After water, now vegetables are also poisoned! Pollution Board reveals; High Court asks government for report
सार
मप्र हाईकोर्ट में प्रदूषण नियंत्रण मंडल की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि जबलपुर के नालों का पानी सीवेज से अत्यंत दूषित है। इस पानी से उगाई जा रही सब्जियां मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं। युगलपीठ ने सरकार को तत्काल कार्रवाई कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए।
विस्तार
हाईकोर्ट में मप्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल की तरफ से तरफ से पेश की गई। रिपोर्ट में बताया गया कि नाले के दूषित पानी से उगाई जाने वाली सब्जी मानव जीवन के लिए खतरनाक हैं। शहर के लगभग सभी नालों के पानी में भारी मात्रा में सीवेज मिलता है। जिस कारण वह अत्यंत दूषित हो गया है और उसका उपयोग निस्तार और सिंचाई के लिए किया जाना मानव जीवन के लिए खतरनाक है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने सरकार को निर्देशित किया है कि प्रदूषण बोर्ड के सुझावों पर तत्काल अमल करते हुए रिपोर्ट पेश करें। याचिका पर अगली सुनवाई 2 फरवरी को नियत की गई है।
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को एक विधि छात्र के द्वारा पत्र लिखकर बताया गया था कि जबलपुर के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को नाले के दूषित पानी का उपयोग की सब्जी की खेती होती है। ऐसी सब्जी का उपयोग मानव जीवन के लिए खतरनाक है। चीफ जस्टिस ने पत्र की सुनवाई जनहित याचिका के रूप में करने के आदेश जारी किये थे। युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए अनावेदकों को नोटिस जारी करते हुए मप्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल नाले की पानी की जांच कर रिपोर्ट पेश करने के आदेश जारी किये थे। याचिका की सुनवाई के दौरान बुधवार को पेश की गई। रिपोर्ट में बताया गया कि हाईकोर्ट के निर्देश पर कृषि अधिकारी, स्वास्थ्य अधिकारी और प्रदूषण बोर्ड की संयुक्त टीम ने 23 नवंबर 2025 को ओमती नाला, मोती नाला , खूनी नाला, उदरना नाला सहित अन्य नालों से पानी का सैंपल लेकर जांच की थी। जांच के बाद इनके पानी में बीओडी, टोटल कोलीफार्म या फेकल कोलीफॉर्म की मात्रा निर्धारित मानक सीमा से अधिक है। नमूना रिपोर्ट और जांच से स्पष्ट है कि यह अनुपचारित सीवर का जल है जो पीने, नहाने या खेती सहित किसी भी अन्य उपयोग के लिए उपयुक्त नहीं है।
रिपोर्ट में कहा गया था कि जबलपुर में 174 मेगा लीटर प्रतिदिन वेस्ट वॉटर नालों में जाता है, जिसमें से नगर निगम द्वारा 13 सीवेज प्लांट्स के जरिए केवल 58 मेगालीटर प्रतिदिन पानी का ट्रीटमेंट किया जाता है। यह पानी नर्मदा तथा हिरन नदी में मिलाया जाता है। प्लांट्स की कुल क्षमता 154.38 मेगा लीटर प्रतिदिन की है। इसके लिए समय-समय पर करोड़ों रुपये की राशि का आवंटन भी किया गया है। हाल ही में नगर निगम जबलपुर को अमृत 2.0 सीवर योजना अंतर्गत 1202.38 करोड़ राशि स्वीकृत हुई है। पीबीसी की तरफ से नाले के पानी को दूषित होने के बचाने के लिए सुझाव भी दिये गये थे। याचिका की सुनवाई के बाद युगलपीठ ने उक्त आदेश जारी किये।









