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शादी का न्योता भी हटके! कृतिका कामरा और गौरव कपूर के कार्ड की लाइनें कर रहीं चर्चा

मुंबई कृतिका कामरा और गौरव कपूर बहुत जल्द शादी के बंधन में बंधने जा रहे हैं। अब दोनों की शादी से ठीक पहले उनका वेडिंग कार्ड सुर्खियां बटोर रहा, जो आम शादी के कार्ड से जरा हटकर है। उन्होंने बताया कि शादी के बाद ट्रडिशनल रिसेप्शन की जगह उन्होंने क्या पालन कर रखा है। कृतिका कामरा और गौरव कपूर का अनोखा वेडिंग इन्विटेशन कार्ड चर्चा में है। बताया जा रहा है कि दोनों की शादी 11-12 मार्च को मुंबई में होने जा रही है जो काफी प्राइवेट सेरिमनी रहेगी। वहीं दोनों के इन्विटेशन कार्ड में शादी के बाद एक आफ्टर पार्टी की भी बात कही गई है। शादी का फंक्शन 11 और 12 मार्च को कहा जा रहा है कि दोनों की शादी का फंक्शन 11 और 12 मार्च को चलेगा। इस प्राइवेट सेरिमनी में शादी के बाद 12 मार्च को एक स्टाइलिश आफ्टर-पार्टी अरेंज की गई है जिसमें फिल्म और खेल जगत के करीबी दोस्त मौजूद होंगे। आफ्टर पार्टी 12 मार्च को 7:30 बजे शाम से शुरू होगी कृतिका कामरा और गौरव कपूर ने के इस इन्विटेशन कार्ड में 12 मार्च को एक आरामदायक, बिना हड़बड़ी वाली आफ्टर-पार्टी की प्लानिंग की गई है। इस कार्ड में ‘द पार्टी, आफ्टर’ लिखते हुए कहा गया है, ‘हम अपनी शादी की खुशियों को आपलोगों के साथ सुकून से सेलिब्रेट करना चाहते हैं। जल्दी आइए और जितनी देर रात तक रुक सकें रुकिए।’ ये आफ्टर पार्टी 12 मार्च को 7:30 बजे शाम से शुरू होगी। 12 मार्च को एक पार्टी रखी जाएगी ये कपल 11 मार्च को मुंबई में गौरव के घर पर एक इंटीमेट सेरिमनी में अपनी शादी रजिस्टर्ड कराएगा। इसके बाद अगले दिन, 12 मार्च को एक पार्टी रखी जाएगी, जिसमें क्रिकेट और मनोरंजन जगत के करीबी दोस्तों के शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है। कृतिका कामरा और गौरव कपूर ने पिछले साल दिसंबर में अपने रिश्ते को इंस्टाग्राम पर ऑफिशियल कर दिया था।

इंजीनियरिंग सुधार और जन-जागरूकता से थमेंगे सड़क हादसे : प्रदीप कुमार लाल

रायपुर सड़क सुरक्षा प्रबंधन पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर को सुगम एवं सुरक्षित बनाने के लिए आज ‘सड़क सुरक्षा प्रबंधन’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में सड़क सुरक्षा से जुड़े विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर विशेषज्ञों ने विस्तृत जानकारी दी। कार्यशाला को संबोधित करते हुए एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी  प्रदीप कुमार लाल ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रियों के लिए सुरक्षित और सुगम आवागमन सुनिश्चित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए रोड इंजीनियरिंग में सुधार, नियमों का कड़ाई से पालन और जन-जागरूकता का समन्वय अनिवार्य है। उन्होंने सभी संबंधित एजेंसियों को आपसी तालमेल के साथ कार्य करने पर जोर दिया।  कार्यशाला के तकनीकी सत्र में सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ  विक्रम तुशिर ने जंक्शन सुधार, ब्लैक-स्पॉट की पहचान, ट्रैफिक साइन, रोड मार्किंग और सेफ्टी ऑडिट जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि केवल बेहतर इंजीनियरिंग और सही साइनेज  के माध्यम से ही सड़क दुर्घटनाओं को 80 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। ब्लैक-स्पॉट्स की वैज्ञानिक तरीके से पहचान करना और वहां समयबद्ध सुधारात्मक उपाय लागू करना सबसे प्रभावी रणनीति है। उन्होंने बताया कि सड़क डिजाइन में छोटे-छोटे तकनीकी सुधार भी बड़े हादसों को रोकने में सक्षम हैं, जिससे राजमार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था को नया आयाम दिया जा सकता है। कार्यशाला में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के ईई  रणबीर यादव विशेष रूप से उपस्थित थे। एनएचएआई की विभिन्न परियोजना कार्यान्वयन इकाईयों के परियोजना निदेशक सर्व डीडी पार्लावर (कोरबा), मुकेश कुमार (बिलासपुर), शमशेर सिंह (अभनपुर) और दिग्विजय सिंह (रायपुर) सहित अनेक अधिकारी एवं कर्मचारी भी कार्यशाला में मौजूद थे।  

अर्शदीप सिंह की हरकत पर ICC सख्त, डेरिल मिचेल पर गेंद फेंकने के बाद लगा 15% जुर्माना

नई दिल्ली भारतीय तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह पर रविवार को अहमदाबाद में न्यूजीलैंड के खिलाफ आईसीसी पुरुष टी20 विश्व कप 2026 के फाइनल के दौरान आईसीसी आचार संहिता के स्तर 1 का उल्लंघन करने के लिए उनकी मैच फीस का 15 प्रतिशत जुर्माना लगाया गया है। यह कार्रवाई तब हुई जब उन्होंने खेल के दौरान मैदान पर अनुचित व्यवहार दिखाया। आईसीसी ने उन्हें खिलाड़ियों के लिए बनी आचार संहिता के अनुच्छेद 2.9 के उल्लंघन का दोषी पाया है। यह नियम अंतरराष्ट्रीय मैच के दौरान किसी खिलाड़ी की ओर खतरनाक या गलत तरीके से गेंद या क्रिकेट का कोई भी सामान फेंकने से संबंधित है। मैदान पर यह घटना न्यूजीलैंड की पारी के 11वें ओवर के दौरान हुई। अर्शदीप सिंह अपनी गेंद डालने के बाद फॉलो-थ्रू में फील्डिंग कर रहे थे। उसी समय उन्होंने गेंद पकड़ी और उसे आक्रामक अंदाज में बल्लेबाज डेरिल मिचेल की ओर फेंक दिया। गेंद सीधे मिचेल के पैड पर जाकर लगी, जो अंपायरों की नजर में एक अनावश्यक और गलत हरकत थी। इस मामले में मैदानी अंपायर रिचर्ड इलिंगवर्थ और एलेक्स व्हार्फ के साथ-साथ तीसरे अंपायर अलाहुद्दीन पालेकर और चौथे अंपायर एड्रियन होल्डस्टॉक ने अर्शदीप के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। आर्थिक दंड के अलावा अर्शदीप सिंह के अनुशासनात्मक रिकॉर्ड में एक डिमेरिट पॉइंट भी जोड़ दिया गया है। पिछले 24 महीनों में अर्शदीप का यह पहला अपराध था, जिसके कारण उन्हें न्यूनतम दंड दिया गया। नियमों के मुताबिक, लेवल-1 के उल्लंघन में खिलाड़ी पर मैच फीस का अधिकतम 50 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकता है और एक या दो डिमेरिट अंक दिए जाते हैं। मैच रेफरी एंडी पाइक्रॉफ्ट द्वारा प्रस्तावित इस सजा को अर्शदीप ने स्वीकार कर लिया है, जिसके कारण इस मामले में किसी औपचारिक सुनवाई या लंबी कानूनी प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं पड़ी। आईसीसी के कड़े नियमों के तहत ये डिमेरिट अंक किसी भी खिलाड़ी के भविष्य के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। यदि कोई खिलाड़ी 24 महीने के समय के भीतर चार या उससे अधिक डिमेरिट अंक हासिल कर लेता है, तो वे सस्पेंशन पॉइंट में बदल जाते हैं और खिलाड़ी पर मैचों का प्रतिबंध लग जाता है। दो सस्पेंशन अंक होने पर खिलाड़ी को एक टेस्ट मैच या दो वनडे/टी20 मैचों से बाहर बैठना पड़ सकता है। अर्शदीप के रिकॉर्ड में यह अंक अब अगले 24 महीनों तक बना रहेगा।

नारी शक्ति से औद्योगिक प्रगतिः पूनम जायसवाल ने 20 महिलाओं को दिया रोजगार, बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

रायपुर अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आज उन महिला उद्यमियों की सफलता की कहानियां सामने आ रही हैं, जिन्होंने शून्य से शिखर तक का सफर तय किया है। अम्बिकापुर की  पूनम जायसवाल ऐसी ही एक प्रेरणापुंज हैं, जिन्होंने न केवल अपनी पारिवारिक स्थिति को सुदृढ़ किया, बल्कि आज 20 से अधिक महिलाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्रदान कर ’नारी सशक्तिकरण’ के संकल्प को धरातल पर उतारा है। संघर्ष से सफलता तकः निजी संसाधनों से रखी नींव  पूनम जायसवाल ने बताया कि उनके उद्यमिता के सफर की शुरुआत वर्ष 2000 में एक छोटे से किराये के भवन और सीमित निजी संसाधनों से हुई थी। आर्थिक चुनौतियां बड़ी थीं, लेकिन हौसला कम नहीं हुआ। वर्ष 2013-14 में छत्तीसगढ़ शासन की नीतियों के फलस्वरूप उन्हें 99 वर्ष की लीज पर औद्योगिक भूमि प्राप्त हुई। बैंक से ऋण लेकर उन्होंने अपने कार्य को गति दी और आज उनका यह लघु उद्योग एक सफल इकाई के रूप में स्थापित हो चुका है। 20 से अधिक महिलाओं को मिला रोजगार  पूनम का उद्देश्य केवल स्वयं का विकास नहीं, बल्कि समाज की जरूरतमंद महिलाओं को साथ लेकर चलना रहा है। उन्होंने बताया कि, मेरे उद्योग में आज 20-22 बहनें कार्य कर रही हैं, जिससे वे अपने परिवार का भरण-पोषण सुचारू रूप से कर पा रही हैं।“ अब उनका लक्ष्य अपने इस उद्यम को ’प्राइवेट लिमिटेड’ कंपनी के रूप में विकसित करना है, ताकि अधिक से अधिक महिला उद्यमियों को जोड़ा जा सके। अपनी सफलता का श्रेय छत्तीसगढ़ शासन और जिला उद्योग केंद्र को देते हुए  जायसवाल ने कहा कि शासन द्वारा प्रदान की गई भूमि और समय-समय पर मिले मार्गदर्शन ने उनके मार्ग को प्रशस्त किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार की ’नई उद्योग नीति’ की सराहना करते हुए कहा कि लागत पूँजी पर मिलने वाले प्रोत्साहन और सब्सिडी के कारण महिलाओं के लिए उद्यमिता के द्वार खुले हैं। आधी आबादी की शक्ति से बढ़ेगा देश प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि, “देश की 50 प्रतिशत जनसंख्या महिलाओं की है। जब महिलाएँ आत्मनिर्भर और स्वाभिमानी बनेंगी, तभी देश आगे बढ़ेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री जी के ’विकसित भारत’ के विजन और छत्तीसगढ़ शासन के ’रोजगार प्रोत्साहन’ कार्यक्रमों को महिला सशक्तिकरण का मुख्य आधार बताया।  पूनम अन्य महिलाओं से अपील की कि वे शासन की योजनाओं, सब्सिडी और कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक बनें और रोजगार के अवसरों का लाभ उठाकर स्वयं उद्यमी बनें।  

महिला आरक्षण पर सरकार का नया प्लान, यूपी चुनाव से पहले कानून में संशोधन संभव

 नई दिल्ली अब सरकार महिला आरक्षण को 2027 के यूपी और उत्तराखंड चुनाव से ही लागू करने की तैयारी में है। पंजाब और गोवा के चुनाव भी यूपी के साथ ही होने हैं। रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने इस संबंध में विपक्ष की राय लेने का प्रयास किया है। उसने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से इस मसले पर बात की है। लोकसभा और विधानसभा के चुनावों में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण दिए जाने वाले कानून में सरकार बदलाव करना चाहती है। महिला आरक्षण अधिनियम, 2023 में प्रावधान था कि जनगणना और परिसीमन के बाद इसे लागू किया जाएगा। लेकिन अब सरकार इसे 2027 के यूपी और उत्तराखंड चुनाव से ही लागू करने की तैयारी में है। पंजाब और गोवा के चुनाव भी यूपी के साथ ही होने हैं। रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने इस संबंध में विपक्ष की राय लेने का प्रयास किया है। उसने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से इस मसले पर बात की है। जानकारी के मुताबिक इन विधानसभा चुनावों में महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटें आरक्षण करने का फैसला लॉटरी सिस्टम से लिया जा सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस मसले पर राय लेने के लिए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने दो बार कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से संपर्क साधा है। सरकार ने दोनों सदनों से नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित कराया था और इस पर राष्ट्रपति के साइन के साथ मुहर लग गई थी। इसमें प्रावधान है कि जनगणना और परिसीमन के बाद इसे लागू किया जाएगा। अब माना जा रहा है कि तब तक काफी देर हो जाएगी। इसलिए विधानसभा चुनावों से ही इसकी शुरुआत कर दी जाए। विपक्ष ने भी इसके लागू होने में देरी को लेकर सवाल उठाया था। जानकारी मिली है कि रिजिजू ने कांग्रेस से कहा है कि हम इस संशोधन विधेयक को मौजूदा बजट सेशन में ही लाना चाहते हैं, जो 2 अप्रैल तक चलने वाला है। सरकार चाहती है कि इस मसले पर सहमति बना ली जाए। इसी मकसद से उसने कांग्रेस के अलावा भी अन्य दलों से संपर्क साधने की कोशिश की है। कांग्रेस एवं अन्य कई दलों ने पहले ही मांग की थी कि इस कानून को पहले लागू किया जाए। यदि इसे जनगणना और परिसीमन से जोड़ा गया तो फिर सालों का वक्त लगेगा। कांग्रेस के साथ ही डीएमके और टीएमसी की भी ऐसी मांग थी। बता दें कि भाजपा ने बुधवार के लिए अपने सांसदों को व्हिप जारी किया है। सांसदों से कहा गया है कि कुछ जरूरी विधायी काम संसद में पेश किए जाएंगे। इस पर अपने दल का समर्थन करने के लिए सभी सांसदों को सदन में मौजूद रहना है। 2024 के आम चुनाव से पहले सितंबर 2023 में इस कानून को लाया गया था। इसके तहत यह तय किया गया था कि जनगणना और परिसीमन के बाद इसे लागू किया जाएगा। ऐसी स्थिति में इस कानून का 2029 के आम चुनाव में भी लागू होना मुश्किल दिखता है। 2021 में होने वाली जनगणना पहले ही देरी से चल रही है। इसलिए अब इस मामले में सरकार चाहती है कि संशोधन करके जल्दी से कानून लागू किया जाए।  

सुप्रीम कोर्ट में SIR याचिका पर CJI भड़के, कहा– ऐसी अर्जी कैसे दाखिल कर दी?

नई दिल्ली देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ आज (मंगलवार, 10 मार्च को) पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी। इस दौरान राज्य सरकार की तरफ से मामले की पैरवी कर रहीं सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी पर CJI भड़क गए। दरअसल, 28 फरवरी को प्रकाशित हुई पश्चिम बंगाल की अंतिम मतदाता सूची से नाम हटाने को चुनौती दी गई थी, जिसकी वह पैरवी कर रही थीं। याचिका में याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि उनके नाम SIR से पहले मतदाता सूची में थे और उन्होंने मतदाता के तौर पर नाम शामिल करने तथा बने रहने के समर्थन में सभी जरूरी दस्तावेज जमा कर दिए थे लेकिन जरूरी डॉक्यूमेंट्स स्वीकार न करने की वजह से वोटर लिस्ट से नाम हटा दिया गया है। ज्यूडिशियल ऑफिसर्स पर आपको भरोसा नहीं है? बहस के दौरान गुरुस्वामी ने कहा, “ज्यूडिशियल ऑफिसर्स ने लगभग 7 लाख दावों पर फैसला किया है। 63 लाख पर फैसला हो रहा था। 57 लाख अभी बाकी हैं।” इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा, “हमें पता था कि जब ज्यूडिशियल ऑफिसर्स अपॉइंट होंगे तो आप लोग भाग जाएँगे। HC के चीफ जस्टिस ने हमें बताया है कि 10 लाख पर फैसला हो चुका है। आज सुबह हमें बताया गया।” इसके बाद CJI ने् भड़कते हुए कहा, “आपका एप्लीकेशन प्रीमैच्योर है और इससे लगता है कि आपको ज्यूडिशियल ऑफिसर्स पर भरोसा नहीं है। आपने ऐसी याचिका डालने की हिम्मत कैसे की? किसी को भी ज्यूडिशियल ऑफिसर्स से सवाल करने की हिम्मत नहीं करनी चाहिए।” ‘CJI के रूप में इसे बर्दाश्त नहीं करूंगा’ इस पर गुरुस्वामी ने कहा कि हम ज्यूडिशियल ऑफिसर्स से सवाल नहीं कर रहे हैं। इस पर CJI ने कहा, “हो सकता है आपने न किया हो। लेकिन सवाल हैं। भारत के चीफ जस्टिस के तौर पर मैं इसे बर्दाश्त नहीं करूँगा।” इसके बाद गुरुस्वामी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि कोई भी ज्यूडिशियल ऑफिसर्स पर सवाल नहीं उठा सकता। हम चीफ जस्टिस के सामने पेश हुए हैं और उनके सामने पेश होना हमारे लिए सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि ज्यूडिशियल ऑफिसर्स के पास अब मोटे तौर पर 50 लाख केस हैं जिन पर फैसला होना है। लगभग 48 लाख मैप्ड वोटर हैं.. हम कहते हैं कि वे मैप्ड हैं क्योंकि वे 2002 के इलेक्टोरल रोल में थे और उन्होंने वोट दिया है.. वोटिंग से एक दिन पहले तक… CJI ने कहा, “इसीलिए SIR हैं। सभी असली वोटर शामिल किए जाएंगे। सभी अनऑथराइज्ड वगैरह नहीं होंगे। इस पर ज्यूडिशियल ऑफिसर्स विचार कर रहे हैं। हमें इस पर क्यों विचार करना चाहिए। वोटिंग से एक दिन पहले तक अगर किसी वोटर पर से बादल हट जाता है तो वह वोट दे सकता है।” इसी बीच CJI ने दूसरे वकील की तरफ इशारा करते हुए कहा कि मुझे वह एप्लीकेशन ढूंढने दीजिए। उस पर कंटेम्प्ट जारी किया जाना चाहिए। उन्होंने पूछा, “क्या आपने इसे फाइल किया है?” अगर हम सजा देना चाहते तो… बार एंड बेंच के मुताबिक, इस पर सीनियर एडवोकेट कल्याण बनर्जी ने कहा, “नहीं माय लॉर्ड। हमने नहीं किया है। चिंता यह है कि बाद में सप्लीमेंट्री लिस्ट पब्लिश करनी होगी।” इस पर CJI ने कहा, “तो हमें इसे ढूंढने दीजिए।” इसी दौरान एडवोकेट गुरुस्वामी ने फिर से CJI से अनुरोध करते हुए कहा, प्लीज 48 लाख मैप्ड वोटरों को सजा न दें। इतना सुनते ही बेंच के दूसरे जज जस्टिस बागची ने कहा कि अगर हम सजा देना चाहते तो हम इतनी बड़ी कार्रवाई नहीं करते। उन्होंने कहा कि हम तारीख के करीब आने पर स्थिति का जायज़ा लेंगे। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले 20 फरवरी को पश्चिम बंगाल सरकार और निर्वाचन आयोग के बीच “विश्वास की कमी” और सहयोग के अभाव का उल्लेख करते हुए इस स्थिति को “असाधारण” बताया था और मतदाता सूची में “तार्किक विसंगतियां” श्रेणी से जुड़े दावों और आपत्तियों के निपटारे की निगरानी के लिए सेवारत और सेवानिवृत्त जिला एवं अतिरिक्त जिला न्यायाधीशों (ज्यूडिशियल ऑफिसर्स) की तैनाती का निर्देश दिया था।  

प्रधानमंत्री मोदी का मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया आभार व्यक्त

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट ने 3 हजार 839 करोड़ की लागत से एनएच 752D पर बदनावर-पेटलावद-थांदला-टिमरवानी सेक्शन के फोर लेन निर्माण की मंजूरी के लिए आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह कॉरिडोर उज्जैन से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे के टिमरवानी इंटरचेंज तक सीधी फोर लेन कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। यह एक महत्वपूर्ण प्रकल्प होगा। इससे जहां इंदौर, पीथमपुर, उज्जैन और देवास के औद्योगिक केंद्रों तक पहुंच सुगम होगी वहीं धार एवं झाबुआ जिले का समग्र आर्थिक विकास भी सुनिश्चित होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह स्वीकृति इसलिए भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि इससे सिंहस्थ-2028 के दौरान श्रद्धालुओं का आवागमन अधिक सुविधाजनक हो जाएगा।  

अतिक्रमण पर चला प्रशासन का बुलडोजर, जिला प्रशासन ने की कार्रवाई

रायपुर ग्राम समोदा में हटाया गया अवैध कब्जा दुर्ग जिले के जनपद पंचायत दुर्ग के अतंर्गत ग्राम समोदा में जिला प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई की गई है। जेसीबी चला कर शासकीय भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराई गई है।    कलेक्टर अभिजीत सिंह के निर्देश पर अतिरिक्त तहसीलदारमती क्षमा यदु द्वारा राजस्व अमले और पुलिस विभाग के सहयोग से ग्राम समोदा राजस्व निरीक्षक मंडल जेवरा सिरसा तहसील व जिला दुर्ग के अतंर्गत शासकीय घास भूमि खसरा नम्बर 778 रकबा 0.13 हेक्टेयर भूमि पर किये गये अवैध पक्का दुकान निर्माण, टीन सेड लगाकर दुकान निर्माण को अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया है। इसी प्रकार सीमेंट पोल लगाकर किया गया तार घेरा को हटाने की कार्रवाई कर अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया है। ग्राम के ही ब्रजेश ताम्रकार पिता गिरजाशंकर ताम्रकार द्वारा उक्त शासकीय भूमि पर अतिक्रमण कर निर्माण कार्य किया गया था। अतिक्रमण हटाने के दौरान राजस्व निरीक्षक रेखा शुक्ला, पटवारी चन्द्रिका प्रसाद खरें, शत्रुहन मिश्रा, अनिता साहू, संदीप देशमुख और पुलिस विभाग के अधिकारी तथा पंचायत जनप्रतिनिधि एवं स्थानीय ग्रामीणजन मौजूद थे। 

सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल की योजनाओं के हितग्राहियों को प्रतीकात्मक चेक किया गया वितरित

रायपुर श्रमिक सम्मेलन का हुआ आयोजन, विभिन्न योजनाओं के माध्यम से श्रमिक परिवारों को मिल रही आर्थिक सहायता -स्कूल शिक्षा मंत्री  यादव स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेन्द्र यादव के मुख्य आतिथ्य में श्रम विभाग द्वारा श्रमिक सम्मेलन का आयोजन आज महात्मा गांधी कला मंदिर सिविक सेंटर भिलाई में किया गया। सम्मेलन के दौरान छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अंतर्गत संचालित विभिन्न योजनाओं के तहत लाभान्वित श्रमिकों के खातों में डीबीटी के माध्यम से 9 हजार 556 श्रमिकों को विभिन्न योजनाओं के तहत लगभग 10 करोड़ 42 लाख 7 हजार 343 रूपए की राशि अंतरित की गई। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री  यादव ने छ.ग. भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल अंतर्गत संचालित योजनाओं के हितग्राहियों को प्रतीकात्मक चेक प्रदान किए। इनमें मिनीमाता महतारी जतन योजना, मुख्यमंत्री निर्माण मजदूर सुरक्षा उपकरण सहायता योजना, मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना, मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना, मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण सहायता योजना, मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना, मुख्यमंत्री श्रमिक औजार सहायता योजना, मुख्यमंत्री श्रमिक सियान सहायता योजना और मुख्यमंत्री सायकल सहायता योजना शामिल हैं। श्रमिक सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेन्द्र यादव ने कहा कि छत्तीसगढ़ में श्रमिकों के कल्याण के लिए सरकार द्वारा लगातार योजनाएं संचालित की जा रही हैं। मजदूरों द्वारा विभिन्न प्रकार के काम करके अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। ऐसे में यदि किसी श्रमिक के साथ कोई दुर्घटना हो जाती थी तो उसके परिवार को जीवन भर आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ती थी। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल में अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल का गठन किया गया। मंडल के माध्यम से प्रदेश के मजदूर भाई-बहनों का श्रम विभाग में पंजीयन शुरू किया गया और श्रमिक कार्ड बनाए गए, ताकि उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके। साथ ही महिला श्रमिकों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सिलाई मशीन उपलब्ध कराई गई, जिससे वे घर बैठे काम कर सकें। राज्य में गरीबों के लिए दो रुपये किलो चावल की योजना भी शुरू की गई थी। पहले यह सुविधा केवल गरीबी रेखा के अंतर्गत आने वाले परिवारों को मिलती थी, लेकिन बाद में श्रम विभाग में पंजीकृत श्रमिक कार्ड धारकों को भी इसका लाभ मिलने लगा। इस तरह श्रमिकों को राशन कार्ड और श्रम कार्ड के माध्यम से खाद्य सुरक्षा भी सुनिश्चित की गई। वर्तमान में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में श्रमिकों को विभिन्न योजनाओं का लाभ डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में दिया जा रहा है। विभिन्न योजनाओं के माध्यम से श्रमिक परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। मंत्री  यादव ने श्रमिकों से अपील की है कि वे श्रम विभाग में पंजीयन कराकर इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। इस अवसर पर अध्यक्ष छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल ने भी मंडल द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। इसके साथ ही जिला पंचायत अध्यक्ष  सरस्वती बंजारे ने भी संक्षिप्त उद्बोधन दिया। इस अवसर पर तेलघानी बोर्ड अध्यक्ष  जितेन्द्र साहू,  भोजराम सिन्हा,  तुलसी साहू,  ललेश्वरी साहू, पार्षद  मनीष कोठारी, पार्षद  गुलराम साहू, अध्यक्ष महिला मोर्चा  स्वीटी कौशिक, अध्यक्ष जनपद पंचायत पाटन  कीर्ति नायक, श्रम अधिकारी  विकास सरोडे, श्रम निरीक्षक  बसंत वर्मा सहित बड़ी संख्या में श्रमिक उपस्थित थे।

केजरीवाल मामले की जज स्वर्ण कांता शर्मा पर AAP का निशाना, BJP से संबंधों को लेकर उठे सवाल

नई दिल्ली कथित शराब घोटाले से जुड़े केस की सुनवाई कर रहीं हाई कोर्ट की जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा पर आम आदमी पार्टी ने सवाल खड़े कर दिए हैं। ‘आप’ ने सवाल किया है कि भाजपा और जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के बीच क्या रिश्ता है? कथित शराब घोटाले से जुड़े केस की सुनवाई कर रहीं हाई कोर्ट की जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा पर आम आदमी पार्टी ने सवाल खड़े कर दिए हैं। ‘आप’ ने सवाल किया है कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा का भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से क्या रिश्ता है? आप के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने भाजपा नेताओं के बयानों के मायने तलाशते हुए जज को लेकर यह सवाल उठाया है। कथित शराब घोटाले के केस में ट्रायल कोर्ट ने 27 फरवरी को अरविंद केजरीवाल समेत सभी 23 आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया था। सीबीआई ने इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी है और जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच इसकी सुनवाई कर रही है। सोमवार को जस्टिस स्वर्ण कांता ने फौरी तौर पर सीबीआई को राहत दी तो भाजपा नेताओं ने उम्मीद जाहिर की कि ‘पिक्चर अभी बाकी’ है। अब इसी को आधार बनाकर ‘आप’ ने जज की निष्पक्षता पर सवाल उठा दिए हैं। पूर्व मंत्री और आप के प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस वीरेंद्र सचदेवा का एक बयान सुनाया और दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा का ट्वीट दिखाया। उन्होंने कहा, ‘जिस तरीके से दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा कह रहे हैं कि निश्चित सजा मिलेगी, इनके मंत्री कपिल मिश्रा कह रहे हैं कि पिक्चर अभी बाकी है। इन्हें कैसे पता कि पिक्चर अभी बाकी है। पिक्चर में क्या बाकी है, यह कपिल मिश्रा को कैसे पता, यह तो अभी हाई कोर्ट की जज साहिबा को भी नहीं पता होगा। अभी वह केस पढ़ेंगी तब पता चलेगा।’ कपिल मिश्रा की वजह से हो गया था जज का ट्रांसफर: भारद्वाज भारद्वाज ने कहा कि वीरेंद्र सचदेवा कैसे कह सकते हैं कि निश्चित तौर पर सजा मिलेगी। क्या ये सीधे तौर पर यह कहने की कोशिश कर रहे हैं कि इन्हें मालूम है कि इस मुकदमे में क्या होगा। इन्हें पता है कि पिक्चर आगे क्या है? क्या ये कहना चाह रहे हैं कि हम जो फैसला चाहेंगे वह जस्टिस स्वर्ण कांता से करा लेंगे? ‘आप’ नेता ने कपिल मिश्रा का प्रभाव बताते हुए आरोप लगाया कि हाई कोर्ट के एक जज ने उनके खिलाफ एफआईआर का आदेश दिया और अगले दिन अदालत में तलब किया तो रात को ही उनका ट्रांसफर हो गया। जज का पूछ लिया भाजपा से रिश्ता सौरभ भारद्वाज ने कई सवालों के बीच जस्टिस का भाजपा से रिश्ता भी पूछ लिया। उन्होंने कहा, ‘कपिल मिश्रा का यह कहना कि पिक्चर अभी बाकी है, यह कुछ सवाल पैदा करता है। क्या जस्टिस क्या करेंगी यह इनको मालूम है? इनका क्या सवाल आता है। जस्टिस स्वर्ण कांता का भाजपा से क्या रिश्ता है,यह इन लोगों को बताना चाहिए। वीरेंद्र सचदेवा और कपिल मिश्रा कैसे कह सकते हैं कि पिक्चर अभी बाकी है। मैं आपके सामने गंभीर सवाल रख रहा हूं।’

मुख्यमंत्री का निर्देश, जून तक पूरा कर लें बीडा के लिए भूमि अधिग्रहण: मुख्यमंत्री

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित कैबिनेट बैठक में उच्च शिक्षा विभाग से संबंधित एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। प्रस्ताव के तहत योगी सरकार ने उच्च शिक्षा के शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में जानकारी देते हुए प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शिक्षकों और शिक्षा क्षेत्र के प्रति अत्यंत संवेदनशील हैं। शिक्षकों का समाज निर्माण और शिक्षण व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान होता है, लेकिन अब तक उन्हें चिकित्सा प्रतिपूर्ति की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। इसी को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने 5 सितम्बर 2025 (शिक्षक दिवस) के अवसर पर उच्च शिक्षा के शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान करने की घोषणा की थी। उच्च शिक्षा मंत्री ने बताया कि उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में कार्यरत नियमित एवं स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों के शिक्षकों, स्ववित्तपोषित मान्यता प्राप्त महाविद्यालयों के शिक्षकों तथा राज्य विश्वविद्यालयों में कार्यरत नियमित एवं स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों के शिक्षकों को इस योजना के अंतर्गत लाया जाएगा। साथ ही मुख्यमंत्री के निर्देश पर शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी इस योजना में शामिल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस योजना के अंतर्गत शिक्षकों और उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ संबद्ध निजी अस्पतालों में भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। मंत्री ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत प्रति शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारी  2479.70 रुपये का प्रीमियम व्यय होगा। प्रदेश में लगभग 2 लाख से अधिक शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारी इस योजना से लाभान्वित होंगे और इस पर सरकार को लगभग 50 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष का व्यय वहन करना पड़ेगा। इस व्यय की व्यवस्था उच्च शिक्षा विभाग के बजट से की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस योजना का संचालन राज्य समग्र स्वास्थ्य एवं एकीकृत सेवा एजेंसी (साचीज) के माध्यम से किया जाएगा। योजना के तहत लाभार्थियों को 5 लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होगी, जिसकी दरें प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत आरोग्य योजना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार होंगी। उच्च शिक्षा मंत्री ने बताया कि इस योजना के लाभार्थियों और उनके आश्रितों का विवरण उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रतिवर्ष 30 जून तक साचीज को उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही जो व्यक्ति पहले से केंद्र या राज्य सरकार की किसी अन्य स्वास्थ्य योजना (जैसे प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री आरोग्य योजना) से आच्छादित होंगे, उन्हें इस योजना का लाभ नहीं दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि योगी सरकार शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के सम्मान और उनकी सामाजिक सुरक्षा के लिए लगातार संवेदनशील निर्णय ले रही है। यह योजना शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों और उनके परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में प्रस्तावित विभिन्न एक्सप्रेस-वे के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए हैं। मंगलवार को प्रगति समीक्षा बैठक में निर्माणाधीन एवं प्रस्तावित इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे, फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे, झांसी लिंक एक्सप्रेसवे तथा जेवर लिंक एक्सप्रेसवे की प्रगति पर चर्चा करते हुए सम्बंधित जिलाधिकारियों को निर्देश दिया कि इन परियोजनाओं के लिए भूमि क्रय की प्रक्रिया को अविलम्ब गति देते हुए सभी बाधाओं को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए, ताकि एक्सप्रेसवे परियोजनाओं का कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जा सके। उन्होंने कहा कि एक्सप्रेसवे नेटवर्क का विस्तार प्रदेश में निवेश, औद्योगिक गतिविधियों और क्षेत्रीय संतुलित विकास को नई गति देगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की तीव्र आर्थिक प्रगति के लिए मजबूत अवसंरचना आधार अत्यंत आवश्यक है और किसी भी परियोजना में अनावश्यक विलंब या गुणवत्ता से समझौता स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिया कि निर्माणाधीन परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा, उच्च गुणवत्ता और पूर्ण पारदर्शिता के साथ पूरा किया जाए। समीक्षा में बताया गया कि गंगा एक्सप्रेसवे का मुख्य कैरिजवे निर्माण पूरा हो चुका है और शेष कार्य तेजी से पूर्ण किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि सभी शेष कार्य समयबद्ध ढंग से पूरे कर एक्सप्रेसवे को शीघ्र संचालन के लिए तैयार किया जाए। मुख्यमंत्री को बताया गया कि गंगा एक्सप्रेसवे को मेरठ से हरिद्वार तक विस्तारित करने के प्रस्ताव पर भी कार्य प्रगति पर है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर परियोजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों ने बताया कि एयरपोर्ट को हाल ही में प्रोविजनल एरोड्रम लाइसेंस प्राप्त हुआ है और भूमि अधिग्रहण व अन्य विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि एयरपोर्ट परियोजना से जुड़े सभी कार्यों को समन्वित ढंग से शीघ्र पूर्ण किया जाए।ग्रेटर नोएडा में विकसित किए जा रहे मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक हब और मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने भूमि अधिग्रहण और निर्माण कार्यों को समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। वहीं नोएडा के चिल्ला एलिवेटेड फ्लाईओवर परियोजना के संबंध में उन्होंने निर्माण गुणवत्ता और अनुबंध शर्तों के कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा। सिंचाई क्षेत्र की समीक्षा में मध्य गंगा नहर परियोजना (स्टेज-2) तथा एरच सिंचाई परियोजना की प्रगति पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंचाई परियोजनाएं किसानों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, इसलिए इनके कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाए। ऊर्जा क्षेत्र में रिहंद-ओबरा क्षेत्र में प्रस्तावित पंप स्टोरेज परियोजना, तापीय विद्युत परियोजनाओं में पर्यावरणीय उन्नयन तथा झांसी में प्रस्तावित 100 मेगावाट सौर ऊर्जा संयंत्र की प्रगति की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में ऊर्जा उत्पादन क्षमता बढ़ाने और स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।लखनऊ में वृंदावन योजना के अंतर्गत प्रस्तावित एग्ज़ीबिशन-कम-कन्वेंशन सेंटर तथा कुकरेल क्षेत्र में प्रस्तावित नाइट सफारी परियोजना की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं से पर्यटन और सेवा क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा, इन्हें प्राथमिकता दी जाए। बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण की प्रगति की समीक्षा करते हुए जून तक यह कार्य पूरा कर लेने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आवश्यकतानुरूप अतिरिक्त मैनपॉवर लगाया जाए। बैठक में अंतरराज्यीय एवं अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से जुड़े मार्गों के चौड़ीकरण तथा बस्ती जनपद में घाघरा नदी के तटबंध सुरक्षा परियोजना की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने नोडल अधिकारियों की तैनाती करते हुए … Read more

सिखों के आनंद विवाह रजिस्ट्रेशन के लिए नई नियमावली को कैबिनेट ने दी मंजूरी

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में निर्माणाधीन दो महत्वपूर्ण जल परियोजनाओं में उत्तर प्रदेश की वित्तीय हिस्सेदारी को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने लखवार मल्टीपरपज प्रोजेक्ट और रेणुकाजी डैम प्रोजेक्ट के लिए राज्य के हिस्से की धनराशि खर्च करने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की। लखवार बहुउद्देशीय परियोजना कैबिनेट ने उत्तराखंड के देहरादून और टिहरी गढ़वाल जिले के लोहारी गांव के पास यमुना नदी पर निर्माणाधीन लखवार बहुउद्देशीय परियोजना में उत्तर प्रदेश के हिस्से के रूप में 356.07 करोड़ रुपये खर्च करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस परियोजना की पुनरीक्षित लागत 5747.17 करोड़ रुपये (प्राइस लेवल 2018) है। परियोजना के तहत 204 मीटर ऊंचा बांध, 300 मेगावाट क्षमता का भूमिगत बिजलीघर और एक बैराज के साथ संतुलन जलाशय (Balancing Reservoir) का निर्माण किया जा रहा है। इस परियोजना में लाभार्थी राज्यों द्वारा वहन की जाने वाली कुल लागत 1146.69 करोड़ रुपये है, जिसमें उत्तर प्रदेश का जल उपभोग शेयर 31.05 प्रतिशत है। इस परियोजना से हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सहित लाभार्थी राज्यों के लगभग 33,780 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही घरेलू और औद्योगिक उपयोग के लिए 78.83 एमसीएम जल तथा 300 मेगावाट (572.54 मिलियन यूनिट) आकस्मिक विद्युत उत्पादन का भी प्रावधान है। इस परियोजना को वर्ष 2008 में राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया था और इसे दिसंबर 2031 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। रेणुकाजी बांध परियोजना कैबिनेट ने हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में गिरी नदी पर निर्माणाधीन रेणुकाजी बांध परियोजना में भी उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी के रूप में 361.04 करोड़ रुपये खर्च करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस परियोजना की कुल लागत 6946.99 करोड़ रुपये (प्राइस लेवल 2018) है, जबकि जल घटक की लागत 6647.46 करोड़ रुपये है। इस परियोजना के तहत 148 मीटर ऊंचा और 430 मीटर लंबा बांध बनाया जा रहा है, जिसकी कुल जल संचयन क्षमता 498 एमसीएम और लाइव स्टोरेज क्षमता 330 एमसीएम होगी। इसके अलावा परियोजना से 40 मेगावाट बिजली उत्पादन भी प्रस्तावित है। लाभार्थी राज्यों द्वारा वहन की जाने वाली कुल लागत 1162.66 करोड़ रुपये है, जिसमें उत्तर प्रदेश का जल उपभोग शेयर 31.05 प्रतिशत है। इस परियोजना के माध्यम से संग्रहित जल का उपयोग हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड राज्यों में सिंचाई के लिए किया जाएगा। इस परियोजना को वर्ष 2009 में राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया था और इसे दिसंबर 2032 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। उत्तर प्रदेश को मिलेगा अतिरिक्त जल इन दोनों परियोजनाओं के पूरा होने के बाद उत्तर प्रदेश को कुल 3.721 बीसीएम (31.05 प्रतिशत) जल प्राप्त होगा। इस अतिरिक्त जल का उपयोग पूर्वी यमुना नहर प्रणाली और आगरा नहर प्रणाली के माध्यम से सिंचाई के लिए किया जाएगा। साथ ही इससे यमुना नदी में जल प्रवाह बढ़ेगा और नदी की तनुता में भी सुधार होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश भिक्षावृत्ति प्रतिषेध अधिनियम में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के 7 मई 2025 के आदेश के अनुपालन में लिया गया है। प्रस्तावित संशोधन के तहत अधिनियम की धारा 21 से कुष्ठ रोग से संबंधित प्रावधानों को हटाया जा रहा है। साथ ही इन प्रावधानों को मेंटल हेल्थकेयर एक्ट 2017 के अनुरूप बनाया जाएगा, ताकि कानून आधुनिक स्वास्थ्य और मानवाधिकार मानकों के अनुरूप हो सके। इस संशोधन से कुष्ठ रोग से प्रभावित व्यक्तियों के साथ होने वाले भेदभाव को समाप्त करने में मदद मिलेगी और उन्हें समाज में सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर मिलेगा। कैबिनेट की मंजूरी के बाद प्रस्तावित उत्तर प्रदेश भिक्षावृत्ति प्रतिषेध (संशोधन) विधेयक, 2026 को आगे की प्रक्रिया के लिए राज्य विधानमंडल में प्रस्तुत किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सिख समुदाय के विवाह पंजीकरण को आसान बनाने के लिए “उत्तर प्रदेश आनंद विवाह रजिस्ट्रीकरण नियमावली, 2026” को प्रख्यापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। सिख धर्म में प्रचलित ‘आनंद कारज’ विवाह के पंजीकरण को सुगम बनाने के लिए यह नियमावली लागू की जा रही है। यह व्यवस्था आनंद मैरिज एक्ट, 1909 (संशोधित 2012) की धारा-6 के तहत राज्य सरकार को प्राप्त अधिकारों के आधार पर बनाई गई है। साथ ही यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट में दायर रिट याचिका अमनजोत सिंह चड्ढा बनाम भारत संघ व अन्य में 4 सितम्बर 2025 को दिए गए निर्देशों के अनुपालन में लिया गया है। नई नियमावली के तहत आनंद विवाह के पंजीकरण के लिए तहसील स्तर पर उप जिलाधिकारी (एसडीएम) को रजिस्ट्रार, जनपद स्तर पर जिलाधिकारी को जिला रजिस्ट्रार, मंडल स्तर पर मंडलायुक्त को मंडलीय रजिस्ट्रार तथा राज्य मुख्यालय पर निदेशक, अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ को मुख्य रजिस्ट्रार नामित किया जाएगा। नियमावली के अनुसार विवाह के पक्षकार या उनके रिश्तेदार विवाह संपन्न होने की तिथि से तीन महीने के भीतर निर्धारित प्रारूप में 1500 रुपये के न्यायालय शुल्क स्टाम्प के साथ विवाह पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकेंगे। निर्धारित समय के बाद भी आवेदन देने की व्यवस्था होगी, लेकिन इसके लिए नियमानुसार विलंब शुल्क देना होगा। इसके साथ ही यदि कोई पक्ष रजिस्ट्रार के आदेश से असंतुष्ट होता है तो वह जिला रजिस्ट्रार के समक्ष अपील कर सकेगा। जिला रजिस्ट्रार के आदेश के खिलाफ मंडलीय रजिस्ट्रार के पास अपील की व्यवस्था भी की गई है। नियमावली में विवाह रजिस्टर के रख-रखाव और उसकी प्रमाणित प्रति प्राप्त करने से जुड़े प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। नियमावली के लागू होने से प्रदेश में सिख समुदाय के आनंद विवाह का विधिवत पंजीकरण आसान होगा और विवाह से संबंधित प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और सुविधा बढ़ेगी।

महतारी वंदन योजना बनी महिलाओं की आत्मनिर्भरता का आधार, लाभान्वित महिलाओं ने मुख्यमंत्री श्री साय को कहा धन्यवाद

रायपुर अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर 8 मार्च को बस्तर में आयोजित वृहद महतारी वंदन कार्यक्रम के दौरान  अनीता साहू और  मिथलेश चतुर्वेदी ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से वर्चुअल संवाद कर महतारी वंदन योजना से अपने जीवन में आए बदलाव के बारे में बताया और इसके लिए उनका आभार व्यक्त किया। गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के गौरेला विकासखण्ड के ग्राम खोडरी की  अनीता साहू ने बताया कि महतारी वंदन योजना से प्रतिमाह मिलने वाली राशि से उन्होंने सिलाई मशीन खरीदी और सिलाई कार्य शुरू किया। पहले उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, क्योंकि उनके पति की मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण परिवार की जिम्मेदारी उन्हें ही उठानी पड़ती थी। अब खेती, मजदूरी और सिलाई कार्य से आय के साथ उनका जीवन स्तर बेहतर हुआ है। उन्होंने “अनीता सिलाई सेंटर” के नाम से उद्यम पंजीयन भी कराया है और महिला एवं बाल विकास विभाग की सक्षम योजना के तहत एक लाख रुपये का ऋण भी प्राप्त किया है। इसी तरह मोहला मानपुर अंबागढ़ चौकी जिले की  मिथलेश चतुर्वेदी ने बताया कि पति के निधन के बाद परिवार का भरण-पोषण करना उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया था। शासन से मिली सहायता राशि और महतारी वंदन योजना के सहयोग से उन्होंने ई-रिक्शा खरीदकर आजीविका का नया साधन शुरू किया। अब वे आत्मसम्मान के साथ अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं। दोनों महिलाओं ने कहा कि महतारी वंदन योजना ने उन्हें आर्थिक संबल देने के साथ आत्मविश्वास भी दिया है। उन्होंने इस जनकल्याणकारी योजना के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया।

प्रदेशभर की स्वच्छता दीदियां, महिला हितग्राही एवं स्वसहायता समूहों की महिलाएं जोश और उत्साह से हुईं शामिल

रायपुर उप मुख्यमंत्री अरुण साव महिलाएं ईश्वर की अनुपम कृति हैं। ईश्वर ने उन्हें विशेष शक्तियां और क्षमताएं दी हैं। महिलाओं ने अपनी लगन, मेहनत और काबिलियत से हर क्षेत्र में अपना स्थान बनाया है। हर क्षेत्र में उपलब्धियां और ऊंचाईयां हासिल की हैं। माताओं व बहनों का सम्मान एवं विशेष स्थान प्राचीन काल से हमारी संस्कृति और परंपरा में है। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने नारी शक्ति सम्मान समारोह में ये विचार व्यक्त किए। उन्होंने नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा आज रायपुर के शासकीय मेडिकल कॉलेज ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह में स्वच्छता, स्वावलंबन और सशक्तीकरण के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाली स्वच्छता दीदियों, महिला हितग्राहियों एवं स्वसहायता समूहों की महिलाओं को सम्मानित किया। उप मुख्यमंत्री साव ने समारोह में नगरीय निकायों में हर महीने स्वच्छता के आंकलन के लिए छत्तीसगढ़ स्वच्छता लीग का शुभारंभ किया। उन्होंने प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में स्वच्छता दीदियों के स्वास्थ्य की जांच के लिए 15 दिनों के विशेष शिविर आयोजित करने की घोषणा की। ये शिविर आगामी 14 मार्च से लगाए जाएंगे। नारी शक्ति सम्मान समारोह में प्रदेशभर की स्वच्छता दीदियां, महिला हितग्राही एवं स्वसहायता समूहों की महिलाएं जोश और उत्साह से शामिल हुईं। वे इस दौरान प्रसिद्ध लोक गायिका सुश्री गरिमा दिवाकर और स्वर्णा दिवाकर द्वारा प्रस्तुत फाग गीत पर जमकर झूमीं। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने नारी शक्ति सम्मान समारोह में महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में कभी निराश होने की जरूरत नहीं है। महिलाएं संघर्ष और करूणा की प्रतिमूर्ति हैं। आप में जो क्षमता और ताकत है, वो किसी और में नहीं है। देश में ऐसी अनेक घटनाएं और प्रसंग हैं जहां नारी शक्ति ने अपनी ममता, तपस्या, त्याग और बलिदान की अनूठी मिसालें पेश की हैं। साव ने कहा कि नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद महिलाओं के सम्मान और सशक्तीकरण के लिए कई योजनाएं शुरू हुई हैं। स्वच्छ भारत मिशन के तहत घर-घर में शौचालय बनाए गए हैं, उज्जवला योजना से रसोई गैस दिए गए हैं, जल जीवन मिशन ने महिलाओं की दिनचर्या पूरी तरह बदल दी है। ‘एक पेड़ मां के नाम’ और ‘वीमेन फॉर ट्री’ जैसी योजनाओं ने महिलाओं की प्रतिष्ठा और सम्मान बढ़ाया है।  श्री साव ने बताया कि छत्तीसगढ़ के शहरों में स्वीकृत दो लाख 44 हजार प्रधानमंत्री आवासों में से एक लाख 77 हजार आवास महिलाओं के नाम से स्वीकृत हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना से यह संभव हुआ है कि इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं के पास खुद के नाम पर पक्का घर है। प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत राज्य के 70 हजार महिला स्ट्रीट वेंडर्स को 88 करोड़ रुपए से अधिक का ऋण बैंकों के माध्यम से दिलाया गया है। उन्होंने कहा कि माता बच्चे की प्रथम शिक्षक होती है। इस नाते भावी पीढ़ी को अच्छे संस्कार, अच्छी शिक्षा, अच्छी सोच और अच्छी दिशा देने की महती जिम्मेदारी महिलाओं के कंधों पर है। रायपुर की महापौर मीनल चौबे ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर हमारे राज्य को और हमारे शहरों को जो प्रतिष्ठा मिलती है, वह आप लोगों के कार्यों की वजह से मिलती है। उन्होंने समारोह के आयोजन के लिए उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विधानसभा सत्र के बीच इसका आयोजन किया गया है। तमाम व्यस्तताओं के बावजूद आप लोगों का हौसला बढ़ाने और सम्मानित करने उप मुख्यमंत्री यहां मौजूद हैं। चौबे ने कहा कि आप लोगों की प्रेरणा और सहयोग से हम आगे बढ़ते हैं। आपकी सहभागिता से योजनाओं को हम धरातल पर उतारते हैं। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव डॉ. बसवराजु एस. ने कार्यक्रम में अपने स्वागत भाषण में कहा कि विभाग के कार्यों में महिलाएं महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। स्वच्छता दीदियों और स्वसहायता समूहों के साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना और पीएम स्वनिधि योजना के क्रियान्वयन में वे बड़ी भूमिका निभा रही हैं। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक आर. एक्का, रायपुर नगर निगम के आयुक्त विश्वदीप, राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) के सीईओ शशांक पाण्डेय, रायपुर नगर निगम में स्वास्थ्य विभाग की अध्यक्ष गायत्री सुनील चंद्राकर, संस्कृति विभाग के अध्यक्ष अमर गिदवानी, राजस्व विभाग के अध्यक्ष अवतार भारती बागल और पार्षद स्वप्निल मिश्रा सहित नगरीय प्रशासन एवं सूडा के अनेक अधिकारी भी समारोह में मौजूद थे। इनका किया गया सम्मान, चेक भी सौंपे गए समारोह में स्वच्छ सर्वेक्षण-2024 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले नगरीय निकायों के स्वच्छता दीदियों के प्रतिनिधि के रूप में बिलासपुर की रामेश्वरी सागर, कुम्हारी की मंजू देवांगन, बिल्हा की संपति यादव, अंबिकापुर की संगीता गुप्ता, विश्रामपुर की भारती गुप्ता और पाटन की लता मंडलेश को सम्मानित किया गया। विपरीत परिस्थितियों के बीच नगर निगम के सहयोग से प्रधानमंत्री आवास का निर्माण करने वाली रायपुर की मांडवी कौशिक, बीरगांव की बिमला साहू, कुम्हारी की त्रिवेणी साहू, राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित बगीचा की महिला हितग्राही सुमन तिर्की तथा वीमेन फॉर ट्री में उत्कृष्ट कार्य करने वाली बिलासपुर की पल्लवी विजय क्षत्री, लोरमी की दुर्गा राजपूत और बगीचा की प्रभा यादव का भी सम्मान किया गया।  उप मुख्यमंत्री साव ने निर्धारित समयावधि में प्रधानमंत्री आवास का निर्माण पूर्ण कर मुख्यमंत्री गृहप्रवेश सम्मान का हकदार बनीं रायपुर की रजनी ध्रुव, कुम्हारी की गीता पाल और बीरगांव की पलक देवांगन को (प्रत्येक को) 32 हजार 850 रुपए का चेक प्रदान किया। उन्होंने प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के अंतर्गत रायपुर नगर निगम की तीन स्ट्रीट वेंडर्स लक्ष्मी साहू, रत्ना दीप और बी. लावण्या को 50-50 हजार रुपए के चेक सौंपे।     

ट्रंप की ‘मैडमैन थ्योरी’ क्या है? क्यों ईरान पर कभी नरमी तो कभी युद्ध की भभकी देते हैं

ईरान ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद से मिडिल-ईस्ट में छिड़े युद्ध के 10 दिन बीत चुके हैं। बावजूद इसके अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अभी तक यह स्पष्ट रूप से नहीं बता पाए हैं कि ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू करने की ठोस वजह क्या थी और इसका अंतिम लक्ष्य क्या है। ऐसे में ईरान जंग पर ट्रंप सरकार की न शुरुआत स्पष्ट है और न ही युद्ध अंत करने का कोई रोडमैप सामने आ रहा है। इससे अमेरिका और विश्व राजनीति में अनिश्चितता बढ़ती जा रही है। इतना ही नहीं ट्रंप की ईरान नीति पर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू करने के बाद ट्रंप प्रशासन की रणनीति और संदेश लगातार बदलते रहे हैं। दस दिन बाद भी, ट्रंप अभी तक इस बात का कोई पक्का कारण नहीं बता पाए हैं कि उन्होंने युद्ध क्यों किया। अब, वह इशारा कर रहे हैं कि शांति जल्द ही आ सकती है, जबकि दूसरी तरफ वह खुद और उनके टॉप सहयोगी साथ चेतावनी दे रहे हैं कि लड़ाई और तेज और भीषण हो सकती है और ज़्यादा समय तक चल सकती है। ट्रंप एक तरफ कड़ी सैन्य कार्रवाई और तेल आपूर्ति रोकने पर “20 गुना घातक” हमले की धमकी दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर रूस के राष्ट्रपति पुतिन से मदद और बातचीत की संभावनाओं पर भी चर्चा कर रहे हैं। इससे अमेरिका समेत पूरी दुनिया में भारी कन्फ्यूजन का स्थिति है। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर इस युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है। शेयर बाजारों में गिरावट और तेल की कीमतों में तेज उछाल ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरे की आशंका पैदा कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह जंग लंबी खिंचती है तो इसका असर विश्व आर्थिक वृद्धि पर पड़ सकता है। इसके साथ ही ईरान द्वारा खाड़ी देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमलों से पूरे मध्य-पूर्व में बड़े क्षेत्रीय युद्ध की आशंका और गहरा सकती है। अमेरिका के अंदर बढ़ रहा राजनीतिक दबाव खबर के मुताबिक, अमेरिका के भीतर भी इस युद्ध को लेकर राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है। आम चुनावों और मध्यावधि चुनावों की पृष्ठभूमि में महंगाई और बढ़ती ऊर्जा कीमतों ने सरकार के लिए चुनौती खड़ी कर दी है। कई सर्वेक्षणों में यह संकेत मिला है कि अमेरिकी जनता का बड़ा हिस्सा किसी नए विदेशी युद्ध के पक्ष में नहीं था। दूसरी तरफ, फ्लोरिडा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने दावा किया कि यदि अमेरिका ने हमला नहीं किया होता तो ईरान पूरे मध्य-पूर्व पर कब्जा कर सकता था। हालांकि उन्होंने इस दावे के समर्थन में कोई ठोस प्रमाण नहीं दिया। विशेषज्ञों की अलग राय ट्रंप ने यह भी कहा कि यह अभियान अमेरिका के लिए आर्थिक रूप से लाभदायक साबित होगा और अंततः इससे तेल और गैस की कीमतें कम हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि यह एक जरूरी सैन्य कार्रवाई थी और युद्ध अपने अंतिम चरण में हो सकता है। हालांकि, कई विश्लेषकों का मानना है कि युद्ध शुरू होने का एक कारण यह भी हो सकता है कि ईरान पहले से ही कमजोर स्थिति में था। हाल के वर्षों में हमास और हिज्बुल्ला जैसे ईरान समर्थित समूहों को भारी सैन्य नुकसान हुआ था, जबकि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था भी दबाव में थी। ट्रंप की “मैडमैन थ्योरी” क्या? कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि यह कन्फ्यूजन दरअसल ट्रंप की “मैडमैन थ्योरी” (Madman Theory) का हिस्सा हो सकता है, जहाँ वे दुश्मन को अनिश्चित रखकर दबाव बनाना चाहते हैं। साथ ही, घरेलू स्तर पर तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी युद्धों के प्रति अमेरिकी जनता की कम सहनशीलता भी उन्हें जल्द युद्ध खत्म करने का दावा करने पर मजबूर कर रही है। हालांकि, युद्ध शुरू करने के पीछे उनके तर्क बदलते रहे हैं, कभी इसे ईरान का आसन्न परमाणु खतरा बताया, तो कभी दावा किया कि ईरान अमेरिका पर हमला करने वाला था, और कभी इसे इजरायल के हितों की रक्षा से जोड़ा। असली सवाल: क्या युद्ध खत्म करना आसान होगा? विशेषज्ञों के अनुसार अब सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि ट्रंप युद्ध खत्म करना चाहते हैं या नहीं, बल्कि यह है कि क्या वे इसे जल्दी समाप्त कर पाएंगे। अमेरिका और इजरायल द्वारा किए जा रहे हमलों ने ईरान की सैन्य क्षमता, मिसाइल कार्यक्रम और परमाणु ढांचे को काफी नुकसान पहुंचाया है, लेकिन अभी तक स्वतंत्र रूप से इसकी पूरी पुष्टि नहीं हुई है। बहरहाल, ईरान युद्ध अब केवल सैन्य संघर्ष नहीं रह गया है। यह वैश्विक ऊर्जा बाजार, अंतरराष्ट्रीय राजनीति और अमेरिकी घरेलू राजनीति- तीनों पर गहरा असर डाल रहा है। जब तक स्पष्ट रणनीति और कूटनीतिक समाधान सामने नहीं आता, तब तक इस संघर्ष के जल्दी समाप्त होने की संभावना अनिश्चित बनी हुई है।  

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