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रायपुर एयरपोर्ट पर बार की शुरुआत संभव, साय सरकार की नई नीति से होटल-रेस्टोरेंट संचालक खुश

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में नई आबकारी नीति 2026-27 को हरी झंडी दे दी गई है। इस नीति का मुख्य केंद्र बिंदु राजस्व में वृद्धि और व्यापार करने की सुगमता (Ease of Doing Business) है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में नई शराब दुकानें नहीं खोली जाएंगी, लेकिन मौजूदा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और लाभप्रद बनाया जाएगा। नए नियमों के अनुसार, अब शराब की आपूर्ति से पहले ही टैक्स का भुगतान अनिवार्य होगा, जिससे सरकारी खजाने में समय पर राजस्व सुनिश्चित हो सकेगा। रायपुर एयरपोर्ट पर बार और लाइसेंस फीस में राहत पर्यटन को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने के लिए सरकार ने रायपुर एयरपोर्ट पर ‘विमानपत्तन रेस्टोरेंट बार’ (FL-3 घ) शुरू करने का रास्ता साफ कर दिया है। इसके साथ ही, होटल, क्लब और रेस्टोरेंट संचालकों के लिए लाइसेंस फीस में उल्लेखनीय कटौती की गई है। इस रियायत का उद्देश्य (CG New Excise Policy) राज्य में निवेश आकर्षित करना और आतिथ्य सत्कार क्षेत्र को मजबूती देना है। हालांकि, बार संचालन के समय में कोई बदलाव नहीं किया गया है; यह पहले की तरह सुबह 11 बजे से रात 11 बजे तक ही संचालित होंगे। प्लास्टिक बोतलों में मिलेगी शराब पर्यावरण और सुरक्षा के दृष्टिकोण से एक बड़ा बदलाव पैकेजिंग में किया गया है। अब छत्तीसगढ़ में देसी और विदेशी शराब कांच की बोतलों के बजाय प्लास्टिक की बोतलों में बेची जाएगी। विभाग का तर्क है कि कांच की बोतलों के टूटने से हर साल करोड़ों का नुकसान होता है और इससे कर्मचारियों के घायल होने का खतरा भी बना रहता है। प्लास्टिक पैकेजिंग से परिवहन आसान होगा और स्टोरेज की लागत में कमी आएगी। यह नियम 1 अप्रैल 2026 से पूरे प्रदेश में अनिवार्य रूप से लागू हो जाएगा। महंगी होगी शराब: नया टैक्स स्लैब लागू शराब प्रेमियों के लिए खबर थोड़ी कड़वी हो सकती है क्योंकि नई नीति में आबकारी ड्यूटी बढ़ा दी गई है। विशेष रूप से विदेशी और प्रीमियम ब्रांड्स (CG New Excise Policy) पर अब ‘रिटेल सेल प्राइस’ (RSP) के आधार पर टैक्स लगेगा। जितनी महंगी बोतल होगी, उस पर उतना ही अधिक ड्यूटी टैक्स देना होगा। बीयर और रेडी-टू-ड्रिंक (RTD) पेय पदार्थों पर भी नई दरें लागू की गई हैं। सरकार का मानना है कि उच्च श्रेणी के ब्रांड्स पर टैक्स बढ़ाने से राजस्व में बड़ी बढ़ोतरी होगी, जबकि सेना और अर्धसैनिक बलों के लिए ड्यूटी की न्यूनतम दरें बरकरार रखी गई हैं। प्रशासनिक सुधार और निगरानी नई नीति के तहत प्रशासनिक शक्तियों में भी बदलाव किया गया है। अब कंपोजिट लाइसेंस जारी करने का अधिकार सीधे आबकारी आयुक्त के पास होगा, जिससे प्रक्रिया में तेजी आएगी। साथ ही, अवैध शराब की तस्करी और ब्लैक मार्केटिंग रोकने के लिए डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम को और मजबूत किया जाएगा।

भारत-UK समझौते से बड़ा फायदा, 99% भारतीय सामान पर जीरो-ड्यूटी संभव

नई दिल्ली  भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) इस साल अप्रैल 2026 से लागू होने के लिए पूरी तरह तैयार है. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने पुष्टि की है कि इस समझौते के लागू होने से न केवल द्विपक्षीय व्यापार में ऐतिहासिक वृद्धि होगी, बल्कि भारतीय श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए ब्रिटेन के दरवाजे पूरी तरह खुल जाएंगे. 99% भारतीय उत्पादों पर जीरो-ड्यूटी इस ऐतिहासिक समझौते की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि ब्रिटेन को निर्यात किए जाने वाले 99 प्रतिशत भारतीय उत्पादों पर अब कोई सीमा शुल्क (Customs Duty) नहीं लगेगा. इससे भारत के उन क्षेत्रों को जबरदस्त फायदा होगा जहां बड़ी संख्या में लोग काम करते हैं. विशेष रूप से टेक्सटाइल (कपड़ा), रत्न एवं आभूषण, चमड़ा, फुटवियर, खिलौने, और समुद्री उत्पादों के निर्यातकों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है. अब ये उत्पाद ब्रिटिश बाजार में वियतनाम और बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले ज्यादा सस्ते और प्रतिस्पर्धी होंगे. IT सेक्टर और पेशेवरों को बड़ी राहत व्यापार के साथ-साथ, सेवाओं के क्षेत्र में भी बड़ी जीत हासिल हुई है. दोनों देशों ने ‘डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन’ (DCC) पर हस्ताक्षर किए हैं. इसका मतलब यह है कि जो भारतीय आईटी पेशेवर या अन्य कर्मचारी अस्थायी रूप से (3 साल तक) ब्रिटेन में काम करने जाएंगे, उन्हें और उनके नियोक्ताओं को वहां ‘सोशल सिक्योरिटी’ टैक्स नहीं देना होगा. इससे भारतीय कंपनियों की लागत कम होगी और उनके कर्मचारी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे. व्हिस्की और कारों पर घटेगा आयात शुल्क भारत ने भी ब्रिटिश उत्पादों के लिए अपने बाजार खोले हैं. भारत में बेहद लोकप्रिय स्कॉच व्हिस्की पर आयात शुल्क 150% से घटाकर तत्काल 75% कर दिया जाएगा, जिसे 2035 तक धीरे-धीरे 40% तक लाया जाएगा. इसी तरह, ब्रिटिश कारों पर लगने वाले भारी-भरकम शुल्क को अगले 5 वर्षों में घटाकर 10% तक लाया जाएगा. बदले में, भारतीय इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों को ब्रिटेन के बाजार में विशेष कोटा मिलेगा. आर्थिक लक्ष्य और भविष्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने मई 2025 में इस डील को अंतिम रूप दिया था. वर्तमान में यह समझौता ब्रिटिश संसद में अनुसमर्थन की प्रक्रिया में है. दोनों देशों का लक्ष्य है कि वर्तमान के $60 बिलियन के द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक $100 बिलियन के पार पहुँचाया जाए. विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत को एक वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के सपने को गति प्रदान करेगा.

सरकारी स्कूल ने प्राइवेट को दी चुनौती, रतलाम के बच्चे बिना बैग आए और 40 तक के पहाड़े याद किए

रतलाम  सरकारी स्कूलों का जब जिक्र आता है, तब ज्यादातर समय दिमाग में पहली तस्वीर बदहाल व्यवस्था की बनती है लेकिन मध्य प्रदेश के रतलाम में एक ऐसा अनूठा स्कूल है, जो इसके विपरीत एक नजीर पेश कर रहा है. यह स्कूल अपने आप में एक मिसाल है. इसके बारे में यह कहना हरगिज गलत नहीं होगा कि यह सरकारी स्कूल प्राइवेट स्कूलों को मात दे रहा है. स्कूल की अपनी कार्यशैली के चलते इसे ‘समस्या मुक्त विद्यालय’ नाम दिया गया है. यहां के प्रधानाध्यापक ने अपने खर्च पर स्कूल को सजाया-संवारा है. वहीं उनका शिक्षा की गुणवत्ता पर भी खासा फोकस रहता है. हम बात कर रहे हैं रतलाम के जावरा स्थित रूपनगर के सरकारी प्राथमिक स्कूल की. प्राथमिक स्कूल को बहुत सुंदर तरीके से सजाया गया है. स्कूल में बच्चों को अच्छी शिक्षा के साथ वह तमाम जानकारी मुहैया करवाई जा रही है, जो उनके सर्वांगीण विकास में सहायक है. स्कूल में इस तरह हरियाली छाई हुई है कि एक बार के लिए लगता है कि आप किसी गार्डन में आ गए हों. स्कूल की साफ-सफाई पर बहुत ध्यान दिया जाता है ताकि बच्चे अभी से स्वच्छता के महत्व को समझ सकें और इसे अपने जीवन में अपना सकें. खाली हाथ स्कूल आते हैं बच्चे पहली से पांचवीं क्लास तक यह स्कूल पूरी तरह से एक बैगलेस स्कूल है. बच्चे घर से बैग लेकर स्कूल नहीं आते हैं ताकि उनके नाजुक कंधों पर वजनी बोझ न पड़े. स्कूल में पढाई के साथ-साथ होमवर्क भी करवाया जाता है. बच्चों की यूनिफॉर्म पूरी तरह से व्यवस्थित है. इन नन्हे-मुन्ने स्टूडेंट्स की छोटी-छोटी बातों पर पूरा ध्यान दिया जाता है ताकि वे भी अच्छी बातें सीख सकें. बच्चों को 40 तक के पहाड़े मुंहजबानी याद स्कूल से प्रधानाध्यापक की मेहनत का ही यह नतीजा है कि उन्होंने इस सरकारी स्कूल की तस्वीर बदल दी. यहां बच्चों को 40 तक के पहाड़े मुंहजबानी याद हैं. जावरा के रूपनगर का यह सरकारी स्कूल रतलाम ही नहीं बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में मिसाल पेश करता नजर आ रहा है.

T20 वर्ल्ड कप 2026 अपडेट: India-Pakistan मैच हो सकता है फिर से, जानें कब और कैसे होगा

नई दिल्ली T20 World Cup 2026 के लीग फेज में टीम इंडिया और पाकिस्तान की भिड़ंत रविवार 15 फरवरी को हुई, जिसमें भारतीय टीम ने बुरी तरह से पाकिस्तान को धोया। पाकिस्तान की टीम को इस मैच में 61 रनों से हार मिली। इस हार की वजह से टीम का सुपर 8 में पहुंचने का गणित भी गड़बड़ा गया है। हालांकि, एक और मैच जीतकर पाकिस्तान की टीम सुपर 8 में पहुंच जाएगी, लेकिन फैंस उम्मीद कर रहे हैं कि भारत और पाकिस्तान का मैच फिर से इस टी20 विश्व कप में खेला जाए? अब क्या संभव है कि इंडिया और पाकिस्तान फिर से टूर्नामेंट में भिड़ेंगे? इसका जवाब है- हां, ऐसा हो सकता है। ये कैसे संभव है? ये आप इस स्टोरी में जान लीजिए। दरअसल, इंडिया और पाकिस्तान टी20 विश्व कप 2026 के ग्रुप ए में थे। ऐसे में दोनों के बीच टी20 विश्व कप में कम से कम एक मुकाबला संभव था, जो कि 15 फरवरी को खेला जा चुका है, लेकिन जिस तरह का मुकाबला हुआ है, उसे देखकर फैंस चाह रहे हैं कि एक बार फिर से दोनों देशों के बीच मुकाबला खेला जाएगा, जो कि कांटे का हो। हालांकि, सुपर 8 में ये संभव नहीं होने वाला है। इसके पीछे का कारण ये है कि इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल यानी आईसीसी ने टूर्नामेंट का शेड्यूल जारी करते हुए टॉप टीमों को सीडिंग दी थी, जिसके तहत सुपर 8 के मुकाबले लगभग तय हैं कि कौन सा मैच किस टीम के बीच खेला जाएगा। सुपर 8 में दो ग्रुप बनाए जाएंगे। ग्रुप 1 की चार टीमों को आपस में मुकाबले खेलने होंगे, जबकि दूसरे ग्रुप में भी ऐसा ही करना होगा। भारतीय टीम (X1) ग्रुप 1 में होगी, जिसमें ऑस्ट्रेलिया (X2), वेस्टइंडीज (X3) और साउथ अफ्रीका (X4) होगी। वहीं, ग्रुप 2 में इंग्लैंड (Y1), न्यूजीलैंड (Y2), पाकिस्तान (Y3) और श्रीलंका (Y4) को रखा जाएगा। बर्शते ये टीमें क्वालीफाई करें। अगर कोई टीम सुपर 8 में नहीं पहुंचती है तो उस टीम को उस ग्रुप की दूसरी टीम से रिप्लेस कर दिया जाएगा। इस तरह सुपर 8 में इंडिया वर्सेस पाकिस्तान मुकाबला संभव नहीं है, लेकिन अगर भारत और पाकिस्तान की टीम सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई करती हैं तो फिर दोनों के बीच भिड़ंत हो सकती है। टी20 विश्व कप 2026 में इंडिया वर्सेस पाकिस्तान सेमीफाइनल मैच तभी होगा, जब ग्रुप 1 में भारत टॉप पर रहे और ग्रुप 2 में पाकिस्तान दूसरे स्थान पर रहे या फिर पाकिस्तान ग्रुप 2 में पहले स्थान पर रहे और ग्रुप 1 में भारत दूसरे स्थान पर सुपर 8 फेज को फिनिश करे। अगर ऐसा नहीं होता तो फिर इंडिया वर्सेस पाकिस्तान सेमीफाइनल मैच संभव नहीं होगा। इसके लिए फैंस को उम्मीद करनी होगी कि दोनों टीमें फाइनल में भिड़ें। अगर पाकिस्तान की टीम सेमीफाइनल में पहुंचती है तो उसका सेमीफाइनल कोलंबो में होगा। अगर इंडिया वर्सेस पाकिस्तान सेमीफाइनल होता है तो यह भी कोलंबो में होगा। अन्यथा इंडिया किसी अन्य टीम से सेमीफाइनल में भिड़ेगी तो वह मैच मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाएगा। अगर पाकिस्तान की टीम ने सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई नहीं किया तो दूसरा सेमीफाइनल कोलकाता के ईडन गार्डेंस में खेला जाएगा। फाइनल में अगर पाकिस्तान की टीम पहुंची तो फिर फाइनल कोलंबो में होगा। अगर फाइनल में पाकिस्तान नहीं पहुंचा तो फिर टी20 विश्व कप 2026 फाइनल अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला जाएगा।

महाकाल नगरी में महाभारत का युद्ध विज्ञान दिखा जीवंत, उज्जैन में पहली बार प्रदर्शित 100+ अस्त्र-शस्त्र

उज्जैन  महाभारत, जिसे विश्व का सबसे बड़ा महाकाव्य और भारतीय युद्ध विज्ञान का मूल स्रोत माना जाता है, अब उज्जैन में शोध आधारित अस्त्र-शस्त्र प्रदर्शनी के रूप में जीवंत हो उठा है। महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ परिसर में सजी इस प्रदर्शनी का शुभारंभ महाशिवरात्रि पर हुआ, जो 19 मार्च तक देशभर के दर्शकों के लिए खुली रहेगी। उद्देश्य, महाभारत को धार्मिक आख्यान से आगे बढ़ाकर भारतीय सैन्य परंपरा, व्यूह रचना और रणनीतिक चिंतन के वैज्ञानिक दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत करना है। प्रदर्शनी में महाभारत युद्ध में वर्णित 100 से अधिक अस्त्र-शस्त्रों के बड़े माडल प्रदर्शित किए गए हैं। इनमें गदा, धनुष-बाण, तलवार, भाला, ढाल, सुदर्शन चक्र और वज्र की प्रतिकृतियां शामिल हैं। 18 दिन चले युद्ध की 14 प्रमुख व्यूह रचनाओं के त्रि-आयामी माडल तैयार किए गए हैं, जिनसे सेना की संरचना, घेराबंदी और आक्रमण-रक्षा की रणनीति को समझाया जा रहा है। युद्ध आचरण-नियमों की भी जानकारी दी जा रही 45 पताकाएं और 11 शंख प्रतिरूप प्राचीन युद्ध संकेत प्रणाली को दर्शाते हैं, जो उस काल की संचार व्यवस्था और सैन्य अनुशासन का प्रमाण हैं। इस प्रदर्शनी की विशेषता यह है कि यहां केवल हथियारों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि उनके प्रयोग की तकनीक, संबंधित योद्धाओं, रथ व्यवस्था, सेना संरचना और युद्ध आचरण-नियमों की भी जानकारी दी जा रही है। आयोजक विक्रमादित्य शोधपीठ से जुड़े राहुल रस्तोगी के अनुसार महाभारत को इतिहास, नीति, कूटनीति और युद्धशास्त्र के समन्वित ग्रंथ के रूप में समझाना ही इसका उद्देश्य है, ताकि नई पीढ़ी भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े। राष्ट्रीय स्तर पर यह प्रदर्शनी इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे पहले ऐसी पहल भोपाल के भारत भवन में हुई थी और अब उज्जैन में इसे स्थायी शैक्षणिक स्वरूप देने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है। इतिहासकारों और शिक्षाविदों का मानना है कि यह पहल भारतीय युद्ध विज्ञान, रणनीतिक सोच और सांस्कृतिक विरासत को अकादमिक विमर्श से जोड़ने का माध्यम बन सकती है। 14 माह का शोध, 12 लाख की लागत सभी प्रतिकृतियां गहन शोध पर आधारित हैं। इंदौर के शोधकर्ता राज बेन्द्र ने आठ माह तक ग्रंथों और ऐतिहासिक स्रोतों का अध्ययन कर रूपरेखा तैयार की, जिसके बाद छह माह में माडल निर्मित कराए गए। निर्माण पर लगभग 12 लाख रुपये खर्च हुए। आकार, अनुपात और उपयोग विधि को प्रमाणिक बनाने के लिए पारंपरिक विवरणों का विशेष ध्यान रखा गया है। युद्ध पद्धति को समझने का दुर्लभ अवसर महाभारत केवल धार्मिक आख्यान नहीं, बल्कि सैन्य संगठन, व्यूह रचना, संचार प्रणाली, मनोवैज्ञानिक युद्ध और आचरण नियमों का विस्तृत दस्तावेज माना जाता है। इसमें सेना संरचना, रथ युद्ध, गदा युद्ध, धनुर्विद्या और संकेत पद्धति का वैज्ञानिक वर्णन मिलता है, जो भारतीय रणनीतिक परंपरा की प्राचीन जड़ों को दर्शाता है। विद्यार्थियों, शोधार्थियों और सैन्य इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए यह प्रदर्शनी प्राचीन भारत की तकनीकी क्षमता, संगठन कौशल और नीति-आधारित युद्ध पद्धति को समझने का दुर्लभ अवसर प्रदान कर रही है।

आज की ताजपोशी में चर्चा का केंद्र—तारिक रहमान की दौलत और पत्नी जुबैदा की अधिक संपत्ति

ढाका  तारिक रहमान की ताजपोशी होने वाली है. दुनियाभर से करीब 1200 मेहमान शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचने वाले हैं. दरअसल, तारिक रहमान बांग्लादेशी के अगले प्रधानमंत्री बनने वाले हैं. ये पूर्व राष्ट्रपति जिया उर रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बड़े बेटे हैं, और 17 साल के निर्वासन के बाद 2025 में लंदन से बांग्लादेश लौटकर आए हैं.  बंपर जीत के बाद तारिक रहमान की खूब चर्चा हो रही है. लोग जानना चाहते हैं कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यकारी प्रमुख तारिक रहमान की कुल संपत्ति कितनी है, उनकी कमाई का जरिया क्या है?  पति से ज्यादा पत्नी अमीर चुनावी हलफनामे के मुताबिक तारिक रहमान की कुल नेटवर्थ करीब 1.97 करोड़ बांग्लादेशी टका है, जो भारतीय करेंसी में करीब 1.48 करोड़ रुपये के बराबर है. उनकी यह नेटवर्थ मुख्य रूप से बैंक बैलेंस, फिक्स्ड डिपॉजिट, शेयर और अचल संपत्ति मिलाकर है. चुनाव आयोग के सामने जमा किए गए हलफनामे में यह विवरण साफ दर्ज किया गया है.  बता दें, तारिक रहमान ने ढाका-17 और बोगुरा-6 दोनों सीटों से भारी मतों से जीत हासिल की है. Election Affidavit के अनुसार तारिक रहमान की सालाना आय करीब 6.76 लाख टका (लगभग 5 लाख रुपये) है, जो उन्होंने शेयर, बॉन्ड और बैंक जमा पर अर्जित किया है.  उनके बैंक खातों में कुल जमा लगभग 1.23 करोड़ टका (यानी करीब 92.25 लाख रुपये) हैं, जिनमें से लगभग 31.6 लाख टका नकद या चालू बचत में रखे हुए हैं. Fixed Deposits में कुछ उनके बेटी के नाम पर भी हैं, तारिक रहमान द्वारा घोषित चल संपत्ति (movable assets) में फर्नीचर लगभग 2 लाख टका का है. इसके अलावा उनके पास बोगुरा में 2 एकड़ से अधिक जमीन है.  तारिक रहमान की पत्नी डॉक्टर तारिक की पत्नी डॉ. जुबैदा रहमान ने अपने हलफनामे में काफी अधिक आय और संपत्ति घोषित की है. वे एक डॉक्टर हैं और उनकी वर्षीय आय लगभग 35.6 लाख टका (लगभग 26.7 लाख रुपये) है, यह उनकी पति की आय से लगभग 5 गुना अधिक है. उनके बैंक जमा लगभग 1 करोड़ बांग्लादेशी टका हैं, जिसमें से 66.5 लाख टका बचत खाते में हैं, वे 111.25 डिसिटल भूमि और 800-स्क्वायर-फुट के डुप्लेक्स घर की भी मालकिन हैं. टैक्स रिकॉर्ड्स से पता चलता है कि तारिक ने पिछले साल करीब 1 लाख टका टैक्स दिया, हलफनामे के अनुसार, उनके पास कोई भी कर्ज या सरकारी बकाया नहीं है. जबकि उनकी पत्नी ने लगभग 5.6 लाख टका टैक्स दिया. शेयरों में भी दोनों का मिलकर कुछ निवेश है, जिसमें लगभग 5 लाख रुपये से अधिक का शेयर और अन्य कंपनियों में 18.5 लाख रुपये का निवेश शामिल है. हलफनामे में यह भी उल्लेख है कि 2004 से अब तक दर्ज 77 कानूनी मामलों में उन्हें पूरी तरह से बरी कर दिया गया है.

ग्वालियर में एलिवेटेड रोड निर्माण की तैयारी, 28 भवनों पर गिरेगा बुलडोजर, प्लॉट अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू

ग्वालियर शहर को ट्रैफिक जाम से स्थायी राहत देने के लिए स्वर्ण रेखा नदी पर बन रही 14.2 किमी लंबी एलिवेटेड रोड परियोजना का काम फिर शुरू तो हुआ है, लेकिन बाधाएं अब भी खत्म नहीं हुईं। प्रथम चरण में लूप निर्माण दोबारा चालू किया गया है लेकिन पड़ाव स्थित गंगादास की शाला के पास 28 भवन और खाली प्लॉट अभी भी अतिक्रमण के रूप में रुकावट बने हुए हैं। करीब 1373.21 करोड़ रुपए की इस परियोजना का पहला चरण ट्रिपल आईटीएम से महारानी लक्ष्मीबाई समाधि स्थल तक 6.5 किमी में बन रहा है। जिला प्रशासन, नगर निगम और पीडब्ल्यूडी की संयुक्त कार्रवाई के बाद काम आगे बढ़ा है, लेकिन अतिक्रमण हटे बिना गति मिलना मुश्किल माना जा रहा है। एएसआई अनुमति में फंसा मामला जहां लूप निर्माण में तकनीकी दिक्कतें हैं वहां पीडब्ल्यूडी ने एएसआई को दोबारा पत्र भेजा है, लेकिन पहले अनुमति से इनकार हो चुका है। इससे कानूनी और प्रशासनिक उलझनें बढ़ गई हैं और टाइमलाइन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। निरीक्षण ज्यादा प्रगति कम केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, सांसद भारत सिंह कुशवाह, मंत्री प्रद्यु्न सिंह तोमर और प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट कई बार निरीक्षण कर चुके हैं, लेकिन जमीनी हकीकत में अतिक्रमण और अधूरा निर्माण अब भी जस का तस है। क्या कहते है एक्सपर्ट शासन और संबंधित विभागों को सख्ती के साथ शेष अतिक्रमण हटाकर निर्धारित समय सीमा में ट्रिपल आईटीएम से महारानी लक्ष्मीबाई समाधि स्थल तक प्रथम चरण को जल्द चालू करना चाहिए, ताकि आमजन को शीघ्र राहत मिल सके। – ज्ञानवर्धन मिश्रा, सेवानिवृत्त कार्यपालन यंत्री, पीडब्ल्यूडी सेतु संभाग अतिक्रमण और अधिग्रहण अभि अधूरा करीब 35 करोड़ रुपए का जमीन अधिग्रहण अवार्ड बांटा जा चुका है, फिर भी रानीपुरा, मानपुर, रमटापुरा और पड़ाव क्षेत्र में अतिक्रमण पूरी तरह नहीं हट पाया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्वर्ण रेखा में चैंबर तोड़े जाने से गंदा पानी घरों में भर रहा है और धूल-जाम से परेशानी बढ़ रही है। ये है वर्तमान स्थिति लंबाई : 6.5 किमी चौड़ाई : 16 मीटर लूप : 13 लागत : 446.92 करोड़ अब तक खर्च: 308 करोड़ कार्य प्रगति : 75% साढ़े तीन साल में तीन बार बढ़ी समय सीमा कार्य शुरू : 23 जून 2022 पहली डेडलाइन : 17 फरवरी 2025 बढ़ाकर : 31 दिसंबर 2025 फिर : जून 2026 अब नई तारीख : 31 दिसंबर 2026 अब तक करीब 75% काम और 308 करोड़ रुपए खर्च होने का दावा है। निर्माण का जिम्मा श्रीमंगलम बिल्डकॉन इंडिया प्रा. लि. के पास है।

क्या AI छीन लेगा नौकरियां? 800 करोड़ लोगों के रोजगार पर मंडराता बड़ा खतरा

मुंबई  आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) लगातार एडवांस होता जा रहा है और हर फील्ड में इसकी धमक देखने को मिल रही है. आज AI दुनिया की सबसे बड़ी तकनीकी क्रांति बन चुका है. चैटबॉट से लेकर सेल्फ-ड्राइविंग कार, मेडिकल डायग्नोसिस से लेकर कंटेंट राइटिंग तक हर क्षेत्र में AI तेजी से अपनी जगह बना रहा है. ऐसे में एक बड़ा सवाल लोगों के मन में उठता है कि अगर सभी काम AI ही कर देगा, तो दुनिया के 800 करोड़ लोग क्या करेंगे? क्या नौकरियां खत्म हो जाएंगी? क्या इंसान बेकार हो जाएगा? आइए इस सवाल का जवाब ChatGPT से जान लेते हैं. ChatGPT के मुताबिक सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि AI का उद्देश्य इंसानों को पूरी तरह रिप्लेस करना नहीं, बल्कि उनके काम को आसान और तेज बनाना है. इतिहास गवाह है कि जब भी नई तकनीक आई जैसे औद्योगिक क्रांति, कंप्यूटर या इंटरनेट आया, तब शुरुआत में नौकरियों को लेकर डर पैदा हुआ. हालांकि समय के साथ नई तकनीक ने पुराने कामों को बदला और नई नौकरियां भी पैदा कीं. AI भी कुछ दोहराए जाने वाले और डेटा आधारित कामों को संभालेगा, लेकिन रचनात्मकता, भावनात्मक समझ और नैतिक निर्णय जैसे क्षेत्रों में इंसान की भूमिका अभी भी अहम रहेगी. दूसरा पहलू है नौकरियों का बदलाव. कई पारंपरिक नौकरियां कम हो सकती हैं, लेकिन AI से जुड़े नए क्षेत्र तेजी से उभर रहे हैं- जैसे डेटा साइंस, मशीन लर्निंग, साइबर सिक्योरिटी, AI ट्रेनिंग, रोबोटिक्स और डिजिटल मैनेजमेंट. इसके अलावा हेल्थकेयर, शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, कला और मनोरंजन जैसे क्षेत्रों में इंसानी स्पर्श की जरूरत हमेशा बनी रहेगी. यानी भविष्य में नौकरियां खत्म नहीं होंगी, बल्कि उनका स्वरूप बदलेगा. तीसरा महत्वपूर्ण मुद्दा है स्किल्स का. आने वाले समय में वही लोग सफल होंगे जो नई तकनीक के साथ खुद को अपडेट करेंगे. डिजिटल लिटरेसी, क्रिटिकल थिंकिंग, क्रिएटिविटी और समस्या सुलझाने की क्षमता बेहद जरूरी होगी. सरकारों और संस्थानों को भी शिक्षा प्रणाली में बदलाव लाकर लोगों को भविष्य की जरूरतों के हिसाब से प्रशिक्षित करना होगा. AI को दुश्मन नहीं, बल्कि एक टूल के रूप में देखने की जरूरत है. हालांकि यह भी सच है कि AI से असमानता बढ़ने का खतरा हो सकता है. अगर तकनीक का लाभ केवल कुछ कंपनियों या देशों तक सीमित रह गया, तो बेरोजगारी और आर्थिक अंतर बढ़ सकता है. इसलिए नीति-निर्माताओं के लिए जरूरी है कि वे AI के विकास के साथ-साथ सामाजिक सुरक्षा, नई नौकरियों के अवसर और रिस्किलिंग प्रोग्राम पर भी ध्यान दें. कुछ विशेषज्ञ यूनिवर्सल बेसिक इनकम जैसे विकल्पों पर भी चर्चा कर रहे हैं, ताकि तकनीकी बदलाव का असर संतुलित रहे. यह कहना गलत होगा कि AI सब कुछ कर देगा और इंसान के पास कोई काम नहीं बचेगा. AI एक शक्तिशाली असिस्टेंस है, लेकिन मानव बुद्धि, भावनाएं और नैतिकता की बराबरी अभी नहीं कर सकता. भविष्य इंसान और मशीन के सहयोग का होगा, प्रतिस्पर्धा का नहीं. अगर हम बदलाव को अपनाएं और खुद को तैयार रखें, तो AI 800 करोड़ लोगों के लिए खतरा नहीं, बल्कि नए अवसरों का दरवाजा साबित हो सकता है.

जबलपुर गन फैक्ट्री अपडेट: 100 धनुष तोपों के लिए अत्याधुनिक माउंटेन गन सिस्टम तैयार किया जाएगा

जबलपुर जबलपुर की गन कैरिज फैक्ट्री (जीसीएफ) में बनी धनुष तोप ऑपरेशन सिंदूर में धाक जमाने के बाद की मांग बढ़ी है। रक्षा उत्पादन में नए सिरे से कार्य करते हुए निर्माणी छह माह के छोटे से समय में 100 धनुष तोप का नया आधुनिक माउंटेन गन सिस्टम बनाएगा। यह तोप अभी 38 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम है। इसमें 52 कैलिबर का उपयोग किया गया है। अब नई तोप 44 से 46 किलोमीटर रेंज कवर करेगी और 45 की जगह 52 कैलिबर में नजर आएगी। निर्माणी ने इसके लिए नया प्लांट विकसित किया है, जहां इसे आकार दिया जाएगा। माउंटेन गन सिस्टम से यह व्हीकल पर कैरी हो सकेगी साथ चारों दिशाओं में घूमकर फायर में सक्षम हो सकेगी। धनुष 155 एमएम 45 कैलीबर की आधुनिक आर्टिलरी गन में एक है। इस आर्टिलरी गन में 81 प्रतिशत पार्ट स्वदेशी है और लक्ष्य 91 प्रतिशत स्वदेशी पार्ट्स का है। 13 सेकंड में तीन फायर उन्होंने बताया कि इस गन की मारक क्षमता 38 किलोमीटर तक है। यह 13 सेकंड में तीन फायर कर सकती है। फायर करने के बाद गन अपनी पोजिशन चेंज कर करती है। उन्होंने बताया कि आर्टिलरी गन का वजन 13 टन है। उन्होंने इस बात से भी इंकार किया कि यह बोफोर्स का अपग्रेडेड वर्जन है। बोफोर्स तथा धनुष के कुछ फंक्शन सामान्य हैं। यह रात के समय भी लक्ष्य पर निशाना साध सकती है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ने कुल 414 गन की मांग की है। पूरी तरह देश में विकसित जानकारी के मुताबिक, 1990 में बोफोर्स के बाद अब जाकर कोई बड़ी गन सेना को सौंपी जा रही है। देश में विकसित सबसे बड़ी आर्टिलरी गन धनुष में कई खूबियां हैं। 2012 में इस पर काम शुरू हुआ था। इसमें अपग्रेडेड कम्यूनिकेशन सिस्टम लगाया गया है।  

MP में गिद्ध गणना का डिजिटल तरीका, मोबाइल एप से 7 प्रजातियों की ट्रैकिंग

भोपाल   वल्चर स्टेट की उपाधि रखने वाले मध्य प्रदेश में इस बार फिर गिद्धों की गणना का काम शुरु होने वाला है। खास बात ये है कि, इस बार मोबाइल एप की मदद से गिद्धों की गिनती की जाएगी। प्रदेश के शहडोल, अनूपपुर, उमरिया और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के करीब 50 से अधिक अधिकारी – कर्मचारियों को इसके लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। ये प्रदेशव्यापी शीतकालीन गिद्ध गणना साल 2025-26 के लिए आयोजित की गई है। इस नई तकनीक से गिद्धों की गणना में पारदर्शिता आएगी और समय की बचत होगी। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के ईको सेंटर ताला में आयोजित इस कार्यशाला में वन वृत्त शहडोल के उत्तर शहडोल, दक्षिण शहडोल, उमरिया, अनूपपुर और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व उमरिया के सभी उप वन मण्डलाधिकारी और परिक्षेत्र अधिकारी शामिल हुए। वल्चर कमेटी के सदस्य और मास्टर ट्रेनर दिलशेर खान ने मध्य प्रदेश में पाए जाने वाले गिद्धों की प्रजातियों और उनके रहवास के बारे में जानकारी दी। मोहन नागवानी ने गिद्ध गणना में इस्तेमाल होने वाले मोबाइल एप्लीकेशन Epicollect5 Data के संचालन का प्रशिक्षण दिया। 20 से 22 फरवरी के बीच होगी गणना क्षेत्र संचालक बांधवगढ टाईगर रिजर्व, डॉक्टर अनुपम सहाय ने गिद्ध संरक्षण में प्रदेशव्यापी गिद्ध गणना के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि, वो मैदानी अमले को भी इस नई तकनीक का प्रशिक्षण दें। मध्य प्रदेश में 20 फरवरी से 22 फरवरी तक मोबाइल एप्लीकेशन का उपयोग करके गिद्धों की गिनती की जाएगी। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय अधिकारियों और वन कर्मचारियों को गणना की नई पद्धतियों से परिचित कराना था। कर्मचारियों को दी गई विशेष ट्रेनिंग प्रशिक्षण के दौरान, विशेषज्ञों ने एसडीओ, रेंजर और वन कर्मचारियों को ऐप के संचालन, डेटा अपलोड करने और फोटो के माध्यम से जानकारी दर्ज करने की विस्तृत जानकारी दी। अधिकारियों को बताया गया कि गणना के समय कर्मचारी मौके पर ही गिद्धों की फोटो खींचकर ऐप में जरूरी जानकारी भरेंगे। इससे काम में और भी ज्यादा पारदर्शिता आएगी और समय भी बचेगा। बांधवगढ़ में चार तरह के गिद्ध बता दें कि, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में चार तरह के गिद्ध पाए जाते हैं। भारतीय गिद्ध (लॉन्ग बिल्ड वल्चर), सफेद पूंछ वाला गिद्ध (व्हाइट बेक्ड वल्चर), राज गिद्ध (रेड हेडेड वल्चर) और इजिप्शियन वल्चर। इस बार तीन और प्रजातियों के गिद्धों के दिखने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालयन ग्रिफन, यूरेशियन ग्रिफन और सिनेरियस गिद्ध भी इस बार देखे जा सकते हैं। गिद्धों की प्रकृति में अहम भूमिका क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय ने बताया कि सभी को ऐप आधारित गणना का प्रशिक्षण मिल चुका है और अब यह पूरा काम डिजिटल तरीके से होगा। उन्होंने यह भी बताया कि गिद्ध हमारे पर्यावरण को साफ रखने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे मरे हुए जानवरों को खाकर पर्यावरण को स्वच्छ रखते हैं। इस बार गिद्धों की गिनती के लिए 150 कर्मचारी फील्ड में काम करेंगे और लगभग 100 अधिकारी और कर्मचारी उन पर नजर रखेंगे। इस तरह कुल मिलाकर करीब 250 लोग इस गणना कार्य में शामिल होंगे। डिजिटल ऐप के इस्तेमाल से यह प्रक्रिया और भी आसान हो जाएगी।

बेमौसम गर्मी से गेहूं फसल प्रभावित होने की आशंका, किसान परेशान

 ग्वालियर  ग्वालियर-चंबल अंचल में इस बार मौसम के मिजाज ने एक बार फिर किसानों की चिंता बढ़ा दी है। फरवरी के मध्य में ही जिस तरह से पारा चढ़ना शुरू हुआ है, उसने सर्दी की विदाई और गर्मी की जल्द दस्तक के संकेत दे दिए हैं। मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, आगामी दो से तीन दिनों में तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस की और बढ़ोतरी होने की आशंका है। हालांकि बीच में एक दिन हल्की बूंदाबांदी का अंदेशा जरूर है, लेकिन यह बढ़ती गर्माहट को रोकने में नाकाफी साबित होगी। अचानक बढ़ते तापमान का सबसे नकारात्मक असर रबी सीजन की गेहूं की फसल पर पड़ता दिखाई दे रहा है। कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक यदि गर्मी इसी तरह बढ़ती रही, तो गेहूं के उत्पादन में गिरावट आ सकती है। क्यों खतरनाक है गेहूं के लिए यह गर्मी कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. शैलेंद्र कुशवाह के अनुसार, वर्तमान में गेहूं की फसल अपनी उस अवस्था में है जहां दाने बनने और उनके परिपक्व होने की प्रक्रिया चल रही है। गेहूं की फसल के लिए इस समय हल्की ठंडक की जरूरत होती है, ताकि दाना धीरे-धीरे और पूरी तरह विकसित हो सके। तापमान अधिक होने से गेहूं का दाना अपनी प्राकृतिक अवधि पूरी करने से पहले ही परिपक्व होने लगता है। इसे वैज्ञानिक भाषा में ‘फोर्स्ड मैच्योरिटी’ कहते हैं। जब दाना समय से पहले पकता है, तो वह पूरी तरह फूल नहीं पाता। इसके परिणामस्वरूप गेहूं का दाना छोटा, पतला और हल्का रह जाता है। दानों का वजन कम होने और उनके सिकुड़ जाने से प्रति हेक्टेयर होने वाली पैदावार काफी कम हो सकती है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान होगा। अंचल की दूसरी प्रमुख फसल सरसों की बात करें, तो बढ़ते तापमान का असर इस पर भी पड़ेगा, लेकिन गेहूं की तुलना में यह काफी कम होगा। जानकारों का कहना है कि सरसों का दाना अब तक लगभग परिपक्व हो चुका है और फसल कटाई की ओर बढ़ रही है। यह कर सकते हैं किसान     हल्की सिंचाई : फसल में नमी बनाए रखने के लिए शाम के समय हल्की सिंचाई करें। इससे जमीन का तापमान कम रहेगा और फसल को हीट शाक नहीं लगेगा।     निगरानी : गेहूं के पौधों में पीलापन या दानों के सूखने की स्थिति पर नजर रखें।     पोटेशियम का छिड़काव : विशेषज्ञों की सलाह लेकर पोटैशियम जैसे तत्वों का प्रयोग करें जो पौधों को गर्मी सहने की शक्ति प्रदान करते हैं। मौसम विभाग बता रहा हल्की बारिश का अनुमान     मौसम में आए बदलाव और बढ़ते तापमान से गेहूं की फसल अधिक प्रभावित होगी। हालांकि मौसम विभाग अभी हल्की बारिश का अनुमान बता रहा है। ऐसे में उम्मीद है कि कम से कम फरवरी में तो ठंडक रहेगी। तापमान यदि बढ़ता है तो गेहूं के दाने की ग्रोथ प्रभावित होगी। –आरबीएस जाटव, उप संचालक, कृषि विकास व किसान कल्याण विभाग।  

सोना जल्द 1 लाख रुपये से नीचे? रूस की चाल ने निवेशकों में मचाई चिंता

इंदौर   भारत में सोने की कीमतों ने वर्ष 2025 में शानदार रिटर्न दिया था. 2026 की शुरुआत में भी तेजी का सिलसिला जारी रहा और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना ₹1,80,779 प्रति 10 ग्राम के शिखर तक पहुंच गया. हालांकि, हाल के सत्रों में इसमें तेज करेक्शन भी देखने को मिला है. पिछले सप्ताह के अंत में MCX पर सोना लगभग ₹1,56,200 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ, जो अपने उच्चतम स्तर से करीब 13 प्रतिशत नीचे है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी यही रुझान दिखा. COMEX पर सोना अपने रिकॉर्ड स्तर से लगभग 10 प्रतिशत नीचे कारोबार करता नजर आया. अब बाजार में यह चर्चा तेज है कि अगर भू राजनीतिक समीकरण बदलते हैं तो सोना 3,000 डॉलर प्रति औंस तक फिसल सकता है. दरअसल, बाजार विश्लेषकों का मानना है कि सोने की तेजी को अब नई चुनौतियां मिल रही हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस अमेरिका के साथ डॉलर आधारित व्यापार समझौते की संभावनाएं तलाश रहा है. यदि ऐसा होता है तो यह BRICS देशों की ‘डीडॉलराइजेशन’ रणनीति के लिए बड़ा झटका हो सकता है. रूस-अमेरिका गठजोड़  अब तक BRICS देशों द्वारा व्यापार में डॉलर पर निर्भरता कम करने और सोने का भंडार बढ़ाने की कोशिशें की जा रही थीं. इसी कारण वैश्विक स्तर पर सोने की मांग मजबूत बनी हुई थी. लेकिन रूस के संभावित रुख में बदलाव से यह धारणा कमजोर पड़ सकती है, जिसका सीधा असर सोने की कीमतों पर दिख सकता है. अमेरिकी आर्थिक संकेतक भी बने कारण दरअसल, सोने की कीमतें केवल भू राजनीतिक घटनाओं पर ही निर्भर नहीं करतीं, बल्कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. हाल में अमेरिका में महंगाई के आंकड़े मजबूत आए हैं, जिससे ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कम हुई हैं. ऐसे में अगर फेड दरों में कटौती टालता है, तो डॉलर मजबूत रह सकता है. मजबूत डॉलर आमतौर पर सोने के लिए नकारात्मक माना जाता है, क्योंकि इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना महंगा हो जाता है और मांग घटती है. निवेशकों के लिए क्या है संकेत? मौजूदा परिस्थितियों में कीमती धातुओं के बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि सोने में लंबी अवधि के निवेशक घबराएं नहीं, लेकिन अल्पकालिक निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए. यदि रूस-अमेरिका व्यापार में डॉलर की वापसी की खबरें पुख्ता होती हैं और फेड दरों में कटौती नहीं करता, तो सोना ₹1 लाख प्रति 10 ग्राम के नीचे भी आ सकता है. हालांकि अंतिम दिशा वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगी. सोना परंपरागत रूप से सुरक्षित निवेश माना जाता है. लेकिन जब वैश्विक जोखिम कम होते हैं और डॉलर मजबूत होता है, तो इसमें मुनाफावसूली बढ़ जाती है. फिलहाल, बाजार इसी दोराहे पर खड़ा है. आने वाले हफ्तों में रूस की आधिकारिक प्रतिक्रिया, अमेरिकी आर्थिक डेटा और वैश्विक बाजार का रुख तय करेगा कि सोना फिर से चमकेगा या कीमतों में और गिरावट देखने को मिलेगी.

राशन कार्ड वालों की बल्ले-बल्ले! छत्तीसगढ़ में 82 लाख परिवारों के लिए एक साथ राशन वितरण

रायपुर छत्तीसगढ़ में गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। विष्णु देव साय सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत प्रदेश के करीब 82 लाख राशन कार्डधारकों को फरवरी 2026 में ही फरवरी और मार्च दो महीने का राशन एक साथ देने का फैसला लिया है। इस फैसले से लाखों परिवारों को समय से पहले राहत मिलेगी और राशन वितरण व्यवस्था और भी सुचारू होगी। खाद्य विभाग के निर्देश पर सभी जिलों में गोदामों से चावल का उठाव तेज कर दिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि NFSA योजना के तहत आने वाले अंत्योदय और प्राथमिकता कार्डधारकों को फोर्टिफाइड चावल दिया जाएगा, जबकि राज्य योजना के APL कार्डधारकों को उनकी पात्रता अनुसार चावल मिलेगा। इसके अलावा फरवरी महीने के लिए नमक, शक्कर और गुड़ का भी वितरण किया जाएगा, ताकि उपभोक्ताओं को सभी जरूरी सामान एक साथ मिल सके। राशन वितरण को पारदर्शी बनाने के लिए ई-पॉस मशीन से बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य किया गया है। दो महीने का राशन एक साथ मिलने के कारण हितग्राही को मशीन पर दो बार अंगूठा लगाना होगा। चावल के अतिरिक्त, फरवरी माह के लिए नमक, शक्कर और गुड़ का आबंटन भी जारी किया गया है, ताकि उपभोक्ताओं को सभी आवश्यक सामग्री एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकें।राशन वितरण की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने ई-पास (e-PoS) मशीन के माध्यम से बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण को अनिवार्य रखा है। चूंकि इस बार दो महीने का राशन एक साथ दिया जा रहा है, इसलिए हितग्राहियों को मशीन पर दो बार (पृथक-पृथक) अंगूठा लगाकर प्रमाणीकरण करना होगा। एईपीडीएस (AePDS) सॉफ्टवेयर में इसके लिए आवश्यक तकनीकी बदलाव किए गए हैं। दुकानदारों को भी निर्देशित किया गया है कि वे उपभोक्ताओं को इस प्रक्रिया के बारे में पहले से जानकारी दें ताकि दुकानों पर अनावश्यक भीड़ न लगे।भंडारण और निगरानी के कड़े निर्देशसरकार ने स्पष्ट किया है कि दो महीने का राशन एकमुश्त (CG News) देने के कारण उचित मूल्य की दुकानों में पर्याप्त स्टॉक होना अनिवार्य है। सरकार ने दुकानदारों को निर्देश दिए हैं कि उपभोक्ताओं को पहले से जानकारी दें, ताकि राशन दुकानों पर भीड़ न लगे। खाद्य विभाग के अनुसार, मिलिंग में देरी की चर्चा जरूर है, लेकिन सरकार का दावा है कि हर पात्र परिवार को समय पर पूरा राशन मिलेगा। खाद्य विभाग के नियंत्रकों ने पुष्टि की है कि गोदामों से चावल का उठाव तेजी से किया जा रहा है और वितरण की निगरानी के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं। हालांकि, मिलिंग की धीमी गति के कारण कुछ क्षेत्रों में स्टॉक की चुनौतियों की चर्चा थी, लेकिन विभाग ने दावा किया है कि वितरण में कोई बाधा नहीं आएगी और प्रत्येक पात्र परिवार को उनका हक समय पर मिलेगा।

8वें वेतन आयोग ने दी राहत, केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों के खाते में लाखों रुपये बढ़त

नई दिल्ली   केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए बड़ी खबर। सरकार ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को आधिकारिक रूप से अधिसूचित कर दिया है। अगर इसे जनवरी 2026 से प्रभावी मानकर 2027 में लागू किया जाता है, तो कर्मचारियों को लाखों रुपये का एरियर एकमुश्त मिल सकता है। कब से लागू होगा नया वेतन? सरकार की ओर से संकेत हैं कि आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जा सकती हैं। व्यावहारिक रूप से इसे 2027 में लागू किया जा सकता है। इसके बाद कर्मचारियों को 12–20 महीने तक का एरियर एक साथ मिलेगा। फिटमेंट फैक्टर और संभावित बढ़ोतरी फिटमेंट फैक्टर लगभग 2.57 माना जा रहा है। इससे सैलरी में 30% से 50% तक बढ़ोतरी संभव है। अनुमानित एरियर राशि लेवल    संभावित एरियर (₹) लेवल-1     3.60 लाख – 5.65 लाख   लेवल-2      3.98 लाख – 6.25 लाख लेवल-4     5.10 लाख – 8.01 लाख एरियर की गणना कैसे होगी? पुरानी और नई बेसिक सैलरी का अंतर निकाला जाएगा। अंतर को लागू होने तक के महीनों से गुणा किया जाएगा। महंगाई भत्ता (DA) भी बढ़ेगा, जिससे एरियर में अतिरिक्त लाभ जुड़ जाएगा। भेदभाव का कोई प्रावधान नहीं पेंशनर्स के लिए सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि नियम कहते हैं कि सिर्फ इस आधार पर कि कोई व्यक्ति 31 दिसंबर 2025 से पहले रिटायर हुआ है या उसके बाद, उनके साथ अलग तरह का व्यवहार नहीं किया जाएगा. 8वें वेतन आयोग से क्या बदलेगा? अगर 8वां वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से लागू होता है, तो इसका असर दो तरह से पड़ेगा. पहले यहा कि जो 1 जनवरी 2026 के बाद रिटायर होंगे, उनकी पेंशन की कैलकुलेशन सीधे नए बेसिक पे के आधार पर होगी. साथ ही पुराने पेंशनर्स, जो 31 दिसंबर 2025 तक रिटायर हो चुके होंगे, उनकी पेंशन को एक फिक्स फिटमेंट फैक्टर के जरिए रिवाइज किया जाएगा. सरकार के जवाब से यह साफ है कि 31 दिसंबर 2025 की तारीख कोई डेडलाइन नहीं है जो आपको बढ़ी हुई पेंशन के फायदे से बाहर कर दे. पिछले समय की तरह हर वेतन आयोग ने पुराने पेंशनभोगियों की पेंशन को भी रिवाइज किया है, जिससे वह महंगाई के दौर में पीछे न छूटें. किन्हें मिलेगा फायदा? केंद्रीय कर्मचारी रक्षा कर्मी ऑल इंडिया सर्विसेज अधिकारी पेंशनर कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए राहत लंबे समय से वेतन संशोधन की मांग कर रहे कर्मचारियों के लिए यह एक बड़ी राहत है। बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की लागत को देखते हुए यह कदम जरूरी माना जा रहा है।

जनगणना 2026: अप्रैल से हर घर दस्तक, कर्मचारियों से किसी को भी यह 1 सवाल नहीं करना

भोपाल  एमपी के भोपाल जिले में अब जनगणना 2027 की हलचल तेज हो गई है। जिले में लोग मतदाता सूची गहन पुनरीक्षण के तहत मतदाता सूची में नाम बनाए रखने के लिए प्रशासन को दस्तावेज देने की जद्दोजहद करते नजर आए थे, लेकिन अब जनगणना में स्थिति पूरी तरह से उलट होगी। यह मौखिक होगी। कोई दस्तोवज नहीं लिया जाएगा। आधार नंबर मांगा जा सकता हैं। हालांकि ये केंद्र की सूची में नहीं है, इसलिए वैकल्पिक ही रहेगा। मोबाइल नंबर जरूर जनगणना के लिए लिया जाएगा। जनगणना फार्म डिजिटली भरा जाएगा। इसके बाद आप डिजिटल रसीद दी जाएगी। ये 1 चीज नहीं पूछेगा प्रशासन अभी पूरी प्रक्रिया प्रशासनिक कार्यालयों में ट्रेनिंग-तैयारियों के तौर पर हो रही है। अप्रैल से हर घर दस्तक देना शुरू होगी। एसआइआर में साढ़े चार लाख मतदाताओं के नाम हटाए थे, जनगणना में सिर्फ 33 हजार को ही मृत श्रेणी में रखा जाएगा। जनगणना में बैकिंग की डिटेल नहीं मांगी जाएगी। जनधन खातों व यूपीआइ के तहत हर व्यक्ति की बैकिंगग डिटेल सरकार के पास है। इंटरनेट की पहुंच, स्मार्टफोन के साथ घरेलू उपयोग में एलपीजी/पीएनजी की उपलब्धता व कनेक्शन को लेकर सवाल जरूर होंगे। स्वगणना के लिए 15 दिन मिलेंगे जनगणना में एक अप्रेल 2026 से सितंबर 2026 तक घर का सर्वे-मैपिंग होगी। 30 दिन गहन काम होगा। इससे पंद्रह दिन पहले लोगों को खुद ही ऑनलाइन फार्म भरकर स्वगणना का विकल्प खोला जाएगा। यानी नागरिक खुद ही अपना डिजिटल फार्म डिटेल के साथ जमा कर सकेंगे। 10 लाख घरों होगी मैपिंग 1 मई से शुरू होने वाली जनगणना को लेकर मध्यप्रदेश में तैयारियां तेज हो गई हैं। जिला प्रशासन ने इस महाअभियान के लिए व्यापक स्तर पर तैयारी पूरी कर ली है। इस बार जनगणना प्रक्रिया में डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी उपयोग किया जाएगा, जिससे नागरिक स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से दर्ज कर सकेंगे। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि नागरिक इंडियन सेंसस डाटा कलेक्शन पोर्टल पर लॉग-इन कर अपनी जानकारी उपलब्ध करा सकेंगे। इसके साथ ही पारंपरिक तरीके से डोर-टू-डोर सर्वे भी किया जाएगा। जनगणना कार्य के लिए करीब 8000 कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। 16 फरवरी से प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू होगा। अभियान के तहत लगभग 10 लाख घरों की जियो-टैगिंग और मैपिंग की जाएगी। मैपिंग पूरी होने के बाद कर्मचारियों को सर्वे कार्य के लिए तैनात किया जाएगा। कितने सवाल पूछे जाएंगे 2 मई से 31 मई 2026 के बीच लोगों से कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे. इन सवालों का सही और स्पष्ट जवाब देना अनिवार्य होगा. सबसे पहले घर से जुड़े सवाल होंगे, जैसे मकान नंबर, मकान की स्थिति, दीवार और छत की सामग्री, घर का उपयोग और फर्श की स्थिति आदि. इसके बाद परिवार से जुड़े प्रश्न पूछे जाएंगे. इसमें परिवार के सदस्यों की संख्या, घर में रहने वाले लोगों की जानकारी, परिवार के मुखिया का नाम, लिंग और जाति (अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य) जैसी जानकारी ली जाएगी. साथ ही यह भी पूछा जाएगा कि घर अपना है या किराए का, कितने कमरे हैं और कितने विवाहित परिवार उसमें रहते हैं. घर की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े सवाल भी शामिल हैं. जैसे पीने के पानी का सोर्स, शौचालय है या नहीं, बिजली की सुविधा, खाना पकाने का ईंधन और गंदे पानी के निकालने की व्यवस्था. इसके अलावा घरेलू समानों की जानकारी भी ली जाएगी. जैसे घर में रेडियो, टीवी, इंटरनेट, लैपटॉप या कंप्यूटर, मोबाइल फोन, साइकिल, मोटरसाइकिल, कार है या नहीं. मोबाइल नंबर भी दर्ज किया जाएगा, लेकिन यह केवल जनगणना से जुड़ी सूचना के लिए होगा. ये 33 प्रमुख सवाल पूछे जाएंगे? जनगणना के दौरान नागरिकों से घर की स्थिति, निर्माण सामग्री (फर्श, दीवार, छत), परिवार के सदस्यों की संख्या, मुखिया का नाम व लिंग, सामाजिक वर्ग (SC/ST/अन्य), स्वामित्व की स्थिति, कमरों की संख्या, विवाहित जोड़ों की संख्या, पेयजल स्रोत, बिजली की उपलब्धता, शौचालय की स्थिति व प्रकार, रसोई और ईंधन का प्रकार, एलपीजी/पीएनजी कनेक्शन, अपशिष्ट जल निकास, स्नान सुविधा, इंटरनेट और डिजिटल उपकरणों की उपलब्धता, वाहन, मुख्य खाद्यान्न और मोबाइल नंबर सहित अन्य जानकारियां ली जाएंगी। जनगणना-2027 पर सीएम का बयान? भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में ऐतिहासिक जनगणना होने जा रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि मध्यप्रदेश इस प्रक्रिया में देश के लिए आदर्श मॉडल बनेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनगणना देश की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण डाटा प्रक्रिया है। इसी के आधार पर सरकारी योजनाएं, संसाधनों का वितरण और विकास की रणनीतियां तय की जाती हैं। एसआइआर में इन्हें हटाया, जनगणना में शामिल होंगे -1.01 लाख के फार्म संग्रहित नहीं किए जा सके -2.86 लाख स्थायी तौर पर शिफ्ट हो गए -14171 दोहरे नाम थे -33791 मृत हो गए नोट नोट: मृत पाए मतदाताओं को छोड़े तो परिजनों के कहने पर बाकी का नाम जनगणना में शामिल रहेगा। धूप तीखी हुई तो बड़ा तालाब स्थित बोट क्लब पर सन्नाटा पसर गया। आग से फैक्ट्री खाक होने के बाद संचालक के बेटा और बेटी विलाप करते हुए।

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