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मेडिकल छात्रा की मौत को लेकर परिजनों ने किया थाने पर प्रदर्शन

भोपाल एमबीबीएस फस्ट ईयर की छात्रा रोशनी कलैश की मौत के मामले में धीमी कार्रवाई से नाराज छात्रा के परिजन और ग्रामीण आज अलीराजपुर से भोपाल पहुंचे और कोहेफिजा थाने के सामने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में अलीराजपुर के अलावा भोपाल में पढ़ने वाले समाज के कई अन्य छात्र-छात्राएं एवं नाते-रिश्तेदार भी शामिल हुए। थाने के अधिकारियों ने उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह बड़े अधिकारी को बुलाने पर अड़े रहे। मामले की गंभीरता को देखते हुए एडिशनल डीसीपी शालिनी दीक्षित मौके पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों से बात की उनके समझाने के बाद परिजन और ग्रामीणों ने प्रदर्शन समाप्त कर दिया।प्रदर्शन करने वालों का कहना था कि छात्रा खुदकुशी नहीं कर सकती है, इसलिए हर एंगल पर जांच की जानी चाहिए। अधिकारियों ने परिजनों को ठोस जांच का आश्वासन दिया है। इसके साथ ही छात्रा के परिजनों और गांव से आए लोगों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार बीती 10 फरवरी को गांधी मेडिकल कॉलेज की मेडिकल छात्रा रोशनी का शव हॉस्टल में संदिग्ध हालत में मिला था। इस मामले में कहा जा रहा था कि छात्रा ने टॉयलेट क्लीनर पी लिया था। रोशनी के शव के पास ही एसिड की बॉटल भी मिली थी। जब वह सुबह कॉलेज के लिए अपने कमरे से बाहर नहीं निकली, तो साथ में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स उसे बुलाने के लिए पहुंचे थे, तब मामले का खुलाास हुआ था। परिजनों ने हॉस्टल पर लगाए गंभीर आरोप। छात्रा के परिजनों का कहना है कि वह हॉस्टल में नीचे रहती थी, जबकि उसका शव ऊपरी मंजिल वाले बाथरूम में मिला था। परिजनों ने जब सीसीटीवी कैमरे चैक किए तो छात्रा ऊपर-नीचे आते-जाते नहीं दिखाई दी। इसके अलावा परिजनों का यह भी आरोप है कि छात्रा की मौत के बाद न तो पुलिस को सूचना दी गई और न ही परिजनों को बताया गया। बल्कि उसे उठाकर सीधे अस्पताल पहुंचा दिया गया।हॉस्टल  द्वारा दिखाए गए फुटेज से परिजन संतुष्ट नहीं हैं, वह छात्रा की मौत को लेकर साजिश बता रहे हैं।परिजनों का कहना है कि पुलिस उनके बयान दर्ज कर रही है, लेकिन जब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती, वह वापस गांव नहीं लौटेंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बागेश्वर धाम में सामूहिक कन्या विवाह सम्मेलन में नव दम्पतियों को दिया आशीष

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि बेटे-बेटियों का विवाह करने के लिए सामूहिक विवाह सबसे उत्तम माध्यम है। समाज में ख़र्चीले विवाहों का प्रचलन चिंतनीय है। मितव्ययिता जरूरी है। हमारा समाज परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। बदलते वक्त के साथ हमें अपनी सोच भी बदलने की जरूरत है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उन्होंने स्वयं अपने पुत्र का विवाह उज्जैन में एक सामूहिक विवाह सम्मेलन में किया हैं। शादियों में अनावश्यक खर्च से हमें बचना ही चाहिए। सामूहिक विवाहों से हुई बचत परिवार के लिए अन्य सुविधा जुटाने के लिए उपयोगी हो सकती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि विवाह और मृत्यु भोज जैसे कार्यक्रमों में फिजूलखर्ची और दिखावे को बंद करने की आवश्यकता है। बागेश्वर धाम में हो रहे सामूहिक विवाह एक यज्ञ के समान हैं। अच्छाइयां ही हमेशा याद रहती हैं। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने भारतीय संस्कृति की भावना को मजबूत करने के लिए छतरपुर को कैंसर अस्पताल की सौगात दी है। हमारे देवस्थान चमत्कारिक होते हैं। मंदिर के आसपास अस्पताल भी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को बागेश्वर धाम सरकार में आयोजित सामूहिक कन्या विवाह सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज जितने भी बेटे-बेटियों का विवाह हुआ है, इन्हें किसी भी रोजगार या काम-धंधे की आवश्यकता है, तो सरकार सभी को हर जरूरी सहायता उपलब्ध करायेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे जीवनकाल के 16 संस्कारों में विवाह सबसे बड़ा संस्कार है। यह धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की राह दिखाता है। उन्होंने सामूहिक विवाह सम्मेलन में शामिल हुए 300 नव दंपतियों को शुभकामनाएं दी। भारतीय सनातन संस्कृति को आघात पहुंचाने के लिए दुनियाभर के आक्रांताओं ने भारत भूमि पर आक्रमण किए। गुजरात के देवधाम सोमनाथ मंदिर पर भी आक्रमण किया, लेकिन पिछले 75 साल से सोमनाथ मंदिर की भव्यता दिनों-दिन बढ़ती ही जा रही है। भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या में भी रामलला भव्य मंदिर में विराजे हैं। उन्होंने कहा कि बागेश्वर धाम ने सनातन संस्कृति को नई दिशा दी है। राज्य सरकार बेटियों के विवाह के लिए मुख्यमंत्री सामूहिक कन्या विवाह योजना के जरिए 51 हजार रुपए की राशि प्रदान कर रही है। सनातन संस्कृति में हर साल तीन ऐसी तिथियां हैं, जब बगैर मुहूर्त के विवाह किए जा सकते हैं। देवउठनी एकादशी, बसंत पंचमी और अक्षय तृतीया। इन तीनों तिथियों पर पर कन्याओं के सामूहिक विवाह आयोजित किए जाएं। सामूहिक विवाह से शादियों में होने वाले बेहिसाब खर्चों में कमी आ रही है। समाज में हो रहे सकारात्मक बदलावों को सभी को अपनाना चाहिए। बागेश्वर धाम सरकार के पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव कृष्ण के वंशज हैं। वे गौशाला, गौ-मंदिर और गौमाता के लिए न्यास बनाने का कार्य करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में उज्जैन में बाबा महाकाल का भव्य महाकाल लोक निर्मित हुआ है। स्थानीय विधायक  अरविंद पटेरिया ने कहा कि बागेश्वर धाम में आयोजित यह 7वां सामूहिक कन्या विवाह सम्मेलन है। पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बागेश्वर धाम सहित संपूर्ण बुंदेलखंड के विकास का संकल्प लिया है। वे क्षेत्र के गरीब परिवारों की बेटियों के पिता बनकर शिक्षा, चिकित्सा एवं विवाह में हर संभव सहायता कर रहे हैं। सामूहिक कन्या विवाह सम्मेलन में पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  लखन पटेल, वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री  दिलीप अहिरवार, खजुराहो सांसद  विष्णुदत्त शर्मा, विधायक  भगवानदास सबनानी, विधायक मती ललिता यादव, पूर्व विधायक  प्रद्युम्न सिंह, मती अर्चना सिंह सहित जनप्रतिनिधि, साधु-संत और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव 14 फरवरी को बुरहानपुर को देंगे 696.37 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 14 फरवरी को बुरहानपुर जिले को 696 करोड़ 37 लाख रुपये की लागत के विकास कार्यों की सौगात देंगे। नेहरू स्टेडियम, बुरहानपुर में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव विभिन्न शासकीय योजनाओं में हितग्राहियों को हितलाभ वितरण भी करेंगे। कार्यक्रम स्थल पर कृषि, उद्यानिकी एवं अन्य विभागों द्वारा विकास प्रदर्शनी लगाई जाएगी, जिसमें शासन की योजनाओं और उपलब्धियों को प्रदर्शित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव 334 करोड़ 22 लाख रुपये की लागत से पूर्ण हुए 32 विकास कार्यों का लोकार्पण और 362 करोड़ 15 लाख रुपये की लागत के 48 नवीन कार्यों का भूमिपूजन करेंगे। इन विकास कार्यों में अधोसंरचना, जनसुविधा, कृषि एवं अन्य विभागों से संबंधित परियोजनाएँ शामिल हैं, जो जिले के समग्र विकास को नई गति प्रदान करेंगी। कार्यक्रम के पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव रोड-शो में भी शामिल होंगे। यह रोड-शो शिकारपुरा थाना क्षेत्र के जीजामाता चौराहा से प्रारंभ होकर नेहरू स्टेडियम तक जाएगा। इस दौरान जिलेवासियों द्वारा मुख्यमंत्री का स्वागत एवं अभिनंदन किया जाएगा।  

भीलवाड़ा में शादी समारोह में 4 की मौत, शराब समझकर पी लिया एसिड

भीलवाड़ा. राजस्थान में भीलवाड़ा जिले के गंगापुर कस्बे में एक हृदय विदारक घटना सामने आई है। जहां शराब के धोखे में ‘केमिकल फ्यूल’ (एसिड) पीने से तीन महिलाओं सहित चार लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। बता दें कि राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संवेदनशीलता दिखाई है और मुख्यमंत्री सहायता कोष से प्रत्येक मृतक के परिवार को 1-1 लाख की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। कैसे हुई घटना? जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना गंगापुर थाना क्षेत्र के आलोली गांव से जुड़ी है। मृतकों ने 9 और 10 जनवरी को एक शादी समारोह में बर्तन साफ करने और अन्य कार्यों का ठेका लिया था। काम खत्म करने के बाद, ये लोग वहां से बर्तन धोने या खाना गर्म करने के काम आने वाला तरल पदार्थ (केमिकल फ्यूल) अपने साथ ले गए थे। गुरुवार देर रात इन लोगों ने उस तरल पदार्थ को गलती से शराब समझ लिया और उसका सेवन कर लिया। सेवन के कुछ ही देर बाद सबकी तबीयत बिगड़ने लगी। अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ा हालत बिगड़ने पर चारों को तत्काल गंगापुर अस्पताल ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने तीन महिलाओं को मृत घोषित कर दिया। वहीं, एक पुरुष की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन उपचार के दौरान उसने भी दम तोड़ दिया। मृतकों की पहचान रतन (पुत्र मसरिया कंजर, निवासी माधोपुर) सुशीला देवी जमनी देवी (पत्नी शंकर कंजर) बदामी देवी कंजर प्रशासनिक मुस्तैदी और जांच के आदेश घटना की सूचना मिलते ही जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (SP) धर्मेंद्र सिंह यादव मौके पर पहुंचे। इस हादसे से पुलिस प्रशासन और आबकारी विभाग में हड़कंप मच गया है। मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच के लिए एक तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया गया है, जिसमें शामिल हैं पुलिस अधीक्षक (SP), मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) और जिला आबकारी अधिकारी। पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह यादव ने बताया कि शव का पोस्टमॉर्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया गया है। पुलिस हर एंगल से मामले की जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि वह फ्यूल असल में क्या था और उसे किस दुकान से खरीदा गया था। संबंधित दुकान की भी जांच जारी है। पीड़ित परिवारों में कोहराम शादी की खुशियों के बीच हुए इस हादसे ने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया है। मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। फिलहाल, पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और कानूनी कार्रवाई जारी है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि दोषियों या लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।

मिस्ट्री गहराई: FSL रिपोर्ट आई सामने, बदल गया साध्वी प्रेम बाईसा केस का एंगल

जयपुर पश्चिमी राजस्थान की लोकप्रिय कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में गुरुवार को बड़ा अपडेट सामने आया। निधन के 16 दिन बाद उनकी एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) रिपोर्ट पुलिस को सौंप दी गई है। देर शाम करीब 7 बजे यह रिपोर्ट जोधपुर पुलिस कमिश्नर को सौंपी गई पश्चिमी राजस्थान की लोकप्रिय कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में बड़ा अपडेट सामने आया। निधन के 16 दिन बाद उनकी एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) रिपोर्ट पुलिस को सौंप दी गई है। देर शाम करीब 7 बजे यह रिपोर्ट जोधपुर पुलिस कमिश्नर को सौंपी गई, जिसके बाद इसे आगे की प्रक्रिया के लिए मेडिकल बोर्ड को भेज दिया गया। अब सभी की निगाहें मेडिकल बोर्ड की अंतिम राय पर टिकी हैं, जिससे मौत के वास्तविक कारणों पर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। जहर की पुष्टि नहीं, अंतिम राय बाकी पुलिस सूत्रों के अनुसार एफएसएल रिपोर्ट में जहर की पुष्टि नहीं हुई है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि साध्वी प्रेम बाईसा की मौत जहर या किसी अन्य अप्राकृतिक कारण से हुई हो, इसका कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि अंतिम निष्कर्ष मेडिकल बोर्ड की राय के बाद ही सामने आएगा। मेडिकल बोर्ड रिपोर्ट का अध्ययन कर अपनी चिकित्सकीय राय देगा, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। डीसीपी (पश्चिम) विनीत कुमार बंसल के माध्यम से रिपोर्ट मेडिकल बोर्ड को भेजी गई है। संभावना जताई जा रही है कि अगले 24 घंटों में मेडिकल ओपिनियन मिल सकता है। इसके बाद ही मौत के कारणों पर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होगी। 28 जनवरी को बिगड़ी थी तबीयत घटना 28 जनवरी की है। उस दिन पाल रोड स्थित आरती नगर के आश्रम में साध्वी प्रेम बाईसा की अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। बताया गया कि उन्हें दो इंजेक्शन लगाए गए थे। इसके कुछ समय बाद ही उनकी मृत्यु हो गई। घटना के बाद क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं और मामले ने तूल पकड़ लिया था। 29 जनवरी को देर शाम पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद पार्थिव शरीर परिजनों को सौंप दिया गया। 30 जनवरी को बाड़मेर जिले के परेऊ गांव में उन्हें समाधि दी गई। अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में अनुयायी और स्थानीय लोग मौजूद रहे। 2 फरवरी को भेजे गए थे विसरा सैंपल घटना के बाद विसरा सैंपल जांच के लिए सुरक्षित रखे गए थे। 31 जनवरी और 1 फरवरी को अवकाश होने के कारण सैंपल तत्काल एफएसएल नहीं भेजे जा सके। अवकाश समाप्त होने के बाद 2 फरवरी को सैंपल जांच के लिए प्रेषित किए गए। अब रिपोर्ट आने के बाद जांच में नया मोड़ आया है। एफएसएल रिपोर्ट को जांच प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है, क्योंकि प्रारंभिक स्तर पर जहर की आशंका को लेकर कई अटकलें लगाई जा रही थीं। रिपोर्ट में जहर की पुष्टि नहीं होने से उन आशंकाओं को फिलहाल विराम मिला है, लेकिन मेडिकल बोर्ड की अंतिम राय से पहले कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगा। पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ रही जांच पुलिस प्रशासन का कहना है कि पूरी जांच प्रक्रिया पारदर्शिता और तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार किसी भी तरह की अफवाह से बचते हुए केवल वैज्ञानिक रिपोर्ट और मेडिकल विशेषज्ञों की राय के आधार पर ही अंतिम निर्णय सार्वजनिक किया जाएगा। इस बीच, साध्वी प्रेम बाईसा के अनुयायियों और स्थानीय लोगों में मामले को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। सभी को मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट का इंतजार है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि मौत स्वाभाविक कारणों से हुई या इसके पीछे कोई अन्य वजह रही। फिलहाल एफएसएल रिपोर्ट ने जांच की दिशा बदल दी है। अब अंतिम तस्वीर मेडिकल बोर्ड की राय के बाद ही साफ हो पाएगी। पुलिस का कहना है कि जैसे ही आधिकारिक निष्कर्ष सामने आएगा, उसे सार्वजनिक कर दिया जाएगा।

उद्यानिकी को बढ़ावा देने पर जोर, मंत्री कुशवाह ने अधिकारियों को दिए अहम निर्देश

भोपाल. उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण, सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण मंत्री  नारायण सिंह कुशवाह ने शुक्रवार को सतना जिले में विभागीय योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि जिले में उद्यानिकी फसलों का रकबा बढ़ाने किसानों को अधिकारी नहीं, बल्कि उनके मित्र बनकर प्रोत्साहित करें। उन्होंने कहा कि जिले में उत्पादित प्रमुख उद्यानिकी फसलों के किसानों को खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों से जोड़कर उनकी आय में वृद्धि करायी जा सकती है। मंत्री  कुशवाह ने कहा कि कृषि वर्ष 2026 में उद्यानिकी विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका है। राज्य सरकार का लक्ष्य अधिक से अधिक किसानों को उद्यानिकी की योजनाओं से जोड़कर उद्यानिकी के रकबे का विस्तार करना है। उद्यानिकी अमला किसानों को फूड प्रोसेसिंग, मसालों की खेती और औषधीय खेती की ओर प्रोत्साहित करे। उन्होंने निर्देश दिये कि कृषि आदानों की गुणवत्ता अच्छी होनी चाहिए। मंत्री  कुशवाह ने कहा कि सतना जिले में प्याज और टमाटर के बहुतायत में उत्पादन को देखते हुए टमाटर, प्याज के शैम्पू, पेस्ट, पावडर एवं अन्य प्रसंस्करण यूनिट लगाने जिला स्तर पर दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित करें। सतना और मैहर जिले में लगभग 2 लाख हितग्राहियों को मिल रही है सामाजिक सुरक्षा पेंशन सामाजिक न्याय मंत्री  कुशवाह ने कहा कि सभी पात्र हितग्राहियों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन उपलब्ध कराई जाये। वर्तमान में सतना जिले में एक लाख 23 हजार और मैहर जिले में 69 हजार से अधिक हितग्राहियों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन वितरित की जा रही है। उन्होंने कहा कि जरूरतमंदों को समय-सीमा में और उनकी आवश्यकता के अनुसार सुविधाएँ मुहैया कराना राज्य सरकार का लक्ष्य है। मंत्री  कुशवाह ने कहा कि दिव्यांगजनों के यूडीआईडी कार्ड अभियान चलाकर बनाये जायें तथा कृत्रिम अंग और सहायक उपकरणों का वितरण शिविर लगाकर किया जाये। बैठक में सीईओ जिला पंचायत  शैलेन्द्र सिंह, अपर कलेक्टर  विकास सिंह सहित उद्यानिकी एवं सामाजिक न्याय विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे। स्व. दयानंद कुशवाह की विचारधारा को आगे बढ़ाने की जरूरत : मंत्री  कुशवाह सामाजिक न्याय एवं नि:शक्तजन कल्याण मंत्री  कुशवाह ने सतना प्रवास के दौरान पिछड़ा वर्ग आयोग के पूर्व सदस्य तथा समाज सेवी स्व. दयानंद कुशवाह की प्रथम पुण्य तिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में श्रद्धा-सुमन अर्पित किये। उन्होंने कहा कि स्व. दयानंद कुशवाह ने शोषित, दलित और पीड़ित वर्ग के लिये संघर्ष किया। उनके द्वारा किये गये कार्यों को सदैव याद रखा जायेगा। श्रद्धांजलि सभा में नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री मती प्रतिमा बागरी, सांसद  गणेश सिंह, विधायक  सिद्धार्थ कुशवाह,  सुरेन्द्र सिंह गहरवार, डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह सहित अन्य जन-प्रतिनिधि भी उपस्थित थे। उन्होंने भी स्व. दयानंद कुशवाह के प्रति श्रद्धा-सुमन अर्पित किये।  

सेवा, समर्पण और संकल्प के साथ करें कार्य : राज्यपाल पटेल

भोपाल. राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने शुक्रवार को लोकभवन के जवाहर खण्ड में रेडक्रॉस के मध्यप्रदेश शाखा की नवगठित प्रबंधन समिति के साथ चर्चा की। उन्होंने नवागत सदस्यों को सेवा, समर्पण और संकल्प के साथ कार्य के लिए शुभकामनाएं दी। बैठक में राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, विधि अधिकारी  उमेश वास्तव, विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी  अरविन्द पुरोहित और रेडक्रॉस प्रबंधन समिति के सदस्य मौजूद थे। राज्यपाल  पटेल को रेडक्रॉस चेयरमैन डॉ. श्याम सिंह कुमरे से रेडक्रॉस अस्पताल के प्रबंधन, ओ.पी.डी. संचालन, माहवार मरीजों की संख्या, जाँच, विभिन्न मदों से प्राप्त आय और व्यय के संबंध में अवगत कराया। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि मरीजों के इलाज, जरूरी जाँच और व्यवस्थाओं का सुचारू संचालन सुनिश्चित किया जाये। मरीजों की देखभाल से जुड़ी सभी व्यवस्थाएँ हमेशा पुख्ता रखें। बैठक में रेडक्रॉस के जनरल सेक्रेटरी  रामेन्द्र सिंह ने समिति की गतिविधियों का विवरण दिया।  

कृषि रथ के माध्यम से किसानों को बताया प्राकृतिक और जैविक खेती का महत्व

भोपाल. कृषक कल्याण वर्ष 2026 राज्य शासन द्वारा घोषित कृषक कल्याण वर्ष 2026 के अंतर्गत किसानों को खेती की नई पद्धतियों की जानकारी दी जा रही है। इसी क्रम में हरदा जिले की ग्राम पंचायतों में कृषि रथ का संचालन किया गया। कृषि रथ के साथ कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक, कृषि विभाग एवं संबद्ध विभागों के अधिकारी-कर्मचारियों द्वारा कृषकों से सीधा संपर्क कर ई-विकास प्रणाली से उर्वरक क्रय करने के लिये जागरूक किया गया। साथ ही नरवाई प्रबंधन, ग्रीष्मकालीन मूंग फसल के स्थान पर उडद, मूंगफली, तिल आदि फसलों को प्रोत्साहन के साथ प्राकृतिक और जैविक कृषि करने के लिए प्रेरित किया गया। मृदा स्वास्थ कार्ड के आधार पर उर्वरकों की संतुलित मात्रा का उपयोग करने और भूमि पर बोई गई फसल अनुसार सूक्ष्म पोषक तत्वों के उपयोग करने सहित समसामयिक सलाह भी प्रदान की गई। किसानों को प्राकृतिक और जैविक खेती करने के लिए प्रेरित करते हुए बताया गया कि रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल से अनेक जानलेवा बीमारियां बढ़ रही हैं। प्राकृतिक और जैविक खेती से बीमारियां होने का खतरा नहीं रहता है। प्राकृतिक और जैविक खेती एक ऐसी खेती है जिसमें रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग नहीं किया जाता है, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों और जैविक पदार्थों का उपयोग करके फसलें उगाई जाती हैं। प्राकृतिक खेती से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है, जल संरक्षण होता है, जैव विविधता बढ़ने के साथ किसानों की आय बढ़ती है और फसलों की गुणवत्ता भी अच्छी होती है। किसानों को मिल रही सोलर पम्प की सौगात प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना के अंतर्गत हरदा जिले के किसानों को सिंचाई सुविधा सुलभ कराने की दिशा में प्रभावी कार्य किया जा रहा है। मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम द्वारा योजना के तहत हरदा जिले में 361 किसानों का ऑफ ग्रिड सोलर पम्प प्रदाय करने के लिए चयन किया गया है। इस योजना से किसानों को दिन के समय निर्बाध सिंचाई, कम लागत में खेती तथा पर्यावरण संरक्षण में सहभागिता का लाभ मिल रहा है।  

चीन-भारत रिश्तों की कहानी: नेहरू का फैसला और तिब्बत पर CDS चौहान की बड़ी बात

बीजिंग चीफ और डिफेंस स्टॉप जनरल अनिल चौहान ने भारत और चीन के बीच हुए पंचशील समझौते को लेकर अपनी राय रखी है। पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा 1954 में किए गए इस समझौते के तहत भारत ने आधिकारिक रूप से तिब्बत को चीन के हिस्से के रूप में स्वीकार कर लिया था। सीडीएस ने कहा कि इस समझौते के बाद भारत को लगा कि उत्तरी सीमा के विवाद का निपटारा हो गया है, लेकिन चीन ने इसे केवल एक व्यापारिक समझौता माना। देहरादून में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीडीएस अनिल चौहान ने उस समय की परिस्थितियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय भी चीन का रुख यही था कि यह समझौता केवल व्यापारिक रास्तों के लिए है, इसका सीमा से कोई लेना-देना नहीं है। इसके बाद से ही एलएसी आज तक संवेदनशील बनी हुई है। गौरतलब है कि भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और तत्तकालीन चीनी प्रीमीयर झोउ एनलाई के बीच में पंचशील समझौता हुआ था। इसके पांच सिद्धांत थे, जो शांति पूर्ण सहअस्तित्व पर आधारित थे। सीडीएस ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, “ब्रिटिश चले गए, उन्हें एक दिन जाना ही था। वह अपने पीछे छोड़ गए यह सीमाएं, अब भारत को तय करना था कि हमारी सीमा कहां है? नेहरू शायद जानते थे कि पूर्व में हमारे पास मैकमोहन जैसी व्यवस्था है, इसके अलावा लद्दाख के कुछ क्षेत्र पर भी हमारा दावा है, लेकिन यहां इन पहाड़ों और दर्रों के बीच में स्तिथि स्पष्ट नहीं थी, इसलिए शायद उन्होंने पंचशील सिद्धांत का रास्ता चुना। तिब्बत हथियाने के बाद क्षेत्र में शांति चाहता था चीन 1950 के दशक का चीन आज के जितना मजबूत नहीं था। लगातार युद्धों के वजह से उसकी हालत भी कमजोर थी। हालांकि इसके बाद भी उसने तिब्बत को हथिया लिया, लेकिन इसके आगे आने की उसकी हिम्मत नहीं थी। ऐसे में वह भी शांति चाहता था। सीडीएस चौहान ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए कहा, “चीनियों के लिए भी यह समझौता महत्वपूर्ण था, क्योंकि उन्होंने हाल ही में तिब्बत को ‘मुक्त’ किया था। वे ल्हासा और शिनजियांग तक पहुंच चुके थे। यह क्षेत्र उनकी पहुंच से काफी दूर थे। ऐसे में यहाँ स्थिरता बनाए रखना मुश्किल था, ऐसे में वह भी यहां पर शांति चाहते थे।” सीडीएस चौहान ने बताया कि स्वतंत्र भारत भी चीन के रूप में एक मजबूत दोस्त को देख रहा था, और उसके साथ मजबूत संबंध चाहता था। ऐसे में यह क्षेत्र दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण बन गया।

मध्‍यप्रदेश पुलिस की त्वरित कार्रवाई

भोपाल . मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेशभर में सतत रूप से की जा रही जनसुरक्षा एवं बाल संरक्षण से जुड़ी कार्यवाहियों के क्रम में नरसिंहपुर एवं शिवपुरी जिलों में नाबालिग बच्चों की सकुशल दस्तयाबी की दो प्रमुख कार्यवाहियाँ विशेष रूप से उल्लेखनीय रहीं, जिन्होंने पुलिस की तत्परता, संवेदनशीलता एवं पेशेवर दक्षता को सशक्त रूप से रेखांकित किया है। नरसिंहपुर: चंद घंटों में दो नाबालिग बालिकाओं की सकुशल दस्तयाबी दिनांक 10 फरवरी को थाना गोटेगांव, जिला नरसिंहपुर में 9 वर्षीय एवं 8 वर्षीय बालिका के गुम होने की सूचना प्राप्त होते ही पुलिस ने तत्काल सघन तलाश प्रारंभ की। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश के नेतृत्व में चार विशेष पुलिस टीमों का गठन किया गया। टीमों द्वारा बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों एवं सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से व्यापक खोजबीन की गई। निरंतर प्रयासों के फलस्वरूप दोनों बालिकाएं ग्राम कमती के सेमरावारी खेत स्थित कोहा के पेड़ के पास झाड़ियों में सुरक्षित अवस्था में मिलीं। पूछताछ में ज्ञात हुआ कि कुरकुरे खाने के बाद परिजनों की डांट के भय से वे स्वयं छिप गई थीं। दोनों बालिकाओं को सकुशल परिजनों के सुपुर्द किया गया। शिवपुरी: हॉस्टल से लापता तीन नाबालिग बालकों को गुना से सुरक्षित दस्तयाबकिया दिनांक 12 फरवरी को थाना कोतवाली, जिला शिवपुरी में हॉस्टल से तीन नाबालिग बालकों (उम्र 14, 15 एवं 17 वर्ष) के लापता होने की रिपोर्ट पर तत्काल अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई। पुलिस अधीक्षक श्री अमन सिंह राठौड़ के निर्देश पर विशेष टीम गठित की गई। टीम द्वारा शिवपुरी एवं गुना में बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन एवं आसपास के क्षेत्रों में 80 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की गहन जांच करते हुए सघन तलाश की गई, जिसके परिणामस्वरूप तीनों बालकों को गुना रेलवे स्टेशन से सकुशल दस्तयाबकर परिजनों के सुपुर्द किया गया। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, महिला एवं बाल सुरक्षा तथा जनसहयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में प्रतिदिन अनेक प्रभावी कार्रवाइयाँ की जा रही हैं। इन प्रयासों के माध्यम से पुलिस न केवल सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है, बल्कि समाज में विश्वास, सहयोग और सकारात्मक संवाद की मजबूत नींव भी रख रही है।  

जनगणना कार्य को उच्च प्राथमिकता देने के लिए मध्यप्रदेश की हुई सराहना

जनगणना प्रशासनिक प्रक्रिया के साथ-साथ भविष्य की दिशा तय करने का है अभियान प्रधानमंत्री मोदी ने लिया डिजिटल जनगणना कराने का ऐतिहासिक फैसला कलेक्टर-कमिश्नर्स समय-सीमा में पूर्ण करें जनगणना कार्य जनगणना में मजरों-टोलों का भी किया जाए आंकलन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जनगणना देश की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण डाटा प्रक्रिया है। जनगणना के आधार पर सरकार की योजनाएं बनती हैं, संसाधनों का वितरण तय होता है और समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने की रणनीति तैयार होती है। आज भारत विश्व का सर्वाधिक आबादी वाला राष्ट्र है। यह जनगणना केवल राष्ट्रीय नहीं बल्कि वैश्विक महत्व की भी है। जनगणना का कार्य केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं है बल्कि यह भारत के भविष्य की दिशा तय करने वाला सबसे व्यापक और निर्णायक अभियान है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव जनगणना-2027 के प्रथम चरण के लिए आयोजित राज्य स्तरीय प्रशिक्षण सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में दीप प्रज्ज्वलित कर सम्मेलन का शुभारंभ किया। राज्य स्तरीय प्रशिक्षण सम्मेलन में जनगणना-2027 की प्रक्रिया पर केंद्रित लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। राज्य स्तरीय प्रशिक्षण सत्र में मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, रजिस्ट्रॉर जनरल तथा जनगणना आयुक्त श्री मृत्युंजय कुमार नारायण, अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) श्री नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव गृह श्री शिवशेखर शुक्ला उपस्थित थे। सम्मेलन में प्रदेश के सभी संभागायुक्त, कलेक्टर्स, नगर निगम आयुक्त तथा अन्य प्रशासनिक अधिकारी सम्मिलित हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने डिजिटल जनगणना कराने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। देश में आखिरी बार वर्ष 1931 में सामाजिक स्तर की जनगणना की गई थी। उन्होंने जनगणना की प्रक्रिया में गांवों, मजरों-टोलों के साथ-साथ बेचिराग गांवों की स्थिति के आंकलन की व्यवस्था करने की भी आवश्यकता बताई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में सड़क, अस्पताल, स्कूल एवं अन्य कार्यों की योजनाएं जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही बनाई जाती हैं। जनगणना केवल संख्या गिनने की प्रक्रिया नहीं है, यह राज्य की संवेदनशीलता, प्रशासन की विश्वसनीयता, प्रतिबद्धता और शासन की पारदर्शिता की परीक्षा है। प्रदेश के अलग-अलग अंचलों की चुनौतियां भिन्न हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष रणनीति अपनाते हुए समयबद्ध रूप से जनगणना की जिम्मेदारियों का निर्वहन किया जाए। इस पूरी प्रक्रिया की सफलता का केन्द्र मैदानी प्रशासनिक अधिकारी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कलेक्टर्स और कमिश्नर्स से जनगणना कार्य को रणनीतिक नेतृत्व प्रदान करते हुए जनगणना के सभी उद्देश्यों की समय सीमा में पूर्ति करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्मेलन में उपस्थित प्रदेश के सभी कमिश्नर-कलेक्टरों से कहा कि मध्यप्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी से प्रारंभ होकर 6 मार्च तक चलेगा। उन्होंने आगामी महाशिवरात्रि और होली जैसे त्यौहारों के दृष्टिगत शांति समितियों के साथ बैठक कर अन्य आवश्यक प्रबंध सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कानून व्यवस्था दुरुस्त रखने में जन भावनाओं का विशेष ध्यान रखा जाए। नागरिकों के स्वास्थ्य की दृष्टि से मिलावटी मिठाई, रंगों में मिलावट एवं अन्य खाद्य पदार्थों की जांच के लिए विशेष प्रबंध किए जाएं। होली के त्यौहार में सामाजिक समरसता सुनिश्चित हो। प्रदेश में जल संरचनाओं के निर्माण में मुआवजे के प्रकरणों का निराकरण संवेदनशीलता के साथ किया जाए। उन्होंने कहा कि हमें विकास के साथ-साथ जनभावनाओं का ध्यान भी रखना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भावांतर योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए सभी अधिकारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि विकसित भारत जी-रामजी योजना के क्रियान्वयन के लिए बेहतर प्रबंध किए जाएं। राज्य सरकार ने वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में घोषित किया है। किसानों से जुड़ी सभी योजनाओं और कार्यों के लिए उचित प्रबंध किए जाएं। ग्रीष्मकालीन फसलों में राज्य सरकार उड़द और मूंगफली के उत्पादन को प्रोत्साहित करने की योजना बना रही है। मक्का की फसलों से भी किसान लाभान्वित हो रहे हैं। नरवाई जलाने की घटनाओं को शून्य करने में विभिन्न जिले स्वस्थ प्रतिस्पर्धा रखें। प्रदेश में दलहन-तिलहन उत्पादन को बढ़ाने के लिए कार्य किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खनिज, पंजीयन, आबकारी के अंतर्गत राजस्व संग्रहण लक्ष्यों को प्राप्त करना सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने कहा कि चुनाव और जनगणना को प्रशासनिक व्यवस्था का सबसे कठिन कार्य माना जाता है। देश में हर 10 साल में जनगणना होती है। प्रशासनिक अधिकारियों के लिए जनगणना, अपनी प्रबंधन दक्षता को सिद्ध करने और अपने अनुभवों का समृद्ध करने का श्रेष्ठ अवसर है। इस बार तकनीक के बेहतर उपयोग से जनगणना के आंकड़े डिजिटल व्यवस्था के परिणामस्वरूप जल्दी आएंगे। मध्यप्रदेश विविधता से समृद्ध राज्य है। यहां करीब 1 लाख 27 हजार मजरे-टोले हैं, अगर मकानों की गणना के पत्रक में एक कॉलम मजरे टोले का रखा जाए, तो इससे राज्य सरकार को भविष्य की योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी। जीआईएस सिस्टम से महत्वपूर्ण जानकारियां मिलेंगी। अगर आंकड़े सही तरीके से फीड किए जाएंगे तो जनगणना का परिणाम बेहतर मिलेगा। यह नागरिकों की भी जिम्मेदारी है कि वे अपनी सही जानकारियां फील्ड अधिकारियों को उपलब्ध कराएं। 

साढ़ेसाती और ढैय्या से राहत का अवसर: कल मनाया जाएगा साल का पहला शनि प्रदोष व्रत

सनातन धर्म में प्रदोष का व्रत बहुत विशेष महत्व माना जाता है. ये व्रत हर माह में दो बार कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन पड़ता है. प्रदोष का व्रत देवों के देव महादेव को समर्पित किया गया है. प्रदोष व्रत के दिन प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है. इस दिन व्रत और पूजन से महादेव की विशेष कृपा मिलती है. प्रदोष व्रत जिस दिन होता है, उस दिन जो वार पड़ता है उसी के नाम से प्रदोष व्रत जाना जाता है. जब शनिवार को प्रदोष व्रत होता है, तो इसे शनि प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है. शनि प्रदोष को शनि त्रयोदशी भी कहा जाता है. कल यानी 14 फरवरी को साल का पहला शनि प्रदोष व्रत रखा जाएगा. इस दिन महादेव के साथ-साथ शनि देव की भी पूजा की जाती है. साथ ही शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से राहत के लिए कुछ विशेष उपाय किए जाते हैं. शनि प्रदोष व्रत पर साढ़ेसाती और ढैय्या के उपाय     वैदिक ज्योतिष के अनुसार, काले और गहरे नीले रंग की वस्तुओं और पदार्थों को शनि देव से संबंधित माना गया है. ज्योतिषियों के अनुसार, शनि प्रदोष व्रत के दिन या कहें कि शनि त्रयोदशी पर शनि देव को उड़द की दाल और लोहे की कील चढ़ाएं. इससे साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव में कमी आती है.     इस दिन शनिदेव के बीज मन्त्र ॐ शं शनिश्चराय नमः का जप करें. कम से कम 30 माला का जप करें. इससे शीघ्र ही जीवन के दुखों का नाश होगा.     इस दिन लोहे का पात्र लें और उसमें सरसों तेल भरें. इसके बाद उसमें एक लाल रंग का फूल रखें. इस पात्र को घर के मध्य भाग यानी ब्रह्म स्थान पर रखें. इससे घर में सकारात्मक उर्जा बढ़ती है.     इस दिन पीपल के पेड़ की जड़ में जल चढ़ाएं. शाम को पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाएं.     शनिवार को हनुमान जी की विशेष पूजा-आराधना करें. ऐसा करने से हर प्रकार का शनि दोष दूर होता है.  

भारत की झोली में गोल्ड, ऐश्वर्य की शानदार शूटिंग से एशियन चैंपियनशिप में चमक

नई दिल्ली ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर ने फाइनल में अपना अनुभव दिखाते हुए आखिरी शॉट में 10.7 का स्कोर किया, जिसके साथ टीम के साथी नीरज कुमार को पीछे छोड़ते हुए 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन में गोल्ड मेडल जीता। भारत ने गुरुवार को डॉ. कर्णी सिंह शूटिंग रेंज में एशियन राइफल/पिस्टल चैंपियनशिप में अखिल शेरॉन के ब्रॉन्ज मेडल जीतने के साथ क्लीन स्वीप किया। पहला व्यक्तिगत अंतरराष्ट्रीय पदक जीतने वाले नीरज कुमार 35वें और आखिरी शॉट में ऐश्वर्य से 0.2 प्वाइंट की बढ़त के साथ उतरे। उन्होंने पहला शॉट 10.3 का लगाया, जिससे ऐश्वर्य को गोल्ड जीतने के लिए 10.6 का टारगेट मिला। वर्ल्ड चैंपियनशिप के सिल्वर मेडलिस्ट ने हिम्मत नहीं हारी और शानदार 10.7 का स्कोर करके नीरज को पीछे छोड़कर गोल्ड मेडल जीता। उन्होंने कुल 362.0 का स्कोर किया, जबकि नीरज ने 361.8 का स्कोर किया। अखिल शेरॉन ने 343.5 के फाइनल स्कोर के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता। जूनियर मेंस के फाइनल में एड्रियन कर्माकर ने 353.2 का स्कोर बनाकर आसान जीत के साथ चैंपियनशिप का अपना दूसरा गोल्ड मेडल हासिल किया, जो कजाकिस्तान के सिल्वर मेडलिस्ट दिमित्री किम से 4.7 ज्यादा था। भारत के मानवेंद्र सिंह शेखावत ने 338.6 के फाइनल स्कोर के साथ ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। इससे पहले क्वालिफिकेशन में, नीरज कुमार ने 593-34x के स्कोर के साथ पहले स्थान पर फाइनल के लिए क्वालीफाई किया, उसके बाद ऐश्वर्य (588-40x) और अखिल (588-32x) रहे। 10 मीटर एयर राइफल गोल्ड मेडलिस्ट रुद्रांक्ष पाटिल ने 591-33x का स्कोर किया, जो क्वालिफिकेशन में दूसरा सबसे बेहतरीन स्कोर था, लेकिन वह सिर्फ रैंकिंग प्वाइंट्स के लिए शूटिंग कर रहे थे। रैंकिंग प्वाइंट्स के लिए शूटिंग कर निखिल तंवर ने 587-29x स्कोर किया। ऐश्वर्य, नीरज और अखिल की तिकड़ी ने भी टीम गोल्ड जीता, जबकि जापान और कजाकिस्तान ने क्रमशः सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल पर निशाने साधे। जूनियर फाइनल में, एड्रियन ने आठ मेन फील्ड में गोल्ड जीता। फाइनल में छठे शॉट से लीड लेने के बाद, एड्रियन ने अपनी बड़ी लीड बनाए रखी और चैंपियनशिप में दूसरा गोल्ड मेडल हासिल किया। मानवेंद्र सिंह शेखावत ने 338.6 की शूटिंग करके ब्रॉन्ज जीता। फाइनल में तीसरे भारतीय, हेमंत बर्मन, शूट-ऑफ में हारकर पांचवें स्थान पर रहे।  

सेवा तीर्थ से PM मोदी के 4 बड़े फैसले: महिलाओं, युवाओं को मिला खास तोहफा

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नए पीएमओ परिसर सेवातीर्थ में महिलाओं, युवाओं और संवेदनशील नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण निर्णयों की फाइलों पर हस्ताक्षर किए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नए पीएमओ परिसर सेवातीर्थ में महिलाओं, युवाओं और संवेदनशील नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण निर्णयों की फाइलों पर हस्ताक्षर किए। प्रधानमंत्री मोदी ने नए पीएमओ परिसर सेवातीर्थ में पीएम राहत योजना, लखपति दीदी की संख्या बढ़ाकर छह करोड़ करने के लक्ष्य से संबंधित फाइलों पर हस्ताक्षर किए। प्रधानमंत्री मोदी ने कृषि अवसंरचना निधि दोगुनी बढ़ाकर दो लाख करोड़ रुपए करने से संबंधित फाइलों पर हस्ताक्षर किए। एक अधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने नए पीएमओ परिसर सेवातीर्थ में सेवा की भावना को दर्शाने वाले निर्णयों से संबंधित महत्वपूर्ण फाइलों पर हस्ताक्षर किए। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को दिल्ली में सेवा तीर्थ परिसर का उद्घाटन किया। इसमें प्रधानमंत्री कार्यालय, कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय स्थित हैं। सेवा तीर्थ परिसर की दीवार पर ‘नागरिक देवो भव’ का आदर्श वाक्य अंकित है। केंद्र सरकार ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि नई इमारतें भारत की प्रशासनिक शासन संरचना को दर्शाती हैं।  

पुलिस मुख्‍यालयस्‍तर से डायल-112 जवानों को किया जा रहा है पुरस्‍कृत

भोपाल. डायल-112 केवल आपात सेवा नहीं, बल्कि संकट की घड़ी में जीवन रक्षक संबल है। एक पिकअप वाहन के दुर्घटनाग्रस्‍त होने से घायल हुए 12 लोगों को समय पर अस्‍पताल पहुंचाकर डायल-112 ने त्वरितप्रतिक्रिया, मानवीय संवेदनशीलता और जन-सुरक्षा का उत्कृष्ट उदाहरण पेश किया है। दिनांक 13 फरवरी 2026 को प्रातः 08 बजे विलइत घाट स्थित नायरा पेट्रोल पंप के समीप एक पिकअप वाहन के अनियंत्रित होकर पलट जाने से महिला व बच्चों सहित कुल 12 व्यक्ति घायल हो गए। यह सभी लोग पतरहटा से बारहो कार्यक्रम में शामिल होकर अपने गांव अखड़ार लौट रहे थे।इस दुर्घटना की सूचना राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम, डायल-112 भोपाल को प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही तत्परता दिखाते हुए थाना चंदिया क्षेत्र में तैनात डायल-112 एफआरव्ही वाहन को तत्काल मौके के लिए रवाना किया गया। कुछ ही समय में डायल-112 स्टाफ आरक्षक सुनील सिकरवार एवं पायलट विजय कुमार यादव घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लेकर त्वरित राहत कार्य प्रारंभ किया। मौके पर पहुँचकर डायल-112 जवानों ने गंभीर रूप से घायल व्यक्तियों को प्राथमिक सहायता प्रदान की और बिना समय गंवाए एफआरव्ही वाहन तथा चिकित्सा वाहन की सहायता से सभी घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चंदिया पहुंचाया। उनकी तत्परता, सूझबूझ और मानवीय संवेदनशीलता के चलते सभी घायलों को समय पर उपचार उपलब्ध हो सका, जिससे संभावित गंभीर परिणामों को टाला जा सका। डायल 112 हीरोजने विषम परिस्थितियों में भी जिस समर्पण और तेजी से अपनी जिम्मेदारी निभाई, वह न केवल प्रशंसनीय है बल्कि समाज में पुलिस के प्रति विश्वास को और सुदृढ़ करता है।यही सच्चे अर्थों में “हीरोज” हैं — जो बिना किसी अपेक्षा के, केवल मानवता के नाते अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हैं। इस सराहनीय कार्य के लिए डायल-112 जवानों को मुख्‍यालयस्‍तर से पुरस्‍कृत किया जा रहा है।  

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