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स्वास्थ्य, पर्यावरण व विकास की नई पहचान बना उत्तर प्रदेश

लखनऊ  उत्तर प्रदेश अब ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया’ की छवि से निकलकर ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ और ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन मेडिकल कॉलेज’ की दिशा में तेजी से आगे बढ़ चुका है। स्वास्थ्य व पर्यावरण के क्षेत्र में प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है। ये बातें बुधवार को लोकभवन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में अभूतपूर्व विकास और सतत समृद्धि के 9 वर्ष पूर्ण होने पर “नव निर्माण के 9 वर्ष” पुस्तक का विमोचन करते हुए कहीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज गोरखपुर और रायबरेली में एम्स संचालित है और काशी के बीएचयू में वर्ल्ड क्लास कैंसर इंस्टीट्यूट बन चुका है। इससे लाखों लोग लाभान्वित हो रहे हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रदेश सरकार की प्रगति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि लगभग 06 करोड़ गोल्डन कार्ड जारी किए जा चुके हैं और हर पीएचसी पर प्रत्येक रविवार को आरोग्य मेले आयोजित हो रहे हैं। इन्सेफेलाइटिस जैसी बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण सीएम योगी ने कहा कि आज इन्सेफेलाइटिस जैसी बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया गया है और वेक्टर बॉर्न डिजीज के खिलाफ भी ठोस कार्रवाई की गई है। बीते वर्षों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, मेडिकल ढांचे के विकास और योजनाओं की पहुंच ने उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदलने में बड़ी भूमिका निभाई है।  व्यापक पौधरोपण अभियानों से पर्यावरण संतुलन को सुदृढ़ किया गया मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं और देश के अग्रणी राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। ग्रीन कवर बढ़ाने और व्यापक पौधरोपण अभियानों के माध्यम से पर्यावरण संतुलन को सुदृढ़ किया गया है, जिससे उत्तर प्रदेश देश में सर्वाधिक पौधरोपण करने वाले राज्यों में शामिल हुआ है।

असम की राजनीति में बड़ा झटका: प्रद्युत बोरदोलोई BJP में शामिल, CM हिमंता ने भविष्य को लेकर दिए अहम इशारे

दिसपुर असम की राजनीति में चुनाव से पहले बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। मंगलवार को कांग्रेस से इस्तीफा देने वाले सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने एक दिन बाद यानी आज (बुधवार को) राज्य की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया। उन्हें राज्य के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के आमंत्रण पर पार्टी में शामिल कराया गया है। बोरदोलोई के भाजपा में शामिल होने के बाद मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि राज्य इकाई केंद्रीय नेतृत्व से सिफारिश करेगी कि बोरदोलोई को आगामी विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाया जाए। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि आत्मसम्मान रखने वाला कोई भी व्यक्ति वहां नहीं रह सकता। मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि भाजपा आगे भी कांग्रेस के नेताओं को अपने साथ जोड़ने का प्रयास करेगी। उन्होंने दूसरा बड़ा संकेत देते हुए कहा, “स्वाभिमान वाले किसी भी व्यक्ति के लिए कांग्रेस पार्टी में बने रहने का कोई कारण नहीं है। हमारा लक्ष्य और भी कांग्रेस नेताओं को पार्टी में लाना है।”   कांग्रेस की प्रतिक्रिया दूसरी तरफ, कांग्रेस सांसद और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने बुधवार को बोरदोलोई के इस्तीफे को “बहुत दुर्भाग्यपूर्ण” बताया और कहा कि वह एक सीट पर टिकट को लेकर नाराज थे। प्रियंका ने कहा कि इस्तीफे से पहले उनसे बातचीत का मौका नहीं मिला। उन्होंने कहा कि पार्टी चाहती थी कि इस्तीफ़ा देने से पहले उन्हें बोरदोलोई से बात करने का मौका मिलता। प्रियंका गांधी ने संसद परिसर में इस बारे में पूछे जाने पर संवाददाताओं से कहा, ”यह दुर्भाग्यपूर्ण है, मुझे लगता है कि वह एक टिकट आवंटन से नाराज थे, काश हमें इस बारे में बातचीत करने का मौका मिलता। यह दुर्भाग्यपूर्ण है।” इस्तीफे के पीछे अंदरूनी कलह असम में विधानसभा चुनाव से महज 20 दिन पहले कांग्रेस को झटका देते हुए लोकसभा सदस्य प्रद्युत बोरदोलोई ने मंगलवार की रात पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। अपने इस्तीफे में बोरदोलोई ने पार्टी के भीतर आंतरिक समस्याओं और उपेक्षा का जिक्र किया। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि वे इस फैसले से खुश नहीं थे, लेकिन पार्टी के भीतर बार-बार अपमान और समर्थन की कमी के कारण उन्हें यह कदम उठाना पड़ा। इस्तीफे की दी थी धमकी बोरदोलोई ने हाल में असम के प्रभारी महासचिव जितेंद्र सिंह को पत्र लिखकर कहा था कि यदि लाहौरीघाट के मौजूदा विधायक आसिफ मोहम्मद नजर को विधानसभा चुनाव के लिए दोबारा उम्मीदवार बनाया गया, तो वह पार्टी से इस्तीफा दे सकते हैं। सांसद ने पत्र में आरोप लगाया कि नजर के करीबी सहयोगी इमदादुल इस्लाम अप्रैल 2025 में बोरदोलोई और अन्य पार्टी नेताओं पर हुए हमले में शामिल थे और इस मामले में पुलिस ने उनके खिलाफ आरोपपत्र भी दाखिल किया है। चुनाव से पहले बढ़ी हलचल यह सियासी घटनाक्रम ऐसे समय पर हुआ है जब असम में 126 सीटों वाली विधानसभा के लिए चुनावों का ऐलान हो चुका है। राज्य में एक ही चरण में 9 अप्रैल को मतदान होने हैं। मतगणना 4 मई को होगी। इस चुनाव में भाजपा, मुख्यमंत्री हिमंता के नेतृत्व में लगातार तीसरी बार सत्ता में आने की कोशिश कर रही है। भाजपा का कांग्रेस से सीधा मुकाबला है। बता दें कि बोरदोलोई का कांग्रेस छोड़ना हाल का पहला मामला नहीं है। इससे पहले असम कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा भी भाजपा में शामिल हो चुके हैं, जिससे राज्य की राजनीतिक स्थिति और अधिक रोचक हो गई है।  

इन फ्री एप्स से अपने एंड्रायड स्मार्टफोन को बनाएं सुरक्षित

एप्लीकेशन वह सॉफ्टवेयर हैं, जो आपके स्मार्टफोन की स्मार्टनेस को और बढ़ा देता हैं। आपके एंड्रायड फोन में आपकी प्राइवेसी से संबंधित बहुत सा डाटा होता है, जो अगर गलत हाथ में चला जाएं, तो बैठे-बिठाएं लेने के देने पड़ सकते हैं, ऐसे में जरूरी हो जाता है कि आप अपने एंड्रायड की सुरक्षा का पूरा ख्याल रखें। इस काम के लिए गूगल प्ले स्टोर पर बहुत से फ्री एप्स दिए गए हैं, इनकी हेल्प से आप अपनी एंड्रायड डिवाइस को प्रोटेक्ट कर सकते हैं, इनमें से तीन बेस्ट फ्री एंड्रायड प्रोटैक्शन ऐप्स के बारे में हम आज आपको बता रहे हैं.. परफेक्ट एप प्रोटैक्टर:- यह एप जैसा कि नाम से ही जाहिर है एप्लीकेशन्स को बहुत परफेक्ट तरीके से प्रोटेक्ट करता है। यह आपके सेलेक्टेड ऐप्स को एक पासवर्ड या पैटर्न के साथ लॉक करता है, स्क्रीन की ब्राइटनेस को कम करता है और जिन एप्स का आप चयन करते हैं उनके स्क्रीन रोटेशन को कंट्रोल करता है। इसका साइज 3.7एमबी है। एप्लीकेशन प्रोटेक्शन:- इस एप की उपयोगिता यह है कि इसकी मदद से आप अपने स्मार्टफोन पर डाटा और एप्लीकेशन्स को आसानी से एक पासकोड के साथ प्रोटेक्ट कर सकते हैं, ताकि अनआॅथराईजड यूजेस से बचाया जा सकें। इसका साइज 328केबी है। एप लाॅक:- इस हैंडी एप से आप अपने स्मार्टफोन में इंस्टॉल्ड एप्स को एक नंबर या फिर पैटर्न लॉक से प्रोटेक्ट कर सकते हैं। यह एक बहुउपयोगी एप है। इसके साथ आप इंस्टॉल और अनइंस्टॉल फंक्शन्स, इनकमिंग कॉल्स, सेटिंग्स, एप लॉक आइकन को छिपाना और दोबारा अनलॉक किए बिना शार्ट एक्जिट कर सकते हैं। इसका साइज 638 केबी है।  

धरसींवा के सरोना में 100 बिस्तर वाले नए अस्पताल का भूमिपूजन, स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा विस्तार

रायपुर प्रदेशवासियों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत: स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल प्रदेशवासियों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत: स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल आज विकासखंड धरसींवा अंतर्गत सरोना, रायपुर में 100 बिस्तर वाले नवीन अस्पताल भवन के निर्माण हेतु भूमिपूजन कार्यक्रम में शामिल हुए।  इस अस्पताल के स्थापित होने से क्षेत्र के नागरिकों को सुलभ, गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी। अस्पताल के निर्माण से आसपास के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के लोगों को बेहतर इलाज की सुविधा अपने ही क्षेत्र में उपलब्ध हो सकेगी, जिससे उन्हें दूरस्थ स्थानों पर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय जी के नेतृत्व में प्रदेश में स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है। इसी दिशा में लगातार नए स्वास्थ्य संस्थानों की स्थापना और सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, ताकि प्रत्येक नागरिक को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं सहज रूप से मिल सकें। स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल ने इस मौके पर कहा कि राज्य सरकार प्रदेशवासियों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि नए अस्पतालों के निर्माण एवं सुविधाओं के विस्तार से आमजन को अपने ही क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण इलाज मिल सकेगा, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक सुधार होगा। इस अवसर पर विधायक  राजेश मूणत,  सुनील सोनी,  पुरंदर मिश्रा तथा रायपुर महापौर मती मीनल चौबे, सीजीएमएससी के अध्यक्ष  दीपक म्हस्के सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

स्टार चेहरों को किनारा, 75 MLA आउट—ममता की ‘रिस्क वाली’ रणनीति क्या दिलाएगी जीत?

कोलकाता पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने हुंकार भर दी है। मंगलवार को ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस के 291 सीट के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की है। राज्य में लगातार चौथी बार सत्ता में आने की कोशिश कर रही पार्टी ने इस बार चर्चित हस्तियों की जगह संगठन पर पकड़ रखने वाले नेताओं को तरजीह दी है। बता दें कि राज्य में आगामी 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में चुनाव होने हैं और नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। इससे पहले कालीघाट स्थित अपने आवास से उम्मीदवारों की सूची की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री और तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी ने कहा है कि पार्टी दार्जिलिंग पहाड़ियों की तीन सीटें सहयोगी भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा (बीजीपीएम) के लिए छोडेगी, जिसका नेतृत्व अनित थापा कर रहे हैं। टीएमसी की लिस्ट जारी होते ही यह साफ हो गया है कि भवानीपुर में ममता बनर्जी-शुभेंदु अधिकारी की प्रतिद्वंद्विता नया चुनावी रंग लेने जा रही है, जहां मुख्यमंत्री अपनी सीट बचाने उतरेंगी, जबकि भाजपा ने यहां से नेता प्रतिपक्ष को मैदान में उतारा है। यह 2 प्रतिद्वंद्वियों के बीच सीधा आमना-सामना होगा, जो पहली बार 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम में भिड़े थे। तब अधिकारी ने ममता को नजदीकी अंतर से हराया था। 226 सीटों पर जीत का दावा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 226 सीट जीतने का दावा भी किया है। मुख्यमंत्री बनर्जी ने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी के साथ उम्मीदवारों के नामों की घोषणा करते हुए कहा, ”हम 291 सीट पर चुनाव लड़ेंगे और 226 से अधिक सीट जीतेंगे।” किसे दिया मौका, किसका कटा पत्ता? तृणमूल ने 291 उम्मीदवारों में से 135 मौजूदा विधायकों को बरकरार रखा है। वहीं लगभग 75 विधायकों को हटा दिया है और 15 अन्य को अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में स्थानांतरित कर दिया है, जिसे पार्टी सूत्रों ने “लक्षित सत्ता-विरोधी लहर से निपटने की कवायद” के रूप में वर्णित किया है। इस सूची में पेशेवर व्यक्तियों, खिलाड़ियों और विभिन्न क्षेत्र के चेहरों का मिश्रण भी शामिल है। हालांकि पूरा जोर मशहूर हस्तियों के बजाय संगठनात्मक चेहरों पर बना हुआ है, जो पहले के चुनावों से एक महत्वपूर्ण बदलाव है। पार्टी ने फरहाद हकीम, जावेद अहमद खान, अरूप बिस्वास, इंद्रनील सेन और चंद्रिमा भट्टाचार्य सहित कई वरिष्ठ मंत्रियों को उनके मौजूदा निर्वाचन क्षेत्रों से फिर से उतारा है। ओलंपिक में हिस्सा ले चुकीं और एशियाई खेलों की स्वर्ण पदक विजेता स्वप्ना बर्मन को राजगंज से मैदान में उतारा गया है, जबकि पूर्व क्रिकेटर शिव शंकर पाल को तूफानगंज से उम्मीदवार बनाया गया है। अभिनेता-नेता सोहम चक्रवर्ती इस बार तेहट्टा से चुनाव लड़ेंगे और पार्टी प्रवक्ता कुणाल घोष को बेलियाघाटा से मैदान में उतारा गया है, जो उनका पहला विधानसभा चुनाव होगा। नामी चेहरों में, बरासात के विधायक चिरंजीत चक्रवर्ती, बेहला पश्चिम के विधायक पार्थ चटर्जी और बेलियाघाटा के विधायक परेश पाल को टिकट नहीं दिया गया है। पार्टी ने कई नए चेहरे भी पेश किए हैं, जिनमें मानिकतला से श्रेया पांडे और उत्तरपाड़ा से टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी के बेटे सिर्सन बनर्जी शामिल हैं। पार्टी के आंकड़ों के अनुसार उम्मीदवारों में से 52 महिलाएं, 95 अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति और 47 अल्पसंख्यक हैं। किसे दी गई प्राथमिकता? तृणमूल के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पार्टी नेतृत्व ने चर्चित हस्तियों की तुलना में जमीनी स्तर पर जुड़ाव रखने वाले नेताओं को प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा, ”नेतृत्व ने जानबूझकर स्टार चेहरों से परहेज किया। जोर उन उम्मीदवारों पर है जो बूथ का प्रबंधन कर सकें, मतदाताओं को गोलबंद कर सकें और स्थानीय नेटवर्क बनाए रख सकें।” नंदीग्राम में तृणमूल ने पूर्व में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से जुड़े पंचायत नेता पबित्र कर को मैदान में उतारा है, जो हाल में पार्टी में वापस लौटे हैं। इसके अलावा पार्टी ने बीरभूम, उत्तर 24 परगना और दक्षिण बंगाल के ग्रामीण इलाकों जैसे प्रमुख चुनावी क्षेत्रों में मजबूत जिला स्तरीय चेहरे बरकरार रखे हैं।  

हंपी कैंडिडेट्स टूर्नामेंट में खेलने को लेकर अब भी सुनिश्चित नहीं, चिंताओं को दोहराया

नई दिल्ली भारतीय ग्रैंडमास्टर कोनेरू हंपी इस महीने साइप्रस में होने वाले प्रतिष्ठित कैंडिडेट्स टूर्नामेंट में हिस्सा लेने को लेकर अब भी असमंजस की स्थिति में हैं और उन्होंने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच मेजबान देश में सुरक्षा की स्थिति को लेकर अपनी चिंताओं को फिर से दोहराया है। विश्व चैंपियनशिप के खिताबों के लिए चुनौती पेश करने वाले खिलाड़ियों का फैसला करने वाला कैंडिडेट्स टूर्नामेंट 28 मार्च से शुरू होना है। पुरुष वर्ग का खिताब भारत के डी गुकेश जबकि महिला वर्ग का खिताब चीन की जू वेनजुन के पास है। हंपी ने बुधवार को ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘मुझे पता है कि मैं अकेले शायद कुछ भी नहीं बदल सकती। लेकिन चाहे मैं कैंडिडेट्स में खेलूं या नहीं खेलूं, मुझे लगता कि जो मैं महसूस करती हूं उसे जाहिर करना जरूरी है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं उन सभी की शुक्रगुजार हूं जिन्होंने अपना समर्थन दिया है। जो लोग इस स्थिति की संवेदनशीलता को नहीं समझ सकते मैं उनके लिए बात यहीं छोड़ देती हूं।’’ इस सप्ताह की शुरुआत में दो बार की महिला विश्व रैपिड चैंपियन और महिला विश्व खिताब की पूर्व चैलेंजर हंपी ने कहा था कि वह यात्रा करने में हिचकिचा रही हैं और टूर्नामेंट से नाम वापस लेने पर विचार कर रही हैं। इस महीने की शुरुआत में साइप्रस में एक ब्रिटिश हवाई अड्डे पर ड्रोन हमला हुआ था जिससे यह डर पैदा हो गया कि अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों से शुरू हुआ संघर्ष इस द्वीप पर भी सुरक्षा को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। हालांकि शतरंज की वैश्विक संचालन संस्था फिडे के सीईओ एमिल सुतोवस्की ने इन चिंताओं को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि दूर-दूर तक भी ऐसा कुछ भी खतरनाक नहीं है जिसके लिए स्थल बदलने की जरूरत पड़े। खाड़ी देश इस समय संघर्ष की चपेट में हैं और इस क्षेत्र के ऊपर का हवाई क्षेत्र काफी हद तक बंद कर दिया गया है। सुतोवस्की ने कहा, ‘‘हमारी योजनाएं नहीं बदली हैं। हम कैंडिडेट्स टूर्नामेंट की तैयारियों के अंतिम चरण में हैं। बेशक, हम स्थिति पर नजर रख रहे हैं। साइप्रस युद्ध क्षेत्र या संघर्ष क्षेत्र से बहुत दूर नहीं है लेकिन साथ ही यह किसी भी तरह से सीधे तौर पर शामिल नहीं है और युद्ध की स्थिति में नहीं है।’’ साइप्रस भूमध्य सागर का तीसरा सबसे बड़ा द्वीप है और तुर्की के दक्षिण में स्थित है। यह यूरोपीय संघ का सदस्य है। हंपी के अलावा भारत की आर वैशाली ने भी महिला कैंडिडेट्स के लिए क्वालीफाई किया है जबकि आर प्रज्ञानानंदा ओपन वर्ग में एकमात्र भारतीय खिलाड़ी हैं।  

बीएसएफ के कॉन्टेबल दुर्गेश्वर को अंतरराष्ट्रीय वुशु चैंपियनशिप में रजत पदक

नई दिल्ली भारत के दुर्गेश्वर सिंह ने यूनान के एथेंस में आयोजित छठी एक्रोपोलिस अंतरराष्ट्रीय वुशु चैंपियनशिप में रजत पदक जीता। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के कांस्टेबल सिंह ने 90 किग्रा वर्ग में अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धियों के खिलाफ असाधारण कौशल और दृढ़ संकल्प का प्रदर्शन किया। इस प्रतियोगिता का आयोजन 13 से 15 मार्च तक किया गया जिसमें 19 देशों के 1100 से अधिक खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया।  

मुसहर, वनटांगिया, थारू, सहरिया, बुक्सा जनजातियों को बिजली, पानी और आवास सुविधाएं दी जा रहीं: सीएम योगी

लखनऊ  प्रदेश के अंदर गरीब कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से 15 करोड़ लोग फ्री राशन की सुविधा का इस्तेमाल कर रहे हैं। बिना भेदभाव हर पात्र को योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है और 25 करोड़ जनता ही हमारा परिवार है। ये बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में अभूतपूर्व विकास और सतत समृद्धि के 9 वर्ष पूर्ण होने पर “नव निर्माण के 9 वर्ष” पुस्तक के विमोचन के दौरान कहीं। सीएम योगी ने कहा कि ये सभी सुविधाएं उन तबकों तक इसलिए पहुंच पाईं, क्योंकि सरकार ने प्रदेश को जातीय या क्षेत्रीय चश्मे से नहीं देखा। उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ जनता ही हमारा परिवार है और इसी परिवार भाव के साथ सबकी समृद्धि और खुशहाली के लिए सरकार ने कदम बढ़ाए।  मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुष्मान भारत सहित अनेक योजनाओं के जरिए उन तबकों तक सरकार पहुंची है, जिन्हें पहले नजरअंदाज किया जाता था। मुसहर, वनटांगिया, थारू, सहरिया, बुक्सा जैसे जनजातीय और वंचित समुदायों के लिए पहली बार 100 प्रतिशत सैचुरेशन लक्ष्य के साथ योजनाएं लागू की गईं। इसके परिणामस्वरूप उन्हें जमीन के पट्टे, आवास, हर घर नल योजना, बिजली, राशन कार्ड और स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल रहा है।  योजनाओं के माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचा मुख्यमंत्री ने कहा कि चाहे दलित हों, वंचित हों, गरीब हों या पिछड़ी जातियों से जुड़े लोग, सरकार ने सभी तक योजनाओं का लाभ पहुंचाया है। आवास, शौचालय, राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, आजीविका मिशन और मिल्क प्रोड्यूसर जैसी योजनाओं के माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंच रहा है और यही परिवर्तन प्रदेश की नई तस्वीर बना रहा है।

किसी का धर्म नहीं बदल रहे… सारा अली खान के मामले में केदारनाथ मंदिर प्रशासन का बड़ा बयान

देहरादून बॉलीवुड अभिनेत्री सारा अली खान को केदारनाथ मंदिर में प्रवेश करने के लिए शपथ पत्र देना होगा। यह बताना होगा कि उनकी सनातन धर्म के प्रति आस्था है। चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले बदरी-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि यह सभी गैर सनातनियों के लिए अनिवार्य किया जाएगा। हिन्दुस्तान से खास बातचीत में हेमंत द्विवेदी ने कहा कि मंदिर कोई पिकनिक स्पॉट नहीं है। क्या शपथ पत्र किसी तरह का धर्मांतरण है? सवाल के जवाब में हेमंत द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि यह किसी तरह का धर्मांतरण नहीं। मंदिर समिति का दायित्व मंदिरों की पवित्रतता बनाए रखना है। बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि हम शपथ पत्र को लेकर एसओपी पर कार्य कर रहे हैं। जल्द ही इसकी डिटेल सार्वजनिक की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि शपथ पत्र मंदिर से ही मिलेगा। यदि आप सनातनी नहीं, लेकिन सनातन धर्म पर आस्था रखते हैं तो फिर धाम में आप सहज ही दर्शन कर सकते हैं। इसके लिए केवल बीकेटीसी के एक तय प्रारूप पर शपथ पत्र देना होगा। सारा अली खान पर क्या बोले हेमंत द्विवेदी हेमंत द्विवेदी ने कहा कि सारा अली खान की माता हिंदू हैं। हम यह नहीं कह रहे कि उन्हें मंदिर में प्रवेश नहीं मिलेगा। लेकिन उसके लिए उनकी सनातन के प्रति आस्था होनी जरूरी है। मंदिर कोई घूमने की जगह नहीं है। यह हिंदू आस्था का केंद्र है। धर्मांतरण से कितना अलग हेमंत द्विवेदी से सवाल किया गया कि लोगों के मन में इस बात को लेकर भ्रम की स्थिति है कि क्या यह उनका धर्मांतरण है? जवाब में द्विवेदी ने कहा कि हम किसी तरह का धर्मांतरण नहीं कर रहे हैं। क्या हमने लोगों को घरों से उठाकर धर्मांतरण करा रहे हैं? क्या हम मंदिर आने के लिए बाध्य कर रहे हैं… नहीं। इसलिए इसे धर्मांतरण कहना ठीक नहीं है। क्या सिख और अन्य धर्मों के लिए भी यही नियम हेमंत द्विवेदी से सवाल किया गया कि क्या यह शपथ पत्र सभी गैर हिन्दुओं के लिए अनिवार्य है? जिसमें सिख, बौद्ध और जैन समेत अन्य धर्म भी आते हैं। उन्होंने इस सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि इस पर वे टिप्पणी नहीं करना चाहते। यह जरूर बताया कि जल्द ही मंदिर समिति की ओर से इस पर बातें स्पष्ट हो जाएंगी। पूजा के रेट में बढ़ोतरी बदरी केदार धाम में होने वाली पूजाओं के शुल्क में भी 10 प्रतिशत की वृद्धि हो गई है। बोर्ड के इस फैसले के अनुरूप आगे जल्द शुल्क जारी कर दिए जाएंगे। अभी बदरीनाथ धाम में महाभिषेक पूजा 4700 रुपए, अभिषेक पूजा 4500 रुपए, पूरे दिन की पूजा 12 हजार, श्रीमद भागवत शप्थ पाठ 51 हजार रुपए, वेद पाठ 2500 रुपए लिया जाता है।

परंपरा, प्रकृति और प्रगति का संगम, नव संवत्सर 2083 पर CM मोहन यादव का बड़ा संदेश

भोपाल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होने वाला भारतीय नववर्ष सांस्कृतिक चेतना, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और प्रकृति के साथ संतुलित जीवन पद्धति का प्रतीक है। विक्रम संवत् 2083 का शुभारंभ मध्यप्रदेश के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि उज्जयिनी की धरती से ही इस गौरवशाली कालगणना की शुरुआत हुई थी। यह अवसर हमारी समृद्ध परंपरा को याद करने का है। इसके अलावा विकास, कृषि सशक्तिकरण और जल संरक्षण जैसे अहम क्षेत्रों में नए संकल्प लेने का भी है। इस अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश की जनता के नाम संदेश लिखा है…. चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ होने वाला नवसंवत्सर हमारी सांस्कृतिक चेतना, वैज्ञानिक दृष्टि और प्राकृतिक जीवन पद्धति का प्रतीक है। इस वर्ष विक्रम संवत् 2083 का शुभारंभ हुआ है। यह मध्यप्रदेश के लिए गर्व और गौरव का विषय है कि भारतीय कालगणना की गौरवशाली परंपरा उज्जयिनी से प्रारंभ हुई है। सम्राट विक्रमादित्य के राज्याभिषेक से आरंभ हुआ विक्रम संवत् भारतीय संस्कृति की चेतना और राष्ट्र की अस्मिता का प्रतीक है। सम्राट विक्रमादित्य न्यायप्रियता, पराक्रम, धैर्य, ज्ञानशीलता और सुशासन के आदर्श हैं। विदेशी आक्रांताओं को पराजित कर उन्होंने राष्ट्र की रक्षा और भारतीय संस्कृति के गौरव को प्रतिष्ठित किया। उनके शासनकाल में सुशासन की आदर्श परंपराएं स्थापित हुईं। उन्होंने न्याय और नीति के जो आदर्श स्थापित किए, वे आज भी शासन और प्रशासन के लिए प्रेरणास्रोत हैं। विक्रमादित्य के सुशासन की परंपरा का उल्लेख ‘सिंहासन बत्तीसी’ की कथाओं में मिलता है। यह उस आदर्श शासन-व्यवस्था का प्रमाण है जिसमें योग्य मंत्रियों, विद्वानों और नीति-निपुण व्यक्तियों के सहयोग से राज्य संचालित किया जाता था। सम्राट विक्रमादित्य ने जिस तरह ज्ञान, संस्कृति और प्रशासनिक व्यवस्था को विकसित किया, वह भारतीय राज्य परंपरा की श्रेष्ठता का प्रतीक है। सम्राट विक्रमादित्य के व्यक्तित्व और भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न आयामों को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से प्रदेश में ‘विक्रमोत्सव-2026’ का आयोजन किया जा रहा है। 12 फरवरी 2026 से 30 जून 2026 तक चलने वाला यह 139 दिवसीय उत्सव दीर्घ आयोजन का कीर्तिमान स्थापित करेगा। इसमें विभिन्न सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और बौद्धिक कार्यक्रमों के माध्यम से सम्राट विक्रमादित्य के जीवन, उनके आदर्श और उपलब्धियों को समाज तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उज्जयिनी प्राचीन काल से ही भारत की सांस्कृतिक और वैज्ञानिक चेतना का केन्द्र रही है। बाबा महाकाल की पावन नगरी का संबंध कालगणना, खगोल विज्ञान और आध्यात्मिक साधना से रहा है। हमारे पूर्वजों ने हजारों वर्ष पहले ग्रहों की गति और नक्षत्रों की स्थिति का गहन अध्ययन कर जो कालगणना पद्धति विकसित की, वह आज भी विश्व के लिए आश्चर्य का विषय है। उज्जैन की वेधशाला और वैदिक कालगणना हमारी ज्ञान परंपरा का प्रमाण है। हमारे लिए यह प्रसन्नता का विषय है कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में विश्व की पहली विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का पुनर्स्थापन किया गया। यह घड़ी भारतीय समय गणना की परंपरा को आधुनिक युग में पुनर्जीवित करने का महत्वपूर्ण प्रयास है। भारतीय नववर्ष प्रकृति के नवोदय का पर्व है। इस समय प्रकृति नवजीवन से समृद्ध होती है,पृथ्वी पर नवचेतना और नवसृजन का संचार होता है। देश भर में मनाए जाने वाले नवसंवत्सर के विभिन्न नाम हैं। कहीं इसे गुड़ी पड़वा, कहीं उगादि, कहीं चैती चांद और कहीं नवरोज के रूप में मनाया जाता है।इसी दिन से चैत्र नवरात्र का भी शुभारंभ होता है। नवरात्र के नौ दिन साधना, आत्मशुद्धि और शक्ति उपासना का अवसर है। भारतीय जीवन पद्धति में पर्व और परंपराएं व्यक्ति और समाज के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त करती हैं। मध्यप्रदेश में नवसंवत्सर का आयोजन विकास और जनकल्याण के नए संकल्पों के साथ किया जा रहा है। नवसृजन के प्राकृतिक उत्सव अवसर पर मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि मध्यप्रदेश में यह वर्ष कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। कृषि हमारे प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसान अर्थव्यवस्था की आधारशिला है, इसलिए किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को लाभकारी बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये हैं। इस वर्ष हमने पहली कृषि कैबिनेट बैठक बड़वानी जिले के भीलट बाबा देवस्थल नागलवाड़ी में की है। इसमें कृषि विकास और कल्याण के लिए 27 हजार 500 करोड़ रुपये की योजनाओं को स्वीकृत किया गया। कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों को प्रोत्साहित करने, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन के लिए प्रदेश में योजनाएं लागू की गई हैं। हमारा लक्ष्य है कि किसान उत्पादन बढ़ाने के साथ कृषि-आधारित उद्योगों के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित करें और आत्मनिर्भर बनें। यशस्वी प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में हम विरासत के साथ विकास मार्ग पर आगे बढ़ रहे हैं। इसी अनुरूप प्रदेश में ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक स्थलों के संरक्षण और विकास पर कार्य किया जा रहा है। ओंकारेश्वर, उज्जैन, मैहर और अन्य प्रमुख तीर्थस्थल आध्यात्मिक पर्यटन स्वरूप में विकसित हो रहे हैं। मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि वर्ष 2028 में उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ पर्व के लिए होने वाली समस्त तैयारियां प्रगति पर हैं। इसके साथ ही श्रीराम वनगमन पथ और श्रीकृष्ण पाथेय जैसी योजनाओं के माध्यम से भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा को नई पीढ़ी से जोड़ा जा रहा है। भारतीय नववर्ष का आयोजन हमें प्रकृति संरक्षण की प्रेरणा देता है।हमारी परंपरा में गुड़ी पड़वा के दिन सूर्योदय से पहले स्वच्छ जल में स्नान करने और सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा है। अर्घ्य देने की परंपरा में जल स्रोतों की पवित्रता और संरक्षण का संदेश है। जल संरक्षण के इसी भाव के साथ मध्यप्रदेश में आज से “जल गंगा संवर्धन अभियान” प्रारंभ किया जा रहा है। नववर्ष प्रतिपदा पर शिप्रा तट उज्जैन से प्रारंभ होने वालेइस तीसरे राज्य स्तरीय अभियान में जल संरक्षण की पारंपरिक पद्धतियों और नवीन तकनीकी, नवाचारों के साथ प्रदेश के जल स्रोतों को सुरक्षित किया जायेगा। मेरा प्रदेशवासियों से आग्रह है कि जल गंगा संवर्धन अभियान को जन आंदोलन बनाएं। प्रकृति के नवसृजन, अवसर पर आज हम विकसित मध्यप्रदेश निर्माण का संकल्प लें। नवचेतना, नवजागृति के साथ आइये हम सब मिलकर प्रदेश के नवकल्याण की ओर बढ़ें और विकसित भारत निर्माण में सहभागी बनें। मुझे विश्वास है कि नव संवत्सर मध्यप्रदेश की प्रगति, समृद्धि और नई उपलब्धियों का … Read more

नौ वर्षों में यूपी की बदली तस्वीर, कानून व्यवस्था और विकास में आया बड़ा सुधार- ब्रजेश पाठक

लखनऊ उत्तर प्रदेश में विकास और समृद्धि के 9 वर्ष पूर्ण होने पर लोक भवन में “नव निर्माण के 9 वर्ष” पुस्तक के विमोचन अवसर पर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीते नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश में सुशासन और विकास की नई मिसाल कायम हुई है। प्रदेश की जनता अब विकास और सुशासन की राजनीति को समझ चुकी है और भ्रम फैलाने वाली राजनीति को स्वीकार नहीं करेगी। वर्ष 2016-17 का दौर प्रदेश के लोगों को आज भी याद है, जब उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति बेहद खराब थी और प्रदेश की पहचान गुंडागर्दी और माफियाओं के प्रभाव से जुड़ गई थी। उस समय निवेशक भी प्रदेश में आने से कतराते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों में समाज के हर वर्ग के साथ अन्याय हुआ और विकास की रफ्तार थम गई थी। उन्होंने जनता से अपील की कि समाजवादी पार्टी के पीडीए की धज्जियां उड़ा दें। 2047 तक भी समाजवादी पार्टी की सरकार नहीं बनने वाली है। 2047 तक विकसित देश बनेगा और विकसित प्रदेश भी बनेगा।  उप मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि वर्ष 2017 में भाजपा और उसके सहयोगियों ने 325 सीटें जीतकर जो इतिहास रचा था, उसे 2027 के विधानसभा चुनाव में और बड़े बहुमत के साथ दोहराया जाएगा। उन्होंने कहा कि आज जो लोग दलितों और पिछड़ों की बात कर रहे हैं, वे समय के साथ अपना रुख बदलते रहे हैं। उन्होंने योगी सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश के तीन करोड़ से अधिक किसानों को करीब 99 हजार करोड़ रुपये सीधे उनके खातों में दिए गए हैं। मुख्यमंत्री राहत कोष से भी बड़ी संख्या में जरूरतमंदों को आर्थिक सहायता मिली है। प्रदेश में भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाकर भ्रष्टाचार और भाई भतीजावाद पर प्रभावी रोक लगाई गई है। समारोह को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था जैसे क्षेत्रों में व्यापक सुधार हुआ है। वर्ष 2017 से पहले प्रदेश की पहचान खराब कानून व्यवस्था और जर्जर बुनियादी ढांचे से होती थी, जबकि आज उत्तर प्रदेश बेहतर सड़कों, एक्सप्रेसवे, निवेश और मजबूत कानून व्यवस्था के कारण देश में नई पहचान बना रहा है। पहले प्रदेश में सड़कों की हालत खराब थी और बिजली आपूर्ति भी बेहद सीमित थी। कई इलाकों में बिजली की स्थिति ऐसी थी कि लोगों को दिन या रात में बिजली मिलती थी। शिक्षा व्यवस्था भी प्रभावित थी और कई जगह नकल माफिया सक्रिय थे। इंटर कॉलेजों में 5 से 10 हजार रुपये लेकर डिग्री दिलाने तक की शिकायतें सामने आती थीं। भाजपा सरकार बनने के बाद नकल विहीन परीक्षा व्यवस्था लागू की गई और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के प्रयास किए गए। यूनिवर्सिटी लगभग दोगुनी हो गई हैं। बेसिक शिक्षा के विद्यालयों में भी व्यापक सुधार हुआ है और स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों का तेजी से विस्तार किया गया है। वर्ष 2017 से पहले जहां सीमित संख्या में मेडिकल कॉलेज थे, वहीं अब प्रदेश के अधिकांश जिलों में मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं। एमबीबीएस और विशेषज्ञ चिकित्सकों की सीटों में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 81 मेडिकल कॉलेज बन गए हैं। एमबीबीएस की सीटों में ढाई गुना वृद्धि हुई है। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि यह ध्यान रखें कि जिन लोगों ने 2017 से पहले उत्तर प्रदेश को गुंडा स्टेट बनाने का काम किया था, उनको कभी सत्ता में नहीं आने दें। हम सब मिलकर उत्तर प्रदेश को नंबर एक पर लाने का काम करेंगे।

समय के साथ चेकअप जरूरी है सेहत के लिए

अच्छा स्वास्थ्य सबकी चाहत होती है। बहुत से लोग स्वयं को स्वस्थ रखने के लिए योगा, सैर, जिम, व्यायाम, तैराकी आदि नियमित रूप से करते रहते हैं। बहुत कम लोग ऐसे हैं जो अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक न हों। अच्छी सेहत बहुत बड़ी देन है। भगवान की इस देन को आगे बरकरार रखने के लिए हमें समय-समय पर डाक्टरों से सलाह लेते रहना चाहिए और उनके परामर्शानुसार अपनी जांच आदि करवाते रहना चाहिए ताकि बीमारी को अधिक पनपने से रोका जा सके। यदि जांच के दौरान शुरुआती लक्षण दिखायी दें और उनका समय रहते इलाज किया जाए ताकि आसानी से उस पर काबू पाया जा सके। इसलिए हम सबके लिए जरूरी है कि हम समय-समय पर अपनी जांच करवाते रहें। यह जांच नवजात शिशु के संसार में आते ही प्रारम्भ हो जाती है। बड़े नर्सिंग होम में तो बाल विशेषज्ञ होते हैं। जब भी डिलीवरी होती है तो वे बच्चे के शुरुआती लक्षणों से जांच लेते हैं कि सब ठीक ठाक है। डिलीवरी के समय बाल विशेषज्ञ उपलब्ध न हो तो बच्चे के पैदा होने के 2-3 दिन के भीतर बच्चे को डाक्टर के पास ले जायें। इस प्रकार महीना खत्म होने से पहले, फिर दूसरे, चैथे, छठे, नौवें और बारहवें महीने में बच्चे को बार विशेषज्ञ को दिखाने ले जाते रहें ताकि बच्चे की वृध्दि, टीकाकरण पर पूरा ध्यान रहे। कुछ असामान्य पर पूरा ध्यान रहे। कुछ असामान्य लक्षण होने पर समय रहते ध्यान दिया जा सके। दूसरे, तीसरे, चैथे साल में भी बच्चे को डाक्टर के पास ले जाते रहें। जब बच्चा थोड़ा और बड़ा होना शुरू होता है तब भी बच्चे को कम से कम साल में एक बार फिजिकल एग्जामिनेशन के लिए डाक्टर के पास ले जाएं ताकि बच्चों की लम्बाई व वजन आदि उम्र के हिसाब से ठीक है या नहीं और कुछ जरूरी टीकाकरण यदि आवश्यक हों तो लगवा लें। बच्चों की दांत, आंख, कान, प्लस व हार्ट रेट, ब्लडप्रेशर, मधुमेह और श्वास प्रक्रिया की जांच करवाएं, बच्चों का शारीरिक विकास उम्र के मुताबिक कम हो तो डाक्टर से सलाह लें। उम्र बढ़ाने के साथ-साथ शरीर में कई बदलाव आते रहते हैं जैसे किशोरावस्था में हार्मोनल चेंजेंस आदि। इस अवस्था में बच्चे में कई बदलाव आते हैं। इन मानसिक और शारीरिक बदलावों को डाक्टर बच्चे और माता-पिता को बताकर गलतफहमी को दूर करने में मदद करते हैं। जब शरीर का पूरा विकास हो जाता है तब भी कई समस्याएं आती हैं। छोटी-छोटी मुश्किलें तो शरीर आसानी से सह लेता है पर बिल्कुल नजरअंदाज करने पर छोटी मुश्किलें बड़ी हो जाती हैं। 40 वर्ष पश्चात् तो साल में एक बार कुछ चेकअप करवाते रहना चाहिए जैसे ब्लडप्रेशर, शुगर, कोलेस्ट्राल, यूरिन अनालिसस, वजन, हीमोग्लोबिन, लीवर प्रोफाइल, लिपिड प्रोफाइल, चेस्ट एक्सरे, ईसीजी आदि करवाते रहना चाहिए। यदि कोई समस्या की शुरुआत हो तो समय पर इलाज परहेज कर उस पर काबू पाना आसान होता है। महिलाओं को 40 वर्ष बाद पेप स्मीअर, बोन डेंसिटी टेस्ट करवाने चाहिए। अल्ट्रासाउंड वगैरह आवश्यकता होने पर करवा लेना चाहिए। 60 वर्ष पश्चात् अपने स्वास्थ्य का पूरी तरह ध्यान रखना चाहिए। कोई भी तकलीफ महसूस होने पर डाक्टर से सलाह लें और लगकर इलाज करवायें। बड़ी आयु में व्यायाम भी डाक्टर की सलाह अनुसार करें। इस आयु में अपना लाइफस्टाइल एक्टिव रखें। आलस्य को दूर रखें। अपने काम स्वयं करें। योगाभ्यास और मेडिटेशन से तनावों पर काबू पायें।  

मुख्यमंत्री ने कहा, प्रदेश सरकार के प्रयासों से आज ड्रॉप आउट रेट जीरो पर पहुंच गया

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में गरीब का बच्चा भी अब वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर से युक्त विद्यालय में पढ़ सकता है। शिक्षा क्षेत्र में सुधारों, ऑपरेशन कायाकल्प और संस्कृत के प्रोत्साहन से यूपी में समृद्धि का नया अध्याय शुरू हुआ है। इसके साथ ही संस्कृत पढ़ने वाले बच्चों के लिए लॉजिंग-फूडिंग की नई स्कीम से प्रदेश और समृद्ध होगा। ये बातें बुधवार को लोकभवन में ‘नव निर्माण के 9 वर्ष’ पुस्तक का विमोचन करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अटल आवासीय विद्यालय इस नई व्यवस्था के मॉडल हैं और इसी तर्ज पर हर जनपद में सीएम कंपोजिट विद्यालयों का विस्तार चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है। पहले चरण में दो-दो विद्यालय गत वर्ष दिए गए थे और इस वर्ष भी दो-दो विद्यालय दिए जाने की तैयारी है। सीएम योगी ने शिक्षा को सुशासन का प्रमुख आधार बताते हुए कहा कि आज जो बदलाव दिखाई दे रहा है, वह योजनाबद्ध तरीके से ठोस क्रियान्वयन का परिणाम है।  सीएम योगी ने कहा कि एक समय बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में बेटियां नंगे पैर जाती थीं, फटे कपड़ों में पढ़ाई करती थीं और सरकारी यूनिफॉर्म भी मजाक का विषय बन जाती थी। अब स्थिति बदल चुकी है और प्रदेश सरकार 1 करोड़ 60 लाख से अधिक बच्चों को दो-दो यूनिफॉर्म, बैग, पुस्तकें, जूते- मोजे और स्वेटर उपलब्ध करा रही है।  1,36,000 से अधिक विद्यालयों को संसाधनों से युक्त किया गया सीएम योगी ने कहा कि ऑपरेशन कायाकल्प के तहत जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के संयुक्त प्रयास से 1,36,000 से अधिक विद्यालयों को संसाधनों से युक्त किया गया है। सर्वे और आईटी टूल के इस्तेमाल से यह स्पष्ट हुआ कि बेटियां केवल दूरी की वजह से स्कूल नहीं छोड़तीं, बल्कि शौचालय और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी भी बड़ी वजह होती है। इसी आधार पर विद्यालयों में बालक-बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय और पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित की गई। प्रदेश सरकार के प्रयासों से आज ड्रॉप आउट रेट जीरो पर पहुंच गया है।  पुराने शिक्षण संस्थानों के पुनरुद्धार की जिम्मेदारी निभाई मुख्यमंत्री ने नकलविहीन शिक्षा और प्रोजेक्ट अलंकार के जरिए माध्यमिक शिक्षा में भव्य विद्यालय भवनों के निर्माण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हम भी किसी इंटर कॉलेज में पढ़ते थे। आज हमारा भी तो दायित्व है कि उसका पुनरुद्धार करें। सरकार ने पुराने शिक्षण संस्थानों के पुनरुद्धार की जिम्मेदारी निभाई है और शिक्षा व्यवस्था को सम्मान के साथ पुनर्गठित किया है।  संस्कृत पढ़ने वाले बच्चों के रहने-खाने की समुचित व्यवस्था होगी मुख्यमंत्री ने कहा कि पहली बार संस्कृत पढ़ने वाले बच्चों के लिए छात्रवृत्ति लागू की गई है। चाहे विद्यार्थी छठी कक्षा में हो, पूर्व मध्यमा में हो या आचार्य कक्षा में, हर बच्चे को छात्रवृत्ति उपलब्ध कराई जा रही है। संस्कृत पढ़ने वाले बच्चों की लॉजिंग-फूडिंग के लिए नई स्कीम लाई जा रही है, ताकि उनके रहने और खाने की समुचित व्यवस्था हो सके। संस्कृत के माध्यम से प्रदेश समृद्धि के मार्ग पर आगे बढ़ सकता है, इसलिए सरकार इस दिशा में नई पहल कर रही है।

निलंबन के साए में बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड, आईसीसी से बातचीत कर हल निकालेंगे अमीनुल हक

ढाका बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड पर आईसीसी से सस्पेंड होने का खतरा मंडरा रहा है। वजह है बीसीबी के चुनाव में कथित अनियमितता की हो रही जांच। बांग्लादेश की नई सरकार ने चुनाव में कथित हेरफेर, धांधली और अनियमितता की जांच के आदेश दिए हैं। आईसीसी को अगर ये बीसीबी के कामकाज में सरकार के दखल के रूप में लगा तो वह बोर्ड को सस्पेंड कर सकती है क्योंकि उसके हिसाब से क्रिकेट बोर्ड सरकार के दखल से मुक्त होने चाहिए। इस बीच अब नई सरकार ने इस मसले पर आईसीसी से चर्चा करने का फैसला किया है ताकि बीसीबी के निलंबन की गुंजाइश खत्म न रहे। बांग्लादेश के खेल मंत्री अमीनुल हक बीसीबी के भविष्य पर अंतिम फ़ैसला लेने से पहले आईसीसी से सलाह करेंगे। साथ ही उन्होंने एक दूसरी समिति बनाने का भी ऐलान किया है, जो यह जांच करेगी कि इस साल भारत और श्रीलंका में हुए पुरुषों के टी20 विश्व कप में बांग्लादेश क्यों हिस्सा नहीं ले पाया। बीसीबी पर क्यों लटकी आईसीसी से सस्पेंड होने की तलवार? 11 मार्च को खेल मंत्रालय ने पिछले साल हुए बीसीबी चुनावों में कथित अनियमितताओं, हेरफेर और सत्ता के दुरुपयोग के आरोपों की जांच के लिए एक जांच समिति बनाई थी। बीसीबी ने सोमवार को इसका जवाब देते हुए कहा कि इस समिति का गठन, बांग्लादेश सरकार की ओर से बोर्ड के मामलों में दखल के बराबर है। बंगलादेश के पूर्व फुटबॉल कप्तान हक ने मंगलवार को कहा कि पांच सदस्यीय समिति जब अपनी रिपोर्ट 15 कार्य दिवसों के भीतर सौंप देगी, तब वह इस मामले पर आईसीसी से चर्चा करेंगे। ‘बीसीबी चुनाव में था मोहम्मद यूनुस सरकार का सीधा हस्तक्षेप’ उन्होंने कहा, ‘हम सब जानते हैं कि पिछले साल बीसीबी चुनावों में हमारी पिछली सरकार का सीधा हस्तक्षेप था। मैंने कई बार इस बारे में बात की है। ढाका के क्लबों और जिलों से मिले आरोपों के बाद हमने जांच समिति बनाई है। मैं उनकी रिपोर्ट पढ़ूंगा, लेकिन अगला क़दम आईसीसी से बात करने के बाद ही उठाऊंगा।’ तमीम इकबाल जैसे दिग्गजों ने बीसीबी चुनाव में हेरफेर के लगाए थे आरोप बीसीबी चुनाव के समय दिग्गज पूर्व क्रिकेटर तमीम इकबाल और ढाका के कई क्लब अधिकारियों ने हेरफेर के आरोप लगाए थे। चुनाव से पहले ही बीसीबी अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम पर भी हस्तक्षेप के आरोप लगे थे। चुनाव से कुछ सप्ताह पहले भेजे गए एक हस्ताक्षरित पत्र में अमीनुल ने खेल मंत्रालय से कुछ ज़िलों के काउंसिलरों को बदलने का अनुरोध किया था। तमीम ने यह भी आरोप लगाया था कि बीसीबी ने नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख दो बार बढ़ाई थी। तमीम इकबाल ने भी चुनाव लड़ने के लिए नामांकन भरा था लेकिन 1 अक्टूबर को उन्होंने अपना नाम वापस ले लिया था। अमीनुल इस्लाम ने 5 अक्टूबर को इन आरोपों से इनकार किया, जो कि मतदान से एक दिन पहले था। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद ICC से करेंगे चर्चा: खेल मंत्री बाग्लादेश के खेल मंत्री अमीनुल हक ने कहा कि जांचकर्ता यह भी देखेंगे कि चुनाव से पहले जिला प्रशासकों ने अपने नामांकन कैसे बदले। उन्होंने कहा, ‘जांच समिति बीसीबी के चुनाव आयुक्तों, मौजूदा बोर्ड अध्यक्ष, बीसीबी निदेशकों और सीईओ से बात करेगी। यह उन जिला प्रशासकों से भी संपर्क करेगी जिन्होंने बीसीबी काउंसिलरों का नामांकन किया था। आरोप है कि कई जिला प्रशासकों ने एक काउंसिलर का नाम भेजने के बाद, एक पत्र मिलने पर नया नाम भेज दिया था। मेरा मानना है कि इन मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।’ टी20 विश्व कप के मामले में बीसीबी ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए भारत जाने से इनकार कर दिया था, तब आईसीसी ने बांग्लादेश की जगह स्कॉटलैंड को विश्व कप के लिए शामिल कर लिया था। हक ने कहा, ‘हम यह पता लगाने की कोशिश करेंगे कि हम विश्व कप में क्यों नहीं गए। हमें समझना होगा कि हमारी खेल कूटनीति कहां कमजोर पड़ी। इस विषय पर ईद के बाद एक जांच समिति बनाई जाएगी। हमें अपनी खेल कूटनीति को मजबूत करना होगा ताकि भविष्य में यह ग़लती दोबारा न हो।’

एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप पर टिकीं नीलम सिरोही की उम्मीदें

नई दिल्ली जाग्रेब ओपन 2026 में रजत पदक जीतने वाली महिला पहलवान नीलम सिरोही ने कहा कि वह किर्गिस्तान के बिश्केके में होने वाली एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप (सीनियर) के लिए जोरदार तैयारी कर रही है। ‘फिट इंडिया संडेज ऑन साइकिल’ कार्यक्रम के दौरान रविवार को यूनीवार्ता से बातचीत में नीलम ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि वह बेहद प्रतिस्पर्धी एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी (ट्रायल्स में चुने जाने के बाद), क्योंकि उन्हें लगता है कि यह स्पर्धा एशियन गेम्स की तैयारी के लिए एक अहम कदम होगा। नीलम, जिन्हें ‘टारगेट एशियन गेम्स ग्रुप’ (टीएजीजी) के जरिए सरकारी मदद मिल रही है, अभी नई दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में चल रहे भारतीय शिविर का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा, “अभी मैं भारतीय शिविर का हिस्सा हूं। कुछ ही दिनों में एशियन चैंपियनशिप के ट्रायल्स होंगे, मुझे उम्मीद है कि अगले महीने मैं चैंपियनशिप में हिस्सा ले पाऊंगी। एशियन गेम्स में हमारे मुख्य प्रतिद्वंद्वियों का आकलन करने के लिए यह एक अहम टूर्नामेंट होगा।” नीलम ने जापान की दो बार की ओलंपिक पदक विजेता यूई सुसाकी सराहना करते हुए कहा, “वह मेरी पसंदीदा खिलाड़ी हैं, उनकी तकनीकी क्षमताएं बहुत अच्छी हैं, और वह बहुत तेज गति से तकनीकों का इस्तेमाल करती हैं, जिससे उनके दांव बहुत असरदार हो जाते हैं।” उन्होंने कहा, “मैं पहलवानों के परिवार से आती हूं, मेरे पिता, चाचा और दादा, सभी पहलवान थे। मैं बहुत कम उम्र से ही पहलवान बनना चाहती थी, मेरे पिता ने मेरा साथ दिया। उन्होंने मुझसे पूछा नहीं, बल्कि सबको बताया कि मैं एक पहलवान बनूंगी।” आईजी स्टेडियम में चल रहे प्रशिक्षण शिविर की देखरेख कर रहीं भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) की कोच भारती ने कहा कि उन्हें कॉन्टिनेंटल चैंपियनशिप में ढेर सारे पदक जीतने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, “हम अपने पहलवानों की गति बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। हमारे पास एक मजबूत टीम है और मुझे उम्मीद है कि वे सभी पदक जीतेंगे, जिनमें से अधिक स्वर्ण पदक होंगे।”  

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