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कांग्रेस को राज्यसभा में क्रॉस वोटिंग का डर, हरियाणा, ओडिशा और बिहार की घटनाओं ने बढ़ाई चिंता, विधायकों की बाड़ेबंदी

भोपाल  मध्य प्रदेश में जून 2026 को खाली होने वाली राज्यसभा सीटों पर अप्रैल मई में चुनाव होने की संभावना है। इससे पहले राज्य में सियासी हलचल तेज हो गई है। प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों पर चुनाव होना है। वर्तमान में इन सीटों पर डॉ सुमेर सिंह सोलंकी (भाजपा), जॉर्ज कुरियन (भाजपा) और दिग्विजय सिंह (कांग्रेस) सांसद हैं। कांग्रेस को क्यों सता रहा डर? कांग्रेस पार्टी को इस चुनाव से पहले अपने ही विधायकों की क्रॉस वोटिंग का डर सता रहा है। हाल ही में हरियाणा, बिहार और ओडिशा में हुए राज्यसभा चुनावों में क्रॉस वोटिंग के उदाहरण सामने आए हैं, जिससे पार्टी सतर्क हो गई है। सूत्रों के अनुसार, इसी आशंका के चलते कांग्रेस अपने विधायकों की “बाड़ेबंदी” (रिसॉर्ट पॉलिटिक्स) की तैयारी में है, ताकि किसी तरह की टूट-फूट से बचा जा सके। किन विधायकों पर संशय? कांग्रेस के पास फिलहाल 65 विधायक हैं, लेकिन निर्मला सप्रे को लेकर स्थिति साफ नहीं है। निर्मला सप्रे लगातार भाजपा के कार्यक्रमों में नजर आ रही हैं। वहीं अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मुकेश मल्होत्रा राज्यसभा चुनाव में वोटिंग नहीं कर सकते। इसके अलावा पार्टी को आशंका है कि 5–6 विधायक भाजपा के संपर्क में आ सकते हैं। क्या कहता है चुनावी गणित? 230 सदस्यीय विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के पास 165 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 65। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 वोटों की जरूरत होती है। इस हिसाब से भाजपा को 2 सीट और कांग्रेस को 1 सीट मिलना तय माना जा रहा है। कहां फंस सकता है पेंच? सियासी समीकरण तब बिगड़ सकते हैं, अगर कांग्रेस के कुछ विधायक क्रॉस वोटिंग कर दें या अनुपस्थित रहें। खासकर अगर निर्मला सप्रे भाजपा के पक्ष में जाती हैं और अन्य 5–6 विधायक भी टूटते हैं, तो कांग्रेस अपनी तय मानी जा रही एक सीट भी गंवा सकती है। पार्टी का दावा कांग्रेस नेता पीसी शर्मा का कहना है कि सभी विधायक एकजुट हैं और पार्टी का शीर्ष नेतृत्व स्थिति पर नजर बनाए हुए है। हालांकि अंदरखाने चल रही हलचल ने प्रदेश की राजनीति को गरमा दिया है। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी दावा किया है कि पार्टी में सबकुछ ठीक है और सभी विधायक एकजुट है। संगठन को धार देने की तैयारी, जिला स्तर पर शुरू किया विस्तार दिल्ली में हुई अहम बैठक के बाद मध्यप्रदेश कांग्रेस ने संगठन विस्तार की प्रक्रिया तेज कर दी है। लंबे इंतजार के बाद अब जिला कार्यकारिणी की घोषणा शुरू हो गई है और नवरात्र के अंदर अधिकांश जिलों में नई टीम सामने आ जाएगी। दो दिन तक चली मंथन बैठक में संगठन को मजबूत करने की रणनीति तय हुई। इसके तुरंत बाद जिला कार्यकारिणी घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पार्टी नेतृत्व ने साफ संकेत दिए हैं कि अब देरी बर्दाश्त नहीं होगी।  लंबे समय से लटका था मामला जिला अध्यक्षों की नियुक्ति तो पहले ही हो चुकी थी, लेकिन कार्यकारिणी घोषित न होने से सवाल उठ रहे थे। कुछ जिलों में सूची जारी हुई भी, लेकिन पदों की संख्या ज्यादा होने पर उन्हें निरस्त करना पड़ा। अब नई गाइडलाइन के तहत संतुलित टीम बनाई जा रही है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक नवरात्रि के भीतर अधिकांश जिलों की कार्यकारिणी घोषित कर दी जाएगी। इसे आगामी चुनावों की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है। जबलपुर ग्रामीण, श्योपुर, कटनी शहर और बड़वानी जिलों की नई कार्यकारिणी घोषित की जा चुकी है। ये नियुक्तियां प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देश पर की गई हैं। AICC की गाइडलाइन के मुताबिक गठन बड़े जिलों में अधिकतम 51 सदस्य छोटे जिलों में 31 सदस्य की सीमा तय इसी मानक के अनुसार नई कार्यकारिणियां तैयार की जा रही हैं। जमीनी स्तर पर भी संगठन मजबूत संगठन विस्तार के तहत 88 नगर अध्यक्ष और 21 मंडल अध्यक्षों की भी नियुक्ति की गई है। इसका मकसद बूथ स्तर तक पार्टी को मजबूत करना है। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और संगठन प्रभारी हरीश चौधरी लगातार प्रदेश का दौरा कर रहे हैं। उनका फोकस बूथ स्तर पर नेटवर्क मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने पर है। 

Mini Cooper S Victory Edition का भारत में हुआ लॉन्च, कीमत और डिजाइन की पूरी जानकारी

मुंबई   कार निर्माता कंपनी Mini India ने भारतीय बाजार में अपनी MINI Cooper S Victory Edition लॉन्च कर दिया है. कंपनी ने इस कार को 57.50 लाख रुपये की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत पर उतारा है।  गौरतलब है कि इस मॉडल की बुकिंग फरवरी के आखिर में शुरू हुई थी, और इसे भारत में पूरी तरह से CBU इम्पोर्ट के तौर पर सीमित संख्या में लाया जा रहा है. इस स्पेशल एडिशन का डिजाइन 1965 की Monte Carlo Rally जीतने वाली Mini Cooper S से प्रेरित है।  MINI Cooper S Victory Edition का डिजाइन MINI Cooper S John Cooper Works Pack पर आधारित, नया Victory Edition विशेष रूप से Chili Red कलर स्कीम में पेश किया गया है, जिसमें रूफ का कलर ब्लैक रखा गया है और कार की पूरी लंबाई में एक सफ़ेद धारी बनी हुई है. वहीं इसके किनारों पर ’52’ नंबर के ग्राफ़िक्स भी बने हुए हैं, जो रैली जीतने वाली कार के रेस नंबर को दर्शाते हैं।  वहीं रियर प्रोफाइल की बात करें तो, इस एडिशन में रूफ पर लगा हुआ एक स्प्लिट स्पॉइलर और बीच में लगा एग्जॉस्ट दिया गया है. कार में बाहर की तरफ, इसमें C-पिलर पर ‘1965’ की बैजिंग, व्हाइट कलर के हब कैप और JCW Lap Spoke 2-tone डिज़ाइन वाले 18-इंच के अलॉय व्हील्स जैसे अतिरिक्त फ़ीचर्स भी दिए गए हैं।  MINI Cooper S Victory Edition का इंटीरियर केबिन के इंटीरियर पर नजर डालें तो, यहां ब्लैक और रेड कलर की थीम दी गई है, और इसमें ड्राइवर-साइड के दरवाज़े पर ‘Rallye Monte-Carlo’ का स्टिकर, Victory Edition के दरवाज़े की सिल्स, और स्टीयरिंग व्हील के रिम और बीच के स्टोरेज बॉक्स पर ‘1965’ की बैजिंग जैसे एलिमेंट्स दिए गए हैं।  MINI Cooper S Victory Edition का पावरट्रेन मैकेनिकल तौर पर नए Victory Edition में कोई बदलाव नहीं किया गया है. इसमें पहले की तरह ही 2.0-लीटर टर्बो-पेट्रोल इंजन इस्तेमाल किया गया है, जो 201 bhp की पावर और 300 Nm का टॉर्क जेनरेट करता है. इस इंजन को डुअल-क्लच ऑटोमैटिक गियरबॉक्स के साथ जोड़ा गया है। 

पीएम मोदी और गृह मंत्री शाह के नेतृत्व में केरल में भाजपा का प्रचार अभियान

तिरुवनंतपुरम   9 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए अभियान निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा केरल में एक आक्रामक अभियान की तैयारी कर रही है। इसमें ऐतिहासिक सफलता हासिल करने के प्रयास में पार्टी अपनी शीर्ष राष्ट्रीय नेतृत्व टीम को तैनात कर रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री समेत अन्य वरिष्ठ नेता केरल पहुंचने वाले हैं, जो 140 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा का खाता खोलने की पार्टी की दृढ़ता को दर्शाता है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो त्वरित दौरों पर प्रमुख जिलों का दौरा करेंगे। इस दौरान वह रैलियों को संबोधित करेंगे और कार्यकर्ताओं को उत्साहित करेंगे। भाजपा के अभियान का खाका राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों जैसे कसर्गोड, पलक्कड़, तिरुवनंतपुरम, कोल्लम और त्रिशूर में उच्च दृश्यता वाली पहुंच पर केंद्रित है। पार्टी अपने हाल के चुनावी लाभों से आत्मविश्वास ले रही है। सबसे प्रमुख है अभिनेता से राजनीतिज्ञ बने सुरेश गोपी की त्रिशूर लोकसभा सीट पर 70,000 से अधिक मतों से हासिल की गई जीत शामिल है। इसके बाद दिसंबर में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा ने तिरुवनंतपुरम निगम पर नियंत्रण हासिल किया, जो इस राज्य में पार्टी के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है, जहां उसे परंपरागत रूप से स्थान पाने में कठिनाई रही है। हालांकि आंकड़े मिश्रित तस्वीर पेश करते हैं। 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा ने 15.64 प्रतिशत वोट शेयर प्राप्त किया जबकि 2025 के स्थानीय निकाय चुनावों में यह थोड़ी गिरकर 14.71 प्रतिशत रह गई। इसके बावजूद, पार्टी उत्साहित बनी हुई है और 2021 विधानसभा चुनावों में नौ सीटों पर दूसरे स्थान पर आने को बढ़ती पकड़ का सबूत मानते हुए लगातार सक्रिय है। केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने विश्वास जताया है कि पार्टी न केवल लंबे समय से चली आ रही चुनावी बाधा को तोड़ेगी बल्कि आगामी विधानसभा में कई सीटें भी जीतेगी। हालांकि, चुनौतियाँ बरकरार हैं। केरल की अद्वितीय जनसांख्यिकीय संरचना, जहां अल्पसंख्यक जिनमें मुस्लिम और ईसाई शामिल हैं, लगभग 42 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं और यह एक महत्वपूर्ण कारक बनी हुई है। पार्टी रणनीतिकार मानते हैं कि समुदाय के नेताओं के साथ सतत संपर्क महत्वपूर्ण होगा क्योंकि राष्ट्रीय नेता आने वाले दिनों में अधिक जुड़ाव बढ़ाएंगे। जैसे-जैसे अभियान तीव्र होता जा रहा है, भाजपा का यह उच्च-ऊर्जा अभियान यह संकेत देता है कि पार्टी केरल में क्रमिक लाभ को ऐतिहासिक चुनावी पकड़ में बदलने के लिए दृढ़ प्रयास कर रही है।

ईरान-इजरायल तनाव के कारण मुंबई में घर खरीदना होगा महंगा

मुंबई मुंबई में प्रॉपर्टी की कीमतें पहले से ही आसमान छू रहीं हैं और अब इनके रेट्स में और तेजी आ सकती है.  Anarock Group की एक नई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि मुंबई और उसके आसपास के इलाकों (MMR) में घरों की कीमतें बढ़ सकती हैं. इसका मुख्य कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में चल रहा तनाव है, जिसकी वजह से निर्माण में इस्तेमाल होने वाले सामान को लाने-ले जाने का खर्च और कच्चे माल की कीमतें काफी बढ़ गई हैं।  रिपोर्ट के मुताबिक, ऊंची इमारतों को बनाने का खर्च पहले ही करीब ₹50 प्रति वर्ग फुट तक बढ़ चुका है. जानकारों का मानना है कि बिल्डर्स अब इस बढ़े हुए खर्च की भरपाई घर खरीदारों से करेंगे, जिसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो बजट होम या मध्यम आय वर्ग के घर तलाश रहे हैं।  निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख इनपुट्स की कीमतों में भी तीखी वृद्धि देखी गई है. स्टील की कीमतें लगभग 20 प्रतिशत बढ़कर ₹62 से ₹72 प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई हैं, जबकि हॉट रोल्ड कॉइल की कीमतें ₹51 से ₹56 प्रति किलोग्राम के बीच बनी हुई हैं, जिनमें आगे और बढ़ोतरी की आशंका है।  खाड़ी देशों में उत्पादन में कटौती के चलते एल्युमीनियम की कीमतें ₹3.5 लाख प्रति टन तक जा पहुंची हैं, जिसका उपयोग इमारतों के बाहरी हिस्सों और मेट्रो स्टेशनों जैसे बुनियादी ढांचे में प्रमुखता से होता है. साथ ही, सड़क निर्माण के लिए अनिवार्य बिटुमेन की कीमतें भी बढ़कर ₹48 से ₹51 प्रति किलोग्राम हो गई हैं।  लॉजिस्टिक्स में आ रही हैं बाधाएं लागत में इस अप्रत्याशित वृद्धि का सबसे बड़ा कारण लॉजिस्टिक्स में आने वाली बाधाएं हैं. होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावी रूप से बाधित होने के कारण शिपमेंट्स को अब ‘केप ऑफ गुड होप’ के लंबे रास्ते से भेजा जा रहा है, जिससे समुद्री मार्ग की दूरी 6,000 से 10,000 समुद्री मील बढ़ गई है और डिलीवरी में 10 से 20 दिनों की देरी हो रही है. इस बदलाव ने प्रति कंटेनर माल ढुलाई की लागत में ₹1.5 से ₹3.5 लाख की बढ़ोतरी कर दी है. इसके अलावा, ₹1 लाख प्रति टन के पार पहुंचे समुद्री ईंधन के ऊंचे दाम, युद्ध अधिभार (War surcharges) और बढ़ते बीमा प्रीमियम ने डेवलपर्स की वित्तीय चुनौतियों को और अधिक गंभीर बना दिया है।  

किसानों के खाते में ₹4000 जमा होंगे एक साथ, जानें इस योजना की पूरी डिटेल

भोपाल मध्य प्रदेश के किसानों के लिए मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना (CM Kisan Kalyan Yojana) को लेकर बड़ी अपडेट सामने आई है। इस योजना के तहत किसानों को हर साल ₹6000 की आर्थिक सहायता दी जाती है, जो तीन किस्तों में ₹2000-₹2000 के रूप में सीधे बैंक खातों में भेजी जाती है। हालांकि, राज्य के किसानों को अब तक 14वीं किस्त का इंतजार है, जबकि केंद्र की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 22वीं किस्त जारी हो चुकी है। क्यों अटकी है 14वीं किस्त? पिछली 13वीं किस्त अगस्त 2025 में जारी की गई थी। इसके बाद से अब तक योजना के तहत अगली किस्त किसानों के खातों में नहीं आई है। माना जा रहा है कि सरकार जल्द ही 14वीं और 15वीं किस्त को एक साथ जारी कर सकती है। अगर ऐसा होता है, तो किसानों के खाते में एक साथ ₹4000 ट्रांसफर किए जा सकते हैं। किन किसानों को नहीं मिलेगा लाभ? जिनकी e-KYC पूरी नहीं है जिनका बैंक खाता आधार से लिंक नहीं है जिनका भूमि रिकॉर्ड सत्यापित नहीं है जिनका नाम पीएम किसान सूची से हट चुका है कैसे चेक करें अपना नाम? किसान अपना स्टेटस देखने के लिए SAARA पोर्टल (saara.mp.gov.in) पर जाकर “Chief Minister Kisan Kalyan Yojana Beneficiary Status” विकल्प चुन सकते हैं। फिलहाल, सरकार की ओर से किस्त जारी करने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन उम्मीद है कि जल्द ही किसानों के खाते में राहत की रकम पहुंच सकती है।

ड्यूक्स गेंदों की सप्लाई संकट में, मिडिल ईस्ट टेंशन से इंग्लैंड के घरेलू क्रिकेट पर असर, ECB ने दी सफाई

लंदन  इंग्लैंड के आगामी घरेलू क्रिकेट सीजन की शुरुआत से पहले एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है. इसकी वजह है मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष. जिसका असर अब क्रिकेट पर पड़ने लगा है।  ‘डेली मेल’ की र‍िपोर्ट के मुताब‍िक- इंग्लैंड में टेस्ट और फर्स्ट-क्लास क्रिकेट के लिए इस्तेमाल होने वाली ड्यूक्स (Dukes) गेंदों की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है।  1760 से संचालन कर रही ड्यूक्स (Dukes) कंपनी  हर साल लगभग 4,000 से 5,000 लाल गेंदें तैयार करती है, जिनका इस्तेमाल इंग्लैंड के समर सीजन (जो 3 अप्रैल से शुरू हो रहा है) में किया जाता है. लेकिन इस बार हालात सामान्य नहीं हैं।  कंपनी के मालिक दिलीप जाजोदिया जो पिछले करीब 40 साल से इस बिजनेस से जुड़े हैं, उन्होंने बताया कि सप्लाई चेन में आई दिक्कतों के चलते उन्हें काउंटी क्लब्स को सीजन की शुरुआत में केवल 50 प्रतिशत गेंदें ही देनी पड़ रही हैं।  जाजोदिया ने कहा- हम इस समय बड़े संकट से जूझ रहे हैं. हमें क्लब्स को आधी गेंदें देकर शुरुआत करनी पड़ रही है और हालात संभालने की कोशिश कर रहे हैं।  दरअसल, ड्यूक्स गेंदों के निर्माण की प्रक्रिया कई देशों से होकर गुजरती है. गेंद के लिए चमड़ा ब्रिटेन की गायों से लिया जाता है और उसे चेस्टरफील्ड में प्रोसेस किया जाता है. इसके बाद सिलाई के लिए यह मटेरियल दक्षिण एशिया भेजा जाता है और फिर तैयार गेंदें वापस यूके लाई जाती हैं।  लेकिन इस बार वापसी की प्रक्रिया सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है. जाजोदिया के मुताबिक, साउथ एशिया में तैयार माल फैक्ट्रियों में पड़ा है, लेकिन एयरलाइंस कार्गो नहीं उठा रही हैं. मिडिल ईस्ट के रास्तों पर तनाव के चलते उड़ानों में भारी रुकावट आई है।  उन्होंने बताया- आमतौर पर 120 गेंदों के एक बॉक्स की एयर फ्रेट लागत करीब 5 डॉलर प्रति किलो होती थी, लेकिन अब यह बढ़कर 15 डॉलर प्रति किलो तक पहुंच गई है. ज्यादातर शिपमेंट मिडिल ईस्ट से होकर जाती है, और वहां हालात खराब होने से बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।  इस संकट का सीधा असर काउंटी क्रिकेट पर पड़ सकता है, जहां टीमों को सीजन की शुरुआत में सामान्य से कम गेंदों के साथ काम चलाना पड़ सकता है।  इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड ने ड्यूक्स गेंदों के संकट पर क्या कहा?  इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) ने फिलहाल स्थिति को लेकर चिंता से इनकार किया है. ECB ने अपने बयान में कहा कि प्रोफेशनल काउंटी क्लब्स को सीजन शुरू होने से पहले उतनी ही Dukes गेंदें मिल चुकी हैं, जितनी आमतौर पर दी जाती हैं. Dukes गेंदों का इस्तेमाल सिर्फ इंग्लैंड ही नहीं, बल्कि आयरलैंड और वेस्टइंडीज में खेले जाने वाले टेस्ट क्रिकेट में भी किया जाता है। 

उज्जैन में खुला नैवेद्य लोक, जहां इंदौर की छप्पन दुकान जैसा लजीज स्वाद मिलेगा

उज्जैन   इंदौर की छप्पन दुकान की तरह उज्जैन में भी नैवेद्य लोक की शुरुआत हुई है। सीएम मोहन यादव ने नैवेद्य लोक का लोकार्पण किया है। भव्य नैवेद्य लोक उज्जैन के नानाखेड़ा में स्थित है। यहां 34 दुकानें बनाई गई हैं। नैवेद्य लोक में आपको शुद्ध शाकाहारी और लजीज व्यंजन मिलेंगे। यह उज्जैन वासियों के लिए बड़ी सौगात है। 18 करोड़ रुपए से हुआ है निर्माण वहीं, नैवेद्य लोक में बने इन दुकानों की साइज 62 वर्गफीट से लेकर 180 वर्गफीट तक है। इन सभी दुकानों की निर्माण लागत 18 करोड़ रुपए बताई जा रही है। दुकानों का निर्माण उज्जैन विकास प्राधिकरण द्वारा किया गया है। 28 हजार स्क्वायर फिट में बने नैवेद्य लोक में दुकानों के साथ ही यहां विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए सुसज्जित ओपन थियेटर, साउंड सिस्टम, महिला, पुरुष, दिव्‍यांग जनों के उपयोगार्थ नवीन सेंसर उपकरण के साथ प्रसाधन कक्ष, सीसीटीवी कैमरा-सर्वर रूम, आपातकालीन विद्युत व्यवस्था के लिए डीजी सेट, पार्किंग, अंडर ग्राउंड विद्युत व्यवस्था, सीवरेज और लैंडस्केपिंग आदि सुविधाएं विकसित की गई हैं। लजीज व्यंजनों के साथ रोजगार भी मिलेगा वहीं, नैवेद्य लोक के लोकार्पण के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मीडिया से चर्चा में कहा कि इस नैवेद्य लोक में व्यंजनों के स्वाद के साथ ही रोजगार भी मिलेगा। इस कार्य के लिए मेरी ओर से सभी को बधाई। अति पिछड़े इलाके को किया गया विकसित नैवेद्य लोक की विशेषता बताते हुए उज्जैन विकास प्राधिकरण के सीईओ संदीप सोनी ने बताया कि यहां अति पिछड़े इलाके को विकसित किया गया है। पहले यहां काफी गंदगी हुआ करती थी। इस नैवेध लोक के माध्यम से उज्जैन में महाकाल दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह एक विशेष सुविधा प्रदान करेगा। श्रद्धालु यहां मालवा के व्यंजनों का लुत्फ उठा सकेंगे। सीईओ संदीप सोनी ने कहा कि इसे पूरी तरह से मॉल वाला लुक दिया गया है। लोग आएंगे तो उन्हें शानदार एंबियंस मिलेगा। गौरतलब है कि लोकार्पण के दिन ही वहां के लोगों की भीड़ उमड़ी है। इसके साथ ही सीएम मोहन यादव ने भी यहां व्यंजनों का स्वाद चखा है।

बरेठा घाट में 51 हादसों के बाद 18 मौतें, टाइगर कॉरीडोर को फोर-लेन बनाने की मिली केंद्र से मंजूरी

बैतूल  मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के बरेठा घाट से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-46 (NH-46) के महत्वपूर्ण हिस्से को अब फोरलेन बनाने की मंजूरी मिल गई है। यह वही इलाका है, जहां पिछले दो साल में सड़क हादसे हुए और 18 लोगों की जान चली गई। लगातार बढ़ते हादसों और ट्रैफिक दबाव को देखते हुए इस सड़क को चौड़ा और सुरक्षित बनाने की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। यह सड़क ग्वालियर से बैतूल तक करीब 634 किलोमीटर लंबा एक अहम हाईवे है, जो पूरी तरह मध्यप्रदेश के अंदर आता है। यह राज्य के उत्तर और दक्षिण हिस्सों को जोड़ने वाला बड़ा मार्ग है और भोपाल से नागपुर जाने वाले कॉरिडोर का भी हिस्सा है। इस पर ज्यादातर काम पूरा हो चुका है, लेकिन बरेठा घाट समेत करीब 21 किलोमीटर का हिस्सा बाकी था।  हाईकोर्ट के आदेश के बाद शुरू होगा काम  दरअसल, यह इलाका टाइगर कॉरिडोर में आता है, यानी यहां से जंगली जानवरों की आवाजाही होती है। इसी कारण 1 अप्रैल 2022 को हाईकोर्ट ने यहां सड़क निर्माण पर रोक लगा दी थी। इसके बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को वन्यजीव और पर्यावरण से जुड़ी कई मंजूरियां लेनी पड़ीं। अब वाइल्डलाइफ बोर्ड और केंद्र सरकार से सभी जरूरी अनुमति मिल चुकी है। जैसे ही हाईकोर्ट से स्टे हटाने का अंतिम आदेश आएगा, निर्माण काम शुरू कर दिया जाएगा। संकरी और घुमावदार सड़क, लगता है जाम  बरेठा घाट का यह हिस्सा अभी केवल दो लेन का है, जो बहुत संकरा और घुमावदार है। यहां भारी वाहनों का दबाव ज्यादा रहता है, जिससे अक्सर जाम की स्थिति बन जाती है। साथ ही, दो जगह ऐसे ब्लैक स्पॉट हैं, जहां बार-बार हादसे होते हैं। कम चौड़ाई, तेज मोड़, ढलान और कम विजिबिलिटी इस रास्ते को और खतरनाक बनाते हैं। ब्लैक स्पॉट को ठीक करने भी बनाया प्लान  पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, जनवरी 2022 से दिसंबर 2024 के बीच यहां 51 एक्सीडेंट हुए, जिनमें 18 लोगों की मौत हुई और करीब 62 लोग घायल हुए। कई छोटे हादसे तो रिकॉर्ड में भी नहीं आ पाते, जिससे असली स्थिति और गंभीर हो सकती है। अब इस पूरे हिस्से को 4 लेन में बदला जाएगा, जिससे सड़क चौड़ी होगी और ट्रैफिक आसानी से चल सकेगा। इसके साथ ही ब्लैक स्पॉट्स को ठीक करने के लिए खास प्लान बनाया गया है। यहां 3 छोटे पुल (माइनर ब्रिज), 38 बॉक्स कलवर्ट, 1 रेलवे अंडरब्रिज, 2 रोड ओवरब्रिज और 1 व्हीकल अंडरपास बनाए जाएंगे। इससे ट्रैफिक सुचारू होगा और दुर्घटनाओं में कमी आएगी। वन्य जीवों की सुरक्षा का ख्याल, बनेंगे 10 अंडरपास, 1 ओवरपास  सबसे खास बात यह है कि इस प्रोजेक्ट में वन्यजीवों की सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा गया है। जानवरों की आवाजाही के लिए 10 अंडरपास और 1 ओवरपास बनाए जाएंगे, ताकि वे बिना खतरे के सड़क पार कर सकें। इसके अलावा सड़क पर क्रैश बैरियर, साइन बोर्ड, रंबल स्ट्रिप, नॉइज बैरियर और फेंसिंग जैसी सुविधाएं भी लगाई जाएंगी, जिससे यात्रियों और पर्यावरण दोनों की सुरक्षा हो सके। पर्यटन स्थलों पर पहुंच भी बेहतर होगी  इस परियोजना के पूरा होने से न सिर्फ सड़क हादसे कम होंगे, बल्कि व्यापार, पर्यटन और आवागमन भी आसान हो जाएगा। सांची, भीमबेटका, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंच बेहतर होगी। साथ ही, उद्योगों और व्यापार को भी इसका बड़ा फायदा मिलेगा। कुल मिलाकर, बरेठा घाट का यह फोरलेन प्रोजेक्ट आम लोगों के लिए सुरक्षित और आसान सफर की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा। 

जमीन अधिग्रहण पर नए कानून से किसानों को मिलेगा फायदा, मुआवजे में ये होगा खास प्रावधान

इंदौर  नए वित्त वर्ष से उन लोगों के लिए एक अच्छा नियम लागू होने जा रहा है जिनकी भूमि विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की जा रही है। इस नए नियम से किसानो के साथ ही बहुत बड़े स्तर पर लोगों को एक नई राहत मिलने वाली है। दरअसल इस नए नियम लागू होने के बाद जमीन देने वाले किसानों और अन्य भू-स्वामियों को पूरी राशि बिना किसी कर कटौती के मिल सकेगी। इससे उन्हें फायदा होगा। सरकारी परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण के बदले मिलने वाली मुआवज़ा राशि नए वित्त वर्ष से  Tax Free दरअसल अब सरकारी परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण के बदले मिलने वाली मुआवज़ा राशि नए वित्त वर्ष (New FinancialYear) से कर-मुक्त (Tax Free ) होगी। केंद्र सरकार के इस नए प्रावधान को एक बड़े राहत भरे फैसले को तौर पर देखा जा रहा है।  खासकल उन लोगों के लिए ये फायदा देने वाले है जिनकी जमीन विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की जा रही है। भूमि अधिग्रहण के बदले मिलने वाली मुआवज़ा राशि टैक्स फ्री होने से उनको काफी लाभ होगा। पश्चिमी बाइपास, अयोध्या बाइपास, मेट्रो परियोजना से जुड़े भूमि मालिको को लाभ इस नए नियम से शहर में चल रहे तीन मेन प्रोजेक्टों पश्चिमी बाइपास, अयोध्या बाइपास और मेट्रो परियोजना से जुड़े भूमि स्वामियों को डायरेक्ट लाभ मिलेगा। इन परियोजनाओं के लिए करीब 400 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जाना प्रस्तावित है। प्रभावित लोगों जो मुआवज़ा राशि मिलेगी वो अब टैक्स के दायरे से बाहर रहेगी। नए नियम लागू होने के बाद जमीन देने वाले किसानों और अन्य भू-स्वामियों को पूरी राशि बिना किसी कर कटौती के मिल सकेगी। लिहाजा नए साल पर लागू होने वाले इस नियम से किसानों को फायदा होगा। 

जयपुर में सीएम मोहन यादव की निवेशकों से मुलाकात, टेक्सटाइल और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पर होगी बात

भोपाल  पिछले कुछ वर्षों में मध्यप्रदेश सरकार निवेश बढ़ाने के लिए लगातार कोशिश कर रही है। इसी सिलसिले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (mp cm dr mohan yadav) शनिवार को देश के उद्योगपतियों से सीधा संवाद करेंगे। जयपुर में 21 मार्च को बड़ा कार्यक्रम होने जा रहा है। जिसमें टेक्सटाइल, इलेक्ट्रिक व्हीकल, ऑटोमोबाइल, फूड प्रोसेसिंग और पर्यटन के क्षेत्र में काम करने वाले निवेशक शामिल हो रहे हैं। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार को राजस्थान की राजधानी जयपुर में रहेंगे। वे जयपुर के आईटीसी राजपूताना में आयोजित निवेशकों के बड़े कार्यक्रम (Investment Summit) में उद्योगपतियों से वन टू वन संवाद करेंगे। कार्यक्रम का नाम ‘इंटरेक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्यूनिटीज इन मध्यप्रदेश’ है। इस कार्यक्रम में खास प्रोजेक्ट और निवेश की नई योजनाओं पर चर्चा की जाएगी। सीएम मोहन यादव उद्योगपतियों से मीटिंग कर टेक्सटाइल, इलेक्ट्रिक व्हीकल, ऑटोमोबाइल, फूड प्रोसेसिंग और टूरिज्म के क्षेत्र में निवेश पर बात करेंगे। जयपुर में दूसरा बड़ा आयोजन एमपी सरकार (mp govt) की मंशा है कि मध्यप्रदेश में अधिक से अधिक उद्योग आएं और युवाओं के लिए रोजगार बढ़े। मोहन सरकार ने इसके लिए मध्यप्रदेश में निवेश बढ़ाने के लिए नई औद्योगिक नीति भी बनाई है। इसमें उद्योग लगाने की और निवेश की प्रक्रिया को आसान बनाया है। इससे निवेशकों को पूरी कागजी कार्यवाही में परेशानी न हो। कुछ दिन पहले भीलवाड़ा में एक्सटाइल सेक्टर को लेकर इसी प्रकार का आयोजन हो चुका है, इसके बाद यह दूसरा बड़ा आयोजन जयपुर में हो रहा है।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव का स्पष्ट संदेश है कि मध्यप्रदेश अब संभावनाओं तक सीमित राज्य नहीं रहा, बल्कि नीतिगत स्पष्टता, त्वरित निर्णय क्षमता और मजबूत औद्योगिक आधार के साथ निवेश को धरातल पर उतारने वाला अग्रणी राज्य बन चुका है। उनका मानना है कि निवेश केवल पूंजी का प्रवाह नहीं, बल्कि रोजगार सृजन, कौशल विकास, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और समग्र क्षेत्रीय विकास का माध्यम है। एमपी में चल रहा है काम मध्यप्रदेश (madhya pradesh) में कई जिलों में नए उद्योग विकसित किए जा रहे हैं। उज्जैन में मेडिकल डिवाइस पार्क, ग्वालियर में फुटवियर पार्क, जबलपुर में डिफेंस हब और धार में पीएम मित्रा पार्क बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा आईटी पार्क और स्किल डेवलपमेंट सेंटर पर भी काम तेजी से चल रहा है। राज्य सरकार ने साल 2026 को ‘कृषि वर्ष’ घोषित किया है, जिससे खेती और फूड प्रोसेसिंग से जुड़े उद्योगों को बढ़ावा मिल सके। जयपुर (jaipur) में होने वाले इस बड़े आयोजन का मकसद भी यह है कि राजस्थान और आसपास के निवेशकों को मध्यप्रदेश में आकर्षित किया जा सके और उनसे निवेश कराया जा सके। इससे मध्यप्रदेश में विकास बढ़े और रोजगार के नए-नए अवसर भी निर्मित हों।  

RTE एडमिशन में बड़ा परिवर्तन, सिर्फ 1425 बच्चों को मिलेगा दाखिला, केजी-नर्सरी की व्यवस्था खत्म

दुर्ग  छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत इस वर्ष प्रवेश प्रक्रिया में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। जिले में आरटीई सीटों में भारी कटौती करते हुए संख्या घटाकर केवल 1425 कर दी गई है। पिछले वर्ष जहां 4267 सीटें उपलब्ध थीं, वहीं इस बार 2842 सीटें कम कर दी गई हैं, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है।  केजी-नर्सरी खत्म, अब सीधे पहली कक्षा में प्रवेश इस बार सबसे बड़ा बदलाव यह किया गया है कि केजी-1, केजी-2 और नर्सरी कक्षाओं को आरटीई दायरे से बाहर कर दिया गया है। अब केवल पहली कक्षा में ही प्रवेश दिया जाएगा। इससे पहले निजी स्कूलों में इन शुरुआती कक्षाओं में भी आरटीई के तहत दाखिले होते थे। विभाग को अब तक 2533 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, जबकि सीटें सिर्फ 1425 ही हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में बच्चों का चयन नहीं हो पाएगा। इससे अभिभावकों के बीच प्रतिस्पर्धा और चिंता दोनों बढ़ गई हैं। निजी स्कूलों की संख्या भी घटी पिछले वर्ष जहां 540 निजी स्कूलों को आरटीई के तहत चिन्हांकित किया गया था, इस बार उनकी संख्या घटकर 528 रह गई है। इससे भी सीटों में कमी का असर साफ नजर आ रहा है। निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत वर्ष 2026-27 के लिए प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन की जा रही है। आरटीई पोर्टल के माध्यम से आवेदन और चयन की प्रक्रिया संपन्न होगी। पहले चरण का शेड्यूल जारी आरटीई प्रवेश प्रक्रिया के पहले चरण का शेड्यूल भी जारी कर दिया गया है। इसके तहत ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 31 मार्च निर्धारित की गई है, जबकि नोडल वेरिफिकेशन की प्रक्रिया 16 फरवरी से 31 मार्च तक चलेगी। इसके बाद 13 से 17 अप्रैल के बीच लॉटरी के माध्यम से सीटों का आबंटन किया जाएगा। चयनित छात्रों का स्कूल में प्रवेश 1 मई से 30 मई के बीच कराया जाएगा, वहीं 2025-26 सत्र की शुल्क प्रतिपूर्ति का सत्यापन कार्य 25 मई से 25 जून तक पूरा किया जाएगा। दूसरे चरण की समय-सारणी द्वितीय चरण के तहत आरटीई प्रवेश प्रक्रिया की समय-सारणी भी जारी कर दी गई है, जिसके अनुसार नए स्कूलों का रजिस्ट्रेशन 8 से 20 जून तक किया जाएगा। इसके बाद नोडल अधिकारी और जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) द्वारा सीटों का वेरिफिकेशन 8 जून से 25 जून तक किया जाएगा। छात्र पंजीयन की प्रक्रिया 1 से 11 जुलाई के बीच पूरी होगी, जबकि नोडल वेरिफिकेशन 1 से 15 जुलाई तक किया जाएगा। इसके पश्चात 27 से 31 जुलाई के बीच लॉटरी और सीटों का आबंटन किया जाएगा, वहीं चयनित छात्रों की स्कूल में प्रवेश प्रक्रिया 3 से 17 अगस्त तक पूरी की जाएगी। अभिभावकों में बढ़ी चिंता सीटों में भारी कटौती और कक्षाओं के दायरे में बदलाव के कारण इस बार बड़ी संख्या में बच्चों को आरटीई का लाभ नहीं मिल पाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे निजी स्कूलों में शिक्षा हासिल करने का अवसर सीमित हो सकता है, खासकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए।

राशन कार्ड धारकों को अप्रैल में मिलेगा तिगुना अनाज, सरकार का अहम फैसला

नई दिल्ली सरकार गरीबी रेखा के नीचे आने वाले सभी लोगों को मुफ्त में राशन मुहैया कराती है। इस बीच केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने देश के सभी राशन कार्ड धारकों को अप्रैल महीने में तिगुना अनाज देने का ऐलान किया है। केंद्र सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने इसकी जानकारी दी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है, ‘अप्रैल में सभी लाभार्थियों को तीन महीने (अप्रैल, मई और जून 2026) का राशन एक साथ मिलेगा। इसके लिए सभी लाभार्थी अपनी नजदीकी राशन दुकान से निर्धारित समय पर राशन प्राप्त कर सकते हैं।’ आपको बता दें कि सरकार ने फिलहाल इसके पीछे कोई ठोस कारण नहीं बताया है। 41 लाख फर्जी राशन कार्ड खत्म इससे पहले सरकार ने मंगलवार को संसद को बताया कि वर्ष 2025 में 41.41 लाख अपात्र राशन कार्ड खत्म किए गए। राज्यसभा में खाद्य राज्य मंत्री निमुबेन जयंतीभाई बंभानिया ने बताया कि हरियाणा में सर्वाधिक लगभग 13.43 लाख राशन कार्ड, राजस्थान में 6.05 लाख, उत्तर प्रदेश में 5.97 लाख, पश्चिम बंगाल में 3.74 लाख और मध्य प्रदेश में 2.60 लाख अपात्र राशन कार्ड खत्म किए गए। बंभानिया ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में प्रौद्योगिकी के उपयोग के परिणामस्वरूप सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए अपात्र राशन कार्डों को खत्म करने में सफलता हासिल की है। उनके अनुसार, वर्ष 2025 में कुल 41.41 लाख फर्जी राशन कार्ड खत्म किए गए, जबकि 2024 में यह संख्या 48.85 लाख और 2023 में 41.99 लाख थी। बंभानिया ने बताया कि पीडीएस में चल रहे सुधारों के तहत सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राशन कार्ड और लाभार्थियों के आंकड़ों का पूरी तरह डिजिटलीकरण किया जा चुका है। देश की लगभग सभी उचित मूल्य की दुकानों (एफपीएस) को खाद्यान्न वितरण के लिए इलेक्ट्रॉनिक ”प्वाइंट ऑफ सेल” (ईपीओएस) उपकरणों की स्थापना के माध्यम से स्वचालित किया गया है। इसके अलावा, 99.2 प्रतिशत लाभार्थियों को आधार से जोड़ा जा चुका है और 98.75 प्रतिशत खाद्यान्न वितरण आधार आधारित बायोमेट्रिक सहित डिजिटल प्रमाणीकरण के माध्यम से किया जा रहा है। मंत्री ने कहा, “पीडीएस का डिजिटलीकरण दक्षता और पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से किया जा रहा है, ताकि वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंच सुनिश्चित हो सके और खाद्यान्न की चोरी आदि का समाधान किया जा सके।”

BSNL के प्राइवेटाइजेशन पर सरकार ने दी बड़ी अपडेट

 नई दिल्‍ली बीएसएनएल को लेकर बुधवार को एक बड़ी जानकारी सामने आई. केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने लोकसभा में भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) के प्राइवेटाइजेशन की किसी भी संभावना से इनकार करते हुए कहा कि सरकारी दूरसंचार ऑपरेटर पब्लिक सेक्‍टर की ही कंपनी है।  केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बीएसएनएल के प्राइवेटाइजेशन का तो कोई सवाल ही नहीं उठता. BSNL भारत की जनता की है और भारत की जनता के लिए है. सिंधिया ने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्‍व में सरकार BSNL को मजबूत करने और उसकी टेलीकॉम क्षमताओं का विस्‍तार करने पर फोकस कर रही है।  बीएसएनल के पास थे दो विकल्‍प  उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के लीडरशिप में प्राइवेटाइजेशन का कोई मुद्दा नहीं है, बीएसएनएल देश की जनता की सेवा के लिए है. बीएसएनएल के 4G रोलआउट को लेकर सरकार के नजरिए को समझाते हुए सिंधिया ने कहा कि कंपनी के पास दो विकल्प थे- या तो ग्‍लोबल कंपनियों से टेलीकॉम सेक्‍टर की चीजें खरीदें या स्वदेशी क्षमताएं डेवलप करे।   उन्होंने कहा कि बीएसएनएल ने अन्‍य कंपनियों की तरह, दक्षिण कोरिया, फिनलैंड, स्वीडन या चीन में स्थित अंतरराष्ट्रीय दिग्गजों से उपकरण खरीदकर 4जी नेटवर्क का निर्माण नहीं किया है, बल्कि खुद के उपकरण बनाए हैं।  ग्‍लोबल लेवल पर भारत का 4G डिजिटल स्टैक  सिंधिया ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री ने साहसिक फैसला लेते हुए कहा कि हम सिर्फ सेवाएं ही नहीं देंगे, बल्कि उपकरण भी बनाएंगे. विश्व में पहली बार, केवल चार देश दूरसंचार उपकरण बनाते हैं, और प्रधानमंत्री की बदौलत, भारत का 4G डिजिटल स्टैक अब एक उपकरण निर्माता के तौर पर वैश्विक मंच पर पहुंच चुका है।  5G से पहले 4G नेटवर्क पर फोकस बीएसएनएल उन्होंने यह भी कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री द्वारा सितंबर 2025 में किया गया था. सिंधिया ने कहा कि पहले बीएसएनएल के 8 करोड़ 55 लाख कस्‍टमर्स थे और अब यह संख्या 9 करोड़ 27 लाख हो गई है. हम 5जी को जल्द से जल्द शुरू करने के लिए 4G तकनीक को भी आगे बढ़ा रहे हैं, लेकिन हमें पहले 4G को स्थिर करना होगा. इससे पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी राज्यसभा में बीएसएनएल के पुनरुद्धार के बारे में बात की थी। 

16 अमेरिकी मिलिट्री जेट्स के तबाह होने से ईरान जंग में अमेरिका को हुआ भारी नुकसान, F-35 और F-15 भी शामिल

वाशिंगटन  ईरान जंग में अमेरिका को बहुत गहरी चोट लगी है. यह एक ऐसा जख्म है, जिसे डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिका जमाने तक याद रखेंगे. जी हां, ईरान युद्ध की शुरुआत से अब तक अमेरिका के 16 मिलिट्री जेट्स तबाह यानी नष्ट हो चुके हैं. इनमें ड्रोन और लड़ाकू विमान भी शामिल हैं. इसमें एक नया नाम एफ-35 फाइटर जेट का भी जुड़ गया है. इसे ईरान ने हिट किया है. इसके कारण इस विमान की इमरजेंसी लैंडिंग हुई है और इसे नुकसान पहुंचा है. इन नुकसान को देखकर लगता है कि बहुत कुछ खोकर भी ईरान ने युद्ध में अमेरिका को खून के आंसू रुला दिए हैं. ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच युद्ध 20 दिन से जारी है. 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने एक साथ मिलकर ईरान पर अटैक किया था. उस अटैक में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गए थे. तब से ही यह ईरान जंग जारी है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के साथ जंग शुरू होने के बाद से कम से कम 16 अमेरिकी सैन्य विमान नष्ट हो गए हैं. इनमें 10 MQ-9 रीपर ड्रोन शामिल हैं. इन्हें ईरान की गोलीबारी में मार गिराया गया है. अमेरिका के कई ऐसे विमान भी हैं, जिनमें क्रू मौजूद था और वे दुर्घटनाओं या हमलों में नष्ट हो गए. दावा किया गया कि सबसे अधिक नुकसान दुर्घटनाओं की वजह से हुआ. बताया गया कि कुवैत में तीन F-15 लड़ाकू विमान ‘फ्रेंडली फायर’ यानी अपनी ही सेना की गोलीबारी में गिर गए, जबकि एक KC-135 टैंकर विमान ईंधन भरने के ऑपरेशन के दौरान नष्ट हो गया, जिसमें सवार सभी छह क्रू सदस्यों की मौत हो गई. इसके अलावा सऊदी अरब के एक एयरफ़ील्ड पर ईरानी मिसाइल हमले में पांच KC-135 विमान क्षतिग्रस्त हो गए. हालांकि, ईरानी पक्ष का दावा है कि फ्रेंडली फायर नहीं, बल्कि उनके अटैक में अमेरिकी लड़ाकू विमान नष्ट हुए हैं। ईरान जंग में अमेरिका को गहरे जख्म मिले अब तक ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम ने युद्ध के दौरान केवल बिना पायलट वाले ‘रीपर’ ड्रोन को ही सफलतापूर्वक निशाना बनाया है. इनमें से कम से कम नौ ड्रोन को हवा में ही मार गिराया गया, जबकि एक अन्य ड्रोन जॉर्डन के एक एयरफ़ील्ड पर बैलिस्टिक मिसाइल का शिकार हो गया. इसके अलावा दो अन्य ड्रोन अलग-अलग दुर्घटनाओं में नष्ट हो गए. ‘रीपर’ ड्रोन को विशेष रूप से अत्यधिक जोखिम वाले मिशनों के लिए डिजाइन किया गया है, क्योंकि इनमें कोई पायलट नहीं होता और इन्हें बदलने का खर्च भी अपेक्षाकृत कम होता है। ईरान जंग में अब भी अमेरिका का पूरा कंट्रोल नहीं ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम को बेअसर करने के लिए अमेरिका और इजराय के शुरुआती प्रयासों के बावजूद पूरी तरह से हवाई वर्चस्व हासिल करना मुश्किल साबित हुआ है. ईरानी हिट के बाद एक अमेरिकी F-35 लड़ाकू विमान को मध्य-पूर्व में स्थित एक सैन्य अड्डे पर आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी. विमान का पायलट सुरक्षित बच गया और बताया जा रहा है कि उसकी हालत स्थिर है। अमेरिका ने कबूला सच अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि ईरानी हवाई क्षेत्र पर उनका नियंत्रण अभी भी सीमित है. जॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ के चेयरमैन डैन केन ने कहा कि अमेरिका के पास फिलहाल केवल कुछ ही जगहों पर हवाई बढ़त हासिल है. उसका नियंत्रण पूरे क्षेत्र के बजाय केवल कुछ ही इलाकों तक सीमित है। आखिर अमेरिका को हुए नुकसान की वजह क्या विशेषज्ञों का कहना है कि ऑपरेशन्स का पैमाना और उनकी तीव्रता ही शायद अधिक नुकसान की वजह हो सकती है. रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स के पूर्व अधिकारी पीटर लेटन ने कहा कि इस अंतर की वजह शायद कहीं अधिक जोरदार कोशिशें हो सकती हैं. हर दिन पहले के मुकाबले अधिक उड़ानें भरी जा रही हैं. यह नुकसान अमेरिकी सेना के सामने मौजूद चुनौतियों को उजागर करता है. खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम मार्गों को सुरक्षित करने के प्रयासों में, जहां सक्रिय हवाई सुरक्षा प्रणालियां अभी भी एक बड़ा खतरा बनी हुई हैं ईरान के निशाने पर आया एफ-35 जी हां, एफ-35 को अमेरिका का सबसे एडवांस फाइटर जेट माना जाता है. ईरान जंग में अब यह भी सेफ नहीं रहा. गुरुवार को ईरान की जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी F-35 स्टील्थ फाइटर जेट को निशाना बनाया गया. इसके बाद उसे मजबूरन इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी. सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना तब हुई जब यह पांचवीं पीढ़ी का घातक फाइटर जेट ईरान के ऊपर कॉम्बैट मिशन पर उड़ान भर रहा था. अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने बताया कि ईरानी फायर के बाद विमान को मिडिल ईस्ट में स्थित अमेरिकी एयरबेस पर आपात लैंडिंग करनी पड़ी. फिलहाल, इस फाइटर जेट के नुकसान की जांच की जा रही है।

21 मार्च 2026 राशिफल: जानें किसके लिए दिन शुभ रहेगा और कौन करें सतर्कता

मेष 21 मार्च के दिन नए कार्यभार संभालते समय सावधान रहें। मन परेशान रहेगा। आत्म संयत रहें। व्यर्थ के क्रोध एवं विवाद से बचें। प्रॉफिट का स्वाद चखेंगे। बातचीत में भी संतुलित रहें। कारोबार में भागदौड़ अधिक रहेगी। परिवार की सेहत का ध्यान रखें। वृषभ 21 मार्च के दिन मन परेशान रहेगा। लक्ष्य को हासिल करना काफी मुश्किल लगेगा। आत्मविश्वास में भी कमी रहेगी। संयत रहें। धैर्यशीलता बनाए रखने का प्रयास करें। नौकरी में बदलाव के साथ तरक्की मिलेगी। मिथुन 21 मार्च के दिन धन आज कई स्रोतों से आएगा। आत्मविश्वास से भरपूर रहेंगे। अधिक मेहनत करने की आवश्यकता होगी। नौकरी में बदलाव के योग बन रहे हैं। तरक्की के अवसर भी मिल सकते हैं। आय में वृद्धि होगी। वाहन सुख में भी वृद्धि होगी। कर्क 21 मार्च के दिन आपको आज लाइफ में अच्छे पल देखने को मिलेंगे। पर्सनल लाइफ में इमोशनली एक दूसरे से चीजें शेयर करें। प्रोफेशनल लाइफ में आपके लिए आज का दिन खास रहेगा। आपको नौकरी के नए अवसर भी मिलेंगे। सिंह 21 मार्च के दिन सिंह राशि वालों के पास आत्मविश्वास भरपूर रहेगा। आपको काम में लाभ होगा। तरक्की के योग हैं, लेकिन फैसले लेने से पहले अच्छे से विचार कर लें। नई स्ट्रैटजी लाने की आवश्यकता होगी। कन्या 21 मार्च के दिन तनाव भरे समय में भी शांत रहें। प्रेम जीवन को ऊर्जावान और रचनात्मक बनाए रखने के रोमांटिक तरीकों की तलाश करें। पेशेवर जीवन को विवादों से दूर रखें। आज के दिन स्वास्थ्य और धन अच्छा रहेगा। तुला 21 मार्च के दिन पार्टनर के साथ क्रिएटिव एक्टिविटी में शामिल हों ताकि आपका रिलेशन मजबूत हो सके। फाइनेंशियल सक्सेस आपके पक्ष में होगी। आपका करियर अपने चरम पर होगा। आप अपने स्वास्थ्य को लेकर भी स्ट्रेसफ्री हो सकते हैं। वृश्चिक 21 मार्च के दिन लेखकों और कॉपीराइटरों को अपनी स्किल्स को साबित करने के अवसर मिलेंगे। आप कई लंबे समय से पेंडिंग अपने लक्ष्यों को पूरा करने के लिए रेडी हो सकते हैं। मार्केट रिसर्च बहुत जरूरी है याद रखें। धनु 21 मार्च के दिन अपने प्रेम जीवन में सबसे अच्छे पलों की तलाश करें और पेशेवर जीवन को उत्पादक बनाए रखें। वित्तीय समृद्धि स्मार्ट मौद्रिक निर्णय लेने की अनुमति देती है। स्वास्थ्य भी अच्छा है। बातचीत से इस प्रॉब्लम का सॉल्यूशन हो सकता है। मकर 21 मार्च के दिन ट्रैवल करते समय भी आपको पार्टनर के संपर्क में रहने की आवश्यकता है। ऑफिस की राजनीति को छोड़ दें। अपनी भावनाओं को खुलकर एक्सप्रेस करने के लिए अपने जीवनसाथी से कॉल पर बात करें। कुंभ 21 मार्च के दिन ऑफिस में अपना कंट्रोल न खोएं। ध्यान रखें कि आप सीनियर्स के साथ अच्छा ताल-मेल भी बनाए रखें। धन का आगमन होगा। ऑयली और मसालेदार भोजन का सेवन कम करें। लाइफ में बैलेंस बनाए रखें। मीन 21 मार्च के दिन आप दूसरों से बेहतर प्रदर्शन करेंगे। प्यार को बनाए रखें और सुनिश्चित करें कि आप कार्यालय में उम्मीदों पर खरे उतरें। स्वास्थ्य और धन दोनों अच्छी स्थिति में रहेंगे। आपकी प्राथमिकता फ्यूचर के दिनों के लिए सेविंग्स करने की होनी चाहिए।

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