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सिंचाई व्यवस्था का हो रहा सुदृढ़ीकरण, 74.33 करोड़ रुपये की लागत से 7 नई ड्रेनेज परियोजनाओं का होगा निर्माण

लखनऊ.  उत्तर प्रदेश में कृषि विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग द्वारा सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। जल प्रबंधन को बेहतर बनाने, बाढ़ की समस्या को कम करने और किसानों की आय में बढ़ोतरी के उद्देश्य से ड्रेनेज व्यवस्था के विस्तार और ड्रेनों की नियमित सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस क्रम में वित्तीय वर्ष 2025-26 में सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग विभिन्न जनपदों में 7 नई ड्रेन परियोजनाओं का निर्माण करा रहा है। साथ ही जल प्रबंधन और खेतों तक सुचारू रूप से जल की पहुंच को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 17,500 किलोमीटर ड्रेनों की सफाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। बहराइच, बिजनौर, गोण्डा, हापुड़ और मेरठ में बन रही हैं 7 नई ड्रेन वित्तीय वर्ष 2025-26 में सिंचाई व्यवस्था के विस्तार के उद्देश्य से विभिन्न जनपदों में 7 नई ड्रेन परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई है। इसमें गोण्डा, हापुड़ और मेरठ में एक-एक ड्रेन परियोजना को मंजूरी दी गई है, जबकि बिजनौर और बहराइच में दो-दो ड्रेन परियोजनाओं को स्वीकृति मिली है। जिन पर कुल 74.33 करोड़ रुपये की धनराशि व्यय करने की स्वीकृति मिली है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से संबंधित क्षेत्रों में जल निकासी व्यवस्था सुदृढ़ होगी और किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हर खेत को पानी के विजन को साकार करने में मजबूती मिलेगी। मार्च 2026 तक पूरा होगा ड्रेनों की सफाई का कार्य ग्रामीण क्षेत्रों में बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए व्यापक सफाई का कार्य भी नियमित तौर पर कराया जाता है। बाढ़ एवं साल भर ड्रेनों के परिचालन से इनमें भारी मात्रा में गाद और सिल्ट जमा हो जाती है, जो खेतों तक जल की पहुंच में बाधा उत्पन्न करती है। इस क्रम में वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 17,500 किलोमीटर ड्रेनों की सफाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें से 11,065 किलोमीटर ड्रेनों की सफाई का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। शेष कार्य मार्च 2026 तक पूरा किया जाना है। विभाग द्वारा कार्यों की नियमित निगरानी की जा रही है ताकि तय समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ कार्य पूर्ण हो सके। इससे न केवल किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा, बल्कि जलभराव और बाढ़ की समस्या में भी कमी आएगी, जिससे कृषि उत्पादन और ग्रामीण जीवन स्तर में सुधार की उम्मीद है।

कैंसर इलाज में नई क्रांति: MP में पहली बार इंदौर के MGM मेडिकल कॉलेज में जीनोम सिक्वेंसिंग

इंदौर. इंदौर के एमजीएम मेडिकल कलेज में जल्द ही कैंसर की जीनोम सिक्वेंसिंग लैब शुरु होगी। यह प्रदेश की पहली लैब होगी। गौरतलब है कि अभी कैंसर के सेल व डीएनए में म्युटेशन की जांच के लिए इंदौर ही नहीं पूरे मप्र से दिल्ली के टाटा मेमोरियल अस्पताल व दिल्ली व बेंगलुरु के निजी अस्पतालों के जांच केंद्रों पर सैंपल भेजे जाते है। ऐसे में अब यह सुविधा इंदौर में ही मिल सकेगी। अभी सैंपल को अन्य शहरों में जांच के लिए भेजने के बाद उसकी रिपोर्ट आने में ही 10 से 15 दिन का समय लग जाता है, लेकिन इंदौर के एमजीएम मेडिकल कालेज में शुरु होने वाली इस लैब में पांच से सात दिन में कैंसर सेल के म्युटेशन की जांच रिपोर्ट मिल सकेगी। हालांकि शुरुआत में इस लैब में स्तन कैंसर व मस्तिष्क कैंसर के सेल की जीनोम सिक्वेंसिंग जांच होगी। मल्टी डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट तैयार इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च व डिपार्टमेंट आफ हेल्थ रिसर्च द्वारा 2014 में इंदौर के एमजीएम मेडिकल कालेज के लिए यह प्रोजेक्ट तैयार किया था, लेकिन अब जाकर यहां मल्टी डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट (एमडीआरयू) शुरु हुई है। इस यूनिट में अब कैंसर संबंधित रिसर्च व जांच की प्रक्रिया शुरु होगी। इसके लिए उपकरण खरीदे जा चुके है और जल्द इनका इंस्टालेशन किया जाएगा। वर्तमान में इस रिसर्च यूनिट में पांच लोगों का स्टाफ नियुक्त है। इसमें दो वैज्ञानिक व तीन टेक्नीशियन है। साढ़े तीन करोड़ की लागत से आए उपकरण इस रिसर्च यूनिट में केंद्र सरकार के प्रोजेक्ट के साढ़े तीन करोड़ रुपये की लागत से उपकरण बुलवाए गए है। इनमें नेक्स्ट जनरेशन जीन सिक्वेंसिंग व पीसीआर-आरपीसीआर जांच मशीने है। इसके अलावा 20 लाख रुपये के सेल की जांच में उपयोग होने वाले रीएजेंट व कंज्युमेंबल मिले है। ये रीएजेंट फिलहाल स्तन कैंसर व मस्तिष्क कैंसर की जांच में ही काम आएंगे। अन्य कैंसर संबंधित जांच के लिए मेडिकल कालेज को अन्य रीएजेंट खरीदना होंगे। डायबिटीज, थायराइड और अन्य बीमारियों पर भी होगा शोध भविष्य में इस लैब में मुंह, पेट, सर्वाइकल सहित अन्य कैंसर की जांच भी हो सकेगी। इसके अलावा नान कम्युनिकेबल डिसिज जिसमें हृदय रोग व मेटाबालिक डिसआर्डर जैसे डायबीटिज, थायराइड जैसी बीमारियों पर शोध किया जा सकेगा। इसके अलावा इन बीमारियों के कारण जानने के लिए जीनोम सिक्वेंसिंग जांच की जा सकेगी। डॉ. तरुण वर्मा, विज्ञानी, एमडीआरयू, एमजीएम मेडिकल कॉलेज के अनुसार, इस लैब में मॉलीक्युलर बायोलॉजी के तहत कैंसर सेल के डीएनए, आरएनए व प्रोटीन की जांच होगी, जिससे इन बीमारियों के भविष्य में उपचार में मदद मिल सकेगी। शुरुआती 200 मरीजों के लिए निशुल्क जांच की सुविधा केंद्र से मिले रीएजेंट के माध्यम से फिलहाल रिसर्च के दौरान जिन मरीजों के सैंपल लिए जाएंगे, शुरुआत में स्तन व मस्तिष्क कैंसर से संबंधित करीब 200 मरीजों से जांच शुल्क नहीं लिया जाएगा। रिसर्च के अलावा यदि कोई अन्य मरीज अपने सैंपल की जांच करवाना चाहेगा तो उसे एक तय शुल्क देना होगा। यह जानकारी डॉ. शिल्पा मिश्रा शुक्ला, सीनियर साइंटिस्ट, एमडीआरयू, एमजीएम मेडिकल कालेज द्वारा दी गई है।

BCCI ने T20 World Cup की शुरुआत में टीम मैनेजमेंट की मांग खारिज की, खिलाड़ियों को दिया झटका

नई दिल्ली T20 World Cup 2026 की शुरुआत में ही भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई ने भारतीय खिलाड़ियों की एक मांग को ठुकरा दिया है। टीम मैनेजमेंट की ओर से बीसीसीआई से पूछा गया था कि क्या भारतीय खिलाड़ी टी20 विश्व कप में अपने परिवार के साथ ट्रेवल कर सकते हैं तो इस अनुरोध को बोर्ड ने ठुकरा दिया। बीसीसीआई ने पहले ही नियम बना दिए थे कि खिलाड़ियों के साथ उनका परिवार कब कितने दिन तक ठहर सकता है। इसी पॉलिसी के मुताबिक, T20 वर्ल्ड कप कैंपेन के दौरान इंडियन क्रिकेटरों के साथ उनके परिवारों को रहने की इजाजत नहीं होगी। एक मीडिया रिपोर्ट की मानें तो टीम मैनेजमेंट ने क्रिकेटरों के परिवारों को उनके साथ रहने की इजाजत देने के बारे में जानकारी मांगी थी। BCCI की वैसे कोई रोक नहीं है, लेकिन समय-सीमा जरूर निर्धारित की हुई है। खिलाड़ियों को उनके परिवारों (पार्टनर और बच्चों) को ज्यादा से ज्यादा 14 दिनों तक अपने साथ रखने की इजाजत देता है, लेकिन इसके लिए शर्त ये है कि कोई विदेशी दौरा 45 दिनों से ज्यादा का हो। भारत में टी20 विश्व कप खेला जा रहा है और एक महीने तक ही ये टूर्नामेंट चलने वाला है तो बोर्ड ने टीम मैनेजमेंट की ओर से आई इस सिफारिश को खारिज कर दिया। BCCI के एक सोर्स ने इंडियन एक्सप्रेस को कन्फर्म किया, “इंडियन टीम मैनेजमेंट ने BCCI से पूछा था कि क्या पत्नियां और मंगेतर टीम के साथ ट्रैवल कर सकती हैं और क्या वे उनके साथ रह भी सकती हैं? बोर्ड ने साफ कर दिया है कि परिवार प्लेयर्स के साथ नहीं रहेंगे। हालांकि, अगर वे चाहें तो अलग से इंतजाम कर सकते हैं।” बीसीसीआई ने पिछले साल ही कई गाइडलाइन्स खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ के लिए बनाई थीं, जिन पर बोर्ड अभी भी अड़िग है। टीम इंडिया की बात करें तो लीग फेज में भारत को चार मुकाबले खेलने थे। इनमें से एक मैच खेला जा चुका है। एक मैच कोलंबो में है और दो मैच ही भारत में भारतीय टीम के लीग फेज के बाकी हैं। इसके बाद सुपर 8 के मैच शुरू हो जाएंगे। वर्ल्ड कप से पहले कई द्विपक्षीय सीरीज भी खेली गई थीं। उनमें भी खिलाड़ियों को अपने परिवार को साथ रखने की इजाजत नहीं थी। सूर्यकुमार यादव की कप्तानी वाली टीम पूरे टूर्नामेंट के दौरान प्राइवेट चार्टर प्लेन से ट्रेवल करने वाली है। कुछ खिलाड़ियों के पर्सनल शेफ भी साथ में ट्रेवल कर रहे हैं, लेकिन वे नजदीक के होटल में ठहरते हैं।

पं. दीनदयाल उपाध्यायः एकात्म मानवदर्शन के प्रणेता और समर्थ भारत निर्माण के चिंतक -डॉ. मोहन यादव

भोपाल  व्यक्ति से समाज और समाज से राष्ट्र निर्माण का मार्ग दिखाने वाले, विलक्षण व्यक्तित्व के धनी, एकात्म मानव दर्शन और अंत्योदय के प्रणेता पं. दीनदयाल उपाध्याय जी के चरणों में कोटिशः नमन।  पं. दीनदयाल जी का जीवन भारत राष्ट्र को दिशा देने वाला प्रकाश स्तंभ है। वे एक ऐसे ऋषि राजनेता थे जो समाज, संस्कृति और राष्ट्र के समग्र उत्थान के लिए समर्पित रहे। उन्होंने राजनीति को राष्ट्रधर्म की साधना का माध्यम माना। उनका स्पष्ट मत था कि स्वतंत्र भारत की यात्रा भारतीय दर्शन, संस्कृति और परंपरा के अनुरूप होनी चाहिए। पं. दीनदयाल जी ने राजनीतिक चिंतन को भारतीय मूल्यों से जोड़ते हुए एकात्म मानव दर्शन का सूत्र दिया। इसमें व्यक्ति, समाज, राष्ट्र और सृष्टि के बीच समन्वय और संतुलन समाहित है। यह जीवन और संपूर्ण सृष्टि को एक सूत्र में पिरोता है। यही दर्शन व्यष्टि से समष्टि की रचना करता है। इसमें श्रीकृष्ण के वसुधैव कुटुम्बकम के भाव से लेकर आज के वैश्विक परिदृश्य का समावेश है। पं. दीनदयाल जी भारत के भविष्य की कल्पना चतुर्पुरुषार्थ-धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के आधार पर की। उनका विश्वास था कि इन चारों का संतुलन ही व्यक्ति और समाज को पूर्णता की ओर ले जा सकता है। यदि व्यक्ति और समाज को विकास के समान अवसर दिए जाएँ, तो स्वावलंबी और समर्थ समाज का निर्माण संभव है। पं. दीनदयाल जी का मानना था कि राजनीति का अंतिम लक्ष्य सशक्त, समरस और स्वाभिमानी राष्ट्र का निर्माण है। उनका विकास मॉडल केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं था, बल्कि उसमें सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक संतुलन का समावेश था। वे चाहते थे कि विकास का लाभ अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे, तभी वह सच्चा विकास कहलाएगा। यही अंत्योदय का भाव है। हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत जिस विकास पथ पर अग्रसर है, उसके मूल में पं. दीनदयाल जी का चिंतन है। विरासत से विकास, आत्मनिर्भर भारत, वोकल फॉर लोकल और सबका साथ – सबका विकास, यह सभी एकात्म मानव दर्शन के आधुनिक रूप हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी जी का संकल्प है कि वर्ष 2047, स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष तक भारत को विश्व की सर्वोच्च शक्ति के रूप में स्थापित किया जाए। यह संकल्प पं. दीनदयाल जी के स्वप्निल भारत की ही साकार अभिव्यक्ति है। मुझे बताते हुए प्रसन्नता है कि प्रधानमंत्री श्री मोदी जी के आत्मनिर्भर और विकसित भारत निर्माण की परिकल्पना को मूर्तरूप देने की दिशा में प्रदेश के प्रत्येक अंचल को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। प्रदेश के हर क्षेत्र की क्षमता, मेधा और दक्षता को अवसर प्रदान करने के लिए जहां रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव का नवाचार किया गया, वहीं भोपाल में संपन्न हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से स्थानीय उद्योगों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। निवेश के लिये हमने यूके, जर्मनी, जापान और दावोस आदि यात्राएं कीं और हैदराबाद, कोयंबटूर सहित मुंबई में रोड-शो के माध्यम से उद्योगपतियों को आमंत्रित किया। यह क्षेत्रीय से वैश्विक स्तर तक उद्योग को जोड़ने का पहला सशक्त प्रयास है। मुझे यह बताते हुए संतोष है कि माननीय प्रधानमंत्री श्री मोदी जी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश में पं. दीनदयाल उपाध्याय जी के चिंतन को व्यवहार में उतारने का प्रयत्न किया जा रहा है। समरस, संवेदनशील और उत्तरदायी शासन के माध्यम से अंतिम व्यक्ति तक योजनाएं और विकास के लक्ष्य धरातल पर पहुंच रहे हैं। प्रदेश में गरीब कल्याण, किसान कल्याण, युवा शक्ति और नारी सशक्तिकरण को केन्द्र में रखकर 4 मिशन के माध्यम से कार्य किया जा रहा है। इससे समाज के सभी वर्गों के कल्याण का लक्ष्य पूर्ण होगा।  पं. दीनदयाल जी ने आर्थिक विकास के लिए कृषि, उद्योग, परिवहन, व्यापार समाज, सुरक्षा एवं सेवा का एक स्पष्ट और व्यावहारिक क्रम बताया। इस क्रम में कृषि प्रधान देश भारत में खेती को प्रथम स्थान देने की आवश्यकता व्यक्त की। उनका मानना था यदि देश में कृषि सुदृढ़ होगी, तो किसानों की आय बढ़ेगी, ग्रामीण जीवन में स्थिरता आएगी और उद्योगों को कच्चा माल एवं श्रम दोनों सहज रूप से उपलब्ध होगा। इससे किसान, उपभोक्ता और समाज तीनों का संतुलन बना रहेगा। पं. दीनदयाल जी खेती की मजबूती और किसानों की समृद्धि को समग्र विकास का आधार मानते थे। मुझे यह बताते हुए संतोष है कि मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री श्री मोदी जी के मार्गदर्शन में किसानों के स्वाभिमान, सुरक्षित जीवन और आत्मनिर्भरता को केन्द्र में रखकर वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसमें आधुनिक तकनीक, उन्नत बीज, सिंचाई, भंडारण और बाजार तक बेहतर पहुंच के माध्यम से खेती को लाभ का व्यवसाय बनाया जाएगा। कृषि आजीविका के साधन के साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। कृषि क्षेत्र के सशक्तिकरण में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। मुझे बताते हुए प्रसन्नता है कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने वर्ष 2025-26 किसानों के कल्याण के लिए समर्पित किया है। मध्यप्रदेश में पार्वती-कालीसिंध-चंबल तथा केन-बेतवा नदी लिंक राष्ट्रीय परियोजना सहित ताप्ती ग्राउंड वॉटर रिचार्ज मेगा परियोजना से प्रदेश के 25 जिलों में 16 लाख हेक्टेयर से अधिक अतिरिक्त कृषि रकबा सिंचित होगा। प्रदेश के किसानों के समग्र कल्याण के लिए हर जरूरी कदम उठाया जायेगा। प्रदेश में श्रीअन्न, सरसों और चना अनुसंधान केंद्र की स्थापना की जा रही है। इससे श्रीअन्न का उत्पादन और पोषण सुरक्षा को नई ऊंचाई मिलेगी। इन केंद्रों के जरिए फसलों की गुणवत्ता और पैदावार बढ़ाने पर विशेष बल दिया जाएगा। प्रदेश के 30 लाख से अधिक किसानों को अगले तीन साल में सोलर पॉवर पम्प दिये जायेंगे। प्रदेश में सिंचाई का रकबा 65 लाख हैक्टेयर से बढ़ाकर 100 लाख हैक्टेयर किये जाने का लक्ष्य है। पं. दीनदयाल उपाध्याय जी ने स्वाभिमानी, स्वावलंबी और विश्व कल्याण में अग्रणी भारत की कल्पना की थी। माननीय प्रधानमंत्री श्री मोदी जी के नेतृत्व में देश इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। उनका जीवन और दर्शन हम सबको राष्ट्रधर्म के पथ पर निरंतर अग्रसर करता रहेगा।  राष्ट्र निर्माण के अमर साधक पं. दीनदयाल जी की पुण्यतिथि पर पुनः कोटिशः वंदन।   

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की मछुआ कल्याण तथा मत्स्य विकास विभाग की समीक्षा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार प्रदेश के सभी किसानों और मछुआरों की आर्थिक समृद्धि के लिए संकल्प के साथ कार्य कर रही है। मध्यप्रदेश कृषि उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य है, इसके साथ हमें मत्स्य उत्पादन में भी सक्रियता से कार्य कर आने वाले वर्षों में इसे दोगुना करने की दिशा में काम करना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मत्स्य पालकों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए प्रदेश में मछली पालन के साथ ही एक्वाकल्चर के क्षेत्र में भी कार्य किया जाए। प्रदेश में ऐसा इको सिस्टम तैयार किया जाए, जिससे मछुआरों का आर्थिक सशक्तिकरण हो सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को मंत्रालय में मछुआ कल्याण तथा मत्स्य विकास विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को यह निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार कृषक कल्याण को समर्पित करते हुए यह वर्ष मना रही है। मध्यप्रदेश को मत्स्य पालन के क्षेत्र में देश का नंबर-1 राज्य बनाने के लिए कार्य योजना तैयार करें। मछुआ सम्मेलन आयोजित कर मत्स्य पालन में बेहतर कार्य करने वालों को प्रोत्साहित किया जाए। सीड प्रोडक्शन बढ़ाने की दिशा में कार्य करें। प्रदेश में संचालित मत्स्य महासंघ के सुव्यवस्थित उपयोग के लिए भी कार्य करने के निर्देश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठक में दिए। उन्होंने कहा कि कम भू-जल स्तर वाले जिलों में फॉर्म पॉन्ड मॉडल के माध्यम से मत्स्य उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए एक जिले को मॉडल के रूप में तैयार किया जाए, जिसमें मत्स्य उत्पादन के साथ ही सिंघाड़ा, कमल गट्टा, मखाना सहित अन्य एक्वाकल्चर आधारित गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को समीक्षा बैठक में विभागीय अधिकारियों ने जानकारी दी कि प्रदेश में मत्स्य उत्पादन बढ़ाने की दिशा में मध्यप्रदेश केज कल्चर नीति पर कार्य किया जा रहा है। इसमें 10 हजार केज हितग्राही मूलक योजना में और 90 हजार केज उद्यमी मॉडल के अंतर्गत तैयार किए जाएंगे। मुख्यमंत्री मछुआ समृद्धि योजना के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों के विषय में भी अधिकारियों ने विस्तार से जानकारी दी। बैठक में भोपाल में प्रस्तावित विशेष प्रोजेक्ट इंटीग्रेडेट एक्वा पार्क एंड रिसर्च सेंटर की जानकारी भी दी गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संभाग स्तर पर मछली घर तैयार करने की कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वित्तीय वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 के विभागीय योजनाओं की प्रगति, किसान क्रेडिट कार्ड की प्रगति, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना, मुख्यमंत्री मछुआ समृद्धि योजना, भारत सरकार द्वारा स्वीकृत विशेष प्रोजेक्ट, केज कल्चर इंदिरा सागर जलाशय, टेक्नोलॉजी डिफ्यूशन सेंटर, रिजर्वायर कलस्टर आधारित मत्स्य पालन और समन्वित मछली घर एवं अनुसंधान केंद्र का बैठक में रिव्यू किया। इस अवसर पर मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  नारायण सिंह पंवार, मुख्य सचिव  अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय)  नीरज मंडलोई एवं अपर मुख्य सचिव  अशोक बर्णवाल सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। 

गाजा पर इजरायल का कदम, ट्रंप की मीटिंग में पाकिस्तान समेत 8 मुस्लिम देश रहेंगे मौजूद

गाजा  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चौंकाने वाले फैसले लेने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने गाजा के मसले पर बोर्ड ऑफ पीस का गठन किया है और इसकी पहली मीटिंग 19 फरवरी को होने वाली है। अमेरिकी राष्ट्रपति का कहना है कि इस बैठक में चर्चा होगी कि कैसे गाजा में विकास के काम दोबारा शुरू किए जाएं और वहां जंग समाप्त हो। इस बोर्ड में इजरायल भी सदस्य है, लेकिन उसे ही इसमें झटका भी लगता दिख रहा है। मामला यह है कि वह पाकिस्तान को कभी भी तवज्जो नहीं देना चाहता, लेकिन इस बोर्ड में डोनाल्ड ट्रंप की पहल पर पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ भी शामिल होंगे। यही नहीं तुर्की भी इसमें शामिल रहेगा, जो फिलिस्तीन के मसले पर खुलकर इजरायल का विरोधी रहा है। ऐसी स्थिति में यदि गाजा के भविष्य को लेकर बन रहे किसी प्लान में यदि शहबाज शरीफ शामिल होंगे तो यह इजरायल के लिए चिंता की बात होगी। वह पहले भी कह चुका है कि हम पाकिस्तान को शामिल नहीं करना चाहते। फिर भी उसकी एंट्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए चिंता की बात है। पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ 18 फरवरी को ही वॉशिंगटन पहुंच जाएंगे और 19 को होने वाले समिट में हिस्सा लेंगे। यह आयोजन यूएस इंस्टिट्यूट ऑफ पीस में होना है। इस बैठक में चर्चा होगी कि कैसे गाजा में जंग के बाद पुनर्निर्माण शुरू किया जाए। इस बैठक में कई देशों के नेता और कुछ अंतरराष्ट्रीय एक्सपर्ट और हस्तियां भी इसमें रहेंगी। इस मीटिंग में पाकिस्तान और तुर्की समेत कुल 8 मुसलमान देश शामिल होंगे। इनमें सऊदी अरब, मिस्र, जॉर्डन, इंडोनेशिया, कतर और यूएई हैं। दरअसल इजरायल की चिंता यह है कि मीटिंग में शामिल सभी मुसलमान देश एकजुट होकर कोई स्टैंड ले सकते हैं। खासतौर पर सीजफायर के उल्लंघन को लेकर इजरायल पर कठिन शर्तें थोपे जाने का खतरा है। इसके अलावा कुछ गारंटी भी उससे ली जा सकती है। मुसलमान देशों का कहना है कि गाजा में पुनर्निर्माण और शांति तभी संभव है, जब इजरायल के ऐक्शन पर कुछ लगाम लग सके। 22 देशों को अमेरिका की ओर से मिला था न्योता अमेरिका की ओर से कुल 22 देशों को बोर्ड ऑफ पीस का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया गया है। इनमें से ज्यादातर ने सहमति जताई है, लेकिन फ्रांस जैसे उसके मित्र देश ही दूरी बना रहे हैं। इसके अलावा भारत ने भी फिलहाल देखो और इंतजार करो की नीति अपना ली है। अब तक भारत की ओर से इसमें हिस्सा लेने की पुष्टि नहीं की गई है। माना जा रहा है कि भारत नहीं चाहता कि वह ऐसे किसी प्रयास में आगे दिखे, जिसे भविष्य में संयुक्त राष्ट्र संघ के विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है।

आयुष्मान योजना से उपचार में मध्यप्रदेश देश में प्रथम

भोपाल . मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में गेहूं का उपार्जन 7 फरवरी से आरंभ हो गया है, यह 7 मार्च तक जारी रहेगा। प्रदेश में 3186 पंजीयन केंद्र बनाए गए हैं। गेहूं का समर्थन मूल्य गत वर्ष से 160 रुपए अधिक है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में सकारात्मक संदेश मिला है। प्रदेश में मातृ मृत्यु दर 173 से घटकर 142 और शिशु मृत्यु दर 41 से घटकर 37 हो गई है। टी.बी. उन्मूलन कार्यक्रम में मध्यप्रदेश देश के 5 शीर्ष राज्यों में शामिल है। सिकल सेल उन्मूलन के लिए प्रदेश में व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। आयुष्मान योजना के माध्यम से उपचार में मध्यप्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है। एयर एंबुलेंस सेवा और राहवीर योजना के क्रियान्वयन में भी निरंतर प्रगति हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले हुए वंदे मातरम के सामूहिक गान के बाद, अपने संबोधन में यह जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आहवान किया कि सभी जिलों में विक्रमोत्सव और गुड़ी पड़वा का पर्व उल्लास और उत्साह से मनाया जाए। उन्होंने कहा कि इसके तत्काल बाद प्रदेश में जल गंगा अभियान आरंभ हो जाएगा जो 3 महीने तक जारी रहेगा। उन्होंने मंत्रीगण को अपने-अपने जिलों में अभियान की गतिविधियों के व्यवस्थित संचालन के लिए आवश्यक समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश को नक्सलियों से मुक्त करने के उपलक्ष में 9 फरवरी को बालाघाट में आयोजित कार्यक्रम के संबंध में जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महाकौशल क्षेत्र की कृषि कैबिनेट बालाघाट में की जाएगी, जो पूरे क्षेत्र को विकास की मुख्य धारा में लाने के संकल्प का प्रतीक होगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश को रेल के क्षेत्र में सिंगरौली जबलपुर ट्रेन की सौगात प्राप्त होने वाली है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश में वन्य जीव पर्यटन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से रेस्क्यू सेंटर और जू एक साथ विकसित करने की योजना है, इसके अंतर्गत जबलपुर और उज्जैन में गतिविधियां आरंभ हुई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जहां अभयारण्य हैं वहां रेस्क्यू सेंटर की व्यवस्था की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन्य जीव पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिये पर्यटन, वन और संस्कृति विभाग समन्वित रूप से कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में चीतों के परिवार में वृद्धि की बधाई दी। उन्होंने कहा कि देश-दुनिया मैं विलुप्त हो रही वन्य प्रजाति पुनर्जीवित हो रही है। प्रदेश में चीतों की संख्या 35 हो गई है। उन्होंने बताया कि जल्द ही और भी खुशखबरी मिलेगी। उन्होंने बताया कि इंदौर जू से भी व्हाइट टाइगर की संख्या में वृद्धि का शुभ समाचार है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री  भूपेंद्र यादव से प्रदेश में वन्य जीवों के पुनर्स्थापना के संबंध में हुई चर्चा के परिणाम स्वरूप अब प्रदेश में जंगली भैंसा भी लाए जा रहे हैं। साथ ही बोत्सवाना से 8 चीते 28 फरवरी को प्रदेश में लाऐ जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि धान का समर्थन मूल्य 2369 रुपए रखा गया है, जो पिछली बार की एमएसपी से अधिक है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 51 लाख 74 हजार मीट्रिक टन धान का उत्पादन हुआ। प्रदेश में 8 लाख 59 हजार से अधिक किसानों ने पंजीयन कराया, जिसमें से 7 लाख 89 हजार से अधिक किसानों ने स्पॉट बुकिंग कर धान उत्पादन में अपना योगदान दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा इस वर्ष प्रदेश में गेहूं की पर्याप्त पैदावार होने की संभावना है, राज्य सरकार के पास भंडारण की समुचित व्यवस्था है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मंत्रीगण अपने-अपने क्षेत्र में वस्त्र उद्योग इकाई स्थापना की संभावनाओं को भी देखें तथा मूलभूत आवश्यकता वाले रोजगारपरक टेक्सटाइल यूनिटों की अपने-अपने क्षेत्रों में स्थापना के लिए प्रयास करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गत दिवस हुई उनकी हरिद्वार यात्रा के संबंध में भी जानकारी दी।  

बजट प्रस्तावों में सभी क्षेत्रों और वर्गों के विकास तथा कल्याण का रखा गया है ध्यान: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल . मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट प्रस्तावों में सभी क्षेत्रों और वर्गों के विकास तथा कल्याण का ध्यान रखा गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बजट प्रस्तावों को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में बेहतर बताते हुए उप मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा के दृष्टिकोण तथा प्रस्ताव तैयार करने में विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों द्वारा किए गए परिश्रम की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के समक्ष मंगलवार को वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट प्रस्तावों का प्रेजेंटेशन दिया गया। मंत्रालय में हुई बैठक में उप मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा, मुख्य सचिव  अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय)  नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव (वित्त)  मनीष रस्तोगी तथा वित्त विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे। मंत्रि-परिषद के समक्ष भी आज ही बजट प्रस्तावों का प्रेजेंटेशन हुआ। मंत्रि-परिषद द्वारा अनुमोदित बजट 18 फरवरी को उप मुख्यंमत्री  देवड़ा द्वारा विधान सभा में प्रस्तुत किया जायेगा।  

हनीट्रैप केस का खुलासा: शिवपुरी में पति करता था टारगेटिंग, पत्नी फंसाती थी शिकार

 शिवपुरी.  देहात थाना क्षेत्र में बदरवास के गल्ला व्यवसायी को हनीट्रैप के जाल में फंसाकर उसे ब्लैकमेल करने और उससे पैसे ऐंठने वाले गिरोह के पांच सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। गिरोह में शामिल महिला का पति और उसके दोस्त पैसे वाला शिकार ढूंढते थे, जबकि महिला उनसे दोस्ती कर प्रेम संबंध स्थापित करने का प्रयास करती थी। जब शिकार जाल में फंस जाता तो महिला उसे मिलने के लिए अपने पास बुलाती थी। इसी दौरान उसका वीडियो बनाकर उसे ब्लैकमेल किया जाता था। बदरवास रेलवे स्टेशन रोड निवासी गल्ला व्यवसायी 26 वर्षीय आदित्य जैन के पास गत 26 जनवरी को अंजली नाम की एक युवती का फोन आया और उसने मित्रता की पेशकश की। आदित्य उसकी बातों में आ गया और उससे बात करने लगा। इंदौर में वकील को हनीट्रैप में फंसाकर 10 लाख रुपये मांगे, पहले खुद को पीड़‍ित बता मोबाइल पर भेजे थे अश्लील फोटो 31 जनवरी को युवती ने मिलने की इच्छा जाहिर की और उसे बड़ौदी स्थित पानी की टंकी पर बुलाया। आदित्य किराए की कार लेकर चालक विनोद राठौर के साथ टंकी पर पहुंचा, जहां उसे युवती मिली, वह उसकी कार में बैठ गई और शहर भर में घुमाती रही। कुछ घंटे बाद युवती ने अपने साथियों को फोन लगाया और कार से चार लोग बड़े गांव के पास आ गए। चारों ने आदित्य के साथ मारपीट की। इसके बाद चारों उसे कार में बिठाकर बांकड़े हनुमान मंदिर की तरफ ले गए, जहां उसका वीडियो बनाकर उसे ब्लैकमेल करते हुए उससे एक लाख पांच हजार 640 रुपये फोन पे करवाए। आदित्य ने पुलिस से शिकायत की। इसके बाद हनीट्रैप गिरोह पकड़ा गया है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि यह गिरोह इससे पहले जिले के विभिन्न क्षेत्रों के कई लोगों को अपना शिकार बना चुकी है। बदरवास में बैठे गैंग लीडर ने च़िह्नित किया था शिकार पुलिस के अनुसार, ग्राम ऐनवारा बदरवास निवासी इस गैंग के लीडर चंद्रपाल सिंह धाकड़ ने आदित्य जैन के बारे में जानकारी जुटाई। उसका फोन नंबर हासिल किया और माधव नगर निवासी राजा ओझा और उसकी पत्नी कल्पना रजक उर्फ अंजली को उपलब्ध करवाया। कल्पना को पूरी प्लानिंग समझाई। आदित्य इसके बाद कल्पना उर्फ अंजली के जाल में फंस गया तो तीनों ने अपने दो अन्य साथी पवन रावत निवासी ढकरोरा खोरघार थाना सिरसौद व विकास रावत निवासी बड़ौदी शिवपुरी के साथ मिलकर घटना को अंजाम दिया।  

इंदौर मामला: कोचिंग सेंटर में छात्रा से छेड़छाड़ का आरोप, गुस्साए परिजनों ने मैनेजर को पीटा

इंदौर. अन्नपूर्णा थाना क्षेत्र में कोचिंग सेंटर में छात्रा के साथ छेड़छाड़ की घटना से हंगामा हो गया। रहवासी और स्वजन ने आरोपित को कोचिंग में ही पकड़ लिया और जमकर पिटाई कर दी। उसके खिलाफ पाक्सो एक्ट और छेड़छाड़ की धारा में केस दर्ज करवाया है। कोचिंग के डायरेक्टर को भी नोटिस जारी किए जा रहे हैं। मैनेजर पर अश्लील हरकत का आरोप डीसीपी ऋषिकेश मीणा (कृष्ण लालचंदानी) के अनुसार घटना नरेंद्र तिवारी मार्ग स्थित केटेलाइजर कोचिंग सेंटर की है। क्षेत्र में रहने वाले व्यक्ति की दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली बेटी कोचिंग में आती है। उसका आरोप है कि सोमवार को वह कोचिंग में ही थी। उसी वक्त ब्रांच मैनेजर आदेश जोशी आया और छात्रा को लाबी में ले गया। उसने अश्लील हरकत करने की कोशिश की। छात्रा के बैग से परफ्यूम निकाल कर लगा लिया।  

खुशखबरी! 17 हजार पदों पर भर्ती, वेतन में भारी बढ़ोतरी

पटना बिहार सरकार ने राज्य की आंतरिक सुरक्षा और विधि-व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से स्पेशल ऑक्जिलरी पुलिस (SAP) के कुनबे में ऐतिहासिक विस्तार करने का निर्णय लिया है। राज्य कैबिनेट से हरी झंडी मिलने के बाद, अब सैप जवानों की संख्या में 10 गुना तक की वृद्धि की जाएगी। वर्तमान में तैनात 1,717 जवानों की संख्या को बढ़ाकर अब 17,000 करने की स्वीकृति दी गई है। सेवानिवृत्त सैनिकों के साथ अर्धसैनिक बलों को भी मौका इस बार बहाली की शर्तों में एक बड़ा बदलाव किया गया है। अब तक सैप में केवल भारतीय सेना के सेवानिवृत्त जवानों को ही अनुबंध पर रखा जाता था, लेकिन अब सेवानिवृत्त अर्धसैनिक बलों के जवानों को भी इसमें शामिल होने का अवसर मिलेगा। विभाग के अनुसार, नए रंगरूटों के प्रशिक्षण के दौरान फील्ड ड्यूटी में आ रही कमी को पूरा करने के लिए यह फैसला लिया गया है। पदों का विवरण और संरचना वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान होने वाली इस बहाली में पदों का वर्गीकरण कुछ इस प्रकार है: पद का नाम                            प्रस्तावित संख्या जेसीओ (JCO)                         150 सैप जवान (SAP Jawans)          16,300 रसोइया (Cook)                         550 कुल पद                                   17,000 मानदेय में वृद्धि: अब मिलेगा बेहतर वेतन सरकार ने न केवल पदों की संख्या बढ़ाई है, बल्कि जवानों के मानदेय  में भी आकर्षक वृद्धि की है। संशोधित दरों के अनुसार मासिक भुगतान निम्नवत होगा: JCO: ₹35,000 प्रति माह सैप जवान: ₹30,000 प्रति माह रसोइया: ₹25,000 प्रति माह विभागीय पक्ष: अधिकारियों का मानना है कि नवनियुक्त सिपाहियों के प्रशिक्षण अवधि में होने के कारण फील्ड में ‘एक्टिव वर्कफोर्स’ की कमी महसूस की जा रही थी। 17 हजार अनुभवी पूर्व सैनिकों की तैनाती से राज्य की पुलिसिंग और विशेष अभियानों को नई धार मिलेगी।

सेफर इंटरनेट डे 2026 पर एआई और साइबर जोखिमों को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

भोपाल. सेफर इंटरनेट डे-2026 के अवसर पर इस वर्ष की निर्धारित थीम “एआई और उभरते साइबर जोखिम” के तहत राष्ट्रीय सूचना-विज्ञान केंद्र (एनआईसी) मध्यप्रदेश राज्य इकाई द्वारा जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य नागरिकों को इंटरनेट के सुरक्षित, जिम्मेदार और जागरूक उपयोग के लिए प्रेरित करना रहा। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि तकनीकी शिक्षा निदेशालय के आयुक्त  अवधेश शर्मा उपस्थित रहे तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्य सूचना विज्ञान अधिकारी  कमलेश जोगी ने की। इस अवसर पर एनआईसी राज्य इकाई के अधिकारियों और कर्मचारियों ने सहभागिता की। साथ ही प्रदेश के सभी शासकीय एवं स्वायत्त इंजीनियरिंग तथा पॉलिटेक्निक संस्थानों के शिक्षक एवं विद्यार्थी वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाने पर जोर दिया। वक्ताओं ने बताया कि वर्तमान समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग जहां विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है, वहीं इसके दुरुपयोग से साइबर अपराधों के नए स्वरूप सामने आ रहे हैं। एआई-सक्षम धोखाधड़ी, डीपफेक तकनीक, वॉयस क्लोनिंग, व्यक्तिगत संदेशों के माध्यम से ठगी और स्वचालित साइबर हमलों जैसे खतरों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने साइबर स्वच्छता की सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए मजबूत पासवर्ड का उपयोग, संदिग्ध लिंक या संदेशों से सावधानी, सोशल मीडिया पर निजी जानकारी साझा करने से बचाव तथा नियमित रूप से डिजिटल उपकरणों के अपडेट रखने जैसे उपायों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में नागरिकों को सुरक्षित इंटरनेट उपयोग के प्रति जागरूक रहना अत्यंत आवश्यक है। इस अवसर पर बताया गया कि सेफर इंटरनेट डे प्रत्येक वर्ष फरवरी के दूसरे मंगलवार को विश्व के लगभग 160 देशों में मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य नागरिकों को इंटरनेट एवं डिजिटल तकनीक के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग के प्रति जागरूक करना है। कार्यक्रम के तहत प्रदेश के सभी जिलों में जिला प्रशासन एवं राष्ट्रीय सूचना-विज्ञान केंद्र के सहयोग से विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों और कार्यालयों में जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों, युवाओं एवं आम नागरिकों को साइबर सुरक्षा और जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार के प्रति प्रेरित किया गया। कार्यक्रम के अंत में सुरक्षित डिजिटल वातावरण के निर्माण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया गया तथा नागरिकों से साइबर अपराधों से बचाव के लिए सतर्क और जागरूक रहने की अपील की गई।  

15 फरवरी को संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल के मुख्य आतिथ्य में होगा कार्यक्रम का समापन

रायपुर. 13 फरवरी से सजेगा तीन दिवसीय ’मैनपाट महोत्सव’ का भव्य मंच छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले का मैनपाट एक प्रमुख हिल स्टेशन है, जिसे अपनी प्राकृतिक सुंदरता, ठंडी जलवायु और तिब्बती संस्कृति के कारण ’छत्तीसगढ़ का शिमला’ और ’छोटा तिब्बत’ भी कहा जाता है।  मैनपाट के रोपाखार जलाशय के समीप आगामी 13 से 15 फरवरी तक तीन दिवसीय ’मैनपाट महोत्सव’ का भव्य आयोजन होने जा रहा है। राज्य शासन के पर्यटन एवं संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस महोत्सव का मुख्य उद्देश्य मैनपाट को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाना तथा स्थानीय लोक कला व संस्कृति का संवर्धन करना है। 13 फरवरी से सजेगा तीन दिवसीय ’मैनपाट महोत्सव’ का भव्य मंच मुख्यमंत्री करेंगे शुभारंभ और सितारों से सजेगी शाम  मैनपाट महोत्सव का शुभारंभ 13 फरवरी को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मुख्य आतिथ्य एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल की अध्यक्षता में होगा। तीन दिनों तक चलने वाले इस सांस्कृतिक महाकुंभ में लोक गीत और आधुनिक संगीत का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। प्रथम दिन 13 फरवरी को भोजपुरी सुपरस्टार  मनोज तिवारी अपनी गायकी से दर्शकों का उत्साह बढ़ाएंगे। साथ ही, छत्तीसगढ़ी गायक सुनील सोनी और ओडिशा का प्रसिद्ध छऊ नृत्य लोक संस्कृति की छटा बिखेरेंगे। द्वितीय दिवस 14 फरवरी को छत्तीसगढ़ की सुप्रसिद्ध लोक गायिका अलका चंद्राकर और ’इंडियन आइडल’ फेम वैशाली रायकवार अपनी सुरीली आवाज से शाम को यादगार बनाएंगी। वहीं समापन दिवस 15 फरवरी को महोत्सव का मुख्य आकर्षण बॉलीवुड की मशहूर सिंगर कनिका कपूर होंगी। इसके साथ ही रायगढ़ घराने की कत्थक नृत्यांगना ज्योति वैष्णव और गायक आयुष नामदेव भी अपनी प्रस्तुतियां देंगे। साहसिक खेल और स्थानीय जायका मैनपाट महोत्सव केवल संगीत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यटकों के लिए मनोरंजन का पैकेज होगा। महोत्सव स्थल पर एडवेंचर एक्टिविटी में पर्यटकों के लिए बोटिंग, साहसिक खेल और पारंपरिक दंगल का आयोजन किया जाएगा। फूड ज़ोन में सरगुजा के पारंपरिक व्यंजनों के साथ-साथ विभिन्न लजीज पकवानों का आनंद लिया जा सकेगा। प्रदर्शनी एवं मेला में विभिन्न शासकीय विभागों द्वारा विकास प्रदर्शनी लगाई जाएगी, जहां शासन की योजनाओं और स्थानीय उत्पादों जैसे टाऊ और तिब्बती हस्तशिल्प का प्रदर्शन होगा। छत्तीसगढ़ का शिमला ’मैनपाट’ के प्रमुख आकर्षण अंबिकापुर मुख्यालय से लगभग 75 किलोमीटर दूर स्थित मैनपाट एक बेहद खूबसूरत हिल स्टेशन है, जोकि समुद्र तल से 3,781 फीट की ऊंचाई पर है। यहाँ के प्रमुख आकर्षणों में बौद्ध मंदिर, टाइगर पॉइंट, मेहता पॉइंट, मछली पॉइंट, और अनोखा जलजली शामिल हैं। यह स्थान तिब्बती संस्कृति, टाऊ की खेती और अद्भुत प्राकृतिक नजारों के लिए प्रसिद्ध है। मैनपाट के प्रमुख दर्शनीय स्थल तिब्बती शरणार्थी शिविर और बौद्ध मंदिर- मैनपाट में 1970 में बसाया गया एक बड़ा तिब्बती समुदाय है, जहां का थाकपो शेडुप्लिंग मठ (कैम्प नंबर 3) मुख्य आकर्षण है। टाइगर पॉइंट -200 फीट की ऊंचाई से गिरने वाला यह वॉटरफॉल (झरना) घने जंगलों से घिरा है। जलजली- यह एक भूगर्भीय आश्चर्य है जहाँ जमीन दलदली है और कूदने पर स्पंज की तरह हिलती है, इसे “म्यूजिकल लैंड“ भी कहते हैं। मछली पॉइंट एक बहुत ही सुंदर झरना और मछली पकड़ने के लिए प्रसिद्ध स्थान है। मेहता पॉइंट-घाटियों के शानदार और मनोरम दृश्य देखने के लिए एक बेहतरीन व्यू पॉइंट। उल्टा पानी- यहाँ का पानी ढलान के विपरीत दिशा में बहता है, जो एक अनसुलझा रहस्य है। सरभंजा जलप्रपात-ग्राम पंचायत से तकरीबन दो किलोमीटर ट्रैकिंग मार्ग से इस प्राकृतिक जलप्रपात तक पहुंचा जा सकता है। जुलाई से मार्च के बीच यहां का मौसम बहुत सुहावना रहता है। जोकि पर्यटकों को आकर्षित करता है स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहन जिला प्रशासन द्वारा मंच पर नामी कलाकारों के साथ-साथ स्थानीय स्कूली बच्चों और क्षेत्रीय कलाकारों को भी प्राथमिकता दी गई है, ताकि सरगुजा की माटी की प्रतिभा को उचित मंच मिल और स्थानीय कलाकारों का उत्साहवर्धन भी हो सके। कलेक्टर  अजीत वसंत के निर्देशन में मैनपाट महोत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। महोत्सव स्थल पर सुरक्षा, पार्किंग और पर्यटकों की सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। 15 फरवरी को समापन समारोह में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल के मुख्य आतिथ्य में कार्यक्रम सम्पन्न होगा।

Budget 2026 Rajasthan: रोजगार, किसानों और एक्सप्रेस-वे को लेकर अहम घोषणाओं के संकेत

जयपुर भजनलाल सरकार बुधवार को अपने कार्यकाल का तीसरा बजट पेश करने जा रही है। वित्त मंत्री दीया कुमारी सदन में आय-व्यय अनुमान पेश करेंगी। इस बजट से राजस्थान को अगले साल क्या मिलने वाला है, इस पर सभी की नजरें है। मौटे तौर पर बजट का फोकस किन सेक्टर्स पर होगा और कौन सी बड़ी घोषणाएं हो सकती हैं पढ़िए इस रिपोर्ट में… इस बार का बजट युवाओं, महिलाओं, किसानों, शहरी-ग्रामीण विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर पर केंद्रित रहने की संभावना है। सरकार की ओर से नई योजनाओं, भर्तियों और बड़े विकास कार्यों की घोषणाएं की जा सकती हैं। भर्ती प्रक्रिया में बदलाव, 1.50 लाख नई नौकरियां भजनलाल सरकार नौकरियों को लेकर लगातार बड़े दावे कर रही है। पिछले बजट में एक लाख नई नौकरियों का ऐलान किया गया था। इस बजट में करीब 1.50 लाख नई भर्तियों की घोषणा की जा सकती है। आरएएस और उच्च पदों को छोड़कर अधिकांश भर्तियों में इंटरव्यू खत्म कर केवल परीक्षा आधारित चयन लागू किया जा सकता है। मुख्यमंत्री फैलोशिप योजना के तहत चयनित युवाओं की संख्या बढ़ाने का भी एलान हो सकता है। सरकारी विभागों में कार्यरत संविदा कर्मचारियों की सैलेरी बढ़ाने का प्रावधान बजट में किया जा सकता है, वहीं सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं में 15 प्रतिशत बढ़ोतरी की घोषणा की संभावना है। इंफ्रा सेक्टर: 15 शहरों में ग्रीन फील्ड व सिटी इकोनॉमिक रीजन स्कीम राजस्थान में इंफ्रा सेक्टर के लिए बजट में कई बड़े ऐलान हो सकते हैं। इसमें बीकानेर, जैसलमेर, जोधपुर, सीकर, झालावाड़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, धौलपुर सहित 15 शहरों में रिंग रोड व नए ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस वे के लिए बजट का प्रावधान हो सकता है। इसके साथ ही प्रदेश की धार्मिक स्थलों से जुड़े शहरों के विकास के लिए ‘सिटी इकोनॉमिक रीजन’ में  ऐलान  किया जा सकता है। जयपुर में मेट्रो फेज टू के लिए तय रूट में एयरपोर्ट टर्मिनल्स को शामिल करने सहित- दूसरे चरण का का काम शुरू करने के लिए बजट का प्रावधान किया जा सकता है। जयपुर में पार्किंग से जुड़ी समस्या को लेकर पीपीपी पर नए पार्किंग जोन्स डवलप प्रोजेक्ट का एलान किया जा सकता है। वेडिंग डेस्टिनेशन साइट्स डवलप करने के लिए आर्थिक सहायता और शेखावाटी हैरिटेज टूरिज्म संरक्षण के लिए भी बजट में प्रावधान किए जाने की संभावना है। किसान: सम्मान निधि में बढ़ोतरी, बोनस में इजाफा किसान सम्मान निधि की राशि को चरणबद्ध तरीके से 12 हजार रुपये तक बढ़ाने की घोषणा संभव है। ब्याजमुक्त फसली कर्ज योजना का दायरा बढ़ेगा और लाखों नए किसानों को इससे जोड़ा जाएगा। एमएसपी पर गेहूं समेत कुछ फसलों पर बोनस, बाजरा और ज्वार की सरकारी खरीद, हाईटेक खेती योजनाओं और नई सिंचाई परियोजनाओं के लिए बजट बढ़ाया जा सकता है। दूध खरीद पर मिलने वाले बोनस में बढ़ोतरी, पशुधन बीमा योजना का विस्तार और महिलाओं के लिए डेयरी प्रोत्साहन योजना की घोषणा संभव है। बाड़मेर में अनार और सवाई माधोपुर में अमरूद प्रोसेसिंग यूनिट्स का भी ऐलान हो सकता है। महिलाओं और बच्चों के लिए योजनाएं लखपति दीदी योजना का दायरा बढ़ाने, मेधावी छात्राओं को स्कूटी योजना के विस्तार और महिला स्वयं सहायता समूहों के बजट में बढ़ोतरी की संभावना है। आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहन राशि देने का एलान भी हो सकता है। दो से अधिक बच्चों वाले लोगों पर चुनाव लड़ने की रोक हटाने के लिए बिल लाने की घोषणा भी बजट सत्र में संभव है। शिक्षा और स्वास्थ्य सीएसआर की सहायता से प्रदेश के सरकारी स्कूलों की मरम्मत के लिए बजट का प्रावधान किया जा सकता है। इसके अलावा जिन जिलों में मेडिकल कॉलेज नहीं है वहां नए मेडिकल कॉलेजों का ऐलान किया जाना भी संभव है। मेडिकल में चिकित्सकों व पैरा मेडिकल स्टॉफ के पद बड़ी संख्या में खाली चल रहे हैं इन पर भी भर्तियों का ऐलान हो सकता है। 

CM योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट बयान, कहा- बाबरी ढांचे का पुनर्निर्माण कभी नहीं होगा

 लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाराबंकी में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए राम मंदिर और बाबरी मस्जिद को लेकर बड़ा बयान दिया है. मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों और कट्टरपंथी विचारधारा रखने वालों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि अयोध्या में जिस स्थान पर राम मंदिर बना है, वहां अब किसी और ढांचे की कल्पना करना भी व्यर्थ है. बाराबंकी की जनसभा में मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद सियासी माहौल गरमा गया है और इसे लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज होने की संभावना जताई जा रही है. सीएम योगी ने कहा कि बाबरी मस्जिद के ढांचे का पुनर्निर्माण अब कभी नहीं होगा. उन्होंने साफ तौर पर कहा, “कयामत के दिन तक भी बाबरी मस्जिद के ढांचे का पुनर्निर्माण नहीं होगा.” जनसभा के दौरान मुख्यमंत्री ने राम मंदिर निर्माण का जिक्र करते हुए कहा कि जनता से किया गया वादा पूरा किया गया है. उन्होंने कहा, “हम लोगों ने कहा था रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे. और मंदिर वहीं बन गया.” उन्होंने दोहराया कि अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर अपने निर्धारित स्थान पर बन चुका है और यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास का प्रतीक है. ‘अवसरवादी लोग स्वार्थ के लिए राम को भूल जाते हैं’ सीएम योगी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि जो लोग बाबरी ढांचे के पुनर्निर्माण के सपने देख रहे हैं, उनका सपना कभी पूरा नहीं होगा. उन्होंने कहा कि राम मंदिर का निर्माण देश की सांस्कृतिक विरासत और सनातन आस्था का प्रतीक है. भगवान राम सबके हैं और इसमें कोई भेदभाव नहीं है, लेकिन कुछ अवसरवादी लोग अपने स्वार्थ के लिए राम को भूल जाते हैं. उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार कानून व्यवस्था को मजबूत बनाने और विकास कार्यों को गति देने के लिए लगातार काम कर रही है. सीएम ने कहा कि जो कयामत के दिन का सपना देख रहे हैं, वे सड़-गल जाएंगे, वह दिन कभी आने वाला नहीं है. भारत की विरासत, गौरवशाली परंपरा और सनातन धर्म का सम्मान करते हुए केसरिया ध्वज सदैव देश का मान बढ़ाता रहेगा. योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री द्वारा अयोध्या में श्रीराम मंदिर पर केसरिया ध्वजारोहण का उल्लेख करते हुए इसे सनातन का प्रतीक बताया. उन्होंने अवसरवादियों पर निशाना साधते हुए कहा कि संकट आने पर कुछ लोगों को राम याद आते हैं, बाकी समय वे राम को भूल जाते हैं, इसलिए भगवान राम भी उन्हें भूल चुके हैं.  कानून तोड़ने वालों को सख्त चेतावनी सीएम योगी ने जनसभा में कानून व्यवस्था को लेकर सख्त चेतावनी देते हुए कहा, “कायदे में रहोगे तो फायदे में रहोगे. कानून तोड़कर जन्नत जाने का सपना देखने वालों का यह सपना कभी पूरा नहीं होगा. सरकार जो कहती है, वह करके दिखाती है और कानून तोड़ने वालों को ऐसा सबक सिखाया जाएगा कि उनकी सात पीढ़ियां उसे याद रखेंगी. जो कानून तोड़ेगा, उसे जहन्नुम का रास्ता दिखाएंगे.” उन्होंने कहा कि रामभक्तों पर गोली चलाने वालों और रामकाज में बाधा डालने वालों के लिए कोई जगह नहीं बची है. भारत और सनातन एक-दूसरे के पूरक हैं, दोनों को अलग नहीं किया जा सकता. देश और सनातन पर अंदर और बाहर से प्रहार हो रहे हैं, जिनसे सजग और सचेत रहने की जरूरत है. कुछ लोग साजिश कर रहे हैं, कुछ साजिश का शिकार हो रहे हैं और कुछ लोग साजिश के लिए बिककर काम कर रहे हैं. उन्होंने जनता से इन दुष्प्रवृत्तियों के खिलाफ तैयार रहने का आह्वान किया. 2017 से पहले की स्थिति का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि तब प्रदेश में दंगे, कर्फ्यू और असुरक्षा का माहौल रहता था. उन्होंने कहा कि उस समय न बेटियां सुरक्षित थीं, न व्यापारी, न किसान, न नौजवान, मंदिर, विद्यालय और घर तक सुरक्षित नहीं थे. पहले हर तीसरे-चौथे दिन किसी न किसी जिले में कर्फ्यू लगता था और लोगों में भय का वातावरण बना रहता था. अब प्रदेश में कानून व्यवस्था मजबूत हुई है और सुरक्षा का माहौल स्थापित हुआ है.

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