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CJI सूर्यकांत ने कहा: “चुनाव आते ही परेशानी होती है…” हिमंत सरमा पर याचिका पर टिप्पणी

नई दिल्ली असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के भाषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई। इसपर भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि कई बार राजनीतिक जंग सुप्रीम कोर्ट में लड़ी जाती है। उन्होंने इस याचिका पर विचार करने की बात कही है। विपक्ष ने सरमा के अल्पसंख्यकों पर निशाना लगाते वीडियो और भाषण पर आपत्ति जताई थी। शीर्ष न्यायालय याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। शीर्ष न्यायालय में सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच सुनवाई कर रही थी। सीजेआई ने कहा, ‘परेशानी यह है कि जब चुनाव आते हैं, जो कई बार उन्हें यहां सुप्रीम कोर्ट में लड़ा जाता है। हम इसे देखेंगे।’ अदालत में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया नेता एनी राजा की तरफ से याचिका दाखिल की गई थी। उन्होंने सीएम सरमा के 27 जनवरी को दिए भाषण पर आपत्ति जताई थी। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत पहुंचे एडवोकेट निजाम पाशा ने कहा, ‘मीलॉर्ड राजनीतिक दल के सदस्य की तरफ से हेट स्पीच के खिलाफ एक याचिका दाखिल हुई है। एक वीडियो भी है, जिसमें मुख्यमंत्री अल्पसंख्यकों पर निशाना लगाते नजर आ रहे हैं।’ पीठ ने वकील निजाम पाशा की दलीलों पर संज्ञान लेते हुए कहा कि वह याचिका को सूचीबद्ध करने पर विचार करेगी। पाशा वाम दलों के कुछ नेताओं की ओर से पेश हुए थे। उन्होंने पीठ के समक्ष कहा, ‘हम इस अदालत से असम के मौजूदा मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए चिंताजनक बयानों और हाल में पोस्ट किए एक वीडियो को लेकर तत्काल हस्तक्षेप का अनुरोध करते हैं। इस संबंध में शिकायतें दर्ज कराई गई हैं, लेकिन अब तक कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है।’ जमीयत भी पहुंची थी सुप्रीम कोर्ट जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने सरमा के भाषण के खिलाफ 2 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने कहा कि विशेष रूप से उच्च संवैधानिक पद पर आसीन किसी व्यक्ति की तरफ से दिए गए इस तरह के बयानों को राजनीतिक बयानबाजी या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। भाषण में क्या था सरमा ने 27 जनवरी को डिगबोई में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि ‘मिया’ समुदाय के लोगों को राज्य में मतदान करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची से ‘मिया’ मतदाताओं के नाम हटाना केवल एक प्रारंभिक कदम है, और जब बाद में राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) किया जाएगा, तो बांग्लादेश के मुसलमानों के चार से पांच लाख वोट रद्द कर दिए जाएंगे। उन्होंने कहा था, ‘हां, हम मिया समुदाय के वोट चुराने की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें हमारे देश में नहीं, बल्कि बांग्लादेश में वोट देना चाहिए। हम यह सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था कर रहे हैं कि वे असम में वोट न दे सकें।’ उन्होंने कहा था, ‘अगर मिया समुदाय को इस संबंध में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, तो हमें क्यों चिंतित होना चाहिए?’

CBSE का अहम निर्णय: ऑन स्क्रीन मार्किंग से तेज और पारदर्शी होगा 12वीं का रिजल्ट

इंदौर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने अपनी मूल्यांकन प्रक्रिया में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए 12वीं कक्षा के लिए ‘ऑन स्क्रीन मार्किंग’ (OSM) सिस्टम लागू करने की घोषणा की है। आगामी सत्र से प्रभावी होने वाली इस डिजिटल जांच प्रणाली का मुख्य उद्देश्य मूल्यांकन को अधिक पारदर्शी, सटीक और तीव्र बनाना है। हालांकि, कक्षा 10वीं की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन फिलहाल पारंपरिक भौतिक तरीके से ही जारी रहेगा। इस बदलाव से शिक्षकों की कार्यशैली और छात्रों के उत्तर लिखने के तरीके पर भी बड़ा प्रभाव पड़ेगा।शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की दिशा में सीबीएसई ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब 12वीं के छात्रों की मेहनत का मूल्यांकन शिक्षक भौतिक रूप से नहीं, बल्कि कंप्यूटर स्क्रीन पर डिजिटल माध्यम से करेंगे। पारदर्शिता और गति पर ध्यान बोर्ड के अनुसार, ‘ऑन स्क्रीन मार्किंग’ (OSM) से मानवीय भूलों, विशेषकर अंकों को जोड़ने (टोटलिंग) की गलतियों की संभावना शून्य हो जाएगी। लॉगिन और लॉगआउट का समय स्वतः दर्ज होने से मूल्यांकन प्रक्रिया पर कड़ी निगरानी रखी जा सकेगी। इससे न केवल परिणाम तैयार करने की गति बढ़ेगी, बल्कि कॉपियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक लाने-ले जाने में होने वाले जोखिम और समय की बर्बादी भी कम होगी। बोर्ड का मानना है कि इस व्यवस्था से व्यक्तिगत पक्षपात की संभावना भी न्यूनतम हो जाएगी। उत्तर पुस्तिका के प्रारूप में बदलाव डिजिटल मूल्यांकन को सुगम बनाने के लिए उत्तर पुस्तिका के स्ट्रक्चर में भी बदलाव किए गए हैं। विशेषकर विज्ञान संकाय (Science Stream) की कापियों को अब भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान के अलग-अलग सेक्शन में विभाजित किया गया है। छात्रों के लिए अब यह अनिवार्य होगा कि वे संबंधित विषय का उत्तर उसी के लिए निर्धारित सेक्शन में लिखें। यदि कोई छात्र गलत सेक्शन में उत्तर लिखता है, तो उसे जांच प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाएगा। यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि डिजिटल जांच के दौरान परीक्षक को उत्तर ढूंढने में कोई तकनीकी समस्या न हो। तकनीकी चुनौतियां और समाधान इंदौर के सरदार पटेल स्कूल के विशेषज्ञ योगेंद्र दुबे का कहना है कि यह कदम स्वागत योग्य है, लेकिन शुरुआत में शिक्षकों को कुछ कठिनाइयां आ सकती हैं। धुंधली इमेज, सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन में त्रुटि या इनपुट डिवाइसेस की खराबी जैसी तकनीकी बाधाएं चुनौती पेश कर सकती हैं। इन समस्याओं से निपटने के लिए सीबीएसई ने शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम और तकनीकी सहायता टीम की व्यवस्था करने का निर्णय लिया है, ताकि नई प्रणाली को बिना किसी बाधा के लागू किया जा सके। 10वीं के लिए फिलहाल कोई बदलाव नहीं सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि यह डिजिटल व्यवस्था अभी केवल 12वीं कक्षा के लिए है। 10वीं कक्षा के छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन पहले की तरह भौतिक रूप में ही किया जाएगा। बोर्ड चरणबद्ध तरीके से इस प्रणाली को आगे बढ़ाने पर विचार कर सकता है।  

MPPSC 2026: EWS वर्ग के लिए नया नियम, अब इस उम्र तक परीक्षा में शामिल हो सकते हैं

इंदौर  मप्र लोक सेवा आयोग की राज्य सेवा पात्रता परीक्षा-2026 की आवेदन प्रक्रिया के बीच सोमवार को इंदौर हाईकोर्ट बेंच ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS Category) के तीन अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट ईडब्ल्यूएस ने याचिकाकर्ताओं को आयु सीमा (EWS Age Limit) में अंतरिम छूट देते हुए उन्हें 40 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा से आगे भी आवेदन करने की अनुमति दे दी है। तीनों याचिकाकर्ता परीक्षा के लिए आवेदन कर सकेंगे, लेकिन इनकी चयन प्रक्रिया कोर्ट के आदेश के अधीन रहेगी। हालांकि अभी अन्य ईडब्ल्यूएस अभ्यर्थियों को कोई फायदा नहीं मिल सकेगा, लेकिन इस मामले में होने वाले अंतिम फैसले से उन हजारों ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों को लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। कोर्ट का यह आदेश ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तारीख वाले दिन ही आया है।  हाईकोर्ट पहुंचा मामला; विज्ञापन को बताया भेदभावपूर्ण आयोग द्वारा 31 दिसंबर 2025 को जारी विज्ञापन में गैर वर्दीधारी पदों के लिए अधिकतम आयु सीमा 1 जनवरी 2026 को 40 वर्ष तय की थी। इस विज्ञापन में एससी/एसटी/ओबीसी, महिलाएं, दिव्यांगजन, भूतपूर्व सैनिक और अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन योजना से जुड़े अभ्यर्थी शामिल थे। इस सभी वर्ग को आयु में छूट दी थी, लेकिन ईडबल्यूएस वर्ग को आयु छूट नहीं दी गई, जिसे भेदभावपूर्ण बताया गया। अभ्यर्थी अभिषेक तिवारी ने इस पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विकास मिश्रा और अधिवक्ता धीरज तिवारी ने कोर्ट को बताया, ईडब्ल्यूएस अभ्यर्थी पूरी योग्यता रखने के बावजूद सिर्फ 1 से 3 वर्ष ज्यादा आयु के कारण ऑनलाइन पोर्टल पर अयोग्य घोषित कर दिए जा रहे है। सरकार के नियमों में लगभग सभी वर्ग को आयु छूट मिलती रही है, लेकिन ईडब्ल्यूएस को जानबूझकर अलग रखा, जिससे आरक्षण सिर्फ कागजी बनकर रह जाता है। राजस्थान बना उदाहरण मामले के दौरान कोर्ट को बताया, राजस्थान में पुरुष ईडब्ल्यूएस को 5 वर्ष, महिला ईडब्ल्यूएस को 10 वर्ष की आयु छूट दी जा रही है। राजस्थान लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन बोर्ड ने स्पष्ट रूप से ईडब्ल्यूएस अभ्यर्थियों को आयु छूट देकर आवेदन आमंत्रित किए है। इससे साबित हुआ कि ईडब्ल्यूएस को आयु छूट देना न केवल संभव है, बल्कि देश में पहले से लागू व्यवस्था भी है। सभी तथ्यों पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने ईडब्ल्यूएस अभ्यर्थियों को अंतरिम संरक्षण दिया। उन्हें प्रोविजनल रूप से आवेदन करने और चयन प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति दी। कोर्ट ने माना कि यदि समय रहते राहत नहीं दी जाती तो भर्ती प्रक्रिया पूरी हो जाती और याचिका निरर्थक हो जाती, जिससे विद्यार्थियों को अपूरणीय नुकसान होता। 

बाबरी ढांचे का सपना देखने वालों से सीएम योगी की दो टूक, कभी नहीं आने वाला कयामत का दिन

बाराबंकी. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाबरी ढांचे का सपना देखने वालों को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है। उन्होंने दो टूक कहा कि कयामत का दिन कभी आने वाला नहीं है, जो लोग इसका सपना देख रहे हैं, सड़-गल जाएंगे। हिंदुस्तान में कायदे में रहने वाले फायदे में रहेंगे। अगर कोई कानून तोड़कर जन्नत जाने का सपना देख रहा है तो उसका यह सपना कभी पूरा नहीं होने वाला। कानून तोड़ने वाले का रास्ता कहीं और नहीं, सीधे जहन्नुम की तरफ ले जाता है। मुख्यमंत्री ने पूरी दृढ़ता के साथ कहा कि यह डबल इंजन सरकार पीएम मोदी के मार्गदर्शन में जो बोलती है, वह करके दिखाती है और जितना करती है, उतना ही बोलती है। हमने कहा कि रामलला आएंगे…। अब मंदिर भी बन गया है। हम विरासत को सम्मान देते हुए भारत व सनातन धर्म की गौरवशाली परंपरा को अक्षुण्ण रखेंगे। पीएम मोदी ने 25 नवंबर को अयोध्या में सनातन के प्रतीक श्रीराम मंदिर में भव्य केसरिया ध्वज का आरोहण किया था,  यह ध्वज सदा भारत व सनातन के गौरव को आगे बढ़ाएगा।  मुख्यमंत्री मंगलवार को हिंद केसरी ब्रह्मलीन महंत बाबा हरिशंकर दास जी महाराज की पुण्य स्मृति में श्रीराम जानकी मंदिर, दुल्हदेपुर कुटी (बाराबंकी) में आयोजित दशम श्री हनुमत विराट महायज्ञ एवं श्री रामार्चा पूजन में सम्मिलित हुए। सीएम ने केंद्र व प्रदेश सरकार की योजनाएं व उपलब्धियां गिनाने के साथ ही कहा कि बाराबंकी में जल्द ही विकास प्राधिकरण प्रारंभ होगा। सीएम की दो टूक, कायदे में रहोगे तो फायदे में रहोगे  सीएम योगी ने कहा कि अयोध्या में 500 वर्ष पश्चात यह गौरवशाली क्षण आया। इतने वर्षों में अनेक राजा-महाराजा आए। 1952 के बाद से अनेक सरकारें बनीं, लेकिन किसी से मन में यह नहीं आया कि भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या पर भव्य मंदिर निर्माण हो। राम सबके हैं, लेकिन कुछ लोग ऐसे हैं जो अवसरवादी रवैया अपनाते हैं। जब संकट आता है तो उन्हें राम याद आते हैं, बाकी समय राम को भूल जाते हैं। ऐसे लोगों को भगवान राम भी भूल चुके हैं, अब उनकी नैया कभी पार नहीं होनी है। रामभक्तों पर गोली चलाने वालों और रामकाज में बाधक रामद्रोहियों के लिए कोई जगह नहीं है। बाबरी ढांचे का सपना देखने वालों को योगी ने चेताया कि कयामत का दिन कभी नहीं आने वाला। कयामत के दिन के लिए मत जियो। हिंदुस्तान में कायदे से रहना सीखो। यहां का कानून मानो, कायदे में रहोगे तो फायदे में रहोगे। कानून तोड़ने वालों का रास्ता जन्नत नहीं, सीधे जहन्नुम की तरफ जाएगा।  यह देश कभी कमजोर नहीं था सीएम योगी ने कहा कि यह देश कभी कमजोर नहीं था। हमारे पास सब कुछ था। उन्होंने 2017 के पहले यूपी में फैली असुरक्षा का जिक्र किया। कहा, हर तीसरे-चौथे दिन किसी न किसी जनपद व शहर में कर्फ्यू-दंगे होते थे। परिवार का कोई सदस्य बाहर गया है और सूर्यास्त होते यदि घऱ नहीं आया तो घरवाले सशंकित रहते थे। गरीबों की जमीन पर कब्जा हो जाता था। सैकड़ों पहलवान तैयार करने वाले बाबा हरिशंकर दास का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि श्रीराम जानकी मंदिर की जमीन पर भी कब्जा करने का प्रयास हुआ। बाबा जी को गोली मार दी गई, लेकिन सरकार बदलते ही यूपी में सारी अराजकता गायब हो गई। 2013 कुंभ में 12 करोड़ श्रद्धालु आए थे और इस वर्ष माघ मेला में अब तक 21 करोड़ श्रद्धालु डुबकी लगा चुके हैं। अयोध्या व वाराणसी में पहले लाखों श्रद्धालु आते थे, अब वह संख्या करोड़ों में पहुंच गई है। 2024-25 में 122 करोड़ श्रद्धालु यूपी के धार्मिक स्थलों पर दर्शन करने आए। महाकुम्भ में 66 करोड़ श्रद्धालु आए, यह संख्या बताती है कि यूपी में अब सुरक्षा और सुविधा है। बेटी सुरक्षित होगी तो समाज सुरक्षा का अहसास कर लेगा, व्यापारी सुरक्षित होगा तो उत्तर से दक्षिण तक सेतुबंध के रूप में कार्य करेगा।  पहले भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया था विकास मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी समृद्धि की नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर रहा है। पहले यूपी में वेतन देने का पैसा नहीं था, लेकिन आज पैसे का उपयोग हर तबके के हित के लिए हो रहा है। छात्रों को बिना भेदभाव छात्रवृत्ति दी जा रही है। यूपी में अच्छे संस्थान खुल रहे हैं, हर तीर्थ स्थल का विकास हो रहा है। सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्य कर रही है। कानून को ठेंगा दिखाने वालों को ऐसा मजा चखाएंगे कि सात पीढ़ियां याद करेंगी। सीएम ने विकास कार्यों को गिनाया और कहा कि 8-9 साल पहले तक जो पैसा भ्रष्टाचार में खर्च होता था, वह आज विकास में खर्च हो रहा है।  यूपी अब ‘बीमारू’ नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था का मजबूत राज्य  सीएम योगी ने कहा कि यूपी देश की तीन बड़ी अर्थव्यवस्था में शामिल है। यूपी अब ‘बीमारू’ नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था का मजबूत राज्य बनकर उभरा है। गांव की बेटी, सबकी बेटी मानते हुए सरकार बेटी के जन्म लेने से लेकर स्नातक की पढ़ाई, शादी आदि की जिम्मेदारी उठा रही है। दिव्यांगजन, वृद्धजन व निराश्रित महिलाओं के रूप में 1.6 करोड़ परिवारों को सरकार 12 हजार रुपये सालाना की पेंशन दे रही है। यूपी में 15-16 करोड़ लोग राशन की सुविधा पा रहे हैं। आयुष्मान भारत के अंतर्गत अब तक 5.46 करोड़ से अधिक गरीबों के लिए पांच लाख रुपये निशुल्क स्वास्थ्य सुविधा वाले गोल्डन कार्ड उपलब्ध कराए गए हैं। सरकार बिना भेदभाव सबके विकास के लिए कार्य कर रही है।  दुनिया भर से सनातन, भारत-भारतीयता पर प्रहार मुख्यमंत्री ने आह्वान किया कि हर भारतीय का दायित्व सकारात्मक सोच के साथ भारत का विकास होना चाहिए। सभी भारतीय मिलकर ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के लिए कार्य करें। जीवन का संकल्प होना चाहिए कि हमारा देश वैभवशाली व विकसित हो। हर संत की साधना देश, धर्म के लिए होती है और धर्म भी देश के लिए समर्पित होता है। एक शरीर है तो दूसरा उसकी आत्मा। भारत और सनातन एक-दूसरे के पूरक हैं, इसे अलग करके नहीं रखा जा सकता। वर्तमान में दुनिया भर से सनातन, भारत-भारतीयता पर प्रहार हो रहे हैं। अंदर-बाहर से होने वाले इन प्रहारों से सचेत रहना होगा। जिन्हें भारत की प्रगति अच्छी नहीं लग रही है, विकसित भारत की संकल्पना पचती नहीं … Read more

बजट से पहले रविंद्र सिंह भाटी का बयान, राजस्थान सरकार से किन मुद्दों पर जताई उम्मीद?

जयपुर राजस्थान सरकार अपना वार्षिक बजट कल विधानसभा में पेश करेगी। उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी बजट प्रस्तुत करेंगी। बजट से पहले पश्चिमी राजस्थान में विभिन्न वर्गों की उम्मीदें सामने आ रही हैं, जिनमें शिक्षा, सड़क, चिकित्सा, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं को लेकर विशेष अपेक्षाएं जताई जा रही हैं। शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी की प्राथमिकताएं शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने बजट से पहले पत्रकारों से बातचीत में कहा कि बजट से बहुत सारी उम्मीदें हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा, सड़क और चिकित्सा पर प्रदेश सरकार का विशेष फोकस रहना चाहिए। साथ ही युवाओं को रोजगार के अधिक अवसर किस प्रकार दिए जा सकें, इस दिशा में ठोस प्रावधानों की आवश्यकता है।   रोजगार और औद्योगिक अवसरों पर जोर विधायक भाटी ने कहा कि सरकार ने एक एनुअल कैलेंडर जारी किया है, लेकिन उसमें तमाम लोगों को शामिल नहीं किया जा सका। मल्टीनेशनल कंपनियों के माध्यम से रिफाइनरी आ रही है, साथ ही अन्य फैक्टरियां और इंडस्ट्रीज भी स्थापित होंगी। इन सभी क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं को किस तरह अवसर मिल सकें, इस पर ध्यान देना जरूरी है।   सड़क और चिकित्सा ढांचे की जरूरत उन्होंने सड़कों पर विशेष रूप से गांवों की इंटरनल सड़कों और हाईवे के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की आवश्यकता बताई। हाल ही में एक बस दुर्घटना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इलाके में 1 यूनिट की सुविधा नहीं होने के कारण घायलों को जोधपुर तक ले जाना पड़ा। उन्होंने कहा कि चिकित्सा व्यवस्था को किस तरह मजबूत किया जाए, इस पर बजट में ध्यान दिया जाना चाहिए, क्योंकि गांव और ढाणियां दूर-दूर स्थित हैं।   खेल जगत से जुड़ी उम्मीदें खेल जगत से जुड़े हेमंत शर्मा ने भी राज्य सरकार के बजट से काफी उम्मीदें जताईं। उन्होंने कहा कि जोधपुर की मूलभूत सुविधाओं जैसे पानी, सड़क और बिजली पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। जोधपुर में पानी की गंभीर समस्या है, जहां हर सातवें और आठवें दिन पानी की कटौती की जा रही है।   पानी और सीवरेज की समस्या हेमंत शर्मा ने कहा कि जोधपुर में सीवरेज की समस्या भी काफी बढ़ गई है। यदि बजट में इन समस्याओं के समाधान के लिए प्रावधान किए जाएं, तो प्रदेश के दूसरे बड़े शहर जोधपुर के लोगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।   संजय गौड ने उम्मीद जताई कि पूर्ववर्ती गहलोत सरकार द्वारा लागू की गई योजनाओं को उचित बजट जारी कर प्रभावी ढंग से क्रियान्वित किया जाए, ताकि आम जनता को फायदा मिल सके। उन्होंने कहा कि यह बजट युवाओं के लिए उम्मीद की किरण बन सकता है।   महंगाई और चिकित्सा योजनाओं पर नजर संजय गौड ने यह भी कहा कि चिकित्सा क्षेत्र की योजनाएं फिर से रफ्तार पकड़ें, इस पर ध्यान दिया जाना चाहिए। महंगाई अपने चरम स्तर पर है, ऐसे में बजट में इसे लेकर भी कुछ ठोस कदम उठाए जाने की अपेक्षा की जा रही है।

आ गई रिलीज डेट, ‘बॉर्डर 2’ के बाद अब ‘लाहौर 1947’ में धमाल मचाने को तैयार सनी देओल

मुंबई, सनी देओल की फिल्म ‘बॉर्डर 2’ का जादू बॉक्स ऑफिस पर जारी है। इस बीच मेकर्स ने उनकी मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘लाहौर 1947’ की रिलीज डेट अनाउंस कर दी है। ‘लाहौर 1947’ 13 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। इस फिल्म के जरिए पहली बार सनी देओल, डायरेक्टर राजकुमार संतोषी और प्रोड्यूसर आमिर खान एक साथ काम करने जा रहे हैं। आमिर खान प्रोडक्शंस द्वारा बनाई गई यह फिल्म साल 1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित है। यह इतिहास के सबसे दर्दनाक अध्याय में से एक को खास अंदाज में पर्दे पर पेश करेगी। आमिर खान ने बताया कि यह दिवंगत अभिनेता धर्मेंद्र की पसंदीदा स्क्रिप्ट थी। उन्होंने फिल्म को लेकर बताया, “यह धरम जी (धर्मेंद्र) की सबसे पसंदीदा स्क्रिप्ट्स में से एक थी। मुझे बहुत खुशी है कि यह फिल्म उसी अंदाज में रिलीज होगी और इसे उनका प्यार मिलेगा।” अपकमिंग फिल्म की कहानी असगर वजाहत के नाटक ‘जिस लाहौर नई देख्या, ओ जम्याई नई’ से प्रेरित है। यह नाटक विभाजन की बड़ी राजनीति के बजाय सांप्रदायिक हिंसा और विस्थापन से टूटे हुए रिश्तों पर फोकस करता है। कहानी एक हिंदू परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे लाहौर से भारत आने के लिए मजबूर किया जाता है। उन्हें एक मुस्लिम परिवार द्वारा छोड़ी गई हवेली मिलती है, लेकिन वहां एक बूढ़ी मुस्लिम महिला अभी भी रह रही होती है। इसके बाद विभाजन के उथल-पुथल भरे दिनों में पहचान, नुकसान और नैतिक जिम्मेदारी जैसे गहरे सवाल उठते हैं। फिल्म तमाशे वाली देशभक्ति कहानियों से अलग हटकर विभाजन के स्थायी जख्मों, सहानुभूति और साझा दर्द पर रोशनी डालती है। यह एक भावुक और गंभीर पीरियड ड्रामा है। फिल्म में सनी देओल मुख्य भूमिका में हैं, जिसमें शबाना आजमी, प्रीति जिंटा और करण देओल भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं। संगीत को एआर रहमान ने तैयार किया है और गीतों के बोल जावेद अख्तर ने लिखे हैं।  

केंद्र सरकार की योजना में उत्तर प्रदेश से 4 एक्सेलेरेटरों का चयन, राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी पहचान

लखनऊ.  केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (मेटी) की महत्वाकांक्षी “स्टार्टअप एक्सेलेरेटर ऑफ मेटी फॉर प्रोडक्ट इनोवेशन, डेवलपमेंट एंड ग्रोथ” (SAMRIDH) योजना में उत्तर प्रदेश ने प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। स्टार्टअप्स को नवाचार, उत्पाद विकास और विस्तार के लिए तैयार करने वाली इस योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश से चयनित एक्सेलेरेटरों और स्टार्टअप्स की संख्या यह संकेत देती है कि प्रदेश तेजी से देश के प्रमुख स्टार्टअप हब के रूप में उभर रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अपनाई गई नीतियों का असर अब राष्ट्रीय स्तर पर साफ दिखने लगा है। योगी सरकार द्वारा केंद्र की योजनाओं का लाभ जमीन तक पहुंचाने के लिए प्रदेश स्तर पर लगातार समन्वय किया जा रहा है। एक्सेलेरेटरों और स्टार्टअप्स की निगरानी, मेंटरशिप और बाजार से जोड़ने की प्रक्रिया को मजबूत किया गया है, ताकि युवा उद्यमियों को केवल फंडिंग ही नहीं बल्कि स्थायी विकास का रास्ता भी मिल सके। समृद्ध को लेकर उत्तर प्रदेश से कुल 10 एक्सेलेरेटरों ने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट जमा किया था। इनमें से 4 एक्सेलेरेटरों का चयन किया गया। इन चयनित एक्सेलेरेटरों के माध्यम से प्रदेश के 35 स्टार्टअप्स को एक्सेलेरेशन सपोर्ट दिया गया, जिनमें से 27 स्टार्टअप्स फंडिंग प्राप्त करने में सफल रहे। उत्तर प्रदेश के स्टार्टअप्स को इस योजना के तहत कुल 9.91 करोड़ रुपये की राशि वितरित की गई। यह राशि स्टार्टअप्स को उनके उत्पाद के विकास, बाजार विस्तार और तकनीकी मजबूती के लिए दी गई है। केंद्र सरकार की इस योजना में स्टार्टअप्स को अधिकतम 40 लाख रुपये तक की मैचिंग फंडिंग का प्रावधान है, जबकि प्रत्येक स्टार्टअप के लिए एक्सेलेरेटरों को भी वित्तीय सहयोग दिया जाता है। प्रदेश सरकार का मानना है कि बीते कुछ वर्षों में स्टार्टअप्स के लिए बनाए गए अनुकूल माहौल का ही यह परिणाम है कि उत्तर प्रदेश अब केवल उपभोक्ता राज्य नहीं बल्कि नवाचार और उद्यमिता का मजबूत केंद्र बन रहा है। नई स्टार्टअप नीति, आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को बढ़ावा, इन्फ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विकास और सिंगल विंडो सिस्टम जैसी पहल युवाओं को उद्यम के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। समृद्ध योजना के अंतर्गत हेल्थ टेक, एजुकेशन टेक, एग्री टेक, फिनटेक, सॉफ्टवेयर सर्विस और कंज्यूमर टेक जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे स्टार्टअप्स को समर्थन दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के स्टार्टअप्स की इन सेक्टर्स में सक्रिय भागीदारी यह दिखाती है कि राज्य की अर्थव्यवस्था अब पारंपरिक क्षेत्रों से आगे बढ़कर ज्ञान और तकनीक आधारित मॉडल की ओर अग्रसर है।

दिल्ली में बेटियों के लिए नई योजना, रेखा गुप्ता सरकार देगी आर्थिक मजबूती

दिल्ली दिल्ली की भाजपा सरकार ने लखपति बिटिया योजना का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अगुआई में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस फैसले पर मुहर लगाई गई। इसके साथ ही 2008 में लॉन्च की गई लाडली योजना को बंद कर दिया गया है। लखपति बिटिया योजना के तहत ग्रेजुएशन करने के बाद बेटियों को एक लाख रुपये की राशि दी जाएगी। इससे पहले महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में भी महिला केंद्रित योजनाएं चलाई जा चुकी हैं जिनमें प्रतिमाह अथवा सालाना आर्थिक सहायता महिलाओं को दी जाती है। अब दिल्ली में भाजपा सरकार ने बेटियों को एकमुश्त रकम देकर लखपति बनाने की पहल की है। कैबिनेट में मुहर के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि 31 मार्च तक लाडली योजना बंद कर दी जाएगी और इसकी जगह दिल्ली लखपति बिटिया योजना की शुरुआत की जाएगी। उन्होंने कहा हर परिवार से दो बिटिया को इस योजना का लाभ दिया जाएगा। दिल्ली में जन्मी हर बच्ची को इस योजना से जोड़ा जाएगा और ग्रेजुएशन पूरा होने पर मिनिमम एक लाख रुपये दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘दिल्ली लखपति बिटिया योजना के तहत हर बच्ची को, जो दिल्ली की निवासी है, जिसका परिवार दिल्ली में रहता होगा, घर में दो बच्चियों को इसका लाभ दिया जाएगा। हर बच्ची पर 20-20 हजार रुपये बढ़ाया जाएगा। पहले 36 हजार था, उसे हमने 56 हजार किया है। 12वीं में जाने पर नहीं, हमने मोटिवेट किया है कि ग्रेजुएशन करने पर मैच्योरिटी मिलती है। मेच्योरिटी पर मिनिमम एक लाख रुपये मिलेंगे।’ दिल्ली लखपति बिटिया योजना की क्या-क्या शर्तें मुख्यमंत्री ने योजना की कुछ शर्तों की जानकारी देते हुए बताया कि योजना की लाभार्थी बच्चियों का वैक्सीनेशन होना जरूरी है। मान्यताप्राप्त स्कूल से पढ़ना जरूरी है और यदि 18 साल के उम्र से पहले शादी की जाती है तो लाभ नहीं मिलेगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि इसकी अनुमानित लागत 160 करोड़ रुपये आएगी, लेकिन यदि इससे अधिक भी लगे तो सरकार फंड को बढ़ाएगी। लाडली योजना क्यों बंद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि दिल्ली की बेटियों से जुड़ी लाडली योजना 2008 में शुरू हुई थी। बच्ची को अलग-अलग फेज में पैसे दिए जाते थे। उन्होंने कहा, ‘हमारी सरकार ने जब पता किया तो सामने आया कि करोड़ों रुपये बैंक के पास अनक्लेम्ड हैं। लाभार्थी को मिले ही नहीं। 1.86 लाख बेटियों को यह पैसा नहीं मिला। सरकार ने उन्हें खोजा। एक साल में ऐसी तीस हजार बच्चियों को खोजकर 90 करोड़ राशि दी है। अब 41 हजार बच्चियां और मिली हैं जिन्हें लगभग 100 करोड़ का फंड दिया जाएगा।  

बिहान योजना से पंचबाई की बदली तकदीर, बनी सफल व्यवसायी

रायपुर. राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन अंतर्गत बिहान योजना ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसी क्रम में  मुंगेली जिले के विकासखण्ड लोरमी के ग्राम खपरीडीह निवासी श्रीमती पंचबाई साहू ने बिहान योजना से जुड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में सफलता प्राप्त की है। बिहान योजना से जुड़कर उन्होंने अपनी तकदीर बदली है, अब वे सफल व्यसायी बन चुकी है। स्व-सहायता समूह से जुड़ने से पूर्व पंचबाई साहू की आर्थिक स्थिति अत्यंत कमजोर थी। परिवार की दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए उन्हें साहूकारों से ऊँचे ब्याज दर पर ऋण लेना पड़ता था। आर्थिक निर्भरता के कारण न केवल परिवार की बुनियादी ज़रूरतें अधूरी रह जाती थीं, बल्कि आत्मसम्मान भी प्रभावित होता था।        श्रीमती  पंच बाई ने बताया कि बिहान योजना के अंतर्गत माँ सरस्वती महिला स्व-सहायता समूह के माध्यम से उन्हें वित्तीय साक्षरता, सामूहिक सहयोग और आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला। उन्होंने व्यवसाय के लिए रिवॉल्विंग फंड से 15 हजार रूपए, बैंक ऋण 01 लाख 50 हजार रूपए और 60 हजार रूपए सीआईएफ राशि प्राप्त हुई। साथ ही समूह के स्तर पर उन्हें 30 हजार रूपए का अतिरिक्त सहयोग भी मिला। प्राप्त राशि से उन्होंने फर्नीचर दुकान की शुरुआत की। परिश्रम, सही योजना और समूह के सहयोग से उनका व्यवसाय निरंतर आगे बढ़ता गया। आज उनकी मासिक आय लगभग 2.5 लाख रूपए से 03 लाख रूपए तक पहुँच चुकी है। इससे उनके बच्चों की शिक्षा बेहतर होने के साथ-साथ जीवन स्तर में सुधार आया है। श्रीमती पंचवाई साहू आज केवल स्वयं सफल नहीं हैं, बल्कि ग्राम की अन्य महिलाओं को भी समूह से जुड़ने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

ठंड के मौसम में बढ़ी गर्मी, राजस्थान में पारा चढ़ा

जयपुर  कुछ दिनों पहले तक राजस्थान के मौसम की तस्वीरों में बर्फ से जमे खेत-खलिहान दिखाई दे रहे थे लेकिन अब यहां भर सर्दी में गर्मी के जैसा एहसास होने लगा है। यहां मौसम अब धीरे-धीरे गर्म होने लगा है। प्रदेश के कई हिस्सों में दिन का तापमान सामान्य से 2 से 5 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया जा रहा है। दिन में तेज धूप के कारण लोगों को हल्की गर्मी का एहसास होने लगा है। सोमवार को बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर समेत प्रदेश के 8 शहरों में अधिकतम तापमान 30 से 32 डिग्री सेल्सियस के बीच रिकॉर्ड किया गया। बाड़मेर में सबसे अधिक तापमान 31.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। इसके अलावा जैसलमेर, जोधपुर और बीकानेर में 30.6 डिग्री, फलोदी और जवाई (पाली) में 30.2, डूंगरपुर में 30.1, जालौर में 30 और चित्तौड़गढ़ में 30.6 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा। अन्य शहरों की बात करें तो भीलवाड़ा में 29.3, जयपुर में 27, अजमेर में 28.4, पिलानी में 26.9, सीकर में 27.4, उदयपुर में 29.5, कोटा में 27.9, चूरू में 29.8, गंगानगर में 26.3 और नागौर में 29.9 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। इन सभी स्थानों पर तापमान औसत से करीब 2 डिग्री अधिक रहा। रात की सर्दी से मिलने लगी राहत दिन के साथ-साथ अब रात के तापमान में भी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। जैसलमेर, फलोदी और बीकानेर में न्यूनतम तापमान 14 से 15 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहा। डूंगरपुर में 14.9, बीकानेर में 15.3, जैसलमेर में 14.6, जयपुर में 13.7 और प्रतापगढ़ में 13.6 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान दर्ज हुआ। सबसे ठंडा इलाका पाली रहा, जहां न्यूनतम तापमान 5.7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। अगले कुछ दिन मौसम साफ मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के अनुसार प्रदेश में अगले 3 से 4 दिनों तक मौसम साफ रहेगा और तापमान में कोई बड़ा बदलाव होने की संभावना नहीं है। पिछले 24 घंटों में उत्तरी जिलों को छोड़कर अधिकांश इलाकों में आसमान साफ रहा और तेज धूप खिली रही।

सबक्लेवियन आर्टरी कटने के बावजूद अत्यंत जटिल सर्जरी से बचाया गया मरीज का हाथ

रायपुर. मेडिकल कॉलेज अस्पताल रायपुर के हार्ट-चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग की एक और बड़ी सफलता, चाकू से कटी मुख्य धमनी, सबक्लेवियन आर्टरी को जोड़कर बचाया युवक का हाथ पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय एवं डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय (मेकाहारा), रायपुर के डॉक्टरों ने एक बार फिर जटिल और जानलेवा केस की जटिल एवं सफलतापूर्वक  सर्जरी कर घायल मरीज के हाथ को कटने से बचाया। डॉक्टरों के अनुसार, यदि मरीज को समय पर इस प्रकार की जटिल शल्य- चिकित्सा की सुविधा नहीं मिलती तो मरीज के हाथ कटने की नौबत आ जाती और मरीज दिव्यांग हो जाता।  हार्ट- चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू के नेतृत्व में एक युवक के कंधे पर चाकू से हुए हमले में बुरी तरह क्षतिग्रस्त मुख्य रक्त नली (सबक्लेवियन आर्टरी) को जोड़कर डॉक्टरों की टीम ने न केवल मरीज की जान बचाई, बल्कि उसका हाथ कटने से भी बचा लिया। इस सर्जरी की एक और विशेष बात यह रही कि इसमें ऑर्थोपेडिक सर्जन भी शामिल रहे जिनकी मदद से कॉलर बोन को काटा गया एवं ऑपरेशन के बाद वापस प्लेट लगाकर जोड़ दिया गया।   इस केस की विस्तृत जानकारी देते हुए विभागाध्यक्ष (हार्ट- चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी) डॉ. कृष्णकांत साहू ने बताया कि :- अम्बेडकर अस्पताल के ट्रॉमा यूनिट में 34 वर्षीय एक मरीज अत्यधिक रक्तस्राव और मरणासन्न अवस्था में लाया गया। मरीज  इलेक्ट्रिक व्हीकल कंपनी में काम करता है और अमलेश्वर का निवासी है। परिजनों के अनुसार, मरीज अपने परिवार के साथ मोटरसाइकिल से रायपुर रेलवे स्टेशन की ओर जा रहा था, तभी इलेक्ट्रिक रिक्शा से टक्कर हो गई। विवाद के दौरान रिक्शा चालक ने मरीज के बाएं कंधे पर धारदार चाकू से हमला कर दिया। घाव इतना गहरा था कि कंधे की हड्डी (क्लेविकल बोन) के पीछे से गुजरने वाली मुख्य धमनी सबक्लेवियन आर्टरी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। चोट लगते ही धमनी से खून का तेज फव्वारा निकलने लगा और कुछ ही देर में मरीज बेहोश हो गया। आसपास मौजूद लोगों ने किसी तरह उसे अम्बेडकर अस्पताल के आपातकालीन विभाग पहुंचाया, जहां घाव में कॉटन गॉज भरकर रक्तस्राव को अस्थायी रूप से रोका गया। हालांकि रक्तस्राव रुकने के साथ ही बाएं हाथ में रक्त प्रवाह भी बंद हो गया, जिससे हाथ काला पड़ने लगा और ताकत खत्म होने लगी। समय पर ऑपरेशन न होने की स्थिति में हाथ काटने की नौबत आ सकती थी। प्रारंभिक उपचार के बाद मरीज के परिजन उसे अपनी इच्छा से अन्य अस्पतालों में लेकर गए, लेकिन चोट की गंभीरता और धमनी के क्षतिग्रस्त होने के कारण अन्य अस्पतालों ने इलाज से मना कर दिया। इसके बाद मरीज को पुनः अम्बेडकर अस्पताल के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग में लाया गया, जहां मेरे (डॉ. कृष्णकांत साहू के) नेतृत्व में तत्काल ऑपरेशन का निर्णय लिया गया। अत्यंत जटिल और चुनौतीपूर्ण सर्जरी सबक्लेवियन आर्टरी की सर्जरी विशेष रूप से उसके दूसरे भाग (सेकंड पार्ट) में बेहद चुनौतीपूर्ण होती है, क्योंकि यह धमनी छाती के भीतर कॉलर बोन के पीछे स्थित रहती है। पट्टी हटाते ही अत्यधिक रक्तस्राव की आशंका बनी हुई थी, जिसके लिए वैस्कुलर कंट्रोल अत्यंत आवश्यक था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए निर्णय लिया गया कि मरीज की कॉलर बोन को काटकर धमनी तक पहुंच बनाई जाए। कॉलर बोन को काटने के बाद पाया गया कि धमनी लगभग 3 सेमी तक पूरी तरह क्षत-विक्षत हो चुकी थी। इसे जोड़ने के लिए 7×30 मिमी. साइज का डेक्रॉन ग्राफ्ट (कृत्रिम नस) लगाया गया। सर्जरी के दौरान लगभग 5 यूनिट रक्त चढ़ाया गया और करीब 4 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद हाथ में पुनः रक्त प्रवाह शुरू हो सका। इस दौरान ब्रैकियल प्लेक्सस (तंत्रिका तंत्र) को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया, क्योंकि इसमें क्षति होने पर हाथ में स्थायी लकवे की संभावना रहती है। ऑपरेशन के बाद कॉलर बोन को प्लेट लगाकर वापस जोड़ दिया गया अब पूरी तरह स्वस्थ, काम पर लौटा मरीज सफल ऑपरेशन और समय पर उपचार के चलते मरीज का हाथ बच गया और गैंगरीन की स्थिति टल गई। वर्तमान में मरीज पूरी तरह स्वस्थ है और अपने रोजमर्रा के कार्यों में वापस लौट चुका है। इस जटिल ऑपरेशन को सफल बनाने वाली टीम में हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जन डॉ. कृष्णकांत साहू, ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. प्रणय वास्तव, डॉ लोमेश साहू,  एनेस्थेटिस्ट डॉ. संकल्प दीवान, डॉ. बालस्वरूप साहू, जूनियर डॉक्टर – डॉ. आयुषी खरे, ख्याति, , आकांक्षा साहू, संजय त्रिपाठी, डॉ. ओमप्रकाश शामिल रहे। नर्सिंग स्टाफ में राजेन्द्र, नरेन्द्र, मुनेश, चोवा, दुष्यंत तथा एनेस्थेसिया तकनीशियन भूपेन्द्र और हरीश ने अहम भूमिका निभाई। यह सफलता न केवल अम्बेडकर अस्पताल बल्कि सभी के लिए गर्व का विषय है, जो यह साबित करती है कि समय पर सही निर्णय, समेकित प्रयास और विशेषज्ञ चिकित्सा से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। डॉ. विवेक चौधरी, डीन, पं. नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर यह सर्जरी अत्यंत जटिल और जोखिम भरी थी। सबक्लेवियन आर्टरी जैसी बड़ी और महत्वपूर्ण धमनी की मरम्मत प्रत्येक अस्पताल में संभव नहीं होती। अम्बेडकर अस्पताल के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग, ट्रॉमा यूनिट और एनेस्थेसिया टीम के समन्वित प्रयास से यह संभव हो सका। यह प्रयास यह दर्शाती है कि सरकारी अस्पतालों में भी उच्चस्तरीय और जीवन रक्षक उपचार सुविधा उपलब्ध है। डॉ. संतोष सोनकर, अधीक्षक, अम्बेडकर अस्पताल

नेपाल में महसूस किए गए भूकंप के झटके, प्रशासन मुस्तैद

ताप्लेजंग, नेपाल पूर्वी नेपाल के ताप्लेजंग जिले में मंगलवार तड़के चार तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। राष्ट्रीय भूकंप निगरानी एवं अनुसंधान केंद्र (NEMRC) के अनुसार, भूकंप मंगलवार सुबह 2 बजकर 47 मिनट पर आया।भूकंप का केंद्र ताप्लेजंग जिले के कंचनजंगा क्षेत्र में स्थित था। झटकों के बाद स्थानीय लोगों में कुछ देर के लिए दहशत फैल गई और कई लोग घरों से बाहर निकल आए। अधिकारियों के मुताबिक, भूकंप के झटके ताप्लेजंग के अलावा पूर्वी नेपाल के अन्य जिलों में भी महसूस किए गए। हालांकि, अब तक किसी भी तरह के जानमाल के नुकसान या संपत्ति क्षति की कोई सूचना नहीं मिली है। प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखने की बात कही है और स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। नेपाल भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में आता है, जहां समय-समय पर इस तरह की गतिविधियां दर्ज की जाती रही हैं।

राजिम में धूमधाम से संपन्न हुआ सामूहिक विवाह समारोह

रायपुर. छत्तीसगढ़ सरकार की मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना की सराहनीय पहल छत्तीसगढ़ की साय सरकार की संवेदनशील और कल्याणकारी सोच का प्रतीक बनी मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत मंगलवार को राजिम के नवीन मेला मैदान में 283 जोड़ों का सामूहिक विवाह धूमधाम से संपन्न हुआ। इस ऐतिहासिक आयोजन के मुख्य अतिथि प्रदेश के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री  राजेश अग्रवाल रहे, जिन्होंने नवदंपतियों को आशीर्वाद प्रदान किया। अध्यक्षता राजिम विधायक  रोहित साहू ने की। राज्य सरकार की इस योजना ने जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक बोझ से मुक्ति दिलाई है, जो समाज के हर वर्ग के लिए वरदान साबित हो रही है। संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री  राजेश अग्रवाल ने कहा कि आज के दौर में बेटी की शादी हर परिवार के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गई है, लेकिन छत्तीसगढ़ की साय सरकार की मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना ने इसे सुलझा दिया है। इस योजना के तहत प्रति जोड़े 50 हजार रुपये की सहायता दी जाती है, जिसमें 35 हजार रुपये वधु के बैंक खाते में सीधे हस्तांतरित होते हैं। शेष 15 हजार रुपये श्रृंगार सामग्री, व्यवस्था और अन्य खर्चों पर व्यय किए जाते हैं।  अग्रवाल ने कहा कि यह योजना जरूरतमंद परिवारों को सम्मानजनक तरीके से बेटी का विवाह करने में सहारा देती है। पूरे रीति-रिवाजों के साथ एक साथ इतने जोड़ों का विवाह होना समाज के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग की सराहना की तथा नवदंपतियों को सुखी वैवाहिक जीवन की शुभकामनाएं दीं। इस भव्य समारोह में राजिम विधानसभा क्षेत्र के 94, बिन्द्रनवागढ़ के 181 तथा कुरूद विधानसभा के 8 जोड़े शामिल हुए। राज्य सरकार की इस दूरदर्शी योजना ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को नई उम्मीद दी है। विधायक  रोहित साहू ने कहा कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना सरकार की जनकल्याणकारी भावना का जीवंत उदाहरण है। विवाह का आर्थिक बोझ अब बोझ नहीं, बल्कि खुशी का अवसर बन गया है। उन्होंने आयोजन से जुड़े सभी अधिकारियों और कर्मचारियों का आभार माना। कलेक्टर  बीएस उइके ने बताया कि यह आयोजन पूरे प्रदेश में एक साथ हो रहा है, जो विश्व रिकॉर्ड के रूप में दर्ज होगा। 4 आत्मसमर्पित नक्सली बंधे विवाह बंधन में, मुख्यधारा में लौटकर सराहा राज्य सरकार की योजना योजना की सबसे प्रेरणादायक कहानी रही चार आत्मसमर्पित नक्सली जोड़ों की। कांकेर, सुकमा और बीजापुर जिले से इन जोड़ों ने मुख्यधारा में लौटकर नई जिंदगी अपनाई है। इनमें दिलीप उर्फ संतु, मंजुला उर्फ लखमी, दीपक उर्फ भीमा मंडावी, सुनीता उर्फ जुनकी, कैलाश उर्फ भीमा, रनीता उर्फ पायकी कारम तथा राजेंद्र उर्फ कोसा मुरिया, जैनी उर्फ देवे मड़कम शामिल हैं। विवाह मंत्रोचार के बीच विवाह बंधन में बंधे इन नवदंपतियों ने राज्य सरकार की पुनर्वास नीतियों की तारीफ की। नक्सली जोड़ों ने मीडिया से कहा कि मुख्यधारा में जुड़ने के बाद हमें नई जिंदगी मिली है। इस योजना से जीवनसाथी के साथ खुशहाल भविष्य का सपना साकार हो रहा है। इस अवसर पर कलेक्टर  बीएस उइके, पुलिस अधीक्षक  वेदव्रत सिरमौर, जिला पंचायत सीईओ  प्रखर चंद्राकर, जिला कार्यक्रम अधिकारी  अशोक पाण्डेय के अलावा पूर्व विधायक  संतोष उपध्याय, राजिम नगर पालिका अध्यक्ष  महेश यादव, विभिन्न जनपद पंचायतों के अध्यक्षगण मती इंद्राणी साहू, मती मीरा ठाकुर,  सोहन धु्रव तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। जिला पंचायत अध्यक्ष  गौरीशंकर कश्यप ने भी संबोधित किया। राज्य सरकार की यह योजना न केवल आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है, बल्कि सामाजिक एकता को मजबूत करने का कार्य भी कर रही है।

एक्सेल एंटरटेनमेंट ने रणवीर सिंह के ‘डॉन 3’ छोड़ने पर बतौर मुआवजा 40 करोड़ रुपये की मांग की

नई दिल्ली,  रणवीर सिंह ने ‘डॉन 3’ फिल्म छोड़ दी है और इसके बाद एक्सेल एंटरटेनमेंट ने उनसे 40 करोड़ रुपये हर्जाने की मांग की है। सूत्रों ने ‘वैरायटी इंडिया’ को बताया कि ‘डॉन 3’ के प्रोजेक्ट से अचानक से अभिनेता के बाहर होने के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। फिल्म जगत के कई सूत्रों ने बताया कि एक्सेल एंटरटेनमेंट का दावा है कि सिंह के फिल्म छोड़ने से उन्हें भारी वित्तीय नुकसान हुआ है। इसमें विकास कार्य पर हुआ खर्च और शेड्यूलिंग, प्लानिंग तथा अन्य प्री-प्रोडक्शन प्रतिबद्धताओं से जुड़ी देरी शामिल है। ‘वैरायटी इंडिया’ को एक ऐसा पत्र भी मिला है, जिससे पता चलता है कि प्रोडक्शन हाउस ने विभिन्न विभागों के प्रमुखों से इस प्रोजेक्ट के बाहर काम खोजने को कहा है। सूत्रों का कहना है कि बैनर का मानना है कि रणवीर सिंह को कंपनी के हुए नुकसान की भरपाई करनी चाहिए। हालांकि, कहा जा रहा है कि सिंह इस दावे का कड़ा विरोध कर रहे हैं और उनका तर्क है कि वह किसी भी राशि का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं हैं। अभिनेता के करीबी लोगों ने कहा है कि रणवीर का तर्क है कि उन्होंने अतीत में भी कई प्रोजेक्ट छोड़े हैं और तब ऐसी मुआवजे की मांग का सामना नहीं करना पड़ा, इसलिए इस मामले को अलग तरह से नहीं देखा जाना चाहिए। नाम न छापने की शर्त पर, एक सूत्र ने ‘वैरायटी इंडिया’ को बताया, “रणवीर का दावा है कि उन्होंने यह प्रोजेक्ट इसलिए छोड़ा, क्योंकि वे पटकथा से खुश नहीं थे। वे लगातार बदलावों की मांग कर रहे थे और उन्हें फाइनल ड्राफ्ट पसंद नहीं आया। दूसरी ओर एक्सेल का दावा है कि उन्होंने प्री-प्रोडक्शन का काम रणवीर सिंह की हरी झंडी मिलने के बाद ही शुरू किया था। पिछले शुक्रवार को सिंह और एक्सेल एंटरटेनमेंट के प्रतिनिधियों के बीच दो घंटे की बैठक के दौरान विवाद पर चर्चा हुई, लेकिन कथित तौर पर बातचीत बिना समाधान के समाप्त हो गयी। अंदरूनी सूत्रों ने इस बैठक को ‘विवादास्पद’ बताया, जिसमें दोनों पक्षों ने प्रोजेक्ट के पटरी से उतरने के लिए जवाबदेही और वित्तीय जिम्मेदारी पर असहमति जतायी। फिलहाल दोनों पक्षों में बढ़ते तनाव को कम करने और मामला सुलझाने के लिए ‘प्रोड्यूसर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ (पीजीआई) मध्यस्थता कर रही है।  

प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन में महासमुंद दूसरे स्थान पर, 10 माह में 27441 आवासों का निर्माण

महासमुंद महासमुंद जिले ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के प्रभावी एवं त्वरित क्रियान्वयन के माध्यम से छत्तीसगढ़ राज्य में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतर्गत मात्र 10 माह की अवधि में जिले में कुल 27 हजार 441 आवासों का निर्माण पूर्ण किया गया है। जिसके आधार पर महासमुंद जिला राज्य स्तर पर दूसरा स्थान हासिल किया है। जिले में निर्मित कुल 27,441 आवासों में विभिन्न विकासखंडों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। पिथौरा विकासखंड में सर्वाधिक 7,193 आवास, बागबाहरा विकासखंड में 6,102 आवास, महासमुंद विकासखंड अंतर्गत 5,775 आवास, सरायपाली विकासखंड अंतर्गत 5,062 आवास तथा बसना विकासखंड में 3,309 आवासों का निर्माण पूर्ण किया गया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मंशानुरूप जिला प्रशासन द्वारा गरीब, वंचित एवं जरूरतमंद परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। इसी दिशा में प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से पात्र हितग्राहियों को सुरक्षित, सम्मानजनक एवं स्थायी आवास उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे उनके जीवन स्तर में सकारात्मक परिवर्तन आ रहा है। योजना के क्रियान्वयन से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित हुए हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। जिले में कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के मार्गदर्शन एवं जिला पंचायत सीईओ हेमंत नंदनवार के सतत निरीक्षण में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, जनप्रतिनिधियों तथा मैदानी अमले के सतत प्रयासों, नियमित निगरानी एवं प्रभावी समन्वय के चलते यह उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। हितग्राहियों को समय पर तकनीकी मार्गदर्शन, वित्तीय सहायता एवं निर्माण सामग्री उपलब्ध कराकर कार्यों में गति लाई गई। जिले में आवास निर्माण की इस उपलब्धि से हजारों परिवारों का पक्के मकान का सपना साकार हुआ है। लाभान्वित परिवारों ने केन्द्र एवं राज्य शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इसके लिए धन्यवाद ज्ञापित किया है। जिला प्रशासन द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना के लक्ष्यों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण करने निरंतर समन्वय के साथ क्रियान्वयन किया जा रहा है। ताकि कोई भी पात्र परिवार आवास सुविधा से वंचित न रहे।

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