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टोल-फ्री नम्बर 1962 बना लाइफ लाइन, घोड़े के बच्‍चे को मिला नया जीवन

भोपाल. पशुओं को सही समय पर घर पर ही बेहतर इलाज की सुविधा मिले, इसके लिए पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा 1962 टोल फ्री नंबर का संचालन किया जा रहा है। चलित पशु एंबुलेंस चलाई जा रही है। खण्डवा जिले के खानशाहवली निवासी सैयद वसीम रजा के घोड़े के बच्‍चे कबीर के लिए प्रदेश सरकार का टोल फ्री नंबर लाइफ लाइन बना। समय पर उपचार मिलने की वजह से उसे नया जीवन मिला। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का पशु चिकित्सा हेल्पलाइन 1962 सुविधा के लिए वसीम और उनके परिवारजन ने आभार प्रकट किया है। खण्डवा के खानशाहवली क्षेत्र के निवासी सैयद वसीम रजा लगभग 5 माह पूर्व घोड़े का एक बच्चा लाए और उसका नाम “कबीर” रखा। घर में बच्चे की तरह कबीर का लालन पालन हो रहा था, और घर के सभी सदस्य उसे बच्चे जैसा दुलार करते। कुछ दिन पूर्व कबीर को जुएं पड़ गई। रविवार शाम को वसीम ने मेडिकल स्टोर से जूं नाशक दवा लाकर कबीर के शरीर पर दवा लगा दी। वसीम ने दवा तो लगा दी, लेकिन वह कबीर के मुंह को कवर करना भूल गया। कबीर ने अपने शरीर पर लगी जुंआ नाशक विषैली दवा चाटना शुरू कर दिया। कुछ ही देर में विषैली दवा ने असर दिखाया और कबीर को बैचेनी होने लगी और वह लोटपोट होने लगा और उसके मुंह से झाग आने लगा। घर के सदस्यों ने यह सब देखा, तो घबरा गए। वसीम को इसकी खबर लगी तो वह तुरंत घर आया और टोल-फ्री नम्बर 1962 पर फोन लगाकर पशुओं के उपचार हेतु उपलब्ध शासन की एम्बुलेंस सुविधा के लिए कॉल किया। कुछ ही देर में पशु चिकित्सक डॉ. कौस्तुभ त्रिवेदी एम्बुलेंस सहित अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और उन्होंने अपना इलाज शुरू किया। डॉ. त्रिवेदी ने एम्बुलेंस पैरावेट स्टॉफ सुश्री विधि पटेल, एवं अटेण्डेंट श्री नीलेश विश्वकर्मा के सामूहिक प्रयासों से लगभग आधे घंटे के उपचार के बाद कबीर को आराम मिलना शुरू हो गया और धीरे धीरे वह बिल्कुल स्वस्थ हो गया। वसीम और उसका परिवार कबीर की जान बचाने के लिए पशु चिकित्सक डॉ. त्रिवेदी और उनके सहयोगी स्टॉफ की सराहना करते नहीं थकते हैं।  

आप देश का भविष्य हैं, अपने कौशल और प्रदर्शन में सुधार करें, खुद को निखारें

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आज के विद्यार्थी ही देश का भविष्य हैं। देश की बागडोर आगे चलकर इन्हें ही संभालनी है। इसलिए सभी विद्यार्थी अपने कौशल, ज्ञान और प्रदर्शन में निरंतर सुधार कर खुद को निखारें। परीक्षा की तैयारी पूरी मेहनत और लगन से करें, तनाव बिलकुल भी न लें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि परीक्षा हमारे जीवन का एक पड़ाव मात्र है, अंतिम लक्ष्य नहीं। मेहनत करना आपकी आदत में होना चाहिए, लेकिन तनाव को खुद पर हावी न होने दें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विद्यार्थियों के लिए परीक्षा के वक्त आत्मविश्वास, अनुशासन और संतुलित दिनचर्या ही सफलता की अंतिम कुंजी है। स्वयं पर सदैव विश्वास बनाए रखें, किसी बात से डरकर नहीं, डटकर आगे बढ़िए और अपने सभी सपनों को साकार कीजिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को शासकीय सुभाष उच्चतर माध्यमिक उत्कृष्ट विद्यालय में बोर्ड परीक्षाओं से पहले “परीक्षा पर संवाद – 2026” कार्यक्रम में विद्यार्थियों को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्यार्थियों को बेहतर तैयारी के लिये मार्गदर्शन भी दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी विद्यार्थियों से परीक्षा के समय खुद को तनाव से दूर रखते हुए निरंतर भरपूर मेहनत करने और जितना भी हो सके, अच्छे अंक लाने की अपील की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्यार्थियों को समय प्रबंधन, नियमित अभ्यास और किसी भी हालात में खुद पर विश्वास बनाए रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि असफलता से घबराने की बजाए उससे सीख लेकर आगे बढ़ना ही एक सशक्त व्यक्तित्व की पहचान है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार शिक्षा व्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए हरसंभव कोशिश कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्यार्थियों से सीधा संवाद कर उनकी जिज्ञासाओं को ध्यानपूर्वक सुना और उन्हें सकारात्मक सोच के साथ अपना भविष्य बनाने की दिशा में आगे बढ़ने की समझाइश दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि परीक्षा के समय सभी विद्यार्थी पर्याप्त नींद लें। पढ़ाई का एक शेड्यूल निर्धारित करें। किसी विषय के अध्ययन के बाद उस पर चिंतन-मनन की आदत डालें। केवल अक्षर ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों को अपने मित्रों और शिक्षकों के साथ पाठ्यक्रम के विषयों पर चर्चा करनी चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने छात्रा लक्ष्मी तिवारी के प्रश्न पर कहा कि माता-पिता और बच्चों के बीच परस्पर संवाद होते रहना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्यार्थियों से पूछा कि परीक्षा से कौन-कौन डरते हैं या किसको डर नहीं लगता है? इस पर छात्र आदित्य ने कहा कि रेगुलर तैयारी करेंगे तो परीक्षा से बिल्कुल भी डर नहीं लगेगा। सिलेबस को डिवाइड कर रिवीजन करना चाहिए। छात्रा सरस्वती ने कहा कि हमें परीक्षा देते समय खुद पर विश्वास रखना चाहिए, क्योंकि प्रधानमंत्री  मोदी ने कहा है कि परीक्षा एक उत्सव की तरह है। छात्रा तान्या दुबे ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को बताया कि वे हमेशा आत्मविश्वास के साथ परीक्षा हॉल में प्रवेश करती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने छात्रों से पूछा कि परीक्षा के समय में पेपर में आए प्रश्नों का उत्तर देने में चयन कैसे करते हैं? इस पर छात्र हिमांशु ने कहा कि वह सबसे पहले अच्छी तरह से आने वाले प्रश्नों को हल करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को अपने बीच पाकर विद्यार्थियों में भारी उमंग और उत्साह देखने को मिला। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से सीधे संवाद का अवसर पाकर विद्यार्थियों ने बेहिचक सवाल किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भी एक गुरू, एक शिक्षक, एक अभिभावक और एक मनोविज्ञान विशेषज्ञ की भांति पहले विद्यार्थियों के मन का भाव जाना, उनसे खुलकर बात की, फिर पूछे गए सभी सवालों के जवाब दिए। विद्यार्थियों ने अपनी परीक्षा की तैयारियों और इस दौरान आई कठिनाईयां भी शेयर की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के साथ इस आत्मीय संवाद से सभी विद्यार्थियों को परीक्षा से पहले मानसिक संबल और हर परिस्थिति में पॉजीटिव रहने की नई ऊर्जा मिली। स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री  उदय प्रताप सिंह ने कहा कि परीक्षा हर वर्ष एक चुनौती की तरह होती है। विद्यार्थियों को समुचित समय नियोजन करते हुए अपनी तैयारियों पर ध्यान देना चाहिए और तनाव को खुद पर हावी नहीं होने देना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सतत रूप से विद्यार्थियों के साथ परस्पर संवाद करते हैं एवं उनकी कठिनाईयों को समझकर निराकरण करने का हरसंभव प्रयास करते हैं। वे लीडर विथ लेटेस्ट नॉलेज हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आरंभ में मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर विद्यार्थियों से संवाद की शुरूआत की। कार्यक्रम में सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. संजय गोयल, आयुक्त लोक शिक्षण मती शिल्पा गुप्ता सहित सुभाष स्कूल के प्राचार्य, सभी शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।

वायरल स्किन फास्टिंग ट्रेंड—फायदा ज्यादा या नुकसान? जानिए एक्सपर्ट्स की राय

सुबह के क्लींजर से लेकर रात के नाइट जेल तक, हम रोज अपनी स्किन को केमिकल प्रोडक्ट्स की कई परतों में दबा देते हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि यह आदत आपकी स्किन की नेचुरल ग्लो को छीन सकता है? ऐसे में इन दिनों सोशल मीडिया पर एक नया ट्रेंड काफी चर्चा में है। लेकिन सवाल आता है कि क्या वाकई यह फायदा होता है, या सिर्फ एक ट्रेंड है? आइए जानते हैं इसके बारे में। क्या है स्किन फास्टिंग? स्किन फास्टिंग का मतलब है कुछ दिनों या हफ्तों के लिए अपनी स्किनकेयर रूटीन को बेहद सिंपल कर देना। इस दौरान त्वचा की देखभाल के लिए सिर्फ क्लींजर, मॉइश्चराइजर और सनस्क्रीन का इस्तेमाल किया जाता है। यह एक तरह का डिटॉक्स है, जिसमें स्किन को एक्टिव इंग्रिडिएंट्स से ब्रेक मिलता है और वह खुद को रिपेयर करती है। क्यों बढ़ रहा है इसका ट्रेंड? आजकल मल्टी-स्टेप रूटीन में ढेर सारे एक्टिव इंग्रेडिएंट्स इस्तेमाल होते हैं, जिससे स्किन का नेचुरल बैरियर कमजोर होने लगता है। ऐसे में स्किन फास्टिंग के दौरान स्किन को रिपेयर होने का मौका मिलता है। साथ ही, कम प्रोडक्ट्स लगाने से स्किन उसे बेहतर अब्जॉर्ब कर पाती है। स्किन फास्टिंग के फायदे     स्किन के नेचुरल बैरियर को रिपेयर करने में मदद करती है।     इससे स्किन का पीएच बैलेंस बरकरार रहता है और त्वचा में नमी बनी रहती है।     स्किन फास्टिंग इरिटेशन और सेंसिटिव को कम करने में मदद करती है। यह रोजेसिया से पीड़ित लोगों के लिए फायदेमंद होती है।     ज्यादा प्रोडक्ट्स लगाने से होने वाले ब्रेकआउट, कंजेशन और रिएक्शन का खतरा भी कम होता है।     रेटिनॉल और एक्सफोलिएशन जैसे प्रोडक्ट्स से ब्रेक लेने पर स्किन खुद को रिपेयर कर पाती है। क्या हर किसी के लिए सही है? स्किन फास्टिंग पर रिसर्च सीमित है। इसलिए हर व्यक्ति पर इसका अलग असर देखने को मिल सकता है, जैसे-     अगर आपकी स्किन ज्यादा ड्राई है, तो आपको रूखापन या स्किन डिहाइड्रेशन हो सकता है। इसके कारण स्किन बैरियर डैमेज होने का रिस्क रहता है।     स्किन फास्टिंग का असर रातों-रात नहीं दिखता। इसलिए अच्छे नतीजों के लिए आपको इंतजार करना पड़ सकता है।     एक्ने या हाइपरपिग्मेंटेशन जैसी परेशानियों के लिए सही ट्रीटमेंट की जरूरत होती है। ऐसे में स्किन फास्टिंग ज्यादा फायदेमंद साबित नहीं होगी।     स्किन फास्टिंग के बाद दोबारा एक्टिव इंग्रिडिएंट्स को स्किनकेयर में शामिल करने पर इरिटेशन हो सकती है।     इसी तरह अचानक कुछ एक्टिव इंग्रिडिएंट्स का इस्तेमाल बंद करने पर भी रिएक्शन होने का खतरा रहता है। कुल मिलाकर बात यह है कि स्किन फास्टिंग कुछ लोगों के लिए फायदेमंद हो सकती है, तो कुछ के लिए नुकसानदेह। इसलिए अपनी स्किन की समस्याओं और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ही फैसला लें।  

अप्रकाशित किताब लीक मामला: जनरल नरवणे से जुड़ी FIR, दिल्ली पुलिस की कार्रवाई

 दिल्ली  दिल्ली पुलिस ने विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और समाचार मंचों पर चल रही उन खबरों का संज्ञान लिया है, जिनमें यह दावा किया गया है कि ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ नाम की किताब की एक प्री-प्रिंट कॉपी सार्वजनिक रूप से प्रसारित की जा रही है। जांच में क्या पाया गया? इस किताब के प्रकाशन के लिए संबंधित अधिकारियों से जरूरी मंजूरी मिलना अभी बाकी है। जांच के दौरान यह पाया गया कि ‘पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ द्वारा तैयार की गई इसी शीर्षक वाली पुस्तक की एक पीडीएफ कॉपी कुछ वेबसाइटों पर उपलब्ध है। इसके अलावा, कुछ ऑनलाइन मार्केटिंग प्लेटफॉर्म्स ने पुस्तक के कवर को इस तरह प्रदर्शित किया है जैसे कि यह बिक्री के लिए उपलब्ध हो। इस मामले की जांच करने के लिए दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक मामला दर्ज किया है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि बिना आधिकारिक मंजूरी के यह किताब ऑनलाइन कैसे पहुंची और क्या यह किसी सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। फिलहाल इस मामले में जांच जारी है ताकि इस ब्रीच के पीछे के कारणों और जिम्मेदार लोगों का पता लगाया जा सके। बता दें, राहुल गांधी को पिछले हफ्ते संसद परिसर में कथित तौर पर इस किताब की एक कॉपी लहराते हुए देखा गया था। इस मामले ने काफी बवाल मचा दिया है, जिसके चलते लोकसभा की कार्यवाही बाधित हुई और मौजूदा बजट सत्र के शेष समय के लिए आठ सांसदों को निलंबित कर दिया गया है।  

7 साल पुराना प्यार, एक कॉल और खून का खेल: वेटर से रिश्ता बना पति की हत्या की वजह

जयपुर संयोग से हुई एक मुलाकात का अंजाम करीब 8 साल बाद बेहद खौफनाक हुआ। राजस्थान में प्रेमी संजू के हाथों पति की हत्या कराने वाली अंजू की कहानी काफी हद तक इंदौर की सोनम रघुवंशी से मिलती-जुलती है। राजा रघुवंशी की तरह ही आशीष को भी उसकी दुल्हन ने ही धोखे से मौत के घाट उतार दिया। अंजू और संजू की इस कहानी की शुरुआत 2018 में हुई थी, लेकिन करीब 7 साल तक दोनों में कोई संपर्क नहीं था। दोबारा हुई मुलाकात के बाद दोनों ने सारी हदें पार कर दीं।   आरोप है कि अंजलि उर्फ अंजू ने 30 जनवरी को संजू और उसके दोस्तों के साथ मिलकर अपने पति आशीष की हत्या कर दी, जिसके साथ 3 महीने पहले ही उसकी शादी हुई थी। अंजू और संजू की पहली मुलाकात 2018 में एक शादी समारोह के दौरान हुई थी। अंजू वहां एक मेहमान बनकर गई थी जबकि संजू वहां एक वेटर के रूप में लोगों को नाश्ता और खाना परोस रहा था। यहां दोनों ने एक दूसरे को देखा और दिल दे बैठे। थोड़ी देर बातचीत के बाद संजू ने अंजू को अपना मोबाइल नंबर दिया। लेकिन अंजू के पास कोई मोबाइल नहीं होने की वजह से दोनों का संपर्क नहीं बन पाया। मोबाइल हाथ आने के बाद जिंदगी में नया मोड़ अंजलि की जिंदगी में एक बड़ा मोड़ तब आया जब उसने 2014 में अपना मोबाइल फोन खरीदा। अब उसने करीब 7 साल पहले उस नंबर को डायल किया जो संजू ने दिया था। सालों पहले मिले और कुछ घंटों के बाद ही बिछड़े अंजू-संजू की फोन पर लंबी बात होने लगी। दोनों की दोस्ती जल्द ही प्यार में बदल गई। दोनों एक दूसरे को बहुत चाहने लगे और एक दूसरे के साथ जिंदगी बिताने की कसमें खाने लगे थे। इधर, बीकॉम कर चुकी अंजू के लिए परिवार के लोग योग्य दूल्हे की तलाश में थे। उनकी तलाश रवाला के आशीष पर जाकर खत्म हुई। एमकॉम करने के बाद बीएड कर रहे संजय से अंजू की शादी तय कर दी गई। परिवार की मर्जी के मुताबिक आशीष से शादी करके वह सादुलशहर से रावला चली गई पर खुश नहीं थी। पति की हत्या के 16 दिन पहले अंजलि मायके गई। पुलिस के मुताबिक, इस दौरान उसने संजू के साथ मिलकर आशीष की हत्या की साजिश रची। शादी के बाद दोनों की आमने-सामने मुलाकात नहीं हुई, पर वे वॉट्सऐप पर लगातार संपर्क में रहते थे। हत्या के दिन भी दोनों के बीच 5-7 बार बात हुई थी। पति की हत्या और लूट का नाटक 30 जनवरी की रात अंजलि ने डिनर के बाद पति को टहलने के लिए चलने को कहा। वह पति को लेकर गांव के सुनसान रास्ते की ओर चली गई जहां प्लान के मुताबिक संजय अपने दो दोस्तों के साथ झाड़ियों में छिपा था। जैसे ही अंजलि अपने पति के साथ वहां पहुंची, संजू ने अपने दो दोस्तों के साथ आशीष पर हमला कर दिया। रॉड से पीटने के बाद मफलर से उसका गला घोंट दिया। इसके बाद अंजलि ने इसे दुर्घटना और लूट दिखाने के लिए प्रेमी को अपने गहने दे दिए। वह बेहोशी का नाटक करके लेट गई। बाद में एक राहगीर की सूचना पर पहुंची पुलिस ने आशीष को अस्पताल पहुंचाया जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में जब यह बात सामने आई कि आशीष का गला घोंटा गया था तो पुलिस ने हत्या के एंगल से पड़ताल की और जो सच सामने आया उससे पूरा देश हैरान है।

दिल्ली में लग्ज़री स्टे महंगा क्यों? 5-स्टार होटलों के रूम रेट में अचानक उछाल का पूरा सच

नई दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी में ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ से पहले 5 स्टार होटलों के कमरों के किराए में भारी उछाल आया है। सम्मेलन 16 से 20 फरवरी के बीच नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होगा। इसमें बड़ी संख्या में विदेशी प्रतिनिधियों, वक्ताओं और टेक जगत के एक्सपर्ट के शामिल होने की उम्मीद है। बताया जा रहा है कि इस समिट के लिए दुनियाभर से 35,000 से ज्यादा रजिस्ट्रेशन हासिल हुए हैं। यही वजह है कि होटलों के कमरों के किराए में भारी बढ़ोत्तरी देखी जा रही है।   एक रात के लिए जिन कमरों का किराया आमतौर पर 20,000 रुपये से 40,000 रुपये होता था अब उनकी कीमतें अब लाखों में पहुंच गई है। ट्रेवल वेबसाइटों के अनुसार, 19 और 20 फरवरी को कई 5 स्टार होटलों में कमरे की कीमतें एक रात के लिए लाखों रुपये तक पहुंच रही हैं। वहीं लग्जरी कैटेगरी में तो एक कमरे की कीमत एक रात के लिए 4 से 5 लाख रुपये के बीच पहुंच चुकी है। कई होटलों ने ‘मिनिमम-स्टे’ जैसी शर्ते लागू कर दी हैं। कमरों के किराए में भारी बढ़ोत्तरी लीला पैलेस, आईटीसी मौर्या और ताज पैलेस, द इंपीरियल, शांगरी-ला इरोज और द पार्क होटल 18 से 20 फरवरी की पीक तारीखों के लिए लगभग पूरी तरह बुक हो चुके हैं। वहीं जो कमरे बचे हैं उन्हें बेहद ही ऊंचे दामों में बुक किया जा रहा है। कनॉट प्लेस में स्थित द इंपीरियल होटल में 17 फरवरी को एक कमरे की कीमत 2.4 लाख रुपये से ज्यादा है तो वहीं रेडिसन ब्लू होटल करीब 1.1 लाख रुपये चार्ज कर रहा है। आपको बता दें कि समिट के लिए अब तक करीब 50 वैश्विक कंपनियों के प्रमुखों और संस्थापकों ने सम्मेलन में भागीदारी की पुष्टि कर दी है, जबकि 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधित्व की उम्मीद जताई गई है। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के लिए मध्य दिल्ली को जी20 की तर्ज पर सजाया जाएगा।  

मध्यप्रदेश को बंधुआ-बाल श्रम से मुक्त करने का संकल्प: श्रम मंत्री श्री पटेल

भोपाल. श्रम मंत्री  प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि चार नवीन श्रम संहिताओं में स्वास्थ्य, दुर्घटना बीमा और व्यावसायिक सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं। बंधुआ मजदूरी और बाल श्रम जैसी कुप्रथाओं को जड़ से उन्मूलन के लिये ठोस रोडमैप तैयार किया जाएगा। इस रोडमैप के पाँच प्रमुख स्तंभ होंगे कानूनी सहायता, पुनर्वास, कौशल विकास, जनजागरूकता और प्रशासनिक संवेदनशीलता। हमारा लक्ष्य मध्यप्रदेश को बंधुआ और बाल श्रम मुक्त बनाना है। यह बात श्रम मंत्री  प्रहलाद सिंह पटेल ने सोमवार को कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर भोपाल में आयोजित कार्यशाला में कही। श्रम मंत्री  पटेल ने कहा कि बंधुआ मजदूर की स्पष्ट परिभाषा तय करना आसान नहीं है, लेकिन यह अवश्य तय किया जा सकता है कि किन परिस्थितियों में कोई मजदूर बंधुआ बनता है। प्रवासी मजदूर होना, अशिक्षा, कानून की जानकारी का अभाव, नशे की लत, मानसिक रूप से कमजोर स्थिति, बाल श्रम और परंपरागत व्यवसायों से जुड़ी तात्कालिक आवश्यकताएं ये सभी बंधुआ श्रम के प्रमुख कारण हैं। मंत्री  पटेल ने बताया कि बारूद से जुड़े कारखानों को मध्यप्रदेश में अत्यंत खतरनाक श्रेणी में रखा गया है। उद्योगों का वर्गीकरण खतरनाक और अति-खतरनाक श्रेणियों में किया जाना चाहिए, ताकि श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। श्रम मंत्री श्रह पटेल ने स्पष्ट किया कि आज संकल्प करने का दिन है कि आने वाले समय में हम यह कह सकें कि मध्यप्रदेश में न कोई बाल मजदूर है और न कोई बंधुआ मजदूर। उन्होंने कहा कि हुनर को रोका नहीं जा सकता, लेकिन यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी को मजदूरी के कारण बंधुआ न बनाया जाए और न ही किसी बच्चे से उसका बचपन छीना जाए। एआई युग में श्रम कानूनों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण कार्यक्रम में सचिव, श्रम विभाग  रघुराज राजेन्द्रन ने कहा कि वैश्विक परिदृश्य में आज एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) एक बड़ा परिवर्तनकारी तत्व बनकर उभरा है। तकनीकी बदलाव हमेशा टूल के रूप में आए हैं, लेकिन एआई में सोचने की क्षमता होने के कारण यह कार्यबल और रोजगार के क्षेत्र में सबसे बड़ा बदलाव लाएगा। उन्होंने कहा कि नियम निर्माण के दौरान जोखिमों को कैसे कम किया जाए, इस पर गंभीरता से विचार करना होगा। इसी परिप्रेक्ष्य में यह कार्यशाला अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसमें चार नवीन श्रम संहिताओं पर चर्चा कर एक बेहतर और समावेशी समाज की दिशा में कदम बढ़ाया जाएगा। कार्यक्रम में श्रम विभाग द्वारा तीन संस्थानों को श्रम स्टार रेटिंग में उल्लेखनीय कार्य करने पर सम्मान प्रदान किया गया। कार्यशाला में श्रमायुक्त मती तन्वी हुड्डा ने स्वागत भाषण देते हुए माननीय अतिथियों का अभिनंदन किया। बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 तथा स्टेट एक्शन प्लान (SAP) पर आधारित प्रस्तुति  लॉलीचैन पी. जोसेफ, बाल संरक्षण विशेषज्ञ, यूनिसेफ भोपाल द्वारा दी गई। कार्यशाला में यूनीसेफ एवं विभिन्न औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि श्रम विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य नवीन श्रम संहिताओं की जागरूकता करना एवं उनके प्रावधानों से अवगत कराना था। कार्यशाला में लगभग 200 प्रतिभागियों के रूप में विभिन्न जिलों से श्रम अधिकारी/ कर्मचारी श्रमिक संगठन/यूनियन नियोजन एवं NGOs से सहभागिता दी गई। इसके साथ-साथ बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986 के अंतर्गत राज्य कार्य योजना का विमोचन श्रम मंत्री  प्रहलाद सिंह पटेल द्वारा किया गया। श्रम अधिनियमों के मापदंडों के अनुपालन संबंधी नवीन अवधारणा श्रम स्टार रेटिंग के सर्टिफिकेट प्रदान किए गए। कार्यशाला में वाचकों द्वारा चार नवीन श्रम संहिताओं का प्रस्तुतीकरण किया गया। प्रतिभागियों द्वारा समूह चर्चा एवं शंका समाधान सत्र में सक्रिय भागीदारी करते हुए मांग सुझाव दिए गए।  

भरोसे की सीमा टूटी: बेटी ने मां के निजी पलों से किया खिलवाड़, सच जानकर सन्न रह गया परिवार

बेंगलुरु कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक महिला ने अपनी बेटी और उसके प्रेमी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। महिला के आरोप हैं कि बेटी ने प्रेमी के कहने पर अपनी मां और मौसी की अश्लील तस्वीरें युवक को भेजी हैं। पुलिस ने युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और उसकी तलाश की जा रही है।   जब फोन की जांच की तो चौंका परिवार रिपोर्ट के अनुसार, 49 वर्षीय महिला ने पुलिस को दी शिकायत में बताया है कि उन्हें बेटी के फोन में आपत्तिजनक सामग्री मिली थी। परिवार ने जांचकर्ताओं को बताया है कि यह बात करीब एक महीने पहले की है, जब युवती की मां ने उसे एक युवक के साथ बात करते हुए पकड़ा था। पढ़ने के लिए मांगा फोन, खींची न्यूड फोटोज शिकायत की गई है कि बीबीए ग्रेजुएट युवती ने अपने पिता से पढ़ाई के लिए फोन की करीब एक साल पहले मांग की थी। परिवार ने मांग को पूरा कर दिया। बात तब बिगड़ी जब एक दिन घर में काम कर रही महिला अचानक बेटी के कमरे में गईं और उसे एक युवक से वीडियो कॉल करते देख लिया। मां को देखते ही युवती ने फोन काट दिया, जिससे उनका शक और गहरा गया था। गुमराह करने की कोशिश जब परिवार ने युवक को लेकर सवाल किया और पासवर्ड मांगा, तो युवती उन्हें सीधा जवाब देने से बचती रही। हालांकि, बाद में परिवार को फोन का पासवर्ड हासिल करने में सफलता मिली। रिपोर्ट के अनुसार, युवती की मां के आरोप हैं कि उन्हें फोन में उनके अश्लील फोटोज मिले हैं, जो सोने के दौरान खींचे गए थे। मौसी की अश्लील तस्वीरें भी शेयर कर दीं उन्होंने आरोप लगाए कि ये फोटोज वरुण नाम के युवक के साथ शेयर किए गए थे। उन्होंने यह भी दावा किया है कि बेटी ने अपनी मौसी की नहाते हुए तस्वीरें भी लेकर वरुण को शेयर की हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, दर्ज शिकायत में बताया गया है कि युवती के फोन से मिले संदेशों से पता चला है कि वरुण ने युवती से फोटो शेयर करने के लिए कहा था। घर से भागी युवती विवाद खड़ा होने के बावजूद युवती परिवार से लगातार बहस करती रही। खबर है कि करीब एक सप्ताह पहले वह कथित तौर पर घर छोड़कर चली गई और परिवार को बताया कि वह वरुण से शादी करना चाहती है। इसके बाद परिवार ने पुलिस का रुख किया। फिलहाल, वरुण की तलाश की जा रही है।

पीली हल्दी के बाद अब ‘नीली हल्दी’ की बारी: सेहत के लिए क्यों मानी जाती है खास?

हल्दी का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में गहरा पीला रंग आता है। हम सभी जानते हैं कि पीली हल्दी हमारी रसोई की शान है, क्योंकि यह सेहत और स्किन दोनों के लिए काफी फायदेमंद होती है, लेकिन क्या आपको पता है कि भारत की मिट्टी में एक ऐसी दुर्लभ हल्दी भी उगती है जो पीली नहीं, बल्कि अंदर से नीले रंग की होती है? जी हां, इसे ‘नीला सोना’ भी कहा जा सकता है क्योंकि यह सामान्य मसाले से कहीं बढ़कर, एक शक्तिशाली आयुर्वेदिक औषधि है। आइए, शारदा हॉस्पिटल में इंटरनल मेडिसिन के सीनियर कंसल्टेंट, डॉ. श्रेय श्रीवास्तव से जानते हैं इसके बारे में। क्या है नीली हल्दी? यह एक बहुत ही दुर्लभ पौधा है जिसे विज्ञान की भाषा में करकुमा कैसिया (Curcuma Caesia) कहा जाता है। आम बोलचाल में लोग इसे ‘काली हल्दी’ के नाम से भी जानते हैं। यह सामान्य हल्दी से बिल्कुल अलग दिखती है। जब आप इसकी जड़ को तोड़ते हैं, तो यह अंदर से चमकदार पीली नहीं, बल्कि गहरे नीले या नीले-काले रंग की निकलती है। यह मुख्य रूप से भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ चुनिंदा इलाकों में ही पाई जाती है। क्यों है यह इतनी खास? हम जो पीली हल्दी खाते हैं, उसमें ‘करक्यूमिन’ होता है, जो उसे पीला रंग और स्वाद देता है, लेकिन नीली हल्दी का मामला थोड़ा अलग है। इसमें करक्यूमिन बहुत कम होता है, लेकिन इसमें कपूर और कई तरह के ‘एशेंशियल ऑयल्स’ भरपूर मात्रा में होते हैं। इसका स्वाद कड़वा होता है और इसमें कपूर जैसी तेज महक आती है। यही कारण है कि इसका इस्तेमाल खाना पकाने में नहीं, बल्कि आयुर्वेद और घरेलू नुस्खों में दवा के तौर पर किया जाता है। नीली हल्दी के अद्भुत फायदे नीली हल्दी को इसके औषधीय गुणों के कारण ‘सुपरचार्ज्ड’ माना जाता है। सही मात्रा में इस्तेमाल करने पर इसके कई फायदे हैं:     जोड़ों के दर्द, मांसपेशियों की अकड़न या किसी चोट के दर्द में यह बहुत राहत देती है। यह सूजन को कम करने में भी कारगर मानी जाती है।     इसमें रोगाणुओं से लड़ने की ताकत होती है, जो इन्फेक्शन को दूर रखने और घावों को भरने में मदद करती है।     पारंपरिक चिकित्सा में इसका इस्तेमाल खांसी, अस्थमा और छाती में जकड़न जैसी समस्याओं के लिए किया जाता है। इसके अलावा, यह पाचन को भी सुधारती है और पेट की गैस को कम करती है। साथ ही, त्वचा की खुजली, रशेज और छोटे-मोटे घावों पर इसका लेप बहुत फायदेमंद होता है। सावधानी भी है जरूरी चूंकि, नीली हल्दी में बहुत शक्तिशाली तत्व होते हैं, इसलिए इसका इस्तेमाल बहुत संभलकर करना चाहिए। एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि इसे हमेशा कम मात्रा में ही यूज करें। गर्भवती महिलाओं और किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों को बिना डॉक्टरी सलाह के इसका उपयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि ज्यादा मात्रा में लेने पर इसके साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं।  

कृषि के साथ पशुपालन: किसानों के लिए मुनाफे का नया मॉडल

भोपाल. ग्रामीण अर्थव्यवस्था का उत्थान, शासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। शासन द्वारा कृषि और पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिससे कृषि और पशुपालन अब न केवल लाभ का व्यवसाय बन गया है, बल्कि इससे किसानों और पशुपालकों को नई पहचान भी मिल रही है। छिंदवाड़ा जिले के चौरई विकासखंड के ग्राम बांकानागनपुर के श्री नवीन रघुवंशी भी उन्हीं किसानों और पशुपालकों में से एक हैं। श्री रघुवंशी ने पशुपालन विभाग की राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम) योजना का लाभ लेकर बकरी पालन को एक सशक्त और लाभकारी व्यवसाय के रूप में स्थापित किया है। सीमित संसाधनों से शुरू हुई उनकी यह पहल आज आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक प्रबंधन के कारण क्षेत्र में एक मॉडल बकरी फार्म के रूप में पहचान बना चुकी है। श्री रघुवंशी बताते हैं कि एनएलएम योजना के अंतर्गत स्वीकृत उनके इस बकरी फार्म में सिरोही नस्ल की कुल 175 बकरियाँ, बकरे एवं उनके बच्चे उपलब्ध हैं। फार्म को मॉडल स्वरूप में विकसित किया गया है, जिसमें बीमार बकरियों के लिए पृथक क्वारंटाइन शेड, बच्चों के लिए अलग कमरे तथा बकरियों के बैठने के लिए 4 फीट ऊँचाई पर प्लाई प्लेटफॉर्म बनाया गया है। इसी प्लेटफॉर्म के नीचे कड़कनाथ मुर्गी का पालन भी किया जा रहा है, जिससे अतिरिक्त आय का स्रोत विकसित हुआ है। बकरी फार्म की कुल लागत लगभग 1 करोड़ रुपये है, जिसमें भारत सरकार द्वारा 50 लाख रुपये की अनुदान राशि स्वीकृत की गई है। योजना के अंतर्गत प्रथम किस्त के रूप में 25 लाख रुपये की राशि श्री नवीन रघुवंशी को प्रदाय की जा चुकी है। इस आर्थिक सहयोग से फार्म को आधुनिक संसाधनों से सुसज्जित किया गया है। बकरियों के पोषण के लिए फार्म में तीन प्रकार की नेपियर घास का उत्पादन किया जा रहा है। दाना बनाने की मशीन एवं चैफ कटर जैसी सुविधाएँ भी उपलब्ध हैं। ब्रीडिंग के उद्देश्य से उच्च गुणवत्ता के बकरे रखे गए हैं, जिनमें एक बकरे की कीमत लगभग 2 लाख रुपये है। बेहतर पोषण और प्रबंधन के कारण बकरियों का स्वास्थ्य एवं उत्पादन स्तर उत्कृष्ट बना हुआ है। बकरी पालन के साथ प्राकृतिक खेती फार्म में बकरी पालन के साथ-साथ प्राकृतिक खेती भी की जा रही है। इससे न केवल लागत में कमी आई है, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल खेती को भी बढ़ावा मिला है। श्री नवीन रघुवंशी के पुत्र श्री मंथन रघुवंशी द्वारा बकरी पालन एवं उन्नत कृषि को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नई पहचान दी जा रही है। वे यूट्यूब एवं इंस्टाग्राम के माध्यम से बकरी पालन, उन्नत कृषि, मक्का उत्पादन तथा कम उम्र में पशुओं का वजन बढ़ाने जैसे विषयों पर शैक्षणिक वीडियो साझा कर रहे हैं। श्री मंथन रघुवंशी को उनके प्रभावी डिजिटल योगदान के लिए कृषि जागरण की ओर से “एग्री इंफ्लूएंसर ऑफ द ईयर 2026 पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह उपलब्धि युवाओं को कृषि एवं पशुपालन से जोड़ने की प्रेरणा देती है। महिला किसानों की पहल को मिली प्रदेश स्तर पर सराहना छिंदवाड़ा जिले के मोहखेड़ ब्लॉक की महिला किसान श्रीमती ज्योति सोमकुंवर ने प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में अपने नवाचार, अनुभव और जमीनी प्रयासों से प्रदेश स्तर पर पहचान बनाने में सफलता पाई है। भोपाल के मिंटो हॉल में आयोजित “मनन 2026” प्राकृतिक खेती विषयक कार्यक्रम में प्रदेश की महिला किसानों ने अपने अनुभव साझा किए, जिसमने छिंदवाड़ा जिले की ज्योति सोमकुंवर को भी अपने अनुभव साझा करने का अवसर मिला, जिसकी प्रदेश स्तर पर सराहना की गई। श्रीमती सोमकुंवर ने हकदर्शिका संस्था से जुड़कर किसानों को शासन की विभिन्न योजनाओं से जोड़ने के अपने अनुभव साझा किए। नव गठित पांढुर्णा जिले के विकासखंड सौंसर से महिला किसान श्रीमती मीता धुर्वे एवं श्रीमती कविता सिरसाम ने भी बड़ादेव जैविक उत्पादक समूह के माध्यम से ग्राम जोबनढाना में सृजन संस्था के सहयोग से संचालित जैविक उत्पाद केंद्र की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस प्रकार जैविक उत्पाद बनाकर किसानों को प्राकृतिक खेती की ओर प्रेरित किया जा रहा है और इससे ग्रामीण स्तर पर रोजगार एवं आय के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं। मोहखेड़ एवं सौंसर ब्लॉक की जैविक उत्पाद केंद्र से जुड़ी इन महिला किसानों द्वारा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के किए का रहे प्रयासों को प्रदेश स्तर पर सराहा गया। महिला किसानों की यह पहल न केवल अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बनी है, बल्कि प्राकृतिक खेती को अपनाने की दिशा में एक मजबूत संदेश भी दे रही है।  

दबोचा रेलवे संपत्ति चोरी गिरोह पर शिकंजा, मध्यप्रदेश पुलिस की बड़ी कार्रवाई

भोपाल. मध्यप्रदेश पुलिस अपने ध्येय वाक्य “देशभक्ति–जनसेवा” के अनुरूप प्रदेश में अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण एवं नागरिकों की आस्था व संपत्ति की सुरक्षा हेतु सतत् एवं ठोस कार्यवाही कर रही है। इसी क्रम में प्रदेश के विभिन्‍न जिलों में चोरी की गंभीर घटनाओं का सफल खुलासा करते हुए पुलिस ने लगभग 37 लाख 40 हजार रूपए से अधिक मूल्य का चोरी की सामग्री जप्त की है। पन्ना- रेलवे स्टेशन भवन से चोरी गई सामग्री बरामद थाना देवेंद्रनगर क्षेत्र में नागौद–खजुराहो रेलवे प्रोजेक्ट के तहत ग्राम फुलवारी स्थित रेलवे स्टेशन भवन से केबल, वायर, पीवीसी पाइप एवं अन्य इलेक्ट्रिकल सामग्री की चोरी के मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए लगभग 20 लाख रूपए की संपत्ति जप्त की है। विदिशा- तीन चोरी के प्रकरणों का खुलासा जिले के थाना सिविल लाइन पुलिस ने मुखबिर सूचना एवं तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर तीन अलग-अलग चोरी की घटनाओं का खुलासा करते हुए 02 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्‍जे से पुलिस ने चोरी की बोलेरो पिकअप वाहन, मंदिर से चोरी किया गया मुकुट एवं छत्र तथा चोरी किया गया बिजली तार सहित लगभग 9 लाख 20 हजार रूपए की सामग्री जब्‍त की है। शाजापुर-ग्राम जावदी स्थित हनुमान मंदिर चोरी का खुलासा शाजापुर जिले के थाना मोहन बड़ोदिया क्षेत्रांतर्गत ग्राम जावदी स्थित संकट मोचन हनुमान मंदिर में हुई चोरी की घटना का पुलिस ने 600 से अधिक सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्य एवं साइबर सेल की सहायता से सफलतापूर्वक खुलासा कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। साथ ही चोरी का माल बेचने हेतु रखने वाले एक अन्‍य आरोपी को भी गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्‍जे से चांदी के आभूषण एवं नगदी, चोरी में प्रयुक्त मोटरसाइकिल एवं दो धारदार चाकू सहित  कुल 4 लाख 20 हजार 570 रूपए की सामग्री जब्‍त की है। सीहोर-सराफा दुकान में चोरी का त्वरित खुलासा जिले के थाना आष्टा क्षेत्र में बुधबारा खरी खुंडी स्थित एक सोने-चांदी की दुकान से कर्मचारी द्वारा लगभग 1 किलो 390 ग्राम चांदी के आभूषण (पायल, कड़े, ब्रेसलेट एवं गले की चेन) चोरी किए जाने की घटना का त्‍वरित खुलासा कर आरोपी को गिरफ्तार किया। आरोपी के कब्जे से 1 किलो 359 ग्राम चांदी के आभूषण कीमत लगभग 4 लाख रूपए जब्‍त किए है। मध्यप्रदेश पुलिस आमजन की आस्था, धार्मिक स्थलों एवं निजी संपत्ति की सुरक्षा हेतु पूर्णतः प्रतिबद्ध है। नागरिक किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल नजदीकी पुलिस थाना अथवा डायल-112 पर दें सकते हैं।  

न्यायपालिका की मर्यादा तार-तार! जज के सामने हमला, CJI एक्शन मोड में

नई दिल्ली भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत के सामने वकील ने अपने साथ मारपीट का मुद्दा उठाया। वकील ने सीजेआई को बताया कि कोर्ट में दूसरे पक्ष के लोगों ने उनके साथ मारपीट की और ये सब एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज के सामने हुआ। इसपर सीजेआई ने नाराजगी जाहिर की। साथ ही कहा कि अदालत में इस तरह का गुंडाराज नहीं चलेगा। वकील ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, ‘मैं ADJ हरजीत सिंह पाल की अदालत तीस हजार कोर्ट में पेश हुआ था। मैं आरोपी की तरफ से कोर्ट में पेश हुआ था। शिकायतकर्ता और उसके कई गुंडों ने मुझपर हमला किया। पीटा भी। जज वहीं बैठे थे। कोर्ट के सभी सदस्य वहीं पर बैठे हुए थे।’ उन्होंने आरोप लगाए हैं कि कोर्ट रूम का दरवाज बंद करके आरोपी के साथ उनके साथ मारपीट की गई थी। CJI ने शिकायत दाखिल करने कहा सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने वकील से शिकायत दर्ज कराने के लिए कहा है। उन्होंने कहा है कि इस संबंध में दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पास शिकायत दर्ज कराई जाए और इसमें उनका नाम भी शामिल किया जाए। CJI ने कहा, ‘ये सब 7 फरवरी को हुआ? क्या आपने इसकी जानकारी दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को दी है? सीजे को लेटर लिखें और मुझे भी मार्क करें। इसपर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को संज्ञान लेने दीजिए और कार्रवाई प्रशासनिक पक्ष की तरफ से की जाएगी। इस तरह का गुंडा राज हमें स्वीकार्य नहीं है। इसका मतलब कानून का व्यर्थ होना है। ऐसा करें और मुझे बताएं।’

महाशिवरात्रि 2026: भद्रा के कारण बदलेगा जलाभिषेक का समय, जानें पूरी जानकारी

हर साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन महाशिवरात्रि का पावन पर्व मनाया जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन शिव-शक्ति का मिलन हुआ था. इस साल महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाने वाली है. महाशिवरात्रि के दिन भक्त भोलेनाथ और माता पार्वती की विशेष पूजा करते हैं. साथ ही व्रत रखते हैं. मान्यता है कि इस दिन भोलेनाथ प्रसन्न मुद्रा में रहते हैं और पूजन व व्रत से प्रसन्न होकर सभी मनोकामनाएं जल्द पूर्ण करते हैं. महाशिवरात्रि के दिन देश भर के शिव मंदिरों में जलाभिषेक के लिए भक्तों की लंबी कतार देखने को मिलती है. हालांकि, इस साल महाशिवरात्रि पर भद्रा का योग भी बन रहा है. ऐसे में कई लोगों के मन में ये सवाल है कि क्या इसका प्रभाव शिव जी के जलाभिषेक पर भी पड़ेगा? ऐसे में आइए जानते हैं कि महाशिवरात्रि पर भद्रा काल कब से कब तक रहेगा? साथ ही कब जलाभिषेक किया जा सकता है? महाशिवरात्रि 2026 भद्रा काल का समय पंचांग के अनुसार, 15 फरवरी की शाम 05 बजकर 04 मिनट से भद्रा काल शुरू होगा. वहीं भद्रा काल का समापन 16 फरवरी की सुबह 05 बजकर 23 मिनट पर होगा. यानी महाशविरात्रि पर करीब 12 घंटे 19 मिनट तक भद्रा काल रहेगा. हालांकि, चिंता की कोई बात नहीं है. पंडितों और ज्योतिषविदों के अनुसार, महाशिवरात्रि पर भद्रा पाताल लोक में वास करेगी. शास्त्रों में बताया गया है कि भद्रा के पाताल लोक में होने पर उसका प्रभाव धरती पर नहीं पड़ता. इसलिए महाशिवरात्रि के दिन भक्त बिना किसी असमंजस के भगवान शिव का जलाभिषेक और पूजा कर सकते हैं. महाशिवरात्रि 2026 जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त इस साल महाशिवरात्रि के दिन महादेव के जलाभिषेक के लिए कई मुहूर्त हैं. इस दिन पहला मुहूर्त सुबह 08 बजकर 24 मिनट से 09 बजकर 48 मिनट मिनट तक रहेगा. दूसरा मुहूर्त सुबह 09 बजकर 48 मिनट से 11 बजकर 11 मिनट तक रहेगा. तीसरा अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त रहेगा. ये सुबह 11 बजकर 11 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगा. शाम को शुभ-उत्तम मुहूर्त 06 बजकर 11 मिनट से 07 बजकर 47 मिनट तक रहेगा. इन सभी मुहूर्तों में भक्त शिव जी का जलाभिषेक कर सकते हैं.

‘इतिहास सब याद रखेगा’—SIR विवाद पर अभिषेक बनर्जी की कविता से गरमाई राजनीति

कोलकाता तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने सोमवार को पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर एक कविता लिखी, जिसमें उन्होंने लोगों पर इसके असर को लेकर अपना गुस्सा जाहिर किया। राजनीतिक लामबंदी या दूसरे तरीकों से विरोध करने के बजाय, बनर्जी ने चुनाव आयोग के कदम के खिलाफ लोगों की तरफ से बोलने के लिए अपनी कलम की ताकत का इस्तेमाल किया। कविता की हर लाइन केंद्र सरकार द्वारा लोगों पर किए जा रहे अत्याचार को दिखाती है। कविता का नाम ‘आमी अस्वीकार कोरी’ (मैं मानने से इनकार करता हूं) है। सोशल मीडिया पोस्ट पर कविता शेयर करते हुए बनर्जी ने कहा, “एक खतरनाक प्रक्रिया को लेकर मेरे अंदर बहुत उथल-पुथल मची हुई है, जिसने लोगों की जिंदगी तबाह कर दी है, और हमारे लोगों के सामूहिक दुख, दर्द और गुस्से को आवाज देते हुए, मैंने इन भावनाओं को एक छोटी सी कविता में ढाला है।” कविता की शुरुआती लाइनें हैं—’मैं ‘मानने से इनकार करता हूं, यह लापरवाही, यह लिस्टों का राज, यह डर का राज। मैं मानने से इनकार करता हूं, राज्य के नाम पर खून का कर्ज। मैं मानने से इनकार करता हूं, खून पर स्याही का राज।’ कविता में, हर शब्द और वाक्यांश एसआईआर से पैदा हुई हाल की स्थिति के डर और दर्द को दिखाता है। यह कविता एसआईआर प्रक्रिया के दौरान लोगों पर थोपे गए नियमों के खिलाफ विरोध की आवाज उठाती है। अब तक, राज्य में एसआईआर अभ्यास शुरू होने के बाद से लगभग 150 लोगों की मौत हो चुकी है। उस संख्या का जिक्र करते हुए, बनर्जी ने दावा किया, “यह सिर्फ एक संख्या नहीं है; यह राज्य द्वारा लगाई गई आग में लोगों की चीख है।” उन्होंने एसआईआर तरीके की व्यर्थता को निशाना बनाते हुए लिखा, “राज्य के रिकॉर्ड में, आंकड़े जिंदगी की जगह ले लेते हैं। जमीर, सच्चाई और सम्मान शासक के जूतों के नीचे कुचल दिए जाते हैं।” बनर्जी ने अपनी कविता में इतिहास का भी जिक्र किया। उनकी पंक्तियां कहती हैं, “इतिहास- वह माफ नहीं करता, वह लिस्टें नहीं पढ़ता। इतिहास याद रखता है कि किसने विरोध किया, किसने लड़ाई लड़ी, कौन अपनी जगह पर डटा रहा, किसने आग लगाई। इतिहास उन्हें कभी माफ नहीं करता जो लोगों को छोटा समझते हैं।” इस कविता के जरिए, उन्होंने एक बार फिर एसआईआर अभ्यास के खिलाफ आवाज उठाई है। इससे पहले, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस अभ्यास के विरोध में 26 कविताएं लिखी थीं। अब, अभिषेक बनर्जी भी इस लिस्ट में शामिल हो गए हैं।

गंभीर का बड़ा बयान: SKY की कप्तानी से टीम को मिल रही है नई ऊर्जा

नई दिल्ली भारत के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने सूर्यकुमार यादव की ‘संयमित नेतृत्व क्षमता’ की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि टी20 प्रारूप में कप्तान के तौर पर SKY सभी कसौटी पर खरे उतरते हैं और इससे उनका दबाव भरा काम थोड़ा आसान हो जाता है। स्टार स्पोर्ट्स द्वारा साझा किए गए एक छोटे वीडियो में गंभीर ने कहा कि मौजूदा टी20 विश्व कप में सूर्यकुमार जैसे आक्रामक बल्लेबाज का कप्तान होना भारत के लिए सौभाग्य की बात है। इस वीडियो में यह नहीं पता चल रहा है कि गंभीर ने यह बयान कब दिया है। गंभीर ने कहा, ‘सूर्यकुमार ने इस प्रारूप में मेरा काम बहुत आसान कर दिया है। वह लोगों के लिए एक बेहतरीन कप्तान हैं, यह सिर्फ इसलिए नहीं कि वह मैदान पर क्या करते हैं, या बल्लेबाज के रूप में कैसे हैं, या उनके शॉट्स इस प्रारूप में कैसे हैं।’ उन्होंने कहा, ‘कोच के तौर पर कभी-कभी आपके दिमाग में कई बातें चल रही होती हैं, लेकिन जब आप जानते हैं कि सूर्यकुमार माहौल को शांत बनाए रखेंगे, जैसा किसी भी कोच का सपना होता है, तो बहुत कुछ आसान हो जाता है।’ भारत ने सूर्यकुमार यादव की शानदार बल्लेबाजी के बूते शनिवार को विश्व कप के अपने शुरुआती मैच में अमेरिका को हराया। भारतीय कप्तान ने एक छोर से विकेटों के पतझड़ के बीच 49 गेंदों में नाबाद 84 रन के साथ पारी को संभाला था। भारतीय टीम बृहस्पतिवार को अब दिल्ली में नामीबिया के खिलाफ खेलेगी। गंभीर ने कहा, ‘मेरे लिए खिलाड़ी सूर्यकुमार को अलग रखा जा सकता है, लेकिन कप्तान सूर्यकुमार के तौर पर उन्होंने हर कसौटी पर खरा उतरकर मेरी जिंदगी बहुत आसान बना दी है। वह वास्तव में एक शानदार नेतृत्वकर्ता हैं।’ उन्होंने कहा, ‘यह बहुत अच्छा है कि देश का नेतृत्व उनके जैसे खिलाड़ी के हाथ में है, क्योंकि उनका दिल सही जगह पर है और दबाव में वह सही निर्णय लेते हैं।’ पैंतीस साल के सूर्यकुमार यादव दो साल पहले रोहित शर्मा की कप्तानी में टी20 विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थे। रोहित के इस प्रारूप से संन्यास के बाद उन्हें टीम की कमान सौंपी गई।

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