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आर्थिक समीक्षा में ग्राम विकास क्षेत्र की उपलब्धियों का ब्योरा, ग्राम पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी

लखनऊ. उत्तर प्रदेश सरकार की वर्ष 2025-26 की आर्थिक समीक्षा के अनुसार, ‘विकसित उत्तर प्रदेश’ की परिकल्पना को साकार करने के लिए योगी सरकार ने ग्रामीण विकास पर खर्च लगातार बढ़ाया है। वर्ष 2017-18 में जहां ग्राम विकास पर 10,508 करोड़ रुपये व्यय हुए थे,  जो 2025-26 में बढ़कर 20,081 करोड़ रुपये हो गया। बीते आठ वर्षों में ग्राम विकास कार्यों में व्यय में 8.43 प्रतिशत की वार्षिक चक्रवृद्धि दर से वृद्धि हुई है। मानव दिवस सृजन में देश में पहला स्थान वर्ष 2017-18 के 1814.34 लाख मानव दिवसों की तुलना में 2024-25 में 85.41 प्रतिशत वृद्धि के साथ 3363.97 लाख मानव दिवस सृजित किए गए, जिससे यूपी को देश में प्रथम स्थान मिला। वित्तीय वर्ष 2025-26 में दिसंबर 2025 तक 1805 लाख से अधिक मानव रोजगार दिवस सृजित हो चुके हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार संवर्धन के लिए वीबी-जी राम जी योजना के तहत आजीविका, पर्यावरण संरक्षण और बुनियादी ढांचे के कार्य तेजी से कराए गए। योजना के अंतर्गत 266 प्रकार के सामुदायिक और व्यक्तिगत लाभार्थीपरक कार्यों को लागू किया गया। तकनीक, पारदर्शिता और नवाचार का असर बुंदेलखंड की जल समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में अभिनव पहल करते हुए ललितपुर के बिरधा विकास खंड में विलुप्त शहजाद नदी के 1500 मीटर हिस्से का पुनरुद्धार किया गया, जिससे 9859 मानव दिवसों का सृजन हुआ और भूजल व सिंचाई संसाधनों को मजबूती मिली। कार्यों में पारदर्शिता के लिए ई-एमबी मॉड्यूल, त्रि-स्तरीय जियो टैगिंग, ऑनलाइन सॉफ्टवेयर, आधार आधारित मजदूरी भुगतान, नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम ऐप, एरिया ऑफिसर ऐप और ड्रोन तकनीक का उपयोग किया गया। 2024-25 में 65.26 लाख परिवारों के 75.83 लाख श्रमिकों को रोजगार मिला। जबकि 6.16 लाख परिवारों को पूर्ण 100 दिन का काम दिया गया। 2025-26 में अक्तूबर 2025 तक 47 लाख से अधिक परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराया गया। तमिलनाडु के बाद यूपी दूसरा सबसे अधिक परिवारों को रोजगार देने वाला राज्य है। पर्यावरण, खेल और सामाजिक सहभागिता वीबी-जी राम जी योजना के तहत ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में 2024-25 में 13.54 करोड़ और 2025-26 में 13.23 करोड़ पौधरोपण किया गया। वहीं, नवंबर 2025 तक 19 हजार से अधिक अमृत सरोवरों का निर्माण/पुनरुद्धार कर यूपी देश में अग्रणी रहा। इसके साथ ही 2025-26 में अक्तूबर 2025 तक 3550 खेल मैदान और 1706 आंगनबाड़ियों का निर्माण पूरा किया गया। महिलाओं की भागीदारी बढ़कर 42 फीसदी पहुंची वीबी-जी राम जी के तहत महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ी है। यह 2018-19 में 35 प्रतिशत से बढ़कर 2024-25 में 42 प्रतिशत तक पहुंच गई। वहीं, सोशल ऑडिट के जरिए पारदर्शिता सुनिश्चित करते हुए 2024-25 में 55,991 ग्राम पंचायतों में और 2025-26 में दिसंबर तक 51,648 ग्राम पंचायतों में ऑडिट पूरा किया गया।

सदन में टकराव चरम पर: राहुल-खरगे को नहीं मिला मौका, विपक्षी सांसदों का वॉकआउट

नई दिल्ली संसद के बजट सत्र के दौरान दोनों ही सदनों में जमकर हंगामा हो रहा है। मंगलवार को कार्यवाही शुरू होते ही लोकसभा में हंगामे का दौर शुरू हो गया और थोड़ी ही देर बाद सदन को 2 बजे तक स्थगित करना पड़ा। दूसरी तरफ राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे को ना बोलने देने का आरोप लगाते हुए विपक्षी सांसदों ने वॉकआउट कर दिया। एक बार स्थगन के बाद बारह बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही पीठासीन अधिकारी कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने जरूरी कागजात सभा पटल पर रखवाए। उन्होंने उसके बाद आम बजट पर चर्चा की शुरुआत करने के लिए कांग्रेस के शशि थरूर का नाम पुकारा। इस बीच कांग्रेस के कयी सदस्य अपने स्थान से खड़े होकर शून्यकाल के साथ राहुल गांधी को अपनी बात रखने देने की मांग करने लगे। पीठासीन अधिकारी ने बार बार कहा कि यह समय बजट पर चर्चा के लिए निर्धारित किया गया है और विपक्ष के नेता बजट पर अपनी बात रख सकते हैं। इस पर कांग्रेस समेत विपक्ष के सदस्य श्री गांधी को अपनी बात रखने देने की मांग करने लगे। विपक्षी सदस्य अपने स्थान पर खड़े होकर अपनी मांग को लेकर शोरगुल करने लगे जिसके कारण सदन की कार्यवाही दो बजे तक स्थगित कर दी गई। इससे पहले कार्यवाही शुरू होते ही अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन को बताया कि छह फरवरी को अंडर-19 भारतीय क्रिकेट टीम ने विश्व कप जीता है इसके लिए उन्हें वह सदन की तरफ से बधाई देते हैं। युवा क्रिकेट टीम को बधाई देने के बाद श्री बिरला ने प्रश्न काल की कार्रवाई शुरू की तो विपक्षी दलों के सदस्य अपनी मांगों को लेकर सीटों पर खड़े हो गए और जोर-जोर से बोलने लगे। अध्यक्ष ने इसी बीच प्रश्न काल की कार्यवाही को आगे बढ़ाया लेकिन विपक्ष की तरफ से तेज हंगामा शुरू हो गया। बिरला ने हंगामा कर रहे सदस्यों से कहा कि प्रश्न काल के बाद सदस्यों को बोलने का अवसर दिया जाएगा। उनका कहना था कि वह हमेशा सब सदस्यों को बोलने का अवसर देते हैं इसलिए सदन को बाधित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बजट पर चर्चा होगी तो सभी दलों को अपनी बात रखने का मौका मिलेगा इसलिए प्रश्न काल को चलने दें। उनका कहना था कि यह सदस्यों का समय होता है और सबको मौका मिलना चाहिए इसलिए वह सभी सदस्यों से सदन को बाधित न करने का आग्रह कर रहे है। सदन में सार्थक चर्चा के लिये सहयोग करें। उन्होंने तेज लहजे में कहा कि सदस्य नियमित सदन की कार्यवाही में अवरोध करने का प्रयास कर रहे हैं और उन्हें ऐसा नहीं होना चाहिए। इसी बीच सदस्य नारे लगाते हुए सदन के बीचों-बीच आ गये और शोर शराबा करने लगे। हंगामा और बढ़ने लगा तो श्री बिरला ने सदन की कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित कर दी।  

प्रदेश में प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक सरकार के अभूतपूर्व प्रयास

लखनऊ. प्रदेश सरकार ने वर्ष 2017-18 से अब तक शिक्षा को सर्वसुलभ, गुणवत्तापरक और रोजगारोन्मुख बनाने के लिए अनेक ठोस और दूरदर्शी कदम उठाए हैं। युवाओं को कौशल विकास, नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति से जोड़ते हुए शिक्षा को प्रदेश की प्रगति का प्रमुख आधार बनाया जा रहा है। बजट सत्र के पहले दिन प्रस्तुत आर्थिक समीक्षा में यह स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है कि प्राथमिक शिक्षा में ड्रॉपआउट रोकने से लेकर उच्च शिक्षा को वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित करने तक में सरकार ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। विद्यालयों का विस्तृत नेटवर्क  केन्द्र की राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को उत्तर प्रदेश में क्रियान्वित करने और सबके लिए शिक्षा को सुलभ बनाने के लिए 2 लाख 62 हजार 358 विद्यालयों का एक विस्तृत नेटवर्क तैयार किया गया है। इनमें 1 लाख 35 हजार 658 प्राथमिक, 90 हजार 243 उच्च प्राथमिक, 11 हजार 938 सेकेंडरी, 24 हजार 519 हायर सेकेंडरी स्कूल शामिल हैं। वहीं प्रधानमंत्री स्कूल फॉर राइजिंग इंडिया (पीएमश्री) योजना के अंतर्गत प्रदेश के 1722 विद्यालयों का चयन किया गया जिन्हें “हरित विद्यालय” के रूप में विकसित किया जा रहा है।  साक्षरता दर में वृद्धि 2017-18 से लेकर 2023-24 तक उत्तर प्रदेश में शैक्षिक उपलब्धता, आधारभूत ढांचे, बच्चों के नामांकन, शिक्षा में लोगों की सामुदायिक सहभागिता जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। साक्षरता दर की बात करें तो जहां 2017-18 में पुरुष साक्षरता दर 80.6% व महिला साक्षरता दर 62.9% थीं, वहीं 2023-24 में यह बढ़कर क्रमश: 86% व 70.4% हो गई है।  बढ़ाया गया प्राथमिक शिक्षा का बजट सुदृढ़ शैक्षिक ढांचे के लिए आर्थिक प्रोत्साहन के महत्व को समझते हुए प्रदेश सरकार ने 2024-25 में प्राथमिक शिक्षा पर कुल 68.46 हजार करोड़ और 2025-26 में 82.34 हजार करोड़ रुपये व्यय किए, जो कि वर्ष 2016-17 में केवल 32.91 हजार करोड़ था। अर्थात 2017-18 की तुलना में 2025-26 में लगभग 2.08 गुना की वृद्धि दर्ज की गई। प्रदेश में समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत स्कूली शिक्षा संवर्धन के लिए वर्ष 2017-18 में कुल 6322.07 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जो कि 2024-25 में बढ़कर 8263.37 करोड़ रुपये हो गया। समग्र शिक्षा योजना के ही अंतर्गत 2274 उच्च प्राथमिक एवं कम्पोजिट स्कूलों में लर्निंग-बाई-डूइंग कार्यक्रम चल रहा है, जो 2025-26 में 3288 स्कूलों तक पहुंच चुका है।  योजनाएं, जिनसे हो रहा है प्राथमिक शिक्षा का उन्नयन  शैक्षिक सत्र 2025-26 में कक्षा 1 से 8 के 1 करोड़ 47 लाख बच्चों को नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकें व कार्य पुस्तिकाएं वितरित की गई हैं। सभी परिषदीय व एडेड स्कूलों में कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को यूनिफॉर्म, स्कूल-बैग, जूता-मोजा व स्टेशनरी उपलब्ध कराने के लिए उनके माता-पिता के खाते में डीबीटी के माध्यम से 1200 रुपये प्रति छात्र/छात्रा उपलब्ध कराए जा रहे हैं। डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 25 हजार 790 परिषदीय उच्च प्राथमिक, कम्पोजिट व कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में स्मार्ट क्लास सेटअप बनाए गए हैं। साथ ही 880 विकासखंडों के ब्लॉक संसाधन केन्द्रों व 4688 स्कूलों में आईसीटी लैब की स्थापना की गई है। वर्ष 2025-26 में 5810 उच्च प्राथमिक व कम्पोजिट स्कूलों में स्मार्ट क्लास सेटअप व 8291 स्कूलों में आईसीटी लैब की स्थापना की जा रही है।  शिक्षा के पंखों से उड़ान भरती बालिकाएं प्रदेश में बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सभी 746 कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में 87700 बालिकाएं शिक्षा ग्रहण कर रही है। आईआईटी गांधीनगर, गुजरात के सहयोग से लगभग 68000 बालिकाओं में रोचक गतिविधियों के माध्यम से विज्ञान विषय में रुचि व क्षमता बढ़ाने के लिए क्यूरियोसिटी प्रोग्राम चल रहे हैं। खेलों के प्रति बालिकाओं की रुचि बढ़ाने के लिए “एक केजीबीवी एक खेल” कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। बालिकाओं में आत्मरक्षा कौशल बढ़ाकर उन्हें सशक्त बनाने के लिए रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत अब तक 10 लाख 22 हजार 508 बालिकाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। शिक्षा को सर्वोन्मुखी बनाने के लिए सरकार के अन्य प्रयास दिव्यांग बच्चों की गुणवत्तापरक समावेशी शिक्षा के लिए 6 से 14 वर्ष के दिव्यांग बच्चों को चिन्हित करने व ऑनलाइन ट्रैकिंग करने के लिए समर्थ पोर्टल विकसित किया गया है। दृष्टि दिव्यांग बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ते हुए 2793 पूर्ण दृष्टि दिव्यांग बच्चों को ब्रेल पाठ्य-पुस्तकें, 4438 अल्प दृष्टि दिव्यांग बच्चों को इन्लार्ज प्रिंट की पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराई गई हैं। साथ ही विशिष्ट दिव्यांग बच्चों को उनकी जरूरत के हिसाब से उपकरण भी उपलब्ध कराए गए हैं। सरकार के प्रयासों से हुए उल्लेखनीय सुधार यूनीफाइड डिस्ट्रिक्ट इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस, भारत सरकार की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार शैक्षिक सत्र 2017-18 में उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों की सकल नामांकन दर 75.3% थी जो वर्ष 2024-25 में 83.9% हो गई है। प्राथमिक विद्यालयों में सत्र 2017-18 में ड्रॉपआउट की दर 7.2 थी जो 8 वर्षों में घटकर शून्य हो चुकी है। वहीं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में ड्रॉपआउट 7.4 से घटकर आठ वर्षों में 3.0 हो गया है। सरकार के प्रयासों से स्कूलों में रिटेंशन (ठहराव) भी बढ़ा है। वर्ष 2017-18 के मुकाबले यह रिटेंशन 77.8% से बढ़कर 2025-26 में 86.9% हो चुका है।  सुदृढ़ हुआ माध्यमिक शिक्षा का ढांचा वर्तमान में प्रदेश में 29 हजार 532 माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं जिनमें 2814 राजकीय, 4523 अशासकीय सहायता प्राप्त व 22195 स्ववित्तपोषित विद्यालय हैं। माध्यमिक शिक्षा का ढांचा सुदृढ़ करने के लिए परख, प्रज्ञान, पहुंच पोर्टल विकसित किए गए हैं। “पंख पोर्टल” से करियर गाइडेंस दिया जा रहा है। बोर्ड परीक्षाओं के दौरान राज्य स्तरीय कंट्रोल रूप से सभी 8373 परीक्षा केन्द्रों में वॉयस रिकॉर्डर से लैस सीसीटीवी कैमरों द्वारा लाइव मॉनीटिरिंग करवाई गई। प्रोजेक्ट अलंकार व समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत कुल 500 स्कूलों में विज्ञान प्रयोगशालाएं बनाने का लक्ष्य है। राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में कुल 1084 आईसीटी लैब स्थापित हो चुके हैं।  पिछले एक दशक में महाविद्यालयों की संख्या 6681 से बढ़कर 8030 हो गई है, यानी लगभग 20% की वृद्धि हुई है। कुल 75 निर्माणाधीन राजकीय महाविद्यालयों में से 70 महाविद्यालय संचालित भी हो चुके हैं। प्रदेश में वर्तमान में कुल 38 राज्य विश्वविद्यालय और 52 निजी विश्वविद्यालय संचालित हैं। उच्च शिक्षा में शोध, नवाचार व ज्ञान सृजन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वित्तीय वर्ष 2025-26 में 26916.03 लाख रुपये के बजट … Read more

बंगाल SIR विवाद में सुप्रीम कोर्ट की फटकार, समयसीमा बढ़ी; पुलिस प्रमुख से मांगी रिपोर्ट

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को पश्चिम बंगाल के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) मामले पर सुनवाई हुई। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के अन्य नेताओं की याचिकाओं पर यह सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में दस्तावेजों की पड़ताल और फाइनल वोटर लिस्ट की समयसीमा को 1 हफ्ते बढ़ाया। पहले फाइनल वोटर लिस्ट जारी करने की डेडलाइन 14 फरवरी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार सुनिश्चित करें कि उसकी ओर से उपलब्ध कराए गए 8505 ग्रुप बी के अधिकारी कल शाम 5 बजे तक निर्वाचन अधिकारी (निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी) को रिपोर्ट करें। ईसीआई चाहे तो अपने अधिकारियों की जगह इन अधिकारियों की सेवा ले सकता है। कोर्ट ने साफ किया कि माइक्रो ऑब्जर्वर या ग्रुप बी के अधिकारियों की भूमिका सिर्फ ईआरओ को सहयोग करने की रहेगी। वोटर लिस्ट पर अंतिम फैसला ईआरओ ही लेंगे। चुनाव आयोग की ओर से कोर्ट को शिकायत की गई कि ऑब्जेक्शन फॉर्म जलाने वाले लोगों के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं की है। कोर्ट ने इस पर राज्य के डीजीपी को कारण बताओ नोटिस जारी किया। कोर्ट ने कहा कि डीजीपी हलफनामा दाखिल करें। वहीं, सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता चंद्र उदय सिंह ने कहा कि नोटिस के जवाब पर चर्चा होनी चाहिए। शुरुआत में वकीलों की दलीलों में तालमेल न होने से चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) सूर्यकांत नाराज हो गए। उन्होंने कहा कि सब एक साथ बोल रहे हैं और एक-दूसरे की बात काट रहे हैं, जिससे सुनवाई करना मुश्किल हो रहा है। इसके बाद ममता बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दिवान ने दलीलें शुरू कीं। सीजेआई ने पिछली सुनवाई का जिक्र करते हुए पूछा कि क्या ड्राफ्ट में 70 लाख मतदाताओं के नामों में स्पेलिंग मिसमैच है। साथ ही मैनपावर की कमी के कारण चुनाव आयोग को माइक्रो-ऑब्जर्वर्स लगाने पड़े थे। श्याम दिवान ने बताया कि राज्य सरकार ने 8,500 अधिकारियों की व्यवस्था कर ली है। सीजेआई ने चुनाव आयोग से पूछा कि क्या आपको इन अधिकारियों की सूची मिल गई है। आयोग के वकील ने कहा कि अभी तक कोई नाम नहीं मिला है। सीजेआई ने टिप्पणी की कि 4 या 5 फरवरी को ही नाम भेजे जा सकते थे। दिवान ने कहा कि डेटा भेज दिया गया था और आयोग से पुष्टि मांगी गई थी, उसके बाद पूरा विवरण भेजा जाता। सीजेआई ने कहा कि राज्य सरकार को तुरंत सूची भेजनी चाहिए थी, कोर्ट के माध्यम से नहीं। वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से कहा कि आयोग ने कभी ग्रुप-बी अधिकारियों की मांग नहीं की थी। यह सुझाव कोर्ट से आया था, इसलिए विवरण जुटाने में समय लगा। दिवान ने दोहराया कि सूची सौंप दी गई है, लेकिन आयोग ने इनकार किया। सीजेआई ने ईमेल चेक करने को कहा और पूछा कि क्या सूची में नाम, पदनाम, संपर्क और क्षेत्र दिए गए हैं। सिंघवी ने कहा कि ईमेल भेज दिया गया है और क्या इन अधिकारियों को जिला निर्वाचन अधिकारी के समक्ष रिपोर्ट करने के निर्देश दिए जाएं। दिवान ने कहा कि आयोग की मंजूरी के बाद नामों की सूची दी जाएगी। उन्होंने जोर दिया कि छोटी-मोटी विसंगतियों के कारण बड़े पैमाने पर नाम नहीं हटाए जा सकते। सीजेआई ने पूछा कि क्या पश्चिम बंगाल का कोई अधिकारी है, जिससे सवाल किए जा सकें। याचिकाकर्ताओं ने बताया कि पूर्व मुख्य सचिव और वर्तमान प्रधान सचिव मनोज पंत मौजूद हैं। पंत ने कहा कि 292 ईआरओ (ग्रुप-ए, एसडीएम रैंक) के नाम भेजे गए हैं। कुछ आईएएस भी हैं। कुल 8,525 सहायक ईआरओ हैं। सीजेआई ने हर विधानसभा क्षेत्र में एईआरओ की संख्या पूछी। पंत ने बताया कि सूची में 65 प्रतिशत ग्रुप-बी, 10-12 प्रतिशत ग्रुप-सी और बाकी ग्रुप-ए के अधिकारी हैं। इन्हें तैनात करने से पहले आयोग को सूचित किया गया था। सीजेआई ने पूछा कि क्या एईआरओ ईआरओ से वरिष्ठ होगा? राज्य ने कहा कि एईआरओ सहायता करता है। आयोग के वकील डीएस नायडू ने कहा कि ईआरओ अर्ध-न्यायिक अधिकारी होते हैं, इसलिए एसडीएम जैसे अनुभवी अधिकारियों की जरूरत थी। राज्य ने वेतन समानता पर आधारित सूची दी, लेकिन आयोग ने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों के लोग अर्ध-न्यायिक कार्य नहीं कर पाएंगे। सीजेआई ने कहा कि अनुपयुक्त ईआरओ और एईआरओ को नए सक्षम अधिकारियों से बदला जा सकता है। दिवान ने कहा कि बदलाव में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन छोटी विसंगतियों के लिए बड़े पैमाने पर नाम हटाने की अनुमति नहीं है। सीजेआई ने आयोग से कहा कि वे एईआरओ बदलने पर विचार करें। माइक्रो-ऑब्जर्वर्स मतदाताओं की आपत्तियों पर सलाह देते हैं, लेकिन निर्णय ईआरओ लेते हैं। आयोग ने कहा कि माइक्रो-ऑब्जर्वर्स को 10 दिनों का प्रशिक्षण दिया गया और दस्तावेज जांच पूरी हो गई है। सीजेआई ने सुझाव दिया कि अगर ये अधिकारी कल सुबह शामिल होते हैं, तो उन्हें फाइलें देखने दें, जिससे निर्णय की गुणवत्ता बढ़ेगी। सुनवाई जारी है और कोर्ट ने सभी पक्षों से सहयोग की अपील की है ताकि वैध मतदाताओं के अधिकार सुरक्षित रहें। वहीं, सीजेआई ने कहा कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया को आसान बनाने और जताई गई चिंताओं का ध्यान रखने के लिए निम्नलिखित अंतरिम निर्देश जारी किए जाते हैं। राज्य सरकार यह सुनिश्चित करे कि सभी 8,555 ग्रुप बी अधिकारी, जिनकी सूची आज सौंपी गई है, शाम 5 बजे तक जिला चुनाव अधिकारियों (डीआरओ) को रिपोर्ट करें। चुनाव आयोग (ईसीआई) के पास मौजूदा ईआरओ और एईआरओ को बदलने और योग्य पाए जाने पर अधिकारियों की सेवाओं का उपयोग करने का अधिकार होगा।

वित्तीय वर्ष 2025–26 में ₹36 लाख करोड़ तक पहुंचने की ओर अग्रसर है यूपी की इकॉनमी

लखनऊ.  वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने सोमवार को विधानमंडल के बजट सत्र के पहले दिन उत्तर प्रदेश की पहली आर्थिक समीक्षा सदन के पटल पर प्रस्तुत की। समीक्षा में प्रदेश की अर्थव्यवस्था, निवेश, प्रति व्यक्ति आय, राजकोषीय स्थिति और क्षेत्रीय योगदान को विस्तार से सामने रखा गया है। वित्त मंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था ने बीते आठ वर्षों में ऐतिहासिक विस्तार किया है। वर्ष 2016–17 में ₹13.30 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था, वर्ष 2024–25 में बढ़कर ₹30.25 लाख करोड़ पार कर चुकी है। वित्तीय वर्ष 2025–26 में इसके ₹36 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। यह वृद्धि उत्तर प्रदेश को देश की सबसे बड़ी राज्य अर्थव्यवस्थाओं में मजबूती से स्थापित करती है। राज्य की प्रगति, जन-आकांक्षाओं और भविष्य की संभावनाओं का जीवंत दस्तावेज वित्त मंत्री ने सदन में कहा कि आज हम सब एक ऐतिहासिक पल के साक्षी बन रहे हैं, जब उत्तर प्रदेश भी भारत सरकार की तरह अपनी आर्थिक समीक्षा पहली बार सदन के समक्ष प्रस्तुत कर रहा है। प्रदेश की आर्थिक समीक्षा केवल आंकड़ों का संकलन नहीं, बल्कि राज्य की प्रगति, जनता की आकांक्षाओं और भविष्य की संभावनाओं का जीवंत दस्तावेज है। भारत की सांस्कृतिक धरोहर और ऐतिहासिक गौरव का प्रतीक, उत्तर प्रदेश आज नई आर्थिक दृष्टि और ऊर्जा के साथ अपने लक्ष्यों की ओर अग्रसर है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था 25 करोड से अधिक नागरिकों की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है, जो इसे कृषि उत्पादन, औद्योगिक विकास और तकनीकी नवाचार का प्रमुख केंद्र बना रहा है। निवेशकों का बदला नजरिया, ₹50 लाख करोड़ से अधिक के मिले निवेश प्रस्ताव वित्त मंत्री ने कहा कि एक समय निवेशकों की प्राथमिकता सूची में न रहने वाला उत्तर प्रदेश अब औद्योगिक निवेश का प्रमुख केंद्र बन चुका है। पारदर्शी नीतियों, समयबद्ध स्वीकृतियों और ‘ट्रिपल एस’ (सेफ्टी, स्टेबिलिटी और स्पीड) की गारंटी के चलते प्रदेश को अब तक ₹50 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। यह निवेश वातावरण में आए निर्णायक बदलाव को दर्शाता है। राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में बढ़ा उत्तर प्रदेश का योगदान आर्थिक समीक्षा के अनुसार, राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में उत्तर प्रदेश का योगदान वर्ष 2016–17 के 8.6 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2024–25 में 9.1 प्रतिशत तक पहुंच गया है। यह वृद्धि प्रदेश की आर्थिक मजबूती और राष्ट्रीय विकास में बढ़ती भूमिका को रेखांकित करती है। प्रति व्यक्ति आय में ऐतिहासिक बदलाव समीक्षा में बताया गया कि स्वतंत्रता के बाद पहली बार उत्तर प्रदेश ने प्रति व्यक्ति आय में गिरावट के लंबे रुझान को पलटा है। वर्ष 2016–17 में ₹54,564 रही प्रति व्यक्ति आय (प्रति व्यक्ति निवल उत्पाद) वर्ष 2024–25 में बढ़कर ₹1,09,844 हो गई है। वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए इसके ₹1,20,000 तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। राष्ट्रीय औसत की तुलना में भी प्रति व्यक्ति आय अनुपात में सुधार दर्ज किया गया है। 2014-15 में यह राष्ट्रीय औसत का केवल 50.2% रह गई थी, जबकि 2024-25 में गिरावट के रुख में बदलाव करते हुए प्रतिव्यक्ति अनुपात बढ़कर 53.5% हो गया।  कृषि, उद्योग और सेवा तीनों क्षेत्र में संतुलित विकास आर्थिक समीक्षा के अनुसार, वर्ष 2024–25 में प्रदेश की जीएसडीपी में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों की हिस्सेदारी 25.8 प्रतिशत, औद्योगिक क्षेत्र की 27.2 प्रतिशत तथा सेवा क्षेत्र की 47 प्रतिशत रही है। यह दर्शाता है कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था अब केवल कृषि आधारित न रहकर बहु-क्षेत्रीय विकास की ओर अग्रसर है। बजट आकार में अभूतपूर्व वृद्धि वित्त मंत्री ने बताया कि प्रदेश के बजट आकार में भी विगत 9 वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2016–17 में ₹3.47 लाख करोड़ का बजट अब बढ़कर वर्ष 2025–26 में ₹8.33 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। समीक्षा में बताया गया कि यह वृद्धि 4.86 लाख करोड़) पूर्ववर्ती सरकारों की तुलना में कहीं अधिक तेज रही है। 2008-09 से 2016-17 (8 वर्ष) में यह वृद्धि मात्र 2.34 लाख करोड़ थी। पूंजीगत व्यय से विकास को गति उन्होंने बताया कि सार्वजनिक निवेश को प्राथमिकता देते हुए पूंजीगत व्यय में दो गुने से अधिक वृद्धि की गई है। वर्ष 2016–17 में पूंजीगत व्यय ₹69.79 हजार करोड़ रहा, जबकि वर्ष 2024–25 में यह बढ़कर ₹147.72 हजार करोड़ हो गया है। इसका सीधा असर अवसंरचना, औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन पर पड़ा है। वित्तीय अनुशासन की मिसाल बना उत्तर प्रदेश आर्थिक समीक्षा में प्रदेश की राजकोषीय स्थिति को संतुलित और अनुशासित बताया गया है। सार्वजनिक ऋण-से-जीसडीपी अनुपात वर्ष 2016–17 के 29.3 प्रतिशत से घटकर वर्ष 2024–25 में 28.0 प्रतिशत हो गया है, जो राष्ट्रीय और वैश्विक औसत से काफी कम है। यह प्रदेश की मजबूत वित्तीय प्रबंधन नीति को दर्शाता है। कर राजस्व में ढाई गुना वृद्धि प्रदेश का अपना कर राजस्व भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। वर्ष 2016–17 में ₹0.86 लाख करोड़ रहा स्टेट ओन टैक्स रेवेन्यू वर्ष 2024–25 में लगभग ढाई गुना बढ़कर ₹2.09 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। आर्थिक समीक्षा में इसे कर सुधारों और प्रशासनिक दक्षता का परिणाम बताया गया है।

वीबी जी राम जी योजना से गांव-गांव पहुंचेगा रोजगार

रायपुर. शासन की महत्वाकांक्षी विकसित भारत जी राम जी (वीबी जी राम जी) योजना के अंतर्गत जिला दंतेवाड़ा की ग्राम पंचायतों में प्रत्येक माह की 07 तारीख को रोजगार दिवस, चावल उत्सव और आवास दिवस का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों को विभिन्न शासकीय योजनाओं की जानकारी दी जा रही है। ग्रामीण जरूरतमंद परिवार तक रोजगार के अवसर पहुंचाना अधिकारियों ने बताया कि पहले महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत 100 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराया जाता था, जिसे अब विकसित भारत जी राम जी योजना के अंतर्गत बढ़ाकर 125 दिनों तक किया गया है। योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक जरूरतमंद परिवार तक रोजगार के अवसर पहुंचाना है। क्यूआर कोड से बढी पारदर्शिता कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को क्यूआर कोड आधारित नई प्रणाली की जानकारी दी गई। अब जॉब कार्ड और मस्टर रोल का मिलान क्यूआर कोड स्कैन कर किया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है और गड़बड़ी की संभावना कम हुई है। गुणवत्तापूर्ण आवास निर्माण लिए तकनीकी मार्गदर्शन प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत स्वीकृत हितग्राहियों के नामों का वाचन किया गया तथा आवास निर्माण के लिए मिलने वाली किश्तों, मजदूरी भुगतान, निर्माण सामग्री और अन्य विभागों से मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने हितग्राहियों को समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण आवास निर्माण पूरा करने के लिए तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया। बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, मोबाइल आधारित निगरानी प्रणाली और नागरिक सहभागिता से पारदर्शिता रोजगार दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और विकसित भारत जी राम जी योजना के तहत मिलने वाली रोजगार गारंटी की जानकारी भी दी गई। बताया गया कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने और रोजगार सुनिश्चित करने के लिए यह पहल की जा रही है। कार्यक्रम में बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, मोबाइल आधारित निगरानी प्रणाली और नागरिक सहभागिता जैसे आधुनिक तकनीकी उपायों की जानकारी दी गई, जिससे कार्यों की निगरानी, उपस्थिति सत्यापन और भुगतान प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जा सके। डबरी निर्माण कर मत्स्य पालन और अन्य आजीविका गतिविधियों को प्रोत्साहन इसके अलावा आजीविका डबरी निर्माण के बारे में भी ग्रामीणों को बताया गया। डबरी निर्माण से मत्स्य पालन और अन्य आजीविका गतिविधियों के माध्यम से आय बढ़ाने की संभावनाओं पर प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम के अंत में ग्रामीणों से अपील की गई कि वे प्रत्येक माह की 07 तारीख को आयोजित रोजगार दिवस, चावल उत्सव और आवास दिवस में भाग लेकर शासकीय योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।

स्थापना दिवस विशेष—संकल्प से सशक्त अर्थव्यवस्था तक का सफर

रायपुर. छत्तीसगढ़ के विकास को रफ्तार दे रहा एनएचएआई भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) अपने गठन के 31वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। छत्तीसगढ़ जैसे तेजी से विकसित होते राज्य के लिए सड़कें केवल आवागमन का साधन मात्र नहीं हैं, बल्कि ये आर्थिक प्रगति की धमनियां हैं। पिछले वर्षों में एनएचएआई ने राज्य के भौगोलिक नक्शे पर डामर और कांक्रीट से विकास की जो गाथा लिखी है, उसने छत्तीसगढ़ को देश के लॉजिस्टिक और औद्योगिक हब के रूप में मजबूती से स्थापित किया है। आज छत्तीसगढ़ की सड़कें केवल गंतव्य तक पहुँचने का रास्ता नहीं, बल्कि राज्य के सुनहरे भविष्य का मार्ग प्रशस्त कर रही हैं। वैश्विक व्यापार की लाइफलाइन – एनएच-53 छत्तीसगढ़ से गुजरने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग-53 जो एशियाई मार्ग-46 का एक अभिन्न हिस्सा है, वर्तमान में राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है। महाराष्ट्र सीमा से शुरू होकर राजनांदगांव, दुर्ग, भिलाई, रायपुर, आरंग और सरायपाली होते हुए ओडिशा सीमा तक फैला यह शानदार फोरलेन खंड राज्य की औद्योगिक क्षमता को वैश्विक पहचान दिला रहा है। इसी मार्ग पर आरंग के पास साल 2019 में महानदी पर बना एक किलोमीटर लंबा छत्तीसगढ़ का पहला भव्य सिक्स-लेन ब्रिज इंजीनियरिंग का एक उत्कृष्ट नमूना है। दुर्ग बायपास से लेकर सीमावर्ती क्षेत्रों तक फैला यह राजमार्ग व्यापारिक सुगमता को नई ऊंचाइयां दे रहा है। राजधानी और औद्योगिक केंद्रों का ‘गोल्डन लिंक’ एनएचएआई ने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर, न्यायधानी बिलासपुर और ऊर्जाधानी कोरबा को आपस में जोड़ने के लिए अभूतपूर्व कार्य किया है। राष्ट्रीय राजमार्ग-130 के माध्यम से रायपुर- से बिलासपुर और वहां से पथरापाली-कटघोरा तक की फोरलेन सड़क ने सफर के समय को आधा कर दिया है। इसी क्रम में चांपा-कोरबा-कटघोरा खंड (NH-149B) ने कोयला और ऊर्जा क्षेत्र के परिवहन को नई गति प्रदान की है। उत्तर में अंबिकापुर और दक्षिण में धमतरी तक फैले सड़कों के इस जाल ने राज्य के सुदूर कोनों को मुख्य धारा से जोड़ दिया है। रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर वर्तमान में निर्माणाधीन परियोजनाओं में सबसे महत्वाकांक्षी ‘रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर’ है। रायपुर से धमतरी और कांकेर होते हुए कोंडागांव के बीच तैयार हो रहा यह 125 किलोमीटर का सिक्स-लेन मार्ग छत्तीसगढ़ को सीधे बंदरगाह से जोड़ेगा। इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता राज्य की पहली 3 किलोमीटर लंबी स्मार्ट टनल (सुरंग) है। यह कॉरिडोर बस्तर के घने वनों के बीच से गुजरते हुए पर्यावरण संरक्षण और आधुनिकता के अद्भुत संगम के रूप में उभर रहा है। फ्लाईओवर और आधुनिक इंटरचेंज राजधानी रायपुर का टाटीबंध चौक, जो कभी अपनी जटिल बनावट के कारण दुर्घटनाओं का केंद्र था, आज एनएचएआई के इंजीनियरिंग का गौरव है। साढ़े तीन किलोमीटर लंबे स्टैंड-अलोन फ्लाईओवर ने न केवल यातायात को सुगम बनाया है, बल्कि इसे जीरो एक्सीडेंट जोन बनाने की दिशा में भी बड़ी सफलता हासिल की है। इसी तरह बिलासपुर का पेंड्रीडीह इंटरचेंज आधुनिक कनेक्टिविटी का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो रायपुर, बिलासपुर और रायगढ़ की ओर जाने वाले भारी वाहनों को बिना किसी बाधा के अपनी मंजिल तक पहुँचाता है। औद्योगिक क्रांति का नया गलियारा – दुर्ग बायपास शहरी क्षेत्रों में बढ़ते प्रदूषण और यातायात के दबाव को कम करने 92 किलोमीटर लंबा दुर्ग-रायपुर-आरंग बायपास निर्माणाधीन है। सिक्स-लेन का यह मार्ग मुंबई-कोलकाता कॉरिडोर का हिस्सा होगा, जो राज्य में औद्योगिक निवेश के नए द्वार खोलेगा।  रायपुर-धनबाद कॉरिडोर छत्तीसगढ़ और झारखंड के बीच की दूरियां अब बीते दौर की बात होने वाली हैं। 627 किलोमीटर लंबा रायपुर-धनबाद आर्थिक गलियारा इन दो राज्यों के रिश्तों को नई मजबूती देगा। इस कॉरिडोर का 384 किलोमीटर का बड़ा हिस्सा छत्तीसगढ़ से होकर गुजरता है। इसके पूर्ण होने से रायपुर से धनबाद का 11 घंटे का सफर मात्र 7 घंटे में सिमट जाएगा, जिससे कोरबा और रायगढ़ के इस्पात एवं कोयला उद्योगों को सीधा लाभ मिलेगा। पर्यटन और आस्था की सुगम राह आधुनिक राजमार्गों ने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और प्राकृतिक संपदा तक पहुँच को अत्यंत सहज बना दिया है। एनएच-53 आज डोंगरगढ़ की माँ बम्लेश्वरी देवी, ऐतिहासिक सिरपुर और बारनवापारा अभयारण्य जैसे प्रमुख स्थलों को जोड़कर पर्यटन को नई ऊंचाई दे रहा है। इसी प्रकार, एनएच-130 श्रद्धालुओं को रतनपुर स्थित माँ महामाया मंदिर से जोड़ने के साथ-साथ अंबिकापुर के रास्ते छत्तीसगढ़ का शिमला कहे जाने वाले मैनपाट के नैसर्गिक सौंदर्य तक पहुँचने का सुगम मार्ग प्रशस्त करता है। वहीं एनएच-30 छत्तीसगढ़ के प्रयाग राजिम और गंगरेल बांध को राजधानी से जोड़ता है। बस्तर के पर्यटन केंद्रों तक पहुँचना भी अब बेहद आसान हो गया है। वहीं, एनएच-149बी के माध्यम से कोरबा के सतरेंगा, कोसगाई, मडवारानी और चांपा के प्रसिद्ध कोसा केंद्र व स्थानीय मंदिरों तक पहुँचना अब सुगम हो गया है। अब पर्यटकों को राष्ट्रीय राजमार्ग के माध्यम से विश्वस्तरीय सड़कों की सुविधा मिल रही है, जिससे छत्तीसगढ़ में पर्यटन की नई संभावनाएं जागृत हुई हैं। सड़कों के साथ संरक्षण और सामाजिक सरोकार एनएचएआई का लक्ष्य केवल कांक्रीट का ढांचा खड़ा करना नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्वों का निर्वहन करना भी है। इसी कड़ी में बिलासपुर के भेलमुड़ी और रतनपुर में ‘केटल शेल्टर’ का निर्माण किया जा रहा है। राजमार्गों पर पशुओं की सुरक्षा और उनके संरक्षण की दिशा में यह एक अनूठी और संवेदनशील पहल है, जो सड़क सुरक्षा को भी सुनिश्चित करती है।  “मजबूत सड़कें किसी भी राज्य की मजबूत अर्थव्यवस्था की बुनियाद होती हैं। एनएचएआई और केंद्र सरकार के सहयोग से छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय राजमार्गों का तेजी से विस्तार हुआ है, जिससे उद्योग, कृषि, खनन और पर्यटन सभी क्षेत्रों को नई गति मिली है। बेहतर कनेक्टिविटी ने दूरस्थ अंचलों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा है और रोजगार, निवेश व व्यापार के नए अवसर पैदा किए हैं। यही सड़कें आज छत्तीसगढ़ की प्रगति की पहचान बन रही हैं।” – मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय “छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय राजमार्ग केवल रास्ते नहीं, बल्कि विकास के कॉरिडोर बन चुके हैं। एनएचएआई द्वारा निर्मित आधुनिक सड़कें, फ्लाईओवर और आर्थिक गलियारे शहरों का दबाव कम कर रहे हैं और औद्योगिक निवेश को आकर्षित कर रहे हैं। बेहतर परिवहन व्यवस्था से समय, ईंधन और लागत की बचत हो रही है, जिससे राज्य की आर्थिक गतिविधियां तेज हुई हैं। यह सड़क नेटवर्क छत्तीसगढ़ के आत्मनिर्भर और समृद्ध भविष्य की मजबूत नींव है।” – उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री  अरुण साव

जो बनना चाहो, वो बन जाओगे—स्वामी विवेकानंद की प्रेरक 7 सीखें

स्वामी विवेकानंद का नाम सुनते ही मन में आशा, उम्मीद, प्रेरणा, जीत, सफलता जैसे शब्द चलने लगते हैं और खुद में आत्मविश्वास महसूस होता है। उन्होंने अपने विचारों से सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि विदेश में भी अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी बातें, विचार आज भी युवाओं को सफल होने के लिए प्रेरित करते हैं। अगर आप उनके मार्ग पर चलें या फिर उनकी बातों को गांठ बांध लें, तो जीवन में सफलता जरूर मिलेगी। चलिए आपको उनकी कुछ प्रभावशाली बातें बताते हैं, जिनसे आप प्रेरणा ले सकते हैं। स्वामी विवेकानंद जी के विचार- 1- सोच बड़ी करो जैसा तुम सोचते हो, वैसे ही बन जाओगे। खुद को निर्बल मानोगे तो निर्बल और सबल मानोगे तो सबल ही बन जाओगे। अगर आप सोचते हैं कि आप सफल होंगे, तो उसी दिशा में मेहनत करना शुरू करें और एकदिन आप जरूर सफल होंगे। 2- रिस्क लें जीवन में जोखिम उठाइए, यदि आप जीतते हैं तो आप नेतृत्व करेंगे, यदि हारते हैं तो आप दूसरों का मार्गदर्शन करेंगे। जीत-हार सब आपकी सफलता के राह के साथी है, जो भी मिले उसे स्वीकार कर आगे बढ़ें और फिर मेहनत करें। 3- गलत मार्ग न चुनें किसी दिन जब आपके सामने कोई समस्या न आए, तो आप सुनिश्चित हो सकते हैं कि आप गलत मार्ग पर चल रहे हैं। विवेकानंद जी ने कहा था कि सही रास्ता वही है, जिसमें रिस्क हो, कठिनाई हो, हर चीज जो सरलता से मिले वो गलत मार्ग हो सकता है। 4- त्याग करो जो कुछ भी तुम्हें कमजोर बनाता है- शारीरिक, बौद्धिक या मानसिक, उसे जहर की तरह त्याग दो। स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि आपकी सफलता के बीच में जो भी चीज बाधा बन रही है, उसे त्याग करने की कोशिश करें। फिर चाहे वो नींद हो, गर्मी-सर्दी हो या फिर आपकी कोई इच्छा या आदत। 5- सीखते रहो जब तक जीना, तब तक सीखना। अनुभव ही जगत में सर्वश्रेष्ठ शिक्षक है। जिस दिन आप सोच लेंगे कि अब सीखने को कुछ बाकि नहीं है, उस दिन आपको करने के लिए कुछ नहीं होगा। आखिरी सांस तक सीखना व्यक्ति का गुण होना चाहिए। 6- संगत का असर स्वामी जी कहते थे कि संगति आप को ऊंचा उठा भी सकती है और यह आपको ऊंचाई से गिरा भी सकती है, इसलिए संगति अच्छे लोगों से करें। इसलिए हमेशा उन लोगों के साथ रहें, जो आपको सफलता की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करें न कि आपके कदम पीछे खींच लें। 7- लक्ष्य तय करें उठो, जागो और तबतक न रुको, जब तक तुम अपना लक्ष्य प्राप्त नहीं कर लेते। अपना लक्ष्य निर्धारित करें और उसपर काम करना शुरू करें। इस बीच आपकी लोग बुराई करें या तारीफ इससे आपको कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए।

सर्जरी के बाद हर्षित राणा का पहला बयान, T20 WC मिस करने पर बोले– अब लक्ष्य सिर्फ फिट होकर लौटना

नई दिल्ली भारतीय टीम के तेज गेंदबाज हर्षित राणा का उस वक्त टी20 वर्ल्ड कप 2026 खेलने का का सपना टूट गया, जब वह साउथ अफ्रीका के खिलाफ अभ्यास मैच में चोटिल हो गए थे। हर्षित ने अभ्यास मैच में केवल एक ओवर डाला और उसके बाद घुटने की चोट के कारण मैदान से बाहर जाना पड़ा। उन्होंने अब अहम इंजरी अपडेट दिया है। उन्होंने सर्जरी कराई है, जो सफल रही। वह सर्जरी के बाद जल्द से जल्द क्रिकेट के मैदान पर लौटना चाहते हैं। हर्षित ने सोमवार को इंस्टाग्राम पर तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, ”सर्जरी सही तरह हो गई है। अब मेरा ध्यान रिकवरी और फिर से उस चीज को करने पर है जो मुझे पसंद है।” गेंदबाज की पोस्ट पर फैंस और शुभचिंतकों के जमकर रिएक्शन आ रहे हैं। एक यूजर ने कमेंट किया, ”जल्दी ठीक हो जाओ भाई।” दूसरे ने लिखा, ”तुम्हारी जल्दी ठीक होने की कामना करता हूं।” अन्य ने कहा, ”मैदान पर देखने का बेसब्री से इंतजार है।” हर्षित ने नवंबर 2024 में इंटरनेशनल डेब्यू किया। उन्होंने अब तक दो टेस्ट, 14 वनडे और 9 टी20 इंटरनेशनल मैच खेले हैं। हर्षित के बाहर होने पर पेसर मोहम्मद सिराज की 18 महीने बाद भारतीय टी20 टीम में वापसी हुई। सिराज टी20 वर्ल्ड कप के लिए शुरुआत में भारत की योजनाओं का हिस्सा नहीं थे। उन्होंने टूर्नामेंट में पहले मैच ही प्रभावी गेंदबाजी की। सिराज ने अमेरिका के खिलाफ 4 ओवर में 29 रन देकर तीन विकेट चटकाए। सिराज ने शनिवार को मैच के बाद कहा कि उन्हें नहीं लगा था कि तुरंत प्लेइंग इलेवन में जगह मिलेगी लेकिन रणजी ट्रॉफी में हैदराबाद की कप्तानी के अनुभव से मदद मिली। उन्होंने कहा, ”सबसे पहले तो मुझे नहीं पता था कि मैं खेलूंगा। मुझे बुलाए जाने पर खुशी हुई लेकिन मुझे सुबह पता चला कि मैं खेल रहा हूं इसलिए मैं थोड़ा और उत्साहित था क्योंकि मैं शुक्रवार को ही आया था।”

उत्तर प्रदेश विधानमंडल के बजट सत्र के प्रथम दिन दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने किया संबोधित

लखनऊ. उत्तर प्रदेश विधानमंडल के बजट सत्र के प्रथम दिन दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का अभिभाषण प्रदेश की बदली हुई पहचान का स्पष्ट घोषणापत्र बनकर सामने आया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश ने बीते वर्षों में ‘बॉटलनेक स्टेट’ की छवि से बाहर निकलकर ‘ब्रेकथ्रू स्टेट’ के रूप में सुशासन, सुदृढ़ कानून-व्यवस्था, आर्थिक सशक्तिकरण, कृषि विस्तार, महिला सशक्तिकरण, अवसंरचना विकास और व्यापक जनकल्याण के क्षेत्रों में ठोस उपलब्धियां हासिल की हैं। राज्यपाल का अभिभाषण सरकार की नीतिगत दृढ़ता, प्रशासनिक दक्षता और विकसित उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ते आत्मविश्वासपूर्ण कदमों का तथ्यात्मक और संवैधानिक प्रस्तुतीकरण रहा। यूपी बना देश के लिए मॉडल राज्य राज्यपाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति आज देशभर में एक प्रभावी मानक के रूप में उभर रही है। सरकार की कठोरता और संवेदनशीलता के संतुलित दृष्टिकोण ने संगठित अपराध और माफिया तंत्र पर निर्णायक नियंत्रण स्थापित किया है। आधुनिक तकनीक के व्यापक उपयोग, पुलिस बल के सुदृढ़ीकरण, त्वरित एवं प्रभावी न्याय व्यवस्था तथा पारदर्शी प्रशासनिक प्रणालियों के माध्यम से प्रदेश में भयमुक्त और विश्वासपूर्ण वातावरण तैयार हुआ है। यही सुरक्षित परिवेश उत्तर प्रदेश को उद्योग, व्यापार, स्टार्टअप, निवेश और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन के लिए देश के सर्वाधिक आकर्षक और भरोसेमंद राज्यों में स्थापित कर रहा है। जीरो टॉलरेंस, सख्त कार्रवाई राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति ने ठोस और निर्णायक परिणाम दिए हैं। संगठित अपराध के विरुद्ध कार्रवाई में अब तक 35 माफिया व 94 सह-अपराधी दोषसिद्ध, 2 अपराधियों को मृत्युदंड, जबकि 267 अपराधी मुठभेड़ में ढेर किए गए हैं। 977 अभियुक्तों को एनएसए के तहत निरुद्ध किया गया है और माफिया तत्वों से ₹4,137 करोड़ से अधिक की अवैध संपत्ति जब्त की जा चुकी है। त्वरित पुलिसिंग के लिए यूपी-112 का रिस्पॉन्स टाइम 25 मिनट 42 सेकंड से घटकर 6 मिनट 51 सेकंड किया गया है। साइबर अपराधों से निपटने हेतु प्रदेश के सभी 75 जिलों में साइबर क्राइम थाने कार्यरत हैं, जबकि एटीएस ने 148 आतंकवादियों को गिरफ्तार किया है। 146 रोहिंग्या बांग्लादेशी, पाकिस्तानी व अन्य अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है। भ्रष्टाचार पर सख्त प्रहार करते हुए भ्रष्टाचार निवारण संगठन द्वारा 999 सफल ट्रैप ऑपरेशन किए गए हैं। मजबूत हुए संस्थान राज्यपाल ने कहा कि सुरक्षा तंत्र की संस्थागत मजबूती की दिशा में 2017 के बाद 8 नई विधि विज्ञान प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं और 6 अन्य निर्माणाधीन हैं। इसी अवधि में 2.19 लाख से अधिक पुलिस भर्तियां, 1.58 लाख कर्मियों को प्रोन्नति तथा 83,122 पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। पुलिस बल के सुदृढ़ीकरण हेतु बजट में लगभग 150 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। 41,424 होमगार्ड पदों पर नामांकन, 6 नए जिला कारागारों सहित इटावा केंद्रीय कारागार का निर्माण, और 1,010 बंदियों की समयपूर्व रिहाई कारागार सुधारों की दिशा में अहम कदम हैं। न्याय व्यवस्था को सुलभ और प्रभावी बनाने के लिए 10 जिलों में एकीकृत न्यायालय परिसरों को स्वीकृति, प्रयागराज में डॉ. राजेंद्र प्रसाद राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की स्थापना, 81 फास्ट ट्रैक न्यायालयों का स्थायीकरण, लोक अदालतों में 3.60 करोड़ मामलों का निस्तारण, तथा 2,609 विधिक साक्षरता शिविरों का आयोजन किया गया है, जिससे प्रदेश में त्वरित, पारदर्शी और जन-संवेदनशील न्याय व्यवस्था को नई मजबूती मिली है। तेज कनेक्टिविटी, तेज विकास राज्यपाल ने अवसंरचना विकास के क्षेत्र में सरकार की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में संपर्क, परिवहन और लॉजिस्टिक्स को नई दिशा दी गई है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 168 विकासखंड मुख्यालयों को डबल-लेन सड़कों से जोड़ा जा चुका है, जबकि 1,410 किलोमीटर लंबाई की 161 सड़कों का निर्माण कार्य पूर्ण किया गया है। राज्य सरकार ने वर्ष 2025–26 तक 46,600 किलोमीटर सड़कों के सुदृढ़ीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया है, वहीं अब तक लगभग 28,000 किलोमीटर सड़कों का नवीनीकरण पूरा हो चुका है। अंतर्राज्यीय और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से जुड़े प्रमुख मार्गों को न्यूनतम फोर-लेन कनेक्टिविटी प्रदान करने का कार्य तेजी से प्रगति पर है, जिससे व्यापार, परिवहन, पर्यटन और औद्योगिक निवेश को व्यापक गति मिल रही है। उत्पादन, उत्पादकता और कृषि अर्थव्यवस्था तीनों मोर्चों पर तेजी से आगे बढ़ रहा है उत्तर प्रदेश: राज्यपाल विधानमंडल के संयुक्त अधिवेशन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अपने अभिभाषण में उत्तर प्रदेश के विकास की व्यापक और तथ्यपरक तस्वीर प्रस्तुत की। उन्होंने ऊर्जा आपूर्ति से लेकर कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था, गन्ना किसानों के भुगतान, पशुपालन, पर्यावरण संरक्षण, खनन सुधार, सार्वजनिक परिवहन, सामाजिक सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण, शहरी आवास और श्रमिक कल्याण तक सरकार की नीतियों और उनके ठोस परिणामों को क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत किया।  रोशनी, भरोसा और राहत राज्यपाल ने ऊर्जा क्षेत्र में हुए व्यापक सुधारों को रेखांकित करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में बिजली आपूर्ति व्यवस्था में ऐतिहासिक परिवर्तन दर्ज किया गया है। वर्तमान में नगरीय मुख्यालयों को 24 घंटे, तहसील मुख्यालयों को 21 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों को 19 घंटे निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। ‘इंटेंसिव डिस्ट्रीब्यूशन स्कीम’ के अंतर्गत अब तक 59.83 लाख स्मार्ट/इलेक्ट्रिक मीटर स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि 37.45 लाख पुराने मीटरों का प्री-पेड में प्रतिस्थापन किया गया है। राज्यपाल ने यह भी स्पष्ट किया कि पिछले 6 वर्षों में बिजली दरों में कोई वृद्धि नहीं की गई, जिससे उपभोक्ताओं को स्थायी राहत मिली है और ऊर्जा क्षेत्र में भरोसे का वातावरण मजबूत हुआ है। अन्नदाता की ताकत, प्रदेश की प्रगति राज्यपाल ने कृषि क्षेत्र में हुई ऐतिहासिक प्रगति का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश आज उत्पादन, उत्पादकता और कृषि अर्थव्यवस्था तीनों मोर्चों पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2016–17 में 557.46 लाख मीट्रिक टन रहा खाद्यान्न उत्पादन 2023–24 में बढ़कर 670.80 लाख मीट्रिक टन हो गया, और 2024–25 में यह 737.40 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचा। कृषि क्षेत्र के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में भी उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया है, जो 2016–17 में ₹2.96 लाख करोड़ से बढ़कर वर्तमान में ₹6.95 लाख करोड़ हो गया है। यह 135 प्रतिशत वृद्धि के साथ लगभग 18 प्रतिशत वार्षिक विकास दर को दर्शाता है। बागवानी बना ग्रामीण समृद्धि का मजबूत आधार बागवानी क्षेत्र में भी प्रदेश ने नई ऊंचाइयां छुई हैं। खेती का क्षेत्रफल 21.40 लाख हेक्टेयर … Read more

नींद में बुझ गई जिंदगी: मच्छरों से परेशान कंडक्टर ने जलाई अगरबत्ती, बस में लगी आग

नई दिल्ली दिल्ली के विकासपुरी में एक प्राइवेट बस में आग लगने की वजह से 25 वर्षीय हेल्पर की मौत हो गई। पुलिस को संदेह है कि आग लगने की वजह अगरबत्ती है। पुलिस ने सोमवार को बताया कि मृतक का नाम सुनील है वह रात में बस में ही सोता था। इस दौरान मच्छरों को भगाने के लिए अगरबत्ती जलाता था। पुलिस के मुताबिक मामले में अभी जांच जारी है लेकिन शुरुआती जांच में आग की वजह अगरबत्ती को माना जा रहा है। पुलिस का मानना है कि आग अगरबत्ती से लगी और धीरे-धीरे पूरी बस को अपने चपेट में ले लिया। आग इतनी तेज थी कि सुनील को बाहर निकलने तक का मौका नहीं मिल सका। आग इतनी तेज थी कि सुनील को बाहर निकलने तक का मौका नहीं मिल सका। पूरी बस जल चुकी थी सुनील के जले हुए शव को दीन दयाल उपाध्याय (डीडीयू) अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे पोस्टमार्टम के लिए रखा गया है। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि बस में लगी आग इतनी भयंकर थी कि जब तक दमकलकर्मी वहां पहुंचे पूरी बस जल चुकी थी। कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया और सुनील के शव को बाहर निकाला गया। मौके पर पहुंचे दमकलकर्मी प्रिया अपार्टमेंट्स में रहने वाले विजय ने बताया, ‘रविवार रात करीब 12:30 बजे हमने देखा कि बस में आग लग गई है। मैंने दमकलकर्मियों को फोन कर दिया था। जब दमकलकर्मी रात 12:45 बजे पहुंचे, तो उन्होंने खिड़कियां तोड़ दीं। तब तक पूरी बस आग की लपटों में घिर चुकी थी। हमें बताया गया कि बस के अंदर सो रहा व्यक्ति सफाईकर्मी था और इसके बाद बस के ड्राइवरों को भी बुलाया गया। बस का रजिस्ट्रेशन नंबर हरियाणा का आपको बता दें कि बस का मालिक विजय कुमार (46) है और बस का रजिस्ट्रेशन नंबर हरियाणा का था। फिलहाल मामले में पुलिस ये पता लगाने में लगी है कि अगरबत्ती ही आग लगने की असल वजह थी या फिर कोई तकनीकी खराबी के चलते ऐसा हुआ।

नशे के कारोबार पर बड़ा वार: 3 ऑपरेशन में गांजा तस्करी का पूरा जाल टूटा, 11 गिरफ्तारी

महासमुंद जिले में एंटी नारकोटिक टास्क फोर्स (ANTF) ने गांजा तस्करी के खिलाफ रिकॉर्ड कार्रवाई करते हुए 24 घंटे के भीतर तीन अलग-अलग मामलों में बड़ी सफलता हासिल की है। महज 6 घंटे के अंदर एंड-टू-एंड ऑपरेशन के तहत थोक विक्रेता से लेकर खरीदार तक पूरे नेटवर्क को पकड़ लिया गया। इस संयुक्त कार्रवाई में थाना सिंघोड़ा, कोमाखान और बागबाहरा क्षेत्र से कुल 132.5 किलोग्राम गांजा जब्त किया गया। साथ ही 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। गांजा तस्करी में प्रयुक्त 6 चार पहिया वाहन (अनुमानित कीमत 55 लाख रुपए) भी जब्त किए गए हैं। गिरफ्तार आरोपियों में मध्यप्रदेश के 5, महाराष्ट्र के 4 और ओडिशा के 2 आरोपी शामिल हैं। इस कार्रवाई में रायपुर, राजनांदगांव और महाराष्ट्र के भंडारा जिले की पुलिस के साथ बेहतर समन्वय देखने को मिला। पूरे ऑपरेशन में साइबर थाना के डाटा एनालिटिक्स और इंटेलिजेंस डेस्क की भूमिका अहम रही। वर्ष 2026 में अब तक की बड़ी उपलब्धि पुलिस के अनुसार वर्ष 2026 में अब तक 34 प्रकरणों में 2285 किलोग्राम गांजा जब्त किया गया है, जिसकी कीमत करीब 11 करोड़ 42 लाख 74 हजार रुपए है। 35 वाहन (कीमत 1 करोड़ 20 लाख रुपए) जब्त किए जा चुके हैं। इन मामलों में 93 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें 69 आरोपी अन्य राज्यों से हैं। थाना सिंघोड़ा मामला 09 फरवरी 2026 को ओडिशा के सोनपुर से गांजा तस्करी की सूचना पर नेशनल हाईवे-53 पर नाकेबंदी की गई। इस दौरान स्विफ्ट डिजायर और टाटा इंडिका कार से 52.5 किलो गांजा बरामद किया गया। जब्ती विवरण गांजा: 52.5 किलो, 2 कार (कीमत लगभग 10 लाख रुपए), 4 मोबाइल फोन, 10 हजार रुपए नकद गिरफ्तार आरोपी अमित राय – जबलपुर (म.प्र.), राजकुमार केंवट – जबलपुर (म.प्र.), प्रकाश शर्मा – जबलपुर (म.प्र.)। तीनों के खिलाफ NDPS एक्ट की धारा 20(b) के तहत मामला दर्ज किया गया है। एक आरोपी फरार है, जिसकी तलाश जारी है। थाना कोमाखान मामला नाकेबंदी के दौरान बोलेरो वाहन (OD-08-P-0321) से 40 किलो गांजा बरामद किया गया। इस केस में परिवहनकर्ता, पायलट वाहन, फॉलो वाहन और गांजा मंगाने वाले सहित कुल 6 आरोपी गिरफ्तार किए गए। आरोपियों से गांजा 40 किलो (कीमत 20 लाख रुपए), 3 कार और 1 बोलेरो (कुल कीमत लगभग 50 लाख रुपए) जब्त किए गए। मामले में धारा 20(b)(2)(c), 29 NDPS एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। थाना बागबाहरा मामला वाहन चेकिंग के दौरान हुंडई वेरना कार (MP07AG8311) से 40 किलो गांजा बरामद किया गया। गिरफ्तार आरोपी सुमित श्रीवास्तव – मुरैना (म.प्र.) रीना भदौरिया उर्फ रीना तोमर – मुरैना (म.प्र.) आरोपियों से जब्ती गांजा: 40 किलो, हुंडई वेरना कार (कीमत लगभग 15 लाख रुपए)

किसान सुरेश कुमार नाग बने ‘भुइयां के भगवान’, सम्मान से नवाज़े गए

रायपुर. किसान सुरेश कुमार नाग को मिला ‘भुइयां के भगवान’ सम्मान छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के ग्राम कासौली (विकासखंड दंतेवाड़ा) के प्रगतिशील किसान  सुरेश कुमार नाग को आईबीसी 24 द्वारा प्रदान किए जाने वाले प्रतिष्ठित ‘भुइयां के भगवान’ सम्मान से नवाजा गया है। 06 फरवरी 2026 को आयोजित कार्यक्रम में राज्य के उपमुख्यमंत्री  अरुण साव ने उन्हें प्रशस्ति पत्र एवं सम्मान राशि प्रदान कर सम्मानित किया। यह उपलब्धि दंतेवाड़ा जिले के किसानों के लिए गर्व का विषय है। खेतों में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग पूरी तरह बंद सुरेश कुमार नाग लंबे समय से जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने रासायनिक खेती के दुष्परिणामों को समझते हुए अपने खेतों में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग पूरी तरह बंद कर दिया और जीवामृत, घन-जीवामृत तथा नीमास्त्र और ब्रह्मास्त्र जैसे जैविक उपायों को अपनाया। इसके अच्छे परिणाम मिलने के बाद उन्होंने अपने अनुभव अन्य किसानों के साथ साझा किए, जिससे आसपास के कई किसान भी प्राकृतिक खेती की ओर प्रेरित हुए। जैविक खेती को बढ़ावा देने चलाए जा रहे प्रयास नाग 100 से अधिक परंपरागत धान की किस्मों के संरक्षण का कार्य भी कर रहे हैं। इसके साथ ही  विधि से रागी और कोसरा की खेती जैसे नवाचारों को अपनाकर जिले में प्राकृतिक खेती को नई दिशा दी है। जिला प्रशासन और कृषि विभाग द्वारा जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए चलाए जा रहे प्रयासों को  नाग जैसे किसानों ने जमीन पर सफल बनाया है। उनकी इस उपलब्धि पर किसानों, कृषि विशेषज्ञों और अधिकारियों ने प्रसन्नता व्यक्त की है। पर्यावरण संरक्षण और मिट्टी की उर्वरता बचाने का महत्वपूर्ण कार्य उपमुख्यमंत्री  अरुण साव ने कहा कि सुरेश कुमार नाग जैसे किसान समाज के लिए प्रेरणा स्रोत हैं, जो खेती के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और मिट्टी की उर्वरता बचाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। सम्मान प्राप्त करने के बाद  नाग ने कहा कि यह पुरस्कार उन सभी किसानों को समर्पित है, जो प्राकृतिक खेती अपनाकर धरती और आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित बनाने का प्रयास कर रहे हैं। युवाओं में खेती के प्रति सकारात्मक सोच सुरेश कुमार नाग को मिला यह सम्मान दंतेवाड़ा जिले में जैविक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है और इससे युवाओं में खेती के प्रति सकारात्मक सोच विकसित होने की उम्मीद है।

मोर गांव मोर पानी अभियान से संवरे 45 परिवार, आजीविका और जल उपलब्धता में सुधार

रायपुर. जल संरक्षण की पहल से पांच एकड़ से अधिक भूमि में लहलहाई खेती मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शी पहल मोर गांव मोर पानी अभियान आज गांवों में जल आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रहा है। इसी अभियान के अंतर्गत एमसीबी जिले के मनेन्द्रगढ़ जनपद पंचायत क्षेत्र के ग्राम मुख्तियारपारा में वर्षों से उपेक्षित एक अनुपयोगी स्टापडेम को नया जीवन मिला है। बहते पानी को सहेजने की इस सामूहिक कोशिश ने न सिर्फ जल संकट दूर किया बल्कि खेती, पशुपालन और ग्रामीण जीवन को नई दिशा दे दी। जब जर्जर स्टापडेम बना समस्या ग्राम मुख्तियार पारा में कई वर्ष पूर्व एक स्थानीय नाले पर निर्मित स्टापडेम समय के साथ जर्जर हो चुका था। गाद जमाव के कारण इसकी जल धारण क्षमता लगभग समाप्त हो गई थी। सर्दियों के बाद नाले का प्रवाह कम होते ही ग्रामीणों को दैनिक उपयोग तक के लिए पानी नहीं मिल पाता था। खेतों की सिंचाई तो दूर, पशुओं के लिए भी जल का संकट बना रहता था। ग्राम सभा से निकली समाधान की राह गत वित्तीय वर्ष में आयोजित ग्राम सभा में मोर गांव मोर पानी अभियान पर चर्चा हुई। ग्रामीणों ने एकजुट होकर खराब पड़े स्टापडेम के पुनरुद्धार का प्रस्ताव रखा। सामुदायिक जलभराव क्षेत्र निर्माण एवं भूमि सुधार कार्य को सर्वसम्मति से स्वीकृति मिली। महात्मा गांधी नरेगा के अंतर्गत लगभग 4.95 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई और ग्राम पंचायत मुख्तियार पारा को निर्माण एजेंसी बनाया गया। तकनीकी निगरानी में यह कार्य समय-सीमा के भीतर सफलतापूर्वक पूर्ण हुआ। जल से समृद्ध हुआ गांव का भविष्य सिल्ट हटने और भूमि सुधार कार्य के बाद स्टापडेम में जल का ठहराव पहले की तुलना में कहीं अधिक हो गया है। इसका सीधा लाभ ग्राम सलका और सिरौली के लगभग 45 परिवारों को मिल रहा है। आज यहां घरेलू उपयोग, पशुपालन और निस्तार के लिए भरपूर जल उपलब्ध है। आसपास के जलस्तर में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इस जलसंचय के कारण 8 से 10 परिवारों ने रबी फसल के साथ-साथ सब्जी उत्पादन भी शुरू कर दिया है और पांच एकड़ से अधिक कृषि भूमि सिंचित हो चुकी है। यह कहानी बताती है कि जब सरकार की योजना, ग्राम सभा की सहभागिता और श्रमशक्ति एक साथ आती है, तो अनुपयोगी संरचनाएं भी समृद्धि का आधार बन जाती हैं। मोर गांव मोर पानी अभियान के तहत किया गया यह कार्य ग्रामीण आत्मनिर्भरता, जल संरक्षण और टिकाऊ विकास की एक प्रेरणादायी सफलता की कहानी बनकर उभरा है।

पूजा के दौरान हादसा: मुरैना के मंदिर में छत गिरने से 3 मासूम बच्चियों की मौत

मुरैना पूजा और प्रसाद वितरण के समय मंदिर की छत भरभरा कर गिर पड़ी। पत्थर की पटियों से बनी छत के नीचे दबने से तीन बालिकाओं की मौत हो गई, जबकि चार घायल हो गए हैं। सोमवार की दोपहर यह हादसा कैलारस थाना क्षेत्र के अहरौली गांव में हुआ है। मिली जानकारी के अनुसार अहरौली गांव में चामड़ माता का मंदिर है। यह मंदिर एक कमरे जैसा बना है, जिसकी छत पटियों से बनी है। कन्याभोज के लिए जमा हुए थे बच्चे सोमवार की दोपहर एक परिवार पूजा करने आया था, पूजा के बाद कन्याभोज व प्रसाद वितरण होना था। कन्या भोज व प्रसाद के लिए गांव के बच्चे बुलाए गए, जिनमें से अधिकांश मंदिर के अंदर ही थे, उसी समय एक पटिया चटकी और उसके बाद पूरी छत भरभरा कर गिर पड़ी। हादसे में 11 साल की वैष्णवी पुत्री जीतू सिकरवार, सात वर्षीय छाया पुत्री अशोक गोस्वामी और करिश्मा पुत्री अशोक गोस्वामी उम्र नौ साल की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे में चार बच्चे घायल हादसे में योगेंद्र सिंह की तीन बेटियां 12 साल की गुंजन, आठ साल की परी और छह साल की विद्या निवासी अहरौली सहित एक अन्य बच्चा घायल हो गया है। घायलों को कैलारस अस्पताल ले जाया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। घटना के बाद गांव में मातम छा गया है और पीड़ित परिवारों का बुरा हाल है। राहत और बचाव कार्य जारी घटना की जानकारी मिलते ही एएसपी व अन्य अधिकारी घटना स्थल पर रवाना हो गए हैं। स्थानीय प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंचकर मलबे को हटाने और स्थिति का जायजा लेने में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिकता घायलों को समुचित उपचार दिलाने और घटना के कारणों की विस्तृत जांच करने की है।  

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