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13 वर्षीय ईसाई लड़की संग कथित जबरन इस्लाम कबूलनामा और निकाह, पाकिस्तान में मानवाधिकारों पर सवाल

इस्लामाबाद पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार रुकने का नाम नहीं ले रहा। बार-बार ऐसे मामले सामने आते हैं जहां अल्पसंख्यक समुदाय की मासूम बच्चियों का अपहरण कर उनके धर्म को जबरन बदल दिया जाता है और छोटी उम्र में ही जबरदस्ती शादी कर दी जाती है। एक बार फिर ऐसा ही एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। ह्यूमन राइट्स फोकस पाकिस्तान (HRFP) ने पाकिस्तान के साहिवाल जिले की तहसील चिचावतनी में 13 वर्षीय ईसाई लड़की सतीश मरियम के अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और जबरन शादी पर गहरी चिंता जताई है। 11 जनवरी को दर्ज हुआ था मामला रिपोर्ट के अनुसार, 11 जनवरी 2026 को पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 365-बी के तहत एफआईआर दर्ज की गई। आरोप है कि सतीश मरियम का अपहरण 10 और 11 जनवरी की रात के बीच हुआ। उसके पिता दिहाड़ी मजदूर बशारत मसीह ने बताया कि स्थानीय लोगों ने अली हैदर गुलजार को कुछ अज्ञात साथियों के साथ नाबालिग लड़की को जबरन गाड़ी में ले जाते देखा था। बशारत मसीह ने एचआरएफपी टीम को बताया कि पुलिस ने शिकायत दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू की है, लेकिन अभी तक कोई संतोषजनक प्रगति नहीं हुई है। बताया गया कि यह घटना तब हुई जब सतीश की मां शाहनाज बीबी एड़ी में फ्रैक्चर के कारण चलने-फिरने में असमर्थ थीं। परिवार के अनुसार, सतीश घर के काम के लिए बाहर गई थी, तभी उसे जबरन उठा लिया गया। कानून प्रवर्तन अधिकारियों से बार-बार गुहार लगाने और कराची में लड़की के होने के दावों के बावजूद, परिवार का आरोप है कि उसे ढूंढने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किए गए। 22 जनवरी 2026 को अपहरण के मामले को आगे बढ़ाने के लिए परिवार के घर में कई व्यक्तियों द्वारा कथित तौर पर घुसपैठ की गई, धमकियां दी गईं और उन्हें डराया-धमकाया गया, जिसके बाद दूसरी एफआईआर दर्ज की गई। इसमें पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 452, 506, 148 और 149 के तहत घर में जबरन घुसने, आपराधिक धमकी और गैरकानूनी जमावड़े से जुड़े आरोप लगाए गए। लड़की ने कबूल कर लिया है इस्लाम रिपोर्ट के अनुसार, मामला तब और गंभीर हो गया जब कथित अपहरणकर्ता ने दावा किया कि नाबालिग लड़की ने इस्लाम कबूल कर लिया है और शादी भी कर ली है। पीड़िता के परिवार का कहना है कि सतीश के बयान दर्ज किए गए थे और 28 जनवरी को चिचावतनी के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नूर मोहम्मद दोथर के समक्ष हुई अदालती सुनवाई में अपहरणकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया गया। इसमें माता-पिता को बेटी से मिलने की इजाजत नहीं दी गई और कानूनी जानकारी के बिना कार्यवाही की गई। 3 फरवरी 2026 को एचआरएफपी कार्यालय में बोलते हुए सतीश के माता-पिता ने न्याय की अपनी मांग दोहराई। सतीश की मां शाहनाज बीबी ने कहा कि वह घर पर अकेली है, स्वास्थ्य खराब होने के कारण बेटी की रक्षा नहीं कर पा रही है और लगातार मिल रही धमकियों से परिवार की सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित हैं। माता-पिता का कहना है कि सतीश नाबालिग है, इसलिए कानूनी रूप से न तो विवाह की सहमति दे सकती है और न ही धर्म परिवर्तन कर सकती है। सुरक्षा की मांग ह्यूमन राइट्स फोकस पाकिस्तान के अध्यक्ष नवीद वाल्टर ने अल्पसंख्यक नाबालिग लड़कियों के जबरन धर्मांतरण और बाल विवाह से सुरक्षा, पीड़ित परिवारों द्वारा झेली जा रही धमकियों व उत्पीड़न, बिना पूर्ण पारदर्शिता और प्रतिनिधित्व के कानूनी कार्यवाही तथा नाबालिग की सुरक्षा व कल्याण को लेकर गंभीर चिंता जताई है। वहीं, एचआरएफपी अध्यक्ष नवीद वाल्टर ने सतीश मरियम के माता-पिता को उनके दौरे के दौरान आश्वासन दिया कि हम सतीश मरियम और उनके परिवार के साथ पूरी एकजुटता से खड़े हैं। हम संबंधित अधिकारियों से निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने, नाबालिग के अधिकारों की रक्षा करने और परिवार को उत्पीड़न व धमकियों से सुरक्षा प्रदान करने की मांग करते हैं।  

बांग्लादेश चुनाव में तनाव का माहौल, कई बूथों पर हिंसक घटनाएं; महिला एजेंट्स ने लगाए उत्पीड़न के आरोप

ढाका  बांग्लादेश में गुरुवार को 13वें संसदीय चुनाव के लिए वोटिंग संपन्न हो गई है। कड़ी सुरक्षा और लोगों में भारी उत्साह के बीच 299 सीटों पर वोट डाले गए। हालांकि, वोटिंग के दौरान भारी हिंसा और पोलिंग बूथों पर महिला एजेंट्स के साथ बदतमीजी का भी मामला सामने आया है। देश भर के 42,659 पोलिंग बूथों पर सुबह 7:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक वोटिंग हुई। बांग्लादेशी मीडिया की ओर से जारी साझा जानकारी के अनुसार, शेरपुर-3 सीट पर एक उम्मीदवार की मौत के बाद चुनाव टाल दिया गया है। 299 सीटों पर कुल 127,298,522 वोटर वोट डालने के लिए उपयुक्त थे। इनमें से 64,620,077 पुरुष वोटर, 62,677,232 महिला वोटर और 1,213 थर्ड-जेंडर वोटर शामिल हैं। अगर कुल 300 सीटों की बात करें तो वोटरों की कुल संख्या 127,711,899 है। चुनाव आयोग की ओर से बांग्लादेशी मीडिया को बताया गया कि दोपहर दो बजे तक 48 फीसदी वोटिंग हुई। निर्दलीय उम्मीदवार तस्नीम जारा ने आरोप लगाया कि ढाका-9 चुनाव क्षेत्र में कई जगहों पर महिला पोलिंग एजेंट्स को परेशान किया जा रहा है और पोलिंग सेंटरों में घुसने से रोका जा रहा है। जारा ने खिलगांव मॉडल कॉलेज पोलिंग सेंटर का दौरा करने के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि उनके पोलिंग एजेंट्स, खासकर महिलाओं को, कई सेंटरों में घुसने की कोशिश करते समय रुकावटों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा, “हमारे पोलिंग एजेंट्स को अलग-अलग बहानों से पोलिंग सेंटरों में घुसने से रोका जा रहा है। उन्हें अंदर नहीं जाने दिया जा रहा है, और महिला एजेंट्स को परेशान किया जा रहा है।” जारा ने आरोप लगाया कि पोलिंग बूथों के अधिकारी मनमाने नियम बनाकर रुकावटें पैदा कर रहे हैं। महिला एजेंट्स को अंदर जाने से रोका गया, सेंटर छोड़ने के लिए मजबूर किया गया, या उन्हें अलग-अलग निर्देश दिए गए। बता दें कि इससे पहले भी बांग्लादेश की निर्दलीय महिला उम्मीदवारों ने आरोप लगाया कि उन्हें परेशानी हो रही है। महिलाओं को चरित्र हनन या धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, दो पोलिंग बूथ, गोपालगंज और मुंशीगंज में धमाके की जानकारी भी सामने आई।

DNA रिपोर्ट के आधार पर बंद किया केस, हाईकोर्ट बोला– लापरवाही बर्दाश्त नहीं

भोपाल मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दुष्कर्म मामले में सुनवाई के दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। जस्टिस जीएस अहलूवालिया की एकलपीठ ने डीएनए रिपोर्ट में आरोपी के निर्दोष पाए जाने के बावजूद असली आरोपी की तलाश शुरू न करने पर पुलिस विभाग को आड़े हाथों लिया। कोर्ट ने डीजीपी से पूछा कि क्या उनके अधीनस्थ अधिकारियों को दोबारा प्रशिक्षण की जरूरत है या आम जनता ऐसे ही पुलिस की कानूनी जानकारी की कमी का खामियाजा भुगतती रहे। बार एंड बेंच में छपी खबर के मुताबिक, मामला बैतूल जिले का है। आरोपी को 10 अक्टूबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था और उसके खिलाफ चालान पेश किया जा चुका था। दिसंबर 2025 में आई डीएनए रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि आरोपी नाबालिग पीड़िता से जन्मे बच्चे का जैविक पिता नहीं है। इसके बावजूद पुलिस ने वास्तविक आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। अदालत की टिप्पणी- पुलिस अधिकारियों को प्रशिक्षण की जरूरत 10 फरवरी को जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बैतूल के पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन से पूछा कि डीएनए रिपोर्ट के बाद आगे क्या कार्रवाई की गई। कोर्ट ने पाया कि एसपी संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। आदेश में कहा गया कि यह स्थिति राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के प्रशिक्षण पर गंभीर सवाल खड़े करती है। डीएनए जांच में आरोपी को क्लीन चिट कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि दो अन्य दुष्कर्म मामलों में भी शुरुआती तौर पर गिरफ्तार किए गए आरोपी बाद में डीएनए जांच में निर्दोष पाए गए, लेकिन पुलिस ने समय रहते वास्तविक आरोपियों की तलाश में सक्रियता नहीं दिखाई। पीठ ने टिप्पणी की कि ऐसा प्रतीत होता है कि पुलिस विभाग अपनी कार्यप्रणाली में सुधार को लेकर गंभीर नहीं है। हालांकि, कोर्ट ने एसपी के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई का आदेश नहीं दिया, बल्कि डीजीपी से यह विचार करने को कहा कि क्या विभाग को सक्षम और विधिक रूप से प्रशिक्षित अधिकारियों की आवश्यकता है? कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि आगे की जांच ट्रायल कोर्ट से अनुमति लेकर की जाए, क्योंकि चार्जशीट दाखिल होने के बाद आगे की जांच के लिए न्यायालय की अनुमति आवश्यक है, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों में निर्धारित है। जमानत अर्जी खारिज कोर्ट ने कहा कि चूंकि बच्चा जीवित है, इसलिए सभी संभावित संदिग्धों के रक्त नमूने लेकर जैविक पिता की पहचान सुनिश्चित की जाए। जहां तक जमानत का सवाल है, कोर्ट ने आरोपी की याचिका खारिज कर दी। पीठ ने कहा कि केवल डीएनए रिपोर्ट के आधार पर पीड़िता के बयान को खारिज नहीं किया जा सकता। चूंकि अभी पीड़िता का साक्ष्य दर्ज नहीं हुआ है, इसलिए इस स्तर पर आरोपी को जमानत नहीं दी जा सकती। बता दें कि आरोपी की ओर से अधिवक्ता प्रदीप सिंह चौहान ने पैरवी की, जबकि राज्य की ओर से शासकीय अधिवक्ता स्वाति जॉर्ज उपस्थित रहीं।

2.36 करोड़ रुपए से अधिक के कार्यों का हुआ भूमिपूजन और लोकार्पण

रायपुर. माता मावली मेले में विकास की सौगात       नारायणपुर में आयोजित ऐतिहासिक माता मावली मेले में छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप तथा राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री  टंकराम वर्मा शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने माता मावली की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों, विशेषकर जिलेवासियों को शुभकामनाएं दीं।      कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री  कश्यप ने कहा कि मावली माता के आशीर्वाद से बस्तर की समृद्ध लोकसंस्कृति और परंपराएं सदैव अक्षुण्ण रहें। उन्होंने कहा कि नारायणपुर का यह मेला सामाजिक समरसता, लोककला और परंपरा का जीवंत संगम है, जहां दूर-दूर से लोग पहुंचकर बस्तर की संस्कृति से रूबरू होते हैं। उन्होंने सभी को मेले में शामिल होकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लेने का आग्रह किया।        मंत्री द्वय ने मेले में लगे विभिन्न दुकानों एवं विभागीय स्टॉलों का अवलोकन किया तथा स्थानीय उत्पादों और पूजा सामग्री की खरीदारी भी की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करते हैं।        इस अवसर पर कुल 1 करोड़ 76 लाख 59 हजार रुपये के कार्यों का भूमिपूजन तथा 59 लाख 51 हजार रुपये के कार्यों का लोकार्पण किया गया। मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप 10 प्राथमिक शाला भवनों के निर्माण हेतु भूमिपूजन किया गया, जिनकी स्वीकृत राशि 1 करोड़ 41 लाख 60 हजार रुपये है। इसके अलावा जनपद पंचायत ओरछा के ग्राम कुतुल एवं जाटलूर में दो-दो बाजार शेड निर्माण के लिए 34 लाख 99 हजार रुपये स्वीकृत किए गए।        जनपद पंचायत नारायणपुर अंतर्गत बागडोंगरी, पालकी और महिमागवाड़ी में 59 लाख 51 हजार रुपये की लागत से निर्मित खाद्यान्न भवनों का लोकार्पण किया गया। साथ ही नेलवाड़ और खोड़गांव में 100-100 मैट्रिक टन क्षमता के गोदामों का भी लोकार्पण किया गया।         कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष रूपसाय सलाम, जिला पंचायत अध्यक्ष नारायण मरकाम, नगरपालिका अध्यक्ष इंद्रप्रसाद बघेल, कलेक्टर नम्रता जैन, पुलिस अधीक्षक सहित जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित

नरवणे की किताब विवाद में नया मोड़, लीक के पीछे साजिश की आशंका; प्रकाशक से 15 सवालों की सूची

नई दिल्ली पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की किताब लीक मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने छानबीन तेज कर दी है। इस सिलसिले में प्रकाशक पेंगुइन इंडिया के प्रतिनिधियों से पूछताछ की गई है। सूत्रों की मानें तो पुलिस 15 सवालों के जवाब जानना चाहती है। स्पेशल सेल तकनीकी सबूतों के जरिए यह पता लगाने में जुटी है कि यह पूरी घटना किसी साजिश का हिस्सा तो नहीं है। कोई आपराधिक साजिश तो नहीं? पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि स्पेशल सेल की छानबीन अब इस बात पर फोकस है कि क्या पांडुलिपि के कथित लीक के पीछे कोई आपराधिक साजिश तो नहीं थी। हाल ही में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने नरवणे की किताब के कथित लीक की जांच में आपराधिक साजिश के आरोप भी जोड़ दिए हैं। 15 सवालों के जवाब चाह रही स्पेशल सेल पुलिस सूत्रों ने बताया कि स्पेशल सेल ने पेंगुइन इंडिया को नोटिस जारी कर 15 अहम सवालों के जवाब मांगे थे। जांच एजेंसी ने कंपनी से पांडुलिपि की हैंडलिंग, डिजिटल और फिजिकल एक्सेस, एडिटिंग प्रक्रिया, प्रिंटिंग से पहले की सुरक्षा व्यवस्था और ड्राफ्ट कॉपी तक किन-किन लोगों की पहुंच थी, जैसे बिंदुओं पर जानकारी तलब की थी। पेंगुइन इंडिया के प्रतिनिधियों से पूछताछ वहीं जांच टीम ने पेंगुइन इंडिया के प्रतिनिधियों से विस्तृत पूछताछ की है। कंपनी के प्रतिनिधि पूछताछ के लिए पेश हुए। उन्होंने कुछ सवालों के जवाब जांच एजेंसी को सौंप दिए हैं। कुछ बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया है। स्पेशल सेल अब पेंगुइन इंडिया द्वारा दिए गए जवाबों और दस्तावेजों का विश्लेषण कर रही है। डिजिटल ट्रेल की भी जांच जांच में इस सवाल का भी जवाब तलाशा जा रहा है कि क्या यह घटना किसी आंतरिक लापरवाही का नतीजा है। इस मामले में किसी की गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस तकनीकी साक्ष्यों और डिजिटल ट्रेल की भी जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही जिम्मेदारी तय की जा सकेगी। नहीं प्रकाशित की पुस्तक- पेंगुइन इंडिया गौरतलब है कि राहुल गांधी ने लोकसभा में इसके कुछ अंश का जिक्र करते हुए सरकार की घेरेबंदी की थी। इसके बाद पुस्तक को लेकर विवाद बढ़ गया। पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने अपने बयान में कहा कि हम स्पष्ट कर रहे हैं कि पुस्तक का प्रकाशन नहीं हुआ है। पुस्तक की कोई भी प्रति प्रिंट या डिजिटल रूप में जनता के लिए उपलब्ध नहीं कराई गई है। फिर कैसे लीक हो गए बुक के अंश? ऐसे में सवाल उठता है कि जब किताब प्रकाशित नहीं हुई तो इसके अंश आम कैसे हो गए? पुलिस सूत्रों ने बताया कि अप्रकाशित पांडुलिपि कथित तौर पर कैसे प्रसारित हुई? इसके जवाब तलाशे जा रहे हैं।

निपाह अलर्ट के बीच पहली मौत, टेस्ट निगेटिव लेकिन हार्ट अटैक से नर्स का निधन

पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना जिले के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में निपाह वायरस इंफेक्शन से जूझ रही 25 साल की एक नर्स की गुरुवार को मौत हो गई। हाल के इतिहास में पश्चिम बंगाल में इस वायरस से यह पहली मौत है। निपाह वायरस से देश में पहली मौत, टेस्ट निगेटिव के बावजूद नर्स की हार्ट अटैक से चली गई जान निपाह वायरस से देश में पहली मौत का मामला सामने आया है। पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना जिले के एक प्राइवेट अस्पताल में निपाह वायरस इंफेक्शन से जूझ रही 25 साल की एक नर्स की गुरुवार (12 फरवरी) को मौत हो गई। हाल के इतिहास में पश्चिम बंगाल में इस वायरस से यह पहली मौत है। अस्पताल सूत्रों ने बताया कि नर्स, उन दो लोगों में एक थीं, जो निपाह वायरस से संक्रमित हुए थे और कई हफ़्तों से इलाज करा रही थी। हालांकि, हाल ही में उसका वायरस टेस्ट नेगेटिव आया था, बावजूद इसके उसकी हालत गंभीर बनी हुई थी और गुरुवार को हार्ट अटैक से उसकी मौत हो गई। राज्य स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि नर्स को जनवरी के अंत में जीवन-रक्षक प्रणाली से हटाया गया था। उन्होंने कहा, ”आज दोपहर हृदयगति रुकने से उनकी मृत्यु हो गई। हालांकि वह निपाह संक्रमण से उबर चुकी थीं, लेकिन वह कई जटिलताओं से ग्रस्त थीं।” अधिकारी ने बताया कि नर्स लंबे समय तक कोमा में थीं, जिससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बुरी तरह प्रभावित हुई और बाद में उन्हें फेफड़ों का संक्रमण हो गया था। उन्होंने बताया कि वह उन दो लोगों में से एक थीं जिनके पिछले महीने निपाह से संक्रमित होने की पुष्टि हुई थी। दूसरा संक्रमित व्यक्ति पुरुष नर्स है और ठीक हो चुका है।

‘संविधान नहीं देता मजबूरी की इजाजत’ — वंदे मातरम् फैसले पर मदनी ने उठाए सवाल

नई दिल्ली वंदे मातरम् को राष्ट्रीय गीत के रूप में बजाने को अनिवार्य घोषित किए जाने के फैसले को जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने धर्म की स्वतंत्रता पर खुला हमला बताया है। केंद्र सरकार ने सभी सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों, कॉलेजों और अन्य महत्वपूर्ण आयोजनों में इसके सभी अंशों की धुन बजाने को अनिवार्य कर दिया है। मदनी ने केंद्र सरकार के इस फैसले को अत्यंत दुखद तथा नागरिकों पर जबरन थोपा गया बताया है। धार्मिक स्वतंत्रता पर गहरी चोट करने का प्रयास मदनी ने कहा कि यह न केवल एक पक्षपातपूर्ण फैसला है बल्कि नागरिकों की उस धार्मिक स्वतंत्रता पर गहरी चोट करने का प्रयास है जो देश के संविधान ने उन्हें प्रदान की है। उन्होंने कहा कि अब यह दुखद सच्चाई पूरी तरह सामने आ गई है कि इन लोगों को देश की प्रगति और जनता की समस्याओं से कोई लेना-देना नहीं है, वे हर समय चुनावी मोड में रहते हैं। उनका हर काम और हर फैसला इस बात पर निर्भर करता है कि उससे चुनाव में कितना लाभ मिल सकता है। हम केवल एक अल्लाह की इबादत करते हैं मौलाना मदनी ने कहा कि वंदे मातरम् का विवाद बहुत पुराना है। इससे पहले दिसंबर 2025 में जब इसे लेकर संसद में चर्चा हुई थी तब भी हमने अपने एक बयान के माध्यम से अपना रुख स्पष्ट कर दिया था। हमें किसी के वंदे मातरम् गाने या किसी समारोह में इसकी धुन बजाने पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन हम मुसलमान इस गीत को इसलिए नहीं गा सकते क्योंकि हम केवल एक अल्लाह की इबादत करते हैं और अपनी इस इबादत में किसी और को शामिल नहीं कर सकते। हर धर्म के अपने आदेश और नियम होते हैं उन्होंने यह भी कहा कि वंदे मातरम् की विषयवस्तु शिर्क से संबंधित मान्यताओं पर आधारित है और इसके एक अंतरे में देश को दुर्गा माता से उपमा देकर उसकी उपासना के लिए शब्दों का प्रयोग किया गया है। हर धर्म के अपने आदेश और नियम होते हैं जिन पर अमल करने से उन्हें कोई नहीं रोक सकता और इसी कारण हमारे संविधान में भी अनुच्छेद 25 के तहत प्रत्येक नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता दी गई है। ऐसे में किसी विशेष नागरिक या नागरिकों पर किसी विशेष विचारधारा को अपनाने, उसका उच्चारण करने या उसे मानने के लिए मजबूर करना संविधान के प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है। किसी के प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं मौलाना मदनी ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट का भी यह निर्णय है कि किसी भी नागरिक को राष्ट्रगान या किसी ऐसे गीत को गाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता जो उसके धार्मिक विश्वास के विरुद्ध हो। उन्होंने कहा कि देश से प्रेम एक अलग बात है और उसकी पूजा दूसरी बात। मुसलमानों को इस देश से कितनी मोहब्बत है, इसके लिए उन्हें किसी के प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं है। देशभक्ति का संबंध दिल की निष्ठा और कर्म से मदनी ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में मुसलमानों और जमीयत उलमा-ए-हिंद के बुजुर्गों की बेमिसाल कुर्बानियां और विशेष रूप से देश के विभाजन के विरोध में जमीयत की कोशिशें दिन के उजाले की तरह स्पष्ट हैं। आजादी के बाद भी देश की एकता और अखंडता के लिए उनकी जद्दोजहद को भुलाया नहीं जा सकता। हमने हमेशा कहा है कि देशभक्ति का संबंध दिल की निष्ठा और कर्म से है, न कि नारों से। टैगोर ने नेहरू को सलाह दी थी आजादी से पहले का ऐतिहासिक रिकॉर्ड मौजूद है कि 26 अक्टूबर 1937 को रवीन्द्रनाथ टैगोर ने पंडित जवाहरलाल नेहरू को एक पत्र में सलाह दी थी कि वंदे मातरम् के प्रारंभिक दो बंदों को ही राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया जाए क्योंकि शेष पंक्तियां एकेश्वरवादी धर्मों की मान्यताओं से टकराती हैं। फलस्वरूप 19 अक्टूबर 1937 को कांग्रेस की वर्किंग कमेटी ने निर्णय लिया कि इसके केवल दो बंदों को ही राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया जाए। पूरे गीत को थोपने की कोशिश संसद में हुई पूरे दिन की चर्चा में भी कांग्रेस सहित अन्य दलों के सदस्यों ने इसी बात पर जोर दिया था, लेकिन अब एक आदेश के माध्यम से पूरे गीत को नागरिकों पर थोपने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसके पीछे देशभक्ति की भावना नहीं बल्कि राजनीति काम कर रही है। वर्तमान सरकार जब भी किसी मुद्दे पर घिरती है तो जानबूझकर कोई न कोई विवाद खड़ा करने की कोशिश करती है ताकि जनता का ध्यान मूल समस्याओं से हटाया जा सके, वंदे मातरम् संबंधी अधिसूचना इसका ताजा उदाहरण है। उन्होंने अंत में कहा कि यह देश को बांटने वाली राजनीति है। हर हाल में सत्ता बनाए रखने का यह जुनून देश की शांति और एकता को नष्ट करने वाला ही नहीं है बल्कि उस संविधान को भी पैरों तले रौंदता है जिस पर हमारे देश के महान लोकतंत्र की नींव टिकी हुई है।  

खेत बना ड्रग्स का गोदाम: 21 करोड़ का नशा जब्त, आरोपी गिरफ्तार

राजगढ़ राजगढ़ जिले में नशे की फैक्ट्री व कारोबार चलाने वाले इस कार्य में संलिप्त पांच सौदागरों को पुलिस ने अंतत: धर दबोचा। उनमें से गोघटपुर में फैक्ट्री चलाने वाले व अभयपुर में ड्रग्स फिंकवाने वाले दोनों मुख्य आरोपितों के पास से पुलिस ने 21 किलो एमडी ड्रग्स भी जब्त किया है। जो खेतों में छिपा रखी थी। इसकी कीमत 21 करोड़ आंकी है। मामले का पर्दाफाश करते हुए एसपी अमित कुमार तोलानी ने बताया कि एमडी ड्रग्स केस में कुल पांच आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। उल्लेखनीय है कि 3 फरवरी रात को राजस्थान पुलिस की स्पेशल टीम झालावाड़ जिले में वाहनों की चेकिंग कर रही थी।उसी दौरान एक पिकअप को रोककर तलाशी ली। इसमें ड्रग्स बनाने में उपयोग होने वाला करीब 320 किलो केमिकल मिला।पिकअप सवारों ने बताया कि वह इसे मप्र के आगरा मालवा जिले की और लेकर जा रहे थे।दस्तावेज मांगने पर कुछ नहीं दिखा सके। उसी से इनपुट मिला था कि राजगढ़ जिले के गोघटपुर गांव में ड्रग्स की अवैध फैक्ट्री संचालित हो रही है। इसके बाद राजस्थान व माचलपुर की पुलिस ने 4 फरवरी को संयुक्त रूप से गोघटपुर में रघुनंदन पाटीदार के मकान पर दबिश दी, जहां कैमिकल से ड्रग्स बनाने की फैक्टी काे पकड़ा। जहां से करीब 4 करोड़ के कैमिकल बरामद किया था। इसके बाद 07-08 फ़रवरी को ग्राम आदमपुरा के जंगल क्षेत्र में खेत में बनी खंती में अज्ञात व्यक्तियों द्वारा अवैध मादक पदार्थ (एमडी ड्रग्स) निर्माण में प्रयुक्त कैमिकल ड्रमों में छिपाकर फेंका गया है।पुलिस टीम द्वारा मौके पर पहुंचकर तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान खंती में 05 नीले रंग के ड्रम मिले। जिनमें प्लास्टिक की पन्नियों में भरा हुआ सफेद रंग का क्रिस्टल जैसा कैमिकल पाउडर पाया गया।उक्त पदार्थ एमडी ड्रग्स (मादक पदार्थ) निर्माण में प्रयुक्त कैमिकल होना पाया गया। कुल वजन 266.9 किलोग्राम पाया गया, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत लगभग 05 करोड़ रुपये है। इसके बाद से ही आरोपितों की तलाश में पुलिस जुटी थी।पुलिस ने 5 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया।दो मुख्य आरोपितों से 21 करोड़ की ड्रग्स जब्त की है। आदमपुरा केस से मिले सुराग, ऐसे खुला रहस्य 7-8 फरवरी की रात को आदमपुरा के जंगल में 5 करोड़ का कैमिकल मिलने के बाद पुलिस टीम द्वारा ग्राम आदमपुरा क्षेत्र में विवेचना के दौरान स्थानीय व्यक्तियों से पूछताछ की गई।पूछताछ में 07 फरवरी 2026 को एक सिल्वर कलर की मारुति वैगनआर कार द्वारा संदिग्ध नीले रंग के केमिकल ड्रम जंगल क्षेत्र में फेंकने संबंधी जानकारी प्राप्त हुई।जांच के दौरान ग्राम रामगढ़ स्थित एक दुकान के सीसीटीवी फुटेज चेक किए गए। फुटेज में 07 फरवरी को सिल्वर कलर की मारुति वैगनआर कार आरजे-02, सीएफ-2543 को आते-जाते देखा गया।उक्त कार ललित कुमार गुर्जर निवासी बरखेड़ा खुर्द, जिला झालावाड़ के नाम पर पंजीबद्ध होना पाया गया।वाहन की तलाश के दौरान मुखबिर सूचना पर ब्राह्मणगांव क्षेत्र में संदिग्ध वाहन को घेराबंदी कर रोका गया।वाहन में सवार तीन व्यक्ति दिनेश गुर्जर पिता कालूलाल गुर्जर, उम्र 30 वर्ष, निवासी बरखेड़ा खुर्द थाना बकानी, ललित गुर्जर पिता भगवान सिंह गुर्जर, उम्र 26 वर्ष, निवासी बरखेड़ा खुर्द थाना बकानी, रामेश्वर गुर्जर पिता कैलाश गुर्जर, उम्र 35 वर्ष, निवासी कोटरा राड़ी थाना बकानी सवार थे।जिन्हें पुलिस टीम द्वारा तत्परता से पकड़ लिया गया।घटना में प्रयुक्त कार आरजे-02, सीएफ-2543 को जब्त किया।पूछताछ के दौरान गिरफ्तार आरोपितों द्वारा बताया गया कि दीपक पिता भगवान गुर्जर ने उन्हें उक्त ड्रम जंगल क्षेत्र में फेंकने के लिए कहा था।आरोपितों ने यह भी बताया कि वे ड्रम दीपक के अरनिया स्थित स्थान से लेकर आए थे।इसके बाद कार सवारों की सूचना पर पकड़ा दीपक, फिर रघुनंदन पाटीदार कार सवार तीनों अारोपितों द्वारा जैसे ही दीपक का नाम बताया तो पुलिस ने मुखबिर सूचना पर ग्राम माणा के पास से आरोपित दीपक गुर्जर (29 वर्ष) निवासी ग्राम अरनिया को पकड़ा गया।पूछताछ में आरोपित द्वारा अपने घर ग्राम अरनिया में एमडी ड्रग्स छिपाकर रखने की जानकारी दी गई।आरोपित के घर की तलाशी ली गई, जहां किचन में रखे कार्टून से 10.160 किलोग्राम एमडी ड्रग्स बरामद हुई।विधिवत तौल, सीलिंग एवं जब्ती की कार्यवाही की गई तथा आरोपित को मौके से गिरफ्तार किया गया।आरोपित दीपक के पकड़े जाने के बाद पुलिस को गोघटपुर में फैक्ट्री चलाने वाले रघुनंदन की तलाश थी।पुलिस ने फिर दीपक की निशानदेही पर संदेही रघुनंदन पाटीदार (34 वर्ष) निवासी ग्राम गोघटपुर को बरखेड़ा खुर्द (राजस्थान) से हिरासत में लिया गया।पूछताछ में उसके द्वारा बाबाजी वाले सरसों के खेत में मादक पदार्थ छिपाकर रखने की जानकारी दी गई।खेत से हरे रंग के कार्टून में रखी 11.350 किलोग्राम एमडी ड्रग्स जब्त की गई।विधिवत तौल, सीलबंदी एवं जप्ती उपरांत आरोपी को गिरफ्तार किया गया।कुल मिलाकर 11 फरवरी को मुख्य गोघटपुर में फैक्ट्री चलाने वाले रघुनंदन पाटीदार व आदमपुरा के जंगल में कैमिकल फेंकने वाले दीपक गुर्जर के कब्जे से 21 करोड़ की एमडी ड्रग्स जब्त की है।जो कि खेतों में व अलग-अलग स्थानों पर छिपा रखी थी।जबकि गोघटपुर, अादमपुरा के जंगल सहित सभी दूर से मिलाकर कुल एमडी ड्रग्स एवं 309 किलोग्राम से अधिक रॉ मटेरियल जब्त किया है।जिसकी कुल अनुमानित कीमत ₹30 करोड़ आंकी है।

खाद्य तेल में आत्मनिर्भरता की ओर छत्तीसगढ़ : राज्य में 10,796 हेक्टेयर क्षेत्रों में ऑयल पाम की खेती

रायपुर. खाद्य तेल में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार करने के लिए छत्तीसगढ़ में ऑयल पाम की खेती को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य में अब तक 10,796 हेक्टयर क्षेत्रों में ऑयल पाम की खेती हो रही है। जिसमें 7,315 किसान लाभान्वित हो रहे हैं। जिला प्रशासन भी ऑयल पाम के लिए जमीन चिहांकित कर रकबा बढ़ाने प्रयासरत हैं।  इसी क्रम में संचालक उद्यानिकी श्री लोकेश कुमार ने दुर्ग एवं बेमेतरा जिलों के किसानों के खेतों का निरीक्षण कर योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की और अधिक क्षेत्र में ऑयल पाम लगाने के लिए किसानों को प्रेरित किया। उद्यानिकी संचालक श्री लोकेश कुमार ने निरीक्षण के दौरान राष्ट्रीय बागवानी मिशन, समेकित उद्यानिकी विकास कार्यक्रम तथा नेशनल मिशन ऑन ऑयल पाम के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों का अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए और किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया। गौरतलब है कि राज्य में ऑयल पाम की खेती वर्ष 2012-13 से की जा रही है। वर्तमान में राज्य के समस्त जिलों में लगभग 10,796 हेक्टेयर क्षेत्र में रोपण किया जा चुका है, जिससे 7,315 किसान लाभान्वित हुए हैं। अब तक लगभग 1,394.88 टन फ्रेश फ्रूट बंच का उत्पादन हुआ है। भारत सरकार द्वारा फ्रेश फ्रूट बंच का न्यूनतम मूल्य 16,460.46 रुपये प्रति टन निर्धारित कया गया है, जबकि छत्तीसगढ़ में किसानों से 22,000 रुपये प्रति टन की दर से सीधी खरीदी की जा रही है। संचालक श्री लोकेश कुमार ने दुर्ग जिले के ग्राम ढाबा में श्रीमती सुनिती देवी मढरिया के एक हेक्टेयर में लगाए गए ऑयल पाम के साथ टमाटर की अंतरवर्ती फसल तथा श्री प्रवीण मढरिया के एक हेक्टेयर क्षेत्र में ऑयल पाम के साथ केले की खेती का अवलोकन किया। यहां किसानों से सब्सिडी और अनुदान से जुड़ी जानकारी साझा की। इसके पश्चात दुर्ग जिले के ही परसदापार, चिखला एवं राजपुर तथा बेमेतरा जिले के डोंगीतराई गांव में चयनित और लाभान्वित किसानों के खेतों में रोपित ऑयल पाम, केला, आम, फेंसिंग और अंतरवर्ती फसलों का अवलोकन किया।  संचालक श्री लोकेश कुमार ने किसानों को योजना के अंतर्गत ऑयल पाम पौध, फेंसिंग, ट्यूबवेल, ड्रिप सिंचाई तथा अंतरवर्ती फसलों पर मिलने वाली आर्थिक सहायता और उत्पाद की बाजार व्यवस्था के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ऑयल पाम की खेती किसानों की आय बढ़ाने का बेहतर विकल्प बन रही है। राजपुर स्थित शासकीय बीज प्रगुणन प्रक्षेत्र में प्लग टाइप सीडलिंग यूनिट का निरीक्षण कर इसे शीघ्र दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए, ताकि आगामी मौसम में किसानों को गुणवत्तायुक्त पौध उपलब्ध कराई जा सके।

मुश्किलों को दी मात, देश को दिलाया मेडल: वरुण सिंह भाटी का जज्बा सलाम के काबिल

नई दिल्ली वरुण सिंह भाटी का नाम देश के श्रेष्ठ पैरा एथलीटों में लिया जाता है। वह ऊंची कूद में देश को पैरालंपिक में पदक दिला चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली इस सफलता का सफर वरुण के लिए आसान नहीं था, लेकिन अपनी मुश्किलों को पीछे छोड़ते हुए और कड़ी मेहनत के बल पर उन्होंने अपना रास्ता बनाया है। वरुण सिंह भाटी का जन्म 13 फरवरी 1995 को नोएडा में हुआ था। महज छह महीने की उम्र में पोलियोमाइलाइटिस का शिकार होने के बाद उनके एक पैर में स्थायी विकलांगता आ गई। गलत दवा की वजह से उनकी परेशानी और बढ़ गई। बचपन में शारीरिक रूप से मिले इस झटके के बावजूद वरुण के परिवार ने उन्हें कभी कमजोर और हतोत्साहित नहीं होने दिया और हमेशा उन्हें कुछ बड़ा करने के लिए प्रेरित किया। बचपन से ही वरुण को खेलों में रुचि थी। बास्केटबॉल उनका पसंदीदा खेल था, लेकिन बाद में उन्होंने ऊंची कूद में बेहतर करने का लक्ष्य बनाया। उन्होंने सामान्य एथलीटों के साथ अभ्यास करना शुरू किया ताकि उन्हें बेहतर करने की प्रेरणा मिल सके। पूर्व राष्ट्रीय एथलीट सत्यनारायण की कोचिंग में उनके करियर को नई उड़ान मिली। गोस्पोर्ट्स फाउंडेशन के पैरा चैंपियंस प्रोग्राम से मिले समर्थन ने भी उनके सफर को मजबूती दी। टी42 श्रेणी में प्रतिस्पर्धा करने वाले वरुण ने 2012 में 1.60 मीटर की छलांग के साथ लंदन पैरालिंपिक के लिए ‘ए’ क्वालिफिकेशन मार्क हासिल किया था, हालांकि सीमित स्लॉट के कारण वे उस संस्करण में हिस्सा नहीं ले सके। इसके बाद उन्होंने 2014 एशियन पैरा गेम्स में भाग लिया और उसी साल चाइना ओपन में स्वर्ण पदक जीता। 2016 उनके करियर के लिए शानदार था। आईपीसी एशिया-ओशिनिया चैंपियनशिप में 1.82 मीटर की छलांग लगाकर उन्होंने स्वर्ण और एशियन रिकॉर्ड अपने नाम किया। रियो पैरालिंपिक 2016 में 1.86 मीटर की व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ छलांग के साथ उन्होंने कांस्य पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया। 2017 विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी उन्होंने कांस्य पदक जीता। 2018 एशियन पैरा गेम्स में 1.82 मीटर के साथ रजत पदक हासिल किया। उनके बेहतरीन खेल और सफलता को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें 29 अगस्त 2018 को अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया था।  

डायबिटीज अलर्ट देगी स्मार्टवॉच? दुबई में शुरू हुई नई टेक्नोलॉजी की जांच

दुबई में एक ऐसी स्मार्टवॉच की टेस्टिंग चल रही है, जो लोगों को डायबटीज रिस्क के बारे में बताएगी। मंगलवार को दुबई में वर्ल्ड हेल्थ एक्सपो (WHX) 2026 का आयोजन किया गया। इसमें डायबिटीज के खतरे का पता लगाने के लिए स्मार्टवॉच टेक्नोलॉजी के बारे में बताया गया है। इसका मकसद बढ़ते डायबिटीज संकट से निपटना है। दुनिया भर में लाखों लोगों को यह भी नहीं पता चल पाता है कि उन्हें डायबटीज का खतरा है। इस कारण स्मार्टवॉच टेक्नोलॉजी के जरिए लोगों की मदद की जा रही है। इसके लिए नए स्टडी हो रही है, जिसमें स्मार्टवॉच की टेस्टिंग हो रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वॉच डायबटीज रिस्क के बारे में कितनी सटीक जानकारी दे सकती है। Huawei Watch GT 6 Pro की हो रही टेस्टिंग आजकल मार्केट में अलग-अलग तरह के गैजेट्स आते हैं। स्मार्टवॉच के जरिए लोग अपनी कई हेल्थ एक्टिविटीज को ट्रैक कर पाते हैं। दुनिया में डायबटीज के मरीज दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं। इससे निपटने के लिए नई स्मार्टवॉच टेक्नोलॉजी पर काम चल रहा है। Gulf News की रिपोर्ट के अमुसार, दुबई हेल्थ के तहत मोहम्मद बिन राशिद यूनिवर्सिटी (MBRU) में असिस्टेंट प्रोफेसर और एंडोक्राइनोलॉजी डायबिटीज स्पेशलिस्ट डॉ. मरियम अल सईद ने बताया कि रिसर्च में 150 मरीजों और वॉलंटियर्स पर Huawei Watch GT 6 Pro को टेस्ट किया जाएगा। यह टेस्टिंग इसलिए है ताकि यह देखा जा सके कि वॉच बढ़े हुए ब्लड ग्लूकोज लेवल को पहचानने में कितनी सही है। टेस्टिंग में शामिल होंगे कई लोग इस ट्रायल में 50 हेल्दी वॉलंटियर्स, 50 जाने-माने डायबिटीज के मरीज के साथ दुबई हेल्थ हॉस्पिटल और शहर भर के प्राइमरी हेल्थकेयर सेंटर से 50 प्री-डायबिटीज वाले मरीज भी शामिल होंगे। डॉ. सईद ने प्री-डायबिटीज ग्रुप में खास दिलचस्पी दिखाई। बता दें कि यह ग्रुप उन लोगों का है, जिनका ब्लड शुगर लेवल कभी ज्यादा और कभी कम हो सकता है और जिन्हें अपनी हालत के बारे में पता हो भी सकता है और नहीं भी। ​ट्रेडिशनल कैपिलरी ग्लूकोज मॉनिटर से होगी तुलना स्टडी में स्मार्टवॉच की रीडिंग की तुलना ट्रेडिशनल कैपिलरी ग्लूकोज मॉनिटर से की जाएगी। यह वह टेस्ट होता है, जिसमें एक्यूरेसी टेस्ट करने के लिए उंगली पर सुई चुभाते हैं और बल्ड की एक बूंद से टेस्ट किया जाता है। बता दें कि Huawei ने WHX में Huawei Health Strategy and Research Platform इवेंट में Huawei Watch GT 6 Pro के लिए डायबिटीज रिस्क के नए फीचर की घोषणा की थी। इसके बाद यह स्टडी की घोषणा हुई। क्या है टेक्नोलॉजी? आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Huawei Watch GTX में फोटोप्लेथिस्मोग्राफी (PPG) का इस्तेमाल होता है। यह एक ऑप्टिकल तरीका है, जो लाइट सेंसर के जरिए ब्लड ग्लूकोज का अंदाजा लगा सकता है। कलाई पर पहना जाने वाले एक बाहरी और नॉन-इनवेसिव डिवाइस होने के कारण यह मिनिमली इनवेसिव कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटर से अलग है, जिन्हें स्किन के नीचे लगाना पड़ता है। डॉ. अल सईद ने कहा कि वॉच यह नहीं बताएगी कि आपको डायबिटीज है, लेकिन यह उन्हें बताएगी कि ग्लूकोज बढ़ा हुआ है। इस तरह वॉच आपको सिग्नल देगी कि शायद आपको अपने डॉक्टर के पास जाकर लैब टेस्ट करवाना चाहिए। जल्दी पता लगाना है जरूरी डॉ. सईद ने कहा कि दुनिया भर में 500 मिलियन से भी ज्यादा लोग टाइप 2 या टाइप 1 डायबिटीज के डायग्नोसिस के साथ जी रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया सबसे दिलचस्प बात यह है कि जिन लोगों को डायग्नोस नहीं हुआ है, उन्हें ये पता ही नहीं है कि उनको डायबिटीज है, क्योंकि उन्होंने कभी चेकअप ही नहीं करवाया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्री-डायबिटीज वाले दो-तिहाई लोगों में कुछ समय बाद यह बीमारी पूरी तरह हो जाती है, इसलिए इसका जल्दी पता लगाना बहुत जरूरी है।

नेपाल बेबस, इटली का जलवा बरकरार—10 विकेट से दर्ज की ऐतिहासिक फतह

मुंबई (महाराष्ट्र) इटली ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गुरुवार को वानखेड़े स्टेडियम में ग्रुप C मैच में नेपाल को 10 विकेट से हराकर ICC टूर्नामेंट में अपनी पहली जीत दर्ज की। इटली ने पूरे मैच में अपनी ऑलराउंड कोशिशें दिखाईं जिसमें नेपाल को टी20 वर्ल्ड कप में पहली बार खेलने वाली टीम ने हराया और वानखेड़े में यादगार जीत हासिल की। 124 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए ओपनर और भाई जस्टिन मोस्का और एंथनी मोस्का ने इटली को अच्छी शुरुआत दिलाई और पहले 2 ओवर में 16 रन बनाए। एंथनी ने शुरुआती ओवरों में कुछ बाउंड्री लगाईं। अगले ही ओवर में नेपाल के बॉलर करण केसी को जस्टिन ने एक छक्के और दो चौकों की मदद से 14 रन ठोके जिससे इटली का स्कोर 30/0 हो गया। यूरोपियन नेशन ने एक और महंगे ओवर के बाद सिर्फ चार ओवर में अपनी फिफ्टी पूरी की, जब ओपनर्स ने ललित राजबंशी को 20 रन ठोके। वर्ल्ड कप में डेब्यू करने वाली टीम ने पावरप्ले का अंत 68/0 के जबरदस्त स्कोर के साथ किया। इटली के 10वें ओवर में 97/0 के मजबूत स्कोर पर पहुंचने के बाद दोनों ओपनर्स ने राइनोज के खिलाफ अपना अटैक जारी रखा। दोनों भाइयों ने 11वें ओवर में अपनी-अपनी हाफ-सेंचुरी पूरी की जिसमें जस्टिन ने 37 गेंदों में और एंथनी ने 28 गेंदों में यह माइलस्टोन पूरा किया। इटली की बैटिंग का यह शानदार प्रदर्शन था क्योंकि उन्होंने सिर्फ 12.4 ओवर में लक्ष्य हासिल कर लिया। उन्होंने नेपाल को 10 विकेट से हराया और इटली ने ICC टूर्नामेंट में अपनी पहली जीत दर्ज की। इससे पहले टॉस जीतकर पहले गेंदाबाजी चुनने वाले इटैलियन बॉलर्स ने शानदार परफॉर्मेंस दी और ग्रुप C मैच में नेपाल को सिर्फ 123 रनों पर रोक दिया। दूसरे ओवर में अली हसन की गेंद पर कुशाल भुर्टेल (5) के आउट होने के बाद राइनोज की शुरुआत खराब रही और नेपाल का स्कोर 8/1 हो गया। आसिफ शेख और कप्तान रोहित पौडेल ने दूसरे विकेट के लिए 41 रन की पार्टनरशिप की, लेकिन दो विकेट जल्दी गिर गए। पौडेल का विकेट कलुगामागे की गेंद पर गिर गया और आसिफ को बेन मानेंटी ने आउट किया जिससे आठवें ओवर में नेपाल का स्कोर 49/3 हो गया। इसके बाद दीपेंद्र सिंह ऐरी और आरिफ शेख के बीच चौथे विकेट के लिए 43 रन की अहम पार्टनरशिप हुई जिसके बाद एक और विकेट गिर गया। हालांकि, इटली की शानदार बॉलिंग के बाद अचानक विकेट गिरे। दीपेंद्र सिंह ऐरी 17 रन बनाकर आउट हो गए, आरिफ ने 27, लोकेश बाम (3), गुलसन झा (3), और नादान यादव (0) ने 17वें ओवर में नेपाल का स्कोर 8/102 कर दिया। नेपाल ने सिर्फ 9 रन पर 5 विकेट खो दिए। आखिर में नेपाल 19.3 ओवर में 123 रन के मामूली स्कोर पर आउट हो गया। इटली के लिए बेन मानेंटी (2/9), अली हसन (1/34), जेजे स्मट्स (1/22), कलुगामागे (3/18) और जसप्रीत सिंह (1/8) ने विकेट लिए।

विदिशा 220 केवी सबस्टेशन में सुरक्षा और ट्रेनिंग पर एम.पी. ट्रांसको की विशेष कार्यशाला

एम.पी. ट्रांसको के 220 केवी विदिशा सबस्टेशन पर हुई सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यशाला भोपाल मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) की जीरो एक्सीडेंट पॉलिसी के अंतर्गत विदिशा जिले के 220 केवी विदिशा सबस्टेशन पर सुरक्षा एवं सबस्टेशन संचालन से संबंधित प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण सत्र के दौरान अधीक्षण अभियंता श्री शेखर फटाले एवं कार्यपालन अभियंता श्री संजय श्रीवास्तव ने सबस्टेशन मेंटेनेंस एवं आपरेशन कार्यों के दौरान अपनाई जाने वाली आवश्यक सुरक्षा प्रक्रियाओं को बिंदुवार समझाया। सुरक्षित एवं व्यवहारिक कार्य प्रणाली पर दिया जोर कार्यशाला में कार्यस्थल पर लापरवाही रोकने के महत्व पर विशेष जोर देते हुए दुर्घटनाओं से बचाव के लिये व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी, जिससे कार्मिकों एवं उपकरणों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। एम.पी. ट्रांसको की जीरो एक्सीडेंट पॉलिसी के अंतर्गत निर्धारित स्टेंडर्ड आपरेटिंग प्रोसीजर(एसओपी) एवं सेफ्टी प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन करने पर बल दिया गया। इस कार्यशाला में सबस्टेशन के अभियंता एवं नियमित व आउटसोर्स तकनीकी कर्मियों ने सक्रिय सहभागिता की। प्रतिभागियों को सुरक्षित कार्य पद्धतियों, सुरक्षा उपकरणों के उपयोग तथा निर्बाध एवं सुरक्षित विद्युत पारेषण बनाए रखने के लिये समन्वित टीमवर्क के प्रति जागरूक भी किया गया।  

श्रम मंत्री ने की विभागीय कामकाज की गहन समीक्षा, सुधार के दिए निर्देश

रायपुर. श्रम मंत्री  लखन लाल देवांगन ने आज गुरुवार को नवा रायपुर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) में श्रम विभाग की दो चरणों में मैराथन समीक्षा बैठक ली। प्रथम चरण की बैठक में श्रम विभाग के अंतर्गत आने वाले तीनों मंडलों की योजनाओं और कारखानों में श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा को लेकर समीक्षा की गई। मंत्री  देवांगन ने अधिकारियों को निर्देश दिए की कारखाने की नियमित तौर पर निरीक्षण करें। श्रमिकों की हितों की सुरक्षा का पूरा ख्याल रखें। कमी मिलने पर संबंधित उद्योग को निर्देशित करें। हर महीने किए जाने वाले निरीक्षण की भी समीक्षा करने की निर्देश दिए गए।        बैठक में उपस्थित अधिकारियों को श्रम मंत्री ने कहा कि श्रमिकों के कल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन, उनके हितों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। प्रदेश के मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की मंशा अनुरूप श्रमिक भाई बहनों को योजनाओं के ज्यादा से ज्यादा लाभ दिलवाए, सुरक्षा के मानको का पूरा ख्याल रखने का प्रयास करें। श्रमिकों के पंजीयन, नवीनीकरण, और योजनाओ का क्रियान्वयन समय अवधि में पूर्ण करें। बैठक में श्रम विभाग के सचिव  हिमशिखर गुप्ता, उप सचिव  विपुल गुप्ता, अपर श्रमायुक्त एस. एल. जांगड़े, मती सविता मिश्रा, बीओसी सचिव गिरीश रामटेके सहित जिलो से आए मैदानी अधिकारी उपस्थित रहे। कॉन्ट्रैक्ट श्रमिक अधिनियम पर विशेष फोकस करें  बैठक में श्रम मंत्री  देवांगन ने कॉन्ट्रैक्ट श्रमिक अधिनियम को लेकर विशेष निर्देश दिए गए। इस अधिनियम के तहत पंजीकृत श्रमिकों को ईएसआईसी और पीएफ का लाभ सुनिश्चित करने साथ ही श्रमिकों की संख्या का मिलान करने के भी निर्देश दिए गए। ठेकेदार को जितने श्रमिकों का लाइसेंस प्राप्त है, उतने ही श्रमिक कार्यरत है की नहीं यह सुनिश्चित करने कहा गया। इसके साथ-साथ निजी कंपनिययों से सेवानिवृत हो चुके कर्मियों के उपादन भुगतान संबंधी मामले के जल्द निराकरण, विभिन्न माध्यमों से आने वाले शिकायतों का समय अवधि में निराकरण, करने के निर्देश दिए गए। सात जिलों में शहीद वीर नारायण श्रम अन्न केंद्र प्रारंभ करने की निर्देश  बैठक में मुख्यमंत्री की घोषणा शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना के अंतर्गत किफायती दर पर भोजन केंद्र की भी समीक्षा की गई। प्रदेश के साथ जिलों में जल्द ही श्रम अन्न केंद्र प्रारंभ करने निर्देश दिए गए। इनमें मुंगेली, सक्ति, जगदलपुर, कांकेर, खैरागढ़ छुई खदान गंडई, जशपुर और जगदलपुर में केंद्र शुरू करने कहा गया है।     श्रमिकों के स्वास्थ्य के नियमित जांच करने की निर्देश        दूसरे चरण की बैठक में मंत्री  लखनलाल देवांगन ने कर्मचारी राज्य बीमा सेवाएं और औद्योगिक स्वास्थ्य सुरक्षा के अधिकारियों की संयुक्त बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। श्रम मंत्री  देवांगन ने सभी जिलों के डिस्पेंसरी की समीक्षा की। ओपीडी की संख्या को और बढ़ाने और श्रमिकों के गुणवत्तापूर्ण इलाज के निर्देश दिए गए। डिस्पेंसरी के स्टाफ की रोजाना हाजिरी बायोमेट्रिक के आधार पर करने के निर्देश दिए। प्रमुख डिस्पेंसरी में सुविधा और बढ़ाने कार्य योजना बनाने कहां गया है। मंत्री  देवांगन ने उद्योगों में नजदीकी डिस्पेंसरी का पता चस्पा करने के भी निर्देश दिए गए हैं। साथ ही कारखाने की नियमित जांच कर उनमें आवश्यक कार्यवाही करने के भी निर्देश दिए गए।

तानाशाह का नया दांव या उत्तराधिकारी तय? किम की बेटी की बढ़ती मौजूदगी से उठे बड़े सवाल

उत्तर कोरिया उत्तर कोरिया के तानाशह किम जोंग उन अपनी बेटी किम जू ऐ को उत्तराधिकारी के रूप में नामित करने की प्रक्रिया में बहुत आगे बढ़ चुका है। दक्षिण कोरिया की खुफिया एजेंसी नेशनल इंटेलिजेंस सर्विस (एनआईएस) ने गुरुवार को संसद की एक बंद कमरे की ब्रीफिंग में इस बात की जानकारी दी है। एनआईएस ने बताया कि किम जू ऐ अब ‘उत्तराधिकारी के रूप में नामित होने के चरण’ में पहुंच चुकी हैं। एजेंसी के अनुसार, पहले उन्हें ‘उत्तराधिकारी प्रशिक्षण में’ बताया जाता था, लेकिन अब भाषा में बदलाव आया है, जो प्रक्रिया के अधिक ठोस और सुनियोजित होने का संकेत देता है। सांसद ली सियोंग-क्वेउन ने ब्रीफिंग के बाद पत्रकारों से कहा कि एनआईएस ने कहा कि किम जू ऐ विभिन्न प्रमुख सैन्य और प्रतीकात्मक कार्यक्रमों में अपने पिता के साथ दिखाई दी हैं, जैसे कोरियन पीपुल्स आर्मी की स्थापना वर्षगांठ, कुमसुसान पैलेस ऑफ द सन का दौरा और वायु सेना दिवस समारोह। साथ ही, निरीक्षण के दौरान नीतिगत मुद्दों पर उनके विचार व्यक्त करने के संकेत मिले हैं। एजेंसी ने किम की बेटी की सार्वजनिक उपस्थिति, पिता के ठीक बगल में प्रमुख स्थिति, सरकारी मीडिया कॉवरेज और व्यवहार को उत्तराधिकार की तैयारी का प्रमाण बताया है। दरअसल, पिछले दो वर्षों में सरकारी मीडिया ने इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च, सैन्य परेड और वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों की बैठकों में बार-बार दिखाया है। एनआईएस का मानना है कि किम जू ऐ अब डी फैक्टो दूसरे सबसे उच्च पद पर हैं और नीतिगत मामलों पर इनपुट दे रही हैं। एजेंसी इस महीने के अंत में होने वाली वर्कर्स पार्टी कांग्रेस पर नजर रखेगी, जहां उनकी भागीदारी, प्रोटोकॉल स्तर, कोई आधिकारिक उपाधि या पार्टी नियमों में संशोधन उत्तराधिकार की पुष्टि कर सकता है। बता दें कि किम जू ऐ की पहली अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति पिछले साल चीन की यात्रा में देखी गई थी, जहां वह अपने पिता के साथ बुलेटप्रूफ ट्रेन से बीजिंग पहुंचीं और एक सैन्य परेड में शामिल हुई थी। गौरतलब है कि उत्तर कोरिया में 1940 के दशक से किम परिवार का वंशानुगत शासन है। किम जोंग उन को 2011 में उनके पिता किम जोंग इल की मृत्यु से पहले उत्तराधिकारी घोषित किया गया था। किम जू ऐ को माना जाता है कि वह किम जोंग उन और उनकी पत्नी री सोल जू की संतान हैं, जिनमें दो या तीन बच्चे हो सकते हैं, लेकिन प्योंगयांग ने अन्य बच्चों की सार्वजनिक पुष्टि नहीं की है।  

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