Fast unto death to save Kailaras sugar factory from tomorrow 15th August (Independence Day)
मुरैना। जिला मुरैना के नगर कैलारस में वर्ष 1973 में प्रदेश का पहला सहकारी शक्कर कारखाना स्थापित किया गया था, जो वर्ष 2008 तक निरंतर रूप से चला। सरकार की गलत नीतियों एवं कुप्रबंधन के कारण उक्त कारखाना बंद करना पड़ा। जिसे पुनः प्रारंभ करने हेतु किसान निरंतर रूप से आंदोलन करते चले आ रहे हैं एवं सरकार कारखाने को चालू करने एवं किसानों और कर्मचारियों की देनदारियों का भुगतान किए जाने हेतु मांग कर रहे हैं। शक्कर कारखाना कैलारस के पुनर्जीवन के लिए क्षेत्र के किसान व्यवसायी व हम सब पांच वर्ष से प्रयास कर रहे हैसरकार द्वारा 19 अगस्त, 2025 को मंत्री परिषद की बैठक में कारखाने की जमीन एवं परिसंपत्तियों को एमएसएमई विभाग को सौंपे जाने का निर्णय लिया गया।

उक्त परिसंपत्तियों के एवज में एमएसएमई विभाग विभाग द्वारा 61 एक करोड़ रुपये सहकारिता विभाग को उपलब्ध कराए जाने निर्णय लिया गया, क्षेत्र के किसानों को जब यह सूचना मिली तो उन्हें गहरा आघात लगा। मंत्रिपरिषद के इस निर्णय के विरोध में किसान संगठनों द्वारा सम्पूर्ण जिले में जनजागरूकता के लिए दौरा किया गया एवं 21 सितंबर 2025 को किसान नेता राकेश टिकैत जी के नेतृत्व में जीवाजीगंज मुरैना में विशाल किसान सभा का आयोजन किया गया। साथ ही क्षेत्र के लगभग पाँच हजार किसानों द्वारा लिखित वचन पत्र भी सरकार को दिया गया कि वह गन्ना उपजाने के लिए तैयार हैं। मेरे द्वारा विधानसभा सत्र दिसंबर 2025 में दिनांक 01 दिसंबर, सत्र फरवरी- मार्च 2026 में दिनांक 17 फरवरी 2026 तथा सत्र जुलाई 2026 में दिनांक 20 जुलाई 2026 विधानसभा प्रश्न के माध्यम से सरकार कारखाने के संबंध में सरकार द्वारा की जा रही कार्यवाही के संबंध में जानकारी चाही गई, किंतु उक्त तीनों प्रश्न विधानसभा अध्यक्ष महोदय द्वारा अपने स्तर पर बिना किसी नियम का उल्लेख करते हुए अस्वीकृत कर दिए गए। एवं उक्त प्रश्नों को निरस्त किए जाने से संबंधित कारणों की मुझे लिखित में कोई जानकारी नहीं दी गई।
जिससे शक्कर कारखाने की संपत्ति को खुर्द बुर्द किए जाने का षड्यंत्र उजागर न हो सके। इसी कृत्य से क्षुब्ध होकर मेरे द्वारा 21 जुलाई 2026 को विधानसभा परिसर में धरना दिया गया। जिसके बाद संबंधित अधिकारियों द्वारा मुझे उक्त प्रश्नों की जानकारी उपलब्ध कराए जाने इसका आश्वासन दिया गया। किन्तु प्रश्नों के उत्तर अभी अप्राप्त है। राष्ट्रीय सहकारी शक्कर कारखाना संघ द्वारा अपनी रिपोर्ट में यह उल्लेख किया गया है कि चंबल क्षेत्र में गन्ना उपजाने की इतनी संभावनाएं हैं कि पाँच कारखाने आसानी से संचालित किए जा सकते हैं। किन्तु शक्कर कारखाने की परिसंपत्तियों को एमएसएमई को सौंपा जाना एवं शक्कर कारखाने का परिसमापन किया जाना, क्षेत्र के किसानों के साथ वायदा खिलाफी एवं धोखा है।
इन समस्त संभावनाओं एवं परिस्थितियों से सरकार को अवगत कराने एवं क्षेत्र की किसानों एवं जनता की मांग को सरकार तक पहुंचाने के लिए मेरे द्वारा केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह, केंद्रीय कृषि मंत्री एवं पूर्व मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग, एवं कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना एवं अनेक सत्ताधारी नेताओं को सैकड़ों पत्र भेजे। किन्तु आज दिनांक तक एक भी पत्र का प्रतिउत्तर किसी भी नेता के द्वारा नहीं दिया गया। इस षड्यंत्र के विरोध हेतु 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस को ध्वजारोहण के उपरांत शक्कर कारखाना प्रांगण में शांतिपूर्ण आमरण अनशन करने का निर्णय लिया गया। और यह अनशन तब तक जारी रहेगा। तब तक, सरकार शक्कर कारखाने को पुनर्जीवित किए जाने एवं परिसमापन से संबंधित समस्त कार्रवाईयों को रद्द करने के संबंध में आश्वासन से परे कोई ठोस लिखित निर्देश जारी नहीं करेगी।









