Questions on administrative accountability after the death of 8 devotees, when will action be taken against the responsible officers?
बैरिकेडिंग और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठे गंभीर सवाल, नागरिकों ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की
संवाददाता चंदा कुशवाहा
नलखेड़ा, आगर-मालवा। मां बगलामुखी मंदिर के समीप बरसाती नाले में कार बहने से 8 श्रद्धालुओं की मौत के बाद अब मामला प्रशासनिक जवाबदेही के सवाल पर आ गया है। हादसे में तीन बच्चों और दो महिलाओं समेत आठ लोगों की जान गई। घटना के बाद स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों में आक्रोश है तथा प्रशासनिक सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि तेज बारिश और जलप्रवाह की संभावित स्थिति के बावजूद श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए प्रभावी बैरिकेडिंग, मार्ग नियंत्रण और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती क्यों नहीं की गई?
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, हादसे से पहले संबंधित मार्ग पर लगी बैरिकेडिंग को हटाने के संबंध में जिला प्रशासन स्तर से निर्देश दिए जाने की बात सामने आ रही है। यदि ऐसा कोई निर्देश दिया गया था तो उसका आधार क्या था, किस स्तर से निर्देश जारी हुए और उसके बाद सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी किस अधिकारी की थी, यह जांच का विषय है।
नागरिकों की मांग है कि जांच में केवल हादसे के तत्काल कारणों तक मामला सीमित न रखा जाए, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी जिम्मेदारी निर्धारित की जाए। विशेष रूप से यह स्पष्ट किया जाए कि बारिश और तेज जलप्रवाह की स्थिति में मार्ग को बंद कराने, बैरिकेडिंग बनाए रखने तथा श्रद्धालुओं की आवाजाही नियंत्रित करने की जिम्मेदारी किन अधिकारियों की थी।
तहसीलदार सहित संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों एवं सामाजिक संगठनों ने घटना की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने तथा जांच में लापरवाही अथवा कर्तव्य में चूक प्रमाणित होने पर तहसीलदार सहित संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध निलंबन एवं नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
इसके साथ ही मृतकों के परिजनों को उचित आर्थिक सहायता, मंदिर परिसर एवं आसपास के मार्गों पर स्थायी सुरक्षा व्यवस्था, प्रभावी बैरिकेडिंग तथा बारिश के दौरान खतरनाक जलप्रवाह वाले मार्गों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही रोकने के लिए स्पष्ट सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करने की मांग भी उठाई गई है।
नागरिकों का कहना है कि आर्थिक सहायता अपनी जगह है, लेकिन आठ लोगों की जान जाने के बाद प्रशासनिक जवाबदेही तय होना भी आवश्यक है। यदि जांच में किसी अधिकारी की लापरवाही अथवा निर्णय के कारण सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होना प्रमाणित होता है, तो संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि हादसे के बाद राहत और बचाव की कार्रवाई तो हुई, लेकिन हादसा रोकने की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों की थी, उनकी जवाबदेही कब तय होगी?









