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गर्मी से मिलेगी राहत: मौसम विभाग ने हल्की बारिश और बिजली गिरने की जताई संभावना

रायपुर. अगर आप भी संडे को कहीं घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो यह खबर पूरी पढ़ लें. छत्तीसगढ़ के मौसम में बदलाव के आसार है. धूप की तेज तपिश से लोगों को राहत मिल सकती है. प्रदेश में रविवार को बादल छाने के आसार हैं. दक्षिणी और उत्तरी के कुछ इलाकों में हल्की बारिश और बिजली गिरने की संभावना जताई गई है. मौसम में बदलाव के कारण दिन आगामी दिनों के तापमान में भी गिरावट हो सकती है. मौसम विभाग ने बताया कि शनिवार को प्रदेश में मौसम शुष्क रहा. सबसे ज्यादा तापमान बिलासपुर में 39.6 डिग्री सेल्सियस और सबसे कम न्यूनतम तापमान में 14.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया.  रायपुर में आज कैसा रहेगा मौसम ? राजधानी में आज मौसम का मिजाज घूमने के लिए अनुकूल रहने वाला है. रविवार को अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया जा सकता है. मौसम वैज्ञानिक एचपी चंद्रा ने बताया कि एक द्रोणिका उत्तर पूर्व उत्तर प्रदेश के मध्य भाग से दक्षिण अंदरूनी उड़ीसा तक छत्तीसगढ़ होते हुए 0.9 किलोमीटर ऊंचाई तक विस्तारित है. एक पश्चिमी विक्षोभ द्रोणिका के रूप में मध्य क्षोभमंडल में 5.8 किलोमीटर ऊंचाई पर 60 डिग्री पूर्व और 32 डिग्री उत्तर में स्थित है. प्रदेश में आज एक दो स्थानों पर हल्की वर्षा और गरज चमक के साथ छींटे पड़ने की संभावना है. इसके अलावा प्रदेश में एक दो स्थानों पर गरज चमक के साथ अंधड़ चलने और वज्रपात होने की संभावना बनी हुई है. प्रदेश में अधिकतम तापमान में मामूली गिरावट संभावित है. मुख्य तौर पर दक्षिण छत्तीसगढ़ में वर्षा का क्षेत्र रहने की आसार है. उत्तर में सरगुजा संभाग के जिले संभावित हैं.

सड़क हादसों पर लगाम की तैयारी: CM सैनी का निर्देश, सड़क से 3 फीट दूरी पर लगेंगे बिजली के खंभे

चंडीगढ़. हरियाणा में आए दिन होने वाले सड़क हादसों को रोकने के लिए सरकार ने अब बिजली के बुनियादी ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी कर ली है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्पष्ट कर दिया है कि सड़कों के बिल्कुल साथ सटे बिजली के खंभे अब बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। चंडीगढ़ में हुई एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान सीएम ने निर्देश दिए कि नए खंभे लगाते समय सड़क के किनारे से कम से कम 3 फीट की दूरी सुनिश्चित की जाए। यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि वाहन चालकों को पर्याप्त जगह मिल सके और अनियंत्रित होने की स्थिति में गाड़ियां सीधे खंभों से न टकराएं। बैठक में मुख्यमंत्री ने केवल नए नियमों की बात नहीं की, बल्कि सड़कों के किनारे खड़े पुराने और खतरनाक खंभों को लेकर भी सख्त लहजे में बात की। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जो खंभे जर्जर हो चुके हैं या जिनका अब कोई उपयोग नहीं रह गया है, उन्हें तुरंत हटाया जाए। अक्सर देखा गया है कि सड़क चौड़ीकरण के बाद पुराने खंभे बीच रास्ते या बिल्कुल किनारे रह जाते हैं, जो रात के अंधेरे में जानलेवा साबित होते हैं। अब ऐसे सभी ‘ब्लैक स्पॉट्स’ को चिन्हित कर सफाई अभियान चलाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने एक अहम पहलू संसाधनों की बर्बादी को लेकर भी उठाया। उन्होंने निर्देश दिए कि हटाए गए खंभों का प्रॉपर स्टॉक रिकॉर्ड बनाया जाए। सीएम का विजन साफ है कि जो खंभे हटाए जा रहे हैं, अगर वे ठीक हालत में हैं तो उन्हें बेकार छोड़ने के बजाय किसी अन्य उपयोगी जगह पर लगाया जाए। लोक निर्माण मंत्री रणबीर सिंह गंगवा की मौजूदगी में सीएम ने विभागों के बीच आपसी तालमेल (Inter-departmental coordination) की कमी पर भी चुटकी ली और कहा कि जनहित की योजनाओं में देरी बर्दाश्त नहीं होगी। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि सरकार की नीतियों का असली मकसद आम आदमी का जीवन सरल बनाना है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि योजनाओं को केवल फाइलों तक सीमित न रखें, बल्कि पारदर्शिता और दक्षता के साथ जमीन पर उतारें। सड़कों को बाधा मुक्त बनाने का यह मिशन न केवल प्रदेश के विकास को गति देगा, बल्कि कीमती जानों को बचाने में भी मील का पत्थर साबित होगा।

गांव में पकड़ा गया चावल से लदा वाहन: सरकारी राशन की हेराफेरी की जांच शुरू

बलौदा बाजार. जिले के ग्राम रसेड़ी में संचालित उचित मूल्य की दुकान में राशन की गड़बड़ी का बड़ा मामला सामने आया है। ग्रामीणों के आरोप के बाद सरपंच की सूचना पर खाद्य विभाग ने कार्रवाई करते हुए चावल से भरे एक वाहन को जब्त कर लिया है। मामले की जांच की जा रही है। जानकारी के अनुसार ग्राम रसेड़ी में संचालित उचित मूल्य की दुकान के संचालक पर ग्रामीणों ने राशन में गड़बड़ी करने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि दुकान संचालक द्वारा हितग्राहियों को निर्धारित मात्रा से कम राशन दिया जा रहा था और बचा हुआ चावल इकट्ठा कर बेचा जा रहा था। ग्रामीणों को जब इस बात की जानकारी मिली कि दुकान के सामने एक वाहन में बड़ी मात्रा में चावल लोड किया जा रहा है, तब उन्होंने इसकी सूचना ग्राम सरपंच को दी। सूचना मिलते ही सरपंच मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों के साथ मिलकर वाहन को रोक दिया। वाहन की जांच करने पर उसमें 50 से अधिक बोरियों में चावल भरा हुआ पाया गया। इसके बाद सरपंच द्वारा इसकी सूचना तत्काल खाद्य विभाग को दी गई। मामले की सूचना मिलने पर खाद्य विभाग के खाद्य निरीक्षक मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की। सरपंच और ग्रामीणों के बयान दर्ज किए गए। प्राथमिक जांच के बाद चावल से भरे उक्त वाहन को जब्त करने की कार्रवाई की गई। ग्रामीणों का आरोप है कि दुकान संचालक द्वारा लोगों को कम राशन देकर बचा हुआ चावल इकट्ठा किया गया था और उसे वाहन के माध्यम से बाहर भेजा जा रहा था। ग्रामीणों ने इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं उचित मूल्य दुकान के संचालक झमकलाल साहू ने आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि वाहन में जो चावल लोड किया जा रहा था, वह उन्होंने राशन कार्डधारी उपभोक्ताओं से खरीदा था। इस संबंध में खाद्य निरीक्षक ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। जब्त किए गए चावल और वाहन से संबंधित पूरी जानकारी एकत्र कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी और इसे एसडीएम के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। सेल्समैन ने यह स्वीकार किया है कि एपीएल कार्डधारकों से चावल खरीदकर बिक्री करने ले जा रहा था। सेल्समैन का यह कृत्य शासकीय दृष्टि से उचित नहीं है। मामले की जांच कर उच्चाधिकारियों के निर्देश अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। बताया जा रहा है कि बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में अधिकांश सोसायटियों में इस तरह के काम हो रहे हैं और चावल की अफरातफरी हो रही है, वहीं बाहरी दुकानदार इन चावलों को खरीद रहे हैं। आपको बता दें कि शासन की योजना है कि कोई भी व्यक्ति भूखा न सोए, पर यहां इसका गलत उपयोग हो रहा है। देखना होगा कि शासन अब आगे क्या कार्रवाई करता है।

परंपरा से पोषण तक: आदि परब में जशप्योर स्टॉल को सराहना, महुआ बना सुपरफूड

रायपुर. आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (TRTI), नवा रायपुर द्वारा 13–14 मार्च 2026 को आयोजित आदि परब–2026 कार्यक्रम “From Tradition to Identity” थीम के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। भारत सरकार के सहयोग से आयोजित इस दो दिवसीय कार्यक्रम में जनजातीय संस्कृति, पारंपरिक ज्ञान, हस्तशिल्प और वन आधारित उत्पादों को प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए प्रतिभागियों, शोधकर्ताओं, अधिकारियों तथा बड़ी संख्या में आगंतुकों ने भाग लिया। इस आयोजन में जशपुर जिले के ब्रांड जशप्योर  द्वारा भी स्टॉल लगाया गया, जिसे आगंतुकों, अधिकारियों और विशेषज्ञों से व्यापक सराहना प्राप्त हुई। स्टॉल पर प्रदर्शित उत्पादों की उच्च गुणवत्ता, पारंपरिक प्रसंस्करण पद्धति और प्रीमियम पैकेजिंग को लेकर लोगों ने विशेष रुचि दिखाई। स्टॉल का मुख्य आकर्षण महुआ आधारित उत्पाद रहे। बड़ी संख्या में आगंतुकों ने महुआ के पारंपरिक उपयोगों के साथ-साथ उसे पोषण से भरपूर एक प्राकृतिक सुपरफूड के रूप में प्रस्तुत करने की पहल की सराहना की। जय जंगल  द्वारा महुआ को केवल पारंपरिक मद्य से जोड़कर देखने की धारणा से बाहर निकालते हुए उसे स्वास्थ्य, पोषण और पारंपरिक खाद्य प्रणाली के रूप में स्थापित करने का प्रयास लोगों को विशेष रूप से आकर्षित करता दिखाई दिया। जशप्योर, जशपुर जिले से शुरू हुई एक पहल है, जिसका उद्देश्य जंगल और जनजातीय समुदायों से जुड़े पारंपरिक खाद्य संसाधनों को सम्मानपूर्वक मुख्यधारा तक पहुँचाना है। यह पहल प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की  दूरदर्शी सोच से प्रेरित है जिसमें महुआ को केवल शराब तक सीमित न रखकर उसे पोषण, स्वास्थ्य और जनजातीय आजीविका के महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया है। आदि परब–2026 में जशप्योर का प्रतिनिधित्व अनिश्वरी भगत एवं प्रभा साय द्वारा किया गया, जिन्होंने आगंतुकों को उत्पादों की विशेषताओं, पारंपरिक प्रसंस्करण विधियों तथा महुआ के पोषण महत्व के बारे में जानकारी दी। स्टॉल पर बड़ी संख्या में लोगों ने उत्पादों के बारे में विस्तार से जानकारी ली और जशपुर से जुड़ी इस पहल की सराहना की। जशप्योर के माध्यम से महुआ, मिलेट्स और पारंपरिक रूप से संसाधित चावल जैसे उत्पादों को आधुनिक उपभोक्ताओं तक पहुँचाने का प्रयास किया जा रहा है, जिसमें जनजातीय महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह पहल न केवल पारंपरिक खाद्य प्रणालियों को पुनर्जीवित करने का प्रयास है बल्कि स्थानीय समुदायों की आजीविका को भी सशक्त बना रही है।

निरीक्षण में खुली पोल: सड़क निर्माण की खराब गुणवत्ता पर विधायक रायमुनी भगत नाराज, अधिकारियों को चेतावनी

जशपुर. छत्तीसगढ़ के जशपुर में बनी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) की सड़क की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़ा हो गया है। सड़क का निरीक्षण करने पहुंचीं विधायक रायमुनी भगत निर्माण कार्य की गुणवत्ता देखकर भड़क गईं और संबंधित अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। विधायक रायमुनी ने सड़क की खराब हालत देखकर मौके से ही ईई संतोष नाग को वीडियो कॉल किया और सड़क की स्थिति दिखाई। उन्होंने कहा कि डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से बनी सड़क कुछ ही महीनों में खराब होना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। विधायक ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि खराब बनी सड़क को उखाड़कर दोबारा बनाया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कल तक काम शुरू नहीं किया गया तो इस पूरे मामले को विधानसभा में उठाया जाएगा। बताया जा रहा है कि यह सड़क बगीचा नगर के वार्ड क्रमांक 4 से वार्ड क्रमांक 5 तक बनाई गई है। करीब डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से बनी यह सड़क कुछ माह पहले ही तैयार हुई थी, लेकिन अब इसकी गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। विधायक के सख्त रुख के बाद संबंधित विभाग में हड़कंप मच गया है और अब सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर जांच की भी संभावना जताई जा रही है।

रायपुर में न्याय की तेज रफ्तार: पहली नेशनल लोक अदालत में लंबित मामलों का होगा समाधान

रायपुर. रायपुर के जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में शनिवार को वर्ष 2026 की पहली नेशनल लोक अदालत लगी. इस अदालत में लंबित मामलों के त्वरित निराकरण के उद्देश्य से बड़ी संख्या में लोग अपने विवादों के समाधान के लिए पहुंचे. आपराधिक, चेक बाउंस, पारिवारिक, बैंक रिकवरी, विद्युत, राजस्व और यातायात जैसे राजीनामा योग्य लंबित प्रकरणों का आपसी सहमति से त्वरित निस्तारण किया गया. 159 प्रकरण मामलों पर आपसी राजीनामा के लिए सुनवाई की गई, जिसमें से कुल 57 प्रकरणों का निराकरण हआ. इन मामलों में कुल 2 करोड़ 46 लाख रुपए से अधिक का भुगतान किया गया. प्रधान जिला एवं सत्र न्यायधीश बलराम प्रसाद वर्मा ने जानकारी दी कि राजीनामा से संबंधित मामले यहां रखे हुए थे. 12 लाख के करीब राजस्व के मामले हैं. नगर पालिका के करीब 2.5 लाख मामले हैं. कोर्ट के करीब 24 हजार से ज्यादा केस पेंडिंग है. यातायात से जुड़े मामले में सेटलमेंट के लिए है. उन्होने कहा कि 90 दिनों के अंदर, जिन्होंने चलान नहीं पटाया है. उन मामलों को भी नेशनल लोक अदालत में रखा गया है. इन सभी मामलों का आज निराकरण हो रहा है. ट्रैफिक से जुड़े मामले में मिनिमम दर के हिसाब चलान कर रहे हैं. मोहल्ला अदालत का आयोजन बलराम प्रसाद वर्मा ने कहा कि मोहल्ला अदालत का आयोजन भी किया गया है. इसमें अधिकारी मोहल्ले में बैठे हुए हैं. जिनकी बिजली, सड़क और पानी की जुड़ी समस्या है. वह अपनी समस्या बता सकतें है. तत्काल उनकी समस्या का निराकरण हो रहा है. क्या है लोक अदालत के लाभ ? आपको बता दें कि लोक अदालत में विभिन्न मामलों के निपटारे से जल्द न्याय मिलता हैं. लोक अदालत में निपटारा प्रकारणों में दोनों पक्षों की जीत होती है. आपसी राजीनामा के कारण मामलों की अपील नहीं होती. दीवानी प्रकरणों के परिणाम तुरंत मिलता है. दावा प्रकरणों में बीमा कंपनी राजीनामा मामलों में तुरंत एवार्ड राशि जमा करती है. लोक अदालत में राजीनामा करने से बार-बार अदालतों में आने से रुपयों, समय की बर्बादी और अकारण परेशानी से बचा जा सकता है. लोक अदालत में राजीनामा करने से दीवानी प्रकरणों में कोर्ट फीस पक्षकारों को वापस मिल जाती है, किसी पक्ष को सजा नहीं होती. मामले को बातचीत कर हल कर लिया जाता है. सभी को आसानी से न्याय मिल जाता है. फैसला अन्तिम होता है. फैसला के विरूद्ध कहीं अपील नहीं होती है.

नशे के खिलाफ निर्णायक जंग: साय सरकार ने SOG और एंटी नारकोटिक्स सेल का किया गठन

रायपुर. छत्तीसगढ़, अपनी समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा, प्राकृतिक संसाधनों और शांत सामाजिक जीवन के लिए जाना जाता रहा है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में देश के अन्य हिस्सों की तरह यहाँ भी अवैध मादक पदार्थों की तस्करी और नशे की बढ़ती प्रवृत्ति ने चिंतनीय स्थिति पैदा की है। नशीले पदार्थ केवल कानून-व्यवस्था की दृष्टि से ही समस्या नहीं हैं बल्कि यह समाज, परिवार और युवाओं के भविष्य के लिए भी गंभीर चुनौती है। इसका सामना करने के लिए छत्तीसगढ़ की सरकार ने कुछ निर्णायक कदम उठाए हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने मादक पदार्थों की तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए विशेष अभियान समूह (एसओजी) और एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के गठन का फ़ैसला किया है। राज्य सरकार पुलिस व्यवस्था को मजबूत करने से साथ ही साथ प्रदेश को नशामुक्त बनाने की व्यापक रणनीति तैयार की है। साय सरकार का स्पष्ट संदेश है कि छत्तीसगढ़ में नशे के व्यापार के लिए कोई जगह नहीं है और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों पर अब क़ानून का शिकंजा कसा जाएगा। नशे की समस्या बन रही समाज के लिए गंभीर चुनौती दुनिया के कई देशों की तरह भारत भी आज नशे की समस्या से जूझ रहा है। तरह-तरह के मादक पदार्थों जैसे गांजा, चरस, हेरोइन, ब्राउन शुगर, अफीम, डोडा और सिंथेटिक ड्रग्स समाज के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ में बहुत से क्षेत्रों में नशीले पदार्थों की तस्करी का नेटवर्क सक्रिय हो रहा है। विधानसभा में उठाए गए प्रश्नों और विभिन्न सर्वेक्षणों के आधार पर कहा जा सकता है कि राज्य में नशे के सेवन करने वालों की संख्या चिंताजनक हो सकती है। राष्ट्रीय स्तर पर किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार छत्तीसगढ़ में लगभग 1.5 से 2 लाख लोग अफीम और इंजेक्टेबल ड्रग्स का सेवन कर रहे हैं। 3.8 से 4 लाख लोग गांजा का उपयोग कर रहे हैं। 10 से 17 वर्ष आयु वर्ग के 40,000 से अधिक किशोर इनहेलेंट और कफ सिरप जैसी नशीली चीजों के आदी हो रहे हैं। यह आंकड़े उस सामाजिक चुनौती का संकेत हैं जिसका सामना समाज और सरकार दोनों को मिलकर करना होगा। नशा व्यक्ति के स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाने के अलावा अपराध, हिंसा, मानसिक तनाव और सामाजिक अस्थिरता भी बढ़ाने वाला होता है। नशे के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं होती बल्कि यह समाज की सामूहिक जिम्मेदारी भी है। सरकार की सक्रियता और कड़े अभियान आंकड़ों में दिखाई दे रहा छत्तीसगढ़ सरकार का दावा है कि राज्य में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ लगातार और प्रभावी कार्रवाई की जारी है। इसका नतीजा हाल के वर्षों में हुई गिरफ्तारियों और जब्तियों के आंकड़ों में स्पष्ट दिखाई दे रहा है। पिछले 13 महीनों में 1,434 मामले दर्ज किए गए, 2,599 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, 20,089 किलोग्राम गांजा जब्त किया गया और 3,00,408 नशीली गोलियां और कैप्सूल बरामद किए गए राज्य सरकार की यह कार्रवाई यह दर्शाती है कि पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय रूप से नशे के नेटवर्क को तोड़ने में सलगन हैं। साल 2025 में मादक पदार्थों के खिलाफ अभियान में और भी तेज़ी लाई गई। इस साल 1,288 मामले दर्ज हुए और 2,342 आरोपी गिरफ्तार किए गए। अभियान में जब्त किए गए पदार्थों में शामिल थे 16,999.7 किलोग्राम गांजा,141 ग्राम ब्राउन शुगर,1,259 ग्राम अफीम, 2.039 किलोग्राम हेरोइन, 27.68 ग्राम चरस, 23.56 ग्राम कोकीन, 70.46 ग्राम एमडीएमए, 1,524 किलोग्राम डोडा, और 2,41,138 नशीली दवाएं यह आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि राज्य सरकार नशे के खिलाफ व्यापक, सख़्त और संगठित कार्रवाई कर रही है। 2026 की शुरुआत में भी जारी अभियान साल 2026 की शुरुआत में भी यह अभियान जारी है। 31 जनवरी 2026 तक नशे के ख़िलाफ़ 146 मामले दर्ज हुए जिसमें 257 आरोपी गिरफ्तार किए गए और बरामदगी की सूची इस प्रकार से है 3,090 किलोग्राम गांजा, 8.85 ग्राम ब्राउन शुगर, 277.2 ग्राम अफीम, 123.8 ग्राम हेरोइन, 15.29 किलोग्राम डोडा और 59,270 नशीली दवाएं इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि सरकार के द्वारा नशे के खिलाफ की जाने वाली कार्रवाई कितनी सख़्त है। एसओजी और एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स साबित हो रहा है एक रणनीतिक कदम छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने अब मादक पदार्थों की तस्करी और संगठित अपराधों से निपटने के लिए नई संस्थागत व्यवस्था बनाने का फ़ैसला किया है।प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में दो महत्वपूर्ण कदम उठाए गए जिसमें पहला है विशेष अभियान समूह (SOG) एसओजी का गठन पुलिस मुख्यालय के अंतर्गत किया गया इसका उद्देश्य है आतंकवादी खतरों से निपटना और संगठित अपराधों पर कार्रवाई करना अचानक उत्पन्न होने वाली सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए यह समूह आधुनिक तकनीक और विशेष प्रशिक्षण से लैस होगा। दूसरा कदम है एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स, नशे के खिलाफ कठोर कार्रवाई के लिए 10 जिलों में एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स बनाई जा रही है। इसके लिए 100 नए पदों के लिए मंजूरी दे दी गई है।इस फ़ोर्स से खुफिया जानकारी जुटाने में तेजी आएगी, तस्करी के नेटवर्क को जल्दी पकड़ा जा सकेगा और राज्यों के बीच समन्वय बढ़ेगा। राज्य सरकार का यह कदम दर्शाता है कि सरकार समस्या की गंभीरता को समझते हुए दीर्घकालिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ रही है। एनडीपीएस अधिनियम से किया जा रहा है आर्थिक नेटवर्क पर भी प्रहार नशे का कारोबार केवल ड्रग्स की बिक्री तक सीमित नहीं होता। इसके पीछे कई बड़े आर्थिक नेटवर्क भी काम करते हैं जिसको ध्यान में रखते हुए सरकार ने एनडीपीएस अधिनियम के तहत वित्तीय जांच को भी प्राथमिकता देने का काम किया है। इसके तहत 2025 में 16 आरोपियों की 13.29 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त या फ्रीज की गई इसके अलावा 145 आदतन अपराधियों के खिलाफ PIT-NDPS कानून के तहत कार्रवाई की गई। छत्तीसगढ़ के साय सरकार की यह रणनीति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जब तक अपराधियों के आर्थिक स्रोतों को खत्म नहीं किया जाएगा तब तक नशे के कारोबार को पूरी तरह खत्म करना मुश्किल है। ड्रग उपयोग के उपकरणों पर भी हो रही कार्रवाई छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने यह भी समझा है कि नशे के नेटवर्क को खत्म करने के लिए ड्रग्स के अलावा उससे जुड़े उपकरणों पर भी नियंत्रण जरूरी है। यही वजह है कि … Read more

रायगढ़ में पुलिस महकमे में हलचल: SSP ने 219 जवानों का किया तबादला, एक दर्जन ASI भी प्रभावित

रायगढ़. पुलिस विभाग में बड़े पैमाने पर फेरबदल किया गया है। एसएसपी शशि मोहन सिंह ने लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ पुलिसकर्मियों को हटाते हुए जंबो ट्रांसफर आदेश जारी किया है। इस आदेश में एक एसआई, करीब एक दर्जन एएसआई सहित कुल 219 पुलिसकर्मियों को अलग-अलग थानों और इकाइयों में नई जिम्मेदारी दी गई है। प्रशासनिक व्यवस्था होगी मजबूर एसएसपी शशि मोहन सिंह ने बताया कि प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने और जिले में लॉ एंड ऑर्डर को और बेहतर बनाने के उद्देश्य से यह तबादला सूची जारी की गई है। इसके तहत कई पुलिसकर्मियों को नई जगहों पर पदस्थ किया गया है। विभिन्न विभागों में प्रशासनिक कसावट और कार्यों में तेजी लाने के उद्देश्य से बड़े पैमाने पर स्थानांतरण किए जा रहे हैं। इसी क्रम में बिलासपुर जिले में एक बार फिर पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल किया गया है। पुलिस विभाग में प्रशासनिक कसावट लाने और लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ पुलिसकर्मियों को बदलने के उद्देश्य से तबादले किए गए हैं। इस संबंध में एसएसपी रजनेश सिंह ने आदेश जारी किया है। 130 पुलिसकर्मियों का स्थानांतरण जारी आदेश के अनुसार, जिले में कुल 130 पुलिसकर्मियों का स्थानांतरण किया गया है। इनमें 3 उप निरीक्षक (SI), 10 सहायक उप निरीक्षक (ASI), 23 प्रधान आरक्षक और 94 आरक्षक शामिल हैं। पुलिस प्रशासन का कहना है कि इस फेरबदल का उद्देश्य कार्यप्रणाली को और बेहतर बनाना तथा व्यवस्था में कसावट लाना है।

अफीम कांड के बाद सख्ती: बलरामपुर में लंबे समय से तैनात 58 पटवारियों का तबादला, प्रशासन हरकत में

बलरामपुर. जिले में हाल ही में सामने आए अवैध अफीम की खेती के मामलों के बाद जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए राजस्व विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। कलेक्टर राजेंद्र कुमार कटारा ने एक साथ 58 पटवारियों के तबादले का आदेश जारी किया है। इस निर्णय के तहत कई तहसीलों में वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ पटवारियों को हटाकर अन्य स्थानों पर भेजा गया है। जारी आदेश के अनुसार राजपुर, रामानुजगंज, कुसमी, वाड्रफनगर, शंकरगढ़, रघुनाथनगर और बलरामपुर सहित कई तहसीलों के पटवारियों का एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरण किया गया है। प्रशासन का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य राजस्व व्यवस्था में कसावट लाना, कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना और लंबे समय से एक ही जगह पदस्थ कर्मचारियों के कारण बन रही प्रशासनिक ढिलाई को दूर करने के उद्देश्य से उठाया गया है। सूत्रों के अनुसार हाल के दिनों में जिले के विभिन्न इलाकों में अवैध अफीम की खेती के मामले सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर सवाल उठ रहे थे। इसके बाद जिला प्रशासन ने राजस्व तंत्र में सख्ती दिखाते हुए यह बड़ा फैसला लिया है। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में पटवारियों के तबादले को प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सभी स्थानांतरित पटवारियों को 13 मार्च 2026 से तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त किया जाएगा। साथ ही सभी संबंधित पटवारियों को 16 मार्च 2026 तक अपने नए पदस्थापना स्थल पर अनिवार्य रूप से उपस्थित होकर कार्यभार ग्रहण करना होगा। जिला प्रशासन ने यह भी संकेत दिया है कि आदेश का पालन नहीं करने या निर्धारित समय में नई पदस्थापना स्थल पर जॉइन नहीं करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। प्रशासनिक हलकों में इस फैसले को राजस्व व्यवस्था को मजबूत करने और लापरवाही पर अंकुश लगाने की दिशा में बड़ी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में प्रशासन राजस्व विभाग में और भी सख्ती बरत सकता है।

सिंधी समाज की एकजुटता पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने की सराहना

सिंधी समाज की एकजुटता सराहनीय : मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय मुख्यमंत्री पूज्य छत्तीसगढ़ी सिंधी पंचायत द्वारा आयोजित “सिंधीयत जो मेलो” में हुए शामिल रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय राजधानी रायपुर में पूज्य छत्तीसगढ़ी सिंधी पंचायत द्वारा आयोजित “सिंधीयत जो मेलो” में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने सिंधी समाज की एकजुटता और उनकी संघर्षशील परंपरा की सराहना करते हुए कहा कि सिंधी समाज ने देश के इतिहास के सबसे कठिन दौर—विभाजन की विभीषिका—का सामना किया है। इसके बावजूद इस समाज ने व्यापार और उद्यम के क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर देश की आर्थिक उन्नति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि विभाजन के समय सिंधी समाज के अनेक परिवारों को अपनी पुश्तैनी संपत्ति और घर-बार छोड़ना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अपने आराध्य के प्रति अटूट आस्था और परिश्रम के बल पर उन्होंने नई शुरुआत की और आज सिंधी समाज विकास के नए-नए सोपान रच रहा है। उन्होंने कहा कि सिंधी समाज का यह जुझारूपन और आत्मविश्वास पूरे समाज के लिए प्रेरणास्पद है और इसके लिए समाज के सभी सदस्य प्रशंसा के पात्र हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों से समाज को एकजुट होने का अवसर मिलता है। जब समाज संगठित और मजबूत होता है तो राष्ट्र भी सशक्त बनता है। उन्होंने कहा कि सिंधी समाज की एकजुटता वास्तव में सराहनीय है और इस प्रकार के मेलों का सबसे बड़ा उद्देश्य यही होता है कि नई पीढ़ी अपनी जड़ों, संस्कृति और परंपराओं से जुड़ी रहे। इस मेले में युवाओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हुई। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आज सिंधी समाज के लोग देश के कोने-कोने में बसे हुए हैं और अपनी मेहनत, लगन तथा उद्यमशीलता के बल पर सफलता के नए आयाम स्थापित कर रहे हैं। उन्होंने छोटे-छोटे व्यवसाय से शुरुआत कर अपने कार्य को ऊंचाइयों तक पहुंचाया है, जो उनके परिश्रम और दूरदर्शिता का परिचायक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार  प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की गारंटी के तहत प्रदेश सरकार ने  अधिकांश गारंटियों को पूरा कर लिया है। मुख्यमंत्री  साय ने इस अवसर पर प्रदेश में आज से प्रारंभ की गई गौधाम योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके अंतर्गत पूरे प्रदेश में  गौधाम स्थापित किए गए हैं। इन गौधामों के माध्यम से गौवंश के संरक्षण और संवर्धन के लिए समुचित व्यवस्था की जाएगी। यहां पशुओं के लिए हरे चारे की व्यवस्था, चिकित्सा सुविधा, काऊ कैचर, दवाइयाँ तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति में गाय को माता का दर्जा दिया गया है और हम उनका पूजन करते हैं। गाय से प्राप्त पंचगव्य को अमृत के समान माना गया है, जो हमारे धार्मिक और सामाजिक जीवन में विशेष महत्व रखता है। मुख्यमंत्री  साय ने इस अवसर पर सभी प्रदेशवासियों को चेट्रीचंड्र पर्व की अग्रिम शुभकामनाएँ भी दीं। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने समाज द्वारा लगाए गए प्रदर्शनी स्टॉलों का अवलोकन किया और उनकी सराहना की। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री  केदार कश्यप ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि सिंधी समाज अत्यंत मेहनतकश समाज है। उन्होंने समाज द्वारा आयोजित प्रदर्शनी की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज की सांस्कृतिक समृद्धि को प्रदर्शित करने का सशक्त माध्यम हैं।  इस अवसर पर रायपुर ग्रामीण विधायक  मोती लाल साहू, धमतरी महापौर  रामू रोहरा, पूज्य छत्तीसगढ़ी सिंधी पंचायत के अध्यक्ष  महेश दरयानी सहित सिंधी समाज के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित  थे।

एमसीबी जिला: 60 ग्राम पंचायतों ने बाल विवाह मुक्त बनाने में प्राप्त की महत्वपूर्ण उपलब्धि

बाल विवाह मुक्त बनने की राह पर एमसीबी जिला, 60 ग्राम पंचायतों की उल्लेखनीय उपलब्धि एमसीबी जिले में बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के तहत बड़ी उपलब्धि सामने आई है। संचालनालय महिला एवं बाल विकास विभाग रायपुर के पत्र क्रमांक 33/10568/मवादि/मि.वा./सारा/2025-26 दिनांक 09 सितम्बर 2025 के निर्देशानुसार ऐसे ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकायों को बाल विवाह मुक्त घोषित किया जाना है, जहां विगत दो वर्षों में बाल विवाह का कोई भी प्रकरण दर्ज नहीं हुआ हो। इसी के तहत जिले के विभिन्न विकास खंडों से प्रस्ताव प्राप्त हुए और नियमानुसार जांच के बाद संबंधित दस्तावेज महिला एवं बाल विकास विभाग को प्राप्त हुए। इसके पश्चात 06 मार्च 2026 को दावा-आपत्ति के लिए पत्र जारी किया गया था, लेकिन निर्धारित तिथि तक महिला एवं बाल विकास विभाग जिला एमसीबी कार्यालय में कोई भी दावा या आपत्ति प्राप्त नहीं हुई। हालांकि चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के माध्यम से कुछ ग्राम पंचायतों में बाल विवाह की सूचना प्राप्त होने पर ब्लॉक खड़गवां के ग्राम पंचायत आमालाड, मुकुन्दपुर और दुग्गी, ब्लॉक भरतपुर के ग्राम पंचायत सेमरिया तथा ब्लॉक मनेन्द्रगढ़ के ग्राम पंचायत डंगौरा और चिमटीमार को सूची से विलोपित कर दिया गया है। कलेक्टर की अनुशंसा के आधार पर चयनित ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों को तीन चरणों में बाल विवाह मुक्त होने का प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा तथा आगे की प्रक्रिया के तहत जिले के अन्य पंचायतों और नगरीय निकायों को भी प्रमाण पत्र प्रदान कराया जाएगा।  बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के अंतर्गत विकासखण्ड मनेन्द्रगढ़ की ग्राम पंचायत चौघड़ा, तेन्दूडांड, बंजी, बिहरापुर, भलौर, हस्तिनापुर, पिपरिया, चिरईपानी, चैनपुर, कठौतिया, छिपछिपी, सेमरा, बुन्देली, सिरौली, भौता, शंकरगढ़, बॉही, बिरौरीडांड, गरूणडोल, बुलाकीटोला, घाघरा, उजियारपुर, बौरीडांड, महाई, बेलबहरा, डुगला, रोझी, चनवारीडांड, मनवारी, डोडकी, केल्हारी, रोकड़ा, ताराबहरा, केराबहरा, परसगढ़ी, डिहुली और कछौड शामिल हैं। इसके साथ ही विकासखण्ड भरतपुर की ग्राम पंचायत बरहोरी, चांटी, ओहनिया, नेरूआ, बड़गांव कला, केसौड़ा, डोमहरा और कुदरा तथा विकासखण्ड खड़गवां की ग्राम पंचायत बोडेमुडा, छोटेकलुआ, पेण्ड्री, बरदर, गिद्धमुड़ी, अखराडांड, जड़हरी, मंगोरा और बेलकामार ग्राम पंचायत भी इस सूची में शामिल हैं। जिले में चलाए जा रहे जागरूकता अभियान, महिला एवं बाल विकास विभाग, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, पंचायत प्रतिनिधियों और आमजन की सक्रिय भागीदारी के कारण बाल विवाह रोकने की दिशा में यह महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है, जो समाज में जागरूकता और बेटियों के सुरक्षित भविष्य की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है।

बस्तर में शांति और खुशहाली की दिशा में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सफलता

बस्तर क्षेत्र में खुशहाली और शांति बहाल करने में हो रहे हैं कामयाब: मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ‘आदि परब’ जनजातीय संस्कृति, कला और परंपराओं को साझा मंच प्रदान करने का बेहतर आयोजन ‘आदि परब’ चित्रकला और परिधान को मिला ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड’ पुरस्कार मुख्यमंत्री ने 43 जनजातियों के पारंपरिक परिधान में सजे अटायर शो का लिया आनंद जनजातीय विद्यार्थियों के उच्च शिक्षा और शोधार्थियों के लिए 100 सीटर छात्रावास का लोकार्पण हर्षोल्लास के साथ ‘आदि परब’ का हुआ समापन रायपुर  हमारी सरकार जनजातीय समाज के भविष्य को संवारने के लिए दृढ़ संकल्प के साथ कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह के दृढ़ संकल्प से अब हम बस्तर क्षेत्र में खुशहाली और शांति बहाल करने में कामयाब हो रहे हैं। बस्तर पिछले लगभग 40 वर्षों से विकास से अछूता रहा और लंबे समय तक नक्सल प्रभाव से प्रभावित था, लेकिन अब परिस्थितियाँ तेजी से बदल रही हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश जल्द ही नक्सलवाद से मुक्त होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिससे जनजातीय समाज में अमन-चैन के साथ-साथ खुशहाली और समृद्धि का नया दौर आएगा।मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने नवा रायपुर स्थित आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (TRTI) परिसर में आयोजित दो दिवसीय ‘आदि परब’ के समापन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।  मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि ‘आदि परब’ की थीम ‘परंपरा से पहचान तक’ रखी गई है। यह आयोजन छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, कला और परंपराओं को साझा मंच देने के उद्देश्य से आयोजित किया गया, जिसमें छत्तीसगढ़ सहित तेलंगाना, ओडिशा, महाराष्ट्र और झारखंड के आदिवासी लोक कलाकारों ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की 43 विभिन्न जनजातियों के लोग एक मंच पर एकत्रित हुए, जो हमारी सांस्कृतिक विविधता और समृद्धि का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने इस सफल आयोजन के लिए विभाग की पूरी टीम को बधाई दी तथा ‘आदि परब’ चित्रकला और परिधान को मिले ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ पुरस्कार के लिए भी शुभकामनाएँ दीं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जनजातीय समाज के युवाओं को उच्च शिक्षा और शोध के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से टीआरटीआई परिसर में 5 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 100 सीटर छात्रावास का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय बाहुल्य प्रदेश छत्तीसगढ़ में इस प्रकार के आयोजन का विशेष महत्व है, क्योंकि यह हमारी समृद्ध जनजातीय संस्कृति और परंपराओं की व्यापकता को प्रदर्शित करता है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन में पारंपरिक चित्रकला, शिल्प, हाट-बाजार और पारंपरिक व्यंजनों का अद्भुत संगम देखने को मिला। हमारी लोक परंपराएँ ही हमारी असली पहचान हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां स्थित दो संग्रहालयों में से एक शहीद वीर नारायण सिंह जी की जीवनगाथा को समर्पित है। उन्होंने कहा कि 1 नवंबर 2025 को छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की रजत जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने देश के पहले डिजिटल ‘शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह-जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय’ का लोकार्पण किया था, जो हम सभी के लिए गर्व की बात है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दूसरे जनजातीय संग्रहालय में जन्म, विवाह और मृत्यु संस्कारों सहित जनजातीय जीवन के विभिन्न अवसरों पर पहने जाने वाले पारंपरिक परिधानों और रीति-रिवाजों का जीवंत चित्रण प्रस्तुत किया गया है। आधुनिकता की दौड़ में हमें अपनी विलुप्त होती सांस्कृतिक विरासत को सहेजना होगा। उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि आज देश में प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी जैसे नेतृत्व के कारण आदिवासी समाज का कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि देश के सर्वोच्च पद राष्ट्रपति के लिए आदिवासी समाज की बेटी मती द्रौपदी मुर्मु को अवसर मिला, जो पूरे जनजातीय समाज के लिए गौरव का विषय है। मुख्यमंत्री ने कहा कि धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के माध्यम से छत्तीसगढ़ में चिन्हित 6 हजार 691 बसाहटों का कायाकल्प किया जा रहा है। अति पिछड़ी जनजातियों को मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।उन्होंने कहा कि पीएम जनमन योजना के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजातियों को सड़क, आवास और अन्य मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस योजना के तहत प्रदेश की 2300 से अधिक पीवीटीजी बसाहटों के 56 हजार से अधिक परिवार लाभान्वित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि नियद नेल्लानार योजना (आपका अच्छा गांव) हमारी सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके माध्यम से नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र के जनजातीय गांवों तक सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएँ पहुंचाई जा रही हैं। साथ ही इन क्षेत्रों के लोगों को अब सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल रहा है। इस अवसर पर आदिम जाति विकास मंत्री  रामविचार नेताम ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद जनजातीय समाज के गौरव के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए गए हैं। इनमें शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय और जनजातीय संस्कृति एवं परंपराओं पर आधारित संग्रहालय प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि यह देश का ऐसा डिजिटल संग्रहालय है जिसका अध्ययन करने देश और विदेश से लोग आ रहे हैं। संग्रहालय में अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष करने वाले जनजातीय नायकों और आंदोलनों की जीवंत प्रस्तुति की गई है, जो समाज के गौरव को बढ़ाती है। उन्होंने बताया कि सरकार 3357 आश्रम-छात्रावास, 17 प्रयास विद्यालय और 75 एकलव्य विद्यालयों के माध्यम से जनजातीय वर्ग के भविष्य को संवारने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की सरकार ने एफआरए के तहत 4 लाख 25 हजार 425 हितग्राहियों को 3.49 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में पट्टा प्रदान किया है। इस अवसर पर वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप ने ‘परंपरा से पहचान तक’ की थीम पर आयोजित ‘आदि परब’ के लिए बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि हमने नक्सलवाद की पीड़ा को नजदीक से देखा है और अब डबल इंजन की सरकार के दृढ़ संकल्प से नक्सलवाद समाप्ति की ओर बढ़ रहा है।उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद से मुक्त कराने में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने ‘आदि परब’ के माध्यम से जनजातीय संस्कृति और परंपराओं को दुनिया तक पहुंचाने के इस प्रयास की सराहना की। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने यूपीएससी … Read more

3 करोड़ 40 लाख रुपए से बनाने वाले सब्जी बाजार का हुआ भूमिपूजन

रायपुर राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने 32 लाख रुपए से बने हाट बाजार का का किया लोकार्पण प्रदेश के राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने शनिवार को नगर पालिका बलौदाबाजार के वार्ड क्रमांक 13 में नव-निर्मित हाट बाजार का लोकार्पण तथा वार्ड क्रमांक 10 में बनने वाले सब्जी बाजार का भूमिपूजन किया। हाट बाजार में लगभग 32 पक्के छत वाले चबूतरे 32 लाख रुपए की लागत से बनाए गए हैं। वहीं आधुनिक सुविधाओं से युक्त सब्जी बाजार का निर्माण करीब 3 करोड़ 40 लाख रुपए की लागत से किया जाएगा।         कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि आज बलौदाबाजार शहर के विकास में एक नई कड़ी जुड़ गई है। उन्होंने कहा कि अब शहर में बदलाव साफ दिखाई देने लगा है और आने वाले दो वर्षों में शहर का कायाकल्प होकर यह और अधिक सुंदर व व्यवस्थित बनेगा।        उन्होंने कहा कि केवल शासकीय योजनाओं और निर्माण कार्यों से ही शहर सुंदर नहीं बनता, बल्कि इसके लिए नागरिकों की जागरूकता भी आवश्यक है। नगरवासियों को शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने की जिम्मेदारी स्वयं लेनी होगी। उन्होंने अपील की कि कचरा इधर-उधर न फेंककर कूड़ेदान या डस्टबिन में डालने की आदत विकसित करनी चाहिए और सभी को इसके लिए संकल्प लेना होगा।        इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष अशोक जैन, पूर्व विधायक लक्ष्मी बघेल, भारत स्काउट गाइड के राज्य उपाध्यक्ष विजय केशरवानी, नगर पालिका उपाध्यक्ष जीतेन्द्र महले सहित पार्षदगण और बड़ी संख्या में नगरवासी उपस्थित रहे।

वन आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने पर फोकस: वन मंत्री कश्यप का अधिकारियों को निर्देश

रायपुर “विजन 2030” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित वन मंत्री  केदार कश्यप ने आज छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम लिमिटेड द्वारा “विजन 2030 दृ छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के लिए उच्च विकास व्यवसाय मॉडल का निर्माण” विषय पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ किया। इस एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन अरण्य भवन सभागार, नया रायपुर में किया गया।  कार्यक्रम के दौरान अपने उद्बोधन में वन मंत्री  कश्यप ने निगम के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम राज्य की वन आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में वन संसाधनों का वैज्ञानिक और सतत प्रबंधन, वनोपज का मूल्य संवर्धन तथा उद्योगों के साथ बेहतर समन्वय के माध्यम से निगम की गतिविधियों का विस्तार किया जाना आवश्यक है। वन मंत्री  कश्यप ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं समय की आवश्यकता हैं। इनके माध्यम से विभिन्न राज्यों के अनुभव साझा करने का मौका मिलता है, उद्योग जगत की अपेक्षाएं और विशेषज्ञों के सुझाव एक मंच पर प्राप्त होते हैं, जिससे भविष्य के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने में मदद मिलती है। उन्होंने इस सफल आयोजन के लिए वन विकास निगम के अधिकारियों को बधाई दी और उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस कार्यशाला से प्राप्त सुझावों के आधार पर निगम के लिए सुदृढ़ और उच्च विकास क्षमता वाला रोडमैप तैयार किया जाएगा।  कार्यक्रम का शुभारंभ छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के प्रबंध संचालक  प्रेम कुमार ने स्वागत उद्बोधन देते हुए कार्यशाला के उद्देश्य तथा विजन 2030 के अंतर्गत निगम के दीर्घकालिक लक्ष्यों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि निगम वन संसाधनों के सतत उपयोग, मूल्य संवर्धन तथा नए अवसरों के माध्यम से राज्य की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के अध्यक्ष  रामसेवक पैकरा ने भी कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि वन विकास निगम लगातार बेहतर कार्य कर रहा है और वनवासियों को आजीविका के अवसर प्रदान कर रहा है। कार्यक्रम में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख छत्तीसगढ़  व्ही. निवास राव सहित वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। उल्लेखनीय है कि इस कार्यशाला की विशेषता यह रही कि इसमें देश के पांच राज्यों के वन विकास निगमों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया स उन्होंने अपने-अपने राज्यों में संचालित गतिविधियों, श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों तथा सफलता की कहानियों को साझा किया। इसके अतिरिक्त विभिन्न उद्योगों के प्रतिनिधियों ने भी सहभागिता करते हुए उद्योगों की आवश्यकताओं और निगम के साथ संभावित सहयोग के अवसरों पर अपने विचार व्यक्त किए। इस एक दिवसीय कार्यशाला के विभिन्न सत्रों में सार्थक चर्चा हुई। विभिन्न राज्यों के अनुभवों, उद्योग जगत के सुझावों और विशेषज्ञों के विचारों के आधार पर छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के लिए विजन 2030 के अंतर्गत उच्च विकास क्षमता वाले मॉडल के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई।  प्रतिभागियों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के विचार-विमर्श भविष्य की रणनीति तय करने में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे।

केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में हुई वर्चुअल बैठक में विभिन्न राज्यों के पीएचई और ग्रामीण विकास मंत्री हुए शामिल, जल जीवन मिशन 2.0 की दी गई जानकारी

रायपुर जल जीवन मिशन की प्रगति, क्रियान्वयन तथा नल कनेक्शनों की स्थिति पर हुई चर्चा उप मुख्यमंत्री तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री  अरुण साव केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री  सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में हुई वर्चुअल बैठक में शामिल हुए। बैठक में जल जीवन मिशन की प्रगति, क्रियान्वयन तथा ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू नल कनेक्शनों की समीक्षा के साथ ही जल जीवन मिशन 2.0 की जानकारी दी गई।  जल जीवन मिशन की प्रगति, क्रियान्वयन तथा नल कनेक्शनों की स्थिति पर हुई चर्चा नई दिल्ली में वीडियो कॉन्फ्रेसिंग से आयोजित बैठक में केन्द्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री  वी. सोमन्ना तथा विभिन्न राज्यों के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री और ग्रामीण विकास मंत्री भी मौजूद थे। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव  मोहम्मद कैसर अब्दुलहक, जल जीवन मिशन के संचालक  जितेन्द्र कुमार शुक्ला तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रमुख अभियंता  ओंकेश चंद्रवंशी भी उप मुख्यमंत्री  अरुण साव के साथ उनके नवा रायपुर स्थित निवास कार्यालय से ऑनलाइन बैठक में शामिल हुए।   बैठक में जल जीवन मिशन की प्रगति, उसके प्रभावी क्रियान्वयन तथा हर घर तक नल से स्वच्छ जल उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न राज्यों द्वारा किए जा रहे कार्यों की समीक्षा की गई। घरेलू नल जल कनेक्शनों की प्रगति, ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति की स्थिति, पेयजल योजनाओं के संचालन में आ रही चुनौतियों तथा उनके समाधानों पर भी इस दौरान चर्चा की गई। बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री मंत्रालय द्वारा जल जीवन मिशन 2.0 की केंद्रीय कैबिनेट से अनुमोदन एवं उसकी शर्तों के बारे में सभी राज्यों को अवगत कराया गया। उप मुख्यमंत्री  साव ने बैठक में जल जीवन मिशन की समयावधि को दिसम्बर-2028 तक बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी को धन्यवाद दिया। उन्होंने इसके लिए केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय तथा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की।   उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने बैठक में बताया कि छत्तीसगढ़ द्वारा जल जीवन मिशन की योजनाओं के लिए राज्यांश के रूप में 3426 करोड़ रुपए की अतिरिक्त राशि जारी की गई है। उन्होंने इसके समतुल्य केंद्रांश की राशि प्राथमिकता से जारी करने का अनुरोध किया। भारत सरकार द्वारा एकल ग्राम योजनाओं के लिए प्राथमिकता के आधार पर राशि जारी करने का निर्णय लिया गया है।  साव ने इसमें आंशिक संशोधन करते हुए मल्टी-विलेज योजनाओं (MVS) के लिए भी प्राथमिकता के आधार पर राशि जारी करने का आग्रह केंद्र सरकार से किया। केन्द्रीय जल शक्ति मंत्रालय के अधिकारियों ने बैठक में जानकारी दी कि जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत सभी राज्यों को भारत सरकार के साथ एमओयू करना होगा। भारत सरकार द्वारा सुझाए गये बिन्दुओं को समाहित कर संशोधित ओएंडएम नीति (O&M Policy) लागू करनी होगी। इसके बाद ही भारत सरकार द्वारा जल जीवन मिशन के अंतर्गत राशि जारी की जाएगी। साथ ही मिशन के अंतर्गत स्वीकृत सभी योजनाओं की डिजिटल एसेट रजिस्ट्री सुजलम भारत मोबाइल एप के माध्यम से सुजल गांव आईडी जनरेट किया जाना होगा तथा योजनाओं का फाइनेंशियल रिकॉन्सिलिएशन भी किए जाने की अनिवार्यता होगी। इन प्रक्रियाओं को पूर्ण करने के बाद ही भारत सरकार द्वारा मिशन के तहत योजनावार राशि जारी की जाएगी। 

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