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औषधीय खेती को बढ़ावा, बस्तर–सरगुजा में योजनाओं के विस्तार की घोषणा : विकास मरकाम

रायपुर छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड की समीक्षा बैठक सम्पन्न छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड की समीक्षा बैठक का आयोजन 12 मार्च को बोर्ड कार्यालय के सभागार में किया गया। बैठक की अध्यक्षता बोर्ड के अध्यक्ष  विकास मरकाम ने की। बैठक में बोर्ड के अध्यक्ष  विकास मरकाम ने कहा कि वन मंत्री  केदार कश्यप के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड लगातार बेहतर कार्य कर रहा है। उन्होंने बैठक में निर्देश दिए कि बोर्ड और शासन की योजनाओं का लाभ दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाया जाए। विशेष रूप से बस्तर और सरगुजा संभाग में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार किया जाए। उन्होंने स्थानीय वैद्यों के स्थायी पंजीकरण के लिए भी आवश्यक प्रयास करने को कहा।     बोर्ड के नवनियुक्त उपाध्यक्ष  अंजय शुक्ला ने बैठक में कहा कि औषधीय पौधों का क्षेत्र अपार संभावनाओं से भरा है। उन्होंने कहा कि हमारा सपना है कि बस्तर औषधीय पौधों के माध्यम से दुनिया के समृद्ध क्षेत्रों में शामिल हो। बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी  जे.ए.सी.एस. राव ने बोर्ड द्वारा संचालित योजनाओं और गतिविधियों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। इसमें वन क्षेत्रों में औषधीय पौधों का रोपण, औषधीय पौधों की खेती (कृषिकरण) तथा विभिन्न नवाचार कार्यों की जानकारी दी गई। मुख्य कार्यपालन अधिकारी  जे.ए.सी.एस. राव ने आश्वस्त किया कि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के निर्देशानुसार जल्द ही विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर बस्तर क्षेत्र में औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने का कार्य शुरू किया जाएगा। प्रारंभिक चरण में बस्तर क्षेत्र में पहले से लगाए गए पाम और नीलगिरी के प्लांटेशन में औषधीय पौधों की मल्टी- क्रॉपिंग के माध्यम से कार्य किया जाएगा। बैठक में नारायण संकल्प फाउंडेशन रायपुर की मती सीमा गुप्ता, एन.डी. मेमोरियल फाउंडेशन दुर्ग के  शालीभद्र मुथा, क्रिस्टल एजुकेशन एंड रिसर्च सोसायटी की मती रीनू छाबड़ा सहित बोर्ड की योजनाओं से जुड़ी विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इसके अलावा बोर्ड के तकनीकी सलाहकार और कर्मचारी भी बैठक में शामिल हुए।

पीएम नरेन्द्र मोदी गुवाहाटी से देश के 9.32 करोड़ किसानों के खाते में राशि अंतरित करेंगे

रायपुर प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी 13 मार्च को असम राज्य के गुवाहाटी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान देश के करीब 9.32 करोड़ किसानों के खातों में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 22 वीं किस्त की राशि 18 हज़ार 650 करोड़ रुपये का अंतरण करेंगे। इस राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम से छत्तीसगढ राज्य के 24 लाख 71 हजार 498 किसानों के खाते में  498.83 करोड़ रूपए की राशि भेजी जाएगी। इस योजना के तहत छत्तीसगढ राज्य के 2 लाख 92 हजार वन पट्टाधारी और 37 हजार 400 विशेष पिछड़ी जनजाति किसानों को भी लाभान्वित किया जा रहा है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के लाखों किसान सहित जनप्रतिनिधिगण राजधानी रायपुर स्थित स्वामी विवेकानंद, कृषि महाविद्यालय जोरा रायपुर से जुड़ेंगे।        कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पी एम किसान उत्सव के तहत विभिन्न ग्राम पंचायतों में किसान बैठकों का आयोजन किया जाएगा और प्रधानमंत्री के कार्यक्रम का लाइव प्रसारण भी कराया जाएगा, ताकि किसान सीधे इस कार्यक्रम से जुड़ सकें।        गौरतलब है कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत प्रधानमंत्री द्वारा की गई थी, जिसके अंतर्गत ’’पहली किश्त फरवरी 2019 में किसानों के खातों में जारी की गई थी’’। योजना प्रारंभ होने से लेकर अब तक प्रदेश के किसानों को ’’कुल 11 हजार 283 करोड़ 09 लाख रुपये’’ की राशि प्रदान की जा चुकी है, जिससे लाखों किसान परिवार लाभान्वित हुए हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत राज्य शासन द्वारा ’’2 लाख 92 हजार वन पट्टाधारी किसानों’’ तथा ’’37 हजार 400 विशेष रूप से पिछड़ी जनजाति (पीवीटीजी) के किसानों’’ को भी योजना में पंजीयन कर लाभान्वित किया जा रहा है।          विशेष रूप से पिछड़ी जनजाति के किसानों को योजना का लाभ प्रदान करने के लिए ’’कृषि भूमि की अनिवार्यता को शिथिल किया गया है’’। योजनांतर्गत सभी ’’एकल एवं संयुक्त खाता धारक किसान परिवार’’, जिनके नाम भू- अभिलेख के रिकार्ड में दर्ज हैं, योजना का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।            प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के संबंध में कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि देश के कृषक परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से यह योजना ’’दिसम्बर 2018 से लागू की गई है’’। यह योजना ’’भारत सरकार द्वारा शत-प्रतिशत वित्त पोषित’’ है। इसके अंतर्गत पात्र किसान परिवारों को ’’प्रतिवर्ष 6 हजार रुपये की सहायता राशि’’ प्रदान की जाती है, जिसे ’’2-2 हजार रुपये की तीन समान किश्तों में प्रत्येक चार माह के अंतराल पर डीबीटी के माध्यम से सीधे किसानों के बैंक खातों में हस्तांतरित किया जाता है’’। योजना का लाभ सभी वर्ग एवं श्रेणी के उन किसानों को दिया जाता है जिनका नाम भू- अभिलेख में दर्ज है। योजनांतर्गत ’’सभी एकल एवं संयुक्त खाता धारक किसान परिवार’’, जिनके नाम भू-अभिलेख में दर्ज हैं, ’’वन अधिकार पट्टाधारी किसान’’ तथा ’’विशेष रूप से पिछड़ी जनजाति के किसान’’ लाभ प्राप्त करने के पात्र हैं।

अफीम की अवैध खेती पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का कड़ा रुख

रायपुर  प्रदेश में अवैध रूप से अफीम की खेती का मामले सामने आने के बाद मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कड़ा रुख अपनाते हुए सभी जिलों के कलेक्टरों को अपने-अपने जिलों में संभावित क्षेत्रों का व्यापक सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं।  मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि राज्य के किसी भी क्षेत्र में अवैध रूप से अफीम की खेती न हो रही हो। उन्होंने कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि 15 दिवस के भीतर प्रमाण पत्र सहित विस्तृत जांच रिपोर्ट शासन को प्रस्तुत करना सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा है कि राज्य में अवैध मादक पदार्थों के उत्पादन और कारोबार के प्रति सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर कार्य कर रही है और ऐसे मामलों में दोषियों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री के निर्देश के पालन में आयुक्त भू-अभिलेख द्वारा राज्य के सभी जिला कलेक्टरों को सर्वे कर जांच रिपोर्ट और उनके जिले में अफीम की खेती नहीं किए जाने संबंधी प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने के संबंध में पत्र जारी किया गया है।

28 लाख 42 हजार उपभोक्ताओं को मिलेगी 757 करोड़ रुपये से अधिक की राहत

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सालय स्थित सभागार से मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने योजना का लाभ लेने वाले उपभोक्ताओं को प्रमाण पत्र प्रदान किया और अधिक से अधिक लोगों से योजना का लाभ लेने की अपील की। साथ ही मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत 2 हजार 931 हितग्राहियों को 8 करोड़ 79 लाख रुपए की सब्सिडी भी अंतरित की। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि बिजली आज हमारी मूलभूत जरूरतों में शामिल हो चुकी है और इसके बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं है। कई परिवार आर्थिक कारणों से समय पर बिजली बिल का भुगतान नहीं कर पाते, जिससे सरचार्ज के कारण बकाया राशि बढ़ जाती है और पूरा भुगतान करना कठिन हो जाता है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं की इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने समाधान योजना शुरू की है, जिससे उन्हें बड़ी राहत मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाधान योजना के माध्यम से लंबे समय से बिजली बिल का भुगतान नहीं कर पाने वाले प्रदेश के निम्न एवं मध्यम आय वर्ग तथा कृषि उपभोक्ताओं को राहत देने की पहल की गई है। योजना के तहत प्रदेश के 28 लाख 42 हजार उपभोक्ताओं को कुल 757 करोड़ रुपए की राहत दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2014 के बाद देश के लगभग 18 हजार गांवों तक बिजली पहुंचाई गई, जिससे आजादी के बाद से अंधेरे में रहे गांव भी रोशन हुए। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में हमारे अपने संसाधनों से लगभग 30 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है और प्रदेशवासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने बताया कि कोरोना काल में आर्थिक कठिनाइयों के कारण कई उपभोक्ता बिजली बिल का भुगतान नहीं कर पाए थे, जिससे बकाया राशि बढ़ गई थी। राज्य सरकार ने उपभोक्ताओं की इस परेशानी को समझते हुए समाधान योजना लागू की है।  मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के प्रति प्रदेश में लोगों की रुचि लगातार बढ़ रही है और अब तक लगभग 36 हजार लोग इससे जुड़ चुके हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि महिला स्व सहायता समूहों द्वारा सोलर पैनल वेंडर के रूप में कार्य किया जाना एक सकारात्मक पहल है। मुख्यमंत्री ने नागरिकों से बिजली की बचत करने और घरेलू बिजली के अनावश्यक उपयोग से बचने की अपील की।   मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग के अधिकारियों को समाधान योजना के लिए बधाई देते हुए निर्देश दिए कि शिविर लगाकर और व्यापक प्रचार-प्रसार के माध्यम से अधिक से अधिक उपभोक्ताओं को समाधान योजना से जोड़ा जाए। उल्लेखनीय है कि योजना के अंतर्गत उपभोक्ताओं की तीन श्रेणियां निर्धारित की गई हैं, जिनमें 31 मार्च 2023 की स्थिति में निष्क्रिय उपभोक्ता, सक्रिय एकल बत्ती कनेक्शनधारी उपभोक्ता तथा सक्रिय अशासकीय घरेलू एवं अशासकीय कृषि उपभोक्ता शामिल हैं। इन श्रेणियों के उपभोक्ताओं को विद्युत देयक जमा करने के लिए प्रोत्साहन के रूप में अधिभार की राशि में 100 प्रतिशत छूट तथा मूल बकाया राशि में 75 प्रतिशत तक छूट का प्रावधान किया गया है। योजना का लाभ लेने के लिए उपभोक्ताओं को पंजीयन कराना होगा और पंजीयन के समय बकाया राशि का न्यूनतम 10 प्रतिशत भुगतान करना अनिवार्य होगा। शेष राशि का भुगतान किस्तों में किया जा सकेगा और आगामी माह में कोई अधिभार नहीं लगेगा। यह योजना 30 जून 2026 तक प्रभावशील रहेगी। इस अवसर पर रायपुर उत्तर विधायक  पुरंदर मिश्रा, रायपुर नगर निगम महापौर मती मीनल चौबे, जिला पंचायत अध्यक्ष  नवीन अग्रवाल, ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव सहित बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी और विद्युत उपभोक्ता उपस्थित थे।

हौसले ने बदली तकदीर : मुर्गी पालन से आत्मनिर्भर बनीं ग्राम जमथान की सकून मौर्या

रायपुर मजबूत इरादे, मेहनत और सही अवसर मिलने पर साधारण परिस्थितियों में रहने वाला व्यक्ति भी सफलता की नई कहानी लिख सकता है। मनेन्द्रगढ-भरतपुर-चिरमिरी जिले के ग्राम जमथान की निवासी  सकून मौर्या ने अपने आत्मविश्वास, मेहनत और स्व-सहायता समूह के सहयोग से यही कर दिखाया है। आज वे मुर्गी पालन के माध्यम से आत्मनिर्भर बनकर गांव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं। स्व-सहायता समूह से जुड़कर मिला नया आत्मविश्वास       साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से आने वाली सकून मौर्या पहले अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को लेकर चिंतित रहती थीं। इसी दौरान वे महामाया महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें बचत, बैंकिंग और स्वरोजगार से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां मिलीं। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने कुछ नया करने का निर्णय लिया। बैंक सहायता से शुरू किया मुर्गी पालन        समूह के सहयोग और मार्गदर्शन से उन्हें छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक के माध्यम से 1 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्राप्त हुई। इस राशि का उपयोग करते हुए उन्होंने मुर्गी पालन का कार्य शुरू किया। शुरुआत में यह एक छोटा प्रयास था, लेकिन अपनी मेहनत और लगन से उन्होंने इस कार्य को धीरे-धीरे एक सफल व्यवसाय में बदल दिया। मुर्गी पालन से मिली आर्थिक मजबूती आज मुर्गी पालन उनके परिवार की आय का एक महत्वपूर्ण साधन बन गया है। इस व्यवसाय से उन्हें प्रतिवर्ष लगभग 93 हजार रुपये की आय प्राप्त हो रही है। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है और वे अपने परिवार की आवश्यकताओं को पहले से बेहतर तरीके से पूरा कर पा रही हैं। अन्य महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा सकून मौर्या की सफलता को देखकर गांव की कई महिलाएं भी स्व-सहायता समूह से जुड़कर स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित हो रही हैं। उनका कहना है कि समूह से जुड़ने के बाद उन्हें न केवल आर्थिक सहायता मिली, बल्कि आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की प्रेरणा भी मिली। सकून मौर्या की यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शन, अवसर और सहयोग मिले तो वे अपनी मेहनत और संकल्प से जीवन की दिशा बदल सकती हैं और आत्मनिर्भर बनकर समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकती हैं।

होटल-ढाबों में घरेलू गैस का दुरुपयोग पकड़ा गया, बीजापुर में प्रशासन का छापा

बीजापुर/दंतेवाड़ा जिले में होटल और ढाबों में घरेलू गैस सिलेंडर के उपयोग पर प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है। कलेक्टर संबित मिश्रा के निर्देश पर चलाए जा रहे सघन निरीक्षण अभियान के तहत अपर कलेक्टर भूपेन्द्र अग्रवाल ने टीम के साथ जिला मुख्यालय बीजापुर में संचालित होटल और ढाबों का औचक निरीक्षण किया। घरेलू गैस सिलेंडर का उपयोग नहीं निरीक्षण के दौरान होटल संचालकों और ढाबा मालिकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि वे घरेलू गैस सिलेंडर का उपयोग न करें और केवल व्यावसायिक (कॉमर्शियल) गैस सिलेंडर का ही इस्तेमाल करें। अधिकारियों ने कहा कि व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में घरेलू गैस का उपयोग नियमों के विरुद्ध है और ऐसा पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने आवश्यक वस्तुओं विशेषकर एलपीजी गैस, डीजल और पेट्रोल की उपलब्धता से जुड़ी शिकायतों और सुझावों की निगरानी के लिए उत्तम कुमार भारती, सहायक खाद्य अधिकारी बीजापुर को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। साथ ही सभी गैस एजेंसी संचालकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपनी एजेंसियों में गैस सिलेंडरों का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखें, ताकि आम नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। दंतेवाड़ा में गैस का पर्याप्त स्टॉक दंतेवाड़ा में गैस सिलेंडर की कमी को लेकर फैल रही अफवाहों पर खाद्य अधिकारी सुश्री वेणुका ध्रुव ने विराम लगाया है। उन्होंने बताया कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए सभी गैस एजेंसी संचालकों के साथ बैठक की गई है, ताकि गैस सिलेंडर की कृत्रिम कमी की स्थिति न बने।  

लकड़ी के अवैध परिवहन पर वन विभाग की कार्रवाई, वाहन जब्त

रायपुर अवैध परिवहन करते पिकअप वाहन जप्त छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के प्रबंध संचालक के निर्देशानुसार वन क्षेत्रों में वनों की अवैध कटाई, अतिक्रमण और अवैध उत्खनन को रोकने के लिए सभी परियोजना मंडलों में नियमित गश्त की जा रही है। इसी क्रम में कोटा परियोजना मंडल, बिलासपुर की टीम ने गश्ती के दौरान अवैध लकड़ी परिवहन पर कार्रवाई की। परिक्षेत्र भैंसाझार के कक्ष क्रमांक पी-1604 में पलाश प्रजाति की 02 नग जलाऊ चट्टा लकड़ी को महिंद्रा पिकअप वाहन से अवैध रूप से ले जाया जा रहा था। वन विभाग की टीम ने वाहन को पकड़कर पिकअप वाहन क्रमांक सीजी-05 एबी- 8843 को जप्त कर लिया।       इस मामले में आरोपी अमृत लाल धीवर, पिता नरोत्तम प्रसाद धीवर, निवासी गिरजाबंध, नवागांव, तहसील रतनपुर, जिला बिलासपुर (छत्तीसगढ़) के विरुद्ध भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 41(2)(ख) और 52 के तहत प्रकरण क्रमांक 80/3991, दिनांक 10 मार्च 2026 दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई क्षेत्रीय महाप्रबंधक अभिषेक सिंह और मंडल प्रबंधक सत्यदेव शर्मा के मार्गदर्शन में परियोजना परिक्षेत्र अधिकारी वैभव साहू के नेतृत्व में की गई।     अभियान में सहायक परियोजना क्षेत्रपाल अश्वनी मेहरा, अरुण कुमार सिंह, तोषपाल साहू, गोविंदा वर्मा तथा क्षेत्ररक्षक कौशलेन्द्र प्रताप सिंह, कृपानंद जॉगड़े, कार्तिकराम धुर्वे सहित अन्य कर्मचारियों ने सहयोग किया। प्रबंध संचालक  प्रेम कुमार ने वन अपराध के विरुद्ध की गई इस त्वरित कार्रवाई के लिए टीम को बधाई दी है। साथ ही प्रदेश के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को वन क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए इसी प्रकार सतर्क रहकर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि वन सुरक्षा और संवर्धन में अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका का उल्लेख आगामी गोपनीय प्रतिवेदन में भी किया

बिलासपुर में अवैध गैस कारोबार पर कार्रवाई, छापे में 55 सिलेंडर बरामद

बिलासपुर शहर में गैस कालाबाजारी के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई जारी है। कोनी क्षेत्र में गुडाखू फैक्ट्री के सामने वाली गली में संचालित एक अवैध रिफिलिंग सेंटर पर खाद्य विभाग ने छापा मारकर बड़ी कार्रवाई की है। टीम ने मौके से 55 खाली और भरे हुए गैस सिलेंडर जब्त किए हैं। जानकारी के अनुसार आरोपी श्रवण साहू किराए के मकान में डंप यार्ड बनाकर पिछले डेढ़ साल से गैस का अवैध कारोबार कर रहा था। वह घरेलू सिलेंडरों से गैस निकालकर छोटी टंकियों में भरता था और उन्हें ऊंचे दामों पर बेचता था। खाद्य विभाग को मिली थी सूचना खाद्य विभाग को सूचना मिली थी कि कोनी इलाके में गैस की अवैध रिफिलिंग कर कालाबाजारी की जा रही है। सूचना के आधार पर सहायक जिला खाद्य अधिकारी राजीव लोचन तिवारी के नेतृत्व में टीम ने किराए के मकान पर छापा मारा। कार्रवाई के दौरान वहां बड़ी संख्या में सिलेंडर पाए गए। जांच में सामने आया कि आरोपी का मुख्य निशाना हॉस्टल में रहने वाले छात्र थे। वह 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडरों से गैस निकालकर 5 किलो की छोटी टंकियों में भरता था और उन्हें छात्रों को सप्लाई करता था। घनी आबादी वाले क्षेत्र में यह अवैध कारोबार पिछले डेढ़ साल से चल रहा था। एक ही व्यक्ति के पास 55 सिलेंडर मिलने से गैस वितरण व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। विभाग अब उन डिलीवरी बॉय और एजेंसियों की पहचान कर रहा है, जिनके जरिए आरोपी तक इतनी बड़ी संख्या में सिलेंडर पहुंचे।  

मंत्री राजवाड़े के विभागों को 11,763 करोड़ रुपये का अनुदान, पारित हुई मांगें

मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े के विभागों के लिए लगभग 11 हजार 763 करोड़ रुपये की अनुदान मांगें पारित समाज के अंतिम व्यक्ति तक के सम्मान और सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध :  राजवाड़े महतारी वंदन योजना से राज्य की 70 लाख से अधिक महिलाएं लाभान्वित  समाज कल्याण का बजट पिछले 5 वर्षों की तुलना में 59 प्रतिशत अधिक प्रधानमंत्री श्री मोदी की गारंटी को पूरा करने बेटियों के भविष्य के लिए रानी दुर्गावती योजना होगी शुरू  नशा मुक्ति के लिए सामाजिक सहयोग से चलेगा अभियान, वरिष्ठ नागरिकों केे देखभाल के लिए “सियान गुड़ी” डे-केयर सेंटर की होगी स्थापना रायपुर छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के विभागों के लिए 11 हजार 762 करोड़ 53 लाख रूपए की अनुदान मांगें पारित कर दी गईं है। इनमें महिला एवं बाल विकास विभाग के लिए 10,162 करोड़ 53 लाख रूपए तथा समाज कल्याण विभाग के लिए 1600 करोड़ रूपए से अधिक का बजट प्रावधान किया गया है।  महिला एवं बाल विकास विभाग मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े ने सदन में चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि राज्य सरकार मातृशक्ति के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए अनेक योजनाओं का प्रभावी संचालन कर रही है।  राजवाड़े ने कहा कि महतारी वंदन योजना राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना में से एक है। यह योजना राज्य की महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक पहल साबित हुई है। इसके तहत प्रदेश की लगभग 70 लाख महिलाओं को लाभान्वित किया जा रहा है। अब तक 25 किश्तों में 14 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्रदान की जा चुकी है। इससे महिलाओं के जीवन में आर्थिक मजबूती के साथ आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिला है और उनके जीवन में स्वावलंबन लाने का काम किया है। राजवाड़े ने सदन में कहा कि महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य तथा पोषण को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के लिए 120 करोड़ रुपये तथा मिशन वात्सल्य योजना के लिए 80 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन के लिए 800 करोड़ रुपये तथा पूरक पोषण आहार के लिए 650 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। आंगनबाड़ी केंद्रों के उन्नयन और आधारभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए भी विशेष प्रावधान किया गया है। राजवाड़े ने कहा कि किशोरी बालिकाओं के स्वास्थ्य और पोषण के लिए ’किशोरी बालिका योजना’ के लिए 40 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही छात्राओं की स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए ’शुचिता योजना’ के लिए 10 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।  राजवाड़े ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोेदी जी के गारंटी को पूरा करने राज्य सरकार बेटियों के उज्ज्वल भविष्य को ध्यान में रखते हुए ’रानी दुर्गावती योजना’ प्रारंभ करने जा रही है। इस योजना के तहत बेटी के 18 वर्ष पूर्ण होने पर उन्हेें 1.5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इसके लिए इस वर्ष के बजट में 15 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा पोषण अभियान के संचालन के लिए 125 करोड़ रुपये तथा मुख्यमंत्री सामूहिक कन्या विवाह योजना के लिए 40 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान रखा गया है।  राजवाड़े ने कहा कि हमारी सरकार महिलाओं की सम्मान और सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि वन स्टॉप सेंटर, सखी निवास और चाइल्ड हेल्पलाइन जैसी योजनाओं के संचालन के लिए भी बजट में पर्याप्त राशि का प्रावधान किया गया है। महिला सुरक्षा से संबंधित कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन तथा जनजागरूकता कार्यक्रमों को भी प्राथमिकता दी जा रही है। समाज कल्याण विभाग सदन को जानकारी देते हुए राजवाड़े ने बताया कि समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1600 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है, जो पिछले पांच वर्षों की तुलना में लगभग 59 प्रतिशत अधिक है। सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत प्रदेश में लगभग 21 लाख 76 हजार हितग्राहियों को पेंशन का लाभ डीबीटी के माध्यम से दिया जा रहा है। इसके लिए 1402 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वरिष्ठ नागरिकों केे देखभाल और सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देने के लिए राज्य में “सियान गुड़ी” डे-केयर सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं, जिसके लिए 5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा वृद्धाश्रमों के संचालन के लिए 6 करोड़ रुपये, राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना के लिए 20 करोड़ रुपये तथा मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के लिए 20 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के लिए विशेष विद्यालयों के संचालन, कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण तथा पुनर्वास कार्यक्रमों के लिए भी बजट में विशेष प्रावधान किए गए हैं। साथ ही उभयलिंगी कल्याण बोर्ड की स्थापना के लिए 1 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।  लक्ष्मी राजवाड़े ने सदन में कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार का उद्देश्य केवल योजनाओं का संचालन करना नहीं बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय, सम्मान और सुरक्षा पहुंचाना है। इन्हीं बातों को ध्येय में रखकर हमारी सरकार सेवा, संवेदना और संकल्प के साथ समग्र विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही हैं।

कोचिंग संस्थानों से आवेदन आमंत्रित, सरगुजा के बच्चे करेंगे NEET-JEE की तैयारी

अम्बिकापुर/रायपुर. शैक्षणिक सत्र 2026-27 में सरगुजा जिले के मेधावी विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहयोग देने के उद्देश्य से NEET एवं IIT-JEE के लिए ऑफलाइन टेस्ट सीरीज आयोजित की जाएगी। इस हेतु जिले के उत्कृष्ट कोचिंग संस्थानों से आवेदन प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं। जिला शिक्षा अधिकारी, अम्बिकापुर द्वारा जारी जानकारी के अनुसार कक्षा 12वीं में अध्ययनरत सरगुजा-30 के 30 विद्यार्थियों तथा जिले के अन्य 50 चिन्हांकित मेधावी विद्यार्थियों को वर्ष 2027 की NEET और IIT-JEE प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए ऑफलाइन टेस्ट सीरीज आयोजित कराई जाएगी। इसके लिए सर्वश्रेष्ठ कोचिंग संस्थान का चयन किया जाएगा। इच्छुक कोचिंग संस्थान अपने आवेदन प्रस्ताव सरगुजा जिले की आधिकारिक वेबसाइट https://surguja.gov.in/ तथा कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी, अम्बिकापुर के सूचना पटल पर प्रकाशित सूचना के अनुसार प्रस्तुत कर सकते हैं। जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य जिले के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बेहतर मार्गदर्शन और अभ्यास का अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि वे राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकें।

नक्सलियों पर बड़ा वार: डंप से 3.61 करोड़ कैश, सोना और AK-47 सहित 101 हथियारों का जखीरा मिला

जगदलपुर बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर में आज नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी सफलता मिली। दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के 108 नक्सली कैडरों ने आत्मसमर्पण किया। इनमें 44 महिला और 64 पुरुष नक्सली शामिल हैं, जिन पर 3.29 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। नक्सलियों के 101 घातक हथियार बरामद यह आत्मसमर्पण पुणे मारगेम पुनर्वास से पुनर्जीवन पहल के तहत हुआ। कार्यक्रम राज्य के डीजीपी अरुण देव गौतम और एडीजी विवेकानंद सिन्हा की मौजूदगी में हुआ। बस्तर आईजी सुंदरराज पी सहित सीआरपीएफ, बीएसएफ और जिला पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। इस दौरान नक्सलियों द्वारा जमा किए गए हथियारों और अन्य सामग्री की प्रदर्शनी लगाई गई। अधिकारियों ने 101 घातक हथियार बरामद होने की जानकारी दी। करोड़ों रुपये के हथियार समेत नगद मिला इन हथियारों में एके 47, इंसास, एलएमजी और बीजीएल शामिल थे। नक्सल इतिहास में पहली बार 3.61 करोड़ रुपये नकद और 1.64 करोड़ रुपये मूल्य का एक किलो सोना बरामद किया गया। इसे अब तक के नक्सल विरोधी अभियानों में सबसे बड़ी डंप बरामदगी माना जा रहा है। यह सभी सामग्री बस्तर रेंज के विभिन्न जिलों से बरामद की गई थी। इनमें बीजापुर, दंतेवाड़ा, सुकमा, नारायणपुर, कांकेर, कोंडागांव और बस्तर जिले शामिल हैं। बरामद किए गए सभी डंप और सामग्री को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया गया। यह प्रदर्शन जगदलपुर स्थित रेंज मुख्यालय में आयोजित आत्मसमर्पण कार्यक्रम के दौरान हुआ। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह सामग्री अलग-अलग अभियानों में मिली थी। इसमें 101 घातक हथियार और बड़ी मात्रा में नकदी व सोना शामिल था। अधिकारियों का कहना है कि सरकार की पुनर्वास नीति प्रभावी साबित हो रही है। लगातार चल रहे सुरक्षा अभियानों के कारण नक्सली मुख्यधारा में लौट रहे हैं। बड़ी संख्या में नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज में वापसी की है। यह आत्मसमर्पण बस्तर में शांति और विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल क्षेत्र में स्थिरता लाने में सहायक होगी।

माँ लक्ष्मी महिला समूह का कमाल: 10,000 चूजों की क्षमता वाले एसी मुर्गी फार्म का सफल संचालन

रायपुर महासमुंद जिले के बागबाहरा विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम एम.के. बाहरा की जय माँ लक्ष्मी महिला स्वयं सहायता समूह की महिलाएं आज राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़कर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर रही हैं। आजीविका मिशन 150 के द्वितीय चरण के अंतर्गत समूह द्वारा स्थापित 10,000 चूजों की क्षमता वाले एयर कंडीशनर मुर्गी फार्म का शुभारम्भ जिला स्काउट गाइड के अध्यक्ष  एतराम साहू एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  हेमंत नंदनवार के द्वारा किया गया। समूह की अध्यक्ष युगेश्वरी साहू बताती है कि समूह की सदस्य महिलाएं पहले मुख्य रूप से खेती-मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करती थीं। उनके पास आय का स्थायी साधन और पर्याप्त संसाधन नहीं थे, जिसके कारण उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़ने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आने लगा। समूह की सभी सदस्याओं ने मिलकर आजीविका गतिविधियों की शुरुआत की और धीरे-धीरे अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाया। युगेश्वरी बताती है कि समूह को एनआरएलएम के तहत 15 हजार रुपये की चक्रीय निधि प्राप्त हुई, जिससे उन्होंने छोटे स्तर पर मुर्गी फार्म की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) से 60 हजार रुपये प्राप्त किए तथा बैंक लिंकेज के माध्यम से 1 लाख रुपये का ऋण लिया। व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने क्रमशः 2 लाख रुपये और 5 लाख रुपये का उद्यम ऋण भी प्राप्त किया। आजीविका को और विस्तारित करने के उद्देश्य से समूह ने बैंक से 10 लाख रुपये का ऋण लेकर आधुनिक एसी मुर्गी फार्म की स्थापना की। इस कार्य में अध्यक्ष युगेश्वरी साहू के पति सुरेश साहू के मार्गदर्शन का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। आज इस मुर्गी फार्म से समूह को लगभग 80 से 90 हजार रुपये तक मासिक आय प्राप्त हो रही है। इससे समूह की महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में काफी सुधार आया है। इस व्यवसाय के माध्यम से समूह की सदस्याएं आत्मनिर्भर बनी है। साथ ही अन्य सदस्यों को भी रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं। बढ़ी हुई आय से वे अपने परिवार के पालन-पोषण, स्वास्थ्य, बच्चों की उच्च शिक्षा तथा जीवन स्तर को बेहतर बनाने में सक्षम हो रही हैं। समूह की सदस्याओं का कहना है कि बिहान योजना से जुड़ने के बाद उन्हें आजीविका शुरू करने का साहस, प्रशिक्षण और आर्थिक सहयोग मिला है। वे इस व्यवसाय को और आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही हैं तथा राज्य शासन एवं बिहान योजना के प्रति आभार व्यक्त की हैं।

दिल की सर्जरी से बची मासूम की जान, ‘प्रोजेक्ट धड़कन’ ने बिलासपुर की पीहू को दिया नया जीवन

रायपुर. छत्तीसगढ़ में प्रोजेक्ट धड़कन मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शुरू किया गया प्रमुख स्वास्थ्य अभियान है। इसका उद्देश्य एक से 18 वर्ष तक के बच्चों में जन्मजात हृदय रोग की निःशुल्क पहचान, परामर्श और सफल ऑपरेशन (इलाज) सुनिश्चित करना है। यह पहल राज्य भर में हजारों बच्चों के लिए वरदान साबित हो रही है। प्रोजेक्ट धड़कन के तहत पीहू सफल उपचार के बाद वह पूरी तरह स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जी रही है। पीहू के माता-पिता ने इस पहल के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आभार जताया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जिला प्रशासन रायपुर की पहल प्रोजेक्ट धड़कन के तहत बिलासपुर की पीहू को नया जीवन मिला है। प्रोजेक्ट धड़कन के अंतर्गत संचालित स्वास्थ्य सेवाओं से बिलासपुर के ग्राम भोजपुरी में रहने वाली  11 वर्षीय पीहू कराके की हृदय संबंधी समस्या का इलाज किया गया। पीहू लंबे समय से हृदय संबंधी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रही थी। कक्षा छठवीं में पढ़ने वाली पीहू के हृदय में समस्या होने के कारण उसे खेल-कूद और अन्य शारीरिक गतिविधियों में कठिनाई होती थी। इसी बीच जिला प्रशासन रायपुर द्वारा पुलिस विभाग के कर्मचारियों एवं उनके परिवारों के लिए आयोजित ‘प्रोजेक्ट छांव’ के अंतर्गत स्वास्थ्य जांच शिविर लगाया गया। पीहू के पिता पुलिस विभाग में कार्यरत हैं और जगदलपुर में सेवाएं दे रहे हैं।  इस शिविर में माता पिता  द्वारा पीहू की भी जांच  कराई गई। ‘प्रोजेक्ट धड़कन’ की विशेषज्ञ टीम ने पीहू के हृदय की जांच की। प्रारंभिक जांच के बाद पीहू को आगे के उपचार के लिए सत्य साईं हॉस्पिटल, नवा रायपुर भेजा गया। अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा विस्तृत जांच के बाद एक सप्ताह के भीतर उसका सफल ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के बाद पीहू को स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और अब वह बिलासपुर में अपने घर पर सामान्य जीवन जी रही है। पीहू पूरी तरह स्वस्थ है और पहले की तरह पढ़ाई-लिखाई में मन लगा रही है। साथ ही वह अपनी बहनों और दादी के साथ कैरम और अन्य खेलों का भी आनंद ले रही है। पीहू की माता इंद्राणी कारके ने इस पहल के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ‘प्रोजेक्ट धड़कन’ की मदद से उनकी बेटी का समय पर इलाज संभव हो सका और अब वह स्वस्थ जीवन जी पा रही है। प्रोजेक्ट धड़कन की पहल न केवल जरूरतमंद बच्चों को समय पर उपचार उपलब्ध करा रही है, बल्कि उनके परिवारों के लिए भी नई उम्मीद और विश्वास का संचार कर रही है।

बिजली बिल बकाया चुकाने का सुनहरा मौका, छत्तीसगढ़ सरकार की खास छूट योजना लागू

रायपुर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज गुरुवार को रायपुर स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय में मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 का शुभारंभ किया। इस योजना के तहत छत्तीसगढ़ सरकार बिजली बिल भुगतान पर भारी छुट दी है। योजना के तहत 29 लाख उपभोक्ता लाभान्वित होंगे। लगभग 75% तक बिजली बिल माफ किया जाएगा। मामले में बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कोरोना काल के समय आर्थिक स्थिति खराब होने की वजह से बहुत से लोग बिजली बिल नहीं भर पाए थे। जिस वजह से उनका बिजली बिल धीरे-धीरे करके बढ़ते चल गया। सरकार ऐसे लोगों को राहत देने के लिए मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना के तहत उन्हें छूट देगी। यदि उपभोक्ता की बिजली बिल राशि अधिक है और उसे वह भुगतान नहीं कर पता है तो उसे किस्तों में भी पटाने की सुविधा दी जाएगी। इस योजना का लाभ 29 जून 2026 तक दिया जाएगा। बिजली बिल का भुगतान करने के लिए उपभोक्ताओं को विभाग वेबसाइट पर पंजीयन करना होगा।

नंबर प्लेट पर गड़बड़ी से होगा पेट्रोल-डीजल का वितरण रोक, पुलिस ने एटीएम संचालकों को दिए सख्त निर्देश

 बिलासपुर  गलत, फर्जी अथवा बिना नंबर प्लेट के वाहन चलाने वालों के खिलाफ पुलिस ने अभियान शुरू कर दिया है। पुलिस ने ऐसे वाहन चालकों पर कार्रवाई तेज करते हुए पेट्रोल और डीजल पंप संचालकों को भी निर्देश दिया है कि बिना नंबर प्लेट या संदिग्ध नंबर प्लेट वाले वाहनों को पेट्रोल-डीजल न दिया जाए। एएसपी रामगोपाल करियारे ने बताया कि जिले में यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। बीट प्रणाली के माध्यम से लगातार निगरानी साथ ही यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि वाहनों का उपयोग किसी भी प्रकार की आपराधिक गतिविधियों में न हो सके। इसके लिए जिले के सभी थाना क्षेत्रों में बीट प्रणाली के माध्यम से लगातार निगरानी रखी जा रही है। पुलिस द्वारा अलग-अलग जगहों पर चेकिंग पाइंट लगाकर वाहनों की जांच की जा रही है। साथ ही संदिग्ध व्यक्तियों तथा वाहनों की तस्दीक भी की जा रही है। मोटरयान अधिनियम के तहत कार्रवाई ऐसे वाहन विशेष निगरानी में रखे गए हैं जिनमें नंबर प्लेट नहीं है। या नंबर प्लेट से छेड़छाड़ की गई है। अमानक तरीके से नंबर लिखा गया है। अगर किसी दूसरे वाहन का नंबर लिखकर वाहन चलाया जा रहा है। ऐसे मामलों में मोटरयान अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है। संदिग्ध नंबर प्लेट वाले वाहनों को पेट्रोल-डीजल न दिया जाए अभियान के तहत जिले के सभी पेट्रोल और डीजल पंप संचालकों को भी निर्देश दिए गए हैं कि बिना नंबर प्लेट या संदिग्ध नंबर प्लेट वाले वाहनों को पेट्रोल-डीजल न दिया जाए। यदि इस तरह का कोई वाहन ईंधन लेने आता है तो उसकी जानकारी तत्काल पुलिस कंट्रोल रूम या संबंधित थाने को दी जाए, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके। आपराधिक गतिविधियों पर रोक लगाने प्रयास एएसपी रामगोपाल करियारे ने बताया कि यातायात नियमों की अनदेखी न केवल ट्रैफिक व्यवस्था को प्रभावित करती है, बल्कि कई बार गंभीर हादसों का कारण भी बनती है। इसके अलावा नंबर प्लेट से छेड़छाड़ कर अपराध की आशंका भी बनी रहती है। दुर्घटना की स्थिति में ऐसे वाहनों की पहचान करना भी मुश्किल हो जाता है। उन्होंने नागरिकों से भी अपील की है कि यदि कहीं बिना नंबर प्लेट या संदिग्ध नंबर वाले वाहन चलते हुए दिखाई दें तो इसकी सूचना तत्काल यातायात पुलिस या नजदीकी थाने को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। 

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