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ईरान के हमलों से UAE में संकट, सिटी बैंक ने सुरक्षित रहने के लिए बंद की अपनी शाखाएं

दुबई ईरान ने गुरुवार तड़के संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पर मिसाइलों और ड्रोनों से बड़ा हमला किया है. दुबई के जेबेल अली बंदरगाह से 65 किलोमीटर दूर फारस की खाड़ी में एक कंटेनर जहाज पर अज्ञात गोला गिरने से आग लग गई है. ब्रिटिश सेना के मुताबिक, जहाज के सभी कर्मचारी सुरक्षित हैं।  यूएई के एयर डिफेंस सिस्टम ने देश भर में ईरानी मिसाइलों और ड्रोनों को इंटरसेप्ट किया है. कई जगह धमाकों की आवाजें सुनी गई हैं. अधिकारियों ने ओमान के सलालाह बंदरगाह पर हुए ड्रोन हमले की भी निंदा की है।  यूएई में सुरक्षा कारणों से सिटी बैंक ने एक को छोड़कर अपनी सभी शाखाएं बंद रखने का फैसला किया है।  जहाज पर हमला… दुबई तट के पास जेबेल अली पोर्ट के करीब एक कंटेनर जहाज को अज्ञात प्रोजेक्टाइल से निशाना बनाया गया. ब्रिटिश सेना के यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर ने पुष्टि की है कि यह हमला सुबह होने से ठीक पहले हुआ. हमले के बाद जहाज पर मामूली आग लग गई थी, जिसे कंट्रोल कर लिया गया है. राहत की बात यह है कि इस घटना में क्रू मेंबर्स को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।  यूएई का एयर डिफेंस… यूएई की नेशनल इमरजेंसी क्राइसिस एंड डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी ने निवासियों को सुरक्षित जगहों पर रहने की सलाह दी है. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, आसमान में सुनाई देने वाले धमाके ईरानी मिसाइलों को बीच में रोकने (इंटरसेप्शन) के कारण हुए हैं. दुबई में एक रिहायशी इमारत पर भी ड्रोन गिरने की खबर है, जहां लगी आग पर काबू पा लिया गया है. अधिकारियों ने इसे ईरान की ओर से शुरू की गई नई लहर बताया है।  फाइनेंशियल बिल्डिंग्स पर मंडराया खतरा ईरान द्वारा क्षेत्र के वित्तीय संस्थानों को निशाना बनाने की धमकी के बाद सिटी बैंक ने बड़ा कदम उठाया है. बैंक ने ऐलान किया है कि वह गुरुवार को देश की एक ब्रांच को छोड़कर बाकी सभी को बंद रखा जाएगा. बैंक मैनेजमेंट ने यह फैसला देश के अंदर बन रही स्थितियों को देखते हुए लिया है. यूएई ने ओमान के सलालाह बंदरगाह पर हुए ड्रोन हमलों को विश्वासघाती कार्रवाई बताते हुए इसकी कड़े शब्दों में निंदा की है। 

LPG संकट के बीच PM मोदी की अपील, गृह मंत्रालय ने जिला स्तर पर अलर्ट और कंट्रोल रूम की घोषणा की

नई दिल्ली देश में एलपीजी सप्लाई में कमी आने की अफवाहों के बीच पीएम नरेंद्र मोदी ने अपील की है कि पैनिक में न आएं। उन्होंने कहा कि हम लोग पश्चिम एशिया में छिड़े संघर्ष के चलते पैदा हुए संकट से निपटने में सफल होंगे। उन्होंने कहा कि किसी को भी परेशान होने की जरूरत नहीं है और सभी के हितों की रक्षा की जाएगी। तमिलनाडु में एनडीए की मीटिंग को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने यह अपील की। इसके अलावा होम मिनिस्ट्री की ओर से कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं। ऐसा इसलिए ताकि एलपीजी सप्लाई पर नजर रखी जा सके और जमाखोरी करने वालों पर ऐक्शन हो। गृह मंत्रालय का कहना है कि किसी भी तरह के पैनिक के हालात ना बनें क्योंकि घरेलू गैस सिलेंडरों की सप्लाई पहले की तरह ही जारी है। यदि लोग पैनिक में खरीद ना बढ़ाएं तो स्थिति सही रहेगी। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा समेत देश के तमाम राज्यों में सरकारें अलर्ट पर हैं और जिला प्रशासन की ओर से लगातार लोगों को अफवाहों से बचने की सलाह दी जा रही है। प्रशासन का कहना है कि गैस की किल्लत नहीं है और यदि कोई जमाखोरी करेगा तो उस पर ऐक्शन लिया जाएगा। सरकार की ओर से पहले ही एस्मा लागू किया जा चुका है। इसके तहत घरेलू गैस सप्लाई को प्राथमिकता दी गई है और बीते 6 महीनों से चली आ रही आपूर्ति के औसत को बनाए रखे का निर्णय हुआ है। इस बीच पीएम मोदी ने किसी भी तरह की अफवाह से बचने को कहा है। उन्होंने कहा कि मैं जनता से अपील करता हूं कि सही सूचना को ही आगे बढ़ाएं। बिना किसी वेरिफिकेशन के सूचनाओं को आगे प्रसारित ना करें। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में चल हे संकट ऊर्जा की सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। उन्होंने बुधवार को कहा, ‘मैं तमिलनाडु के लोगों से अपील करूंगा कि अफवाहों से बचें। सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। हमें उम्मीद है कि हम संकट से उबरेंगे, जैसा कोरोना के दौर में हुआ था। हमारी विचारधारा इंडिया फर्स्ट की है। किसी भी तरह के पैनिक में रहने की जरूरत नहीं है। सभी के हितों की रक्षा करने के लिए सरकार प्रयास कर रही है।’ पीएम बोले- कोरोना महामारी की तरह इस संकट से भी उबरेंगे पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना महामारी के दौर में 140 करोड़ भारतीयों ने दिखाया था कि हमारा देश कितना परिपक्व है। मुझे भरोसा है कि हम इस संकट से आसानी से उबर जाएंगे, जैसा कोरोना में हुआ था। पीएम मोदी की यह टिप्पणी अहम है क्योंकि देश भर से ऐसी खबरें आ रही हैं, जिसमें कहा जा रहा है कि एलपीजी की सप्लाई प्रभावित है और लोग पैनिक परचेजिंग करने में जुटे हैं। इसी के कारण होम मिनिस्ट्री ने कंट्रोल रूम बना दिए हैं और दिन भर नजर रखी जा रही है। फैक्ट चेक करने में भी जुटे मंत्रालय, कंट्रोल रूम ऐक्टिव होम मिनिस्ट्री ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और पेट्रोलियम मिनिस्ट्री से संपर्क साधा है। तीनों विभाग मिलकर फैक्ट चेक करने और सही सूचना देने के काम में जुटे हैं। इस बीच हालात संभालने के लिए केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों और पुलिस प्रमुखों के साथ मीटिंग की है। ऐसा इसलिए ताकि कानून व्यवस्था को बनाए रखा जा सके और अफवाहों से उपजे हालातों से भी निपटने में मदद मिले।

क्या मोनालिसा ने किया बाल विवाह? पति फरमान ने दी सफाई, दिखाए सच्चाई के सबूत

तिरुवनंतपुरम महाकुंभ में रुद्राक्ष की माला बेचकर मोनालिसा रातोरात वायरल हो गई थीं. अपनी कजरारी आंखों और मिलियन डॉलर स्माइल से मोनालिसा ने फैंस का दिल जीता था. अपनी खूबसूरती से करोड़ों दिलों में छाने वाली मोनालिसा ने करियर शुरू होने से पहले शादी रचा ली है. बुधवार को उन्होंने अपने बॉयफ्रेंड फरमान खान संग शादी की. क्योंकि फरमान मुस्लिम हैं, इसलिए एक्ट्रेस के पेरेंट्स इस रिश्ते के खिलाफ थे. लेकिन अपने प्यार को पाने की खातिर मोनालिसा ने परिवार से बगावत कर शादी की।  मोनालिसा और फरमान ने केरल में जाकर सिविल मैरिज की, फिर तिरुवनंतपुरम के अरुमनूर नैनार मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज से शादी की. फरमान ने पुलिस प्रोटेक्शन के बीच मोनालिसा की मांग में सिूंदर भरा. मोनालिसा की इंटरफेथ मैरिज ने सबको हैरानी में डाल दिया है. इंटरनेट पर उनकी वेडिंग फोटोज वायरल हो रही हैं. इनमें मोनालिसा लाल साड़ी में मांग में सिंदूर लगाए, गले में वरमाला पहने दिख रही हैं. इस बीच ऐसी भी बातें उड़ीं कि मोनालिसा नाबालिग हैं. वो 18 साल से कम हैं. इन खबरों पर उनके पति फरमान ने रिएक्ट किया है।   क्या नाबालिग हैं मोनालिसा? फरमान ने शादी के बाद मीडिया से बात करते हुए मैरिज सर्टिफिकेट दिखाकर बताया कि मोनालिसा एडल्ट हैं. फरमान ने कहा- बहुत जगह न्यूज चल रही है कि मोनालिसा मैच्योर नहीं है. वो चाइल्ड है, लेकिन ऐसा नहीं है. मैं बता दूं कि मोनालिसा एडल्ट है. वो 18 प्लस है. मैरिज सर्टिफिकेट में उसका डेट ऑफ बर्थ लिखा हुआ है. वो 18 प्लस है. इसका सबूत मैरिज सर्टिफिकेट और आधार कार्ड में मिल जाएगा।  मीडिया से बात करते हुए मोनालिसा ने बताया कि उन्हें शादी के बाद काफी अच्छा लग रहा है. वो खुश हैं. उनके पति ने कहा वो फिलहाल केरल में रहेंगे. अगर मोनालिसा को केरल में रहना पसंद आएगा तो वो यहीं पर सैटल हो जाएंगे. उनके मुताबिक, मोनालिसा के पिता इस रिश्ते के खिलाफ थे इसलिए उन्होंने केरल आकर मंदिर में शादी की. उन्होंने केरल के लोगों का सपोर्ट करने के लिए शुक्रिया अदा किया. मोनालिसा ने कहा- केरल मुझे अच्छा लगा. यहां के लोग बहुत अच्छे हैं।  लव स्टोरी कैसे हुई शुरू मोनालिसा के पति भी पेशे से एक्टर हैं. फरमान ने बताया कि हमारा 6 महीने का प्यार है. लेकिन वो 60 साल के बराबर है. इसलिए हम दोनों ने शादी की. लव स्टोरी बताते हुए फरमान ने कहा- हम दोनों एक फिल्म में साथ काम कर रहे थे. उसी वक्त हमारी बातचीत शुरू हुई. मोनालिसा ने मुझे प्रपोज किया. मैंने शुरुआत में मना किया था. लेकिन मोनालिसा ने कहा कि हमें ये रिश्ता करना है. मुझे तुम पसंद हो. फिर हमें प्यार हुआ और हमने शादी करने का फैसला किया। 

महाराष्ट्र विधान भवन को बम की चेतावनी, बजट सत्र में सुरक्षा अलर्ट के कारण खाली कराई गई बिल्डिंग

 मुंबई महाराष्ट्र विधान भवन को बम से उड़ाने की धमकी वाला मेल आया है. सुरक्षा के मद्देनजर तुरंत विधानसभा को खाली करा दिया गया है. मुंबई पुलिस और बम निरोधक दस्ते (BDS) की टीमें गुरुवार को विधान भवन परिसर में बम की धमकी मिलने के बाद गहन तलाशी अभियान चला रही हैं. कुछ विधायकों और विधान भवन की आधिकारिक आईडी पर एक धमकी भरा ईमेल प्राप्त हुआ है, जिसमें परिसर में विस्फोट करने की बात कही गई है। बजट सत्र चलने की वजह से बड़ी संख्या में मंत्रियों और विधायकों की मौजूदगी को देखते हुए पूरी इमारत को तुरंत खाली करा दिया गया है।सभी कर्मचारियों को बाहर निकाल दिया गया है. सुरक्षा बल वर्तमान में पूरे क्षेत्र और भवन परिसर को सैनिटाइज करने और संदिग्ध वस्तुओं की जांच करने में जुटे हैं। बजट सत्र के दौरान मचा हड़कंप विधानसभा में बजट सत्र की महत्वपूर्ण कार्यवाही चल रही है. इस दौरान विधायकों को धमकी भरे ईमेल की जानकारी मिली. इसके तुरंत बाद सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत ‘फ्लैश’ अलर्ट जारी किया गया. बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल स्क्वाड (BDDS) की टीमें चप्पे-चप्पे की तलाशी ले रही हैं, जिससे किसी भी अप्रिय घटना को टाला जा सके। तलाशी और सुरक्षा अभियान जारी पुलिस अधिकारियों ने बताया कि विधान भवन परिसर को पूरी तरह सील कर दिया गया है. ईमेल के जरिए दी गई इस धमकी की गंभीरता को देखते हुए तकनीकी सेल भी सक्रिय है. फिलहाल पूरी इमारत को सैनिटाइज किया जा रहा है और सुरक्षा टीमें यह सुनिश्चित कर रही हैं कि परिसर सुरक्षित है. जांच जारी रहने तक कर्मचारियों और बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई है।

पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला पर फायरिंग की कोशिश नाकाम, पुलिस के दो जवानों ने बदल दी गोली की दिशा

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता डॉ. फारूक अब्दुल्ला पर बुधवार रात एक शादी समारोह के दौरान जानलेवा हमला हुआ, लेकिन पुलिस के दो जांबाज जवानों- (एक इंस्पेक्टर और एक सब-इंस्पेक्टर) ने अपने साहस से गोली की दिशा बदल दी और हत्या की इस कोशिश को नाकाम कर दिया, जिससे फारूक अब्दुल्ला की जान बाल-बाल बच गई. घटना के बाद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए. वहीं, अब खुफिया सूत्र ने इस घटना को  सुरक्षा में गंभीर चूक करार दिया है। पुलिस के अनुसार, घटना जम्मू के पॉश इलाके ग्रेटर कैलाश में रॉयल पार्क बैंक्वेट हॉल में हुई, जहां फारूक अब्दुल्ला और उप-मुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी पार्टी नेता बी.एस. चौहान के बेटे की शादी में शामिल होने गए थे. समारोह खत्म होने के बाद जब दोनों नेता बाहर निकल रहे थे, तभी 63 वर्षीय आरोपी कमल सिंह ने पीछे से आकर पॉइंट-ब्लैंक रेंज से फारूक अब्दुल्ला पर गोली चला दी। सुरक्षाकर्मियों ने बदली गोली की दिशा पुलिस ने बताया कि आरोपी ने अपनी लाइसेंसी पिस्तौल से एक गोली चलाई, लेकिन सुरक्षा में तैनात दो पुलिसकर्मियों- एक इंस्पेक्टर और एक सब-इंस्पेक्टर- ने तुरंत आरोपी पर झपट्टा मारा. उन्होंने उसे दबोच लिया और गोली चलने के बावजूद उसकी दिशा बदल दी, जिससे गोली किसी को नहीं लगी. आरोपी को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया और उसके पास से इस्तेमाल की गई पिस्तौल भी बरामद कर ली गई। आरोपी का चौंकाने वाला खुलासा पुलिस ने बयान जारी कर कहा, ‘फारूक अब्दुल्ला पर हत्या की कोशिश की गई थी. सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई की और हमले को नाकाम कर दिया. आरोपी को हिरासत में ले लिया. आरोपी की पहचान जम्मू के पुरानी मंडी निवासी कमल सिंह पुत्र अजीत सिंह के रूप में हुई है। जांच में पता चला है कि आरोपी ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वह पिछले 20 साल से फारूक अब्दुल्ला को निशाना बनाने का इंतजार कर रहा था। उमर अब्दुल्ला ने उठाए सवाल घटना के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (फारूक अब्दुल्ला के बेटे) ने एक्स पर पोस्ट किया, ‘अल्लाह मेहरबान है. मेरे पिता को बहुत करीब से बचाया गया. क्लोज प्रोटेक्शन टीम ने गोली को डिफ्लेक्ट किया और हत्या के प्रयास को नाकाम कर दिया। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए कि Z+ सुरक्षा के बावजूद हमलावर इतने करीब कैसे पहुंच गया। सीसीटीवी फुटेज में पूरा घटनाक्रम कैद हो गया है, जिसमें दिखता है कि आरोपी पीछे से आता है, पिस्तौल तानता है और गोली चलाता है, लेकिन सुरक्षाकर्मी तुरंत उसे पकड़ लेते हैं. फारूक अब्दुल्ला और सुरिंदर चौधरी दोनों सुरक्षित हैं और किसी को चोट नहीं आई। सुरक्षा में गंभीर चूक है घटना वहीं, घटना के बाद अब खुफिया सूत्रों ने इस घटना को गंभीर सुरक्षा चूक बताया है. सूत्रों कहना है कि क्लोज प्रोटेक्शन टीम (CPT) को प्रोटेक्टी के इतने करीब किसी को आने नहीं देना चाहिए था. NSG टीम ने तब हरकत में आई, जब सुरक्षा में सेंधमारी हो चुकी थी और आरोपी ने गोली चला दी थी। सूत्रों ने खुलासा किया कि बाहरी घेरे की सुरक्षा और कार्यक्रम स्थल के सैनिटाइजेशन की जिम्मेदारी जम्मू-कश्मीर पुलिस की थी, जिसने अपनी ड्यूटी में ढिलाई की. इसके कारण हमलावर हथियार के साथ वेन्यू के अंदर पहुंच गया. हालांकि, NSG टीम ने हमला होने के बाद त्वरित कार्रवाई की, लेकिन सुरक्षा घेरा टूटने और गोली चलने के बाद उनका एक्शन में आना प्रोटोकॉल पर सवाल खड़े करता है।

ऑयल क्राइसिस से बचाव: पहाड़ी गुफाओं में सुरक्षित रखे गए भारत के रणनीतिक तेल भंडार

नईदिल्ली  मिडिल ईस्ट में ईरान युद्ध और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज जैसे अहम समुद्री रास्तों पर खतरे की खबरों के बीच पूरी दुनिया की नजर तेल सप्लाई पर टिक गई है. ऐसे में भारत को लेकर भी एक बड़ा सवाल उठ रहा है कि अगर वैश्विक सप्लाई अचानक रुक जाए तो देश कितने दिनों तक अपने भंडार के भरोसे चल सकता है. बहुत कम लोगों को पता है कि भारत ने इस तरह की आपात स्थिति के लिए बेहद खास इंतजाम कर रखे हैं. देश ने पहाड़ों की मजबूत चट्टानों के भीतर विशाल गुफाओं जैसी संरचनाओं में कच्चे तेल का भंडार छिपाकर रखा है. ये गुफाएं दरअसल भारत के स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व हैं. इन्हें युद्ध, आपदा या वैश्विक सप्लाई रुकने जैसी स्थिति में इस्तेमाल करने के लिए बनाया गया है. दरअसल इस पूरी योजना की शुरुआत अचानक नहीं हुई थी. इसकी कहानी 1991 के उस आर्थिक संकट से जुड़ी है जब गल्फ वॉर के दौरान भारत के सामने गंभीर ऊर्जा संकट खड़ा हो गया था. उस समय ऐसी खबरें सामने आई थीं कि देश के पास तेल का स्टॉक बेहद सीमित रह गया था. कुछ रिपोर्टों में कहा गया कि भारत के पास सिर्फ तीन दिनों का तेल बचा था, जबकि कुछ में इसे एक सप्ताह या दस दिन बताया गया. असल समस्या यह थी कि तेल खरीदने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से खत्म हो रहा था. उस संकट ने भारत को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना जरूरी है. 1991 के संकट ने क्यों बदली भारत की सोच     1991 के समय भारत के पास जो तेल स्टॉक था वह असल में तेल कंपनियों का कमर्शियल भंडार था. यानी वह रोजमर्रा की सप्लाई के लिए रखा जाता था. सरकार के पास अलग से ऐसा कोई रणनीतिक भंडार नहीं था जिसे सिर्फ आपात स्थिति में इस्तेमाल किया जा सके. हालांकि उस समय भी तेल कंपनियां सरकारी नियंत्रण में ही थीं, लेकिन फिर भी संकट के समय अलग से सुरक्षित रिजर्व होना जरूरी समझा गया.     दुनिया के कई बड़े देशों ने पहले से ही अपने स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) बना रखे थे. इनका मकसद यही होता है कि अगर युद्ध, वैश्विक संकट या प्राकृतिक आपदा की वजह से तेल सप्लाई रुक जाए तो देश कुछ समय तक अपने भंडार के सहारे चल सके. इसे ऐसे समझा जा सकता है जैसे पुराने स्कूटरों में पेट्रोल टैंक में एक रिजर्व सिस्टम होता था. जब टैंक का पेट्रोल खत्म हो जाता था तो रिजर्व खोलकर नजदीकी पेट्रोल पंप तक पहुंचा जा सकता था. उसी तरह यह सरकारी रिजर्व होता है जिसे सिर्फ संकट की स्थिति में ही खोला जाता है.     तेल कंपनियों के कमर्शियल भंडार आम तौर पर बड़े-बड़े तेल टैंकों या डिपो में रखे जाते हैं. लेकिन रणनीतिक भंडार के लिए ऐसी जगह चाहिए होती है जहां युद्ध या हमले का असर कम से कम हो. अगर कोई दुश्मन देश तेल डिपो को निशाना बना दे या किसी आपदा में डिपो नष्ट हो जाए तो संकट और बढ़ सकता है. इसलिए तय किया गया कि रणनीतिक भंडार जमीन के ऊपर नहीं बल्कि चट्टानों के भीतर बनाए जाएं.     इसके लिए कई भौगोलिक मानकों पर विचार किया गया. पहली शर्त थी कि वहां मजबूत चट्टानें हों, जिनमें बड़ी गुफाएं बनाई जा सकें. दूसरी शर्त यह थी कि उन चट्टानों से तेल रिसना नहीं चाहिए. तीसरी शर्त थी कि उस इलाके में भूकंप का खतरा कम हो. चौथी शर्त यह थी कि समुद्री बंदरगाह पास हो, ताकि जहाजों से तेल आसानी से लाया जा सके. और पांचवीं शर्त यह थी कि रिफाइनरी भी ज्यादा दूर न हो, ताकि पाइपलाइन से तेल पहुंचाया जा सके. भारत के पास तेल भंडारों की स्थिति:     भारत के पास करीब 5.33 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता का स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) है.     यह भंडार आपात स्थिति में लगभग 9 से 10 दिनों की तेल जरूरत पूरी कर सकता है.     भारत ने ये रणनीतिक तेल भंडार पहाड़ों की चट्टानों के भीतर गुफाओं जैसी संरचनाओं में बनाए हैं.     देश में फिलहाल तीन प्रमुख स्थानों पर ये भंडार मौजूद हैं- विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पडूर.     इन भंडारों का इस्तेमाल युद्ध, वैश्विक तेल संकट, प्राकृतिक आपदा या सप्लाई रुकने जैसी स्थिति में किया जाता है.     भारत सरकार इन्हें इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड (ISPRL) के जरिए संचालित करती है.     भारत अब दूसरे चरण में ओडिशा के चंडीखोल और पडूर विस्तार के जरिए इस क्षमता को और बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा है. पहले चरण में तीन जगहों पर कुल 5.33 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता के भंडार बनाने का फैसला हुआ. भारत ने कहां बनाए रणनीतिक तेल भंडार     सभी मानकों को देखते हुए दक्षिण भारत के तटीय इलाकों को चुना गया. सरकार ने इस काम के लिए एक अलग कंपनी बनाई इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड (ISPRL). इस कंपनी को जिम्मेदारी दी गई कि वह देश के लिए रणनीतिक तेल भंडार तैयार करे.     पहले चरण में तीन जगहों पर कुल 5.33 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता के भंडार बनाने का फैसला हुआ. पहला भंडार आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में बनाया गया जिसकी क्षमता 1.33 मिलियन मीट्रिक टन है. दूसरा कर्नाटक के मंगलुरु में 1.5 मिलियन मीट्रिक टन का भंडार बनाया गया. तीसरा कर्नाटक के ही पडूर (उडुपी के पास) में 2.5 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता का बनाया गया.     इन तीनों भंडारों को पहाड़ों की मजबूत चट्टानों के भीतर गुफाओं की तरह बनाया गया है. विशाखापत्तनम में ग्रेनाइट चट्टानों के भीतर सुरंग जैसी संरचनाएं बनाई गई हैं. यह स्थान इसलिए चुना गया क्योंकि यहां भूकंप का खतरा कम है और पास में बंदरगाह तथा HPCL की रिफाइनरी मौजूद है. यह भंडार 2015 में तैयार हुआ और इसमें इराक से लाकर तेल भरा गया.     मंगलुरु में बने भंडार को बसाल्ट चट्टानों के भीतर बनाया गया है. यह 2016 में तैयार हुआ और इसमें अबू धाबी से तेल लाकर रखा गया. तीसरा भंडार पडूर में बनाया गया जो 2018 में पूरा हुआ. यहां भी बसाल्ट … Read more

देश में LPG का हाल: डेढ़ करोड़ घरों में PNG कनेक्शन, हर घर में मिलेगा दो सिलेंडर

नई दिल्ली युद्ध की वजह से कई देशों में तेल और गैस की किल्लतें बढ़ती जा रही हैं. भारत संकट से पहले अलर्ट हो गया है, और जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं. सरकार का कहना है कि देश के लोग घबराएं, फिलहाल तेल और गैस को लेकर कोई संकट नहीं है। दरअसल, 140 करोड़ आबादी वाले देश भारत तेल और रसोई गैस के लिए काफी हदतक दूसरे देशों पर निर्भर है. यानी सीधा रसोई से जुड़ा हुआ मामला है, गैस की किल्लत की खबर से लोग परेशान हैं. लेकिन खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हालात पर नजर बनाए हुए हैं, और जरूरी आदेश दे रहे हैं, ताकि देश में रसोई गैस की कोई किल्लत न हो। केंद्र सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार देश में करीब 33 करोड़ घरेलू LPG कनेक्शन हैं. अधिकतर घरों में दो सिलेंडर होते हैं, इस हिसाब से देश में LPG सिलेंडर कुल संख्या करीब 66 करोड़ तक हो सकती है. इनमें से बड़ी संख्या प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत दिए गए कनेक्शनों की है, जिससे ग्रामीण और गरीब परिवारों तक भी रसोई गैस की पहुंच बढ़ी है. इसके अलावा देश में कमर्शियल सिलेंडर की संख्या भी करोड़ों में है।  देश में 33 करोड़ गैस कनेक्शन  सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2014 में देश में LPG कनेक्शनों की संख्या लगभग 14.5 करोड़ थी. पिछले 10 वर्षों में यह संख्या करीब दोगुनी होकर 33 करोड़ तक पहुंच गई है. प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत करीब 10.4 करोड़ गरीब परिवारों को मुफ्त या सब्सिडी वाले LPG कनेक्शन दिए गए हैं. गांव-गांव तक रसोई गैस की उपलब्धता बढ़ाने के लिए देशभर में गैस एजेंसियों और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का भी तेजी से विस्तार किया गया है. दूसरी ओर, शहरों में पाइप के जरिए घरों तक गैस पहुंचाने की व्यवस्था यानी PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) भी धीरे-धीरे बढ़ रही है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार फिलहाल देश में करीब 1.5 करोड़ घरों में PNG कनेक्शन उपलब्ध हैं. यह सुविधा मुख्य रूप से महानगरों और बड़े शहरों में उपलब्ध है,  जहां सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के जरिए घरों तक पाइपलाइन से गैस पहुंचाई जाती है.  PNG नेटवर्क का इस्तेमाल केवल घरों तक ही सीमित नहीं है. इसके अलावा देशभर में करीब 45 हजार से ज्यादा कमर्शियल प्रतिष्ठान, जैसे होटल और रेस्टोरेंट, 20 हजार से ज्यादा उद्योग भी पाइप गैस का इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे ऊर्जा आपूर्ति अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित मानी जाती है, क्योंकि इसमें सिलेंडर की जरूरत नहीं होती है.  PNG की सप्लाई बड़े शहरों में  यही नहीं, सरकार आने वाले वर्षों में PNG नेटवर्क का और विस्तार करने की योजना बना रही है. पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन परियोजनाओं के माध्यम से 2032 तक करीब 12.5 करोड़ घरों तक PNG पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है. इसके लिए देश के कई नए शहरों और जिलों में गैस पाइपलाइन बिछाने का काम जारी है.  हालांकि फिलहाल भारत में रसोई गैस की जरूरतों का बड़ा हिस्सा LPG सिलेंडरों के जरिए ही पूरा होता है, क्योंकि PNG नेटवर्क अभी सीमित शहरों तक ही पहुंच पाया है. भारत में साल 2025 के आसपास लगभग 31–33 मिलियन मीट्रिक टन LPG की खपत हुई. इस हिसाब से लगभग 85 हजार टन LPG की रोजाना खपत होती है. जबकि भारत की कुल प्राकृतिक गैस खपत लगभग 188 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन (MMSCMD) के आसपास है.  इसके अलावा सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत के पास करीब 8 हफ्ते का तेल भंडार उपलब्ध है. भारत के तेल आयात का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है और इसका एक महत्वपूर्ण भाग होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते से गुजरता है. जिस वजह से वैश्विक स्तर पर संकट दिख रहा है.  बता दें, भारत ने जोखिम कम करने के लिए पिछले कुछ वर्षों में अपनी रणनीति बदली है. देश ने रूस, अमेरिका और अफ्रीकी देशों से भी कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई है. लेकिन अगर वैश्विक स्तर पर लंबे समय तक तेल संकट बना रहता है तो इससे पेट्रोल-डीजल की कीमतों, महंगाई और देश के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है. इस बीच राहत की बात ये है कि कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट देखी जा रही है. ब्रेंट क्रूड की कीमत सोमवार की हाई 120 डॉलर प्रति बैरल से फिसलकर 90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है.

रसोई गैस संकट LIVE: सिलेंडर की किल्लत, ब्लैक मार्केट में कीमत 300 रुपये प्रति किलो तक पहुंची

नई दिल्ली अमेरिका और इजरायल के खिलाफ ईरान की जंग का असर भारत के करोड़ों लोगों पर पड़ता दिख रहा है. पश्चिम एशिया में जारी इस युद्ध के बीच उत्तर प्रदेश, बिहार से लेकर तेलंगाना और तमिलनाडु तक लाखों लोग एलपीजी सिलेंडर की किल्लत से जूझ रहे हैं. एलपीजी सप्लाई बंद होने जयपुर स्थित बोरोसिल के कारखाने में काम बंद करना पड़ा और कंपनी प्रबंधन ने करीब तीन हजार श्रमिकों को बुधवार से काम पर नहीं आने के लिए कह दिया है. वहीं दिल्ली हाईकोर्ट की लॉयर्स कैंटीन में एलपीजी गैस सिलेंडर उपलब्ध न होने के कारण फिलहाल मुख्य भोजन (मेन कोर्स) तैयार और परोसा नहीं जा रहा है। बिहार सहित कई राज्यों में कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई रोक दी गई है. वहीं पटना से लेकर अयोध्या तक कई लोग सुबह ही गैस एजेंसी के गोदाम के बाहर लाइन लगाकर खड़े हैं. कई लोगों की शिकायत है कि गैस सिलेंडर की बुकिंग करवाने के बावजूद 4-5 दिनों तक एलपीजी सिलेंडर उन्हें नहीं मिल पाई है। रसोई गैस की सप्लाई में दिक्कत की खबरों के सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. पूरे देश में केंद्र सरकार ने ईसीए यानी एसेंशियल कमोडिटी एक्ट लागू कर दिया है. केंद्र सरकार ने एलपीजी और सीएनजी की आपूर्ति तय करने के लिए बड़ा फैसला लिया है. सरकार के मुताबिक, आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी और कुछ उद्योगों को सीमित गैस आपूर्ति मिलेगी। प्रधानमंत्री मोदी ने भी कैबिनेट मीटिंग में मंत्रियों को साफ निर्देश दिए कि पश्चिम एशिया में जारी संकट का असर आम आदमी पर बिल्कुल नहीं पड़ना चाहिए. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस वैश्विक उथल-पुथल के समय जनता का भरोसा बनाए रखना सबसे ज़रूरी है. प्रधानमंत्री ने मंत्रियों से कहा कि तेल की क़ीमतें स्थिर हैं, ये बात लोगों तक पहुंचाएं और ये भी बताएं कि देश में तेल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. प्रधानमंत्री ने ये भी कहा कि भारत ने सप्लाई चेन मैनेजमेंट सिस्टम इस संकट को ध्यान में रखकर तैयार किया है, इसे भी जनता तक पहुंचाया जाए। भारत सरकार ने दावा किया है कि इस जंग का तेल की कीमतों पर कोई असर नहीं पड़ेगा और देश में घरेलू उपभोक्ता के लिए गैस की कोई कमी नहीं है. सरकार की तरफ से बताया गया कि भारत में फ़िलहाल पेट्रोल और डीज़ल के दाम स्थिर ही रहेंगे वो नहीं बढ़ेंगे. वहीं गैस क़ीमतों में हुआ 60 रुपये का इजाफा मौजूदा हालत की वजह से नहीं, बल्कि पिछले साल की अंडरकवरी की वजह से बढ़े हैं। दरअसल इजरायल और अमेरिका के खिलाफ ईरान की जंग के चलते मिडिल ईस्ट के प्रमुख ऊर्जा परिवहन मार्गों में आई बाधाओं के चलते पिछले एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में शनिवार को ही इजाफा किया गया था. घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की कीमत में 60 रुपये और कमर्शियल रसोई गैस सिलेंडरों की कीमत में 115 रुपये की बढ़ोतरी की गई। न रसोई गैस की बुकिंग हो रही, न एलपीजी सिलेंडर मिल रहा… ब्लैक मार्केट में 300 रुपये किलो पहुंचा दाम एलपीजी गैस सिलेंडर की किल्लत से देशभर के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. नोएडा के रहने वाले लोगों का कहना है कि पिछले 5-6 दिनों से ऑनलाइन गैस बुकिंग नहीं हो पा रही है. जब लोग गैस एजेंसी से संपर्क करते हैं तो उन्हें बताया जाता है कि सिस्टम में तकनीकी खराबी है. वहीं एजेंसी पर जाकर पूछने पर भी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है. गैस बुक कराने के लिए लोगों को घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है, लेकिन इसके बाद भी सिलेंडर मिलने की कोई गारंटी नहीं है। गैस बुकिंग में दिक्कत के चलते लोगों को ब्लैक में गैस खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि एक किलो गैस के लिए 300 से 400 रुपये तक देने पड़ रहे हैं. गैस बुकिंग कराने आई महिलाओं ने बताया कि एजेंसी वाले उनका नंबर लिखकर बाद में फोन करने की बात कहते हैं, लेकिन कई दिनों बाद भी न तो फोन आता है और न ही गैस मिलती है. लोगों का कहना है कि एजेंसी के बाहर कहा जा रहा है कि गैस उपलब्ध नहीं है, जबकि इलाके में ब्लैक में गैस बेची जा रही है। एक महिला ने नाराजगी जताते हुए कहा कि वे दिल्ली-नोएडा कमाने आए हैं, भूखे रहने के लिए नहीं. अगर सारी कमाई गैस खरीदने में ही खर्च हो जाएगी तो परिवार का गुजारा कैसे होगा. गैस की कमी के कारण कई परिवारों को मजबूरन बाहर से खाना खरीदकर गुजारा करना पड़ रहा है. रसोई गैस हुई खत्म तो इंडक्शन खरीदने भागे लोग, दुकानों पर भीड़ रसोई गैस संकट की खबरों के बीच अब इलेक्ट्रिकल शॉप्स पर इंडक्शन की मांग में इजाफा देखने को मिल रहा है. दिल्ली के दरियागंज की एक इलेक्ट्रिकल शॉप्स के मालिक विकास ने बताया कि पिछले दो तीन दिन से इंडक्शन की मांग और इंक्वायरी बढ़ गई है. इंडक्शन खरीदने आए एक ग्राहक मोहम्मद शफी ने बताया कि गैस की दिक्कत है इसलिए खरीद रहे हैं. गैस की बुकिंग नहीं हो पा रही है. फिलहाल के लिए गैस है, लेकिन सेफ साइड के लिए ले रहे हैं, अगर नहीं मिली तो इंडक्शन रहे।  दिल्ली हाईकोर्ट की कैंटीन में एलपीजी खत्म, मेन कोर्स हुआ बंद दिल्ली हाईकोर्ट की लॉयर्स कैंटीन में एलपीजी गैस सिलेंडर उपलब्ध न होने के कारण फिलहाल मुख्य भोजन (मेन कोर्स) तैयार और परोसा नहीं जा रहा है. कैंटीन प्रबंधन की ओर से जारी सूचना के अनुसार, वर्तमान में एलपीजी गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं है, जिसके चलते मुख्य भोजन की तैयारी संभव नहीं हो पा रही है. गैस सप्लाई कब तक बहाल होगी, इसकी अभी कोई जानकारी नहीं है. गैस उपलब्ध होते ही मुख्य भोजन की तैयारी फिर से शुरू कर दी जाएगी. हालांकि इस दौरान सैंडविच, सलाद, फ्रूट चाट और अन्य हल्के नाश्ते उपलब्ध रहेंगे और इन्हें परोसा जाता रहेगा। एलपीजी सप्लाई बंद होने जयपुर का बोरोसिल प्लांट ठप, 3000 मजदूरों की कर दी गई छुट्टी अमेरिका-इजरायल के साथ ईरान की जंग का असर अब भारत के उद्योगों पर भी दिखने लगा है. जयपुर के गोविंदगढ़ क्षेत्र में स्थित बोरोसिल लिमिटेड की फैक्ट्री में एलपीजी गैस की … Read more

तरनजीत सिंह संधू के नेतृत्व में चलेगी दिल्ली सरकार: सीएम रेखा गुप्ता

नई दिल्ली दिल्ली के नए उपराज्यपाल के तौर पर बुधवार को तरनजीत सिंह संधू ने पदभार ग्रहण किया। इस दौरान दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि भाजपा सरकार उपराज्यपाल के नेतृत्व में काम करेगी। सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि मैं दिल्ली के विकास को तेज करने में मदद करने के लिए आपका दिल्ली में स्वागत करती हूं। हमें पूरा भरोसा है कि आपकी मौजूदगी से दिल्ली की तरक्की और तेज़ होगी, शहर की समस्याओं का बेहतर समाधान मिलेगा और दिल्ली सरकार आपके मार्गदर्शन और दिशा में काम करेगी। हम आपका आशीर्वाद चाहते हैं। सीएम रेखा गुप्ता ने एक्स पोस्ट में लिखा कि दिल्ली के नवनियुक्त उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू को पदभार ग्रहण करने पर हार्दिक बधाई। उनके शपथ ग्रहण समारोह में सम्मिलित हुई। दिल्ली हम सबकी साझा विरासत है। इसकी प्रगति और समावेशी समृद्धि के लिए हम सभी मिलकर कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मुझे पूर्ण विश्वास है कि आपके व्यापक और दीर्घ प्रशासनिक अनुभव से दिल्ली में चल रहे विकास कार्यों को नई गति और ऊंचाइयां प्राप्त होंगी। आपके सफल और यशस्वी कार्यकाल के लिए हार्दिक मंगलकामनाएं। दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने एक्स पोस्ट में लिखा कि सीएम रेखा गुप्ता की उपस्थिति में दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने सरदार तरनजीत सिंह संधू को दिल्ली के उपराज्यपाल के रूप में शपथ दिलाई। इसी के साथ उपराज्यपाल के रूप में तरनजीत सिंह संधू ने पदभार ग्रहण किया। मुझे पूरा विश्वास है कि उनके अनुभव, दूरदृष्टि और कुशल मार्गदर्शन में दिल्ली के विकास और सुशासन को नई दिशा और गति मिलेगी। मैं पुन उन्हें उनके आगामी कार्यकाल के लिए बहुत-बहुत बधाईयां देता हूं। मंत्री प्रवेश वर्मा ने एक्स पोस्ट में लिखा कि दिल्ली के नवनियुक्त उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू को पदभार ग्रहण करने पर हार्दिक बधाई। मुझे विश्वास है कि आपके समृद्ध प्रशासनिक अनुभव और दूरदर्शी नेतृत्व में दिल्ली के विकास कार्यों को नई गति मिलेगी तथा राजधानी प्रगति नए आयाम स्थापित करेगी। आपके सफल एवं जनसेवा से परिपूर्ण कार्यकाल के लिए हार्दिक शुभकामनाएं।

अनुराग ठाकुर का राहुल गांधी पर निशाना, कहा– ‘लीडर ऑफ प्रोपेगेंडा’, सदन के नियम तोड़ते हैं

नई दिल्ली भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने बुधवार को लोकसभा में विपक्ष (एलओपी) के नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उन्हें ‘लीडर ऑफ प्रोपेगेंडा’ बताया।अनुराग ठाकुर ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी विदेशों में भारत और भारतीय लोकतंत्र की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं और सदन के नियमों का भी पालन नहीं करते। सदन में बोलते हुए अनुराग ठाकुर ने कहा, “कुछ लोग इस सदन में माइनस ट्रिपल सी के साथ आते हैं- न सिविक सेंस, न कॉमन सेंस और न ही कॉन्स्टिट्यूशनल सेंस। जब हम लोकसभा के सदस्य बने थे, तब हमें बताया गया था कि सदन के अंदर कैसे व्यवहार करना चाहिए। लेकिन एक व्यक्ति है जो इन सभी नियमों को तोड़ता है, और वह है प्रोपेगेंडा का लीडर।” उन्होंने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए उन्हें ‘फोमो गांधी’ भी कहा। अनुराग ठाकुर ने कहा, “यह फोमो गांधी हैं। इन्हें डर रहता है कि कहीं वे सुर्खियों से बाहर न हो जाएं।” अनुराग ठाकुर ने यह बयान उस दौरान दिया जब वे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को हटाने के प्रस्ताव के खिलाफ बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि सदन के लगभग सभी दलों के सांसदों ने ओम बिरला के कार्यों की सराहना की है। उन्होंने कहा, “ओम बिरला इस सदन के प्रधान हैं और वे बने रहेंगे। हर पार्टी के सदस्य ने उनके पक्ष में बात कही है।” भाजपा सांसद ने आगे कहा कि लोकसभा अध्यक्ष के रूप में ओम बिरला ने सभी दलों को बराबर बोलने का अवसर दिया है। उन्होंने कहा, “चाहे कांग्रेस हो या समाजवादी पार्टी, ओम बिरला ने सभी को बोलने का मौका दिया। यहां तक कि जिन सांसदों को अपनी ही पार्टी से कम अवसर मिला, उन्हें भी ओम बिरला ने बोलने का मौका दिया। इसलिए प्रत्येक सदस्य उनकी प्रशंसा कर रहा है और उनके समर्थन में बोल रहा है।” इसके अलावा अनुराग ठाकुर ने रक्षा और सुरक्षा के मुद्दे पर भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सशस्त्र बलों को पूरी छूट दी थी। प्रधानमंत्री मोदी ने सेना से कहा था, ‘जो उचित है, वह करो।’

‘ईद पर भाई को रिहा नहीं करेगी सरकार’: अलीमा खान का बड़ा बयान, पाकिस्तान की राजनीति गरमाई

इस्लामाबाद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बहनें अडियाला जेल के बाहर फिर से धरने पर बैठ गई हैं। तीनों को चेक पोस्ट पर रोका गया जिसके विरोध में उन्होंने धरना दिया। स्थानीय मीडिया ने बुधवार को बताया कि पुलिस ने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के कार्यकर्ताओं को भी पीछे धकेल दिया, जो जेल की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे। मंगलवार को जेल के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए, इमरान खान की अलीमा खान ने इसे बेहद निराशाजनक रवैया करार दिया। उन्होंने कहा कि कोर्ट के ऑर्डर के बावजूद परिवार के लोगों को पीटीआई संस्थापक से मिलने नहीं दिया गया। पीटीआई के आधिकारिक एक्स हैंडल पर अलीमा खान की एक वीडियो क्लिप अपलोड की गई है, जिसमें वह गुस्से और हताशा में कह रही हैं कि उन्हें यकीन है कि भाई को ईद में भी रिहा नहीं किया जाएगा। एक सवाल के जवाब में, अलीमा खान ने उन खबरों को खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि उनके भाई को ईद से पहले रिहा कर दिया जाएगा। पाकिस्तान के अनुसार, अलीमा ने उन खबरों को लेकर पूछे गए सवाल पर जवाब दिया जिसमें इमरान खान को ईद में रिहा किए जाने का दावा किया गया था। उन्होंने कहा, “वे उसे रिहा नहीं करना चाहते। आजकल जो दुनिया में हो रहा है उस पर ध्यान देंगे तो, और आपको पता चल जाएगा कि इमरान खान जेल में क्यों हैं? उनके साथ जो हो रहा है उसे तारीख (इतिहास) याद रखेगी।” इससे पहले फरवरी में, जेल में बंद पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के नेताओं ने पाकिस्तान के चीफ जस्टिस को एक पत्र लिखा था, जिसमें इमरान खान को कानूनी और मेडिकल मदद देने में कथित रुकावटों पर गंभीर चिंता जताई गई थी। नेताओं ने चीफ जस्टिस याह्या अफरीदी को लिखे अपने खत में उनसे इस मामले में दखल देने की अपील की ताकि इस मामले में इंसाफ हो सके। स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने अफरीदी से यह भी अनुरोध किया कि वे इस मामले पर ध्यान दें और यह पक्का करें कि इमरान खान को कानून के मुताबिक निजी चिकित्सक, कानूनी सलाहकार और परिवार के लोगों से मिलने की इजाजत मिले। पत्र में, पीटीआई नेताओं ने इमरान खान के इलाज की तुलना पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के 2019 में हुए मेडिकल ट्रीटमेंट से की। उन्होंने कहा कि तब की सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि नवाज शरीफ को लाहौर के सर्विसेज हॉस्पिटल ले जाया जाए और जब उनका प्लेटलेट काउंट कम था तो उन्हें सही मेडिकल केयर दी जाए। उन्होंने आगे कहा कि नवाज शरीफ के पर्सनल डॉक्टर मेडिकल बोर्ड की सभी मीटिंग में शामिल होते थे, उनका परिवार और वकील भी उनसे नियमित तौर पर मिलते थे।  

स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर अमित शाह का पलटवार—लोकतंत्र का किया जा रहा अपमान

नई दिल्ली लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष के नो-कॉन्फिडेंस मोशन पर, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, ‘यह कोई आम बात नहीं है। करीब 4 दशक बाद, लोकसभा स्पीकर के खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस मोशन लाया गया है। यह पार्लियामेंट्री पॉलिटिक्स और इस सदन के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।’   विपक्ष इमानदारी पर उठा रही सवाल शुरूआती दिनों को याद करते हुए गृह मंत्री बोले, ‘मैं पूरे सदन को बताना चाहता हूं कि विद्यमान स्पीकर की नियुक्ति जब हुई, तब दोनों दलों के नेता ने एक साथ उन्हें आसन पर बैठाने का काम किया। इसका मतलब है कि स्पीकर को अपने दायित्वों के निर्वहन के लिए पक्ष और प्रतिपक्ष दोनों ने एक प्रकार से मुक्त माहौल भी देना है और दायित्वों के निर्वहन के लिए उनका समर्थन भी करना है। मगर आज स्पीकर के निर्णय पर कोई असहमति तो व्यक्त हो सकती है, लेकिन लोकसभा के नियमों में स्पीकर के निर्णयों को अंतिम माना गया है। इसके विपरित विपक्ष ने स्पीकर की निष्ठा पर सवालिया निशान खड़ा किया। ये लोकसभा भारत के लोकतंत्र की सबसे बड़ी पंचायत है, और न केवल भारत, बल्कि दुनियाभर में हमारी लोकतंत्र की साख बनी है, गरिमा बनी है… और पूरी दुनिया लोकतंत्र की इस प्रतिष्ठा को स्वीकार करती है।लेकिन जब इस पंचायत के मुखिया पर, उसकी निष्ठा पर सवालिया निशान लगता है तो केवल देश में नहीं, पूरी दुनिया में हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़ा होता है। लेकिन यहां उनपर शंका के सवाल उठा दिए। सदन आपसी विश्वास पर चलता है: शाह अमित शाह बोले, ‘मैं बताना चाहता हूं कि 75 साल से इन दोनों सदनों ने हमारे लोकतंत्र की नींव को पाताल से भी गहरा किया है, लेकिन आज विपक्ष ने इस साख पर एक प्रकार से सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। सदन आपसी विश्वास से चलता है। पक्ष और विपक्ष—दोनों के लिए सदन के जो स्पीकर होते हैं, वे कस्टोडियन होते हैं। इसलिए नियम बनाए गए हैं। यह सदन कोई मेला नहीं है; यहां नियमों के अनुसार चलना पड़ता है। जो बातें सदन के नियम परमिट नहीं करते, उस तरह से बोलने का किसी को अधिकार नहीं है, चाहे वह कोई भी हो।’  

कर्नाटक बनेगा आईटी एक्सपोर्ट का पावरहाउस, इस साल 5.50 लाख करोड़ से ज्यादा निर्यात का अनुमान: प्रियांक खड़गे

बेंगलुरु कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खड़गे ने बुधवार को विधानसभा में कहा कि राज्य का आईटी निर्यात इस वर्ष 5.50 लाख करोड़ रुपये को पार कर सकता है। भाजपा विधायक वेदव्यास कामत के सवाल का जवाब देते हुए प्रियांक खड़गे ने कहा, “कर्नाटक में आईटी-बीटी की संभावनाओं की बात करें तो 2022-23 में हमारा आईटी-बीटी निर्यात 3.55 लाख करोड़ रुपये था। 2023-24 में यह बढ़कर 4.09 लाख करोड़ रुपये हो गया और पिछले वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर 4.58 लाख करोड़ रुपये हो गया। इस वर्ष 31 मार्च को समापन तिथि है। मुझे 100 प्रतिशत भरोसा है कि इस साल हम 5.50 लाख करोड़ रुपये को पार कर जाएंगे।” उन्होंने कहा, “इस 5.50 लाख करोड़ रुपये में से मैसूरु शहर से लगभग 3,000 करोड़ रुपये का आईटी निर्यात होता है, जबकि मैंगलुरु और तटीय क्षेत्र से लगभग 3,500 करोड़ रुपये का योगदान है। बेलगावी और हुब्बली मिलकर 2,000 करोड़ से 2,500 करोड़ रुपये के बीच आईटी निर्यात करते हैं। बाकी हिस्सा बेंगलुरु शहर से आता है।” खड़गे ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी नहीं कहा कि मैंगलुरु में संभावनाएं नहीं हैं। उन्होंने कहा, “इस क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। अगर स्थानीय नेता अनुकूल माहौल बनाते हैं तो हम स्थानीय अर्थव्यवस्था को तेज कर सकते हैं। मैं विधायक के ध्यान में लाना चाहता हूं कि बेंगलुरु जिले का जीडीपी लगभग 39.9 प्रतिशत, यानी करीब 40 प्रतिशत है। इसके बाद मैंगलुरु 5.4 प्रतिशत के साथ है और तीसरा 3.4 प्रतिशत है। अंतर साफ देखा जा सकता है।” उन्होंने कहा, “कहां 40 प्रतिशत और कहां 5.4 प्रतिशत? मैं ईमानदारी से कहता हूं कि अगर उस क्षेत्र में पूंजी निवेश के लिए उपयुक्त माहौल बनाया जाए तो अगले तीन वर्षों में यह लगभग तीन प्रतिशत वृद्धि हासिल कर सकता है। मैंने यही कहा था और मैं अपनी बात पर कायम हूं।” मैंगलुरु क्षेत्र को अक्सर सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील माना जाता है और अतीत में यहां सांप्रदायिक झड़पों, विरोध प्रदर्शनों और बदले की हत्याओं की घटनाएं हुई हैं। खड़गे ने ऐसे मुद्दों पर अक्सर सांप्रदायिक ताकतों और भाजपा की आलोचना की है। उन्होंने कहा, “विकास सुनिश्चित करना केवल आपकी जिम्मेदारी नहीं है, यह मेरी भी जिम्मेदारी है।” खड़गे ने कहा, “राज्यभर में हमने आईटी और संबंधित कंपनियों के साथ 380 एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। तटीय क्षेत्र में हम मणिपाल, उडुपी और मैंगलुरु को एक क्लस्टर के रूप में लेकर उन्हें इकोनॉमिक एक्सेलेरेटर प्रोग्राम के तहत ला रहे हैं। हमारी ओर से एक टेक्नोलॉजी कन्वेंशन आयोजित किया जा रहा है और बियॉन्ड बेंगलुरु क्लस्टर पहल के तहत 25 करोड़ रुपये का सीड फंड जारी किया गया है। कर्नाटक एक्सेलेरेशन प्रोग्राम के तहत शाइन प्रोग्राम के माध्यम से गठजोड़ बनाए गए हैं और स्टार्टअप्स को सहायता दी जा रही है।” खड़गे ने कहा कि तटीय क्षेत्र में आईटी पार्क स्थापित करने के मानदंडों को सरल बनाने की मांग भी उठी है। उन्होंने कहा, “एक सप्ताह के भीतर स्थानीय विधायकों की मांग के अनुसार मानदंडों को सरल बनाया जाएगा। हम ओशन फार्मिंग नीति लाने की भी कोशिश कर रहे हैं। डेटा सेंटरों को भी प्राथमिकता दी जा रही है। यह क्लस्टर केवल राज्य ही नहीं बल्कि देश के लिए भी महत्वपूर्ण है। संभावनाएं बहुत हैं, लेकिन हमें अनुकूल माहौल बनाना होगा।” भाजपा के कामत ने कहा कि चुनौतियों के बावजूद तटीय क्षेत्र विकास के मामले में बेंगलुरु के बाद दूसरे स्थान पर है। उन्होंने मंत्री से कम जीडीपी वाले जिलों जैसे कलबुर्गी के लिए योजनाओं को स्पष्ट करने को कहा। बता दें कि प्रियांक खड़गे स्वयं कलबुर्गी से आते हैं, जिसे राज्य के सबसे पिछड़े जिलों में से एक माना जाता है। जवाब में खड़गे ने कहा कि विकास भौगोलिक और जनसांख्यिकीय लाभों पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा, “तटीय कर्नाटक को जो लाभ उपलब्ध हैं, वे कल्याण कर्नाटक क्षेत्र में नहीं हैं। जो फायदे हमारे पास हैं, वे आपके पास नहीं हैं। आपके पास समुद्र है, जिससे समुद्री खेती की संभावना है, जबकि हम तूर दाल उगाते हैं। जीडीपी योगदान के मामले में कलाबुरगी 1.9 प्रतिशत का योगदान देता है। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि बेंगलुरु ग्रामीण भी जीडीपी में 1.9 प्रतिशत का योगदान देता है। हम इन क्षेत्रों में विकास तेज करने के तरीकों पर विचार कर रहे हैं। राज्य विकास को केवल मैंगलुरु या बेंगलुरु तक सीमित नहीं रख रहा है। जहां भी राज्य में संभावनाएं हैं, वहां जीडीपी सुधारने के लिए हम हस्तक्षेप कर रहे हैं।”

ईरान से भारतीय छात्रों की निकासी का मिशन तैयार, कल भेजा जाएगा पहला जत्था, दो रास्तों से होगी वापसी

ईरान पश्चिमी एशियाई देश ईरान पर इजरायल और अमेरिकी हमले के बाद पूरा मध्य-पूर्व क्षेत्र संघर्ष के दौर से गुजर रहा है। हालांकि, इस जंग के बीच ईरान में फंसे भारतीय छात्रों को वहां से निकालने का इंतजाम पूरा कर लिया गया है। युद्ध के तेरहवें दिन यानी गुरुवार को भारतीय छात्रों का पहला जत्था ईरान से आर्मेनिया के रास्ते निकलेगा। उम्मीद है कि पहला बैच गुरुवार को आर्मेनिया बॉर्डर के लिए रवाना होगा क्योंकि वहां से निकलने की योजना धीरे-धीरे बन रही है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय छात्रों और यूनिवर्सिटी प्रशासन के बीच समन्वय के बाद उन्हें सुरक्षित निकासी के लिए आर्मेनिया या अजरबैजान होकर दो मार्गों के विकल्प दिए गए हैं। ताकि ईरान से बाहर निकाले जा सकें। इनमें अधिकांश मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्र हैं। उनमें भी अधिकांश जम्मू-कश्मीर के रहने वाले हैं। ईरान में पढ़ रहे भारतीय छात्रों के साथ शेयर की गई जानकारी के अनुसार, तेहरान यूनिवर्सिटी ऑफ़ मेडिकल साइंसेज (TUMS), ईरान यूनिवर्सिटी ऑफ़ मेडिकल साइंसेज (IUMS), और शाहिद बेहेश्टी यूनिवर्सिटी ऑफ़ मेडिकल साइंसेज (SBUMS) में एनरोल्ड स्टूडेंट्स को निकलने के दो रास्ते दिए हैं। उन्हें कहा गया है कि या तो आर्मेनिया या अज़रबैजान के रास्ते बाहर निकलिए। अधिकारी और स्टूडेंट ग्रुप यह पक्का करने के लिए कोऑर्डिनेट कर रहे हैं कि जो लोग जाने को तैयार हैं, वे तय एग्जिट पॉइंट तक सुरक्षित रूप से यात्रा कर सकें। छात्र संगठनों और स्थानीय अधिकारियों की मदद से उन्हें सीमा तक सुरक्षित पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। कुछ छात्र फ्लाइट से लौटना चाहते हैं हालांकि, कुछ छात्रों ने जमीनी रास्ते से निकलने के बजाय हवाई मार्ग से भारत लौटने का फैसला किया है। उनमें से बहुत से लोगों ने 15 मार्च, 16 मार्च और उसके बाद के दिनों के लिए फ़्लाईदुबई फ़्लाइट बुक की हैं, ताकि नजदीकी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डों तक पहुंचकर सीधे भारत लौट सकें। दूसरी तरफ, शिराज यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज में, जहाँ 86 भारतीय मेडिकल छात्र अभी अपनी पढ़ाई कर रहे हैं, लोकल अधिकारियों ने उनके आने-जाने को आसान बनाने के लिए एक अलग इवैक्युएशन रूट का सुझाव दिया है। इस प्लान के तहत, छात्र अज़रबैजान के बाकू में शिराज – क़ोम – बाकू एयरपोर्ट से जा सकते हैं, जहाँ से वे भारत के लिए इंटरनेशनल फ़्लाइट ले सकते हैं। छात्रों में बढ़ रही चिंता ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AIMSA) जम्मू-कश्मीर के प्रेसिडेंट मोहम्मद मोमिन खान ने कहा कि उन्हें गोलेस्तान यूनिवर्सिटी ऑफ़ मेडिकल साइंसेज़, केरमान यूनिवर्सिटी ऑफ़ मेडिकल साइंसेज़ और इस्फ़हान यूनिवर्सिटी ऑफ़ मेडिकल साइंसेज़ में एनरोल्ड भारतीय छात्रों से परेशानी भरे कॉल आ रहे हैं। उनके अनुसार, कई छात्र अधिकारियों से इवैक्युएशन का इंतज़ाम करने की गुज़ारिश कर रहे हैं क्योंकि उन्हें डर है कि पूरे देश में हालात सुरक्षित नहीं हो सकते हैं। खान ने कहा, “स्टूडेंट्स लगातार फोन कर रहे हैं और इवैक्युएशन की रिक्वेस्ट कर रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि ईरान का कोई भी हिस्सा अभी सेफ नहीं है,” उन्होंने स्टूडेंट्स और उनके परिवारों की चिंताओं को भी बताया। राजनीतिक प्रतिनिधियों से भी सहयोग उन्होंने उन पॉलिटिकल रिप्रेजेंटेटिव्स की कोशिशों को भी माना जो स्टूडेंट्स के टच में हैं और मदद को कोऑर्डिनेट कर रहे हैं। खान ने सपोर्ट देने और इंडियन स्टूडेंट्स की चिंताओं को संबंधित अधिकारियों के सामने उठाने में मदद करने के लिए मेंबर ऑफ पार्लियामेंट आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी का शुक्रिया अदा किया। बयान में कहा गया, “डॉ. खान ने मेंबर ऑफ पार्लियामेंट आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी का भी शुक्रिया अदा किया, जिन्होंने इंडियन स्टूडेंट्स की चिंताओं को दूर करने और उनकी सेफ वापसी की कोशिशों में मदद करने के लिए लगातार सपोर्ट और कोऑर्डिनेशन दिया।” परिवारों की बढ़ी चिंता जैसे-जैसे अलग-अलग बैच देश छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं, भारत में मौजूद उनके परिवार सुरक्षित निकासी की उम्मीद कर रहे हैं। छात्र संगठनों का कहना है कि आने वाले दिनों में और अधिक छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालने की व्यवस्था की जा सकती है।  

ईरान संकट में ‘मोजतबा खामेनेई’ का नाम क्यों सुर्खियों में? सुप्रीम लीडर की लोकेशन पर सस्पेंस

ईरान ईरान युद्ध के 12वें दिन मध्य-पूर्व में संघर्ष तेज हो गया है। एक तरफ ईरान तो दूसरी तरफ इजरायल और अमेरिका ताबड़तोड़ हमले कर रहे हैं। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय मीडिया में एक सवाल भी तेजी से कौंध रहा है कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई कहां हैं? ताजपोशी के कई दिनों बाद भी सार्वजनिक तौर पर मोजतबा की अनुपस्थिति ने कई बड़े सवालों और अटकलों को जन्म दिया है। कुछ रिपोर्टों में उनके घायल होने की बात कही गई है। इन अटकलों के बीच ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि वह “सुरक्षित और स्वस्थ” हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन के बेटे और सरकारी सलाहकार यूसुफ पेज़ेशकियन ने टेलीग्राम पर एक संदेश में कहा कि उन्होंने मोजतबा खामेनेई के घायल होने की अफवाहों की पुष्टि करने की कोशिश की थी। उन्होंने लिखा कि उनसे जुड़े लोगों ने बताया है कि “खामेनेई सुरक्षित हैं और उन्हें कोई गंभीर नुकसान नहीं हुआ है।” इस बीच, इजरायल के खुफिया अधिकारियों ने दावा किया है कि मोजतबा घायल हैं। सार्वजनिक रूप से नहीं आए सामने रविवार को ईरान का सर्वोच्च नेता बनने के बाद से मोजतबा खामेनेई ने अभी तक कोई सार्वजनिक बयान या भाषण जारी नहीं किया है। उनकी इस अनुपस्थिति से देश और विदेश में उनकी सेहत और लोकेशन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। अमेरिकी अखबार की रिपोर्ट में तीन ईरानी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि हालिया हमलों में मोजतबा खामेनेई के पैरों में चोट आई थी। रिपोर्ट के अनुसार वह फिलहाल एक अत्यंत सुरक्षित स्थान पर रह रहे हैं और सीमित संपर्क में हैं। युद्ध के बीच बढ़ती अनिश्चितता खामेनेई की हालत को लेकर अनिश्चितता ऐसे समय में है जब मिडिल ईस्ट में लड़ाई लगातार बढ़ रही है। यह लड़ाई ईरान पर US-इजरायली हमलों से शुरू हुई थी और तब से इसमें कई रीजनल एक्टर्स शामिल हो गए हैं, जिसमें मिसाइल हमले, ड्रोन इंटरसेप्शन और खाड़ी में नेवी की घटनाओं की खबरें शामिल हैं। मोजतबा खामेनेई के पिता और पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की 28 फरवरी को अमेरिकी और इजरायली हमलों में मौत हो गई थी। इसके बाद क्षेत्र में संघर्ष और तेज हो गया। क्षेत्रीय संकट गहराने की आशंका इस युद्ध के दौरान ईरान और इज़रायल के बीच मिसाइल हमले जारी हैं। वहीं सऊदी अरब सहित कई खाड़ी देशों ने अपनी सैन्य ठिकानों और तेल प्रतिष्ठानों पर किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोकने का दावा किया है। इसके अलावा ईरान की Islamic Revolutionary Guard Corps ने यह भी कहा है कि उसने कुवैत में स्थित एक अमेरिकी सैन्य अड्डे की ओर मिसाइल दागी है, हालांकि कुवैत ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर युद्ध इसी तरह जारी रहा तो इसका असर पूरे मध्य-पूर्व की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। वहीं ईरान के नए सर्वोच्च नेता की स्थिति को लेकर बनी अनिश्चितता इस संकट को और जटिल बना रही है।  

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