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‘ईद पर भाई को रिहा नहीं करेगी सरकार’: अलीमा खान का बड़ा बयान, पाकिस्तान की राजनीति गरमाई

इस्लामाबाद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बहनें अडियाला जेल के बाहर फिर से धरने पर बैठ गई हैं। तीनों को चेक पोस्ट पर रोका गया जिसके विरोध में उन्होंने धरना दिया। स्थानीय मीडिया ने बुधवार को बताया कि पुलिस ने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के कार्यकर्ताओं को भी पीछे धकेल दिया, जो जेल की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे। मंगलवार को जेल के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए, इमरान खान की अलीमा खान ने इसे बेहद निराशाजनक रवैया करार दिया। उन्होंने कहा कि कोर्ट के ऑर्डर के बावजूद परिवार के लोगों को पीटीआई संस्थापक से मिलने नहीं दिया गया। पीटीआई के आधिकारिक एक्स हैंडल पर अलीमा खान की एक वीडियो क्लिप अपलोड की गई है, जिसमें वह गुस्से और हताशा में कह रही हैं कि उन्हें यकीन है कि भाई को ईद में भी रिहा नहीं किया जाएगा। एक सवाल के जवाब में, अलीमा खान ने उन खबरों को खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि उनके भाई को ईद से पहले रिहा कर दिया जाएगा। पाकिस्तान के अनुसार, अलीमा ने उन खबरों को लेकर पूछे गए सवाल पर जवाब दिया जिसमें इमरान खान को ईद में रिहा किए जाने का दावा किया गया था। उन्होंने कहा, “वे उसे रिहा नहीं करना चाहते। आजकल जो दुनिया में हो रहा है उस पर ध्यान देंगे तो, और आपको पता चल जाएगा कि इमरान खान जेल में क्यों हैं? उनके साथ जो हो रहा है उसे तारीख (इतिहास) याद रखेगी।” इससे पहले फरवरी में, जेल में बंद पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के नेताओं ने पाकिस्तान के चीफ जस्टिस को एक पत्र लिखा था, जिसमें इमरान खान को कानूनी और मेडिकल मदद देने में कथित रुकावटों पर गंभीर चिंता जताई गई थी। नेताओं ने चीफ जस्टिस याह्या अफरीदी को लिखे अपने खत में उनसे इस मामले में दखल देने की अपील की ताकि इस मामले में इंसाफ हो सके। स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने अफरीदी से यह भी अनुरोध किया कि वे इस मामले पर ध्यान दें और यह पक्का करें कि इमरान खान को कानून के मुताबिक निजी चिकित्सक, कानूनी सलाहकार और परिवार के लोगों से मिलने की इजाजत मिले। पत्र में, पीटीआई नेताओं ने इमरान खान के इलाज की तुलना पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के 2019 में हुए मेडिकल ट्रीटमेंट से की। उन्होंने कहा कि तब की सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि नवाज शरीफ को लाहौर के सर्विसेज हॉस्पिटल ले जाया जाए और जब उनका प्लेटलेट काउंट कम था तो उन्हें सही मेडिकल केयर दी जाए। उन्होंने आगे कहा कि नवाज शरीफ के पर्सनल डॉक्टर मेडिकल बोर्ड की सभी मीटिंग में शामिल होते थे, उनका परिवार और वकील भी उनसे नियमित तौर पर मिलते थे।  

इमरान खान के लिए राहत: अस्पताल में इलाज, परिवार से मिलने की अनुमति भी मिलेगी

लाहौर  पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को जल्द अस्पताल शिफ्ट किए जाने की संभावना है. सूत्रों के मुताबिक उनकी आंख के इलाज के लिए 21 फरवरी से 26 फरवरी के बीच आइलिया इंजेक्शन की एक और डोज दी जानी है. उन्हें आंखों के इलाज के लिए रावलपिंडी के अस्पताल में भर्ती किया जा सकता है. जानकारी के मुताबिक इस बार उन्हें रावलपिंडी के अल शिफा आई ट्रस्ट हॉस्पिटल में इलाज के लिए ले जाया जा सकता है. अभी यह स्पष्ट नहीं है कि वह अस्पताल में कितने दिन रहेंगे. अंतिम फैसला डॉक्टरों से सलाह-मशविरा करने के बाद लिया जाएगा. सूत्रों का यह भी कहना है कि इलाज के दौरान या उसके बाद इमरान खान को अपने कुछ करीबी सहयोगियों और जेल में बंद उनकी पत्नी बुशरा बीबी से मुलाकात की अनुमति मिल सकती है. सरकार व्यापक मेडिकल जांच कराने की भी योजना बना रही है. इनमें एमआरआई, सीटी स्कैन, एक्स-रे, हृदय संबंधी जांच और पूरे शरीर के ब्लड टेस्ट जैसे प्रमुख परीक्षण शामिल हो सकते हैं. बताया जा रहा है कि इन सभी टेस्ट के जरिए उनकी सेहत की विस्तृत और आधिकारिक स्थिति स्पष्ट की जाएगी. दुनियाभर में हो रही है इमरान के इलाज की मांग इमरान खान को सरकार ने अकेले ही एक कोठरी में बंद कर रखा है, जहां न तो उनसे किसी को मिलने की इजाजत है और न ही वे वहां से निकल सकते हैं. उनसे मिलकर आए उनके वकील ने बताया था कि उनकी आंखों की रोशनी 85 फीसदी तक जा चुकी है और उन्हें दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी हो रही हैं. इसके अलावा उन्हें फ्रिज और टीवी जैसी बेसिक सुविधाएं भी नहीं दी गईं जबकि मच्छरों की वजह से वहां सोना तक मुश्किल हो रहा है. वकील ने मांग की थी कि उन्हें टीवी नहीं तो कम से कम किताबें ही दी जाएं, ताकि वे अपना समय बिता सकें. इमरान खान की ये हालत सामने आने के बाद पूरी दुनिया में उनके समर्थन में रैलियां हुईं और ये अपील की गई कि उनका इलाज हो. दुनिया में क्रिकेट जगत के 12 पूर्व कप्तानों ने मिलकर पाकिस्तान सरकार को चिट्ठी भी लिखी कि इमरान खान को उचित इलाज दिया जाए. खराब सेहत को बता रहे सियासी ड्रामा वहीं पाकिस्तान के पंजाब की सूचना मंत्री अज्मा बुखारी ने इमरान खान की हालिया मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि उनकी सेहत और आंखों की रोशनी पूरी तरह ठीक है. उन्होंने बताया कि खान साहब को जेल में सभी जरूरी सुविधाएं दी जा रही हैं, जिनमें पौष्टिक भोजन और टहलने के लिए अलग स्थान भी शामिल है. अजमा बुखारी ने कहा कि मेडिकल जांच में किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या की पुष्टि नहीं हुई है. उनके मुताबिक इमरान खान एक आंख से घड़ी की सुइयां तक साफ देख सकते हैं. उन्होंने इमरान खान पर निशाना साधते हुए इसे उनका राजनीतिक ड्रामा करार दिया.

इमरान खान को तुरंत मेडिकल सुविधा देने की अपील, कपिल देव और सुनील गावस्कर समेत 14 हस्तियों का खत

नई दिल्ली सुनील गावस्कर, कपिल देव, एलन बॉर्डर, स्टीव वॉ समेत दुनियाभर के 14 पूर्व कप्तानों ने इमरान खान के लिए अपनी आवाज बुलंद की है। इन क्रिकेट दिग्गजों ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को खत लिखकर इमरान खान की जेल में उनके पसंद के डॉक्टरों से तत्काल इलाज कराने की मांग की है। जेल में बंद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की हिरासत में खराब होती सेहत और आंखों की रोशनी कमजोर पड़ने की रिपोर्ट के बीच क्रिकेट जगत ने गंभीर चिंता जताई है। महान सुनील गावस्कर, कपिल देव, एलन बॉर्डर, स्टीव वॉ समेत दुनियाभर के 14 पूर्व कप्तानों ने इमरान खान के लिए अपनी आवाज बुलंद की है। इन क्रिकेट दिग्गजों ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को खत लिखकर इमरान खान की जेल में उनके पसंद के डॉक्टरों से तत्का इलाज कराने, परिवार से नियमित मुलाकात और बिना किसी देरी के निष्पक्ष और पारदर्शी कानूनी प्रक्रिया का अधिकार देने की मांग की है। इमरान खान अपने दौर के महान ऑलराउंडर रहे हैं और उनकी ही कप्तानी में पाकिस्तान ने 1992 में वनडे वर्ल्ड कप जीतने की ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की थी। हमारे सहयोगी हिंदुस्तान टाइम्स डिजिटल ने क्रिकेट की दुनिया के दिग्गजों की पाकिस्तान सरकार को लिखे खत की कॉपी देखी है। खत में पूर्व कप्तानों ने ये भी साफ किया है कि उन्होंने ये अपील खेल भावना और मानवता के नाते किया है। किसी कानूनी कार्यवाही में दखल देने की मंशा नहीं है। इन 14 हस्तियों के हैं दस्तखत पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को संबोधित खत पर दस्तखत करने वालों में सुनील गावस्कर, कपिल देव, ग्रेग चैपल, बेलिंडा क्लार्क, माइकल अथर्टन, नासिर हुसैन, इयान चैपल, एलन बॉर्डर, माइकल ब्रियर्ली, डेविड गॉवर, किम ह्यूज, क्लाइव लॉयड, स्टीव वॉ और जॉन राइट शामिल हैं। दिलचस्प बात ये है कि इस खत पर दस्तखत करने वाले पूर्व कप्तानों में पाकिस्तान का कोई भी पूर्व कप्तान शामिल नहीं है। वैसे पिछले हफ्ते वसीम अकरम, वकार यूनुस, शाहिद अफरीदी समेत पाकिस्तान के कुछ पूर्व क्रिकेटरों ने सोशल मीडिया पर ये गुजारिश की थी कि इमरान खान को उचित डॉक्टरी देखभाल दी जाए। क्रिकेट की हस्तियों का पाकिस्तान पीएम को लिखा पूरा खत ‘हम अधोहस्ताक्षरी राष्ट्रीय क्रिकेट टीमों के पूर्व कप्तान हैं और पाकिस्तान के पूर्व कप्तान और विश्व क्रिकेट की महान हस्ती इमरान खान के साथ हो रहे व्यवहार और उनकी जेल की स्थितियों को लेकर अपनी गहरी चिंता व्यक्त करते हैं। क्रिकेट के खेल में इमरान खान के योगदान की पूरी दुनिया तारीफ करती है। एक कप्तान के रूप में उन्होंने 1992 में पाकिस्तान को ऐतिहासिक विश्व कप जीत दिलाई। यह एक ऐसी जीत थी जो उनके कौशल, अटूट साहस और नेतृत्व पर आधारित थी, जिसने सीमाओं के पार कई पीढ़ियों को प्रेरित किया। हममें से कई लोग उनके खिलाफ खेले हैं, उनके साथ मैदान साझा किया है या उनके खेल और करिश्मे को देखते हुए बड़े हुए हैं। वे खेल के अब तक के सबसे बेहतरीन ऑलराउंडरों और कप्तानों में से एक हैं, जिन्हें खिलाड़ियों और प्रशंसकों से समान सम्मान मिला है। क्रिकेट के अलावा इमरान खान ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के रूप में भी सेवा की। राजनीतिक विचारों से इतर उन्हें अपने देश के सर्वोच्च पद पर लोकतांत्रिक रूप से चुने जाने का सम्मान प्राप्त है। उनकी सेहत को लेकर आ रही हालिया खबरें, खासकर हिरासत के दौरान उनकी आंखों की रोशनी कम होने की चिंताजनक रिपोर्ट और पिछले ढाई साल से जेल की स्थितियों ने हमें बहुत परेशान किया है। हम साथी क्रिकेटर होने के नाते ‘फेयर प्ले’ और सम्मान के मूल्यों को समझते हैं। हमारा मानना है कि इमरान खान जैसे कद के व्यक्ति के साथ वह गरिमा और मानवीय व्यवहार होना चाहिए, जो एक पूर्व राष्ट्रीय नेता और वैश्विक खेल रत्न के योग्य हो। हम सम्मानपूर्वक पाकिस्तान सरकार से आग्रह करते हैं कि वे यह सुनिश्चित करें कि इमरान खान को- अपनी पसंद के विशेषज्ञों से तुरंत और उचित चिकित्सा सुविधा मिले। जेल में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार मानवीय और सम्मानजनक स्थितियां दी जाएं, जिसमें परिवार से नियमित मुलाकात शामिल हो। बिना किसी देरी के निष्पक्ष और पारदर्शी कानूनी प्रक्रिया का अधिकार मिले। क्रिकेट हमेशा देशों के बीच एक पुल रहा है। मैदान पर हमारा साझा इतिहास हमें याद दिलाता है कि मुकाबला स्टंप उखड़ने के साथ खत्म हो जाता है, लेकिन सम्मान हमेशा बना रहता है। इमरान खान ने अपने पूरे करियर में इसी भावना को जिया है। हम अधिकारियों से अपील करते हैं कि वे शालीनता और न्याय के सिद्धांतों को बनाए रखते हुए इसका सम्मान करें। यह अपील हम किसी कानूनी कार्रवाई में दखल देने के लिए नहीं, बल्कि खेल भावना और मानवता के नाते कर रहे हैं।’  

परिवार को बिना बताए अस्पताल में किया शिफ्ट, इमरान खान की सेहत की बढ़ी अटकलें

इस्लामाबाद. पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सेहत को लेकर नई चिंताएं सामने आई हैं। उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने आरोप लगाया कि इमरान को जेल से गुप्त रूप से अस्पताल में भेजा जा रहा है। पार्टी का दावा है कि इस कदम से उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है और उनकी जान को खतरा पैदा हो सकता है। इमरान खान की फैमिली को इस ट्रांसफर के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। पीटीआई ने मांग की है कि कोई भी मेडिकल जांच या इलाज उनके निजी डॉक्टरों की मौजूदगी में और कम से कम एक परिवार के सदस्य के साथ होना चाहिए। जेल नियमों के अनुसार भी परिवार और डॉक्टरों को पहले सूचित करना जरूरी है, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इमरान खान 73 वर्ष के हैं। वह अगस्त 2023 से जेल में बंद हैं। उन्हें लाहौर में उनके घर से गिरफ्तार किया गया था और भ्रष्टाचार के आरोपों में अदियाला जेल में रखा गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जेल में रहते हुए उनकी सेहत बिगड़ गई है, खासकर दाहिने आंख में लगभग 85 प्रतिशत विजन लॉस हो चुका है। परिवार और लीगल टीम का आरोप है कि जेल अथॉरिटीज ने उन्हें उचित मेडिकल केयर नहीं दिया, जिससे यह स्थिति बनी। जनवरी 2026 के अंत में उन्हें आंख की समस्या के लिए अस्पताल ले जाया गया था, जहां एक छोटी प्रक्रिया हुई, लेकिन फैमिली को पहले सूचित नहीं किया गया था। पीटीआई ने लगाए गंभीर आरोप पीटीआई ने बयान जारी कर गंभीर चिंता जताई है कि इमरान खान को बिना परिवार की जानकारी के अस्पताल शिफ्ट करने की योजना बनाई जा रही है। पार्टी ने कहा, ‘ऐसा कदम मौलिक मानवाधिकारों और कानूनी प्रावधानों का खुला उल्लंघन है।’ उन्होंने इसे इमरान खान की सेहत और जान के साथ छेड़छाड़ करार दिया और इलाज में देरी को अमानवीय बताया। पार्टी ने तत्काल इलाज शुरू करने की मांग की है, बिना किसी समझौते के। पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने भी विजन लॉस की रिपोर्ट्स पर ध्यान देते हुए मेडिकल बोर्ड गठित करने का आदेश दिया है, ताकि उनकी आंखों की जांच हो सके। इमरान खान की सेहत को लेकर गरमाई राजनीति इस मुद्दे पर राजनीतिक विरोध बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार को पाकिस्तान के विपक्षी गठबंधन ने संसद के पास धरना दिया और इमरान खान को तुरंत अल-शिफा अस्पताल में भर्ती करने की मांग की। प्रदर्शनकारी तब तक प्रदर्शन जारी रखने की बात कह रहे हैं। सरकार की ओर से जानकारी मंत्री ने कहा कि इमरान खान को स्पेशलाइज्ड आंखों के इलाज के लिए ले जाया जा रहा है और स्पेकुलेशन से बचने की अपील की है। हालांकि, परिवार और पीटीआई का कहना है कि बिना उनकी सहमति के कोई कदम नहीं उठाया जाए। यह घटनाक्रम पाकिस्तान की राजनीति में तनाव को और बढ़ा रहा है।

इमरान खान की बिगड़ती सेहत से सियासी तूफान, 85% नजर कमजोर होने की खबर पर CJP एक्टिव

इस्लामाबाद पाक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि इमरान खान के दाहिनी आंख में ‘सेंट्रल रेटिनल वेन ऑक्लूजन’ (CRVO) नामक गंभीर बीमारी का पता चला है, जो समय पर इलाज न मिलने पर स्थाई अंधापन पैदा कर सकती है। इसी वजह से उनकी 85 फीसदी रोशनी चली गई। लंबे समय से जेल में बंद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के हेल्थ अपडेट से पाकिस्तान में हड़कंप मचा हुआ है। पाक मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक खान की दाहिनी आंख की रोशनी 85 फीसदी खत्म हो चुकी है। उसमें अब सिर्फ 15 फीसदी को रोशनी बची है। डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इमरान खान की आंख की जांच के लिए एक स्पेशल मेडिकल टीम बनाने का आदेश दिया है। यह आदेश कोर्ट में पेश की गई एक रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें PTI फाउंडर ने दावा किया था कि उनकी दाहिनी आंख में “सिर्फ़ 15 फीसदी” रोशनी बची है। SC ने यह भी निर्देश दिया कि इमरान को उनके बच्चों से बात करने की इजाज़त दी जाए। यह आदेश दिया गया कि आंखों की जांच और फोन कॉल दोनों 16 फरवरी (सोमवार) से पहले किए जाएं। SC का यह निर्देश तब आया जब पाकिस्तान के चीफ जस्टिस (CJP) याह्या अफरीदी की अगुवाई वाली और जस्टिस शाहिद बिलाल हसन सहित दो अन्य जजों की बेंच ने PTI संस्थापक के अदियाला जेल में रहने की स्थिति से जुड़े मामले की सुनवाई फिर से शुरू की। खून का थक्का जमने से गई रोशनी कोर्ट में पेश रिपोर्ट में बताया गया कि इमरान खान ने कहा है कि उनकी दाईं आंख की केवल लगभग 15% दृष्टि बची है। रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर 2025 तक उनकी दोनों आंखों की दृष्टि सामान्य थी, लेकिन बाद में धुंधलापन शुरू हुआ और इलाज में देरी के कारण स्थिति बिगड़ गई। बताया गया कि बाद में डॉक्टरों ने जांच में खून का थक्का (ब्लड क्लॉट) जैसी समस्या की पहचान की और इंजेक्शन सहित इलाज किया गया, लेकिन दृष्टि पूरी तरह वापस नहीं आ सकी। कैदी की सेहत राज्य की जिम्मेदारी सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि कैदी की सेहत सर्वोच्च प्राथमिकता है और राज्य का दायित्व है कि उसे उचित इलाज मिले। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून के तहत सभी कैदियों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए। कोर्ट ने माना कि परिवार से संपर्क भी महत्वपूर्ण मानवीय पहलू है। इसलिए बच्चों से टेलीफोन पर बातचीत की अनुमति देने के निर्देश दिए गए। सुनवाई के दौरान टॉप जज ने कहा, “हम उनकी (इमरान की) हेल्थ के मामले पर सरकार का स्टैंड जानना चाहते हैं।” इस पर पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल (AGP) मंसूर उस्मान अवान ने कन्फर्म किया कि मेडिकल फैसिलिटी देना सरकार की ज़िम्मेदारी है। AGP अवान ने कहा, “अगर कैदी सैटिस्फाइड नहीं है, तो सरकार कदम उठाएगी।” इस पर CJP अफरीदी ने फिर कहा कि इमरान के “अपने बच्चों के साथ टेलीफोन कॉल का मामला भी जरूरी है”। जेल में इलाज पर उठे सवाल रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इमरान खान ने पहले जेल प्रशासन को आंख की समस्या की शिकायत की थी, लेकिन समय पर विशेष इलाज नहीं मिला। बाद में विशेषज्ञ डॉक्टर बुलाए गए। यह मामला सिर्फ एक कैदी के स्वास्थ्य का नहीं बल्कि जेलों में मेडिकल सुविधाओं, मानवाधिकार और राजनीतिक संवेदनशीलता से भी जुड़ा माना जा रहा है। इस बीच, इन्फॉर्मेशन मिनिस्टर अताउल्लाह तरार ने कहा कि जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री के परिवार द्वारा फैलाई जा रही कहानी रिपोर्ट के सामने “पूरी तरह से गलत साबित हुई है।”

कथित बेटी की सच्चाई छिपाने पर फिर मुश्किल में पाकिस्तानी पूर्व पीएम इमरान

इस्लामाबाद. पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। कथित बेटी के नाम को छिपाने के आरोप में खान को अयोग्य ठहराने वाली मांग को लेकर याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पूर्व पीएम के खिलाफ 2018 के चुनाव में नामांकन के दौरान गलत जानकारी देने के आरोप में उनका नामांकन रद्द करने की मांग को लेकर इस्लामाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया था। अब याचिकाकर्ता ने शीर्ष अदालत का रुख अपना है। बता दें, पूर्व पीएम इमरान खान के खिलाफ मोहम्मद साजिद नामक याचिकाकर्ता ने याचिका दायर की थी। याचिका में लगाए गए ये आरोप याचिका में कहा गया कि 71 वर्षीय इमरान खान ने 2018 के चुनाव के दौरान अपने नामांकन में अपनी कथित बेटी टायरिन के बारे में जानकारी नहीं दी थी। इमरान खान की पार्टी ने 2018 के चुनाव में जीत दर्ज की थी और उसके बाद इमरान खान ने अगस्त 2018 से लेकर अप्रैल 2022 तक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के रूप में काम किया था। याचिकाकर्ता का आरोप है कि इमरान खान ने अपने नामांकन में गलत जानकारी दी। इमरान ने अपने हलफनामे में सिर्फ अपने दो बेटों का जिक्र किया, लेकिन तीसरी संतान टायरिन का जिक्र नहीं किया। हाईकोर्ट से मिली थी राहत दरअसल, सुप्रीम कोर्ट से पहले याचिकाकर्ता ने इस्लामाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि, यहां से उसे निराशा हाथ लगी। इस मामले पर सुनवाई कर रही इस्लामाबाद हाईकोर्ट की तीन जजों की पीठ को हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस आमेर फारुख ने भंग कर दिया था। बाद में नई पीठ ने याचिका पर सुनवाई कर उसे खारिज कर दिया था। न्यायमूर्ति तारिक महमूद जहांगीरी ने पिछले साल दिए गए दो न्यायाधीशों की राय पढ़ी और फैसला सुनाया कि मामला पहले ही खारिज किया जा चुका है। याचिकाकर्ता मोहम्मद साजिद ने अपने वकील साद मुमताज हाशमी के माध्यम से शनिवार को सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर कर दलील दी कि इस्लामाबाद हाईकोर्ट की पीठ ने तीन में से दो न्यायाधीशों की सहमति वाली राय को अदालती फैसला मानने में गलती की है। उसका कहना है कि खान ने मियांवाली निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए नामांकन पत्र दाखिल करते समय अपनी बेटी के बारे में नहीं बताया था। केवल अपनी पत्नी बुशरा बीबी और विदेश में रहने वाले दो बेटों कासिम खान और सुलेमान खान के बारे में जानकारी दी थी। इमरान खान पर 2022 में हुए हमले के मामले में तीन दोषी करार इमरान खान पर साल 2022 में जानलेवा हमला हुआ था। उस मामले में पाकिस्तान की आतंक रोधी अदालत ने मंगलवार को तीन लोगों को दोषी ठहराया है। इमरान खान पर 2022 में लाहौर प्रांत में एक विरोध रैली के दौरान हमला हुआ था। इस हमले में इमरान खान के पैर में कथित तौर पर तीन गोलियां लगीं थी। दोषी ठहराए गए लोगों की पहचान नावीद मेहर, वकास और तैयब के रूप में हुई है। नावीद मेहर को मुख्य दोषी बताया गया है और मेहर ने ही इमरान खान पर गोलियां चलाईं थी। वहीं वकास और तैयब ने मेहर को हथियार मुहैया कराया था। उस हमले में पीटीआई के कार्यकर्ता की मौत हो गई थी और इमरान खान समेत 14 अन्य लोग घायल हुए थे। मेहर को मौके पर ही पीटीआई समर्थकों ने पकड़ लिया था। मंगलवार को गुंजरावाला स्थित आतंक-रोधी अदालत ने तीनों को दोषी ठहराया। कोर्ट 25 मई को इस मामले में सजा सुनाएगा। इमरान खान ने इस हमले का आरोप आईएसआई के मेजर जनरल फैसल नसीर, शहबाज शरीफ और तत्कालीन आंतरिक मामलों के मंत्री राणा सनाउल्लाह पर लगाया था। इमरान खान ने मेजरल जनरल फैसल नसीर पर केन्या में पाकिस्तानी पत्रकार अरशद शरीफ की हत्या का भी आरोप लगाया था।

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