LATEST NEWS

बारबाडोस ने प्रधानमंत्री मोदी को दिया सर्वोच्च सम्मान : ‘ऑर्डर ऑफ फ्रीडम ऑफ बारबाडोस’ से हुए सम्मानित

ब्रिजटाउन कैरेबियाई देश बारबाडोस ने कोविड-19 महामारी के दौरान रणनीतिक नेतृत्व और बहुमूल्य सहायता के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अपने देश के सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार ‘ऑनरेरी ऑर्डर ऑफ फ्रीडम ऑफ बारबाडोस’ से सम्मानित किया। विदेश राज्यमंत्री मार्गेरिटा ने पीएम मोदी की ओर से पुरस्कार किया ग्रहण विदेश मंत्रालय ने एक बयान में यह जानकारी दी। इसमें कहा गया है कि बारबाडोस के ब्रिजटाउन में आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से पुरस्कार भारत के विदेश राज्यमंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने ग्रहण किया। बाराडोस की प्रधानमंत्री ने पीएम मोदी की महत्वपूर्ण भूमिका को सराहा बयान के अनुसार, 20 नवंबर 2024 को गुयाना के जॉर्जटाउन में दूसरे भारत-कैरिकॉम शिखर सम्मेलन के दौरान बारबाडोस की प्रधानमंत्री मिया अमोर मोटले और प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात हुई थी। इस दौरान बाराडोस की प्रधानमंत्री मोटले ने कोविड-19 महामारी की विकट परिस्थिति में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और समर्थन को मजबूत करने में प्रधानमंत्री मोदी की महत्वपूर्ण भूमिका को सराहते हुए उन्हें ऑनरेरी ऑर्डर ऑफ फ्रीडम ऑफ बारबाडोस देने की घोषणा की थी। भारत और बारबाडोस के बीच प्रगाढ़ होते संबंधों को रेखांकित करता है यह सम्मान विदेश राज्यमंत्री मार्गेरिटा ने इस सम्मान के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का प्रतिनिधित्व करना और उनकी ओर से यह प्रतिष्ठित पुरस्कार स्वीकार करना उनके लिए बहुत सम्मान की बात है। यह सम्मान भारत और बारबाडोस के बीच प्रगाढ़ होते संबंधों को रेखांकित करता है साथ ही विशेष रूप से संकट के समय में सहयोग और विकास के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। यह पुरस्कार दोनों देशों के बीच स्थायी मित्रता का प्रतीक वर्ष 1966 में राजनयिक संबंधों की स्थापना के बाद से भारत और बारबाडोस ने निरंतर जुड़ाव और विकास पहलों द्वारा एक मजबूत साझेदारी को बढ़ावा दिया है। यह पुरस्कार दोनों देशों के बीच स्थायी मित्रता का प्रतीक है।  

मुंबई में Parle-G कंपनी के कई स्‍थानों पर IT की छापेमारी, सुबह से चल रही जांच

मुंबई मुंबई में पारले ग्रुप पर इनकम टैक्‍स विभाग ने छापेमारी की है. पारले ग्रुप Parle-G, मोनाको और अन्‍य ब्रांड नेम से बिस्‍कुट बेचने वाली फर्म है. मुंबई में कंपनी के कई स्‍थानों पर छापेमारी की जा रही है, जो सुबह से ही चल रही है. आयकर विभाग की फॉरेन असेट यूनिट और मुंबई की इनकम टैक्‍स इन्‍वेस्टिगेशन विंग की ओर से सर्च किया जा रहा है. हालांकि यह सर्च क्‍यों हो रहा है? इसकी वजह सामने नहीं आ पाई है. छापेमारी पूरी होने के बाद इसके पीछे के कारणों का खुलासा हो सकता है. फिलहाल इनकम टैक्‍स विभाग कंपनी के दस्‍तावेज खंगालने में जुटा हुआ है. FY24 में पारले-जी इतना बढ़ा प्रॉफिट सबसे पहले बात कर लेते हैं Parle-G बिस्कुट को वित्त वर्ष 2023-24 में हुए प्रॉफिट के बारे में, तो पीटीआई के मुताबिक, FY24 में इसका मुनाफा दोगुना होकर 1,606.95 करोड़ रुपये रहा है, जो कि FY23 में 743.66 करोड़ रुपये रहा था. इसके बीते वित्त वर्ष में पारले बिस्कुल की ऑपरेशनल इनकम दो फीसदी के इजाफे के साथ बढ़कर 14,349.4 करोड़ रुपये हो गई है. अगर रेवेन्यू की बात करें, तो ये 5.31 फीसदी उछलकर 15,085.76 करोड़ रुपये रहा है. ये आंकड़े दर्शाते हैं कि Parle Biscuit की डिमांड अभी भी जोरदार बनी हुई है. कब हुई थी कंपनी की शुरुआत? पारले की शुरुआत की बात करें, तो इसे देश को आजादी मिलने से पहले साल 1929 में हुई थी. 90 के दशक के बच्चों को तो अपना वह दौर भी याद होगा, जब चाय के साथ पारले-जी का कॉम्बिनेशन सबसे ज्यादा फेमस हुआ करता था. रिपोर्ट्स की मानें तो ऐसा कहा जाता है कि कंपनी ने पारले नाम मुंबई के विले-पार्ले इलाके से लिया है.    

मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने अंत्योदय अन्न योजना परिवारों को 200 यूनिट मुफ्त बिजली और बस यात्रा देने की बजट में घोषणा

जम्मू जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को विधानसभा में शून्य घाटे वाला बजट पेश किया, जिसमें 2025-2026 के लिए 1.12 लाख करोड़ रुपये के खर्च की घोषणा की गई। केंद्र शासित प्रदेश के बहु-क्षेत्रीय कल्याण और विकास पर जोर दिया गया गया। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व वाली सरकार में वित्त विभाग भी संभाल रहे अब्दुल्ला ने विधानसभा में अपना पहला बजट पेश किया। मुख्यमंत्री ने अंत्योदय अन्न योजना परिवारों को 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने की घोषणा की। जम्मू-कश्मीर की सभी महिलाओं को एक अप्रैल से ई-बसों सहित सभी सरकारी परिवहन में मुफ्त सफर की सुविधा प्रदान की जाएगी। विधानसभा में बजट पेश करने के दौरान अब्दुल्ला ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के लिए प्रशंसा की। जम्मू-कश्मीर का साल 2018 के बाद से यह पहला वार्षिक बजट है। 2019 में अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को एक अलग केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया था। तालियों की गड़गड़ाहट के बीच, अब्दुल्ला ने एक फारसी दोहे के साथ अपना भाषण शुरू किया और कहा, “मैं आज वित्त मंत्री के रूप में अपना पहला बजट पेश करने के लिए आपके सामने खड़ा हूं, जो सात वर्षों में सामूहिक सरकार का पहला बजट है। हालांकि यह एक सम्मान की बात है, लेकिन मैं इस महत्वपूर्ण मोड़ पर जम्मू-कश्मीर के वित्त का संरक्षक होने के साथ आने वाली जिम्मेदारी के भार से अच्छी तरह वाकिफ हूं।” 1,12,310 करोड़ रुपये का शुद्ध बजट उन्होंने कहा कि यह एक नए और समृद्ध जम्मू-कश्मीर के लिए एक रोड मैप है, जो हमारे लोगों की आकांक्षाओं को दर्शाता है और आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति और सतत विकास के लिए एक मजबूत नींव रखता है। अब्दुल्ला ने कहा, “वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कुल शुद्ध बजट अनुमान 1,12,310 करोड़ रुपये है, जिसमें वेज एंड मीन्स एडवांस और ओवरड्राफ्ट के प्रावधान शामिल नहीं हैं।” शून्य घाटे वाले बजट पर ध्यान केंद्रित करते हुए उन्होंने कहा, “अपेक्षित राजस्व प्राप्तियां 97,982 करोड़ रुपये और पूंजीगत प्राप्तियां 14,328 करोड़ रुपये हैं। इसी तरह, राजस्व व्यय 79,703 करोड़ रुपये और पूंजीगत व्यय 32,607 करोड़ रुपये होने का अनुमान है।” जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को विधानसभा में शून्य घाटे वाला बजट पेश किया, जिसमें 2025-2026 के लिए 1.12 लाख करोड़ रुपये के खर्च की घोषणा की गई। केंद्र शासित प्रदेश के बहु-क्षेत्रीय कल्याण और विकास पर जोर दिया गया गया। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व वाली सरकार में वित्त विभाग भी संभाल रहे अब्दुल्ला ने विधानसभा में अपना पहला बजट पेश किया। मुख्यमंत्री ने अंत्योदय अन्न योजना परिवारों को 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने की घोषणा की। जम्मू-कश्मीर की सभी महिलाओं को एक अप्रैल से ई-बसों सहित सभी सरकारी परिवहन में मुफ्त सफर की सुविधा प्रदान की जाएगी। विधानसभा में बजट पेश करने के दौरान अब्दुल्ला ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के लिए प्रशंसा की। जम्मू-कश्मीर का साल 2018 के बाद से यह पहला वार्षिक बजट है। 2019 में अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को एक अलग केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया था। तालियों की गड़गड़ाहट के बीच, अब्दुल्ला ने एक फारसी दोहे के साथ अपना भाषण शुरू किया और कहा, “मैं आज वित्त मंत्री के रूप में अपना पहला बजट पेश करने के लिए आपके सामने खड़ा हूं, जो सात वर्षों में सामूहिक सरकार का पहला बजट है। हालांकि यह एक सम्मान की बात है, लेकिन मैं इस महत्वपूर्ण मोड़ पर जम्मू-कश्मीर के वित्त का संरक्षक होने के साथ आने वाली जिम्मेदारी के भार से अच्छी तरह वाकिफ हूं।” 1,12,310 करोड़ रुपये का शुद्ध बजट उन्होंने कहा कि यह एक नए और समृद्ध जम्मू-कश्मीर के लिए एक रोड मैप है, जो हमारे लोगों की आकांक्षाओं को दर्शाता है और आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति और सतत विकास के लिए एक मजबूत नींव रखता है। अब्दुल्ला ने कहा, “वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कुल शुद्ध बजट अनुमान 1,12,310 करोड़ रुपये है, जिसमें वेज एंड मीन्स एडवांस और ओवरड्राफ्ट के प्रावधान शामिल नहीं हैं।” शून्य घाटे वाले बजट पर ध्यान केंद्रित करते हुए उन्होंने कहा, “अपेक्षित राजस्व प्राप्तियां 97,982 करोड़ रुपये और पूंजीगत प्राप्तियां 14,328 करोड़ रुपये हैं। इसी तरह, राजस्व व्यय 79,703 करोड़ रुपये और पूंजीगत व्यय 32,607 करोड़ रुपये होने का अनुमान है।” ‘समावेशी विकास को प्राथमिकता’ अनुमानों के बारे में बातते हुए उन्होंने कहा कि सकल प्राप्तियां 1,40,309.99 करोड़ रुपये होने का अनुमान है, जिसमें 28,000 करोड़ रुपये के ओवरड्राफ्ट के प्रावधान शामिल हैं। अब्दुल्ला ने इस बात पर जोर दिया कि बजट में समावेशी विकास, राजकोषीय विवेक और बुनियादी ढांचे, कृषि, उद्योग, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और डिजिटल शासन में रणनीतिक निवेश को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य क्षेत्रीय असमानताओं को पाटना, युवाओं और महिलाओं को सशक्त बनाना और निवेश और नवाचार को आकर्षित करने के लिए व्यवसाय के अनुकूल माहौल को बढ़ावा देना है।”

गुनहगार तहव्वुर राणा की अर्जी फिर खारिज,अमेरिकी कोर्ट में प्रत्यर्पण रोकने की मांग की थी, कहा- पाकिस्तानी मुस्लिम हूं, भारत गया तो मारा जाऊंगा

वाशिंगटन अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से 2008 मुंबई हमलों के दोषी तहव्वुर राणा को बड़ा झटका लगा है. भारत प्रत्यर्पण पर रोक लगाने की उनकी याचिका खारिज कर दी गई है. जज एलेना कगान ने तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण पर रोक लगाने की याचिका खारिज की. 26/11 मुंबई हमले के दोषी तहव्वुर राणा ने भारत प्रत्यर्पण किए जाने से बचने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. राणा ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उनके प्रत्यर्पण पर इमरजेंसी स्टे लगाया जाए. याचिका में तहव्वुर राणा ने कहा था कि अगर मुझे भारत प्रत्यर्पित किया गया तो मुझे प्रताड़ित किया जाएगा. मैं भारत में ज्यादा सर्वाइव नहीं कर पाऊंगा. तहव्वुर राणा ने याचिका में क्या कहा था? राणा ने अमेरिकी कोर्ट के समक्ष अपनी याचिका में कहा था कि पाकिस्तान मूल का मुस्लिम होने की वजह से उसे भारत में बहुत अधिक प्रताड़ित किया जाएगा. ह्यूमन राइट्स वॉच 2023 की वर्ल्ड रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की बीजेपी सरकार धार्मिक अल्पसंख्यकों विशेष रूप से मुस्लिमों के साथ भेदभाव करती है. याचिका में कहा गया था कि भारत की सरकार लगातार तानाशाही होती जा रही है और इसके पर्याप्त कारण हैं कि भारत सरकार को सौंपे जाने पर उसे प्रताड़ित किया जाएगा. तहव्वुर राणा ने कहा था कि वह कई तरह की बीमारियों से जूझ रहा है. वह पार्किंसंस की समस्या से भी जूझ रहा है. ऐसी जगह नहीं भेजा जाए, जहां राष्ट्रीय, धार्मिक और सांस्कृतिक तौर पर उन्हें निशाना बनाया जाएगा. कौन है तहव्वुर राणा? तहव्वुर राणा का जन्म पाकिस्तान में हुआ था. उसने आर्मी मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई की और पाकिस्तान आर्मी में 10 साल तक बतौर डॉक्टर काम काम किया. लेकिन तहव्वुर राणा को अपना काम पसंद नहीं आया और उसने ये नौकरी छोड़ दी. भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों में शामिल रहने वाला तहव्वुर राणा अभी कनाड़ा का नागरिक है. लेकिन हाल में वह शिकागो का निवासी था, जहां उसका बिजनेस है. अदालत के दस्तावेजों के मुताबिक, उसने कनाड़ा, पाकिस्तान, जर्मनी और इंग्लैंड की यात्राएं की है और वहां रहा है, वह लगभग 7 भाषाएं बोल सकता है. अदालत के दस्तावेज बताते हैं कि 2006 से लेकर नवंबर 2008 तक तहव्वुर राणा ने पाकिस्तान में डेविड हेडली और दूसरे लोगों के साथ मिलकर साजिश रची. इस दौरान तहव्वुर राणा ने आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और हरकत उल जिहाद ए इस्लामी की मदद की और मुंबई आतंकी हमले की प्लानिंग की और इसे अमली जामा पहनाने में मदद की. आतंकी हेडली इस मामले में सरकारी गवाह बन गया है. 26 नवंबर 2008 को क्या हुआ था? 26 नवंबर 2008 को देश की आर्थिक राजधानी मुंबई पर आतंकी हमला हुआ था. आतंकियों के इस हमले को नाकाम करने के लिए 200 एनएसजी कमांडो और सेना के पचास कमांडो को मुंबई भेजा गया था. इसके अलावा सेना की पांच टुकड़ियों को भी वहां तैनात किया गया था. हमले के दौरान नौसेना को भी अलर्ट पर रखा गया था. मुंबई के आतंकी हमले को नाकाम करने के अभियान में मुंबई पुलिस, एटीएस और एनएसजी के 11 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए थे. इनमें एटीएस के प्रमुख हेमंत करकरे, एसीपी अशोक कामटे, एसीपी सदानंद दाते, एनएसजी के कमांडो मेजर संदीप उन्नीकृष्णन, एनकाउंटर स्पेशलिस्ट एसआई विजय सालस्कर, इंसपेक्टर सुशांत शिंदे, एसआई प्रकाश मोरे, एसआई दुदगुड़े, एएसआई नानासाहब भोंसले, एएसआई तुकाराम ओंबले, कांस्टेबल विजय खांडेकर, जयवंत पाटिल, योगेश पाटिल, अंबादोस पवार और एम.सी. चौधरी शामिल थे.  

सेना ने कारगिल में सी-17 ग्लोबमास्टर विमान को उतारकर बड़ा दांव चल दिया

 कारगिल भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कभी एकदम से खत्म नहीं हो पाया। वहीं जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को लेकर पाकिस्तान और चीन सदाबहार दोस्त बने रहते हैं। ऐसे में भारत की चुनौती और भी बढ़ जाती है। बुधवार को सेना ने कारगिल में सी-17 ग्लोबमास्टर विमान को उतारकर बड़ा दांव चल दिया है। यह कदम बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकता है। दरअसल सीमा को सुरक्षित रखने के लिए कनेक्टिविटी बहुत जरूरी होती है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के ऊंचाई वाले इलाकों में अकसर कनेक्टिविटी खत्म हो जाती है। पाकिस्तान 1999 में करगिल पर कब्जा करने की कोशिश कर भी चुका है। ऐसे में भारतीय सेना ने भी अपनी तैयारियों तेज कर दी हैं। जल्द ही लद्दाख को जोड़ने वाली ऑल वेदर सड़क और जोजिला टनल भी शुरू हो जाएगा। क्या हैं सी-17 लैंड करने के मायने कारगिल में सी-17 ग्लोबमास्टर की लैंडिंग के मायने बहुत बड़े हैं। दरअसल इससे सेना का मूवमेंट बढ़ जाएगा। इसके अलावा लॉजिस्टिक सपोर्ट की क्षमता भी चार गुना बढ़ेगी। इस एयरफील्ड से अब तक सी-130 जे सुपर हल्क्युलिस और एएन-32 का संचालन किया जाता था। इनकी अधिकतम क्षणता 6 से सात टन ही थी। वहीं सी-17ग्लोबमास्टर अकेले ही 60 से 70 टन का भार उठा सकता है। इसके अलावा इसकी मदद से 150 से ज्यादा सैनिक हथियारों और उपकरणों के साथ तुरंत फ्रंट पर तैनात हो सकते हैं। पाकिस्तान और चीन दोनों से जंग की स्थिति में कारगिल तक यह पहुंच काम आएगी। कारगिल में सेना को उतारकर जल्दी चीन की सीमा पर भी भेजा जा सकता है। पाकिस्तान इस एयरफील्ड से भी इतना चिढ़ा रहता है कि 1999 के युद्ध के दौरान उसने इसे निशाना बनाया था। यह एयरफील्ड एलओसी से बेहद करीब है। सी-17 ग्लोबमास्टर ऊंचाई वाले इलाकों में और कम तापमान वाले इलाकों के हिसाब से भी तैयार रहता है। सूत्रों का कहना है कि वायुसेना को लगता था कि लेह और श्रीनगर के बीच एक गैप है। अगर कारगिल में ग्लोबमास्टर की लैंडिंग होती है तो यह खाली स्थान भर जाएगा और सेना को सप्लाई और तैनाती दोनों में मदद मिलेगा। कारगिल में कोई पार्किंग बे नहीं है। ऐसे में एक समय में एक ही सी-17 का संचालन हो सकता है।

पाकिस्तान अवैध रूप से कश्मीर के हिस्से पर कब्जा जमाकर बैठा है, वह हिस्सा वापस आ जाए तो कश्मीर की समस्या पूरी तरह से सुलझ जाएगी:जयशंकर

नई दिल्ली लंदन में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के कश्मीर को लेकर दिए गए बयान पर पाकिस्तान तिलमिला उठा है. जयशंकर की पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (Pok) पर दिए गए बयान पर पड़ोसी मुल्क ने अब बयान जारी किया है. पाकिस्तान ने पीओके को लेकर जयशंकर के बयान को आधारहीन बताया है. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता शफकत अली खान ने कहा कि कश्मीर को लेकर आधारहीन दावे करने के बजाए भारत को जम्मू कश्मीर के उस बड़े हिस्से को छोड़ देना चाहिए, जिस पर वर 77 साल से कब्जा करके बैठा है. शफकत ने कहा कि हम लंदन के चैथम हाउस में कश्मीर को लेकर दिए गए जयशंकर के बयान को खारिज करते हैं. उन्होंने कहा कि पीओके का मामला विवादित है और जयशंकर गलत तरीके से इसे लेकर बयानबाजी कर रहे हैं. भारत ने सेना के दम पर स्टेटस बदलने की कोशिश की है लेकिन इससे वास्तविकता नहीं बदलेगी. सेना के दम पर उठाए गए कदम से कश्मीर के लोगों की मुश्किलें हल नहीं होंगी. क्या है पूरा मामला? लंदन के चैथम हाउस में एक कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तान के एक पत्रकार ने जयशंकर से सवाल पूछते हुए कहा था कि भारत ने कश्मीर पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है जिस वजह से वे प्रोटेस्ट कर रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दुनिया में शांति लाने की बात करते हैं तो क्या नरेंद्र मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के साथ अपनी दोस्ती का इस्तेमाल कर कश्मीर मुद्दे को सुलझा सकते हैं? इस पर जयशंकर ने जवाब दिया था कि हमने कश्मीर समस्या काफी हद तक सुलझा ली है. इस दिशा में जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाना पहला कदम था. इसके बाद कश्मीर में विकास और आर्थिक गतिविधि बढ़ाने के साथ-साथ सामाजिक न्याय को बहाल करना दूसरा कदम था. अच्छे मतदान प्रतिशत के साथ वोटिंग कराना तीसरा कदम था. पाकिस्तान द्वारा कश्मीर के चुराए गए हिस्से की वापसी चौथा कदम होगा. पाकिस्तान अवैध रूप से कश्मीर के जिस हिस्से पर कब्जा जमाकर बैठा है, वह हिस्सा वापस आ जाए तो कश्मीर की समस्या पूरी तरह से सुलझ जाएगी. पाकिस्तान अवैध रूप से कश्मीर के जिस हिस्से पर कब्जा जमाकर बैठा है, वह हिस्सा वापस आ जाए तो कश्मीर की समस्या पूरी तरह से सुलझ जाएगी. जयशंकर ने क्या-क्या कहा था? लंदन के चैथम हाउस थिंक टैंक में आयोजित कार्यक्रम मे जयशंकर ने कहा था कि पाकिस्तान ने भारत से जो हिस्सा (POK) चुराया है, अब उसकी वापसी का इंतजार है. उस हिस्से के भारत में शामिल होते ही जम्मू-कश्मीर में पूरी तरह से शांति स्थापित हो जाएगी. उन्होंने घाटी में शांति का फॉर्मूला बताते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर में शांति बहाल करने की पूरी प्रक्रिया तीन चरणों में अपनाई गई. इसके अलावा जयशंकर ने अमेरिका की पॉलिसी पर बात करते हुए कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिकी प्रशासन बहुध्रुवीयता (multipolarity) की तरफ बढ़ रहा है, जो भारत के हितों के लिए अच्छा है. दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार समझौते की जरूरत पर सहमत हुए हैं.  

आज से शुरू होगी बरसाना की लड्डू मार होली?, रंग नहीं, लड्डू बरसते हैं यहां!, जानें क्यो खेली जाती है लड्डू मार होली?

नई दिल्ली भारत में होली का त्योहार बहुत धूमधाम से मनाया जाता है लेकिन मथुरा, वृंदावन और बरसाना की होली का रंग सबसे अलग होता है। यहां यह त्योहार केवल रंगों तक सीमित नहीं रहता बल्कि भक्ति, प्रेम और अनोखी परंपराओं का संगम भी देखने को मिलता है। खासतौर पर बरसाना की लड्डू मार होली दुनियाभर में मशहूर है। कब होगी बरसाना की लड्डू मार होली? बरसाना के बंसा श्रीराधारानी मंदिर में इस साल 7 मार्च 2025 को लड्डू मार होली खेली जाएगी। इस दिन श्रद्धालुओं पर ढेर सारे लड्डू बरसाए जाते हैं और जिनके ऊपर लड्डू गिरते हैं वे इसे अपना सौभाग्य मानते हैं। कैसे खेली जाती है लड्डू मार होली? बरसाना की इस अनूठी होली में नंदगांव से आए पुरोहितों और श्रद्धालुओं पर सैकड़ों किलो लड्डू बरसाए जाते हैं। इस आयोजन को देखने के लिए दूर-दूर से लोग बरसाना पहुंचते हैं। इस दौरान मंदिर के अंदर और आसपास भक्ति का विशेष माहौल बन जाता है और हर कोई प्रसाद के रूप में लड्डू पाने की इच्छा रखता है। लड्डू मार होली की पौराणिक कथा इस अनोखी परंपरा के पीछे एक रोचक पौराणिक कथा है—द्वापर युग में जब श्रीकृष्ण और राधारानी धरती पर थे तब राधारानी के पिता वृषभानु जी ने नंदगांव वालों को होली खेलने का निमंत्रण दिया। नंद बाबा ने यह निमंत्रण स्वीकार कर लिया और अपनी ओर से एक पुरोहित को जवाब देने के लिए बरसाना भेजा। जब यह पुरोहित बरसाना पहुंचे तो उनका स्वागत बहुत प्रेम से किया गया। उन्हें आदरपूर्वक लड्डू खाने के लिए दिए गए। इस दौरान वहां मौजूद गोपियों ने होली के रंग में उन्हें गुलाल लगा दिया लेकिन पुरोहित के पास कोई गुलाल नहीं था तो उन्होंने थाल में रखे लड्डू उठाकर गोपियों पर फेंकने शुरू कर दिए। तभी से यह परंपरा शुरू हुई और इसे लड्डू मार होली के रूप में मनाया जाने लगा। क्यों खास है बरसाना की लड्डू मार होली? भक्तिमय माहौल – इस दिन श्रद्धालु पूरी तरह से राधा-कृष्ण की भक्ति में डूब जाते हैं। अनोखी परंपरा – रंगों की होली से अलग यहां लड्डुओं से होली खेली जाती है। सौभाग्य का प्रतीक – कहा जाता है कि जिन पर लड्डू गिरते हैं वे बहुत सौभाग्यशाली होते हैं। देश-विदेश से आते हैं पर्यटक – इस अद्भुत आयोजन को देखने के लिए दुनियाभर से लोग बरसाना आते हैं। बरसाना की लड्डू मार होली केवल मस्ती और उमंग का त्योहार ही नहीं बल्कि यह श्रीकृष्ण और राधा की प्रेम-लीला की झलक भी दिखाती है। यह परंपरा हर साल हजारों भक्तों और पर्यटकों को आकर्षित करती है और उन्हें प्रेम और भक्ति के रंगों में रंग देती है।  

मार्च में सरकारी दफ्तरों, बैंकों और स्कूलों में छुट्टी रहेगी, 13, 14 को सरकारी अवकाश, 31 को ईद की भी छुट्टी

नई दिल्ली मार्च 2025 का महीना त्योहारों और सार्वजनिक अवकाशों से भरपूर रहने वाला है। खासकर नौकरीपेशा लोगों और छात्रों के लिए यह महीना राहत लेकर आएगा। इस बार मार्च में कई महत्वपूर्ण त्योहार पड़ रहे हैं, जिनके चलते 13, 14, और 31 मार्च को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है। इस दौरान सरकारी दफ्तरों, बैंकों और स्कूलों में छुट्टी रहेगी। वहीं, यूपी के परिषदीय विद्यालयों में 15 मार्च को भैया दूज व 28 मार्च को रमजान के अंतिम शुक्रवार पर छुट्टी घोषित करने की मांग शिक्षक संगठनों ने की है। प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन ने कहा है कि परिषदीय विद्यालयों में 13 व 14 मार्च को होली की छुट्टी है। मार्च में कब-कब रहेगी छुट्टी? 13 मार्च 2025 – होलिका दहन के अवसर पर सार्वजनिक अवकाश रहेगा। 14 मार्च 2025 – होली का त्योहार मनाया जाएगा, इस दिन भी अवकाश घोषित किया गया है। 15 मार्च को  –      होली भाई दूज 16 मार्च 2025 – रविवार होने के कारण पहले से ही अवकाश रहेगा। यानी, 13 से 16 मार्च तक लगातार चार दिन की छुट्टियां होंगी। 31 मार्च 2025 – ईद उल-फितर के अवसर पर देशभर में सार्वजनिक अवकाश रहेगा, जिससे बैंक और सरकारी दफ्तर बंद रहेंगे। लंबे वीकेंड का मिलेगा फायदा मार्च में लगातार छुट्टियां होने से लोग परिवार के साथ समय बिता सकते हैं या यात्रा की योजना बना सकते हैं। खासतौर पर होली और ईद के बीच के दिनों में वर्किंग प्रोफेशनल्स छुट्टी लेकर लंबे ब्रेक का आनंद उठा सकते हैं। सरकारी आदेश और छुट्टी की पुष्टि राज्य सरकारों और केंद्र सरकार द्वारा घोषित इन सार्वजनिक अवकाशों की पुष्टि की जा चुकी है। इसके अलावा, बैंक हॉलिडे कैलेंडर के अनुसार भी इन दिनों बैंकों में अवकाश रहेगा।

PF के पैसे निकलेंगे यूपीआई और एटीएम से, सब्सक्राइबर्स को तुरंत ही अपनी राशि मिल जाएगी

नई दिल्ली कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के सात करोड़ से भी ज्यादा सब्सक्राइबर्स या लाभार्थी को बड़ी आसानी होने जा रही है। सरकार अब इस तरह की व्यवस्था कर रही है कि लाभार्थी घर बैठे यूपीआई के जरिए अपना पैसा निकाल सकते हैं। यह व्यवस्था इसलिए की जा रही है क्योंकि कई बार कर्मचारियों को PF की राश निकालने में दिक्कत आती है। उनके दावे रद्द हो जाते हैं। तीन में से एक क्लेम नहीं मिलते साल 2024 में EPFO ने EPF final settlement claims रिपोर्ट जारी की थी। यह साल 2023 के लिए थी। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि ईपीएफओ में दावा किया गए हर तीन फाइनल सेटलमेंट क्लेम में से एक पास नहीं हुए बल्कि डिनाई (Denied) कर दिए गए। इसलिए सरकार UPI के ज़रिए EPF निकासी शुरू करने की योजना बना रही है। इससे प्रक्रिया आसान और तेज़ हो जाएगी। तुरंत पैसे आएंगे अकाउंट में इस नए तरीके से, EPF मेंबर GPay, PhonePe और Paytm जैसे UPI प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके तुरंत पैसा निकाल पाएंगे। फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) इस सुविधा को शुरू करने के लिए नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के साथ बातचीत कर रहा है। यह योजना मई या जून 2025 तक शुरू हो सकती है। कई सुविधाएं शुरू हो रही हैं केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने इसी साल जनवरी में बताया था कि EPFO 3.0 पहल, जिसमें ATM से निकासी भी शामिल है, इस साल जून तक लागू हो जाएगी। EPFO 3.0 के ज़रिए और भी कई सुविधाएं मिलेंगी। देखा जाए तो UPI से EPF निकासी के कई फायदे होंगे। इससे पैसे तक तुरंत पहुंच मिलेगी। अभी EPF निकासी में 23 दिन लगते हैं, लेकिन UPI से यह कुछ ही मिनटों में हो जाएगा। यह नई प्रक्रिया ज़्यादा पारदर्शी होगी। और निकासी प्रक्रिया को बेहद आसान बना देगी। जरूरतमंद को आसानी यह सुविधा खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद होगी जिन्हें पैसे की तत्काल ज़रूरत होती है। मान लीजिये किसी मेडिकल इमरजेंसी में आपको पैसे की ज़रूरत है, तो आप तुरंत अपने EPF से पैसे निकाल सकेंगे। इससे आपको किसी से उधार मांगने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। या फिर अगर आपको कोई बड़ी खरीदारी करनी है, तो आप आसानी से अपने EPF से पैसे निकाल सकते हैं। यह सुविधा आपके लिए एक वरदान साबित होगी।

इसी महीने से रोड एक्सीडेंट में घायलों को मिलेगा फ्री इलाज, प्राइवेट-सरकारी दोनों ही हॉस्पिटल को देना होगा कैशलेस

नई दिल्ली जहां एक तरफ, भारत में सड़क एक्सीडेंट में इजाफा देखने को मिला है. वहीं इस मामले पर एक खबर के अनुसार, अब रोड एक्सीडेंट में घायलों को इसी महीने यानी मार्च 2025 से ही डेढ़ लाख रुपए तक का फ्री इलाज मिलने लगेगा. वहीं यह नियम प्राइवेट हॉस्पिटल के लिए भी अनिवार्य होगा. देशभर में इस व्यवस्था को लागू किया जाएगा, इस बाबत NHAI नोडल एजेंसी के रुप में अपनी सेवाएं देगा. कैशलेस इलाज की सुविधा जानकारी दें कि, इस योजना के लिए मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 162 में पहले ही जरुरी संशोधन हो चुका है. इस योजना को पूरी तरह से लागू करने से पहले बीते 5 महीनों में पुड्डूचेरी, असम, हरियाणा और पंजाब सहित छह राज्यों में पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया, जो कि बहुत ही सफल रहा. इस बाबत सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने बीते 14 मार्च 2024 को रोड एक्सीडेंट पीड़ितों को कैशलेस इलाज देने के लिए एक जरुरी पायलट प्रोजेक्ट कैशलेस ट्रीटमेंट योजना शुरू किया था. इसके बाद बीते 7 जनवरी 2025 को गडकरी ने योजना को देशभर में ऑफिशियली लॉन्च करने की घोषणा की. प्राइवेट-सरकारी दोनों ही हॉस्पिटल को देना होगा कैशलेस वहीं मामले पर NHAI ने बताया कि, घायल को पुलिस या कोई आम नागरिक या संस्था जैसे ही हॉस्पिटल पहुंचाएगी, और उसका इलाज तुरंत शुरू हो जाएगा. इसके लिए कोई फीस भी नही जमा करनी पड़ेगी. इसके साथ घायलों के साथ चाहे उनके परिजन हो या नहीं, हॉस्पिटल उसकी समुचीत देखरेख करेंगे. प्राइवेट और सरकारी दोनों ही हॉस्पिटल को इस बाबत कैशलेस इलाज देना होगा. जिसका पूरा लेखा जोखा NHAI के पास रहेगा. इसके नियम के तहत देश में कहीं भी रोड एक्सीडेंट होने पर घायल व्यक्ति को इलाज के लिए भारत सरकार की ओर से अधिकतम 1.5 लाख रुपए की मदद दी जाएगी, जिससे वह आगामी 7 दिनों तक अस्पताल में इलाज भी करा सकेगा. एक समान टोल नीति पर भी हो रहा काम आपको बता दें कि बीते 3 फरवरी को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि सड़क परिवहन मंत्रालय राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रियों को राहत देने के लिए एक समान टोल नीति पर भी काम कर रहा है. तब गडकरी ने यह भी कहा था कि अब भारत का राजमार्ग बुनियादी ढांचा अमेरिका के बराबर है. वहीं बीते 10 साल में अधिक से अधिक खंडों पर टोल संग्रह शुरू होने से टोल शुल्क बढ़ा भी है, जिससे अक्सर यात्रियों में असंतोष बढ़ता है. जहां भारत में कुल टोल संग्रह बीते 2023-24 में 64,809.86 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो इससे पिछले वर्ष की तुलना में 35 % अधिक है. वर्ष 2019-20 में संग्रह 27,503 करोड़ रुपये था, वहीं तब केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री गडकरी ने भरोसा जताया था कि राजमार्ग मंत्रालय 2020-21 में प्रतिदिन 37 किलोमीटर राजमार्ग निर्माण के पिछले रिकॉर्ड को चालू वित्त वर्ष में पार कर जाएगा. चालू वित्त वर्ष में अबतक करीब 7,000 किलोमीटर राजमार्गों का निर्माण भी हो चुका है. लाज ना मिलने पर होती है मौत सड़क हादसों में इलाज समय पर ना मिलने के कारण सबसे ज्यादा मौत के मामले देखने को मिलते हैं। एक्सीडेंट के बाद बहुत से लोगों को अस्पताल तक नहीं पहुंचाया जाता है। अगर कोई अस्पताल पहुंच भी जाता है, तो उसे कई तरह की फॉर्मेलिटी पूरी करनी पड़ती है। इस सब में कई बार इलाज मिलने में ही काफी देर हो जाती है। इसी को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक्सीडेंट में घायल लोगों को 1.5 लाख रुपये तक का इलाज मुफ्त देने का फैसला लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह सुविधा इसी महीने से मिलनी शुरू हो जाएगी। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की भूमिका इस नए नियम के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) अहम भूमिका निभाएगा। इस पूरी मामले में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण नोडल एजेंसी की तरह काम करेगा। पहले हरियाणा और पंजाब समेत कुल 6 राज्यों में इसका पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया था। इसकी सफलता को देखते हुए, इसे लागू करने का फैसला किया गया है। तुंरत मिलेगा इलाज इस फैसले के तहत अगर किसी की एक्सीडेंट होता है, तो उसे तुरंत किसी भी अस्पताल में इलाज के लिए ले जाया जा सकता है। उसके इलाज के लिए उसके परिवार को नहीं खोजा जाएगा। घायल के 1.5 लाख तक का इलाज का खर्च सड़क एवं परिवहन मंत्रालय उठाएगा। अगर खर्च 1.5 लाख से ऊपर आता है, तो इसके आगे का परिवार को बिल पे करना होगा। नितिन गडकरी ने कैशलेस ट्रीटमेंट योजना लॉन्च की थी सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 14 मार्च 2024 को रोड एक्सीडेंट पीड़ितों को कैशलेस इलाज देने के लिए पायलट प्रोजेक्ट कैशलेस ट्रीटमेंट योजना शुरू किया था। इसके बाद 7 जनवरी 2025 को गडकरी ने योजना को देशभर में ऑफिशियली लॉन्च करने की घोषणा की। इससे देश में कहीं भी रोड एक्सीडेंट होने पर घायल व्यक्ति को इलाज के लिए भारत सरकार की ओर से अधिकतम 1.5 लाख रुपए की मदद दी जाएगी। जिससे वह 7 दिनों तक अस्पताल में इलाज करा सकेगा। डेढ़ लाख से ऊपर खर्च पर खुद पैसे देने होंगे अस्पताल को प्राथमिक उपचार के बाद बड़े अस्पताल में रेफर करना है तो उस अस्पताल को सुनिश्चित करना होगा कि जहां रेफर किया जा रहा है, वहां मरीज को दाखिला मिले। डेढ़ लाख तक कैशलेस इलाज होने के बाद उसके भुगतान में नोडल एजेंसी के रूप में NHAI काम करेगा, यानी इलाज के बाद मरीज या उनके परिजन को डेढ़ लाख तक की रकम का भुगतान नहीं करना है। यदि इलाज में डेढ़ लाख से ज्यादा का खर्च आता है तो बढ़ा बिल मरीज या परिजन को भरना होगा। सूत्रों का कहना है कि कोशिश यह हो रही है कि डेढ़ लाख की राशि को बढ़ाकर 2 लाख रुपए तक किया जा सके। दरअसल, दुर्घटना के बाद का एक घंटा ‘गोल्डन ऑवर’ कहलाता है। इस दौरान इलाज न मिल पाने से कई मौतें हो जाती हैं। इसी को कम करने के लिए यह योजना शुरू की जा रही है।

ट्रंप के चार वरिष्ठ सहयोगियों ने यूक्रेन के विपक्षी नेताओं से गुप्त बैठकें की हैं, जिससे देश में तख्तापलट की अटकलें तेज

कीव/वाशिंगटन यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की सत्ता पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चार वरिष्ठ सहयोगियों ने यूक्रेन के विपक्षी नेताओं से गुप्त बैठकें की हैं, जिससे देश में तख्तापलट की अटकलें तेज हो गई हैं। अमेरिका और यूरोप के राजनीतिक घटनाक्रमों पर नजर रखने वाले समाचार पोर्टल POLITICO ने इस अहम रिपोर्ट का खुलासा किया। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब हाल ही में वाइट हाउस की बैठक के दौरान ट्रंप और जेलेंस्की के बीच तीखी तकरार हुई थी। बैठक बीच में ही रद्द हुई और उसके तीन दिन बाद अमेरिका ने यूक्रेन को सभी सैन्य सहायता देने पर रोक लगा दी। ट्रंप सहयोगियों की गुप्त मीटिंग से बढ़ी हलचल रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन की प्रमुख विपक्षी नेता यूलिया तिमोशेंको और पूर्व राष्ट्रपति पेत्रो पोरोशेंको की पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ ट्रंप के सहयोगियों की बैठकें हुईं। तीन यूक्रेनी सांसदों और एक अमेरिकी रिपब्लिकन विदेश नीति विशेषज्ञ के हवाले से कहा गया है कि इस चर्चा का मुख्य विषय यूक्रेन में जल्द से जल्द राष्ट्रपति चुनाव कराना था। जेलेंस्की की सत्ता खतरे में? यूक्रेन तीन साल से युद्ध झेल रहा है। अरबों की संपदा खाक हो चुकी है, करोड़ों लोग पलायन कर चुके हैं और लाखों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है। इस जंग में भले ही रूस पूरी तरह से यूक्रेन पर कब्जा नहीं कर पाया, लेकिन पांच शहरों पर रूस ने अपनी आंशिक जीत सुनिश्चित कर दी है। अब यूक्रेन में तख्तापलट की आहट से राष्ट्रपति जेलेंस्की की सत्ता पर लगातार चुनौतियां बढ़ गई है। अमेरिकी रिपब्लिकन नेताओं का यूक्रेनी विपक्षी नेताओं से मिलना बड़े राजनीतिक बदलाव के संकेत दे रहा है। रूस और ट्रंप भी चाह रहे राष्ट्रपति चुनाव पहले रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और फिर डोनाल्ड ट्रंप भी संकेत दे चुके हैं कि यूक्रेन में जल्द से जल्द राष्ट्रपति चुनाव होने चाहिए। दोनों की नजर में यूक्रेन में शांति जेलेंस्की की विदाई के बाद ही संभव है। सूत्रों के मुताबिक, यूक्रेन के विपक्षी नेताओं की ट्रंप के सहयोगियों संग बैठक में चर्चा का मुख्य बिंदु यह था कि क्या यूक्रेन में जल्द राष्ट्रपति चुनाव संभव है। जेलेंस्की को इस बात का भी डर है कि कि युद्ध के बीच यूक्रेन में चुनाव रूस को फायदा पहुंचा सकता है।

अब अमेरिका में सालों से बसे हजारों भारतीयों के आगे बेदखली का खतरा, कई तलाशने लगे ठिकाने

वॉशिंगटन अमेरिका में पिछले दिनों करीब 500 भारतीयों को डिपोर्ट करके तीन फ्लाइट्स में भारत भेजा गया है। ये लोग अमेरिका में अवैध दस्तावेजों के साथ चले गए थे। लेकिन अब एक नया विवाद खड़ा होने वाला है। हजारों ऐसे भारतीयों के सामने अमेरिका से वापसी का खतरा मंडराने लगा है, जो नाबालिग के तौर पर अमेरिका पहुंचे थे। इन लोगों को H-4 वीजा पर अमेरिका में रहने का मौका मिला था। अब ये 21 साल के होने वाले हैं तो इनका भविष्य अंधकार में है। अमेरिका में मौजूदा प्रवासी कानून के अनुसार नाबालिग के तौर पर आए लोगों को उनके एच-1बी वीजा होल्डर पैरेंट्स पर निर्भर यानी डिपेंटेडेंट घोषित नहीं किया जा सकता। ऐसा करने से उन्हें वहां बने रहने की परमिशन मिल सकती थी। अब तक उन्हें दो साल का मौका मिलता था और इस दौरान वे अपने वीजा का स्टेटस बदलवा लेते थे। लेकिन अब वीजा नीति में बदलाव ने उनके भविष्य को अंधकार में धकेल दिया है। कई लोग पहले से ही विकल्प की तलाश में जुटे हैं। कुछ लोग कनाडा, ब्रिटेन जैसे देशों में जाने की तैयारी में हैं, जहां बसने को लेकर नीतियां थोड़ी लचीली हैं। दरअसल अमेरिका में रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड का एक लंबा बैकलॉग है। ऐसे में नए आवेदकों को नागरिकता मिल पाना तत्काल तो मुश्किल ही है। अमेरिकी नागरिकता और प्रवासी सेवा विभाग ने हाल ही में एच-1बी वीजा के लिए रजिस्ट्रेशन पीरिडयन का ऐलान किया है। यह प्रक्रिया 7 मार्च से 24 मार्च तक ही चलने वाली है। एच-1बी वीजा उन लोगों के लिए होता है, जो गैर-प्रवासी होते हैं। इसके तहत अमेरिकी कंपनियों को विदेशी लोगों को नौकरी देने की मंजूरी दी जाती है। यह नौकरियां तकनीकी और विषय की विशेषज्ञता को आधार मानकर दी जाती हैं। अब यहां पेच यह फंस रहा है कि एच-1बी वीजा हर साल 65 हजार ही जारी किए जा सकते हैं। इनके अतिरिक्त 20 हजार ऐसे लोगों को यह वीजा जारी हो सकते हैं, जिन्होंने अमेरिका में ही मास्टर्स डिग्री ली हो। अब इसमें भी फ्रॉड की आशंका को रोकने के लिए अमेरिका ने अपनी नीतियों को सख्त किया है। एच-1बी वीजा के लिए रजिस्ट्रेशन फीस 215 डॉलर की गई है। एक अनुमान के अनुसार ऐसे करीब 1.34 लाख भारतीय हैं, जिनकी आयु 21 साल होने वाली है और उनके परिवारों के पास ग्रीन कार्ड नहीं है। अमेरिकी सिस्टम में बड़े पैमाने पर बैकलॉग है। ऐसे में इस बात की संभावना प्रबल है कि हजारों की संख्या में भारतीयों को अमेरिका ही छोड़ना होगा। हाल ही में टेक्सास कोर्ट ने नए आवेदकों के लिए वर्क परमिट जारी करने पर रोक लगा दी थी। अब तक एक नियम था, जिसे Deferred Action for Childhood Arrivals जाता है। इस नियम के तहत नाबालिग के तौर पर पैरेंट्स के साथ आए लोगों को दो साल का अतिरिक्त समय नागरिकता के लिए आवेदन हेतु मिलता था। अब वह समय खत्म हो गया है। ऐसे में हजारों भारतीयों के पास कोई और विकल्प तलाशने के अलावा दूसरा रास्ता नहीं बचा है।

इस बार साल का पहला महंगाई भत्ता मार्च में लागू हो सकता है, होली से पहले डीए में बढ़ोतरी का ऐलान कर सकती है

नई दिल्ली अगले हफ्ते केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बड़ी खुशखबरी मिलने वाली है। दरअसल, केंद्र सरकार होली से पहले महंगाई भत्ता और महंगाई राहत में बढ़ोतरी की घोषणा कर सकती है। इससे केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी और पेंशनर्स की पेंशन में जबरदस्त इजाफा होगा। महंगाई भत्ते में होगी 3 फीसदी की बढ़ोतरी सरकार हर साल दो बार (1 जनवरी और 1 जुलाई) महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी करती है। हालांकि इसकी अधिकारिक घोषणा कुछ समय बाद होती है। इस बार साल का पहला महंगाई भत्ता मार्च में लागू हो सकता है। खबर है कि सरकार होली से पहले डीए में बढ़ोतरी का ऐलान कर सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बार सरकार महंगाई भत्ते में 3 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकती है। यह बढ़ोतरी 1 जनवरी 2025 से लागू मानी जाएगी। वहीं 3 फीसदी की बढ़ोतरी होने से DA और DR 56% तक पहुंच जाएगा। बता दें कि पिछले साल भी अक्टूबर के पहले सप्ताह में महंगाई भत्ते में 3 फीसदी बढ़ोतरी की गई थी। लेकिन इसे लागू 1 जुलाई से माना गया था। तब डीए बढ़कर 50 फीसदी से बढ़कर 53 फीसदी हो गया था। इससे पहले मार्च 2024 में डीए 4 फीसदी की बढ़ोतरी की थी। तब महंगाई भत्ता 4 प्रतिशत बढ़ने से बेसिक पे का 50 प्रतिशत हो गया था। अब डीए बेसिक सैलरी का 53 फीसदी है। साथ ही पेंशनर्स के लिए महंगाई राहत (DR) भी 53 फीसदी है। कब लागू होगा 8वां वेतन आयोग अगर 8वें वेतन आयोग की बात करें तो इसे लागू करने को लेकर सरकार ने आधिकारिक रूप से तारीख का ऐलान नहीं किया है। लेकिन एक्सपर्ट्स द्वारा कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि सरकार 1 जनवरी 2026 से 8वां वेतन आयोग लागू कर सकती है। जानकारों की मानें तो सातवें वेतन आयोग का कार्यकाल खत्म होने के बाद साल 2026 में इसे लागू किया जा सकता है। साल 31 दिसंबर 2025 को मौजूदा वेतन आयोग के दस पूरे हो जाएंगे।

प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण 2.0 के लिए अब मोबाइल से करें अप्लाई, दुमका जिले में सर्वे हुआ प्रारंभ

दुमका प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण 2.0 (PM Awas Yojana) के लिए दुमका जिले में सर्वे प्रारंभ हो चुका है। आर्थिक तौर पर कमजोर तबके को पक्का मकान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रारंभ किए गए पीएम आवास योजना के तहत लाभुक को 1.20 लाख रुपये की लागत से पक्का मकान बनवाने की योजना है। पीएम आवास के नए सर्वे का इरादा 2024-25 से 2028-29 तक योजना के पात्र परिवारों को पक्के मकान मुहैया कराना है। झारखंड में 31 मार्च 2025 तक इस योजना के लिए नए लोग आवेदन कर सकते हैं। खास बात यह है कि पीएम आवास योजना के लिए अब लाभुक खुद भी मोबाइल एप से आवेदन कर सकते हैं। वैसे प्रशासनिक स्तर पर सर्वे करने की जिम्मेवारी ग्राम पंचायत के सचिव को दी गई है। इतना ही नहीं जिला व प्रखंड स्तर पर इसके सत्यापन के लिए कमेटियां भी गठित की गई है। जिनके पास मकान नहीं है उन्हें मिलेगी प्राथमिकता प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत वैसे लाभुकों को प्राथमिकता मिलेगी जिनके पास मकान नहीं है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के परिवार जिनके पास मकान नहीं है उन्हें भी पीएम आवास में वरीयता दी जाएगी। इसके अलावा मिडिल और लोअर-मिडिल श्रेणी के लाभुकों को भी इसका फायदा मिलेगा। आवास प्लस ऐप से लाभुक कर सकते हैं खुद अप्लाई सबसे अच्छी खबर यह है कि अब लोग पीएम आवास के लिए खुद भी अपने मोबाइल से अप्लाई कर सकते हैं। राष्ट्रीय सूचना केंद्र ने एक मोबाइल ऐप तैयार किया है जिसका नाम है आवास प्लस। चूंकि अगले पांच सालों तक पात्र परिवारों को इस योजना के तहत पक्के मकान दिए जाने की योजना है, इसलिए ऐप के जरिए भी अब लाभुक अपना आवेदन कर सकते हैं। सर्वे का काम 31 मार्च 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। केंद्र सरकार से इस योजना के लिए 2024-25 से 2028-29 तक के लिए मंजूरी दे दी गई है। ऐसे कर सकते हैं लाभुक खुद से अप्लाई प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के लिए जरूरी शर्तों को पूरा करने वाले पात्र व्यक्ति खुद अपने मोबाइल से आवेदन कर सकते हैं। लाभार्थी को अपने स्मार्टफोन में आवास प्लस-2024 सर्वे व आधार फेस आइडी एप डाउनलोड करके इंस्टाल करना होगा। एक मोबाइल फोन से एक ही सर्वे किया जाए सकेगा। सर्वे के लिए लाभार्थी का आधार नंबर जरूरी है। यह है पीएम आवास के लिए प्राथमिकताएं पीएम आवास योजना में बेघर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के परिवारों को प्राथमिकता मिलेगी। यानी जिन लोगों के पास रहने के लिए अपना घर नहीं है उन्हें पक्के घर बनाकर दिए जाएंगे। इसके बाद अन्य लाभार्थियों को घर मिलेंगे। यह है आवेदन के नियम अगर किसी किसान की केसीसी लिमिट 50 हजार से ज्यादा है तो वह योजना के लाभ के लिए अपात्र की श्रेणी में आएंगे। सर्वे में जिले के आवास विहीन और कच्चे घरों में रहने वाले पात्र परिवारों का नाम जोड़ा जाना है। इसके अलावा ऐसे लोग जिनके पास पक्के घर और -तीन पहिया या चार पहिया वाहन हैं, उन ग्रामीणों को इस योजना का लाभ नहीं मिल सकेगा। मशीन वाले तीन पहिया और चार पहिया कृषि उपकरण रखने वालों को भी पीएम आवास योजना का फायदा नहीं मिल पाएगा। जिन लोगों के पास ढाई एकड़ सिंचित भूमि हैं, उन्हें भी योजना का लाभ नहीं मिलेगा। ढाई एकड़ या इससे ज्यादा सिंचित भूमि और 11.5 एकड़ या इससे ज्यादा असिंचित भूमि वाले किसान इस योजना का लाभ नहीं ले पाएंगे। इसके अलावा परिवार के किसी भी सदस्य के सरकारी नौकरी में होने, गैर कृषि उद्यम वाले परिवार भी आवास योजना के लाभ से वंचित रहेंगे। इनकम टैक्स व बिजनेस टैक्स देने वालों को भी इस योजना का लाभ नहीं मिल सकेगा।  

डोनाल्ड ट्रंप अफगानिस्तान और पाकिस्तान के लोगों पर अगले हफ्ते से ही अमेरिका में प्रवेश पर पाबंदी लगा सकते है!

वॉशिंगटन बीते दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक आतंकी को पकड़वाने में मदद करने के लिए पाकिस्तान की खूब तारीफ की थी। इस तारीफ के बाद फूले नहीं समा रहे शाहबाज शरीफ को ट्रंप जल्द ही बड़ा झटका देने की तैयारी में हैं। मामले से परिचित सूत्रों ने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ऐसे आदेश पर दस्तखत कर सकते हैं जिससे अफगानिस्तान और पाकिस्तान के लोगों पर अगले हफ्ते से ही अमेरिका में प्रवेश पर पाबंदी लग जाएगी। बता दें कि ट्रंप प्रशासन दुनिया के कई देशों पर ट्रैवल बैन लगाने की तैयारी में हैं। अमेरिकी सरकार ने इसके पीछे देश की सुरक्षा का हवाला दिया है। सूत्रों ने बताया है कि जनवरी को एक कार्यकारी आदेश जारी किया गया जिसमें पाक और अफगानिस्तान के अलावा दूसरे देश भी शामिल हो सकते हैं। ट्रंप ने इससे पहले अपने पहले कार्यकाल में भी सात मुस्लिम बहुल देशों के यात्रियों पर अमेरिका आने प्रतिबंध लगाने की घोषणा कर दी थी। यही नहीं 2018 में उनकी इस नीति को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा था। हालांकि पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन ने 2021 में इन प्रतिबंधों को हटा दिया था और इसे राष्ट्रीय विवेक पर एक धब्बा बताया था। ट्रंप की लिस्ट में कौन से देश? ट्रंप ने 12 मार्च तक उन देशों की सूची प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था जिनसे यात्रा आंशिक रूप से या पूरी तरह से निलंबित की जानी चाहिए। इससे पहले ट्रंप अवैध प्रवासियों पर सख्ती बरतने के लिए सुर्खियां बना चुके हैं। वहीं अक्टूबर 2023 में अपने चुनावी अभियान के दौरान भी उन्होंने गाजा पट्टी, लीबिया, सोमालिया, सीरिया और यमन जैसे देश के लोगों को सुरक्षा के लिए खतरा बताया था। ट्रंप अगर इस तरह का कोई भी प्रतिबंध लगाते हैं तो यह उन हजारों अफगानों को प्रभावित कर सकता है जिन्हें शरणार्थियों के रूप में या विशेष प्रवासी वीजा पर अमेरिका में पुनर्वास के लिए मंजूरी दी गई थी।

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

casino online

clickbet88

login kudahoki88

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

slot olympus

sbobet

slot thailand

sbobet