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आपराधिक मामलों में दोषी नेताओं पर ताउम्र चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध सही नहीं, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि आपराधिक मामलों में दोषी ठहराए गए नेताओं पर ताउम्र चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाना सही नहीं होगा। केंद्र ने कहा कि मौजूदा छह साल का प्रतिबंध ही काफी है। आपराधिक मामलों में दोषी करार दिए गए नेताओं पर आजीवन प्रतिबंध लगाने की मांग करने वाली एक जनहित याचिका का विरोध करते हुए केंद्र सरकार ने शीर्ष न्यायालय से ऐसा कहा है। इस याचिका में दोषी ठहराए गए सांसदों और विधायकों समेत अन्य नेताओं पर चुनाव लड़ने पर आजीवन प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी। शीर्ष अदालत में दाखिल हलफनामे में केंद्र ने कहा कि याचिका में जो अनुरोध किया गया है वह विधान को फिर से लिखने या संसद को एक विशेष तरीके से कानून बनाने का निर्देश देने के समान है, जो न्यायिक समीक्षा संबंधी उच्चतम न्यायालय की शक्तियों से पूरी तरह से परे है। इसके साथ ही केंद्र ने कहा कि इस तरह की अयोग्यता तय करना केवल संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है। हलफनामे में कहा गया है, ‘‘यह सवाल कि आजीवन प्रतिबंध लगाना उपयुक्त होगा या नहीं, यह पूरी तरह से संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है।’’ इसमें कहा गया है कि दंड के क्रियान्वयन को एक उपयुक्त समय तक सीमित कर, रोकथाम सुनिश्चित की गई है और अनावश्यक कठोर कार्रवाई से बचा गया है। केंद्र ने कहा कि यह कानून का स्थापित सिद्धांत है कि दंड या तो समय या मात्रा के अनुसार निर्धारित होते हैं। हलफनामे में कहा गया है, ‘‘यह दलील दी गई है कि याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए मुद्दों के व्यापक प्रभाव हैं और वे स्पष्ट रूप से संसद की विधायी नीति के अंतर्गत आते हैं तथा इस संबंध में न्यायिक समीक्षा की रूपरेखा में उपयुक्त परिवर्तन करना पड़ेगा।’’ अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर दोषी करार दिये गए नेताओं पर आजीवन प्रतिबंध लगाने के अलावा देश में सांसदों और विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों के त्वरित निस्तारण का अनुरोध किया है। अपने हलफनामे में, केंद्र ने कहा कि शीर्ष अदालत ने निरंतर यह कहा है कि एक विकल्प या दूसरे पर विधायी विकल्प की प्रभावकारिता को लेकर अदालतों में सवाल नहीं उठाया जा सकता। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8 (1) के तहत, अयोग्यता की अवधि दोषसिद्धि की तारीख से छह साल या कारावास के मामले में रिहाई की तारीख से छह साल तक है। हलफनामे में कहा गया है कि उक्त धाराओं के तहत घोषित की जाने वाली अयोग्यताएं संसदीय नीति का विषय हैं और आजीवन प्रतिबंध लगाना उपयुक्त नहीं होगा। केंद्र ने कहा कि न्यायिक समीक्षा के मामले में, न्यायालय प्रावधानों को असंवैधानिक घोषित कर सकता है, हालांकि, याचिकाकर्ता द्वारा मांगी गई राहत में अधिनियम की धारा 8 की सभी उप-धाराओं में ‘‘छह वर्ष’’ के प्रावधान को ‘‘आजीवन’’ पढ़े जाने का अनुरोध किया गया है। इसने कहा कि आजीवन अयोग्यता, प्रावधानों के तहत लगाई जा सकती है और ऐसा विवेकाधिकार ‘‘निश्चित रूप से संसद के अधिकार क्षेत्र में’’ है। केंद्र ने कहा कि याचिका अयोग्यता के आधार और अयोग्यता के प्रभावों के बीच महत्वपूर्ण अंतर स्पष्ट करने में विफल रही है। हलफनामे में कहा गया है कि याचिकाकर्ता का संविधान के अनुच्छेद 102 और 191 का उल्लेख करना पूरी तरह से गलत है। संविधान के अनुच्छेद 102 और 191 संसद, विधानसभा या विधानपरिषद की सदस्यता के लिए अयोग्यता से संबंधित हैं। केंद्र ने कहा कि अनुच्छेद 102 और 191 के खंड (ई) संसद को अयोग्यता से संबंधित कानून बनाने की शक्ति प्रदान करते हैं और इसी शक्ति का प्रयोग करते हुए 1951 का (जन प्रतिनिधित्व) अधिनियम बनाया गया था। इसने कहा कि संविधान ने संसद को अयोग्यता से संबंधित ऐसे अन्य कानून बनाने का अधिकार दिया है, जिसे बनाना वह उचित समझता हो। केंद्र ने कहा, ‘‘संसद के पास अयोग्यता के आधार और अयोग्यता की अवधि, दोनों निर्धारित करने की शक्ति है।’’न्यायालय ने 10 फरवरी को, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 8 और 9 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र और निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा था।

दक्षिण कोरिया में बहुत तेज घट रही थी जनसंख्या, सरकार की मेहनत रंग लाई, बढ़ने लगी जन्म दर

सियोल पिछले लंबे समय से दुनिया के कई देश जनसंख्या में लगातार गिरावट से जूझ रहे हैं। इनमें एक देश ऐसा है जहां जन्म दर दुनिया में सबसे कम थी। लेकिन अब सरकार और कई अन्य कंपनियों की पहल काम आ रही है और करीब 9 साल बाद पहली बार जन्म दर में वृद्धि देखने को मिली है। हम बात कर रहे हैं दक्षिण कोरिया की। यहां सरकार के लगातार प्रयासों और नीतियों का असर दिखने लगा है। पिछले एक दशक की बात करें, तो इस देश में जन्मदर में भारी गिरावट देखी गई थी क्योंकि महिलाएं करियर को प्राथमिकता दे रही थीं और महंगे घरों व बच्चों की परवरिश की बढ़ती लागत के कारण विवाह और मातृत्व से बच रही थीं। दक्षिण कोरिया में प्रजनन दर (फर्टिलिटी रेट) साल 2023 में 0.72 तक पहुंच गई थी, जो दुनिया में सबसे कम थी। किसी देश की जनसंख्या को स्थिर रखने के लिए प्रजनन दर का 2.1 होना जरूरी माना जाता है, लेकिन दक्षिण कोरिया इससे बहुत पीछे था। बढ़ती महंगाई, लंबे काम के घंटे, नौकरी की असुरक्षा और बच्चों के पालन-पोषण की ऊंची लागत के चलते युवा शादी और बच्चे पैदा करने से कतरा रहे थे। नतीजतन, देश की आबादी तेजी से घट रही थी और यह अनुमान लगाया जा रहा था कि यदि यही स्थिति रही तो साल 2100 तक दक्षिण कोरिया की 5.1 करोड़ की आबादी आधी से भी कम हो जाएगी। जन्मदर में मामूली सुधार 2024 में, दक्षिण कोरिया की कुल प्रजनन दर बढ़कर 0.75 हो गई, जो 2023 में 0.72 थी। 2015 में यह दर 1.24 थी, जिसके बाद लगातार आठ वर्षों तक गिरावट जारी थी। वहीं, 1,000 लोगों पर जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या (क्रूड बर्थरेट) 4.7 रही, जो 2014 से चली आ रही गिरावट को तोड़ने में सफल रही। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यह वृद्धि महामारी के कारण विलंबित शादियों की संख्या में वृद्धि और सरकार की कार्य-परिवार संतुलन, बाल देखभाल और आवास संबंधी नीतियों के कारण संभव हो सकी है। सरकार ने इस संकट से निपटने के लिए कई कदम उठाए। पिछले कुछ सालों में करीब 286 अरब डॉलर की भारी-भरकम राशि जन्म दर को बढ़ाने के लिए खर्च की गई। इसमें सब्सिडी वाले आवास, परिवहन, स्वास्थ्य सेवाएं, मुफ्त आईवीएफ (टेस्ट ट्यूब बेबी) सुविधाएं और माता-पिता को आर्थिक सहायता जैसे कदम शामिल थे। इसके अलावा, बच्चों की देखभाल के लिए विदेशी कर्मचारियों की भर्ती, कर में छूट और 30 साल की उम्र तक तीन या अधिक बच्चों वाले पुरुषों को सैन्य सेवा से छूट जैसे प्रोत्साहन भी दिए गए। सामाजिक सोच में बदलाव अल-जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, सांख्यिकी कोरिया की अधिकारी पार्क ह्यून-जंग ने एक प्रेस वार्ता में कहा, “समाज में विवाह और मातृत्व को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण बढ़ा है।” उन्होंने बताया कि प्रजनन दर बढ़ाने में 30 वर्ष की उम्र वाले लोगों की संख्या में वृद्धि और महामारी के कारण विलंबित शादियों ने योगदान दिया। नई जनसांख्यिकीय नीति बीते वर्ष, राष्ट्रपति यून सुक-योल ने देश के “जनसांख्यिकीय संकट” से निपटने के लिए एक नए मंत्रालय के गठन का प्रस्ताव रखा था। इस नीति का उद्देश्य पहले की केवल नकद सहायता आधारित योजनाओं के बजाय व्यापक समाधान देना था। नई नीति के तहत, माता-पिता दोनों के लिए कुल छह महीने तक 100 प्रतिशत वेतन भुगतान की सुविधा दी गई है, जबकि पहले यह केवल तीन महीने के लिए था। इसके अलावा, माता-पिता दोनों द्वारा छुट्टी लेने की स्थिति में कुल छुट्टी की अवधि एक वर्ष से बढ़ाकर डेढ़ वर्ष कर दी गई है। कंपनियों पर नए नियम इस वर्ष से, सरकार ने सूचीबद्ध कंपनियों के लिए अनिवार्य कर दिया है कि वे अपने बाल देखभाल से जुड़े आंकड़ों को नियामक रिपोर्ट में शामिल करें। सरकार की विभिन्न परियोजनाओं और वित्तीय सहायता पाने के लिए कंपनियों को यह आंकड़े प्रस्तुत करने होंगे। इसके अलावा, छोटे और मध्यम उद्यमों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। सरकार का वित्तीय निवेश दक्षिण कोरियाई सरकार इस वर्ष कार्य-परिवार संतुलन, बाल देखभाल और आवास के तीन प्रमुख क्षेत्रों में कुल 19.7 ट्रिलियन वॉन (13.76 अरब डॉलर) खर्च करने जा रही है। यह 2024 के मुकाबले 22 प्रतिशत अधिक है। सरकार को उम्मीद है कि इन नई नीतियों से जन्मदर को और स्थिरता मिलेगी और दक्षिण कोरिया की गंभीर जनसांख्यिकीय चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी। इन प्रयासों का नतीजा अब सामने आया है। ताजा सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में जन्म दर में मामूली लेकिन महत्वपूर्ण बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह रुझान जारी रहा तो प्रजनन दर 0.74 के आगे पहुंच सकती है। हालांकि यह अभी भी अन्य देशों की तुलना में कम है, लेकिन यह एक सकारात्मक संकेत है। सितंबर 2024 में 14 सालों में पहली बार नवजात शिशुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई, जिसने सरकार और नागरिकों में उम्मीद जगाई है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल शुरुआत है। दक्षिण कोरिया को अभी लंबा रास्ता तय करना है ताकि जनसंख्या संकट से पूरी तरह उबरा जा सके। बढ़ती उम्र की आबादी और युवाओं की घटती संख्या अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। फिर भी, जन्म दर में यह बढ़ोतरी सरकार की मेहनत का रंग लाने का सबूत है और भविष्य के लिए एक नई उम्मीद की किरण लेकर आई है।

सीएम अब्दुल्ला ने भी माना अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद राज्य में अलगाववादी गतिविधियों में कमी आई

श्रीनगर  जम्मू-कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला ने भी मान लिया है कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद राज्य में अलगाववादी गतिविधियों में कमी आई है। उन्होंने मीडिया चैनल से बातचीत में उमर अब्दुल्ला ने कहा कि 2019 में जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म करने के बाद अलगाववादी राजनीति कमजोर हुई है, इसे कोई नकार नहीं सकता। हुर्रियत चेयरमैन मीरवाइज उमर फारूक को सीआरपीएफ सुरक्षा कवर मिलना पहले असंभव था, यह इस बदलाव का एक उदाहरण है। उन्होंने कहा कि अगर अलगाववादी राजनीति कमजोर हुई है, तो इसका मतलब है कि स्थिति में सुधार हुआ है। हालांकि उनके इस बयान के बाद जम्मू-कश्मीर में अलग ही विवाद शुरू हो गया है। सज्जाद लोन बोले, अब्दुल्ला के पास सबसे बड़ी सिक्युरिटी पिछले साल 16 अंक्टूबर को उमर अब्दुल्ला ने केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर के पहले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। सत्ता में बैठने के चार महीने बाद उमर अब्दुल्ला ने अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद हुए बदलावों पर चर्चा की। अब्दुल्ला ने कहा कि 2019 के बाद से जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी गतिविधियों में कमी आई है। उन्होंने कहा कि क्या आपने कभी सोचा था कि मीरवाइज को केंद्र से सीआरपीएफ सुरक्षा मिलेगी? मैं तो नहीं सोच सकता था, लेकिन हालात बदल गए हैं। अब अब्दुल्ला के इस बयान पर खूब बवाल मचा है। पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद लोन ने भी उमर को निशाने पर लेते हुए कहा कि मीरवाइज की सुरक्षा का जिक्र करने वाले भूल जाते हैं कि उनके पास सबसे बड़ा सुरक्षा घेरा रहा है। लोन ने अब्दुल्ला के बयान को जानलेवा तक कह दिया। मीरवाइज को ही उमर अब्दुल्ला ने क्यों बनाया निशाना हुर्रियत नेता मीरवाइज के ऑफिस ने उमर अब्दुल्ला के बयान को बेतुका और घटिया बताया है। इस तरह के गैर-जिम्मेदाराना बयान उनके अंदर की असुरक्षा को दिखाता है। पीडीपी एमएलए वहीद पारा ने भी एक्स पर लिखा कि मीरवाइज को अलग से निशाना बनाना उन्हें और खतरे में डालता है। यह जानते हुए भी कि उनके परिवार ने पहले ही भारी कीमत चुकाई है। सच्चाई यह है कि सैकड़ों अन्य लोगों की तरह, कब्रों, मंदिरों और मस्जिदों की भी जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ की सुरक्षा की जाती है। तो अगर मीरवाइज की सुरक्षा हो रही है तो इसे मुद्दा क्यों बनाया जा रहा है? वहीद पारा ने कहा कि कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों और एनआईए की कड़ी कार्रवाई के कारण है, न कि अलगाव वादियों के कमजोर होने के कारण। पहले भी केंद्र सरकार की तारीफ कर चुके हैं सीएम 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को रद्द करने का फैसला लिया था। सरकार ने एक राष्ट्रपति अध्यादेश जारी किया, जिसने जम्मू-कश्मीर से विशेष दर्जा छीन लिया और अनुच्छेद 35A को निरस्त कर दिया। जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक भी राज्यसभा में पारित किया गया था। इसके बाद उमर अब्दुल्ला और उनकी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस समेत जम्मू-कश्मीर के सभी क्षेत्रीय दलों ने 370 हटाने का विरोध किया था। अक्टूबर 2024 में पहली बार केंद्रशासित प्रदेश में चुनाव हुए, जिसमें नेशनल कॉन्फ्रेंस को बड़ी जीत मिली थी। उमर अब्दुल्ला पिछले चार महीने से सीएम हैं। कुर्सी संभालने के बाद वह कई मुद्दों को लेकर अमित शाह से मिले थे। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में नए कानूनों का क्रियान्वयन की तारीफ की थी।

केदारनाथ धाम के कपाट इस दिन खुलेंगे, तारीख आई सामने, तैयारी तेज

देहरादून चार धाम यात्रा (Chardham Yatra 2025) सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र मानी जाती है. जिसमें बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम शामिल हैं. यह यात्रा न केवल आध्यात्मिक शांति प्रदान करती है, बल्कि पवित्र गंगा और हिमालय की दिव्यता से भक्तों को एक अद्भुत अनुभव भी देती है. इस बीच चारधाम यात्रा 2025 (Chardham Yatra 2025) की शुरुआत 30 अप्रैल से होने जा रही है. वहीं केदारनाथ (Kedarnath Yatra 2025) धाम के कपाट खुलने की तारीख भी सामने आ गई है. 30 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलेंगे. इसके बाद, केदारनाथ धाम (Kedarnath Yatra 2025) के कपाट 2 मई (प्रात: 7 बजे) और बद्रीनाथ धाम के कपाट 4 मई को खुलेंगे. यह तीर्थयात्रा लगभग 6 महीने तक चलेगी. यात्रा की शुरुआत यमुनोत्री धाम से होती है, जो माता यमुना को समर्पित है. यहां के गर्म जलकुंड में स्नान करना शुभ माना जाता है. केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि घोषित: केदारनाथ धाम के रावल पंडित भीमशंकर लिंग ने गणना करके घोषणा की कि चारधाम यात्रा 2025 के लिए केदारनाथ धाम के कपाट 2 मई की प्रातः 7 बजे वृष लग्न में खुलेंगे. 2024 की चारधाम यात्रा संपन्न होने के बाद से बाबा केदारनाथ की उत्सव डोली उनके शीतकालीन गद्दीस्थल ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में है. इन दिनों ओंकारेश्वर मंदिर में ही बाबा केदार के दर्शन हो रहे हैं. 12 ज्योतिर्लिंगों में है केदारनाथ धाम: गौरतलब है कि केदारनाथ धाम 12 ज्योतिर्लिंगों में आता है. बाबा केदार का ये धाम उत्तराखंड के चार धामों में से एक है. केदारनाथ को पंच केदार में प्रथम पूज्य माना जाता है. शीतकाल में केदारनाथ धाम में बर्फबारी होने के कारण इसके कपाट 6 महीने के लिए बंद हो जाते हैं. शीतकालीन पूजा-अर्चना ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में होती है. आज महाशिवरात्रि पर्व पर केदारनाथ धाम के कपाट खोलने की तिथि घोषित की गई है. 4 मई को खुलेंगे बदरीनाथ धाम के कपाट: इससे पहले बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि घोषित हो चुकी है. बदरीनाथ धाम के कपाट 4 मई के ब्रह्ममुहूर्त में सुबर 6 बजे खुलने हैं. बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर नरेंद्रनगर (टिहरी) स्थित राजदरबार में की गई थी. वहीं 30 अप्रैल को अक्षय तृतीया के दिन गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलेंगे. गंगोत्री और यमुनोत्री धाम उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में हैं. इसके बाद गंगोत्री धाम आता है, जहां से गंगा नदी का उद्गम होता है. तीसरा पड़ाव केदारनाथ धाम है, जो भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है. यहां पहुंचने के लिए कठिन चढ़ाई करनी पड़ती है. अंतिम पड़ाव बद्रीनाथ धाम है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है और मोक्ष प्राप्ति का द्वार माना जाता है.

जौरी जिले के सुंदरबनी में सेना की गाड़ी पर आतंकी हमला, आतंकियों ने ताबड़तोड़ बरसाईं गोलियां

जम्मू जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले के सुंदरबनी में सेना की गाड़ी पर आतंकी हमला हुआ है। इस इलाके से सेना का वाहन गुजर रहा था। इसी दौरान घात लगाए बैठे आतंकवादियों ने वाहन पर हमला बोला दिया। अब तक मिली जानकारी के अनुसार जंगल से ही आतंकियों ने कई राउंड फायरिंग गाड़ी को निशाना बनाकर की। जवाब में सेना के जवानों ने भी ऐक्शन लिया है। पूरे इलाके की घेराबंदी करके आतंकियों के खिलाफ सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। यह हमला बुधवार को दोपहर 1 बजे के करीब हुआ। पानी टंकी के पास गांव फहल में यह हमला हुआ है। यह गांव सुंदरबनी मल्ला रोड पर स्थित है। आतंकियों ने वाहन पर 4 से 5 राउंड की फायरिंग की, जो एलओसी के नजदीक जंगल में छिपे हुए थे। सेना के प्रवक्ता ने भी घटना की जानकारी दी है, लेकिन अब तक किसी तरह के नुकसान की कोई खबर नहीं है। फिलहाल आतंकियों के खिलाफ सर्च ऑपरेशन जारी है। सेना चला रही है सर्च अभियान जानकारी के अनुसार, मुश्तबह दहशतगर्दों पेली फाल सुंदरबनी के इलाके में सेना की गाड़ी पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। ये हमला अखनूर के मलला और राजौरी के सुंदरबनी के पास के इलाके में हुआ है। फ़ायरिंग के बाद संदिग्ध आतंकी फरार हो गए। संभावना है कि आतंकी पास के जंगलों में छिप गए हैं। फायरिंग के बाद इलाके में आने जाने वाली गाड़ियों को रोककर तलाशी की ली जा रही है। किसी के हताहत होने की सूचना नहीं अधिकारियों ने बताया कि सुंदरबनी सेक्टर के फाल गांव के पास हुई संक्षिप्त गोलीबारी में किसी के हताहत होने की तत्काल कोई खबर नहीं है। उन्होंने बताया कि जंगल में छिपे हुए आतंकवादियों ने इलाके से गुजर रहे सेना के वाहन पर कुछ राउंड फायरिंग की। यह इलाका आतंकवादियों के लिए पारंपरिक घुसपैठ का रास्ता माना जाता है। अधिकारियों ने बताया कि सैनिकों ने जवाबी फायरिंग की, जबकि आतंकवादियों को बेअसर करने के लिए अतिरिक्त बल भेजा गया। सेना ने इलाके में की घेराबंदी जानकारी के अनुसार, आज दोपहर 12:45 बजे, आतंकवादियों ने राजौरी सेक्टर के निकट सेना के वाहन पर गोलीबारी की। सेना ने इलाके की घेराबंदी कर दी है और तलाशी जारी है। जहां पर फायरिंग हुई है वह इलाका पाकिस्तान से सटा हुआ है। आतंकवादियों के दो आकाओं की संपत्तियां कुर्क इससे पहले जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पाकिस्तान स्थित दो आतंकवादी आकाओं की लाखों रुपये की संपत्ति मंगलवार को कुपवाड़ा जिले में कुर्क की। पुलिस द्वारा अदालत से आदेश प्राप्त करने के बाद कुर्क की गई संपत्तियों में तीन कनाल और 12 मरला भूमि शामिल है। अधिकारियों ने बताया कि ये संपत्तियां ताहिर अहमद पीर और मोहम्मद रमजान गनी की हैं, जो कुपवाड़ा के निवासी हैं और फिलहाल पाकिस्तान से बाहर रहते हैं। पुलिस ने बताया कि 2011 में दर्ज एक मामले की जांच के दौरान इनकी पहचान दो भगोड़ों की संपत्तियों के रूप में की गई थी।

गाजियाबाद में 5 कांवड़ियों को बेकाबू कार ने रौंदा, 3 कांवड़ियों की मौत, 2 की हालत गंभीर

गाजियाबाद गाजियाबाद में एक दर्दनाक हादसा हो गया। हरिद्वार से कांवड़ लेकर लौट रहे 5 शिवभक्तों को तेज रफ्तार कार ने रौंद डाला। घटना में दो सगे भाइयों सहित 3 कांवड़ियों की मौत हो गई, जबकि 2 अन्य की हालत गंभीर बनी हुई है। पुलिस ने शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजकर घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया है, जहां उनका इलाज जारी है। जानकारी के अनुसार, यह दर्दनाक हादसा मंगलवार रात 1 बजे मुरादनगर थाना क्षेत्र में दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर हुआ। तीनों मृतक हरियाणा के फरीदाबाद जिले के रहने वाले हैं। मरने वालों में दो सगे भाई भी शामिल हैं। पीड़ित परिजनों की शिकायत पर भोजपुर पुलिस ने आरोपी चालक के खिलाफ केस दर्ज किया है। फरीदाबाद के थाना तिगांव के महमूदपुर गांव निवासी राहुल ने भोजपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई है। राहुल का कहना है कि वह अपने चचेरे भाइयों देवेंद्र और हरेंद्र, थाना सेक्टर-75 फरीदाबाद के गांव खेड़ी निवासी अजय, सुनील और उसके भाई सुंदर तथा 15-20 साथियों के साथ कांवड़ लेने हरिद्वार गए थे। 25-26 फरवरी की देर रात करीब 1 बजे भोजपुर थाना क्षेत्र में दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से वापस लौट रहे थे। राहुल का कहना है कि एक बाइक पर उनके भाई देवेंद्र, हरेंद्र तथा अजय जबकि दूसरी बाइक पर सुनील और सुंदर कांवड़ का इंतजार करने के लिए सड़क किनारे रुक गए थे। वह तथा अन्य साथी उनसे कुछ दूर टेंपो में बैठे हुए थे। इसी दौरान तेज रफ्तार टाटा हैरियर गाड़ी कई वाहनों को ओवरटेक करती हुई आई और दोनों बाइक को रौंद डाला। टक्कर लगने से दोनों बाइकों पर सवार पांचों लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को इलाज के लिए मणिपाल अस्पताल ले जाने पर देवेंद्र, हरेंद्र और अजय को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि सुनील व सुंदर की हालत भी नाजुक बनी हुई है। डीसीपी ग्रामीण सुरेंद्रनाथ तिवारी ने बताया कि जिस गाड़ी ने टक्कर मारी है, वह मेरठ आरटीओ विभाग में पंजीकृत है। शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

इंडोनेशिया में सुबह-सुबह डोली धरती, 6.1 तीव्रता के साथ कांपी धरती, दहशत में लोग, सुनामी का अलर्ट नहीं!

सुलावेसी इंडोनेशिया में आज बुधवार सुबह भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 6.1 मापी गई। यह भूकंप उत्तरी सुलावेसी प्रांत के पास समुद्र में आया और इसकी गहराई करीब 10 किलोमीटर थी। संयुक्त राज्य भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) के मुताबिक भूकंप सुबह 6:55 बजे (स्थानीय समय) आया। राहत कि बात यह है कि इंडोनेशियाई मौसम विज्ञान एजेंसी ने सुनामी की संभावना से इनकार किया है और अब तक किसी बड़े नुकसान या किसी के घायल होने की खबर नहीं है। इंडोनेशिया एक ऐसी जगह पर स्थित है जहां धरती की टेक्टोनिक प्लेटें मिलती हैं। इसे ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है, जिससे यहां अक्सर भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट होते रहते हैं। इसी कारण, यह इलाका भूकंपीय दृष्टि से बहुत संवेदनशील माना जाता है। पिछले वर्षों में, इस देश में कई खतरनाक भूकंप आ चुके हैं। जनवरी 2021 में, 6.2 तीव्रता के भूकंप से 100 से ज्यादा लोगों की मौत हुई और हजारों लोग बेघर हो गए थे। 2018 में, 7.5 तीव्रता के भूकंप और सुनामी ने 2,200 से ज्यादा लोगों की जान ले ली थी। वहीं, 2004 में आए 9.1 तीव्रता के भूकंप और सुनामी में 1,70,000 से अधिक लोग मारे गए थे। इंडोनेशियाई सरकार और राहत एजेंसियां हमेशा सतर्क रहती हैं और किसी भी आपदा से निपटने के लिए तैयार रहती हैं। सुनामी  का खतरा नहीं यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के अनुसार, फिलहाल इस भूकंप से हुए नुकसान की कोई जानकारी सामने नहीं आई है.  वहीं USGS  की तरफ से दी जानकारी के अनुसार भूकंप से सुनामी आने का खतरा नहीं है. जो इंडोनेशिया के लिए बड़ी राहत वाली बात है.  इंडोनेशिया में अक्सर आते रहते हैं भूकंप यह पहली बार नहीं है जब इंडोनेशिया में भूकंप आया हो. इंडोनेशिया एक विशाल द्वीपसमूह है, जो प्रशांत महासागर के “फायर रिंग” पर स्थित है. यह क्षेत्र अत्यधिक भूकंपीय गतिविधियों के लिए प्रसिद्ध है, क्योंकि यहां टेक्टोनिक प्लेटें नियमित रूप से टकराती रहती हैं, जिससे भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट होते हैं. भूकंप से बचने के उपाय     शांत रहें और जल्दी से नीचे झुकें: भूकंप के दौरान खुद को शांत रखकर, जमीन पर झुककर अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करें.     सुरक्षित स्थान पर शरण लें: मजबूत टेबल या डेस्क के नीचे छिपें, ताकि गिरते मलबे से बच सकें.     दरवाजों और खिड़कियों से दूर रहें: इनसे दूर रहें क्योंकि ये आपको चोटिल कर सकते हैं.     अगर बाहर हैं, तो खुले स्थान पर जाएं: इमारतों, पेड़ों और बिजली के तारों से दूर रहें.     आफ्टरशॉक्स से सतर्क रहें: भूकंप के बाद आने वाले आफ्टरशॉक्स से बचने के लिए सतर्क रहें.  

इनकम टैक्स विभाग की टैक्स चोरी करने वालों के खिलाफ सख्त एक्शन की तैयारी, टैक्सपेयर्स की एक पूरी लिस्ट तैयार

नई दिल्ली  इनकम टैक्स डिपार्टमेंट देशभर में एक बड़ा अभियान चलाने की तैयारी में है। अधिकारियों का कहना है कि अभियान उन लोगों और कंपनियों के खिलाफ होगा जिन्होंने TDS/TCS नहीं काटा है या जमा नहीं किया है। लगभग 40,000 ऐसे टैक्सपेयर्स जांच के दायरे में हैं। यह कार्रवाई वित्त वर्ष 2022-23 और 2023-24 में काटे गए टैक्स के आधार पर हो रही है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने TDS डिफॉल्टर्स को पकड़ने के लिए 16 सूत्रीय योजना बनाई है। इसके अलावा डेटा एनालिटिक्स टीम ने जांच के लिए ऐसे टैक्सपेयर्स की एक पूरी लिस्ट तैयार की है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘हमारे पास एनालिटिक्स टीम का डेटा है। अगर किसी ने टैक्स जमा नहीं किया है तो हम पहले उन्हें इस बारे में सूचित करेंगे।’ अधिकारी बार-बार नियम तोड़ने वालों पर ध्यान केंद्रित करेंगे। वे उन मामलों की जांच करेंगे जहां टैक्स कटौती और एडवांस टैक्स भुगतान में बड़ा अंतर है। जिन मामलों में कटौती करने वाले के नाम में बार-बार बदलाव और सुधार हुए हैं, उनकी भी जांच होगी। साथ ही उन कंपनियों की भी जांच होगी जिन्होंने ऑडिट में बीमार इकाइयों या घाटे वाली कंपनियों का यूज किया है। क्या कहता है कानून बोर्ड ने आकलन अधिकारियों से कहा है कि वे आयकर अधिनियम की धारा 40(a)(ia) के तहत बड़ी अस्वीकृति वाले मामलों की रिपोर्ट करें। यह धारा उन मामलों में कटौती की अनुमति नहीं देती है जहां TDS नहीं काटा गया है या सरकार के पास जमा नहीं किया गया है। कर अधिकारी ऐसे मामलों पर भी कड़ी नजर रखेंगे जहां TDS रिटर्न में कई बार संशोधन किया गया है और डिफॉल्ट की राशि में काफी कमी आई है। बोर्ड ने फील्ड अधिकारियों से कहा है कि वे कटौती करने वालों द्वारा दायर की गई शिकायतों पर भी ध्यान दें। TDS भुगतान में पैटर्न और अनियमितताओं की पहचान करने के लिए डेटा एनालिटिक्स का उपयोग करें। अधिकारी ने कहा कि विभाग के पहले के अभियानों की तरह इसमें भी किसी को परेशान नहीं किया जाएगा। इस साल के बजट में, केंद्र सरकार ने TDS और TCS दरों को युक्तिसंगत बनाने की घोषणा की है। दरों की संख्या और TDS कटौती की सीमा को कम किया गया है। डिफॉल्टर पर एक्शन अधिकारी ने कहा, ‘ईमानदार करदाताओं के लिए TDS अनुपालन में ढील दी गई है। लेकिन जानबूझकर डिफॉल्ट करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इससे टैक्स सिस्टम निष्पक्ष और न्यायसंगत बनेगा।’ इस अभियान से सरकार को उम्मीद है कि टैक्स चोरी कम होगी और राजस्व बढ़ेगा। साथ ही, ईमानदार करदाताओं को प्रोत्साहन मिलेगा। इससे देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।  

आवास को लेकर 15 मार्च से शुरू होगा सर्वे, जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाएगी आपका घर

जम्मू शहर में रहने वाले गरीब लोगों का घर बनाने का सपना साकार होने जा रहा है। सरकार ऐसे लोगों की सूची तैयार करने जा रही है जिनके पास जमीन तो है लेकिन गरीबी के कारण घर नहीं बना पा रहे। आवास एवं शहरी विकास विभाग 15 मार्च से इसके लिए सर्वे शुरू करने जा रहा है। 3 से 9 लाख रुपये वार्षिक आमदनी वाले ऐसे परिवारों को सूचीबद्ध कर प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी)- 2.0 के तहत घर बनाने का मौका दिया जाएगा। विभाग मार्च महीने में इस सर्वे को पूरा करेगा जिसमें विभिन्न विभागों के कर्मचारियों की तैनाती रहेगी। इतना ही नहीं लोग ऑनलाइन भी आवेदन कर सकेंगे। जांच-पड़ताल के बाद योग्य आवेदक को योजना का लाभ मिल पाएगा। पीएम योजना के तहत मिलेगा पक्का मकान प्रधानमंत्री आवास योजना- शहरी 2.0 योजना का उद्देश्य सभी के लिए आवास के दृष्टिकोण के साथ देश भर के सभी पात्र शहरी परिवारों को हर मौसम के अनुकूल पक्के घर उपलब्ध कराना है। आवास और शहरी मामलों का मंत्रालय शहरी क्षेत्रों में पात्र परिवारों को बीएलसी, एएचपी,आईएसएस कार्यक्रम के माध्यम से वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए योजना को लागू करता है। पिछले वर्ष करीब 350 लाख रुपये की राशि जारी की गई थी। सरकार ने जम्मू शहर के सुंजवां क्षेत्र में इस योजना के तहत 336 फ्लैट्स भी बनाए थे जिन्हें पिछले वर्ष आवंटित किया गया। यह है कार्यक्रम 1. लाभार्थी के नेतृत्व में निर्माण (बीएलसी): योजना का बीएलसी कार्यक्षेत्र 3 लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले ईडब्ल्यूएस श्रेणियों से संबंधित व्यक्तिगत पात्र परिवारों को 2.5 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान करेगा, ताकि वे अपनी उपलब्ध भूमि पर 45 वर्गमीटर तक के नए पक्के घर (एक हर मौसम के अनुकूल आवास इकाई) का निर्माण कर सकें। 2. भागीदारी में किफायती आवास (एएचपी): भागीदारी में किफायती आवास (एएचपी) कार्यक्षेत्र ईडब्ल्यूएस लाभार्थियों को पक्का घर खरीदने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करेगा। इस वर्टिकल के अंतर्गत 30-45 वर्गमीटर कार्पेट एरिया वाले किफायती मकानों का निर्माण सार्वजनिक/निजी एजेंसियों द्वारा किया जाएगा तथा उन्हें ईडब्ल्यूएस श्रेणी के पात्र लाभार्थियों को आवंटन के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। एएचपी परियोजनाओं में ईडब्ल्यूएस लाभार्थी को संपत्ति के खरीद मूल्य पर केंद्रीय और राज्य एजेंसियों द्वारा ईडब्ल्यूएस (वार्षिक आय 3 लाख रुपये तक) फ्लैट के लिए 2.5 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। 3. ब्याज सब्सिडी योजना (आईएसएस): पीएमएवाई-यू 2.0 की ब्याज सब्सिडी योजना (आईएसएस) के तहत, ईडब्ल्यूएस/एलआईजी और एमआईजी के पात्र लाभार्थियों को घरों की खरीद/पुनर्खरीद/निर्माण के लिए 01.09.2024 या उसके बाद स्वीकृत और वितरित किए गए गृह ऋण पर सब्सिडी प्रदान की जाएगी। योजना के अंतर्गत ईडब्ल्यूएस/एलआईजी/एमआईजी लाभार्थी के रूप में पहचान के लिए व्यक्तिगत ऋण आवेदक को आय का प्रमाण प्रस्तुत करना होगा। क्या है पीएमएवाई-यू 2.0 प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 (पीएमएवाई-यू 2.0) का उद्देश्य पात्र परिवारों, लाभार्थियों को शहरी क्षेत्रों में किफायती मकानों के निर्माण, खरीद या किराये पर लेने के लिए केंद्रीय सहायता प्रदान करना है। लाभ प्राप्त करने के लिए पात्रता मानदंड शहरी क्षेत्रों में रहने वाले ईडब्ल्यूएस/एलआईजी/एमआईजी वर्ग के परिवार, जिनके पास अपने या अपने परिवार के किसी सदस्य के नाम पर कोई पक्का मकान नहीं है, वे पीएमएवाई-यू 2.0 के तहत मकान खरीदने/निर्माण करने या किराये पर लेने के लिए पात्र हैं। यह रहेगी व्यवस्था ईडब्ल्यूएस परिवारों को 3 लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले परिवारों के रूप में परिभाषित किया गया है। एलआईजी परिवारों को 3 लाख रुपये से 6 लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले परिवारों के रूप में परिभाषित किया गया है। एमआईजी परिवारों को 6 लाख रुपये से 9 लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले परिवारों के रूप में परिभाषित किया गया है। कैसे कर सकते हैं आवेदन -योजना के तहत निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूरा करने वाले लाभार्थी पीएमएवाई-यू 2.0 के एकीकृत वेब पोर्टल, सामान्य सेवा केंद्रों (सीएससी) के माध्यम से या वे जिस संबंधित शहरी स्थानीय निकाय/नगर पालिका में रह रहे हैं, वहां जाकर निर्धारित प्रारूप में आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। दस्तावेज चाहिए लाभार्थी को अपने आधार कार्ड की प्रति, बैंक खाते का विवरण, निर्धारित प्रारूप के अनुसार पात्रता मानदंड को पूरा करने का वचन, बीएलसी के मामले में भूमि स्वामित्व दस्तावेज।

अगले दो से तीन दिनों में मौसम फिर से करवट ले सकता है, इन तीन राज्‍यों में भारी बारिश की संभावना

नई दिल्ली देश के कुछ राज्‍यों में अब गर्मी का असर शुरू हो गया है। हालांकि अभी भी मध्‍य और उत्‍तर भारत में रात के समय ठंड का अहसास कायम है। इधर, मौसम के जानकारों के अनुमान जताया है कि अगले दो से तीन दिनों में मौसम फिर से करवट ले सकता है। इसके चलते कुछ राज्‍यों में तेज बारिश भी देखने को मिल सकती है। आइये जानते हैं देश भर के मौसम का हाल। इन राज्‍यों में बदलेगा मौसम स्‍कायमेट वेदर का अनुमान है कि अगले 24 घंटों के दौरान लद्दाख, जम्मू कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी के साथ अगले 2-3 दिनों के दौरान कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है। भारतीय मौसम विभाग का अनुमान है कि पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव में जम्मू क्षेत्र और हिमाचल प्रदेश में 27 फरवरी, 2025 को गरज के साथ आंधी-तूफान और बहुत भारी वर्षा/बर्फबारी होने के संभावना है। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव में जम्मू क्षेत्र में 26 फरवरी, 2025 को गरज के साथ आंधी-तूफान और बहुत भारी वर्षा/बर्फबारी होने के संभावना है। अगले 24 घंटों के दौरान, सिक्किम, असम और अरुणाचल प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। जम्मू कश्मीर और उत्तर-पश्चिम राजस्थान के कुछ इलाकों में हल्की बारिश संभव है। दिल्‍ली में आज और कल पारा और बढ़ने तथा उसके बाद गिरने की संभावना है बारिश और बौछारों के कारण तापमान में गिरावट की संभावना है, हालांकि हल्की और छिटपुट बारिश होगी। इस मौसम में राजधानी में सर्दियों की बारिश की बहुत कमी है। अगले 3 दिनों के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत में न्यूनतम तापमान में 2-3 डिग्री सेल्सियस की क्रमिक वृद्धि और उसके बाद 2-4 डिग्री सेल्सियस की क्रमिक गिरावट की संभावना है। अगले 4-5 दिनों के दौरान मध्य भारत में न्यूनतम तापमान में 2-4 डिग्री सेल्सियस की क्रमिक वृद्धि की संभावना है। अगले 3 दिनों के दौरान पूर्वी भारत में न्यूनतम तापमान में कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं होने की संभावना है और उसके बाद 2-3 डिग्री सेल्सियस की क्रमिक वृद्धि की संभावना है। अगले 4-5 दिनों के दौरान आंतरिक महाराष्ट्र में न्यूनतम तापमान में 2-4 डिग्री सेल्सियस की क्रमिक वृद्धि की संभावना है। अगले 4-5 दिनों के दौरान भारत के बाकी हिस्सों में न्यूनतम तापमान में कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं होने की संभावना है। अधिकतम तापमान अगले 24 घंटों के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में अधिकतम तापमान में लगभग 2 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होने की संभावना है, उसके बाद 4-6 डिग्री सेल्सियस की गिरावट होगी। अगले 4-5 दिनों के दौरान मध्य भारत में अधिकतम तापमान में 2-4 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होने की संभावना है। अगले 3 दिनों के दौरान पूर्वी भारत में अधिकतम तापमान में कोई महत्वपूर्ण बदलाव होने की संभावना नहीं है और उसके बाद 2-3 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होने की संभावना है। अगले 4-5 दिनों के दौरान भारत के बाकी हिस्सों में अधिकतम तापमान में कोई महत्वपूर्ण बदलाव होने की संभावना नहीं है।   दिल्‍ली में बढ़ रहा है तापमान दिल्ली में पिछले तीन दिनों से दिन के तापमान में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। सफदरजंग स्थित बेस स्टेशन पर अधिकतम तापमान 27.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से लगभग 2 डिग्री सेल्सियस अधिक है। शनिवार और रविवार को दिन का तापमान क्रमशः 24.7 डिग्री सेल्सियस और 26.7 डिग्री सेल्सियस रहा। शहर में 21.5 मिमी के मासिक औसत के मुकाबले केवल 1.4 मिमी बारिश दर्ज की गई है। इससे पहले, जनवरी का महीना भी निराशाजनक रहा था, जिसमें औसत 19.2 मिमी के मुकाबले मासिक कुल 6.5 मिमी बारिश हुई थी। आगामी बारिश भी पर्याप्त नहीं होगी और इसमें बस कुछ मिलीमीटर की वृद्धि हो सकती है। यह ‘टच एंड गो’ स्थिति है, और बारिश राष्ट्रीय राजधानी के बाहरी इलाकों में ही रह सकती है।  

देश में सौ दिवसीय गहन टीबी-मुक्त भारत अभियान की शुरुआत, 5 लाख से अधिक टीबी रोगी चिन्हित

नईदिल्ली देश में सौ दिवसीय गहन टीबी-मुक्त भारत अभियान की शुरुआत के बाद से इसने उल्लेखनीय प्रगति की है। 455 रोकथाम वाले जिलों में 3.5 लाख से अधिक टीबी रोगियों की संख्‍या दर्ज की गई है और 10 करोड़ से अधिक कमजोर व्यक्तियों की जांच की गई है। यह त्वरित मामले का पता लगाने के प्रयासों, निदान में देरी को कम करने, दवा प्रतिरोधी मामलों की जल्द पहचान करने और उपचार के परिणामों में सुधार के परिणामस्वरूप हुआ है। 7 दिसंबर, 2024 को हुई 100-दिवसीय गहन टीबी-मुक्त भारत अभियान की शुरुआत केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा द्वारा 7 दिसंबर, 2024 को 100-दिवसीय गहन टीबी-मुक्त भारत अभियान की शुरुआत के बाद से, पूरे भारत में 5.1 लाख से अधिक रोगियों की संख्‍या दर्ज की गई है। टीबी की शुरुआती पहचान के लिए एक नई रणनीति तैयार की गई स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय के अनुसार टीबी के बढ़ते उच्च जोखिम वाले लोगों के लिए जांच उपकरण के रूप में एक्स-रे की पेशकश करके टीबी की शुरुआती पहचान के लिए एक नई रणनीति तैयार की गई थी। अल्ट्रापोर्टेबल हैंड-हेल्ड एक्स-रे के उपयोग और घर-घर जाकर एकत्र सेटिंग्स में पहुंचने के तीव्र प्रयासों के साथ, मधुमेह, धूम्रपान करने वालों, शराब पीने वालों, एचआईवी से पीड़ित लोगों, अतीत में टीबी से पीड़ित लोगों, वृद्ध लोगों, टीबी रोगियों के घरेलू संपर्कों जैसे जोखिम समूहों की पहचान करना और एक्स-रे के साथ लक्षणहीन और लक्षण वाले दोनों की जांच करना और उसके बाद न्यूक्लिक एसिड एम्प्लीफिकेशन टेस्टिंग (एनएएटी) का उपयोग करके पुष्टि करना कई लक्षणहीन टीबी रोगियों की पहचान कर चुका है। अभियान ने उल्लेखनीय प्रगति की है आज तक, अभियान ने उल्लेखनीय प्रगति की है। 455 रोकथाम वाले जिलों में 3.5 लाख से अधिक टीबी रोगियों की संख्‍या दर्ज की गई है और 10 करोड़ से अधिक कमजोर व्यक्तियों की जांच की गई है। यह त्वरित मामले का पता लगाने के प्रयासों, निदान में देरी को कम करने, दवा प्रतिरोधी मामलों की जल्द पहचान करने और उपचार के परिणामों में सुधार के परिणामस्वरूप हुआ है। पहचाने गए लोगों में से, 2.4 लाख रोगियों की संख्‍या सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में दर्ज की गई है जबकि 1.1 लाख की पहचान निजी स्वास्थ्य सुविधाओं के माध्यम से की गई है। इसके अतिरिक्त, 10 लाख से अधिक निक्षय शिविर आयोजित किए गए हैं और टीबी सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए 836 निक्षय वाहन तैनात किए गए हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सबसे दूरदराज के क्षेत्रों को भी कवर किया जा सके। छाती के एक्स-रे का उपयोग करके 38 लाख से अधिक लोगों की जांच की गई है जिसमें एक बड़ी आबादी शामिल है जिसमें टीबी के सामान्य लक्षण या कोई लक्षण नहीं दिखाई दिए। साथ ही, अभियान पूर्ण उपचार सुनिश्चित करने, तत्काल देखभाल की आवश्यकता वाले रोगियों, अस्पताल में भर्ती, कुपोषित टीबी रोगियों की पहचान करने के लिए अलग टीबी देखभाल को बढ़ाने और कमजोर आबादी के लिए निवारक टीबी उपचार प्रदान करने के लिए काम कर रहा है। वहीं, अभियान के शुभारंभ के बाद से, 2.4 लाख से अधिक निक्षय मित्र पंजीकृत हो चुके हैं और 2.3 लाख से अधिक खाद्य टोकरियाँ वितरित की जा चुकी हैं।  

जयपुर से दिल्‍ली का सफर मात्र 30 मिनट में! देश का पहला हाइपरलूप टेस्‍ट ट्रैक तैयार1100 KM प्रति घंटा की स्पीड से दौड़ेगी ट्रेन

नई दिल्ली भारत अब भविष्य को ध्यान में रखते हुए अत्याधुनिक यातायात सुविधाओं को विकसित करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है. इस कड़ी में बुलेट ट्रेन के साथ-साथ अब हाइपरलूप ट्रैक का नाम भी शामिल हो चुका है. इस दिशा में तेजी आगे बढ़ते हुए ही देश में पहली हाइपरलूप टेस्ट ट्रैक को तैयार कर लिया गया है. इस हाइपर लूप के शुरू होने से महज 30 मिनट में 300 किलोमीटर का सफर तय किया जा सकेगा. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे लेकर सोशल मीडिया साइट एक्स एक पोस्ट भी साझा किया है. 422 मीटर के इस हाइपरलूप टेस्ट ट्रैक को IIT मद्रास की मदद से तैयार किया गया है. रेल मंत्री ने टेस्ट ट्रैक के तैयार होने पर बधाई भी दी है. साथ ही कहा है कि ये भविष्य के यातायात को और सुगम बनाएगा. रेल मंंत्री ने हाइपरलूप को लेकर किया सोशल मीडिया पोस्ट आपको बता दें कि हाइपर लूप को भविष्य की तकनीक माना जा रहा है. इस तकनीक के तहत ट्रेन को एक खास ट्यूब में हाई स्पीड में चलाया जा सकता है. उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इसपर ट्रेन के ट्रायल शुरू होंगे. सब कुछ ठीक रहा और भारत में हाइपरलूप ट्रेन की शुरुआत होती है तो पब्लिक ट्रांसपोर्ट का पूरा ढांचा ही बदल जाएगा. हाइपरलूप ट्रैक आखिर होता क्या है? आसान भाषा में अगर समझना चाहें तो हाइपलूप एक अत्याधुनिक परिवहन प्रणाली है, जो वैक्यूम ट्यूब में विशेष कैप्सूल के जरिए अत्यधिक तेज रफ्तार से यात्रा करने की संभावना प्रदान करती है. वर्जिन हाइपरलूप का टेस्ट 9 नवंबर 2020 को अमेरिका के लास वेगास में 500 मीटर के ट्रैक पर एक पॉड के साथ आयोजित किया गया था.  इसकी रफ्तार 161 किलोमीटर प्रति घंटा थी. भारत में कौन कर रहा है इस तकनीक को विकसित अगर बात भारत में इस तकनीक के विकसित किए जाने की करें तो आईआईटी मद्रास के डिस्कवरी कैंपस में स्थित इस टेस्टिंग ट्रैक को  भारतीय रेलवे, आईआईटी मद्रास की अविष्कार हाइपरलूप टीम और TuTr हाइपरलूप स्टार्टअप की साझेदारी से बनाया गया है. इस ट्रैक की शुरुआत 100 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से की गई थी, और आगामी टेस्ट्स में इसे 600 किलोमीटर प्रति घंटा तक की रफ्तर तक टेस्ट किया जाएगा. यूरोप में इस्तेमाल में लाई जा रही है ये तकनकी विश्व के कई देशों में हाइपरलूप तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. यूरोप में सबसे लंबा हाइपरलूप टेस्ट ट्रैक खुल चुका है. इसे ऑपरेट करने वालों का कहना है कि यह सुविधा आने वाले समय में लोगों के सामने हाइपरलूप की आवश्यकता को और बेहतर तरीके से परिभाषित करेगी. कहा जा रहा है कि वर्ष 2050 तक यूरोप के चारों ओर हाइपरलूप का कुल 10000 किलोमीटर लंबा जाल विकसित हो चुका होगा. क्या है हाइपरलूप हाइपरलूप एक ऐसी तकनीक है, जिसमें ट्रेन को एक खास ट्यूब में टॉप स्पीड पर चलाया जाता है। इस तकनीक की मदद से लोगों को बहुत तेज और सुरक्षित यात्रा का अनुभव होगा। ट्रायल सफल रहने के बाद यह तकनीक भारत के पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम को पूरी तरह से बदल सकती है। हाइपरलूप एक हाई-स्पीड ट्रंसपोर्ट सिस्टम है, जिसमें पॉड्स को वैक्यूम ट्यूब के भीतर चुंबकीय तकनीक पर चलाया जाता है। घर्षण और वायुगतिकीय दबाव नहीं होने के कारण होता पॉड्स 1100 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार पकड़ सकते हैं। इस प्रणाली में ऊर्जा खपत बेहद कम होती है और यह लगभग शून्य प्रदूषण पैदा करती है।

इजरायल-अमेरिका कर सकते है परमाणु ठिकानों पर हमला, ईरान पर मंडराया युद्ध का साया, हाई अलर्ट जारी

तेहरान ईरान ने अपने परमाणु स्थलों पर अमेरिका और इजरायल के संभावित हमले की आशंका के बीच ‘हाई अलर्ट’ जारी किया है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी अधिकारियों को संदेह है कि दोनों देश मिलकर उसके परमाणु कार्यक्रम को निशाना बना सकते हैं। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब क्षेत्र में तनाव चरम पर है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ईरान के परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर नजर रखे हुए है। ईरानी सरकार ने अपनी सैन्य तैयारियों को मजबूत करने के संकेत दिए हैं, हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति मध्य पूर्व में नई अस्थिरता पैदा कर सकती है। ईरान ने परमाणु स्थलों की सुरक्षा बढ़ाई, संभावित हमले की आशंका ब्रिटेन के अखबार द टेलीग्राफ की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने इन महत्वपूर्ण स्थलों पर अतिरिक्त वायु रक्षा प्रणाली तैनात की है और सुरक्षा को मजबूत किया है। इससे पहले अमेरिका की खुफिया एजेंसियों ने बाइडेन और फिर ट्रंप प्रशासन को इस साल ईरानी परमाणु ठिकानों पर इजरायल के संभावित हमले की चेतावनी दी थी। इजरायल के हमले और ईरान की प्रतिक्रिया ईरान लंबे समय से अपने परमाणु स्थलों को सुरक्षित कर रहा था, लेकिन पिछले एक साल में इसने सुरक्षा उपायों को और तेज कर दिया, खासतौर पर तब से जब इजरायल ने ईरान पर पहली बार हमला किया था। अमेरिकी मीडिया आउटलेट ‘Axios’ के अनुसार, इजरायल ने पारचिन सैन्य परिसर पर हवाई हमले किए थे, जहां ईरान कथित रूप से परमाणु हथियारों से जुड़ा रिसर्च कर रहा था। इस हमले में “Taleghan 2” सुविधा को नष्ट कर दिया गया था। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है, “ईरान हर रात संभावित हमले का इंतजार कर रहा है और सतर्क है, यहां तक कि उन ठिकानों पर भी जो सार्वजनिक रूप से ज्ञात नहीं हैं।” ट्रंप की वापसी और ईरान पर फिर से दबाव डोनाल्ड ट्रंप के जनवरी 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में दोबारा शपथ लेने के बाद, उन्होंने ईरान के खिलाफ “अधिकतम दबाव” नीति को बहाल कर दिया है। यह वही नीति है जो उन्होंने अपने पहले कार्यकाल में अपनाई थी। इस नीति के तहत, अमेरिका ने 2015 के परमाणु समझौते से एकतरफा रूप से खुद को अलग कर लिया था और ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे। अमेरिका का आरोप है कि ईरान गुप्त रूप से परमाणु हथियार विकसित कर रहा है, जिसे उसने लगातार खारिज किया है। हालांकि, ट्रंप ने हाल ही में ईरान के साथ एक नया समझौता करने की बात कही, लेकिन ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई ने 15 फरवरी को स्पष्ट कर दिया कि, “अमेरिका से बातचीत करके कोई समस्या हल नहीं होगी।” इजरायल ने दी “अंतिम प्रहार” की धमकी खामेनेई के बयान के एक दिन बाद, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि उनका देश अमेरिका के सहयोग से ईरान के खिलाफ “अंतिम प्रहार” करेगा। नेतन्याहू ने कहा, “पिछले 16 महीनों में, इजरायल ने ईरान के आतंकवादी नेटवर्क पर कड़ा प्रहार किया है। राष्ट्रपति ट्रंप के मजबूत नेतृत्व में और अमेरिका के अटूट समर्थन के साथ, मुझे कोई संदेह नहीं कि हम इस कार्य को पूरा करेंगे।” गौरतलब है कि 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद इजरायल ने गाजा में ईरान समर्थित हमास से युद्ध छेड़ दिया था। इसके अलावा, उसने लेबनान में हिज्बुल्लाह, यमन और इराक में ईरान समर्थित सशस्त्र समूहों से भी संघर्ष किया है। अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइकल वॉल्ट्ज ने पिछले सप्ताह कहा कि, “ईरान एक तानाशाही शासन है, जिसे परमाणु हथियारों का नियंत्रण नहीं दिया जा सकता। सभी विकल्प खुले हैं।” रिपोर्ट में कहा गया है कि इजरायली हमलों से ईरान की वायु रक्षा प्रणाली कमजोर हो गई है, और भले ही उसने अतिरिक्त लॉन्चर तैनात किए हैं, लेकिन वह अब भी बड़े हमलों के प्रति संवेदनशील है। ईरान की रक्षा प्रणाली मुख्य रूप से घरेलू रूप से विकसित तकनीकों और रूसी S-300 मिसाइलों पर निर्भर है, जो इजरायली हथियारों के सामने अपर्याप्त साबित हो सकती हैं। इसे देखते हुए, ईरान ने रूस से S-400 मिसाइलों की आपूर्ति तेजी से करने की मांग की है। इसके अलावा, ईरानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की एयरोस्पेस फोर्स के प्रमुख जनरल अमीर अली हाजीजादेह ने कहा है कि ईरान एक नई बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस प्रणाली विकसित कर रहा है, ताकि इज़राइल से बढ़ते खतरे का सामना किया जा सके।

अमेरिका ने यूक्रेन का समर्थन करने से किया इनकार

न्यूयॉर्क अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को यूक्रेन युद्ध पर एक नया रुख अपनाया, जब वॉशिंगटन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में यूक्रेन पर आक्रमण की निंदा करने वाले प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद ये पहली बार है जब अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र के अंदर कीव को समर्थन देने से इनकार कर दिया। संघर्ष के तीन साल पूरे होने पर यूरोपीय समर्थन वाले प्रस्ताव को महासभा ने 93 वोटों के साथ स्वीकार कर लिया। लेकिन अमेरिका के प्रस्ताव का विरोध करने की चर्चा सबसे ज्यादा है, जो ट्रंप के नेतृत्व में वॉशिंगटन की विदेश नीति में बड़े बदलाव को दर्शाता है। प्रस्ताव के खिलाफ 18 सदस्य देशों ने मतदान किया, जबकि 65 सदस्यों ने इसमें हिस्सा नहीं लिया। वॉशिंगटन ने मतदान के दौरान मॉस्को और रूस के सहयोगियों उत्तर कोरिया और सूडान जैसे देशों का साथ दिया। नए पारित प्रस्ताव में युद्ध में कमी लाने, शत्रुता को शीघ्र समाप्त करने और यूक्रेन के विरुद्ध युद्ध का शांतिपूर्ण समाधान करने का आह्वान किया गया है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप नागरिक आबादी समेत भारी विनाश और मानवीय पीड़ा शामिल है। भारत ने लिया किसका पक्ष ? यह प्रस्ताव यूक्रेन के लिए जीत के रूप में सामने आया है, लेकिन यह कीव के कम होते समर्थन को भी दिखाता है। इसे पिछले प्रस्तावों की तुलना में बहुत कम समर्थन मिला है। वहीं, भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के मसौदा प्रस्ताव पर मतदान में हिस्सा नहीं लिया। भारत उन 65 संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों में शामिल था, जिन्होंने प्रस्ताव पर मतदान से परहेज किया। अमेरिका ने पेश किया अलग प्रस्ताव इस बीच अमेरिका ने भी एक प्रतिद्वंद्वी प्रस्ताव तैयार किया, जिसे संयुक्त राष्ट्र में रूसी राजदूत ने सही दिशा में एक कदम कहा था। लेकिन वॉशिंगटन के सहयोगी फ्रांस ने अमेरिकी पाठ में संशोधन पेश किया और महासभा को बताया कि पेरिस, ब्रिटेन समेत अन्य यूरोपीय देशों के साथ मौजूदा स्वरूप में इसका समर्थन नहीं कर पाएगा। अपने ही पाठ से पीछे हटा अमेरिका इन देशों ने अमेरिकी पाठ को फिर से लिखने के लिए दबाव डाला। इन परिवर्तनों ने यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता के प्रति प्रतिबद्धता की भी पुष्टि की, जिसे अमेरिकी पाठ से हटा दिया गया था। अमेरिकी प्रस्ताव में इतना अधिक संशोधन किया गया कि वॉशिंगटन ने आखिरकार अपने खुद के पाठ पर मतदान से परहेज किया, जबकि सभा ने इसे पास कर दिया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा- देश की सामरिक सुरक्षा दो तरह के खतरों का सामना करती

नई दिल्ली भौगोलिक दृष्टि से भारत तीन तरफ से समुद्र से घिरा हुआ है और इसकी तटरेखा बहुत बड़ी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि देश की सामरिक सुरक्षा दो तरह के खतरों का सामना करती है। पहला युद्ध है, जिसका सामना सशस्त्र बलों को करना पड़ता है और दूसरा समुद्री डकैती, आतंकवाद, घुसपैठ, तस्करी और अवैध मछली पकड़ने की चुनौतियां हैं। इनके लिए समुद्री सेनाएं, खास तौर पर भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) हमेशा सतर्क रहती हैं। गौरतलब है कि आईसीजी ने कुल 37,000 करोड़ रुपये कीमत के मादक पदार्थ भी जब्त किए। रक्षा मंत्री का कहना है कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए आईसीजी सक्रिय रूप से काम कर रहा है और सामरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 25 फरवरी को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 18वें आईसीजी अलंकरण समारोह में शामिल हुए। इस दौरान भारतीय तटरक्षक बल के कर्मियों को वीरता, विशिष्ट सेवा और सराहनीय सेवा पदक प्रदान किए गए। वर्ष 2022, 2023 और 2024 के लिए कुल 32 पदक दिए गए। इनमें छह राष्ट्रपति तटरक्षक पदक (विशिष्ट सेवा), 11 तटरक्षक पदक (वीरता) और 15 तटरक्षक पदक (सराहनीय सेवा) शामिल हैं। यहां पुरस्कार विजेताओं और उनके परिवारों ने राजनाथ सिंह से बातचीत की। पिछले एक साल में आईसीजी ने समुद्री सुरक्षा, संरक्षा और मानवीय कार्यों में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। इनमें 14 नावों और 115 समुद्री लुटेरों को पकड़ना शामिल है। साथ ही लगभग 37,000 करोड़ रुपये कीमत के मादक पदार्थ जब्त किए गए। इसके अलावा, आईसीजी ने विभिन्न बचाव कार्यों के माध्यम से 169 लोगों की जान बचाई और 29 गंभीर रूप से घायल लोगों को चिकित्सा सहायता प्रदान की। रक्षा मंत्री ने इन उपलब्धियों को केवल आंकड़े नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति आईसीजी के साहस और समर्पण की कहानी बताया। उन्होंने कहा कि समुद्री सीमाओं पर सतर्क रहकर आईसीजी न केवल अवैध घुसपैठ को रोकता है, बल्कि भारत की संप्रभुता और आंतरिक सुरक्षा को सकारात्मक रूप से प्रभावित करने में भी मदद करता है। नवीनतम तकनीकी प्रगति के कारण अपरंपरागत खतरों के उभरने पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने समुद्री बलों, विशेष रूप से आईसीजी से पारंपरिक खतरों के अलावा साइबर हमलों, डेटा उल्लंघन, सिग्नल जामिंग, रडार व्यवधान और जीपीएस स्पूफिंग जैसी चुनौतियों के प्रति सतर्क रहने का आह्वान किया। रक्षा मंत्री ने जवानों को बधाई देते हुए कहा कि ये पदक सिर्फ एक स्मृति चिन्ह नहीं हैं, बल्कि ये तिरंगे के सम्मान को बनाए रखने के लिए बहादुरी, दृढ़ता और अटूट संकल्प का प्रतीक हैं। उन्होंने तटीय सुरक्षा, संगठनात्मक दक्षता, मादक पदार्थों की जब्ती, बचाव अभियान और अंतरराष्ट्रीय अभ्यास सुनिश्चित करने में जवानों के प्रयासों की सराहना की। राजनाथ सिंह ने कहा कि सुरक्षित और समृद्ध भारत का सपना तभी साकार हो सकता है जब देश की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हो और सेनाएं सशक्त हों। उन्होंने आईसीजी की दक्षता बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा, “वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारतीय तटरक्षक बल को 9,676.70 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो पिछले बजट से 26.50 प्रतिशत अधिक है। यह आईसीजी के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके अलावा, आईसीजी को मजबूत बनाने के लिए 14 फास्ट पेट्रोल वेसल, छह एयर कुशन वाहन, 22 इंटरसेप्टर बोट्स, छह नेक्स्ट जेनरेशन ऑफशोर पेट्रोल वेसल और 18 नेक्स्ट जेनरेशन फास्ट पेट्रोल वेसल की खरीद को मंजूरी दी गई है।” रक्षा मंत्री ने डिजिटल कोस्ट गार्ड परियोजना की आधारशिला रखने की सराहना करते हुए आईसीजी की तकनीकी प्रगति पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही। उन्होंने कहा कि ये सभी प्रयास आईसीजी को पारंपरिक और अपारंपरिक खतरों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए निरंतर मजबूत करेंगे। उन्होंने इस उद्देश्य को प्राप्त करने में सरकार के पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया। समारोह से पहले रक्षा मंत्री ने औपचारिक सलामी गारद का निरीक्षण किया, जो इस अवसर की गंभीरता और महत्व को दर्शाता है।

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