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खामेनेई की मौत का जश्न मनाने के बाद एलनाज नौरोजी ने जताया डर, “वे मुझे मार डालेंगे”

नई दिल्ली एलनाज नौरोजी बीते कुछ वक्त से चर्चा में हैं। वह अपने देश ईरान के शासकों के खिलाफ खुलकर बोल रही हैं। एलनाज ने अली खामेनेई की मौत पर खुशी जाहिर की थी। इसके बाद एक वीडियो शेयर करके कहा था कि वहां जो भी हो रहा है, वहां के हुक्मरान इसके जिम्मेदार हैं। अब एक इंटरव्यू में एलनाज ने यह भी कहा है कि जब तक वो सरकार है, वह अपने देश वापस नहीं जा सकतीं। उन्हें जान से मार दिया जाएगा। इजराइल से अच्छे थे ईरान के रिश्ते एलनाज ने बॉम्बे टाइम्स से बातचीत में बताया कि वह यूएस और इजराइल का सपोर्ट क्यों कर रही हैं। वह बोलीं, ‘जब हम ईरान के बारे में बात करते हैं तो मैं इस्लामिक रिपब्लिक को अलग कर देना चाहती हूं जिन्होंने ईरान के लोगों पर कब्जा कर रखा है। ईरान के ज्यादातर लोग स्मार्ट और पढ़े-लिखे हैं और उनके विचार इस्लामिक रिपब्लिक से नहीं मिलते। एक वक्त था जब ईरान और इजराइल के रिश्ते अच्छे थे। अगर आप सायरस द ग्रेट को देखें, जिस इंसान ने दुनिया का पहला मानवाधिकार लिखा, वो पर्शियन (ईरान का) था। उसने उसने यहूदियों को बेबीलोन से मुक्त करवाया था। शाह (मोहम्मद रजा पहलवी) के वक्त में भी हमारे यूएस से अच्छे रिश्ते थे। सिर्फ इस्लामिक रिपब्लिक ही है जो लगातार कह रहा है कि नक्शे से इजराइल को मिटाना चाहता है।’ एलनाज ने बताया क्यों कर रहीं विरोध एलनाज आगे बोलीं, ‘एक महीने पहले जो ईरानी इन शासकों का विरोध कर रहे थे, उन्हें मार दिया गया। मैं ईरान में पैर भी नहीं रख सकती। अगर मैंने ऐसा किया तो वे लोग मुझे भी मार देंगे। 2022 मूवमेंट में जो हुआ उसकी वजह से मैं ईरान नहीं जा पाई हूं, जहां उन्होंने माहसा अमीनी (22 साल की लड़की) को मार दिया था। सितंबर 2022 में पुलिस कस्टडी में जिसकी मौत होने के बाद जबरदस्त विरोध हुआ था। उस लड़की को इसलिए गिरफ्तार किया गया था कि उसने हिजाब गलत तरीके से पहना था। मैंने खामेनेई के खिलाफ बोला तो मेरे परिवार को मेरी सुरक्षा की चिंता हो गई। अगर युद्ध में लोग मारे जाते हैं तो मैं अयातुल्ला को दोष दूंगी क्योंकि लोग कई बार आए और उन्होंने कहा कि वे उन्हें नहीं चाहते लेकिन वे लोग नहीं हटे। ये डिक्टेटरशिप है।’ बचपन में ही ईरान से चली गई थीं एलनाज एलनाज का जन्म ईरान में हुआ था लेकिन वह 8 साल की हुईं तो उनके परिवार ने ईरान छोड़ दिया और जर्मनी चली गईं। उनके कुछ रिश्तेदार अभी भी वहां रहते हैं। जर्मनी में एलनाज ने मॉडलिंग की फिर 20 साल की उम्र में भारत आईं। वह कई साल से ईरान नहीं गई हैं।

खामेनेई की मौत पर ईरान में खुशी, भारत में क्यों मना रहे हैं मातम?

नई दिल्ली ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मिसाइल हमले में हत्या की खबर सामने आने के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर पहुंच गया है और पूरे इलाके में हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं. अमेरिका और इजरायल की तरफ से किए गए इस हमले के बाद जहां एक तरफ कई देशों में विरोध प्रदर्शन देखने को मिले हैं और शिया मुस्लिम समुदाय के बीच गहरा शोक छा गया है. वहीं दूसरी तरफ ईरान और दुनिया के कुछ हिस्सों में लोगों ने इसे ‘फ्री ईरान’ की दिशा में पहला कदम बताते हुए जश्न भी मनाया है. इसी बीच भारतीय सिनेमा में काम कर रहीं ईरानी एक्ट्रेस एलनाज नोरौजी का सोशल मीडिया रिएक्शन सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोर रहा है. ईरान से आई दो तस्वीरों ने पहले विरोध की आग दिखाई थी, अब वही तस्वीरें जश्न की कहानी बन गई हैं. कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक तस्वीर में एक युवती देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की तस्वीर जलाकर उसी आग से सिगरेट सुलगाती नजर आई थी. यह दृश्य ईरान में महिलाओं के गुस्से और सत्ता के खिलाफ खुली चुनौती का प्रतीक बना. अब खामेनेई की मौत की खबर सामने आने के बाद उसी तरह की महिलाएं ‘चीयर्स’ करती और जश्न मनाती दिखाई दे रही हैं. इन तस्वीरों ने दुनिया भर में बहस छेड़ दी है कि क्या यह सिर्फ एक राजनीतिक प्रतिक्रिया है या फिर दशकों से सख्त सामाजिक और धार्मिक पाबंदियों में जी रही ईरानी महिलाओं की आजादी की शुरुआत? ईरान में महिलाओं का संघर्ष क्यों बना वैश्विक मुद्दा?     पिछले कुछ सालों में ईरान में महिलाओं के अधिकार सबसे बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बनकर उभरे हैं. ड्रेस कोड, सार्वजनिक जीवन में पाबंदियां और मोरल पुलिसिंग के खिलाफ लगातार आंदोलन होते रहे हैं. कई बार इन आंदोलनों को सख्ती से दबाया गया, लेकिन विरोध की आवाज पूरी तरह खत्म नहीं हुई. महसा अमिनी की मौत के बाद आंदोलन और तेज हो गया.     खामेनेई की मौत के बाद सत्ता संरचना में संभावित बदलाव महिलाओं के आंदोलन को नई दिशा दे सकता है. हालांकि यह भी सच है कि ईरान की राजनीतिक व्यवस्था सिर्फ एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं है, इसलिए तुरंत बड़े बदलाव की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी. खामेनेई की मौत पर भारत में मातम क्यों  तेहरान में अमेरिका और इजरायल ने जिस तरह से ताबड़तोड़ हमले किए और इसमें ईरान के सुप्रीम लीडर 86 वर्षीय अयातुल्ला अली खामेनेई ने जान गंवाई, उसे लेकर हंगामा मचा हुआ है। खामेनेई की मौत को लेकर भारत के मुस्लिम समुदाय में कुछ वर्गों के बीच खास प्रतिक्रिया नजर आई। लखनऊ, हैदराबाद, मुंबई और अलीगढ़ में शोक सभाओं, अंतिम संस्कार की प्रार्थना और ऑनलाइन संदेशों से संकेत मिलता है कि यह एक रेयर मूमेंट है। ऐसा पहली बार है जब शिया और सुन्नी, धार्मिक मतभेदों के लंबे इतिहास के बाद भी एक नेता के निधन पर साथ में शोक जताते नजर आए। खामेनेई 1989 से कर रहे थे ईरान का नेतृत्व     खामेनेई, जिन्होंने अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी की मृत्यु के बाद 1989 से ईरान का नेतृत्व किया।     वो एक शिया धर्मगुरु थे और सुन्नियों के लिए कोई धार्मिक प्राधिकारी नहीं थे।     उनकी मृत्यु पर प्रतिक्रियाएं सांप्रदायिक सीमाओं को पार कर गईं।     कई सुन्नियों के लिए, यह भावना ईरान से कम और फिलिस्तीन से अधिक जुड़ी है।     ये एक ऐसा मुद्दा है जो दक्षिण एशिया में सांप्रदायिक विभाजनों को भी पार कर जाता है। खामेनेई पर क्यों आए शिया सुन्नी साथ? जमात-ए-इस्लामी हिंद के प्रमुख सैयद सदातुल्लाह हुसैनी ने कहा कि खामेनेई का जीवन धार्मिक अधिकार के साथ-साथ राजनीतिक दृढ़ विश्वास को भी दर्शाता था। एक बयान में कहा गया कि रमजान के पवित्र महीने में खामेनेई की शहादत ने मुस्लिम जगत के लाखों लोगों को गहरा शोक पहुंचाया है। कुछ सुन्नी मौलवियों में शोक के साथ-साथ उन मुस्लिम सरकारों की आलोचना भी शामिल थी जिन्हें चुप्पी साधे हुए देखा गया।  सुन्नियों की इस प्रतिक्रिया पर क्या कह रहे जानकार विद्वान बशारत अली ने कहा कि शिया राजनीतिक कल्पना में, शहादत एकता और राजनीतिक शक्ति का स्रोत बन जाती है। भारत में कई शियाओं के लिए, ईरान का धार्मिक महत्व है क्योंकि यह दुनिया का सबसे बड़ा शिया-बहुसंख्यक देश है। ये कोम और मशहद जैसे धार्मिक केंद्रों का घर है। सुन्नियों के लिए प्रतिक्रिया काफी हद तक राजनीतिक रही है, जो फिलिस्तीन और इजरायल के विरोध के इर्द-गिर्द केंद्रित है।  

भारत में खामेनेई की मौत के बाद हाईअलर्ट, कानून-व्यवस्था पर सख्त नजर, उल्लंघन पर कार्रवाई की चेतावनी

नई दिल्ली  मध्य पूर्व के हालात को देखते हुए भारत में हाईअलर्ट जारी किया गया है। गृह मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियों ने सभी राज्यों को संदिग्ध लोगों पर नजर रखने और प्रदेश में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस फोर्स तैनात करने का निर्देश दिया है, जिससे देश में शांति व्यवस्था बनी रहे। अमेरिका-इजरायल के हमले में मारे गए ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के समर्थन में देश के विभिन्न राज्यों में प्रदर्शन हो रहे हैं। कुछ लोग सोशल मीडिया के माध्यम से देश में भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, राज्यों में पुलिस-प्रशासन ने सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर भी सख्त चेतावनी दी है।  नागरिकों से कहा गया है कि वे किसी भी तरह का आपत्तिजनक, भड़काऊ या अनचाहा कंटेंट पोस्ट, शेयर या फॉरवर्ड करने से बचें। अफवाहें और भ्रामक संदेश माहौल को बिगाड़ सकते हैं और कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकते हैं। पुलिस-प्रशासन ने कहा कि शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से अपनी बात रखने के अधिकार का सम्मान किया जाता है लेकिन हिंसा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना और सुरक्षा बलों के साथ टकराव किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। ऐसी घटनाओं से जान-माल का नुकसान होता है और पूरे समाज को परेशानी होती है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि किसी भी तरह के उल्लंघन पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल तत्वों, भड़काने वालों और असामाजिक तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसी क्रम में कर्नाटक के बांदीपुरा जिले में मौजूदा हालात को देखते हुए स्थानीय पुलिस ने आम नागरिकों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग की अपील की है। पुलिस-प्रशासन ने कहा है कि क्षेत्र में शांति व सुरक्षा बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है, इसलिए लोग किसी भी ऐसी गतिविधि से दूर रहें जिससे सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका हो। पुलिस की ओर से जारी अपील में कहा गया है कि लोग तोड़फोड़, दंगा-फसाद, पत्थरबाजी या किसी भी प्रकार की गड़बड़ी में शामिल न हों। ऐसा करना न केवल कानून के खिलाफ है, बल्कि इससे आम जनता, व्यापारियों, विद्यार्थियों और दिहाड़ी मजदूरों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। हिंसा और अशांति की वजह से शैक्षणिक संस्थानों के बंद होने, आवाजाही में रुकावट और आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ने की संभावना रहती है।

‘जज ने समझा नहीं’: HC में गलती का खुलासा, सीबीआई नहीं छोड़ेगी केजरीवाल-सिसोदिया को

नई दिल्ली दिल्ली की चर्चित आबकारी नीति मामले में एक नया मोड़ आ गया है. केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने दिल्ली आबकारी नीति मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले में गंभीर खामियां बताई हैं. सीबीआई ने अपनी अपील में कहा कि विशेष न्यायाधीश जीतेंद्र सिंह ने मामले में ‘मिनी ट्रायल’ चला दिया और एजेंसी के सबूतों को पूरी तरह समझे बिना आदेश पारित कर दिया. एजेंसी ने यह भी कहा कि जज ने अभियोजन पक्ष के मामले को चुनिंदा तरीके से पढ़ा और पूरे षड्यंत्र को समग्र रूप से नहीं देखा. यह मामला 2021-22 की दिल्ली की नई आबकारी (शराब) नीति से जुड़ा है, जिसे बाद में वापस ले लिया गया था. सीबीआई का आरोप है कि इस नीति को बनाते समय जानबूझकर ऐसे बदलाव किए गए, जिनसे कुछ निजी कंपनियों को फायदा पहुंचे और बदले में कथित रूप से आर्थिक लाभ लिया गया. ट्रायल कोर्ट ने क्या कहा था? राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश जीतेंद्र सिंह ने 27 फरवरी को जारी अपने आदेश में कहा था कि सीबीआई की तरफ से पेश किए गए दस्तावेजों और साक्ष्यों से पहली नजर में भी कोई ठोस मामला नहीं बनता. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री किसी भी आरोपी के खिलाफ गंभीर संदेह तक पैदा नहीं करती. जज ने कहा कि अभियोजन पक्ष ऐसा कोई सबूत पेश नहीं कर पाया, जिससे आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाया जा सके. उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि बड़ी साजिश की जो थ्योरी पेश की गई थी, वह उपलब्ध साक्ष्यों की जांच में टिक नहीं पाती. इसी आधार पर सभी 23 आरोपियों को आरोपों से मुक्त कर दिया गया. सीबीआई की अपील में क्या कहा गया? सीबीआई ने इस फैसले के खिलाफ 974 पन्नों की विस्तृत अपील दाखिल की है. एजेंसी का कहना है कि विशेष न्यायाधीश ने आरोप तय करने के शुरुआती चरण में ही ‘मिनी ट्रायल’ जैसा व्यवहार किया और मामले के हर हिस्से का विस्तृत विश्लेषण कर दिया, जबकि इस स्तर पर केवल यह देखना होता है कि प्रथम दृष्टया मामला बनता है या नहीं. सीबीआई के अनुसार, जज ने अभियोजन के पूरे मामले को एक साथ देखने के बजाय अलग-अलग हिस्सों में बांटकर देखा. एजेंसी का आरोप है कि फैसले में अभियोजन के सबूतों को चुनिंदा तरीके से पढ़ा गया और उन तथ्यों को नजरअंदाज कर दिया गया, जो आरोपियों की भूमिका को दर्शाते थे. सीबीआई ने यह भी कहा कि जज ने जांच एजेंसी और जांच अधिकारी के खिलाफ जो प्रतिकूल टिप्पणियां कीं, वे ‘अनुचित और समझ से परे’ हैं. शराब नीति में बदलाव को लेकर गंभीर आरोप सीबीआई का कहना है कि 2021-22 की आबकारी नीति में किए गए बदलाव सामान्य प्रशासनिक फैसले नहीं थे. एजेंसी के मुताबिक, नीति के तहत थोक व्यापार को निजी हाथों में सौंपने का फैसला किया गया और मुनाफे का मार्जिन 5% से बढ़ाकर 12% कर दिया गया. साथ ही टर्नओवर की शर्तों में भी ढील दी गई, जबकि विशेषज्ञों ने पहले की व्यवस्था बनाए रखने की सलाह दी थी. सीबीआई का आरोप है कि यह सब पहले से तय ‘क्विड प्रो क्वो’ यानी लेन-देन की योजना का हिस्सा था. एजेंसी का दावा है कि उसके पास वरिष्ठ नौकरशाहों के बयान और डिजिटल साक्ष्य हैं, जो यह संकेत देते हैं कि नीति को खास तरीके से तैयार किया गया. अपील में कहा गया है कि नीति तैयार करने से लेकर कथित रूप से रिश्वत की रकम के इस्तेमाल तक एक सतत आपराधिक साजिश चली. सीबीआई का दावा है कि कथित अवैध धन का इस्तेमाल गोवा विधानसभा चुनाव में किया गया. हालांकि, जज जितेंद्र सिंह ने अपने आदेश में कहा था कि गोवा चुनाव से जुड़े आरोप अधिकतर अनुमान और धारणाओं पर आधारित हैं, न कि ठोस कानूनी साक्ष्यों पर. जज पर उठाए गए सवाल सीबीआई ने अपनी अपील में कहा है कि विशेष न्यायाधीश ने साजिश के मूल आधार को नजरअंदाज कर दिया और छोटे-छोटे विरोधाभासों पर अधिक ध्यान दिया. एजेंसी के अनुसार, जज ने आरोपियों की भूमिकाओं को अपनी अलग समझ के आधार पर परिभाषित किया, जो अभियोजन के प्रस्तुत मामले से अलग थी. सीबीआई ने यह भी कहा कि आरोप तय करने के चरण में कानून की जो सीमाएं और सिद्धांत लागू होते हैं, उनका सही तरीके से पालन नहीं किया गया. एजेंसी का दावा है कि फैसला ‘स्पष्ट रूप से गलत, कानून के विपरीत और तथ्यों की गलत व्याख्या पर आधारित’ है. अपील में सीबीआई ने यह भी कहा कि कथित साजिश उच्च राजनीतिक स्तर पर रची गई थी. एजेंसी का आरोप है कि नीति के ढांचे में जानबूझकर बदलाव किए गए, ताकि निजी होलसेल व्यवस्था लागू की जा सके और कुछ कंपनियों को फायदा मिले. सीबीआई का कहना है कि नीति में किए गए बदलाव सिर्फ प्रशासनिक सुधार नहीं थे, बल्कि पहले से तय लेन-देन को आगे बढ़ाने के लिए बुनियादी कदम थे, जिनमें दिल्ली सरकार और आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेताओं की भूमिका थी. अब आगे क्या? सीबीआई ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए उसी दिन दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया. हाईकोर्ट इस अपील पर 9 मार्च को सुनवाई करेगा. अगर हाईकोर्ट को लगता है कि ट्रायल कोर्ट ने कानून की गलत व्याख्या की है या पर्याप्त आधार होते हुए भी आरोप तय नहीं किए गए, तो मामला दोबारा ट्रायल के लिए भेजा जा सकता है. वहीं, यदि हाईकोर्ट ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही मानता है, तो आरोपियों को मिली राहत बरकरार रहेगी.  

तालिबान ने डूरंड लाइन पर दो और पोस्ट कब्जाई, पाकिस्तान में तेज हुई जंग

काबुल  पाकिस्तान को अफगानिस्तान-तालिबान ने एक और झटका दे दिया है. तालिबान ने डूरंड लाइन पर दो पोस्टों पर कब्जा कर लिया है. Tolo News की रिपोर्ट के मुताबिक, इस्लामिक अमीरात ऑफ़ अफ़गानिस्तान की सेनाओं ने कंधार प्रांत के स्पिन बोल्डक और शोराबक ज़िलों में काल्पनिक डूरंड लाइन के पास पाकिस्तानी मिलिट्री पोस्ट पर कब्ज़ा कर लिया है|  पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान के बीच तनाव तब और बढ़ गया, जब अफ़गान तालिबान सेनाओं ने रावलपिंडी में नूर खान एयर बेस पर पाकिस्तान के कमांड और कंट्रोल सेंटर को निशाना बनाकर हथियारों से लैस ड्रोन हमले किए. यह घटना खास तौर पर सेंसिटिव है क्योंकि नूर खान एयर बेस उन पाकिस्तानी मिलिट्री साइट्स में से एक था, जिन्हें ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेनाओं ने टारगेट किया था|  मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिन की छोटी लेकिन ज़ोरदार लड़ाई के नौ महीने बाद भी, बेस पर रिकंस्ट्रक्शन का काम चल रहा था. बेस पर अफ़गान तालिबान के नए हमले की खबर ने रिपेयर के काम को और खतरे में डाल दिया है, जिससे और नुकसान हुआ है|  अफ़गानिस्तान के नेशनल डिफेंस मिनिस्ट्री के ऑफिशियल X अकाउंट के मुताबिक, तालिबान सेनाओं ने क्वेटा में 12th डिवीजन हेडक्वार्टर और खैबर पख्तूनख्वा में दूसरी पाकिस्तानी मिलिट्री जगहों पर ड्रोन हमले किए|  मिनिस्ट्री ने कहा, “आज, नेशनल डिफेंस मिनिस्ट्री की एयर फोर्स ने पाकिस्तान में ज़रूरी मिलिट्री ठिकानों पर सटीक और कोऑर्डिनेटेड हवाई ऑपरेशन किए. इसमें रावलपिंडी में नूर खान एयरबेस, क्वेटा (बलूचिस्तान) में 12th डिवीजन हेडक्वार्टर, खैबर पख्तूनख्वा की मोहमंद एजेंसी में ख्वाजाई कैंप और कई दूसरी ज़रूरी पाकिस्तानी मिलिट्री जगहों और कमांड सेंटर को निशाना बनाया गया|  इससे पहले, तालिबान अधिकारियों ने दावा किया था कि पूर्वी अफ़गान शहर जलालाबाद में एक पाकिस्तानी फ़ाइटर जेट को मार गिराया गया था. न्यूज़ एजेंसी AFP ने बताया कि पायलट को एयरक्राफ़्ट से पैराशूट से उतरने के बाद ज़िंदा पकड़ लिया गया. स्थानीय लोगों ने AFP को बताया कि पायलट को लैंडिंग के तुरंत बाद हिरासत में ले लिया गया था. यह घटनाक्रम दोनों देशों के बीच बड़े पैमाने पर बॉर्डर पार दुश्मनी के बीच हुआ है|  शुक्रवार को पाकिस्तान ने अफ़गानिस्तान की राजधानी काबुल और दक्षिणी शहर कंधार पर एयरस्ट्राइक की, जहां तालिबान के सुप्रीम लीडर हिबतुल्लाह अखुंदज़ादा का ठिकाना है. पाकिस्तानी सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा कि 133 तालिबान लड़ाके मारे गए, 200 से ज़्यादा घायल हुए और कई चौकियां तबाह कर दी गईं या उन पर कब्ज़ा कर लिया गया| 

तेहरान के हर कोने को डिजिटल रूप में समझ रहा था इजरायल, नेतन्याहू का दावा – युद्ध लंबा नहीं चलेगा

तेहरान  ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई की मौत के बाद एक सवाल लोगों के ज़ेहन में है. सवाल ये है की अमेरिका और इजरायल ने आख़िर कैसे इतना सटीक निशाना लगाया और खामेनेई के साथ तमाम टॉप लीडरशिप पर बॉम्बिंग कर दी |  Financial Times की एक बड़ी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इजरायल ने कई सालों तक तेहरान के ट्रैफिक कैमरा सिस्टम में सेंध लगाई |  सिर्फ कैमरे ही नहीं, मोबाइल नेटवर्क तक पहुंच बनाई गई. मकसद था ईरान के सुप्रीम लीडर अयातोल्ला अली खामेनेई और उनके सुरक्षा घेरे की हर गतिविधि पर नजर रखना |  रिपोर्ट कहती है कि तेहरान के ज्यादातर ट्रैफिक कैमरे इजरायल की निगरानी में थे. फुटेज को एन्क्रिप्ट कर बाहर भेजा जाता था. इससे एक पूरा मूवमेंट पैटर्न तैयार हुआ. कौन कब निकला. कौन साथ था. कौन सा रूट लिया गया. सब रिकॉर्ड होता रहा |  ऑपरेशन कैसे चला? बताया गया है कि यह काम एक-दो महीने का नहीं था. यह लंबा ऑपरेशन था. इजरायल की खुफिया यूनिट 8200 और मोसाद ने टेक सिस्टम में गहरी घुसपैठ की |  कैमरों की लाइव फीड एक्सेस की गई. मोबाइल नेटवर्क डेटा भी जोड़ा गया. इससे सिक्योरिटी स्टाफ की आवाजाही समझी गई. बॉडीगार्ड्स कहां पार्क करते हैं. किस समय गार्ड बदलते हैं. किस रास्ते से मूवमेंट होता है. धीरे-धीरे एक पैटर्न ऑफ़ लाइफ तैयार हुआ. यानी रोजमर्रा की आदतों का पूरा डिजिटल नक्शा |  कैमरे कैसे हथियार बने? आज शहरों में लगे CCTV सिर्फ ट्रैफिक कंट्रोल के लिए नहीं हैं. अगर कोई सिस्टम में घुस जाए तो वही कैमरे निगरानी का टूल बन जाते हैं|  रिपोर्ट के मुताबिक फुटेज को सीधे बाहर के सर्वर पर भेजा गया. यानी डेटा शहर के अंदर नहीं रहा|  मोबाइल नेटवर्क की घुसपैठ से यह पता चलता है कि कौन सा फोन किस लोकेशन पर था. इससे सिक्योरिटी मूवमेंट और साफ दिखने लगता है|  इजरायल ने ऐसे बनाया एक्शन प्लान  रिपोर्ट में दावा है कि जब पर्याप्त जानकारी इकट्ठा हो गई, तब सटीक एक्शन प्लान बनाया गया|  लोकेशन, टाइमिंग और सिक्योरिटी गैप को समझकर आगे की रणनीति तय की गई|  हालांकि आधिकारिक स्तर पर सभी दावों की पुष्टि नहीं हुई है. लेकिन यह साफ है कि डिजिटल निगरानी इस पूरे मामले में अहम रही|  डिजिटल युद्ध: साइबर वॉर      विशेषज्ञ कहते हैं कि अब युद्ध सिर्फ जमीन या आसमान में नहीं लड़ा जाता|      डिजिटल सिस्टम नया मोर्चा है. कैमरे. मोबाइल नेटवर्क. इंटरनेट. सब संभावित टारगेट हैं|      जो देश साइबर क्षमता में मजबूत हैं, वे बिना गोली चलाए भी बड़ी बढ़त बना सकते हैं|  क्या सेफ हैं कैमरा? मिडिल ईस्ट में तनाव पहले से बढ़ा हुआ है. इजरायल और ईरान के बीच टकराव खुला रहस्य है. ऐसे माहौल में अगर शहर का इंफ्रास्ट्रक्चर ही निगरानी टूल बन जाए, तो यह नई तरह की जंग है|  यह मामला दिखाता है कि अब साइबर वॉरफेयर असली दुनिया के फैसलों को प्रभावित कर रही है|  इस रिपोर्ट ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. क्या शहरों के कैमरे सुरक्षित हैं? क्या मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह सुरक्षित हैं? और क्या आने वाले समय में ऐसे ऑपरेशन आम हो जाएंगे? ये युद्ध कई साल तक नहीं चलेगा… नेतन्याहू  इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ईरान के खिलाफ जल्द और निर्णायक सैन्य कार्रवाई का ऐलान किया है. उन्होंने कहा है कि यह सैन्य संघर्ष अंतहीन नहीं होगा और इसे वर्षों तक खींचने की योजना नहीं है |  इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप मंगलवार दोपहर 2 बजे वित्त और ऊर्जा सचिवों के साथ व्हाइट हाउस में बैठक कर रहे हैं. अमेरिका और इजरायल संयुक्त रूप से ईरान में सत्ता परिवर्तन के लिए परिस्थितियां बना रहे हैं |  इजरायल का मानना है कि ईरान के खिलाफ यह सैन्य कदम सऊदी अरब के साथ संभावित शांति के द्वार खोल सकते हैं |  नेतन्याहू का युद्ध और ईरान पर रुख नेतन्याहू ने जोर देकर कहा है कि इजरायल ईरान के साथ लंबे युद्ध की स्थिति में नहीं जाना चाहता है. उनका मानना है कि ईरान के खिलाफ जो कार्रवाई की जा रही है, वह त्वरित और निर्णायक होगी. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान में सत्ता परिवर्तन की अंतिम जिम्मेदारी वहां की जनता की है. अमेरिका और इजरायल मिलकर ऐसी परिस्थितियां बना रहे हैं, जो ईरानी लोगों को अपने शासन को बदलने में सक्षम बनाएंगी. इजरायल के मुताबिक, यह सैन्य कार्रवाई कुछ वक्त तक जारी रह सकती है लेकिन यह लंबी अवधि की प्रक्रिया नहीं होगी | सऊदी-इजरायल शांति और ट्रंप की बैठक नेतन्याहू ने यह भी इशारा किया कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई सऊदी अरब और इजरायल के बीच शांति स्थापना में मदद कर सकती है |  इस बड़े घटनाक्रम के बीच व्हाइट हाउस से सूचना मिली है कि राष्ट्रपति ट्रंप मंगलवार को दोपहर 2 बजे वित्त सचिव और ऊर्जा सचिव के साथ बैठक करेंगे. इस बैठक को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, विशेषकर ईरान के खिलाफ रणनीतिक आर्थिक और ऊर्जा संबंधी फैसलों के संदर्भ में. प्रशासन इस स्थिति को लेकर लगातार सक्रिय है और कूटनीतिक और सैन्य दोनों स्तरों पर समन्वय बना रहा है | 

तेल में आग और बाजार में भागमभाग: क्या निवेशकों को घबराना चाहिए? इतिहास का नजरिया क्या कहता है?

नई दिल्ली  क्या पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव भारत की अर्थव्यवस्था की रफ्तार थाम सकता है? मिसाइल हमलों और जवाबी कार्रवाई की खबरों के बीच वैश्विक बाजारों में घबराहट साफ दिख रही है. 2 मार्च 2026 को निफ्टी 50 और सेंसेक्स करीब 1.8% तक फिसल गए, सरकारी बॉन्ड यील्ड में हल्की तेजी आई, ब्रेंट क्रूड लगभग 6% उछला और सोने की कीमतें 3% बढ़ीं. सवाल यह है कि क्या यह उथल-पुथल भारत की लंबी अवधि की विकास यात्रा को प्रभावित करेगी, या यह केवल एक अस्थायी झटका है? हालिया विश्लेषण में एक्सिस एसेट मैनेजमेंट (Axis Asset Management) ने साफ किया है कि भले ही अमेरिका-इजराइल बनाम ईरान टकराव ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई हो, लेकिन इतिहास बताता है कि ऐसे संघर्ष भारतीय शेयर बाजारों को लंबे समय तक पटरी से नहीं उतार पाए हैं. कच्चा तेल: भारत के लिए सबसे बड़ा जोखिम इस एनालिसिस के मुताबिक, भारत अपनी जरूरत का 80% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है. इसलिए पश्चिम एशिया में अस्थिरता का सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ता है. यदि ईरान होरमुज जलडमरूमध्य को बाधित करता है, तो यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बड़ा खतरा होगा. दुनिया के लगभग 20% कच्चे तेल और 30% एलएनजी का व्यापार इसी रास्ते से गुजरता है, और भारत की करीब आधी ऊर्जा आपूर्ति भी इसी मार्ग पर निर्भर है. तेल की कीमतों में तेज उछाल से भारत का चालू खाता घाटा बढ़ सकता है, महंगाई दबाव में आ सकती है और विमानन, पेंट, सीमेंट तथा केमिकल जैसे सेक्टरों की लागत बढ़ सकती है. हालांकि, पिछले अनुभव बताते हैं कि जब तक तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची नहीं टिकतीं, तब तक शेयर बाजार स्थायी गिरावट का शिकार नहीं होते. रूस–यूक्रेन युद्ध के दौरान भी ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर गया था, लेकिन शुरुआती गिरावट के बाद बाजार संभल गए और साल अंत में सकारात्मक रिटर्न दिया. रुपये और विदेशी निवेश का असर भू-राजनीतिक तनाव के समय अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है, जिससे उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव आता है. भारतीय रुपया भी इससे अछूता नहीं रहता. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की बिकवाली से रुपये में अस्थायी कमजोरी देखी जा सकती है. फिर भी भारत की मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार स्थिति, नियंत्रित चालू खाता घाटा और संतुलित राजकोषीय स्थिति सुरक्षा कवच का काम करती है. 2013 के टेपर टैंट्रम, 2020 की महामारी और 2022 के युद्ध जैसे दौर में भी रुपया दबाव में आया, लेकिन शेयर बाजारों में लंबी अवधि की गिरावट नहीं आई. आरबीआई की भूमिका और बाजार की मानसिकता रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (Reserve Bank of India) ऐसे समय में स्थिरता का अहम स्तंभ बनता है. केंद्रीय बैंक ने अतीत में अस्थायी महंगाई झटकों को नजरअंदाज करते हुए मूल महंगाई और विकास की स्थिरता पर ध्यान केंद्रित किया है. तरलता प्रबंधन के जरिए बाजार में भरोसा बनाए रखा गया है, ताकि घबराहट स्थायी संकट में न बदले. पिछले 15 वर्षों का इतिहास देखें तो हर बड़े संघर्ष के दौरान शुरुआती गिरावट आई, लेकिन बाजारों ने जल्द ही संतुलन पा लिया.     2014 के क्रीमिया संकट     2016 की सर्जिकल स्ट्राइक     2019 के बालाकोट एयरस्ट्राइक     2022 के रूस–यूक्रेन युद्ध     2023 के इजराइल–हमास संघर्ष इन सबके दौरान यही पैटर्न दिखा कि बाजार जल्द ही पटरी पर लौट आया. यहां तक कि 2025 के ऑपरेशन सिंदूर के समय भी शुरुआती घबराहट के बाद स्थिरता लौट आई. असल में बाजार भावनाओं से ज्यादा इस बात का आकलन करते हैं कि आर्थिक असर कितना लंबा और गहरा होगा. जब यह स्पष्ट हो जाता है कि सप्लाई चेन पर असर सीमित है और घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है, तो जोखिम प्रीमियम घटने लगता है और निवेशक दोबारा सक्रिय हो जाते हैं. लंबी अवधि के निवेशकों के लिए संदेश इतिहास बताता है कि संघर्षों के समय घबराकर बाजार से बाहर निकलना अक्सर नुकसानदेह साबित हुआ है. जिन्होंने गिरावट के दौरान निवेश छोड़ा, वे बाद की तेजी से चूक गए. इसलिए अनुशासन, विविधीकरण और लंबी अवधि की सोच ही ऐसे दौर में सबसे कारगर रणनीति मानी गई है. ईरान वाला तनाव गंभीर जरूर है, लेकिन भारतीय बाजारों के लिए यह कोई अनजाना अनुभव नहीं. शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव के बावजूद देश की विकास की कहानी घरेलू खपत, पूंजीगत व्यय, डिजिटलीकरण और मैन्युफैक्चरिंग विस्तार पर टिकी है. ऐसे में हर भू-राजनीतिक झटका स्थायी मोड़ नहीं, बल्कि अस्थायी विराम साबित हुआ है.  

दोस्ती पर भारी पड़ी भूल: कुवैत ने गिराए तीन F-15E फाइटर जेट, अमेरिका ने कही ये बात

कुवैत कुवैत ने गलती से 3 अमेरिकी F-15E Strike Eagle लड़ाकू विमानों को मार गिराया है। यूएस सेंट्रल कमांड के अनुसार, सभी 6 एयरक्रू सदस्य सुरक्षित रूप से ईजेक्ट हो गए, उन्हें बचा लिया गया है और वे स्थिर हालत में हैं। यह घटना ईरान के खिलाफ चल रही ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के दौरान हुई, जब कुवैती एयर डिफेंस सिस्टम ने इन विमानों को दुश्मन के रूप में पहचान लिया। कुवैत ने इस घटना को स्वीकार किया है और अमेरिकी सेना ने कुवैती रक्षा बलों के सहयोग की सराहना की है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह दुर्भाग्यपूर्ण फ्रेंडली फायर घटना 2 मार्च की सुबह हुई, जब अमेरिकी F-15E विमान ईरान पर हमलों में सहायता कर रहे थे। उस समय क्षेत्र में ईरानी विमान, बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन अटैक हो रहे थे, जिससे वायु क्षेत्र में भारी उथल-पुथल मची हुई थी। कुवैती एयर डिफेंस सिस्टम ने इन अमेरिकी विमानों को गलत तरीके से खतरे के रूप में पहचाना और उन्हें मार गिराया। यह घटना मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष की जटिलता को दर्शाती है, जहां सहयोगी देशों के बीच भी गलतफहमियां हो सकती हैं। खाड़ी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले ऑपरेशन एपिट फ्यूरी अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई है, जिसमें ईरान के सैन्य ठिकानों, नौसेना और IRGC मुख्यालयों पर 1 हजार से अधिक हमले किए जा चुके हैं। ईरान ने जवाबी हमलों में कुवैत सहित खाड़ी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं, जिससे क्षेत्रीय तनाव चरम पर है। इस फ्रेंडली फायर घटना से अमेरिकी वायुसेना को नुकसान हुआ है, लेकिन कोई जानमाल की हानि नहीं हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि भीड़भाड़ वाले वायु क्षेत्र और तेज गति से बदलती स्थिति ने इस गलती को जन्म दिया। दोनों देश अब जांच और बेहतर समन्वय पर काम कर रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। कुवैत में कैसे हैं हालात ईरान और ईरान समर्थित मिलिशिया ने इजरायल व अरब देशों पर मिसाइलें दागीं, जिनमें कुवैत में अमेरिकी दूतावास परिसर को निशाना बनाया गया। इजरायल और अमेरिका ने ईरान में लक्ष्यों पर बमबारी की जिससे सोमवार को युद्ध का विस्तार हुआ। इसके साथ ही युद्ध में हताहतों की संख्या भी बढ़ रही है। ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी के अनुसार, अमेरिका-इजरायल ऑपरेशन में ईरान में अब तक कम से कम 555 लोग मारे जा चुके हैं और देश भर के 130 से अधिक शहर हमलों की चपेट में आ चुके हैं। कुवैत सिटी में अमेरिकी दूतावास परिसर के अंदर से आग और धुआं उठते देखा गया। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि देश में अमेरिकी युद्धक विमान भी दुर्घटनाग्रस्त हो गए हैं। मंत्रालय ने दुर्घटनाओं के कारणों या उनमें शामिल विमानों की संख्या के बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी, लेकिन कहा कि पायलटों को अस्पताल ले जाया गया है और उनकी हालत स्थिर है।  

ईरान तनाव के चलते फ्लाइट्स पर ब्रेक: आज भी सैकड़ों उड़ानें रद्द, रिफंड नियमों में ढील

ईरान ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई से उपजे पश्चिम एशिया संकट के बीच सोमवार को भी बड़ी संख्या में वहां जाने वाली और वहां से गुजरने वाली उड़ानें रद्द रहीं। इंडिगो की आज 162 उड़ानें रद्द हैं। उसने मंगलवार को भी 47 उड़ानें रद्द करने की घोषणा की है। एयरलाइंस ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर एक पोस्ट में बताया कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए पश्चिम एशिया के कुछ हिस्सों के होकर गुजरने वाली चुनिंदा अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों का अस्थायी निलंबन बढ़ा दिया गया है। साथ ही, अब 07 मार्च तक की यात्रा के लिए बिना शुल्क टिकट रद्द कराने या तारीख में बदलाव का विकल्प दिया जा रहा है। पहले 05 मार्च तक की यात्रा के लिए यह विकल्प दिया गया था। यह 28 फरवरी से पहले बुक कराये गये टिकटों पर लागू होगा। अंतर्राष्ट्रीय मार्गों पर देश की सबसे बड़ी विमान सेवा कंपनी एयर इंडिया ने भी 28 फरवरी या उससे पहले बुक कराये गये 05 मार्च तक की यात्रा के टिकट रद्द कराने या यात्रा की तारीख में बदलाव पर कोई शुल्क न लेने की घोषणा की है। उसने संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, इजरायल और कतर को जाने वाली और वहां से आने वाली उसकी सभी उड़ानें आज रात 11:59 बजे तक के लिए रद्द कर दी हैं। एयरलाइंस ने बताया है कि 02 मार्च को उत्तरी अमेरिका और यूरोप की उसकी सिर्फ छह उड़नें रद्द रहेंगी। दिल्ली हवाई अड्डे पर आज दोपहर बाद एक बजे तक यहां से जाने वाली 37 और यहां आने वाली 50 अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें हवाई क्षेत्र से संबंधित प्रतिबंधों के कारण रद्द रही हैं। पश्चिम एशिया संकट के कारण स्पाइसजेट की आज 17 उड़ानें (सात प्रस्थान, 10 आगमन) रद्द रही हैं। उसने 01 मार्च को 24 उड़ानें रद्द की थीं जबकि 03 मार्च को दो उड़ानें रद्द करने की घोषणा की है। अकासा एयर ने 03 मार्च तक अबू धाबी, दोहा, जेद्दा, कुवैत और रियाद की अपनी सभी उड़ानें रद्द कर दी हैं। उसने भी 07 मार्च तक की यात्रा के टिकट पर पूरा रिफंड देने या बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के यात्रा की तारीख में बदलाव का विकल्प दिया है। एयर इंडिया एक्सप्रेस ने बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात की अपनी सभी उड़ाने आज आधी रात तक के लिए रद्द करने की सूचना दी है। उसने भी 05 मार्च तक की यात्रा के टिकट रद्द करने या तारीख में बदलाव पर कोई शुल्क नहीं लगाने की घोषणा की है।  

मोदी-कार्नी की अहम मुलाकात: व्यापार, निवेश और सहयोग बढ़ाने पर बनी सहमति

नई दिल्ली   प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को भारत और कनाडा के रिश्तों में एक अंतराल के बाद फिर से आई प्रगाढ़ता को दोहराते हुए कहा कि दोनों देश 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने पर सहमत हुए हैं। यह फिलहाल लगभग 13 अरब डॉलर है। प्रधानमंत्री मोदी ने नई दिल्ली में भारत-कनाडा सीईओ मंच को संबोधित करते हुए कहा, ”हम अपने द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब डॉलर तक ले जाना चाहते हैं और उस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।” उन्होंने कहा, ”इसीलिए, हमने दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने का निर्णय लिया है।”दोनों देशों के बीच 2025 के जनवरी-अक्टूबर के दौरान द्विपक्षीय व्यापार लगभग आठ अरब डॉलर रहा है। पीएम ने कहा कि वैश्विक आर्थिक व्यवस्था पर दबाव है। ऐसे कठिन समय में भारत और कनाडा के उद्योगपतियों के बीच विचार-विमर्श द्विपक्षीय व्यापार संबंधों के लिए खाका तैयार करने में सहायक होगा। उन्होंने भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बताते हुए कहा कि मजबूत घरेलू खपत, बड़े पैमाने पर निवेश और डिजिटल अर्थव्यवस्था ने वृद्धि में योगदान दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इसके अलावा, सुधारों पर ध्यान केंद्रित करने और कारोबार सुगमता ने भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद की है। बुनियादी ढांचे के विकास का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने 2026-27 के बजट में 130 अरब अमेरिकी डॉलर का रिकॉर्ड आवंटन किया है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को जल्द अंतिम रूप देने पर भी सहमति बनी। दोनों नेताओं के बीच यहां हुई बातचीत के दौरान रक्षा, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी, छोटे एवं मॉड्यूलर परमाणु रिएक्टर (एसएमआर), शिक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा में सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत एवं कनाडा के द्विपक्षीय संबंध अब ‘नई ऊर्जा, आपसी विश्वास और सकारात्मकता’ से भरे हुए हैं। कनाडा 2.6 अरब डॉलर के यूरेनियम आपूर्ति समझौते के तहत भारत के असैन्य परमाणु ऊर्जा क्षेत्र का समर्थन करेगा। मोदी ने कहा, “असैन्य परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति पर ऐतिहासिक समझौता हुआ है। हम छोटे मॉड्यूलर और उन्नत रिएक्टरों पर भी साथ काम करेंगे।” महत्वपूर्ण खनिजों पर समझौता ज्ञापन से स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन और उन्नत विनिर्माण के लिए सुरक्षित आपूर्ति शृंखला को मजबूती मिलेगी। कनाडा के पास दुर्लभ खनिजों का बड़ा भंडार मौजूद है। दोनों पक्षों ने आतंकवाद, उग्रवाद और कट्टरपंथ को साझा एवं गंभीर चुनौती बताते हुए सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ”इन चुनौतियों के खिलाफ हमारा करीबी सहयोग वैश्विक शांति एवं स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।” मोदी और कार्नी ने बातचीत के दौरान पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात पर भी चर्चा की। मोदी ने कहा, “पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति हमारे लिए गंभीर चिंता का विषय है। भारत सभी विवादों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति का समर्थन करता है और क्षेत्र में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।” कार्नी ने रणनीतिक ऊर्जा साझेदारी की घोषणा करते हुए कहा कि यह समझौते दोनों देशों के लिए दीर्घकालिक अवसर पैदा करेंगे। उन्होंने कहा, “आज हम एक रणनीतिक ऊर्जा साझेदारी की शुरुआत कर रहे हैं, जिसमें द्विपक्षीय ऊर्जा व्यापार को बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं हैं। हमने महत्वपूर्ण खनिजों पर एक नई साझेदारी पर हस्ताक्षर किए हैं, जो विकास, प्रसंस्करण और स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन एवं उन्नत विनिर्माण के लिए सुरक्षित आपूर्ति शृंखला को समाहित करती है।” कार्नी ने कहा कि दोनों देश स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को और गहरा कर रहे हैं, जिसमें पवन, सौर और हाइड्रोजन ऊर्जा के क्षेत्रों में साझेदारी का विस्तार शामिल है। उन्होंने यूरेनियम आपूर्ति समझौते को स्वच्छ और विश्वसनीय ऊर्जा के प्रति साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक बताते हुए कहा, “एक ही पृथ्वी के तहत हुए ये सभी समझौते एक नए और समृद्ध संबंध की शुरुआत हैं, जो दोनों देशों के श्रमिकों और व्यवसायों के लिए पीढ़ीगत अवसर पैदा करेंगे और भविष्य की पीढ़ियों के लिए पृथ्वी की रक्षा करेंगे।” कनाडा के प्रधानमंत्री रविवार को नयी दिल्ली पहुंचे थे। इसके पहले वह मुंबई में थे जहां पर उन्होंने उद्योग जगत के दिग्गजों से मुलाकात की। भारत एवं कनाडा के संबंध 2023 में खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर उपजे विवाद के बाद तनावपूर्ण हो गए थे। हालांकि, पिछले कुछ महीनों में संबंध सामान्य बनाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं और दोनों देशों ने एक-दूसरे की राजधानियों में उच्चायुक्त तैनात कर दिए हैं।

भारत के कदम से पाकिस्तान में हड़कंप, कहा– अब भूख-प्यास का खतरा बढ़ा

इस्लामाबाद पलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ ऐसे रणनीतिक कदम उठाए हैं जो कि उसकी टेंशन बढ़ाते ही चले जा रहे हैं। झेलम और चिनाब के बहाव कम करने को लेकर शहबाज सरकार एकदम से बिलबिला गई है। हाल ही में पाकिस्तान में प्रांतीय स्तर की एक बड़ी बैठक हुई और इसमें वॉटर ऐंड पावर डिवेलपमेंट अथॉरिटी के चेयरमैन मोहम्मद सईद ने कहा कि भारत झेलम और चिनाब प्रोजेक्ट पर 60 अरब डॉलर खर्च कर रहा है और इससे पाकिस्तान में हाहाकार मचने वाला है। उन्होंने कहा कि भारत के प्रोजेक्ट पूरे होने के बाद इन निदियों के जल रोकने की कैपिसीटी 15 दिन से बढ़कर सीधे 60 दिन हो जाएगी। घबरा गया पाकिस्तान पाकिस्तान भारत के इस प्रोजेक्ट से बुरी तरह घबराया हुआ है। डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान को सूखे का डर सताने लगा है। पाकिस्तान के अधिकारियों का कहना है कि जब फसलों की पानी की जरूरत होगी तो नदियों का बहाव बेहद कम हो जाएगा। वहीं मॉनसून में भारत ज्यादा पानी छोड़ सकता है इससे पाकिस्तान का बड़ा हिस्सा डूब जाएगा। भारत के इस कदम से परेशान पाकिस्तान के अधिकारियों ने सरकार को सलाह दी है कि वहां भी बड़े बांध बनाने की जरूरत है जिससे पानी को नियंत्रित किया जा सके। हालांकि समस्या यही है कि ये नदियां भारत से ही होकर पाकिस्तान में जाती हैं। ऐसे में बांध बनाने के बाद भी उसकी मुसीबत कम होने वाली नहीं है। पाकिस्तान का जल मंत्रालय नदियों के पानी को लेकर बेहद परेशान है। महीने भर पहले पाकिस्तान ने इसको लेकर भारत से जवाब मांगने शुरू कर दिया है। पाकिस्तान का कहना है कि भारत ने बगलिहार डैम पर पानी रोक लिया है दिसंबर महीने में देखा गया था कि बगलिहार में पानी की कमी हो गई है। झेलम और चिनाब में कम हआ पानी पाकिस्तान का कहना है कि भारत झेलम और चिनाब का पानी कभी रोकता है और कभी छोड़ता है। इससे पाकिस्तान में पानी की कमी देखी जा रही है। सिंधु जल पर पाकिस्तान के एक अधइकारी ने कहा कि पाकिस्तान में मंगला बांध तक पानी का बहाव काफी कम हो गया है। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक शहबाज सरकार झेलम के बहाव पर नजर रख रही है। परेशान पाकिस्तान बार-बार पत्र भेजकर भारत के आगे गिड़गिड़ा रहा है। बता दें कि पहलगाम महले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौता निलंबित करदिया था। यह पाकिस्तान के लिए बहुत बड़ा घाव साबित हो रहा है। जानकारी के मुताबिक भारत अब रावी का पानी भी रोकने का प्लान बना रहा है। जानकारी के मुताबिक शहपुर कंडी डैम का काम भी जल्द पूरा होने वाला है। इससे रावी का पानी रोककर इसे कठुआ और सांबा भेजा जाएगाय़ पाकिस्तान को जाने वाला ज्यादातर पानी रोक लिया जाएगा। पाकिस्तान की लगभग 90 फीसदी खेदी सिंदु नदी सिस्म पर ही निर्भर है। पाकिस्तान के पास पानी रोकने की क्षमता ना के बराबर है।

ओमान में तेल टैंकर पर ड्रोन हमला, मिडिल-ईस्ट युद्ध की चपेट में आया भारतीय नागरिक

नई दिल्ली मिडिल-ईस्ट में जारी युद्ध में एक भारतीय व्यक्ति की मौत हो गई है। ओमान में सोमवार को मार्शल द्वीपों के झंडे वाले तेल टैंकर MKD VYOM पर बम से लैस ड्रोन से हमला किया गया, जिसमें जहाज पर सवार एक भारतीय नाविक की मौत हो गई। ओमान न्यूज एजेंसी के अनुसार, यह हमला मस्कट के तट से दूर हुआ। हमले के चलते जहाज में आग लग गई और इंजन रूम में विस्फोट हुआ। जहाज पर कुल 21 क्रू मेंबर्स थे, जिनमें 16 भारतीय शामिल थे। बाकी लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह हमला स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के निकट हुआ, जो फारस की खाड़ी का पतला रास्ता है। वैश्विक तेल व्यापार के लिए यह काफी अहम है। ओमान के मैरीटाइम सिक्योरिटी सेंटर ने बताया कि टैंकर पर लगभग 59,463 मीट्रिक टन कार्गो था और हमला मस्कट से करीब 52 नॉटिकल मील दूर हुआ। यह घटना मध्य-पूर्व में चल रहे युद्ध के विस्तार का हिस्सा मानी जा रही है। इजरायल और अमेरिका ने हाल ही में ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए हैं, जिसके जवाब में ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य के नजदीक आने वाले जहाजों को धमकी दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने कई हमलों को अंजाम दिया है, जिसमें ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल शामिल है। इस हमले को ईरान समर्थित ताकतों से जोड़ा जा रहा है, हालांकि अभी तक किसी ने स्पष्ट रूप से जिम्मेदारी नहीं ली है। यह क्षेत्र पहले भी समुद्री हमलों का गवाह रहा है, लेकिन मौजूदा संघर्ष के कारण तनाव और बढ़ गया है। इस हमले में भारत के व्यक्ति की मौत को अमेरिका-ईरान संघर्ष में पहली भारतीय हानि के रूप में देखा जा रहा है। ओमान ने हमले के बाद जहाज के चालक दल को सुरक्षित निकाल लिया है और स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस तरह की घटनाएं अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर सवाल उठाती हैं और तेल की सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकती हैं। यह हमला क्षेत्रीय अस्थिरता को और गहरा करने वाला है, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल गुजरता है। ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते तनाव से समुद्री व्यापार प्रभावित हो रहा है। ओमान जैसे तटवर्ती देशों को ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ रही है। विशेषज्ञ चिंता जता रहे हैं कि अगर ऐसे हमले जारी रहे तो ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर गंभीर असर पड़ सकता है।  

यात्रियों का उफान! रेलवे स्टेशन पर उमड़ी भीड़, सीट न मिलने पर जनरल डिब्बों में चढ़ने की होड़

  होली के मौके पर यात्रियों की भारी भीड़ के कारण धनबाद रेलवे स्टेशन पर बीते रविवार रात अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सीट कन्फर्म नहीं होने से परेशान लोग जनरल डिब्बों की ओर दौड़ पड़े, जिससे हालात बेकाबू हो गए। बीते रविवार रात करीब 9:50 बजे जैसे ही हटिया-गोरखपुर मौर्य एक्सप्रेस प्लेटफॉर्म पर पहुंची, जनरल बोगियों में चढ़ने के लिए यात्रियों में होड़ मच गई। लंबी वेटिंग लिस्ट के कारण जिन लोगों की सीट कन्फर्म नहीं हो सकी, वे भी किसी तरह ट्रेन में चढ़ने की कोशिश करने लगे। हालात ऐसे थे कि जनरल डिब्बों में पैर रखने तक की जगह नहीं बची थी। कई यात्री स्लीपर कोच में घुस गए, जिससे वहां भी जनरल जैसी भीड़ हो गई। लोग सीटों के बीच फर्श पर, दरवाजों पर और शौचालय के पास खड़े होकर सफर करने को मजबूर दिखे। वहीं दर्जनों यात्री ट्रेन में चढ़ नहीं सके और प्लेटफॉर्म पर ही रह गए। RPF की टीम करती रही अपील भीड़ का असर महिला और दिव्यांग कोच पर भी पड़ा। महिला कोच में पुरुषों के घुसने से हंगामा हुआ, जबकि दिव्यांग बोगी में आम यात्रियों के चढ़ जाने से दिव्यांग यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इस दौरान आरपीएफ की टीम लोगों से शांति और संयम बनाए रखने की अपील करती रही, लेकिन त्योहार पर घर पहुंचने की जल्दबाजी में कई लोग नियमों की अनदेखी करते नजर आए। होली के कारण ट्रेनों में बढ़ी भीड़ ने रेलवे प्रशासन की तैयारियों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।  

‘हम नहीं दे रहे आदेश’—खामेनेई की खबरों के बीच IRGC की कार्रवाई पर ईरानी मंत्री का चौंकाने वाला दावा

ईरान ईरान पर इजरायल और अमेरिका के हमले के बाद वहां के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) अब स्वतंत्र होकर बदले की कार्रवाई कर रही है और हमले कर रही है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघाची ने दावा किया है कि ओमान पर हमला करना देश की प्राथमिकता और च्वाइस में शामिल नहीं था लेकिन IRGC ने उस पर हमले किए। इससे इस बात की संभावना जोर पकड़ने लगी है कि क्या ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद IRGC के सैनिक बेकाबू हो चले हैं। बता दें कि IRGC ईरान का सबसे शक्तिशाली और विशिष्ट सैन्य संगठन है, जिसे ईरानी क्रांति के बाद 1979 में स्थापित किया गया था। ईरान के पास दो अलग-अलग सेनाएं हैं। एक पारंपरिक सेना (Artesh) जो सीमाओं की रक्षा करती है, और दूसरी IRGC, जिसका मुख्य कार्य ईरान की ‘इस्लामिक व्यवस्था’ और क्रांति की रक्षा करना है। यह संगठन सीधे ईरान के सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) के प्रति जवाबदेह होता है। इसकी अपनी थल सेना, नौसेना और वायु सेना (एयरोस्पेस फोर्स) है। इसके अलावा, इसमें दो महत्वपूर्ण इकाइयाँ कुद्स फोर्स और बसीज शामिल हैं। सुप्रीम लीडर को रिपोर्ट करता है IRGC IRGC ईरान के सुप्रीम लीडर को रिपोर्ट करता है, यह पद अयातुल्लाह अली खामेनेई के पास था, जब तक कि वह US-इज़राइल हमले के दौरान मारे नहीं गए। इसका मतलब है कि IRGC अब बिना हेड के है और स्वतंत्र रूप से काम कर रहा है। ईरानी विदेश मंत्री का बयान भी इस बात की तस्दीक कर रहा है। “हमारी पसंद नहीं” ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघाची ने अल जज़ीरा के साथ एक इंटरव्यू के दौरान यह चौंकाने वाली बात कही है। ओमान पोर्ट को टारगेट करके किए गए स्ट्राइक के बारे में पूछे जाने पर, उन्होंने कहा, “ओमान में जो हुआ वह हमारी पसंद नहीं थी। हमने पहले ही अपनी सेना को बता दिया है कि वे अपने चुने हुए टारगेट के बारे में सावधान रहें।” उन्होंने कहा, “असल में, हमारी मिलिट्री यूनिट अब असल में इंडिपेंडेंट और किसी तरह अलग-थलग हैं, और वे पहले से दिए गए इंस्ट्रक्शन – आप जानते हैं, जनरल इंस्ट्रक्शन – के आधार पर काम कर रही हैं।” अऱाघाची का यह बयान अहम है। इसका सीधा मतलब है कि IRGC ईरानी सरकार के ऑर्डर पर काम नहीं कर रहा है, बल्कि खामेनेई के अपनी हत्या से पहले दिए गए निर्देशों के अनुसार काम कर रहा है। एसोसिएटेड प्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, अराघाची की बातों को हमलों के बहाने के तौर पर भी देखा जा सकता है, क्योंकि तेहरान खाड़ी में अपने पड़ोसियों के साथ तनाव कम करने की कोशिश कर रहा है। ईरानी क्रांति के बाद बनी थी IRGC IRGC, जिसे ईरानी क्रांति के बाद मई 1979 में रूहोल्लाह खुमैनी ने बनाया था, पारंपरिक ईरानी आर्मी से अलग है। BBC की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 1979 में राज बदलने के बाद, ईरान के रूलिंग मौलवियों ने एक नया संविधान पेश किया था, जिसमें ईरान की सीमाओं की रक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक रेगुलर मिलिट्री (आर्टेश) और ईरान में इस्लामिक सिस्टम की रक्षा के लिए एक अलग रिवोल्यूशनरी गार्ड (पासदारन) दोनों का इंतजाम किया गया था।  

मिडिल ईस्ट तनाव के बीच बड़ा फैसला, Apple ने UAE में परिचालन अस्थायी रूप से रोका

संयुक्‍त अरब अमीरात ईरान-अमेरिका-इस्राइल की जंग में घ‍िरे मिड‍िल ईस्‍ट में हालात को देखते हुए दिग्‍गज कंपनी ऐपल ने UAE (संयुक्‍त अरब अमीरात) में अपने कॉरपोरेट ऑफ‍िस और सभी ऐपल स्‍टोर्स को अस्‍थायी तौर पर बंद कर दिया है। MacRumours की रिपोर्ट में बताया गया है क‍ि कंपनी ने अपने स्‍टोर्स को कम से कम मंगलवार 3 मार्च तक के लिए बंद किया है। आगे की स्‍थ‍ित‍ि को देखते हुए स्‍टोर्स खोलने पर फैसला लिया जाएगा। दिलचस्‍प यह है कि कंपनी इस हफ्ते अपने कई नए गैजेट लॉन्‍च करने वाली है, जिनमें iphone 17e को भी शामिल बताया जा रहा है। UAE में 3 मार्च तक बंद रहेंगे ऐपल स्‍टोर्स रिपोर्ट के अनुसार, UAE में ऐपल स्‍टोर्स को 3 मार्च तक बंद रखा जाएगा। यूएई में बड़ी संख्‍या में भारतीय रहते हैं और ऐपल स्‍टोर्स उनके लिए तब पसंदीदा जगह हाे जाती है, जब उन्‍हें नया ऐपल गैजेट खरीदना होता है। ऐपल इस सप्‍ताह अपने कई नए गैजेट लेकर आने वाली है। इनमें नया आईपैड, आईफोन 17e, मैक शामिल हो सकता है। अगर ऐपल स्‍टोर्स को अधिक दिनों तक बंद रखा गया तो कंपनी की बिक्री पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है। इन जगहों पर बंद रहेंगे ऐपल स्‍टोर्स     दुबई मॉल     मॉल ऑफ द ऐमिरेट्स     यास मॉल     अल जिमी मॉल     अल मरिया आईलैंड SIM स्‍कैम का खतरा बढ़ा मिडिल ईस्‍ट में बढ़ते तनाव के बीच यूएई में सिम स्‍कैम के मामलों का खतरा भी बढ़ गया है। दुबई पुलिस ने इसको लेकर अपने लोगों को चेतावनी दी है। बताया जा रहा है कि कुछ लोग क्राइसि‍स मैनेजमेंट अधिकारी बनकर लोगों से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं। इससे बचने के लिए लोगों से उनकी पर्सनल डिटेल्‍स ना बताने की हिदायत दी गई है। साथ ही किसी संदिग्‍ध कॉल या मैसेज पर ना रिप्‍लाई करने को कहा गया है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि मदद के नाम साइबर धोखेबाज लोगों की जरूरी जानकारी चुरा सकते हैं। भारत के संदर्भ में यह खबर इसलिए महत्‍वपूर्ण है क्‍योंकि दुबई में बड़ी संख्‍या में भारतीय रहते हैं। अगर आपका भी कोई जानकार, करीबी इन जगहों पर है तो उसे सिम स्‍कैम के बारे में सतर्क अवश्‍य करें।

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