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LPG यूजर्स के लिए बड़ी खबर: गैस बुकिंग में e-KYC का सच क्या है? जानें मंत्रालय की नई गाइडलाइंस

नई दिल्ली मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और देश के कुछ हिस्सों में गैस संकट की खबरों के बीच, केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए ई-केवाईसी (e-KYC) को लेकर बनी असमंजस की स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। सरकार ने साफ किया है कि बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण सभी के लिए हर बार अनिवार्य नहीं है। किसे करानी होगी e-KYC और किसे नहीं? मंत्रालय द्वारा जारी स्पष्टीकरण के अनुसार, केवाईसी की आवश्यकता केवल विशिष्ट स्थितियों में ही होगी…      सामान्य उपभोक्ता: यदि आप उज्ज्वला योजना के तहत नहीं आते हैं और अपनी केवाईसी प्रक्रिया पहले ही पूरी कर चुके हैं, तो आपको इसे दोबारा कराने की कोई जरूरत नहीं है।      अधूरे दस्तावेज वाले ग्राहक: बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण केवल उन ग्राहकों के लिए अनिवार्य है, जिनकी केवाईसी प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हुई है।      उज्ज्वला योजना (PMUY) लाभार्थी: इस योजना के 10.51 करोड़ लाभार्थियों को अपनी सब्सिडी जारी रखने के लिए साल में एक बार केवाईसी अपडेट कराना होगा। 15 मार्च के आदेश पर स्पष्टीकरण गौरतलब है कि 15 मार्च को मंत्रालय ने एक आदेश जारी कर सभी घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की बात कही थी, जिससे आम जनता में भ्रम फैल गया था। मंगलवार को मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि उस आदेश का उद्देश्य केवल उन उपभोक्ताओं को प्रोत्साहित करना था जिन्होंने अभी तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं की है।  

जितना पूछा जाए, उतना ही बताएं — मंत्री के लंबे जवाब पर ओम बिरला का सख्त रुख

नई दिल्ली लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने प्रश्नकाल में सदस्यों से संक्षिप्त प्रश्न पूछने और मंत्रियों से छोटे जवाब देने का अपना आग्रह दोहराते हुए मंगलवार को कहा कि क्या मंत्री ‘संक्षिप्त जवाब देने की कोशिश नहीं कर सकते।’ प्रश्नकाल में सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री बीएल वर्मा तेलुगुदेशम पार्टी (तेदेपा) के सदस्य जीएम हरीश बालयोगी के पूरक प्रश्न का उत्तर दे रहे थे। इस दौरान बिरला ने उन्हें टोकते हुए कहा, ‘आप भाषण क्यों दे रहे हैं। आप तो जवाब दो।’ इसके बाद जब वर्मा दूसरे पूरक प्रश्न का उत्तर दे रहे थे तो अध्यक्ष ने कहा, ‘आप लोग संक्षिप्त जवाब देने की कोशिश नहीं कर सकते। मैंने कितनी बार सदन में यह आग्रह किया है। हर बार विस्तृत जवाब देते हो आप। जितना (सदस्य) पूछें आप उतना जवाब दे दो।’ इससे पहले प्रश्नकाल शुरू होने के दौरान भी बिरला ने सदस्यों से संक्षिप्त प्रश्न पूछने और मंत्रियों से उनके संक्षिप्त जवाब देने का अपना आग्रह दोहराया। उन्होंने कहा, ‘मेरा प्रयास है कि प्रश्नकाल में सूचीबद्ध सभी 20 पूरक प्रश्न आ जाएं।’ उन्होंने दोपहर 12 बजे प्रश्नकाल समाप्त होने से पहले एक सदस्य को आज का अंतिम पूरक प्रश्न पूछने का निर्देश देते हुए हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी कहा, ‘समय कम है, मत्रीजी को लंबा जवाब देना है।’ विपक्ष के आठ लोकसभा सदस्यों का निलंबन रद्द लोकसभा ने मंगलवार को उन आठ विपक्षी सदस्यों का निलंबन रद्द कर दिया जिन्हें संसद के बजट सत्र के पहले चरण में सदन की अवमानना के मामले में निलंबित किया गया था। बिरला ने सोमवार को सभी दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें आठ विपक्षी सदस्यों का निलंबन वापस लेने पर सहमति बनी थी। सदन में कांग्रेस के मुख्य सचेतक कोडिकुनिल सुरेश ने आसन से निलंबन रद्द करने का अनुरोध किया और विपक्षी सदस्यों के आचरण पर खेद भी जताया। इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने निलंबन खत्म करने का प्रस्ताव सदन में रखा जिसे सदन ने ध्वनिमत से मंजूरी दी। क्यों हुआ था निलंबन बजट सत्र के पहले चरण के दौरान तीन फरवरी को आसन की ओर कागज फेंकने के बाद, सदन की अवमानना के मामले में विपक्ष के आठ सांसदों को बजट सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया था। निलंबित सांसदों में कांग्रेस के मणिकम टैगोर, अमरिंदर सिंह राजा वडिंग, गुरजीत सिंह औजला, हिबी ईडन, डीन कुरियाकोस, प्रशांत पडोले, किरण कुमार रेड्डी और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के एस. वेंकटेशन शामिल हैं। निलंबन के बाद से ये सांसद कार्यवाही वाले दिन संसद के मकर द्वार पर धरना दे रहे थे।  

महिलाओं के अधिकार में सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय, 12 सप्ताह का मातृत्व अवकाश और सरकार को आदेश

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में कहा कि तीन महीने और उससे अधिक उम्र के बच्चे को गोद लेने वाली मांओं को मातृत्व अवकाश मिलेगा. साथ ही कोर्ट ने कहा कि पितृत्व अवकाश के लेकर सरकार फैसला करेगी. पहले के नियम के मुताबिक तीन महीने के बच्चे को गोद लेने पर 12 सप्ताह का मातृत्व अवकाश मिलता था. शीर्ष कोर्ट ने मंगलवार को अहम फैसला सुनाते हुए सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (Social Security Code, 2020) की धारा 60(4) के उस प्रावधान को असंवैधानिक करार दिया, जिसमें गोद लेने वाली मां को मातृत्व लाभ केवल तभी देने की बात कही गई थी जब बच्चा तीन महीने से कम उम्र का हो. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गोद लेने वाली मां को बच्चे की उम्र की परवाह किए बिना 12 सप्ताह का मातृत्व अवकाश मिलना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने प्रावधान की व्याख्या करते हुए कहा कि जो महिला कानूनी रूप से किसी बच्चे को गोद लेती है या जो कमीशनिंग मदर है, उसे बच्चे को सौंपे जाने की तारीख से 12 सप्ताह तक मातृत्व लाभ का अधिकार होगा. इस फैसले को गोद लेने वाली माताओं के अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे उन्हें समानता और सामाजिक सुरक्षा का लाभ सुनिश्चित होगा। जस्टिस जेबी पार्दीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने कहा कि परिवार की परिभाषा केवल जैविक संबंधों के आधार पर ही तय नहीं की जा सकती. फैसले में जोर दिया गया कि गोद लेना परिवार बढ़ाने का उतना ही वैध तरीका है जितना जैविक तरीका. ऐसे में एक गोद दिए गए बच्चे का अधिकारी भी एक बायोलॉजिकल बच्चे जैसा है. जजों ने आगे कहा कि एक गोल लिए गए बच्चे को पालन पोषण में माता-पिता भावनात्मक रूप से उतना ही जड़े होते हैं जितना एक बॉयोलॉजिकल बच्चे को पालने में होता है. इसमें बच्चे की उम्र से कुछ भी लेना देना नहीं है।

SC की ऐतिहासिक टिप्पणी: गोद लिए और जन्मे बच्चे समान, 3 महीने का नियम समाप्त

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (17 मार्च) को एक अहम फैसला सुनाते हुए व्यवस्था दी है कि किसी महिला के गर्भ (कोख) से पैदा हुए बच्चे और गोद लिए गए बच्चे में कोई अंतर नहीं है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने कहा कि तीन महीने से अधिक उम्र के बच्चे को गोद लेने वाली महिलाओं को मातृत्व अवकाश से वंचित करना असंवैधानिक है। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि ऐसी महिलाओं को भी 12 सप्ताह का मातृत्व अवकाश मिलना चाहिए। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने कहा कि मातृत्व संरक्षण का उद्देश्य इस बात पर निर्भर नहीं करता कि बच्चा परिवार में कैसे आया है। अदालत ने कहा, “जो महिलाएं बड़े बच्चे को गोद लेती हैं, वे भी उसी स्थिति में हैं जैसे कोई महिला तीन महीने से कम उम्र के बच्चे को गोद लेती हैं।” पीठ ने कहा, “हालांकि, पारंपरिक रूप से रिश्तेदारी को समझने का मुख्य आधार जीव विज्ञान (बायोलॉजी) रहा है, लेकिन गोद लेना भी परिवार बनाने का उतना ही सही तरीका है। परिवार का आधार जीव विज्ञान नहीं, बल्कि आपसी जुड़ाव और साझा भावनाएँ होती हैं। सिर्फ़ जैविक कारक ही परिवार तय नहीं करते। गोद लिया हुआ बच्चा, अपने सगे बच्चे से किसी भी तरह अलग नहीं होता।” कानून की धारा पर सवाल कोर्ट ने माना कि ‘सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020’ की धारा 60(4) के तहत उम्र से जुड़ी ऐसी पाबंदियाँ, संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन करती हैं। इस धारा में यह प्रावधान था कि महिलाएँ मातृत्व अवकाश की हकदार तभी होंगी, जब वे 3 महीने से कम उम्र के बच्चे को गोद लें। हालांकि, अदालत ने इस धारा को निरस्त नहीं किया, बल्कि इसकी व्याख्या करते हुए महिलाओं के अधिकारों का विस्तार किया। “गोद लेना भी परिवार बनाने का समान अधिकार” अदालत ने अपने फैसले में कहा कि गोद लेना परिवार बनाने का एक समान और वैध तरीका है। अदालत ने टिप्पणी की, “गोद लिया गया बच्चा तथाकथित ‘जैविक’ बच्चे से अलग नहीं होता। यह मातृत्व और पितृत्व की गहरी स्वीकृति है।” पीठ ने यह भी कहा कि कानूनी प्रक्रियाओं के चलते तीन महीने से कम उम्र के बच्चों को गोद लेना बहुत कम मामलों में संभव होता है, इसलिए यह शर्त व्यावहारिक रूप से भी अनुचित है। पितृत्व अवकाश पर भी सुझाव मातृत्व अवकाश के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पितृत्व अवकाश को भी सामाजिक सुरक्षा लाभ के रूप में मान्यता देने के लिए कानून बनाने की सिफारिश की। कोर्ट का यह ऐतिहासिक फैसला हमसानंदिनी नंदूरी द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर आया, जिसमें आयु-आधारित इस भेदभाव को मनमाना और असंवैधानिक बताया गया था। यह निर्णय न केवल गोद लेने वाली माताओं के अधिकारों को मजबूत करता है, बल्कि भारतीय समाज में दत्तक ग्रहण को समान सम्मान देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

हरदीप पुरी की बेटी से जुड़ी गलत जानकारी पर दिल्ली HC का आदेश, रोक लगाई

नई दिल्ली दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी की बेटी हिमायनी पुरी को चाइल्ड सेक्स ऑफेंडर जेफरी एपस्टीन से जोड़कर बदनाम करने वाले कंटेंट को ब्लॉक करने का आदेश दिया है। अभी ये आदेश वैश्विक स्तर पर जारी नहीं हुए हैं। दरअसल हिमायनी पुरी ने जेफरी एपस्टीन से जोड़ने वाले पोस्ट को अपमानजनक बताते हुए याचिका दायर की थी, जिस पर दिल्ली हाई कोर्ट सुनवाई कर रहा है। 10 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग अपने वाद में हिमायनी पुरी ने 10 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है। इसके साथ ही कई संस्थाओं को मानहानिकारक कंटेंट फैलाने से रोकने का आदेश देने का अनुरोध किया है। इस मामले में न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्ना सुनवाई कर रही हैं। पुरी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी का कहना है कि उन्हें अत्यंत अपमानजनक पोस्टों के जरिए निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ ‘जॉन डो’ आदेश की मांग की है। पुरी की ओर से पेश वकील ने क्या तर्क दिए जेठमलानी का तर्क है कि यह सामग्री एक सुनियोजित हमले का हिस्सा प्रतीत होती है, जो व्यक्तिगत और संभावित राजनीतिक दुर्भावना का संकेत देती है। उनका यह भी कहना है कि पुरी से पूर्व में जुड़ी एक फर्म को एपस्टीन से धन प्राप्त होने के दावे पूरी तरह से झूठे और मनगढ़ंत हैं। जेठमलानी का कहना है कि ये आरोप पेशेवर कदाचार और नैतिक पतन के आरोप हैं, जो उनके अनुसार हिमायनी पुरी के खिलाफ मानहानिकारक हमले का मूल आधार हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फैलाई जा रही झूठी सामग्री याचिका के अनुसार, 22 फरवरी 2026 के आसपास से सोशल मीडिया और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर झूठे, भ्रामक एवं मानहानिकारक पोस्ट, आर्टिकल, वीडियो और डिजिटल कंटेंट फैलाए जा रहे हैं। इनमें एक्स, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक, लिंक्डइन तथा अन्य डिजिटल न्यूज पोर्टल भी शामिल हैं। केंद्रीय मंत्री की बेटी होने की वजह से बनाया जा रहा निशाना हिमायनी पुरी ने कहा कि वह फाइनेंस और इनवेस्टमेंट सेक्टर में काम करती हैं। उन्हें केवल इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वह केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी की बेटी हैं। याचिका में कहा गया है कि प्रतिवादियों ने यह निराधार आरोप लगाए कि उनका एपस्टीन के साथ डायरेक्ट-इडायरेक्ट बिजनेस, फाइनेंस या निजी संबंध था। याचिका के अनुसार, इन आरोपों को पूरी तरह झूठा, दुर्भावनापूर्ण और तथ्यहीन बताया गया है। चाइल्ड सेक्स ऑफेंडर जेफरी एपस्टीन Jeffrey Epstein एक अमेरिकी फाइनेंसर था, जो बाद में नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण और सेक्स ट्रैफिकिंग के गंभीर आरोपों के कारण दुनिया भर में कुख्यात हो गया। वह अमीर और प्रभावशाली लोगों से जुड़े अपने नेटवर्क के लिए भी चर्चा में रहा। 2008 में उसे नाबालिग से जुड़े अपराध में सजा मिली थी, लेकिन 2019 में दोबारा गिरफ्तार किया गया। उसी साल न्यूयॉर्क की जेल में उसकी संदिग्ध मौत हो गई, जिसे आधिकारिक तौर पर आत्महत्या बताया गया। एपस्टीन केस ने वैश्विक स्तर पर सत्ता, पैसे और यौन अपराधों के संबंध पर बहस छेड़ दी।

पाकिस्तान ने काबुल में आतंकी ठिकाने को निशाना बनाकर 400 लोगों की जान ले ली, मरीज भी थे शामिल

काबुल अफ़गानिस्तान के उप-सरकारी प्रवक्ता ने मंगलवार सुबह बताया कि अफ़गान राजधानी काबुल में नशा करने वालों का इलाज करने वाले एक अस्पताल पर हुए पाकिस्तानी हवाई हमले में मरने वालों की संख्या बढ़कर 400 हो गई है।  सोशल मीडिया पोस्ट में हमदुल्ला फितरत ने कहा कि सोमवार देर रात हुए इस हमले में अस्पताल का एक बड़ा हिस्सा तबाह हो गया. उन्होंने बताया कि अब तक 400 लोग मारे जा चुके हैं और करीब 250 अन्य के घायल होने की खबर है।  फितरत ने आगे कहा कि बचाव दल इमारत में लगी आग पर काबू पाने और मलबे से शवों को निकालने का काम कर रहे हैं।  पाकिस्तान क्या बोला? पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के दावे को झूठा और जनता की राय को गुमराह करने के मकसद से किया गया बताकर खारिज कर दिया. पाकिस्तान ने कहा कि उसने सोमवार को काबुल और नंगरहार प्रांत में केवल सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था।  अफ़गानिस्तान की तालिबान सरकार के डिप्टी प्रवक्ता हमदुल्ला फ़ितरत के मुताबिक, काबुल के उमर एडिक्शन ट्रीटमेंट हॉस्पिटल पर हमला स्थानीय समय के अनुसार रात लगभग 9 बजे (16:30 GMT) हुआ. उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि यह हॉस्पिटल 2,000 बेड की सुविधा वाला है और इस हमले में इमारत का एक बड़ा हिस्सा तबाह हो गया।  ‘हम फिर से उठ खड़े होंगे…’ अफगानिस्तानी क्रिकेटर राशिद खान ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “काबुल में पाकिस्तानी हवाई हमलों के कारण आम नागरिकों के हताहत होने की ताज़ा रिपोर्टों से मुझे गहरा दुख हुआ है. आम नागरिकों के घरों, शिक्षण संस्थानों या चिकित्सा सुविधाओं को निशाना बनाना एक युद्ध अपराध है. इंसानी जानों के प्रति इस तरह की शदीद गफलत, खासकर रमज़ान के पवित्र महीने में, बेहद घिनौनी और गहरी चिंता का विषय है. इससे केवल फूट और नफ़रत ही बढ़ेगी।  उन्होंने आगे कहा कि मैं संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली अन्य एजेंसियों से अपील करता हूं कि वे इस ताज़ा जुल्म जांच करें और इसके दोषियों को जवाबदेह ठहराएं. इस मुश्किल घड़ी में मैं अपने अफ़ग़ान लोगों के साथ खड़ा हूं. हम इस सदमे से उबरेंगे और एक राष्ट्र के रूप में हम फिर से उठ खड़े होंगे. हम हमेशा ऐसा ही करते आए हैं।  ‘जेट ने बम गिराए…’ स्थानीय टेलीविज़न चैनलों ने ऐसे फुटेज दिखाए, जिनमें दमकलकर्मी एक इमारत के मलबे के बीच उठ रही लपटों को बुझाने के लिए संघर्ष करते नज़र आ रहे थे।  हॉस्पिटल में सुरक्षा गार्ड के तौर पर काम करने वाले 31 साल के ओमिद स्तानिकज़ई ने AFP समाचार एजेंसी को बताया कि हमले से पहले उन्होंने आसमान में लड़ाकू विमानों को गश्त करते हुए सुना था. हमारे चारों ओर सैन्य टुकड़ियां थीं. जब इन सैन्य टुकड़ियों ने जेट पर गोलीबारी की, तो जेट ने बम गिराए और आग लग गई. सभी मृतक और घायल नागरिक थे।  पाकिस्तान के द्वारा यह हमला अफ़ग़ान अधिकारियों के उस बयान के कुछ घंटों बाद हुआ, जिसमें उन्होंने कहा था कि दोनों पक्षों के बीच उनकी साझा सीमा पर गोलीबारी हुई थी और अफ़ग़ानिस्तान में चार लोग मारे गए थे. यह घटना ऐसे वक्त में हुई है, जब इन पड़ोसी देशों के बीच पिछले कई वर्षों की सबसे भीषण लड़ाई तीसरे हफ़्ते में प्रवेश कर गई है।  ‘इंसानियत के खिलाफ जुर्म…’ अफ़ग़ान सरकार के एक और प्रवक्ता ज़बीहुल्ला मुजाहिद ने इससे पहले सोशल मीडिया पर अस्पताल पर हुए हमले की निंदा करते हुए कहा कि पाकिस्तान ने एक बार फिर अफ़ग़ानिस्तान के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया है और काबुल में एक नशा मुक्ति केंद्र को निशाना बनाया है. उन्होंने कहा कि अफ़ग़ान सरकार इस तरह के कृत्य को सभी सिद्धांतों के खिलाफ और इंसानियत के खिलाफ जुर्म मानती है।  ‘आतंकवादियों को मदद देने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर…’ पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ के प्रवक्ता मुशर्रफ़ ज़ैदी ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि काबुल में किसी भी अस्पताल को निशाना नहीं बनाया गया।  सोशल मीडिया पोस्ट में पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने कहा कि इन हमलों में सैन्य ठिकानों और आतंकवादियों को मदद देने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर को सटीक रूप से निशाना बनाया गया, जिसमें अफ़ग़ान तालिबान के तकनीकी उपकरणों और गोला-बारूद के गोदाम शामिल हैं. इसके साथ ही काबुल और नंगरहार में मौजूद अफ़ग़ानिस्तान-स्थित पाकिस्तानी लड़ाकों को भी निशाना बनाया गया. मंत्रालय ने आगे कहा कि इन ठिकानों का इस्तेमाल बेकसूर पाकिस्तानी नागरिकों के खिलाफ किया जा रहा था। 

अटल टनल की ओर जाने वाले रास्ते बर्फबारी के चलते बंद, IMD ने जारी किया मौसम अलर्ट

 मनाली      हिमाचल प्रदेश में भारी बर्फबारी के कारण प्रशासन ने नेहरू कुंड से साउथ पोर्टल तक अटल टनल की ओर वाहनों की आवाजाही पर अस्थायी रोक लगा दी है. दरअसल, प्रसिद्ध पर्यटन जगह मनाली के पास अटल टनल क्षेत्र में रविवार को अचानक हुई भारी बर्फबारी ने हजारों पर्यटकों की मुश्किलें बढ़ा दी थीं. करीब 1000 से ज्यादा वाहनों में लगभग 5000 पर्यटक सड़क पर फंस गए थे. लेकिन प्रशासन, पुलिस और बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) की टीमों ने तुरंत रेस्क्यू अभियान चलाया और सोमवार देर शाम तक सभी लोगों को सुरक्षित मनाली पहुंचा दिया। डीएसपी मनाली केडी शर्मा ने बताया कि भारी बर्फबारी से सड़कों पर बर्फ जम गई. जिससे फिसलन वाले रास्तों पर वाहन चलाना मुश्किल हो गया था. कई पर्यटकों को अपनी गाड़ियां छोड़कर पैदल या मदद से सुरक्षित जगह पहुंचना पड़ा. वहीं, कुछ टैक्सी ड्राइवर अभी भी अपने वाहनों के साथ टनल के आस-पास हैं, लेकिन सभी लोग सुरक्षित हैं. सड़क ठीक होने पर उन्हें मनाली भेज दिया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, अटल टनल के साउथ पोर्टल के पास भारी बर्फ जमा हो गई है. इसलिए यातायात को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है. नेहरू कुंड और सोलंग नाला में 24 घंटे के लिए बैरियर लगाए गए हैं. पुलिस की निगरानी में केवल आपातकालीन वाहन जैसे एंबुलेंस, पुलिस गाड़ियां, फायर ब्रिगेड और स्थानीय लोगों को 4×4 वाहनों से ही जाने की अनुमति है। मार्च में बर्फ से ढकी वादियां, स्नोफॉल का अद्भुत नजारा उपायुक्त कुल्लू अनुराग चंद्र शर्मा ने कहा कि बीआरओ की टीमें लगातार भारी मशीनरी से बर्फ हटा रही हैं. सड़क को जल्द से जल्द साफ करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन अभी जोखिम ज्यादा है, इसलिए ट्रैफिक बंद रखना जरूरी है. इस बीच, मौसम विभाग ने फिलहाल भारी बर्फबारी और बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. प्रशासन ने सभी पर्यटकों और स्थानीय लोगों से अपील की है कि मौसम और सड़क की स्थिति पूरी तरह सामान्य होने तक अटल टनल, सोलंग वैली की ओर जाने से बचें।

‘पाकिस्तान से डिप्लोमेसी का समय अब समाप्त’, काबुल एयरस्ट्राइक के बाद अफगान सरकार ने बदले की कसम खाई

काबुल पाकिस्तान और अफगान-तालिबान के बीच पिछले 10 दिनों से भीषण युद्ध जारी है . कल रात 9 बजे पाकिस्तान ने ‘ऑपरेशन गजब लिल हक’ के तहत काबुल में अब तक की सबसे बड़ी एयरस्ट्राइक की, जिसमें एक अस्पताल को भी निशाना बनाया गया. अफगान अधिकारियों के मुताबिक, इस हमले में 400 बेकसूर नागरिकों की मौत हो गई है और करीब 250 लोग घायल हुए हैं। पाकिस्तान सरकार ने इस हमले का फुटेज जारी करते हुए इसे सैन्य ठिकानों पर की गई कार्रवाई बताया है। इस हमले के बाद इस्लामिक एमिरेट्स ऑफ अफगानिस्तान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने टोलो न्यूज़ से कहा कि अब पाकिस्तान के साथ बातचीत या कूटनीति का समय खत्म हो गया है, अफगानिस्तान इसका बदला लेगा. डूरंड लाइन पर दोनों देशों की सेनाएं लगातार आमने-सामने हैं और तनाव चरम पर है। निशाने पर इस्लामाबाद जंग की शुरुआत से ही दोनों देशों के बीच जुबानी जंग और सैन्य कार्रवाई तेज थी. अफगानिस्तान के रक्षा मंत्री ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर काबुल पर हमला हुआ, तो निशाना इस्लामाबाद होगा. जवाब में तालिबान ने पाकिस्तान के इस्लामाबाद, क्वेटा और रावलपिंडी में पाक आर्मी के ठिकानों पर हमले का दावा किया था. तालिबान ने दावा किया था कि उन्होंने पाकिस्तान के महत्वपूर्ण ‘नूर खान एयरबेस’ को निशाना बनाया है। पाकिस्तान का ‘ऑपरेशन गजब लिल हक’ पाकिस्तान ने काबुल और नंगरहार में किए गए इन हमलों को अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी बताया है. पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने हाल ही में बयान दिया था कि अफगान-तालिबान ने पाकिस्तान में नागरिकों को निशाना बनाकर ‘रेड लाइन’ क्रॉस की है. इसी बयान के बाद कल रात काबुल पर भारी बमबारी की गई. पाकिस्तान का दावा है कि ये हमले उन सैन्य प्रतिष्ठानों पर थे, जो पाकिस्तान में हमलों को प्रायोजित कर रहे थे। डूरंड लाइन पर भीषण झड़पें दोनों देशों के बीच सीमा पर स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है. डूरंड लाइन पर दोनों तरफ की सेनाएं लगातार एक-दूसरे पर भारी गोलाबारी कर रही हैं. पाकिस्तान द्वारा काबुल के अस्पताल पर किए गए हमले और उसके फुटेज जारी करने के बाद अफगानिस्तान में भारी आक्रोश है. तालिबान ने कहा है कि वे इस सैन्य हमले का करारा जवाब देंगे, जिससे पूरे इलाके में बड़ी जंग का खतरा मंडराने लगा है। ।.

भारत लौटा’नंदा देवी जहाज, होर्मुज से 47 हजार मीट्रिक टन LPG लेकर आया

वडीनार होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित रूप से शिवालिक के बाद, एक और LPG टैंकर ‘नंदा देवी’ भारत आ चुका है. ‘नंदा देवी’ होर्मुज़ जलडमरूमध्य को पार करते हुए वडीनार बंदरगाह पर पहुंच गया है. यह जहाज अपने साथ 47 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस लेकर आया है. यह जहाज गुजरात के वाडीनार बंदरगाह पर पहुंच चुका है. मिडिल ईस्ट में गहराते संकट के बीच, होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने वाला यह दूसरा जहाज़ है। एक दिन पहले, दूसरा LPG टैंकर ‘शिवालिक’ गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर 46,000 मीट्रिक टन से ज़्यादा LPG लेकर पहुंचा था. इसमें इतनी LPG थी जो भारतीय घरों में इस्तेमाल होने वाले 14.2 किलोग्राम के करीब 32.4 लाख स्टैंडर्ड घरेलू सिलेंडरों के बराबर थी। अधिकारियों का अनुमान था कि यह अकेला जहाज़ भारत की कुल LPG आयात की ज़रूरत का लगभग एक दिन का हिस्सा पूरा कर सकता है। मंत्रालय ने क्या बताया था? शनिवार को जहाज़रानी मंत्रालय में विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया था कि शिवालिक और नंदा देवी के क्रमशः 16 मार्च और 17 मार्च को पहुंचने की उम्मीद है. सिन्हा ने कहा था, “फ़ारसी खाड़ी इलाके में मौजूद सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और पिछले 24 घंटों में उनके साथ किसी भी अप्रिय घटना की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है. फ़ारसी खाड़ी में 24 भारतीय ध्वज वाले जहाज़ मौजूद थे. इनमें से दो जहाज़- शिवालिक और नंदा देवी सुरक्षित रूप से गुज़र गए और अब भारत की ओर बढ़ रहे हैं। नंदा देवी के गुजरात बंदरगाह पर पहुंचने के बाद 24 हजार मीट्रिक टन LPG तमिलनाडु भेजी जाएगी. LPG आपूर्ति स्थिर होने की उम्मीद दो जहाज़ों के आने से भारत की LPG आपूर्ति स्थिर होने की उम्मीद है, जिससे कमी के व्यापक डर को दूर किया जा सकेगा. फ़िलहाल, कई शहरों में लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं, जबकि छोटे कारोबारी (होटल, रेस्टोरेंट और सड़क किनारे दुकानें चलाने वाले) इस बात से चिंतित हैं कि इस कमी की वजह से उन्हें अपना कारोबार बंद करना पड़ सकता है। पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव (विपणन एवं तेल शोधन) सुजाता शर्मा ने कहा, “कच्चे तेल और रिफाइनरियों के संबंध में, हमारे पास कच्चे तेल की पर्याप्त आपूर्ति है और हमारी रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं। खुदरा दुकानों पर स्टॉक की कमी की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है। पेट्रोल और डीजल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। हम अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए घरेलू स्तर पर पर्याप्त पेट्रोल और डीजल का उत्पादन करते हैं; इसलिए, हमें आयात की कोई आवश्यकता नहीं है। पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध कराए जाएंगे प्राकृतिक गैस के संबंध में, मैंने कल आपका ध्यान सरकार के उद्देश्य की ओर दिलाया था, जहां भी वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को एलपीजी आपूर्ति में कठिनाइयों या व्यवधानों का सामना करना पड़ रहा है, उन्हें पीएनजी कनेक्शन में परिवर्तित किया जाना चाहिए।” इस उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए, GAIL (गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड) ने विभिन्न सीजीडी ऑपरेटरों के साथ एक बैठक आयोजित की और उन्हें सलाह दी कि वे जहां भी संभव हो, सभी पात्र वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध कराने में तेजी लाएं… कांडला बंदरगाह में 22 जहाजों को हैंडल करने का इंतजाम तनाव के माहौल में होर्मुज स्ट्रेट से गुजरकर भारत आने वाला पहला जहाज लाइबेरिया का था, जो सीधे मुंबई पहुंचा था। लेकिन, उसके बाद कांडला बंदरगाह में 72 घंटों के अंदर 22 जहाजों को हैंडल करने का इंतजाम किया गया है। 46,000 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर आ रहा ‘नंदा देवी’ उधर जानकारी के अनुसार ‘नंदा देवी’46,000 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर आ रहा है। भारत के कई इलाकों में इस समय जिस तरह से एलपीजी की किल्लत बताई जा रही है, ऐसे मौके पर देश के लिए ईरान से बात करके इस तरह से होर्मुज के रास्ते एलपीजी टैंकर ले आना बहुत बड़ी उपलब्धि है। ईरान से होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते अबतक भारत पहुंचे जहाज     ईरान युद्ध के बाद भारत पहुंचने वाला सबसे पहला तेल टैंकर लाइबेरिया का शेनलॉन्ग।     यह मुंबई बंदरगाह पहुंचा, लेकिन इसने होर्मुज स्ट्रेट पार करने के लिए ‘डार्क ट्रांजिट’ का इस्तेमाल किया।     ईरान से जब भारतीय जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने के लिए कूटनीतिक स्तर पर बातचीत हुई तो सबसे पहले जिस एलपीजी टैंकर को गुजरने की इजाजत मिली, वह ‘शिवालिक’ है।     सूत्रों के अनुसार ‘शिवालिक’ भी अभी अंतरराष्ट्रीय जल में है और इंडियन नेवी इसे एस्कॉर्ट करके भारत ला रही है। 

भारत का देसी जुगाड़: LPG से कितनी सस्ती होगी DME गैस और संकट के बीच इसका कितना असर?

नई दिल्ली ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच गहराते युद्ध के बीच वैश्विक स्तर पर ईंधन की सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा गई है. इस महायुद्ध की आशंका के बीच रसोई गैस (LPG) की कीमतों में लगी आग और गैस की किल्लत के दावों ने आम आदमी का बजट बिगाड़ दिया है. ऐसे में पुणे के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा देसी जुगाड़ यानी DME गैस तैयार की है, जो न केवल सस्ती है बल्कि संकट के समय भारत को आत्मनिर्भर बनाने की ताकत भी रखती है. आइए जानें कि यह कितने काम की है और कैसे एलपीजी का बेहतर ऑप्शन बन सकती है। युद्ध के साये में एलपीजी का विकल्प दुनिया भर में जारी युद्ध की वजह से प्राकृतिक गैस की आपूर्ति पर बुरा असर पड़ा है. ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने भारत जैसे देशों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि हम अपनी गैस जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर हैं. इसी संकट के बीच पुणे स्थित सीएसआईआर-राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला (NCL) के वैज्ञानिकों ने डाइमिथाइल ईथर (DME) के रूप में एक क्रांतिकारी समाधान पेश किया है. यह गैस एलपीजी की तरह ही काम करती है और आने वाले समय में रसोई गैस की किल्लत को खत्म कर सकती है। क्या है डाइमिथाइल ईथर और इसके गुण? डाइमिथाइल ईथर यानी DME एक ऐसा ईंधन है, जिसके गुणधर्म काफी हद तक एलपीजी से मिलते-जुलते हैं. वैज्ञानिकों का दावा है कि यह गैस एलपीजी की तरह ही सुरक्षित तरीके से जलती है और मौजूदा कुकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ पूरी तरह संगत है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे चलाने के लिए आपको अपने घर के चूल्हे या सिलेंडर में किसी भी तरह के बदलाव की जरूरत नहीं पड़ेगी. यह मौजूदा सिस्टम में फिट होकर उतनी ही ऊर्जा प्रदान करती है जितनी सामान्य रसोई गैस देती है। दो दशकों की मेहनत का शानदार नतीजा पुणे के वैज्ञानिकों ने पिछले 20 वर्षों के कड़े शोध के बाद इस खास फॉर्मूले को तैयार किया है. फिलहाल एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत रोजाना 250 किलो गैस का उत्पादन किया जा रहा है. वैज्ञानिकों की इस सफलता ने भारत को उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा कर दिया है, जिनके पास ईंधन का अपना वैकल्पिक और सस्ता विज्ञान मौजूद है. यह तकनीक पूरी तरह स्वदेशी है, जो मेक इन इंडिया अभियान को भी मजबूती देती है। विदेशी मुद्रा भंडार को मिलेगी संजीवनी भारत अपनी जरूरत की एलपीजी का एक बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है, जिसके लिए भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा चुकानी पड़ती है. शोध के अनुसार, यदि एलपीजी में केवल 8% DME गैस मिला दी जाए, तो देश को हर साल लगभग 9,500 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हो सकती है. युद्ध के कारण डॉलर के मुकाबले गिरते रुपये और बढ़ती तेल कीमतों के बीच यह बचत भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए किसी वरदान से कम नहीं होगी। कितनी सस्ती और कितनी कारगर है यह गैस? DME गैस एलपीजी की तुलना में काफी सस्ती पड़ने वाली है, क्योंकि इसे भारत में ही उपलब्ध कोयले या बायोमास (जैविक कचरे) से तैयार किया जा सकता है. वर्तमान शोध बताते हैं कि एलपीजी के साथ 20% तक DME मिलाकर इस्तेमाल करना पूरी तरह सफल रहा है. हालांकि, शुरुआत में इसे 8% की मिलावट के साथ बाजार में उतारने की तैयारी है. घरेलू स्रोतों से तैयार होने के कारण इसकी उत्पादन लागत कम है, जिसका सीधा फायदा आम उपभोक्ताओं की जेब को मिलेगा। पर्यावरण के लिहाज से भी बेहतर विकल्प महंगाई कम करने के साथ-साथ DME गैस पर्यावरण के लिए भी एक वरदान साबित हो सकती है. एलपीजी की तुलना में यह गैस जलने पर बहुत कम प्रदूषण फैलाती है. इसमें हानिकारक कणों का उत्सर्जन न्यूनतम होता है, जिससे यह एक क्लीन फ्यूल की श्रेणी में आती है. आज जब पूरी दुनिया नेट-जीरो और प्रदूषण मुक्त ईंधन की बात कर रही है, तब भारत का यह देसी जुगाड़ वैश्विक मानकों पर भी खरा उतरता नजर आ रहा है। औद्योगिक उत्पादन और भविष्य की राह वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि बड़ी औद्योगिक कंपनियां इस तकनीक को अपनाती हैं और बड़े पैमाने पर इसका उत्पादन शुरू होता है, तो एलपीजी पर निर्भरता काफी हद तक खत्म हो सकती है. पायलट प्रोजेक्ट की सफलता ने रास्ता साफ कर दिया है. अब जरूरत है इसे लैब से निकालकर आम जनता तक पहुंचाने की. युद्ध के इस दौर में जहां ऊर्जा सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती है, वहां DME गैस भारत के लिए एक मजबूत ढाल साबित हो सकती है।

गैस संकट की आशंका खारिज: केंद्र बोला– CNG और PNG उपभोक्ताओं को मिलती रहेगी निर्बाध सप्लाई

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने सोमवार को कहा कि देश में गैस की कोई कमी नहीं है और उपभोक्ताओं को निर्बाध सीएनजी और पीएनजी की आपूर्ति जारी है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की विपणन और तेल शोधन विभाग की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि सीएनजी की आपूर्ति करने वाले ईंधन पंप और घरेलू पीएनजी कनेक्शन सामान्य रूप से काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “सीएनजी उपयोगकर्ताओं और पीएनजी उपभोक्ताओं दोनों को आपूर्ति पूरी तरह से जारी रखी जा रही है। अधिकारियों ने जमाखोरी रोकने के लिए प्रवर्तन कार्रवाई भी शुरू कर दी है। ईंधन भंडारण और आपूर्ति की जांच के तहत कई राज्यों में छापे मारे गए हैं।” वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने आगे कहा कि कच्चा तेल भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। उन्होंने कहा, “सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं। हमारे पेट्रोल पंप सामान्य रूप से चल रहे हैं। अभी तक किसी भी तरह की कमी की सूचना नहीं मिली है।” गैस वितरण कंपनियों ने नए पीएनजी उपभोक्ताओं के लिए प्रोत्साहन योजनाएं भी शुरू की हैं। इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (आईजीएल) ने 31 मार्च से पहले पीएनजी कनेक्शन के लिए पंजीकरण कराने वाले उपभोक्ताओं को 500 रुपए की मुफ्त गैस देने की घोषणा की है। इस बीच, घरेलू गैस की उपलब्धता को लेकर उपभोक्ताओं में व्याप्त भय कम होने से एलपीजी बुकिंग में गिरावट आई है, वहीं जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए राज्यों भर में छापेमारी की जा रही है। जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए राज्यों भर में छापेमारी की जा रही है और 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने स्थिति पर नजर रखने के लिए नियंत्रण कक्ष स्थापित किए हैं। मंत्रालय ने उपभोक्ताओं से अनुरोध किया है कि वे घबराहट में बुकिंग न करें, डिजिटल बुकिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग करें और एलपीजी वितरकों के पास अनावश्यक रूप से जाने से बचें। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि सरकार घरेलू उपभोक्ताओं के हितों को प्राथमिकता देती रहेगी और एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति विशेष रूप से घरों और अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए सुनिश्चित करेगी।

समझौते के दावे पर ईरान ने दिया करारा जवाब, ट्रंप की कूटनीति पर उठे सवाल

नई दिल्ली एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार दावा कर रहे हैं कि ईरान, अमेरिका के साथ समझौता करना चाहता है। वहीं, ईरान ने अपनी तरफ से इन सभी दावों को खारिज कर दिया। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए कहा कि हम किसी तरह के सीजफायर या किसी बातचीत के लिए तैयार नहीं हैं। ईरानी विदेश मंत्री के इस बयान के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान इन हमलों को खत्म करने के लिए समझौता करने को तैयार नहीं है। वैश्विक मुद्दों पर अक्सर एकतरफा दावा करने वाले ट्रंप ईरानी विदेश मंत्री के बयान के बाद अपना बयान बदलते नजर आ रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ताजा बयान में कहा कि अमेरिका ईरान के साथ बातचीत कर रहा है, क्योंकि युद्ध अपने तीसरे हफ्ते में है, लेकिन तेहरान इसे खत्म करने के लिए किसी डील के लिए तैयार नहीं है। ट्रंप ने इस दौरान ये भी बताया कि मिडिल ईस्ट और वैश्विक बाजार में जारी उथल-पुथल और तनाव को रोकने के लिए अमेरिका सभी देशों के साथ कूटनीतिक बातचीत कर रहा है। हालांकि, उन्होंने ज्यादा जानकारी नहीं दी। लेकिन, उन्होंने बताया कि वह अन्य देशों के साथ डिप्लोमैटिक बातचीत में लगे हैं। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ने हार्मुज स्ट्रेट को खुला रखने के लिए सभी देशों से अपने वॉरशिप वहां भेजने की अपील की थी। हालांकि, ट्रंप को इसमें सफलता हाथ नहीं लगी। अब तक किसी भी देश ने ट्रंप के इस फैसले को अपना समर्थन नहीं दिया है। वहीं, ट्रंप के पहले वाले दावों को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफतौर पर खारिज करते हुए कहा था कि इस गैर-कानूनी युद्ध के खिलाफ जितना समय लगेगा, तेहरान अपनी रक्षा के लिए तैयार है। विदेश मंत्री ने कहा, “हमने कभी सीजफायर के लिए नहीं कहा और हमने कभी बातचीत के लिए भी नहीं कहा। हम अपनी रक्षा के लिए तैयार हैं, जब तक जरूरत हो।” उन्होंने कहा कि ईरान तब तक अपने ऑपरेशन जारी रखेगा, जब तक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस बात पर नहीं पहुंच जाते कि यह एक गैर-कानूनी युद्ध है, जिसमें कोई जीत नहीं है। अराघची ने आगे कहा, “हमें कोई कारण नहीं दिखता कि हमें अमेरिकियों से बात क्यों करनी चाहिए। जब उन्होंने हम पर हमला करने का फैसला किया, तब हम उनसे बात कर रहे थे और वह दूसरी बार था।” इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ने शनिवार को कहा था कि ईरान ने बातचीत में दिलचस्पी दिखाई है। हालांकि, ट्रंप ने इस बात पर भी जोर दिया है कि जब तक युद्ध जारी है, वाशिंगटन सीजफायर समझौते में जल्दबाजी नहीं करेगा। ट्रंप ने कहा, “ईरान एक डील करना चाहता है और मैं इसे नहीं करना चाहता क्योंकि शर्तें अभी काफी अच्छी नहीं हैं।”

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भारतीय जहाजों की सुरक्षा बढ़ी, नेवी वॉरशिप के साथ जारी वापसी

नई दिल्ली भारतीय नौसेना के ‘मिशन बेस्ड डिप्लॉयमेंट’ के तहत दुनिया के छह अलग-अलग इलाकों में वॉरशिप की तैनाती की गई है। साल 2017 के बाद से यह तैनाती लगातार जारी है। ‘मिशन बेस्ड डिप्लॉयमेंट’ के तहत ओमान और अदन की खाड़ी के पास भी दो बड़े अभियान चल रहे हैं- ओमान की खाड़ी के पास ‘ऑपरेशन संकल्प’ और अदन की खाड़ी में ‘एंटी-पायरेसी ऑपरेशन’। वेस्ट एशिया में जारी जंग के चलते इस इलाके में तैनात नौसेना के वॉरशिप भारतीय फ्लैगशिप को सुरक्षित एस्कॉर्ट भी कर रहे हैं। एलपीजी कैरियर शिवालिक और नंदा देवी के बाद तीसरा इंडियन फ्लैग वेसल जग लाडकी भी सुरक्षित तरीके से भारत के लिए रवाना हो चुका है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, देर रात से ही भारतीय नौसेना का एक वॉरशिप उसे एस्कॉर्ट करते हुए सुरक्षित क्षेत्र तक पहुंचाने का काम कर रहा है। इससे पहले दोनों वेसल्स को भी नौसेना के वॉरशिप ने सुरक्षा मुहैया कराते हुए एस्कॉर्ट किया था। सूत्रों के अनुसार अदन की खाड़ी के पास फिलहाल नौसेना के तीन जहाज ऑपरेट कर रहे हैं। जिस दिन से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से मरीन ट्रैफिक बाधित हुआ, उसी समय से भारतीय नौसेना के वॉरशिप हालात पर पैनी नजर बनाए हुए हैं और लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। ओमान की खाड़ी के पास भारतीय नौसेना का गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर आईएनएस सूरत तैनात है। अगर वर्ष 2017 में शुरू किए गए ‘मिशन बेस्ड डिप्लॉयमेंट’ की बात करें, तो फिलहाल दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में इस मिशन के तहत भारतीय नौसेना के युद्धपोत लगातार तैनात रहते हैं। पहली तैनाती अरब सागर में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास है, जहां से फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के रास्ते भारत का लगभग 80 प्रतिशत ऊर्जा व्यापार होता है। दूसरी तैनाती अदन की खाड़ी में है, जहां ऊर्जा व्यापार के अलावा भारत का लगभग 90 प्रतिशत अन्य व्यापार होता है, जो स्वेज नहर, रेड सी और अदन की खाड़ी से होकर अरब सागर के रास्ते भारत पहुंचता है। यह क्षेत्र समुद्री डकैती के लिहाज से सबसे संवेदनशील माना जाता है। जिबूती और सोमालिया के समुद्री लुटेरे इसी इलाके में सक्रिय रहते हैं। यह व्यापार का सबसे छोटा समुद्री मार्ग है, इसलिए यहां जहाजों की आवाजाही भी अधिक रहती है। यदि अदन की खाड़ी का मार्ग बाधित हो जाए, तो व्यापारी जहाजों को भूमध्य सागर से होते हुए अफ्रीका के दक्षिणी सिरे केप ऑफ गुड होप के रास्ते आना-जाना पड़ता है। यह मार्ग न केवल समय बढ़ाता है, बल्कि लागत भी बढ़ा देता है। तीसरी तैनाती सेशेल्स के पास है, जो केप ऑफ गुड होप मार्ग से आने-जाने वाले जहाजों की सुरक्षा और समुद्री डकैती रोकने के लिए है। चौथी तैनाती मालदीव के पास, पांचवीं अंडमान-निकोबार के पास और छठी तैनाती म्यांमार-बांग्लादेश सीमा के पास बंगाल की खाड़ी में है। इन तैनातियों के दौरान भारतीय युद्धपोत मित्र देशों की नौसेनाओं के साथ युद्धाभ्यास भी करते हैं और किसी भी प्रकार की समुद्री डकैती या दुर्घटना की स्थिति में राहत और बचाव कार्यों को अंजाम देते हैं।

भारतीयों के लिए एडवाइजरी जारी: ईरान बॉर्डर पार करने से पहले दूतावास से संपर्क जरूरी

तेहरान तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने सैन्य संघर्ष में फंसे अपने नागरिकों को साफ कहा है कि बिना दूतावास से कोआर्डिनेट किए सीमा पार न करें। दूतावास ने एक्स पर एडवाइजरी पोस्ट की है, जिसमें स्पष्ट कहा है कि 9 मार्च की एडवाइजरी को जारी रखते हुए/दोहराते हुए, ईरान में मौजूद सभी भारतीय नागरिकों को सख्ती से सलाह दी जाती है कि वे आगे की यात्रा के लिए ईरान की किसी भी जमीनी सीमा के पास न जाएं और न ही उसे पार करने की कोशिश करें, जब तक कि उन्होंने तेहरान स्थित भारतीय दूतावास के साथ पहले से और साफ तौर पर संपर्क न किया हो।  इसमें आगे लिखा है कि दूतावास भारतीय समुदाय के साथ लगातार संपर्क में है, और जरूरत के मुताबिक इंतजाम किए जा रहे हैं। जमीनी सीमाओं की ओर बिना दूतावास के सहयोग के जाने से सख्ती से मना किया जाता है। अंदेशा जताया है कि जो भारतीय नागरिक दूतावास की जानकारी और मार्गदर्शन के बिना जमीनी सीमाओं के रास्ते ईरान छोड़ने की कोशिश करेंगे, उन्हें गंभीर लॉजिस्टिकल और इमिग्रेशन संबंधी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। एम्बेसी ने अपील करते हुए अपने निर्देशों को पालन करने की वजह और अपनी सीमा का जिक्र किया है। कहा है कि एक बार जब लोग बिना कोआर्डिनेशन के ईरानी सीमा से बाहर चले जाएंगे, तो दूतावास उनकी मदद करने की स्थिति में नहीं होगा। इसलिए, ईरान में मौजूद सभी भारतीय नागरिकों से आग्रह किया जाता है कि वे दूतावास की एडवाइजरी का सख्ती से पालन करें, आधिकारिक माध्यमों से संपर्क में रहें, और कोई भी यात्रा शुरू करने से पहले उनसे सलाह लें। इसके साथ ही आपात स्थितियों के लिए, कुछ नंबर भी सुझाए हैं। एम्बेसी ने हेल्पलाइन नंबर +98-9128109115, +98-9128109102, +98-9128109109 और +98-9932179359 शेयर किए हैं, साथ ही कॉन्सुलर सपोर्ट के लिए ईमेल एड्रेस सीओएनएसडॉटतेहरानएटएमईएडॉटजीओवीडॉटइन भी है।

कतर में फंसे यात्रियों के लिए राहत, 18 मार्च को इन शहरों के लिए फ्लाइट्स की सूची जारी

नई दिल्ली मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारतीय दूतावास ने एक लिस्ट जारी की है, जिसमें बताया गया है कि 18 मार्च को किन शहरों के लिए कतर से विमान उड़ान भरेंगे। कतर एयरवेज ने इससे पहले भी एक शेड्यूल जारी कर जानकारी दी थी कि कतर से कहां-कहां उड़ान जाएंगी। ताजा जानकारी के अनुसार, भारतीय दूतावास ने बताया कि कतर एयरवेज ने भारत में उन जगहों की लिस्ट बनाई है, जहां वह 18 मार्च से अपनी सीमित फ्लाइट चलाएगा। वे शहर अहमदाबाद, अमृतसर, बेंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली, हैदराबाद, कोच्चि, कोझिकोड और मुंबई हैं। कतर एयरवेज 18 मार्च से 28 मार्च 2026 तक सीमित संख्या में संशोधित फ्लाइट चलाएगा। इसके साथ ही एयरवेज ने सलाह दी है कि अपनी बुकिंग मैनेज करने का सबसे तेज तरीका ऑनलाइन या हमारे ऐप पर है। अगर आपकी बुकिंग की पुष्टि हो गई है और आपकी यात्रा की तारीख 28 फरवरी और 28 मार्च 2026 के बीच है, तो आप रिफंड या तारीख बदल सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि कतर एयरवेज की विमान पर रीबुकिंग करने पर 30 अप्रैल 2026 तक नई यात्रा की तारीख में दो बार रिशेड्यूल कर सकते हैं या आपके टिकट की इस्तेमाल न की गई कीमत का रिफंड ले सकते हैं। कतर एयरवेज ने कहा, “हम समझते हैं कि यह स्थिति परेशान करने वाली हो सकती है, और हम अपने रोजाना के ऑपरेशन को सुरक्षित रूप से वापस लाने की तैयारी करते हुए आपको आगे बढ़ने में मदद करने की कोशिश कर रहे हैं। आपका सब्र और समझ हमारे लिए बहुत मायने रखती है, और इस मुश्किल समय में आपके लगातार सपोर्ट के लिए हम सच में शुक्रगुजार हैं। कतर सिविल एविएशन अथॉरिटी के कतर के एयरस्पेस को सुरक्षित रूप से पूरी तरह से फिर से खोलने की घोषणा करने के बाद कतर एयरवेज ऑपरेशन फिर से शुरू कर देगा।”इन सबके बीच कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जसीम अल थानी ने सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद से फोन पर बात की है। कतर के विदेश मंत्रालय के एक बयान के मुताबिक, शीर्ष अधिकारियों ने इलाके में सैन्य बढ़ोतरी और इलाके और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और स्थिरता पर इसके गंभीर असर पर चर्चा की। बयान में कहा गया, “दोनों पक्षों ने कतर राज्य, सऊदी अरब किंगडम और कई दूसरे सहयोगी देशों पर ईरान के गलत हमलों की निंदा दोहराई। उन्होंने इस मामले में सभी बढ़ती कार्रवाइयों को तुरंत रोकने, बातचीत की टेबल पर लौटने, तर्क और समझदारी को प्राथमिकता देने और संकट को इस तरह से कंट्रोल करने की जरूरत पर जोर दिया जिससे इलाके की सुरक्षा बनी रहे।”

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