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RTI खुलासा: पिछले 14 महीनों में 149 मौतें, तेंदुओं के लिए क्यों कब्रगाह बनता जा रहा MP; सामने आई यह बड़ी वजह

RTI reveals why MP is turning into a graveyard for leopards, with 149 deaths in the last 14 months भोपाल ! भारत में सबसे ज्यादा तेंदुए मध्यप्रदेश में पाए जाते हैं और इसी वजह से इसे तेंदुओं का प्राकृतिक आवास भी कहा जाता है। लेकिन हाल ही में सामने आए एक चिंताजनक आंकड़े ने देश के वन्यजीव प्रेमियों को चिंता में डाल दिया है। दरअसल सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मिली जानकारी से पता चला है कि बीते 14 महीनों में राज्य में कुल 149 तेंदुओं की जान जा चुकी है। यह आंकड़ा जनवरी 2025 से लेकर मार्च 2026 तक का है। खास बात यह है कि इन मौतों के पीछे की सबसे बड़ी वजह तेंदुओं का शिकार होना नहीं है, में बल्कि इन मौतों का बड़ा कारण सड़क हादसे रहे हैं। वहीं वन विभाग ने मौतों के इन आंकड़ों को सामान्य बताया है और उसका कहना है कि तेंदुओं के मामले में चार प्रतिशत की मृत्यु दर स्वीकार्य सीमा के भीतर है। 31 प्रतिशत मौतों के पीछे सड़क हादसे वजह तेंदुओं की मौत की जानकारी पाने के लिए RTI कार्यकर्ता अजय दुबे ने आवेदन लगाया था। जिसके जवाब में उन्हें बताया गया कि जनवरी 2025 से इस साल मार्च तक के 14 महीनों में मध्य प्रदेश में 149 तेंदुओं की मौत हुई। इनमें से 31 प्रतिशत मौतें सड़क दुर्घटनाओं के कारण हुईं। डेटा के अनुसार इनमें से भी 19 मौतें हाईवे पर हुईं। वहीं बुढ़ापा और बीमारी जैसे प्राकृतिक कारणों के कारण 24 प्रतिशत मौतें हुईं, जबकि 21 प्रतिशत मौतें वन्यजीवों के बीच आपसी संघर्ष के कारण हुईं। 8 तेंदुओं की जान करंट लगने की वजह से गई आंकड़ों के अनुसार शिकार और बदले की भावना के कारण लगभग 14 प्रतिशत तेंदुओं की जानें गई। 8 लेपर्ड की मौत बिजली का झटका लगने से हुई, फिर चाहे वह जानबूझकर लगाया गया हो या गलती से लगा हो, जबकि दो जानवर फंदों में फंसकर मारे गए। इसके अलावा लगभग नो प्रतिशत मामलों में, मौत का कारण पता नहीं चल पाया। तेंदुओं की लिए कब्रिस्तान बन रहा MP- RTI कार्यकर्ता इस RTI को लगाने वाले एक्टिविस्ट अजय दुबे मौतों के इन आंकड़ों को भयावह बता रहे हैं, उनका कहना है कि ये आंकड़े एक गंभीर सच्चाई है। उन्होंने कहा, ‘टाइगर स्टेट (MP) तेंदुओं के लिए एक कब्रिस्तान बन गया है। NTCA (नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी) के प्रोटोकॉल को लागू करने में सिस्टम की नाकामी और सुरक्षित रास्तों की कमी उन्हें खत्म कर रही है।’ वन विभाग ने कहा- 4% का आंकड़ा सामान्य उधर वन विभाग इन मौतों को सामान्य बता रहा है। इस बारे में प्रतिक्रिया देते हुए वन विभाग के अतिरिक्त प्रधान मुख्य संरक्षक (वन्यजीव) एल. कृष्णमूर्ति ने कहा कि राज्य में तेंदुओं की मृत्यु दर को कम करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि ‘तेंदुए आकार में छोटे होते हैं और आसानी से दिखाई नहीं देते, इसलिए वे पूरे राज्य में फैले हुए हैं। वे अक्सर इंसानी बस्तियों के करीब पाए जाते हैं।’ आगे उन्होंने कहा कि ‘मौतों के आंकड़े को कम करने के लिए हम योजनाबद्ध तरीके से काम कर रहे हैं ओर नई सड़कों पर जानवरों के लिए सुरक्षित निकलने के रास्ते बनाने (एनिमल पैसेज), चेतावनी के संकेतक लगाने और नियमित गश्त करने जैसे उपाय लागू कर रहे हैं।’ साथ ही उन्होंने आगे कहा, ‘हम सड़कों के पास पानी के स्रोत न बनाने की भी सलाह दे रहे हैं, क्योंकि जानवर अक्सर पानी की तलाश में सड़कों की ओर आ जाते हैं और दुर्घटनाओं का शिकार बन जाते हैं।’ बिग कैट फैमिली में 10 से 20 प्रतिशत मौतें सामान्य एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ‘करीब 4,000 तेंदुओं में से 149 की मौत होना केवल 4 प्रतिशत का नुकसान है, जबकि बिल्ली परिवार में सालाना 10 से 20 प्रतिशत तक की मृत्यु दर को स्वीकार्य माना जाता है।’ बता दें कि फरवरी 2024 में जारी आंकड़ों के अनुसार देश में तेंदुओं की सबसे ज्यादा संख्या मध्य प्रदेश में है। उस वक्त मध्य प्रदेश में 3,907 तेंदुए थे। इससे पहले साल 2018 में राज्य में 3,421 तेंदुए थे। मध्य प्रदेश के बाद महाराष्ट्र और कर्नाटक का नंबर आता है।

मध्य प्रदेश में ‘नारी शक्ति वंदन’ उत्सव आज से, महिला आरक्षण कानून की दी जाएगी जानकारी

‘Nari Shakti Vandan’ festival in Madhya Pradesh from today, information will be given about women’s reservation law राज्य सरकार ने महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए 10 अप्रैल से 25 अप्रैल 2026 तक पूरे प्रदेश में “नारी शक्ति वंदन” पखवाड़ा मनाने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” की जानकारी आम जनता तक पहुंचाना और महिलाओं की नेतृत्व क्षमता का सम्मान करना है। इसे जन-उत्सव के रूप में मनाने के निर्देश दिए गए हैं। अभियान की शुरुआत भोपाल के रविन्द्र भवन स्थित हंसध्वनि सभागार में राज्य स्तरीय सम्मेलन से होगी। इसके अलावा सभी संभाग मुख्यालयों और छिंदवाड़ा, खरगोन व मंदसौर में भी बड़े सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में महिला जनप्रतिनिधियों और सफल महिला उद्यमियों को सम्मानित किया जाएगा और उनके अनुभव साझा किए जाएंगे। पदयात्रा आयोजित होगीमहिला एवं बाल विकास विभाग हर लोकसभा और विधानसभा क्षेत्र में “नारी शक्ति पदयात्रा” आयोजित करेगा। इसमें समाज की महिलाएं शामिल होंगी। युवाओं को जोड़ने के लिए “नारी शक्ति वंदन दीवार” बनाई जाएगी, जहां वे पेंटिंग और संदेशों के जरिए अपने विचार व्यक्त करेंगे। अंबेडकर जयंती पर विशेष ग्राम सभा14 अप्रैल को डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के अवसर पर सभी ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभाएं आयोजित होंगी। इनमें अधिनियम पर चर्चा होगी और बाबा साहेब को श्रद्धांजलि दी जाएगी। साथ ही पंचायतों, नगरीय निकायों और शिक्षण संस्थानों में गोष्ठियां और सेमिनार होंगे। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी अभियानजनसंपर्क विभाग इस अभियान का प्रचार डिजिटल प्लेटफॉर्म पर करेगा। प्रेरक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए जाएंगे। महिला स्व-सहायता समूह, ‘लखपति दीदी’ और ‘लाड़ली बहना’ योजना की महिलाओं को अभियान में जोड़ा जाएगा। शिक्षा संस्थानों में कार्यक्रमस्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में व्याख्यान और प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी, ताकि युवा पीढ़ी महिला सशक्तिकरण को बेहतर तरीके से समझ सके। सरकार ने निर्देश दिए हैं कि सभी कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए और इस पखवाड़े को जन-उत्सव के रूप में मनाया जाए।

MP के शिक्षकों को बड़ी सौगात, 35 साल की सेवा पर मिलेगा चौथा वेतनमान, 3 से 5 हजार रुपये बढ़ेगी मासिक सैलरी

MP teachers get a big gift: Fourth pay scale after 35 years of service, monthly salary will increase by 3,000 to 5,000 rupees. भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने लंबे समय से सेवा दे रहे शासकीय शिक्षकों को बड़ी राहत दी है। 35 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके शिक्षकों को अब चतुर्थ क्रमोन्नत वेतनमान का लाभ मिलेगा। यह सुविधा एक जुलाई 2023 या उसके बाद पात्रता पूरी करने वाले शिक्षकों पर लागू होगी। 15 हजार शिक्षकों को अभी से लाभसरकार के इस फैसले से प्रदेश के करीब सवा लाख शिक्षक लाभान्वित होंगे, जिनमें से लगभग 15 हजार शिक्षकों को इसी वित्तीय वर्ष में इसका फायदा मिलने लगेगा। इस वेतनमान के लागू होने से पात्र शिक्षकों को हर महीने तीन से पांच हजार रुपये तक की अतिरिक्त राशि मिलेगी। इस योजना के लिए कैबिनेट द्वारा 322.34 करोड़ रुपये की मंजूरी दी जा चुकी है। इसके दायरे में सहायक शिक्षक, शिक्षक, प्राथमिक शिक्षक, खेल, संगीत-नृत्य, विज्ञान, आईटी और माध्यमिक शिक्षक सहित विभिन्न शैक्षणिक पद शामिल किए गए हैं। शिक्षक दिवस पर की थी घोषणागौरतलब है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 5 सितंबर 2025 को शिक्षक दिवस के अवसर पर इस योजना की घोषणा की थी। अब इसे अमल में लाते हुए हजारों शिक्षकों को आर्थिक लाभ देने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है। मध्य प्रदेश शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष क्षत्रवीर सिंह राठौर के अनुसार, एक जुलाई 2023 तक 35 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके शिक्षक (भले ही वे सेवानिवृत्त हो चुके हैं) भी इस लाभ के पात्र होंगे। पहले यह सुविधा केवल सीधे भर्ती हुए लेक्चरर, सहायक संचालक और प्राचार्यों को मिल रही थी, अब अन्य शिक्षकों को भी इसका लाभ मिलेगा।

आधी रात खुला विधानसभा सचिवालय: जीतू पटवारी व पीसी शर्मा ने दतिया विधायक के मुद्दे पर भाजपा को घेरा, कही ये बात

Assembly Secretariat opened at midnight: Jitu Patwari and PC Sharma surrounded the BJP on the issue of Datia MLA, said this भोपाल ! विधानसभा सचिवालय को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता खत्म करने की प्रक्रिया के लिए देर रात विधानसभा सचिवालय खोला गया। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि यह पूरी कार्रवाई भाजपा के इशारे पर की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है और संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है। पीसी शर्मा के साथ पहुंचे विधानसभामामले की जानकारी मिलते ही जीतू पटवारी, पूर्व मंत्री पीसी शर्मा के साथ विधानसभा पहुंचे और इस पर आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि रात में सचिवालय खोलना कई सवाल खड़े करता है। पटवारी ने कहा कि विधानसभा सचिवालय एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है, लेकिन जिस तरह से रात में काम किया गया, वह पूरी तरह अस्वीकार्य है। कांग्रेस ने इसे राजनीतिक गुंडागर्दी और सत्ता का दुरुपयोग बताया है। राजेंद्र भारती की सदस्यता पर घमासानकांग्रेस का दावा है कि विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता खत्म करने की कार्रवाई राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है। पार्टी ने साफ किया है कि इस मुद्दे पर वह पूरी ताकत से लड़ाई लड़ेगी। फिलहाल इस पूरे मामले पर भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चा और तेज हो गई है। क्या है भारती का मामला? यहां जानेंयह पूरा मामला वर्ष 1998 का है, जब श्याम सुंदर संस्थान की ओर से बैंक में 10 लाख रुपये की एफडी कराई गई थी। आरोप है कि राजेंद्र भारती ने बैंक के लिपिक रघुवीर प्रजापति के साथ मिलकर दस्तावेजों में हेरफेर की और एफडी की अवधि तीन साल से बढ़ाकर 15 साल कर दी।बताया जाता है कि वर्ष 1999 से 2011 के बीच करीब 13.5 प्रतिशत ब्याज दर के आधार पर हर साल लगभग 1.35 लाख रुपये निकाले जाते रहे। साल 2011 में जब भाजपा नेता पप्पू पुजारी बैंक के अध्यक्ष बने, तब इस गड़बड़ी का खुलासा हुआ। जांच के दौरान एफडी पर ऑडिट आपत्ति भी दर्ज की गई। इसके बाद मामला उपभोक्ता फोरम से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, लेकिन वहां से भी राहत नहीं मिल सकी। अंततः वर्ष 2015 में इस मामले में आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया और अब अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुना दी है।

सफलता की कहानी : सास-बहू से देवरानी-जेठानी तक: रिश्तों की साझेदारी से खिल रहा ग्रामीण पर्यटन

Success Story: From Mother-in-law and Daughter-in-law to Sister-in-law and Sister-in-law: Rural Tourism is Flourishing Through Relationship Sharing सास-बहू, मां-बेटी या देवरानी-जेठानी के रिश्तों को अक्सर तकरार और मतभेद के उदाहरणों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, लेकिन मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के पर्यटन ग्राम इन धारणाओं को बदलते हुए एक नई मिसाल कायम कर रहे हैं। जिले के गॉवों की महिलाएं आपसी सहयोग और विश्वास के साथ होम-स्टे चला रही हैं और रिश्तों की मजबूती को तरक्की की नई राह में बदल रही हैं। पर्यटन ग्राम धूसावानी की श्रीमती मनेशी धुर्वे और श्रीमती अलका धुर्वे रिश्ते में सास-बहू हैं, लेकिन जब उनके होम-स्टे में पर्यटक आते हैं तो दोनों मिलकर पूरे उत्साह से मेहमाननवाजी में जुट जाती हैं। इसी तरह सावरवानी में श्रीमती मालती यदुवंशी अपनी सास श्रीमती शारदा यदुवंशी के साथ मिलकर होम-स्टे का संचालन कर रही हैं। यह केवल एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि पूरे जिले में उभरती एक नई सामाजिक और आर्थिक तस्वीर है, जहां रिश्तों की साझेदारी महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही है। रिश्तों की साझेदारी से मिली पहचान छिंदवाड़ा के पर्यटन ग्रामों में चल रहे होम-स्टे केवल आय का साधन नहीं हैं, बल्कि ये महिलाओं की सांस्कृतिक पहचान और आत्मविश्वास का भी प्रतीक बन चुके हैं। यहां सास-बहू, मां-बेटी और देवरानी-जेठानी मिलकर पर्यटकों का स्वागत करती हैं, भोजन तैयार करती हैं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करती हैं। इन रिश्तों की सामूहिक ताकत ने यह साबित किया है कि जब परिवार की महिलाएं साथ मिलकर काम करती हैं, तो घर ही नहीं बल्कि पूरा गांव विकास की राह पर आगे बढ़ सकता है। जिले में 50 से अधिक होम-स्टे मध्यप्रदेश में सर्वाधिक होम-स्टे संचालित करने वाले जिलों में शामिल छिंदवाड़ा में इस समय 50 से अधिक होम-स्टे संचालित हैं। खास बात यह है कि इन सभी होम-स्टे का पंजीयन महिलाओं के नाम पर किया गया है और संचालन की अधिकांश जिम्मेदारी भी महिलाएं ही संभाल रही हैं। सावरवानी, चोपना, काजरा, देवगढ़, चिमटीपुर, गुमतरा और धूसावानी जैसे पर्यटन ग्रामों में स्थानीय महिलाएं पारंपरिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ पर्यटन गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। स्थानीय स्वाद और संस्कृति से जुड़ते पर्यटक गांव की महिलाएं पर्यटकों के लिए पारंपरिक और स्वादिष्ट स्थानीय व्यंजन तैयार करती हैं। इसके साथ ही वे लोकनृत्य और लोक गायन से क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से भी पर्यटकों को परिचित कराती हैं। इससे पर्यटकों को ग्रामीण जीवन और संस्कृति को करीब से देखने का अवसर मिलता है, वहीं महिलाओं को आय का सम्मानजनक साधन भी प्राप्त हो रहा है। महिलाओं के हाथों में होम-स्टे की कमान गांव की महिलाएं स्वयं होम-स्टे का संचालन कर रही हैं। पर्यटकों के स्वागत से लेकर भोजन व्यवस्था, आवास और सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रबंधन तक की पूरी जिम्मेदारी वे ही निभाती हैं। इस पहल ने यह साबित कर दिया है कि सास-बहू, देवरानी-जेठानी जैसे रिश्ते केवल पारिवारिक संबंध ही नहीं, बल्कि सहयोग और विश्वास के मजबूत आधार भी बन सकते हैं। यही साझेदारी आज छिंदवाड़ा के ग्रामीण पर्यटन को नई पहचान दे रही है और महिलाओं को आत्मनिर्भर बन रही है। स्थानीय लोगों का मानना है कि होम-स्टे की यह पहल गांव की महिलाओं को सशक्त बनाने के साथ-साथ पर्यटन ग्रामों की पहचान भी तेजी से बढ़ा रही है। आने वाले समय में यहां पर्यटन गतिविधियों के और विस्तार की संभावनाएं भी दिखाई दे रही हैं।

आदिवासी विधायक को हटाना पूरे समाज का अपमान” — जीतू पटवारी का भाजपा पर बड़ा हमला

“Removing the tribal MLA is an insult to the entire society” – Jitu Patwari’s big attack on the BJP भोपाल। मध्यप्रदेश की सियासत में एक बार फिर आदिवासी मुद्दा गरमा गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भाजपा सरकार पर दलित और आदिवासी विरोधी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला है। पटवारी ने कहा कि आज मध्यप्रदेश में दलित और आदिवासियों के खिलाफ पूरी भाजपा एकजुट होकर खड़ी दिखाई दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता द्वारा चुने गए एक आदिवासी विधायक को पद से हटाने की कार्रवाई केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे आदिवासी समाज का अपमान है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता के फैसले का सम्मान होना चाहिए, लेकिन भाजपा सरकार सत्ता के अहंकार में आदिवासी समाज की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। पटवारी ने चेतावनी देते हुए कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर चुप नहीं बैठेगी और आदिवासी समाज के सम्मान की लड़ाई सड़क से लेकर सदन तक लड़ी जाएगी। पटवारी के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी टकराव और तेज होने के आसार हैं।

कर्ज के पहाड़ तले मध्यप्रदेश! मोहन सरकार फिर ले रही 5800 करोड़ का नया कर्ज, कांग्रेस ने घेरा”

Madhya Pradesh under a mountain of debt! The Mohan government is taking on another 5,800 crore rupees in new loans, and Congress is attacking it. भोपाल। वित्तीय वर्ष के अंतिम चरण में मध्यप्रदेश सरकार एक बार फिर बड़ा कर्ज लेने जा रही है। प्रदेश सरकार भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से तीन किस्तों में 5,800 करोड़ रुपये का कर्ज उठाने की तैयारी में है। इससे पहले होली से ठीक पहले सरकार 6,300 करोड़ रुपये का कर्ज ले चुकी है। लगातार लिए जा रहे कर्ज को लेकर अब सियासत भी तेज हो गई है और विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। वित्त विभाग के अधिकारियों के अनुसार 10 मार्च (मंगलवार) को सरकार तीन अलग-अलग किस्तों में यह कर्ज लेगी। इसमें 1,900 करोड़, 1,700 करोड़ और 2,200 करोड़ रुपये शामिल हैं। सरकार का कहना है कि यह राशि प्रदेश में विकास परियोजनाओं और आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए ली जा रही है। खासतौर पर इस धनराशि का उपयोग पूंजीगत कार्यों और अधोसंरचना विकास में किया जाएगा। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अगर हाल ही में लिए गए कर्ज को भी जोड़ लिया जाए तो वित्तीय वर्ष 2025-26 में मध्यप्रदेश द्वारा लिए गए कुल कर्ज की राशि लगभग 85,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी। वहीं प्रदेश पर कुल कर्ज का बोझ बढ़कर करीब 5.66 लाख करोड़ रुपये के आसपास पहुंचने का अनुमान है। इधर इस मुद्दे को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। पटवारी ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार लगातार कर्ज लेकर मध्यप्रदेश को कर्ज के दलदल में धकेल रही है और आने वाली पीढ़ियों पर आर्थिक बोझ बढ़ा रही है। हालांकि सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि लिया जा रहा कर्ज राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम के दायरे में है और इसका उपयोग केवल विकास कार्यों के लिए किया जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा के बजट सत्र के दौरान कर्ज का यह मुद्दा सियासी बहस का बड़ा केंद्र बन सकता है, जहां विपक्ष सरकार की आर्थिक नीति पर सवाल उठाएगा।

कर्ज में डूबा किसान: मप्र के हर किसान परिवार पर 74,420 रुपए का कर्ज उमंग सिंघार ने सरकार से किए सवाल

Farmers in debt: Every farmer family in Madhya Pradesh has a debt of Rs 74,420. Umang Singhar questions government भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा लगातार लिए जा रहे कर्ज और किसानों की घटती आय को लेकर कांग्रेस ने प्रदेश सरकार को घेरा है। Umang Singhar questions government ने कहा कि संसद में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार मध्यप्रदेश के हर किसान परिवार पर औसतन 74,420 का कर्ज है। उन्होंने कहा कि देश के कृषि मंत्री भी मध्यप्रदेश से आते हैं, फिर भी आज एमपी का किसान देश के सबसे अधिक कर्ज वाले राज्यों में शामिल है। उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि किसानों का कर्ज़ घटाने के लिए क्या ठोस योजना है, किसानों को फसल का सही मूल्य कब मिलेगा और किसान आत्मनिर्भर कब बनेगा। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि किसान सिर्फ वोट बैंक नहीं हैं बल्कि देश के अन्नदाता हैं, जिनकी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता से होना चाहिए। उमंग सिंघार ने कर्ज के मुद्दे पर सरकार को घेराUmang Singhar questions government मध्य प्रदेश के किसान परिवारों पर बढ़ते कर्ज़ को लेकर राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि संसद में पेश किए गए ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार मध्यप्रदेश के हर किसान परिवार पर औसतन 74,420 का कर्ज़ है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी के तमाम वादों और दावों के बावजूद किसानों की आय दोगुनी नहीं हुई बल्कि उनपर कर्ज बढ़ गया है। कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि क्या यही ह्लडबल इंजन सरकारह्व की किसान नीति है। उन्होंने पूछा कि जब देश के कृषि मंत्री भी मध्यप्रदेश से आते हैं, तब भी राज्य के किसान देश के सबसे अधिक कर्ज वाले राज्यों में क्यों शामिल हैं। मुख्यमंत्री से किए सवालनेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री से सीधे सवाल किए हैं कि उनके पास कर्ज घटाने की क्या ठोस योजना है। उन्होंने पूछा कि किसानों को उनकी फसल का सही दाम कब मिलेगा और आत्मनिर्भर किसान कब बनेगा। उमंग सिंघार ने कहा कि किसान सिर्फ वोट बैंक नहीं, बल्कि देश का अन्नदाता है और लेकिन सरकार लगातार उनकी उपेक्षा कर रही है। बता दें कि एमपी सरकार ने प्रदेश के बजट सत्र से ठीक पहले 5,000 करोड़ का नया कर्ज लिया है, जो पिछले एक हफ्ते में दूसरी बार लिया गया बड़ा कर्ज है। चालू वित्त वर्ष में अब तक कुल 36 बार कर्ज लिया जा चुका है, और इसकी कुल राशि 67,300 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।

महिला सशक्तिकरण को भूली सरकार, अब उनका रोजगार भी छीनने की तैयारी: संगीता शर्मा

The government has forgotten women’s empowerment and is now preparing to take away their jobs: Sangeeta Sharma भोपाल। प्रदेश में 1166 करोड़ रुपये के पोषण आहार कार्य को निजी हाथों में सौंपे जाने के निर्णय को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता संगीता शर्मा ने इस फैसले का कड़ा विरोध करते हुए इसे महिला सशक्तिकरण के दावों के विपरीत तथा लाखों महिलाओं की आजीविका पर सीधा प्रहार बताया है।सुश्री शर्मा ने कहा कि वर्षों से प्रदेश के विभिन्न जिलों में महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा संचालित पोषण आहार प्लांट न केवल स्थानीय महिलाओं को रोजगार प्रदान कर रहे थे, बल्कि आंगनबाड़ी केंद्रों तक पोषण सामग्री की नियमित आपूर्ति भी सुनिश्चित कर रहे थे। सीमित संसाधनों के बावजूद इन समूहों ने गुणवत्तापूर्ण कार्य कर आत्मनिर्भरता की मिसाल कायम की थी। ऐसे में इस संपूर्ण कार्य को निजी कंपनियों को सौंपना महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की भावना के प्रतिकूल है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार एक ओर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करती है, उन्हें ऋण उपलब्ध कराकर प्लांट स्थापित करवाती है, वहीं दूसरी ओर नीतिगत निर्णयों के माध्यम से उन्हीं इकाइयों को बंद करने की स्थिति पैदा कर देती है। इससे हजारों परिवारों की आय का स्रोत प्रभावित हुआ है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता ने सवाल उठाया कि जब महिला स्व-सहायता समूहों का मॉडल सफलतापूर्वक संचालित हो रहा था, तो उसे समाप्त करने की आवश्यकता क्यों पड़ी। उन्होंने आशंका जताई कि इतने बड़े वित्तीय कार्य को निजी हाथों में सौंपने से पारदर्शिता और गुणवत्ता पर भी प्रश्नचिह्न खड़े हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि माताओं और बच्चों के पोषण जैसे संवेदनशील विषय को लाभ-हानि के व्यापार में परिवर्तित नहीं किया जाना चाहिए। शर्मा ने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल मंचों और भाषणों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि महिलाओं को स्थायी रोजगार, सम्मानजनक आय और निर्णय प्रक्रिया में वास्तविक भागीदारी मिलनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार इस निर्णय पर पुनर्विचार नहीं करती है, तो कांग्रेस पार्टी महिला स्व-सहायता समूहों के साथ मिलकर व्यापक आंदोलन करेगी।

कर्ज पर चल रही मोहन सरकार सरकार? एक हफ्ते में दूसरी बार 5 हजार करोड़ का कर्ज

Is the Mohan Yadav government running on debt? This is the second time in a week that the government has incurred a debt of Rs 5,000 crore. MP Government : विधानसभा का बजट सत्र शुरू होने और अनुपूरक बजट के पहले मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने बजट सत्र के पहले बाजार से 5 हजार करोड़ का नया कर्ज लिया है। पिछले एक सप्ताह में सरकार ने दूसरी बार कर्ज लिया है। इससे पहले 4 फरवरी को ही सरकार ने 5300 करोड़ का कर्ज लिया था। सरकार रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के माध्यम से तीन किस्तों में ये कर्ज ले रही है। इस वित्तीय वर्ष में सरकार द्वारा अब तक 67,300 करोड़ रुपए कर्ज ले चुकी है। उल्लेखनीय है कि, बजट सत्र 16 फरवरी से शुरु हो रहा है और 18 एमपी का बजट पेश होगा। बता दें कि, एक हफ्ते में लिया गया ये दूसरा कर्ज है, जो सरकार ने तीन किस्तों में लिया है। इसका भुगतान सरकार को आज यानी बुधवार को होने वाला है। इसके बाद चालू वित्त वर्ष में लिए गए कुल कर्ज की संख्या 36 हो गई है और कर्ज का आंकड़ा 67300 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। अलग-अलग किस्तों में लिया गया कर्जजनवरी 2026 तक सरकार ने 30 कर्ज लिए थे, जो फरवरी के पहले 10 दिनों में लिए गए कुल 6 कर्ज मिलाकर 36 तक पहुंच गया है। 3 फरवरी को 3 नए कर्ज लिए जाने के बाद आंकड़ा 33 तक पहुंचा था और आज फिर तीन अलग-अलग किस्तों में कर्ज लिया गया है। इसलिए लिया गया कर्ज10 फरवरी को लिए गए दो-दो हजार करोड़ के दोनों ही कर्ज 21 साल और 16 साल की अवधि के हैं, जबकि 1000 करोड़ रुपए का तीसरा कर्ज 8 साल की अवधि के लिए लिया गया है, जिसका भुगतान छमाही ब्याज के रूप में किया जाएगा। यहां गौरतलब है कि, मंगलवार को मोहन सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तावित बजट का प्रजेंटेशन कैबिनेट के सामने किया है, जिसे 18 फरवरी को विधानसभा में वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा पेश करेंगे। एग्रीकल्चर स्कीम, सिंचाई और पॉवर प्रोजेक्ट तथा कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स के स्थायी निर्माण के नाम पर यह कर्ज लिए गए हैं। 2025-26 में महीने दर महीने ऐसे लिया कर्ज

फिर 5200 करोड़ रूपए कर्ज ले रही मोहन सरकार, सिर्फ एक वित्तीय वर्ष में ले चुकी 62,300 करोड़

Mohan Bhagwat government is taking another ₹5,200 crore loan, having already borrowed ₹62,300 crore in just one financial year. Mohan Government : मोहन सरकार एक बार फिर 5200 करोड़ का कर्ज ले रही है। साल 2026 में सरकार दूसरी बार ऋण लेने जा रही है। जबकि चालू वित्तीय वर्ष में ये कर्ज 57,100 करोड़ लिया जा चुका हैं। इस तरह नया कर्ज मिलाकर इसी चालू वर्ष में कुल 62,300 करोड़ रुपए का हो जाएगा। Mohan Government :मध्य प्रदेश की मोहन सरकार एक बार फिर 5200 करोड़ का कर्ज लेने जा रही है। साल 2026 में सरकार दूसरी बार ऋण लेने जा रही है। जबकि चालू वित्तीय वर्ष में ये कर्ज 57,100 करोड़ लिया जा चुका हैं। इस तरह नया कर्ज लेने के बाद अब ये इसी चालू वर्ष में कुल 62,300 करोड़ रुपए का हो जाएगा। बता दें कि, राज्य सरकार साल 2026 में ही दूसरी बार कर्ज ले रही है। इस बार 7 फरवरी को 5200 करोड़ की राशि मिलेगी, जिसकी पहली किस्त 1200 करोड़ रुपए 7 साल के लिए ब्याज समेत भुगतान की तारीख 4 फरवरी 2033 तारीख की है। 2000 करोड़ का कर्ज 17 साल के लिए लिया जा रहा है जो 4 फरवरी 2043 तक के लिए है। जबकि, तीसरी किस्त 2000 करोड़ रुपए 22 साल की अवधि में ब्याज के साथ चुकता किया जाएगा। सिर्फ एक चालू वर्ष में ही 62,300 करोड़ कर्जआपको बता दें कि, मध्य प्रदेश सरकार ने चालू वित्त वर्ष में 57,100 करोड़ का कर्ज ले चुकी है। 5200 करोड़ का कर्ज लेने के बाद यह आंकड़ा 62,300 करोड़ रुपए पहुंच जाएगा। वित्तीय वर्ष 2025-26 में कब-कब लिया गया कर्ज

गूगल करेगा म.प्र. में आईटी, आईटीईएस और डेटा सेंटर में निवेश

Google to invest in IT, ITES and data centres in Madhya Pradesh गूगल के एशिया पैसिफिक क्षेत्र के प्रेसिडेंट संजय गुप्ता के साथ दावोस में मंगलवार को मध्यप्रदेश के अधिकारियों ने बैठक कर राज्य में आईटी, आईटीईएस सेक्टर और मौजूदा प्रस्तावित डेटा सेंटर परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की। गुप्ता ने मध्यप्रदेश में आईटी, आईटीईएस और डेटा सेंटर में निवेश की रूचि दिखाई। बैठक में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला सहित अधिकारी उपस्थित रहे। गूगल की ओर से राज्य में जेमिनी एआई (Gemini AI) के माध्यम से कृषि एवं शिक्षा क्षेत्रों में नवाचार और डिजिटल समाधान लागू करने की संभावनाओं पर भी विचार साझा किए गए। बैठक में राज्य शासन द्वारा आईटी एवं डेटा सेंटर परियोजनाओं के लिए पर्याप्त एवं सतत विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु हरित ऊर्जा आधारित नीति तैयार करने की योजना से अवगत कराया गया। साथ ही, गूगल जैसी वैश्विक कंपनियों की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने की मध्यप्रदेश की क्षमता, अनुकूल नीतिगत ढांचा और सहयोगी दृष्टिकोण को भी रेखांकित किया गया। गूगल के एशिया पैसिफिक क्षेत्र के प्रेसिडेंट श्री संजय गुप्ता ने आईटी अवसंरचना, डिजिटल नवाचार और कौशल विकास के माध्यम से मध्यप्रदेश को एक उभरते तकनीकी केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में सहयोग दिए जाने पर सहमति व्यक्त की।

भोपाल में एक्यमानस मित्र द्वारा डिमेंशिया जागरूकता की महत्वपूर्ण पहल

A significant dementia awareness initiative by Akymanas Mitra in Bhopal भोपाल ! एक्यमानस मित्र द्वारा आयोजित डिमेंशिया अवेयरनेस गेट-टुगेदर में 30–35 लोगों की भागीदारी देखने को मिली, जहाँ डिमेंशिया जैसे संवेदनशील विषय पर खुलकर संवाद हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य इस स्थिति को बेहतर ढंग से समझना और समाज में इसकी जागरूकता बढ़ाना था, जहाँ अब भी जानकारी और संरचित सहायता की कमी महसूस की जाती है।सत्र के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि डिमेंशिया केवल याददाश्त से जुड़ी समस्या नहीं है, बल्कि यह मस्तिष्क से संबंधित एक जटिल स्थिति है, जो व्यक्ति के व्यवहार, भावनाओं और रोज़मर्रा की गतिविधियों को प्रभावित करती है। उम्र बढ़ने के साथ सही समझ, लाइफस्टाइल में बदलाव और भावनात्मक सहयोग की अहम भूमिका पर विशेष जोर दिया गया।क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट इशिता सचान ने डिमेंशिया के मानसिक और संज्ञानात्मक पहलुओं को सरल भाषा में समझाया, जिससे प्रतिभागियों को इसके प्रभाव और संकेतों को पहचानने में स्पष्टता मिली। एक्यमानस मित्र के संस्थापक दीपक भंडारी ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस तरह अपनी माता के डिमेंशिया से जूझने के अनुभव ने उन्हें इस पहल की शुरुआत के लिए प्रेरित किया। उनकी कहानी ने कार्यक्रम को एक मानवीय और भावनात्मक जुड़ाव प्रदान किया।कार्यक्रम में आयोजित एक इंटरएक्टिव मेमोरी चैलेंज के माध्यम से प्रतिभागियों को यह अनुभव कराया गया कि स्मृति कैसे कार्य करती है और डिमेंशिया में उसमें किस प्रकार के बदलाव आते हैं।यह आयोजन सफल रहा क्योंकि इसमें डिमेंशिया पर खुली चर्चा हुई—एक ऐसा विषय जिस पर अक्सर बात नहीं की जाती। इस तरह की पहलें वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल और सहयोग के लिए एक मजबूत आधार तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।एक्यमानस मित्र, जो एक समर्पित मेमोरी केयर और डे-केयर सेंटर है, आगे भी डिमेंशिया जागरूकता अभियानों और संज्ञानात्मक आकलन (assessment) कार्यक्रमों का आयोजन करेगा, जिससे लोग अपनी मानसिक स्थिति को समझ सकें और समय रहते सही मार्गदर्शन प्राप्त कर सकें।

फिर चर्चा में यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री, CM मोहन यादव ने किया दौरा

Union Carbide factory in the news again, CM Mohan Yadav visited सीएम मोहन यादव शनिवार को अचानक यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री पहुंच गए। ठीक उसी स्थान पर जहां दुनिया की भीषण त्रासदी लोगों को झेलना पड़ी थी। सीएम ने उस फैक्ट्री का निरीक्षण किया। इस मौके पर गैस राहत विभाग से जुड़े अधिकारी भी मौजूद थे, सीएम ने उनसे काफी देर तक चर्चा की। यह फैक्ट्री 85 एकड़ जमीन पर बनी है। इससे एक दिन पहले शुक्रवार को भोपाल जिला प्रशासन, गैस राहत विभाग के अधिकारी इस फैक्ट्री और जमीन से जुड़ी फाइलों को देख रहे थे। पिछले साल पीथमपुर पहुंचा था 337 टन कचरायूनियन कार्बाइड में 40 सालों से पड़ा कचरा पिछले साल जनवरी में पीथमपुर भेजा गया था, जहां उस जहरीले कचरे के नष्ट कर दिया गया। 12 कंटेनरों में भरकर इस कचरे को पीथमपुर ले जाया गया था। इस कचरे को पीथमपुर में नष्ट करने का जमकर विरोध भी देखने को मिला था, अंततः कचरा नष्ट कर दिया गया और उसकी राख तक को दफन कर दिया गया। गौरतलब है कि भोपाल गैस त्रासदी दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदी में से एक थी। 41 साल पहले 2 और 3 दिसंबर 1984 की रात को यह भीषण घटना हुई थी। जेपी नगर क्षेत्र में यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के टैंक नंबर 610 में से मिथाइल आइसोसाइनेट गैस लीक हुई थी। आज भी उस रात की तस्वीरें रूह कंपा देती है। इस घटना के चश्मदीद और उस दौर के पत्रकार बताते हैं कि हर तरफ लाशें ही लाशें बिछ गई थी। उन्हें ढोने के लिए गाड़ियां कम पड़ गई थी, लाशों को जलाने के लिए लकड़ियां कम पड़ गई थी। हाईलाइट्स CM डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को अचानक यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री पहुंचकर स्थल का निरीक्षण किया और गैस राहत विभाग के अधिकारियों से विस्तृत चर्चा की।यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री 85 एकड़ जमीन पर फैली हुई है, जिसकी फाइलों की समीक्षा एक दिन पहले ही जिला प्रशासन और गैस राहत विभाग ने की थी।40 सालों से फैक्ट्री में पड़ा 337 टन जहरीला कचरा जनवरी 2025 में पीथमपुर भेजकर नष्ट किया गया, जिसे 12 कंटेनरों में भरकर ले जाया गया था।पीथमपुर में जहरीले कचरे के निपटान का कड़ा विरोध हुआ, लेकिन अंततः कचरा और उसकी राख को सुरक्षित तरीके से दफन कर दिया गया। भोपाल गैस त्रासदी दुनिया की सबसे भीषण औद्योगिक आपदाओं में से एक है, जिसमें 2-3 दिसंबर 1984 की रात मिथाइल आइसोसाइनेट गैस लीक होने से हजारों लोगों की मौत हुई थी।

भोपाल की अरेरा कॉलोनी में फर्जी पुलिस बनकर किडनैपिंग और लूट की वारदात

Kidnapping and robbery by posing as police in Bhopal’s Arera Colony भोपाल। भोपाल के पाश इलाके अरेरा कॉलोनी में पुलिस बनकर आए बदमाशों ने लूट व अपहरण की सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया। हबीबगंज थाना क्षेत्र के ई-7 सेक्टर स्थित मेघना अपार्टमेंट में 11 जनवरी की शाम करीब साढ़े सात बजे 5-6 बदमाश फ्लैट में घुसे व खुद को पुलिसकर्मी बताया। उन्होंने फ्लैट में मौजूद राहुल गुप्ता, अनिमेष वर्मा, अनुराग और नरेंद्र परमार को एनडीपीएस केस में फंसाने की धमकी दी और मारपीट की। डर के मारे युवकों ने विरोध नहीं किया। बदमाशों ने उनसे 79,800 रुपये नकद और तीन कीमती घड़ियां लूट लीं। फिर बदमाशों ने चारों को उनकी ही कार में जबरन बैठाया और मिसरोद बाइपास टोल रोड की ओर ले गए। वहां और रुपये मांगे। राहुल ने परिचित आनंद रघुवंशी को फोन कर मदद मांगी। आनंद होशंगाबाद से एक लाख रुपये लेकर भोपाल पहुंचे। बदमाशों ने उन्हें पांच नंबर पेट्रोल पंप के पास बुलाया। वहां आनंद ने बदमाशों से फोन छीन लिया और शोर मचाया कि वह असली पुलिस के साथ है। पकड़े जाने के डर से बदमाश पीड़ितों के हाथ से मोबाइल छीनकर भाग निकले। घबराए युवक हबीबगंज थाने पहुंचे, लेकिन किरकिरी से बचने पुलिस ने मामला चार दिन तक दबाए रखा। बाद में पहचान होने पर चार बदमाशों को गिरफ्तार किया गया।

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