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प्रदेश के 23 जिलों में जारी है 100 दिवसीय नि-क्षय शिविर अभियान – मुख्यमंत्री डॉ. यादव

टी.बी. लाइलाज बीमारी नहीं – मुख्यमंत्री डॉ. यादव कोई भी प्रभावित व्यक्ति, जांच और इलाज से वंचित न रहे – मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश के 23 जिलों में जारी है 100 दिवसीय नि-क्षय शिविर अभियान – मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री मोदी का देश को टी.बी. मुक्त करने का संकल्प सबकी सहभागिता से ही होगा साकार भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2018 में देश को टी.बी. (क्षय रोग) से मुक्त कराने का संकल्प लिया था। लोगों की जिंदगी बचाने के प्रधानमंत्री मोदी के इस अभियान में सहभागिता कर हम सब उनके साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रहे हैं। देश को टी.बी. मुक्त करने के लिए, देश के 347 जिलों में 100 दिवसीय नि-क्षय शिविर अभियान चलाया जा रहा है। इनमें मध्यप्रदेश के 23 जिले अलीराजपुर, अनूपपुर, बैतूल, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, दतिया, डिंडोरी, जबलपुर, कटनी, खंडवा, मंडला, मंदसौर, नरसिंहपुर, नीमच, रतलाम, सीहोर, सिवनी, श्योपुर, सीधी, सिंगरौली, उज्जैन और विदिशा शामिल हैं। टी.बी. से मुक्ति के अभियान में प्रदेश का प्रत्येक व्यक्ति एक कार्यकर्ता है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मुझे पूर्ण विश्वास है कि सभी की सक्रिय सहभागिता से कोई भी प्रभावित व्यक्ति टी.बी. की जांच और इलाज से वंचित नहीं रहेगा। टी.बी लाइलाज बीमारी नहीं है, टी.बी. का इलाज होता है, टी.बी. से डरने की जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सब सक्रियता के साथ इस अभियान में भागीदारी करें। हमारे आसपास कोई भी टी.बी. की बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति हो तो उसे इस अभियान का हिस्सा अवश्य बनाएं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में लोगों का जीवन बचाने के लिए आरंभ, इस अभियान में प्रदेश का प्रत्येक व्यक्ति एक कार्यकर्ता है। हम सब मिलकर टी.बी. से प्रभावित व्यक्तियों को इस रोग से मुक्त कराने का प्रयास करें। सबके प्रयासों से देश को टी.बी. मुक्त कर, प्रधानमंत्री मोदी के संकल्प को साकार करने में निश्चित ही सफलता मिलेगी।  

होटल मेपल और परिक्रमा रेस्तरां,अरविंद अग्रवाल और आयुष अग्रवाल की मेहनत की गूंज

भोपाल यह कहानी है अरविंद अग्रवाल साहब और उनके बेटे आयुष अग्रवाल की, जिन्होंने अपनी दूरदृष्टि, मेहनत और जुनून से मध्य प्रदेश के आतिथ्य और पर्यटन उद्योग को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। पिता-पुत्र की इस जोड़ी ने न केवल नर्मदापुरम रोड पर स्थित होटल मेपल को खड़ा किया, बल्कि इसके साथ “परिक्रमा”, मध्य प्रदेश का पहला घूमने वाला रेस्तरां भी बनाया, जो आज हर किसी के आकर्षण का केंद्र बन चुका है।  शुरुआत: पिता-पुत्र की अनोखी साझेदारी अरविंद अग्रवाल साहब हमेशा से एक दूरदर्शी इंसान रहे हैं। उनका सपना था कि वे मध्य प्रदेश में ऐसा कुछ बनाएं, जो सिर्फ एक व्यवसाय नहीं, बल्कि एक पहचान बन जाए। दूसरी ओर, आयुष अग्रवाल, जो युवा और ऊर्जा से भरपूर थे, अपने पिता के सपनों को नई सोच और तकनीक के साथ साकार करना चाहते थे। दोनों ने मिलकर एक ऐसी जगह बनाने का सपना देखा, जो न केवल पर्यटकों के लिए आकर्षण हो, बल्कि लोगों को एक यादगार अनुभव भी प्रदान करे। इस सपने को साकार करने की दिशा में उन्होंने होटल मेपल और परिक्रमा रेस्तरां की योजना बनाई।  होटल मेपल: नर्मदापुरम रोड की शान होटल मेपल, नर्मदापुरम रोड पर स्थित, सिर्फ एक होटल नहीं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और आधुनिकता का मेल है। अरविंद साहब ने होटल के हर पहलू पर ध्यान दिया, जिससे यह स्थान अपने मेहमानों के लिए घर जैसा आरामदायक और अनोखा अनुभव बन सके।  होटल मेपल की खासियतें: 1. आधुनिक डिज़ाइन: होटल को इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि यह प्राकृतिक सुंदरता के बीच एक आधुनिक अनुभव प्रदान करता है। 2. सांस्कृतिक झलक: हर कमरे और सजावट में मध्य प्रदेश की लोक कला और परंपराओं की झलक दिखाई देती है। 3. उत्तम सेवा: यहां हर मेहमान का स्वागत एक विशेष अनुभव के साथ किया जाता है, जिससे वे खुद को खास महसूस करते हैं। 4. स्थानीय स्वाद: होटल के रेस्तरां में परोसा जाने वाला भोजन न केवल ताजा और स्वादिष्ट है, बल्कि यह स्थानीय व्यंजनों को भी बढ़ावा देता है।   परिक्रमा: मध्य प्रदेश का पहला घूमने वाला रेस्तरां होटल मेपल की सफलता के बाद, अरविंद और आयुष ने “परिक्रमा रेस्तरां” का सपना देखा। यह रेस्तरां होटल मेपल का सबसे बड़ा आकर्षण बन गया। परिक्रमा, जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, एक ऐसा रेस्तरां है, जो लगातार घूमता रहता है। परिक्रमा रेस्तरां की अनोखी बातें: 1. 360 डिग्री घूमने वाला डिज़ाइन: यह रेस्तरां धीरे-धीरे घूमता है, जिससे मेहमान न केवल स्वादिष्ट भोजन का आनंद लेते हैं, बल्कि 360 डिग्री का मनोरम दृश्य भी देखते हैं। चाहे वह सूरज की किरणों का खेल हो या रात में चमकते सितारे, परिक्रमा हर पल को खास बना देता है। 2. तकनीकी चमत्कार: परिक्रमा को उच्च-स्तरीय तकनीक का उपयोग करके डिज़ाइन किया गया है, जो इसे सुरक्षित और सहज रूप से घूमने में सक्षम बनाती है। 3. वातावरण का अद्भुत अनुभव: रेस्तरां के अंदर बैठते ही मेहमानों को ऐसा महसूस होता है, जैसे वे प्रकृति और आधुनिकता के संगम का हिस्सा बन गए हों। खिड़की से दिखने वाले दृश्य हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। 4. स्वाद का जादू: यहां परोसे जाने वाले व्यंजन न केवल स्वादिष्ट हैं, बल्कि वे स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय स्वादों का अद्भुत मिश्रण हैं।    मेहनत रंग लाई अरविंद साहब के अनुभव और आयुष की नई सोच ने परिक्रमा को हकीकत में बदल दिया। इस रेस्तरां ने न केवल स्थानीय लोगों को बल्कि दूसरे शहरों और राज्यों से आने वाले पर्यटकों को भी आकर्षित किया। यह मध्य प्रदेश का पहला और अनोखा घूमने वाला रेस्तरां बन गया, जो हर किसी के दिल को छू लेता है।  पिता-पुत्र की साझेदारी का जादू अरविंद अग्रवाल साहब और आयुष अग्रवाल की यह साझेदारी केवल व्यवसाय तक सीमित नहीं है। यह साझेदारी उनके मजबूत रिश्ते, आपसी सम्मान और सहयोग का प्रमाण है। अरविंद साहब ने अपने बेटे को सपने देखने और उन्हें साकार करने की प्रेरणा दी, जबकि आयुष ने अपने पिता के अनुभव का सही दिशा में उपयोग कर आधुनिक तकनीक और सोच को जोड़ा।  आज का होटल मेपल और परिक्रमा आज होटल मेपल और परिक्रमा मध्य प्रदेश के पर्यटन मानचित्र पर एक प्रमुख स्थान रखते हैं। यह स्थान न केवल अपने मेहमानों को शानदार आतिथ्य प्रदान करता है, बल्कि यह राज्य की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को भी बढ़ावा देता है।  निष्कर्ष यह कहानी हमें सिखाती है कि जब अनुभव और नई सोच का मेल होता है, तो असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। अरविंद अग्रवाल और आयुष अग्रवाल की मेहनत, दूरदृष्टि और समर्पण ने न केवल एक होटल और रेस्तरां बनाया, बल्कि मध्य प्रदेश को एक नई पहचान दी। “होटल मेपल और परिक्रमा” आज केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि उन सपनों का प्रतीक हैं, जिन्हें जुनून और मेहनत से पूरा किया गया। यह पिता-पुत्र की जोड़ी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा है कि जब सपने को हकीकत में बदलने की ठान लो, तो हर मुश्किल आसान हो जाती है।

उषा ठाकुर ने प्रशासन ने मांग कि जितने भी बांग्लादेशी इंदौर में काम करने आए है इनका भी परिक्षण किया जाना चाहिए

 इंदौर बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमलों के विरोध में पूरे प्रदेश में विरोध प्रदर्शन जारी है. इसी बीच इंदौर में काम कर रहे बांग्लादेशियों के खिलाफ बीजेपी विधायकों ने मोर्चा खोल दिया है. पूर्व मंत्री उषा ठाकुर ने प्रशासन से मांग की है कि सराफा बाजार और सदर बाजार में रहकर काम कर रहे बांग्लादेशियों की जांच कर उन्हें तत्काल यहां से विदा किया जाए. वहीं विधायक रमेश मेंदोला भी विरोध कर रहे हैं.   कुछ दिनों पहले कांग्रेस ने भी इंदौर में रह रहे बांग्लादेशियों की जांच की मांग की थी. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जो भी यहां अनैतिक तरीके से रह रहा है उसकी जांच कर कानूनी कार्रवाई की जाए.   उषा ठाकुर ने की मांग महू विधायक उषा ठाकुर ने कहा कि, हम जिला प्रशासन को पत्र लिखकर यह मांग कर रहे है कि जितने भी बांग्लादेशी कारोबारी और मजदूर यहां काम करने आए है, इनका भी परिक्षण किया जाना चाहिए. इनका आधार कार्ड और समग्र आईडी चेक करना चाहिए. वहीं जितने भी बांग्लादेशी है उन सबको यहां से तत्काल विदा करना चाहिए.   मेन्दोला का नोबल पुरस्कार समिति से मांग इंदौर 2 के विधायक रमेंश मेंदोला ने बांग्लादेश में निर्दोष हिन्दुओं के नरसंहार के विरोध में नोबल पुरस्कार समिति से मांग की है, उन्होंने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख युनुस मोहम्मद से नोबल विश्व शान्ति पुरस्कार वापस लेने की मांग की है. विधायक रमेश मेन्दोला ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा की  बांग्लादेश में हिन्दुओं के नरसंहार और उत्पीड़न के विरुद्ध इंदौर से उठी आवाज अब वैश्विक स्वर ले रही है. मैं नोर्वे स्थित नोबल पुरस्कार समिति से बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख युनुस मोहम्मद से नोबल विश्व शान्ति पुरस्कार वापस लेने की मांग करता हूं. इंदौर 2 के विधायक रमेंश मेंदोला ने बांग्लादेश में निर्दोष हिन्दुओं के नरसंहार के विरोध में नोबल पुरस्कार समिति से मांग की है कि, बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख युनुस मोहम्मद से नोबल विश्व शान्ति पुरस्कार वापस लिया जाए। मेंदोला ने एक्स पर भी पोस्ट करते हुए कहा है कि बांग्लादेश में हिन्दुओं के नरसंहार और उत्पीड़न के विरुद्ध इंदौर से उठी आवाज अब वैश्विक स्वर ले रही है। मैं नोर्वे स्थित नोबल पुरस्कार समिति से बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख युनुस मोहम्मद से नोबल विश्व शान्ति पुरस्कार वापस लेने की मांग करता हूं। बता दें कि युनुस मोहम्मद को नोबल प्राइज कमेटी ने साल 2006 में नोबल विश्व शान्ति पुरस्कार से सम्मानित किया था। नोबल प्राइज कमेटी से मांग करते हुए मेंदोला ने कहा कि- पुरस्कार की नीति की समीक्षा करनी चाहिए। जो व्यक्ति अपने देश का मुखिया रहते हुए हिंदू उत्पीड़न, अवैध धर्मांतरण और नरसंहार का जिम्मेदार है। वह नोबल विश्व शान्ति पुरस्कार विजेता कहलाने के योग्य नहीं हो सकता। बंगाली कारीगर एसोसिएशन बोला- अगर कोई बांग्लादेशी तो हमें कैसे पता चलेगा बंगाली कारीगर एसोसिएशन के अध्यक्ष सुशांत सामवंत ने कहा कि, सराफा बाजार में काम करने वाले कारीगर पश्चिम बंगाल से आए हैं, जो भारत का हिस्सा है। उन्होंने बताया कि इंदौर सराफा बाजार में लगभग 15 से 20 हजार बंगाली कारीगर काम कर रहे है। वहीं उनकी एसोसिएशन में 10,000 से अधिक कारीगर रजिस्टर्ड हैं। यदि कोई बांग्लादेशी नागरिक बंगाली बनकर काम कर रहा है, तो इसकी जानकारी पुलिस को ही जांच कर पता लगानी चाहिए। बता दें कि कल इंदौर में हुए बांग्लादेश के खिलाफ प्रदर्शन में इंदौर बंगाली कारीगर एसोसिशन ने भी हिस्सा लिया था।   बांग्लादेशी कारीगरों की आशंका इंदौर के सराफा बाजार में 15,000 से अधिक बंगाली कारीगर सोने के जेवर बनाने का काम करते हैं. यहां काम करने वाले कारीगर सराफा बाजार के आसपास ही किराए के मकानों में रहते हैं. सराफा में काम करने वाले कारीगरों का एक एसोशिएसन भी है, जानकारी के अनुसार  इन कारीगरों में कुछ बांग्लादेश से आए लोग भी शामिल हो सकते हैं. लेकिन उन कारीगरों के सही आंकड़े का कोई पुख्ता रिकॉर्ड नहीं है  

जिले में राजस्व प्रकरणों का किया जा रहा तेजी से निराकरण

शहडोल कलेक्टर डॉ. केदार सिंह के मागर्दशन मे जिले में राजस्व महा अभियान 3.0 के अंतर्गत राजस्व  प्रकरणों का तेजी से निराकरण किया जा रहा है। राजस्व विभाग के मैदानी अधिकारी एवं कर्मचारियों द्वारा खेत खलिहानों में पहुंचकर राजस्व प्रकरणों का तेजी से निराकरण किया जा रहा है। इसी कड़ी में आज तहसील ब्यौहारी के ग्राम  बेडरा में राजस्व महा अभियान 3.0 के तहत नक्शा बटांकन  का कार्य किया गया।

कलेक्टर ने की निर्मला सीनियर सेकेंडरी स्कूल की वार्षिक खेल उत्सव में सहभागिता

मंडला कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने निर्मला सीनियर सेकेंडरी स्कूल मण्डला के वार्षिक खेल उत्सव में सहभागिता की। कलेक्टर ने अपने संबोधन में कहा कि जीवन में खेलों का अत्यधिक महत्व होता है। खेल हमें अनुशासन के साथ-साथ एक टीम के रूप में समन्वय करने की शिक्षा भी देते हैं। अपने काम के प्रति ईमानदार रहें, अपने लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहें, सपने देखें एवं उनको पूरा करने के लिए हमेशा प्रयास करें। उन्होंने पालकों का आव्हान किया कि बच्चों को पर्याप्त अवसर प्रदान करें तथा उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए समुचित सहयोग एवं मार्गदर्शन प्रदान करें। इस अवसर पर सीईओ जिला पंचायत श्रेयांश कूमट ने कहा कि खेल से व्यक्तित्व का विकास होता है। खेलों से हमें नेतृत्व तथा प्रबंधन की क्षमता में वृद्धि होती है। उन्होंने बच्चों का आव्हान किया कि वे अपने पालकों और गुरूजनों का सम्मान करें तथा उनकी मेहनत और समर्पण को सार्थक करें। जीवन में सफलता हासिल करने के लिए धैर्य, आत्मविश्वास और कठिन मेहनत आवश्यक है। इससे पूर्व कलेक्टर सोमेश मिश्रा एवं सीईओ जिला पंचायत श्रेयांश कूमट द्वारा फायरगन जलाकर कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत की गई। विद्यार्थियों द्वारा सदनवार परेड का प्रदर्शन के पश्चात सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम में बैंड प्रदर्शन, रिले दौड़, जलेबी दौड़ और सांस्कृति कार्यक्रम का आयोजन किया गया तथा विजेताओं को कलेक्टर सोमेश मिश्रा एवं सीईओ जिला पंचायत श्रेयांश कूमट द्वारा पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम में प्राचार्य, उप प्राचार्य सहित स्कूल स्टॉफ उपस्थित थे।

‘भोपाल यूनियन कार्बाइड का जहरीला कचरा 4 सप्ताह में हटाया जाए ‘, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का बड़ा आदेश

भोपाल / जबलपुर  मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत व न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने राजधानी भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड परिसर का जहरीला कचरा एक माह में हटाने के निर्देश दिए हैं। इस सिलसिले में एक सप्ताह में संयुक्त बैठक कर सभी औपचारिकताएं पूर्ण करने के लिए कहा गया है। यह चेतावनी भी दी है कि यदि कोई विभाग आदेश का पालन करने में विफल रहता है तो उसके प्रमुख सचिव के विरुद्ध अवमानना कार्रवाई की जाएगी। ऐसा नहीं करने पर प्रदेश के मुख्य सचिव और भोपाल गैस त्रासदी राहत और पुनर्वास विभाग के प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण पेश करना होगा. युगलपीठ ने याचिका पर अगली सुनवाई 6 जनवरी को निर्धारित की है. हाईकोर्ट ने सरकार को लगाई फटकार युगलपीठ ने सभी पक्षों को सुनने के बाद सरकार को फटकार लगाते हुए अपने आदेश में कहा कि “राज्य सरकार की तरफ से इस साल 20 मार्च को पेश की गई योजना के अनुसार न्यूनतम अवधि 185 दिन और अधिकतम 377 दिनों में जहरीले कचरे को हटाने की प्रक्रिया पूरी कर ली जायेगी. हम यह समझने में विफल हैं कि सर्वोच्च तथा इस न्यायालय द्वारा समय-समय पर जारी निर्देश के अनुसार आज तक जहरीले कचरे को हटाने कोई कदम क्यों नहीं उठाया गया है. अधिकारी निष्क्रियता में हैं और आगे की कार्रवाई करने से पहले एक और त्रासदी आकार ले सकती है.” ’40 साल बाद भी दुखद स्थिति’ याचिका की सुनवाई करते हुए युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि “पूर्व में पारित आदेश का अवलोकन करने पर स्पष्ट होता है कि याचिका साल 2004 में दायर की गई थी और 20 वर्ष बीत गए हैं. प्रतिवादी अभी तक पहले चरण में हैं. वास्तव में यह दुखद स्थिति है, क्योंकि प्लांट साइट से विषाक्त अपशिष्ट को हटाना, एमआईसी और प्लांट को बंद करना और आसपास की मिट्टी और भूजल में फैले दूषित पदार्थों को हटाना भोपाल शहर की आम जनता की सुरक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है. भोपाल में गैस आपदा आज से 40 साल पहले हुई थी. ‘वैधानिक दायित्वों और कर्तव्यों का करें पालन’ हाईकोर्ट जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने प्रमुख सचिव, भोपाल गैस त्रासदी राहत और पुनर्वास विभाग को आदेश दिया है कि “देश के पर्यावरण कानूनों के तहत अपने वैधानिक दायित्वों और कर्तव्यों का पालन करें. यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री साइट की तत्काल सफाई और संबंधित क्षेत्र से पूरा जहरीला कचरे को हटाने और सुरक्षित विनष्टीकरण करने उपचारात्मक उपाय करें. इसकी लागत राज्य सरकार और केंद्र सरकार द्वारा वहन करेंगे.” ‘1 सप्ताह में सभी औपचारिकताएं पूरा करें’ हाईकोर्ट युगलपीठ ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि “जहरीला कचरा हटाये जाने के लिए सरकार, संबंधित अधिकारी और प्रतिवादी संयुक्त बैठक कर 1 सप्ताह में सभी औपचारिकताएं पूरा करें. कोई विभाग आदेश का पालन करने में विफल रहता है, तो संबंधित प्रमुख सचिव पर अवमानना की कार्यवाही की जायेगी.कोई अधिकारी आदेशों के पालन के संबंध में कोई बाधा या रुकावट पैदा करता है, तो इसकी जानकारी मुख्य सचिव व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर न्यायालय को प्रदान करेंगे. जिससे अगली सुनवाई पर न्यायालय उस अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्यवाही कर सकें.” 6 जनवरी को होगी अगली सुनवाई हाईकोर्ट युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि “जहरीले कचरे के परिवहन और निपटान के दौरान सभी सुरक्षा उपाय किए जाएंगे. प्रतिदिन की प्रगति के साथ तैयार की गयी रिपोर्ट अगली सुनवाई के दौरान प्रमुख सचिव, भोपाल गैस त्रासदी राहत और पुनर्वास विभाग हलफनामे के साथ पेश की जाये.” युगलपीठ ने याचिका पर अगली सुनवाई 6 जनवरी को निर्धारित की है. याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ उपस्थित हुए. पीथमपुर में होना है जहरीले कचरे का विनष्टीकरण याचिका की सुनवाई के दौरान पूर्व में केन्द्र सरकार की तरफ से युगलपीठ को बताया कि वह अपने हिस्से की राशि 126 करोड़ रुपये पहले ही राज्य सरकार को दे चुके हैं. राज्य सरकार ने यह राशि खर्च नहीं की है. राज्य सरकार ने राशि मिलने की जानकारी देते हुए बताया गया कि ठेकेदार को 20 प्रतिशत राशि का भुगतान किया जा चुका है लेकिन संबंधित ठेकेदार ने कोई कार्य प्रारंभ नहीं किया है. सरकार 3 सप्ताह के भीतर प्रक्रिया प्रारंभ कर देगी. म.प्र. प्रदूषण बोर्ड धार के क्षेत्रीय अधिकारी ने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर बताया था कि जहरीले कचरे का विनष्टीकरण पीथमपुर में किया जाना है, जिसके लिए हम तैयार हैं. उनके पास 12 ट्रक उपलब्ध हैं, जिसका उपयोग राज्य सरकार जहरीले कचरे के परिवहन के लिए कर सकती है. 2004 में दायर की गई थी याचिका बता दें कि आलोक प्रभाव सिंह ने साल 2004 में यूनियन कार्बाइड के कचरे को हटाने को लेकर याचिका दायर की थी. याचिका में कहा गया था कि भोपाल गैस त्रासदी के दौरान यूनियन कार्बाइड कंपनी से हुए जहरीले गैस रिसाव में लगभग 4 हजार से अधिक लोगों की मौत हो गई थी. भोपाल गैस त्रासदी के बाद यूनियन कार्बाइड फैक्टरी में करीब 350 मीट्रिक टन जहरीले कचरा पड़ा है. याचिका में जहरीले कचरे के विनिष्टीकरण की मांग की गई थी. याचिकाकर्ता की मृत्यु के बाद हाईकोर्ट मामले की सुनवाई स्वतः संज्ञान लेकर कर रहा है.

हसदेव क्षेत्र के राजनगर उपक्षेत्र स्थित झिरिया अंडरग्राउंड खदान में दो मजदूरों की मौत

राजनगर मध्य प्रदेश अनुपपुर जिले के झिरिया अंडरग्राउंड खदान में ब्लास्टिंग के बाद ड्रेसिंग के दौरान दुर्घटना हो गई। जिससे दो मजदूरों की मौत हो गईड्रेसिंग काम के ब्लास्टिंग के बाद मजदूर काम कर रहे थे तभी ऊपर छत से पत्थर गिरने से इसकी चपेट में आ गए दरअसल, यह पूरा मामला SECL (साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) के हसदेव क्षेत्र के राजनगर उपक्षेत्र स्थित झिरिया अंडरग्राउंड खदान का है। जहां पर ब्लास्टिंग के बाद ड्रेसिंग के दौरान छत से गिरते पत्थरों के गिरने के कारण मजदूर गंभीर रूप से घायल हुए। जिसके बाद तुरंत घायल मजदूर को अस्पताल ले जाया गया जहां पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मृतक मजदूरों का नाम लखन लाल और वॉल्टर तिर्की है। वहीं इस घटना के बाद से खदानों में मजदूरों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं।

50 पैसे के इनामी बदमाश को पुलिस से दबोचा, गर्लफ्रेंड के साथ काट रहा था फरारी

इंदौर इंदौर में पुलिस ने हत्याकांड के गवाह को धमकी देने वाले आरोपी पर 50 पैसे का इनाम घोषित किया था. आरोपी ने अनिल दीक्षित हत्याकांड के गवाह को धमकी दी थी, इसके बाद से वह फरार हो गया था. अब पुलिस ने आरोपी बिट्टू गौड़ को अरेस्ट कर लिया है. गिरफ्तारी के दौरान भागने की कोशिश में आरोपी मकान की बालकनी से कूद गया, जिससे उसका पैर फ्रैक्चर हो गया. पुलिस ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया है. जानकारी के अनुसार, दो साल पहले इंदौर के हीरानगर थाना क्षेत्र में अनिल दीक्षित हत्याकांड का मामला सामने आया था. बीते महीने कंडिलपुरा की रहने वाली महिला ने जिंसी डिपो के पास रहने वाले रोहन सागर और कृष्णबाग कॉलोनी के रहने वाले बिट्टू गौड़ के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी. इन पर आरोप था कि इन्होंने धमकी दी है. दरअसल, जुलाई 2022 में हीरा नगर थाना क्षेत्र में अनिल दीक्षित हत्याकांड हुआ था. इस मामले में पुलिस ने शानू सागर और दुर्लभ कश्यप गैंग के आरोपी चयन सीके को गिरफ्तार कर किया था. पीड़ित महिला ने कहा कि इस केस में मेरा बेटा विक्की उर्फ विक्रांत गवाह है. कोर्ट में विचाराधीन इस मामले में 27 नवंबर को जेल में बंद बेटे विक्की की वीडियो कॉन्फ्रेंस से पेशी थी. इसी मामले में गवाही नहीं देने को लेकर शानू सागर के दोस्त बिट्टू गौड़ और शानू सागर के छोटे भाई रोहन सागर ने बाइक से घर आकर धमकी दी थी. इंदौर में 50 पैसे का फरार इनामी पकड़ा गया, हत्याकांड के गवाह को दी थी धमकी इस मामले की शिकायत दर्ज करने के बाद पुलिस ने रोहन सागर को गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन बिट्टू गौड़ फरार चल रहा था. पुलिस ने उस पर 50 पैसे का इनाम घोषित किया था. अब पुलिस ने उसे इंदौर के गांधी नगर थाना क्षेत्र स्थित एक घर पर दबिश देकर पकड़ लिया. पुलिस से बचने के चक्कर में बिट्टू गौड़ मकान की बालकनी से कूदकर गया. इससे उसका एक पैर फ्रैक्चर हो गया. इसके बाद पुलिस ने बिट्टू को इलाज के लिए एमवाय अस्पताल में भर्ती कराया.        

महाकाल मंदिर में श्रद्धालु किसी भी समय प्रसाद खरीद सकते है, वेंडिंग मशीन में लड्डू प्रसाद के तीन प्रकार के पैकेट उपलब्ध

उज्जैन  ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में बुधवार से वेंडिंग मशीन से लड्डू प्रसाद विक्रय की विधिवत शुरुआत हो गई। देशभर से आए श्रद्धालु नई सुविधा से प्रसन्न नजर आए। भक्तों ने कहा कि महाकाल मंदिर समिति का यह प्रयोग सराहनीय है। इससे श्रद्धालु किसी भी समय बिना किसी परेशानी के प्रसाद खरीद सकते हैं। भक्तों ने केवल योजना की तारीफ ही नहीं कि वे अपने साथ 47,700 रुपये का लड्डू प्रसाद भी खरीदकर ले गए हैं। मशीन से लड्डू विक्रय करने वाला देश का पहला मंदिर महाकाल मंदिर मशीन से लड्डू विक्रय करने वाला देश का पहला मंदिर बन गया है। रविवार को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा व मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने गेट नंबर एक के पास वेंडिंग मशीन से प्रसाद विक्रय का शुभारंभ किया था। अगले दिन सोमवार को मशीन को मंदिर के बैंक खाते से जोड़ने की शुरुआत हुई। मंगलवार शाम देर रात इस प्रक्रिया को पूरा कर लिया गया। इसके बाद लड्डू प्रसाद विक्रय की शुरुआत हुई। बुधवार सुबह से शाम तक मशीन में तीन बार लड्डू प्रसाद के पैकेटों का भंडारण किया जा चुका था। मंदिर प्रशासन के अनुसार पहले दिन 47 हजार 700 रुपये का लड्डू प्रसाद बिका है। तीन पैक में प्रसाद विक्रय वेंडिंग मशीन से 100, 200 तथा 500 ग्राम के पैक में लड्डू प्रसाद का विक्रय किया जा रहा है। मशीन की क्षमता अनुसार एक बार में 500 ग्राम के 36 पैकेट, 200 ग्राम के 42 पैकेट तथा 100 ग्राम के 90 पैकेट का भंडारण किया जा रहा है। पहले दिन मशीन में तीन बार पैकेट का भंडारण किया गया। यह है प्रसाद की कीमत     500 ग्राम का पैकेट- 200 रुपये     200 ग्राम का पैकेट- 100 रुपये     100 ग्राम का पैकेट- 50 रुपये पहले दिन इतने पैकेट बिके     500 ग्राम के 108 पैकेट     200 ग्राम के 126 पैकेट     100 ग्राम के 270 पैकेट योजना श्रद्धालुओं को आ रही पसंद     वेंडिंग मशीन से लड्डू प्रसाद विक्रय की योजना श्रद्धालुओं को पसंद आ रही है। जल्द ही मंदिर में कुछ और स्थानों पर नई मशीन लगाई जाएगी। – गणेश कुमार धाकड़, प्रशासक महाकालेश्वर मंदिर  

घातक रसायनों और पॉलीथीन से मृदा को बचाना जरूरी – मुख्यमंत्री डॉ. यादव

घातक रसायनों और पॉलीथीन से मृदा को बचाना जरूरी – मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने विश्व मृदा दिवस पर दिया संदेश भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने “विश्व मृदा दिवस” पर कहा है कि स्वस्थ मिट्टी हो, तो धरा की न केवल उपजाऊ शक्ति बढ़ेगी, बल्कि मानव का स्वास्थ्य भी उत्तम होगा। उन्होंने प्रदेशवासियों से स्वस्थ और समृद्ध धरा के लिए मृदा को घातक रसायनों एवं पॉलीथीन से बचाने और धरती की सेवा और उसे पोषित करने के लिए स्वयं को समर्पित करने का आहवान किया है।

स्कूली बसों को लेकर हाईकोर्ट का सख्त निर्देश, नहीं चलेंगी ये बसें, DPS बस हादसे की याचिका पर सुनवाई में शासन को दिए निर्देश

इंदौर मध्य प्रदेश में स्कूल बसों के हादसों को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट की इंदौर बैंच ने बड़ा फैसला दिया है. हाईकोर्ट ने बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गाइडलाइन जारी की है. होईकोर्ट की तरफ से सरकार को निर्देश दिया गया है कि एमपी मोटर व्हीकल एक्ट-1994 में स्कूल बस रजिस्ट्रेशन, संचालन व प्रबंधन के लिए नियमों का प्रावधान किया जाए. आइए जानते हैं क्या है गाइडलाइन… जानिए निर्देश स्कूली बसों को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त निर्देश दिए हैं. हाईकोर्ट ने कहा कि अब प्रदेश के सभी स्कूलों में 12 साल पुरानी बसें नहीं चलाई जाएगी. बसों में स्पीड गवर्नर, जीपीएस और सीसीटीवी कैमरे के जरुरी है. ताकि ऐप के जरिए बस को ट्रैक किया जा सके. इसके साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिया है कि बस में एक स्कूल की तरफ से एक शिक्षक को रखा जाए, जो बस के आखिरी स्टॉप तक बस में रहे. वहीं, अगर स्कूल की तरफ से ऑटो रिक्शा से छात्रों को ले जाए जाता है तो इस ड्राइवर सहित ऑटो रिक्शा में चार लोग ही बैठ सकेंगे. कोर्ट ने कहा है कि आरटीओ, डीएसपी-सीएसपी ट्रैफिक इन गाइडलाइन का सख्ती से पालन करवाएं. आरटीओ, डीएसपी-सीएसपी ट्रैफिक इन गाइडलाइन का सख्ती से पालन करवाएं। इंदौर में हुए डीपीएस बस हादसे में चार स्कूल बच्चों और ड्राइवर की मौत हुई थी। इस पर लगी विविध जनहित याचिकाओं की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की डबल बेंच ने स्कूल व शैक्षणिक संस्थानों की बसों के लिए अहम आदेश जारी किया है। सात वर्ष पहले हुई थी चार बच्चों की मौत 2018 को डीपीएस की बस छु‌ट्टी के बाद बच्चों को घर छोड़ने जा रही थी। बायपास पर बस अनियंत्रित हो गई और डिवाइडर फांदते हुए दूसरे लेन में चल रहे ट्रक से जा टकराई। हादसे में चालक स्टीयरिंग पर फंस गया। उसने वहीं दम तोड़ दिया। हादसे में चार बच्चों की भी मौत हो गई थी जबकि वह अन्य बच्चे घायल हो गए। ऑटो में नहीं बैठा सकेंगे 3 से ज्यादा बच्चे इसमें स्कूल बस और ऑटो के लिए गाइडलाइन जारी कर दी है। मप्र शासन को आदेश दिए हैं कि वह मोटर व्हीकल एक्ट में संशोधन करे। जब तक ऐसा नहीं होता यह गाइडलाइन लागू रहेगी। साथ ही उनका पालन कराने की जिम्मेदारी संबंधित जिले के आरटीओ और ट्रैफिक सीएसपी, डीसीपी की होगी। वहीं पीएस स्कूल शिक्षा विभाग, संबंधित जिले के कलेक्टर, एसपी इस मामले में ध्यान देंगे कि इनका पालन हो और इन गाइडलाइन को लेकर जागरूकता फैलाई जा सके। आदेश में यह भी कहा गया है कि ऑटो में तीन से ज्यादा स्कूली बच्चे नहीं बैठेंगे। ड्राइवर सहित कुल चार ही सवारी होंगी। जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस बिनोद कुमार द्विवेदी की डिवीजन बेंच ने यह फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि वर्तमान नियम ट्रांसपोर्ट व्हीकल के है। सरकार मोटर व्हीकल एक्ट के तहत स्कूल बसों के लिए विशेष प्रावधान करे। इनके पालन की जिम्मेदारी भी तय करे। जानिए पूरी गाइडलाइन सरकारी स्कूल में प्राचार्य, निजी स्कूल में मालिक, प्रबंधन स्कूल के किसी सीनियर शिक्षक या कर्मचारी को बस का इंजार्च नियुक्त करेंगे. जो नियमों का पालन करवाएंगे. वहीं, बस में एक शिक्षक को रखा जाएगा, यह शिक्षक महिला या पुरुष कोई भी हो सकता है. जो बस के आखिरी स्टॉप तक बस में ही रहेगा. इस दौरान हादसा या उल्लंघन होने पर प्रबंधन के साथ वे भी जिम्मेदार होंगे. ये भी आदेश बस की खिड़की पर ग्रिल हो, साथ ही फर्स्ट एड किट व अग्निशमन यंत्र जरूरी है. स्कूल प्रबंधन ड्राइवर व कंडक्टर का मेडिकल चेकअप कराएं और आपराधिक गतिविधियों पर नजर रखें. बस का रंग पीला रहेगा। बस पर स्कूल बस या ऑन स्कूल ड्यूटी लिखा जाए. अनुबंधित बसों के पास मोटर व्हीकल एक्ट के अनुसार फिटनेस प्रमाण पत्र होना चाहिए. बसों में बीमा, परमिट, पीयूसी व टैक्स रसीद रखी जाए. स्कूल का नाम, पता, टेलिफोन व व्हीकल इंचार्ज का मोबाइल नंबर की पट्टी लगाएं. खिड़की में ग्रिल लगी होनी चाहिए. फिल्म व रंगीन ग्लास का उपयोग नहीं करें. बसों में फर्स्ट एड किट और अग्निशमन यंत्र अनिवार्य रूप से लगे हों. बस सहायक को स्कूल प्रबंधन की तरफ से इमर्जेंसी उपयोग व बच्चों को बैठाने-उतारने का प्रशिक्षण दिया जाए. ड्राइवर के पास स्थाई लाइसेंस व 5 साल का अनुभव हो.  ऐसे ड्राइवर नियुक्त न करें जिनका ओवर स्पीडिंग, नशा करके चलाने जैसे नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना या चालान किया गया हो. पेरेंट्स मोबाइल एप पर देख सकेंगे बस की स्थिति हाईकोर्ट जस्टिस विवेक रुसिया और जस्टिस विनोद कुमार द्विवेदी ने गाइडलाइन के साथ ही आदेश दिए हैं कि हर सरकारी स्कूल में प्रिंसिपल और निजी स्कूल, शैक्षणिक संस्थान में ऑनर, प्रिंसिपल व अन्य जिम्मेदार व्यक्ति हर बस के लिए एक व्हीकल इंचार्ज नियुक्त करेगा। जो बस के परमिट, लाइसेंस, फिटनेस ड्राइवर के क्रिमिनल रिकॉर्ड व अन्य बातों पर नजर रखेगा। कोई भी घटना होने पर उन्हें ही सीधे जिम्मेदार माना जाएग। हाईकोर्ट ने यह भी आदेश दिए हैं कि हर बस में सीसीटीवी और जीपीएस भी होना चाहिए। इससे पेरेंट्स मोबाइल एप पर हर बस की स्थिति देख सकें। बस में मेल, फीमेल टीचर भी होना चाहिए, जो बच्चों के बस में आने-जाने को देखेगा। ड्राइवर का लगातार मेडिकल चैकअप भी किया जाएगा। मुआवजे का मुद्दा जनहित याचिका में नहीं उठाया जा सकता- कोर्ट इसके साथ ही बस दुर्घटना में मरने वालों और घायलों को उचित मुआवजा दिए जाने का मुद्दा भी जनहित याचिका में उठाया गया था। साथ ही प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की गई थी, लेकिन इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि मुआवजे का मुद्दा जनहित याचिका में नहीं उठाया जा सकता। इसलिए इस पर विचार नहीं किया जाएगा। जहां तक प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की बात है, तो उस समय पहले से ही मामला दर्ज था, इसलिए इन दो बिंदुओं पर विचार नहीं किया जा रहा है। लेकिन स्कूली बसों और ऑटो में बच्चों की सुरक्षा के लिए दिशा-निर्देश जरूर जारी किए जा रहे हैं।    

रतलाम : 40 हजार रिश्वत लेते लोकायुक्त टीम ने पटवारी को पकड़ा

रतलाम  एमपी के रतलाम जिले में लोकायुक्त ने बड़ी कार्रवाई की है. लोकायुक्त पुलिस ने 40 हजार रुपये की रिश्वत लेते पटवारी को रंगे हाथ पकड़ा है. आरोपी ने सीमांकन के बाद रिपोर्ट प्रस्तुत करने के एवज में फरियादी से घूस की डिमांड की थी. फिलहाल, इस मामले में पुलिस आरोपी के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई कर रही है. बता दें कि इस कार्रवाई को उज्जैन लोकायुक्त ने अंजाम दिया है. पंचेड रहने वाले फरियादी गोपाल उपाध्याय ने बताया कि पटवारी रमेश चंद्र बैरागी जमीन की सीमांकन के बाद रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए 50 हजार की डिमांड की थी. 40 हजार रुपये गुरूवार को देना तय किया था. बचे हुए 10 हजार बाद में देने का कहा गया था. इधर, फरियादी की शिकायत पर लोकायुक्त ने जाल बिछाया. अपनी मांग के अनुरूप पटवारी ने फरियादी से 40 हजार रुपये लिए. जैसे ही फरियादी ने रुपये देने का इशारा किया, वैसे ही लोकायुक्त की टीम ने भ्रष्टाचारी पटवारी को धर दबोचा. बता दें कि 15 नवंबर को किसान गोपाल के जमीन का सीमांकन किया था. फरियादी किसान की मानें तो पटवारी 8 महीने से सीमांकन के लिए आनाकानी कर रहा था. उसका कहना है कि पटवारी सीमांकन में जमीन का 25 प्रतिशत ही बता रहा था. सही सीमांकन के बाद पटवारी रिपोर्ट पेश करने के नाम पर 50 हजार की रिश्वत की मांग कर रहा था. परेशान होकर 2 दिसंबर को लोकायुक्त को शिकायत की थी. वहीं फरियादी की शिकायत पर आज गुरुवार को लोकायुक्त ने कार्रवाई करते हुए रिश्वतखोर पटवारी को धर दबोचा. इस मामले में आरोपी के खिलाफ धारा 7, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संसोधन 2018 ) के तहत केस दर्ज कर मामले को जांच में लिया है.

अल सुबह आयकर विभाग ने इंदौर, देपालपुर, मनावर, राजगढ़ सहित 12 स्थानों पर एक साथ दबिश दी

मनावर  मध्य प्रदेश के धार जिले के मनावर के बिल्डिंग मटेरियल कारोबारी, प्रॉपर्टी ब्रोकर और पेट्रोल पंप व्यवसायी सहित अन्य व्यापारियों के ठिकानों पर आयकर विभाग की टीम ने छापा मारा गुरुवार अल सुबह 25 आयकर अधिकारियों की टीम ने इंदौर, देपालपुर, मनावर, राजगढ़ सहित 12 स्थानों पर एक साथ दबिश दी। जानकारी के मुताबिक आयरक विभाग की टीम को इनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति होने की शिकायत मिली थी। जांच के बाद आज व्यापारियों के ठिकानों पर एक साथ छापा मारा गया। इनमें मनावर के बड़े बिल्डिंग मटेरियल के व्यापारी आरसी जैन भी शामिल है। इसके साथ ही पेट्रोल पंप व्यवसायी गोलू पहाड़‍िया, प्रॉपर्टी ब्रोकर, पंकज गोधा, जहीर शेख, कालू उफ बब्बू टेलर, राजेश शर्मा और अमित मिश्रा भी शामिल हैं। आयकर विभाग की टीम ने इनके घरों, दफ्तर और पेट्रोल पंप पर छापा मारा है। आयकर विभाग की टीम अभी दस्तावेजों की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही साफ हो पाएगा कि इनके पास से क्या मिला। इसके साथ ही पेट्रोल पंप व्यवसायी गोलू पहाड़‍िया, प्रॉपर्टी ब्रोकर, पंकज गोधा, जहीर शेख, कालू उफ बब्बू टेलर, राजेश शर्मा और अमित मिश्रा भी शामिल हैं। आयकर विभाग की टीम ने इनके घरों, दफ्तर और पेट्रोल पंप पर छापा मारा है। राजगढ़ में चार स्थानों पर सराफा व्यापारियों के यहां इनकम टैक्स रेड धार जिले के राजगढ़ में गुरुवार को इनकम टैक्स टीम द्वारा चार सराफा व्यापारियों के यहां एक साथ छापा मारा। इस दौरान व्यापारियों के मोबाइल बंद करवाकर पूछताछ की जा रही थी। वहीं दुकानों में मौजूद व्यापारियों के अलावा अन्य किसी को अंदर नहीं आने दिया गया। शटर गिराकर टीम द्वारा कार्रवाई की जा रही है। आयकर विभाग की टीम द्वारा सुबह करीब 11 बजे मैन चौपाटी स्थित केसर एवं एसवी ज्वलेर्स पर छापा मारा गया। यहां दुकान मालिक एवं घर के अन्य सदस्यों के मोबाइल बंद करवाकर कैश से संबंधित छानबीन की जा रही थी। चारों स्थानों पर अलग-अलग टीमों द्वारा जांच की जा रही है। जैसे ही दुकानों पर इनकम टैक्स की रेड पड़ी तो दुकानों के बाहर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ लग गई थी। इस मामले में टीम के अधिकारियों से चर्चा की गई, लेकिन उन्होंने कुछ भी बताने इन्कार कर दिया। उनका कहना था कि जांच के बाद जानकारी दी जाएगी।

भारत एक दशक से पोलियोमुक्त है, प्रदेशवासी बच्चों को पोलियो से बचाव की दृष्टि से अभियान में हिस्सा लें: CM यादव

भोपाल  मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने आज बताया कि राज्य के 16 जिलों में आगामी आठ से 16 दिसंबर के बीच पल्सपोलियो अभियान चलाया जा रहा है और प्रदेशवासी अपने बच्चों को पोलियो से बचाव की दृष्टि से इस अभियान में हिस्सा लें। डॉ यादव ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि भारत पिछले एक दशक से पोलियोमुक्त है। भारत को पोलियोमुक्त बनाने में सभी जनप्रतिनिधियों, शासकीय विभागों और स्वयंसेवी संस्थाओं ने मिल कर काम किया है। इस अभियान की सफलता के लिए सभी बधाई के पात्र हैं। उन्होंने कहा कि पोलियो बच्चों में आजीवन दिव्यांगता पैदा कर देता है। इससे बचाव का एकमात्र उपाय टीकाकरण है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए राज्य में आठ से 16 दिसंबर तक प्रदेश के 16 जिलों भोपाल, छिंदवाड़ा, दतिया, ग्वालियर, इंदौर, कटनी, खरगोन, मंदसौर, नरसिंहपुर, नीमच, निवाड़ी, सतना, श्योपुर, टीकमगढ़, विदिशा और भिंड इत्यादि में पल्सपोलियो अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन जिलों के सभी नागरिकों से अपील है कि पांच साल तक के बच्चों को पोलियो की ड्रॉप पिलाएं और इस बीमारी को हराएं।

प्रधानमंत्री मोदी के देश को टीबीमुक्त बनाने का संकल्प को मध्यप्रदेश भी कदम से कदम मिला कर चल रहा

भोपाल मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने आज कहा कि ‘टीबीमुक्त भारत’ के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प में राज्य भी कदम से कदम मिला कर चल रहा है और अगर कोई व्यक्ति टीबी से ग्रस्त है तो उसे इस अभियान का हिस्सा बनाने में सभी मदद करें। डॉ यादव ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2018 में देश को टीबीमुक्त बनाने का संकल्प लिया था। मध्यप्रदेश भी उसमें कदम से कदम मिला कर चल रहा है। उन्होंने कहा कि क्षय रोग के दृष्टिकोण से देश भर के 347 जिलों का चयन किया गया है, जिसमें 100 दिवसीय नि:क्षय अभियान चलाया जा रहा है। इसमें मध्यप्रदेश के 23 जिले अलीराजपुर, अनूपपुर, बैतूल, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, दतिया, डिंडोरी, जबलपुर, कटनी, खंडवा, मंडला, मंदसौर, नरसिंहपुर, नीमच, रतलाम, सीहोर, सिवनी, श्योपुर, सीधी, सिंगरौली, उज्जैन और विदिशा शामिल हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि क्षय उन्मूलन की दिशा में इन जिलों में सक्रियता के साथ काम होगा। साथ ही जनता भी इस अभियान में मददगार बनते हुए टीबी से ग्रस्त अगर कोई व्यक्ति है तो उसे इस अभियान का हिस्सा बनाने में मदद करे।मुख्यमंत्री ने कहा कि टीबी लाइलाज बीमारी नहीं है। इससे डरे नहीं। रोगी की पहचान कर राेगमुक्ति का संकल्प लें।

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