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इतनी धूप के बावजूद भारत में बढ़ रही विटामिन-डी की कमी, कारण जानकर हैरान रह जाएंगे

भारत एक ऐसा देश है जहां साल के ज्यादातर महीनों में सूरज की भरपूर रोशनी रहती है। इसके बावजूद, ज्यादातर भारतीयों में विटामिन-डी की कमी देखने को मिलती है। यह चौंकाने वाला जरूरी है, लेकिन सच है। इसलिए यह सवाल करना जरूरी है कि ऐसा क्यों है? जिस देश में धूप की कोई कमी नहीं है, वहां लोगों में विटामिन-डी की कमी क्यों पाई जा रही है। आइए जानें इसके पीछे छिपे कारणों के बारे में। भारतीयों में विटामिन-डी की कमी के कारण     मेलानिन– भारतीयों की त्वचा का रंग प्राकृतिक रूप से गेहुआं या गहरा होता है। हमारी त्वचा में मेलानिन नाम का पिगमेंट ज्यादा मात्रा में होता है। मेलानिन सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणों के खिलाफ एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है, जो त्वचा को जलने से तो बचाता है, लेकिन विटामिन-डी के निर्माण की प्रक्रिया को धीमा कर देता है। गोरी त्वचा की तुलना में गहरी त्वचा को उतना ही विटामिन-डी बनाने के लिए धूप में ज्यादा समय बिताना पड़ता है।     बदलती लाइफस्टाइल- आज की ज्यादातर आबादी घर के अंदर रहने लगी है। सुबह 9 से शाम 6 की डेस्क जॉब, बंद दफ्तर और एसी के कमरों ने हमें सूरज से दूर कर दिया है। शहरी इलाकों में ऊंची इमारतों के कारण घरों तक सीधी धूप नहीं पहुंच पाती।     प्रदूषण- महानगरों में बढ़ता वायु प्रदूषण भी एक बड़ा कारण है। हवा में मौजूद धूल के कण और धुएं के कारण सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणों हम तक पहुंच नहीं पाती हैं, जिसके कारण विटामिन-डी बनाने की प्रक्रिया रुक जाती है। खान-पान में बदलाव- खान-पान में विटामिन-डी के नेचुरल सोर्स बहुत सीमित हैं, जैसे- फैटी फिश, अंडे की जर्दी और डेयरी प्रोडक्ट्स। भारत की एक बड़ी आबादी शाकाहारी है, जिससे खाने के जरिए इस विटामिन की पूर्ति करना मुश्किल हो जाता है।  

वैज्ञानिकों की बड़ी खोज: अब दवाएं होंगी ज्यादा असरदार, कैंसर इलाज को मिलेगा नया रास्ता

क्या आपने कभी सोचा है कि बिना किसी बाहरी गर्मी, रोशनी या केमिकल के कोई रासायनिक प्रतिक्रिया अपने आप सेकंडों में पूरी हो सकती है? वैज्ञानिकों ने एक ऐसी ही अद्भुत और दुर्लभ खोज की है। इस नई खोज ने दवा निर्माण, प्रोटीन विज्ञान और बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में विकास के नए दरवाजे खोल दिए हैं। आइए, इस अहम वैज्ञानिक खोज को डिटेल में समझते हैं। क्या है यह नई रिसर्च? शोधकर्ताओं ने एक पूरी तरह से नई रासायनिक प्रक्रिया की खोज की है, जिसे ‘ट्राइसल्फाइड मेटाथेसिस प्रतिक्रिया’ नाम दिया गया है। इसके बारे में मशहूर विज्ञान पत्रिका ‘नेचर केमिस्ट्री’ में प्रकाशित किया गया है। इस प्रतिक्रिया की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सामान्य कमरे के तापमान पर, बिना किसी बाहरी एजेंट या उत्तेजना (जैसे गर्मी या रोशनी) के अपने आप काम करती है। यह प्रतिक्रिया कुछ ही सेकंडों में पूरी हो जाती है और इसके परिणाम बेहद साफ, सटीक और कुशल होते हैं। सल्फर-सल्फर बांड्स का खेल इस पूरी खोज के केंद्र में ‘सल्फर-सल्फर बांड’ हैं। ये बांड पेप्टाइड्स, प्रोटीन, दवा के अणुओं और वल्कनाइज्ड रबर जैसे पॉलिमर्स में मौजूद होते हैं। बता दें, ये प्रोटीन को उसकी संरचनात्मक मजबूती और स्थिरता देने के लिए बहुत जरूरी होते हैं। अब तक, बिना किसी बाहरी रसायन या गर्मी के इन बांड्स को अपनी मर्जी से बनाना या तोड़ना बहुत मुश्किल माना जाता था, लेकिन यह नई प्रतिक्रिया इसे स्वचालित रूप से कर सकती है। कैसे हुई यह खोज? इस अनोखी खोज की शुरुआत ऑस्ट्रेलिया के फ्लिंडर्स विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जस्टिन चाल्कर और यूके के लिवरपूल विश्वविद्यालय के उनके सहयोगी टॉम हैसेल के काम से हुई। उन्होंने शुरुआत में कुछ खास सॉल्वेंट्स में S-S बांड्स के अजीब और हैरान करने वाले व्यवहार पर ध्यान दिया। इसके बाद, उन्होंने एक मॉडल तैयार किया जो यह समझाता है कि ये बांड कैसे टूटते हैं, कैसे फिर से बनते हैं और यह हमारे लिए कैसे उपयोगी हो सकता है। भविष्य के लिए इसके शानदार उपयोग फ्लिंडर्स विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने इस नई प्रतिक्रिया के कई बेहतरीन फायदे बताए हैं, जिनकी मदद से कई क्षेत्रों में क्रांति आ सकती है:     कैंसर की दवाओं में सुधार: चाल्कर लैब के शोधकर्ता हर्षल पटेल के अनुसार, इस प्रतिक्रिया का सफलतापूर्वक इस्तेमाल कैंसर रोधी दवाओं और दवाइयों की खोज से जुड़े केमिकल को संशोधित करने के लिए किया गया है।     रीसायकल होने वाला प्लास्टिक: इस तकनीक से ऐसे नए और बेहतरीन प्लास्टिक बनाए जा सकते हैं जिन्हें आसानी से आकार दिया जा सकता है, इस्तेमाल किया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर रीसायकल करने के लिए तोड़ा जा सकता है। दवा और विज्ञान में तेज विकास: प्राकृतिक उत्पादों और दवाओं के अणुओं को बदलने में यह बेहद काम आ रही है। इसके उच्च प्रतिक्रिया दर की वजह से चिकित्सा से जुड़े यौगिकों को तेजी से तैयार किया जा सकता है। फ्लिंडर्स विश्वविद्यालय के वरिष्ठ लेखक प्रोफेसर जस्टिन चाल्कर के शब्दों में कहें तो, किसी पूरी तरह से नई प्रतिक्रिया की खोज होना अपने आप में बहुत दुर्लभ है। और यह उससे भी ज्यादा दुर्लभ है कि एक ही खोज इतने सारे अलग-अलग क्षेत्रों में उपयोगी साबित हो। शोधकर्ताओं की टीम इस बात को लेकर बेहद उत्साहित है कि आने वाले समय में इस रसायन विज्ञान को उन तरीकों से भी इस्तेमाल किया जाएगा, जिनकी अभी हमने कल्पना भी नहीं की है।  

रिश्ता बचाएँ या आत्मसम्मान? प्रेमानंद जी महाराज की बात बदल देगी आपकी सोच

जीवन में कई बार ऐसा मोड़ आ जाता है, जब समझ ही नहीं आता कि क्या करना सही रहेगा। खासतौर से जब बात उन रिश्तों की हो, जो हमारे दिल के बेहद करीब होते हैं। कई बार हम रिश्ता बचाना भी चाहते हैं, फिर हमें कहीं ना कहीं ये भी लगने लगता है कि अपना आत्मसम्मान बचाना ज्यादा जरूरी है। रिश्ते और आत्मसम्मान के बीच की ये कश्मकश चलती रहती है और कुछ हाथ नहीं लगता। प्रेमानंद जी महाराज के सत्संग में उनसे किसी ने यही सवाल किया कि रिश्ता अगर बिखर रहा हो तो आत्मसम्मान ज्यादा जरूरी है या फिर उस रिश्ते को बचाना। महाराज ने इसका जो उत्तर दिया है, वो वाकई हर किसी को जरूर सुनना चाहिए। रिश्ता या आत्मसम्मान, क्या जरूरी है? प्रेमानंद जी महाराज इस प्रश्न का उत्तर देते हुए कहते हैं कि आप जिस आत्म सम्मान की बात कर रहे हैं, वो कुछ नहीं बल्कि देहाभिमान है। इस अभिमान को मिटाकर ही रिश्तों का पोषण किया जा सकता है। अगर आप रिश्ते के बीच में इसे ले कर आते हैं, तो कभी ना कभी खटास होना तय है। आत्मसम्मान देव स्वरूप है लेकिन जो हमें आत्मसम्मान लगता है, वो ज्यादातर देहाभिमान होता है, जिसे सही नहीं माना गया है।इस देहाभिमान को मिटाकर हमें रिश्ता बचाना चाहिए। मान रहित हो कर सबका मान करें महाराज जी शास्त्रों में कहे गए एक श्लोक को दोहराते हुए बताते हैं कि जब आप मान रहित हो कर सबका मान करेंगे, तो रिश्ते अपने आप उज्ज्वल हो जाएंगे। वहीं जब हम अपने सम्मान की बात रखेंगे, तो रिश्ते में कहीं ना कहीं खटास आ ही जाएगी। इससे बेवजह आपका मन अशांत रहेगा और बेचैनी भी होगी। इसलिए शास्त्रों की सिद्धांत के अनुसार आपको अमानी यानी मान रहित होना चाहिए। ये होता है असली आत्मसम्मान प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि असली आत्मसम्मान वो होता है, जब सामने वाला आपसे कटु वचन कहे और आप फिर भी उसे प्यार से ही जवाब दें। ऐसे में आप खुद को किसी और के लिए नहीं बदलते हैं। ऐसे लोगों को भले ही कोई ना देख रहा हो लेकिन भगवान देख रहे होते हैं और जिससे भगवान प्रेम करें उससे दुनिया प्रेम करती है।

Instagram की प्राइवेसी पर संकट, Meta ने एंड टू एंड एन्क्रिप्शन हटाने का किया ऐलान

नई दिल्ली सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Instagram को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. कंपनी ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि कर दी है कि इंस्टाग्राम पर एंड टू एंड एन्क्रिप्टेड चैट फीचर 8 मई 2026 के बाद बंद कर दिया जाएगा. यानी इस तारीख के बाद इंस्टाग्राम के डायरेक्ट मैसेज (DM) में यह सुरक्षा फीचर उपलब्ध नहीं रहेगा। यह जानकारी खुद इंस्टाग्राम के आधिकारिक हेल्प पेज पर दी गई है, जहां साफ कहा गया है कि 8 मई 2026 के बाद इंस्टाग्राम पर एंड टू एंड एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग सपोर्ट नहीं करेगा। अगर किसी यूजर की चैट इस फीचर के तहत है, तो उन्हें पहले से नोटिफिकेशन मिलेगा और वे अपने चैट डेटा को डाउनलोड भी कर सकेंगे। क्या होता है एंड टू एंड एन्क्रिप्शन एंड टू एंड एन्क्रिप्शन एक ऐसी तकनीक होती है जिसमें मैसेज भेजने वाले और पाने वाले के अलावा कोई भी तीसरा व्यक्ति उसे पढ़ नहीं सकता। यहां तक कि प्लेटफॉर्म चलाने वाली कंपनी भी उन मैसेज को नहीं देख सकती. इस तकनीक में मैसेज भेजते समय वह एक कोड में बदल जाता है और केवल रिसीवर के डिवाइस पर ही डिक्रिप्ट होता है। इसी वजह से इसे डिजिटल दुनिया में सबसे मजबूत प्राइवेसी सुरक्षा माना जाता है. Signal और WhatsApp जैसे कई मैसेजिंग प्लेटफॉर्म इसी तकनीक का इस्तेमाल करते हैं ताकि यूजर्स की बातचीत पूरी तरह निजी रह सके। इंस्टाग्राम में कब आया था यह फीचर? इंस्टाग्राम ने एंड टू एंड एन्क्रिप्शन फीचर को 2023 के आसपास अपने मैसेजिंग सिस्टम में जोड़ना शुरू किया था. शुरुआत में यह फीचर सभी के लिए डिफॉल्ट नहीं था बल्कि यूजर्स को इसे अलग से ऑन करना पड़ता था। इस फीचर को ऑन करने के बाद बातचीत एक अलग एन्क्रिप्टेड चैट में होती थी और उसमें अतिरिक्त सुरक्षा विकल्प भी मिलते थे.  लेकिन अब कंपनी ने इसे पूरी तरह हटाने का फैसला लिया है। मेटा ने क्यों लिया यह फैसला? इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी Meta का कहना है कि इस फीचर का इस्तेमाल बहुत कम लोग कर रहे थे. इसलिए कंपनी ने इसे बंद करने का फैसला लिया है। कंपनी यूजर्स को पहले से नोटिफिकेशन भी भेज रही है ताकि वे चाहें तो अपने एन्क्रिप्टेड चैट्स और मीडिया फाइल्स डाउनलोड कर सकें। क्या इंस्टाग्राम यूज़र्स के मैसेज डेटा से Meta AI होगा ट्रेन? आधिकारिक तौर पर भले ही मेटा ने इस फैसले को कम इस्तेमाल से जोड़ा है. लेकिन टेक इंडस्ट्री में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि एन्क्रिप्शन हटने से प्लेटफॉर्म के लिए मैसेजिंग डेटा को प्रोसेस करना आसान हो सकता है।  एंड टू एंड एन्क्रिप्शन होने पर प्लेटफॉर्म खुद यूजर्स के मैसेज नहीं पढ़ सकता, इसलिए उस डेटा का इस्तेमाल किसी भी तरह के विश्लेषण या AI सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए करना संभव नहीं होता। एक्सपर्ट्स का मानना है कि एन्क्रिप्शन हटने के बाद तकनीकी रूप से प्लेटफॉर्म के पास मैसेज स्कैन करने और डेटा को प्रोसेस करने की क्षमता बढ़ जाती है। इससे कंपनियां मैसेजिंग सिस्टम को बेहतर बनाने, कंटेंट मॉडरेशन करने या AI मॉडल्स को ट्रेन करने के लिए डेटा का इस्तेमाल कर सकती हैं। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि एन्क्रिप्शन हटने से प्लेटफॉर्म को मैसेज स्कैन करने और संदिग्ध या अवैध कंटेंट का पता लगाने में आसानी होती है। प्राइवेसी को लेकर पहले भी घिर चुकी है Meta प्राइवेसी को लेकर मेटा पहले भी विवादों में घिर चुकी है. हाल ही में कंपनी के RayBan Meta AI Glasses को लेकर बड़ा विवाद सामने आया था। कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि इन स्मार्ट ग्लासेस से रिकॉर्ड हुई वीडियो और फोटो का इस्तेमाल एआई सिस्टम को ट्रेन करने के लिए किया जा रहा था और इसके लिए ह्यूमन रिव्यूअर्स भी फुटेज देखते थे। एक जांच में सामने आया कि कुछ कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स उन वीडियो को देखते थे जिनमें बेहद निजी पल भी शामिल थे।  रिपोर्ट्स के अनुसार इन फुटेज में लोगों के घर के अंदर के फुटेज, बाथरूम में रिकॉर्ड हुए पल या अन्य सेंसिटिव मोमेंट्स भी शामिल थीं। इन डेटा का इस्तेमाल एआई सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए किया जा रहा था, जिससे प्राइवेसी को लेकर गंभीर सवाल उठे। इतना ही नहीं, इन स्मार्ट ग्लासेस में मौजूद कैमरों को लेकर यह भी चिंता जताई गई कि लोग अनजाने में रिकॉर्ड हो सकते हैं, क्योंकि यह सामान्य चश्मे की तरह दिखते हैं और आसानी से वीडियो रिकॉर्ड कर सकते हैं. एक्सपर्ट्स ने इसे भविष्य के लिए एक बड़ा प्राइवेसी खतरा बताया है।  यूजर्स पर क्या पड़ेगा असर? 8 मई 2026 के बाद इंस्टाग्राम पर भेजे जाने वाले मैसेज एंड टू एंड एन्क्रिप्टेड नहीं होंगे. यानी तकनीकी रूप से यह मैसेज प्लेटफॉर्म के सर्वर पर प्रोसेस होंगे. हालांकि कंपनियां आमतौर पर दावा करती हैं कि यूजर्स के डेटा की सुरक्षा और प्राइवेसी का ध्यान रखा जाता है। फिर भी साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि एंड टू एंड एन्क्रिप्शन हटने से प्राइवेसी को लेकर सवाल उठ सकते हैं, क्योंकि यह फीचर मैसेजिंग को सबसे ज्यादा सुरक्षित बनाता है। क्या WhatsApp पर भी खत्म होगा एन्क्रिप्शन? इंस्टाग्राम के इस फैसले के बाद कई यूजर्स के मन में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या मेटा अपने दूसरे प्लेटफॉर्म पर भी ऐसा ही कदम उठाएगा. फिलहाल ऐसा नहीं है। मेटा के दूसरे बड़े मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp में एंड टू एंड एन्क्रिप्शन पहले की तरह जारी रहेगा और यह वहां डिफॉल्ट रूप से लागू है। 8 मई से पहले क्या करें यूजर्स? अगर आप इंस्टाग्राम पर एंड टू एंड एन्क्रिप्टेड चैट का इस्तेमाल करते हैं तो 8 मई 2026 से पहले अपने चैट का बैकअप डाउनलोड कर सकते हैं. इंस्टाग्राम इसके लिए यूजर्स को नोटिफिकेशन और डाउनलोड का विकल्प देगा। इंस्टाग्राम का यह फैसला सोशल मीडिया प्राइवेसी को लेकर नई बहस को जन्म दे रहा है. कई टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स सुरक्षा और मॉडरेशन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करेंगे, जिसकी वजह से ऐसे बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

WhatsApp ने लॉन्च किया नया AI टूल, यूज़ करना हुआ बेहद आसान

 नई दिल्ली  WhatsApp ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप के अंदर एक न्यू टैब दिखाया गया है, जिसका नाम Meta AI Tab है, जिसकी मदद से यूजर्स आसानी से AI फीचर्स को एक्सेस कर पाएंगे। लेटेस्ट अपडेट की जानकारी Wabetainfo ने शेयर की है. रिपोर्ट में बताया है कि न्यू टैब की मदद से यूजर्स आसानी से AIसे इंटरैक्ट कर सकेंगे. इसमें टेक्स्ट और वॉयस कमांड से बातचीत की जा सकेगी. साथ ही यहां एनीमेटेड इमेज आदि को तैयार किया जा सकेगा। इस एंड्रॉयड बीटा वर्जन में दिखा नया टैब  Wabetainfo ने पोस्ट करके बताया है कि WhatsApp बीटा के Android 2.26.6.5 वर्जन में न्यू टैब दिखाई दिया है. यह एक सेंटरलाइज AI पावर्ड टूल है। Wabetainfo ने पोस्ट किया एंड्रॉयड यूजर्स को टेस्टिंग के लिए मिला  WhatsApp ने अभी सीमित एंड्रॉयड यूजर्स के साथ इसकी टेस्टिंग शुरू की है. कई यूजर्स इस फीचर्स को यूज कर रहे हैं. Wabetainfo ने इसको लेकर एक स्क्रीनशॉट्स भी शेयर किया है, जहां बताया है कि न्यू AI टैब कैसा नजर आएगा। Meta AI के लिए एक नया टैब पोस्ट में एम्बेड इमेज की मदद से आप देख सकते हैं कि कुछ बीटा टेस्टर्स को बॉटम पर Meta AI के लिए एक नया टैब दिया है. मैसेजिंग ऐप में नया टैब जोड़ने के लिए मैसेजिंग ऐप में मुख्य इंटरफेस से कम्युनिटीस टैब को रिमूव कर दिया है। एक पुराने पोस्ट में पहले ही बताया जा चुका था कि इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप में  कम्युनिटीज टैब की जगह AI पावर्ड चैट्स के लिए एक नया सेक्शन आ रहा है।  

Redmi Note 15 Pro: पावरफुल बैटरी और बढ़िया डिस्प्ले के साथ लॉन्च, खरीदने से पहले जानें इसकी खूबियां और कमियां

नई दिल्ली कुछ समय पहले भारतीय बाजार में एक नया मिड रेंज स्मार्टफोन Redmi Note 15 Pro 5G लॉन्च हुआ है। इसके कई कलर वेरिएंट आए हैं। फोन देखने में काफी डीसेंट लगता है। इसके बैक साइड में बड़ा कैमरा मॉड्यूल दिया गया है। मैं इसका 8GB RAM वाला वेरिएंट यूज कर रही हूं। फोन की कीमत 30 हजार रुपये से कम है। अगर आप मिड रेंज में एक नया स्मार्टफोन खरीदना चाहते हैं तो यह र‍िव्‍यू पढ़कर रेडमी नोट 15 प्रो के बारे में अपनी राय बना सकते हैं। Redmi Note 15 Pro 5G डि‍जाइन इस स्मार्टफोन के तीन कलर वेरिएंट आते हैं। मैं Silver Ash कलर इस्तेमाल कर रही हूं। फोन देखने में काफी डीसेंट है। इसे मॉडर्न, ड्यूरेबल और स्लीक डिजाइन के साथ लाया गया है। इसमें फ्लैट-एज्ड फ्रेम और बड़ा 6.83 इंच का फ्लैट डिस्प्ले दिया गया है। फोन को मैट फिनिश और ग्‍लॉसी बैक पैनल डिजाइन के साथ लाया गया है। इससे फोन पर फिंगरप्रिंट नहीं आते। डिवाइस प्रीमियम लुक के साथ आती है। फोन में हाई-लेवल वॉटर और डस्ट रेजिस्टेंस के लिए IP66 + IP68 + IP69 + IP69K रेटिंग है। हैंडसेट Corning Gorilla Glass Victus 2 प्रोटेक्शन के साथ आता है। फोन के बैक साइड में बीचों-बीच बड़ा कैमरा मॉड्यूल दिया गया है। इसमें तीन कैमरा सेंसर और फ्लैश लगा है। कैसे है फोन का डिस्प्ले? फोन में 6.83 इंच का AMOLED डिस्प्ले है। इसका रेजॉलूशन 2772 x 1280 और रिफ्रेश रेट 120Hz तक है। फोन 3200 nits पीक ब्राइटनेस के साथ आता है। इसमें HDR10+ और Dolby Vision सपोर्ट द‍िया गया है। डिस्प्ले साइज के आधार पर कोई भी इसे आसानी से पकड़ सकता है। ऑनलाइन स्ट्रीमिंग के लिए फोन का डिस्प्ले साइज काफी अच्छा है। हाई ब्राइटनैस के चलते फोन की स्क्रीन धूप की रोशनी में भी साफ-साफ दिखाई देती है। इसका वजन 210 ग्राम है। फोन 7.96mm मोटा है। इसका मतलब है कि फोन ना बहुत हैवी और ना ही लाइटवेट है। इसका इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर तेज काम करता है। टच करने से ही फोन अनलॉक हो जाता है। इसमें स्टीरियो स्पीकर दिए गए हैं, जो अच्छी साउंड क्वालिटी देते हैं। हालांकि बेस की थोड़ी कमी लग सकती है। परफॉर्मेंस में एवरेज है फोन Redmi Note 15 Pro में MediaTek Dimensity 7400-Ultra प्रोसेसर दिया गया है। यह Xiaomi HyperOS 2 पर रन करता है। फोन में 8GB RAM और 256GB तक स्टोरेज है। इस रेंज में आजकल कंपनियां यही प्रोसेसर दे रही हैं, जिसकी परफॉर्मेंस एवरेज से ऊपर है। हालांकि इसमें स्टोरेज UFS 2.2 है। अगर यह 3.1 होता तो अच्‍छा रहता। फोन को इस्तेमाल करने में कोई दिक्कत नहीं आती है। ऐप पर स्विच करना, एक साथ कई ऐप्स ओपन करना, टच रिस्पांस काफी स्मूद और फोन अच्छे से काम करता है। फोन में कोई लैग नहीं है। अगर आप BGMI खेलने के बाद होम स्क्रीन पर वापस आते हैं तो आपको हल्का लैग म‍िल सकता है। फोन Android 15 पर रन करता है। यह एंड्रॉयड 16 होता तो सॉफ्टवेयर एक्‍सपीर‍ियंस और बेहतर रहता। फोन में ओवर हीटिंग जैसी कोई समस्या नहीं आती। हालांकि हाई सेटिंग्स में गेमिंग करने पर लैग म‍िलते हैं। कैमरों में हो सकता था सुधार Redmi Note 15 Pro 5G के बैक में OIS सपोर्ट के साथ 200MP का मेन कैमरा, 8MP का अल्ट्रा वाइड एंगल सेंसर और 20MP का फ्रंट कैमरा दिया गया है। इसका रियर कैमरा 30fps पर 4K, 30/60fps पर 1080p और 30fps पर 720p वीडियो रिकॉर्ड कर सकता है। हार्डवेयर के मामले में कैमरा अच्छा है, लेकिन सॉफ्टवेयर को थोड़ा और बेहतर बनाया जा सकता था। फोटोज के कलर बाइब्रेंट नहीं हैं। इस रेंज के अन्य फोन्स, बेहतर कैमरा सेटअप के साथ आते हैं। फोटोज की डिटेल भी क्लियर नहीं आई। कलर भी नैचुरल नहीं लगते। पोर्ट्रेट में 2X का ऑप्शन मिल रहा है। उसकी क्वालिटी डीसेंट है। लो लाइट में कैमरा उतना अच्छा परफॉर्म नहीं करता। फ्रंट कैमरा द‍िन की रोशनी में ज्यादा अच्छा काम करता है। कम लाइट में स्किन टोन अच्छी नहीं लगती। हैंडसेट में कई AI फीचर्स जैसे- Al Erase Pro, Al Remove Reflection, Al Image Expansion, Al Sky, Al Bokeh, Al Cutouts, Al Image Enhancement, Al Beautify, Al Film, Circle to Search मिल रहे हैं।

घर बैठे मोबाइल से बुक करें गैस सिलेंडर: UMANG और पेमेंट ऐप्स का आसान तरीका समझें

नई दिल्ली सिलेंडर की किल्लत की खबरों के बीच लोगों को फोन कॉल के जरिए LPG सिलेंडर बुक करने में परेशानी हो रही है। इसी का नतीजा है कि गैस एजेंसियों के बाहर लोगों की कतारें देखने को मिल रही हैं। ऐसे में आप चाहें, तो सरकारी ऐप UMANG या PhonePe और Google Pay जैसी पेमेंट ऐप्स के जरिए भी सिलेंडर बुक कराने की कोशिश कर सकते हैं। इससे पहले हम बता चुके हैं कि किस तरह आप WhatsApp, SMS और मिस कॉल के जरिए सिलेंडर बुक करने का तरीका आजमा सकते हैं। इसी कड़ी में आज हम बात सरकारी ऐप UMANG और पेमेंट ऐप्स की करेंगे। बता दें कि अगर आपका सिलेंडर बुक हो जाता है और समय पर डिलीवर नहीं किया जाता, तो इन 4 तरीकों से आप फोन पर ही उसकी शिकायत भी कर सकते हैं। BHIM UPI ऐप पर LPG सिलेंडर कैसे बुक करें? आप सरकारी UPI ऐप BHIM UPI ऐप के जरिए भी सिलेंडर बुक करवा सकते हैं। इसके लिए:     BHIM ऐप खोलें और होम स्क्रीन पर दिख रहे Bill Pay के ऑप्शन पर क्लिक करें।     नीचे की ओर स्क्रॉल करें और Utility Bills कैटेगरी में LPG Cylinder के आइकन को चुनें।     अपनी गैस कंपनी को चुनें।     इसके बाद अपनी कंज्यूमर आईडी या रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर दर्ज करें।     Get Bill Details पर क्लिक करते ही आपको सिलेंडर की कीमत और उपभोक्ता का नाम दिखेंगे।     अब अपना UPI पिन डालें और पेमेंट पूरा करें।     बुकिंग सफल होते ही आपको कन्फर्मेशन मैसेज मिल जाएगा। UMANG ऐप पर LPG सिलेंडर कैसे करें बुक? UMANG यानी कि Unified Mobile Application for New-age Governance एक सरकारी ऑल-इन-वन ऐप है। इसकी मदद से आप एक ही ऐप में कई सरकारी सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं। बता दें कि गैस सिलेंडर की बुकिंग कराना भी उनमें से ही एक है। UMANG ऐप के जरिए सिलेंडर बुक करने के लिए:     सबसे पहले ऐप को प्ले स्टोर या ऐप स्टोर से डाउनलोड करके उसमें लॉग इन कर लें। नए यूजर हैं, तो मोबाइल नंबर से साइन अप कर लें।     इसके बाद होम स्क्रीन पर सर्च बार में अपनी गैस कंपनी जैसे Indane, HP Gas या Bharat Gas सर्च करें और रिजल्ट पर क्लिक करें।     अब Refill Order या Order Cylinder के ऑप्शन को चुनें।     अपनी कस्टमर आईडी या मोबाइल नंबर डालकर कंफर्म करें और पेमेंट करके बुकिंग पूरी करें। PhonePe पर LPG सिलेंडर कैसे बुक करें? सिलेंडर बुक करने के लिए आप पेमेंट ऐप्स का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। Phonepe भी उनमें से एक है। PhonePe के जरिए सिलेंडर बुक करने के लिए:     पहले Recharge & Pay Bills सेक्शन पर जाएं।     अब ‘LPG Cylinder’ आइकन पर क्लिक करें।     इसके बाद ऑपरेटर चुनें।     अब अपनी कस्टमर आईडी डालें। इसके बाद सिलेंडर की कीमत स्क्रीन पर दिखने लगेगी।     Proceed to Pay पर क्लिक करके UPI, डेबिट कार्ड या वॉलेट के जरिए पेमेंट पूरा करें।     बुकिंग होते ही आपको डिजिटल रसीद मिल जाएगी। Google Pay के जरिए सिलेंडर बुक करने के लिए:     सबसे पहले Bills सेक्शन में जाएं।     इसके बाद पेमेंट कैटेगरी में आपको LPG Cylinder का ऑप्शन मिलेगा, उस पर टैप करें।     अपनी गैस कंपनी चुनें और Consumer ID या रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर डालकर अपना अकाउंट लिंक करें।     अकाउंट लिंक होते ही कस्टमर का नाम और सिलेंडर की ताजा कीमत दिखाई देगी     Pay पर क्लिक करें और अपना UPI पिन डालकर पेमेंट पूरा करें।     बुकिंग सफल होते ही आपको Google Pay की ओर से कन्फर्मेशन मिलता है।

सिर्फ खान-पान नहीं, अधूरी नींद भी बढ़ा सकती है वजन—जानिए कैसे

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम सबसे ज्यादा अपनी नींद के साथ समझौता करते हैं। देर रात तक ऑफिस का काम करना, अनियमित दिनचर्या या फिर मोबाइल और लैपटॉप पर समय बिताना हमारी आदत बन चुकी है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि नींद पूरी न होने का असर सिर्फ थकान या कमजोरी तक सीमित नहीं है? डॉक्टर के अनुसार, कम नींद लेना सीधे तौर पर आपके वजन को बढ़ा सकता है। आइए, आज 13 मार्च को मनाए जा रहे World Sleep Day के मौके पर इस आर्टिकल में समझते हैं कि आपकी नींद और बढ़ते वजन के बीच क्या कनेक्शन है। नींद और मेटाबॉलिज्म का गहरा नाता जब हम पर्याप्त नींद नहीं लेते हैं, तो हमारे शरीर का वह सिस्टम गड़बड़ा जाता है जो हमारी ऊर्जा, भूख और फैट को कंट्रोल करता है। मुख्य रूप से दो हार्मोन हमारी भूख को नियंत्रित करते हैं:     घ्रेलिन: यह शरीर में भूख बढ़ाने का काम करता है।     लेप्टिन: यह पेट भरने का संकेत देता है। जब हमारी नींद पूरी नहीं होती, तो शरीर में घ्रेलिन (भूख बढ़ाने वाले हार्मोन) का स्तर बढ़ जाता है और लेप्टिन का स्तर कम हो जाता है। इसका नतीजा यह होता है कि हमें बार-बार भूख लगती है और हम सामान्य से ज्यादा, खासकर हाई-कैलोरी वाला खाना खाने लगते हैं। कैलोरी बर्न करने की क्षमता होती है कम नींद की कमी हमारी एनर्जी को भी प्रभावित करती है। थकावट के कारण शरीर की फिजिकल एक्टिविटी कम हो जाती है, जिससे कैलोरी बर्न होने की प्रक्रिया यानी मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है। लंबे समय तक कम नींद लेने से शरीर में ‘इंसुलिन रेजिस्टेंस’ भी बढ़ता है, जिससे शुगर का स्तर बिगड़ता है। धीरे-धीरे यही स्थिति मोटापे, टाइप-2 डायबिटीज और दिल से जुड़ी गंभीर बीमारियों का कारण बन जाती है। डॉक्टर ने बताए कमाल के हेल्थ सीक्रेट्स एशियन हॉस्पिटल के रेस्पिरेटरी, क्रिटिकल केयर एवं स्लीप मेडिसिन विभाग के डायरेक्टर और एचओडी डॉ. मानव मनचंदा बताते हैं कि नींद हमारे शरीर के मेटाबॉलिज्म को संतुलित रखने में एक बहुत बड़ा रोल निभाती है। जब व्यक्ति लगातार कम सोता है, तो हार्मोनल संतुलन बिगड़ने से शरीर में फैट जमा होने लगता है। इसलिए, मेटाबॉलिक बीमारियों से बचने और स्वस्थ जीवन जीने के लिए अच्छी गुणवत्ता वाली नींद लेना बेहद जरूरी है। अच्छी और गहरी नींद पाने के आसान तरीके अगर आप अपने वजन को कंट्रोल में रखना चाहते हैं और अच्छी नींद पाना चाहते हैं, तो इन आदतों को अपनाएं:     सोने का समय तय करें: रोजाना एक निश्चित समय पर सोने और उठने की आदत डालें।     गैजेट्स से दूरी: सोने से पहले मोबाइल, टीवी या लैपटॉप का इस्तेमाल न करें। इनकी स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी नींद लाने वाले ‘मेलाटोनिन’ हार्मोन को नुकसान पहुंचाती है।     कैफीन कम लें: शाम के समय चाय या कॉफी के सेवन से बचें।     हल्का भोजन और व्यायाम: रात का खाना हमेशा हल्का रखें और अपनी दिनचर्या में नियमित व्यायाम को शामिल करें।     डॉक्टर से मिलें: अगर आपको लगातार नींद न आने की समस्या हो रही है, तो बिना देर किए डॉक्टर से सलाह लें। अच्छी नींद का मतलब सिर्फ शरीर को आराम देना नहीं है, बल्कि यह आपको फिट रखने और मेटाबॉलिज्म को सही चलाने के लिए भी जरूरी है। इसलिए अगर आप सच में स्वस्थ रहना चाहते हैं, तो अपनी नींद को प्राथमिकता दें।  

LPG और बिजली से छुटकारा: धूप वाला चूल्हा बदल रहा रसोई की तस्वीर

नई दिल्ली LPG गैस सिलेंडर की किल्लत की खबरों के बीच इंडक्शन चूल्हे भी कई ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से आउट ऑफ स्टॉक जा चुके हैं। ऐसे में कोई आपसे कहे कि खाना पकाने के लिए ना तो LPG गैस की जरूरत है और ना ही बिजली की तो क्या आप विश्वास करेंगे? दरअसल हम बात कर रहे हैं धूप वाले चूल्हे यानी कि सोलर कुकर की। दरअसल यह एक ऐसा गैजेट या कहें कि चूल्हा है जो गैस की किल्लत और बिजली के भारी बिल से आपको हमेशा के लिए आजादी दिला सकता है। इसका इस्तेमाल उन इलाकों में बखूबी किया जा सकता है, जहां गर्मी अच्छी पड़ती है। कैसे काम करता है धूप वाला चूल्हा? सोलर कुकर विज्ञान और टेक्नोलॉजी का जबरदस्त मिक्सचर है। इस चूल्हे में चमकदार शीशा या रिफ्लेक्टर लगा होता है, जो कि सूरज की रौशनी को एक बिंदू पर फोकस करता है। यह अच्छी तरह से गर्म हो, इसके लिए चूल्हे के अंदर का हिस्सा पूरी तरह काला होता है। इसके ऊपर लगा कांच का ढक्कन ‘ग्रीन हाउस इफेक्ट’ पैदा करता है, यानी यह धूप की गर्मी को अंदर ही कैद कर लेता है और बाहर नहीं जाने देता। धूप वाले चूल्हे का तापमान 150°C से भी ज्यादा हो सकता है, जो दाल, चावल और सब्जियां पकाने के लिए काफी है। इसमें खाना धीमी आंच पर पकता है, जिससे उसके पोषक तत्व भी बने रहते हैं। धूप वाले चूल्हे की कीमत और कहां से खरीदें? अगर आप धूप वाला चूल्हा खरीदने का मन बना रहे हैं लेकिन जानना चाहते हैं कि इसकी कीमत क्या होती है और इसे कहां से खरीदा जा सकता है, तो बता दें कि बाजार में इसके दो ऑप्शन मिलते हैं। पहला सोलर कुकर एक बॉक्स के प्रकार का होता है, जो छोटे परिवार के लिए बेस्ट है और इसकी कीमत 2,500 से 4,500 रुपये के बीच होती है। दूसरी तरह के सोलर कुकर को पैराबोलिक कुकर कहते हैं. जो काफी ज्यादा और तेजी से गर्म होता है और 5,000 से 8,000 रुपये में खरीदा जा सकता है। आप इसे Amazon या Flipkart जैसी साइट्स से ऑनलाइन मंगा सकते हैं। इसके अलावा, केंद्र सरकार की अक्षय ऊर्जा योजनाओं के तहत सरकारी केंद्रों से सब्सिडी पर इसे काफी कम कीमत में भी खरीदा जा सकता है। इसके लिए आपको अपने नजदीकी जिला अक्षय ऊर्जा कार्यालय से संपर्क करना चाहिए। सोलर चूल्हे की खूबियां सोलर चूल्हे की तकनीक न केवल बचत के लिहाज से बेहतरीन है, बल्कि यह आपकी सेहत और सुरक्षा के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है।     इसे इस्तेमाल करने में ना गैस सिलेंडर पर खर्च करना पड़ता है और न ही बिजली के बिल की चिंता करनी पड़ती है। इसे एक बार खरीदने के लिए खर्चा करना पड़ सकता है लेकिन उसके बाद खाना बनाने का खर्चा हमेशा के लिए खत्म हो जाता है।     ​सोलर कुकर में खाना धीरे-धीरे पकता है, इससे खाने के जरूरी विटामिन और मिनरल्स नष्ट नहीं होते।     सोलर चूल्हे में न आग लगने का डर है, न गैस लीक होने की टेंशन और न ही बिजली के झटके का खतरा। इसे बच्चे या बुजुर्ग भी बिना किसी जोखिम के इस्तेमाल कर सकते हैं।     धूप वाले चूल्हे की बनावट बहुत सरल होती है। इसमें किसी तरह का एडवांस पुर्जा नहीं लगा होता है। ऐसे में यह सालों-साल बिना किसी खराबी के चलता है। आपको ज्यादा से ज्यादा से बस इसके शीशे और अंदरूनी हिस्सों को साफ रखना होता है। जानें कैसे इस्तेमाल होता है धूप वाला चूल्हा सोलर चूल्हे को इस्तेमाल करने के लिए आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। इसे ऐसी जगह रखकर इस्तेमाल करना चाहिए, जहां कम से कम 3 से 4 घंटे की सीधी और तेज धूप आती हो जैसे कि आपकी छत या बालकनी। खाना पकाने के लिए हमेशा काले रंग के बर्तनों का इस्तेमाल करें, क्योंकि काला रंग गर्मी को सबसे तेजी से खींचता है। सोलर चूल्हा गैस वाले चूल्हे के मुकाबले थोड़ा धीमा होता है, इसलिए सुबह 10-11 बजे बर्तन धूप में रखने पर दोपहर तक खाना अपने आप तैयार हो जाता है।

पावर बैंक का असली कमाल: सिर्फ चार्जिंग नहीं, इन 5 तरीकों से भी कर सकते हैं उपयोग

नई दिल्ली क्या आपको भी लगता है कि पावर बैंक का इस्तेमाल सिर्फ फोन या दूसरे डिवाइसेज को चार्ज करने के लिए होता है? अगर हां, तो आपको अंदाजा नहीं कि आपका पावर बैंक क्या-क्या काम कर सकता है। भले पावर बैंक बैटरी से लैस एक गैजेट हैं, जिसका इस्तेमाल दूसरे डिवाइस को चार्ज करने के लिए किया जाता है लेकिन इसका इस्तेमाल एक पावर सोर्स के तौर पर भी हो सकता है। जिस पल आप पावर बैंक को पावर सोर्स की तरह इस्तेमाल करना शुरू करते हैं, इसके इस्तेमाल की ढेरों संभावनाएं खुल जाती है। आपको जानकर शायद हैरानी हो कि आप चाहें तो पावर बैंक की मदद से यूएसबी फैन, लाइट और यहां तक कि सिक्योरिटी कैमरा तक चला सकते हैं। पावर बैंक को बनाएं लैंप पावर बैंक सिर्फ डिवाइस चार्ज करने के लिए नहीं होता। बाजार में यूएसबी लाइट्स मिल जाती हैं, जो आपके लिए नाइट लैंप के तौर पर काम आ सकती हैं। वहीं आप कैंपिंग के दौरान भी इसे लैंप बनाकर इस्तेमाल कर सकते हैं, तो एक पावरबैंक और यूएसबी लाइट के सेट को गाड़ी में भी रख सकते हैं। इसे आप जरूरत पड़ने पर इमरजेंसी लैंप के तौर पर भी इस्तेमाल कर पाएंगे। पावर बैंक से खाएं ठंडी हवा जिस तरह से बाजार में यूएसबी लाइट्स उपलब्ध हैं. वैसे ही आप मार्केट से यूएसबी फैन भी खरीद सकते हैं। इन्हें पावरबैंक में लगाकर आप ठंडी हवा खा सकते हैं। इन्हें काम करते हुए टेबल पर रखा जा सकता है या फिर किचन में गर्मी में चेहरे की ओर करके ठंडी हवा खाई जा सकती है। पावर बैंक को बनाएं हीटर बाजार में ऐसी कई जैक्ट्स या दस्ताने मिल जाते हैं, जिन्हें अगर पावर बैंक से कनेक्ट कर दिया जाए, तो वह आपको ठंडक में गर्म रख सकते हैं। इनका इस्तेमाल आप बाइक राइडिंग के दौरान या ठंडे इलाकों में घूमते हुए कर सकते हैं। पावर बैंक से रखें नजर आज मार्केट में ऐसे कई सीसीटीवी कैमरा उपलब्ध हैं, जो कि यूएसबी के जरिए कनेक्ट हो जाते हैं। अगर आप किसी ऐसी जगह कैमरा इंस्टॉल करना चाह रहे हैं, जहां प्लग पास नहीं है, तो इस तरह के छोटे कैमरे आप पावर बैंक की मदद से भी चला सकते हैं। हालांकि इसके लिए हर दो से तीन दिन में आपको पावर बैंक चार्ज करना पड़ेगा लेकिन इमरजेंसी में और कुछ देर का काम निकालने के लिए पावरबैंक आपकी काफी मदद कर सकते हैं। पावरबैंक से पाएं फोटोग्राफी में मदद अगर आप फोटोग्राफी करते हैं या रील्स बनाते हैं और आप लाइट्स पर खर्चा करने की सोच रहे हैं, तो बेहतर रहेगा कि आप यूएसबी वाली रिंग लाइट और पावर बैंक का कॉम्बो इस्तेमाल करें। इसके जरिए आप बेहतर लाइट्स के साथ वीडियो कॉल, फोटोग्राफी या रील्स बना सकते हैं। इस तरह पावर बैंक एक पावर सोर्स के तौर पर इस्तेमाल किया जाए, तो डिवाइस चार्ज करने से ज्यादा बहुत कुछ कर सकता हैं।

आंखों के नीचे काले घेरे हटाने के 7 सरल और कारगर टिप्स

आंखों के नीचे काले घेरे जहां हमारे खराब स्वास्थ्य,अधूरी नींद ,थकान ,आयु और हमारे तनाव को अभिव्यक्त करते हैं, वहीं ये हमारे अच्छे भले सौंदर्य को अनाकर्षक बना देते हैं ।उपरोक्त लेख में हम इस समस्या के कारणों और समाधान के उपायों का उल्लेख करेंगे जिन्हें अपना कर आप भी अपनी आंखों के काले घेरों की समस्या का समाधान कर सकेंगे। आंखों के काले घेरों के कारण… -अपर्याप्त नींद आंखों के काले घेरों की समस्या का प्रमुख कारण है। -खराब स्वास्थ्य के कारण भी आंखों के नीचे काले घेरे पड जाते हैं। -आयरन की कमी भी काले घेरों की समस्या का कारण है । -विटामिन ‘ए’ की कमी भी काले घेरों की समस्या को उत्पन्न करती है। -आंखों के प्रति असावधानी रखना भी इस समस्या को उत्पन्न करती है। -आनुवांशिक कारणों से भी यह समस्या उत्पन्न हो जाती है। -अध्ययन करते समय पर्याप्त प्रकाश न होना भी काले घेरों की समस्या को उत्पन्न करता है।   क्या करें? -पर्याप्त नींद लें। -पानी का पर्याप्त सेवन करें। -दूध और अंडे का सेवन करें। -लाल पके टमाटरों का नियमित सेवन करें। -आंखों का नियमित व्यायाम करें। -व्यर्थ की चिन्ता और तनाव से बचें। -गाजर के रस का नियमित सेवन करें। -शराब व धूम्रपान के सेवन से बचें। -ताजा गुलाब के फूलों से बने गुलकंद का सेवन करें। -आंखों पर खीरे का रस भी लगाएं। -ऐलोवेरा के पल्प से आंखों की मसाज करने से काले घेरों की समस्या का समाधान होता है। -आंखों के काले घेरों को साफ करने के लिए आलू के रस को आंखों के चारों ओर लगाकर हल्के हाथों से मसाज करें।  

बिना पर्चे वाली दवाइयों से किडनी पर असर, AIIMS के डॉक्टर ने बताए जरूरी टेस्ट और यूरिन का रंग

नई दिल्ली World Kidney Day:12 मार्च को वर्ल्ड किडनी डे मनाया जाता है और इस दिन लोगों को किडनी हेल्थ के लिए अवेयर किया जाता है. भारत में किडनी की बीमारियों का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है और दुनिया भर में भारत दूसरे नंबर पर है जहां पर सबसे अधिक क्रोनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) के मरीज हैं. भारत में किडनी की बीमारी अब सिर्फ बुजुर्गों की समस्या नहीं रह गई है, 15 साल से ऊपर की आबादी में भी क्रॉनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) की चपेट में आ रहे हैं. ‘ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज’ के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में लगभग 17% आबादी किसी न किसी रूप में किडनी की समस्या से जूझ रही है. वर्ल्ड किडनी डे पर AIIMS भोपाल के डॉक्यर ने बताया है कि कैसे छोटी-छोटी गलतियां आपकी किडनी फेल कर सकती हैं। यंगस्टर्स में क्यों बढ़ रहा है खतरा? AIIMS भोपाल के यूरोलॉजिस्ट और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. केतन मेहरा ने बताया, ‘किडनी की समस्या सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं है. मेरे पास ऐसे कई मरीज आते हैं जो 20 साल के आसपास के हैं या उससे भी कम हैं. ऐसे लोगों में किडनी खराब होने का एक बड़ा कारण ‘ऑटो-इम्यून डिजीज’ है जिसमें शरीर की इम्यूनिटी ही किडनी को नुकसान पहुंचाने लगती है. इसके अलावा, कई मामलों में कारण का पता नहीं चल पाता जिसे मेडिकल भाषा में ‘क्रिप्टोजेनिक’ कहते हैं. युवाओं में सिरदर्द, पैरों में सूजन और धुंधला दिखना जैसे लक्षणों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है जो बाद में किडनी फेलियर के रूप में सामने आते हैं। पेनकिलर्स बन रहे दुश्मन डॉ. कहते हैं, ‘आजकल सिरदर्द या शरीर में दर्द होने पर लोग बिना डॉक्टर की सलाह के दर्द निवारक दवाइयां खा लेते हैं. ऐसे में हैवी डोज वाली पेनकिलर्स किडनी को सीधा नुकसान पहुंचाती हैं. हालांकि पैरासिटामोल को सुरक्षित माना जाता है लेकिन अन्य हेवी पेनकिलर्स का लगातार सेवन किडनी फेलियर का बड़ा कारण बन रहा है. बिना डॉक्टरी पर्चे के कोई भी दर्द निवारक दवा लेना जोखिम भरा हो सकता है। किडनी की सेहत के लिए जरूरी टेस्ट हमारी किडनी 50% तक खराब होने पर भी खुद को कॉम्पेंसेट (एडजस्ट) कर लेती है, इसलिए लक्षण तब दिखते हैं जब नुकसान ज्यादा हो चुका होता ह इसलिए समय-समय पर जांच ही बचाव का एकमात्र रास्ता है। डॉ. मेहरा ने बताया, ‘अगर आपको ऊपर दिए गए लक्षण महसूस होते हैं तो तुरंत जांच करानी चाहिए. इसके अलावा समय-समय पर कुछ टेस्ट कराते रहें ताकि आपको अपनी किडनी की सेहत का पता चलता रहे। KFT/RFT (किडनी फंक्शन टेस्ट): इसमें मुख्य रूप से सेरम यूरिया और सेरम क्रिएटिनिन की जांच की जाती है। इलेक्ट्रोलाइट्स: ब्लड में सोडियम और पोटेशियम के लेवल की जांच। यूरिन रूटीन: यूरिन में प्रोटीन या अन्य तत्वों की मौजूदगी देखने के लिए। यूरिन भी बताती है किडनी खतरे में है डॉ. मेहरा के अनुसार, ‘किडनी शरीर के टॉक्सिन्स को बाहर निकालने का काम करती है. यूरिन का रंग और उसकी फ्रीक्वेंसी किडनी की सेहत का हाल बता देती है इसलिए सभी को अपनी यूरिन के कलर और फिक्वेंसी पर भी ध्यान देना चाहिए। कम यूरिन आना: अगर आपको पहले की तुलना में कम पेशाब आ रहा है, तो यह किडनी के सही से काम न करने का संकेत है। डार्क या कॉफी कलर: यदि यूरिन का रंग गहरा यानी कोला या ब्लैक कॉफी कलर का आ रहा है तो समझ लीजिए कि मामला गंभीर है। झाग या सूजन: चेहरे और पैरों पर सूजन आना इस बात का संकेत है कि किडनी लिक्विड को शरीर से बाहर नहीं निकाल पा रही है और वह अंदर ही जमा हो रहा है।

बेचैन मन को शांत करने का उपाय, नित्यानंद चरण दास ने बताए जीवन के मंत्र

जीवन में हर इंसान मुश्किल हालातों से गुजरता है। कोई वही परिस्थिति देखकर टूट जाता है, तो कोई उसी स्थिति में आगे बढ़ने का रास्ता खोज लेता है। फर्क हालात में नहीं, बल्कि मन की स्थिति में होता है। नित्यानंद चरण दास के अनुसार, ‘जीवन पहले नहीं बदलता, मन बदलता है। और जब मन बदलता है, तो जीवन अपने आप बदलने लगता है।’ भगवद गीता में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं – ‘मनुष्य को चाहिए कि वह अपने मन के द्वारा स्वयं का उद्धार करे और स्वयं का पतन ना करे। क्योंकि मन ही मनुष्य का मित्र है और मन ही उसका शत्रु।’ यह श्लोक हमें सिखाता है कि हमारा सबसे बड़ा सहारा और सबसे बड़ी चुनौती- दोनों हमारा मन ही है। नित्यानंद चरण दास बताते हैं कि एक ही परिस्थिति दो लोगों के लिए बिल्कुल अलग परिणाम दे सकती है। इसका कारण है- मन का नजरिया।     जब मन कमजोर होता है, तब हर स्थिति समस्या लगती है।     जब मन संतुलित होता है, वही स्थिति चुनौती बन जाती है। कमजोर मन की पहचान जब मन कमजोर होता है, तो व्यक्ति छोटी-छोटी बातों से घबरा जाता है। नकारात्मक सोच हावी रहती है। डर, असुरक्षा और तुलना मन को नियंत्रित करने लगती है। ऐसे में व्यक्ति हालात को दोष देता है- कभी लोगों को, कभी किस्मत को और कभी भगवान को। कमजोर मन समाधान नहीं, सिर्फ शिकायत खोजता है। संतुलित मन की ताकत संतुलित मन हालात से भागता नहीं, बल्कि उन्हें समझता है। ऐसा मन जानता है कि हर चुनौती कुछ सिखाने आई है। नित्यानंद चरण दास के अनुसार, संतुलित मन वाला व्यक्ति यह नहीं पूछता कि ‘मेरे साथ ही ऐसा क्यों?’, बल्कि यह पूछता है कि ‘इससे मुझे क्या सीख मिल सकती है?’ यही सोच व्यक्ति को भीतर से मजबूत बनाती है। मन को कैसे बनाएं अपना मित्र?     आत्मनिरीक्षण करें: अपने विचारों को रोज देखें, परखें और सुधारें।     शास्त्रों का अध्ययन: गीता जैसे ग्रंथ मन को दिशा देते हैं।     सकारात्मक संगति: जैसा संग होगा, वैसा ही मन बनेगा।     ध्यान और प्रार्थना: ये मन को शांत और स्थिर बनाते हैं।     स्वीकार करना सीखें: हर चीज आपके नियंत्रण में नहीं होती, यह स्वीकार करना भी शक्ति है। जीवन मंत्र: जीवन की परिस्थितियां अक्सर हमारे बस में नहीं होतीं, लेकिन उन पर हमारी प्रतिक्रिया पूरी तरह हमारे हाथ में होती है। अगर मन कमजोर है, तो जीवन बोझ बन जाता है। और अगर मन संतुलित है, तो वही जीवन साधना बन जाता है। इसलिए जैसा नित्यानंद चरण दास कहते हैं- पहले मन को समझिए, जीवन अपने आप समझ में आने लगेगा।

Google ने क्रोम ब्राउजर को स्मार्ट बनाया, इनबिल्ट Gemini से ब्राउजर बनेगा और भी कामकाजी

नई दिल्ली इंटरनेट ब्राउज़िंग का तरीका धीरे-धीरे बदल रहा है. ब्राउजर में एजेंटिक फीचर्स मिल रहे हैं. Perplexity Comet हो या या OpenAI का ATLAS ब्राउजर, ये सभी एजेंटिक AI देते हैं. यानी ब्राउजर खुद ही आपका काम कर देता है।Google ने अपने ब्राउज़र Google Chrome में Google Gemini AI को भारत में रोलआउट करना शुरू कर दिया है। इसके साथ ही यह फीचर कनाडा और न्यूज़ीलैंड के यूज़र्स को भी दिया जा रहा है. गूगल ने इस फीचर का ऐलान पहले ही कर दिया था और तब से यूजर्स को इसका इंतजार था। क्रोम में ऐसे यूज होगा गूगल जेमिनी अब तक Gemini का इस्तेमाल अलग ऐप या वेबसाइट के जरिए किया जाता था. लेकिन इस अपडेट के बाद यह सीधे Chrome के अंदर काम करेगा. यानी अगर आप कोई खबर पढ़ रहे हैं, किसी प्रोडक्ट के बारे में जानकारी देख रहे हैं या किसी टॉपिक पर सर्च कर रहे हैं, तो उसी पेज पर AI से सवाल पूछ सकते हैं. इसके लिए अलग से नया टैब खोलने की जरूरत नहीं होगी। साइड पैनल में जुड़ा Gemini Chrome में यह फीचर एक साइड पैनल के रूप में दिखेगा. यूज़र इसे खोलकर Gemini से चैट कर सकते हैं. अगर कोई आर्टिकल बहुत लंबा है तो AI से उसका समरी पूछा जा सकता है। अगर किसी वेबसाइट पर दी गई जानकारी थोड़ी मुश्किल है तो Gemini उसे आसान भाषा में समझा सकता है. उदाहरण के तौर पर अगर कोई टेक्नोलॉजी या फाइनेंस से जुड़ा आर्टिकल पढ़ रहा है, तो AI से पूछा जा सकता है कि इसका मतलब क्या है या इसका छोटा सार क्या है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समझेगा कॉन्टेक्स्ट इस फीचर की एक और खास बात यह है कि AI एक से ज्यादा टैब को भी समझ सकता है. मान लीजिए आपने किसी स्मार्टफोन या लैपटॉप के बारे में अलग-अलग वेबसाइट खोल रखी हैं। ऐसे में Gemini उन टैब्स में दी गई जानकारी को देखकर तुलना करने में मदद कर सकता है. इससे यूज़र को अलग-अलग साइट पढ़ने में ज्यादा समय नहीं लगाना पड़ेगा। डेस्क्टॉप यूजर्स को पहले मिलेगा ये फीचर रिपोर्ट्स के मुताबिक यह फीचर अभी धीरे-धीरे रोलआउट किया जा रहा है. सबसे पहले इसे डेस्कटॉप यूज़र्स के लिए लाया गया है. यानी Windows और Mac पर Chrome इस्तेमाल करने वाले यूज़र्स को यह फीचर मिलने लगा है. आने वाले समय में इसे और ज्यादा यूज़र्स तक पहुंचाया जा सकता है। भारत को ध्यान में रखते हुए इसमें कई भाषाओं का सपोर्ट भी दिया गया है. इससे यूज़र अपनी भाषा में भी AI से सवाल पूछ सकेंगे. यानी अगर कोई हिंदी में सवाल पूछता है तो AI उसी भाषा में जवाब दे सकता है। दरअसल पिछले कुछ समय से टेक कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स में AI को तेजी से जोड़ रही हैं. गूगल पहले ही Gemini को अपने कई प्रोडक्ट्स में ला चुका है. अब Chrome में इसका इंटीग्रेशन दिखाता है कि कंपनी चाहती है कि यूज़र्स को ब्राउज़र के अंदर ही एक AI असिस्टेंट मिल जाए, जो इंटरनेट इस्तेमाल करते समय तुरंत मदद कर सके।  

89,999 रुपये में लॉन्च हुई Xiaomi 17 सीरीज, कैमरा और AI फीचर्स बने सबसे बड़ा आकर्षण

नई दिल्ली शाओमी 17 सीरीज को भारत में लॉन्‍च कर द‍िया गया है। कई द‍िनों से ये स्‍मार्टफोन्‍स चर्चा में थे। इनका ग्‍लोबल लॉन्‍च फरवरी महीने के आखिर में हुआ था। चीन में इन्‍हें पिछले साल ही पेश कर दिया गया था। अब ये भारत में भी आ गए हैं। Xiaomi 17 की शुरुआती कीमत 89999 रुपये रखी गई है, जबक‍ि अल्‍ट्रा मॉडल को खरीदने के लिए 1,29,999 रुपये चुकाने होंगे। सवाल है कि शाओमी की इस प्रीमियम सीरीज को खरीदा जाना चाहिए या नहीं। इसमें क्‍या खास है और क्‍या एवरेज, आइए जानते हैं। Xiaomi 17 Series प्राइस इन इंडिया Xiaomi 17 सीरीज के दाम 89,999 रुपये से शुरू होते हैं। अर्ली बर्ड पीरियड के तहत कंपनी 512 जीबी मॉडल को भी 256 जीबी वेरिएंट वाली कीमत में यानी 89,999 रुपये में ऑफर कर रही है। Xiaomi 17 Ultra की कीमत 1,29,999 रुपये है। एसबीआई क्रेड‍िट कार्ड्स पर 10 हजार रुपये का इंस्‍टेंट डिस्‍काउंट लिया जा सकता है। इस फोन के साथ कंपनी फोटोग्राफी किट भी लेकर आई है जिसकी कीमत 19,999 रुपये है। इन डिवाइसेज को खरीदने पर कंपनी स्‍पॉटिफाई का 4 महीने का प्रीमियम प्‍लान दे रही है। 3 महीने के लिए Google AI Pro और 3 महीने के लिए यूट्यूब प्रीमियम दिया जा रहा है। Xiaomi 17 सीरीज की सेल एमेजॉन, mi.com और Xiaomi रिटेल स्‍टोर्स पर 18 मार्च से शुरू होगी। Xiaomi 17 फीचर्स, स्‍पेसिफि‍केशंस     डिस्‍प्‍ले: 6.3 इंच क्र‍िस्‍टलरेस OLED डिस्‍प्‍ले, 120 हर्त्‍ज रिफ्रेश रेट, 3,500 निट्स पीक ब्राइटनैस, HDR10+ के साथ डॉल्‍बी विजन सपोर्ट     चिपसेट: Snapdragon 8 Elite Gen 5     रैम : 12 जीबी     स्‍टोरेज : 256 जीबी और 512 जीबी     ओएस: एंड्रॉयड 16 पर बेस्‍ड शाओमी हाइपर ओएस 3     कैमरा: 50 मेगापिक्‍सल का मेन सेंसर, 50 मेगापिक्‍सल टेलिफोटो कैमरा, 50 मेगापिक्‍सल अल्‍ट्रावाइड कैमरा     फ्रंट कैमरा: 50 मेगा‍प‍िक्‍सल     बैटरी: 6330 एमएएच, 100 वॉट चार्जिंग सपोर्ट     वजन: 191 ग्राम Xiaomi 17 अल्‍ट्रा फीचर्स, स्‍पेसिफि‍केशंस     डिस्‍प्‍ले: 6.9 इंच शाओमी हाइपर आरजीबी OLED डिस्‍प्‍ले, 120 हर्त्‍ज रिफ्रेश रेट, 3,500 निट्स पीक ब्राइटनैस, HDR10+ के साथ डॉल्‍बी विजन सपोर्ट     चिपसेट: Snapdragon 8 Elite Gen 5     रैम : 16 जीबी     स्‍टोरेज : 512 जीबी     ओएस: एंड्रॉयड 16 पर बेस्‍ड शाओमी हाइपर ओएस 3     कैमरा: 50 मेगापिक्‍सल का मेन सेंसर, 200 मेगापिक्‍सल टेलिफोटो कैमरा, 50 मेगापिक्‍सल अल्‍ट्रावाइड कैमरा     फ्रंट कैमरा: 50 मेगा‍प‍िक्‍सल     बैटरी: 6000 एमएएच, 90 वॉट चार्जिंग सपोर्ट     वजन: 219 ग्राम Xiaomi 17 और Xiaomi 17 अल्‍ट्रा में मुख्‍य फर्क Xiaomi 17 के मुकाबले अल्‍ट्रा मॉडल में बड़ा डिस्‍प्‍ले दिया गया है। परफॉर्मेंस में दोनों फोन्‍स एक जैसे हैं। कैमरों का मुख्‍य फर्क है। अल्‍ट्रा मॉडल में दिए गए 200 मेगापिक्‍सल के टेल‍िफोटो कैमरा की जूम‍िंग क्षमता काफी अधिक है बेस मॉडल से। Xiaomi 17 और Xiaomi 17 अल्‍ट्रा काे खरीदें या नहीं दोनों ही फोन में फ्लैगशि‍प फीचर्स दिए गए हैं, लेकिन कीमत बहुत ज्‍यादा महसूस हुई मुझे। इस कीमत में सैमसंग और ऐपल का मुकाबला करना बहुत मुश्किल है। इसमें कोई दो-राय नहीं कि शाओमी ने अच्‍छे फीचर्स ऑफर किए हैं। आपको अच्‍छा डिस्‍प्‍ले, परफॉर्मेंस और शानदार कैमरा चाहिए तो ये फोन न‍िराश नहीं करेंगे। लेकिन इतनी कीमत में आईफोन 17 और सैमसंग की S सीरीज के नए मॉडल भी मिल रहे हैं जो ब्रैंड के आधार पर आकर्षित ज्‍यादा करते हैं।

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