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सांस की बीमारी से परेशान होते बच्चे

वातावरण से हमारे श्वसन तंत्र का सीधा संबंध होता है। वातावरण में विशेष रूप से आधुनिक शहरी वातावरण में कई तरह के जीवाणु और दूषित तत्व हर वक्त मौजूद रहते हैं। इसी वजह से श्वसन तंत्र में संक्रमण आसानी से और लगातार होते रहते हैं। बचपन में तो श्वसन तंत्र की समस्या आम होती है। कई बार बचपन और बुढ़ापा दोनों अवस्थाओं में यह बीमारी गंभीर रूप धारण कर लेती है और यही नहीं कई बार यह मौत का कारण भी बन सकती है। आमतौर पर श्वसन तंत्र का संक्रमण अगर युवा वर्ग के लोगों को होता है तो वे कुछ दिनों में स्वस्थ हो जाते हैं, लेकिन छोटे बच्चों, बूढ़ों में इस रोग के गंभीर रूप धारण करने की आशंका होती है क्योंकि उनके शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता तो कम होती ही है, साथ ही फेफड़ों की क्षमता भी कम होती है। श्वसन तंत्र के ऊपर के भाग में जुकाम, गले में खराश, कान में दर्द, मवाद आना, गला खराब होना आदि के रूप में संक्रमण हो सकता है या फिर श्वसन तंत्र के निचले भाग में स्वर तंत्र या श्वसन मार्ग में या फिर फेफड़ों में संक्रमण (न्यूमोनिया) हो सकता है। आज भी हर साल 40 लाख बच्चों की मृत्यु श्वसन तंत्र के रोग के गंभीर रूप के कारण हो जाती है। छोटे बच्चों में तो औसतन हर साल 5 से 8 बार श्वसन तंत्र में संक्रमण के मामले सामने आ ही जाते हैं। ज्यादातर मामलों में बच्चों को बीमारी मामूली ही होती है और बच्चे जल्दी ठीक हो जाते हैं पर बार−बार बीमार होने से माता−पिता परेशान रहते हैं। श्वसन तंत्र का संक्रमण कान में फैलने से बच्चे बहरे हो सकते हैं। यही नहीं संक्रमण अगर खतरनाक जीवाणु से हुआ हो या इलाज में लापरवाही बरती गई हो तो यह प्राणघातक भी हो सकता है। श्वसन तंत्र में संक्रमण कई तरह के वायरस की वजह से होता है जैसे बैक्टीरिया, फफूंद। बच्चों में धूल पराग कण, ठंडक, धुंआ, गरमी, खुशबू आदि से यह समस्या शुरू होती है। इसके अलावा बच्चे वायरस बैक्टीरिया के संक्रमण के शिकार भी हो सकते हैं। अगर बच्चे कुपोषण के शिकार हैं, शरीर कई बीमारियों का घर है, दमा रोग है या फिर फेफड़ों का संक्रमण किसी खतरनाक जीवाणु से हुआ हो तो रोग गंभीर रूप धारण कर सकता है। अगर घर के अंदर या आसपास का वातावरण अच्छा नहीं प्रदूषित है, घर के आसपास कोई फैक्टरी है, घर में धूम्रपान किया जाता है या जन्म के समय शिशु का वजन कम है, बच्चा निर्धारित समय से पहले पैदा हुआ है तो रोग गंभीर रूप धारण कर सकता है। गांवों का वातावरण काफी खुला और शहरों की तुलना में काफी कम प्रदूषित होता है। इसलिए शहरी बच्चों खासकर गंदी बस्ती, झुग्गी झोपड़ी में रहने वालों में श्वसन तंत्र के संक्रमण की ज्यादा संभावना होती है। इस रोग के लक्षण इसकी गंभीरता पर निर्भर करते हैं। बच्चों में नाक बहने, गले में खराश, बुखार, खांसी, गले या कान में दर्द, कान बहना, सांस लेने में परेशानी, हांफना, शरीर नीला पड़ना, छाती में दर्द जैसी परेशानियां हो सकती हैं। रोग की शुरुआत में छोटे बच्चे दूध पीना बंद कर देते हैं। कभी−कभी शरीर ठंडा पड़ जाता है वे चिड़चिडे हो जाते हैं। उनकी सांस भी तेजी से चलने लगती है और अगर बच्चा न्यूमोनिया से पीड़ित है तो शरीर नीला पड़ जाता है, सांस लेने पर छाती अंदर धंस जाती है। श्वसन तंत्र का संक्रमण मामूली भी हो सकता है और गंभीर भी। इसलिए रोग कितना गंभीर है यह जानना बहुत जरूरी होता है। रोग की गंभीरता के अनुसार ही इलाज और देखभाल की आवश्यकता होती है। इस रोग में बच्चों को तेज बुखार होता है वे ठीक से सो नहीं पाते और वे दूध भी नहीं पी पाते हैं। यहीं नहीं उन्हें झटके भी आ सकते हैं। अगर बच्चे शांत पड़े हैं तो छाती से तेज आवाज आती है। सांस लेते वक्त छाती अंदर को धंस जाती है। सांस काफी तेज गति से चलती है। ऐसी स्थिति में बच्चों को तुरन्त अस्पताल में भर्ती कराना चाहिए जहां पर समुचित उपचार आक्सीजन एंटीबायोटिक आदि दवाएं उसे दी जाती हैं। ऐसे में जरा भी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए क्योंकि यह स्थिति अत्याधिक गंभीर बीमारी की होती है। अगर सांस लेते वक्त पसलियां अंदर को धंसती हैं, नथूने फूल जाते हैं, गले से गुर्राहट जैसी आवाज निकलती है, शरीर नीला पड़ जाता है तो समझ लें कि बच्चा गंभीर न्यूमोनिया की चपेट में है। ऐसे बच्चों को फौरन अस्पताल में भरती कराना आवश्यक होता है। श्वसन तंत्र के संक्रमण के रोग से पीड़ित अधिकतर बच्चे साधारण इलाज से कुछ ही दिनों में ठीक हो जाते हैं फिर भी बच्चों पर नजर रखनी चाहिए। अगर रोग गंभीर हों तो लक्षणों को पहचान कर तुरन्त डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। अगर बचपन में खांसी, जुकाम, सांस फूलने की समस्या लगातार एक माह तक रहती है तो उसे टीवी, दमा, काली खांसी होने की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में उचित जांच द्वारा लक्षणों की वजह जान कर इलाज करवाना चाहिए।  

ब्लैकफोनः इस फोन का दुरुपयोग संभव नहीं

अधिकांश लोगों को मोबाइल फोन खो जाने का उतना अफसोस नहीं होता जितना कि उसमें मौजूद डेटा के खो जाने या फिर गलत हाथों में पहुँच जाने को होता है। बड़ी कंपनियों के अधिकारियों और सरकारी नौकरशाहों के लिए तो यह बेहद चिंता का मुद्दा बन जाता है, जिनके फोन में कई संवेदनशील जानकारियाँ, सूचनाएँ, फोन नंबर आदि हो सकते हैं। इन्हीं चिंताओं के मद्देनजर एक अदद ऐसे स्मार्टफोन की तलाश लंबे समय से की जाती रही है जो या तो गुम ही न हो पाए और अगर गुम हो जाए तो कम से कम उसमें मौजूद डेटा गलत हाथों में न पड़ने पाए। बहरहाल, हैकर तो हैकर हैं। उनके हाथ में अगर कोई फोन पहुँच जाए तो भले ही उसमें सिक्यूरिटी के कितने भी ठोस इंतजाम क्यों न हों, आपके डेटा की सुरक्षा की गारंटी नहीं ली जा सकती। कहते हैं कि सुरक्षा के इंतजाम एक कदम आगे बढ़ते हैं तो अपराधी तत्व दो कदम आगे बढ़ जाते हैं। ऐसे में एक नये स्मार्टफोन ने इस समस्या के समाधान की उम्मीद जगाई है। इस फोन का नाम है- ब्लैक फोन और इसे बनाया है मशहूर विमान-निर्माता कंपनी बोइंग ने। बोइंग ने हाल ही में इस फोन का प्रदर्शन किया, जो है तो किसी भी आम-फहम स्मार्टफोन जैसा ही, लेकिन फर्क यह है कि वह एक अदृश्य सुरक्षा आवरण से लैस है। ब्लैक फोन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अगर वह गलत हाथों में पड़ जाता है तो वह अपने भीतर मौजूद सारी सूचनाओं को खुद ही नष्ट कर देता है। जब कोई शख्स कई बार कोशिश करने के बाद भी सही पासवर्ड डालने में नाकाम रहता है और उसके बाद वह स्मार्टफोन के केस को खोलने की कोशिश करता है, तो फोन में मौजूद सुरक्षा प्रणाली समझ जाती है कि कोई व्यक्ति उसके अनधिकृत इस्तेमाल की कोशिश कर रहा है। नतीजा? तीस सैकंड के भीतर ही समूचे डेटा को डिलीट करने के साथ-साथ यह फोन अपनी संचार तथा संचालन प्रणाली को भी निष्क्रिय कर देता है जिससे वह इस्तेमाल के काबिल नहीं रह जाता। जेम्स बॉन्ड की किसी फिल्म की पटकथा जैसा लगता है ना? ब्लैकफोन को बड़े सरकारी अधिकारियों और बड़े कारोबारियों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। इसके जरिए किए जाने वाले सभी टेलीफोन कॉल एनक्रिप्टेड होते हैं यानी कोई खुफिया एजेंसी या हैकर संचार नेटवर्क में सेंध लगाकर उन्हें सुन नहीं सकता। यह गूगल के एंड्रोइड ऑपरेटिंग सिस्टम से लैस है और सीडीएमए, जीएसएम तथा एलटीई (4जी) नेटवर्कों में काम कर सकता है। वाइ-फाई और ब्लूटूथ कनेक्टिविटी भी मौजूद है। इसका आकार आइफोन से थोड़ा बड़ा है और इसमें ड्युअल सिम कार्ड मौजूद हैं। इसकी बैटरी सोलर पावर से भी चार्ज हो सकती है।  

भारत में जल्द दस्तक देगा iQoo नए Z9 Turbo Endurance एडिशन

नई दिल्ली iQoo ने नए स्मार्टफोन को लाने की तैयारी कर दी है। नए एडिशन का नाम Z9 Turbo Endurance दिया गया है। नए वैरिएंट में बेहतरीन बैटरी लाइफ मिलने वाली है। क्योंकि इसमें 6400 mAh बैटरी दी गई है जो यूजर एक्सपीरियंस काफी अच्छा देने वाली है। यानी यूजर्स को कोई परेशानी नहीं होगी। बैटरी कैपेसिटी में यूजर्स को कई शानदार अपडेट्स मिले हैं। Z9 Turbo के मुकाबले इस फोन में 400 mAh ज्यादा दी गई है। पावर के लिहाज से भी ये काफी पॉजिटिव साउंड करता है। फोन में फ्लैगशिप स्नैपड्रैगन 8s Gen 3 चिपसेट दिया जाता है। यानी यूजर्स को परफॉर्मेंस भी काफी अच्छी मिलती है। दमदार प्रोसेसर के साथ शानदार डिस्प्ले Endurance Edition में स्लिम डिजाइन दिया जाता है। साथ ही सिलिकॉन-कार्बन बैटरी मिलती है। बड़ी बैटरी के साथ फोन का डिजाइन काफी मदद करता है। iQoo की तरफ से फोन ‘Flying Blue’ कलर ऑप्शन में दिया जाता है। क्लासिक ब्लैक, व्हाइट और ब्लू में आपको ऑप्शन दिया जाता है। Z9 Turbo में यूजर्स को 6.78 इंच AMOLED डिस्प्ले मिलती है। यानी डिस्प्ले में यूजर्स को Full HD+ रेजोल्यूशन दियाजाता है और 144Hz रिफ्रेश रेट मिलता है। विजुअल और व्यू एक्सपीरियंस भी आपको काफी अच्छा मिलता है। कब हो सकता है लॉन्च कैमरा सिस्टम भी अपग्रेड किया गया है। फोन में 50MP का प्राइमरी सेंसर कैमरा मिलता है और 8MP अल्ट्रावाइड लेंस भी दिया जाता है। फोटोग्राफी एक्सपीरियंस भी आपका काफी अच्छा होने वाला है। फोन में 80W वायर फास्ट चार्जिंग मिलती है। पावर अप भी आसानी से किया जा सकता है। अब बात करें कि ये फोन लॉन्च कब हो सकता है तो आपको बता दें कि ये फोन अगले महीने लॉन्च किया जा सकता है। चीन में ये फोन प्री-ऑर्डर के लिए उपलब्ध होगा। भारत मार्केट में भी ये फोन बहुत जल्द उपलब्ध होगा। हालांकि अभी तक कीमत को लेकर जानकारी सामने नहीं आई है। रिपोर्ट्स की मानें तो जनवरी में ये फोन भारत में दस्तक दे सकता है।

भारत में जनवरी में लॉन्च हो सकता है OnePlus 13 और 13R

नई दिल्ली OnePlus नई सीरीज के साथ भारत में दस्तक देने वाला है। OnePlue 13 और 13R 7 जनवरी 2025 को भारत में दस्तक दे सकती है। फ्लैगशिप डिवाइस की कीमत और लॉन्च को लेकर बड़ी जानकारी सामने आ गई है। हालांकि अभी तक इससे संबंधित कीमत का पता नहीं चल पाया है। टिप्सटर योगेश बरार ने कीमत और अन्य फीचर्स सामने आए हैं। कितनी हो सकती है कीमत OnePlus 13 की बात करें तो इसकी कीमत 67 हजार रुपए से 70 हजार रुपए तक हो सकती है। फोन को 12GB RAM + 256GB Storage और 16GB RAM + 512GB Storage वैरिएंट में लाया जा सकता है। यानी OnePlus 12 सीरीज के मुकाबले ये थोड़े से महंगे हो सकते हैं। क्योंकि OnePlus 12 सीरीज की शुरुआती कीमत 64,999 रुपए रखी गई थी। अब इसे ज्यादा कर दिया गया है। OnePlus 13R को 12GB+256GB स्टोरेज वैरिएंट के साथ लाया जा सकता है। OnePlus 13 की स्पेसिफिकेशन OnePlus 13 में 6.82-inch 2K AMOLED डिस्प्ले मिलती है। साथ ही 120Hz रिफ्रेश रेट मिलने वाली है। इसके अलावा QHD+ रेजोल्यूशन वाली स्क्रीन यूजर एक्सपीरियंस बेहतर कर सकती है। फोन में Qualcomm का Snapdragon 8 Gen 3 चिपसेट दिया गया है, जिसकी स्पीड काफी अच्छी दी जाती है। इस फोन में 50MP का डुअल रियर कैमरा दिया जाता है। साथ ही 32MP AI फ्रंट कैमरा मिलता है। फोन में 6000 mAh बैटरी मिलती है। यानी आपको बैटरी बैकअप भी काफी अच्छआ मिलने वाला है। Gorilla Glass Victus 2 की वजह से आपको ड्यूरेबिलिटी भी काफी अच्छी मिलेगी। OnePlus 13R की स्पेसिफिकेशन OnePlus 13R की बात करें तो इसमें 6.78 इंच Full HD+ AMOLED डिस्प्ले मिल सकता है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट के सात आता है। फोन में Snapdragon 8 Gen 3 processor मिलने वाला है। हालांकि इसमें बैटरी 6400 mAh मिलने वाली है जो 80W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ आता है।

पुरानी नौकरी से इस्तीफा देने से पहले ध्यान रखें ये बातें

करियर की राह में आगे बढ़ने के लिए पुरानी नौकरी से इस्तीफा देने में कुछ भी गलत नहीं है। पर, यह निर्णय कभी भी जल्दबाजी में नहीं, बल्कि सोच-समझकर लिया जाना चाहिए। लिंक्डइन के द्वारा किए गए एक सर्वे के मुताबिक लगभग 88 प्रतिशत कामकाजी लोग इस साल अपनी नौकरी बदलने की योजना बना रहे हैं। यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में चार प्रतिशत ज्यादा है। सर्वे में शामिल 42 प्रतिशत लोग बेहतर वर्क-लाइफ संतुलन के लिए नौकरी बदलना चाहते हैं, तो वहीं 37 प्रतिशत लोग बेहतर सैलरी के लिए नौकरी बदलने की योजना बना रहे हैं। सर्वे में शामिल हर 10 में से आठ लोगों ने माना कि वे अपने वर्तमान प्रोफेशन की जगह किसी और प्रोफेशन में भी अपना भविष्य तलाश सकते हैं। पर, यह भी सच है कि नई नौकरी और नए विकल्प की तलाश करने के लिए पुरानी नौकरी छोड़ने की बात करना जितना आसान है, वास्तव में वैसा कर पाना आसान नहीं है। एक स्थायी नौकरी को छोड़कर नई नौकरी की तलाश करना एक चुनौतीपूर्ण काम है। नौकरी छोड़ने के संबंध में अंतिम निर्णय लेने से पहले आपको अपनी आर्थिक स्थिति से लेकर करियर के किस मोड़ पर आप हैं, जैसे कई मुद्दों पर सोचने की जरूरत है। नौकरी से इस्तीफा देने या करियर से कुछ वक्त का ब्रेक लेने से पहले किन मुद्दों पर गौर करना है जरूरी, आइए जानें: बचत है पर्याप्त? नौकरी से इस्तीफा देने से पहले जरा अपना बैंक बैलेंस जांच कर देखें। आपके पास इतनी बचत होनी चाहिए कि आपको तीन से छह माह का खर्च निकल जाए। आपके पास इतने पैसे होंगे, तो अपने सपनों की नौकरी को तलाशने में आपको जल्दबाजी से काम लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अपना हेल्थ इंश्योरेंस, रिटायरमेंट फंड और वर्तमान नौकरी से मिलने वाले अन्य लाभों पर गौर करने के बाद ही इस्तीफा दें। जॉब मार्केट के क्या हैं हाल? जॉब मार्केट हमेशा एक जैसा नहीं रहता। कभी बहुत ज्यादा भर्तियां होती हैं, तो कुछ वक्त मार्केट पूरी तरह से ठंडा रहता है। वैसे तो नई नौकरी की तलाश किए बिना इस्तीफा देने का निर्णय कई दफा काफी जोखिम भरा साबित हो जाता है। पर, अगर आप पूरी तैयारी करके इंटरव्यू देना चाहती हैं, तो इसमें भी कुछ गलत नहीं। बस उससे पहले यह जरूर जांच-पड़ताल कर लें कि जॉब मार्केट की वर्तमान स्थिति कैसी है। आपके जॉब प्रोफाइल के मुताबिक मार्केट में अभी सैलरी के क्या हालात हैं? इस तरह के शोध करने का लाभ यह होगा कि आपको यह मालूम होगा कि इस नौकरी से इस्तीफा देना आपके लिए फायदे का सौदा साबित होगा या नहीं। जल्दबाजी में नौकरी से इस्तीफा ना दें बल्कि अच्छी तरह से सोच-विचार लें कि नौकरी छोड़ना आपको करियर की राह में लाभ देगा या फिर आप अपने इस निर्णय के कारण प्रोफेशनली थोड़ा और पीछे तो नहीं हो जाएंगी? सेहत पर क्या होगा असर? आपकी वर्तमान नौकरी का आपकी शारीरिक व मानसिक सेहत पर क्या असर हो रहा है, इस्तीफा देने से पहले आपको इस बात पर भी गौर करने की जरूरत है। अगर वर्तमान नौकरी आपकी सेहत बिगाड़ रही है, तो नौकरी से इस्तीफा देने के निर्णय पर आपको पुनर्विचार करने की जरूरत नहीं है। इस बात पर भी गौर करें कि आपकी नौकरी का निजी जीवन व विभिन्न रिश्तों पर क्या असर पड़ रहा है। क्या वर्तमान नौकरी में आप ऑफिस व निजी जिंदगी के बीच संतुलन बना पा रही हैं? अगर आपकी वर्तमान नौकरी आपको अकेलेपन की ओर धकेल रही है और आप अपने परिवार व दोस्तों के लिए वक्त नहीं निकाल पा रही हैं, तो बेहतर होगा कि इस नौकरी से इस्तीफा देकर ऐसी नौकरी तलाशी जाए, जहां बेहतर वर्क-लाइफ संतुलन हो। कैसा है ऑफिस का माहौल? अगर आपको लगता है कि आपके वर्तमान ऑफिस में बहुत ज्यादा राजनीति होती है और वहां का माहौल आपकी मानसिक सेहत को नुकसान पहुंचा रहा है, तो इस्तीफा देकर नई नौकरी तलाशने का निर्णय बिल्कुल ठीक है। पर, इस बात को ध्यान में रखें कि लड़ाई-झगड़ा करके नौकरी छोड़ने का निर्णय लेना ठीक नहीं होता। इसका नकारात्मक असर आपके भविष्य पर पड़ सकता है। अकसर कंपनियां किसी को नौकरी पर रखने से पहले पुराने नियोक्ता से उस व्यक्ति का फीडबैक लेती है। खराब व्यवहार के साथ नौकरी कभी न छोड़ें। हमेशा नोटिस पीरियड सर्व करने और अपनी सभी जिम्मेदारियां निभाने के बाद ही इस्तीफा दें।

उबला अंडा और ऑमलेट दोनों ही स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हैं

अंडा पोषण से भरपूर सुपरफूड है, जिसमें प्रोटीन, विटामिन्स, मिनरल्स और हेल्दी फैट्स पाए जाते हैं। उबला अंडा और ऑमलेट दोनों ही स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हैं, अंडा दुनियाभर में सबसे पॉपुलर ब्रेकफास्ट ऑप्शन है। इसे लोग विभिन्न तरीकों से खाना पसंद करते हैं, जो स्वाद और सेहत दोनों के लिए बेहतरीन है। सबसे ज्‍यादा लोग उबले अंडे या फ‍िर ऑमलेट खाना पसंद करते हैं। क्या उबला अंडा ज्यादा फायदेमंद है या ऑमलेट? दोनों के अपने फायदे हैं, आइए जानते हैं वेटलॉस से लेकर ज्‍यादा प्रोटीन इनटेक के ल‍िए दोनों में से कौनसा विकल्‍प खाना ज्‍यादा फायदेमंद हैं। उबले अंडे खाने के फायदे उबले अंडे सेहत के लिए बेहतरीन विकल्प हैं, क्योंकि इन्हें बिना तेल या मसालों के पकाया जाता है, जिससे अतिरिक्त कैलोरी नहीं बढ़ती। एक उबले अंडे में लगभग 70-80 कैलोरी होती है, जो ऊर्जा प्रदान करती है। यह खासतौर पर वजन घटाने वालों और हल्का आहार पसंद करने वालों के लिए फायदेमंद है। इसमें मौजूद प्रोटीन मांसपेशियों को मजबूत बनाने और स्वस्थ रखने में मदद करता है। ऑमलेट खाने के फायदे ऑमलेट एक स्वादिष्ट और पोषणयुक्त विकल्प है, जिसमें अंडे के साथ सब्जियां, पनीर या हल्के मसाले मिलाकर इसे और भी हेल्दी बनाया जा सकता है। हालांकि, इसे पकाने के लिए तेल या मक्खन का उपयोग होता है, जिससे कैलोरी बढ़ सकती है। सही मात्रा में तेल और कम मसालों के साथ बनाया गया ऑमलेट सेहतमंद विकल्प बन सकता है। सब्जियां और पनीर मिलाकर यह एक संपूर्ण आहार बन जाता है। दोनों में से क्‍या खाना ज्‍यादा फायदेमंद? उबले अंडे और ऑमलेट दोनों ही सेहतमंद हैं। कम कैलोरी के लिए उबले अंडे बेहतर हैं, जबकि स्वाद और पोषण का संतुलन चाहिए तो ऑमलेट चुनें। यह ऑमलेट की तैयारी पर निर्भर करता है-कम तेल और स्वस्थ सामग्री इसे हेल्दी बनाती है। अंडा सेहत के लिए फायदेमंद है, लेकिन संतुलित मात्रा में खाना जरूरी है। रोजाना 2-3 अंडे खाना उचित है। कोलेस्ट्रॉल की समस्या होने पर केवल अंडे का सफेद हिस्सा खाने की सलाह दी जाती है। वेटलॉस वालों को क्‍या खाना चाह‍िए? एक्टिव लोगों के लिए ऑमलेट एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है, क्योंकि इसमें एनर्जी देने वाले फैट्स होते हैं, जो दिनभर ऊर्जा प्रदान करते हैं। वहीं, उबला अंडा कम कैलोरी और हाई प्रोटीन होने के कारण वजन घटाने में मददगार है।

क्या बोतल बंद पानी सेफ? वैज्ञानिकों की यह रिसर्च उड़ा देगी आपकी नींद

Is bottled water safe? This research by scientists will blow your mind कुछ साल में हुए रिसर्च में पाया गया कि औसतन एक लीटर पानी की बोतल में 240,000 प्लास्टिक कण पाए जाते हैं.यह एक बहुत ही चिंताजनक आंकड़ा है, क्योंकि नल के पानी के एक लीटर में औसतन 5.5 प्लास्टिक कण होते हैं. नैनोप्लास्टिक के कारण कैंसर, जन्म दोष और प्रजनन जैसी समस्याओं से जोड़ा जाता है. नैनोप्लास्टिक अपने छोटे आकार के कारण खतरनाक होते हैं – जिससे वे सीधे रक्त कोशिकाओं और मस्तिष्क में प्रवेश कर सकते हैं. बोतलों को बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले प्लास्टिक में आमतौर पर थैलेट्स होते हैं, जिन्हें विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से जोड़ा गया है.नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एनवायर्नमेंटल हेल्थ साइंसेज के अनुसार, थैलेट्स ‘विकासात्मक, प्रजनन, मस्तिष्क, प्रतिरक्षा और अन्य समस्याओं से जुड़े हैं’. पॉलियामाइड नामक एक प्रकार का नायलॉन पानी की बोतलों में पाया जाने वाला एक और प्लास्टिक कण था. हाल ही में हुए एक स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. एक लीटर के पानी की बोतल में लगभग 2, 40,000 प्लास्टिक के टुकड़े होते हैं. नॉर्मल एक लीटर के पानी की बोतल में पानी पी रहे हैं तो हो सकता है आप प्लास्टिक के टुकड़े पी रहे होंगे. हो सकता है आप प्लास्टिक के कण भी पी रहे होंगे. प्लास्टिक की बोतल में पानी पीना क्योंकि है नुकसानदायक? हमारी खराब लाइफस्टाइल के कारण अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में प्लास्टिक का खूब इस्तेमाल करते हैं. घर हो या ऑफिस प्लास्टिक बंद बोतल में पानी पीना हम खूब पसंद करते हैं. अगर आप भी ऐसा कर रहे हैं तो संभल जाएं क्योंकि आपके शरीर में धीमा जहर पहुंच रहा है. प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज नाम की संस्थान ने एक स्टडी में डराने वाला खुलासा किया है. जिसमें बताया गया है कि एक लीटर बोतलबंद पानी में करीब 2.40 लाख प्लास्टिक के महीन टुकड़े मौजूद होते हैं.जिसकी वजह से सेहत को गंभीर और जानलेवा खतरे (Bottled Water Harmful Effects) हो सकते हैं.प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज नाम की ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक प्लास्टिक के बोतल में पानी पीने के कारण कई गंभीर जानलेवा बीमारी हो सकती है. क्या है रिसर्च हाल ही में कुछ रिसर्च के मुताबिक बोतल में मौजूद बोतल बंद पानी में 100,000 से ज्यादा नैनोप्लास्टिक मिले हैं. यह इतने छोटे कण होते हैं कि ब्लड सर्कुलेशन तक को खराब कर सकते हैं. यह दिमाग और सेल्स को भी नुकसान पहुंचाते हैं. प्लास्टिक की बोतल में पानी पीने से इन बीमारियों का बढ़ता है खतरा? डायबिटीज और दिल की बीमारी हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की रिसर्च के अनुसार, पॉली कार्बोनेट की बोतलों के पानी में बिस्फेनॉल ए केमिकल होता है, जो जब शरीर में जाता है तो दिल की बीमारियों और डायबिटीज का खतरा कई गुना तक बढ़ा सकता है. कैंसर का खतरा एक्सपर्ट्स के मुताबिक प्लास्टिक की बोतल में पानी पीने से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ता है. इससे ब्रेस्ट और ब्रेन कैंसर का जोखिम बढ़ता है. प्लास्टिक बर्तन में रखी गर्म चीजों को खाने से बचना चाहिए. Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

क्या वेजिटेबल जूस में मिला सकते हैं फ्रूट्स, क्या यह सेहत के लिए हो सकता है खतरनाक?

lifestyle health mixing fruits and vegetables in juice can be dangerous to your health कुछ लोग ऐसे होते हैं जो कच्ची सब्जियों का जूस पीना पसंद करते हैं. फिटनेस फ्रिक वाले लोग हरी सब्जियों को ज्यादा से ज्यादा अपनी डाइट में शामिल करते हैं. ऐसे डाइट लेने वाले समर्थकों का दावा है कि कच्ची सब्ज़ियों में कई जरूरी विटामिन और खनिज होते हैं जो खाना पकाने के दौरान खत्म हो जाते हैं और ये इम्युनिटी को बढ़ाने और बीमारियों को रोकने के लिए बहुत बढ़िया हैं. यह बात सही हो सकती है लेकिन किसी भी चीज़ को हद से ज्यादा खाना सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. सर्दियां आ रही हैं और यह वह मौसम है जब हरी पत्तेदार सब्जियां काफी ज्यादा मार्केट में होती हैं और लोग हर संभव दिलचस्प तरीके से उन्हें अपने आहार में शामिल करके उनका अधिकतम लाभ उठाने की कोशिश करते हैं. कुछ लोग इस मौसम में कच्ची सब्जियों का जूस पीना भी पसंद करते हैं. लेकिन क्या ये सभी वाकई सेहतमंद और सुरक्षित हैं? आपको हरी सब्जियां किस तरह खानी चाहिए – उन्हें पकाकर या कच्चे रूप में खाकर. आयुर्वेद और आंत स्वास्थ्य कोच डॉ. डिंपल जांगडा ने अपने हालिया इंस्टाग्राम पोस्ट में कहा है कि अधिक मात्रा में कच्चे खाद्य पदार्थों का सेवन करने से पेट में कुछ संक्रमण या अपच का खतरा हो सकता है. पके हुए भोजन की तुलना में कच्चे खाद्य पदार्थों को पचाना शरीर के लिए अधिक कठिन होता है, क्योंकि पके हुए भोजन पहले से ही गर्मी, मसालों और पकाने की विधि से टूट जाते हैं. वे अवशोषण के लिए अधिक जैविक रूप से उपलब्ध होते हैं और पाचन अग्नि पर तनाव को कम करते हैं. कुछ कच्चे खाद्य पदार्थों में एंटी-पोषक तत्व भी होते हैं जो वास्तव में खाद्य पदार्थों के पोषण अवशोषण को पूरी तरह से अवरुद्ध कर देते हैं.हल्का खाना पकाने की सलाह दी जाती है. विशेषज्ञ कहते हैं, यदि आप मतली, थकान, चक्कर आना, पेट फूलना, दस्त या आईबीएस जैसे लक्षणों का अनुभव कर रहे हैं, तो आपका शरीर आपसे बात कर रहा है. आयुर्वेद बड़ी मात्रा में कच्चे खाद्य पदार्थों या ठंडे खाद्य पदार्थों का सेवन करने की सलाह नहीं देता है, क्योंकि वे परजीवियों का घर होते हैं, जिन्हें केवल धोने से नष्ट नहीं किया जा सकता है. कच्ची सब्ज़ियां जिनसे बचना चाहिए Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

लोहे की काली कड़ाही को मिनटों में चमका देगी 10 रुपये की फिटकरी, सालों पुरानी जमी कालिख भी हो जाएगी साफ

shopping how to clean cast iron pan or lohe ki kadhai quickly by using alum or fitkari लोहे की काली कड़ाही को साफ करने में अच्छे-अच्छों की हालत पतली हो जाती है। जलने के बाद कड़ाही पर लगे दाग इतने ज्यादा जिद्दी हो जाते हैं कि आसानी से निकलते ही नहीं है। ऐसे में हम आपको 10 रूपये की फिटकरी का इस्तेमाल करने का तरीका बता रहे हैं, जिससे सालों पुरानी जमी कालिख भी साफ हो जाएगी। माना जाता है कि लोहे की कड़ाही में भोजन पकाने से स्वादिष्ट और पोष्टिक बनता है। मगर, सबसे बड़ी दिक्कत है कि यह बहुत जल्दी काली और गंदी हो जाती है। जिसकी वजह से पकने वाला भोजन भी काला हो जाता है और जल्दी जलने लगता है। अगर, ज्यादा दिनों तक कड़ाही को साफ ना किया जाए तो इसमें कालिख जमने लग जाती है। अब लोहे की काली कड़ाही को साफ करना बहुत ही मेहनत का काम होता है। आज भी गांव के लोग इसे साफ करने के लिए ईंट या राख की मदद लेते हैं। लेकिन हर कोई इतनी मेहनत नहीं कर सकता है और शहरों में ईंट या राख कड़ाही साफ करने के लिए मुश्किल ही है। ऐसे में 10 रुपये की फिटकरी वाला सस्ता और आसान तरीका बता रहे हैं। कड़ाही क्लीन करने की पहली स्टेप सबसे पहले आप काड़ाही को गैस पर रखकर गर्म कर लीजिए। अब इस पर फिटकरी को रगड़ दीजिए। जब आप लोहे की गर्म कड़ाही पर फिटकरी को रगड़ेंगी को कालिख छूटना शुरू हो जाएगी। रगड़ने के बाद आपको इसपर पानी डालना होगा। साथ ही बचे फिटकरी के तुकड़े को एक चम्मच नमक के साथ डालकर 5 मिनट के लिए छोड़ दीजिए। यूं चमक जाएगी लोहे की काली कड़ाही तय समय बाद आप कड़ाही में मिक्स घोल को किसी कटोरी में निकाल लीजिए। अब कड़ाही पर डिश बार या लिक्विड डालकर थोड़ा सा रगड़कर साफ कर लीजिए। इस दौरान फिटकरी घुले पानी का इस्तेमाल भी करते रहें। इस तरह थोड़ी देर में फिटकरी की मदद से आपकी काली कड़ाही नई जैसी चमक जाएगी।

व्यस्तता भरी लाइफ में दिमाग को दे ब्रेक

रोजाना की लाइफ में लोग अपने काम में काफी व्यस्त और स्ट्रेस में रहते हैं। हेल्दी डायट, नियमित शारीरिक गतिविधि और पर्याप्त आरामदायक नींद के साथ अपने शारीरिक स्वास्थ्य को बनाकर रखा जा सकता है। इन दिनों लोग अपने काम में इतना ज्यादा व्यस्त रहते हैं कि मानसिक और शारीरिक हेल्थ से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में अपने ब्रेन को ब्रेक देना बेहद जरूरी है। जानिए दिमाग को ब्रेक देना क्यों जरूरी है और काम के दौरान दिमाग को कैसे ब्रेक दें। दिमाग को ब्रेक देना क्यों है जरूरी छोटे-छोटे ब्रेक लेने से फोकस और एकाग्रता को बढ़ावा मिलता है। वहीं ब्रेक लेने से तनाव के लेवल को कम करने में मदद मिल सकती है। जब हम लगातार एक्शन मोड में होते हैं तो हमारा शरीर कोर्टिसोल जैसे तनाव हार्मोन जारी करता है, जो हमारे स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। ऐसे में ब्रेक लेने से कोर्टिसोल के स्तर को कम करने में मदद मिल सकती है, जिससे तनाव का लेवल कम होगा काम के दौरान दिमाग को ब्रेक कैसे दें पूरे दिन छोटे-छोटे ब्रेक लें हर एक घंटे में छोटे-छोटे ब्रेक लेने की कोशिश करें। अपने ब्रेक के दौरान केवल बैठे रहने के बजाय, कुछ एक्टिविटी को शामिल करने की कोशिश करें। इसके अलावा बाहर टहलने जाएं या हल्की स्ट्रेचिंग करें। टेकनोलॉजी से डिस्कनेक्ट करें अपने ब्रेक के दौरान टेकनोलॉजी से डिस्कनेक्ट करने की कोशिश करें। यह तनाव के लेवल को कम करने और आपके दिमाग को आराम करने का मौका देने में मदद कर सकता है। ब्रेक को प्राथमिकता दें कई लोग ब्रेक तो लेते हैं लेकिन उसे प्राथमिकता नहीं देते हैं और अपने अधूरे काम को परा करने में लग जात हैं। मानसिक और शारीरिक दोनों तरह से हेल्दी रहने के लिए ब्रेक को प्राथमिकता दें।

Apple Face ID सपोर्ट वाला स्मार्ट डोरबेल

नई दिल्ली iPhone, iPad और अन्य वियरेबल्स बनाने के लिए मशहूर Apple अब स्मार्ट होम सेगमेंट में अपने कदम बढ़ा रहा है. ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी Face ID और iCloud सपोर्ट वाले एक स्मार्ट डोरबेल पर काम कर रही है. Face ID सपोर्ट वाला स्मार्ट डोरबेल प्रसिद्ध Apple विश्लेषक Mark Gurman ने अपनी Power On न्यूज़लेटर में खुलासा किया कि यह स्मार्ट डोरबेल Face ID के साथ आएगा. यह डोरबेल उसी तरह से काम करेगा जैसे आप अपना iPhone अनलॉक करते हैं. डिवाइस में लगे कैमरे के सामने निवासी के आने पर दरवाजा स्वतः खुल जाएगा. यह सुविधा Apple Secure Enclave चिप का उपयोग करेगी, जो Face ID की जानकारी को सुरक्षित रूप से स्टोर और प्रोसेस करती है. इसके अलावा, यह डिवाइस HomeKit-संगत स्मार्ट लॉक के साथ काम करने की संभावना रखता है. Proxima चिप और iCloud इंटीग्रेशन डोरबेल में Apple की इन-हाउस “Proxima” Wi-Fi/Bluetooth चिप का उपयोग होगा. यह चिप Face ID से संबंधित इमेज को डिवाइस पर ही प्रोसेस करेगी, जिससे डेटा गोपनीय रहेगा. डेटा को iCloud पर बैकअप करने की सुविधा भी होगी, जिससे Apple के क्लाउड सब्सक्रिप्शन सर्विस को बढ़ावा मिलेगा. संभावित लॉन्च और अतिरिक्त फीचर्स यह स्मार्ट डोरबेल अभी विकास के शुरुआती चरण में है. Gurman के अनुसार, इसे 2025 के अंत तक लॉन्च किया जा सकता है. यह 6-इंच टचस्क्रीन स्मार्ट होम हब के साथ लॉन्च हो सकता है, जिसमें Apple Intelligence और FaceTime का सपोर्ट होगा. स्मार्ट होम हब के लिए एक नया ऑपरेटिंग सिस्टम आने की भी संभावना है. Apple का यह स्मार्ट डोरबेल और स्मार्ट होम हब न केवल सुरक्षा को बढ़ाएगा, बल्कि स्मार्ट होम डिवाइसेस के साथ कंपनी के एकीकृत इकोसिस्टम को भी और मजबूत बनाएगा. अगर यह प्रोडक्ट लॉन्च होता है, तो यह स्मार्ट होम इंडस्ट्री में Apple के लिए एक बड़ा कदम साबित हो सकता है.

बिना फ्रिज के कैसे रखें खाद्य पदार्थ सुरक्षित

अगर आप अपने घर से दूर रहते हैं जहां आप के पास फ्रिज की व्यवस्था नहीं है, तो उस दौरान फल और सब्जियों को सुरक्षित रखना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। यही नहीं अगर रात का बचा हुआ भोजन सुबह तक चलाना हो तो भी बड़ी कठिनाई आती है। बहुत से लोग ऐसे भी होते हैं जो बिजली का खर्चा बचाने के लिये भी फ्रिज का इस्तमाल नहीं करते। मगर दूध या मीट आदि अगर ठंडे स्थान पर ना रखा जाए तो वह जल्दी खराब हो जाता है। हांलाकि ऐसा नहीं है कि अगर आपके पास फ्रिज नहीं है तो कोई खाद्य पदार्थ सुरक्षित नहीं रह सकता। आप अपने खाने को बड़ी ही आराम से सुरक्षित रख सकते हैं, हमारे ये टिप्स पढ़ कर। हम आपको ऐसे आसान से उपाय बताएंगे जिनकी मदद से आप रसोई में बचे हुए भोजन या फिर साग-सब्जियों को बिल्कुल सुरक्षित रा सकते हैं। आइये जानते हैं वह उपाय… पानी का भरा कटोरा सब्जियों को अगर सुरक्षित रखना हो तो उसे ठंडे पानी के कटोरे में रखें। इससे पानी में रखी हुई सब्जी जल्दी खराब नहीं होगी। लेकिन कोशिश करें कि इन्हें कुछ ही दिनों में खा कर खतम कर दें नहीं तो यह लंबे समय नहीं चलेंगी। ठंडी हवा में अगर रात में खाना बच जाए तो उसे कटोरे में रख कर किसी खुली हुई खिड़की के सामने रख दें, जिससे ठंडी हवा के बहाव से वह खराब ना हो। यदि आपके घर पर कूलर या एसी की व्यवस्था तो भी यह काम आसानी से किया जा सकता है। बर्फ का कटोरा भोजन को किसी बर्फ से भरे कटोरे में रख कर लंबे समय तक आराम से चलाया जा सकता है। बस आपको कहीं से बर्फ का इंतजाम अपने आप करना होगा। वैसे मार्केट में आइस क्यूब्स कम दामों में उपलब्ध हो जाती हैं। ऐसा नहीं है कि आप बर्फ में केवल सब्जियां और फलों को ही सुरक्षित रख सकती हैं बल्कि कई और भी खाद्य पदार्थ भी सुरक्षित रखे जा सकते हैं। सुखा कर कुछ खाद्य पदार्थ को आप सूरज की धूप में सुखा कर भी कई दिनों तक चला सकती हैं।  

मुश्किल समय में ध्यान रखें ये सक्सेस मंत्र

किसी व्यक्ति के लिए उसके मुश्किल समय में इस बात का निश्चय कर पाना मुश्किल हो जाता है, कि वो निराशा के अंधेरों से खुद को बाहर कैसे निकाले। जीवन में सफलता हासिल करने के लिए उसके लिए क्या करना सही होगा और क्या गलत। अगर आप भी जीवन के किसी मोड़ पर खुद को ऐसी ही किसी असमंजस से घिरा हुआ पा रहे हैं तो आपको राह दिखाएंगे ये सक्सेस मंत्र। धैर्य से काम लें- किसी व्यक्ति के जीवन में जब मुश्किल समय आता है तो वो स्वाभाविक रूप से परेशान होकर झटपटाने लगता है। अपनी तरफ से हर संभव प्रयास करता है कि वो जल्द से जल्द उस समस्या से बाहर निकल जाएं। लेकिन ऐसे समय में व्यक्ति को इस बात का खास ख्याल रखना चाहिए, कि समय चाहे कितना भी खराब क्यों ना हो परिवार और धैर्य की शक्ति के आगे वो झुक ही जाता है। परिवार के साथ मिलकर धैर्य के गुण को साथ लिए हुए अपने सभी फैसला को लें। सफलता की किरण आपको जरूर नजर आएगी। धन की बचत- व्यक्ति को संकट से निकालने के लिए धन की भी बहुत आवश्यकता होती है। संकट के समय धन ही सच्चा मित्र होता है। जिस व्यक्ति के पास संकट के समय धन का अभाव होता है ,उसके लिए संकट से उभर पाना बड़ा कठिन हो जाता है। नकारात्मक सोच से रहें दूर- व्यक्ति के जीवन में मुश्किलें आते ही सबसे पहले उसके मन को नकारात्मक सोच घेरने लगती है। निगेटिव एनर्जी से घिरा व्यक्ति यह सोचने पर मजबूर हो जाता है कि उसे उसकी समस्या का कोई हल नहीं मिलने वाला है। ऐसे में व्यक्ति को बड़ी से बड़ी मुश्किल में भी मन में नकारात्मक विचार नहीं लाने देने चाहिए। मन को शांत रखते हुए सकारात्मक सोच के साथ अपनी हर मुश्किल का हल निकालने की कोशिश करें, सफलता जरूर मिलेगी। जल्दबाजी में न लें फैसला- कई बार व्यक्ति मुश्किल समय में समस्या से निकलने के लिए जल्दबाजी में कई फैसला ले लेता है। जिसकी वजह से उसकी मुश्किलें कम होने की जगह और ज्यादा बढ़ जाती हैं। अगर आप किसी मुश्किल में फंसे हैं तो समस्या को अच्छे से समझकर ही उसे दूर करने के उपाय के बारे में सोचें, जल्दबाजी में कोई फैसला ना लें। सावधानी- चाणक्य नीति कहती है कि मुश्किल समय में व्यक्ति को हमेशा सावधानी बरतनी चाहिए। व्यक्ति को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि संकट के समय में व्यक्ति के पास सीमित अवसर और चुनौतियां बड़ी होती हैं। ऐसे में जरा सी चूक आपका बड़ा नुकसान कर सकती है। ऐसे में सावधानी बरतकर ही आप अपने काम में सफलता हासिल कर सकते हैं।

Vivo Y29 5G स्मार्टफोन को भारत में लॉन्च

नई दिल्ली Vivo Y29 5G स्मार्टफोन को भारत में लॉन्च कर दिया गया है। Vivo Y29 5G स्मार्टफोन IP64 डस्ट और वाटर रेजिस्टेंट रेटिंग के साथ आता है। इसमें मिलिट्री ग्रेड शॉक रेजिस्टेंट दिया गया है। फोन की थिकनेस 8.1mm है। साथ ही इसका वजन 198 ग्राम होगा। Vivo का कहना है कि Vivo Y29 5G, 20 हजार रुपये में आने वाला स्मार्टफोन है, जिसमें SGS शॉक रेजिस्टेंट के साथ मिलिस्ट्री ग्रेड ड्यूरेबिलिटी दी जा रही है। Vivo Y29 5G की भारत में कितनी होगी कीमत Vivo Y29 5G स्मार्टफोन के 4 जीबी रैम और 128 जीबी स्टोरेज वेरिएंट की कीमत 13,999 रुपये है। वही 6जीबी रैम और 128जीबी स्टोरेज वेरिएंट की कीमत 15,499 रुपये है। फोन के 8 जीबी रैम और 128 जीबी स्टोरेज वेरिएंट 16,999 रुपये में आएगा। जबकि 8 जीबी रैम और 256 जीबी स्टोरेज वेरिएंट की कीमत 18,999 रुपये है। फोन को तीन कलर वेरिएंट ग्लेशियर ब्लू, टाइटेनियम गोल्ड और डायमंड ब्लैक में आएगा। अगर आप Vivo Y29 स्मार्टफोन खरीदते हैं, तो आप 1500 रुपये कैशबैक हासिल करने के हकदार हो जाएंगे। इसके अलावा 1399 रुपये मंथली ईएमआई पर फोन को खरीदा जा सकेगा। Vivo Y29 5G के स्पेसिफिकेशन्स फोन में 6.68 इंच का डिस्प्ले दिया जा सकता है। साथ ही प्रोसेसर सपोर्ट के तौर पर फोन में MediaTek Dimensity 6300 प्रोसेसर दिया जा सकता है। फोन 5500mAh बैटरी सपोर्ट के साथ आएगा। इसमें 44W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट दिया जाएगा। फोन में 50MP प्राइमरी कैमरा सेंसर मिलेगा। साथ ही 0.08MP QVGA सेकेंड्री कैमरा सपोर्ट मिलेगा। फोन एलईडी फ्लैश लाइट के साथ आएगा। साथ ही इसमें ऑरा लाइट दी जा सकती है। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए फोन में 8MP कैमरा सेंसर दिया जा सकता है। फोन में AI फोटो इन्हैंस, एआई इरेजर जैसे कैमरा मोड मिलेंगे। फोन 120Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट के साथ आएगा, जिससे स्मूथ विजुअल्स और गेमिंग एक्सपीरिएंस मिलेगा। फोन LCD डिस्प्ले में आएगा। साथ ही ब्राइटनेस के लिए 1000 nits सपोर्ट दिया जाएगा। Vivo Y29 5G स्मार्टफोन IP64 डस्ट और वाटर रेजिस्टेंट रेटिंग दी जाएगी। इसमें मिलिट्री ग्रेड शॉक रेजिस्टेंट दिया जाएगा। फोन की थिकनेस 8.1mm है। साथ ही इसका वजन 198 ग्राम होगा।

Apple AirPods में आएंगे नए हेल्थ फीचर्स

नई दिल्ली इस साल की शुरुआत में, Apple ने AirPods Pro में कुछ हेल्थ फीचर्स पेश किए थे। इनमें एक हियरिंग टेस्ट फीचर और हियरिंग एड्स के रूप में उपयोग करने का विकल्प शामिल है। अब, Bloomberg की एक रिपोर्ट के अनुसार, Apple AirPods में हेल्थ फीचर्स को और उन्नत बनाने की योजना बना रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, Apple AirPods में हार्ट रेट मॉनिटर, टेम्परेचर सेंसर और विभिन्न फिजियोलॉजिकल मेट्रिक्स को ट्रैक करने के लिए नए सेंसर्स जोड़ने पर काम कर रहा है। Apple की प्राथमिकता फिलहाल हार्ट रेट मॉनिटरिंग टेक्नोलॉजी पर है, जिसे AirPods में सेंसर के जरिए शामिल करने की योजना है। रिपोर्ट बताती है कि Apple ने AirPods में हार्ट रेट सेंसर का इंटरनल टेस्टिंग किया है। हालांकि, यह Apple Watch जितना सटीक नहीं है लेकिन इससे बहुत ज्यादा पीछे भी नहीं है। नए फीचर्स के लॉन्च की टाइमलाइन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ये हेल्थ फीचर्स कब तक लॉन्च किए जाएंगे। संभावना है कि AirPods Pro 3 के साथ कुछ नए फीचर्स आ सकते हैं, लेकिन इसमें अभी कुछ साल लग सकते हैं। कैमरा इंटीग्रेशन पर भी हो रहा है काम Apple केवल हेल्थ फीचर्स पर ही नहीं, बल्कि AirPods में कैमरा इंटीग्रेशन की संभावनाएं भी तलाश रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, पहले यह प्रोजेक्ट रोक दिया गया था, लेकिन अब कंपनी के AI-ड्रिवन प्रोडक्ट्स पर ध्यान केंद्रित करने के कारण इसे फिर से शुरू किया गया है। AI और AirPods टीम के लिए AirPods में कैमरा इंटीग्रेशन प्राथमिकता बन चुका है। हालांकि, AirPods में कैमरा फीचर देखने के लिए कुछ सालों का इंतजार करना पड़ सकता है। साउंड क्वालिटी पर भी कंपनी की तरफ से काफी काम किया जा रहा है। इसमें डिजाइन भी आपको काफी अच्छा मिल रहा है। साथ ही आपको कॉम्पैक्ट डिजाइन के साथ कई चीजें मिलती हैं।

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