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पानी के बाद अब सब्जियों में भी जहर! प्रदूषण बोर्ड का खुलासा; हाईकोर्ट ने सरकार से मांगी रिपोर्ट

After water, now vegetables are also poisoned! Pollution Board reveals; High Court asks government for report सार मप्र हाईकोर्ट में प्रदूषण नियंत्रण मंडल की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि जबलपुर के नालों का पानी सीवेज से अत्यंत दूषित है। इस पानी से उगाई जा रही सब्जियां मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं। युगलपीठ ने सरकार को तत्काल कार्रवाई कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए। विस्तार हाईकोर्ट में मप्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल की तरफ से तरफ से पेश की गई। रिपोर्ट में बताया गया कि नाले के दूषित पानी से उगाई जाने वाली सब्जी मानव जीवन के लिए खतरनाक हैं। शहर के लगभग सभी नालों के पानी में भारी मात्रा में सीवेज मिलता है। जिस कारण वह अत्यंत दूषित हो गया है और उसका उपयोग निस्तार और सिंचाई के लिए किया जाना मानव जीवन के लिए खतरनाक है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने सरकार को निर्देशित किया है कि प्रदूषण बोर्ड के सुझावों पर तत्काल अमल करते हुए रिपोर्ट पेश करें। याचिका पर अगली सुनवाई 2 फरवरी को नियत की गई है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को एक विधि छात्र के द्वारा पत्र लिखकर बताया गया था कि जबलपुर के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को नाले के दूषित पानी का उपयोग की सब्जी की खेती होती है। ऐसी सब्जी का उपयोग मानव जीवन के लिए खतरनाक है। चीफ जस्टिस ने पत्र की सुनवाई जनहित याचिका के रूप में करने के आदेश जारी किये थे। युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए अनावेदकों को नोटिस जारी करते हुए मप्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल नाले की पानी की जांच कर रिपोर्ट पेश करने के आदेश जारी किये थे। याचिका की सुनवाई के दौरान बुधवार को पेश की गई। रिपोर्ट में बताया गया कि हाईकोर्ट के निर्देश पर कृषि अधिकारी, स्वास्थ्य अधिकारी और प्रदूषण बोर्ड की संयुक्त टीम ने 23 नवंबर 2025 को ओमती नाला, मोती नाला , खूनी नाला, उदरना नाला सहित अन्य नालों से पानी का सैंपल लेकर जांच की थी। जांच के बाद इनके पानी में बीओडी, टोटल कोलीफार्म या फेकल कोलीफॉर्म की मात्रा निर्धारित मानक सीमा से अधिक है। नमूना रिपोर्ट और जांच से स्पष्ट है कि यह अनुपचारित सीवर का जल है जो पीने, नहाने या खेती सहित किसी भी अन्य उपयोग के लिए उपयुक्त नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया था कि जबलपुर में 174 मेगा लीटर प्रतिदिन वेस्ट वॉटर नालों में जाता है, जिसमें से नगर निगम द्वारा 13 सीवेज प्लांट्स के जरिए केवल 58 मेगालीटर प्रतिदिन पानी का ट्रीटमेंट किया जाता है। यह पानी नर्मदा तथा हिरन नदी में मिलाया जाता है। प्लांट्स की कुल क्षमता 154.38 मेगा लीटर प्रतिदिन की है। इसके लिए समय-समय पर करोड़ों रुपये की राशि का आवंटन भी किया गया है। हाल ही में नगर निगम जबलपुर को अमृत 2.0 सीवर योजना अंतर्गत 1202.38 करोड़ राशि स्वीकृत हुई है। पीबीसी की तरफ से नाले के पानी को दूषित होने के बचाने के लिए सुझाव भी दिये गये थे। याचिका की सुनवाई के बाद युगलपीठ ने उक्त आदेश जारी किये।

इंजेक्शन, टैबलेट या फिर लिक्विड…शरीर में दवा पहुंचाने का क्या है सबसे सही तरीका?

medication into the body

injection tablet or liquid what is the fastest way to get medication into the body Way to Get Medication into the Body : किसी भी व्यक्ति के बीमार पड़ने पर डॉक्टर उनकी स्थिति के हिसाब से उन्हे दवाएं देते हैं. डॉक्टर अपने मरीजों को दवाएं कई रूपों में देते हैं, जिसमें टैबलेट, कैप्सूल, लिक्विड सिरप, इंजेक्शन या फिर इन्हेलर जैसे अन्य विकल्प होते हैं. अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि इनमें से किस तरह की दवाएं सबसे अधिक असरदार होती हैं? तो आपको बता दें कि इसका जवाब इस पर निर्भर करता है कि आपको किस तरह की समस्या हुई है और आपकी स्थिति कितनी गंभीर है. आइए जानते हैं इस बारे में- टैबलेट और कैप्सूल टैबलेट और कैप्सूल सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला तरीका है. इन्हें लेना आसान होता है, ये लंबे समय तक स्टोर की जा सकती हैं और कम खर्चीली भी होती हैं. हालांकि, इन्हें पचने और खून में घुलने में समय लगता है, इसलिए ये उन बीमारियों में दी जाती हैं जिनमें तुरंत असर की जरूरत नहीं होती, जैसे – सामान्य बुखार, दर्द, एलर्जी, ब्लड प्रेशर इत्यादि स्थितियों में टैबलेट और कैप्सूल जैसी दवाएं दी जाती हैं. लिक्विड जिन मरीजों के निगलने की क्षमता कम होती है, जैसे- छोटे बच्चे या बुजुर्ग, उन्हें दवाएं लिक्विड दी जाती हैं. लिक्विड में मिलने वाली दवाएं जल्दी अवशोषित होती हैं और स्वाद के अनुसार बनाई जाती हैं. पर इनकी मात्रा का सही निर्धारण जरूरी होता है. इंजेक्शन किसी भी मरीज को इंजेक्शन तब दिया जाता है, जब दवा को शरीर में तुरंत पहुंचाना होता है. इंजेक्शन सबसे सबसे प्रभावी तरीका होता है. ये सीधे खून में (IV), मांसपेशी (IM) या स्किन के नीचे (SC) दिए जाते हैं. इंजेक्शन गंभीर संक्रमण, एलर्जी रिएक्शन या सर्जरी के समय इसका इस्तेमाल किया जाता है. मुख्य रूप से तेज बुखार, डिहाइड्रेशन, गंभीर संक्रमण, डायबिटीज (इंसुलिन) जैसी स्थितियों में दिया जाता है. सबसे सही तरीका कौन सा है? दवाएं देने का कोई सही तरीका नहीं होता है. यह पूरी तरह इस पर निर्भर करता है कि बीमारी की गंभीरता क्या है? दवा कितनी जल्दी असर दिखानी चाहिए? मरीज की उम्र और शारीरिक स्थिति क्या है? हर दवा देने का तरीका अपनी जगह सही होता है. डॉक्टर आपकी स्थिति के अनुसार सबसे उपयुक्त तरीका चुनते हैं. खुद से दवाओं का रूप या तरीका बदलना खतरनाक हो सकता है, इसलिए हमेशा चिकित्सक की सलाह लेना ही सबसे सही तरीका है.

लाइफस्टाइल- गर्मियों में फायदेमंद गन्ने का जूस: लू से बचाए, शरीर को रखे हाइड्रेटेड, डाइटीशियन से जानें किन्हें नहीं पीना चाहिए

Lifestyle:Sugarcane juice is beneficial in summers: Protects from heat wave, keeps the body hydrated, know from dietician who should not drink it हेल्थ डेस्क: आपने गर्मी के मौसम में अपने आसपास गन्ने का जूस बिकते जरूर देखा होगा। तेज धूप और हीट स्ट्रोक से बचने के लिए लोग इसे खूब पीते हैं। यह न केवल स्वादिष्ट होता है, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है। यह शरीर को हाइड्रेट के साथ-साथ एनर्जेटिक भी रखता है। इसके अलावा गन्ने का रस पाचन तंत्र को बेहतर बनाने, इम्यूनिटी बूस्ट करने और स्किन को हेल्दी बनाए रखने में भी मददगार है। इसमें कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। फार्माकोग्नॉसी जर्नल में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, गन्ने के जूस के कई हेल्थ बेनिफिट्स हैं। आयुर्वेद और यूनानी पद्धति में पीलिया व यूरिन संबंधी समस्याओं के इलाज के लिए गन्ने का जूस पीने की सलाह दी जाती है। इसमें विटामिन और मिनरल्स का खजाना होता है। गन्ना अनुसंधान केंद्र की एक स्टडी के मुताबिक, इसके जूस में हाई पॉलीफेनोल्स होते हैं, जो पावरफुल फाइटोन्यूट्रिएंट्स हैं। गन्ने के जूस में बैड कोलेस्ट्रॉल से लड़ने की क्षमता होती है। साथ ही ये मेटाबॉलिज्म को भी बेहतर बनाता है। इसलिए, आज जरूरत की खबर में गन्ने का जूस पीने के फायदों के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- क्या इसे ज्यादा पीने के कोई साइड इफेक्ट्स भी हैं? किन लोगों को गन्ने का जूस नहीं पीना चाहिए? एक्सपर्ट: डॉ. पूनम तिवारी, सीनियर डाइटीशियन, डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ सवाल- गन्ने में कौन-कौन से पोषक तत्व पाए जाते हैं? जवाब- नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, गन्ने में 70-75% पानी, 13-15% सुक्रोज (नेचुरल शुगर) और 10-15% फाइबर होता है। हालांकि गन्ने का जूस निकालने की प्रक्रिया में फाइबर लगभग खत्म हो जाता है। नीचे दिए ग्राफिक में 250ml जूस की न्यूट्रिशनल वैल्यू जानिए- सवाल- गन्ने का जूस सेहत के लिए किस तरह से फायदेमंद है? जवाब- गन्ने के जूस में मौजूद विटामिन C और फ्लेवोनोइड्स व फेनोलिक जैसे एंटीऑक्सिडेंट्स इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाते हैं। ये एक बेहतरीन हाइड्रेटिंग ड्रिंक्स है क्योंकि इसमें भरपूर मात्रा में पानी होता है। गन्ने के जूस में नेचुरल शुगर, फाइबर और इनवर्टेज जैसे एंजाइम होते हैं, जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं। गन्ना सुक्रोज और ग्लूकोज जैसे कार्बोहाइड्रेट का एक नेचुरल सोर्स है, जो इंस्टेंट एनर्जी देता है। गन्ने के डाइयूरेटिक गुण यूरिन के जरिए शरीर के टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मददगार हैं। गन्ने में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो ओरल हेल्थ के लिए फायदेमंद हैं। इसमें मौजूद कैल्शियम दांतों और हड्डियों को मजबूत बनाते हैं। इसमें पाए जाने वाले एंटीऑक्सिडेंट्स स्किन को हेल्दी बनाए रखने में मदद करते हैं। ये उम्र बढ़ने के संकेतों जैसे झुर्रियां, महीन रेखाएं और स्किन के दाग-धब्बे को कम करते हैं। वहीं पॉलीफेनोल और पोटेशियम जैसे कंपाउंड कार्डियो प्रोटेक्टिव होते हैं। गन्ने के एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण आर्टरीज की सूजन और कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करके हार्ट हेल्थ को बेहतर बनाते हैं। इसका जूस शरीर के तापमान को कंट्रोल करने के साथ-साथ इलेक्ट्रोलाइट को भी बैलेंस करता है। इस तरह ये हमें गर्मी में हीट स्ट्रोक के खतरे से बचाता है। नीचे दिए ग्राफिक से गन्ने का जूस पीने के कुछ फायदे समझिए- सवाल- गन्ना या गन्ने का जूस क्या ज्यादा फायदेमंद है? जवाब- सीनियर डाइटीशियन डॉ. पूनम तिवारी बताती हैं कि चाहे गन्ने की बाइट चबाएं या उसका जूस पिएं दोनों ही फायदेमंद है। हालांकि गन्ने में फाइबर की मात्रा भरपूर होती है। इसलिए जूस पीने से ज्यादा इसे चबाना बेहतर है। सवाल- क्या गन्ने में बर्फ डालकर पीना सेहत के लिए अच्छा है? जवाब- बर्फ डालने से गन्ने का रस ठंडा हो जाता है, जिससे गर्मी में ताजगी मिलती है। ठंडा गन्ने का जूस पीने से गर्मी से तुरंत राहत मिलती है। लेकिन कुछ लोगों को इससे सर्दी-जुकाम, खांसी या पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए बहुत ज्यादा बर्फ वाला गन्ने का रस पीने से बचना चाहिए। सवाल- गन्ने का जूस पीने का सही तरीका क्या है? जवाब- गन्ने का जूस निकालने के तुरंत बाद पीना सबसे अच्छा होता है। बासी गन्ने के जूस में बैक्टीरिया पनप सकते हैं, जो सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। गन्ने का जूस हमेशा किसी साफ और स्वच्छ दुकान से ही पिएं। जिस मशीन से जूस निकाला जा रहा है, वह साफ-सुथरी होनी चाहिए। गन्ने का जूस पीने का सबसे अच्छा समय दोपहर से पहले का होता है। खाली पेट गन्ने का जूस नहीं पीना चाहिए क्योंकि इससे एसिडिटी हो सकती है। गन्ने के जूस में थोड़ा सा काला नमक और नींबू का जूस और पुदीना मिलाकर पीने से इसका स्वाद और न्यूट्रिशन दोनों बढ़ जाता है। सवाल- क्या गन्ने का जूस किडनी स्टोन में फायदेमंद है? जवाब- गन्ने का जूस किडनी स्टोन से पीड़ित लोगों के लिए सुरक्षित माना जाता है क्योंकि इसमें ऑक्सालेट कम होता है। जो शरीर में पथरी बनने से रोकने में मदद कर सकता है। इसके डाइयूरेटिक गुण टॉक्सिन्स को बाहर निकालने और नए स्टोन्स के प्रोडक्शन को रोकने में भी मदद कर सकते हैं। इसके अलावा गन्ने के जूस में पोटेशियम, मैग्नीशियम और कई अन्य ऐसे पोषक तत्व होते हैं, जो किडनी की सेहत के लिए फायदेमंद हैं। गन्ने का रस शरीर में पानी की मात्रा को बढ़ाता है, जिससे किडनी में पथरी बनने की संभावना कम हो जाती है। सवाल- क्या डायबिटिक लोग गन्ने का जूस पी सकते हैं? जवाब- डॉ. पूनम तिवारी बताती हैं कि गन्ने के जूस में नेचुरल शुगर की मात्रा अधिक होती है, जो ब्लड शुगर लेवल को बढ़ा सकती है। इसलिए डायबिटिक लोगों को इसे पीने से बचना चाहिए। सवाल- एक दिन में कितना गन्ने का जूस पीना सुरक्षित है? जवाब- एक स्वस्थ व्यक्ति एक दिन में एक गिलास गन्ने का जूस पी सकता है। इससे ज्यादा पीना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। सवाल- क्या गन्ने का जूस पीने के कोई साइड इफेक्ट भी हैं? जवाब- गन्ने का जूस पीना आमतौर पर सुरक्षित होता है। हालांकि इसके अधिक सेवन से वजन बढ़ सकता है। साथ ही ब्लड शुगर हाई हो सकता है। इसके अलावा दांत खराब हो सकते हैं और पाचन … Read more

हेल्थ टिप्स – क्या ज्यादा फायदेमंद? आलू या शकरकंद, एक्सपर्ट से जानें बेनिफिट्स, ज्यादा खाने के नुकसान, किसे नहीं खाना चाहिए

Which is more beneficial? Potato or sweet potato

Which is more beneficial? Potato or sweet potato हर भारतीय रसोई में आलू और शकरकंद की खास जगह है। ये दोनों ही फूड हमारी थाली में अहम स्थान रखते हैं। इन दोनों में कई सारी समानताएं हैं, जो उन्हें एक जैसा बनाती हैं। अंग्रेजी भाषा में दोनों के नाम भी मिलते-जुलते हैं। आलू को ‘पोटैटो’ और शकरकंद को ‘स्वीट पोटैटो’ के नाम से जाना जाता है।आलू को सब्जियों का राजा कहा जाता है और हर भारतीय रसोई में हमेशा इसकी मौजूदगी होती है। वहीं शकरकंद अपने मीठे स्वाद और न्यूट्रिएंट्स की वजह से अलग पहचान रखता है।शकरकंद को कई डिश में मिठास के लिए इस्तेमाल किया जाता है। सर्दी के मौसम में शकरकंद खूब खाया जाता है। हालांकि, जब बात सेहत की आती है, तो यह सवाल उठता है कि इन दोनों में से क्या अधिक फायदेमंद है? ऐसे में आज हम सेहतनामा में जानेंगे कि- आलू और शकरकंद में क्या ज्यादा सेहतमंद है?इन दोनों के क्या फायदे और नुकसान हैं? आलू के फायदे आलू के कई सारे चाहने वाले हैं। लोग इसे अलग-अलग रूपों में पसंद करते हैं। हालांकि इसके स्वाद के साथ हेल्थ बेनिफिट्स की वजह से भी इसे पसंद किया जाता है। विटामिन C: एक मध्यम आकार का यानी तकरीबन 115 ग्राम का एक आलू खाने से विटामिन C की दैनिक जरूरत की 11% पूरा हो जाता है।विटामिन C कोलेजन बनाने में मदद करता है। यह आयरन के अवशोषण में सहायक होता है। इसके अलावा आलू में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सिडेंट भी होता है।विटामिन B6: आलू में विटामिन B6 भी होता है, जो हमारी दैनिक आवश्यकता का 25% पूरा करता है। विटामिन B6 रेड ब्लड सेल्स के उत्पादन में मददगार है।यह ऊर्जा के रूपांतरण और ब्रेन के न्यूरोट्रांसमीटर के निर्माण में मदद करता है, जो मूड और नींद को नियंत्रित करते हैं। फाइबर: आलू में फाइबर भी पाया जाता है, जो पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है।पोटेशियम: इसमें पोटेशियम होता है, जो ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद करता है। यह नर्वस सिस्टम और मांसपेशियों के कार्य में मदद करता है। स्टार्च: आलू में एक प्रकार का कार्बोहाइड्रेट होता है, जिसे स्टार्च कहा जाता है। यह छोटी आंत में नहीं टूटता, बल्कि सीधे बड़ी आंत में जाता है। यह आंतों के स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है। हालांकि, पेट की समस्या हो तो आलू खाने से बचना चाहिए। शकरकंद के फायदे शकरकंद अपने लो-ग्लाइसेमिक इंडेक्स और फाइबर के कारण डायबिटीज कंट्रोल करने और वजन घटाने में मददगार है। शकरकंद फाइबर, विटामिन्स, मिनरल्स और एंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर होता है। इसके छिलके में पाया जाने वाला फाइबर प्रीबायोटिक गुणों से भरपूर होता है, जो गुड बैक्टीरिया के विकास को बढ़ावा देता है और आंतों की हेल्थ को बेहतर बनाता है। विटामिन A: नारंगी शकरकंद में बीटा-कैरोटीन और प्रोविटामिन A की भरपूर मात्रा होती है, जो आंतों में जाकर विटामिन A में बदल जाता है। एक मध्यम आकार का शकरकंद (114 ग्राम) खाने से रोज की विटामिन A की जरूरत का 122% मिल जाता है। यह सेल्स के विकास, इम्यून सिस्टम, प्रजनन और आंखों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी होता है। पॉलीफेनोल्स: शकरकंद में पॉलीफेनोल्स एंटीऑक्सिडेंट्स होते हैं, जो सूजन को कम करने, कोलेस्ट्रॉल के स्तर को सुधारने और ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद करते हैं। बैंगनी शकरकंद में पाया जाने वाला एंथोसाइनिन सूजन को कम करने और मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने में सहायक होता है। विटामिन C और विटामिन B6: शकरकंद विटामिन C और विटामिन B6 का भी अच्छा स्रोत है। इसमें भी आलू की तरह प्रतिरोधी स्टार्च पाया जाता है, जो आंतों के स्वास्थ्य को सुधारने, ब्लड शुगर कंट्रोल करने में मदद करता है। साथ ही इससे पेट भरे होने का एहसास होता है, जो वजन घटाने में मददगार हो सकता है।तो, क्या आपने यह सोच लिया है कि आपकी हेल्थ के लिए क्या बेहतर है– आलू या शकरकंद? आइए ग्राफिक के जरिए दोनों में पाए जाने वाले न्यूट्रिएंट्स और डेली वैल्यू के बीच के अंतर को समझते हैं। क्या आलू और शकरकंद का कुछ नुकसान भी है? आलू और शकरकंद दोनों ही हेल्थ के लिए फायदेमंद हैं, लेकिन अधिक मात्रा में खाने से कई नुकसान हो सकते हैं। साथ ही एलर्जी की समस्याओं से जूझ रहे व्यक्तियों को शकरकंद खाने से बचना चाहिए।शकरकंद में विटामिन A की अधिकता होती है। इससे शरीर में पॉइजनिंग हो सकती है। वहीं अधिक मात्रा में आलू खाने से कई सारी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। आइए इसे ग्राफिक के जरिए जानते हैं। आपके लिए कौन सा बेहतर? आलू और शकरकंद दोनों ही हेल्थ के लिए फायदेमंद होते हैं। इनमें कार्बोहाइड्रेट्स, फाइबर, विटामिन्स, मिनरल्स और एंटीऑक्सिडेंट्स की भरपूर मात्रा पाई जाती है। शकरकंद में विटामिन A की मात्रा ज्यादा होती है, जो आंखों की सेहत और इम्यून फंक्शन के लिए बेहद जरूरी है।अपनी हेल्थ को ध्यान में रखते हुए जरूरत के अनुसार, आलू और शकरकंद दोनों को हम अपनी डाइट में संतुलित मात्रा में शामिल कर सकते हैं। अगर इनके साथ प्रोटीन रिच फूड, कई सारी हरी सब्जियां और हेल्दी फैट्स हो, तो ये हमारी सेहत के लिए अधिक फायदेमंद साबित होते हैं। किसे आलू या शकरकंद नहीं खाना चाहिए क्रॉनिक डायबिटीज के मरीजों को आलू खाने से बचना चाहिए। इससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है।आलू में स्टार्च की अधिक मात्रा होती है। ऐसे में गैस्ट्रिक या एसिडिटी की समस्या से जूझ रहे लोगों को आलू से परहेज करना चाहिए।आलू में एक ऐसा केमिकल होता है, जो एनेस्थीसिया के असर को कम कर सकता है। साथ ही सर्जरी से रिकवरी में देरी का कारण बन सकता है। इसलिए किसी सर्जरी के बाद इसे खाने से बचना चाहिए।आलू में ऑक्सलिक एसिड पाया जाता है, जो ब्लैडर सर्जरी के बाद दर्द पैदा कर सकता है। इसलिए ब्लैडर सर्जरी से पहले आलू नहीं खाना चाहिए।क्रॉनिक डायबिटीज हो तो शकरकंद नहीं खाना चाहिए। इससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है।लिवर की बीमारी से जूझ लोगों को भी शकरकंद नहीं खाना चाहिए। शकरकंद में पोटैशियम बहुत ज्यादा होता है, जो लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है।

औषधीय गुणों से भरपूर अर्जुन के पेड़ से संबंधित विस्तृत जानकारी,एवं फायदे

Detailed information and benefits related to Arjuna tree which is rich in medicinal properties. अर्जुन के पेड़ को औषधीय पेड़ माना जाता हैं क्यूंकि इसे बहुत सी दवाइयों के लिए उपयोगी माना जाता है। यह पेड़ ज्यादातर नदी और नालों के किनारे पाए जाते है। अर्जुन का पेड़ सदाहरित रहता हैं। अर्जुन के पेड़ को अन्य कई नामो से जाना जाता हैं जैसे ,घवल और नदीसर्ज। इस पेड़ की ऊंचाई लगभग 60 -80 फ़ीट ऊँची रहती हैं। अर्जुन का पेड़ ज्यादातर उत्तर प्रदेश ,महाराष्ट्र ,बिहार और अन्य कई राज्यों नदियों के किनारे या सुखी नदियों के तल के पास पाए जाते है। अर्जुन का पेड़ कैसा होता हैं अर्जुन के पेड़ की लम्बाई काफी ऊँची रहती है। अर्जुन का पेड़ बहुत ही शुष्क इलाकों में पाया जाता हैं। अर्जुन के पेड़ को किसी भी मिटटी में उगाया जा सकता है। अर्जुन के पेड़ को अनुनारिष्ट के नाम से भी जाना जाता है। इस पेड़ का उपयोग बहुत सालों से आयुर्वेदिक दवाइयों के लिए किया जा रहा है। अर्जुन के पेड़ का फल कैसा होता हैं अर्जुन के पेड़ का फल शुरुआत हल्के सफ़ेद और पीले रंग का होता हैं ,कुछ समय पश्चात जब फल में बढ़ोत्तरी होती हैं तो ये फल हरे और पीले रंग का दिखाई पड़ता हैं ,साथ ही इसमें से हल्की हल्की सुगंध भी आने लगती है। पकने के बाद ये फल लाल रंग का दिखाई पड़ने लगता है। अर्जुन के पेड़ के पत्ते हैं लाभकारी अर्जुन के पेड़ के पत्ते खाने से ये शरीर में जमा गंदे कॉलेस्ट्रॉल को बाहर निकलता हैं। इसका सेवन सुबह खाली पेट करना चाहिए। इन पत्तों का सेवन करने से ब्लड शुगर नियंत्रित रहता हैं। अर्जुन की छाल से मिलने वाले फायदे अर्जुन की छाल का काढ़ा बनाकर पीने से खून पतला होता हैं जो शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को संतुलित बनाये रखता है। इस छाल के काढ़े का उपयोग दो से तीन महीने लगातार करना चाहिए। इस काढ़े के उपयोग से रक्तश्राव कम होता है। यह ह्रदय के रक्तचाप जैसी गतिविधियों की क्षमता में सुधार लाता है। पाचन किर्या में सहायक अर्जुन का पेड़ पाचन किर्या में सहायक होता हैं। इसकी छाल का चूर्ण बनाकर लेने से ये पाचन तंत्र को संतुलित बनाये रखता है। यह बड़े हुए चर्बी को कम करने में मदद करता हैं ,अर्जुन की छाल का सेवन लिवर जैसी समस्याओं के लिए बेहतर माना जाता है। यह वजन घटाने में भी सहायता प्रदान करती है। सर्दी खांसी में है लाभकारी अर्जुन के पेड़ की छाल का कड़ा बनाकर पीने से या फिर अर्जुन के चूर्ण में शहद मिलाकर खाने से सर्दी और खांसी दोनों में फायदा होता है। अर्जुन के पेड़ का रस औषिधि के रूप में सदियों से किया जा रहा हैं। हड्डियों के जोड़ने में मददगार अर्जुन के पेड़ की छाल का उपयोग टूटी हुई हड्डियों या फिर मांसपेशियों में होने वाले दुखाव के लिए किया जाता हैं। इसमें छाल के चूर्ण को एक गिलास दूध में दो चम्मच चूर्ण मिलाकर पीने से हड्डियां मजबूत होती है। ये हड्डी में होने वाले दर्द से भी आराम दिलाता हैं। अल्सर बीमारी में है फायदेमंद अर्जुन का प्रयोग अल्सर जैसी बीमारी में भी किया जाता हैं। कई बार अल्सर का घाव जल्द ही नहीं भर पाता हैं। या फिर घाव सूखते ही दूसरे घाव निकल आते हैं ,इसमें अर्जुन के पेड़ की छाल का काढ़ा बनाकर ,घाव को इससे धोये। ऐसा करने से घाव कम होने लगते हैं,साथ ही अल्सर जैसे रोग को भी नियंत्रित करता है। अर्जुन की छाल से होने वाले नुकसान अर्जुन के पेड़ को बहुत सी बीमारियों के लिए लाभकारी माना जाता हैं ,लेकिन इसके कुछ नुक्सान भी हैं जो शरीर पर गलत प्रभाव डालते है। सीने में जलन होना अर्जुन की छाल का सेवन बहुत से लोगो की सेहत के लिए ठीक नहीं रहता हैं, जिसकी वजह से उन्हें जी मचलना या घबराहट जैसी परेशानियां अक्सर हो जाती है। यदि आप छाल का सेवन कर रहे हैं और आपको ऐसा महसूस होता हैं की सीने में जलन या दर्द हो रहा हैं तो इसका उपयोग करना उसी वक्त छोड़ दे। पेट में दर्द या ऐठन का महसूस होना यदि छाल का उपयोग करने से आपको पेट में दर्द या और कोई परेशानी महसूस होती हैं तो छाल का सेवन करना बंद कर दे। हालाँकि अर्जुन एक आयुर्वेदिक जड़ीबूटी हैं लड़की कुछ लोगों पर इसका दुष्प्रभाव पड़ता है। एलेर्जी जैसो रोगों को जन्म देता हैं अर्जुन के पेड़ की छाल का घोल बनाकर शरीर पर लगाया जाता हैं, यह त्वचा के लिए बहुत ही लाभकारी माना जाता हैं। लेकिन इसका लेप बहुत से लोगो के शरीर एलेर्जी से जुडी समस्याओं को भी खड़ा कर देता हैं। यदि इस लेप का उपयोग करने के बाद शरीर में खुजली जैसी परेशानिया हो तो इस लेप का उपयोग न करें। आयुर्वेद में अर्जुन के पेड़ को बहुत ही लाभकारी माना गया हैं। अर्जुन के पेड़ में सबसे ज्यादा उपयोग छाल का किया जाता हैं। अर्जुन के पेड़ की छाल में मैग्नीशियम ,पोटेसियम और कैल्शियम पाया जाता है। इस पेड़ की छल का इस्तेमाल बहुत से रोगो में किया जाता हैं ,और ये लाभकारी भी है। अर्जुन के पेड़ की छाल का उपयोग कैंसर सम्बंधित रोगो से निपटने के लिए भी किया जाता है। साथ ही इसके कुछ नुक्सान भी हैं। जो व्यक्ति पहले से किसी भी प्रकार की कोई दवाई ले रहा हैं ,उसे इसका सेवन डॉक्टर से परामर्श लेकर ही करना चाहिए।

मध्य प्रदेश : हजारों फार्मासिस्टों की पोस्ट खाली फिर भी स्वास्थ्य विभाग कर रहा है अनदेखी ?

Madhya Pradesh: Posts of thousands of pharmacists are vacant yet the health department is ignoring it?

Madhya Pradesh: Posts of thousands of pharmacists are vacant yet the health department is ignoring it? भोपाल ( कमलेश )। मप्र में स्वास्थ्य विभाग के प्रशासकीय 10267 केंद्र संचालित हैं। यहां अभी तक फार्मासिस्टों की भर्ती नहीं हो सकी है, जबकि इन स्वास्थ केंद्रों में 126 प्रकार की दवाओं का वितरण और संधारण किया जाता है। वर्तमान में इन उप स्वास्थ्य केंद्रों में गैर-फार्मासिस्टों की मदद ली जा रही है, जो फार्मेसी एक्ट का उल्लंघन है। बता दें कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के तहत देशभर के उपस्वास्थ्य केंद्रों में आयुष, नर्सिंग के साथ फार्मासिस्ट भी कम्युनिटी हेल्थ आफिसर पद के लिए योग्य हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मप्र द्वारा फार्मासिस्टों को नजरअंदाज किया जा रहा है।दरअसल, देश में संचालित चिकित्सा प्रणाली मुख्यतः एलोपैथी पर आधारित है, जिसके तहत एमबीबीएस व एमएस/एमडी डिग्रीधारी चिकित्सक इस पद्धति से उपचार करते हैं। एलोपैथी पद्धति में एमबीबीएस, एमएस डिग्रीधारी चिकित्सक के बाद फार्मासिस्ट ही मरीजों एवं बीमारियों से संबंधित जानकारी के सबसे नजदीक हैं।फार्मासिस्ट अपने बी फार्मेसी एवं एम फार्मेसी कोर्स के दौरान इसका अध्ययन भी करते हैं। बी फार्मेसी चार वर्षीय पाठ्यक्रम में थ्योरी एवं प्रैक्टिकल मिलाकर कुल 75 विषयों के तहत एलोपैथी पद्धति विशेषतः बीमारी एवं उसके उपचार से संबंधित अध्ययन किया जाता है, बावजूद इसके फार्मासिस्टों को कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर के पद के लिए योग्य नहीं समझा जा रहा।काउंसिल बना दलालों का अड्डाफार्मासिस्टों ने बताया है कि मप्र फार्मेसी काउंसिल में निरंतर अनियमितताएं पाई जा रही हैं। इसमें खासतौर पर पंजीकृत फार्मासिस्टों के रिनुअल, नए पंजीयन, एनओसी और पंजीयन के लिए प्रोफाइल क्रिएशन में समस्या होती है, जिससे हजारों फार्मासिस्ट परेशान होते हैं।फार्मासिस्टों का आरोप है कि काउंसिल में बिना लेने-देन कोई काम नहीं होता है, यह दलालों का अड्डा है। काउंसिल परिसर में दलाल सक्रिय हैं। जो फार्मासिस्ट रिश्वत नहीं देते हैं, उनके काम रोक दिए जाते हैं। जनता के साथ खिलवाड़स्वास्थ्य विभाग के 10267 उप स्वास्थ्य केंद्रों में फार्मासिस्ट के पद को स्वीकृत नहीं किया गया है। जिसके चलते दवाओं का वितरण, संधारण आदि कार्य गैर फार्मासिस्ट से कराया जा रहा है। इससे प्रदेश की जनता के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। – राजन नायर, प्रदेश संयोजक, स्टेट फार्मासिस्ट एसोसिएशन, मप्र

अमानक दवाओं की सप्लाई पर चिकित्सक महासंघ अलर्ट, CM को लिखी चिट्ठी

Doctors federation alert on supply of non-standard medicines, letter written to CM

Doctors federation alert on supply of non-standard medicines, letter written to CM भोपाल ! प्रदेश के सरकारी अस्पताल में अमानक दवाइयों की सप्लाई हो रही है. इस बात का खुलासा चिकित्सक महासंघ द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को लिखे पत्र से हुआ है. चिकित्सक महासंघ द्वारा लिखे गए पत्र में सीएम से एफआईआर दर्ज कराने के साथ ही आजीवन कारावास सजा की मांग की है. बता दें मध्य प्रदेश में सरकारी अस्पतालों में अमानक दवाइयों का मामला सुर्खियों में बना हुआ है. इसे लेकर मध्य प्रदेश मेडिकल कॉरपोरेशन ने सीएम डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखा है. इस पत्र में शासकीय अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों की शिकायत पर आईसीयू और ऑपरेशन के दौरान उपयोग की जाने वाली जीवन रक्षक 10 दवाओं को लैब जांच में अमानक पाए जाने पर चिंता जताई. डॉक्टर्स ने मामले को गंभीर चिंता का विषय बताया और सीएम को लिखे पत्र में बताया कि 10 जीवन रक्षक दवाओं का अमानक पाया जाना मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ है. ‘बच्चों के स्वास्थ्य से भी खिलवाड़’पत्र में बताया कि ओआरएस जैसे सामग्री के अमानक पाए जाने से दस्त एवं डायरिया से ग्रस्त बच्चों का इलाज प्रतिकूल रूप से प्रभावित हुआ है. हमारे चिकित्सकों ने गंभीर मरीजों के उपचार में इन दवाओं का उपयोग किए जाने पर मरीजों पर दवा का असर न होना पाया गया है. चिकित्सा संघ ने कहा की विगत दिनों में लगातार दवाओं के अमानक पाए जाने पर ऐसा प्रतीत होता है कि निर्माता कंपनियों पर गुणवत्तापूर्ण दवाइयां निर्मित करने का कोई नियंत्रण नहीं है. आजीवन कारावास की सजा होसीएम को लिखे पत्र में कहा कि मध्य प्रदेश शासकीय स्वशासी चिकित्सक महासंघ मांग करता है कि मध्य प्रदेश में दवा निर्माता कंपनियों शासकीय अस्पतालों में अमानक दवाइयां सप्लाई करने की स्थिति में आजीवन कारावास का कठोर दंड निर्धारित किया जाए.

भोपाल: औषधि निरीक्षक एवं CMHO की सयुंक्त टीम ने शहर के क्लिनिक पर की कार्यवाही से शहर में मचा हड़कंप । 

A young man died due to the negligence of a doctor at Aditya Hospital, Jabalpur

The joint team of drug inspector and CMHO created a stir in the city due to the action taken against the city clinic. भोपाल, ड्रग इंस्पेक्टर तबस्सुम मेरोठा ने शुक्रवार को  दोपहर बाद भोपाल शहर के बाणगंगा क्षेत्र में संचालित विकास क्लिनिक पर कार्यवाही की जिसमे उन्होंने पाया की फर्जी तरीके से क्लिनिक जिसका नाम विकास क्लिनिक का आकस्मिक निरीक्षण किया। जहाँ करीब 6 बॉक्स भरकर एलॉपथी की दवाईया मिली,  उन्होंने विभिन्न दवाओं के खरीद के बिल चेक किए, रजिस्टर चेक किए। विकास क्लिनिक के संचालक डॉक्टर अनिल शर्मा इन सभी के कोई भी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाए. जिसके तहत फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट ने क्लिनिक पर एलॉपथी दवाई पाए जाने पर उचित कार्यवाही की गयी।  CMHO एवं निरयंत्रक खाद्य एवं औषधि प्रशासन की सयुक्त टीम ने यह कार्यवाही की, टीम में DHO मनोज हुरमाडे व् सदस्य, ड्रग इंस्पेक्टर मौजूद थे।  उन्होंने इसके अलावा टीम ने आस पास के क्षेत्र में भी मेडिकल चेक किये तथा अपनी रूटीन कार्यवाही को अंजाम दिया।  ड्रग इंस्पेक्टर भोपाल तबस्सुम मेरोठा ने बताया कि दवा मेडिकल स्टोर पर दवाओं की खरीद और बिक्री का विवरण रखें, शेड्यूल एच 1 का रजिस्टर बनाएं, फ्रिज रखें, मेडिकल स्टोर लाइसेंस चस्पा करके रखें, इसके अलावा पशुओं की दवा बेचते हैं तो वह दवा रखने के स्थान पर बोर्ड भी लगाएं। ड्रग इंस्पेक्टर कन्हैया लाल अग्रवाल एवं तबस्सुम मेरोठा से मिली जानकारी के अनुसार पिछले एक महीने में अनेक कार्यवाहियां खाघ एवं औषधि प्रशासन  के आदेश कार्यक्षेत्र में संचालित औषधि विक्रय संस्थानों के द्वारा औषधियों पर अंकित एम.आर.पी. से अधिक मूल्य पर औषधियों का विक्रय न हो एवं आम जनता को उचित मूल्य पर औषधियों उपलब्ध हो सके, साथ ही औषधि विक्रय संस्थान द्वारा बेची जाने वाली ऐसी औषधियों जिनका दुरूपयोग नशे के रूप में हो सकता है। औषधि विक्रय संस्थानों द्वारा औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 एवं नियमावली, रजिस्टर्ड मेडिकल प्रेक्टीशनर के पर्चे के बिना यदि कोई शेडयूल एथ, एच। एवं एक्स का विक्रय किये जाने के संबंध में कोई प्रकरण पाया जाता है तो औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 एवं नियमावली, 1945 के तहत् कठोर कार्यवाही की जाएगी सभी निजी चिकित्सालयों/ नर्सिंग होम परित्तर में संचालित औषधि विक्रय संस्थानों के मालिक, कर्मचारी, स्टॉफ अथवा चिकित्सालयों के स्टॉफ द्वारा मरीजों को अथवा मरीजों के परिजन को उनके ही औषधि विक्रय संस्थान से ही औषधि क्रय किये जाने हेतु बाध्य नहीं कर सकते । इस प्रकार का कृत्य करते पाए जाने औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत कठोर कार्यवाही की जाएगी।  

खाघ एवं औषधि नियंत्रक के आदेश की, रायसेन औषधि निरीक्षक द्वारा उड़ाई जा रही है धज्जिया। 

Raisen; Health Department; DI Ajeet Jain; Bhopal;

The orders of the Food and Drug Controller are being flouted by the Raisen Drug Inspector. Special Correspondent, Raisen, Madhya Pradesh भोपाल , मध्य प्रदेश के सभी ड्रग इंस्पेक्टरों को खाघ एवं औषधि नियंत्रक द्वारा 27 जुलाई 2024 को एक आदेश भेजा गया था, जिसमे मध्यप्रदेश के सभी जिलों के औषधि निरीक्षकों को उनके कार्यक्षेत्र में संचालित हो रहे औषधि विक्रय संस्थानों के द्वारा औषधियों पर अंकित एम.आर.पी. से अधिक मूल्य पर औषधियों का विक्रय न हो एवं आम जनता को उचित मूल्य पर औषधियों उपलब्ध हो सके, साथ ही औषधि विक्रय संस्थान द्वारा बेची जाने वाली ऐसी औषधियों जिनका दुरूपयोग नशे के रूप में हो सकता है ऐसी औषधियों की बिक्री को और प्रभावी रूप से नियंत्रित किये जाने के संबंध में आदेश जारी किये गए थे, एवं औषधि निरीक्षको को निरिक्षण कर यह सुनिश्चित करने को कहा गया था की किसी फार्मेसी/ केमिस्ट शॉप / मेडिकल स्टोर के द्वारा बिना प्रिस्क्रिप्शन के शेडयूल H, H1 एवं X में दी गई औषधियों का विक्रय न किया जाये।  निजी चिकित्सालयों/ नर्सिंग होम परित्तर में संचालित औषधि विक्रय संस्थानों के मालिक, कर्मचारी, स्टॉफ द्वारा अथवा चिकित्सालयों के स्टॉफ द्वारा मरीजों को अथवा मरीजों के परिजन को उनके ही औषधि विक्रय संस्थान से ही औषधि क्रय किये जाने हेतु बाध्य नहीं किया जाय।  रजिस्टर्ड मेडिकल प्रेक्टीशनर के पर्चे के बिना यदि शेडयूल H, H1 एवं X का विक्रय न किया जाये एवं आम जनता हेतु औषधि विक्रय संस्थान द्वारा प्रमुख स्थान पर इस आशय को प्रदर्शित किया जाये कि ऐसी औषधियों जो शेडयूल H, H1 एवं X में आती है उन्हें बिना प्रिस्क्रिप्शन के नहीं बेचा जाय। इन्होने क्या कहा —-? लेकिन रायसेन जिले के औषधि निरीक्षक “अजीत जैन” इस आदेश की धज्जियां उड़ाते दिख रहे है “सहारा समाचार” टीम के द्वारा फ़ोन पर बात करने पर औषधि निरीक्षक अजीत जैन ने लगभग 24 घंटे बाद 5-6 कॉल करने पर हमारी टीम का फ़ोन उठाया एवं जानकारी देने से मना कर दिया और कहा की में इस सम्बन्ध में आप से कोई बात नहीं कर सकता।   हमारे संवाददाता ने रायसेन क्षेत्र में जाकर जानकारी इकठा करने की कोशिश की तो पता चला की यहाँ पर किसी भी प्रकार की कोई कारवाही नहीं की गयी। इस से यह स्पष्ठ होता है की रायसेन के औषधि निरीक्षक इस आदेश को गंभीरता से नहीं ले रहे है आसपास के जिलों से मिली जानकारी के अनुसार मेडिकल संस्थानों पर शेडयूल H, H1 एवं X के चेतावनी का विज्ञापन प्रदर्शित देखा गया है।

कोलकाता की घटना के बाद मध्य प्रदेश प्रशासन सख्त, सरकारी अस्पतालों के कर्मचारियों का पता लगाया जाएगा बैकग्राउंड

Madhya Pradesh administration strict after Kolkata incident, background of government hospital employees will be ascertained

Madhya Pradesh administration strict after Kolkata incident, background of government hospital employees will be ascertained भोपाल। कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में ट्रेनी महिला डॉक्टर के साथ हुई हैवानियत की घटना के बाद मप्र में भी स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी अस्पतलों की सुरक्षा- व्यवस्था पुख्ता करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। सरकारी अस्पताल में काम करने वाले कर्मचारियों की कुंडली जांची जाएगी। स्वास्थ्य आयुक्त ने सरकारी अस्पताल के सफाईकर्मी, सुरक्षाकर्मी सहित अन्य कर्मचारियों के बैकग्राउंड की जांच के आदेश दिए हैं। इससे यह पता चल जाएगा कि अस्पतालों में काम करने वालों में से कोई किसी आपराधिक प्रवृत्ति का तो नहीं है। इसके अलावा सभी अस्पतालों के अधीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि अस्पताल की सुरक्षा और सीसीटीवी कैमरों की जानकारी उपलब्ध करवाएं। इससे अस्पताल में सुरक्षा-व्यवस्था पुख्ता हो सकेगी। क्योंकि इन अस्पतालों में बड़ी संख्या में महिला डॉक्टर दिन-रात ड्यूटी करती हैं। हमीदिया हो या फिर जेपी अस्पताल, इनमें डाक्टर एक साथ ड्यूटी रूम साझा करने के लिए मजबूर हैं, क्योंकि यहां पुरुष और महिला डॉक्टरों के लिए अलग-अलग कमरे नहीं हैं।जेपी अस्पताल में कमरों के दरवाजे टूटे, कैमरा भी नहींराजधानी के मॉडल जिला अस्पताल जेपी में बने ड्यूटी रूम में कोई सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं। कमरों के दरवाजे भी टूटे हुए हैं। कई बार कोई गार्ड भी ड्यूटी पर नहीं होता है। अस्पताल के कर्मचारियों के अनुसार मेडिसिन विभाग में 15 ड्यूटी डाक्टर हैं और एक समय में 10 से अधिक ड्यूटी पर रहते हैं, लेकिन यहां सिर्फ एक सामान्य ड्यूटी रूम हैं, जो काफी छोटे हैं। शौचालय की स्थिति खराब है, टूटे हुए बिस्तर हैं और वेंटिलेशन के लिए कोई जगह नहीं है। कई बिस्तरों पर तो सिर्फ सामान ही रखा जा रहा है।शिकायत के बावजूद सुनवाई नहींचिकित्सक महासंघ के मुख्य संयोजक डॉ. राकेश मालवीय ने बताया कि डॉक्टरों ने सुरक्षा को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों से कई बार शिकायत की है, लेकिन अभी तक कोई फायदा नहीं हुआ। अस्पताल में डॉक्टरों के लिए कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं है। कोई भी घूमते हुए किसी भी वार्ड में घुस सकता है।डॉ. राकेश मालवीय के अनुसार, बड़ी संख्या में स्वजन और कई असामाजिक तत्व बिना किसी जांच के गलियारों में बैठे रहते हैं। इतना ही नहीं मरीजों के स्वजन द्वारा दुर्व्यवहार के समय भी मौके पर गार्ड नहीं होता है, हमें उसे ढूंढना पड़ता है। सुरक्षा बढ़ाने और CCTV की जांच के निर्देश

किस विटामिन की कमी से जल्दी आता है बुढ़ापा? वैज्ञानिकों ने लगाया पता

Deficiency of which vitamin causes early ageing? Scientists discovered

Deficiency of which vitamin causes early ageing? Scientists discovered उम्र बढ़ना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है. हर कोई बूढ़ा होता है, लेकिन कुछ लोगों की उम्र उनके चेहरे पर नहीं दिखती. वे अपनी उम्र से काफी छोटे लगते हैं. क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है? वैज्ञानिकों ने इस सवाल का जवाब ढूंढ निकाला है. न्यूट्रिएंट्स जर्नल में प्रकाशित एक नए अध्ययन के अनुसार, विटामिन डी उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा कर सकता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि विटामिन डी कई महत्वपूर्ण कारकों को प्रभावित करता है जो उम्र बढ़ने और उम्र से संबंधित बीमारियों से जुड़े होते हैं. उम्र बढ़ने की प्रक्रिया कैसे होती है?उम्र बढ़ने के साथ-साथ हमारे शरीर में कई बदलाव होते हैं. सेल्स में सूजन, सेल्स के बीच संचार में गड़बड़ी, स्टेम सेल की थकान, सेल्स की सेंसिटिविटी कम होना, माइटोकोंड्रिया का कमजोर होना, पोषक तत्वों का सही तरीके से अवशोषण न होना, प्रोटीन में बदलाव और जीन में बदलाव जैसे कई कारक उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं. ये सभी प्रक्रियाएं बहुत जटिल हैं, लेकिन विटामिन डी इन सभी प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. विटामिन डी कैसे करता है काम?विटामिन डी हमारे शरीर के लिए कई तरह से फायदेमंद होता है. यह हड्डियों को मजबूत बनाने, प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने और मूड को बेहतर बनाने में मदद करता है. इसके अलावा, विटामिन डी सेल्स की मरम्मत और नवीनीकरण में भी मदद करता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि विटामिन डी सूजन को कम करके, सेल्स के बीच संचार को बेहतर बनाकर और स्टेम सेल को सक्रिय करके उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा कर सकता है. विटामिन डी की कमी के क्या होते हैं लक्षण?विटामिन डी की कमी से हड्डियों का कमजोर होना, थकान, मसल्स में दर्द, डिप्रेशन और इम्यून सिस्टम कमजोर होना जैसे लक्षण हो सकते हैं. इसके अलावा, विटामिन डी की कमी से दिल की बीमारियां, कैंसर और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है. विटामिन डी कैसे प्राप्त करें?विटामिन डी सूर की रोशनी से मिलता है. आप रोजाना कुछ समय धूप में बैठकर अपनी विटामिन डी की जरूरत पूरी कर सकते हैं. इसके अलावा, आप विटामिन डी से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे मछली, अंडे और दूध का सेवन भी कर सकते हैं. यदि आपको विटामिन डी की कमी है तो आप अपने डॉक्टर से विटामिन डी की गोलियां लेने की सलाह ले सकते हैं.

चिलचिलाती गर्मी में शरीर को फायदा पहुंचाएगा लौकी का रायता, जानें इसे बनाने का तरीका

Bottle gourd raita will benefit the body in the scorching heat, know how to make it अप्रैल का महीना चल रहा है और भीषण गर्मी से अभी से लोगों की हालत खराब होने लगी है। कई शहरों में तो तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से पार चला गया है, जिस वजह से लोगों ने बाहर निकलना तक बंद कर दिया है। इस मौसम में लोगों को अपने खाने का खासा ध्यान रखना पड़ता है। अगर आप भी ऐसी डिश की तलाश कर रहे हैं, जो स्वाद और सेहत दोनों के लिए फायदेमंद हो तो लौकी का रायता एक बेहतर विकल्प है। लौकी गर्मी के मौसम में शरीर को काफी लाभ पहुंचाती है। इसमें कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को हाइड्रेट रखते हैं। इसके साथ ही लौकी मे पाए जाने वाले विटामिन-सी, फाइबर, पोटेशियम और अन्य तत्व शरीर के लिए लाभदायक हैं। वहीं दही शरीर को ठंडक प्रदान करता है। ऐसे में अगर आप लौकी का रायता बनाकर खाएंगे, तो आपको इसका लाभ देखने को जरूर मिलेगा। लौकी का रायता बनाने का सामान विधि लौकी का रायता बनाना काफी आसान है। इसके लिए सबसे पहले लौकी का छिलका उतारकर उसे चार टुकड़ों में काटकर कद्दूकस कर लें। कद्दूकस करने के बाद लौकी को एक पैन में पानी डालकर उबाल लें। इसे आपको 5-8 मिनट तक उबालना है। जब लौकी गल जाए तो इसे छलनी से छानकर एक थाली में फैला दें।जब तक ये ठंडी हो रही है, तब तक एक भगोने में दही लेकर उसे सही से फेंट लें। अब आपको रायते के तड़के की तैयारी करनी है। तड़का लगाने के लिए सबसे पहले एक पैन में तेल डालकर इसे गर्म करें। तेल गर्म हो जाने के बाद इसमें हींग-जीरे का तड़का लगाएं। तड़का बन जाने के बाद इसे फेंटी हुई दही में डालें। तड़का लगाने के बाद दही को सही से मिक्स करें। आखिर में इसमें उबली हुई लौकी, बारीक कटी धनिया पत्ती, हरी मिर्च स्वादानुसार नमक और थोड़ा सा काला नमक डालें। रायता तैयार होने के बाद इसे फ्रिज में रख दें। अब ठंडे रायते को खाने के साथ परोसें।

टमाटर खाने से दूर हो सकती हैं कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियां, जानें फायदे

Eating tomatoes can cure dangerous diseases like cancer, know the benefits टमाटर में विटामिन C ही नहीं सोडियम, फास्फोरस, कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम और सल्फर जैसे पावरफुल तत्व पाए जाते हैं. इसमें मौजूद ग्लूटाथियोन इम्यूनिटी बढ़ाकर कई तरह की बीमारियों से बचा सकता है. हेल्थ डेस्क सहारा समाचार, भोपाल ! टमाटर हर सब्जी की जान होता है. इसे सलाद, चटनी, सॉस और न जाने कितने सारे फूड्स को टेस्टी बनाने में उपयोग किया जाता है. यह सेहत के लिए जबरदस्त फायदेमंद है. इसमें (Tomatoes) ढेर सारे पौष्टिक तत्व और कई एंटीऑक्सिडेंट्स (Antioxidant) भी पाए जाते हैं, जो शरीर को कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियों से भी बचा सकते हैं. इसके अलावा कब्ज और कमजोरी जैसी समस्याएं भी दूर करने में टमाटर उपयोगी हो सकते हैं. आइए जानते हैं टमाटर के क्या-क्या फायदे हैं… टमाटर क्यों इतना फायदेमंदटमाटर में लाइकोपेन नाम का एंटीऑक्सीडेंट होता है, जो हार्ट की बीमारी और कैंसर के खतरे को कम करता है. टमाटर में विटामिन C ही नहीं सोडियम, फास्फोरस, कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम और सल्फर जैसे जरूरी और पावरफुल तत्व पाए जाते हैं. इसमें मौजूद ग्लूटाथियोन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी को बढ़ा देता है और प्रोस्ट्रेट कैंसर से भी शरीर की रक्षा करता है. यह एक अच्छे एंटीऑक्सिडेंट का काम करता है, इसीलिए यह शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को सामान्‍य बनाने में मदद करता है. टमाटर के क्या-क्या फायदे हैं कैंसर का खतरा करें कमरिसर्च में पता चला है कि जब मोनोपॉज के बाद अगर महिलाएं टमाटर खाती हैं तो ब्रेस्ट कैंसर का रिस्क काफी कम हो सकता है. इससे ग्लूटाथियोन नाम का एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है, जो हार्मोन्स पर सकारात्मक असर डालकर कैंसर का रिस्क कम होता है. वजन कम करेंलो कैलोरी फूड होने के कारण यह टमाटर आपके वजन को कंट्रोल में रखता है. इसमें पानी के साथ ही फाइबर भी काफी ज्यादा मात्रा में होता है. इस वजह से वजन कम करने में ये काफी मदद कर सकता है. वेट कंट्रोल करने वाले गुण की वजह से ही इसे ‘फिलिंग फूड’ नाम से भी जाना जाता है. शरीर को दे मजबूतीटमाटर में विटामिन और कैल्शियम पाए जाते हैं, जो हड्डियों के टिशूज़ हेल्दी रखकर उन्हें मजबूत बनाते हैं. टमाटर खाने से ब्रेन हैमरेज की का खतरा भी कम किया जा सकता है. इससे शरीर को मजबूती मिलती है. पाचन शक्ति बढ़ाएटमाटर में मौजूद क्लोरीन और सल्फर के कारण पाचन शक्ति बढती है और गैस-कब्ज जैसी परेशानी दूर हो जाती हैं. टमाटर हमारे शरीर से खराब पदार्थों को बाहर निकालने में भी मददगार होता है.Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

जिला चिकित्सालय में उपलब्ध नहीं रहती पूरी दवाई , बाहर की दवा लेने को मजबूर नागरिक

Complete medicines are not available in the district hospital, citizens are forced to take medicines from outside. कटनी । शासन के द्वारा नागरिकों को मुहैया कराने के लिए जिला चिकित्सालय में दवाइयां उपयोग कराई जाती हैं एवं अच्छे स्वास्थ्य की अपेक्षा की जाती है लेकिन जिला चिकित्सालय में आए हुए मरीजों को पूरी दवाइयां उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं डॉक्टर जो दवा लिखते हैं इसमें कई दवाइयां नागरिक बाहर से खरीदने को मजबूर होते हैं यह कोई नई बात नहीं है यह सिलसिला हमेशा चलता रहता है मिली जानकारी के मुताबिक जिला चिकित्सालय में लगभग 80 परसेंट दवाइयां उपलब्ध रहती हैं एवं कई प्रकार की दवाइयां जिला चिकित्सालय में आती हैं फिर भी डॉक्टर के द्वारा लिखी दवाइयां कुछ मरीजों को प्राप्त नहीं हो पाती हैं नागरिकों ने बताया कि कई बार ऐसा होता है कि बाहर से दवाई लेने को मजबूर होते हैं जिला चिकित्सालय में हर रोज कई मरीज आते हैं और बाहर से भी जिसको दवाइयां नहीं मिलती है वह परेशान होते हैं मरीज ने बताया कि पूर्ण रूप से दवाइयां नहीं मिल पाती हैं जिससे बाहर महंगे दामों में खरीदना पड़ता है इस विषय पर सिविल सर्जन डॉक्टर यशवंत वर्मा का कहना है कि हमारी कोशिश रहती है कि मरीज को दवाइयां उपलब्ध कराना कभी स्टॉक में कमी हो जाती है और लेट दवाइयां मिलने के कारण मरीजों को उपलब्ध नहीं हो पाती हैं

डायबिटीज के मरीजों के लिए हैं वरदान , पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं मोरिंगा के पत्ते

Moringa leaves are a boon for diabetic patients, they are rich in nutrients. मोरिंगा की फली का इस्तेमाल कई तरह के भोजन बनाने के लिए किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते है कि न सिर्फ इसकी फली बल्कि पत्ते भी हमारी सेहत के लिए काफी फायदेमंद होते हैं। डायबिटीज कंट्रोल से लेकर पाचन बेहतर करने तक इसके कई फायदे हैं।मोरिंगा की फली का इस्तेमाल कई तरह के भोजन बनाने के लिए किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते है कि न सिर्फ इसकी फली बल्कि पत्ते भी हमारी सेहत के लिए काफी फायदेमंद होते हैं। डायबिटीज कंट्रोल से लेकर पाचन बेहतर करने तक इसके कई फायदे हैं। खुद को हेल्दी रखने के लिए हम कई चीजें को अपनी डाइट में शामिल करते हैं। फलों हो या हरी सब्जियां ये सब हमारे हेल्दी डाइट का ही एक हिस्सा होती हैं। इन्हीं में से एक है सहजन की फली जिसका इस्तेमाल लोग सब्जी के रूप में करते हैं। खासकर सांभर बनाने के लिए इसका बहुत इस्तेमाल होता है। लेकिन क्या आपके पता हैं कि सहजन की सिर्फ फली ही नहीं इसके पत्ते भी हमारे सेहत के लिए फायदेमंद हैं। सेहजन की पत्तियों में कई पोषक तत्व होते हैं जो सेहत को दुरूस्त रखने में मदद करते हैं। ऐसे में इन पत्तों को अपनी डाइट में शामिल करके आप कई बीमारियों से बच सकते हैं। डायबिटीज में असरदारअगर आप भी डायबिटीज से परेशान है तो ये आपके बहुत काम आ सकती हैं। डायबिटीज के मरीजों के लिए सहजन के पत्ते किसी वरदान से कम नहीं हैं। ये हमारे बॉडी में ब्लड शुगर के लेवल को स्थिर करने में योगदान देती हैं। जिसका सकारात्मक प्रभाव डायबिटीज मरीजों पर पड़ता है। इतना ही नहीं ये हमारे शरीर की इम्यूनिटी को भी मजबूत रखने में मदद करता है। बेहतर बनाए पाचनआप भी अगर पाचन संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं तो ये आपके काम आ सकती है। जी हां सहजन की पत्तियां आपके पाचन संबंधी समस्या के बेहतर बनाने के काम आ सकती है। इसकी पत्तियों में एंटीबायोटिक और एंटी-बैक्टीरियल जैसे गुण मौजूद होते हैं, जो पाचन को बेहतर बनाने का काम करते हैं। विटामिन से भरपूरमोरिंगा की पत्तियां विटामिन ए, विटामि सी, विटामि बी1, फोलेट, आयरन, कैल्शियम जैसे कई विटामिन की मात्रा पाई जाती है। इसके सेवन से हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज, कैंसर जैसी कई बीमारियों के लिए फायदेमंद है। इन पत्तियों को अपने डाइट में शामिल करके आप कई बीमारियों से बच सकते हैं। Disclaimer – इस लेख में दी गई सूचनाएं सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। सहारा समाचार इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह लें।

हल्के में ना लें सिरदर्द, हो सकती हैं ये गंभीर बीमारियां

Do not take headache lightly, it can lead to serious diseases. जानें राहत पाने के उपाय सिरदर्द होने पर आमतौर पर दर्द की दवा खाकर ठीक हो जाते हैं लेकिन अगर दर्द लगातार बना हुआ है तो कोई गंभीर बीमारी भी हो सकती है. ऐसी कंडीशन में इसे सामान्य दर्द समझने की गलती नहीं करनी चाहिए. Headache Remedies: सिरदर्द एक आम समस्या मानी जाती है लेकिन अगर इससे ज्यादा दिन से परेशान हैं तो सावधान हो जाइए, क्योंकि जब कई दिनों तक सिरदर्द (Headache) ठीक न हो तो वह गंभीर रूप भी ले सकती है. इसका कारण कई खतरनाक बीमारी भी हो सकती है. ऐसे में डॉक्टर के पास जाने की नौबत आ सकती है. इसलिए सिरदर्द को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. आइए जानते हैं सिरदर्द के क्या कारण हो सकते हैं और इससे बचने के लिए क्या करना चाहिए… सिरदर्द का गंभीर कारण बुखार के साथ सिरदर्दकई बार बुखार के साथ सिरदर्द या गर्दन में अकड़न की वजह से भी होती है. यह इंसेफेलाइटिस या मेनिन्जाइटिस के संकेत भी हो सकते हैं. जिसे दिमागी बुखार या मस्तिष्क ज्वर भी कहा जाता है.यह एक संक्रामक बीमारी है, जिसमें मेनिन्जेस में सूजन आ जाती है. इस तरह का सिरदर्द खतरनाक भी हो सकता है. ऐसे लोग जिन्हें डायबिटीज या उनकी इम्यूनिटी कमजोर है, उनके लिए यह जानलेवा भी हो सकती है. इसलिए समय रहते इसका इलाज करवाना चाहिए. माइग्रेन या क्लस्टर हेडेकक्लस्टर हेडेक या माइग्रेन से होने वाला सिरदर्द अलग होता है. माइग्रेन की वजह से सिर के किसी एक हिस्से में काफी तेज दर्द होता है. इसमें उल्टी या मिचली भी आती है. कई बार यह दर्द इतना ज्यादा होता है कि नींद खुल जाती है. यह समस्या 20 से 50 साल की उम्र वालों में ज्यादा देखने को मिलता है. कई बार ब्रेन ट्यूमर, स्लीप एपनिया और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों की वजह से भी सिरदर्द होता है. स्ट्रेस की वजह से सिरदर्दस्ट्रेस यानी तनाव की वजह से भी सिरदर्द की समस्या होती है. इसमें सिरदर्द अचानक से होता है और फिर खुद से ही ठीक हो जाता है. हालांकि, तनाव से होने वाले दर्द में कोई दूसरा लक्षण नहीं दिखाई देता लेकिन इसे भी हल्के में नहीं लेना चाहिए. थंडर क्लैप सिरदर्दथंडरक्लैप सिरदर्द काफी गंभीर बीमारी है. इसमें कुछ ही सेकेंडस में ही तेज दर्द होने लगता है. कई बार स्ट्रोक, आर्टरीज के डैमेज होने या सिर में चोट की वजह से भी दर्द हो सकता है. कई बार ये दर्द सिर से पीठ की तरफ बढ़ जाता है और कई-कई घंटों तक बना रहता है. थंडर क्लैप सिरदर्द की वजह से मिचली, बेहोशी और चक्कर आने की समस्याएं हो सकती हैं. हाई ब्लड प्रेशर वालों को यह दर्द ज्यादा परेशान कर सकता है. साइनस सिरदर्दसिर में साइनस या कैविटी में सूजन आने के कारण भी कई बार सिर में तेज दर्द होता है. यह दर्द लगातार होता रहता है. इसमें सिरदर्द के अलावा नाक के ऊपरी हिस्से या गाल की हड्डी पर भी दर्द हो सकता ह. इसकी वजह से चेहरे पर सूजन, कान बंद होना, बुखार और नाक बहने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं. आंखों की बीमारी से सिरदर्दआंखों का धुंधलापन, रेटिना की प्रॉब्लम्स या आंखों की दूसरी समस्याओं की वजह से भी सिर दर्द बहुत तेज होता है. अगर आंखों की रोशनी कम है तो भी सिरदर्द की समस्या हो सकती है. ऐसे में डॉक्टर को दिखाना चाहिए. सिरदर्द के ये कारण भी50 साल या उससे ज्यादा उम्र वालों में शारीरिक बदलाव की वजह से कमजोरी होती है और इससे भी सिरदर्द हो सकता है.कुछ महिलाओं को मेनोपॉज के दौरान सिरदर्द होता है.चाय-कॉफी पीने की आदत है तो कैफीन की लत पड़ जाती है, जब ये न मिले तो सिरदर्द होने लगता है.ज्यादा शराब पीने या डिहाइड्रेशन से भी सिरदर्द हो सकता है.नींद पूरी न होने से से भी सिर दर्द करता रहता है. सिरदर्द से राहत पाने के उपाय Disclaimer: इस आर्टिकल में बताई विधि, तरीक़ों और सुझाव पर अमल करने से पहले डॉक्टर या संबंधित एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें.

स्वास्थ्य मंत्रालय की सलाह- सीजनल फ्लू से करें बचाव, जानिए इसके लिए क्या करें-क्या नहीं?

Health Ministry’s advice – Protect yourself from seasonal flu, know what to do and what not to do? फरवरी-मार्च के महीने में देश में मौसम में तेजी से बदलाव आने लगता है और बदलता मौसम कई प्रकार की बीमारियों और संक्रमण का कारक हो सकता है। विशेषतौर पर मौसम बदलने के कारण सीजनल फ्लू (इंफ्लूएंजा) के मामले सबसे ज्यादा देखे जाते रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है उनमें संक्रामक रोगों के विकसित होने का खतरा अधिक होता है। बच्चे और बुजुर्ग मौसमी फ्लू का अधिक शिकार होते हैं। मौसम में होने वाले परिवर्तन के साथ इस संक्रामक रोग से बचाव को लेकर सभी लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने भी सीजनल फ्लू और इसके जोखिमों को लेकर लोगों को सावधान किया है। आइए जानते हैं इस संक्रमण से किस प्रकार से बचाव किया जा सकता है और सुरक्षात्मक तौर पर लोगों को क्या करना चाहिए-क्या नहीं? मौसमी फ्लू (इन्फ्लूएंजा) का खतरा स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया, मौसमी फ्लू को इन्फ्लूएंजा के नाम से भी जाना जाता है, ये वायरल संक्रमण श्वसन समस्याओं का कारण बनता है। इसके कारण सर्दी-जुकाम के साथ बुखार, शरीर-सिर में दर्द के साथ थकान की समस्या हो सकती है। इन्फ्लूएंजा वायरस, संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने पर आसानी से फैल सकता है। फ्लू का टीकाकरण इस बीमारी से बचाव का सबसे अच्छा तरीका माना जाता है। डॉक्टर कहते हैं, लाइफस्टाइल और आहार में कुछ प्रकार के बदलाव करके भी आप संक्रामक रोगों के खतरे से खुद को सुरक्षित रख सकते हैं। सीजनल फ्लू से बचाव के लिए क्या करें? स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक पोस्ट में सीजनल फ्लू से बचाव के लिए क्या करें और क्या न करें, इसको लेकर स्पष्ट जानकारी साझा की है। आइए जानते हैं कि इस बदलते मौसम में स्वस्थ और फिट रहने के लिए क्या उपाय किए जाने चाहिए?मास्क पहनें और भीड़-भाड़ वाली जगहों से बचें।छींकते और खांसते समय मुंह और नाक को ढकें।आंखों और नाक को बार-बार छूने से बचें।तरल पदार्थों-पानी का खूब सेवन करें।बुखार और शरीर में कुछ समय से दर्द महसूस हो रहा है तो पैरासिटामॉल लें। संक्रामक रोग से बचाव के लिए क्या न करें? स्वास्थ्य मंत्रालय ने सीजनल फ्लू से बचाव के लिए कुछ बातों का ध्यान रखने और उसे न करने की सलाह दी है। क्या है डब्ल्यूएचओ की सलाह? विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) कहता है, थोड़ी सी सावधानी आपको और परिवार के अन्य सदस्यों को इस संक्रामक रोग से सुरक्षित रख सकती है। मौसमी फ्लू आसानी से फैल सकता है, स्कूलों और नर्सिंग होम सहित भीड़-भाड़ वाली जगहों पर इसका प्रसार अधिक तेजी से होने का जोखिम रहता है। जब कोई संक्रमित व्यक्ति खांसता या छींकता है, तो इससे निकलने वाली ड्रॉपलेट (संक्रामक बूंदें) हवा में फैल जाती हैं और निकटतम व्यक्तियों को संक्रमित कर सकती हैं। संचरण को रोकने के लिए, खांसते समय अपने मुंह और नाक को रुमाल से ढकना और नियमित रूप से अपने हाथ धोना जरूरी है।

स्ट्रेस नहीं आएगा पास, तनाव भी चला जाएगा दबे पांव, बस आपको करने होंगे ये उपाय

Stress will not come near, tension will also disappear, you just have to do these measures हमारे शरीर में तनाव से जो प्रक्रियाएं होती है, उसे कंट्रोल करने का कामकोर्टिसोल नाम का हार्मोन करता है. कोर्टिसोल का स्तर बढ़ने पर तनाव भी बढ़ने लगता है. आजकल करीब-करीब हर इंसान तनाव में है. वो बात अलग है कि हर किसी का कारण अलग-अलग होता है. जिस तेजी से दुनिया आगे बढ़ रही है, तनाव भी उसी तरह हम सभी की जिंदगी का हिस्सा बनता जा रहा है. इसकी वजह से कई तरह की गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं. तनाव को पूरी तरह खत्म कर पाना भी आसान नहीं है. हालांकि, कुछ प्रयास कर इससे छुटकारा जरूर पाया जा सकता है. आइए जानते हैं तनाव का कारण और इससे बचने के 5 सबसे कारगर उपाय… तनाव क्यों होता है दरअसल, हमारे शरीर में तनाव से जो प्रक्रियाएं होती है, उसे कंट्रोल करने का कामकोर्टिसोल नाम का हार्मोन करता है. कोर्टिसोल का स्तर बढ़ने पर तनाव भी बढ़ने लगता है. कुछ अच्छी हैबिट्स से कोर्टिसोल और तनाव दोनों को कंट्रोल किया जा सकता है. तनाव से छुटकारा पाने के 5 जबरदस्त उपाय तनाव और खानपान का गहरा जुड़ाव होता है. पोषक तत्वों से भरपूर खाना खाने से ब्लड शुगर कंट्रोल में रहता है. इससे नींद अच्छी आती है और टेंशन कम रहता है. पुदीने या लेमन ग्रास टी कोर्टिसोल के लेवल को कम कर तनाव से छुटकारा दिला सकते हैं. स्ट्रेस से बचने के लिए आप चाहें तो थोड़ी सी डार्क चॉकलेट भी खा सकते हैं. इसमें एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो तनाव कम करने का काम करते हैं. इसके अलावा एवोकाडो, बादाम, अखरोट, पिस्ता, चिया सीड्स और अलसी जैसी चीजों में ओमेगा-3 फैटी एसिड और मैग्नीशियम खूब पाए जाते हैं, जिससे तनाव दूर होते हैं. खट्टे फल और पत्तेदार सब्जियां भी तनाव से राहत दिलाते हैं. स्मार्टफोन या लैपटॉप का इस्तेमाल इन दिनों काफी ज्यादा बढ़ गया है. ऐसे में सोने से एक घंटे पहले स्क्रीन से दूरी बनाकर रखनी चाहिए. दरअसल, इन गैजेट्स से निकलने वाली नीली रोशनी नींद को प्रभावित करती हैं. लगातार फोन यूज करने से दिमाग एक्टिव रहता है. जिससे बॉडी में कोर्टिसोल का लेवल बढ़ता है. ऐसे में तनाव ट्रिगर हो सकता है. तनाव से बचना है तो अपना नजरिया बदलना चाहिए. दरअसल, लोग उन चीजों को लेकर ज्यादा दुखी हैं, जो उन्हें नहीं मिल पाए हैं. ऐसे में आपके पास जो भी है, उसके लिए ईश्वर का आभार जताएं और उसी में खुश रहने की आदत डालें. इससे छोटे-छोटे अचीवमेंट्स आपको खुश रखेंगे. जिससे आप शांत रह पाएंगे और अच्छा महसूस करेंगे. योग और मेडिटेशन को अपनी लाइफ का हिस्सा बनाएं. इससे तनाव दूर करने में मदद मिलती है. योग-मेडिटेशन जिंदगी में पॉजिटिविटी लाने का काम करते हैं और पैरासिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम को एक्टिव करते हैं. जिससे बॉडी रिलैक्स होती है. इससे मन शांत रहता है और फोकस बढ़ता है.

भगवान भरोसे चल रहा आरोग्यम प्राथमिक स्वस्थ्य केंद्र धमोखर

Arogyam Primary Health Center Dhamokhar is running with the trust of God. विशेष संवाददाता  उमरिया। प्रदेश सरकार मरीजो को बेहतर इलाज के लिए भले ही पानी की तरफ पैसा बहा रहे हो लेकिन हकीकत कुछ और ही है। जिला उमरिया से लगभग 13 किमी की दूरी पर बनी आरोग्यम स्वास्थ्य केंद्र धमोखर अस्तपाल में मरीज आये और ऑनलाइन पर्ची बनवाने के पश्चात ऑनलाइन ही मरीज अपनी दवा करवा के घर जाए इस अस्पताल का रबईया आज दिनों कुछ ऐसा ही चल रहा हकीकत यह है की इस अस्पताल मे जहा पर डॉक्टर मरीजो की जांच कर सही उपचार करें वही पर डॉक्टर की कुर्सी मे बैठ कर कंपाउंडर मरीजो की जाँच कर उनको दवा दे रहे है जिससे मरीजो की जिंदगी दाँव पर लगी बैठी है अगर इसी तरह का रबईया रहा तो मरीजो की समस्या का समाधान नहीं हो सकता

हमीदिया अस्पताल: एंबुलेंस चालकों का आरोप: शव ले जाने से पहले पार्किंग संचालक मांगता है कमीशन

Hamidia Hospital: Allegations of ambulance drivers: Parking operator demands commission before taking the dead body भोपाल। हमीदिया अस्पताल में पार्किंग व शव वाहन का संचालन विवाद की जड़ बन गया है। अकसर रात में यहां दो गुट एक दूसरे के लोगों को धमकाते व मारपीट करते हैं। हाल ही में इसका एक वीडियो भी वयरल हुआ था। वहीं अब करीब 11 एंबुलेंस चालकों द्वारा कोहफिजा थाने में लिखित शिकायत की गई है। जिसमें पार्किंग संचालक नरेंद्र गोस्वामी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। लिखित आवेदन में कहा गया है कि पार्किंग संचालक शव ले जाने से पहले कमीशन मांगता है। उसकी बात ना मानने मारपीट व जान से मारने तक की धमकी देता है। इस मामले में पार्किंग संचालक नरेंद्र का कहना है कि यह वे लोग हैं जो प्रति माह 2 हजार रुपए का तय किराया नहीं दे रहे हैं। इनसे जब किराया मांगा गया तो, इन्होंने झूठा आरोप लगाना शुरू कर दिया। इनके पीछे सलमान और आरीफ नाम के लोगों का हाथ। जो अकसर हमीदिया परिसर में गुंडागर्दी करते हैं। परिजनों से वसूल रहे दो से ढाई गुना किरायापार्किंग को लेकर चल रहे इस विवाद से परेशान मरीजों व परिजनों को होना पड़ रहा है। परिजनों को हमीदिया से शव निवास तक ले जाने के लिए दो से ढाई गुना अधिक किराया चुकाना पड़ रहा है। यह स्थिति बीते डेढ़ से दो साल से बनी हुई। अस्पताल प्रबंधन से लेकर प्रसाशन तक ने अब तक इस पर कोई कठोर कदम नहीं उठाए हैं। जिसके चलते अस्पताल की व्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हो रही है।

जेपी अस्पताल: हद है… किसी दूसरे मरीज का एक्स-रे देख डॉक्टर ने शुरू कर दी थी इलाज की तैयार

Jaypee Hospital: This is too much… the doctor started preparing for treatment after seeing the X-ray of another patient भोपाल। राजधानी मॉडल अस्पताल जेपी में एक बार फिर इलाज के प्रति स्टाफ की लापरवाही उजागर हुई है। यदि मरीज चिकित्सक की बात मानकर इलाज शुरू करा देता तो उसको जो नुकसान होता उसकी भरपाई नामुमकिन थी। लेकिन मरीज ने समझदारी दिखाई और सेकेंड ओपिनियन के लिए वह एक निजी अस्पताल पहुंच गया, जहां पता चला कि उसे वो बीमारी ही नहीं है, जिसका इलाज जेपी अस्पताल के चिकित्सक बता रहे थे। दरअसल समीर सूफी नाम का एक मरीज 6 फरवरी को जेपी अस्पताल पहुंचा। उसकी दाढ़ में से अक्सर खून आता रहता है, यही समस्या लेकर वह जेपी अस्पताल गया और यहां डॉ. यश से चैकअप कराया। डॉ. यश ने मरीज का एक्स-रे कराने को कहा। एक्स-रे जेपी अस्पताल में ही हुआ था। एक्स-रे की रिपोर्ट देख डॉ. यश ने मरीज समीर से कहा कि आपका दाढ़ सढ़ गई है, इसे निकालना होगा। मरीज ने इस बात पर आपत्ति भी ली और कहा कि मुझे भोजन चबाने में कोई दिक्कत नहीं होती, लेकिन चिकित्सक ने मरीज की बात को नकार दिया और दाढ़ निकलवाने की राय देता रहा।मरीज ने कराया फिर से एक्स-रेजेपी अस्पताल से निराश होकर लौटे समीर सूफी ने आठ फरवरी को करोंद स्थित पीपुल्स डेंटल अस्पताल में एक संपर्क किया। यहां चिकित्सक ने मरीज का फिर से एक्स-रे किया। इस एक्स-रे में मरीज की दाढ़ को एक दम स्वस्थ्य बताया और खून आने का कारण नस में परेशानी को बताया। इतना ही नहीं इस समस्या का इलाज बिना किसी चीर फाड़ या दाढ़ निकलवाने के बजाए सिर्फ दवाओं से बताया। इस मामले में अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. राकेश श्रीवास्तव का कहना है कि मामले को दिखवाना पड़ेगा, किस स्तर पर गलती हुई है। यदि कहीं कोई चूक हुई है तो कार्रवाई भी की जाएगी।

देश के जायकेः पालक के पत्तों की लज्जतदार चाट 

Flavors of the country: Delicious chaat of spinach leaves सर्दी के मौसम के खत्म होने में अब कुछ ही दिन बाकी हैं। यानी हरी पत्तेदार सब्जियों का सीजन भी जल्द ही बीत जाएगा। तो क्यों न हरे पत्तों के जाते हुए सीजन में + आज कुछ अलग-सी डिश पर हाथ आजमाएं। आज हम बनाते हैं अब भी बहुतायत में आ रहीं पालक के पत्तों की लज्जतदार चाट। सामग्री: पालक के पत्ते – 7 से 8 नग बेसन – 1 कप चावल का आटा – 2 छोटे चम्मच कॉर्न फ्लोर – 2 छोटे चम्मच – लाल मिर्च पाउडर – 1 चम्मच हल्दी पाउडर – 1 चम्मच – गरम मसाला 1 चम्मच – नमक 1 चम्मच तलने के लिए तेल सामग्री: गार्निशिंग के लिए – दही – 1/2 कप – पीसी हुई शक्कर – 1 छोटा चम्मच काला नमक – 2 छोटे चम्मच भुना जीरा पाउडर – 2 छोटे चम्मच धनिया पाउडर – 2 छोटे चम्मच लाल मिर्च पाउडर – 2 छोटे चम्मच – हरी चटनी – 2 बड़े चम्मच – मीठी चटनी – 2 बड़े चम्मच अदरक (पतली कतरन) – 2 बड़े चम्मच अनार के दाने 2 बड़े चम्मच – हरा धनिया (बारीक कटा हुआ) – 2 छोटे चम्मच बनाने की विधि : – पालक के पत्तों को अच्छे से धोकर और साफ करके उन्हें एक तरफ रख दीजिए। – एक बॉउल में बेसन लेकर उसमें चावल का आटा, कॉर्न फ्लोर, नमक, लाल मिर्च पाउडर, हल्दी पाउडर, गरम मसाला और पानी डालकर चिकना घोल बना लीजिए। – पालक के पत्तों को बेसन के घोल में पूरी तरह लपेट लीजिए और फिर गहरे फ्राई पैन में अच्छे से तल लीजिए – अब एक बॉउल में दही डालकर उसमें पीसी हुई शक्कर और काला नमक डालकर अच्छे से मिला लीजिए।  अब पालक पत्ता चाट की प्लेट लगाने की शुरुआत करते हैं। इसके लिए तले हुए पालक पत्ता को प्लेट में रखें और ऊपर से काला नमक, भुना हुआ जीरा पाउडर, धनिया पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, दही का मिश्रण, हरी चटनी, मीठी चटनी, कटा हुआ हरा धनिया, अनार के दाने डालिए। अब इसी प्रकिया को दोहराएं और जितनी जरूरत हो, उतनी परतें बनाते जाएं। तैयार है आपकी पालक पत्ता चाट।

तुलसी, सेहत के लिए बेहद फायदेमंद, कई बीमारियों के लिए औषधि

Tulsi, very beneficial for health, medicine for many diseases भोपाल ! क्या आप जानते हैं कि तुलसी आपके स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायक है. चलिए आज हम आपको बताते हैं कि तुलसी की पत्तियां आपके स्वास्थ्य के लिए कितनी लाभदायक हैं. सर्दी के मौसम में ज्यादातर घरों में तुलसी का उपयोग कभी चाय में तो कभी-कभी काढ़े के रूप में किया जाता है. सर्दी में तुलसी का सही विधि से उपयोग किया जाए, तो आप कई बीमारियों से बच सकते हैं !तुलसी के अंदर एंटी-ऑक्सीडेंट, आयरन, कैल्शियम, जिंक प्रॉपर्टी होती है, जो आपको अलग-अलग स्वास्थ्य लाभ पहुंचाती है. एंटी-ऑक्सीडेंट होने की वजह से यह शरीर की इम्युनिटी को बूस्ट करने में मददगार है. सर्दी-जुकाम, सूखी खांसी, बलगम खांसी में भी तुलसी के पत्तों का रस लाभदायक होता है. साइनस की समस्या में लाभदायक तुलसी तुलसी के पत्ते साइनस की समस्या में भी लाभकारी हैं. यदि किसी मरीज को साइनस की दिक्कत है, नाक बंद रहती है या बार-बार छींक आती है, तो तुलसी के पत्तों का रस निकालकर उसकी कुछ बूंदें डायरेक्ट नाक में डालने से नाक का सारा बलगम निकल जाता है और आपको साइनस की समस्या में राहत मिलती है. नाक में डायरेक्ट तुलसी की बूंदें अप्लाई करने से यदि तेज जलन होती है, तो इसे थोड़ा पानी के साथ डाइल्यूट करके भी इस्तेमाल किया जा सकता है. छोटे बच्चों को शहद में मिलाकर दें तुलसी का रस सर्दियों के मौसम में सर्दी-जुकाम, नाक बंद जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं और इन मौसमी बीमारियों का असर सबसे पहले छोटे बच्चों पर दिखाई देता है. यदि आपके भी 5 से 15 साल के बच्चे को सर्दी-जुकाम हो रहा है, तो आप तुलसी के पत्तों का रस निकालकर उसमें थोड़ा शहद मिलाकर थोड़ा-थोड़ा बच्चों को पिलाने से सर्दी-जुकाम की समस्या खत्म हो जाती है.

यह है मॉडल अस्पताल जेपी का हाल: 59 सफाई कर्मी,

This is the condition of Model Hospital JP: 59 cleaning workers, भोपाल। राजधानी का मॉडल अस्पताल जेपी में सफाई व्यवस्था के नाम पर सरकारी रुपयों की बर्बादी हो रही है। सफाई का जिम्मा जिस कंपनी को दिया गया है, वह खानापूर्ति कर रही है। यही कारण है कि अस्पताल परिसर में गंदगी और गुटके के दाग देखे जा सकते है। आईपीडी वार्ड की खिड़कियों के बाहर कचरा और छिपे हुए कोनों में दवाईयों का ढेर आसानी से देखा जा सकता है। जानकारी अनुसार जेपी अस्पताल की सफाई का जिम्मा निजी कंपनी के पास है। जिसका नाम प्रथम नेशनल सिक्योरिटी सर्विसेस है। यह फर्म इंदौर की है। फर्म को जो ठेका दिया गया है, उसकी शर्तों के अनुसार 59 सफाई कमी जेपी अस्पताल में हर दिन ड्यूटी देंगे, लेकिन फर्म द्वारा सफाई सिर्फ 20 से 25 कर्मचारियों द्वारा कराई जा रही है। ताकि अधिक से अधिक पैसा बचाया जा सके। इतना ही नहीं ओपीडी के समय में सफाई पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता, बल्कि दोपहर में जब भीड़ कम होती है तब सफाईकर्मी एक से दो घंटे में सफाई करते हुए देखे जाते हैं। बायोमेडिकल वेस्ट का निष्पादन नहीं जेपी अस्पताल की सफाई व्यवस्था में सबसे बड़ी लापरवाही बायोमेडिकल वेस्ट मामले में हो रही है। अस्पताल में मरीजों को दी जाने वाली दवाईयां कचरे के ढेर में आए दिन मिलती हैं। इसके अलावा ग्लब्स, पट्टी और अन्य मेडिकल वेस्ट भी खुले परिसर में नाले के पास अक्सर देखे जाते हैं। आज तक नहीं मिला कायाकल्प अवार्ड जेपी अस्पताल में सफाई व्यवस्था लचर रहने और मरीजों को मिलने वाली सुविधाएं सुस्त रहने के कारण ही आज तक संस्था को कायाकल्प अवार्ड में नंबर आने का मौका नहीं मिला है। जबकि इस अवार्ड को शुरू हुए सात साल से ज्यादा हो गए हैं। जेपी अस्पताल को अक्सर कायाकल्प अवार्ड में सांत्वना पुरस्कार से संतोष करना पड़ा है। जांच कराऊंगा जेपी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राकेश श्रीवास्तव ने बताया कि सफाई व्यवस्था में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जएगी। यदि निजी फर्म द्वारा कम संख्या में सफाई कर्मियों से काम लिया जा रहा है तो मैं इस मामले की जांच कराउंगा। यदि फर्म ने कुछ गड़बड़ी की है तो कंपनी पर जुर्माना लगाकर ठेका निरस्त किया जाएगा।

25 निजी अस्पतालों में इलाज करा सकेंगे सरकारी कर्मचारी

Government employees will be able to get treatment in 25 private hospitals भोपाल। राज्य शासन द्वारा शासकीय कर्मचारी व उनके परिवार के आश्रित सदस्य की जांच और उपचार के लिए 21 अस्पताल को नवीन मान्यता और चार की मान्यता अवधि में वृद्धि की गई है। अब शासकीय कर्मचारी 25 निजी अस्पताल में उपचार करा सकेंगे। नवीन मान्यता प्राप्त अस्पतालों में बॉम्बे हॉस्पिटल इंदौर, नेशनल हॉस्पिटल भोपाल, नर्मदा अपना हॉस्पिटल नर्मदापुरम, जैनमश्री हॉस्पिटल भोपाल, शैल्बी हॉस्पिटल जबलपुर, तेजनकर हेल्थकेयर उज्जैन, मार्बल सिटी हॉस्पिटल जबलपुर, नोबल हॉस्पिटल भोपाल, जिंदल हॉस्पिटल भोपाल, ग्लोबल सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल ग्वालियर, ज्याति हॉस्पिटल इंदौर, अपेक्स हॉस्पिटल, वी वन हॉस्पिटल इंदौर, लक्ष्मी नारायण हॉस्पिटल जबलपुर, रेटिना स्पेशेलिटी इंदौर, अनंत हार्ट हॉस्पिटल भोपाल, महेश्वरी हॉस्पिटल भोपाल, चित्रकूट हॉस्पिटल जबलपुर, सेंटर फॉर साइट हॉस्पिटल इंदौर और डॉ अग्रवाल हेल्थ केयर इंदौर शामिल हैं। वहीं नर्मदा ट्रामा सेंटर भोपाल की अतिरिक्त मान्यता के साथ अमृता हॉस्पिटल शहडोल, आरोग्य हेल्थ केयर हॉस्पिटल छिंदवाड़ा और एमिनेंट हॉस्पिटल इंदौर की मान्यता में वृद्धि की गई है। मान्यता प्राप्त निजी अस्पताल शासकीय कर्मचारियों और आश्रित परिवार सदस्यों से पंजीयन शुल्क नहीं लेंगे और चिकित्सालय में निर्धारित पैकेज दरों की रेट-लिस्ट प्रदर्शित करेंगे। निर्धारित दरों से अधिक शुल्क लेने, परीक्षण संबंधी सुविधाएं मानक-स्तर की न पाए जाने और किसी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर मान्यता समाप्त कर दी जाएगी। चिकित्सालय में उपचार और परीक्षण करवाने पर चिकित्सा प्रतिपूर्ति निर्धारित दरों पर होगी। एक भी सरकारी अस्पताल नहीं है एनएबीएच सर्टिफाईफिलहाल प्रदेश का एक भी सरकारी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज एनएबीएच सर्टिफाई नहीं हैं। लेकिन भोपाल के हमीदिया हॉस्पिटल ने एंट्री लेवल सर्टिफिकेशन के लिए अप्लाई किया हुआ है। इसके तहत एनएबीएच की टीम हॉस्पिटल का प्राइमरी इंस्पेक्शन कर चुकी है, जिसकी रिपोर्ट अस्पताल प्रबंधन को अब तक नहीं मिली है।

खीरे के पानी में छुपे हैं अद्भुत गुण, इन 6 बीमारियों में होता है फायदेमंद

Amazing properties are hidden in cucumber water it is beneficial in these 6 diseases रोज सुबह खीरे का पानी पीने से स्किन का ग्लो बना रहता है। यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है। आजकल अनियमित जीवनशैली और खानपान में लापरवाही के कारण लोग कम उम्र में ही कई बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। ऐसे में यदि आप दिन की शुरुआत ही व्यवस्थित तरीके से कर दें तो आप कई समस्या से छुटकारा पा सकते हैं। सुबह उठते ही शरीर को डिटॉक्स करने से लिए पानी पीने की सलाह दी जाती है, लेकिन इसके स्थान पर यदि आप खीरे का पानी का सेवन करेंगे तो सेहत को कई बीमारियों से छुटकारा मिल सकता है। यहां डायटिशियन मीना कोरी खीरे के पानी के फायदों के बारे में विस्तार से जानकारी दे रही है। शरीर में पानी की कमी नहींसुबह यदि आप खीरे का पानी का सेवन करते हैं तो शरीर में पानी की कमी नहीं होती है। सामान्य जल की तुलना में खीरे का पानी सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद होता है। यह पानी सुगंधित होने के साथ-साथ स्वास्थ्यवर्धक भी होता है। यह पानी शरीर की आंतरिक सफाई में अहम भूमिका निभाता है। वजन घटाने में मददगारखीरा एक ऐसी सब्जी है, जिसमें कैलोरी काफी कम होती है। यदि सुबह सुबह खीरे का पानी पीते हैं तो इससे पेट काफी देर तक भरा हुआ रहता है। यह वजन कम करने में मदद करता है। खीरे का पानी एक डिटॉक्स ड्रिंक के रूप में काम करता है, जो शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। खीरे के पानी में घुलनशील फाइबर भी होता है, जो शरीर का वजन नहीं बढ़ने देता है। कंट्रोल में रहता है ब्लड प्रेशरखीरे के पानी में पोटेशियम भरपूर मात्रा में होता है, जो ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद करता है। खीरे का पानी किडनी में जमा सोडियम की मात्रा को नियंत्रित करता है। खीरे का पानी पीने से हार्ट अटैक का खतरा भी कम होता है।स्किन में बढ़ता है ग्लोरोज सुबह खीरे का पानी पीने से स्किन का ग्लो बना रहता है। यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है। खीरे के पानी में विटामिन, खनिज और फाइबर जैसे आवश्यक पोषक तत्व भी होते हैं, जो स्किन को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

मुरैना जिला अस्पताल में आग लगने से मचा हड़कंप।

There was a stir due to fire in Morena District Hospital संतोष सिंह तोमर मुरैना। जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में भीषण आग लग गई जिसके चलते पूरे वार्ड में अफरा तफरी फैल गई और अस्पताल परिसर में भगदड़ मच गई। बताया गया कि यह आग शॉर्ट सर्किट के चलते हुए लगी है । फटाफट इस वार्ड से नवजात बच्चों को और प्रसूति महिलाओं को दूसरे वार्ड में तत्काल प्रभाव से शिफ्ट किया गया । जैसे ही घटना की सूचना पुलिस और प्रशासन को मिली तो मुरैना के अपर कलेक्टर और पुलिसअफसर मौके पर पहुंचे । अस्पताल के अग्नि शमक यंत्र से कर्मचारियों के द्वारा आज पर काबू पाया गया मौके पर दमकल विभाग की दो गाड़ी पहुंची। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि जिला चिकित्सालय में हमारा बच्चा भर्ती था यहां न तो कोई सायरन बजा न कुछ प्रशासन की लापरवाही इतनी है कि आग लग गई हमारा बच्चा दूसरे वार्ड में शिफ्ट कर दिया है और प्रशासन कोई जवाब नहीं दे रहा है। वहीं सीएमएचओ का कहना है कि बिजली का जो फॉल्ट हुआ है उसकी हम जांच करवा रहे है और उसे दिखवा रहे है। उन्होंने बताया कि वार्ड में 47 बच्चे थे अब उनको दूसरे वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है । सारे बच्चे सुरक्षित है जिनको ऑक्सीजन की जरूरत है उनको प्रदाय की जा रही है और जिनको उपचार की जरूरत है उनको भी ट्रीटमेंट दिया जा रहा है।

देश में एक बार फिर कोरोना संक्रमण ने पकड़ी रफ्तार

Corona infection once again gained momentum in the country देश में एक बार फिर कोरोना संक्रमण ने पकड़ी रफ्तार, 24 घंटे में 636 नए मामले, जेएन.1 के मरीज 200 पार स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, पिछले 24 घंटे में केरल में दो और तमिलनाडु में एक मरीज की संक्रमण से मौत हो गई। पिछले साल पांच दिसंबर तक दैनिक मामलों की संख्या घटकर दोहरे अंक तक पहुंच गई थी। देश में कोरोना संक्रमण के 636 नए मामले सामने आए हैं, जिससे उपचाराधीन मरीजों की संख्या बढ़कर 4,394 हो गई है। साथ ही नए उपस्वरूप जेएन.1 के 37 नए मामले मिलने के बाद इसके मरीजों की संख्या 200 पार कर गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, पिछले 24 घंटे में केरल में दो और तमिलनाडु में एक मरीज की संक्रमण से मौत हो गई। पिछले साल पांच दिसंबर तक दैनिक मामलों की संख्या घटकर दोहरे अंक तक पहुंच गई थी, लेकिन ठंड और वायरस के नए उपस्वरूप के कारण मामलों में तेजी आई है। स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाइट के अनुसार, अब तक संक्रमण से उबरने वाले लोगों की संख्या 4.4 करोड़ से अधिक हो गई है। किस राज्य में कितने जेएन.1 वैरिएंट के मामलेजेएन.1 वैरिएंट से संक्रमित लोगों की संख्या बताने के लिए INSACOG ने राज्यवार आंकड़े भी जारी किए। सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक केरल (83), गोवा (51), गुजरात (34), कर्नाटक (आठ), महाराष्ट्र (सात), राजस्थान (पांच), तमिलनाडु (चार), तेलंगाना (दो) ओडिशा (एक) और दिल्ली में एक मामला रिपोर्ट किया गया है। राज्यों को निगरानी बढ़ाने का निर्देशWHO के मुताबिक कोरोना वायरस के जेएन.1 सब-वैरिएंट को पहले बीए.2.86 का प्रकार माना गया। हालांकि, बीते कुछ हफ्तों में 40 से अधिक देशों में JN.1 मामले सामने आ चुके हैं। तेजी से फैलते संक्रमण को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से निरंतर निगरानी बनाए रखने को कहा है।

लाखों की लागत से बने उप स्वास्थ्य केंद्र पर लगा रहता है ताला, लोगों को नहीं मिल रहा इलाज.

A lock is placed on the Sub health Center built at a cost of millions, depriving people of access to medical treatment. मलखान सिंह परमार मुरैना । ग्राम पंचायत आरोली मे बीच का पुरा गांव में स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए उप स्वास्थ्य केंद्र ताे खोले गए हैं। लेकिन इन स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में लोगों को इलाज के लिए लोगों को निजी चिकित्सालय क्लीनिकों पर या जिला स्तर पर अस्पताल में जाना पड़ता है। उप स्वास्थ्य केंद्रों पर कहने को तो यहां 24 घंटे एएनएम और इलाज की सुविधा मिलना है, लेकिन ताला नहीं खुलने से ग्रामीणों को विकासखंड के उप स्वास्थ्य केंद्रों पर इलाज की सुविधा नहीं मिल रही है। लाखों की लागत से बने बीच के पुरा पर स्थित उप स्वास्थ्य केंद्र बना जर्जर केंद्र जानकारी के अनुसार देखने में तो उप स्वास्थ्य केंद्र को बने अभी कुछ अधिक समय नहीं हुआ लेकिन उसकी दीवारें, प्लास्टर सभी खंडर हो गए है केंद्र को बनाने में घटिया सामग्री का उपयोग किए जाने से कम समय में ही उप स्वास्थ्य केंद्र खंडर हो गया है। ग्राम पंचायत अरोली में ग्राम बीच के पूरा को शासकीय उप स्वास्थ्य केंद्र में पिछले कई दिनों से ताला लटका हुआ हैं, वहीं जिले में बैठे जिम्मेदार जांच सहित अन्य के नाम पर वाहन द्वारा डीजल का भुगतान लेते है, लेकिन समझ से परे यह है कि आखिर इनके द्वारा किस चीज की जांच की जाती है। ग्रामीण क्षेत्र में लोगों को नि:शुल्क उपचार उपलब्ध कराना महज दिखावा बनकर रह गया है, क्योंकि कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां पर पिछले कई दिनों से उप स्वास्थ्य केंद्र में ताला लटक रहा है। मजे की बात तो यह है कि यहां पदस्थ जिम्मेदार से अगर कोई पूछ ले कि आप कहां हैं, तो इनके द्वारा मीटिंग के साथ भ्रमण बताकर अपना पल्ला झाड़ लिया जाता है। ग्रामीणों को स्वास्थ्य लाभ मुहैया करवाने के उद्देश्य से सरकार ने गांव में उप-स्वास्थ्य केन्द्र खोला था, लेकिन यह ग्रामीणों का दुर्भाग्य ही रहा कि लाखों रुपये की लागत से बने उप-स्वास्थ्य केन्द्र में आये दिन ताला लटका रहता है।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अधिकारी घोड़ाडोंगरी की हिटलर शाही

Community Health Center Officer Hitler Shahi of Ghoradongri स्वास्थ्य केंद्र सफाई कर्मी एवं सुरक्षाकर्मी को तीन-तीन माह से वेतनमान नहीं डॉ जाकिर शेख घोड़ाडोंगरी ! किरण चाहे सूर्य की हो, या आशा की जीवन के सभी अंधकार मिटा देती है, इसी तारम्य मे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घोड़ा डोंगरी के सफाई कर्मी एवं सुरक्षा कर्मी जी रहे हैं, के बीते 4 माह से वेतनमान नहीं दिया गया, सफाई कर्मी एवं सुरक्षा कर्मी द्वारा वेतन की मांग करने पर नौकरी से निकलने की धमकी मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित प्रथम नेशनल सिक्योरिटी के बैतूल में बैठे ग्रुर्ग द्वारा दी जाती है… जो की सुरक्षा कर्मी एवं सफाई कर्मी का शोषण जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी बैतूल के साथ ही मेडिकल अधीक्षक घोड़ाडोंगरी द्वारा किया जा रहा है….चुकी सफाई कर्मी एवं सुरक्षा कार्मि को कलेक्टर दर के अनुसार 10500 से लेकर 11000 के दरमियान होता है. जिन्हें 6000 दिया जाता है, किंतु सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घोड़ाडोंगरी के अधीक्षक के मिली भगत के चलते समय पर नहीं दिया जा रहा है, वही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घोड़ाडोंगरी में समय पर नहीं आते अधिकारी एवं कर्मचारी चाहे महिला ओपीडी कक्ष हो या दवाई वितरण कक्ष अन्य कक्षओं के क्या कहने, “अंधेर नगरी चौपट राजा, टके शेर भाजी, टके खाजा” के तर्ज पर चल रहा है.. चुके सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर एवं कर्मचारियों की सुबह 11:00 बजे होती है, चुके देखा गया सुबह के 11:00 बजे तक सारी कुर्सियां खाली नजर आई, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घोड़ाडोंगरी के उपस्थित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से पूछने पर पता चला कि बस अभी आता ही होंगे, जोकी प्रति दिवस दिनचर्या के अनुसार 10:30-11के पश्चात ही अधिकारियों का आगमन होता है, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घोड़ाडोंगरी में…आने वाले रोगियों का बेहाल है, जहां कोई किसी की नहीं सुनता इस तरह की शिकायत क्षेत्रीय आने वाले रोगी एवं उनके परिजनों ने की है… सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में न ही कोई कर्मचारी सुनता है या न डॉ, चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी अपने समय पर उपस्थित होकर कार्य करते हुए दिखाई देते हैं.. चुके रामभरोस से चल रहा है सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घोड़ाडोंगरी… सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आउटसोर्स सुरक्षा कर्मी व सफाई कर्मी का शोषण को रोकने एवं मानदेय में वृद्धि के संबंध में जानकारी प्राप्त हुई, के बीते कई वर्षों से प्रथम नेशनल सिक्योरिटी इंदौर के द्वारा ठेका पद्धति के जरिए सुरक्षा एवं सफाई कर्मी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घोड़ाडोंगरी में नियुक्त किया गया था… जिसे वेतनमान कलेक्टर दर से एवं इपीएफ की शर्तों पर नियुक्त कर अपने ही अंदाज में करवाते हैं घोड़ाडोंगरी के अधिकारी कार्य, नहीं देते वेतनमान ठेकेदार की चल रही मनमानी, जिले में बैठे हैं श्री शैलेंद्र सिंह उपाध्याय जो कि सफाई कर्मी एवं सुरक्षाकर्मी को नौकरी से निकलने की धमकी देते हुए चार-चार माह तक वेतन नहीं दिया जाता, वेतन चाहिए तो नौकरी से हाथ धोना होगा, जिस कारण सुरक्षा कर्मी एवं सफाई कर्मी के परिवार पर भूखे मरने की नौबत नेशनल सिक्योरिटी इंदौर मुख्य चिकित्सा अधिकारी बैतूल के साथ ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ संजू शर्मा द्वारा किया जा रहा है… जबकि समय-समय पर सफाई कर्मी एवं सुरक्षाकर्मी द्वारा अपनी पीड़ा को संविदा जिला अकाउंट प्रबंधक श्री पुष्पेंद्र सिंह चौरसिया को अवगत कराने पर, नौकरी से निकलने की धमकी चौरसिया द्वारा दी जाती है…. समस्त आउटसोर्स सुरक्षा कर्मी सफाई कर्मी स्वास्थ्य विभाग प्रथम नेशनल सिक्योरिटी इंदौर द्वारा कार्यालय मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी बैतूल के अंतर्गत सामुदायिक /प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए नियुक्त किए गए थे, वर्तमान समय में सुरक्षाकर्मी एवं सफाई कर्मी का वेतनमान 10500 से 11000 के दरमियान है, कलेक्टर दर एवं इपीएफ में आदर्श अनुसार जो कि समय पर नहीं दिया जाता, एवं खातों मे ₹6000 के हिसाब से भुगतान किया जा रहा है, जो की सितंबर माह से आज दिनांक तक नहीं दिया गया, और न ही अभी तक खाते में इपीएफ डाला गया है. यह तो वर्षों से चला आ रहा है, कि तीन-तीन, 4-4 महीने वेतन नहीं दिया जाना, वेतन की बात करने पर कंपनी के पदाधिकारी द्वारा धमकी दी जाती है, बोला जाता है, वेतन की जल्दी है तो काम छोड़ दो, हम अभि वेतन नहीं दे पाएंगे, सुरक्षाकर्मी एवं सफाई कर्मी द्वारा जिला कलेक्टर से भी पहले शिकायत की गई है, लेकिन कंपनी के अधिकारियों एवं जिले में संविदा जिला अकाउंट प्रबंधक श्री पुष्पेंद्र सिंह चौरसिया को पता चलने पर काम से निकाल देने की धमकी इन छोटे कर्मचारियों को बार-बार दी जाती है, साथ ही कई कई महीने वेतन नहीं मिलने से सुरक्षा कर्मी एवं सफाई कर्मी के घरों की स्थिति बहुत खराब एवं दयनीय हो गई.. जीस कारण सफाई कर्मी एवं सुरक्षाकर्मियों का परिवार तनाव पूर्वक जिंदगी जी रहा है, समस्याओं से जूझ रहे है, कई वर्ष से स्वास्थ्य विभाग में नौकरी करने के पश्चात भी न तो कार्य के अनुरूप सम्मानजनक वेतन मिला रहा है और न ही इस बार दीपावली पर बोनस दिया गया है.. जबकि सुरक्षा एवं सफाई कर्मियों को वेतन घंटे के हिसाब से जांब दर का वेतन भुगतान किया जाता है, जो समय पर नहीं किया जाता.. उक्त कर्मियों को परिवार पालने लायक वेतन भी नहीं दिया जाता है, कल को इन कर्मियों के घर में किसी तरह की कोई अनहोनी होती है, तो इसके लिए प्रथम नेशनल सिक्योरिटी इंदौर के प्रताप उपाध्याय एवं जिले में संविदा डीएम श्री पुष्पेंद्र सिंह चौरसिया जिम्मेदार होंगे… क्योंकि श्री चौरसिया द्वारा कंपनी को सहयोग किया जाता रहा है.. वही समय पर नहीं पहुंचाना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घोड़ा डोंगरी के डॉ एवं अधिकारियों का आए दिन का एक हिस्सा है, जोकि सुधार नहीं जा सकता, क्योंकि बरसों से बैठे हैं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अधीक्षक डॉक्टर संजीव शर्मा जिनकी छत्रछाया में फल- फुल रहे हैं डॉक्टर एवं अधिकारी जिला प्रशासन के क्या कहने…

कोरोना वायरस की दस्‍तक, बागेश्वर धाम से लौटा व्यक्ति संक्रमित.

Corona virus knocks, person returned from Bageshwar Dham infected. ग्वालियर में एक कोरोना संक्रमित मरीज मिला है, जिसे होम आइसोलेशन में रखा गया है। ग्‍वालियर में कोरोना संक्रमित मरीज की पुष्टि ,गजराराजा मेडिकल कालेज में लिए थे सैंपल ,चार कोविड टेस्ट में एक की रिपोर्ट पाजिटिव ग्वालियर। ग्वालियर में कोरोना पाजिटिव मरीज मिला है। इसके साथ ही जिले में एक्टिव मरीज की संख्या एक हो गई है। कोरोना संक्रमित मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड में आ गया है। कोरोना के चार सैंपल गजराराजा मेडिकल कालेज में जांच के लिए पहुंचे थे। इनमें से एक 58 वर्षीय व्यक्ति संक्रमित पाए गए। यह 15 दिन पहले बागेश्वर धाम छतरपुर गए थे। फिलहाल 58 वर्षीय मरीज को होम आइसोलेशन में रखा गया है। इनके संपर्क में आने वाले परिवार के सदस्यों के सैंपल लेने स्वास्थ्य विभाग की टीम सीएमएचओ के निर्देश पर उनके घर पहुंची।फिलहाल हालत स्थिरकोरोना संक्रमित ने बताया कि वह बागेश्वर धाम छतरपुर गए थे। वहां से लौटने पर सर्दी-जुखाम हुआ, तो एक हजार बिस्तर अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचा। यहां चिकित्सक ने कोरोना के लक्षण दिखाई देने पर जांच के लिए बोला। जांच गजराराजा मेडिकल कालेज में कराई तो रिपोर्ट पाजिटिव निकली। घर पर ही स्वास्थ्य लाभ ले रहा हूं। हालत स्थिर है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा.राजौरिया ने बताया कि मरीज की जांच के लिए रोजाना स्वास्थ्य टीम को भेजा जाएगा। दवा उपलब्ध करा दी गई हैं। संक्रमित के घर उनकी पत्नी व एक बच्चा भी है। इसलिए चिकित्सकों ने सलाह दी है कि अगर किसी को सर्दी-जुकाम के लक्षण दिखाई दें तो सूचना दें।सोमवार को लिए जाएंगे जीनोम सीक्वेंसिंग जांच के लिए सैंपलमुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा.आरके राजौरिया ने बताया कि मरीज की जीनोम सीक्वेंसिंग जांच के लिए सैंपल सोमवार को लिए जाएंगे। इस जांच से कोरोना के वेरिएंट का पता लगाया जाएगा। कोरोना संक्रमण की पुष्टि के बाद हमें उस मरीज में कोरोना का कौन सा वेरिएंट है, इसकी जांच करनी होती है। जेएएच के पुराने आइसीयू में 30 बेड आरक्षितकोरोना को लेकर जेएएच प्रबंधन अलर्ट है। यहां पुराने आइसीयू भवन में तीस बेड आरक्षित किए गए हैं। यहां दस वेंटिलेटर, मल्टीपैरा मीटर, दवा, पीपीइ किट के साथ अन्य व्यवस्थाएं की गई हैं। जीआरएमसी के डीन डा.अक्षय निगम कोविड वार्ड निरीक्षण कर चिकित्सक और स्टाफ को सतर्क रहने के निर्देश दे चुके हैं। इसके साथ ही जिला अस्पताल में दस पलंग का वार्ड आरक्षित किया गया है। सैंपल जांच की सुविधा शुरू की गई है।

कोरोना के JN.1 वेरिएंट ने भारत में मचाया कोहराम, 24 घंटे में 5 लोगों की मौत, 529 नए मामले

The JN.1 variant of the coronavirus has caused havoc in India, with 5 deaths and 529 new cases reported in the last 24 hours. नई दिल्ली ! भारत में कोरोना के नए वेरिएंट JN.I ने कोहराम मचा दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में 24 घंटे के भीतर 529 नए मामले सामने आए हैं। वहीं 5 लोगों की मौत हो गई। दिल्ली में भी JN.1 का पहला मामला सामने आया है। भारत में कोरोना के नए वेरिएंट JN.I ने कोहराम मचा दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में 24 घंटे के भीतर कोविड के 529 नए मामले सामने आए हैं। वहीं 5 लोगों की मौत हो गई। दिल्ली में भी JN.1 का पहला मामला सामने आया है। दरअसल, JN.] वेरिएंट दिल्ली से लेकर भारत के 9 राज्यों में फैला हुआ है। वहीं महाराष्ट्र में तीन महीने में पहली बार कोविड-19 से मौत की खबर सामने आई है। वहीं 4,093 मरीज इलाज करा रहे है। रिपोर्ट के अनुसार JN.1 वेरिएंट गुजरात, कर्नाटक, गोवा, महाराष्ट्र, केरल, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना और दिल्ली जैसे राज्यों में पाया गया है। एक्सपर्ट के अनुसार, JN.1 के लक्षण हल्के हैं। इसलिए मरीज को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत कम होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, JN.1 वेरिएंट में म्यूटेशन होता है। 24 घंटे में सामने आए 529 नए मामले स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, भारत में 24 घंटों में कोविड-19 के 529 मामले और 5 मौतें दर्ज की गईं हैं। वहीं कोविड का JN.] वेरिएंट का पहला केस 8 दिसंबर को केरल में पाया गया था। इसके बाद यह 9 राज्यों में फैल गया। इसके साथ ही नई दिल्ली में JN.1 वेरिएंट का पहला मामला मिलने के बाद हड़कंप मच गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने आगे कहा कि भारत में बुधवार सुबह 8 बजे तक 24 घंटे में 529 नए मामले दर्ज किए गए। अब तक कोविड के कारण 5 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं बुधवार को 87 मामले दर्ज किए गए। रिपोर्ट के अनुसार, देश में अब तक JN.1 के कुल 110 मामलों की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात में JN.1 के सबसे अधिक 36 मामले हैं। इसके बाद कर्नाटक में 34, गोवा में 14, महाराष्ट्र में 9, केरल में 6, राजस्थान में 4, तमिलनाडु में 4, तेलंगाना में 2 और दिल्ली में एक मामले सामने आए है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि मामले बढ़ रहे हैं लेकिन मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत कम पड़ रही है क्योंकि अधिकतर मामलों में हल्के लक्षण है।

हमीदिया अस्पताल में डॉक्टर, पर्चे में दवाओं के नाम कैपिटल लेटर्स में लिखना होगा.

Doctors at Hamidia Hospital will need to write the names of medicines in capital letters on prescriptions. हमीदिया अस्पताल में फरमान, पर्ची की जांच भी होगी भोपाल। अब डॉक्टरों की घसीटा राइटिंग से किसी मरीज को परेशान नहीं होना पड़ेगा। अब हमीदिया अस्पताल के डॉक्टर परिचय में दावों के नाम कैपिटल लेटर्स में ही लिखेंगे। यही नहीं, जिन परचों में जो में घसीटा राइटिंग होगी उन्हें मान्य नहीं किया जाएगा। हमीदिया अस्पताल के अधीक्षक ने इस संबंध में अस्पताल के सभी एचओडी को आदेश जारी कर इसे सख्ती से लागू कराने के निर्देश दिए हैं। पत्र में कहा गया है कि दवाओं के नाम स्पष्ट व बड़े अक्षरों में लिखें, जिससे मेडिकल स्टोर में कार्यरत फार्मासिस्ट व दूसरे कर्मचारियों को आसानी से दवा का नाम समझ सकें। मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया ने पहले भी दवाओं के नाम कैपिटल लेटर में लिखने का फरमान जारी किया था। हालांकि यह फरमान पूरी तरह लागू नहीं हुआ है। हमीदिया अस्पताल भोपाल के अधीक्षक डा. आशीष गोहिया ने बताया कि हम मॉनिटरिंग भी करेंगे हमीदिया के सभी विभागों में एचओडी को जेनेरिक दवाएं और बड़े अक्षरों में लिखने के लिए निर्देश जारी किए हैं। इसके बाद हम इसे लेकर मानिटरिंग भी करेंगे। एमसीआई ने पूर्व में इसे लेकर निर्देश दे चुकी है। लेकिन पालन नहीं किया जाता था। घसीटा राइटिंग से होता है कन्फ्यूजनडॉक्टरों की रेटिंग के कारण कई बार मेडिकल स्टोर में दवाओं के नाम पर कंफ्यूजन होता है। कई बार मरीजों को गलत दवा मिल जाती है। मरीजों को परेशानी से बचने के लिए कैपिटल लेटर में दवा का नाम लिखने को कहा है। यही नहीं चिकित्सक ऐसा कर रहे हैं या नहीं, इसकी मानीटरिंग भी की जाएगी। सभी विभागों की ओपीडी पर्ची की जांच की जाएगी, ताकि कैपिटल लेटर में लिखने को बढ़ावा दिया जा सके। केवल 40 फीसदी जेनेरिक दवा लिखते हैं चिकित्सक :चिकित्सकों को मरीजों के लिए केवल जेनेरिक दवा लिखने का फरमान जारी किया गया है। मानीटरिंग में यह बात सामने आई कि डाक्टर मरीजों की परची में केवल 40 फीसदी जेनेरिक दवा लिख रहे हैं। बाकी ब्रांडेड दवाओं के नाम सामने आ रहे है । अस्पताल प्रबंधन ने सभी विभाग के चिकित्सकों को जेनेरिक दवा लिखने के निर्देश दिए हैं।ऐसे जारी होते रहे आदेश

फिक्स्ड-ड्रग कॉम्बिनेशन में क्लोरफेनिरामाइन मैलेट और फिनाइलफ्राइन, 4 साल से कम उम्र के बच्चों में नहीं दिया जाना चाहिए- Central Drugs Standard Control Organisation.

According to the Central Drugs Standard Control Organisation, the combination of Chlorpheniramine Maleate and Phenylephrine should not be administered to children under 4 years of age in a fixed-dose combination. Manish Trivedi, Sahara Samachaar. नई दिल्ली ! सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन के इस हफ़्ते लिए गए फ़ैसले के अनुसार फिक्स्ड-ड्रग कॉम्बिनेशन (एफडीसी) का इस्तेमाल करने पर दवा कंपनियों को दवा के लेबल पर लिखना होगा कि “एफडीसी का उपयोग 4 साल से कम उम्र के बच्चों में नहीं दिया जाना चाहिए ! सरकार का यह फ़ैसला कुछ महीने पहले कई देशों में कफ़ सीरप पीने से 100 से अधिक बच्चों की मौत होने के बाद आया है. सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन ने कहा है कि बच्चों के लिए एक अस्वीकृत सर्दी-रोधी दवा फॉर्मूलेशन के प्रमोशन को लेकर चिंता जताई गई थी. अब चार साल से कम उम्र के बच्चों के लिए एफडीसी का इस्तेमाल न करने की सिफारिश की गई. नियामक के आदेश के अनुसार, फिक्स्ड-ड्रग कॉम्बिनेशन (एफडीसी) का उपयोग करने पर दवा कंपनियों को अपने उत्पादों पर चेतावनी के साथ लेबल लगाने की ज़रूरत होगी. फिक्स्ड-ड्रग कॉम्बिनेशन में क्लोरफेनिरामाइन मैलेट और फिनाइलफ्राइन शामिल होते हैं. इसका उपयोग अक्सर सर्दी जुकाम के इलाज के लिए सिरप या गोलियों में किया जाता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन भी पांच साल से छोटे बच्चों में खांसी और सर्दी के इलाज के लिए बिना डॉक्टर की पर्ची के सिरप या अन्य दवाई के उपयोग की सिफ़ारिश नहीं करता.

भारत में कोरोना वायरस के एक्टिव केस बढ़कर 3420 हुए.

The active cases of coronavirus in India have increased to 3,420. Corona virus spreading rapidly नई दिल्ली। भारत में बीते 24 घंटों में कोरोना संक्रमण के ताजा मामलों में काफी तेजी से बढ़ोतरी हुई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, बीते 24 घंटे में कोरोना संक्रमित मरीजों की सबसे अधिक संख्या केरल में दर्ज की गई है। इस दौरान कुल 423 मामले सामने आए हैं, जिनमें से 266 केरल से और 70 पड़ोसी राज्य कर्नाटक से हैं। इस बीच केरल में कोरोना संक्रमण के कारण दो लोगों की मौत की भी खबर है। देश में फिलहाल कुल संक्रमित 3420केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, देश में कोविड-19 के कुल सक्रिय मामलों की संख्या 3,420 दर्ज की गई। कोरोना वायरस के नए वेरिएंट के कारण बढ़ती चिंता बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की पूर्व मुख्य वैज्ञानिक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने कहा कि फिलहाल घबराने की कोई जरूरत नहीं है, लेकिन लोगों को एहतियाती कदम उठाना बेहद जरूरी है। पूरी दुनिया में बढ़ रहे कोरोना केसभारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) की पूर्व महानिदेशक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने कहा कि फिलहाल ताजा वेरिएंट JN.1 के एनालिसिस के लिए डाटा उपलब्ध नहीं हैं। इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने हाल कहा है कि यह वेरिएंट BA.2.86 वेरिएंट से अलग है। वैश्विक स्तर पर कोरोना के नए वेरिएंट जेएन.1 के मामलों में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है। हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने JN.1 से स्वास्थ्य को ज्यादा नुकसान होने की आशंका नहीं जताई गई है। 4 सप्ताह में 52 फीसदी की बढ़ोतरीWHO ने कहा कि बीते 4 हफ्तों के दौरान नए कोविड ​​​​मामलों की संख्या में 52 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जिसमें 850,000 से अधिक नए मामले सामने आए हैं। WHO ने कहा है कि COVID-19 महामारी की शुरुआत के बाद से 17 दिसंबर तक वैश्विक स्तर पर 772 मिलियन से अधिक लोग संक्रमित हुए हैं और करीब 70 लाख लोगों की मौत हुई है।

जिला चिकित्सालय बजट के अभाव से गुजर रहा है जिसके कारण मरीजों को हो रही है समस्या.

The district hospital is facing challenges due to a shortage of budget, causing difficulties for patients. छतरपुर। जिला अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए लगाई गई 5 लिफ्ट में से 4 खराब पड़ी हुई है। लिफ्ट खराब होने के कारण गंभीर मरीजों तथा उनके परिजनों को काफी समस्या हो रही है। मीडिया द्वारा पिछले दिनों इस समस्या को अस्पताल प्रबंधन सहित जिला प्रशासन के संज्ञान में लाया गया था, लेकिन अभी भी लिफ्ट का सुधार कार्य नहीं हो सका है। इस संबंध में जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. जीएल अहिरवार ने बताया कि बजट न होने के कारण लिफ्ट का सुधार कार्य नहीं हो पा रहा है। डॉ. अहिरवार के मुताबिक वे कई बार राज्य शासन को इस आशय का पत्र भेज चुके हैं। हालांकि पिछले दिनों कलेक्टर संदीप जी आर ने आश्वासन दिया था कि जल्द ही किसी अन्य शासकीय मद से राशि उपलब्ध कराकर लिफ्ट का सुधार कार्य कराया जाएगा। सिविल सर्जन ने यह भी बताया कि अस्पताल में बजट की समस्या लंबे समय से है। दीपावली के त्यौहार पर अस्पताल के आउटसोर्स कर्मचारियों को वेतन तक नहीं मिल सका था।

झोलाछाप डॉक्टरों के विरूद्ध कार्यवाही के लिए बड़ा एक्शन, समिति गठित.

Significant action against Jholachaap doctors, committee formed for disciplinary action. Special Correspondent, Sahara Samachaar, Chhatarpur.छतरपुर। राज्य शासन के निर्देशानुसार तथा कलेक्टर छतरपुर के अनुमोदन से मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा झोलाछाप डॉक्टरों के विरूद्ध कार्यवाही के लिए समिति का गठन किया गया है। समिति में संबंधित अनुभाग के एसडीएम, एसडीओपी तथा संबंधित खण्ड चिकित्सा अधिकारी शामिल हैं। समिति के सदस्य सामंजस्य स्थापित करते हुये शासन के निर्देशानुसार फर्जी चिकित्सक, पैथॉलोजी, झोलाछाप, डॉक्टर म.प्र. में चिकित्सा व्यवसाय कर रहे अन्य राज्य में पंजीकृत फर्जी चिकित्सकों के विरूद्ध कार्यवाही करेंगे।

फिर बढ़ा कोरोना का खतरा, डायट में शामिल करें ये इम्यूनिटी बूस्टर जड़ी बूटियां.

The threat of COVID-19 has increased again; include these immunity-boosting herbs in your diet. ( L.K varma ) अदरक की तासीर गर्म होती है। इस मसालेदार जड़ में जिंजरोल होता है, जिसमें रोगाणुरोधी और सूजन-रोधी गुण होते हैं। सर्दी के मौसम में जहां इम्यूनिटी कमजोर होने से कई संक्रामक बीमारियों का प्रकोप बढ़ जाता है, वहीं दूसरी ओर इन दिनों कोरोना संक्रमण के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में यदि आप भी अपने शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाना चाहते हैं तो डायट में ऐसी जड़ी बूटियों को जरूर शामिल करना चाहिए, जो हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। हल्दी, में कई औषधीय गुणों होते हैं। इसमें करक्यूमिन नाम का यौगिक होता है, जो शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करता है। इसके अलावा हल्दी में सूजनरोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं। यह शरीर को किसी भी प्रकार के संक्रमण से लड़ने में मदद करती है। अदरक, की तासीर गर्म होती है। इस मसालेदार जड़ में जिंजरोल होता है, जिसमें रोगाणुरोधी और सूजन-रोधी गुण होते हैं। यह पाचन में सहायता करता है। सूजन कम होने से शरीर को प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत होती है। लहसुन, भोजन का स्वाद बढ़ाने के साथ कई औषधीय गुणों से भरपूर है। लहसुन में एसिलिन नाम का यौगिक होता है, जो इम्यूनिटी बूस्टर का काम करता है। एसिलिन रोगाणुरोधी और एंटीवायरल गुणों वाला एक यौगिक है, जो संक्रमण से लड़ने में मदद करता है। अजवाइन, भी एक स्वादिष्ट जड़ी-बूटी है, जो विटामिन-C और खनिजों से भरपूर है। अजवाइन में रोगाणुरोधी गुण भी होते हैं। यह प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करती है। इसके अलावा कोरोना से बचने के लिए तुलसी, एलोवेरा, त्रिफला आदि का भी सेवन कर सकते हैं।

घरेलू नुस्खों से दूर करें गले की खराश, सर्दियों में होती है परेशानी.

Home Remedies for throat in winter season. मौसम में बदलाव के साथ सर्दी-खांसी और गले में खराश का होना आम बात है। कई लोग कफ और कोल्ड की समस्या से जूझते हैं। मौसम के बदलाव के साथ कई लोगों को गल में खराश की समस्या होने लगती है। मौसम में बदलाव के साथ सर्दी-खांसी और गले में खराश का होना आम बात है। कई लोग कफ और कोल्ड की समस्या से जूझते हैं। मौसम के बदलाव के साथ कई लोगों को गल में खराश की समस्या होने लगती है। वह इसके लिए कई महंगी दवाईयों को खाना शुरू कर देते हैं, लेकिन फिर भी कोई आराम नहीं मिलता है। ऐसे में कई घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल कर इन परेशानियों को दूर किया जा सकता है। घरेलू नुस्खों को आसानी से रसोई में मौजूद चीजों के इस्तेमाल से बनाया जा सकता है। डाइटिशियन सिमरन कौर ने इसके बारे में विस्तार से जानकारी दी। हल्दी वाला पानी पिएं ,हल्दी में एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-इंफ्लेमेटरी एंटी-सेप्टिक और एंटी-ऑक्सीडेंट के गुण होते हैं। यह हमारे शरीर में मौजूद इंफेक्शन को दूर कर देते हैं। गर्म पानी के साथ लहसुन, हल्दी और गुड़ का पेस्ट भी खाया जा सकता है। यह आपको फायदा पहुंचाएगा। तुलसी और अदरक की चाय पिएंसर्दियों में स्वस्थ रहने के लिए तुलसी और अदरक की चाय भी पी सकते हैं। तुलसी की 4-5 पत्तियां और आधा इंच अदरक का टुकड़ा लें। दोनों को पानी में उबाले। पानी के आधा रह जाने पर इसको गैस को बंद कर दें। चाय को गुनगुना रहते ही पी लें। यह आपके गले की खराश को दूर करने में मदद करेगा। दालचीनी और शहद का नुस्खादालचीनी और शहद के घरेलू नुस्खे से गले की खराश को खत्म कर सकते हैं। आप चौथाई चम्मच दालचीनी का पाउडर लें। इसको आधा रह जाने तक उबालते रहें। यह जब रूम टेम्परेचर पा आ जाएं, तब ही इसमें शहद को मिलाएं। इसको पीने से आपके गले की खराब दूर हो जाएगी।

सर्दी के मौसम में तेजी से फैलता है इन्फ्लूएंजा वायरस.

 The influenza virus spreads rapidly during the cold weather. फ्लू इन्फ्लूएंजा वायरस के कारण होता है, जो नाक, गला और फेफड़ों को संक्रमित करता है। The flu is caused by the influenza virus, which infects the nose, throat, and lungs. Manish Trivedi, Sub-Editor, Sahara Samachaar. ठंड के मौसम में बीमारियों का खतरा अधिक होता है। इस मौसम में कई मौसमी बीमारियों जैसे सर्दी-खांसी और फ्लू का खतरा अधिक रहता है। फ्लू इन्फ्लूएंजा वायरस के कारण होता है, जो नाक, गला और फेफड़ों को संक्रमित करता है। ठंड के मौसम में बीमारियों का खतरा अधिक होता है। इस मौसम में इन्फ्लूएंजा वायरस अधिक सक्रिय रहता है। सर्दी में ठंडी हवाएं और गिरता तापमान सबसे ज्यादा परेशान करता है। इस मौसम में कई मौसमी बीमारियों जैसे सर्दी-खांसी और फ्लू का खतरा अधिक रहता है। इस मौसम में फ्लू लोगों को बेहद प्रभावित करता है। मेडिसिन विभाग के सह प्राध्यापक डा. अशोक ठाकुर ने बताया कि फ्लू इन्फ्लूएंजा वायरस के कारण होता है, जो नाक, गला और फेफड़ों को संक्रमित करता है। जब फ्लू से पीड़ित लोग खांसते, छींकते या आपस में बात करते हैं तो ये वायरस हवा के जरिए एक-दूसरे में फैलने लगता है। यह वायरस सबसे आसानी से फैल जाता है। कोविड के प्रोटोकाल का पालन करना चाहिए इससे बचाव के लिए हमें कोविड की तरह प्रोटोकाल का पालन करना चाहिए। जैसे मास्क लगाकर रखें, बार-बार हाथ धोएं, भीड़ वाली जगहों पर जाने से बचें। खासकर घर में यदि कोई व्यक्ति बीमार है, तो उससे दूरी बनाकर रखना चाहिए। इस मौसम में सबसे अधिक समस्या सांस के मरीज को होती है। उन्हें अपना विशेष तौर पर ध्यान रखने की आवश्यकता है। ऐसे में खानपान में ठंडी चीजों को नहीं खाना चाहिए। जिन लोगों की जिस भी तरह के खाने से एलर्जी है, उसे खाने से बचना चाहिए।सर्दी में मौसमी बीमारियों से बचाव करने के लिए टीका लगना जरूरी है। फ्लू से बचाव के लिए नियमित रूप से साबुन से अपने हाथ धोएं या फिर सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें। हाथों को अपनी आंखें, नाक, या मुंह को छूने से बचें।

अब नहीं सोना पड़ेगा बेंच पर, जेपी अस्पताल में बनेगा रैन बसेरा.

A Renbaseara will be built in J P Hospital. प्रस्ताव तैयार, परिसर में मंदिर के पास की जगह तय भोपाल। जेपी अस्पताल शहर का तीसरा सरकारी अस्पताल है, जहां रैन बसरे की सुविधा होगी। अब तक हमीदिया अस्पताल व एम्स में दूर दराज से आने वाले लोगों के लिए यह व्यवस्था थी। प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार रोजाना जेपी में 60 से 80 मरीज भर्ती होते हैं। अस्पताल में वार्ड में एक मरीज के साथ एक परिजन के ही रुकने की अनुमति होती है। जिसके कारण रात में कई परिजन फर्श व बेंच पर सोते नजर आते हैं। ठंड के मौसम इसके चलते वे भी बीमार हो सकते हैं। इसी को देखते हुए रैन बसेरा बनाने का फैसला लिया गया है। परिसर में मौजूद हनुमान मंदिर के रैन बसेरा बनाना तय किया गया है। जिसका प्रस्ताव भी विभाग को भेज दिया गया है। मंजूरी मिलते ही इसका निर्माण शुरू किया जाएगा। नई व्यवस्था का परिजनों को ठंड से बचाने के लिए अलाव जलाया जाएगा। यह व्यवस्था तब तक रहेगी, जब तक शीतलहर का प्रकोप रहेगा। जेपी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राकेश श्रीवास्तव ने बताया कि अस्पताल में रूकने वाले परिजनों की सुविधा के लिए रैन बसेरा बनाया जाएगा। जमीन का चयन कर प्रस्ताव विभाग को भेज दिया गया है। मंजूरी मिलते ही रैन बसेरा तैयार किया जाएगा।

सेहत के लिए फायदेमंद है कांटेदार सत्यानाशी पौधा, कई औषधीय गुणों से है भरपूर.

The thorny devil’s snare plant is beneficial for health, possessing numerous medicinal properties. हमारे आसपास कई तरह के पेड़ पौधे ऐसे होते हैं, जो कई सारे औषधीय गुना से भरपूर रहते हैं। There are many types of trees and plants around us that are abundant in various medicinal properties. हालांकि, कई बार अपने आसपास मौजूद चीजों को हम बेकार या फिर जंगली समझकर तोड़ देते हैं या उखाड़ कर फेंक देते हैं। ऐसा ही दिखने वाला एक कांटेदार पौधा सत्यानाशी फूल का होता है जो कई तरह की औषधीय गुणों से भरपूर है। हमारे आसपास मौजूद पार्क, गार्डन और सड़क के किनारे पर कई तरह के पेड़ पौधे और फूल उगे हुए दिखाई देते हैं। कई पेड़ पौधे ऐसे होते हैं, जिनके बारे में लोगों को जानकारी नहीं होती है और वह इन्हें जंगली और बेकार समझ लेते हैं। ऐसा ही एक पौधा पीले रंग ला सत्यानाशी फूल है, जिस अक्सर ही बेकार समझ कर फेंक दिया जाता हैं। इस पौधे में बहुत सारे कांटे होते हैं, यही वजह है कि इसे बेकार समझा जाता है। आपको बता दें कि ये कांटेदार फूल का पौधा सेहत के लिहाज से बहुत फायदेमंद है। इसे खुसबसूरती के साथ अगर गमले में लगाया जाए तो ये देखने में भी सुंदर दिखेगा और इससे होने वाले फायदे का लाभ भी उठाया जा सकता है। चलिए आज आपको इस पौधे से जुड़ी कुछ खास बातें बताते हैं। कैसा होता है सत्यानाशी पौधासत्यानाशी पौधा देखने में बहुत खूबसूरत होता है और अक्सर ही खाली जमीन पर उग जाता है। इस पौधे में कई तरह की औषधि गुण मौजूद है और यह आपको अक्सर सड़क किनारे या निर्जन स्थान पर देखने को मिल जाएगा। इस पौधे में फूल, पत्ते, डाली सभी जगह पर कांटेदार पौधे होते हैं और इसे बहुत ही सावधानी के साथ तोड़ना पड़ता है। पीले रंग के स्कूल के अंदर बैंगनी रंग के बीच दिखाई देते हैं। सबसे खास बात यह है कि जब भी आप किसी पौधे या फूल को तोड़ते हैं तो उसमें से सफेद रंग का दूध निकलता है। लेकिन जब आप सत्यानाशी पौधे को तोड़ेंगे तो इसमें से आपको पीले रंग का दूध निकलता हुआ दिखाई देगा। सत्यानाशी पौधे के फायदेकांटेदार और बेकार सा दिखने वाला यह पौधा कई गुणों से भरपूर है और इससे बहुत तरह के फायदे होते हैं। जिन लोगों को अक्सर खांसी चलने या फिर सांस चलने की शिकायत होती है, वह अगर इसकी जड़ को पानी में उबालकर काढ़े की तरह पिएंगे तो उन्हें बहुत फायदा होगा।सत्यानाशी के तेल में गिलोय का जूस मिलाकर पीने से पीलिया जैसे रोग से मुक्ति मिलती है।पेट दर्द की समस्या को दूर करने में भी यह पौधा काफी कारगर है बस आपको इसके दूध में घी मिलाकर पीना होगा और दर्द से आराम मिल जाएगा। कैसे लगाए पौधासत्यानाशी पौधे को आप अपने घर में कैक्टस प्लांट की तरह ही लगा सकते हैं। जब इसमें फूल खिलेंगे तो यह बहुत ही खूबसूरत दिखाई देगा। इसे लगाने के लिए बस आपको पके हुए बीज की आवश्यकता होगी। आप इन्हें मिट्टी में मिला दें और बस पौधा उगने लगेगा। इस पौधे को कुछ खास देखभाल की जरूरत नहीं होती है। लगाते वक्त ही थोड़ी ऑर्गेनिक खाद इसकी मिट्टी में मिला दें। बीज के जरिए पौधा उगाने के अलावा आप छोटा सा पौधा लाकर भी इसे लगा सकते हैं। दिन में दो-तीन बार इसे पानी देने के अलावा आप धूप या छांव में कहीं भी इसे रख सकते हैं। दाद-खाज-खुजली से छुटकारा (What stops itching fast)स्किन रोगों के लिए सत्यानाशी का प्रयोग (Prickly Poppy use to Treat Skin Disease)सत्यानाशी का पौधा आपको आसानी से पार्क या सड़क के किनारे लगा दिख जाएगा। यह एक कांटेदार पौधा होता है, जिस पर पीले रंग के फूल होते हैं। सत्यानाशी पंचांग के रस में हल्का नमक डालकर सेवन करने से स्किन संबंधी रोगों में लाभ होता है। इसके लिए आपको रोजाना सत्यानाशी पंचांग के रस का 1 या 2 चम्मच सेवन करना होगा। दाद का इलाज (ringworm treatment)एंटीफंगल गुणों से भरपूर सत्यानाशी का पौधा दाद के इलाज में भी फायदेमंद साबित होता है। सत्यानाशी की पत्तियों का रस या तेल को दाद वाली जगह पर लगाने से दाद के लक्षण धीरे धीरे हल्के होने लगते हैं और इसका इंफेक्शन फैलना भी बंद हो जाता है। खुजली के लिए सत्यानाशी का उपयोग (uses of Prickly Poppy for itching)खुजली की समस्या में इंसान परेशान हो जाता है, ज्यादा खुजली के कारण स्किन पर रैशेज भी आ जाते हैं और कई बार खून भी निकलने लगता है। फोड़े, फुंसी, खुजली और जलन के लिए सत्यानाशी फायदा करता है। इसके लिए आप सत्यानाशी पंचांग का रस या पीला दूध लगाएं। इसे लगाने से आपको खुजली से राहत मिलेगी।

सिरोंज ब्लॉक में 28,169 के निर्धारित लक्ष्य में से 27,548 बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई.

In the Sironj block, 27,548 out of the targeted 28,169 children have been administered polio medicine. सीताराम कुशवाहा, सहारा समाचार विदिशा.विदिशा/ सिरोंज, तीन दिन तक राज्यस्तरीय पल्स पोलियो अभियान में सिरोंज ब्लॉक में ग्रामीण एवं शहरी खेत्र में बच्चों को दवाई पिलाई जाएगी सिरोंज के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ विकास सिंह बघेल ने बताया है 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को दवाई पिलाई जाएगी । वही शहर एवं ग्रामीण अधिकांश जगहों पर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई जिससे की 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को भी दवाई पिलाई जा सके । इसी अभियान के तहत विदिशा के सिरोंज ब्लॉक में स्वास्थ्य विभाग द्वारा अभियान चलाया गया. जीरो से पांच वर्ष तक के बच्चों को दवा पिलाई गयी, यह अभियान 10 दिसंबर से 12 दिसंबर तक चलाया जा रहा है जिसमें सिरोंज समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 28,169 बच्चों को दवा पिलाने का लक्ष्य रखा। जिसमें से पहले दिन 27,548 बच्चों को दवाई पिलाई गई । रविवार से मध्य प्रदेश के 16 जिलों में राज्यस्तरीय पल्स पोलियो अभियान की शुरुआत हुई । इस अभियान के तहत लगभग 36 लाख, पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों को टीका लगाने का लक्ष्य रखा हैं।

11793 बच्चों को पोलियो की दवाई पिलाई, पहले दिन 68% टारगेट पूरा किया.

11,793 children were administered polio medicine, achieving 68% of the target on the first day. सीताराम कुशवाहा, सहारा समाचार विदिशा.विदिशा/गंज बासोदा, रविवार से मध्य प्रदेश के 16 जिलों में राज्यस्तरीय पल्स पोलियो अभियान की शुरुआत हुई । जिला स्वास्थ्य प्राधिकृतियां इस अभियान के तहत लगभग 36 लाख, पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों को टीका लगाने का लक्ष्य रखा हैं। जिलों को उनकी संक्रामक संक्रमण के प्रति संवेदनशीलता के आधार पर चयनित किया गया है. इसी अभियान के तहत विदिशा के गंज बासोदा ब्लॉक में स्वास्थ्य विभाग द्वारा अभियान चलाया गया. जीरो से पांच वर्ष तक के बच्चों को दवा पिलाई, यह अभियान 10 दिसंबर से 12 दिसंबर तक चलाया जा रहा है जिसमें गंज बासोदा समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 17756 बच्चों को दवा पिलाने का लक्ष्य रखा। जिसमें से पहले दिन 11793 बच्चों को दवाई पिलाई गई । तीन दिन तक गंज बासोदा ब्लॉक में सभी गांव में बच्चों को दवाई पिलाई जाएगी गंज बासोदा के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ प्रमोद कुमार दीवान ने बताया है 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को दवाई पिलाई जाएगी । वही शहर के अधिकांश जगहों पर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई जिससे की जीरो से 5 वर्ष तक के बच्चों को भी दवाई पिलाई जा सके ।

12244 बच्चों को पोलियो की दवाई पिलाई.

Administered polio medicine to 12,244 children सीताराम कुशवाहा, सहारा समाचार, विदिशाविदिशा! ग्यारसपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ग्यारसपुर के सरपंच राजू कुशवाहा एवं स्वास्थ्य विभाग के सुपरवाइजर गणेशराम विश्वकर्मा के द्वारा जीरो से पांच वर्ष तक के बच्चों को दवा पिलाई यह अभियान 10 दिसंबर से 12 दिसंबर तक चलाया जा रहा है! जिसमें ग्यारसपुर समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 16432 बच्चों को दवा पिलाने का लक्ष्य रखा है। जिसमें से पहले दिन 12244 बच्चों को दवाई पिलाई गई । तीन दिन तक ग्यारसपुर ब्लॉक में सभी गांव में बच्चों को दवाई पिलाई जाएगी ग्यारसपुर ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर सुनीता नागाचे ने बताया कि 169 केंद्र ग्यारसपुर ब्लॉक में बनाए गए हैं! जहां पर 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को दवाई पिलाई जाएगी । वही बस स्टैंड पर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई जिससे की बसों में आने जाने वाले 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को भी दवाई पिलाई जा सके ।

एचडीएफसी बैंक जबलपुर शाखा द्वारा 46 केंद्रों में रक्तदान अभियान के माध्यम से 4661 यूनिट ब्लड का कलेक्शन किया.

HDFC Bank’s Jabalpur branch collected 4661 units of blood across 46 centers through a blood donation campaign. भोपाल! भारत का अग्रणी निजी क्षेत्र का एचडीएफसी बैंक ने शुक्रवार 8 दिसंबर, 2023 से शुरू होने वाले अपने राष्ट्रव्यापी रक्तदान अभियान के 15वें संस्करण का आयोजन जबलपुर के विजय नगर शाखा में किया। अपने प्रमुख सीएसआर कार्यक्रम परिवर्तन के तहत भारत के 1200 शहरों में 6,000 केंद्रों पर रक्तदान शिविर का संचालन किया गया। रक्तदान शिविर का उद्घाटन निर्मला देवी ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज के संस्थापक श्री मुनेंद्र मिश्रा जी के द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। श्री मिश्रा ने एचडीएफसी बैंक द्वारा किए जा रहे रक्तदान शिविर की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह बैंक व्यवसायिक दायित्वों के निर्वाह के साथ साथ सामाजिक दायित्व के निर्वहन में भी देश का नंबर वन बैंक बन चुका है। एचडीएफसी बैंक के सर्किल हेड श्री अनूप शर्मा ने रक्तदाताओं की सराहना करते हुए कहा कि इस दान से बड़ा और कोई दान नहीं हो सकता। श्री शर्मा ने शहर के सभी युवाओं को स्वेच्छा से रक्तदान करने का आग्रह किया। गत माह में एचडीएफसी बैंक के जबलपुर सर्किल के द्वारा 45 विभन्न कैंपों के माध्यम से 4661 यूनिट ब्लड का कलेक्शन किया गया। एचडीएफसी बैंक अपने कर्मचारियों, ग्राहकों, कॉरपोरेट्स, रक्षा बलों और स्थानीय समुदाय के सदस्यों सहित विभिन्न प्रकार के रक्त दानदाताओं को जुटाने के लिए तैयार है। इस साल एक अनोखे दृष्टिकोण में एचडीएफसी बैंक ने लोगों को रक्तदान करने के लिए प्रोत्साहित करते हुए ‘फीलिंग ऑफ सेविंग समवन नामक एक फिल्म लॉन्च की है। फिल्म व्यक्तियों को इस जीवन रक्षक कार्य में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करती है और रक्तदान की महत्वपूर्ण आवश्यकता पर जोर देती है। यह फिल्म बैंक के सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज की जाएगी, यह जनता के बीच उनके योगदान के प्रभाव के बारे में जागरूकता पैदा करेगा और अभियान में बड़े पैमाने पर रक्तदान के लिए प्रेरित करेगा। एचडीएफसी बैंक के कार्यकारी निदेशक, श्री भावेश ज़वेरी ने कहा, “एचडीएफसी बैंक में हम लोगों को इस प्रयास में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने में बहुत गर्व महसूस करते हैं, क्योंकि दान किए गए रक्त की हर बूंद एक संभावित जीवन रक्षक है। अपने 15वें अखिल भारतीय रक्तदान अभियान के साथ हम नागरिकों को इस नेक काम में भाग लेने और अपना योगदान देने के लिए एक मंच देना चाहते हैं।” यह पहल 2007 में केवल 88 केंद्रों और 4000 दानदाताओं के साथ शुरू की गई थी जो केवल बैंक कर्मचारियों के बीच ही चलाई गई थी। पिछले कुछ वर्षों में इस अभियान का दायरा बढ़ा दिया गया और इसमें कॉलेज के छात्रों, कॉरपोरेट्स और सेना और सेवा कर्मियों को शामिल किया गया। इसे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्डसा” से सबसे बड़े (सिंगल डे, मल्टीपुल वेन्यू) रक्तदान अभियान के रूप में मान्यता और प्रमाणन प्राप्त हुआ। 2022 में बैंक ने 25 लाख यूनिट से अधिक रक्त एकत्र किया। कुछ महत्वपूर्ण दानकर्ता 1500- कॉलेजों, 550 कॉरपोरेट्स और 105- रक्षा और सेवा कर्मियों से आए जिन्होंने रक्तदान अभियान में भाग लिया। एचडीएफसी बैंक के रक्तदान अभियान के बड़े पैमाने और व्यापक आधार ने देश के समग्र रक्त संग्रह को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।रक्तदान शिविर का संचालन जबलपुर शाखा के ऑपरेशन प्रबंधक श्री लीजू जोसेफ ने किया एवं समस्त स्टाफ ने स्वेच्छा से रक्तदान करने आए बैंक के ग्राहकों एवं युवा वर्ग का आभार व्यक्त किया।

मध्य प्रदेश में फिर डराने लगा कोरोना, इंदौर में मरीज मिलने के बाद मचा हड़कंप

COVID in Madhya Pradesh, as a patient in Indore tests positive. Doctors advise people to stay vigilant. इंदौर। मध्य प्रदेश में एक बार फिर कोरोना ने दस्तक दे दी है। इंदौर में एक मरीज मिलने के बाद डॉक्टरों ने लोगों से सतर्क रहने की सलाह दी है। एक बुजुर्ग की कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। वह सर्दी और बुखार से पीड़ित था। निजी लैब में कोविड जांच कराई गई। रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद मरीज को होम आईसोलेशन में रखा गया है। दो साल बाद भी कोविड का भय खत्म नहीं हुआ है। 70 वर्षीय बुजुर्ग की सर्दी खांसी के जांच के बाद कोविड पॉजिविट मिला है। इसके बाद मरीज का होम आईसोलेशन कर उपचार किया गया। मरीज की हालत ठीक है।कोविड नोडल अधिकारी डॉ अमित मालाकार ने बताया कि हरदा निवासी 70 वर्षीय बुजुर्ग सर्दी खांसी और बुखार से पीड़ित था। निजी लैब में कोविड जांच कराने पर रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। जिसके बाद मरीज को आईसोलेशन में रखकर उसका उपचार किया गया। फिलहाल मरीज की हालत ठीक है। मामला 24 नवंबर का है। रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर परिवार के सभी सदस्यों की कोविड जांच की गई, लेकिन सभी की रिपोर्ट नेगेटिव है। बता दे कि मामले के 16 दिन बाद भी स्वास्थ्य विभाग ने रिपोर्ट मरीज की सांझा नहीं की है।

युवाओं में अब इस बीमारी का खतरा, लगातार हो रहे शिकार.

The danger of this illness is now looming over the youth, becoming a continuous threat. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एकाकीपन को गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य खतरा घोषित किया है। जिसकी मृत्यु दर प्रतिदिन 15 सिगरेट पीने के बराबर है। आंकड़ों के अनुसार विश्व में 5 से 15 प्रतिशत किशोर अकेले हैं। बुजुर्गों में होने वाली एकाकीपन की समस्या ने अब युवाओं को भी अपनी गिरफ्त में लेना शुरू कर दिया है। कोविड के बाद इन आंकड़ों में वृद्धि हुई है। बुजुर्गों में होने वाली एकाकीपन की समस्या ने अब युवाओं को भी अपनी गिरफ्त में लेना शुरू कर दिया है। कोविड के बाद इन आंकड़ों में वृद्धि हुई है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार मनोचिकित्सक केंद्र में रोजाना टेलीमानस पर 20 से 40 युवाओं के कॉल आ रहे हैं, जो एकाकीपन का शिकार है। इसमें ज्यादातर आईआईटी, नीट और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले व घर से दूर रहने वाले युवा शामिल है। वहीं बुजुर्गों की ओपीडी में हर सप्ताह 30 मरीज आ रहे हैं। जिनमें 8 से 10 केस एकाकीपन से जुड़े हैं। एंग्जाइटी, डिप्रेशन और तनावमनोचिकित्सक डॉ. ललित बत्रा बताते हैं कि इंसान भावनाओं को शब्दों के जरिए अभिव्यक्त करता है। परिवार में उसकी यह जरूरतें पूरी हो जाती है। अकेलेपन से एंग्जाइटी, डिप्रेशन, तनाव जैसी समस्याएं पनपने लगती है। स्कूल-कॉलेज में बच्चों के बीच एक समूह बने, जिसमें वे अपने मन की बात साझा कर सकें। ये हैं दूर करने के उपायदिनचर्या को ठीक रखने का प्रयास करें।सोने और उठने का समय निर्धारित करें।मेडिटेशन और योगा करें।स्वयं को सामाजिक संवाद में शामिल करें।दोस्तों और परिजनों के साथ समय बिताए और मन की बात साझा करें।

हमारे पास डॉक्टरों की कमी है. भारत में प्रति 1000 जनसंख्या पर एक डॉक्टर है, विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ाना सबसे जरूरी – नीति आयोग के सदस्य विनोद के. पॉल.

We have a shortage of doctors. In India, there is one doctor per 1000 population, and it is crucial to increase the number of specialist doctors – says NITI Aayog member Vinod K. Paul. Manish Trivedi – Sahara Samachaar नई दिल्ली: नीति आयोग के सदस्य विनोद के. पॉल ने दिल्ली स्थित राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (आरएमएलआईएमएस) के स्थापना दिवस समारोह को बीते गुरुवार (30 नवंबर) को संबोधित करते हुए कहा कि लोगों की पर्याप्त स्वास्थ्य देखभाल के लिए देश में एमबीबीएस और विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ाना सबसे जरूरी है. पॉल ने कहा, ‘हमारे पास डॉक्टरों की कमी है. भारत में प्रति 1000 जनसंख्या पर एक डॉक्टर है, अगर हम आयुष चिकित्सकों को जोड़ दें तो 1.3 डॉक्टर हैं, जबकि विकसित देशों में समान जनसंख्या के लिए तीन डॉक्टर हैं.’ ‘विशेषज्ञों की आवश्यकता और भी अधिक है.’ देश में विशेषज्ञों की संख्या बढ़ाने के लिए डीएनबी (डिप्लोमैट ऑफ नेशनल बोर्ड) पाठ्यक्रम और जिला रेजीडेंसी कार्यक्रम (डीआरपी) का उपयोग किया जाना चाहिए. डीआरपी के तहत एक-चौथाई उम्मीदवारों को बेहतर शिक्षा और मरीजों की सेवा के लिए जिला अस्पतालों में तैनात किया जाता है. उत्तर प्रदेश में डीआरपी इस साल की शुरुआत में शुरू की गई है और सभी मेडिकल कॉलेजों के 768 उम्मीदवारों को तीन महीने की अवधि के लिए जिला अस्पतालों में तैनात किया गया है. एमबीबीएस छात्रों को पीजी पाठ्यक्रमों में सीट पाने के बारे में चिंता नहीं करनी चाहिए, क्योंकि पीजी सीटों की संख्या बढ़ गई है और अधिक सीटें जोड़ने पर काम चल रहा है. अगर डीपीआर ठीक से लागू किया गया तो प्रत्येक जिला अस्पताल में 5 से 10 पीजी छात्र होंगे.’ ‘देश में 68,000 से अधिक पीजी मेडिकल सीटें हैं और अगर एक-चौथाई अस्पतालों में हैं तो इससे मरीजों की सेवा में सुधार करने में मदद मिलेगी और उम्मीदवारों की संख्या भी बढ़ेगी, क्योंकि कॉलेज अतिरिक्त छात्रों को ले सकते हैं.’ ‘देश में पीजी सीटें 32,000 से बढ़कर 63,000 से अधिक हो गई हैं और यूजी मेडिकल सीटें 52,000 से बढ़कर 1.8 लाख हो गई हैं. चुनौती देश में विशेषज्ञों की संख्या बढ़ाने की है.’ कार्यक्रम में शामिल भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक और भारत सरकार के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव डॉ. राजीव बहल ने कहा, ‘अनुसंधान केवल कुछ संस्थानों तक सीमित नहीं होना चाहिए. सभी संस्थानों को इसमें भाग लेना चाहिए.’ डॉ. बहल ने कहा, ‘इस साल आईसीएमआर ने 203 विभिन्न संस्थानों को 600 अनुदान दिए और उनमें से कई को राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों के रूप में नहीं जाना जाता था.’ समारोह में प्रमुख सचिव, चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य, पार्थ सारथी सेन शर्मा और आरएमएलआईएमएस निदेशक प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद भी उपस्थित थे.

जिला चिकित्सालय में डॉक्टरों की लापरवाही का सिलसिला जारी, कार्यवाही के नाम पर रस्म अदायगी, प्रसूता की हुई मौत.

The saga of doctors’ negligence continues at the district hospital, with formalities being carried out in the name of disciplinary action, leading to the unfortunate death of a pregnant woman. Special Correspondent – Sahara Samachaar Katni. कटनी। जिला चिकित्सालय में व्यवस्थाएं सुधारने के बजाय बिगड़ती जा रही हैं ऐसे डॉक्टर है जो स्वयं के क्लीनिक चला रहे हैं जिला अस्पताल में दो दिन बाद फिर एक बार डॉ की लापरवाही से प्रसूता की मौत लागतार डॉक्टरों की लापरवाही से प्रस्तुओ की मौत होने का सिलसिला थम ही नही रहा है। जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ जांच का अस्वाशन देकर परिजनों को शांत करा दिया जाता है लेकिन आज तक किसी पर ठोस कार्यबाही नही होने के कारण लापरबाही का रवैया अपनाते हुए डॉक्टर अपने प्राइवेट डिस्पेंसरी में लगे रहते है जानकारी के अनुसार बताया गया है कि विजयराघवगढ़ से आयी प्रसूता की इलाज दौरान मौत विजयराघवगढ़ से आई शालिनी तिवारी पति राजू तिवारी 28 वर्ष कारितलाई निवाशी कल विजयराघवगढ़ में कल शाम 8 बजे स्वास्थ केन्द्र में प्रसव हुआ जिसमें लड़का हुआ था महिला की हालत गम्भीर होने के कारण जिला अस्पताल कटनी रेफर किया गया था जहाँ पर महिला को किसी भी डॉक्टर ने नही देखा रात में डॉक्टर सुनीता वर्मा को अस्पताल से कॉल गया था आधे घण्टे करते करते सुबह 5 बजा दिया, फिर परिजनों को कही ओर ले जाने की सलाह स्टाफ द्वारा दी गयी। जहाँ परिजन शारदा हॉस्पिटल ले गए लेकिन से भी बोल दिया गया था कि जबलपुर ले जाओ लेकिन महिला की मौत हो गयी परिजनों द्वारा डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया गया कि इलाज में बेपरवाही की गई जिससे प्रसूता की मौत हो गयी गौरतलब है कि अभी कुछ दिन पहले ही चौधरी परिवार की एक महिला ने जिला अस्पताल में दम तोड़ दिया था जिससे उसके परिवारजनो ने लापरवाही का आरोप लगाया था.

108 एम्बुलेंस के लापरवाही के चलते एक नवजात शिशु की गई जान.

Chhindwara; Sahara Samachaar; Health Department;

Negligence of 108 ambulances led to the death of a newborn child चन्द्रदीप गगन तेकामछिंन्दवाडा, जिले के पतालकोट में जननी 108 की लापरवाही के चलते नवजात बच्चे की गई जान लापरवाही की भेंट चढ़ा मासूम मामला ग्राम गैलडुब्बा का बताया जा रहा रहा यहां निवासी श्याम कुमारी पति ब्रजलाल उईके को प्रसव पीड़ा के चलते जननी 108 एम्बुलेंस की राह देखते देखते घर पर ही डिलेवरी होने से बच्चे की सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने से पहले ही मौत हो गई अगर समय रहते महिला को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तामिया लाया गया होता तो बच्चे की जान बचाई जा सकती थी लेकिन 108वाहन ना मिलने से एक नौ निहाल बच्चे की जान नहीं बची छिंदी में ना तो डाक्टर ना उचित स्वास्थ्य व्यवस्था फिर भी नेता मंत्री बड़े बड़े वादे करने से पीछे नहीं है आखिर कब होगी स्वास्थ्य व्यवस्था दुरुस्त फिलहाल कहना मुश्किल है।

कोविड और हार्ट अटैक पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री का चौकाने वाला बड़ा बयान.!

Corona; Covid; Hearth Attack; Sahara Samachaar; Mansukh Mandaviya

Shocking statement by the Central Health Minister on COVID and heart attacks Manish Trivediनई दिल्ली : लगातार देश में आ रही हार्ट अटैक की खबरों से लोगों की नींद हराम हो गईं हैं,अगर देखा जाये तो सबसे अधिक युवा वर्ग प्रभावित हो रहे हैं. लोगों के दिमाग में ये भी सवाल उठना शुरू हो गया है कि कहीं हार्ट अटैक बढ़ने की खबरों का कोविड से तो कोई संबंध नहीं है. जानिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया का चौकाने वाला बड़ा बयान जरूर पढ़ें. स्वास्थ्य मंत्री ने साफ तौर पर इसका जवाब हां में दिया है. उन्होंने कहा कि जिस किसी व्यक्ति को कोविड की बीमारी हुई थी, उसे आने वाले दो-तीन सालों तक कोई भी कठिन और तनावपूर्ण कार्य से बचना चाहिए. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ऐसे लोगों को दो से तीन सालों तक कठिन एक्सरसाइज भी नहीं करना चाहिए. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने इस संबंध में इंडियन काउंसल ऑफ मेडिकल रिसर्च की एक स्टडी का हवाला दिया है. उन्होंने कहा कि आईसीएमआर ने इस संबंध में एक स्टडी की है. इसके अनुसार जिन्हें भी कोविड का इन्फेक्शन हुआ था, उन्हें आने वाले कम से कम दो सालों तक कठिन कार्य से बचना चाहिए. मंडाविया ने कहा कि हाल के दिनों में कई ऐसी घटनाएं हुईं हैं, जिसके बाद इस पर स्टडी किया गया. मंत्री ने कहा कि 22 अक्टूबर को गुजरात के खेडा में गर्बा खेलते-खेलते 17 साल का एक लड़का हार्ट अटैक का शिकार हो गया. इस तरह की कई घटनाएं हुईं हैं,

प्राईवेट नर्सिंग होम एवं पैथोलॉजी सेंटर्स संचालकों को गंभीर बीमारियों के सेंपल का जिला चिकित्सालय से पुनः परीक्षण के निर्देश

Katni; CMHO; Private Hospitals; Katni Private Hospitals; Pathalogy; Orders;

Operators of private nursing homes and pathology centers have been directed to undergo reexamination for serious diseases using samples from the district hospital.

फूड पॉयजनिंग का शिकार lNIPE छात्रों से मिले केंद्रीय मंत्री सिंधिया।

ग्वालियर। केन्द्रीय नागरिक उड्डयन एवं इस्पात मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया शुक्रवार को ग्वालियर पहुंचे, यहां उन्होंने मंगलवार को फूड पॉयजनिंग का शिकार होने के बाद अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचे महारानी लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारिरिक शिक्षण संस्थान के 100 से ज्यादा छात्रों अस्पताल पहुंचकर उनका हाल जाना है। यहां 15 छात्र भर्ती मिले हैं जिनमें एक वेंटीलेटर पर था, जबकि अधिकांश छात्रों को उपचार के बाद आराम मिलने पर अस्पताल से डिसचार्ज किया जा चुका है।छात्रों के स्वास्थ्य को लेकर अस्पताल के डॉक्टरों से जानकारी ली और बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिये केन्द्रीय मंत्री सिंधिया सभी छात्रों के परिजनों से मुलाकात की है। यहां छात्रों ने बताया कि उन्होंने पनीर खाया तभी उनकी हालत बिगड़ने लगी थी। अस्पताल से बाहर निकलने के बाद केन्द्रीय मंत्री सिंधिया ने कहा कि महारानी लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारिरिक शिक्षण संस्थान में इतनी संख्या में वहां पढ़ने वाले छात्रों का फूड पॉइजनिंग का शिकार हो जाना, यह कोई साधारण बात नहीं है। मामले की पूरी जांच की जा रही है। दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। दोषी कोई भी हो बच नहीं सकेगा। सिंधिया ने कहा कि मैंने छात्रों और उनके परिजन से बातचीत कर उनका हाल चाल जाना है। वेंटीलेटर पर जो छात्र है उसकी भी हालत में सुधार है। ऐसे समझिए पूरा मामला शहर के रेसकोर्स रोड स्थित महारानी लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारिरिक शिक्षण संस्थान में तीन दिन पहले मंगलवार को उस समय हड़कंप मंच गया था, जब एक सैकड़ा से अधिक छात्र-छात्राएं फूड पॉइजनिंग का शिकार हो गए थे। पूछताछ में छात्रों ने बताया था कि सोमवार रात को उन्होंने डिनर में सादा चपाती के साथ उनको खाने में पनीर दिया गया था। पनीर ग्रेवी वाला था। पनीर खाने के बाद छात्र अपने अपने कमरे में सो गए थे, लेकिन सोमवार-दरमियानी रात से ही छात्रों को पेट में दर्द और दस्त की शिकायत होने लगी थी। इनमें कुछ छात्रों को उल्टियां होने लगीं थी। उस समय तो यह बात सामान्य लग रही थी, लेकिन मंगलवार सुबह होते-होते हालत बद से बदतर होने लगे थे। और करीब 100 से ज्यादा छात्र-छात्राएं बुरी तरह से उल्टी दस्त से ग्रसित होने लगे थे। इसके बाद छात्र-छात्राओं को बीमार होता देख महारानी लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारिरिक शिक्षण संस्थान के अधिकारी और कर्मचारियों ने तत्काल सभी को कैंपस में बने अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लेकिन अस्पताल में बच्चों की हालत में सुधार नहीं हुआ और उनकी हालत हर मिनट बिगड़ती जा रही थी, इसके बाद इन सभी छात्रों को गंभीर हालत में जयारोग्य के हजार बिस्तर के अस्पताल में मंगलवार रात को भर्ती कराया गया था। खाद्य विभाग चुका है सैंपल महारानी लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारिरिक शिक्षण संस्थान के 119 छात्रों के फूड पॉयजनिंग का शिकार होकर अस्पताल में भर्ती होने खबर मिलने के बाद कॉलेज पहुंचे खाद्य विभाग के अधिकारियों ने कार्यवाही करते हुए महारानी लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारिरिक शिक्षण संस्थान की किचन से पनीर, दूध, दही घी, तेल, आटा, चावल, सलाद, मसाले सहित एक दर्जन खाद्य सामग्री के सैंपल लेकर जांच के लिए भेज दिए थे। सैंपल की जांच आने पर यह स्पष्ट हो पाएगा कि किचन में बने खाद्य पदार्थ खाने से फूड पॉइजनिंग के शिकार होकर तबीयत बिगड़ी थी या नहीं । पुलिस कर रही है जांच बड़ी संख्या में छात्रों के फूड पॉयजनिंग का शिकार होकर अस्पताल में भर्ती होने की सूचना अस्पताल के डॉक्टरों और कॉलेज प्रबंधन ने पुलिस को दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल अस्पताल और कॉलेज पर पहुंच कर आवश्यक कार्यवाही करने के साथ ही मैस के प्रभारी अधिकारियों से मामले में जानकारी ली इसके बाद से मैस की किचिन स्टाफ, सुपरवाइजर व अन्य जिम्मेदार कर्मचारियों से पूछताछ कर रही है।

आशा किरण नवोदय सोसायटी में मिली वित्तीय गड़बड़ियां, बच्चों की देखरेख के मामले में कलेक्टर हुए सख्त, वित्तीय अनियमितता की जांच हेतु गठित किया दल

कटनी। महिला एवं बाल विकास के अंतर्गत संचालित बाल देख रेख संस्थाओं की जांच हेतु कलेक्टर अवि प्रसाद द्वारा गठित 5 सदस्यीय समिति द्वारा आशा किरण नवोदय सोसायटी कटनी की, की गई जांच में यहां संचालित बाल गृह में 4 लाख 20 हजार रूपये की भवन किराया मद में प्रथम दृष्टया अनियमितता पाई गई। कलेक्टर अवि प्रसाद ने आशा किरण नवोदय सोसायटी में इसके अलावा अन्य वित्तीय अनियमितताओं की आशंका के अनुक्रम मे वित्तीय अभिलेखों की विस्तृत जांच हेतु दो सदस्यीय जांच दल गठित किया है। इस जांच दल मे जिला कोषालय अधिकारी शैलेष गुप्ता और जिला संस्थागत वित्त अधिकारी दीपक सिंह शामिल है। कलेक्टर श्री प्रसाद ने जांच दल को महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आशा किरण नवोदय सोसायटी को प्रदाय मान्यता वर्ष 2010 से अब तक के वित्तीय अभिलेखों का परीक्षण कर 15 दिवस में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए है। 5 सदस्यीय जांच समिति कलेक्टर अवि प्रसाद ने आशा किरण नवोदय सोसायटी में अनियतिताओं की जांच हेतु 7 जून 2023 को जिला पंचायत सी.ई.ओ शिशिर गेमावत की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय जांच समिति गठित किया था। इसके सदस्यों मे जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास नयन सिंह, जिला संयोजक आदिम जाति कल्याण पूजा द्विवेदी, सदस्य बाल कल्याण समिति योगेश बघेल और प्रभारी विशेष किशोर पुलिस इकाई रेणु तिवारी को शामिल किया था। इस समिति ने आशा किरण सोसायटी सहित मिशन वात्सल्य के अंतर्गत संचालित अन्य बाल देखरेख संस्था लिटिल स्टार फाउण्डेशन कटनी बालिका गृह, शंकर सरस्वती शिक्षा समिति आसरा बालगृह एवं किलकारी शिशु गृह की जांच की थी।

स्वास्थ विभाग की बड़ी कार्यवाही, दवा दुकानों के खिलाफ

कटनी। औषधि निरीक्षक एवं औषधि अनुज्ञापन प्राधिकारी खाद्य एवं औषधि प्रशासन जिला कटनी द्वारा दवा दुकानों का आकस्मिक निरीक्षण किया गया। श्रीमती मनीषा धुर्वे औषधि अनुज्ञापन प्राधिकारी खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने बताया कि निरीक्षण के दौरान औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 की नियमावली 1945 के नियमों का उल्लंघन करने पर एन.के.जे स्थित मेसर्स लाल जी मेडिकल स्टोर्स प्रोपराइटर विनय कुमार पटेल सहित शर्मा मेडिकल स्टोर्स प्रोपराइटर रमेश शर्मा एवं मेसर्स अनन्या मेडिकल एवं जनरल स्टोर्स रोशन नगर प्रोपराइटर मनीष कुमार अहिरवार को प्रदत्त औषधि अनुज्ञप्तियां दो दिवस के लिए निलंबित की गई है। निलंबन के दौरान औषधियों का क्रय- विक्रय पूर्ण रूप से बंद रहेगा एवं दुकान बंद रहेगी। यदि देखा जाये तो कटनी जिले में अधिकांश मेडिकल स्टोर ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट का उल्लंघन कर रहे है अभी कुछ ही दिन पहले कटनी जिले के ही मेडिकल स्टोर के इलाज से मौत का मामला सामने आया था. अभी हाल ही में ही रीठी स्वास्थ केंद्र का मामला संज्ञान में आया था. देखते है मनीषा धुर्वे औषधि अनुज्ञापन प्राधिकारी खाद्य एवं औषधि प्रशासन अब क्या कारवाही करती है.

महाराष्ट्र नांदेड़ के अस्पताल में 24 लोगों की मौत के 24 घंटे बाद छत्रपति संभाजीनगर जिले के सरकारी अस्पताल में 2 शिशुओं सहित कम से कम 8 मरीजों की मौत की खबर

महाराष्ट्र, नांदेड़, नांदेड़ के सरकारी अस्पताल में 24 लोगों की मौत की घटना के बमुश्किल 24 घंटे बाद महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिले के एक सरकारी अस्पताल में 2 शिशुओं सहित कम से कम 8 मरीजों की मौत की खबर से हड़कंप मच गया है। एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने इसे राज्य सरकार की स्वास्थ्य प्रणाली पर “काला धब्बा” करार दिया है। छत्रपति संभाजीनगर (पूर्व-औरंगाबाद) जिले के एक सरकारी अस्पताल में मरने वाले 8 लोगों में 5 पुरुष हैं और उनकी मौत के कारणों का विवरण अभी तक स्पष्ट नहीं है।

मच्छरों के काटने से होने वाली बीमारी डेंगू के आठ मामले सामने आ चुके हैं, जबकि शहर में दो युवकों की मौत ।

जबलपुर, मौसम में बदलाव के साथ ही लोग मलेरिया, चिकनगुनिया, टायफाइड, पीलिया जैसी घातक बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। अब डेंगू भी डंक मारने लगा है। एडीज मच्छरों के काटने से होने वाली बीमारी डेंगू के घोषित तौर पर आठ मामले सामने आ चुके हैं, जबकि शहर में दो युवकों की मौत हो चुकी है। मृतकों के परिजन मौत का कारण डेंगू ही मान रहे हैं। वहीं जिला मलेरिया विभाग का दावा है कि अब तक डेंगू से किसी की मौत नहीं हुई है। जानलेवा डेंगू के मामले में लापरवाही भी बरती जा रही है। शासकीय व निजी अस्पतालों में रोजाना डेंगू के मरीज पहुंच रहे हैं। अघोषित तौर पर सितंबर माह में 14 मामले सामने आए हैं लेकिन अस्पताल प्रबंधन द्वारा डेंगू पाजीटिव मरीजों की जानकारी नहीं दी जा रही है।

बिलहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में नहीं मिल रही पानी की सुविधा जिम्मेदार मौन

कटनी, जिला कटनी के अंतर्गत बिलहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में 2 माह से पानी नहीं कोई जिम्मेदार अधिकारी नही दे रहा ध्यान। बिलहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में अगस्त माह में लगभग 100 प्रसूति महिलाओं की डिलीवरी हुई और ऐसी ही व्यवस्था मे सित, माह में 40 डिलीवरी हुई। जननी और उसके परिजन अपने मरीज के लिए स्वयं पानी अपने घरों से ला रहे हैं स्टाफ भी बूंद बूंद पानी को तरस रहा है किन्तु जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता सी एस डॉ यशवंत वर्मा जी कहते हैं टैंकर मंगवा लो और काम चलाओ या फिर कलेक्टर महोदय से शिकायत कर दो अब स्टाफ टैंकर मंगाकर काम चला रहा था उसका पैसा तक नहीं मिला। सरपंच ने हैंडपंप लगाने को कहा था वह आज तक नहीं लगा और इतनी अव्यवस्था के बावजूद स्टॉफ रिफर नहीं कर पा रहा है नहीं तो रिफर बनाने का चाबुक बेचारे छोटे कर्मचारियों पर चल जाएगा और उनकी उपलबधियां का श्रेय बड़े अधिकारियों को मिल जाता है।

प्रसूता के घर पहुंच कलेक्टर ने लिया स्वास्थ्य सुविधाओं का फीडबैक

मंडला, कलेक्टर डॉ. सलोनी सिडाना ने आज बिछिया विकासखंड के विभिन्न ग्रामों का भ्रमण किया। इस दौरान सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बिछिया से छुट्टी पाकर प्रसूता अपने नवजात शिशु के साथ जैसे ही घर पहुंची उसी समय कलेक्टर डॉ. सलोनी सिडाना भी उसके घर पहुंच गई और उससे स्वास्थ्य सुविधाओं के संबंध में फीडबैक प्राप्त किया। जानकारी के अनुसार ग्राम कोको निवासी मनीषा कुड़ापे प्रसव के उपरांत अपने नवजात शिशु के साथ संजीवनी 108 वाहन से अपने घर पहुंची। उसी समय कलेक्टर डॉ. सलोनी सिडाना भी भ्रमण पर थी उन्होंने एम्बूलेंस से प्रसूता को उतरते देख अपनी गाड़ी रोकी और प्रसूता मनीषा कुड़ापे के पास जाकर टीकाकरण, संजीवनी 108 वाहन सुविधा तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में प्रदाय की गई सुविधाओं के संबंध में जानकारी ली। मनीषा कुड़ापे ने एएनसी रजिस्ट्रेशन से लेकर प्रसव तक प्रदाय की गई सुविधाओं की सराहना की।

गलत इलाज से युवक की बिगड़ी तबीयत बड़वारा क्षेत्र का मामला

कटनी। बड़वारा क्षेत्र के एक युवक को सर्दी-खांसी का इलाज मेडिकल स्टोर संचालक से करवाना भारी पड़ गया। गलत उपचार की वजह से युवक की बोतली बंद हो गई और जीभ सूजकर बाहर आ गई है। युवक की हालत बिगड़ने पर परिजन गुरुवार दोपहर उसे बड़वारा शासकीय अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां जांच व परीक्षण के बाद डॉक्टरों ने उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया है। जानकारी के अनुसार बड़वारा के ग्राम भुड़सा निवासी नरेश चौधरी ने बताया कि उनका बेटा अजय चौधरी (21) पिछले कुछ दिनों से सर्दी-खांसी से पीड़ित था। गत दिवस मेडिकल स्टोर संचालक के यहां दवा लेने गए। उसे दवा देने की बजाय इंजेक्शन लगा दिया। इससे सर्दी-खांसी तो ठीक नहीं हुई बल्कि हाथ-पैर एवं पूरे बदन में दर्द बढ़ना शुरू हो गया। मेडिकल स्टोर संचालक को जानकारी दी तो उसने ठीक करने के लिए दो इंजेक्शन और लगाए। नरेश चौधरी ने बताया कि कुछ ही घंटों बाद बेटे की जीभ चलना ही बंद हो गई। हालत बिगड़ने पर उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बड़वारा में भर्ती कराया। यहां डॉक्टरों ने जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। 24 घंटे से नहीं खाया खाना, सांस लेने में भी परेशानी बड़वारा अस्पताल में जब डॉक्टरों ने उपचार शुरू किया तो यह सामने आया कि युवक जीभ बाहर निकलने व दर्द की वजह से पिछले 24 घंटे से खाना नहीं खा पाया है। गलत उपचार की वजह से उसे सांस लेने में भी परेशानी हो रही है। इनका कहना है बड़वारा के बीएमओ डॉ अनिल झामनानी ने इस संबंध में बातचीत करते हुए कहा कि गलत उपचार की वजह से युवक की जीव अकड़ गई है। प्राथमिक उपचार के बाद उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया है। परिजनों द्वारा मेडिकल स्टोर संचालक पर गलत उपचार करने का आरोप लगाया गया है। मामले की जांच की जा रही है। दोष साबित होने पर कार्रवाई की जाएगी।

निगम सफाई मित्रों अधिकारी-कर्मचारियों के लिये केसीएस विद्यालय में 5 अक्टूबर को मेगा स्वास्थ्य शिविर का आयोजन

कटनी। नगर पालिक निगम द्बारा नगर निगम के सफाई मित्रों अधिकारी कर्मचारियों के लिये चिकित्सा के क्षेत्र में मेगा स्वास्थ्य परीक्षण शिविर का आयोजन किया जा रहा है।।आगामी 5अक्टूबर को शहर के बीचों बीच स्थित केसीएस विद्यालय में विशाल चिकित्सा शिविर का आयोजन किया जायेगा।शिविर में शहर सहित अन्य शहर से रोग विशेषज्ञ कुशल चिकित्सकों द्बारा पीडित जनों का उपचार किया जायेगा। महापौर श्रीमती प्रीति संजीव सूरी द्वारा स्वास्थ्य शिविर के लिये आज केसीएस स्कूल का निरीक्षण किया गया।इस मौके पर एम आईसी सदस्य शिब्बू साहू रमेश सोनी डीसी पवन कुमार अहिरवार नागेद पटेल आदेश जैन तेज भान आदि की उपस्थिति रही।

महापौर का आपदा में अवसर, शहर में गंदगी का साम्राज्य, सफाई कर्मचारी धरने पर

कटनी । नगर निगम कटनी के सफाई कर्मचारी धरने पर बैठे शहर मे चारो तरफ पसरी गंदगी बाज़ार बस्ती गलिया चौराहा चारो तरफ लगा गंदी का अंबार नगर निगम सफाई कर्मचारीयो के द्वारा कटनी महापौर को 135 सफाई कर्मचारियों की स्थाई नियुक्ति हेतु आवेदन दिया गया था, पर महापौर ने खुद हाँथ में झाड़ू उठा लिया और सफाई के नाम पर ढोंग रचते नज़र आये. कई मीडिया कर्मियों ने महापौर को अपनी अखबार में सुर्ख़ियों में रख दिया, नेता सिर्फ एक या दो दिन ही सफाई के नाम पर ढोंग रचते नज़र आते है, अब देखते है की महापौर कितने दिन कहाँ कहाँ सफाई करते नज़र आती है यह देखने योग्य होगा. नगर निगम के द्वारा मनमाने तारिके से कार्यवाही कि जा रही है| मांग पूरी नहीं होने पर सफ़ाई कर्मचारी बैठे अनिश्चित कालीन हड़ताल पर जिस से शहर में जगह जगह लगा गंदगी का अंबार सफ़ाई कर्मचारियों ने बताया जब तक हमारी मांगे पूरी नहीं हो जाती हमारी हडताल जारी रहेगी| अगर सफाई कर्मचारी इसी तरह हड़ताल पर बैठे रहे सारे शहर में गंदी का अंबार लग जाएगा | जिस्से आम जनता का जीना दुश्वार हो रहा है,|

2 स्वास्थ्य कर्मचारी व उनके परिजनों के खिलाफ धारा 420 का मामला दर्ज

रायसेन, स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी हेंमत कुमार महोब, पूनम सिरोही, ओम प्रकाश महोबे, प्रीतम सिंह महोबे, साजिद अली, कैलाशनाथ, शहीद कुरैशी, अरविंद कुमार, विजय साहू, रामकुमार, ज्योति तोमर, महेश बाबू के खिलाफ धारा 420 आईपीसी के तहत मामला दर्ज कर लिया है। रायसेन के स्वास्थ्य विभाग में अभी कुछ ही दिन पहले भविष्य निधि में घोटाले का मामला सामने आया था। कोषालय की जांच के बाद, थाना कोतवाली पुलिस ने नोडल अधिकारी की रिपोर्ट पर 12 स्वास्थ्य कर्मचारी व उनके परिजनों के खिलाफ धारा 420 का मामला दर्ज कर लिया है। 1 करोड़ 92 लाख 32 हजार 727 रूपए के घोटाले की रकम है

स्वास्थ्य महकमे मे मचा हड़कंप दी हिदायत लापरवाही पडी भारी चिकित्सा अधिकारी सहित नर्सिंग आफिसर को जारी नोटिस

कटनी । प्रसव के मामलों की नियमित निगरानी और समीक्षा के बाद दो स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा बरती गई लापरवाही पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ आर.के.अठया को संबंधित स्वास्थ्य कर्मियों से स्पष्टीकरण तलब करनें के निेर्देश दिए है। कलेक्टर श्री प्रसाद के निर्देश के बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ अठया नें पी.एच.सी कन्हवारा के चिकित्सा अधिकारी सहित नर्सिंग आफिसर को कारण बताओ नोटिस जारी कर दो दिवस में अपना स्पटीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए है। सीएमएचओ डॉ अठया द्वारा जारी नोटिस में पी.एच.सी कन्हवारा ब्लॉक कन्हवारा मे पदस्थ चिकित्सा अधिकारी डॉ शैलेन्द्र पटेल एवं नर्सिंग आफिसर मनीषा बर्मन द्वारा जोबीकला निवासी गर्भवती महिलाओं के हाईरिस्क में नहीं होनें के बाद भी पीएनसी के दौरान अनावश्यक रूप से जिला चिकित्सालय प्रसव हेतु रेफर किये जाना सही नहीं मानते हुए कारण बताओ नोटिस जारी कर उपरोक्त संबंध में अपना स्पष्टीकरण दो दिवस में प्रस्तुत करनें हेतु निर्देशित किया है। विदित हो कि कलेक्टर अवि प्रसाद द्वारा जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार तथा मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने सहित प्रसव के रेफरल प्रकरणों की निरन्तर समीक्षा की जा रही है। विगत दिवस आयोजित स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान कलेक्टर अवि प्रसाद ने स्वास्थ्य महकमें को दो टूक हिदायत दी थी कि प्रसव के रेफरल प्रकरणों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी। गर्भवती महिला की ए.एन.सी के दौरान निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत सभी जांचें करने तथा इन सब मामलों में कोताही बरतने पर कड़ी कार्यवाही किये जानें के निर्देश दे रखे है।

शिविर में 182 नेत्र रोगियों की जांच की गई

ग्यारसपुर,जिला विदिशा, ग्यारसपुर के शासकीय चिकित्सालय में सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट आनंदपुर के द्वारा नेत्र शिविर का किया गया आयोजन जिसमें नेत्र चिकित्सक डॉ अरुण कुमार कुर्मी नेत्र सहायक सुनील कुमार जैन ने 182 मरीज के नेत्र परीक्षण कर नेत्र रोगों से बचाव के तरीके बताएं इस अवसर पर स्वर्गीय नारायण सेवा संस्था के सुनील पिंगले ने कहा की स्वर्गीय रणछोड़ दास जी गुरु महाराज के आशीर्वाद से वर्ष भर में 45000 से अधिक ऑपरेशन नेत्र रोगियों के किया है । जिसमें 40000 ऑपरेशन निशुल्क किये गए हैं पीड़ित मानवता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है कैंप में मरीज के शुगर एवं बीपी की जांच का कार्य किया इस अवसर पर 72 मरीजों को निशुल्क दवाइयां प्रदान की गई 23 मरीजों को चश्मा के नंबर दिए 53 मरीजों को मोतियाबिंद चिन्नित किया गया 24 मरीजों को चश्मा दिए गए इस अवसर पर कैंप संचालक लखन शर्मा अंकित बघेल रवि धाकड़ मिलन बघेल एवं गब्बर सिंह भी मौजूद रहे।

घड़ियाल केन्द्र पहुंचे प्रशिक्षु आई.एफ.एस.।

ग्वालियर/मुरैना। प्रशिक्षणार्थी आई.एफ.एस. मुरैना के देवरी स्थित घड़ियाल केंद्र का विजिट करने पहुंचे। जहां प्रशिक्षु अधिकारियों ने घडियालों के बारे में जानकारी प्राप्त की। भारतीय वन सेवा के इन 48 प्रशिक्षणार्थियों के साथ उनके प्रशिक्षक एवं मुरैना बन विभाग के वन मंडल अधिकारी सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे। बता दें कि, भारतीय वन सेवा के यह सभी प्रशिक्षु अपने प्रोवेशन पीरियड के दौरान पूरे देश में भ्रमण कर रहे हैं। मध्य भारत भ्रमण के दौरान इनका काफिला मुरैना जिले से जब निकला तो देवरी स्थित घड़ियाल केंद्र पर पहुंचा। इस मौके पर उनके साथ मुरैना के वन मंडल अधिकारी स्वरूप दीक्षित, एसडीओ प्रतीक दुबे एवं अन्य अधिकारी मुख्य रूप से मौजूद रहे। प्रशिक्षुओं ने घड़ियाल केंद्र पर मौजूद सभी घड़ियालों का बारीकी से अवलोकन किया तथा उनके बारे में जानकारी एकत्रित की। उन्होंने वहां मौजूद ट्रेनर से इस बात की भी जानकारी ली कि अभी वर्तमान में चंबल नदी में कितने घड़ियाल मौजूद हैं और हर साल कितने अंडे देते हैं तथा उन अंडों से कितने घड़ियाल निकलते हैं। कुछ प्रशिक्षु इन घड़ियालों पर शोध करने के भी इच्छुक दिखाई दिए।

ग्वालियर जू में बाघ शावक की मौत।

ग्वालियर। शहर के गांधी प्राणी उद्यान में पांच माह की मादा बाघ शावक की अचानक मौत का मामला सामने आया है।गुरुवार देर रात चिड़ियाघर में अचानक तबियत बिगड़ने के कुछ देर बाद ही शावक ने दम तोड़ दिया था। जिसके बाद शुक्रवार दोपहर सेंट्रल “जू’ अथॉरिटी के नियम अनुसार पोस्टमार्टम के साथ ही प्रक्रिया को फॉलो करते हुए शावक पूरे विधि विधान के साथ दाह संस्कार किया गया। प्राथमिक रिपोर्ट में मौत की वजह कार्डियक अरेस्ट बताई गई है। विस्तार से जांच के लिए शावक के ऑर्गन्स जबलपुर लैब भेजे गए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्वालियर के फूलबाग स्थित गांधी प्राणी उद्यान चिड़ियाघर में मादा बाघ शावक की गुरुवार रात अचानक पिंजरे में तबीयत खराब हो गई थी, जिसकी सूचना कर्मचारियों द्वारा दी प्राणी उद्यान के डॉ. उपेन्द्र यादव को दी। इस सूचना के मिलते ही मौके पर पहुंचे डॉक्टर ने केज में जाकर शावक को चेक किया लेकिन बहुत देर हो गई थी और शावक ने दम तोड़ दिया था। जिसके बाद डी.एफ.ओ. अंकित पांडेय की मौजूदगी में शावक का पोस्टमार्टम किया गया। प्राथमिक रिपोर्ट में जानकारी सामने आई है कि शावक की मौत कार्डियक अरेस्ट की वजह से हुई है। सेंट्रल “जू’ अथॉरिटी के नियमों के तहत शावक का चिड़िया घर में ही दाह संस्कार किया गया, मौत की मुख्य वजह सामने आ सके इसके लिए डीएफओ की मौजूदगी में शावक के सभी अंगों की जांच करने के बाद उन्हें जबलपुर लैब भेजा गया है। लैब रिपोर्ट आने पर ही शावक की मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा। इस मामले में डी.एफ.ओ. अंकित पांडेय का कहना है कि हाल ही में कुछ मामले ऐसे सामने आए है, जहां इंफेक्शन के चलते शावको की मौत हो चुकी है। ऐसे में शावकों के वेक्सीनेशन का प्रॉपर ध्यान रखा जा रहा है। चिड़ियाघर में अब कुल 9 बाघ बचे है। जिनमे 4 शावक शामिल हैं। गौरतलब है कि ग्वालियर के चिड़ियाघर में 20 अप्रैल 2023 को मादा बाघ मीरा ने तीन शावकों को जन्म दिया था। जिनमें एक सफेद और दो पीले शावक शामिल थे। मृतक शावक के पिता का नाम लव है, 45 दिन के लंबे आइसोलेशन पीरियड के बाद बाघ के शावकों को बाड़े में रिलीज किया गया था। तभी से हर रोज इन सभी शावकों का रुटीन चेकअप के साथ ही प्रोसीजर के तहत डाइट भी दी जा रही है, लेकिन गुरुवार देर रात अचानक पीली मादा टाइगर शावक के मुँह से झाग निकला और देखते ही देखते उसने दम तोड़ दिया था। फिलहाल डीएफओ ने चिड़ियाघर का निरीक्षण करने के बाद व्यवस्थाओं को लेकर आवश्यक दिशा निर्देश भी प्रबंधन को दिए हैं।

डेंगू ने जड़ा दोहरा शतक।

ग्वालियर। शहर में डेंगू ने दोहरा शतक पूरा कर लिया है। शुक्रवार सुबह तक ग्वालियर में डेंगू के मरीजों की संख्या दो सैंकड़ा के पार हो चुकी है, जबकि डेंगू मलेरिया से एक बच्ची की मौत भी हो चुकी है। इसके बाद भी स्वास्थ विभाग, नगर निगम, जिला प्रशासन अलर्ट पॉजिशन में नहीं आया है। यहां बताना जरूरी है कि डेंगू के डेंजर जोन में सीमावर्ती मोहल्ले नहीं बल्कि हरिशंकरपुरम, माधव नगर, विवेक विहार, विजया नगर आदि शहर की पॉश कॉलोनियों है। यहां पढ़े लिखे और संभ्रांत लोग रहते हैं, लेकिन यहीं डेंगू का लार्वा पनप रहा है। ग्वालियर में हर दिन के साथ डेंगू जानलेवा होता जा रहा है। गुरुवार रात को ग्वालियर के जेएएच बायोलॉजिकल लैब, जिला अस्पताल में आई 149 संदिग्ध की रिपोर्ट में 24 को डेंगू होने की पुष्टि हुई है। जिसमें से 10 ग्वालियर के मरीज हैं और शेष 14 आसपास के शहरों के हैं। अभी तक ग्वालियर शहर के मरीजों की संख्या 192 थी, लेकिन यह दस नाए केस मिलने के बाद कुल डेंगू मरीज की संख्या 202 हो गई है। शहर में डेंगू का प्रकोप दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। अभी तक शहर में डीडी नगर ही डेंजर जोन में गिना जाता था। इस बार माधव नगर, विवेक बिहार, विजया नगर, हरिशंकरपुरम का वार्ड 58 और सिकंदर कंपू, गुढ़ा गुढ़ी का नाका का वार्ड 52 डेंजर जोन में आ गए हैं। वार्ड 58 में तो डेंगू से 8 साल की बच्ची भावेशा की मौत भी हो चुकी है।शहर में डेंगू फैलने का प्रमुख कारण निर्माणाधीन मकानों में भरा पानी है। इसके अलावा जानवरों को पानी पिलाने के लिए रखी गई टंकियों में लार्वा पनप रहे हैं। मलेरिया विभाग की टीम को इनमें ही ज्यादा लार्वा मिल रहे हैं। शहर के 66 वार्डों के लिए मलेरिया विभाग के पास सिर्फ 23 कर्मचारी ही हैं। इनको डेंगू पीड़ित मरीजों के घर के आसपास सर्वे कर दवाओं का छिड़काव करना है। इतने कम कर्मचारियों से डेंगू पर कैसे कंट्रोल हो पाएगा यह बड़ा सवाल है। सीएमएचओ डॉ. आरके राजौरिया का कहना है कि जो कर्मचारी अटैच हैं उन्हें वापस भेजा जाएगा। जिससे डेंगू की रोकथाम के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकें। शहर के अंदर मच्छर जनित बीमारियां रफ्तार पकड़ रही हैं, लेकिन कार्रवाई में रफ्तार कम ही दिख रही है। अभी तक निगम ने सिर्फ 10 से 15 लोगों के घर डेंगू का लार्वा मिलने पर जुर्माना किया है। हालांकि निगम की फोगिंग मशीनें मैदान से गायब हैं। अब निगम खाली प्लॉट मालिकों पर ज्यादा सख्ती करने जा रहा है। उन पर जुर्माना किया जाएगा। निगम के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. वैभव श्रीवास्तव ने बताया कि फोगिंग शहर में कराई जा रही है। साथ भी पिछले दिनों भूखंड मालिकों सहित अन्य लोगों के घरों पर लार्वा मिलने पर जुर्माने की कार्रवाई की गई है।

ज़िला अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधा में लापरवाही के कारण एक प्रसूता की उपचार के दौरान मौत

बुरहानपुर। ज़िला चिकित्सालय बुरहानपुर में एक प्रसूता की मौत की खबर लगते ही ज़िला कांग्रेस कमेटी बुरहानपुर के कार्यवाहक ज़िला अध्यक्ष एवं यूथ आईकॉन हर्षित सिंह ठाकुर सीधे अस्पताल पहुंचे और परिजनों से चर्चा की। अपने जारी बयान में उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर लाख दावे करें लेकिन ज़मीनी हकीक़त और कुछ ही बयां कर रही है। बुरहानपुर के ज़िला अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधा में लापरवाही के कारण एक प्रसूता की उपचार के दौरान मौत हो गई। परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाया। सूचना लगते ही कांग्रेस के कार्यवाहक ज़िला अध्यक्ष हर्षित सिंह ठाकुर अस्पताल पहुंचे और उन्होंने परिजनों से मुलाक़ात कर डॉक्टरो से चर्चा की और इसकी जानकारी बुरहानपुर कलेक्टर सुश्री भव्या मित्तल को देेते हुए लापरवाही बरतने वाले डॉक्टरो पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। कांग्रेस के कार्यवाहक ज़िला अध्यक्ष हर्षित ठाकुर ने आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा सरकार द्वारा ज़िला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी को पूरा नहीं किया जा रहा है। आए दिन ऐनेस्थेसिया के डॉक्टर की कमी के कारण मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है लेकिन सरकार द्वारा ऐसे डॉक्टरों की भर्ती नहीं की जा रही है जिसका खामियाज़ा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। आज आजाद नगर क्षेत्र में रहने वाली प्रसूता मुस्कान की भी लापरवाही के चलते मौत हो गई। ऐसी लापरवाही बरतने वालों पर कड़ी कार्रवाई हों, ऐसी मांग उनके द्वारा कलेक्टर से की गई है।

CMHO ने एडवाइजरी जारी करते हुए लोगों को मच्छर का लार्वा नहीं पनपने, नियमित सफाई जैसे महत्वपूर्ण कार्य में सहयोग करने की अपील की है।

ग्वालियर, डेंगू से जिले में पहली मौत भी दर्ज हो गई है , 8 साल की मासूम की। विवेक विहार में रहने वाले पिता की बेटी को बुखार आया, डेंगू की पुष्टि भी हुई थी, ग्वालियर से दिल्ली रेफर की एक मासूम की मौत ने चिंताएं बढ़ा दी हैं, शहर में डेंगू के मरीजों की रोज बढती संख्या भी परेशानी बन रही है, सरकारी अस्पतालों से लेकर निजी नर्सिंग होम्स की ओपीडी मरीजों की भीड़ हैं, CMHO ने एडवाइजरी जारी करते हुए लोगों को मच्छर का लार्वा नहीं पनपने के लिए पानी जमा नहीं होने और कूलर की नियमित सफाई जैसे महत्वपूर्ण कार्य में सहयोग करने की अपील की है।

हाथों में सलाइन की बोतल, खड़े-खड़े इलाज फूड पॉइजनिंग का शिकार हुए बच्चों को नहीं मिला बेड

मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में एकलव्य आदिवासी गुरुकुल छात्रावास विद्यालय में 100 बच्चे फूड पॉइजनिंग का शिकार हो गए। बच्चों को आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया, जहां उनके हाथ में सलाइन की बोतल थमाकर खड़े-खड़े ही इलाज शुरू कर दिया गया। जबलपुर | मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के मांडवा बस्ती में संचालित एकलव्य आदिवासी गुरुकुल छात्रावास विद्यालय के सैकड़ों बच्चों की जिंदगी खतरे में पड़ गई। दरअसल, सोमवार शाम छात्रावास में रहने वाले करीब 460 बच्चों को खाने में कटहल की सब्जी दी गई थी। सब्जी खाने के बाद एक के बाद एक बच्चों की हालत बिगड़ती चली गई। बच्चों को खून की उल्टियां तक होने लगीं। बच्चों की हालत बिगड़ती देख छात्रावास में हड़कंप मच गया। छात्रावास प्रबंधन ने आनन-फानन में उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती करा, जहां डॉक्टरों की निगरानी में बच्चों का इलाज चल रहा है। बताया जा रहा है कि छात्रावास के करीब 100 बच्चे फूड पॉइजनिंग के शिकार हुए हैं, जिनमें से एक दर्जन बच्चों की हालत गंभीर बताई जा रही है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, खबर मिलने के बाद जब वे छात्रावास पहुंचे तो वहां के जिम्मेदार पूरे मामले में लीपापोती की कोशिशों में जुटे रहे। सैकड़ों की तादाद में बच्चों की हालत बिगड़ने के बाद जो तस्वीर सामने आई, उसे देखकर कोई भी चौंक सकता है। लोग फूड पॉइजनिंग के शिकार हुए बच्चे हाथों में दवा की बोतलें लेकर छात्रावास से अस्पताल पहुंचे, जहां उनका इलाज चल रहा है। छात्रावास में 460 बच्चे रहते हैं- क्षेत्रीय स्वास्थ्य संचालक वहीं पूरे मामले में क्षेत्रीय स्वास्थ्य संचालक संजय मिश्रा का कहना है कि यह फूड प्वाइजनिंग ही है, जिसकी वजह से सभी बच्चों की तबीयत बिगड़ी है। बताया जा रहा है कि एकलव्य आदिवासी छात्रावास में तकरीबन 460 बच्चे रहते हैं। पहली शिफ्ट में 5वीं से लेकर 8वीं तक के बच्चों को खाना खिलाया जाता है। इसी के तहत आज भी तकरीबन 120 बच्चों ने एक साथ खाना खाया. खाने में बच्चों को दाल-चावल, कटहल की सब्जी और रोटियां दी गई थीं। बच्चों को हुई फूड पॉइजनिंग हालांकि खाना खाते ही कुछ बच्चों ने उल्टियां शुरू कर दीं और पेट दर्द की शिकायत की, जिसके बाद छात्रावास के स्टाफ ने तत्काल बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि सभी बच्चों की हालत बेहतर है। बच्चों को फूड पॉइजनिंग ही हुई है। बच्चों का इलाज जारी है। कुछ बच्चों को मेडिकल अस्पताल भी रेफर किया जा रहा है। स्वास्थ्य अधिकारी का कहना है कि छात्रावास से खाने का सैंपल ले लिया गया है और उसकी जांच खाद्य विभाग से कराई जाएगी। अगल-अलग अस्पतालों में किए गए भर्ती वहीं अभिभावकों का कहना है कि छात्रावास में अक्सर बच्चों को खराब खाना ही दिया जाता है, जिसकी शिकायत पहले भी की जा चुकी है, लेकिन छात्रावास के कर्मचारियों ने इस पर ध्यान नहीं दिया। नतीजा आज कई बच्चों की जिंदगी खतरे में पड़ गई। बीमार हुए इन बच्चों में से जबलपुर के विक्टोरिया अस्पताल में करीब 40 बच्चों को भर्ती कराया गया है तो वहीं नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल अस्पताल में 45 बच्चों को भर्ती कराया गया है। इसके साथ जबलपुर के निजी अस्पतालों में भी अलग-अलग इन बच्चों को भर्ती कराया जा रहा है। खराब खाने खाने से बच्चों की तबीयत बिगड़ी वहीं बच्चों के परिजनों का आरोप है कि इससे पहले भी कई बार छात्रावास में खराब खाना दिया जाता है, जिसकी शिकायत भी कई बार की गई है, लेकिन जिम्मेदारों पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई और यही वजह है कि आज खराब खाने की वजह से बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। फिलहाल मेडिकल अस्पताल के बाहर और विक्टोरिया अस्पताल में परिजनों की भारी भीड़ लगी हुई है तो वहीं परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है।

कटनी, लार्वा पाये जाने पर नगर निगम द्वारा काटा जाएगा चालान

कटनी, लार्वा पाये जाने पर नगर निगम द्वारा काटा जाएगा चालान कटनी :- स्वास्थ्य विभाग द्वारा विगत दिवस एक दिवसीय ट्रेनिंग शहर के 45 वार्ड दरोगाओ को मच्छर के लार्वा का सर्वे करने और लार्वा पाये जाने पर चालान काटने हेतु दिये निर्देश जिसमें श्रीमती शालिनी नामदेव जिला मलेरिया अधिकारी एवं पी के महार प्रभारी सहायक मलेरिया अधिकारी के द्वारा 45 वार्ड दरोगाओ को मलेरिया, डेंगू , चिकन गुनिया, फाई लेरिया की एक दिवसीय ट्रेनिंग ऑडिटोरियम बस स्टेंड कटनी में दी गई संजय चौदाह जयभान सिह नितिन बाल्मीकि अजित विश्वकर्मा वन्स गोपाल बेगा कौशल कुंडे संदीप यादव आदि उपस्थित रहे

नीमच. आबकारी विभाग ने बरामद की 200 लीटर कच्ची शराब

नीमच जिले में अवैध मदिरा निर्माण व अवैध शराब के विरुद्ध विशेष अभियान चलाया जा रहा है जिला कलेक्टर दिनेश जैन एवं जिला आबकारी आर एन व्यास के निर्देशन पर -उप निरीक्षक कमलेश सोलंकी ने बताया कि टीम के साथ ग्राम बरखेड़ा और ग्राम भांड्या में दबिश दी। इस दौरान 200 लीटर अवैध कच्ची शराब बरामद की गई और 1500 किलो लहान मौके पर नष्ट किया गया। अवैध कारोबार में संलिप्त एक अभियुक्त को मौके से गिरफ्तार किया गया

डीजीसीआई के परामर्श के बाद एबॉट इंडिया ने ‘डाइजीन सीरप’ के बैच वापस लिए

डीजीसीआई के परामर्श के बाद एबॉट इंडिया ने ‘डाइजीन सीरप’ के बैच वापस लिए After the advice of the DGCI, Abbott India has recalled batches of ‘Digene Syrup.’ ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने बीते माह चर्चित एंटासिड ‘डाइजीन’ सीरप के संबंध में शिकायत मिलने के बाद इसकी जांच की थी. इसने केमिस्ट और थोक विक्रेताओं से भी इसकी बिक्री बंद करने को कहा था. सोर्स- द वायर

ग्वालियर में बढ़ा डेंगू का खतरा, 10 साल के बच्चे सहित 17 मरीज़ों में डेंगू की हुई पुष्टि

ग्वालियर में बढ़ा डेंगू का खतरा, 10 साल के बच्चे सहित 17 मरीज़ों में डेंगू की हुई पुष्टि

रायसेन में अस्पताल की छत गिरने से एक नर्स के घायल

32 वर्षीय नर्सिंग अधिकारी ममता बैथेरी को चोट आई जब सरकारी अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर की छत का एक हिस्सा उसके सिर पर गिरा, मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में, यह जानकारी आधिकारिक रूप से जानकारी देने वाले विनोद सिंह परमार ने बताया। घटना बुधवार को घटी जब नर्सिंग अधिकारी ममता बैथेरी जिला अस्पताल में एक ऑपरेशन की तैयारियों में थीं। उन्हें सिर में चोट आई और उन्हें खुद जिला अस्पताल में भर्ती किया गया। उनकी (सीटी) स्कैन की गई। उन्हें खतरे से बाहर और उनकी स्थिति स्थिर है जिला अस्पताल के अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को पत्र लिखा हैं ताकि अस्पताल के नए भवन को उन्हें सौंपा जा सके और ऑपरेशन थिएटर को वहाँ स्थानांतरित किया जा सके। पीडब्ल्यूडी के परियोजना कार्यान्वयन इकाई डिवीजनल इंजीनियर सुरेश कुमार मिश्रा ने कहा कि नये भवन को अस्पताल को 10 दिनों के भीतर हस्तांतरित कर दिया जाएगा

बच्चों के नाश्ते में मरी छिपकली निकलने के बाद करीब एक दर्जन बच्चे बीमार

कटनी जिले की रंगनाथ नगर वेद पाठशाला में बच्चों के नाश्ते में मरी छिपकली निकलने के बाद करीब एक दर्जन बच्चे बीमार हो गए। यहां वेद पुराण की पढ़ाई करने वाले छात्रों के खाने में छिपकली निकली। जिसके बाद 13 छात्र उल्टी और सिर दर्द की समस्या के चलते जिला अस्पताल में भर्ती किए गए हैं। बता दें कि इस वेद पाठशाला में जिले के अलावा बाहर से भी आकर भी बहुत से बच्चे पढ़ाई करते हैं। कलेक्टर अवि प्रसाद ने इस पूरे मामले में संज्ञान लेते हुए नोटिस जारी किया है।

पीएम मोदी के बर्थडे पर बना कीर्तिमान, महज 9 घंटे में 2 करोड़ लोगों को वैक्सीन लगी

नई दिल्ली। भारत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर शुक्रवार को महज 9घंटे में ही कोरोना वायरस के खिलाफ 2 करोड़ से ज्यादा लोगों को वैक्सीन लगाने का रिकॉर्ड बनाया है। अभी भी वैक्सीनेशन जारी है। यानी यह आंकड़ा अभी और ऊपर जाएगा। इससे पहले दोपहर डेढ़ बजे तक ही एक करोड़ से ज्‍यादा डोज लगाए जा चुके थे। वैक्‍सीनेशन प्रोग्राम की रफ्तार का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि हर सेकेंड 527 से ज्‍यादा डोज लगाए जा रहे हैं। हर घंटे 19 लाख से ज्‍यादा डोज दिए जा रहे हैं। राज्यों को 77.77 करोड़ से ज्‍यादा डोज मुहैया कराए गए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वैक्सीन के 77.77 करोड़ से ज्‍यादा डोज उपलब्ध कराए गए है। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के पास अभी वैक्सीन के 6.17 करोड़ से ज्‍यादा डोज उपलब्ध हैं। चौथे दिन एक करोड़ से ज्यादा वैक्सीन डोज लगे इससे पहले 27 अगस्त, 31 अगस्त और 6 सितंबर को देश में एक करोड़ से ज्यादा वैक्सीन डोज लगाए गए थे। स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने गुरुवार को आह्वान किया था कि देश में वैक्सीनेशन ड्राइव को रफ्तार देनी चाहिए। यह प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन का सबसे अच्छा तोहफा होगा। भाजपा ने इस मौके पर देशभर में अपनी यूनिट्स को निर्देश दिया था कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को वैक्सीन का डोज लगाया जाए। 20 दिनों का सेवा और समर्पण अभियान BJP अध्यक्ष जेपी नड्डा ने PM मोदी के जन्मदिन पर 20 दिनों का सेवा और समर्पण अभियान शुरू किया है, जो 7 अक्टूबर तक चलेगा। पार्टी इस दौरान मोदी के सार्वजनिक जीवन में दो दशक पूरा करने का भी जश्न मनाएगी। इसमें वह वक्‍त भी शामिल है, जिस दौरान मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे।

MP में कोरोना के बाद वायरल फीवर-डेंगू का कहर

एमपी में कोरोना के बाद अब डेंगू और वायरल फीवर का प्रकोप बढ़ता जा रहा है. बीमारियों ने बच्चों को अपनी चपेट में ले लिया है. भोपाल/जबलपुर. कोरोना की तीसरी लहर (Corona Third Wave) की चेतावनी के बीच मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में वायरल फीवर और डेंगू कहर बरपा रहे है. राजधानी भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर सहित कई जगहों पर सैकड़ों की संख्या में लोग अस्पतालों में भर्ती हैं. इन मरीजों में बच्चों की संख्या ज्यादा है. भोपाल में तो बीमारी होने वाले बच्चों की संख्या ही 355 से ज्यादा है. जबलपुर में मरीजों का आंकड़ा 500 के आसपास छू रहा है. ग्वालियर में मरीजों की संख्या 40 से ज्यादा हो गई है. स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, भोपाल में वायरल फीवर बच्चों पर सीधा असर कर रहा है. राजधानी भोपाल के निजी व सरकारी अस्पतालों में 355 से ज्यादा बच्चे वायरल फीवर से पीड़ित है. यहां 50 से 60 बच्चे रोज वायरल फीवर का शिकार हो रहे हैं. इनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. ओपीडी की संख्या भी सरकारी-निजी अस्पतालों में 60% बढ़ा दी गई है. अस्पतालों में एक- एक बेड पर से दो से तीन बच्चों को भर्ती किया गया है. करीब-करीब सभी अस्पताल बच्चों से भर चुके हैं. प्रदेश में डेंगू चिकनगुनिया और स्क्रब टायफस के मरीज भी तेजी से बढ़ रहे हैं. बुधवार को डेंगू के 11, तो चिकनगुनिया के 7 मरीज मिले. शहर में डेंगू के अब तक 151, चिकनगुनिया के 47 मरीज सामने आए हैं. 9068 घरों में डेंगू का लार्वा मिला है. मलेरिया विभाग और नगर निगम की टीमें घर घर-घर जाकर सर्वे कर लार्वा नष्ट कर रही हैं. जबलपुर में बच्चों की हालत नाजुक जबलपुर में डेंगू पीड़ित मरीजों की संख्या का आंकड़ा 500 के ऊपर है. हालांकि, सरकारी आंकड़ों में मात्र 333 मरीज ही हैं. शहर के बड़े अस्पतालों में से एक विक्टोरिया अस्पताल के चाइल्ड वार्ड में एक बेड पर 2 से 3 बच्चे तक भर्ती हैं. 24 बेड की व्यवस्था वाले चाइल्ड वार्ड में 55 से 60 बच्चे एडमिट हैं. इसके बावजूद जगह कम पड़ रही है. इस जिला अस्पताल के अलावा निजी और अन्य बड़े सरकारी अस्पतालों में भी हालात भयावह है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जिले में अभी तक 18 साल तक उम्र के डेंगू के 124 मरीज मिले हैं. वहीं, संक्रामक बीमारियों से पीड़ित बच्चे रोजाना 100 की संख्या में सामने आ रहे हैं. औसत से कम बारिश बनी वजह इस मामले को लेकर डॉक्टरों का कहना है कि इस बार औसत से कम बारिश के चलते नमी बढ़ गई है. यही वजह है कि लार्वा और संक्रामक बीमारियां पैर पसार रही हैं. स्वास्थ्य महकमा नगर निगम के साथ मिलकर जन जागरूकता फैला रहा है. जिले में लार्वा नष्ट करने का काम भी किया जा रहा है. गौरतलब है कि, गरीब परिजन मासूम बच्चों के लिए ब्लड और प्लेटलेट की व्यवस्था में जूझ रहे हैं. वायरल फीवर के चलते उनकी हालत नाजुक बनी हुई है. दूसरी ओर, ग्वालियर में डेंगू का प्रकोप बढ़ रहा है. यहां पिछले 24 घंटे में डेंगू के 10 नए मरीज मिले. जिले में डेंगू मरीजों की संख्या 43 हो गई है. इनमें 15 बच्चे भी शामिल हैं. चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग का कहना है कि उत्तर प्रदेश या किसी अन्य राज्य की तरह मध्य प्रदेश में बच्चों में किसी भी तरह का कोई रहस्यमयी बुखार नहीं है. सिर्फ वायरल फीवर के लक्षण बच्चों में है. किसी भी तरह से वायरल को लेकर पैनिक फैलाने की जरूरत नहीं है. अस्पतालों की व्यवस्था का लगातार जायजा ले रहे हैं. वायरल की चपेट में आ रहे बच्चों की बढ़ती संख्या के बीच अस्पताल में बिस्तरों की संख्या और तमाम व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं.

सिंगल मदर बनीं भोपाल की संयुक्ता, स्पर्म डोनेशन के जरिए दिया बेटे को जन्म

महिला ने बताया कि, मैं मां बनना चाहती थी, इसलिए केंद्रीय दत्तक ग्रहण प्राधिकरण से बच्चा गोद लेने के लिए दो बार रजिस्ट्रेशन किया, लेकिन बच्चा गोद नहीं मिल पाया. MP : रुढ़िवादी सोच तोड़ सिंगल मदर बनीं भोपाल की संयुक्ता, स्पर्म डोनेशन के जरिए दिया बेटे को जन्म बिना पति के मां बना एक औरत के लिए आज के समय में भी बहुत बड़ा चैलेंज है. समाज ऐसी महिलाओं को स्वीकार नहीं करता है. इन जैसी और भी कई बातों और रुढ़िवादी सोच को तोड़कर भोपाल (Bhopal) की 37 साल की संयुक्ता बनर्जी ने अपने लिए कुछ अलग चुना है. हालांकि ये फैसला लेना इतना आसान नहीं था, लेकिन परिवार और दोस्तों से मिले सपोर्ट के बाद उसके लिए मुश्किले और आसान हो गई. संयुक्ता बनर्जी ने काफी सोचने के बाद बिना पार्टनर के ही मां (single mother) बनने का फैसला लिया और स्पर्म डोनेशन (sperm donation) के जरिए अगस्त में एक बेटे को जन्म दिया है संयुक्ता का आज अपने इस फैसले पर गर्व है. संयुक्ता का कहना है कि उनके परिवार और दोस्तों ने मानसिक और भावनात्मक बहुत सहयोग किया जिसकी वजह से उन्हें ये फैसला लेने में कोई मुश्किल नहीं आई. बच्चा गोद लेने का भी कोशिश की थी लेकिन गोद नहीं मिला उन्होंने बताया कि तीन बार बच्चा गोद लेने की कोशिश की थी, लेकिन बच्चा गोद नहीं मिल पाया. इसके बाद एक फैमिली डॉक्टर ने उन्हें आईसीआई तकनीक के बारे में बताया. जिसके बाद उनका मां बनने का सपना पूरा हो गया. सरोगेसी से मां बनना बहुत मंहगा प्रोसेस है संयुक्ता ने बताया कि उनकी शादी 20 अप्रैल 2008 में हुई थी. पति को बच्चा नहीं चाहिए था लेकिन मुझे मातृत्व का सुख लेना था. 2014 में दोनों की राहें अलग हो गईं और 2017 में तलाक हो गया. फिर मैंने नए सिरे से जिंदगी शुरू की. चूंकि मैं मां बनना चाहती थी, इसलिए केंद्रीय दत्तक ग्रहण प्राधिकरण से बच्चा गोद लेने के लिए दो बार रजिस्ट्रेशन किया, लेकिन बच्चा गोद नहीं मिल पाया. इसके बाद मेरे फैमिली डॉक्टर ने सेरोगेसी, आईवीएफ, आईसीआई और आईयूआई जैसी तकनीक के बारे में बताया. इसमें बिना पार्टनर के भी मां बना जा सकता है. 24 अगस्त को दिया बेटे को जन्म उन्होंने कहा कि, मैंने आईसीआई तकनीक को अपनाने का निर्णय लिया. इसमें बिना किसी के संपर्क में आए केवल स्पर्म डोनेशन लेना होता है. इसमें डोनर की पहचान गोपनीय रहती है. फरवरी में मुझे पता चला मैंने कंसीव कर लिया है. डॉक्टर की देखरेख में मैंने 24 अगस्त को बेटे को जन्म दिया. पहले मैंने सरोगेसी से बच्चा पैदा करने के बारे में सोचा था लेकिन यह तकनीक बहुत महंगी है. इसमें काफी रुपया खर्च होने के बाद भी सक्सेस रेट बहुत कम है. इसके बाद टेस्ट ट्यूब बेबी पर भी विचार किया लेकिन उसमें भी बात नहीं बनी. तब मैंने आईसीआई तकनीक को अपनाया. ‘मैं पापी हो गई हूं. मेरा पाप सामने आ गया’ संयुक्ता कहती हैं, अगर आप शादी के बंधन में हैं तो मां बने बिना एक महिला अस्तित्व ही न पूरा कर पाए. लेकिन अगर शादीनुमा संस्थान से या तो निकल गए हो या शादी ही नहीं की है तो एक महिला का मां बनना पाप माना जाता है. इस तरह से अब इस समाज की नजरों में मेरा एक पाप सामने आ चुका है और मैं पापी हो गई हूं वह कहती हैं कि मेरी मां 70 साल की उम्र में साये की तरह मेरे साथ खड़ी रहीं. कुछ दोस्तों ने भी हर मोड़ पर मेरा साथ दिया जिससे राह आसान हो गई.

MP : कोरोना में महा पाप: मरीजों को लगा दिए 500 नकली रेमडेसिविर

जबलपुर. नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन के मामले में पुलिस ने शहर के जाने-माने उद्योगपति और सिटी हॉस्पिटल के संचालक सरबजीत सिंह मोखा के खिलाफ FIR दर्ज की है. मोखा पर आरोप है कि इसने 500 नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन कोविड मरीजों को लगा दिए. इन मरीजों में से कई की मौत होने की आशंका जताई जा रही है. पुलिस की टीमें सरबजीत की तलाश कर रही हैं. गौरतलब है कि विगत दिनों गुजरात पुलिस ने नकली रेमडेसीवीर मामले में सपन जैन को गिरफ्तार किया था. उसने पूछताछ में सरबजीत सिंह मोखा का नाम लिया. इसके बाद पुलिस ने 48 घंटे के अंदर नकली इंजेक्शन की चैन का भंडाफोड़ कर दिया. जांच में सामने आया कि सरबजीत ने 500 नकली इंजेक्शन इंदौर से बुलवाए थे. इन इंजेक्शन को उसके अस्पताल में भर्ती मरीजों को लगवा दिया गया और उनकी जान से बड़ा खिलवाड़ किया गया. कई धाराओं में दर्ज हुए मामले देर रात जबलपुर की ओमती थाना पुलिस ने इस मामले में धारा 274, 275, 308, 420 समेत डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया. पुलिस के मुताबिक, सरबजीत सिंह मोखा ने सपन जैन के साथ मिलकर बड़ी संख्या में यह नकली इंजेक्शन मरीजों को दिए हैं. इस वजह से कई मरीजों को अपनी जान तक खोनी पड़ी है. पुलिस ने इस मामले में सिटी हॉस्पिटल में कार्यरत मैनेजर देवेश चैरसिया पर भी मामला दर्ज किया. इस तरह होता गया मामले का खुलासा बता दें, गुजरात में नकली इंजेक्शन की फैक्ट्री पर पुलिस ने कुछ दिनों पहले रेड मारी थी. जांच में पता चला था कि करीब एक लाख फर्जी रेमडेसिविर इंजेक्शन देशभर के अलग-अलग राज्यों में बेचे गए हैं. इसी कड़ी में गुजरात पुलिस 7 मई को जबलपुर आई और आधारताल निवासी दवा व्यवसायी सपन जैन को गिरफ्तार कर ले गई. इसके बाद जबलपुर पुलिस भी हरकत में आई थी और लगातार दो दिनों से ताबड़तोड़ छापे मारे. सपन जैन की तीन दवा दुकानों को पहले ही सील कर दिया गया था, जबकि पूछताछ में दो बड़े अस्पतालों के नाम भी सामने आए थे. इसी जांच में सिटी अस्पताल के संचालक का नाम उजागर हो गया.

MP में बेशर्म सिस्टम : सरकारी अस्पताल के कोविड वार्ड में ऑक्सीजन सप्लाई रुकी, 2 मरीजों की मौत

भोपाल। मध्यप्रदेश में राजधानी भोपाल के जिला अस्पताल में बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां जेपी अस्पताल के कोरोना वार्ड में बुधवार देर रात दो मरीजों की मौत हो गई। मृतकों के परिजनों का आरोप है कि रात में ऑक्सीजन सप्लाई रुक गई थी, जिसके कारण मरीजों की जान चली गई। जान गंवाने वाली 50 साल की रामरती अहिरवार ICU में भर्ती थीं, जबकि सीबी मेश्राम कोरोना संदिग्ध वार्ड में भर्ती थे। आरोपों पर जेपी के सिविल सर्जन डॉ. राजेश श्रीवास्तव का कहना है कि ऑक्सीजन सप्लाई नहीं रुकी थी। दोनों मरीजों की हालत गंभीर थी। अब तक इस मामले में किसी तरह की जांच के आदेश नहीं दिए गए हैं। 11 दिसंबर 2020 को हमीदिया के कोरोना वार्ड की दो घंटे बिजली गुल होने से ऑक्सीजन सप्लाई बंद हो गई थी। तब ऑक्सीजन सपोर्ट पर चल रहे तीन मरीजों की मौत हो गई थी। हालांकि, जांच रिपोर्ट में क्लीनचिट दे दी गई थी। रामरती के बेटे जीवन ने भास्कर को बताया, ‘मां को 28 मार्च को जेपी में भर्ती कराया था, तब उन्हें तेज बुखार था। 29 को उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। बुधवार रात को मां की हालत अच्छी थी। उन्होंने मुझसे बात की, दलिया खाया और सो गई थीं। मैं रात में वार्ड के बाहर ही रुका था। रात ढाई बजे वार्ड में कोई मरीज बुरी तरह चिल्ला रहा था। तब मैं वार्ड में जाना चाहता था, लेकिन गार्ड ने अंदर नहीं जाने दिया। सुबह 7 बजे डॉक्टर ने फोन कर बताया कि मां की हालत बहुत खराब है, आकर देख लो। अंदर मां बेसुध पड़ी थीं। हम मां को दूसरे अस्पताल ले जाना चाहते थे, उन्हें बाहर भी ले आए, लेकिन अस्पताल वालों ने पुलिस बुला ली और हमें मां को नहीं ले जाने दिया। अगले दिन दोपहर में शव सौंपा गया। इसके लिए भी मुझे मिन्नतें करनी पड़ीं।’ एंटीजन रिपोर्ट निगेटिव थी, फिर भी जान चली गई दूसरे मृतक सीबी मेश्राम को दो दिन पहले ही परिजनों ने यहां भर्ती किया था। उनको निमोनिया था। अस्पताल प्रबंधन की मानें तो उनकी कोरोना जांच कराई गई, लेकिन एंटीजन टेस्ट निगेटिव था। ऐसे में RTPCR सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा गया था। रिपोर्ट नहीं आने की स्थिति में उनको कोरोना सस्पेक्टेड वार्ड में रखकर इलाज किया जा रहा था। जहां गुरुवार तड़के करीब तीन बजे उनकी मौत हो गई।

मध्यप्रदेश में 3 माह तक के लिए एस्मा लागू

भोपाल. कोरोना की दूसरी लहर से संक्रमण की रफ्तार बढ़ने के साथ ही सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं पर एस्मा (अति आवश्यक सेवा घोषित) लगा दिया है। अब डॉक्टर, नर्स या फिर पैरामेडिकल स्टाॅफ डयूटी करने से इंकार नहीं कर सकेंगे। सरकार ने बुधवार देर शाम राजपत्र में इसका नोटिफिकेशन कर दिया है। जिसमें कहा गया है, स्वास्थ्य सेवाओं को 3 माह के लिए अति आवश्यक घोषित किया गया है। मध्‍य प्रदेश में सभी सरकारी और गैर सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं पर सरकार ने एस्मा कानून लागू दिया है। एस्मा लागू होने के बाद कोई भी डॉक्टर या नर्स मरीज का इलाज करने से इनकार नहीं कर सकता है। अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा ने बताया है कि कोविड-19 महामारी की रोकथाम के लिये स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं को 3 माह के लिये अत्यावश्यक सेवाओं के रूप में अधिसूचित किया गया है। डॉ. राजौरा ने बताया है कि राजपत्र में जारी अधिसूचना अनुसार मध्यप्रदेश अत्यावश्यक सेवा संधारण तथा विच्छिन्नता निवारण अधिनियम-1979 की धारा-4 की उप धारा-1 द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए राज्य सरकार समस्त शासकीय एवं निजी स्वास्थ्य एवं चिकित्सीय संस्थानों में समस्त स्वास्थ्य सुविधाओं, डॉक्टर, नर्स और स्वास्थ्यकर्मी, स्वास्थ्य संस्थानों में स्वच्छता कार्यकर्ता, मेडिकल उपकरणों की बिक्री संधारण एवं परिवहन, दवाइयों एवं ड्रग्स की बिक्री, परिवहन एवं विनिर्माण, एम्बुलेंस सेवाएं, पानी एवं बिजली की आपूर्ति, सुरक्षा संबंधी सेवाओं, खाद्य एवं पेयजल प्रावधान एवं प्रबंधन तथा बॉयो मेडिकल वेस्ट प्रबंधन को अत्यावश्यक सेवाओं में शामिल किया गया है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य संबंधी उक्त कार्य करने से इंकार किये जाने का प्रतिषेध किया गया है।

आ गई बड़ी खुशखबरी, 16 जनवरी से भारत में लगने लगेगी कोरोना की वैक्सीन

नई दिल्ली . प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में कोरोना की स्थिति और टीकाकरण की तैयारियों को लेकर शनिवार को एक उच्च-स्तरीय बैठक की। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने देश में कोरोना वैक्सीनेशन शुरू होने की तारीख का ऐलान कर दिया। देश में 16 जनवरी से कोरोना टीकाकरण अभियान शुरू होगा। सबसे पहले करीब 3 करोड़ हेल्थकेयर और फ्रंटलाइन वर्करों को टीका लगाया जाएगा। इसके बाद 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों और इससे कम उम्र के उन लोगों को टीके लगेंगे जो पहले से ही किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं। ऐसे लोगों की तादाद करीब 27 करोड़ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में टीकाकरण की तैयारियों और कोरोना की स्थिति की समीक्षा के लिए शनिवार को एक उच्च-स्तरीय बैठक की समीक्षा की। बैठक में कैबिनेट सेक्रटरी, पीएम के प्रिंसिपल सेक्रटरी, हेल्थ सेक्रटरी और दूसरे बड़े अधिकारी शामिल हुए। दरअसल, भारत में बनी दो कोरोना वैक्सीनों को सरकार ने लिमिटेड इमर्जेंसी यूज की इजाजत दे चुकी है।

भारत बना रहा है कोरोना किलर नेजल स्प्रे, वैक्सीन की नहीं रहेगी जरूरत

नई दिल्ली। भारत को कोरोना वैक्सीन के मोर्चे पर जल्द ही एक और अच्छी खबर मिल सकती है. भारत बायोटेक देश में जल्द ही Nasal वैक्सीन का ट्रायल शुरू करने जा रहा है. नागपुर में इस वैक्सीन के पहले और दूसरे फेज का ट्रायल किया जाएगा. Nasal वैक्सीन को नाक के जरिए दिया जाता है, जबकि अभी तक भारत में जिन दो वैक्सीन (कोविशील्ड, कोवैक्सीन) को मंजूरी मिली है वो हाथ पर इंजेक्शन लगाकर दी जाती है. भारत बायोटेक के डॉ. कृष्णा इल्ला के मुताबिक, उनकी कंपनी ने वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के साथ करार किया है. इस Nasal वैक्सीन में दो की बजाय सिर्फ एक ही डोज देने की जरूरत होगी. रिसर्च में पाया गया है कि ये काफी बेहतरीन ऑप्शन है. डॉ. चंद्रशेखर के मुताबिक, अगले दो हफ्तों में Nasal Covaxin का ट्रायल शुरू कर दिया जाएगा. इसके लिए हमारे पास जरूरी सबूत हैं कि नाक से दी जाने वाली वैक्सीन इंजेक्शन वाली वैक्सीन से बेहतर है. भारत बायोटेक जल्द ही इस ट्रायल को लेकर DCGI के सामने प्रपोजल रखेगा. जानकारी के मुताबिक, भुवनेश्वर-पुणे-नागपुर-हैदराबाद में भी इस वैक्सीन का ट्रायल होगा. जहां पर 18 से 65 साल के करीब 40-45 वॉलेंटियर्स का चयन किया जाएगा. गौरतलब है कि भारत बायोटेक अभी भी दो इंट्रा-नेसल वैक्सीन पर काम कर रहा है. दोनों ही वैक्सीन अमेरिका की हैं. आपको बता दें कि अभी तक जो भी वैक्सीन बाजार में आई हैं, उसमें व्यक्ति के हाथ पर ही टीका लगाया जाता है. लेकिन Nasal वैक्सीन को नाक के जरिए ही दिया जाएगा. चूंकि नाक से ही सबसे अधिक वायरस फैलने का खतरा रहता है, ऐसे में इस वैक्सीन के कारगर होने की अधिक संभावना है. वाशिंगटन स्कूल ऑफ मेडिसन की रिसर्च के मुताबिक, अगर नाक के द्वारा वैक्सीन दी जाती है तो शरीर में इम्युन रिस्पॉन्स काफी बेहतर तरीके से तैयार होता है. ये नाक में किसी तरह के इंफेक्शन को आने से रोकता है, ताकि आगे शरीर में ना फैल पाए. क्या इंजेक्शन से बेहतर साबित होगी ये वैक्सीन? एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर इस तरह की वैक्सीन को मंजूरी मिलती है तो कोरोना से लड़ाई में ये गेम चेंजर साबित होगी. क्योंकि जो इंजेक्शन लगाया जाता है, उससे इंसान का सिर्फ निचला लंग ही सेफ हो पाता है. लेकिन अगर नाक के जरिए वैक्सीन दी जाती है तो उससे ऊपरी और निचला लंग दोनों सेफ होने की संभावना है. Nasal वैक्सीन मौजूदा वैक्सीन के मुकाबले कम खतरनाक और आसानी से दी जाने वाली वैक्सीन है. जो किसी भी इंसान के शरीर में तेजी से असर करती है. आपको बता दें कि भारत से पहले यूनाइटेड किंगडम में Nasal वैक्सीन का ट्रायल किया जा रहा है. UK में कुल दो Nasal कोरोना वैक्सीन के फेज़ 1 का ट्रायल किया जा रहा है.

एमपी अजब है एमपी गजब है ….. स्वास्थ्य मंत्री ने 1000 डॉक्टर को दरकिनार कर अपनी पत्नी का किया प्रमोशन

भोपाल . स्वास्थ्य विभाग में पदोन्नति में परिवारवाद का मामला सामने आया है। मंगलवार को स्वास्थ्य संचालनालय से एक आदेश जारी हुआ। इसमें बताया गया कि भोपाल की जिला स्वास्थ्य अधिकारी नीरा चौधरी को क्षेत्रीय कार्यालय में संयुक्त संचालक बनाया गया है। बता दें कि नीरा चौधरी प्रदेश सरकार में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी की पत्नी हैं और उन्हें पदोन्नत कर जो पद दिया गया है, वरिष्ठता सूची के आधार पर उस पद के लिए नीरा से पहले 1000 अन्य डॉक्टर दावेदार थे। स्वास्थ्य विभाग ने 2017 में प्रथम श्रेणी डॉक्टराें की अंतिम वरिष्ठता सूची जारी की थी। इसमें 1042 डॉक्टरों के नाम थे, लेकिन नीरा का नाम नहीं था। नीरा की नई नियुक्ति से डॉक्टरों में भी नाराजगी है। इस मामले में जब स्वास्थ्य मंत्री से संपर्क किया गया तो उन्होंने कुछ भी कहने से मना कर दिया। 34 जिलों में सीनियर को दरकिनार कर जूनियर को बनाया सीएमएचओ प्रदेश के 52 जिलों में से 34 ऐसे जिलें है, जहां पिछले एक साल में सीनियर डाॅक्टरों के बजाय जूनियर को सीएमएचओ बनाया गया है। इनमें शाजापुर में डाॅ. राजू निदारिया को सीएमएचओ बनाया गया है, जबकि वहां उनसे सीनियर तीन अन्य डाॅक्टर एसडी जायसवाल, सुनील सोनी और आलोक सक्सेना पदस्थ हैं। खरगोन में रजनी डाबर को सीएमएचओ बनाया गया है, जबकि वहां एसएस चौहान, विजय फूलोरिया, राजेंद्र जोशी, डाॅ. कानूनगो, वंदना कानूनगो, इंदिरा गुप्ता और संजय भट्‌ट सीनियर हैं। बड़वानी में डॉ. अनिता सिंगारे को सीएमएचओ बनाया है, जबकि वहां तीन डाॅक्टर उनसे सीनियर हैं। इसी तरह रतलाम में डाॅ प्रभाकर नानावरे से 6 डाॅक्टर सीनियर हैं। धार, छतरपुर, दमोह, कटनी, रीवा, शहडोल समेत अन्य जिलों में पदस्थ सीएमएचओ से वरिष्ठ चिकित्सक पदस्थ हैं। इसी तरह अन्य जिलों में भी यही स्थिति हैं। वरिष्ठता क्रम में दो पद पीछे थीं नीरा नियमानुसार संयुक्त संचालक पद पर सिर्फ प्रथम श्रेणी अधिकारी को ही पदस्थ किया जा सकता है। इनमें वरिष्ठता क्रम में उप संचालक और उससे नीचे मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमएचओ) आते हैं। नीरा जिला स्वास्थ्य अधिकारी थीं और अकेले भोपाल में ही 70 से ज्यादा प्रथम श्रेणी डॉक्टर हैं। ये सभी डिप्टी डायरेक्टर पद पर हैं। इनमें अर्चना मिश्रा, प्रज्ञा तिवारी, दुर्गेश गौर, दिलीप हेड़ाऊ, हिमांशु जायसवाल, मनीष सिंह, राजीव श्रीवास्तव, अलका परगनिया, पद्माकर त्रिपाठी, इंद्रजीत सिकरवार और वीरेंद्र गौर समेत अन्य चिकित्सकों के नाम हैं। ये सभी पिछले 15 साल से संचालनालय में प्रशासनिक पदों पर हैं और ट्रांसफर की वजह से पदोन्नति नहीं चाहते हैं।

MP : शुरू हुआ ठगी का नया खेल, फेक हेल्थ अफसर के झांसे से ऐसे बचा छात्र, आप भी रहें सतर्क

भोपाल। कोरोना कहर के बीच अब ठगों ने कोविड वैक्सीन को ठगी का नया हथियार बनाया है। भोपाल में एक छात्र को वैक्सीन के लिए रजिस्ट्रेशन कराने के नाम पर ठगी का शिकार बनाने का प्रयास किया गया। आरोपी ने छात्र को जल्दी रजिस्ट्रेशन नहीं कराने पर वैक्सीन खत्म होने का झांसा देते हुए ओटीपी नंबर मांगा था। हालांकि, छात्र की समझदारी से वह ठगी का शिकार होने से बच गया। उसने इसकी शिकायत साइबर सेल में की है। एएसपी रजत सकलेचा ने बताया कि शहर में रहने वाले एक छात्र को बुधवार को कॉल आया। कॉलर ने खुद को केंद्र सरकार के स्वास्थ्य विभाग का अधिकारी बताया। उसने कहा- भारत में कोरोना वैक्सीन लगवाने के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू हो गए हैं। इसी के संबंध में आपको कॉल किया गया है। रजिस्ट्रेशन फीस के 500 रुपए भरे जाने हैं। बाकी रुपए वैक्सीन लगाने के दौरान लिए जाएंगे। रजिस्ट्रेशन के लिए आपके मोबाइल पर ओटीपी नंबर आएगा। आपको उसे शेयर करना है। इसके बाद आपका रजिस्ट्रेशन हो जाएगा। छात्र ने कॉलर से कहा कि अभी तो वैक्सीन ही नहीं आई, तो रजिस्ट्रेशन कैसे होने लगे? उसने समझदारी दिखाई और फोन काट दिया। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। हालांकि आरोपियों का पता नहीं चल पाया है। ऐसे फोन अटेंड न करें एएसपी सकलेचा के मुताबिक, कोरोना वैक्सीन के लिए आए फोन कॉल को अटेंड न करें। रजिस्ट्रेशन के नाम पर आप का आधार नंबर मांगा जाएगा। फिर कहेंगे कि आप के मोबाइल पर OTP आएगा, वो बताओ, रजिस्ट्रेशन हो जाएगा और वैक्सीन जल्द मिल जाएगी। OTP बताते ही ठग एकाउंट को हैक कर लेगा। इस तरह से फंसाते हैं जाल में साइबर ठग किसी भी तरह ओटीपी नंबर हासिल करना चाहते हैं। इसके लिए एटीएम कार्ड से लेकर क्रेडिट कार्ड एक्सपायर होने, खाता सीज होने, ऑन ऑन लाइन पेमेंट एप बंद होने और खाते में रुपए ट्रांसफर करने के नाम पर लिंक को क्लिक करने तक का झांसा देते हैं। इसलिए किसी को भी एटीएम नंबर, खाता नंबर, पिन (पासवर्ड) और ओटीपी नंबर शेयर नहीं करना चाहिए।

डायबिटीज : वेटलॉस और डाइट पर कंट्रोल करेंगे तो ठीक हो जाएगी ये बीमारी

नई दिल्ली। डायबिटीज के बारे में एक आम राय है कि ये बीमारी जिसे होना है उसे जरूर होगी। लेकिन, विशेषज्ञ अब इसे पूरी तरह सच नहीं मानते। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की प्रोफेसर और हार्वर्ड वुमन्स हेल्थ वॉच की एडिटर इन चीफ डॉ. होप रिकीओटी कहती हैं कि प्री-डायबिटीज को ठीक किया जा सकता है। क्या है प्री- डायबिटीज? प्रीडायबिटीज वह अवस्था होती है जब व्यक्ति का शरीर ग्लूकोज को आसानी से ऊर्जा में नहीं बदल पाता। इससे शुगर का स्तर बढ़ जाता है, लेकिन यह इतना नहीं होता कि इसे डायबिटीज कहा जाए। हालांकि यह स्थिति आगे चलकर बीमारी में बदल जाती है। डॉ. रिकीओटी कहती हैं कि उस समय अपने वजन को पांच से सात फीसदी तक कम कर लिया जाए और खानपान को सुधार लिया जाए तो डायबिटीज से लंबे समय तक बचा जा सकता है। वे कहती हैं कि ऐसे व्यक्ति को सप्ताह में कम से कम 150 मिनट एक्सरसाइज करनी चाहिए। भोजन में फल, सब्जी, होल ग्रेन, हेल्दी फिट शामिल करना चाहिए और शुगर कम कर देनी चाहिए। उसे हेल्दी लाइफ स्टाइल अपनानी चाहिए। हैल्दी लाइफस्टाइल डायबिटीज से बचने का उपाय मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल की फिजिशियन डॉ. मोनीक टेला बताती हैं कि ‘द डायबिटीज प्रिवेंशन प्रोग्राम’ एक लंबी अवधि का अध्ययन है। 20 साल के मेडिकल रिसर्च में यह साबित हुआ है कि यदि हेल्दी लाइफ स्टाइल अपनाई जाए तो डायबिटीज से बचा जा सकता है। बल्कि अगर डायबिटीज़ की बीमारी नई है तो इसे रिवर्स भी किया जा सकता है। ऐसे समझें क्या है लो-कैलोरी डाइट इंग्लैंड में हुई रिसर्च में पाया गया कि जिन लोगों को नई डायबिटीज है वो लो-कैलोरी डाइट पर जाकर बीमारी को ठीक कर सकते हैं। रिसर्च में।ऐसे मरीजाें को दो से पांच माह तक 625 से 850 कैलोरी की लिक्विड डाइट लेने काे कहा गया। इसके बाद उन्हें सामान्य डाइट के लिए कहा गया, लेकिन इसमें भी हेल्दी चीजें लेनी थी ताकि वजन न बढ़े। अध्ययन में पाया गया कि करीब 50% लोगों का शुगर लेवल एक साल तक नहीं बढ़ा। ऐसी डाइट डॉक्टर के परामर्श पर ही लेनी चाहिए।

देश में जनवरी में वैक्सीनेशन शुरू, शायद महामारी का सबसे बुरा दौर खत्म

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने उम्मीद जताई है कि देश में कोरोना वैक्सीन लगाने का काम जनवरी में शुरू हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में शायद कोरोना महामारी का सबसे बुरा दौर खत्म हो चुका है। उन्होंने कहा कि जनवरी के किसी भी हफ्ते में भारत अपने नागरिकों को वैक्सीन देने की स्थिति में होगा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने रविवार को न्यूज एजेंसी से बातचीत में कहा, ‘मुझे निजी तौर पर लग रहा है कि जनवरी के किसी हफ्ते में वैक्सीन का पहला डोज दे दिया जाएगा। हम इस स्थिति में पहुंच चुके हैं। हालांकि, हमारी पहली प्राथमिकता है कि वैक्सीन सुरक्षित और इफेक्टिव रहे। इसके साथ हम किसी भी तरह का समझौता नहीं कर सकते हैं।’ हमारा रिकवरी रेट दुनिया में सबसे अच्छा हर्षवर्धन ने कहा, ‘कुछ ​महीनों पहले देश में कोरोना के 10 लाख एक्टिव केस थे, जो अब करीब तीन लाख हैं। संक्रमण के एक करोड़ मामले आ चुके हैं। इनमें से 95 लाख से ज्यादा मरीज ठीक हो चुके हैं। हमारा रिकवरी रेट दुनिया में सबसे ज्यादा है। मुझे लगता है कि जितनी तकलीफों से हम गुजरे हैं अब वे खत्म होने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। इतना बड़ा देश होते हुए भी हम दूसरे बड़े देशों से बेहतर स्थिति में है।’ प्रायोरिटी वाले लोगों में से सभी को वैक्सीन लगाने की कोशिश स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि भारत सरकार बीते चार महीनों से राज्य सरकारों के साथ मिलकर राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर वैक्सीनेशन की तैयारियां कर रही है। 260 जिलों में 20 हजार वर्कर्स को इसकी ट्रेनिंग दी गई है। हमारी कोशिश होगी कि हमारी प्राथमिकता में शामिल हर व्यक्ति को वैक्सीन लगाई जाए, लेकिन कोई इसे नहीं लगवाना चाहे तो उस पर दबाव नहीं डाला जाएगा। कोरोना के खिलाफ हर तरह से तैयार रहना होगा भारत को पोलियो की तरह कोरोना मुक्त करना मुमकिन है? इस सवाल पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने पोलियो और COVID-19 अलग-अलग बीमारियां हैं। पोलियो को खत्म करना वैज्ञानिक रूप से संभव था। आखिरकार कोरोनावायरस भी कम हो जाएगा और हम छिटपुट मामलों के बारे में सुनेंगे।

इंदौर में कोरोना से आबकारी सब इंस्पेक्टर की मौत

इंदौर। कोरोना का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। रविवार सुबह आबकारी विभाग के सब इंसपेक्टर संतोष सिंह (44) की कोरोना के चलते मौत हो गई। इंदौर में अब तक 837 लोग कोरोना का शिकार हो चुके है। सीधी के रहने वाले संतोष सिंह लंबे समय से यहां पदस्थ थे। उनकी 12 साल की बेटी और 10 साल का बेटा है। अधिकारियों ने बताया कि लंबे समय से वह कोविड-19 से जूझ रहे थे और निजी अस्पताल में भर्ती थे लेकिन रविवार सुबह उनका निधन हुआ है। 13 दिसम्बर को हाई कोर्ट जज की मौत कुछ दिनों पहले इंदौर हाईकोर्ट जज वंदना कसरेकर की भी कोरोना से मौत हुई थी और हाईकोर्ट में 52 से अधिक कर्मचारी इस संक्रमण का शिकार हुए थे जिसके बाद लगातार यह आंकड़ा बढ़ते जा रहा है। इंदौर में सबसे पहली मौत निरीक्षक देवेंद्र चन्द्रवंशी की कोविड-19 कॉल शुरू होते ही हुई थी। उन्हें भी लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रखा था लेकिन स्वास्थ्य अधिकारी उनकी जान नहीं बचा पाए थे। इंदौर में अब तक कुल पॉजिटिव मरीजों की संख्या 51563 है। शनिवार को एक ही दिन में 395 पॉजिजिव मिले थे। 837 लोगों की मौत हो चुकी है।

अगले महीने से भारत में भी वैक्सीन लगने लगेगी

नई दिल्ली । सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (SII) दिसंबर के अंत तक अपनी वैक्सीन कोवीशील्ड के अंतिम फेज के क्लिनिकल ट्रायल्स के डेटा को रेगुलेटर को सौंप देगी। अगर डेटा संतोषजनक रहता है तो कोवीशील्ड को जनवरी के पहले हफ्ते में इमरजेंसी अप्रूवल मिल सकता है। यानी जनवरी से वैक्सीनेशन ड्राइव शुरू हो सकती है। इस वैक्सीन को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और ब्रिटिश फर्म एस्ट्राजेनेका ने मिलकर डेवलप किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, SII अगले दस दिन में अंतिम डेटा रेगुलेटर को सौंप देगा। दरअसल, पिछले हफ्ते ही ड्रग रेगुलेटर सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) की सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी (SEC) की मीटिंग हुई। इसमें कोवीशील्ड के साथ ही भारत बायोटेक की कोवैक्सिन और फाइजर की वैक्सीन के डेटा पर चर्चा हुई। इन तीनों वैक्सीन के लिए इमरजेंसी अप्रूवल मांगा गया है। कमेटी ने तीनों ही वैक्सीन कैंडिडेट्स के इमरजेंसी अप्रूवल के आवेदन पर कुछ सवाल उठाए और कंपनियों से जवाब मांगे थे। फाइजर, सीरम और भारत बायोटेक ने मांगा इमरजेंसी अप्रूवल; कुछ ही हफ्तों में मिलेगी वैक्सीन कमेटी ने SII से कहा था कि भारत में चल रहे फेज-2/3 क्लिनिकल ट्रायल्स का सेफ्टी डेटा अपडेट किया जाए। साथ ही, UK और भारत में हुए क्लिनिकल ट्रायल्स का इम्युनोजेनेसिटी डेटा पेश किया जाए। इसके अलावा ब्रिटेन में ड्रग रेगुलेटर के इमरजेंसी अप्रूवल पर फैसले के बारे में भी पूछताछ की गई थी। फाइजर ने कमेटी से कुछ समय मांगा था। वहीं, भारत बायोटेक के कोवैक्सिन के फेज-3 ट्रायल्स के डेटा के लिए अभी इंतजार करना पड़ सकता है। भारत की टॉप वैक्सीन साइंटिस्ट और वेल्लोर के क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर डॉ. गगनदीप कांग के मुताबिक, पिछले साल ही भारत के नए क्लिनिकल ट्रायल्स के नियम बने हैं। इसमें रेगुलेटर को आपात परिस्थितियों में बिना ट्रायल के भी दवा या वैक्सीन को इमरजेंसी यूज के लिए मंजूरी देने का अधिकार दिया है। डॉ. कांग के मुताबिक, इमरजेंसी यूज की परमिशन देने के बाद भी मॉनिटरिंग क्लिनिकल ट्रायल्स जैसी ही होती है। हर पेशेंट के डिटेल्स जरूरी होते हैं। उन पर नजर रखी जाती है। जिस कंपनी को अपने प्रोडक्ट के लिए कहीं और लाइसेंस मिला है, उसे प्री-क्लिनिकल और क्लिनिकल ट्रायल्स का पूरा डेटा रेगुलेटर को सबमिट करना होता है। जब कंपनी इमरजेंसी रिस्ट्रिक्टेड यूज की परमिशन मांगती है, तो रेगुलेटर के स्तर पर दो स्टेज में वह प्रोसेस होती है। सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी उस एप्लिकेशन पर विचार करती है। उसके अप्रूवल के बाद मामला अपेक्स कमेटी के पास जाता है। इस कमेटी में स्वास्थ्य मंत्रालय से जुड़े विभागों के सचिव भी होते हैं।

कोरोना वैक्सीन पर बड़ी खुशखबरी, एम्स डायरेक्टर बोले- अगले महीने तक भारत को मिल जाएगा टीका

देश में कोरोना की दूसरी लहर थमती नजर आ रही है. पिछले 24 घंटे में कोरोना के करीब 35 हजार नए मामले सामने आए हैं. कोरोना की थमती रफ्तार पर दिल्ली एम्स के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने खुशी जाहिर की है. उन्होंने कहा कि हम कोरोना ग्राफ देख रहे हैं और अगर नियमों का पालन करते रहे तो यह गिरावट जारी रहेगी. डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने कहा कि आने वाले तीन महीने काफी महत्वपूर्ण हैं. अगर हम सावधानी बरतना जारी रखते हैं तो कोरोना महामारी के खतरे को टाल सकते हैं. कोरोना वैक्सीन पर डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने कहा कि भारत में जो टीके बनाए जा रहे हैं, वह अंतिम चरण के ट्रायल में है. डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने उम्मीद जताई कि इस महीने के अंत तक या अगले महीने की शुरुआत तक हमें कोरोना वैक्सीन के इमरजेंसी वैक्सीनाइजेशन की इजाजत मिल जाए. हमें वैक्सीन डिस्ट्रीब्यूशन को लेकर सख्त कदम उठाने की जरूरत है, जिससे जनता को वैक्सीन देना शुरू किया जा सके. डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने कहना है कि कोरोना वैक्सीन को लेकर अच्छा डेटा उपलब्ध है कि टीके बहुत सुरक्षित हैं. वैक्सीन की सुरक्षा और प्रभावकारिता से कोई समझौता नहीं किया गया है. 70,000-80,000 स्वयंसेवकों ने टीका लगवाया, कोई महत्वपूर्ण गंभीर प्रतिकूल प्रभाव नहीं देखा गया. डेटा से पता चलता है कि अल्पावधि में टीका सुरक्षित है. डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने कहा कि जब हम बड़ी संख्या में लोगों को टीका लगाते हैं, तो उनमें से कुछ को कोई न कोई बीमारी हो सकती है, जो टीके से संबंधित नहीं हो सकती है.

कोरोना पर पीएम मोदी क्यों बोले – हमें किनारे पर कश्ती नहीं डूबने देनी है

नई दिल्ली। देश में अभी कोरोना की वैक्सीन आने में वक्त है। और जब तक वैक्सीन न आ जाए, हिदायतें ही काम आएंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देश को ऐसी ही हिदायतें दी हैं। मंगलवार को वे बीते आठ महीने में नौवीं बार मुख्यमंत्रियों की बैठक ले रहे थे। 9 राज्यों के सीएम के साथ करीब चार घंटे चली इस मीटिंग के बाद प्रधानमंत्री बोले- ‘अभी यह तय नहीं है कि कोरोना वैक्सीन की एक डोज देनी होगी या दो। उसकी कीमत क्या होगी, यह भी तय नहीं है। अभी ऐसे किसी भी सवाल का जवाब हमारे पास नहीं हैं।’ हालांकि, प्रधानमंत्री ने वैक्सीन आने के बाद की बात जरूर की। उन्होंने कहा कि वैक्सीन के बारे में तो वैज्ञानिक ही बताएंगे, लेकिन हमें वैक्सीन आने के बाद की तैयारी अभी से करनी होगी। यानी उसका स्टोरेज और डिस्ट्रीब्यूशन। इन 9 राज्यों के CM शामिल हुए मीटिंग में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल, राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत, बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे, छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल, गुजरात के सीएम विजय रूपाणी, हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर, केरल के सीएम पिनाराई विजयन और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान शामिल हुए। महाराष्ट्र, दिल्ली, राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात उन राज्यों में शामिल हैं, जहां एक्टिव केस तेजी से बढ़ रहे हैं। मोदी ने कहा- वैक्सीन की रिसर्च आखिरी दौर में पहुंची है। भारत जो भी वैक्सीन देगा, वो वैज्ञानिक तौर पर खरी होगी। भारत सरकार हर डेवलपमेंट पर बारीकी से नजर रख रही है। अभी यह तय नहीं है कि वैक्सीन की एक डोज होगी, दो डोज होगी। कीमत भी तय नहीं है। इन सवालों के जवाब हमारे पास नहीं हैं। वैज्ञानिक हैं, जो वैक्सीन बनाने वाले हैं। कॉरपोरेट वर्ल्ड का भी कंपटीशन है। हम इंडियन डेवलपर्स और दूसरे मैन्यूफैक्चरर्स के साथ भी काम रहे हैं। प्रधानमंत्री ने बताया कि वैक्सीन आने के बाद यही प्राथमिकता हो कि सभी तक पहुंचे। अभियान बड़ा होगा और लंबा चलने वाला है। हमें एकजुट होकर एक टीम के रूप में काम करना ही पड़ेगा। वैक्सीन को लेकर भारत के पास जैसा अनुभव है, वो बड़े-बड़े देशों को नहीं। भारत जो भी वैक्सीन देगा, वो वैज्ञानिक तौर पर खरी होगी। वैक्सीन डिस्ट्रीब्यूशन को लेकर राज्यों के साथ मिलकर खाका रखा गया है। फिर भी ये निर्णय तो हम सब मिलकर करेंगे।

CM शिवराज ने PM को बताया- प्रदेश में लॉकडाउन नहीं लगाया जाएगा

भाेपाल . मध्य प्रदेश में कोरोना वैक्सीन की कोल्ड चेन और टीकाकरण के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई है। इसके लिए जिलों में टास्क फोर्स बनेगी। मुख्यमंत्री ने पीएम के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में कहा कि मध्य प्रदेश में कोरोना वैक्सीन के लिए ह्यूमन ट्रायल भी शुरू हो गए हैं। शिवराज ने प्रधानमंत्री मोदी को बताया कि प्रदेश में लॉकडाउन नहीं लगाया जाएगा। कोरोना के टीके को लेकर मध्य प्रदेश सरकार ने तैयारी कर ली है। इसके मुताबिक सबसे पहले प्रदेश के 5 लाख स्वास्थ्य कर्मचारियों को टीका लगाया जाएगा। इसके बाद प्रदेश के करीब 30 लाख लोग जो 60 साल से ज्यादा उम्र के हैं, उन्हें टीका लगाया जाएगा। सीएम ने कहा कि टीकाकरण अभियान कैसे किया जाए, इसकी व्यवस्था हमने बना ली है। मध्य प्रदेश पूरी तैयारी कर रहा है, स्वास्थ्य कर्मियों को इसकी ट्रेनिंग दी जा रही है, ताकि वैक्सीन आने पर नागरिकों को लगाई जा सके। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की है। बैठक में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल हुए। प्रधानमंत्री ने कोरोना की स्थिति की समीक्षा करने के साथ वैक्सीन के वितरण की रणनीति को लेकर मुख्यमंत्रियों से चर्चा की है। वर्चुअल मीटिंग के माध्यम से चल रही यह बैठक दो चरणों में हुई। पहले चरण में प्रधानमंत्री उन आठ राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात की, जहां कोरोना का कहर सबसे ज्यादा है। इसके बाद दोपहर 12 बजे से बाकी बचे राज्यों की स्थिति पर समीक्षा की। प्रधानमंत्री मोदी कोरोना की स्थिति की समीक्षा के लिए अब तक कई बार राज्यों के साथ बैठक कर चुके हैं। मध्य प्रदेश की वर्तमान स्थिति की बात करें, तो पिछले एक सप्ताह में कोरोना केस तेजी से बढ़े हैं। जिसे देखते हुए भोपाल, इंदौर और ग्वालियर सहित सात जिलों में नाइट कर्फ्यू भी लगाया गया है। केंद्र सरकार की ओर से लगातार यह प्रयास भी हो रहे हैं कि जब भी कोरोना का टीका उपलब्ध होगा, उसके सुचारू वितरण की व्यवस्था हो सके। भारत फिलहाल पांच वैक्सीन तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा हैं। इनमें से चार परीक्षण के दूसरे या तीसरे चरण में हैं जबकि एक पहले या दूसरे चरण में है।

देश में वैक्सीन के इमरजेंसी यूज पर विचार कर रही सरकार

नई दिल्ली । देश में कोरोना मरीजों का आंकड़ा 91 लाख के पार हो गया है। अब तक 91 लाख 39 हजार 560 लोग संक्रमित हो चुके हैं। राहत की बात है कि इनमें 85 लाख 60 हजार 625 लोग ठीक हो चुके हैं। अभी 4 लाख 43 हजार 125 मरीजों का इलाज चल रहा है। संक्रमण के चलते जान गंवाने वालों की संख्या अब 1 लाख 33 हजार 750 हो गई है। रविवार को 24 घंटे के अंदर 43 हजार 652 नए मरीज मिले। 40 हजार 586 लोग रिकवर हुए और 487 की मौत हो गई। इस बीच, केंद्र सरकार ने जल्द से जल्द कोरोना वैक्सीन को लोगों तक पहुंचाने के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। न्यूज एजेंसी ने सूत्रों के हवाले बताया कि केंद्र सरकार कोविड-19 वैक्सीन के इमरजेंसी यूज पर भी विचार कर रही है। मतलब तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल के बाद अगर सबकुछ सही रहा तो सरकार वैक्सीन के इमरजेंसी यूज के लिए मंजूरी दे सकती है। इमरजेंसी यूज के लिए नियम बनेगा केंद्र सरकार की ओर से वैक्सीन को लेकर बनाई गई टीम ने पिछले दिनों बैठक की। बताया जाता है कि इसमें वैक्सीन के प्राइज, खरीददारी, वैक्सीनेशन प्रॉसेस, स्टोरेज आदि मसलों पर बातचीत की गई। इसमें नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) विनोद पॉल, सरकार के चीफ साइंटिफिक एडवाइजर के. विजय राघवन और केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण शामिल हुए थे। इसी में वैक्सीन के इमरजेंसी यूज को लेकर भी चर्चा हुई। तय हुआ कि वैक्सीन के इमरजेंसी यूज की मंजूरी देने के लिए कुछ नियम बनाए जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 8 राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्र शासित राज्य के प्रतिनिधियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर बातचीत कर सकते हैं। न्यूज एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी। बताया कि प्रधानमंत्री दो बैठकें करेंगे। सबसे पहले संक्रमण से सबसे ज्यादा प्रभावित 8 राज्यों के मुख्यमंत्रियों से कॉन्फ्रेंसिंग होगी। दूसरी मीटिंग में अन्य राज्यों और केंद्र शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों या प्रतिनिधियों से बातचीत होगी। इसमें वह वैक्सीन के वितरण प्रक्रिया, दूसरी लहर के रोकथाम जैसे मुद्दों पर बात करेंगे।

कोरोना वैक्सीन के लिए करीब 52 हजार करोड़ का फंड, हर डोज पर 500 से 600 रु. खर्च होंगे

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा था कि देश के हर नागरिक को वैक्सीन लगाई जाएगी। देश में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच केंद्र सरकार ने 130 करोड़ की आबादी तक वैक्सीन पहुंचाने के लिए खाका तैयार कर लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार ने वैक्सीन खरीदने और पूरे देश में इसके डिस्ट्रीब्यूशन के लिए करीब 51 हजार करोड़ रुपए का फंड निर्धारित कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, करंट फाइनेंशियल ईयर में वैक्सीन के लिए पैसों की कमी न आए, इसके लिए पहले से ही तैयारी कर ली गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रशासनिक अफसरों का अनुमान है कि देश में हर व्यक्ति पर वैक्सीन का करीब 500 से 600 रुपए (6 से 7 डॉलर) का खर्च आएगा। ऐसी है सरकार की तैयारी देश में हर व्यक्ति को दो बार वैक्सीन लगाया जाएगा। एक डोज का खर्च करीब 2 डॉलर यानी लगभग 147 रु. आएगा। एक व्यक्ति के वैक्सीन के रख-रखाव और उसके ट्रांसपोर्टेशन पर 2 से 3 डॉलर यानी लगभग 219 रु. का खर्च आएगा। सरकार समर्थित पैनल ने भविष्यवाणी की है कि भारत संक्रमण के चरम पर है, फरवरी तक इसका प्रसार जारी रह सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा था कि वैक्सीन देश के सभी लोगों तक पहुंचाई जाएगी। ऐसा अनुमान है कि सरकार ने वैक्सीन के लिए पर्याप्त रकम जुटा ली है और आगे भी इसमें कोई कमी नहीं आएगी। मोदी सरकार ठोस कदम उठा सकती है सरकार के पैनल ने अनुमान लगाया है कि भारत में कोरोना का एक पीक आ चुका है। संक्रमण अभी फरवरी तक फैलेगा। कोरोना के चलते देश की अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान पहुंचा है। इसलिए, मोदी सरकार आने वाले दिनों में अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई ठोस कदम उठा सकती है।

कोरोना : देश में नए केस में 3 महीने की सबसे बड़ी गिरावट, सिर्फ 45 हजार मरीज मिले, 70 हजार ठीक हुए

नई दिल्ली . कोरोना के ग्राफ में लगातार गिरावट आ रही है। सोमवार को सिर्फ 45 हजार 490 नए केस आए। 69 हजार 800 मरीज ठीक हो गए। इससे 24 हजार एक्टिव केस कम हो गए। अब 7.47 लाख मरीजों का इलाज चल रहा है। 17 सितंबर को यह आंकड़ा 10.17 लाख तक पहुंच गया था। नए केस में यह तीन महीने की सबसे बड़ी गिरावट है। इससे कम केस 39 हजार 170 केस 20 जुलाई को आए थे। देश में अब तक 75.74 लाख केस आ चुके हैं, 67.30 लाख मरीज ठीक हो चुके हैं, 1.15 लाख मरीजों की इस बीमारी ने जान ले ली है। सोमवार को 589 लोगों की मौत हुई। ये आंकड़े covid19india.org से लिए गए हैं। मध्यप्रदेश : राज्य में सोमवार को 1015 लोग संक्रमित पाए गए। 1287 लोग रिकवर हुए और 13 मरीजों की मौत हो गई। अब तक 1 लाख 61 हजार 203 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए जा चुके हैं। इनमें 12 हजार 996 मरीजों का अभी इलाज चल रहा है, जबकि 1 लाख 45 हजार 421 लोग ठीक हो चुके हैं। संक्रमण के चलते अब तक 2786 मरीजों की मौत हो चुकी है।

कोरोना पर खुशखबरी देश में फरवरी तक पूरी तरह से काबू में होगा कोरोना

नई दिल्ली। भारत में कोरोना वायरस के मामले में राहत भरी है। कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या में दुनिया भर में दूसरे पायदान पर पहुंच चुके भारत के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है। सरकार की ओर से बनाई गई वैज्ञानिकों के एक पैनल का कहना है कि भारत में कोरोना वायरस महामारी अपने चरम से गुजर चुकी है और अब ढलान पर है। यानी कोरोना वायरस महामारी का सबसे बुरा दौर गुजर चुका है। सरकारी पैनल तो यहां तक कह रहा है कि फरवरी 2021 तक, यानी अगले करीब सवा चार महीनों में यह महामारी काबू में आ जाएगी। सरकारी पैनल का कहना है कि भारत में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या एक करोड़ छह लाख से ज्‍यादा नहीं होगी। अभी भारत में कोरोना के करीब 75 लाख केस हैं। पैनल का कहना है कि वायरस से बचाव को लेकर किए जा रहे उपाय जारी रखे जाने चाहिए। पैनल ने महामारी के रुख को मैप करने के लिए कम्‍प्‍यूटर मॉडल्‍स का इस्‍तेमाल किया है। IIT हैदराबाद के प्रोफेसर एम. विद्यासागर की अध्यक्षता में बने इस पैनल ने कहा कि वायरस से बचाव को लेकर किए जा रहे उपाय जारी रखे जाने चाहिए। देशवासियों को सभी सावधानियों जैसे- मास्‍क, सोशल डिस्‍टेंसिंग, क्‍वारंटीन का पालन करते रहना होगा। फरवरी तक महामारी पर काबू होने की भी उम्मीद है। लेकिन यह तभी संभव होगा जब लोग कोरोना से बचाव के नियमों का पूरी तरह से पालन करना जारी रखें। एक्टिव केस हो रहे हैं कम कोरोना महामारी को नियंत्रण में तभी माना जाएगा एक्टिव केस बहुत कम बचे हों। देश में एक्टिव केसों की संख्या में लगातार गिरवाट देखने को मिल रही है। जो कि अच्छे संकते मिल रहे हैं। 17 सितंबर को 10.7 लाख ऐक्टिव केसेज का पीक था। उसके बाद एक बार 26-27 सितंबर को थोड़ा उछाल देखा गया। हालांकि उसके बाद से तेजी से ऐक्टिव केसेज कम हुए हैं। 18 अक्‍टूबर तक देश में 7.83 लाख ऐक्टिव केस थे। टोटल केसेज में ऐक्टिव केसेज का हिस्‍सा अब केवल 10.45 फीसदी रह गया है। इसे 1% से कम पर लाना होगा। अगर यही ट्रेंड जारी रहा तो सरकारी पैनल का अनुमान सही साबित हो सकता है।

दिसंबर तक देश के लिए कोरोना टीके की 30 करोड़ तक खुराक बना लेंगे

नई दिल्ली। सीरम इंस्टीट्यूट (एसएसआई) ने कहा कि वह दिसंबर तक कोरोना वैक्सीन के 30 करोड़ डोज बना लेगा। संस्थान के कार्यकारी निदेशक डाॅ. सुरेश जाधव ने कहा कि डीसीजीआई से लाइसेंस मिलते ही टीके लॉन्च कर दिए जाएंगे। सीरम इंस्टीट्यूट ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्रेजेनेका के साथ मिलकर वैक्सीन बना रहा है। डॉ. जाधव ने कहा कि सीरम 5 अलग-अलग उत्पादों पर काम कर रहा है। जो डोज बनेंगे, उनमें से आधे भारत व आधे मिलिंडा-बिल गेट्स की संस्था गैवी के जरिए गरीब देशों की मदद के लिए भेजे जाएंगे। रूसी वैक्सीन के ट्रायल की सिफारिश: सीडीएससीओ की एक्सपर्ट कमेटी ने भारत में रूसी वैक्सीन स्पुतनिक-5 के दूसरे चरण के ट्रायल की सिफारिश की है। दो दिन में मंजूरी मिल सकती है। टीका कब मिलेगा? डाॅ जाधव ने कहा- हम दिसंबर में नियामक डीसीजीआई को तीसरे चरण के ट्रायल का डेटा उपलब्ध करा देंगे। नियामक संतुष्ट होते हैं तो हमें मार्केटिंग प्राधिकार के साथ एक महीने में टीके के आपात इस्तेमाल का लाइसेंस मिल सकता है। फिर हम प्रीक्वालिफिकेशन के लिए डब्ल्यूएचओ जाएंगे। उसके बाद टीके बाजार में आ जाएंगे। पहले किसे मिलेगा? सीरम ने कहा- टीका लगाने की प्राथमिकता सूची में सबसे पहले स्वास्थ्यकर्मी होने चाहिए। दूसरे नंबर पर 60 साल से ऊपर के बुजुर्ग हों। 18 साल से कम उम्र वालों पर बहुत कम परीक्षण चल रहे हैं, इसलिए हो सकता है कि उनका नंबर बाद में आए। 18 से 50 साल के उम्र के नागरिकों को आिखर में टीका लगाया जा सकता है।

कोरोना वैक्सीन को लेकर PM मोदी ने की बैठक, कहा- देश में हर किसी के पास पहुंचे वैक्सीन

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज शनिवार को देश में कोविड-19 महामारी की स्थिति और वैक्सीन की स्थिति, वितरण और प्रशासन की तैयारियों को लेकर समीक्षा की. प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक में अधिकारियों से कहा कि कोरोना वैक्सीन के वितरण को लेकर ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिससे जल्दी से जल्दी पूरे देश में कोरोना वैक्सीन पहुंच सके. साथ ही वैक्सीन का वितरण सुचारू रुप से होना चाहिए. साथ ही वितरण के लिए हमें चुनाव प्रबंधन के अनुभव का इस्तेमाल करना चाहिए. बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक समुदाय की मदद करने के प्रयास में आगे बढ़ने का निर्देश देते हुए कहा कि हमें अपने अपने प्रयासों को तत्काल पड़ोसी देशों तक सीमित नहीं रखना चाहिए. तेजी से पहुंच हो सुनिश्चितः PM मोदी प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिया कि देश की भौगोलिक स्थिति और विविधता को ध्यान में रखते हुए वैक्सीन की पहुंच तेजी से सुनिश्चित की जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि लॉजिस्टिक्स, वितरण और प्रशासन में हर कदम को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए. इसमें कोल्ड स्टोरेज चेन, डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क, मॉनिटरिंग मैकेनिज्म, एडवांस असेसमेंट और आवश्यक उपकरण तैयार करने की एडवांस प्लानिंग शामिल होनी चाहिए. कोरोना वैक्सीन के वितरण को लेकर पीएम मोदी ने आगे निर्देश दिया कि हमें देश में चुनाव और आपदा प्रबंधन के सफल आयोजन के अनुभव का उपयोग करना चाहिए. प्रधानमंत्री ने कहा कि एक समान तरीके से वैक्सीन के वितरण और प्रशासन प्रणालियों को लागू किया जाना चाहिए. इसमें राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, जिला स्तरीय पदाधिकारियों, सिविल सोसाइटी के संगठनों, स्वयंसेवकों, नागरिकों और सभी आवश्यक डोमेन के विशेषज्ञों की भागीदारी होनी चाहिए. पूरी प्रक्रिया में एक मजबूत आईटी बैकबोन होना चाहिए और सिस्टम को इस तरह से डिजाइन किया जाना चाहिए ताकि हमारी स्वास्थ्य प्रणाली के लिए स्थायी मूल्य हो. इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक में कोरोना केस और वृद्धि दर में लगातार गिरावट को नोट किया. पीएम मोदी के साथ बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव, नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य), प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार, वरिष्ठ वैज्ञानिक, पीएमओ और भारत सरकार के अन्य विभागों के के अधिकारी हिस्सा लिया. पाकिस्तान शामिल नहीं कोरोना महामारी से निजात पाने के लिए भारत समेत कई देशों में वैक्सीन की खोज का काम जारी है. भारत में तीन वैक्सीन की खोज का काम एडवांस स्तर पर चल रहा है, जिनमें से 2 दूसरे चरण में हैं और एक तीसरे चरण में है. भारतीय वैज्ञानिक और रिसर्च टीम पड़ोसी देशों अफगानिस्तान, भूटान, बांग्लादेश, मालदीव, मॉरीशस, नेपाल और श्रीलंका में अनुसंधान क्षमताओं को सहयोग और मजबूत कर रहे हैं. साथ ही बांग्लादेश, म्यांमार, कतर और भूटान से अपने यहां क्लीनिकल ट्रायल की गुजारिश की गई है. हालांकि इन सबमें पाकिस्तान शामिल नहीं है. वैश्विक समुदाय की मदद करने के प्रयास में प्रधानमंत्री मोदी ने आगे निर्देश दिया कि हमें अपने अपने प्रयासों को तत्काल पड़ोसी देशों तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि वैक्सीन वितरण प्रणाली के लिए वैक्सीनंस, दवाइयां और आईटी प्लेटफॉर्म प्रदान करने के लिए पूरी दुनिया में पहुंचना चाहिए.

कोरोना : नए साल पर मिलेगा वैक्सीन का तोहफा, देशभर में डिस्ट्रीब्यूशन की प्लानिंग पर काम शुरू

नई दिल्ली.. देश के लिए अच्छी खबर है। कोरोना वैक्सीन पर तेजी से काम हो रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने मंगलवार को कहा कि उम्मीद है कि जैसे ही नया साल शुरू होगा, देश में कोरोना की वैक्सीन उपलब्ध हो जाएगी, वह भी एक से ज्यादा सोर्स के जरिए। देशभर में इसके डिस्ट्रीब्यूशन की प्लानिंग पर काम शुरू हो गया है। उम्मीद है कि जुलाई 2021 तक हम देश में वैक्सीन के 40-50 करोड़ डोज मुहैया कराकर देश के 20-25 करोड़ लोगों को वैक्सीन दे सकेंगे। इस बीच, देश में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा 71 लाख 73 हजार 565 हो गया है। 710 लोगों ने दम तोड़ा। देश में एक्टिव केस में 21 दिन की सबसे बड़ी गिरावट आई है। 24 घंटे में 25 हजार केस कम हुए हैं। इससे पहले 21 सितंबर को 28 हजार 653 केस कम हुए थे। मोदी बोले- जब तक दवाई नहीं, तब तक ढिलाई नहीं महाराष्ट्र में कोरोना के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा- ‘जब तक दवाई नहीं, तब तक ढिलाई नहीं। मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग के मामले में लापरवाही न बरती जाए।’ मोदी ने डॉ. बालासाहेब विखे पाटिल की बायोग्राफी रिलीज होने के मौके पर यह बात कही। देश में पिछले दो हफ्तों में 10 लाख मामले बढ़े हैं। हालांकि, 24 घंटे में सामने आने वाले संक्रमितों की औसत संख्या अब 72 से 74 हजार के बीच हो गई है। दो हफ्ते पहले हर दिन 90 हजार से ज्यादा मामले सामने आते थे। अब तक 62.24 लाख मरीज ठीक हो चुके हैं, जबकि 1 लाख 9 हजार 894 मरीजों की मौत हो चुकी है। रिकवरी का आंकड़ा बढ़ने से एक्टिव केस भी कम हो रहे हैं। बीते 24 घंटे में 71 हजार 559 लोग ठीक होने के साथ एक्टिव केस की संख्या घटकर 8.61 लाख हो गई। लगातार चार दिनों से देश में एक्टिव केस की संख्या 9 लाख से नीचे रही। ये आंकड़े covid19india.org के मुताबिक हैं।

कोरोना पर अध्ययन : 70 फीसदी रोगी नहीं फैलाते वायरस 

नई दिल्ली . कोरोना के 70 फीसदी रोगी वायरस नहीं फैलाते हैं। इस बात की जानकारी आंध्रप्रदेश-तमिलनाडु में किए गए एक अध्ययन से हुई है। अमेरिका स्थित सेंटर फॉर डिसीज, डायनेमिक्स एंड इकोनॉमिक पॉलिसी (सीडीडीईपी) द्वारा आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में किए गए एक नवीनतम अध्ययन से पता चला है कि कोरोना से संक्रमित सभी व्यक्ति वायरस को प्रसारित नहीं करते हैं। हालांकि, हमउम्र बच्चों में संक्रमण का प्रसार ज्यादा बताया गया है। आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में कोरोना महामारी विज्ञान और संचरण गतिकी शीर्षक से अध्ययन साइंस पत्रिका के 30 सितंबर के संस्करण में प्रकाशित हुआ था। इस बाबत आंध्र प्रदेश सरकार के एक अधिकारी ने कहा कि बर्कले में सीडीडीईपी, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु सरकारों और कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के जांचकर्ताओं के एक दल ने 575,071 व्यक्तियों में बीमारी के संचरण पैटर्न का अध्ययन किया, जिसमें कोरोना के 84,965 मामलों की पुष्टि हुई। अधिकारी ने दावा किया कि आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के राज्यों में हजारों संपर्क प्रशिक्षकों द्वारा एकत्र किए गए आंकड़ों के आधार पर महामारी विज्ञान का अब तक का सबसे बड़ा और सबसे व्यापक विश्लेषण है। अध्ययन के अनुसार, उजागर संपर्कों के संभावित अनुवर्ती परीक्षण से पता चला कि 70 प्रतिशत संक्रमित व्यक्तियों ने अपने किसी भी संपर्क को संक्रमित नहीं किया था, जबकि 8 प्रतिशत संक्रमित व्यक्ति 60 प्रतिशत नए संक्रमणों के लिए जिम्मेदार थे। अध्ययन में उन बच्चों में संक्रमण का उच्च प्रसार पाया गया, जो अपनी उम्र के आसपास के मामलों के संपर्क में थे। सूचकांक मामले से एक करीबी संपर्क में संचरण का जोखिम समुदाय में 2.6 प्रतिशत से लेकर घर में 9.0 प्रतिशत तक है। समान-आयु वाले संपर्क सबसे बड़े संक्रमण जोखिम से जुड़े हैं। हालांकि, इन दोनों राज्यों में 40-69 वर्ष की आयु में मृत्यु दर अधिक है। यह 5-17 वर्ष के आयु वर्ग के लोगों में 0.05 प्रतिशत और 85 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में 16.6 प्रतिशत है। सीडीडीईपी के निदेशक डॉ. रामनयन लक्ष्मीनारायण के अनुसार, यह अध्ययन आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में महत्वपूर्ण संपर्क-ट्रेसिंग प्रयास से संभव हुआ, जिसमें हजारों स्वास्थ्य कार्यकर्ता शामिल थे।

कोरोना : जुलाई 2021 तक देश के 25 करोड़ लोगों तक पहुंचेगी वैक्सीन, 40 से 50 करोड़ डोज बनाने पर फोकस

केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने रविवार को कहा कि केंद्र सरकार देश के हर एक नागरिक तक वैक्‍सीन पहुंचाने की तैयारियां कर रही है। इस पर एक हाई लेवल कमेटी काम कर रही है। उन्होंने कहा, ”सरकार का लक्ष्य है कि जुलाई 2021 तक 20-25 करोड़ भारतीयों तक कोविड-19 वैक्सीन पहुंचाई जा सके। इसके लिए हमारा फोकस है कि हम तब तक वैक्सीन की 40 से 50 करोड़ डोज हासिल कर सकें। इसकी प्लानिंग पर काम चल रहा है। जरूरतमंदों को पहले मिलेगी वैक्सीन डॉ. हर्षवर्धन ने कहा, ”वैक्सीन तैयार होने के बाद, टीकाकरण का काम होगा। हेल्थ मिनिस्ट्री इसके लिए एक फॉर्म तैयार कर रही है। इसमें सभी स्टेट ऐसे लोगों की डिटेल्स देंगे, जिन्हें वैक्सीन की पहले जरूरत है। खासतौर पर कोविड-19 के मैनेजमेंट में लगे हेल्थ वर्कर्स, पुलिस स्टाफ आदि शामिल हैं। अक्टूबर तक इसकी प्लानिंग पर काम हो जाएगा। वैक्सीन के स्टोरेज के लिए स्टेट से कोल्ड चेन के अलावा वैक्सीन स्टोरेज और डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़ी जानकारी भी मांगी गई है। देश में अब तक 65 लाख 53 हजार केस आ चुके हैं। इनमें 55 लाख 9 हजार लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि 9 लाख 37 हजार मरीजों का इलाज चल रहा है। ये आंकड़े covid19india.org के मुताबिक हैं।

क्या भारत में गुजर गया कोरोना वायरस संक्रमण का पीक ? रिकवरी रेट 100% बढ़ा

नई दिल्ली। भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले साढ़े 61 लाख के करीब पहुंच चुके हैं। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से मंगलवार सुबह 8 बजे जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक पिछले 24 घंटे में 70,589 नए मामले सामने आने के बाद देश में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 61,45,291 हो गई। पिछले कुछ दिनों से कोविड-19 के डेली केसेज में कमी आई है तो क्या भारत में कोरोना का पीक गुजर चुका है? आइए आंकड़ों के जरिए इस सवाल का जवाब तलाशते हैं। भारत में 12 सितंबर से 22 सितंबर तक कोरोना वायरस संक्रमण के हर दिन 90,000+ मामले सामने आए। 17 सितंबर को 93,199 नए मामले सामने आए जो अब तक किसी एक दिन में संक्रमण का सबसे बड़ा आंकड़ा है। हालांकि, पिछले कुछ दिनों से कोरोना के नए मामलों में लगातार गिरावट आ रही है। देश में करीब एक महीने बाद मंगलवार को कोविड-19 के एक दिन में 75 हजार से कम नए मामले सामने आए और एक हजार से कम लोगों की मौत हुई है। भारत में पहली बार नए मामलों में लगातार गिरावट पहली बार भारत में कोरोना के मामलों में इतने लंबे समय तक लगातार गिरावट देखने को मिली है। इस दौरान एवरेज डेली टेस्ट भी बढ़े हैं, फिर भी नए मामलों में थोड़ा ही सही लेकिन लगातार गिरावट उम्मीदें बढ़ाने वाला है। इसी तरह टेस्ट पॉजिटिविटी रेट भी 8.7 प्रतिशत से गिरकर 7.7 प्रतिशत पर आ चुका है। भारत में कोरोना के केस लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़े बताते हैं कि बड़ी संख्या में मरीज इस बीमारी को मात भी दे रहे हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, पिछले महीने की तुलना में सितंबर में रिकवरी रेट 100 फीसदी बढ़ा है। वहीं, अब तक सामने आए कुल मरीजों में से 82 फीसदी स्वस्थ्य हो चुके हैं। बता दें, देश में कुल मरीजों का आंकड़ा साठ लाख के पार हो गया है। वहीं एक्टिव मरीजों की संख्या 10 लाख से कम है। जिन राज्यों में पहले कोरोना तेजी से फैल रहा था, वहां अब राहत के संकेत मिल रहे हैं। मसलन दिल्ली में सोमवार को 1984 नए मामले सामने आए जो कि करीब एक महीने में सबसे कम हैं।

इंदौर में कोरोना से सितंबर में 152 मौत, फिर भी सियासी जलसों में जुटाई भीड़

इंदौर। इंदौर में रविवार रात कोरोना रिपोर्ट में 468 नए मामले मिले, जबकि 6 लोगों की मौत भी हुई। इसे मिलाकर संक्रमितों की संख्या अब 23075 हो गई है, जबकि कुल मृतक 551 हो गए। रात में 3 हजार 240 टेस्ट की रिपोर्ट आई, जिसमें 2 हजार 682 निगेटिव मरीज मिले। इंदौर में कोरोना की भयंकर तस्वीर होने के बाद भी सियासी जलसे हो रहे हैं। गौरतलब है कि सांवेर विधानसभा क्षेत्र इंदौर से लगा हुआ है। सांवेर में उपचुनाव हो रहा है. यहां हाल ही में जनसभा हुई। जिसमें सीएम शिवराज सिंह के अलावा सिंधिया ने भाग लिया। इस सभा के लिए प्रशासन के स्तर पर 600 बसों का इंतज़ाम किया गया, इन बसों में गाँव-गाँव से लोगों को लाया गया। इस कोरोना काल में कांग्रेस भी भीड़ जमा कर लोगों को खतरा पैदा कर रही है। हालांकि 18194 लोग अब तक ठीक हो चुके हैं। फिर भी सबसे ज्यादा परेशान करने वाला आंकड़ा लगातार बढ़ रहे पॉजिटिव मरीजों का है। जिले में अभी 4 हजार 330 एक्टिव मरीज हैं। जिले में अब तक 2 लाख 93 हजार 759 सैंपल टेस्ट किए जा चुके हैं। सितंबर के 27 दिनों में 9825 संक्रमित मरीज मिले हैं। वहीं, 152 की मौत हुई है। सबसे संक्रमित क्षेत्र सुदामा नगर रविवार रात 234 क्षेत्रों में संक्रमण मिला, इनमें से तीन क्षेत्र ऐसे थे, जहां पहली बार संक्रमण पहुंचा है। सबसे ज्यादा संक्रमित क्षेत्र सुदामा नगर रहा। यहां पर 17 संक्रमित सामने आए। इसके बाद विजय नगर क्षेत्र में 14 लोग पॉजिटिव मिले। हुजूर गंज में 9 तो गुमास्ता नगर, वीना नगर, हीरा नगर, न्याय नगर और महेश गार्ड लाइन में 8-8 संक्रमित मिले। सूर्यदेव नगर में 7 तो स्कीम नंबर -71, त्रिवेणी नगर, अखंड नगर, लक्ष्मी नगर, सीआईएसएफ, सदाशिव गैलेक्सी, एयरपोर्ट रोड, जिला जेल, कैम्पस रेसिडेंसी एरिया, इंद्रपुरी कॉलोनी में 6-6 लोग संक्रमित मिले। कैलाश मार्ग, मल्हार गंज, आनंद नगर, शिव शक्ति नगर, वैशाली नगर, सिल्वर स्प्रिंग, पिपलिया राव, राजेंद्र नगर, ट्रेजर टाउन, सनकेश्वर सिटी में 5-5 लोगों में संक्रमण दिखाई दिया। स्कीम नंबर 51, राज मोहल्ला, खातीवाल टैंक, एमआईजी कॉलोनी, सिलिकॉन सिटी, कालानी नगर, बियाबानी, क्लर्क कॉलोनी, लसुडिय़ा अभिनवन नगर और सराफा बाजार में 4-4 लोग संक्रमित मिले।

MP : कोरोना ने बढाई सीएम की चिंता, कलेक्टर्स को अधिक सावधानी के निर्देश

भोपाल. कोरोना संक्रमण ने सीएम शिवराज सिंह चौहान की चिंता बढा दी है। उन्होंने प्रदेश के सभी कलेक्टर्स को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक कर कोरोना संक्रमण से अधिक प्रभावी तरीके से निपटने के लिए निर्देश दिए। सीएम ने कोरोना संक्रमण की वर्तमान स्थिति की जानकारी ली और इस संक्रमण से रिकवरी रेट बढाने की दिशा में कार्य करने के लिए व्यवस्थाएं सुनिश्चित कराने को कहा। 80 प्रतिशत हुआ रिकवरी रेट सीएम शिवराज सिंह चौहान ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से कोरोना संक्रमण की वस्तुस्थिति का जिलेवार जायजा लिया। जानकारी लेने के बाद सीएम ने सभी जिला कलेक्टर्स को कोरोना संक्रमण पर प्रभावी नियंत्रण के निर्देश दिए। सीएम ने बताया कि प्रदेश में कोरोना संक्रमण से ठीक होने वालों का रिकवरी रेट 80 प्रतिशत हो गया है। यह अच्छा संकेत है, लेकिन इस संक्रमण को रोकने के लिए और अधिक प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि कोरोना मरीजों के उपचार के लिए सभी संभव व्यवस्थएं सुनिश्चित की जाएं। इन जिलों पर रहा फोकस मुख्यमंत्री शिवराज सिहं चौहान ने जबलपुर, नरसिंहपुर, शहडोल, उमरिया, खरगोन व धार जिलों में कोरोना संक्रमण की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। सीएम ने इन जिलों की अलग से विशेष समीक्षा की और खास तौर पर ध्यान रखने को कहा। उन्होंने कोविड केयर सेंटर्स में मरीजों के एडमिट होने और डिस्चार्ज होने की अवधि की भी समीक्षा की। फीवर क्लीनिक पर विशेष ध्यान रखने के लिए कलेक्टर्स को निर्देशित किया। बैठक में ​​चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग, मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस, अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य मोहम्मद सुलेमान, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव मनीष रस्तोगी आदि शामिल रहे।

ड्रग्स लेने पर कैसा महसूस होता है, आखिर क्यों हैं बॉलिवुड में इसका इतना चलन ?

मुंबई. ड्रग्स के सेवन को लेकर जिस स्तर का हंगामा इस समय हमारे देश में देखने को मिल रहा है, उसका पूरा फोकस इस समय केवल बॉलिवुड है। लेकिन ऐसा नहीं है कि ड्रग्स का कंजंप्शन केवल बॉलिवुड मे होता है। हां लेकिन ड्रग्स केस में फंस चुकी जया साहा ने एनसीबी की पूछताछ में सितारों का बचाव करने के लिए जिस तरह के तर्क दिए हैं, उनसे दिल्ली के जाने माने सायकाइट्रिस्ट एग्री नहीं करते हैं… क्या वाकई ड्रग्स लेने से स्ट्रेस कम होता है? इस बारे में बात करते हुए मैक्स हॉस्पिटल पटपड़गंज (दिल्ली) के सीनियर सायकाइट्रिस्ट डॉक्टर राजेश कुमार कहते हैं कि कोई भी ड्रग हमारे ब्रेन के मिड पार्ट में पहुंचने पर प्लेजर ऐक्टिविटीज के सर्किट में जाकर काम करता है। आमतौर पर ब्रेन का यह हिस्सा सेक्स, फूड, प्लेजर ऐक्टिविटीज, म्यूजिक आदि के कारण ऐक्टिव होता है। ड्रग्स भी ब्रेन के इसी सर्किट पर काम करता है और ड्रग लेने के बाद हाई फील होने लगता है। क्या होती है हाई फीलिंग? –हाई फील करने के दौरान आप खुद को फुल ऑफ एनर्जी महसूस करते हैं। इस दौरान आप आस–पास के माहौल से पूरी तरह कट जाते हैं और तनाव देनेवाली बातों को भूल जाते हैं। इस दौरान आप डिसइनिवेटिव बिहेवियर (जो काम आप एलर्टनेस में नहीं कर सकते) करने लगते हैं और ड्रग्स के असर से कुछ समय के लिए आपकी नींद और थकान गायब हो जाती हैं। हाई फील में होते हैं ‘लो‘ काम –जब व्यक्ति हाई फील करता है तो उसकी कॉन्शियसनेस (चेतन अवस्था) कम हो जाती है, सही और गलत समझने की उसकी क्षमता कम हो जाती है। किस काम को करना है और किसे नहीं उसे यह तय करने में भी मुश्किल होती है। इस कारण उनका व्यवहार सामान्य स्थिति की अपेक्षा में बहुत अधिक बदल जाता है। इस अवस्था में लोग रेप, ऐक्सिडेंट, चोरी और दूसरे इंपल्सिव बिहेवियर करने लगते हैं, जो कि इस स्थिति में बहुत सामान्य ऐक्टिविटीज हैं। अक्सर इस हाई फील के दौरान व्यक्ति ऐसे काम नहीं कर पाता है, जिनमें पूरी तरह सजगता (फोकस) की जरूरत होती है। क्यों सितारे यूज करते हैं ड्रग्स? –सुशांत डेथ केस से जुड़े ड्रग्स मामले में जेल में बंद जया साहा का कहना है कि फिल्मी सितारे अपने स्ट्रेस और डिप्रेशन को कम करने के लिए ड्रग्स लेते हैं। इस बारे में डॉक्टर राजेश कहते हैं कि यह पूरी तरह एक मिथ है कि एंग्जाइटी और डिप्रेशन में लोग ड्रग्स लेते हैं। अपने क्लीनिकल एक्सपीरियंस के बारे में बात करते हुए डॉक्टर कुमार कहते हैं कि एंग्जाइटी और डिप्रेशन के इलाज में कुछ खास पेथी की सीमित दवाओं को छोड़ दिया जाए तो कोई मेडिसिन ऐसी नहीं है, जिसके कॉम्पोनेंट इन ड्रग्स से मिलते–जुलते भी हों। जबकि ड्रग्स का सेवन करने से इन बीमारियों के लक्षण बढ़ जरूर जाते हैं। –आमतौर पर एडिक्शन के शिकार लोग फिर भले ही वे सिलेब्रिटी ही क्यों ना हों, ड्रग्स का सेवन फन के लिए करते हैं। लेकिन वो लोग हमेशा किसी और को अपने ड्रग्स अडिक्शन का कारण बताते हैं। मतलब वे अपने ऊपर जिम्मेदारी ना लेकर किसी और पर प्रोजेक्ट करते हैं या कहिए कि दोषी ठहराते हैं, इसे सायकॉलजी की भाषा में डिफेंस मैकेनिज़म कहा जाता है। –ड्रग लेनेवाले लोग अलग–अलग कारण देते हैं कि हमने ड्रग्स का सेवन इस कारण किया या उस कारण किया… जैसा कि वे उदाहरण देते हैं कि इन देशों में तो लीगलाइज है ड्रग्स लेना, इसलिए भारत में भी इन्हें लेने की छूट होनी चाहिए। जबकि उन्हें बात की जानकारी नहीं होती है कि जिन देशों में इन ड्रग्स पर पाबंदी नहीं है, वहां भी मेंटल इलनेस के इलाज के लिए इन ड्रग्स का सेवन नहीं किया जाता है। हर प्रफेशन में है स्ट्रेस –डॉक्टर राजेश कहते हैं कि जितना पेन आपको सफलता के स्तर पर पहुंचने के लिए लेना पड़ता है, उससे अधिक पेन आपको सफलता की ऊंचाइयों पर बने रहने के लिए लेना पड़ता है। लेकिन यह बात सिर्फ बॉलिवुड पर नहीं बल्कि हर प्रफेशन पर लागू होती है। इसलिए इस कारण को वैलेड नहीं माना जा सकता कि बॉलिवुड सितारे स्ट्रेस कंट्रोल करने के लिए ड्रग्स लेते हैं। स्ट्रेस से बचने के लिए क्या करें –डॉक्टर राजेश के अनुसार, स्ट्रेस कम करने के कई दूसरे तरीके होते हैं, जो आपको शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाने का काम करते हैं। इनमें माइंडफुलनेस प्रैक्टिस, मेडिटेशन, योगा और अन्य स्प्रिचुअल प्रैक्टिस की जा सकती हैं। आप सायकाइट्रिस्ट से ट्रीटमेंट, सायकॉलिजस्ट से काउंसलिंग या स्प्रिचुअल काउंसलिंग ले सकते हैं। ये सभी स्ट्रेस से लड़ने के हेल्दी तरीके हैं। – यदि आप अपना तनाव कम करने के लिए ड्रग्स लेते हैं तो आप बस कुछ देर के लिए अपने स्ट्रेस को दूर कर पाते हैं। लेकिन इसके साथ ही खुद को अन्य समस्याओं में झोंक रहे होते हैं। इनमें मेंटल और फीजिकल दोनों तरह की बीमारियां शामिल हैं।

ताउम्र शुगर की बीमारी से बचाकर रख सकता है एलोवेरा, जानें इसे खाने के और भी फायदे

भोपाल. ग्वारपाठा, घृतकुमारी या एलोवेरा आपकी त्वचा की सुंदरता के लिए जितना उपयोगी है, उतना ही लाभकारी आपकी सेहत के लिए भी है। हम सभी चाहते हैं कि हमारा शरीर हमेशा निरोग रहे। तो प्राकृतिक आयुर्वेदिक औषधियों में एलोवेरा एक ऐसी ही औषधि है, जिसका सेवन नियमित रूप से करने पर किसी भी तरह की बीमारियां शरीर पर हावी नहीं हो पाती हैं। आइए, जानते हैं ग्वारपाठा खाने का सही तरीका और इसके फायदे… क्यों खाना चाहिए एलोवेरा? –एलोवेरा को एक सर्वगुण संपन्न पौधा भी कहा जाता है। क्योंकि आपकी सेहत से जुड़ी कोई समस्या हो या सौंदर्य से जुड़ी समस्या, हर पीड़ा को हरने के गुण इस पौधे में मौजूद होते हैं। शायद यही वजह है कि मिश्र की प्राचीन सभ्यता में घृतकुमारी को अमरता प्रदान करनेवाला पौधा कहा जाता था। –एलोवेरा में ऐंटिबैक्टीरियल, ऐंटिफंगल और ऐंटिमाइक्रोबियल तत्व पाए जाते हैं। यही कारण है कि कोई बीमारी आपकी त्वचा से जुड़ी हो या शरीर के अंदरूनी हिस्सों से, एलोवेरा खाने का फायदा शरीर के हर अंग को मिलता है। इन समस्याओं से बचाता है –अपने दैनिक जीवन में आप खान–पान और लाइफस्टाइल से संबंधित कई भूल कर जाते हैं। जिस कारण कभी दांत दर्द, पेट दर्द, कब्ज, अपच, उल्टी, लूजमोशन, सिर दर्द जैसी समस्या हो जाती है। लेकिन अगर आप हर दिन एलोवेरा जूस या इसके गूदे का सेवन करेंगे तो आपको इन समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा। कभी नहीं होती ये बीमारियां –नियमित रूप से सीमित मात्रा में एलोवेरा का सेवन करने से रोगी को कभी भी डायबिटीज, हाई कॉलेस्ट्रोल, हाइपरटेंशन जैसी गंभीर बीमारियों का सामना नहीं करना पड़ता है। क्योंकि एलोवेरा का सही प्रकार से सेवन करने पर आपके शरीर में कोई विकार पनप ही नहीं पाता है। इस कारण आप हर तरह की बीमारियों से बचे रहते हैं। इन बीमारियों में देता तुरंत लाभ –पेट में तेज जलन हो रही हो या सीने पर जलन की समस्या तब आप एलोवेरा की एक पत्ती को छीलकर उसके गूदे में धोड़ा–सा शहद मिलाएं और इस मिश्रण का सेवन धीरे–धीरे चाटकर करें। आपको सीने और पेट की जलन से छुटकारा मिलेगा। –ग्वारपाठा छीलकर उसके गूदे में थोड़ी–सी चीनी मिलाकर रोगी को पिला दें। कैसा भी पेट दर्द हो उसे कुछ ही मिनटों में आराम मिल जाएगा। –यदि रसोई का कोई काम करते हुए या किसी अन्य काम के दौरान आपकी त्वचा जल जाती है तो आप तुरंत इस जली हुई जगह पर एलोवेरा का गूदा लगा लें। इससे आपकी त्वचा की जलन तुरंत शांत होगी। साथ ही फफोले कम पड़ेंगे और त्वचा पर जले हुए का निशान गहरा नहीं बन पाएगा। दिव्य अनुभूती कराती है घर पर तैयार की गई यह ड्रिंक, एक बार जरूर ट्राई करें सेवन से जुड़ी जरूरी बातें –एलोवेरा का सेवन करने के बारे में यह बात अच्छी तरह जान लें कि आपको इसके सेवन से कोई हानि नहीं होगी अगर आप हर दिन सीमित मात्रा में इसका सेवन करेंगे। –अति तो हर चीज की वर्जित होती है, इस कारण आपको अपनी उम्र और सेहत के अनुसार ही एलोवेरा की सही मात्रा का निर्धारण करना होगा। इस बारे में आयुर्वेदिक चिकित्सक आपको सही सलाह दे सकते हैं। –यदि आप युवा हैं और स्वस्थ हैं। यानी आपको किसी भी तरह का गंभीर रोग नहीं है तो आप हर दिन एलोवेरा की पत्ती का दो इंच भाग खा सकते हैं। जूस पीना चाहें तो आप हर दिन चाय के कप से आधा कप जूस पी सकते हैं। –गर्भवती महिलाओं को किसी भी जूस या फल का नियमित सेवन करने से पहले अपनी डॉक्टर से परामर्श अवश्य लेना चाहिए। क्योंकि प्रेग्नेंसी के दौरान हर महिला के शरीर में हॉर्मोन्स की स्थिति अलग हो सकती है, जिससे उसकी हेल्थ संबंधी जरूरतें भी अलग–अलग हो सकती हैं। इस स्थिति में आपकी डॉक्टर की सलाह के बाद ही आप एलोवेरा का सेवन करें।

गैस के कारण हो रहा है पेट दर्द तो ये घरेलू नुस्खे दिलाएंगे तुरंत आराम

भोपाल. पेट में दर्द होना एक आम समस्या है। कई बार अचानक यह दर्द शुरू हो जाता है और आप सोच में पड़ जाते हैं कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? काफी देर सोचने के बाद भी आप नहीं जान पाते कि आपने ऐसा क्या खाया है या पिया है जिसके कारण पेट दर्द हो रहा है, जबकि कई बार आपको पता भी चल जाता है कि किस कारण आपके पेट में गैस बन रही है और आपको दर्द झेलना पड़ रहा है। आइए, यहां जानते हैं उन घरेलू नुस्खों के बारे में जो आपको पेट दर्द से तुरंत राहत दिलाने का काम करेंगे… पेट में गैस का दर्द होने के लक्षण –अगर आपके मन में यह सवाल आ रहा है कि इस बात का पता कैसे लगाएं के पेट में दर्द गैस के कारण हो रहा है तो इसका उत्तर यह है कि गैस के कारण जब भी दर्द होता है वह पेट में किसी एक स्थान पर नहीं होता है। –गैस यानी वायु और वायु की प्रकृति होती है कि वह किसी भी एक स्थान पर नहीं ठहरती है। इस कारण गैस से होनेवाला दर्द या तो आपको पूरे पेट में अनुभव होगा या कभी पेट के एक हिस्से में और कुछ ही देर बाद पेट के दूसरे हिस्से में होने लगेगा। –गैस के कारण होने वाले दर्द के समय पेट फूला हुआ और बहुत टाइट अनुभव होता है। यह जरूरी नहीं है कि गैस का दर्द आपके पेट तक ही सीमित रहे। यह शरीर के अन्य हिस्सों में भी पहुंच सकता है। –इस तरह का दर्द होने के दौरान यदि डकार आती है या वायु पास होती है तो व्यक्ति को दर्द में राहत मिलती है। –गैस के कारण होनेवाले दर्द के दौरान बार–बार वायु पास होने या डकार आने की प्रक्रिया भी लगातार चलती रह सकती है। ऐसा उस स्थिति में होता है ,जब पेट में बहुत अधिक गैस बन रही होती है। क्यों बनती है पेट में गैस? –हमारा शरीर पंचतत्वों से बना हुआ है। इन्हें पंचमहाभूत भी कहा जाता है। इनमें जल, वायु, अग्नि, आकाश और पृथ्वी शामिल हैं। ये सभी तत्व शरीर में संतुलित अवस्था में रहते हैं तो आप भी खुद को स्वस्थ और ऊर्जावान अनुभव करते हैं। –लेकिन यदि किसी भी कारण से इन तत्वों के संतुलन में दिक्कत हो जाती है तो शरीर में अलग–अलग तरह की पीड़ा होने लगती है। जैसे, वायु अधिक होने पर दर्द की समस्या होने लगती है। –जब आप भोजन करते हैं तो उसे पचाने के दौरान शरीर में वायु या गैस का उत्सर्जन होता है। पाचन के दौरान उत्पन्न हुई यह गैस, डकार या वायु ( Fart) के रूप में शरीर से बाहर निकल जाती है तो कोई समस्या नहीं होती है। लेकिन यदि किसी भी कारण से यह गैस शरीर में ही रुकी रहती है तो दर्द का कारण बनती है। गैस से होनेवाले पेट दर्द के घरेलू उपचार –पेट में यदि गैस के कारण दर्द हो रहा हो तो आप हरे पुदीने की 5 से 6 पत्तियां धुल लें और इन्हें काले नमक के साथ धीरे–धीरे चबाकर खाएं। कुछ ही मिनटों में आपको वायु पास हो जाएगी और दर्द से राहत मिलेगी। –पेट में बननेवाली गैस की समस्या को दूर करने में अजवाइन सीड्स आपकी सहायता कर सकते हैं। आप 1/4 चम्मच अजवाइन लेकर उसे हल्के गुनगुने पानी के साथ खा लें। इसके बाद उलटे हाथ (लेफ्ट हैंड) की तरफ करवट लेकर 10 से 15 मिनट के लिए लेट जाएं। आपको आराम मिलेगा और दर्द दूर होगा। –पेट गैस के कारण होनेवाले दर्द को दूर करने में हींग आपकी सहायता कर सकता है। आप दो चुटकी हींग लेकर उसे कुछ बूंद पानी के साथ घोलकर लिक्विड बना लें। अब थोड़ी–सी कॉटन लेकर इस लिक्विड में भिगो लें और इसे नाभि में लगाकर लेट जाएं। आपको जल्द राहत मिलेगी। –आप 1/4 चम्मच अजवाइन सीड्स (अजवाइन दाना) लें, इतनी ही चीनी और 1 चुटकी काला नमक लें। इन चीजों को आधा गिलास पानी में मिलाएं। अब इसमें आधे नींबू का रस निचोड़कर पी लें। आपको राहत मिलेगी। लेकिन ध्यान रखें कि यह नुस्खा आप सिर्फ गर्मी के मौसम में ही अजमाएं। सर्दी के मौसम में सादे के स्थान पर हल्के गुनगुने पानी का उपयोग करें।

उत्तराखंड के दौरे पर गयीं उमा भारती को कोरोना, हरिद्वार के पास क्वारंटीन

भोपाल। एमपी की पूर्व सीएम उमा भारती की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव हैं। वह अभी उत्तराखंड के दौरे पर हैं। उमा बीते दिनों पहाड़ की यात्रा पर गई थीं। उन्होंने केदारनाथ में दर्शन करते हुए वीडियो भी डाला था। कोरोना पॉजिटिव होने के जानकारी उन्होंने खुद ही ट्वीट कर दी है। रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उमा भारती ने ऋषिकेश और हरिद्वार के बीच स्थित वंदे मातरम कुंज में खुद को क्वारंटीन किया है। उमा भारती ने देर रात ट्वीट कर लिखा है कि मैं आपकी जानकारी के लिए यह डाल रही हूं कि मैंने अपनी पहाड़ यात्रा की समाप्ति के अंतिम दिन प्रशासन को आग्रह करके कोरोना टेस्ट की टीम को बुलवाया, क्योंकि मुझे 3 दिन से हल्का बुखार था। मैंने हिमालय में कोविड के सभी विधिनिषेध एवं सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया। फिर भी मैं कोरोना पॉजिटिव निकली हूं। पूर्व सीएम ने बताया कि मैं अभी हरिद्वार और ऋषिकेश के बीच वंदे मांतर कुंज में क्वारंटीन हूं, जो कि मेरे परिवार के जैसा है। 4 दिन बाद फिर से टेस्ट कराऊंगी और स्थिति ऐसी ही रही, तो डॉक्टरों के परामर्श के अनुसार निर्णय लूंगी। मेरे संपर्क में आए लोगों से अपील है कि वो अपनी कोरोना टेस्ट करवाए एवं सावधानी बरते। गौरतलब है एमपी की पूर्व सीएम उमा भारती एमपी उपचुनाव के लिए चुनाव प्रचार के बाद हिमालय की यात्रा पर निकल गई थीं। यात्रा खत्म कर वह फिर से एमपी की राजनीति में सक्रिय होतीं। लेकिन उससे पहले ही वह कोरोना की चपेट में आ गई हैं। एमपी बीजेपी के नेताओं ने उन्हें जल्द स्वस्थ होने की कामना की है।

MP : एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंची, अस्पताल के रास्ते में ही निकली महिला की जान

बैतूल। मध्य प्रदेश के बैतूल में एम्बुलेंस समय पर नहीं पहुंचने से एक महिला की मौत हो गई। बैतूल के भंडारपानी गांव में सड़क नहीं है और ग्रामीण बांस के झोले में महिला को लादकर अस्पताल के लिए निकले, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है और मामले की जांच की मांग की है। बैतूल के घोड़ाडोंगरी ब्लॉक का भंडारपानी गांव 1800 फीट ऊपर पहाड़ी पर बसा है। यहां जाने के लिए रास्ता नहीं है। भंडारपानी की जग्गोबाई पति इंदर (28) की डिलीवरी पिछले महीने अगस्त में हुई थी जब उसने बेटी को जन्म दिया था लेकिन एक महीने बाद पेट मे दर्द और ब्लीडिंग के कारण उसकी मौत हो गई। परिवार वालों का आरोप है कि एम्बुलेंस और सरकारी सुविधाएं मिल जाती तो उसकी जान बच सकती थी। जग्गो बाई को 9 सितंबर की रात में अचानक दर्द और ब्लीडिंग होनी लगी। 10 सितंबर की सुबह ग्रामीणों ने बांस में कपड़ा बांधकर झोला बनाया और उसे कंधों पर 1800 फीट नीचे इमलीखेड़ा (सड़क तक) ले आए। ग्रामीणों का दावा है कि उन्होंने बुधवार दोपहर 12.46 बजे 108 पर एंबुलेंस के लिए फोन किया। भोपाल से सूचना मिली कि घोड़ाडोंगरी की एंबुलेंस ढाई घंटे बाद मिल पाएगी। इसके बाद नूतन डंगा गांव के सरपंच साबू लाल, सचिव मालेकार सरकार ने प्राइवेट वाहन की व्यवस्था की और घोड़ाडोंगरी अस्पताल के लिए महिला व परिजनों को रवाना किया। गांव से 10 किमी दूर तबियत बिगड़ने पर रास्ते में आमढाना उप स्वास्थ्य केंद्र में इलाज के लिए दिखाया गया लेकिन महिला की मौत पहले ही हो चुकी थी। श्रमिक आदिवासी संगठन के राजेंद्र गढ़वाल ने कहा उन्होंने 108 पर एंबुलेंस के लिए फोन किया था, लेकिन एंबुलेंस नहीं आई। पीड़िता एंबुलेंस का इंतजार करती रही। अगर एंबुलेंस समय पर आ जाती तो शायद महिला की मौत नहीं होती। उन्होंने सरकार से पीड़ित परिवार के लिए राहत की मांग भी की है।

विटामिन D हो पर्याप्त तो कोरोना वायरस से मौत का खतरा आधा: स्टडी

भोपाल। कोरोना वायरस के जिन मरीजों में पर्याप्त मात्रा में विटामिन D की मात्रा मौजूद होती है उनकी मौत का खतरा 52 फीसदी कम होता है. एक नई स्टडी में इस बात की जानकारी मिली है. अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने यह स्टडी की है. रिसर्चर्स को इस बात की जानकारी मिली है कि जिन मरीजों में विटामिन डी की मात्रा पर्याप्त रूप से मौजूद थी, वैसे मरीजों के हॉस्पिटल में भर्ती होने के बाद मौत का खतरा आधा हो गया. वहीं, गंभीर रूप से बीमार पड़ने का खतरा भी विटामिन डी की वजह से 13 फीसदी कम पाया गया. स्टडी के दौरान पता चला कि जिन मरीजों में विटामिन डी की पर्याप्त मात्रा मौजूद है, उनके वेंटिलेटर पर रखे जाने की जरूरत भी 46 फीसदी कम हो गई. वैज्ञानिकों का कहना है कि व्यक्ति के इम्यून सिस्टम में विटामिन डी का अहम रोल होता है जिसकी वजह से कोरोना मरीजों को फायदा होता है. बता दें कि औसतन अमेरिका के 42 फीसदी लोगों में विटामिन डी की कमी पाई जाती है. वहीं, अश्वेत और बुजुर्ग लोगों में भी तुलनात्मक रूप से विटामिन डी की कमी अधिक होती है और ऐसे लोग कोरोना के भी अधिक शिकार हो रहे हैं. इससे पहले बोस्टन यूनिवर्सिटी के ही माइकल हॉलिक को एक रिसर्च में पता चला था कि ऐसे लोग जिनमें पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी मौजूद है, उनके कोरोना वायरस से संक्रमित होने का खतरा 54 फीसदी कम होता है. पिछली स्टडी को ही आगे बढ़ाने पर वैज्ञानिकों को कोरोना मरीजों और विटामिन डी के संबंधों को लेकर नई जानकारी मिली. हॉलिक की टीम ने तेहरान के अस्पताल के 235 कोरोना मरीजों के सैंपल लिए थे. कुल 67 फीसदी मरीजों में विटामिन डी की मात्रा 30 ng/mL से कम थी. एक्सपर्ट का कहना है कि अन्य बीमारियों से जूझ रहे लोगों में भी विटामिन डी की मात्रा कम होती है, इसलिए स्पष्ट तौर से यह कहना मुश्किल है कि विटामिन डी की कमी नहीं होती तो कितने लोगों की जान बच सकती थी.

MP : न डॉक्टर देखते हैं, न दवा देते हैं, मरीज की पत्नी ने मंत्री को गिनाईं खामियां

भोपाल। पति को कोरोना होने पर 5 दिन पहले ही जेपी अस्पताल में भर्ती किया है, ना डॉक्टर देखने आते हैं और ना वार्ड ब्वॉय दवाई खिलाते हैं। नर्सों को कुछ बोलो तो वो दुत्कार देती हैं। मरीज को खाना खिलाने और बाथरूम कराने के लिए कोई तैयार नहीं है। ऐसे में मजबूरन मैं कोरोना के आईसीयू में जाकर पति को दवा और खाना खिलाती हूं। मैं जानती हूं कि मुझे संक्रमण का खतरा है, इसलिए 5 दिन से अस्पताल में ही पड़ी हूं। घर में छोटे-छोटे बच्चे अकेले हैं। अपनी मजबूरी और अस्पताल प्रबंधन की यह लापरवाही 12 नंबर स्टॉप पर रहने वाली आशा शर्मा ने शनिवार दोपहर 2 बजे जेपी अस्पताल पहुंचे चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग को सुनाई। इस पर मंत्री ने अस्पताल प्रबंधन को फटकार लगाई और स्वास्थ्य आयुक्त संजय गोयल को व्यवस्थाएं दुरुस्त करने को कहा। साथ ही आशा को भरोसा दिलाया कि उनके पति का बेहतर इलाज किया जाएगा। मंत्री सारंग जेपी अस्पताल में कोरोना मरीज संतोष रजक की मौत और रजक की बेटी की ओर से लगाए गए आरोपों की हकीकत देखने अस्पताल पहुंचे थे। मंत्री ने जेपी अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. आरके तिवारी और डॉ. योगेंद्र श्रीवास्तव को फटकार लगाई। मंत्री सारंग ने बताया कि मृतक संतोष रजक के मामले की जांच के लिए स्वास्थ्य आयुक्त को बोला है। लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद देर शाम जेपी अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. आरके तिवारी को हटा दिया गया। इनके स्थान पर डॉ. राकेश श्रीवास्तव को यह जिम्मेदारी सौंपी। मंत्री की फटकार के बाद चिरायु भेजा- मंत्री सारंग ने आशा से पूछा कि आप क्या चाहती हैं। इस पर आशा ने साफ कहा कि यहां इलाज ही नहीं हो रहा है, आप मेरे पति को चिरायु अस्पताल में शिफ्ट करा दो। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग का अमला सक्रिय हुआ और एक घंटे में एंबुलेंस से सुरेश को चिरायु अस्पताल भेज दिया गया। इससे पहले मंत्री सारंग ने कोरोना पॉजिटिव मृतका संतोष की बेटी प्रियंका की ओर से लगाए गए आरोपों का वीडियो जेपी के सिविल सर्जन डॉ. तिवारी समेत अन्य जिम्मेदारों को दिखाया। उनसे हकीकत पूछी। इस पर उन्होंने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया और कहा था कि परिजन तो झूठे आरोप लगा रहे हैं।

कोरोना : राहत … अब एक्टिव केस कम हो रहे, 14 दिन पहले 9.73 लाख थे, अब 9.61 लाख

नई दिल्ली. देश में कोरोना संक्रमितों का आंकड़े अब कुछ राहत दे रहे हैं। बीते आठ में से सात दिनों में नए संक्रमितों से ठीक होने वालों की संख्या ज्यादा रही है। शुक्रवार को भी 85 हजार 465 संक्रमितों की पहचान हुई, जबकि 93 हजार 166 ठीक हो गए। इससे एक्टिव केस लगातार कम हो रहे हैं। 14 दिन पहले 12 सितंबर को 9.73 लाख एक्टिव केस थे, जबकि 25 सितंबर को यह 9.61 लाख हो गए। देश में अब तक 59 लाख 1 हजार 571 लोग संक्रमित हो चुके हैं। इनमें 48 लाख 46 हजार 168 लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि 93 हजार 410 मरीजों की मौत हो चुकी है। ओडिशा देश का 8वां राज्य हो गया है, जहां संक्रमितों की संख्या 2 लाख से अधिक हो चुकी है। शुक्रवार को यहां 4208 नए केस मिले। इसी के साथ संक्रमितों की संख्या 2 लाख 1 हजार 96 हो गई है। महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, उत्तरप्रदेश, दिल्ली और पश्चिम बंगाल में संक्रमितों की संख्या 2 लाख से ज्यादा हो चुकी है। गुरुवार को रिकॉर्ड 14 लाख 92 हजार 409 लोगों की जांच हुई। कोरोना टेस्टिंग का यह आंकड़ा एक दिन में सबसे ज्यादा है। इसके पहले 19 सितंबर को 12 लाख लोगों की जांच हुई थी। 6.89 करोड़ जांच हो चुकी हैं। अब हर 10 लाख की आबादी में मरीजों के मिलने की संख्या बढ़ गई है। अब इतनी आबादी में 4210 लोग संक्रमित मिल रहे हैं। 20 सितंबर तक 4200 मरीज मिल रहे थे। इतनी ही आबादी में मरने वालों की संख्या भी 67 हो गई है। पीजीआई चंडीगढ़ में शुक्रवार से ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की कोरोना वैक्सीन कोवीशील्ड का ट्रायल शुरू हो गया है। यहां वैक्सीन का डोज लेने के लिए 400 वॉलंटियर्स ने रजिस्ट्रेशन कराया है।

MP : बीमार मां को लेकर बच्चे 3 अस्पतालों में 2 दिन भटके; चौथे दिन बेड मिला, मौत

भोपाल। कोरोनाकाल में इंसानियत भी मरती जा रही है। प्राइवेट अस्पताल हों या सरकारी, सभी जगह बेपरवाह सिस्टम अब लोगों को मार रहा है। भोपाल के कोलार की 43 साल की संतोष रजक इसी बेपरवाही का शिकार हो गईं। वे दो दिन अस्पतालों में आईसीयू बेड के लिए भटकीं। जैसे-तैसे बेड मिला तो ठीक से इलाज नहीं हो पाया। अंत में उन्होंने गुरुवार को दम तोड़ दिया। बंसल में एक रात के इलाज का 41 हजार रु. बिल भरा 12 सितंबर की शाम करीब 6 बजे मां को सांस लेने में परेशानी हुई तो हर्ष उन्हें सिद्धांता अस्पताल ले गया। यहां हार्ट अटैक के लक्षण बताए तो हम रात 10 बजे बंसल अस्पताल ले गए। यहां कोरोना का सैंपल लिया गया तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई। यहां कोविड आईसीयू बेड नहीं हैं, इसलिए अगले दिन दोपहर तीन बजे हमें एंबुलेंस से जेके अस्पताल भेज दिया गया। बंसल में एक रात के इलाज का हमने 41 हजार रु. बिल भरा। जेके में भी आईसीयू बेड खाली नहीं थे, तो उन्होंने भर्ती नहीं किया। जेके से हमें हमीदिया भेजा, तो वहां रात 9 बजे तक हम बेड का इंतजार करते रहे, लेकिन बेड खाली नहीं होने का कहकर हमें लौटा दिया। फिर हमने पीपुल्स अस्पताल में फोन लगाया तो पता चला, वहां आईसीयू बेड खाली हैं। हम रात 10:20 बजे पीपुल्स हॉस्पिटल पहुंचे। यहां मरीज को भर्ती करने के पहले पांच दिन के 50 हजार रु. जमा करा गए। यहां इलाज महंगा पड़ता, इसलिए 14 की सुबह हमने कलेक्टर अविनाश लवानिया को आवेदन किया। उनके दखल के बाद मां को 14 सितंबर को दोपहर में जेपी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती किया गया। लेकिन, यहां भी इलाज के नाम पर खानापूर्ति हुई। मां की डेथ हुई, तब भी किसी ने हाथ नहीं लगाया यहां रात में अक्सर ऑक्सीजन की सप्लाई बंद हो जाती है, कोई सुनता नहीं है। ऑक्सीजन सिलेंडर खत्म होने पर मरीज के परिजन दूसरे वार्ड से खुद ही लाते हैं। 10 दिन इलाज के बाद जब गुरुवार को मां की डेथ हुई, तब भी किसी ने हाथ नहीं लगाया। हमें आईसीयू में बुलाकर पीपीई किट थमा दी और कहा- खुद पहन लो और अपनी मां को पहना दो। मेरे भाई और परिजनों ने पीपीई किट पहनकर मां को पैकिंग बैग में रखा, फिर उन्हें एंबुलेंस से विश्राम घाट लेकर गए।  

MP : BHOPAL में संक्रमित बैंककर्मी का शव लेकर भटकती रही बेटी, PPE किट भी नहीं

भोपाल। भोपाल के जेपी हॉस्पिटल 1250 में कोरोना संक्रमित एक महिला की मौत के बाद उनकी बेटी ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। उसका कहना है कि अपने चाचा के साथ वह मां का शव लेकर भटकती रही। पहले तो इलाज में देरी की गई। ऑक्सीजन सप्लाई सही से नहीं हुई। अस्पताल प्रबंधन ने कोई जवाब नहीं दिया राजधानी भोपाल निवासी प्रियंका ने बताया कि वह अस्पताल से कलेक्टर और मंत्री के दरवाजे तक खटखटा आई, लेकिन मदद नहीं मिली। मौत के बाद भी उसकी मां को सुकून नहीं मिला और उन्हें यूं ही छोड़ दिया गया। परिजनों ने ही रात में शव को मोर्चरी में रखा। 43 साल की मां संतोष भोपाल कोऑपरेटिव सेंट्रल बैंक कोटरा सुल्तानाबाद ब्रांच में कार्यरत थीं। पिता की 8 साल पहले मौत के बाद मां को अनुकंपा नियुक्ति मिली थी। वह 14 सितंबर को कोरोना पॉजिटिव हुई थीं। दो प्राइवेट अस्पतालों में उनसे 50-50 हजार महज 18 घंटे के अंदर ले लिए गए, लेकिन इलाज अच्छे से नहीं किया गया। मजबूर होकर मैं अपनी मां को एंबुलेंस में बिठाकर करीब 13 घंटे तक शहर में इधर से उधर घूमती रही, लेकिन कहीं भी उनकी मां को भर्ती नहीं किया गया। उन्होंने कलेक्टर से गुहार लगाई, तब जाकर जेपी अस्पताल में मां को भर्ती किया गया, लेकिन भर्ती करने के अलावा उनका किसी तरह का इलाज नहीं किया गया। मैं दिन भर अस्पताल के बाहर रहती थी। जरूरत पड़ने पर आईसीयू में जाकर मां की मदद करती थी। खाना-पीना भी उनकी तरफ से ही दिया जाता था। प्रियंका ने आरोप लगाया कि गुरुवार रात मां की मौत हो गई उसके बाद डॉक्टरों ने कहा कि अब तुम शव को ले जाओ। उन्होंने ना तो मां को पीपीई किट पहनाई और ना ही वार्डबॉय तक दिया। प्रियंका ने बताया कि इलाज में लापरवाही को देखते हुए वह मंत्री विश्वास सारंग से भी मिलने गई थी। उन्होंने आश्वासन दिया था कि वह दिखाते हैं, लेकिन उसके बाद भी कुछ नहीं हुआ। मां को काफी तकलीफ हो रही थी। शाम 4:00 बजे मां से मिली थीं। उस दौरान वे ठीक लग रही थीं। उन्होंने बताया कि बीच-बीच में ऑक्सीजन नहीं मिलती है। प्रियंका ने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रबंधन उनसे ही ऑक्सीजन के सिलेंडर भी यहां से वहां रखवाया गया।

MP : दो और मंत्रियों को कोरोना, BMHRC की डायरेक्टर सहित राजधानी में 271 नये मरीज़

भोपाल. मध्य प्रदेश में मंत्रियों के कोरोना पीड़ित होने का सिलसिला जारी है. मंगलवार को फिर दो मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया और हरदीप सिंह डंग की रिपोर्ट पॉजिटिव आयी है. इससे पहले सीएम शिवराज सहित उनके मंत्रिमंडल के कई मंत्रियों को कोरोना हो चुका है. रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया चिरायु अस्पताल में भर्ती हो गए हैं.मिली जानकारी के मुताबिक सिसोदिया अपनी मां का कोरोना टेस्ट कराने चिरायु अस्पताल गए थे. मां की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आयी. जिसके बाद उन्होंने भी अपना टेस्ट कराया. जांच में वे भी संक्रमित मिले. इसके बाद वो मां के साथ ही अस्पताल में भर्ती हो गए. डंग की अपील ऊर्जा मंत्री हरदीप सिंह डंग की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई है.संक्रमित होने के बाद मंत्री डंग ने सोशल मीडिया के ज़रिए ये जानकारी साझा की है.डंग ने ट्वीट कर ये बताया कि उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है, वह अस्पताल में भर्ती हैं.साथ ही ये अपील भी की है कि उनके संपर्क में जो लोग भी आए हैं, वे अपना कोरोना टेस्ट करा लें. यह भी संक्रमण की चपेट में शहर में मिले संक्रमित मरीजों में भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर की डायरेक्टर डॉ. प्रभा देसिकन की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है.भोपाल में उप लोकायुक्त सुशील कुमार पॉलो को भी कोरोना हो गया है. नेशनल ज्यूडिशियल अकेडमी में दो मरीज मिले. जीएमसी में दो, आरकेडीएफ में दो और चिरायु अस्पताल में एक डॉक्टर की रिपोर्ट पॉजिटिव आई.राजभवन में तीन, पुलिस कंट्रोल रूम में दो जवान संक्रमित मिले हैं. मैनिट की स्थापना शाखा के अधीक्षक की पत्नी भी कोरोना से संक्रमित हो गयी हैं. 16 दिन बाद मौत के गिरे आंकड़े राजधानी में संक्रमित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. रोजाना ढाई सौ से ज्यादा नए मरीज मिल रहे हैं.मंगलवार को शहर में 271 नए संक्रमित मिले हैं. लगभग 16 दिन बाद संक्रमितों की मौतों के मामलों में थोड़ी कमी दर्ज की गई है. स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक 16 दिन बाद सिर्फ एक मरीज की मौत हुई है.इससे पहले 7 सितंबर के बुलेटिन में सिर्फ एक मौत रिकॉर्ड हुई थी.

मरीज रातभर में 6 से 7 अस्पताल भटके, नहीं मिले बेड, एक या दो दिन में ही मौत

इंदौर। इंदौर में 80 साल की महिला को 28 अगस्त की रात सांस में तकलीफ होने पर मेदांता अस्पताल ले गए। वहां एक्सरे करने पर पता चला कि निमोनिया है। बेड नहीं होने से अरविंदो अस्पताल भेजा। वहां भी दो घंटे तक बेड नहीं मिला। फिर इंडेक्स ले गए। वहां भी बेड नहीं मिला। वहां से ग्रेटर कैलाश अस्पताल ले गए। बावजूद महिला ने दम तोड़ दिया। यह काेई एक वाक्या नहीं है, ऐसे ढेरों दुखद मामले आपको कोरोनाकाल में सुनाई दे जाएंगे, जहां बेड नहीं मिल पाया और मिला भी तो भर्ती होने के एक दिन बाद ही मरीज ने दम तोड़ दिया। कोरोना संक्रमण से होने वाली मौत के कारणों का पता लगाने के लिए प्रशासन डेथ-ऑडिट करवा रहा है। जिसके लिए 8 सदस्यीय समिति बनाई गई है। इस समिति ने भी इस बार माना है कि मरने वाले कुछ मरीज ऐसे थे जो रातभर कई अस्पताल भटके हैं। उन्हें बेड नहीं होने का बताकर रैफर कर दिया गया। कुछ तो 5 से 7 अस्पताल भटके थे, जिसके कारण कुछ की एक या दो दिन में ही मौत हो गई। इनमें से 90 फीसदी डायबिटीज, अस्थमा और हाइपरटेंशन सरीखी पुरानी बीमारियों से भी पीड़ित थे। इस रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला खुलासा यह भी हुआ डेंगू के एक मरीज को कोरोना के कोई लक्षण नहीं थे। बावजूद अचानक सांस लेने में तकलीफ हुई। अस्पतालों में भटके, लेकिन किसी ने भर्ती नहीं किया। दो दिन बाद वह पॉजीटिव आ गई, लेकिन तब तक उसकी मौत हो गई। धार, झाबुआ, बड़वानी से आए मरीजों को भी यहां लाने में देर की गई। समिति ने सैंपलिंग और क्वारैंटाइन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए कहा गया है। इसमें तीनों मेडिकल कॉलेजों को यह निर्देश दिए गए हैं कि यह जानकारी ली जाए कि मरीजों को क्यों निजी अस्पतालों से रैफर किया जा रहा है। इसके अलावा यह टिप्पणी भी की गई है कि मरीज निजी अस्पताल जाना इसलिए पसंद कर रहे हैं, क्योंकि वहां सफाई और सुविधाएं सरकारी अस्पतालों से बेहतर है। केस 1: 64 वर्षीय महिला को चार दिन से बुखार आ रहा था। डेंगू की जांच कराई तो डेंगू की पुष्टि हुई। फेरिटिन लेवल भी 1600 हो गया। प्लेटलेट्स भी कम हो गए थे। दवा चल रही थी। मरीज काे सर्दी-जुकाम भी नहीं था और सांस लेने में भी कोई दिक्कत नहीं थी। यानी कोरोना बीमारी के कोई लक्षण नहीं थे। 29 अगस्त को अचानक सीने में दर्द हुआ तो उन्हें चोइथराम अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टर ने कहा कि कोरोना नहीं है। अभी भर्ती नहीं कर सकते। वहां भर्ती करने से मना किया। यही स्थिति एप्पल हॉस्पिटल में भी हुई। इसके बाद परिजनों ने इंडेक्स अस्पताल में बात की। वहां पर भी मना कर दिया गया। परिजन फिर मयूर अस्पताल ले गए और महिला को भर्ती करवाया गया। 30 अगस्त को कोरोना वायरस जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई, लेकिन उसी दिन उनकी मौत हो गई। मरीज को डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और मोटापा की समस्या थी। बीमार होने के बाद अस्पताल में यह सिर्फ एक ही दिन भर्ती रहे। केस 2: इसी तरह 58 साल के मरीज को जब सांस लेने में तकलीफ हुई तो उन्हें विशेष हॉस्पिटल ले जाया गया। यह अस्पताल नेमावर रोड पर शिफ्ट हो गया था तो परिजन सुयश अस्पताल ले गए। वह भर्ती करने से मना कर दिया गया। इसके बाद से सैम्स अस्पताल ले गए। जहां बैठ की समस्या के कारण भर्ती नहीं किया गया। परिजन गोकुलदास अस्पताल ले गए तो वहां बताया गया कि बेड खाली हैं, लेकिन ऑक्सीजन की व्यवस्था नहीं है। इसके बाद परिजन राजश्री अपोलो अस्पताल ले गए। वहां भी बेड खाली नहीं था। मेदांता अस्पताल में फोन करने पर पता चला बेड खाली नहीं है। 29 अगस्त को मरीज को सिनर्जी अस्पताल में भर्ती किया गया। जहां पर ऑक्सीजन सेचुरेशन 30 फीसदी बताया गया। 29 अगस्त की सुबह ही उनका ऑक्सीजन लेवल 80 से 87 फीसदी हो गया था, लेकिन उसी दिन उसकी मौत हो गई। मरीज का अस्पताल स्टे केवल एक ही दिन पाया गया।

दूसरे दिन संक्रमितों से ज्यादा ठीक होने वालों की संख्या बढ़ी; देश में 53.98 लाख केस

नई दिल्ली. देश में कोरोना मरीजों की संख्या 53 लाख 98 हजार 230 हो गई है। पिछले 24 घंटे के अंदर रिकॉर्ड 12 लाख से ज्यादा लोगों की जांच हुई। एक दिन में टेस्टिंग का ये सबसे ज्यादा आंकड़ा है। इन 12 लाख लोगों में 7.66% यानी 92 हजार 574 नए मरीज बढ़े। अब तक 42 लाख 99 हजार 724 लोग ठीक हो चुके हैं। शनिवार को 94 हजार 384 मरीजों को ठीक होने के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। अच्छी बात है कि यह लगातार दूसरा दिन था जब देश में संक्रमितों से ज्यादा ठीक होने वालों की संख्या बढ़ी। इसी के साथ भारत अब मरीजों के ठीक होने के मामले में पहले नंबर पर हो गया है। यहां अब तक अन्य देशों की तुलना में सबसे ज्यादा मरीज ठीक हुए हैं। अमेरिका अब दूसरे नंबर पर पहुंच गया है। (भारत में 100 संक्रमितों में से 79 रिकवर, पूरी खबर पढ़ें) मरने वालों का आंकड़ा 86 हजार के पार शनिवार को देश में 1,149 संक्रमितों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इसी के साथ मरने वालों की संख्या अब 86 हजार 774 हो गई है। अभी 10 लाख 10 हजार 975 मरीज ऐसे हैं जिनका इलाज चल रहा है। ये मरीज घर में रहकर या फिर अस्पताल में अपना इलाज करा रहे हैं। इनमें करीब 9 हजार मरीजों की हालत गंभीर है। कल से कोरोना वैक्सीन का आखिरी ट्रायल शुरू होगा कोरोना के लिए बनाए जा रहे ऑक्सफोर्ड वैक्सीन का आखिरी और फेज-3 ट्रायल सोमवार से पुणे में शुरू हो जाएगा। इसके लिए 150 से 200 वालंटियर्स डोज लेने के लिए तैयार हैं।

सरकारी अस्पताल में मिला नवजात का शव, फ्रीजर में रखकर भूला स्टाफ

इंदौर. मध्य प्रदेश के इंदौर के महाराजा यशवंतराव चिकित्सालय अस्पताल के मुर्दाघर में हाल ही में एक लावारिस शव के स्ट्रैचर में ही सड़ जाने और कंकाल बन जाने का मामला सामने आया था. जिसकी तस्वीरें भी सोशल मीडिया में वायरल हुई थीं. ऐसे में जहां एक तरफ मामले की जांच भी पूरी नहीं हो पायी वहीं गुरुवार को एक अज्ञात बच्चे का शव मुर्दाघर में एक बक्से में बंद मिलने से हड़कंप मच गया है. बताया जा रहा है कि यहां बीते पांच दिन से एक बच्चे का शव मर्चुरी रूम के फ्रीजर में रखा था. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नवजात बच्चे की मौत 5 दिन पहले यानी कि 12 सितंबर हो चुकी थी. ऐसे में पांच दिन से शव उसी हालत में फ्रीजर में पड़ा रहा. ऐसे में माना जा रहा है कि अस्पताल प्रशासन बच्चे का शव फ्रीजर में रखकर भूल गया. रिपोर्ट्स के मुताबिक अस्पताल के सूत्रों ने बताया कि बच्चे को 11 सितंबर को किसी ने अलीराजपुर में छोड़ दिया था. जिसे एक सोशल वर्कर उठाकर अस्पताल में भर्ती कर गया. उन्होंने बताया कि उसी दिन इस बच्चे की मौत भी हो गयी थी जिसे सीएमओ को भी बताया गया था. लावारिस शव के सड़ जाने पर आयोग ने मांगी रिपोर्ट वहीं स्ट्रैचर पर शव के सड़ जाने और कंकाल बन जाने के मामले में एक अधिकारी ने बताया कि मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार जैन ने महाराजा यशवंतराव चिकित्सालय (एमवायएच) के मुर्दाघर में स्ट्रैचर पर रखे गये लावारिस शव के सड़ जाने को लेकर जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और इस सरकारी अस्पताल के अधीक्षक से चार हफ्ते में रिपोर्ट मांगी है. ‘लापरवाही के चलते लावारिस शव का अंतिम संस्कार नहीं किया जा सका’ अधिकारी ने बताया कि आयोग ने मीडिया की खबरों पर इस घटना का संज्ञान लिया है. खबरों में कहा गया है कि सरकारी अस्पताल के कर्मचारियों की कथित लापरवाही के चलते लावारिस शव का अंतिम संस्कार नहीं किया जा सका जिससे यह मुर्दाघर में स्ट्रैचर पर पड़े-पड़े सड़ गया और कंकाल बन गया. प्रबंधन ने दिये जांच के आदेश इस बीच, सोशल मीडिया के जरिये मामले का खुलासा होने पर सकते में आये एमवायएच प्रबंधन ने जांच के आदेश दिये हैं. अस्पताल के अधीक्षक प्रमेंद्र ठाकुर ने बताया, “हमने लावारिस शव सड़ने के मामले की जांच के लिये समिति बनायी है. जांच में एमवायएच का जो भी कर्मचारी दोषी पाया जायेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी.”

नाक बहने, छींक आने का मतलब कोरोना नहीं, जानें किस आयु में दिखाई देते हैं कौन लक्षण

नई दिल्ली . बच्चे को नाक बहने, बार-बार छींक आने या सीने में जकड़न की शिकायत हो तो घबराएं नहीं। जरूरी नहीं कि ये लक्षण आपके जिगर के टुकड़े के कोरोना संक्रमण की जद में आने का संकेत हों। मुमकिन है कि वह साधारण सर्दी-जुकाम या फ्लू से जूझ रहा हो। किंग्स कॉलेज लंदन के शीर्ष संक्रामक रोग विशेषज्ञ प्रोफेसर टिम स्पेक्टर ने ‘कोविड सिम्पटम स्टडी ऐप’ से प्राप्त आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर यह दावा किया है। स्पेक्टर ने अभिभावकों से अपील की है कि वे सर्दी-जुकाम से परेशान होकर बच्चे को कोरोना जांच के लिए अस्पताल लेकर न दौड़ें। इससे न सिर्फ टेस्टिंग की प्रक्रिया में शामिल स्वास्थ्यकर्मियों पर काम का दबाव बढ़ रहा है, बल्कि संक्रमितों की समय रहते पहचान कर वायरस के प्रसार पर लगाम लगाने की कोशिशें भी प्रभावित हो रही हैं। एक अनुमान के मुताबिक ब्रिटेन में कोरोना जांच करवाने वाले कुल संदिग्धों में 25 फीसदी ऐसे हैं, जिन्हें टेस्टिंग की जरूरत ही नहीं थी। मामूली सर्दी-जुकाम होने पर भी उन्होंने मन की तसल्ली के लिए कोरोना जांच करवाई। हर आयुवर्ग में अलग लक्षण -स्पेक्टर ने बताया कि सार्स-कोव-2 वायरस से संक्रमित अलग-अलग उम्र के मरीजों में अलग-अलग लक्षण उभर सकते हैं। 18 साल से कम और 65 वर्ष से अधिक उम्र के मरीजों में बुखार, खांसी और सूंघने-स्वाद चखने की क्षमता कमजोर पड़ जाए, यह जरूरी नहीं जबकि इन तीनों ही लक्षणों को व्यक्ति के कोरोना पीड़ित होने की मुख्य निशानी करार दिया जाता है। ऐसे में नाक बहने या छींक आने मात्र पर कोरोना जांच के लिए दौड़ने का कोई फायदा नहीं है। यह समय और संसाधनों की बर्बादी भर है। 52% बच्चों को बुखार-जुकाम नहीं -‘कोविड सिम्पटम स्टडी ऐप’ से मिले आंकड़ों पर नजर डालें तो ब्रिटेन में 18 साल से कम उम्र के 52 फीसदी संक्रमितों में सर्दी-जुकाम, बुखार और सूंघने की शक्ति कमजोर पड़ने जैसे लक्षण नहीं पनपे। वहीं, 33 प्रतिशत बच्चों में तो ऐप में दर्ज 20 में से एक भी लक्षण नहीं दर्ज किए गए। इसका मतलब यह है कि वे ‘एसिम्टोमैटिक’ थे। उनकी पहचान संक्रमित के संपर्क में आने के बाद हुई जांच के चलते की जा सकी। ‘कोविड सिम्पटम स्टडी ऐप’ पर ढाई लाख बच्चों का डाटा दर्ज है। इनमें 198 में कोरोना की पुष्टि हो चुकी है। 90% स्वैब जांच के नतीजे नेगेटिव -ब्रिटिश सरकार की ओर से जारी आंकड़ों पर गौर करें तो देश में रोजाना दो लाख से अधिक संदिग्धों के स्वैब नमूने इकट्ठे किए जा रहे हैं। इससे जांच प्रक्रिया में जुटे स्वास्थ्यकर्मियों का काम धीमा पड़ रहा है और रिपोर्ट में देरी की शिकायत लगातार बढ़ती जा रही है। खास बात यह है कि लगभग 90 फीसदी मामलों में स्वैब जांच की रिपोर्ट नेगेटिव आती है। यानी लोग जल्दबाजी में कोरोना जांच करवा रहे हैं। इससे जो वास्तविक रूप में संक्रमित हैं, उन लोगों की पहचान में देरी हो रही है और कोरोना की रोकथाम में मुश्किल आ रही है। बच्चों में सबसे आम लक्षण- -55% बच्चों को थकान, सुस्ती की शिकायत होती है -54% में सिरदर्द और चक्कर जैसे लक्षण उभरते हैं -49% तेज बुखार और बदनदर्द का सामना करते हैं -38% के गले में खराश होती है, 35% की भूख मिट जाती है व्यस्कों में संक्रमण की निशानी -87% वयस्कों में थकान, सुस्ती की समस्या पनपती है -72% को सिरदर्द और चक्कर की शिकायत सताती है -60% की सूंघने, स्वाद महसूस करने की क्षमता खो जाती है -54% लगातार खांसी तो 49% गले में खराश की समस्या से परेशान रहते हैं

खुशखबरी: धीमी गति से रूप बदल रहा कोरोना अब और ज्यादा संक्रामक नहीं होगा

लंदन . दुनियाभर में तबाही मचाने वाला कोरोना वायरस अब धीमी गति से अपना रूप बदल रहा है। ब्रिटेन की प्रतिष्ठित रॉयल सोसायटी ऑफ लंदन के शोध से यह महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। शोधकर्ताओं का कहना है कि अब तक वायरस के आनुवांशिक तत्वों में हुआ एक भी बदलाव उसे और ज्यादा संक्रामक नहीं बनाता। इससे साफ है कि वायरस फैलने की गति और घातक क्षमता में कमी आई है। जबकि पूर्व के शोध में कहा गया था कि भले वायरस धीमी गति से फैल रहा हो पर ज्यादा घातक हो गया है। टीका बनने पर असरकारी होगा- शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर कोविड-19 वायरस में म्यूटेशन या रूप परिवर्तन बहुत धीमा हो रहा है तो इसका फायदा कोविड का टीका तैयार होने पर मिलेगा। यह टीका ज्यादा लंबे वक्त तक लोगों को वायरस से सुरक्षा दे सकेगा क्योंकि वायरस समय गुजरने के साथ और शक्तिशाली नहीं हो रह पाएगा। वायरस अब स्थायी रूप में मौजूद- कैंब्रिज विश्वविद्यालय से जुड़े और शोध के अग्रणी वैज्ञानिक डॉ. जेफ्री स्मिथ का कहना है कि वायरस रफ्तार और क्षमता के लिहाज से अब ज्यादा स्थायी है। इसकी आसानी से पहचान के साथ सही ढंग से उपचार हो सकता है। रॉयल सोसायटी के साइंस इन इमरजेंसी टास्क फोर्स ने इस अध्ययन को प्री-प्रिंट के रूप में ऑनलाइन प्रकाशित किया है। घातक नहीं बन रही बीमारी- शोधकर्ताओं ने जीनोम शृंखला का अध्ययन कर पाया कि धीमी गति से हो रहे रूप परिवर्तन के बावजूद वायरस के अंदर ऐसे गुण विकसित नहीं हो रहे हैं, जिससे वायरस का नया स्ट्रेन किसी दवा के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर ले। ऐसे में शोधकर्ताओं का भरोसा है कि यह वायरस अब बीमारी को और ज्यादा संक्रामक और जानलेवा नहीं बना रहा है। प्रयोगशाला में तैयार नहीं हुआ वायरस- वैज्ञानिकों ने वायरस की उत्पत्ति का भी अध्ययन किया। उनका कहना है कि वायरस किसी प्रयोगशाला में तैयार नहीं हुआ। सार्सकोव-2 व अन्य वायरसों की आनुवांशिक प्रकृति के बीच इतना अंतर है कि इसे प्रयोगशाला में बनाना असंभव है। वैज्ञानिकों ने ब्रिटेन में फैले कोविड-19 वायरस के स्ट्रेन की ट्रेसिंग की। उन्होंने पाया कि वायरस के 97 प्रतिशत निकटतम गुण वाला एक अन्य वायरस ‘आरएटीजी13’ चीन के चमगादड़ों में मौजूद था। हालांकि दोनों वायरस के आनुवांशिक तत्वों की जांच में काफी भिन्नता मिली। शोधकर्ताओं का कहना है कि कोविड-19 और कोरोना प्रजाति के अन्य वायरस में इतना ज्यादा अंतर है कि इसे लैब में तैयार करना संभव नहीं है। पहले का दावा- नौ गुना तेजी से फैल रहा संक्रमण- जुलाई में सेल पत्रिका में छपे शोध में कहा गया कि वायरस का नया रूप ‘जी614’ पूरी दुनिया में तेजी से संक्रमण फैला रहा है, हालांकि यह संक्रमण पहले के स्ट्रेन की तुलना में ज्यादा घातक नहीं है। कैलिफोर्निया के ला जोला इंस्टीट्यूट फॉर इम्यूनोलॉजी के शोध में कहा गया कि नया स्ट्रेन नौ गुना तेजी से दुनिया में वायरस को फैला रहा है। मार्च की शुरूआत में इसकी मौजूदगी यूरोप में थी और मार्च के अंत तक यह अमेरिका तक फैल चुका था। फरवरी में शुरू हुआ था म्यूटेशन – कोरोना के आनुवांशिक तत्वों में आंशिक बदलाव या म्यूटेशन सबसे पहले फरवरी में देखा गया। डब्ल्यूएचओ का कहना है कि यूरोप से अमेरिका में वायरस का बदला हुआ स्वरूप फैला। रॉयल सोसायटी के शोध का महत्व- रॉयल सोसायटी ऑफ लंदन की स्थापना 1660 में हुई थी, यह ब्रिटेन की सबसे पुरानी वैज्ञानिक संस्था है। कोरोना संक्रमण के इस आपातकाल में रॉयल सोसायटी एक विशेष टास्क फोर्स बनाकर इस वायरस से जुड़े अध्ययन कर रहा है। इस ताजा शोध की अभी समीक्षा होना बाकी है, जिसके बाद इसे जर्नल में प्रकाशित किया जाएगा। पर सोसायटी से जुड़े प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों के अध्ययन को इस क्षेत्र से जुड़े अन्य वैज्ञानिक उम्मीद के तौर पर देख रहे हैं। सोसायटी ने सबसे पहले बताई थी मास्क की जरूरत- रॉयल सोसायटी उन वैज्ञानिक संस्थाओं में से एक है, जिससे सबसे पहले कहा था कि सिर्फ तालाबंदी से संक्रमण नहीं रोका जा सकता। इसके लिए जरूरी है कि सार्वजनिक जगहों पर लोगों को फेसमास्क लगाने को प्रेरित किया जाए और वे शारीरिक दूरी अपनाएं।

भोपाल में रोज 200-250 नए केस, 15 हजार के करीब पहुंचा आंकड़ा

भोपाल। राजधानी भोपाल में कोरोना का कहर थम नहीं रहा है। यहां पर हर रोज कोरोना के 200-250 नए केस मिल रहे हैं। बुधवार को भी यहां पर 245 नए कोरोना मरीज मिले। ऐसे में सरकार कोविड नियंत्रण के लिए स्पेशल ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू करने जा रही है। इसमें इंटर्न, मेडिकल स्टूडेंट, प्राइवेट प्रैक्टिशनर्स, आयुष डॉक्टर और नर्सिंग स्टूडेंट को शामिल किया जाएगा। इसमें कोरोना की रोकथाम और मरीजों के मन से भय को कैसे दूर किया जाए। इसकी ट्रेनिंग दी जाएगी। साथ ही जागरुकता के लिए नए-नए तरीके अपनाने पर भी जोर दिया जाएगा। चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि शहर के 24 प्राइवेट अस्पतालों में कोविड का निशुल्क इलाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जरूरत को देखते हुए अन्य निजी अस्पतालों को भी कोविड सेंटर बनाएंगे। अस्पतालों में आईसीएमआर की गाइडलाइन के अनुरूप उपचार उपलब्ध कराने के दिशा-निर्देश दिए गए हैं। ऑक्सीजन सप्लाई की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। नये अस्पतालों को शामिल करते समय विशेष रूप से देख रहे हैं कि वहां पर ऑक्सीजन की निर्बाध सप्लाई हो रही है या नहीं। हमीदिया में कोविड के लिए 50 बेड और बढ़ेंगे आयुष्मान योजना के तहत इम्पैनल्ड 61 अस्पतालों की टोटल क्षमता 5894 में से 1184 बेड कोविड के लिए डेडिकेटेड किए जाएंगे। हर अस्पताल के साथ जिला प्रशासन के प्रतिनिधि कोऑर्डिनेट करेंगे। हमीदिया अस्पताल में जल्द ही कोविड मरीजों के लिए 50 बेड और बढ़ाए जाएंगे। साथ ही टीबी अस्पताल में 10 बेड का आईसीयू भी शुरू होगा, इससे इसकी क्षमता और बढ़ जाएगी। जूनियर डॉक्टरों के लिए इलाज के लिए जीवन रक्षक दवाइयां दी जाएंगी जीएमसी के जूनियर डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ की मांग को सरकार ने मान ली है। मंत्री सारंग ने कहा कि जूनियर डॉक्टर्स के संक्रमित होने पर उनके कोविड उपचार के लिए रि-इन्वेस्टमेंट मोड पर जीवन-रक्षक दवाइयां उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने गांधी मेडिकल कॉलेज में सुव्यवस्थित कैंटीन और रिक्रिएशन सेंटर बनाने के निर्देश दिए। 5 सरकारी और 10 प्राइवेट अस्पतालों में हो रहा है इलाज राजधानी में कोरोना का इलाज पांच सरकारी और 10 प्राइवेट अस्पतालों में किया जा रहा है। इसमें एम्स, जीएमसी, जे.पी. हॉस्पिटल, कस्तूरबा हॉस्पिटल और मिलिट्री हॉस्पिटल हैं। वहीं अधिग्रहित किए गए अस्पतालों में चिरायु, जेके अस्पताल सहित पीपुल्स, बंसल, आरकेडीएफ, भोपाल केयर हॉस्पिटल, केयर मल्टी स्पेशियलिटी, निर्मल प्रेम मूर्ति हॉस्पिटल, करोंद मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल और एबीएम हॉस्पिटल में इलाज किया जा रहा है। अब 24 अस्पतालों में कोरोना मरीजों का मुफ्त इलाज होगा आयुष्मान योजना के तहत रजिस्टर्ड जिले के 24 अस्पतालों में 20 प्रतिशत बेड कोविड-19 मरीजों के इलाज के लिए आरक्षित करा दिए हैं। यहां मरीजों को नि:शुल्क इलाज मिलेगा। इलाज की राशि सरकार देगी। वर्तमान में 12 से अधिक अस्पताल आयुष्मान योजना के तहत रजिस्टर्ड लोगों के इलाज कर रहे हैं। यहां अभी तक 61 मरीज भर्ती हैं और कोरोना का इलाज करा रहे हैं। दरअसल, प्रदेश सरकार के निर्णय के बाद भोपाल कलेक्टर अविनाश लवानिया ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। गुरुवार से 6 व 19 सितंबर से 6 अन्य अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड वाले लोगों को कोरोना का इलाज मिलना शुरू हो जाएगा। सभी 24 अस्पतालों में 300 से अधिक ऑक्सीजन बेड उपलब्ध होंगे। इन अस्पतालों में मिलेगा इलाज कोलार क्षेत्र में – अक्षय हॉस्पिटल, नोबेल, नर्मदा ट्रामा सेंटर, आरकेडीएफ हॉस्पिटल, पुष्पांजलि, सिद्धांता अस्पताल और सहारा हॉस्पिटल। हुजूर क्षेत्र में – रुद्राक्ष मल्टी सिटी हॉस्पिटल और लीलावती हाॅस्पिटल। गोविंदपुरा क्षेत्र में- केयर मल्टी और अनंतश्री हॉस्पिटल। बैरागढ़ क्षेत्र में – एबीएम, ग्रीन सिटी, एलबीएस, राजदीप, सेंट्रल हॉस्पिटल, गुरु आशीष हॉस्पिटल, जवाहरलाल कैंसर हॉस्पिटल, माहेश्वरी, सर्वोत्तम, सिल्वर लाइन हॉस्पिटल। टीटी नगर क्षेत्र में- पीपुल्स हॉस्पिटल। एमपी नगर में – सहारा हॉस्पिटल और पालीवाल हॉस्पिटल।

वैक्सीन का काम कर रहा मास्क

इंटरनेशनल जर्नल की रिपोर्ट में दावा- 90%वायरस रोक लेता है मास्क और इस तरह से मास्क वैक्सीन का काम कर रहा  | यह दावा इंटरनेशनल रिसर्च जर्नल न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन की हाल ही में प्रकाशित एक ताजा शोध में किया गया है। इस रिपोर्ट को तैयार किया है अमेरिका के सैनफ्रांसिस्को के स्कूल ऑफ मेडिसिन की प्रोफेसर (मेडिसिन) मोनिका गांधी और एपिडियोमॉलिजी एंड बायोइन्फोमैटिक्स के प्रोफेसर जॉर्ज रदरफोर्ड ने। रिपोर्ट कहती है कि फेसमास्क काफी हद तक वैक्सीन जैसा ही काम कर रहा है।

सलमान खान की पेशी

काले  हिरण शिकार एवं  आर्म्स एक्ट प्रकरण में फिल्म अभिनेता सलमान खान को जिला एवं सेशन न्यायालय जोधपुर ने 28 सितम्बर को पेश होने के आदेश दिए हैं। मामले में आज सुनवाई चल रही थी। आज सलमान की याचिका पर काला हिरण शिकार प्रकरण व राज्य सरकार की याचिका पर आर्म्स एक्ट प्रकरण की सुनवाई पूरी नहीं हो पाई और सलमान को अगली सुनवाई तिथि पर खुद कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दिया गया।

महाराष्ट्र में कोरोना मरीजों का आंकड़ा आज 10 लाख के पार

महाराष्ट्र में मरीजों का आंकड़ा आज 10 लाख के पार हो जाएगा, दुनिया में 4 देश हैं जहां अब तक इतने संक्रमित मिले; देश में अब तक 45 लाख केस से अधिक  है | महाराष्ट्र में कोरोना मरीजों की संख्या ज्यादा  होने लगी  है। आज शाम तक यहां संक्रमितों का आंकड़ा 10 लाख  पार हो गया । अभी तक भारत समेत दुनिया के चार देश ही हैं जहां 10 लाख से ज्यादा लोग संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। इनमें अमेरिका, ब्राजील और रूस शामिल है। राज्य में अब तक 41 लाख से ज्यादा लोगों की जांच हो चुकी है और इनमें 20% लोग संक्रमित मिले। यहां हर 10 लाख की आबादी में 32 हजार  लोगों की जांच हो रही है।

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