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कानून के रखवाले ही बने शिकारी: डिप्टी रेंजर बाघ-तेंदुए के शिकार में शामिल, खाल के साथ गिरफ्तार

जगदलपुर. बस्तर के इंद्रावती और बीजापुर के जंगलों से जो कहानी सामने आई है. वो सिर्फ शिकार नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी की चीख है. यहां बाघ और तेंदुए की मौत हुई. लेकिन गोली से नहीं. बल्कि एक धीमी, दर्दनाक साजिश से. तार के फंदों में फंसे दोनों वन्य जीव 2-3 दिनों तक तड़पने के बाद आखिरकार दम तोड़ दिया. इस पूरे खेल में एक ऐसा नाम सामने आया. जिस पर जंगल बचाने की जिम्मेदारी थी. दंतेवाड़ा वन विभाग का डिप्टी रेंजर देवी प्रसाद कोयाम भी इस शिकारी गिरोह का हिस्सा निकला. वन विभाग की उड़नदस्ता टीम ने जब कार्रवाई की तो 9 आरोपी पकड़ में आए, जो बाघ और तेंदुए की खाल को बाइक के जरिए रायपुर ले जाकर बेचने की फिराक में थे. बरामद खाल और हालात इस ओर इशारा कर रहे हैं कि शिकार हाल ही में हुआ और मारे गए बाघ की उम्र महज 3 साल थी, यानी एक युवा दहाड़ को हमेशा के लिए खामोश कर दिया गया. विशेषज्ञ बताते हैं कि शिकारियों ने पुराने लेकिन बेहद क्रूर तरीके अपनाए. मांस के लालच में फंसाकर तार के फंदे गले में कस दिए और फिर उन्हें तड़पने के लिए छोड़ दिया गया. सवाल अब सिर्फ शिकार का नहीं है सवाल उस भरोसे का है जो जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा पर टिका है. जब जिम्मेदार ही शिकारी बन जाएं तो जंगल की सुरक्षा आखिर किसके भरोसे? बस्तर के जंगल आज खामोश हैं लेकिन इस खामोशी में एक सवाल लगातार गूंज रहा है, क्या अब भी जंगल सुरक्षित हैं या शिकार का खेल सिस्टम के भीतर तक फैल चुका है?

अबूझमाड़ में बदली तस्वीर: कारकाबेड़ा गांव में पहली बार शुरू हुआ स्कूल, वर्षों की मांग हुई पूरी

नारायणपुर. अबूझमाड़ के अति दूरस्थ क्षेत्र कारकाबेड़ा में पहली बार स्कूल की शुरुआत हुई। यह पहल कलेक्टर नम्रता जैन और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी आकांक्षा शिक्षा खलको के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुई। बच्चों और ग्रामीणों की लंबे समय से चली आ रही मांग को सुनते हुए प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए गांव में शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराई। इस सफलता की शुरुआत जनसमस्या निवारण शिविर से हुई, जिसमें ग्रामीणों ने आवेदन देकर कारकाबेड़ा में स्कूल खोलने की मांग रखी थी। कलेक्टर नम्रता जैन ने तत्काल निर्देश जारी किए और जिला शिक्षा अधिकारी अशोक कुमार पटेल को स्कूल खोलने की जिम्मेदारी सौंपी। इसके बाद संकुल समन्वयक और शिक्षकों की टीम ने सर्वेक्षण कर बच्चों की संख्या और शैक्षणिक आवश्यकता का आंकलन किया। सर्वे में पाया गया कि गांव में लगभग 20 बच्चे पढ़ाई के योग्य हैं। स्कूल खोलने के लिए जिला प्रशासन की टीम ने कई नदी-नालों और पहाड़ियों को पार करते हुए करीब 5 घंटे की पैदल यात्रा कर कारकाबेड़ा पहुंचकर नवीन प्राथमिक शाला का उद्घाटन किया। इस मौके पर खंड शिक्षा अधिकारी संतुराम नूरेटी, खंड स्रोत समन्वयक लक्ष्मीकांत सिंह, संकुल समन्वयक कारूराम नूरेटी और सरपंच रामूराम वड्डे भी मौजूद रहे। स्कूल खुलने के साथ ही बच्चों को निःशुल्क गणवेश, पाठ्यपुस्तकें, स्लेट, पेंसिल और श्यामपट्ट जैसी शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराई गई। इस पहल से बच्चों और ग्रामीणों में खुशी और उत्साह देखने को मिला। वर्तमान में इस स्कूल में 20 बच्चों को पढ़ाई की सुविधा दी जा रही है, और इसके लिए जिला प्रशासन ने एक अतिथि शिक्षक की व्यवस्था भी की है। भविष्य में आसपास के अन्य दूरस्थ गांवों जैसे मरकूड़ के बच्चे भी इस स्कूल का लाभ ले सकेंगे। स्वतंत्रता के बाद पहली बार कारकाबेड़ा में स्कूल की स्थापना होने के कारण यह कदम क्षेत्र में शिक्षा के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। जिला प्रशासन की इस पहल से अबूझमाड़ के बच्चों को स्थानीय स्तर पर शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा, जिससे उन्हें स्कूल आने के लिए लंबी दूरी तय करने की जरूरत नहीं रहेगी। इस कदम से न केवल शिक्षा का स्तर बढ़ेगा, बल्कि ग्रामीण समुदाय में जागरूकता और विकास की भावना भी मजबूत होगी। कारकाबेड़ा में स्कूल खोलने की यह पहल यह संदेश देती है कि दूरदराज के क्षेत्र में भी सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक कार्यवाही के जरिए शिक्षा को सुलभ बनाना संभव है। प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि भविष्य में इस क्षेत्र में शिक्षा और विकास के कार्यक्रम नियमित रूप से चलेंगे और बच्चों की पढ़ाई के लिए समुचित संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।

अब उड़ान से जुड़ा रीवा: रायपुर तक 1:10 घंटे में पहुंचेंगे यात्री, डिप्टी CM ने किया उद्घाटन

रायपुर. मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर पहुंचे. उन्होंने रायपुर और रीवा के बीच शुरू हुई पहली फ्लाइट से रायपुर एयरपोर्ट पर लैंड किया. इसके बाद वह विंध्यनाचल कल्याण सर्व समाज द्वारा आयोजित समारोह में शामिल हुए. इस दौरान हवाई सेवा की सौगात के लिए उनका अभिनंदन किया गया. उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला ने कहा कि हमारे हाथ में हवाई सेवा शुरुआत करना था, अब यह आपके हाथ में है कि हवाई सेवा चलते रहे. उन्होंने कहा कि अब रायपुर से रीवा के बीच एक दिन में पूरा होने वाला सफर, महज एक घंटे, दस मिनट में होगा. जितना सोचा उससे ज्यादा सफलता देखने को मिली है. रास्ता आसान होने से सभी क्षेत्र में प्रभाव पड़ता है. व्यापार, पर्यटन समेत अन्य क्षेत्र में अब रीवा विकास करेगा.

सेप्टिक टैंक बना मौत का गड्ढा: रायपुर में 3 स्वीपर की दर्दनाक मौत, परिवार ने किया विरोध प्रदर्शन

रायपुर. राजधानी रायपुर के पचपेड़ी नाका स्थित रामकृष्ण अस्पताल में मंगलवार की रात दर्दनाक हादसा हो गया. सफाई करने सिवरेज टैंक में उतरे तीन लोगों की मौत हो गई. घटना के बाद अस्पताल के गेट पर मृतकों के परिजन और लोगों की पुलिसकर्मियों के साथ झूमाझटकी हुई. मौके पर जमकर हंगामा हुआ और मृतकों के परिजन भीड़ अंदर घुस आई. मृतकों के परिजन बिलखते नजर आए. जानकारी के मुताबिक, रामकृष्ण हॉस्पिटल के सिवरेज टैंक की सफाई के लिए तीनों मजदूरों को अंदर उतारा गया था. इसी दौरान टैंक में मौजूद जहरीली गैस की वजह से एक-एक कर तीनों की हालत बिगड़ गई और मौके पर ही उनकी मौत हो गई. खर्च बचाने नियमों की अनदेखी का आरोप घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि बिना किसी सुरक्षा उपकरण के मजदूरों को सिवरेज टैंक में उतारा गया. अस्पताल प्रबंधन ने खर्च बचाने के लिए नियमों की अनदेखी की. प्रशिक्षित कर्मचारियों की बजाय सामान्य मजदूरों से सफाई कराई गई. अगर सुरक्षा मानकों का पालन किया जाता तो यह हादसा टाला जा सकता था. दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे परिजन दरअसल, सिवरेजटैंक की सफाई बेहद जोखिम भरा काम होता है, जिसे आमतौर पर नगर निगम या प्रशिक्षित टीम द्वारा आधुनिक उपकरणों और सुरक्षा किट के साथ किया जाता है. इसमें गैस डिटेक्टर, ऑक्सीजन मास्क और अन्य सुरक्षा साधनों का उपयोग अनिवार्य होता है. घटना के बाद परिजन दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. वहीं, पुलिस और प्रशासन द्वारा मामले की जांच शुरू किए जाने की बात कही जा रही है. अस्पताल में तनाव का माहौल बना हुआ है. बताया जा रहा है कि मृतकों की पहचान गोविंद सेंद्रे, अनमोल मचकन और प्रशांत कुमार के रूप में हुई है, तीनों सिमरन सिटी निवासी हैं.

राजेंद्र शुक्ला ने मुख्यमंत्री से मिलकर की सौजन्य भेंट, राजनीतिक वार्ता का सिलसिला शुरू

मुख्यमंत्री से मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री  राजेंद्र शुक्ला ने की सौजन्य मुलाकात रायपुर – रीवा हवाई सेवा के लिए की मुख्यमंत्री के प्रयासों की सराहना रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित उनके निवास में मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ला ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री  साय ने  शुक्ला का शॉल एवं प्रतीक चिन्ह भेंट कर आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया।                इस दौरान दोनों के मध्य क्षेत्रीय विकास, आपसी समन्वय एवं जनहित से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। साथ ही दोनों राज्यों के बीच सहयोग को और सुदृढ़ करने पर भी सहमति व्यक्त की गई। उपमुख्यमंत्री  शुक्ला ने बताया कि अब रीवा-रायपुर से सीधे हवाई मार्ग से जुड़ गया है। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के साझा प्रयासों से दोनों राज्यों के लोगों को हवाई सेवा की बड़ी सौगात मिली है। उपमुख्यमंत्री  शुक्ला ने इस दिशा में मुख्यमंत्री  साय के प्रयासों के लिए आभार व्यक्त किया और आगे भी दोनों राज्यों के साझा हितों को आगे बढ़ाने की बात कही।        उल्लेखनीय है रायपुर और रीवा के मध्य हवाई सेवा प्रारंभ हो गई है। इससे छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के लोगों की यात्रा आसान होगी।         इस अवसर पर छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, डॉ. हिमांशु द्विवेदी एवं जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

राज्यव्यापी अभियान में आंगनबाड़ी केंद्रों में न्योता भोज कार्यक्रम, पोषण और शिक्षा पर जोर

आंगनबाड़ी केन्द्रों में न्योता भोज कार्यक्रम : पोषण, शिक्षा और जनभागीदारी का राज्यव्यापी अभियान प्रदेशभर में 9,763 न्योता भोज आयोजित, 1.83 लाख से अधिक बच्चे हुए लाभान्वित  रायपुर आंगनबाड़ी केन्द्रों में संचालित ‘न्योता भोज’ कार्यक्रम प्रदेश में पोषण, शिक्षा और सामुदायिक सहभागिता का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशानुरूप शुरू की गई इस पहल के तहत अब समाज के विभिन्न वर्गों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है। राज्य स्तर पर जनवरी से फरवरी 2026 तक कुल 9,763 न्योता भोज आयोजनों के माध्यम से 1,83,927 बच्चों को लाभान्वित किया गया है, जो इस योजना की व्यापक सफलता को दर्शाता है। जिलेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो बिलासपुर जिले में सर्वाधिक 884 आयोजन हुए, जिनमें 18,703 बच्चे लाभान्वित हुए। वहीं कोरबा में 720 आयोजनों के माध्यम से 13,944 बच्चों, रायगढ़ में 690 आयोजनों से 9,835 बच्चों तथा कांकेर में 636 आयोजनों से 7,915 बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया गया। इसी प्रकार धमतरी में 606 आयोजन कर 11,228 बच्चों, महासमुंद में 415 आयोजनों के माध्यम से 7,302 बच्चों तथा जांजगीर-चांपा में 439 आयोजनों से 10,518 बच्चों को लाभ पहुंचाया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत समाज के नागरिक, जनप्रतिनिधि, दानदाता एवं पालक अपने विशेष अवसरों—जैसे जन्मदिन, वर्षगांठ या अन्य पारिवारिक खुशियों—पर आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों के साथ भोजन साझा कर रहे हैं। इससे बच्चों को अतिरिक्त पौष्टिक आहार मिल रहा है, साथ ही समाज में उनके प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता भी बढ़ रही है। महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों के अनुसार, आंगनबाड़ी केन्द्रों में आने वाले अधिकांश बच्चे ग्रामीण एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से होते हैं। ऐसे में ‘न्योता भोज’ जैसे प्रयास उनके शारीरिक और मानसिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यह पहल न केवल कुपोषण को कम करने की दिशा में कारगर साबित हो रही है, बल्कि आंगनबाड़ी केन्द्रों के प्रति बच्चों और अभिभावकों का आकर्षण भी बढ़ा रही है। शासन ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे अपने सामाजिक एवं पारिवारिक अवसरों को आंगनबाड़ी के बच्चों के साथ साझा कर इस अभियान को और मजबूत बनाएं।

आदिवासी खेलों का महाकुंभ बस्तर में, 1150 खिलाड़ी मैदान में उतरेंगे जीत के जज्बे के साथ

जगदलपुर. खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के प्रथम संस्करण के तहत बस्तर एक बार फिर राष्ट्रीय खेल मानचित्र पर उभरने जा रहा है। छत्तीसगढ़ में 25 मार्च से 6 अप्रैल तक आयोजित होने वाले इस बड़े आयोजन के अंतर्गत जगदलपुर स्थित धरमपुरा क्रीड़ा परिसर में 30 मार्च से 2 अप्रैल के बीच एथलेटिक्स (दौड़-कूद) प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। छत्तीसगढ़ को व्यापक पहचान इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में देशभर से लगभग 1150 खिलाड़ी, प्रशिक्षक, प्रबंधक और तकनीकी विशेषज्ञ भाग लेंगे। प्रतिभागियों का आगमन 28 मार्च से शुरू हो जाएगा, जिससे पूरे क्षेत्र में खेलों का उत्साह बढ़ेगा। इस आयोजन का उद्देश्य जनजातीय खिलाडिय़ों को राष्ट्रीय मंच प्रदान करने के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की खेल प्रतिभा और सांस्कृतिक विरासत को व्यापक पहचान दिलाना है। बस्तर जैसे आदिवासी अंचल में इस स्तर के आयोजन को खेल विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। परिसर का व्यापक सुधार किया जा रहा खिलाड़ियों की सुविधा और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के लिए क्रीड़ा परिसर का व्यापक सुधार किया जा रहा है। खेल मैदान, दौड़ ट्रैक, दर्शक दीर्घा, आवास और अन्य आवश्यक सुविधाओं को उन्नत किया जा रहा है, ताकि प्रतिभागियों को बेहतर वातावरण मिल सके। देशभर के प्रतिभागियों के सामने अपनी परंपरा को प्रस्तुत करेगा बस्तर इसके अलावा सुरक्षा, परिवहन, आवास और चिकित्सा सुविधाओं को भी मजबूत किया जा रहा है। विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर आयोजन को सफल बनाने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है। यह आयोजन न केवल खेल प्रतिभाओं को मंच देगा, बल्कि बस्तर की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और आतिथ्य को भी देशभर के प्रतिभागियों के सामने प्रस्तुत करेगा।

रायपुर में लू का कहर, स्कूलों के समय में बड़ा बदलाव—सुबह जल्दी खुलेंगे, दोपहर से पहले छुट्टी

रायपुर. तेज धूप और गर्मी को देखते हुए रायपुर जिले में भी स्कूल का समय बदल दिया गया है। जिले के समस्त शासकीय और निजी स्कूल अब सुबह 7.30 बजे से पूर्वान्ह 11.30 बजे तक संचालित होंगे। परीक्षा और कार्यालयीन समय यथावत रहेगा। प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी के कारण कई जिलों में स्कूल का समय बदल गया है। मंगलवार को रायपुर के जिला शिक्षा अधिकारी ने भी गर्मी को देखते हुए स्कूल का समय बदलने का आदेश जारी किया। जिला शिक्षा अधिकारी हिमांशु भारतीय द्वारा जारी आदेश के अनुसार रायपुर जिले के समस्त शासकीय और अशासकीय स्कूल एक पाली वाले सोमवार से शनिवार तक प्रातः 7.30 बजे से पूर्वान्ह 11.30 तक संचालित होंगे। इसी तरह ऐसे स्कूल जो दो पाली में संचालित हो रहे हैं, वहां प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक स्कूल सुबह 7.30 बजे से 11.30 बजे तथा हाईस्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूलों का संचालन पूर्वान्ह 11.30 बजे से शाम 4.30 बजे तक होगा। परीक्षा और कार्यालयीन समय में किसा प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है। यह आदेश 20 मार्च से प्रभावशील होगा। बता दें कि इन दिनों कक्षा 5वीं और 8वीं की परीक्षा चल रही है। इसके बाद स्थानीय कक्षाओं पहली, दूसरी, तीसरी, चौथी, छठवीं, सातवीं और 9वीं-11वीं की परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी।  

रंगों में बसी एकता की भावना, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने होली मिलन समारोह में की शिरकत

रंगों में घुला समरसता का संदेश: मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय होली मिलन समारोह में हुए शामिल रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर में होली मिलन समारोह में शामिल हुए। मुख्यमंत्री  साय ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि होली केवल रंगों का नहीं, बल्कि प्रेम, भाईचारे और सामाजिक समरसता का पर्व है। यह पर्व आपसी मनमुटाव को भुलाकर रिश्तों को और मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि होली बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है और हमें इस अवसर पर अपने भीतर की नकारात्मकताओं को त्यागकर सकारात्मकता को अपनाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि युवा शक्ति ही राष्ट्र की वास्तविक शक्ति है। उन्होंने आह्वान किया कि युवा वर्ग सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाए, ताकि समाज के प्रत्येक वर्ग को इन योजनाओं का लाभ मिल सके। उन्होंने प्रदेशवासियों को होली की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए उनके जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। उपमुख्यमंत्री  अरुण साव ने   कहा कि होली का त्योहार परिवार और समाज के साथ मिलकर आनंद और अपनत्व के साथ मनाने की परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन हमारी संस्कृति और सामाजिक एकता को और मजबूत बनाते हैं। इस अवसर पर आदिम जाति विकास मंत्री  रामविचार नेताम, स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल, राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा, तकनीकी शिक्षा मंत्री  खुशवंत साहेब, स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेंद्र यादव, महिला एवं बाल विकास मंत्री मती लक्ष्मी रजवाड़े, विधायक  किरण देव,  मोतीलाल साहू,  अनुज शर्मा, रायपुर महापौर मती मीनल चौबे, धमतरी महापौर  रामू रोहरा सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और नागरिक उपस्थित थे।

उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा: रींवा-रायपुर हवाई मार्ग से तेज होगा विकास

रींवा-रायपुर हवाई सेवा से बढ़ेगी विकास की रफ्तार: उपमुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल रींवा-रायपुर हवाई सेवा से बढ़ी नजदीकियां उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल का छत्तीसगढ़ दौरा रायपुर मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री  राजेन्द्र शुक्ल दो दिवसीय प्रवास पर आज शाम रायपुर पहुंचें। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल अपने प्रवास के यहां कई धार्मिक, सामाजिक और शिष्टाचार भेंट कार्यक्रमों में शामिल होंगे।       आज शाम रायपुर पहुंचने के बाद उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने वीआईपी रोड स्थित राम मंदिर में दर्शन कर प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इसके पश्चात वे क्वींस क्लब में विंध्य समाज द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में शामिल हुए, जहां उनका जोरदार स्वागत किया गया।     उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि रीवा से रायपुर के लिए शुरू हुई हवाई सेवा से क्षेत्र के लोगों को बड़ी राहत मिली है। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र के विकास के लिए सड़कों और रेल सेवाओं का बेहतर होना जरूरी है। इससे पहले रीवा से दिल्ली और इंदौर के लिए हवाई सेवाएं प्रारंभ हो चुकी हैं, जिससे व्यापार और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने रीवा से दुर्ग तक ट्रेन सेवा जल्द शुरू करने के लिए सकारात्मक प्रयास करने का भरोसा दिलाया।      कार्यक्रम में विंध्याचल कल्याण सर्व समाज द्वारा  शुक्ल का अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के बीच संबंध बहुत गहरे हैं। उन्होंने कहा कि यह हवाई सेवा केवल दूरी ही नहीं, बल्कि दिलों को भी जोड़ने का कार्य करेगी। विधायक  किरण सिंहदेव ने कहा कि रीवा से रायपुर के लिए हवाई सेवा शुरू होना एक महत्वपूर्ण पहल है, जिससे आवागमन आसान हो गया है।      ज्ञात हो कि उपमुख्यमंत्री  शुक्ल निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 18 मार्च को वे सुबह 11.15 बजे छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से उनके निवास (स्पीकर हाउस) में सौजन्य भेंट करेंगे। इसके पहले वे नालंदा परिसर का निरीक्षण करेंगे। दोपहर 12.05 बजे पहुंना गेस्ट हाउस में विंध्य क्षेत्र के नागरिकों से मुलाकात कर क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे।       कार्यक्रम में विधायक  मोतीलाल साहू, रीवा के पूर्व विधायक  के.पी. त्रिपाठी, समाज के संरक्षक  शंकर सिंह गहरवार, अध्यक्ष  कल्याण प्रसाद पांडेय, डॉ. व्यास मुनि द्विवेदी,  मधुकर द्विवेदी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

मयबद्ध कार्य और बेहतर उपस्थिति पर सम्मान: मुख्य सचिव ने अधिकारी-कर्मचारियों को किया पुरस्कृत

रायपुर ई-ऑफिस सम्मान समारोह मुख्य सचिव  विकासशील ने आज यहां मंत्रालय, महानदी भवन में आयोजित ई-ऑफिस सम्मान समारोह में जनवरी एवं फरवरी माह में उत्कृष्ट कार्य करने वाले विभागों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। ई-ऑफिस प्रणाली के माध्यम से नस्तियों के त्वरित निस्तारण और समयबद्ध उपस्थिति सुनिश्चित करने में श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वालों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर  सम्मानित किया गया। जनवरी माह की विभागीय रैंकिंग में गृह विभाग ने 92 प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रथम स्थान हासिल किया। समाज कल्याण विभाग ने 86.76 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जबकि धर्मस्व विभाग ने 86.58 प्रतिशत अंक अर्जित कर तीसरा स्थान प्राप्त किया। इस अवसर पर मुख्य सचिव ने अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सराहना करते हुए कहा कि ई-ऑफिस के प्रभावी उपयोग से शासन की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, गति और जवाबदेही सुनिश्चित हो रही है। उन्होंने सभी विभागों से इसी प्रकार दक्षता के साथ कार्य करने और निरंतर बेहतर प्रदर्शन बनाए रखने की अपेक्षा की। समारोह में विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों को सम्मानित किया गया। जनवरी माह में ई-ऑफिस में उल्लेखनीय कार्य करने वाले में संयुक्त सचिव श्रेणी में प्रथम स्थान में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की मती जय जैन, द्वितीय स्थान में अनुसूचित जाति विकास विभाग के संयुक्त सचिव  अनुपम त्रिवेदी, उप सचिव श्रेणी में प्रथम स्थान में सामान्य प्रशासन-एक के उप सचिव  किशोर कुमार भुआर्य, द्वितीय स्थान में सामान्य प्रशासन-6 के उप सचिव मती ऋतु वर्मा, तृतीय स्थान में समाज कल्याण विभाग के उप सचिव स्वर्गीय रामलाल खैरवार, अवर सचिव श्रेणी में प्रथम स्थान में विधि एवं विधायी विभाग के अवर सचिव अरूण कुमार मिश्रा, द्वितीय स्थान में अवर सचिव गृह विभाग पूरन लाल साहू, तृतीय स्थान में अवर सचिव सामान्य प्रशासन-1 के कैलाश कुमार नेताम, तृतीय स्थान में लोक निर्माण विभाग के अतिरिक्त सचिव  सत्य नारायण वास्तव, अनुभाग अधिकारी श्रेणी में प्रथम स्थान में अनुभाग अधिकारी नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग मणिराम रात्रे, द्वितीय स्थान में अनुभाग अधिकारी सामान्य प्रशासन-(1, 4 ) के नंद कुमार मेश्राम, तृतीय स्थान में अनुभाग अधिकारी पंचायत विभाग लीलाम्बर ओहदार, वरिष्ठ सचिवालय सहायक श्रेणी में प्रथम स्थान में महिला एवं बाल विकास विभाग के वरिष्ठ सचिवालय सहायक दौलतराम वर्मा, द्वितीय स्थान में खेल विभाग के वरिष्ठ सचिवालय सहायक मुकेश राम प्रधान, तृतीय स्थान में गृह विभाग के वरिष्ठ सचिवालय सहायक रामगोपाल सेन, कनिष्ठ सचिवालय सहायक श्रेणी में प्रथम स्थान में सामान्य प्रशासन-1 के कनिष्ठ सचिवालय सहायक राम कुमार सिंग, द्वितीय स्थान में जल संसाधन विभाग के कनिष्ठ सचिवालय सहायक प्रदीप कुमार, तृतीय स्थान सामान्य प्रशासन विभाग-2 के कनिष्ठ सचिवालय सहायक  सुरेन्द्र कुमार, कम्प्यूटर ऑपरेटर श्रेणी में प्रथम स्थान में वन विभाग के डाटा एंट्री ऑपरेटर माया देवांगन, द्वितीय स्थान में स्कूल शिक्षा विभाग के सहायक ग्रेड-2 ललीत साहू, द्वितीय स्थान में (तकनीकी) कम्प्यूटर ऑपरेटर दीपेश कुमार साहू।  फरवरी माह में ई-ऑफिस में उल्लेखनीय कार्य करने वाले में संयुक्त सचिव श्रेणी में प्रथम स्थान में आदिम जाति विकास विभाग के संयुक्त सचिव  भूपेन्द्र कुमार राजपूत, द्वितीय स्थान में अतिरिक्त सचिव  सत्यनारायण वास्तव, तृृतीय स्थान में परिवहन विभाग के संयुक्त सचिव  कमलेश बंसोड़, उप सचिव श्रेणी में प्रथम स्थान में गृह विभाग के उप सचिव  रामप्रसाद चौहान, द्वितीय स्थान में सामान्य प्रशासन-1 के उप सचिव  किशोर कुमार भूआर्य, तृतीय स्थान में सामान्य प्रशासन-8 के उप सचिव अंशिका ऋषि पांडे, द्वितीय स्थान में लोक निर्माण विभाग के अतिरिक्त सचिव  सत्यनारायण वास्तव, अवर सचिव श्रेणी में प्रथम स्थान गृह विभाग अवर सचिव पूरनलाल साहू, द्वितीय स्थान पंचायत विभाग अवर सचिव विश्वनाथ नाग, तृतीय स्थान में सामान्य प्रशासन-1 के अवर सचिव कैलाश कुमार नेताम, अनुभाग अधिकारी श्रेणी में प्रथम स्थान में सामान्य प्रशासन-(1, 4 ) अनुभाग अधिकारी  नंदकुमार मेश्राम, द्वितीय स्थान में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग अनुभाग अधिकारी मणिराम रात्रे, तृृतीय स्थान में पंचायत विभाग के अनुभाग अधिकारी  शिवकुमार गोड़, सहायक अनुभाग अधिकारी श्रेणी में प्रथम स्थान में धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग के  ओंकार राम भूआर्य, वरिष्ठ सचिवालय सहायक श्रेणी में प्रथम स्थान में मुख्य सचिव कार्यालय के वरिष्ठ सचिवालय सहायक  राकेश संतयाल, द्वितीय स्थान खेल विभाग के वरिष्ठ सचिवालय सहायक  श्याम लाल साहू, कनिष्ठ सचिवालय सहायक श्रेणी में प्रथम स्थान में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के कनिष्ठ सचिवालय सहायक  प्रमोद कुमार, द्वितीय स्थान में आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के कनिष्ठ सचिवालय सहायक  सतकुमार भास्कर, तृतीय स्थान में सामान्य प्रशासन-1 के कनिष्ठ सचिवालय सहायक  रामकुमार सिंग, कम्प्यूटर ऑपरेटर श्रेणी में प्रथम स्थान में कम्प्यूटर ऑपरेटर (तकनीकी)  दीपेश कुमार साहू, द्वितीय वन विभाग डाटा एंट्री ऑपरेटर माया देवांगन, तृतीय स्थान में स्कूल शिक्षा विभाग के सहायक ग्रेड-2  ललित साहू। जनवरी माह में उपस्थिति में श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले में प्रथम स्थान पर रहने वाले  आशीष कुमार शर्मा (अनुभाग अधिकारी),  छबि लाल साहू, (निज सचिव),  पवन कुमार साहू (सहायक अनुभाग अधिकारी), फरवरी माह में उपस्थिति में श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले में प्रथम स्थान में 22 अधिकारी-कर्मचारी निम्न है- सहायक अनुभाग अधिकारी  अजित कुमार चंद्रवंशी, वरिष्ठ सहायक सचिवालय सु अंजू पटेल, सहायक अनुभाग अधिकारी  आशुतोष वर्मा, अनुभाग अधिकारी  बसंत कुमार धु्रर्वे, निज सहायक  बिरेन्द्र कुमार, सहायक अनुभाग अधिकारी  छवि राम साहू, अवर सचिव क्लेमेन्टीना लकरा, सहायक अनुभाग अधिकारी  देवेन्द्र साहू, अवर सचिव  हेमंत कुमार पांडे, सहायक अनुभाग अधिकारी  लोक नारायण शर्मा, वरिष्ठ सचिवालय सहायक  प्रदीप कुमार साव, वरिष्ठ सचिवालय सहायक प्रमिला यादव, वरिष्ठ सचिवालय सहायक  पुरूषोत्तम लाल निषाद, भृत्य  राज कुमार सोरी, अवर सचिव  राजीव कुमार झाड़े, अवर सचिव  रातु लाल धु्रव, वरिष्ठ सचिवालय सहायक सुनीता साहू, वरिष्ठ सचिवालय सहायक  सूरज कुमार साहू, वरिष्ठ सचिवालय सहायक तारा कुजूर, सहायक अनुभाग अधिकारी  विनोद कुमार अथनकर, सहायक अनुभाग अधिकारी  योगेन्द्र कुर्रे, अनुभाग अधिकारी  युवराज साहू कार्यक्रम में मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड की फेम ट्रिप से प्रभावित हुए देश के प्रतिनिधि, प्राकृतिक सौंदर्य, संस्कृति और आतिथ्य की सराहना

रायपुर विभिन्न राज्यों से आए टूर ऑपरेटरों और ट्रैवल एजेंट्स ने बस्तर, मैनपाट और जशपुर के प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण किया छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों के व्यापक प्रचार-प्रसार और राज्य की प्राकृतिक तथा सांस्कृतिक धरोहर को देश-दुनिया तक पहुंचाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड द्वारा आयोजित फेम (FAM) ट्रिप के अंतर्गत देश के विभिन्न राज्यों से आए टूर ऑपरेटरों और ट्रैवल एजेंट्स ने बस्तर, मैनपाट और जशपुर के प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण किया। इस दौरान प्रतिनिधियों ने छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति और ऐतिहासिक धरोहर को करीब से देखा और उसकी भूरी-भूरी प्रशंसा की। फेम ट्रिप के दौरान प्रतिनिधियों को बस्तर जिले के विश्व प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात का भ्रमण कराया गया, जहां उन्होंने प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लिया साथ ही बोटिंग भी कराई गई, जिसने उनके अनुभव को और रोमांचक बना दिया। इसके साथ ही प्रतिनिधियों ने चित्रकोट स्थित प्राचीन शिव मंदिर के दर्शन भी किए। बस्तर की जीवंत लोक संस्कृति से परिचित कराने के लिए प्रतिनिधियों को यहां के प्रसिद्ध हाट-बाजार भी ले जाया गया, जहां उन्होंने पारंपरिक मुर्गा लड़ाई जैसे स्थानीय सांस्कृतिक आयोजनों को देखा और बस्तर की विशिष्ट जनजातीय परंपराओं को समझा। इस भ्रमण के दौरान प्रतिनिधियों को ऐतिहासिक नगरी बारसूर भी ले जाया गया, जहां उन्होंने प्रसिद्ध बत्तीसा मंदिर और भगवान गणेश की अद्भुत एवं प्राचीन मूर्तियों का अवलोकन किया। इन ऐतिहासिक धरोहरों ने प्रतिनिधियों को छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया। फेम ट्रिप के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने बस्तर संभाग के प्रशासनिक अधिकारियों से भी मुलाकात की। प्रतिनिधियों ने बस्तर के कमिश्नर, आईजी और एसपी से भेंट कर क्षेत्र में पर्यटन विकास, सुरक्षा व्यवस्था और पर्यटन सुविधाओं पर चर्चा की। अधिकारियों ने उन्हें आश्वस्त किया कि बस्तर क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। इसी क्रम में प्रतिनिधियों को मैनपाट के खूबसूरत पर्यटन स्थलों का भी भ्रमण कराया गया। यहां उन्होंने करमा एथेनिक रिजॉर्ट और सैला रिसोर्ट का दौरा किया तथा मैनपाट की प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण का अनुभव किया। इसके अलावा प्रतिनिधियों को कुनकुरी स्थित गिरजाघर, जशपुर का राजपुरी जलप्रपात तथा केरे विलेज जशपुर में स्थित महुआ होमस्टे जैसे आकर्षक पर्यटन स्थलों से भी परिचित कराया गया। इन स्थलों ने छत्तीसगढ़ के इको-टूरिज्म और ग्रामीण पर्यटन की संभावनाओं को उजागर किया। छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड द्वारा आयोजित यह फेम ट्रिप 13 मार्च से 18 मार्च तक आयोजित की जा रही है, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से आए लगभग 28 टूर ऑपरेटर और ट्रैवल एजेंट्स शामिल हैं। इन प्रतिनिधियों को दो समूहों में विभाजित कर राज्य के उत्तरी और दक्षिणी क्षेत्रों के प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण कराया जा रहा है। इस पहल के माध्यम से छत्तीसगढ़ सरकार और पर्यटन बोर्ड का उद्देश्य देश के विभिन्न राज्यों के टूर ऑपरेटरों को राज्य की पर्यटन संभावनाओं से सीधे परिचित कराना है, ताकि वे अपने-अपने क्षेत्रों में छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों का प्रचार-प्रसार कर सकें। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड राज्य के पर्यटन को नई पहचान दिलाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। पर्यटन बोर्ड के अध्यक्ष  नीलू शर्मा तथा प्रबंध संचालक  विवेक आचार्य के नेतृत्व में राज्य में पर्यटन सुविधाओं के विकास और प्रचार-प्रसार के लिए कई नवाचार किए जा रहे हैं। इस फेम ट्रिप से जुड़े प्रतिनिधियों ने छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक सौंदर्य, सांस्कृतिक विविधता और यहां के लोगों के आत्मीय आतिथ्य की सराहना करते हुए कहा कि राज्य में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं और वे अपने-अपने राज्यों में छत्तीसगढ़ को एक आकर्षक पर्यटन गंतव्य के रूप में बढ़ावा देंगे। फेम ट्रिप का समापन 18 मार्च को रायपुर में आयोजित कार्यक्रम के साथ होगा, जहां दोनों समूहों के प्रतिनिधि एकत्रित होंगे और छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड की ओर से राज्य की पर्यटन संभावनाओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी जाएगी। इस पहल से आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के पर्यटन को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।

वित्तीय वर्ष के अंतिम दिनों में भी खुले रहेंगे पंजीयन कार्यालय अवकाश के दिनों पर भी मिलेगी पंजीयन की सुविधा

रायपुर, राज्य के आम नागरिकों को पंजीयन संबंधी कार्यों में किसी प्रकार की असुविधा न हो और वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतिम दिनों में पंजीयन कार्यों का सुचारू एवं समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित किया जा सके, इसके लिए छत्तीसगढ़ शासन ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इसके तहत राज्य के सभी पंजीयन (स्टाम्प दस्तावेज) कार्यालय चयनित अवकाश दिवसों में भी संचालित (खुले) किए जाएंगे। जारी निर्देशों के अनुसार प्रदेश के सभी पंजीयन कार्यालय 22 मार्च, 28 मार्च, 29 मार्च तथा 31 मार्च 2026 को भी सामान्य कार्यदिवसों की तरह खुले रहेंगे। इन तिथियों में दस्तावेजों के पंजीयन सहित अन्य सभी संबंधित सेवाएं नियमित रूप से उपलब्ध रहेंगी।        शासन के इस निर्णय का उद्देश्य नागरिकों को अतिरिक्त सुविधा प्रदान करना है, ताकि वे अपने लंबित पंजीयन कार्यों को समय पर पूरा कर सकें। विशेष रूप से वित्तीय वर्ष की समाप्ति के मद्देनज़र इन दिनों में पंजीयन कार्यों की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था की गई है। राज्य सरकार ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे इस विशेष सुविधा का अधिकतम लाभ उठाते हुए निर्धारित तिथियों में अपने पंजीयन संबंधी कार्यों का निष्पादन कराएं, जिससे अनावश्यक भीड़ और अंतिम समय की परेशानी से बचा जा सके।

धान के बजाय मक्का से बढ़ा मुनाफा : किसान मालती मोहन बने उन्नत खेती की मिसाल किसान मालती मोहन

रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन प्रयासों का सकारात्मक परिणाम जशपुर जिले के पत्थलगांव विकासखंड अंतर्गत ग्राम काडरो के किसान श्री मालती मोहन के रूप में सामने आया है। पूर्व में ग्रीष्मकालीन धान की खेती करने वाले कृषक श्री मालती मोहन ने इस बार कृषि विभाग के मार्गदर्शन में बदलाव करते हुए 2 एकड़ भूमि में मक्का फसल की खेती की। इस नवाचार से उन्हें बेहतर उत्पादन के साथ 88 हजार 200 रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हुई। किसान ने बताया कि मक्का की खेती में कुल 11 हजार 800 रुपये का खर्च आया, जिसमें बीज, खाद और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं शामिल हैं। मक्का की बिक्री से उन्हें लगभग 1 लाख रुपये की आय हुई, जिससे अच्छी-खासी शुद्ध कमाई संभव हो सकी। उन्होंने बताया कि धान की तुलना में मक्का की खेती में कम पानी और कम लागत लगती है, जबकि लाभ अधिक प्राप्त होता है। श्री मालती मोहन ने बताया कि ग्रीष्मकालीन धान की खेती में अधिक पानी की आवश्यकता होती है और लागत भी ज्यादा आती है, जबकि मक्का एक बेहतर विकल्प के रूप में सामने आया है। इस बदलाव से न केवल उनकी आय में वृद्धि हुई है, बल्कि जल संरक्षण के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिला है। किसान ने इस पहल के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त किया है। उनकी यह सफलता अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है, जो अब धान के स्थान पर वैकल्पिक फसलों की खेती की ओर अग्रसर हो रहे हैं।

समाज में सकारात्मक बदलाव लाएं स्वयंसेवक: मंत्री परमार ने दिए अहम संदेश

रायपुर बस्तर के वनांचलों में डिजिटल क्रांति वह मंजर आज भी बस्तर के वनांचलों की यादों में एक कसक पैदा कर देता है, जब एक लाचार बुजुर्ग को अपनी चंद रूपए की पेंशन के लिए तपती धूप में मीलों पैदल चलना पड़ता था। कभी शारीरिक अक्षमता तो कभी तंगहाली के कारण बैंक तक न पहुँच पाने का वह दर्द और थक-हारकर सूनी आँखों से लौट आने की वह बेबसी ग्रामीण जीवन का एक कड़वा सच थी। लेकिन वक्त बदला और बस्तर की इन पथरीली राहों पर ममता और सेवा का हाथ बढ़ाते हुए बीसी सखियों ने उस करुणा को शक्ति में बदल दिया है। आज वही बुजुर्ग अपनी देहरी पर बैठी बैंक सखी को देख मुस्करा उठता है, क्योंकि अब बैंक चलकर उसके घर तक आता है।         ग्रामीण बैंकिंग के इस मानवीय चेहरे का सबसे जीवंत उदाहरण छिदगांव में देखने को मिलता है, जहाँ के वृद्ध हितग्राही रतन राम बघेल वृद्धावस्था के कारण चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ हैं। ऐसे में बीसी सखी दशोमती कश्यप हर माह उनके घर जाकर पेंशन की राशि उनके हाथों में सौंपती हैं। अपनी इस सुविधा पर खुशी जाहिर करते हुए रतन राम बघेल कहते हैं कि बढ़ती उम्र और शारीरिक कमजोरी के कारण मेरे लिए बैंक तक जाना अब संभव नहीं रह गया था, पेंशन के पैसों के लिए हमेशा दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब दशोमती बेटी हर महीने घर आकर पैसे दे जाती है, जिससे मुझे बहुत सहारा मिला है।           बैंक और ग्रामीणों के बीच एक मजबूत कड़ी बनकर उभरीं जिले की इन 144 बीसी सखियों ने फरवरी महीने में 4 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय लेन-देन कर यह साबित कर दिया है कि यदि महिलाओं को अवसर और तकनीक मिले, तो वे पूरी अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल सकती हैं। इन बैंक सखियों ने न केवल बैंकिंग सेवाओं को सुलभ बनाया है, बल्कि सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई है। विशेष रूप से मातृत्व वंदना योजना के तहत 67 लाख रुपये से अधिक की राशि गर्भवती और धात्री माताओं तक पहुँचाकर इन सखियों ने स्वास्थ्य और पोषण की दिशा में भी बड़ा योगदान दिया है। इसके साथ ही बुजुर्गों की पेंशन और नरेगा मजदूरों की मजदूरी का भुगतान भी अब इन्हीं बैंक सखियों के माध्यम से गाँव में ही सुरक्षित तरीके से हो रहा है।         महिला सशक्तिकरण का सबसे सुंदर उदाहरण दरभा और बस्तर जैसे ब्लॉकों में देखने को मिला, जहाँ इन बैंक सखियों ने दिन-रात मेहनत कर हजारों ट्रांजैक्शन किए। लोहंडीगुड़ा और तोकापाल जैसे क्षेत्रों में भी सखियों ने बड़ी कुशलता के साथ लाखों रुपयों का प्रबंधन किया। यह केवल आंकड़ों की कहानी नहीं है, बल्कि उन 144 महिला शक्तियों के आत्मविश्वास की कहानी है जो अब खुद आत्मनिर्भर हैं और अपने गाँव के विकास का नेतृत्व कर रही हैं। बस्तर की इन बेटियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि डिजिटल इंडिया का असली चेहरा गाँवों की ये सशक्त बीसी सखियाँ ही हैं।  

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