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CM शिवराज सिंह को सूखी रोटी, ठंडी सब्जी और घटिया दाल खिलाई, खाद्य अधिकारी सस्पेंड

इंदौर। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को सूखी रोटी, ठंडी सब्जी और घटिया दाल खिलाने वाले खाद्य अधिकारी मनीष स्वामी को सस्पेंड कर दिया गया है। इंदौर से रात 9 बजे रवाना हुए मुख्यमंत्री के लिए शाम 6 बजे ही खाना पैक करवा दिया गया था। करीब 4 घंटे बाद जब उन्होंने खाने का पैकेट खोला तो सीधे इंदौर कलेक्टर पर बरस पड़े। सीएम शिवराज सिंह चौहान इंदौर में कई विकास योजनाओं के शुभारंभ के लिए आए थे। उस दिन उन्हें शाम 6 बजे इंदौर पहुंचना था लेकिन रात को 8 बजे पहुंचे। लगातार कार्यक्रमों की वजह से उन्हें खाना खाने का मौका नहीं मिला। इसके साथ ही मौसम खराब होने की वजह से सीएम सड़क मार्ग से भोपाल लौटना था। उन्होंने खाना पैक करवा कर अपनी गाड़ी में रखवाने के निर्देश दिए थे। खाद्य अधिकारी ने शाम 6 बजे ही खाना पैक करवा दिया। सीएम रात 9 बजे इंदौर से निकले और पैक किया हुआ खाना ठंडा हो गया और रोटियां कड़ी हो गई थीं। इस पर सीएम नाराज हो गए। उन्होंने इंदौर कलेक्टर मनीष सिंह से नाराजगी व्यक्ति की। प्रोटोकॉल का उल्लंघन होने के कारण खाद्य निरीक्षक मनीष स्वामी को निलंबित कर दिया गया है। मनीष स्वामी इंदौर में 10 साल से जमे हुए थे। कलेक्टर मनीष सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि प्रोटोकॉल के तहत जिस गुणवत्ता वाला खाना होना चाहिए था, उसमें चूक हुई है। इसलिए मनीष स्वामी पर कार्रवाई की गई है।

शिवराज बोले- कमलनाथ नालायक थे, अपनी जोड़ी को शिव-ज्योति एक्सप्रेस का नाम दिया

भोपाल. शिवपुरी जिले में पहली बार प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया एक साथ मंच पर दिखे। मुंगावली विधानसभा क्षेत्र में पिपरई और अशोकनगर विधानसभा क्षेत्र के राजपुर गांव में दोनों नेताओं ने अपनी इस जोड़ी तो शिव-ज्योति एक्सप्रेस का नाम दिया। करोड़ों रुपए के विकास कार्यो का लोकार्पण व शिलान्यास करने के बाद दोनों की नेताओं ने कांग्रेस और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ व दिग्विजय सिंह पर जुबानी हमले किए। मुख्यमंत्री चौहान ने अशोकनगर को स्मार्ट सिटी बनाने का ऐलान किया। अगले साल अशोकनगर में कृषि महाविद्यालय खोलने का आश्वासन भी दिया। राजपुर में सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कमलनाथ जैसे मुख्यमंत्री का आचार डालेंगे क्या, जो अपने विधायकों की नहीं सुन रहे थे। इसलिए महाराज ने सरकार को सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा ग्वालियर में कमलनाथ ने बोला- शिवराज सिंह नालायक है, जबकि फसल बीमा का पैसा खाने वाले, कर्जामाफी की वादाखिलाफी, कई योजनाओं को बंद करने वाले कमलनाथ ही नालायक थे। मुख्यमंत्री चौहान ने पूर्व कांग्रेस सरकार से मिले खाली खजाने पर कहा कांग्रेस की नीति, नीयत और नेता ठीक नहीं हैं, इसलिए लक्ष्मीजी उनसे रूठीं थीं। मैं रोने वाला मुख्यमंत्री नहीं हूं, इसलिए खुलेआम बोल रहा हूं प्रदेश की खराब हालत को सुधारने कर्जा लूंगा और जब स्थिति सुधर जाएगी तो वापस कर दूंगा। मेरी जनता के साथ वादाखिलाफी करने वाले कमलनाथ और दिग्विजय सिंह गद्दार : राज्यसभा सांसद बनने के बाद पहली बार जिले में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा दिग्विजय सिंह और कमलनाथजी बोल रहे हैं कि जजपाल सिंह गद्दार है, ज्योतिरादित्य गद्दार है, लेकिन मैं कहता हूं कि जो नेता और जो सरकार मेरी जनता के साथ वादा खिलाफी और गद्दारी करेगी, उसके खिलाफ सिंधिया परिवार काम रखेगा। सिंधिया ने कहा कांग्रेस सरकार ने जनता के साथ वादाखिलाफी की तो प्रदेश की जनता के मान-सम्मान और विकास के लिए ज्योतिरादित्य ढाल बन गया। मोती-माधव एक्सप्रेस की तरह चलेगी शिव-ज्योति एक्सप्रेस मंच से दोनों की नेताओं ने अपनी इस नई जोड़ी को शिव-ज्योति एक्सप्रेस का नाम दिया। सिंधिया ने कहा कि जिस तरह 1980 में मोतीलाल वोरा जी और उनके पिताजी की जोड़ी को मोती-माधव एक्सप्रेस नाम दिया था, इसी तरह प्रदेश के विकास और प्रगति के लिए शिव-ज्योति एक्सप्रेस चलेगी। इस एक्सप्रेस के साथ चलने पर हर घर में खुशहाली आएगी।

MP : 4 घंटे कार्यक्रम में बिना मास्क के गृह मंत्री, बोले- मैं ताे मास्क पहनता नहीं

इंदौर। मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा बुधवार को शहर में करीब 4 घंटे तक कई कार्यक्रमों में शामिल हुए। पहले वे अनुग्रह सहायता राशि वितरण कार्यक्रम में शामिल होने रवींद्र नाट्यगृह पहुंचे। इसके बाद नए कंट्रोल रूम का उद्घाटन किया। सभी कार्यक्रमों में गृहमंत्री बिना मास्क के नजर आए। जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने बेहिचक कह दिया कि वे तो मास्क पहनते ही नहीं हैं। मैं यहां क्या- किसी कार्यक्रम में मास्क नहीं पहनता, इसमें क्या होता है। दरअसल, इंदौर वही शहर है, जहां मास्क नहीं पहनने वालों पर निगम टीम चालानी कार्रवाई कर रही है। मास्क नहीं लगाने वालों पर 100 रुपए जुर्माना लिया जा रहा है। इसे लेकर विवाद भी हो रहे हैं, लेकिन गृह मंत्री का मास्क को लेकर ऐसा जवाब, जनता पर क्या असर डालेगा। कैदियों की पैरोल 2 महीने और बढ़ाई गृह मंत्री ने मीडिया से चर्चा में सांवेर जेल को लेकर कहा कि निर्माण कार्य बहुत जल्दी शुरू होगा। हम आज ही सांवेर जेल को लेकर राशि मंजूर कर देंगे। कैदियों को लेकर कहा कि जो कैदी कोरोना को लेकर 4 महीने से पैरोल पर थे। उसे दो महीने और बढ़ा दिया गया है। अस्पतालों में लापरवाही को लेकर कहा कि सभी के खिलाफ जांच के बाद कार्रवाई होगी। 2 लाख रुपए की कर्जमाफी नहीं हुई किसानों के कर्जमाफी को लेकर कहा कि दो हजार और चार हजार रुपए कर्ज माफ हुए हैं। हम बात कर रहे हैं 2 लाख रुपए के कर्जमाफी की, वो नहीं हुए हैं। आप तो कांग्रेस-भाजपा के चक्कर में मत आओ। आप मीडिया वाले किसी गांव में सीधे जाओ, 10 दिन के भीतर राहुल गांधी जो 2 लाख का कर्ज माफ करने का कहकर गए थे। गांव के 10 किसानों से पूछ लो, उनके एक लाख हुए हों, डेढ़ लाख हुए हों, दो लाख हुए हों। उन्हें कैमरे के सामने बिठा लो तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। कमलनाथजी चांदी की चम्मच लेकर पैदा हुए, वे क्या जानें गरीबों का दर्द मध्य प्रदेश में 15 महीने कांग्रेस की सरकार रही। कमलनाथजी मुख्यमंत्री रहे, उन्होंने गरीब के दर्द और पीड़ा को समझा ही नहीं। समझते भी कैसे- उद्योगपति हैं, बड़े आदमी के बेटे थे, सोने की चम्मच मुंह में लेकर पैदा हुए थे, गरीब का दर्द वे कहां जानते। अपने यहां शास्त्र में कहा गया है कि जाके पांव ना फटी बेमाई, वाे का जाने पीर पराई। सोने का चम्मच लेकर पैदा होने वाले कमलनाथजी को इस दर्द का एहसास ही नहीं है। दर्द का एहसास है भाजपा को, उसके नेताओं को और हमारे मुख्यमंत्री को, क्योंकि वे गरीब और किसान के बेटे हैं। यह बात प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बुधवार को रवींद्र नाट्यगृह में कही। वे यहां अनुग्रह सहायता राशि वितरण कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे।

मां पीतांबरा के दर्शन के बहाने प्रियंका गांधी के रोड शो की तैयारी

भोपाल। मध्य प्रदेश में होने वाले विधानसभा उपचुनाव के जरिये सत्ता में वापसी का गणित भले ही कांग्रेस के लिए मुश्किलभरा हो, लेकिन पार्टी जीत के लिए पुरानी परिपाटी को छोड़ने में भी गुरेज नहीं कर रही है। कांग्रेस की नैया पार लगाने के लिए उपचुनाव में गांधी परिवार का चेहरा मोर्चा संभाल रहा है। मप्र कांग्रेस ने पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा को उपचुनाव में बुलाया है। प्रियंका यहां दतिया स्थित मां पीतांबरा देवी के दर्शन के बहाने आ रही हैं। इसी बहाने वे उपचुनाव की छह सीटों से गुजरते हुए रोड शो भी करेंगी। उनका कार्यक्रम राजस्थान से सड़क मार्ग से प्रवेश कर मुरैना, ग्वालियर और डबरा होते हुए दतिया तक पहुंचने का बनाया जा रहा है। मकसद है सिंधिया से हिसाब चुकता करना दरअसल, कमल नाथ सरकार गिराने के लिए कांग्रेस ज्योतिरादित्य सिंधिया को दोषी ठहराती रही है, इसलिए वह कांग्रेस और गांधी परिवार के निशाने पर हैं। सिंधिया से हिसाब चुकता करने के लिए ही कांग्रेस उनके गढ़ में प्रियंका गांधी वाड्रा का रोड शो कराने की तैयारी में है। कांग्रेस को उम्मीद है कि प्रियंका के आने से इन क्षेत्रों में कार्यकर्ता सक्रिय होंगे, क्योंकि अभी मुश्किल यह है कि सिंधिया के प्रभाव वाला क्षेत्र होने के कारण यहां पार्टी कार्यकर्ताओं की कमी के साथ ही भरोसे के संकट से भी जूझ रही है। वह कड़ी टक्कर देने वाले प्रत्याशी के लिए भी दूसरे दलों के बागियों पर आश्रित है। पीढ़ियों से हाजिरी लगाता आया गांधी परिवार कांग्रेस प्रियंका के इस प्रस्तावित दौरे को सियासी करार देने से बच रही है। उसका तर्क है कि मां पीतांबरा के दर्शन के लिए गांधी परिवार पीढ़ियों से हाजिरी लगाता आया है। पूर्व प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी यहां आकर दर्शन कर चुके हैं। 2018 में राहुल गांधी ने यहां दर्शन पूजन कर चुनावी अभियान शुरू किया था। एक तीर से कई निशाने कांग्रेस प्रियंका का रोड शो कर एक तीर से कई निशाने लगाना चाहती है। 2018 में राहुल गांधी की मंदसौर रैली ने मप्र विस चुनाव-2018 की तस्वीर ही बदल दी थी। उपचुनाव में प्रियंका भी संदेश देना चाहेंगी कि कांग्रेस में युवा नेताओं को भरपूर मौका दिया जा रहा है। प्रियंका उत्तर प्रदेश में लगातार सक्रिय हैं। रोड शो से सफलता मिलने की स्थिति में उत्तर प्रदेश में प्रियंका की पैठ और गहरी होगी। वहां भी कार्यकर्ताओं का नया कैडर मजबूत हो सकता है।

पानीपत में दिल्ली कूच कर रहे किसानों पर आंसू गैस के गोले, कई हिरासत में

चंडीगढ़। कृषि बिल को लेकर किसानों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर हरियाणा और पंजाब में किसान सड़क पर हैं और बिल को वापस लेने की मांग कर रहे हैं. हरियाणा के पानीपत में दिल्ली कूच कर रहे किसानों पर हरियाणा पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे हैं और पानी की बौछार की गई है. इसके साथ ही किसानों को हिरासत में ले लिया गया. प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि अध्यादेश किसानों का डेथ वारंट है और इसे किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे. जो पहले से उन्हें मिल रहा है, वह उसको लेकर खुश हैं. सरकार और ज्यादा देने का प्रयास ना करें. उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को उनकी जमीन को अडानी और अंबानी को बेचने का काम कर रही है. किसान नेताओं का कहना है कि सरकार लोगों के साथ धोखा कर रही है, क्योंकि तीनों अध्यादेश पूंजीपतियों के लिए है और पूंजीपति किसान की फसल का मनचाहा एमएससी लगाएंगे, जिससे किसान की हालत और भी ज्यादा खराब होगी. आज पूरे देश का किसान रोड पर उतर कर इसका विरोध कर रहा है. भारतीय किसान यूनियन और अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति ने 25 सितंबर को भारत बंद का ऐलान किया है. भाकियू के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बताया कि देशभर के किसान 25 सितंबर को कृषि सुधार विधेयक 2020 के विरोध में धरना प्रदर्शन और चक्का जाम करेंगे. यूपी के किसान अपने-अपने गांव, कस्बे और हाईवे का चक्का जाम करने का काम करेंगे. किसान यूनियन के महासचिव धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि भारतीय किसान यूनियन इस हक की लडाई को मजबूती के साथ लड़ेगी. सरकार यदि हठधर्मिता पर अड़िग है तो हम किसान भी पीछे हटने वाले नहीं हैं. किसान के पेट पर सरकार ने हमला किया है, जिसे हम कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे. इस कानून से कृषि क्षेत्र में कम्पनी राज को सरकार स्थापित कर रही है.

सपा नज़र ब्राह्मण वोटों पर , 75 जिलों में भगवान परशुराम का भव्य मंदिर बनवाएगी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में कास्ट पॉलीटिक्स हावी है। खासकर 16% ब्राह्मणों को अपने पाले में लाने के लिए सपा हो या कांग्रेस कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती है। आम आदमी पार्टी तो यूपी में जातिगत सर्वे भी करा चुकी है। जिस पर सांसद संजय सिंह पर राजद्रोह का केस भी दर्ज है। मंगलवार को सपा के पूर्व मंत्री व राष्ट्रीय प्रवक्ता अभिषेक मिश्रा ने उरई में कहा कि, सपा प्रदेश के 75 जिलों में भगवान परशुराम का भव्य मंदिर बनवाएगी। इसके लिए चेतना पीठ के नाम से ट्रस्ट बन गया है। इस सरकार में हर जाति व वर्ग परेशान पूर्व मंत्री अभिषेक ने योगी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि, पूरे प्रदेश में ब्राह्मणों के साथ-साथ अन्य जातियों पर अन्याय हो रहा है। इनके सांसद-विधायक टीवी पर बैठकर ब्राह्मणों को जूते मारने की बात कहते है, वहीं इस सरकार में युवा वर्ग, किसान परेशान है। जो लोग सरकारी नौकरी कर रहे उनको सरकार ने 3 माह से वेतन नहीं दिया है और जिनको वेतन दे रही है, उनका केवल 40% ही दिया जा रहा है। इसे समाजवादी पार्टी कभी भी बर्दाश्त नहीं करेगी और इसके लिए लगातार संघर्ष करती रहेगी। चार बार मुख्यमंत्री रहीं मायावती तब क्यों नहीं बनवाया मंदिर उन्होंने मायावती पर भी हमला बोला। कहा कि मायावती चार बार यूपी में मुख्यमंत्री रह चुकी हैं, तीन बार उन्होंने भाजपा के साथ सरकार बनाई, जबकि एक बार ब्राह्मणों के सहयोग से सरकार बनाई थी, लेकिन उन्होंने भगवान परशुराम का एक भी मंदिर नहीं बनाया और जब वह कह रही हैं कि सरकार आते ही वह मंदिर बनाएगी, लेकिन सपा सरकार में न होते हुए भी अभी से ही मंदिर का निर्माण कराने लगी है। उन्होंने कहा कि सपा सरकार बनते ही हर वर्ग का विशेष ध्यान रखा जाएगा, बैक डोर से कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए लाया गया कृषि बिल अभिषेक मिश्रा ने कहा कि प्रदेश में भाजपा सरकार द्वारा 5 साल संविदा का कानून लागू करने की योजना थी, जैसा कि वह गुजरात में इसे लागू कर चुकी थी। लेकिन हाईकोर्ट के आदेश पर वहां पर वापस लेना पड़ा और जब यहां युवाओं ने आवाज उठाई तो सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा। वहीं, किसानों के साथ भाजपा सरकार ने अंग्रेजों से काले कानून के तहत कृषि बिल लाया है। जिसमें बैक डोर से कंपनियों को ले जाकर किसानों की कमर को तोड़ना है। सपा सरकार आते ही यूपी में किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए उनके लिए अलग कानून लाया जाएगा, जिससे किसानों को सही एमएसपी मिल सके।

फसल बीमा में 5 लाख किसान मुआवजे से चूके; 2 लाख किसानों को दो अंकों में मुआवजा

भोपाल। प्रदेश के पांच लाख किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का मुआवजा नहीं मिल पाएगा। वो इसलिए क्योंकि सरकार अपने पोर्टल में 6511 गांवों की अधिसूचित फसल दर्ज करना भूल गई। ये गांव सीहोर, हरदा, होशंगाबाद, देवास और रायसेन जिले के हैं। केंद्र सरकार ने इस गड़बड़ी पर राज्य सरकार से 30 सितंबर तक जानकारी मांगी है, ताकि इन किसानों को फसल बीमा का फायदा मिल सके। 2 लाख को दो अंकों में मुआवजा हाल ही में सरकार ने खरीफ-2019 की 4611 करोड़ रु. बीमा राशि 22 लाख किसानों के खाते में डाली थी। इसमें से करीब दो लाख किसान ऐसे हैं, जिन्हें 99 रु. या दो अंकों में मुआवजा मिला। ये वे किसान हैं, जिनकी सोयाबीन की फसल खराब हुई है। नीमच में बोरखेड़ी पोनेरी के गोपाल को 35 पैसे तो सीहोर की श्यामपुर दोराहा की कौशल्या को एक रुपए मुआवजा मिला। ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि दो साल पहले सरकार ने तय किया था कि न्यूनतम मुआवजा 200 रु. होगा, लेकिन यह मामला केंद्र के पास मंजूरी के लिए अटका है। अब जब किसानों को 200 रु. से कम मुआवजा मिला, तब राज्य ने केंद्र से प्रस्ताव को मंजूरी देने को कहा है। मामले पर कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री जीतू पटवारी ने कहा कि ऐसे दो लाख किसान हैं जिन्हें 100 रुपए से भी कम मुआवजा मिला है। राज्य सरकार किसानों से मुआवजे के नाम पर मजाक कर रही है। यहां भी हालात ऐसे ही रतलाम, मंदसौर व नीमच में सैंकड़ों किसान ऐसे हैं, जिन्हें 100 रुपए से कम का क्लेम मिलेगा। मंदसौर जिले में 11 रुपए व रतलाम जिले में 43 रुपए न्यूनतम बीमा क्लेम मिलेगा। नीमच जिले के मोडी के किसान गोविंदराम को 23 रुपए का बीमा क्लेम स्वीकृत हुआ है। सूची में 21 किसान ऐसे हैं जिन्हें 100 रुपए से कम की बीमा राशि स्वीकृत हुई है। बोरखेड़ी पानेरी के किसान गोपालकृष्ण ने बताया कि सरकार जब मदद नहीं कर सकती है तो मजाक क्यों करती है। खरगौन जिले में किसानों को 4 से 8 रुपए तक का मुआवजा मिला, जिले में 1.43 लाख किसान है और क्लेम की 118 करोड़ 22 लाख रुपए की राशि का वितरण किया जाना है। महेश्वर के नागझिरी गांव के 81 किसानों को मिली क्लेम की राशि 8 रुपए से कम है।

MP : शहरी क्षेत्रों में सरकारी जमीन पर काबिज लोगों को दिए जाएंगे स्थायी पट्टे

भोपाल. मध्य प्रदेश कैबिनेट ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए प्रदेशभर में शहरी क्षेत्रों में सरकारी जमीन (नजूल की भूमि) पर काबिज लोगों को स्थायी पट्टे मिल सकेंगे। सरकार 53 साल बाद नजूल भूमि के नियम बदलने जा रही है। इसके लिए हर जिले में कलेक्टर, संभाग में कमिश्नर और राजधानी भोपाल में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति बनाई जाएंगी। नजूल की भूमि का पूरा ब्योरा एक क्लिक मेंं ऑनलाइन देखा जा सकेगा। गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कैबिनेट की बैठक की जानकारी देते हुए कहा कि गौशालाओं के लिए 10 एकड़ तक नजूल की जमीन एक रुपए सालाना लाइसेंस फीस पर दी जाएगी। यानि ये एक तरह से मुफ्त होगी। राज्य सरकार 2020 नजूल भूमि निवर्तन निर्देश लागू करने जा रही है। अब राजस्व भूमि का संधारण किया जाएगा नरोत्तम मिश्रा ने की बैठक में 50 साल बाद नगरीय क्षेत्रों की शासकीय भूमि के धारकों को भू अधिकार पत्र देकर उन्हें स्वामित्व दिया जाएगा। नजूल निवर्तन निर्देश दिया गया गया है। वर्तमान में नगरीय क्षेत्रों में नजूल भूमि, आबादी भूमि धारणा अधिकार सुनिश्चित एवं राजस्व वसूली के लिए कोई भूमि अभिलेख संधारित नहीं था। जो इसके बाद अब होगा। नगरीय क्षेत्र में शासकीय भूमि में काबिज अधि भोगियों को भूमि स्वामी प्रमाणपत्र अथवा स्थायी पट्टा किए जाने का प्रस्ताव है। विभाग द्वारा तैयार किए गए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित वरिष्ठ सचिव समिति द्वारा भी इसमें अनुशंसाएं की गई हैं। जब हम गांव में पट्टा दे रहे हैं तो शहर में क्यों नहीं ? गृह मंत्री ने कहा 1967 से राज्य शासन द्वारा नजूल भू खंडों के अधिपत्य अभिलेख तैयार करने और उसके प्रमाणपत्र तैयार करने के निर्देश शासन देगा। ये कार्रवाई प्रदेश के सभी नगरों में शुरू होगी। जहां पर नजूल भूमि का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, वहां पर उपलब्ध होगा। इसकी आवश्यकता क्यों है, वो इसलिए कि भू धारकों को पट्टा देने के साथ ही नजूल भूमि का अभिलेख तैयार करने और इससे राजस्व वसूली करने की जरूरत है। अब इसके बाद स्थायी पट्टा मिल सकेगा। जैसे ग्वालियर में जेसी मिल में लोग सालों से रह रहे हैं। जब हम गांवों में पट्टा दे रहे हैं और मालिक बना रहे हैं तो फिर शहर में क्यों नहीं। जमीन कैसे दी जा सकेगी राज्य शासन के किसी भी विभाग को हस्तांतरण द्वारा, स्थायी पट्टे पर द्वारा, स्थानीय निकाय को भू-स्वामी के हक में दी जाकर, नीलामी द्वारा भू स्वामी के हक में दी जाकर। खाली पड़ी भूमि को मेला लगाने के लिए लाइसेंस द्वारा दी जा कर। योजना बनाकर निर्माण के लिए बाजार, बस स्टैंड इत्यादि के लिए बाजार मूल्य 50 फीसदी प्रीमियम। आबादी योजना के लिए बाजार मूल्य के लिए 60 फीसदी प्रीमियम पर। मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दलों को सक्षम प्राधिकार राज्य सरकार को होगी, लेकिन ऐसे मामले में कैबिनेट की मंजूरी जरूरी होगी। अब एनओसी के लिए नहीं भटकना होगा नजूल के एनओसी के लिए अब भटकना नहीं पड़ेगा। अब ये व्यवस्था समाप्त की जा रही है। इसे फ्री कर दिया गया। नजूल की भूमि का लैंड बैंक तैयार किया ज रहा है। एक क्लिक पर पूरे नजूल की जानकारी हर कोई ले सकेगा। कमजोर वर्गों को आधे प्रीमियम पर भूमि आवंटित की जाएगी। सहकारी बैंकों के मामले में 50 फीसदी प्रीमियम पर भूमि दी जाएगी। चैरिटेबल संस्थाओं को रियायती दरों पर भूमि दी जाएगी। गौशालाओं के लिए 10 एकड़ तक की भूमि एक रुपए वार्षिक लाइसेंस फीस पर दी जाएगी मतलब गौशालाओं के लिए भूमि निशुल्क कर दी गई है। स्थायी पट्टे वित्त विभाग की सहमति से 99 साल के लिए दिए जाएंगे। 77 लाख किसानों के खातों में 25 सितंबर को एक क्लिक में भेजी जाएगी 4-4 हजार की राशि नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि उसमें किसान कल्याण निधि जोड़कर 10 हजार रुपए साल तय कर दी है। प्रदेश सरकार ने इसमें 4 हजार रुपए जोड़ा गया है। 77 लाख किसानों के खाते में 25 सितंबर को दीन दयाल उपाध्याय जी के जन्मदिन पर ये राशि एक क्लिक में भेजी जाएगी। बुधवार से राजस्व विभाग का अमला और पटवारी इसके डेटा कलेक्शन के लिए जुट जाएंगे। 77 लाख के अलावा, जो किसान मानते हैं कि वह पात्र हैं, लेकिन उनका नाम नहीं है। वह अपना नाम इस लिस्ट में जुड़वाएं। उन सभी के डेटा को कंप्लीट करने का काम कल से होगा। फिर चाहे वो 80 लाख हो जाएं या 90 लाख हो जाएं। सभी को इसका लाभ मिलेगा।

MP : विदिशा में फसल बीमा की राशि काे लेकर किसानाें का एक घंटे तक चक्काजाम

विदिशा। फसल बीमा की राशि और खराब हुई फसल के सर्वे की मुआवजा राशि को लेकर मंगलवार को देवास-कानपुर हाईवे के धतूरिया गांव के पास किसान सड़क पर उतर आए। किसानों ने नेशनल हाईवे 146 पर चक्काजाम कर दिया। किसानों का कहना था कि बीमा राशि की सूची में हमारा नाम नहीं है। चक्काजाम के कारण दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। इन गांवों के किसान शामिल चिड़ोरिया, खाईखेड़ा, मिर्जापुर, पांझ, कुआखेड़ी, सन, भैरोखेड़ी, रुसल्ला, कराखेड़ी, मदनखेड़ी, धारुखेड़ी, डाबर, पड़रात, धतूरिया, पीपरहूंठा, अबेला, तिलक, भदारबड़ा गांव, हिरनई, खरी, काफ, मूड़रा, ठर्र आदि गांव के किसान यहां काफी संख्या में जुट गए थे। किसानों के आगे सिविल लाइंस पुलिस बेबस नजर आई। वहीं, कांग्रेस नेताओं के नेतृत्व में किसानों ने बीमा राशि को लेकर सुनवाई नहीं होने से कलेक्टोरेट में प्रदर्शन किया। इसके अलावा राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के कार्यकर्ताओं ने किसानों की समस्याओं को लेकर किसानों ने जमकर नारेबाजी की। किसान जुटते गए, पुलिस को भनक भी नहीं लगी सागर रोड के एक दर्जन से ज्यादा गांव के किसान बीमा राशि को लेकर सागर हाईवे पर धतूरिया के पास एकत्रित हुए। सैकड़ों की संख्या में किसान पूर्व सूचना पर जुटते गए लेकिन सिविल लाइंस पुलिस को इस बात की भनक नहीं लगी। सिविल लाइंस थाना प्रभारी कमलेश सोनी के ढीले रवैये की वजह से आंदोलन को और ज्यादा बल मिला। एकत्रित हुए किसानों ने करीब एक घंटे तक जाम लगाए रखा। बात करनी की बजाय थाना प्रभारी किसानों ने बदतमीजी कर रहे थे। इस वजह से नाराज किसानों ने हाईवे पर एक घंटे तक जाम लगा दिया। दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार लग गई। कई गांवों के किसानों को नहीं मिली बीमा राशि, नेता और अफसर कर रहे गड़बड़ी कांग्रेस नेता देवेंद्रसिंह राठौर, डॉ राजेन्द्रसिंह दांगी, नरेन्द्र रघुवंशी, पोपसिंह, दीवान किरार, प्रकाश कक्का, सुनील रघुवंशी , पांझ पंचायत के सरपंच तोरन सिंह का कहना था कि पिछले साल खरीफ फसल को बहुत नुकसान हुआ था। लेकिन जहां नुकसान हुआ वहां किसानों को राशि नहीं दी गई। कंपनी, अफसरों और नेताओं के साथ मिलकर गड़बड़ी करती है। हाईवे पर जाम के बाद कृषि: संचालक एएस चौहान किसानों से चर्चा करने पहुंचे। डीडीए ने बताया कि एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ने प्रदेश के 22 जिलों में बीमा किया था। 416 हलकों में बीमा आया है और 171 में नहीं आया है। कंपनी के अधिकारियों से चर्चा हुई। बाकी हलकों की राशि आने की उम्मीद है। वहीं विदिशा विधायक शशांक भार्गव ने प्रधानमंत्री, कृषि मंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर विसंगति को दूर करने की मांग की। कांग्रेस भी उतरी किसानों के लिए कांग्रेस नेताओं ने बीमा नहीं मिलने पर किसानों के साथ कलेक्टोरेट में प्रदर्शन किया। कांग्रेस जिलाध्यक्ष कमल सिलाकारी, पूर्व विधायक डॉ मेहताबसिंह यादव आदि नेताओं का कहना था कि बीमा राशि वितरण सही ढंग से की जाए। जहां नुकसान हुआ था वहां बीमा नहीं मिला। वहीं राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के कार्यकर्ताओं ने भी इसका विरोध कर प्रदर्शन किया।

MP : दो और मंत्रियों को कोरोना, BMHRC की डायरेक्टर सहित राजधानी में 271 नये मरीज़

भोपाल. मध्य प्रदेश में मंत्रियों के कोरोना पीड़ित होने का सिलसिला जारी है. मंगलवार को फिर दो मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया और हरदीप सिंह डंग की रिपोर्ट पॉजिटिव आयी है. इससे पहले सीएम शिवराज सहित उनके मंत्रिमंडल के कई मंत्रियों को कोरोना हो चुका है. रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया चिरायु अस्पताल में भर्ती हो गए हैं.मिली जानकारी के मुताबिक सिसोदिया अपनी मां का कोरोना टेस्ट कराने चिरायु अस्पताल गए थे. मां की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आयी. जिसके बाद उन्होंने भी अपना टेस्ट कराया. जांच में वे भी संक्रमित मिले. इसके बाद वो मां के साथ ही अस्पताल में भर्ती हो गए. डंग की अपील ऊर्जा मंत्री हरदीप सिंह डंग की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई है.संक्रमित होने के बाद मंत्री डंग ने सोशल मीडिया के ज़रिए ये जानकारी साझा की है.डंग ने ट्वीट कर ये बताया कि उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है, वह अस्पताल में भर्ती हैं.साथ ही ये अपील भी की है कि उनके संपर्क में जो लोग भी आए हैं, वे अपना कोरोना टेस्ट करा लें. यह भी संक्रमण की चपेट में शहर में मिले संक्रमित मरीजों में भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर की डायरेक्टर डॉ. प्रभा देसिकन की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है.भोपाल में उप लोकायुक्त सुशील कुमार पॉलो को भी कोरोना हो गया है. नेशनल ज्यूडिशियल अकेडमी में दो मरीज मिले. जीएमसी में दो, आरकेडीएफ में दो और चिरायु अस्पताल में एक डॉक्टर की रिपोर्ट पॉजिटिव आई.राजभवन में तीन, पुलिस कंट्रोल रूम में दो जवान संक्रमित मिले हैं. मैनिट की स्थापना शाखा के अधीक्षक की पत्नी भी कोरोना से संक्रमित हो गयी हैं. 16 दिन बाद मौत के गिरे आंकड़े राजधानी में संक्रमित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. रोजाना ढाई सौ से ज्यादा नए मरीज मिल रहे हैं.मंगलवार को शहर में 271 नए संक्रमित मिले हैं. लगभग 16 दिन बाद संक्रमितों की मौतों के मामलों में थोड़ी कमी दर्ज की गई है. स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक 16 दिन बाद सिर्फ एक मरीज की मौत हुई है.इससे पहले 7 सितंबर के बुलेटिन में सिर्फ एक मौत रिकॉर्ड हुई थी.

कमलनाथ ने कहा- किसानों की कर्ज माफी पर झूठ बोलने के लिए शिवराज और सिंधिया माफी मांगे

भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शनिवार को ग्वालियर में मुख्यमंत्री शिवराज को चुुनौती कहा था कि वह आमने-सामने बैठ जाएं, मैं उन्हें 26 लाख किसानों के कर्ज माफी का पूरा रिकॉर्ड दे दूंगा। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मंगलवार को बयान जारी कर कहा कि कांग्रेस सरकार द्वारा किसानों की ऋण माफी पर पहले दिन से ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह और कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए ज्योतिरादित्य सिंधिया झूठ बोलते रहे हैं। इस झूठ की राजनीति का पर्दाफाश स्वयं शिवराज सरकार ने सोमवार को विधानसभा में कर दिया है। शिवराज सरकार ने स्वीकार किया कि प्रदेश में प्रथम और द्वितीय चरण में कांग्रेस की सरकार ने 51 जिलों में 26 लाख 95 हजार किसानों का 11 हजार 600 करोड़ रुपए से अधिक का कर्ज माफ किया है। प्रदेश की जनता से सफेद झूठ बोलने और गुमराह करने की घृणित राजनीति के लिए शिवराज सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया को तत्काल प्रदेश की जनता से माफी मांगना चाहिए । कमलनाथ ने कहा कि ग्वालियर दौरे के दौरान मैंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को किसानों की ऋण माफी के मुद्दे पर खुली बहस करने की चुनौती दी थी। वे इस मुद्दे पर खुली बहस करते, उसके पहले ही उनकी सरकार ने विधानसभा में स्वीकार कर लिया कि कांग्रेस सरकार ने 26 लाख 95 हजार किसानों का ऋण माफ किया था। जबकि स्वीकृति की प्रकिया में शेष पांच लाख नब्बे हजार किसानों की संख्या को भी स्वीकार किया है। भाजपा की झूठ की राजनीति का पर्दाफाश हुआ पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सदन के पटल पर जो सच्चाई भाजपा सरकार ने स्वीकार की है, इससे शिवराज सिंह व भाजपा की झूठ की राजनीति का पर्दाफाश हो चुका है और मेरे द्वारा पहले दिन से ही किसान ऋण माफी की जो संख्या और सूची दी जा रही थी, वह सच साबित हुई है। मैं शुरू से ही यह कहता आ रहा हूं कि भाजपा चाहे जितना झूठ बोल ले लेकिन जो सच्चाई है, वह इस प्रदेश की जनता जानती है और हमारे किसान भाई इसके गवाह है। इसी सच्चाई को सदन में भाजपा सरकार के कृषि मंत्री ने लिखित में स्वीकार भी किया है । अब बाकी किसानों की कर्ज माफी की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए कमलनाथ ने कहा कि सच्चाई को स्वीकार करने के बाद शिवराज सरकार को शेष किसानों की ऋण माफी की प्रक्रिया को शीघ्र शुरू करना चाहिए । उन्होंने कहा कि विधानसभा में जो बहाना ऋण माफी योजना की समीक्षा का बनाया गया है, वह बताता है कि भाजपा और शिवराज सिंह किसानों के विरोधी है। शिवराज सरकार कोई समय-सीमा भी बताने को तैयार नहीं है, जिससे स्पष्ट होता है कि वे किसानों की कर्ज माफी करना ही नहीं चाहते।

MP : शिवराज सरकार ने माना- कमलनाथ सरकार में 51 जिलों में माफ हुआ किसानों का कर्ज

भोपाल. मध्य प्रदेश में किसान कर्ज माफी को लेकर अब तक पिछली कांग्रेस सरकार पर हमलावर सत्‍तारूढ़ बीजेपी ने माना है कि कमलनाथ सरकार में किसान कर्ज माफी हुई है. किसान कर्ज माफी के मुद्दे पर अब तक बीजेपी के आरोप झेल रही कांग्रेस ने प्रदेश सरकार पर जवाबी हमला करना शुरू कर दिया है. पूर्व मंत्री और मौजूदा कांग्रेस विधायक डॉक्टर गोविंद सिंह ने कहा है कि कांग्रेस बार-बार यह कह रही है कि कमलनाथ सरकार में किसानों का कर्जा माफ हुआ है, लेकिन बीजेपी किसान कर्ज माफी के मामले पर भ्रम फैलाने का काम कर रही है. अब विधानसभा में सरकार के जवाब से साफ हो गया है कि किसानों का कर्जा माफ हुआ है. डॉक्टर गोविंद सिंह ने दावा किया है कि उनके विधानसभा क्षेत्र में किसानों का दो लाख रुपए तक का भी कर्जा माफ हुआ है. विधानसभा में कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह (के एक सवाल पर कृषि मंत्री कमल पटेल ने जवाब दिया कि प्रदेश में 51 जिलों में किसान कर्ज माफी हुई है. राज्य सरकार ने विधानसभा में बताया कि 27-12-2019 से पहले किसान कर्ज माफी का पहला चरण और 27-12-2019 के बाद किसान कर्ज माफी का दूसरा चरण चलाया गया था. राज्य सरकार ने यह भी माना है कि प्रदेश में किसानों का एक लाख रुपए तक का कर्जा माफ हुआ है. राज्य सरकार ने गुना, बमोरी, राघोगढ़, मधुसूदनगढ़, चाचौड़ा, कुंभराज और आरोन में भी 17403 किसानों का एक लाख रुपए तक का कर्जा माफ होने की जानकारी दी. राज्य सरकार के विधानसभा में दिए गए जवाब के मुताबिक, प्रदेश के सभी जिलों में किसान कर्ज माफी हुई है. कमलनाथ सरकार ने किया था यह वादा इस बीच, कृषि मंत्री कमल पटेल ने एक बार फिर पूर्व की कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा है. कृषि मंत्री कमल पटेल के मुताबिक, कमलनाथ सरकार ने 10 दिन के अंदर कर्ज माफी का वायदा किया था, लेकिन एक भी किसान का दो लाख रुपए तक का कर्जा माफ नहीं हुआ है. कृषि मंत्री कमल पटेल पिछली सरकार किसान कर्ज माफी के नाम पर किसानों के साथ धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया.

मरीज रातभर में 6 से 7 अस्पताल भटके, नहीं मिले बेड, एक या दो दिन में ही मौत

इंदौर। इंदौर में 80 साल की महिला को 28 अगस्त की रात सांस में तकलीफ होने पर मेदांता अस्पताल ले गए। वहां एक्सरे करने पर पता चला कि निमोनिया है। बेड नहीं होने से अरविंदो अस्पताल भेजा। वहां भी दो घंटे तक बेड नहीं मिला। फिर इंडेक्स ले गए। वहां भी बेड नहीं मिला। वहां से ग्रेटर कैलाश अस्पताल ले गए। बावजूद महिला ने दम तोड़ दिया। यह काेई एक वाक्या नहीं है, ऐसे ढेरों दुखद मामले आपको कोरोनाकाल में सुनाई दे जाएंगे, जहां बेड नहीं मिल पाया और मिला भी तो भर्ती होने के एक दिन बाद ही मरीज ने दम तोड़ दिया। कोरोना संक्रमण से होने वाली मौत के कारणों का पता लगाने के लिए प्रशासन डेथ-ऑडिट करवा रहा है। जिसके लिए 8 सदस्यीय समिति बनाई गई है। इस समिति ने भी इस बार माना है कि मरने वाले कुछ मरीज ऐसे थे जो रातभर कई अस्पताल भटके हैं। उन्हें बेड नहीं होने का बताकर रैफर कर दिया गया। कुछ तो 5 से 7 अस्पताल भटके थे, जिसके कारण कुछ की एक या दो दिन में ही मौत हो गई। इनमें से 90 फीसदी डायबिटीज, अस्थमा और हाइपरटेंशन सरीखी पुरानी बीमारियों से भी पीड़ित थे। इस रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला खुलासा यह भी हुआ डेंगू के एक मरीज को कोरोना के कोई लक्षण नहीं थे। बावजूद अचानक सांस लेने में तकलीफ हुई। अस्पतालों में भटके, लेकिन किसी ने भर्ती नहीं किया। दो दिन बाद वह पॉजीटिव आ गई, लेकिन तब तक उसकी मौत हो गई। धार, झाबुआ, बड़वानी से आए मरीजों को भी यहां लाने में देर की गई। समिति ने सैंपलिंग और क्वारैंटाइन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए कहा गया है। इसमें तीनों मेडिकल कॉलेजों को यह निर्देश दिए गए हैं कि यह जानकारी ली जाए कि मरीजों को क्यों निजी अस्पतालों से रैफर किया जा रहा है। इसके अलावा यह टिप्पणी भी की गई है कि मरीज निजी अस्पताल जाना इसलिए पसंद कर रहे हैं, क्योंकि वहां सफाई और सुविधाएं सरकारी अस्पतालों से बेहतर है। केस 1: 64 वर्षीय महिला को चार दिन से बुखार आ रहा था। डेंगू की जांच कराई तो डेंगू की पुष्टि हुई। फेरिटिन लेवल भी 1600 हो गया। प्लेटलेट्स भी कम हो गए थे। दवा चल रही थी। मरीज काे सर्दी-जुकाम भी नहीं था और सांस लेने में भी कोई दिक्कत नहीं थी। यानी कोरोना बीमारी के कोई लक्षण नहीं थे। 29 अगस्त को अचानक सीने में दर्द हुआ तो उन्हें चोइथराम अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टर ने कहा कि कोरोना नहीं है। अभी भर्ती नहीं कर सकते। वहां भर्ती करने से मना किया। यही स्थिति एप्पल हॉस्पिटल में भी हुई। इसके बाद परिजनों ने इंडेक्स अस्पताल में बात की। वहां पर भी मना कर दिया गया। परिजन फिर मयूर अस्पताल ले गए और महिला को भर्ती करवाया गया। 30 अगस्त को कोरोना वायरस जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई, लेकिन उसी दिन उनकी मौत हो गई। मरीज को डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और मोटापा की समस्या थी। बीमार होने के बाद अस्पताल में यह सिर्फ एक ही दिन भर्ती रहे। केस 2: इसी तरह 58 साल के मरीज को जब सांस लेने में तकलीफ हुई तो उन्हें विशेष हॉस्पिटल ले जाया गया। यह अस्पताल नेमावर रोड पर शिफ्ट हो गया था तो परिजन सुयश अस्पताल ले गए। वह भर्ती करने से मना कर दिया गया। इसके बाद से सैम्स अस्पताल ले गए। जहां बैठ की समस्या के कारण भर्ती नहीं किया गया। परिजन गोकुलदास अस्पताल ले गए तो वहां बताया गया कि बेड खाली हैं, लेकिन ऑक्सीजन की व्यवस्था नहीं है। इसके बाद परिजन राजश्री अपोलो अस्पताल ले गए। वहां भी बेड खाली नहीं था। मेदांता अस्पताल में फोन करने पर पता चला बेड खाली नहीं है। 29 अगस्त को मरीज को सिनर्जी अस्पताल में भर्ती किया गया। जहां पर ऑक्सीजन सेचुरेशन 30 फीसदी बताया गया। 29 अगस्त की सुबह ही उनका ऑक्सीजन लेवल 80 से 87 फीसदी हो गया था, लेकिन उसी दिन उसकी मौत हो गई। मरीज का अस्पताल स्टे केवल एक ही दिन पाया गया।

MP : इंदौर बुजुर्ग के शव को चूहों ने कुतरा, एक लाख जमा करने के बाद ही दिया शव

इंदौर में कोरोना के मरीजों का इलाज करने वाले एक और अस्पताल ने सोमवार को मानवता को शर्मसार कर दिया। अन्नपूर्णा इलाके में स्थित यूनीक अस्पताल में तीन दिन पहले भर्ती हुए 87 साल के बुजुर्ग की रविवार देर रात मौत हो गई। परिजन का आरोप है कि अस्पताल ने शव को रखने में लापरवाही दिखाई। पूरी बॉडी को चूहों ने कुतर दिया। परिजन को शव तभी सौंपा गया, जब उन्होंने एक लाख का बिल चुका दिया। मामला सामने आने के बाद कलेक्टर मनीष सिंह ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। जांच एडीएम अजय देव शर्मा करेंगे। इतवारिया बाजार के रहने वाले नवीन चंद जैन (87 साल) को सांस लेने में तकलीफ होने पर 17 सितंबर को यूनीक अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। परिजन के अनुसार, बुजुर्ग का कोविड वार्ड में इलाज चल रहा था। रविवार रात करीब 3 बजे उनकी मौत की सूचना दी गई। कहा गया कि निगम की गाड़ी उन्हें अंतिम संस्कार के लिए लेकर जाएगी। जब हम दोपहर 12 बजे अस्पताल पहुंचे तो हमने देखा कि शव को जगह-जगह चूहों ने कुतर रखा है। हमने प्रबंधन से बात की तो उनका कहना था कि हमसे गलती हो गई। एक लाख रुपए का बिल थमाया, शव पर गंभीर घाव थे परिजन प्राची जैन का कहना है, ‘जब अस्पताल पहुंचे तो एक लाख से ज्यादा का बिल थमा दिया गया। बिल जमा करने के बाद शव दिया गया। शव देखकर तो हमारे होश उड़ गए। चेहरे और पैर में गंभीर घाव थे। अस्पताल प्रबंधन ने शव को कहीं ऐसी जगह पटक दिया था, जहां चूहों ने कुतर दिया। आंख पर गंभीर घाव हो गया था।’ आक्रोशित परिजन ने शव अस्पताल के बाहर रखकर हंगामा किया। मौके पर पहुंची पुलिस ने समझाइश दी। हालांकि, काफी देर होने के बाद भी अस्पताल की तरफ से कोई जिम्मेदार नहीं आया, जो परिजन को पूरी जानकारी दे सके। हमें मिलने नहीं दिया गया, शाम को अच्छे से बात की थी परिजन के अनुसार, अस्पताल वालों ने भर्ती करने के बाद हमें मिलने नहीं दिया। रविवार शाम 4 बजे फोन पर बात हुई तो वे अच्छे से बात कर रहे थे। रात साढ़े 8 बजे अस्पताल वालों ने हमें बुलाया और हालत गंभीर बताते हुए हमसे कागज पर साइन करवा लिए। देर रात साढ़े 3 बजे हमें बताया कि उनकी मौत हो गई। यदि वे कह देते तो हम रात में ही शव लेकर चले जाते। अस्पताल वालों ने इस तरह से बॉडी क्यों छोड़ा? हमारे साथ अन्याय हुआ है। इंदौर में दो मामले पहले भी सामने आए थे 9 सितंबर को एमवायएच में एक कोरोना मरीज की मौत हो गई थी, लेकिन परिजन को उनकी मौत का पता 10 दिन बाद चला। परिजन को लगता रहा कि मरीज का इलाज चल रहा है। (पूरी खबर यहां पढ़ें)

शिवराज जी, ये इंदौर में क्या हो रहा है? ना जीवित इंसान सुरक्षित है और ना शव?

पिछले एक हफ्ते में इंदौर में मरीजों के साथ-साथ शवों से भी जो बदसलूकी की घटनाएं सामने आ रही हैं, उससे शहर की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं। एमवाय की मर्चुरी में शव का कंकाल बन जाना, पांच दिन तक दो महीने के बच्चे का शव बॉक्स में पड़ा रहना, कोरोना मरीज की मौत के बाद परिजन को बिना बताए शव रूम में रखवा देने के बाद सोमवार को यूनिक अस्पताल में एक कोविड मरीज के शव को चूहों द्वारा कुतरा जाना और एमटीएच अस्पताल में एक मरीज की फिर से मौत हो जाना जैसे मामले ने शहर की स्वास्थ्य सेवाओं पर सवालिया निशान खड़ा कर दिए हैं। इस पूरे मामले में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी ट्वीट कर चिंता जाहिर की है। उन्होंने लिखा – मुख्यमंत्री शिवराज जी, ये आपके सपनों के शहर इंदौर में क्या हो रहा है? ना जीवित इंसान सुरक्षित है और ना शव? पूर्व सीएम का ट्वीट मुख्यमंत्री शिवराज जी, ये आपके सपनों के शहर इंदौर में क्या हो रहा है? ना जीवित इंसान सुरक्षित है और ना शव? शव कंकाल बन रहे हैं, नवजात का शव मुर्दाघर में रख भुला दिया जाता है और अब शव को चूहे द्वारा कुतरे जाने की घटना सामने आयी है। मानवता को शर्मशार करने वाली इन घटनाओं से परिवार की भावनाएं आहत हो रही हैं, इंसानियत – मानवता तार-तार हो रही है? स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली की सामने आ रही इन तस्वीरों पर सरकार कड़ा निर्णय ले, दोषियों पर सख़्त कार्यवाही करे। यह है मामला इतवारिया बाजार के रहने वाले नवीन चंद जैन (87 साल) को सांस लेने में तकलीफ होने पर 17 सितंबर को यूनीक अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। परिजन के अनुसार, बुजुर्ग का कोविड वार्ड में इलाज चल रहा था। रविवार रात करीब 3 बजे उनकी मौत की सूचना दी गई। कहा गया कि निगम की गाड़ी उन्हें अंतिम संस्कार के लिए लेकर जाएगी। जब हम दोपहर 12 बजे अस्पताल पहुंचे तो हमने देखा कि शव को जगह-जगह चूहों ने कुतर रखा है। हमने प्रबंधन से बात की तो उनका कहना था कि हमसे गलती हो गई।

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