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पश्चिम एशिया तनाव पर संसद में जयशंकर का जवाब: ‘डायलॉग ही समाधान’, भारतीयों की सुरक्षित वापसी पर दिया अपडेट

नई दिल्ली पश्चिम एशिया संकट पर विदेश मंत्री जयशंकर ने राज्यसभा में बयान दिया। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी हालात पर नजर रख रहे हैं और भारतीयों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है। इस बीच, विपक्ष ने संसद में जमकर हंगामा और नारेबाजी की। पश्चिम एशिया में फंसे भारतीयों और ऊर्जा संकट पर राज्यसभा में विपक्ष के हंगामे और नारेबाजी के बीच विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने राज्यसभा में पश्चिम एशिया के हालात पर बयान दिया। उन्होंने कहा कि सरकार इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव को लेकर काफी गंभीर है। भारत ने 20 फरवरी को ही एक बयान जारी कर अपनी चिंता जाहिर कर सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की थी। प्रधानमंत्री मोदी घटनाक्रम पर रख रहे नजर विदेश मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार नए घटनाक्रमों पर करीब से नजर रख रहे हैं। संबंधित मंत्रालय आपस में तालमेल बिठाकर काम कर रहे हैं ताकि सही कदम उठाए जा सकें। उन्होंने बताया कि यह विवाद भारत के लिए बड़ी चिंता की बात है। खाड़ी देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते हैं। ईरान में भी हजारों भारतीय छात्र और कर्मचारी मौजूद हैं। यह इलाका भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है क्योंकि यहां तेल और गैस के मुख्य सप्लायर हैं। सप्लाई चेन में रुकावट आना एक गंभीर मुद्दा है। जयशंकर ने कहा यह विवाद लगातार बढ़ रहा है जिससे इलाके की सुरक्षा की स्थिति खराब हो गई है। इसका असर आम जिंदगी और कामकाज पर पड़ रहा है। इस संकट में भारत ने अपने दो नाविकों को खो दिया है और एक नाविक अभी भी लापता है। तेहरान में भारतीय दूतावास हाई अलर्ट पर भारतीयों की सुरक्षा पर उन्होंने कहा कि तेहरान में भारतीय दूतावास छात्रों को सुरक्षित जगहों पर भेजने में मदद कर रहा है। ईरान में मौजूद व्यापारियों को आर्मेनिया के रास्ते भारत लौटने में सहायता दी गई है। तेहरान में भारतीय दूतावास पूरी तरह सक्रिय और हाई अलर्ट पर है। अब तक लगभग 67,000 भारतीय नागरिक वापस लौटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर चुके हैं। सरकार अपने लोगों को वापस लाने की पूरी कोशिश कर रही है। ईरान ने जताया आभार विदेश मंत्री ने यह भी बताया कि फिलहाल ईरान के बड़े नेताओं से संपर्क करना मुश्किल है। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्री ने भारत का शुक्रिया अदा किया है। भारत ने मानवीय आधार पर ईरानी युद्धपोत ‘लवन’ को कोच्चि पोर्ट पर रुकने की इजाजत दी थी, जिसके लिए ईरान ने आभार जताया है।

PAN कार्ड यूज़र्स अलर्ट! e-PAN डाउनलोड ईमेल के जरिए हो रहा फ्रॉड, सरकार ने दी चेतावनी

नई दिल्ली क्या आपको भी e-PAN कार्ड डाउनलोड करने को लेकर कोई ईमेल आया है? अगर हां, तो चौकन्ने हो जाएं क्योंकि ये साइबर ठगी करने वालों का नया हथकंडा है। दरअसल साइबर अपराधी लोगों को ईमेल भेजकर e-PAN कार्ड डाउनलोड करने का झांसा दे रहे हैं। PIBFactCheck ने X पर पोस्ट कर ठगी के इस नए जाल से बचकर रहने की सलाह दी है। ठग अपने इस नकली ईमेल में फर्जी लिंक पर लोगों को क्लिक करने के लिए उकसाते हैं। साइबर अपराधी नकली लिंक से लोगों का निजी डेटा जैसे कि आधार या बैंक की डिटेल्स चुराकर झूठे लोन और बैंक के साथ धोखाधड़ी को अंजाम देते हैं। PIBFactCheck ने साफ लिखा है कि ये ईमेल नकली है और इस तरह के किसी भी ईमेल पर मौजूद लिंक पर आपको क्लिक नहीं करना चाहिए। इसके अलावा इसकी शिकायत करने के बारे में भी सरकारी फैक्ट चेक संस्था ने पूरी जानकारी उपलब्ध कराई है। क्या है e-PAN कार्ड स्कैन e-PAN कार्ड स्कैम साइबर अपराधियों का ठगी करने का नया हथियार है। इसमें लोगों को e-PAN कार्ड डाउनलोड करने के लिए कहा जाता है। यह मेल इस तरह से लिखा जाता है कि जैसे इनकम टैक्स विभाग की ओर से भेजा गया हो। e-PAN कार्ड डाउनलोड करने के लिए ईमेल में मौजूद लिंक फर्जी होता है। जिसका मकसद यूजर की निजी डिटेल्स चुराकर लोगों का बैंक अकाउंट खाली करना होता है। आपको आए ईमेल तो क्या करें?     अगर आपको ऐसा ईमेल आए, तो PIBFactCheck के अनुसार ईमेल का जवाब न दे। भले कोई भी खुद को आयकर विभाग का अधिकारी बताकर संपर्क करे लेकिन उसका जवाब न दें।     इसके अलावा ईमेल मौजूद किसी भी अटैचमेंट को न खोलें। ऐसा इसलिए क्योंकि इनमें वायरस या मैलवेयर हो सकते हैं जो आपके कंप्यूटर को नुकसान पहुंचा सकते हैं।     ईमेल में मौजूद लिंक पर क्लिक न करें। अगर गलती से क्लिक हो भी जाए, तो वहां अपनी बैंक डिटेल्स या क्रेडिट कार्ड जैसी निजी जानकारी बिल्कुल न भरें।     ईमेल में मौजूद मैसेज में दिए गए लिंक को कॉपी करके अपने ब्राउजर में पेस्ट न करें। हैकर्स ऐसे लिंक बनाते हैं जो दिखने में असली लगते हैं, लेकिन वे आपको फर्जी वेबसाइट पर ले जाते हैं।     अपने कंप्यूटर में हमेशा अपडेटेड एंटी-वायरस, एंटी-स्पाइवेयर और फायरवॉल का इस्तेमाल करें। ये आपको अनचाही फाइलों और इंटरनेट पर आपकी जासूसी करने वाले सॉफ्टवेयर से बचाते हैं। ईमेल आए तो ऐसे करें शिकायत अगर आपको भी e-PAN कार्ड जैसा कोई फर्जी ईमेल आता है, तो आप इसकी शिकायत आसानी से कर सकते हैं। इसके लिए आप     संदिग्ध ईमेल या ईमेल में आए वेबसाइट के लिंक को webmanager@incometax.gov.in पर भेज दें।     इसके अलावा CERT-In को सूचना दें। इसकी एक कॉपी incident@cert-in.org.in पर भी भेजें।     इसके तुरंत बाद उस फर्जी ईमेल को अपने इनबॉक्स से डिलीट कर दें।

तेल डिपो पर इजरायली हमलों के बाद घरों में कैद लोग, ईरान की हवा जहरीली और आसमान काला

तेहरान. इजरायल की ओर से ईरान पर ताबड़तोड़ हमले जारी हैं। इस बीच रविवार को उसने ईरान के तेल डिपो पर भी हमले किए हैं, जिसके कारण वहां की हवा खराब होने की भी शिकायतें हैं। हालात ऐसे हैं कि तेल डिपो पर हमले होने से इतना धुआं उठा कि आसमान काला हो गया है। इसके अलावा हवा में तेल के कण पाए जा रहे हैं। हवा एक तरह से जहरीली हो गई है और ईरान के लोगों को सलाह दी गई है कि मास्क लगाकर निकलें। तेहरान से जो तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं, उनमें दिखता है कि आसमान एकदम काला है। इसके अलावा सड़कों, इमारतों और वाहनों पर भी तेल के धब्बे ही दिख रहे हैं, जिन्हें साफ करना भी मुश्किल है। शहर के गवर्नर ने लोगों से अपील की है कि वे मास्क लगाकर निकलें क्योंकि शहर की हवा प्रदूषित हो गई है और लोग बीमार हो सकते हैं। ईरान के सरकारी मीडिया का कहना है कि देश के कई ऑइल डिपो पर हमले हुए हैं। इनमें शहर के पूर्वोत्तर इलाके में स्थित अघदासेह ऑइल डिपो और शाहरान के ऑइल डिपो शामिल हैं। यही नहीं एक ऑइल रिफाइनरी भी इजरायल के हमले का निशाना बनी है। इजरायल की सेना ने भी पुष्टि की है कि उसने ईरान के तेल डिपो पर हमले किए हैं। उसका कहना है कि ये हमले इसलिए हुए हैं क्योंकि ईरानी सेना इनका इस्तेमाल कर रही थी। यहीं से ईरान की सेना से जुड़े लोगों को तेल सप्लाई हो रही थी। ईरान की FARS न्यूज एजेंसी के अनुसार तेहरान में कुल 4 तेल डिपो और एक ऑइल ट्रांसफर सेंटर पर हमला हुआ है। इसके अलावा तेल टैंकरों के 4 चालक भी एक डिपो पर हमले के दौरान मारे गए हैं। इन तेल डिपो में हुए हमलों के चलते आग भड़क गई, जो घंटों तक जलती रही। इसी के चलते खूब धुआं उठा और आसमान काला नजर आ रहा है। आसपास की इमारतें और इलाके में काली परत जम गई है। हालात ऐसे हैं कि आसमान में तेल से निकला धुआं जम गया और अब वही पिघलकर नीचे गिर रहा है। तेहरान और उसके आसपास की आबादी 1 करोड़ के करीब है। इस तरह इन हमलों ने एक बड़ी आबादी के लिए संकट बढ़ा दिया है। आसमान से टपक रहा तेल, लोगों को गंभीर बीमारियों का खतरा ईरान की रेड क्रेसेंट सोसायटी का कहना है कि इन हमलों के चलते जो तेल की परत धुएं के रूप में आसमान में जम गई है। वह अब धीरे-धीरे नीचे आ रही है। इसके चलते खतरनाक कण हवा में घुल गए हैं और ये स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। यहां तक कि स्किन एलर्जी लोगों को हो रही है और उन्हें सांस लेने तक में परेशानी का सामना करना पड़ा रहा है। तेहरान के लोगों को घरों में ही रहने की सलाह दी गई है। लेबनान में भी हमले, मारे गए 394 लोग इसके अलावा किसी जरूरी काम से निकलने पर मास्क लगाने को कहा गया है। बता दें कि इजरायल ने ईरान के अलावा लेबनान पर भी हमले किए हैं। इन हमलों में 394 लोग मारे गए हैं। इनमें 83 बच्चे भी शामिल हैं। यह हमले तब हो रहे हैं, जबकि लेबनान के साथ इजरायल ने नवंबर 2024 में ही सीजफायर कर लिया था।

मल्लिकार्जुन खरगे के साथ दिल्ली निकले शिवकुमार, कर्नाटक में CM पद की बढ़ी अटकलें

नई दिल्ली. कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार के नई दिल्ली दौरे ने विधानसभा के बजट सत्र के बाद राज्य में संभावित नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को फिर से हवा दे दी है। सरकारी और पार्टी सूत्रों के अनुसार, शिवकुमार रविवार शाम कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ कलबुर्गी से राष्ट्रीय राजधानी के लिए रवाना हुए। इससे पहले दिन में, दोनों नेताओं ने जिले के चित्तपुर में 1,069 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं की शुरुआत की थी। मीडिया के साथ साझा किए गए शिवकुमार के यात्रा कार्यक्रम के अनुसार, वह एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए नयी दिल्ली गये हैं और सोमवार सुबह बेंगलुरु लौटेंगे। सिद्धारमैया क्या बोले मुख्यमंत्री पद को लेकर शिवकुमार के साथ जारी खींचतान के बीच, सिद्धरमैया ने शनिवार को कहा था कि अगर कांग्रेस आलाकमान उन्हें अवसर देता है तो वह दो और बजट पेश कर सकते हैं। सिद्धरमैया ने शुक्रवार को राज्य के वित्त मंत्री के रूप में अपना रिकॉर्ड 17वां बजट पेश किया। कहा जा रहा है कि शिवकुमार के समर्थक कुछ विधायक दिल्ली जाकर पार्टी आलाकमान के सामने अपने नेता को विधानसभा के बजट सत्र के बाद मुख्यमंत्री बनाए जाने की इच्छा व्यक्त चुके हैं। यह बजट सत्र 27 मार्च को समाप्त होगा। इस बीच, शिवकुमार 10 मार्च को सभी मंत्रियों, कांग्रेस विधायकों और विधान परिषद सदस्यों के लिए रात्रिभोज का आयोजन करेंगे, जो कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के अध्यक्ष के रूप में उनके छह साल पूरे होने का जश्न होगा। पहले भी दे चुके संकेत शिवकुमार ने मंगलवार को कहा कि वह ‘अत्यंत धैर्य’ रखे हुए हैं और उन्हें किसी भी प्रकार की क्रांति में शामिल होने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि उन्हें खुद पर विश्वास है और उम्मीद है। कांग्रेस की कर्नाटक इकाई के प्रमुख शिवकुमार ने कहा कि उन्हें न तो स्वार्थ के लिए किसी भी तरह की ‘ब्लैकमेलिंग’ में दिलचस्पी है और न ही कांग्रेस के लिए किसी तरह की परेशानी पैदा करने में। उन्होंने यह भी कहा कि हालांकि वह मैदान में उतरकर लड़ने वाले व्यक्ति हैं, लेकिन उनकी लड़ाई कभी भी पार्टी के भीतर नहीं होती। शिवकुमार ने एक सवाल के जवाब में कहा था, ‘आज तक मैंने मुख्यमंत्री पद के मुद्दे पर कभी कुछ नहीं कहा है। हमारे बीच के मुद्दे, मेरे, मुख्यमंत्री और पार्टी आलाकमान तक ही सीमित हैं। मैंने सिर्फ इतना कहा है कि जो फैसला हुआ है उसमें हम शामिल हैं, इसके अलावा मैंने कभी कुछ नहीं कहा।’ उन्होंने यहां पत्रकारों से कहा, ‘कुछ लोग कह रहे हैं कि मुख्यमंत्री का पद खाली हो जाएगा, दलितों को यह पद मिलना चाहिए, दूसरों को मिलना चाहिए। ये वही लोग हैं जो मुख्यमंत्री का पद खाली करवाना चाहते हैं, चाहते हैं कि यह पद दलितों और अन्य लोगों को दिया जाए। मैंने इस बारे में कभी कुछ नहीं कहा।’

हजारों सैनिकों की शुरू कर दी मिलिट्री ड्रिल, अब किम जोंग से पंगा ले रहे डोनाल्ड ट्रंप

वासिंगटन. ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बीते 10 दिनों से जारी भीषण युद्ध का कोई अंत फिलहाल नजर नहीं आ रहा है। युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक सैंकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है और जंग का दायरा बढ़ता ही जा रहा है। इस बीच अब अमेरिका ने कुछ ऐसा कर दिया है जिससे उत्तर कोरिया का भड़कना तय है। दरअसल अमेरिका ने सोमवार को दक्षिण कोरिया के साथ मिलकर एक बड़ा सैन्य अभ्यास शुरू किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस अभ्यास में हजारों सैनिक हिस्सा ले रहे हैं, जिससे उत्तर कोरियाई तानाशाह किम जोंग उन का पारा चढ़ सकता है। दक्षिण कोरिया के ‘ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ’ ने जानकारी देते हुए बताया कि लगभग 18,000 कोरियाई सैनिक इस ‘फ्रीडम शील्ड’ अभ्यास में हिस्सा लेंगे, जो 19 मार्च तक चलेगा। हालांकि अमेरिकी सेना ने दक्षिण कोरिया में इस अभ्यास में शामिल अपने सैनिकों की संख्या नहीं बताई है इन दोनों सहयोगी देशों का यह संयुक्त अभ्यास ऐसे समय में हो रहा है जब दक्षिण कोरियाई मीडिया में अटकलें लगाई जा रही हैं कि अमेरिका कुछ सैन्य संसाधनों को दक्षिण कोरिया से हटा कर ईरान के खिलाफ लड़ाई में ले जा रहा है। पैट्रियट मिसाइल सिस्टम पश्चिम एशिया भेजे जाने की खबरें इससे पहले ‘यूएस फोर्सेज कोरिया’ ने पिछले सप्ताह कहा था कि सुरक्षा कारणों से वह सैन्य संसाधनों की विशिष्ट गतिविधियों पर टिप्पणी नहीं करेगी। वहीं दक्षिण कोरियाई अधिकारियों ने भी इस खबर पर टिप्पणी करने से इनकार किया कि कुछ अमेरिकी पैट्रियट मिसाइल सिस्टम और अन्य उपकरण पश्चिम एशिया भेजे जा रहे हैं। उन्होंने कहा था कि इससे सहयोगी देशों की संयुक्त रक्षा रणनीति पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। बौखला सकता है उत्तर कोरिया ‘फ्रीडम शील्ड’ अभ्यास को लेकर उत्तर कोरिया की ओर से तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है। उत्तर कोरिया लंबे समय से सहयोगी देशों के संयुक्त अभ्यासों को आक्रमण का पूर्वाभ्यास बताता रहा है और इसे अपने सैन्य प्रदर्शनों और हथियार परीक्षणों को बढ़ाने का बहाना बनाता रहा है। अमेरिका एवं दक्षिण कोरिया का कहना है कि ये अभ्यास रक्षा उद्देश्य के लिए होते हैं।

भारत ने की थी 100 करोड़ की मदद, कांग्रेस ने याद दिलाया इराक हमले का वाकया

नई दिल्ली. कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों की ओर से मांग की जा रही है कि सरकार को ईरान के पक्ष में खड़ा होना चाहिए। इन दलों का कहना है कि ईरान पर हमला और अयातुल्लाह खामेनेई के कत्ल पर भारत सरकार को सख्त रुख दिखाना चाहिए। ईरान के प्रति संवेदना व्यक्त करनी चाहिए। इसी को लेकर चर्चा की मांग भी विपक्ष कर रहा है। इस बीच कांग्रेस ने 2003 में संसद में लाए गए प्रस्ताव की याद दिलाई है, जब अमेरिका ने ही इराक पर हमला किया था। तब इराक को 100 करोड़ रुपये की मदद की गई थी। इसमें नकद राशि और राशन आदि शामिल था। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने उस प्रस्ताव की प्रति को एक्स पर शेयर किया है। जयराम रमेश ने जो प्रस्ताव शेयर किया, उसमें लिखा था कि हम इराक के खिलाफ अमेरिका की लीडरशिप में हुए हमले की निंदा करते हैं। इराक में सत्ता परिवर्तन के लिए की गई सैनिक कार्रवाई स्वीकार्य नहीं है। युद्ध के फलस्वरूप में इराक के मासूम लोगों, महिलाओं और बच्चों की वेदनाएं एक गंभीर मानवीय मसला है। यह कार्रवाई संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की विशेष मंजूरी के बिना की गई है और यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर के खिलाफ है। अत: यह सदन इराक के लोगों के लिए गंभीर संताप और गहन सहानुभूति प्रकट करता है। इसी प्रस्ताव में आगे जानकारी दी गई थी कि नकद और सामग्री के माध्यम से 100 करोड़ रुपये की सहायता देने का फैसला लिया गया है। इसमें विश्व खाद्य कार्यक्रम के लिए 50 हजार मीट्रिक टन गेहूं देना भी शामिल है। यह भी हम विश्वास दिलाते हैं कि आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी। राज्यसभा के प्रस्ताव की प्रति भी जयराम रमेश ने शेयर की है। इसमें लिखा था कि यह सदन तत्काल युद्ध समाप्ति का आह्वान करता है और गठबंधन सेनाओं की शीघ्र वापसी की मांग करता है। यह सदन संयुक्त राष्ट्र से इस बात की भी मांग करता है कि वह इराक की प्रभुसत्ता की रक्षा करे। यह सुनिश्चित करे कि इराक का पुनर्निर्माण संयुक्त राष्ट्र की देखरेख में हो। ईरानी प्रतिनिधि से मिलकर आए थे कांग्रेस के कई नेता गौरतलब है कि ईरान के मसले पर कांग्रेस नेता ऐक्टिव हैं। सांसद इमरान मसूद ने दिल्ली में स्थित ईरान के शीर्ष नेता के प्रतिनिधि से मुलाकात की थी और संवेदनाएं प्रकट की थीं। इसके अलावा ईरानी दूतावास में भी एक श्रद्धांजलि आयोजन हुआ था। इसमें भी कई नेता पहुंचे थे। वरिष्ठ वकील और राज्यसभा के सांसद कपिल सिब्बल भी इस आयोजन में गए थे।

युद्ध की आग में निवेशकों के 15 लाख करोड़ स्वाहा, सेंसेक्स 2400 और निफ्टी 700 अंक लुढ़का

नई दिल्ली. अमेरिका-ईरान युद्ध ने भारतीय शेयर बाजार को गहरी चोट दी है. पिछले छह सत्रों में से पांच में बाजार में गिरावट देखने को मिली है. खास बात यह है कि पिछले चार दिनों में ही निवेशकों को 13.46 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है. कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल ने दलाल स्ट्रीट का मूड बुरी तरह बिगाड़ दिया और निवेशकों ने ताबड़तोड़ बिकवाली की. आखिरी कारोबारी सत्र यानी शुक्रवार को भारतीय बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी 50 ताश के पत्तों की तरह ढह गए. कारोबार के आखिरी घंटों में बिकवाली का ऐसा भूचाल आया कि सेंसेक्स 1,097 अंक लुढ़ककर 78,918.90 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी ने भी 315.45 अंक का गोता लगाई और 24,450.45 के स्तर पर सिमट गया. बीएएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप, जो 27 फरवरी को 463.25 लाख करोड़ रुपये था वह 6 मार्च तक घटकर 449.79 लाख करोड़ रुपये रह गया. बाजार विश्‍लेषक मान रहे हैं कि युद्ध लंबा चला तो यह नुकसान और भी गहरा हो सकता है. 52 हफ्ते के निचले स्तर पर कई नामी कंपनियां बाजार में बिकवाली का आलम यह था कि बीएसई 500 की कई दिग्गज कंपनियां अपने 52 हफ्ते के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गईं. इनमें एसीसी लिमिटेड, अंबुजा सीमेंट्स, बर्जर पेंट्स इंडिया, इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड और सोनाटा सॉफ्टवेयर जैसी कंपनियां शामिल हैं. 4,374 शेयरों में से 2,304 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि 258 शेयर अपने साल के सबसे निचले स्तर को छू गए. बैंकिंग सेक्टर में ‘रक्तपात’ बाजार की इस गिरावट में सबसे बड़ी भूमिका बैंकिंग सेक्टर ने निभाई. सेंसेक्स के शेयरों में आईसीआईसीआई बैंक सबसे बड़ा लूजर रहा, जिसके शेयर 3.39% तक गिर गए. इसके अलावा एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक और भारतीय स्टेट बैंक में भी 2% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई. बीएसई बैंकेक्स और बीएसई ऑटो इंडेक्स में भारी बिकवाली रही. अल्ट्राटेक सीमेंट और लार्सन एंड टुब्रो जैसे भारी वजन वाले शेयरों ने भी बाजार को नीचे खींचने में कोई कसर नहीं छोड़ी. हालांकि, इस सुनामी के बीच भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल), रिलायंस इंडस्ट्रीज और सन फार्मास्युटिकल जैसे शेयरों ने थोड़ी मजबूती दिखाई और हरे निशान में बंद हुए. संभलेगा या और गिरेगा बाजार शेयर बाजार विश्‍लेषकों का मानना है कि निफ्टी के लिए अब 24,600 और 24,700 के स्तर बड़ी रेजिस्टेंस बन गए हैं. यदि निफ्टी 24,300 के स्तर से नीचे फिसलता है तो यह तेजी से 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर तक गिर सकता है. युद्ध की अनिश्चितता के बीच निवेशकों को फिलहाल आक्रामक खरीदारी से बचना चाहिए.

खामेनेई के बेटे मोजतबा बने ईरान के नए सुप्रीम लीडर, ‘पावर ब्रोकर’ की अब क्या होगी रणनीति?

नई दिल्ली. अमेरिका और इजरायल के खिलाफ छिड़ी भीषण जंग के बीच ईरान ने अपना सर्वोच्च नेता चुन लिया है। अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद अब उनके बेटे मोजतबा खामेनेई यह जिम्मेदारी संभालेंगे। सोमवार को ईरान की तरफ से यह ऐलान होते ही पूरी दुनिया में कोहराम मच गया है। अब इस बात को लेकर चर्चाएं तेज हैं कि आखिर इस युद्ध को लेकर मोजतबा का रुख क्या होगा और वह अमेरिका और इजरायल के साथ-साथ देश के लोगों में उठे असंतोष की भावना का जवाब कैसे देंगे। इससे पहले ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की रमजान के महीने में मौत होने के बाद देश की सत्ता की बागडोर को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं। खामेनेई के उत्तराधिकारी के रूप में सबसे प्रमुख नाम उनके बेटे मोजतबा खामेनेई का ही था, जिन्हें लंबे समय से ईरान की सत्ता व्यवस्था के भीतर प्रभावशाली व्यक्ति माना जाता है। कौन हैं मोजतबा खामेनेई? मोजतबा खामेनेई को अपेक्षाकृत मध्य-स्तरीय धर्मगुरु माना जाता है और उन्हें 2022 में ही अयातुल्ला की उपाधि दी गई थी, जो सर्वोच्च नेता बनने के लिए आवश्यक मानी जाती है। इसीलिए कई विश्लेषकों ने इसे उन्हें अली खामेनेई के उत्तराधिकारी के रूप में तैयार किए जाने का संकेत माना था। मोजतबा ने अपने अधिकतर राजनीतिक जीवन में कोई औपचारिक सरकारी पद नहीं संभाला, लेकिन वह सर्वोच्च नेता के कार्यालय के भीतर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। उन्हें अक्सर सत्ता के गलियारों में प्रभावशाली ‘पावर ब्रोकर’ और ‘गेटकीपर’ के रूप में देखा जाता रहा है। बताया जाता है कि 17 वर्ष की उम्र में उन्होंने ईरान-इराक युद्ध में संक्षिप्त रूप से हिस्सा लिया था। हालांकि उन्हें व्यापक सार्वजनिक पहचान 1990 के दशक के आखिर में मिली, जब उनके पिता अली खामेनेई की सर्वोच्च नेता के रूप में स्थिति मजबूत हो चुकी थी। 2019 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने मोजतबा खामेनेई पर प्रतिबंध लगाए थे और आरोप लगाया था कि वे बिना किसी औपचारिक सरकारी पद के भी सर्वोच्च नेता की ओर से प्रभावी भूमिका निभा रहे थे। आईआरजीसी से करीबी समय के साथ उनकी पहचान दो प्रमुख पहलुओं से जुड़ी रही है। पहला, ईरान की सुरक्षा व्यवस्था, विशेष रूप से इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) और उससे जुड़े कट्टरपंथी नेटवर्क के साथ उनके करीबी संबंध। दूसरा, सुधारवादी राजनीति और पश्चिमी देशों के साथ करीबी संबंधों के प्रति उनका कड़ा विरोध। आलोचक उन्हें 2009 के विवादित राष्ट्रपति चुनाव के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों के दमन से भी जोड़ते हैं। माना जाता है कि उन्होंने ईरान के सरकारी प्रसारण संगठन पर भी गहरा प्रभाव बनाए रखा, जिससे उन्हें देश के सूचना तंत्र और सरकारी विमर्श के एक हिस्से पर अप्रत्यक्ष नियंत्रण मिला। कैसे होगी ईरान की नीति? विशेषज्ञों का मानना है कि मोजतबा खामेनेई के सर्वोच्च नेता बनने पर ईरान की नीतियों में बड़े बदलाव की संभावना कम है। माना जाता है कि उनके नेतृत्व में देश की राजनीति में सुरक्षा संस्थानों, खासकर आईआरजीसी का प्रभाव और मजबूत हो सकता है। विश्लेषकों के अनुसार घरेलू स्तर पर विरोध प्रदर्शनों के प्रति सख्त रुख अपनाया जा सकता है, जबकि विदेश नीति में पश्चिमी देशों के साथ बातचीत मुख्य रूप से रणनीतिक जरूरतों के आधार पर ही की जा सकती है। कुल मिलाकर, उनके नेतृत्व में ईरान की नीति रणनीतिक रूप से व्यावहारिक रह सकती है। खामेनेई की नियुक्ति इस बात का भी इशारा है कि ईरान किसी भी हाल में अमेरिकी मांगों के आगे नहीं झुकेगा और वह अपने पिता के सख्त रवैये को जारी रखेंगे, यानी इस्लाम और अमेरिका विरोधी विदेश नीति को सबसे ऊपर रखना। वहीं 28 फरवरी के हमलों में अपने पिता, मां और पत्नी को खोने वाले मोजतबा बदला लेने की कोशिशें भी कर सकते हैं। युद्ध फिलहाल जारी रहेगा।

वहीं बैठे रहोगे और घटते चले जाओगे, राज्यसभा में विपक्ष के वॉकआउट पर भड़के नड्डा

नई दिल्ली. संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण सोमवार से शुरू हो रहा है। पहले ही दिन दो बड़े घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं। इनमें लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा और विदेश मंत्री एस जयशंकर का पश्चिम एशिया के हालात पर बयान है। माना जा रहा है कि वैश्विक उथल-पुथल के बीच होने जा रहे सत्र के दूसरे चरण के भी हंगामेदार रहने के आसार हैं। खबर है कि भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने अपने सांसदों को तीनों दिनों के लिए व्हिप जारी कर दिया है। केंद्रीय संसदीय मंत्री किरेन रिजिजू ने जहां सत्तापक्ष की तरफ से चर्चा में हिस्सा लेने वाली सदस्यों के साथ बैठक की, वहीं कांग्रेस ने भी बैठक कर रणनीति पर चर्चा की थी। कहा जा रहा है कि बिरला के खिलाफ लाए जा रहे प्रस्ताव पर 10 घंटे चर्चा हो सकती है। संसदीय सूत्र बताते हैं कि विपक्ष के 118 सांसदों ने प्रस्ताव के समर्थन में नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं। नोटिस पर तृणमूल कांग्रेस ने हस्ताक्षर नहीं किए थे, पर नए घटनाक्रम में टीएमसी ने भी प्रस्ताव का समर्थन करने का निर्णय लिया है। एनसीपी (शरद पवार) ने भी अभी तक अपना रुख साफ नहीं किया है, पर माना जा रहा है कि एनसीपी (एसपी) विपक्षी दलों के खिलाफ नहीं जाएगी। विपक्ष पर भड़के नड्डा, ओछी राजनीति के लगाए आरोप विदेश मंत्री एस जयशंकर की तरफ से पश्चिम एशिया पर बयान दिए जाने के दौरान विपक्ष वॉक आउट कर गया। इसपर सत्ता पक्ष के नेता जगत प्रकाश नड्डा ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर, बजट भाषण, वक्फ बिल पर जेपीसी रिपोर्ट समेत कई मामलों का जिक्र कर कहा कि जब भी जवाब की बारी आती है, तो विपक्ष वॉक आउट कर जाता है। उन्होंने कहा, ‘इनका कोई इंटरेस्ट भारत के लोगों के विकास में नहीं है, इनका कोई इंटरेस्ट विकसित भारत में नहीं है, कोई इंटरेस्ट आत्मनिर्भर भारत में नहीं है। कोई इंटरेस्ट देश आगे बढ़े इसमें नहीं है। इनका इंटरेस्ट ओछी राजनीति को आगे बढ़ाना है।

UAE के भी सब्र का बांध टूटा, ईरान की हरकत से आगबबूला हुआ सऊदी अरब

ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद ईरान ने बीते 10 दिनों से खाड़ी देशों पर लगातार हमले किए हैं। इन हमलों में ना सिर्फ अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया गया है, बल्कि ईरान ने सऊदी अरब और अन्य देशों के अन्य तेल और रिहायशी ठिकानों पर भी मिसाइलें बरसाई हैं। वहीं खाड़ी देशों ने अब तक संयम से काम लेते हुए दोनों पक्षों से बातचीत की अपील की है। हालांकि अब इन देशों के सब्र का बांध टूटता नजर आ रहा है। रविवार को अपने तेल ठिकानों और एक रिहायशी इलाके पर हुए हमलों की कड़ी निंदा करते हुए सऊदी अरब ने ईरान को चेतावनी दे दी है। सऊदी अरब ने सोमवार को ईरान को आगाह किया है कि अगर वह अरब देशों पर हमले करता रहा तो उसे अब तक का ‘सबसे बड़ा नुकसान’ उठाना पड़ेगा। सऊदी अरब का यह बयान उस नए ड्रोन हमले के बाद आया, जिसमें उसके बड़े शायबा तेल क्षेत्र को निशाना बनाया गया था। सऊदी अरब ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन द्वारा शनिवार को दिए गए इस बयान को भी खारिज कर दिया कि ईरान ने खाड़ी अरब देशों पर अपने हमले रोक दिए हैं। भविष्य में संबंधों पर गंभीर असर पड़ेगा- सऊदी सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “देश इस बात की पुष्टि करता है कि ईरानी पक्ष ने इस बयान पर अमल नहीं किया, ना तो राष्ट्रपति के भाषण के दौरान और ना ही उसके बाद। ईरान ने बिना किसी ठोस वजह के अपना आक्रमण जारी रखा है।” बयान में आगे कहा गया कि ईरानी हमले का मतलब है तनाव में और वृद्धि, जिसका वर्तमान और भविष्य में संबंधों पर गंभीर असर पड़ेगा। UAE ने किया अटैक वहीं संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने ईरान पर हमला बोल दिया है। UAE ने अपने पहले हमले में ईरान के एक विलवणीकरण संयंत्र पर हमला किया है। यह अमीरात और ईरान के बीच शत्रुता में एक अहम वृद्धि का संकेत है। अगर इस हमले की पुष्टि हो जाती है, तो यह हमला ना केवल फारस की खाड़ी के एक और देश को ईरान के साथ सीधे सैन्य संघर्ष में शामिल करेगा, बल्कि ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों के खिलाफ अबू धाबी का पहला जवाबी हमला भी होगा। ईरानी अधिकारियों और उसके सरकारी मीडिया के अनुसार, केशम द्वीप पर स्थित एक विलवणीकरण संयंत्र पर कथित तौर पर रात भर में हमला किया गया, जिससे आसपास के लगभग 30 गांवों में पानी की आपूर्ति बाधित हो गई। ईरान के हमले जारी इस बीच ईरान ने अपने पड़ोसी मुल्कों को रविवार को भी निशाना बनाया। कुवैत के सैन्य अधिकारियों के अनुसार, ईरानी ड्रोनों ने कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के ईंधन टैंकों को निशाना बनाया। कुवैती वायु रक्षा प्रणालियों ने कई ड्रोनों को मार गिराया, लेकिन मलबे गिरने से हवाई अड्डे के टर्मिनल को आंशिक नुकसान पहुँचा है। इसके अलावा, कुवैत सिटी स्थित ‘पब्लिक इंस्टीट्यूशन फॉर सोशल सिक्योरिटी’ की बहुमंजिला इमारत में भी ईरानी ड्रोन हमले के बाद भीषण आग लग गई। कुवैती सेना ने बताया कि पिछले 48 घंटों में उन्होंने 12 ड्रोनों और 14 मिसाइलों को सफलतापूर्वक गिरा दिया है।

हिटलर का मौत का कारखाना: वह नाजी कैंप जहां इंसानों को दी गई सबसे क्रूर सज़ा

दाचाऊ एडोल्फ हिटलर ने नाजी जर्मनी में अपने राज के दौरान यहूदियों समेत लाखों लोगों को मौत के घाट उतारा। इस इतिहास से तो हर कोई परिचित है, लेकिन क्या आपको मालूम है कि हिटलर की क्रूरताओं के किस्सों में मार्च का महीना काफी अहम है। ये वही महीना है, जब हिटलर ने नाजी कैंपों की नींव रखना शुरू किया था, जो आगे चलकर यहूदियों समेत उन तमाम लोगों की मौत की वजह बनें, जिन्हें सरकार नापसंद करती थी। इसी महीने हिटलर ने पहले ‘जहन्नुम’ यानी नाजी कैंप की नींव रखी थी, जिसे दाचाऊ कैंप के तौर पर जाना जाता है। दाचाऊ कैंप का इतिहास इतना दर्दनाक है, जिसे जानकर लोगों की रूह कांप जाती है। क्या बच्चे, क्या बूढ़े, क्या महिलाएं और जवान, हिटलर जिसको भी नापसंद करता था, उन्हें कैंपों में ठेल दिया जाता था, जहां उनकी जिंदगी जहन्नुम से कम ना थी। एडोल्फ हिटलर ने जनवरी 1933 में नाजी जर्मनी की कमान संभाली और इसी साल मार्च में दाचाऊ कंसन्ट्रेशन कैंप खोला गया। ये कैंप दक्षिणी जर्मनी के दाचाऊ शहर में स्थित था। वैसे तो इस कैंप को राजनीतिक बंदियों के लिए बनाया गया था, लेकिन फिर यहां यहूदियों को कैद किया जाने लगा। दाचाऊ कैंप में क्या होता था? नेशनल म्यूजिम के मुताबिक, शुरुआत में यहां उन राजनीतिक बंदियों को कैद किया गया, जो हिटलर की नीतियों के खिलाफ थे। यहां कैद किए जाने वाले ज्यादातर लोग समाजवादी और कम्युनिस्ट थे। मगर नाजी सरकार का इरादा तो कुछ और ही था। राजनीतिक कैदियों के बाद नंबर आया कलाकारों, बुद्धिजीवियों, शारीरिक और मानसिक रूप से विकलांगों, रोमानी लोगों और समलैंगिकों का, जिन्हें नाजी सरकार हीन भावना से देखती थी। फिर यहां यहूदियों को भी कैद किया जाने लगा। इस कैंप को चलाने का जिम्मा हिलमार वैकरले को मिला हुआ था, जो नाजी अर्धसैनिक संगठन SS का एक अधिकारी था। कैंप में कैद किए गए लोगों के साथ अमानवीय व्यवहार होता था। इसका अंदाजा कुछ यूं लगाया जा सकता है कि हिटलर ने एक फरमान जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि कैंप के अंदर जर्मनी का कानून लागू नहीं होगा। इसका मतलब था कि कैदियों के साथ मारपीट की जाए या उन्हें मौत के घाट उतारा जाए, ऐसा करने पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। इससे कैंप के नाजी अधिकारियों को अपने मनमुताबिक सजा देने का अधिकार मिल गया। हिलमार वैकरले के बाद कैंप का जिम्मा थियोडोर आइके के पास आ गया, जिसने यहां वो बर्बरता फैलाई, जो रूह कंपा देती है। सबसे पहले थियोडोर आइके ने एक रेगुलेशन जारी किया, जिसमें ये बताया गया कि कैंप किस तरह चलेगा। इसके तहत अगर कोई कैदी छोटी सी भी गलती कर देता था, तो उसकी बेहरमी से पिटाई होती थी। अगर किसी ने यहां से भागने की हिम्मत की या फिर उसकी राजनीतिक विचारधारा सरकार के खिलाफ है, तो फिर उसे तुरंत मौत के घाट उतार दिया जाता था। कैदियों को खुद का बचाव करने या अपने साथ हो रहे अमानवीय व्यवहार के खिलाफ बोलने की आजादी नहीं थी। अगर कोई कुछ कहता, तो उसे पहले पीटा जाता और फिर उसकी हत्या कर दी जाती। थियोडोर आइके ने यहां पर जो रेगुलेशन बनाई थी, उसको एक ब्लूप्रिंट के तौर पर देखा गया। इसके बाद जितने भी नाजी कैंप बनाए गए, वहां इसी आधार पर सजा देने का प्रावधान किया गया। यहां कैद किए लोगों को समय पर खाना नहीं मिलता था। उनसे कई-कई घंटों तक काम करवाया जाता था। जब 1939 में द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत हुई, तो दाचाऊ में कैद किए गए लोगों से हथियार और अन्य चीजें बनवाई जाने लगीं। इसके अलावा हजारों ऐसे कैदी भी थे, जिनके ऊपर नाजी वैज्ञानिक और डॉक्टर मेडिकल एक्सपेरिमेंट किया करते थे। दाचाऊ में कितने लोग मारे गए थे? यूएस होलोकॉस्ट मेमोरियल म्यूजिम के अनुसार, 1940 तक दाचाऊ एक कंसन्ट्रेशन कैंप का रूप धारण कर चुका था, जहां के हालात बेहद क्रूर और भीड़भाड़ भरे थे। इसे लगभग 6,000 बंदियों को रखने के लिए डिजाइन किया गया था, लेकिन आबादी लगातार बढ़ती रही और 1944 तक लगभग 30,000 कैदियों को शिविर में ठूंस दिया गया। द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत में, हिटलर को यह विश्वास हो गया कि जर्मनी और नाजियों द्वारा कब्जा किए गए देशों में यहूदियों की दैनिक गतिविधियों पर बैन लगाने भर से ‘यहूदी समस्या’ का समाधान नहीं होगा। उस लगने लगा कि ये समस्या तभी सुलझेगी, जब सारे यहूदियों का सफाया कर दिया जाए। इसके बाद 1941 से लेकर 1944 तक जहां हजारों यहूदियों और उन लोगों को भेजा जाने लगा, जिन्हें सरकार पसंद नहीं करती थी। फिर यहां उन्हें जहरीली गैस देकर मारने का सिलसिला शुरू हुआ। 1933 से 1945 तक दाचाऊ के हजारों कैदी बीमारी, कुपोषण और अत्यधिक काम की वजह से जान गंवा बैठे। कैंप के नियमों के उल्लंघन के लिए हजारों लोगों को फांसी दे दी गई। 1942 में इस कैंप में बैरक एक्स का निर्माण शुरू हुआ, जो एक श्मशानगृह था और इसमें शवों को जलाने के लिए इस्तेमाल होने वाली चार बड़ी भट्टियां शामिल थीं। नाजियों ने दाचाऊ के कैदियों पर खूब मेडिकल एक्सपेरिमेंट भी किए। उदाहरण के लिए, नाजी वैज्ञानिक ये पता लगाना चाहते थे कि क्या बर्फीले पानी में डूबे व्यक्ति को जीवित किया जा सकता है। इस संभावना का पता लगाने के लिए कैदियों को बर्फीले पानी में डुबोकर परीक्षण किया जाता था। उन्हें घंटों तक बर्फीले पानी से भरे टैंकों में जबरन डुबोया जाता था। इस दौरान भी कैदी मारे जाते रहे। यहां कैद हुए लोगों को आजादी तब मिली, जब 29 अप्रैल 1945 को अमेरिकी सेना ने दाचाऊ कैंप पर अपना कंट्रोल जमाया। 1933 से लेकर 1945 तक यहां 2 लाख से ज्यादा कैदियों को रखा गया था, जिसमें से हजारों ने अपनी जान गंवाई।

पोस्ट ऑफिस में लगाएं थोड़ा पैसा, पाएं ₹90,000 ब्याज – जानें पूरी स्कीम

नई दिल्ली बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव और निवेश से जुड़ी अनिश्चितताओं के बीच अधिकांश लोग ऐसे विकल्प की तलाश करते हैं, जहां उनका पैसा सुरक्षित भी रहे और अच्छा रिटर्न भी मिल सके। ऐसे निवेशकों के लिए डाकघर की बचत योजनाएं एक भरोसेमंद विकल्प मानी जाती हैं। नेशनल डेस्क: बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव और निवेश से जुड़ी अनिश्चितताओं के बीच अधिकांश लोग ऐसे विकल्प की तलाश करते हैं, जहां उनका पैसा सुरक्षित भी रहे और अच्छा रिटर्न भी मिल सके। ऐसे निवेशकों के लिए डाकघर की बचत योजनाएं एक भरोसेमंद विकल्प मानी जाती हैं। इन्हीं योजनाओं में पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट स्कीम (POTD) इन दिनों काफी चर्चा में है। यह योजना भारत सरकार की संप्रभु गारंटी के साथ आती है, इसलिए इसमें निवेश को बेहद सुरक्षित माना जाता है। खास बात यह है कि इस योजना में निवेश करके बिना किसी बाजार जोखिम के अच्छा रिटर्न प्राप्त किया जा सकता है। बैंक एफडी जैसी योजना पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट स्कीम का ढांचा काफी हद तक बैंक की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) योजना जैसा है। इसमें निवेशक अपनी सुविधा के अनुसार एक, दो, तीन या पांच साल की अवधि के लिए पैसा जमा कर सकते हैं। मौजूदा ब्याज दरों के अनुसार:     एक साल के लिए जमा राशि पर 6.9 प्रतिशत ब्याज मिलता है     दो और तीन साल की अवधि पर 7 प्रतिशत ब्याज मिलता है     पांच साल के निवेश पर 7.5 प्रतिशत की दर से ब्याज दिया जाता है 2 लाख के निवेश पर संभावित कमाई यदि कोई निवेशक इस योजना में पांच साल के लिए 2 लाख रुपये का निवेश करता है, तो मौजूदा 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर के हिसाब से पांच साल बाद उसका कुल फंड लगभग 2,89,990 रुपये हो सकता है। इसमें 2 लाख रुपये मूल निवेश होगा, जबकि करीब 89,990 रुपये ब्याज के रूप में मिल सकते हैं। यानी केवल ब्याज से ही लगभग 90 हजार रुपये की कमाई संभव है। ज्यादा निवेश पर ज्यादा फायदा अगर कोई व्यक्ति अधिक रकम निवेश करता है, तो उसे उसी अनुपात में अधिक रिटर्न भी मिल सकता है। उदाहरण के तौर पर, यदि कोई निवेशक पांच साल के लिए 5 लाख रुपये जमा करता है, तो अवधि पूरी होने पर उसे लगभग 2,24,974 रुपये ब्याज के रूप में मिल सकते हैं। इस तरह कुल राशि करीब 7,24,974 रुपये तक पहुंच सकती है। टैक्स में भी मिलती है राहत इस योजना का एक और बड़ा फायदा यह है कि पांच साल की अवधि वाली टाइम डिपॉजिट पर आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत टैक्स छूट का लाभ भी मिलता है। निवेशक 1.5 लाख रुपये तक की राशि पर टैक्स छूट का दावा कर सकते हैं। खाता खोलना आसान पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट स्कीम में खाता खोलना भी काफी आसान है। इसमें न्यूनतम 1,000 रुपये से निवेश शुरू किया जा सकता है और अधिकतम निवेश की कोई सीमा तय नहीं है। निवेशक अपनी जरूरत के अनुसार सिंगल या जॉइंट अकाउंट भी खुलवा सकते हैं। हर साल मिलने वाला ब्याज निवेशक के खाते में जुड़ता रहता है, जिससे समय के साथ निवेश की कुल राशि बढ़ती जाती है। सुरक्षित निवेश और स्थिर रिटर्न की वजह से यह योजना उन लोगों के लिए खास तौर पर उपयोगी मानी जाती है जो बिना जोखिम के अपनी बचत बढ़ाना चाहते हैं।  

Heat Wave का खतरा बढ़ा: भारत के 417 जिले हाई रिस्क में, रात का तापमान भी बना चिंता

नई दिल्ली भारत में क्लाइमेट चेंज का असर अब सिर्फ “चिलचिलाती दोपहर” तक ही सीमित नहीं है, बल्कि “घुटन भरी रातें” और “बढ़ती नमी” भी बड़ी आबादी के लिए जानलेवा खतरा बन रही हैं। काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (CEEW) की तरफ से जारी की गई नई स्टडी, “बहुत ज्यादा गर्मी भारत पर कैसे असर डाल रही है: जिला-लेवल हीट रिस्क का आकलन 2025”, ने चौंकाने वाले तथ्य सामने लाए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के 57 प्रतिशत ज़िले, जहां देश की 76 प्रतिशत आबादी रहती है, अब बहुत ज़्यादा से लेकर बहुत ज्यादा गर्मी के खतरे का सामना कर रहे हैं। यह स्टडी पहली बार 35 इंडिकेटर्स के आधार पर 734 ज़िलों का डिटेल्ड एनालिसिस करती है, जो 1982 से 2022 तक बदलते ट्रेंड्स को दिखाता है। हीट ‘हॉटस्पॉट’: दिल्ली और महाराष्ट्र लिस्ट में सबसे ऊपर CEEW डेटा के मुताबिक, देश के 417 जिले ‘हाई रिस्क’ कैटेगरी में हैं, जबकि 201 जिलों में मीडियम रिस्क है। सबसे ज्यादा गर्मी के खतरे वाले टॉप 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की लिस्ट इस तरह है: दिल्ली, आंध्र प्रदेश, गोवा, केरल, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, कर्नाटक, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश दिलचस्प और चिंता की बात यह है कि यह खतरा सिर्फ़ शहरी इलाकों तक ही सीमित नहीं है। जहाँ दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और बेंगलुरु जैसे आर्थिक केंद्र खतरे में हैं, वहीं महाराष्ट्र, केरल, उत्तर प्रदेश और बिहार के ग्रामीण ज़िले, जहाँ खेती करने वाले मज़दूर खुले आसमान के नीचे काम करने को मजबूर हैं, भी ज़्यादा खतरे में हैं। रातें दिनों से ज्यादा खतरनाक स्टडी की सबसे डरावनी बात ‘गर्म रातों’ (बहुत ज़्यादा गर्म रातें) में बढ़ोतरी है। रिपोर्ट से पता चलता है कि पिछले एक दशक (2012-2022) में, लगभग 70 प्रतिशत ज़िलों में हर गर्मी के मौसम में कम से कम पाँच और बहुत ज़्यादा गर्म रातें दर्ज की गई हैं। “साइंस साफ़ है—हम अब बहुत ज़्यादा, लंबे समय तक चलने वाली गर्मी और खतरनाक रूप से गर्म रातों के दौर में आ गए हैं।” जब रात का टेम्परेचर नॉर्मल से काफ़ी ज़्यादा रहता है, तो इंसान के शरीर को दिन की गर्मी से उबरने का समय नहीं मिलता, जिससे हीट स्ट्रोक और दिल की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। डेटा के मुताबिक, गर्म दिनों के मुकाबले गर्म रातें बहुत तेज़ी से बढ़ रही हैं। उत्तर भारत में बढ़ती ह्यूमिडिटी उत्तर भारत के ज़िले, जिन्हें पहले सूखा माना जाता था, अब तटीय इलाकों के बराबर ह्यूमिडिटी महसूस कर रहे हैं। पिछले दस सालों में इंडो-गैंगेटिक मैदानों में रिलेटिव ह्यूमिडिटी में 10 परसेंट की बढ़ोतरी देखी गई है। बदलाव: कानपुर, जयपुर, दिल्ली और वाराणसी जैसे शहरों में ह्यूमिडिटी का लेवल 30-40 परसेंट से बढ़कर 40-50 परसेंट हो गया है। असर: ज्यादा ह्यूमिडिटी की वजह से महसूस होने वाला टेम्परेचर असल टेम्परेचर से 3-5 डिग्री सेल्सियस ज़्यादा हो जाता है। इससे शरीर के पसीना निकलने के नैचुरल कूलिंग प्रोसेस में रुकावट आती है, जिससे नॉर्मल टेम्परेचर भी जानलेवा हो जाता है। आगे का रास्ता: डिस्ट्रिक्ट लेवल पर हीट एक्शन प्लान CEEW में सीनियर प्रोग्राम लीड, डॉ. विश्वास चिताले ने ज़ोर दिया कि लोकल लेवल पर हीट एक्शन प्लान लागू करने का समय आ गया है। महाराष्ट्र, ओडिशा और गुजरात जैसे राज्यों ने इस दिशा में कदम उठाए हैं, लेकिन इसे नेशनल लेवल पर बढ़ाने की जरूरत है। मुख्य सुझाव:     फाइनेंशियल मदद: 2024 में हीटवेव को डिजास्टर कैटेगरी में शामिल किए जाने के साथ, राज्य अब स्टेट डिज़ास्टर मिटिगेशन फंड का इस्तेमाल कर सकते हैं।     समाधान: नेट-जीरो कूलिंग शेल्टर, कूल रूफ और अर्ली वार्निंग सिस्टम को ज़रूरी करें।     डेटा अपडेट: हीट एक्शन प्लान में सिर्फ टेम्परेचर ही नहीं, बल्कि रात में होने वाली गर्मी और ह्यूमिडिटी का डेटा भी शामिल करें।     यह रिपोर्ट साफ करती है कि बहुत ज़्यादा गर्मी अब भविष्य की चेतावनी नहीं है, बल्कि आज की एक त्रासदी है, जिससे निपटने के लिए पॉलिसी और स्ट्रक्चरल बदलावों की जरूरत है।  

16 बैलिस्टिक मिसाइलें, 117 ड्रोन से हमला: ईरान की कार्रवाई से दहला UAE, जॉर्डन के एयरबेस को भी नुकसान

नई दिल्ली ईरान ने रविवार को क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ाते हुए यूएई पर 16 बैलिस्टिक मिसाइलें और 117 ड्रोन दागे । इसके साथ ही जॉर्डन के एक प्रमुख एयरबेस को भी निशाना बनाए जाने की खबर है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि यह हमला उसके जारी सैन्य अभियान ऑपरेशन ऑनेस्ट प्रॉमिस 4 का हिस्सा है। इजरायली शहरों के साथ‑साथ जॉर्डन पर भी हमला आईआरजीसी के अनुसार, ताजा हमलों में तेल अवीव और बेएरशेवा जैसे इजरायली शहरों के साथ‑साथ जॉर्डन के अल‑अज्राक एयरबेस को लक्ष्य बनाया गया। ईरानी सरकारी मीडिया ने बताया कि यह अभियान मिसाइलों की नई पीढ़ी से अंजाम दिया गया। इसी बीच, लेबनान के एक अधिकारी ने बताया कि बढ़ते संघर्ष के बीच 117 ईरानी नागरिकों को शनिवार‑रविवार की रात रूसी विमान से बेरूत से निकाला गया। जिनमें राजनयिक और दूतावास कर्मचारी शामिल हैं, हालात तेजी से बिगड़ते दिख रहे हैं और पूरे क्षेत्र में अलर्ट बढ़ा दिया गया है।  

ईरान-इजरायल तनाव चरम पर: तेहरान के फ्यूल डिपो पर हमला, धमाकों के बाद एसिड रेन का अलर्ट

नई दिल्ली ईरान की राजधानी तेहरान में पांच फ्यूल डिपो को निशाना बनाया गया। इजरायल की तरफ से किए गए हवाई हमलों में तेहरान में बड़े धमाके हुए। इसके कारण धुएं के ऊंचे गुबार देखे गए। इजरायल की सेना ने कन्फर्म किया है कि उनकी एयरफोर्स ने तेहरान में फ्यूल स्टोरेज की जगहों पर हमला किया है। इजरायल ने कहा है कि उनका मकसद ईरान की सेना को उनका इस्तेमाल करने से रोकना है। हालांकि ईरान ने धमाकों और आग की पुष्टि तो की है, लेकिन कहा है कि उसके फ्यूल रिजर्व सुरक्षित हैं।   धमाकों से लगी बड़ी आग दरअसल इजरायल के लड़ाकू विमानों ने तेहरान और उसके आस-पास कई ऑयल डिपो पर हमला किया। इससे बड़ी आग लग गई और आसमान में काले धुएं फैल गया। सोशल मीडिया पर इसके कई वीडियो वायरल हैं, जिसमें आग देखी जा सकती है। इस घटना में अब तक 4 लोगों की मौत हो गई है, जिसें दो तेल टैंकर ड्राइवर भी शामिल हैं। ईरानी रेड क्रिसेंट ने तेल डिपो में धमाकों के बाद हवा में टॉक्सिन निकलने की वजह से तेहरान में एसिड रेन की चेतावनी दी है। एजेंसी ने कहा है कि धमाकों की वजह से हवा में जहरीले हाइड्रोकार्बन कंपाउंड, सल्फर और नाइट्रोजन ऑक्साइड की काफी मात्रा निकली है। आग पर पाया गया काबू फ्यूल टैंक में हुए धमाकों से आस-पास के शहरों को भी हिला दिया। सड़क पर लीक हो रहे फ्यूल से आग बहती हुई दिख रही थी। इमरजेंसी क्रू ने आग पर काबू पाने के लिए रात भर काम किया। ईरान ने बताया कि 5 जगहों पर हमला हुआ है, जिसमें 4 स्टोरेज डिपो और एक पेट्रोलियम प्रोडक्ट ट्रांसपोर्ट सेंटर शामिल हैं। अधिकारियों ने कहा है कि आग पर काबू पा लिया गया है। नुकसान को कम करने के लिए फ्यूल डिस्ट्रीब्यूशन को कुछ समय के लिए रोक दिया गया था। हवा में फ्यूल की गंध महसूस हो रही थी। बता दें कि इजराइल ने 28 फरवरी से ईरान पर लगभग 3400 हमले किए हैं।  

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