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केंद्रीय कोयला मंत्री से राज्य का 1.36 लाख करोड़ रुपये का कोयला बकाया चुकाने का हेमंत सोरेन ने किया आग्रह

रांची झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी से राज्य का 1.36 लाख करोड रुपये का कोयला बकाया चुकाने का आग्रह किया है। एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया कि रेड्डी ने सोरेन को आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार बकाया राशि का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी। सोरेन और रेड्डी की मौजूदगी में राज्य सरकार, कोयला मंत्रालय और ‘कोल इंडिया लिमिटेड’ के वरिष्ठ अधिकारियों की एक बैठक हुई। विज्ञप्ति में कहा गया कि झारखंड सरकार ने बैठक में केंद्रीय मंत्री के समक्ष बकाया खनिज राजस्व भुगतान का विस्तृत आकलन प्रस्तुत किया। इसमें कहा गया है, ‘…केंद्रीय कोयला मंत्री ने निर्देश दिया कि केंद्र सरकार के अधिकारी इन दावों की प्रामाणिकता की जांच के लिए राज्य सरकार के साथ सहयोग करें।’ सोरेन ने कहा कि कोयला खनन, उत्पादन, परिवहन, भूमि अधिग्रहण और मुआवजे के बेहतर प्रबंधन के लिए केंद्र और राज्य सरकार को मिलकर आगे बढ़ना होगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जिन जमीनों पर खनन कार्य पूरा हो चुका है, उन्हें झारखंड सरकार को वापस कर दिया जाना चाहिए। सोरेन ने कहा, ‘राज्य में कई कोयला परियोजनाएं हैं, जहां खनन कार्य पूरा हो चुका है और कोयला कंपनियों ने जमीन छोड़ दी है। उन्हें न तो राज्य सरकार को हस्तांतरित किया जा रहा है और न ही उनका समुचित उपयोग हो रहा है। इस कारण बंद खदानों में अवैध खनन हो रहा है।’ उन्होंने खनन गतिविधियों से पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। सोरेन ने सुझाव दिया कि कोयला कंपनियों को स्थायी प्रशिक्षण केंद्र खोलने, खनन पर्यटन को प्रोत्साहित करने और कोल इंडिया का मुख्यालय पश्चिम बंगाल से झारखंड स्थानांतरित करने की पहल करनी चाहिए।  

तूफान राफेल से प्रभावित क्यूबा को भारत ने मानवीय सहायता भेजी

नई दिल्ली भारत ने तूफान राफेल से प्रभावित क्यूबा को शुक्रवार को मानवीय सहायता भेजी। सहायता की पहली खेप में एंटीबायोटिक्स, दर्द निवारक, ओआरएस समेत आवश्यक दवाएं शामिल हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि विश्वबंधु भारत, भारत ने क्यूबा के लोगों के लिए मानवीय सहायता भेजी है। तूफान राफेल के बाद एंटीबायोटिक्स, एंटी-पायरेटिक्स, दर्द निवारक, ओआरएस, मांसपेशियों को आराम देने वाली दवाओं सहित आवश्यक दवाओं के रूप में एक खेप आज क्यूबा के लिए रवाना की गयी है। राफेल तूफान ने 6 नवंबर को पश्चिमी क्यूबा के आर्टेमिसा प्रांत में दस्तक दी थी। राफ़ेल के चलते 185 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चली थीं। तूफान के कारण क्यूबा में बड़े पैमाने पर बिजली कटौती हुई और कई घरों को नुकसान पहुंचा।  

कई ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को जारी किए गए जीएसटी ‘कारण बताओ नोटिस’ पर रोक लगाई: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कई ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को जारी किए गए 1.12 लाख करोड़ रुपये के वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) ‘कारण बताओ नोटिस’ पर रोक लगा दी, जिससे इस सेक्टर को अस्थायी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने मामले के अंतिम निपटारे तक डीजीजीआई द्वारा जारी सभी ‘कारण बताओ नोटिस’ के संबंध में आगे की सभी कार्यवाही पर रोक लगा दी। मामले की अंतिम सुनवाई 18 मार्च को तय की गई है। फैसले के बाद, स्टॉक एक्सचेंजों पर इंट्रा-डे ट्रेड के दौरान डेल्टा कॉर्प और नाजारा टेक जैसी गेमिंग कंपनियों के शेयरों में 7 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई। ई-गेमिंग फेडरेशन (ईजीएफ) के सीईओ अनुराग सक्सेना ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई राहत का स्वागत किया। सक्सेना ने कहा, “यह सरकार और गेमिंग ऑपरेटर्स दोनों के लिए फायदेमंद है। गेमिंग ऑपरेटर्स के लिए जो जबरदस्ती की कार्रवाई का सामना कर रहे थे और सरकार के लिए जिसकी समयसीमा अब बढ़ाई जा सकती है। हम इस मुद्दे के निष्पक्ष और प्रगतिशील समाधान को लेकर आश्वस्त हैं, जिसके बाद हम गेमिंग सेक्टर में निवेश, रोजगार और वैल्यूएशन को अपनी पूरी क्षमता तक बढ़ते देखेंगे।” डीजीजीआई ने 2023 में गेमिंग कंपनियों को 71 नोटिस भेजे, जिसमें उन पर 2022-23 और 2023-24 के पहले सात महीनों के दौरान 1.12 लाख करोड़ रुपये के जीएसटी की चोरी करने का आरोप लगाया गया, जिसमें ब्याज और जुर्माना शामिल नहीं है। जीएसटी अधिनियम की धारा 74 के तहत नोटिस जारी किए गए थे, जो विभाग को कर मांग के 100 प्रतिशत तक का जुर्माना लगाने की अनुमति देता है और कुल देयता ब्याज सहित 2.3 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है। अगस्त 2023 में, जीएसटी परिषद ने कानून में संशोधन किया, जिसमें कहा गया कि दांव लगाने वाले सभी ऑनलाइन गेम, स्किल या चांस की परवाह किए बिना, उसी वर्ष 1 अक्टूबर से लगाए गए दांव के पूरे मूल्य पर 28 प्रतिशत की जीएसटी दर लगेगी, न कि सकल गेमिंग राजस्व पर।  

कृष्ण जन्मस्थान और शाही ईदगाह मामले पर न्यायालय का बड़ा संकेत, अब दोनों की सुनवाई एक ही अदालत में हो सकेगी

नई दिल्ली कृष्ण जन्मस्थान और शाही ईदगाह के बीच चल रहे भूमि विवाद को लेकर एक महत्वपूर्ण विकास हुआ है। उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान संकेत दिया है कि सभी संबंधित याचिकाओं की सुनवाई अब किसी एक अदालत में हो सकती है। इससे विवाद के समाधान में एक नया मोड़ आ सकता है, जो दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद हो सकता है। उच्चतम न्यायालय का रुख कृष्ण जन्मस्थान-शाही ईदगाह भूमि विवाद को लेकर उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने शुक्रवार को महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं। पीठ ने पूछा कि मथुरा की विभिन्न सिविल अदालतों से संबंधित लगभग 18 मुकदमों को एक साथ एकीकृत करके सुनवाई उच्च न्यायालय के पास क्यों न की जाए, जबकि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इस संबंध में पहले ही फैसला सुनाया था। उच्चतम न्यायालय ने यह भी कहा कि मुकदमों का एकीकरण पक्षकारों के लिए अधिक सुविधाजनक हो सकता है, क्योंकि इससे अलग-अलग अदालतों में लंबी और जटिल प्रक्रियाओं से बचा जा सकता है। मुस्लिम पक्ष की आपत्ति मुस्लिम पक्ष के वकील ने हालांकि इस एकीकरण पर आपत्ति जताते हुए कहा कि ये मुकदमे समान प्रकृति के नहीं हैं और यदि उन्हें एक साथ सुना जाता है, तो यह जटिलताओं का कारण बन सकता है। हालांकि, उच्चतम न्यायालय की पीठ ने इस आपत्ति को खारिज करते हुए कहा कि इससे किसी प्रकार की जटिलता नहीं आएगी, और यह पक्षकारों के लिए सुविधाजनक होगा। इलाहाबाद उच्च न्यायालय का निर्णय इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 26 मई 2023 को इस मामले में मथुरा की विभिन्न सिविल अदालतों से कृष्ण जन्मस्थान-शाही ईदगाह भूमि विवाद से संबंधित मुकदमों को अपने पास स्थानांतरित करने का आदेश दिया था। इसके बाद 1 अगस्त 2024 को उच्च न्यायालय ने एक और महत्वपूर्ण आदेश देते हुए मस्जिद प्रबंधन समिति की चुनौती को खारिज कर दिया था और मामले की सुनवाई जारी रखने का निर्देश दिया था। जानें 16 जनवरी से पहले की स्थिति 16 जनवरी 2024 को उच्चतम न्यायालय ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 14 दिसंबर 2023 के आदेश पर रोक लगाते हुए शाही ईदगाह मस्जिद का सर्वेक्षण करने का निर्देश अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया था। इस फैसले से मामले की आगे की सुनवाई में भी नए पहलू जुड़ सकते हैं, जो विवाद को सुलझाने में सहायक हो सकते हैं। अगली सुनवाई की तारीख उच्चतम न्यायालय ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 1 अप्रैल 2025 की तारीख निर्धारित की है, जब दोनों पक्षों के वकील अपने तर्क पेश करेंगे। यह तारीख इस मामले के भविष्य के लिए अहम हो सकती है, क्योंकि इसके बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया और विवाद का समाधान निकलने की संभावना है।  

अब दिल्ली और श्रीनगर के बीच डायरेक्ट ट्रेन सेवा का सपना फिलहाल अधूरा रहेगा, नहीं मिलेगी डारेक्ट ट्रेन

नई दिल्ली देशभर में दिल्ली और श्रीनगर के बीच एक नई ट्रेन सेवा के शुरू होने की उम्मीदें बहुत थीं। इसे लेकर भारतीय रेलवे ने हाल ही में एक बड़ा अपडेट दिया है, जो उन सभी यात्रियों के लिए बुरी खबर है, जो बिना रुके दिल्ली से श्रीनगर या जम्मू तक यात्रा करने का सपना देख रहे थे। भारतीय रेलवे ने घोषणा की है कि श्रीनगर जाने वाली ट्रेनों को जम्मू के कटरा रेलवे स्टेशन पर रुकना पड़ेगा, और वहां सुरक्षा कारणों से यात्रियों को दूसरी ट्रेन में चढ़ने के लिए ट्रांसफर होना होगा। इसका मतलब यह है कि अब दिल्ली और श्रीनगर के बीच डायरेक्ट ट्रेन सेवा का सपना फिलहाल अधूरा रहेगा। 26 जनवरी को PM Modi करेंगे उद्घाटन इस नई ट्रेन सेवा का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर करेंगे। यह उद्घाटन एक बहुत बड़े रेल प्रोजेक्ट के अंतर्गत हो रहा है, जो लगभग तीन दशकों से लंबित था। इस प्रोजेक्ट के तहत दिल्ली और श्रीनगर के बीच एक रेल कनेक्टिविटी स्थापित की जाएगी, जिसे लेकर लोगों में भारी उत्साह था। कटरा स्टेशन पर होगा अनिवार्य ट्रांसशिपमेंट रेलवे अधिकारियों ने बताया है कि श्रीनगर और कटरा के बीच चलने वाली सभी ट्रेनों को कटरा रेलवे स्टेशन पर रुकना होगा। यहां पर यात्रियों को ट्रेन बदलने के लिए उतरना होगा। कटरा स्टेशन पर स्थित प्लेटफॉर्म-1 को कश्मीर जाने वाली ट्रेनों के लिए समर्पित किया जाएगा। यह सुरक्षा कारणों से किया गया है, ताकि यात्रियों का ट्रांसपोर्टेशन और सुरक्षा प्रक्रिया सही तरीके से की जा सके। कटरा स्टेशन पर यात्रियों को अपने सामान को फिर से स्कैन कराना होगा और फिर दूसरी ट्रेन में चढ़ने के लिए उन्हें प्लेटफॉर्म पर जाना होगा। इस ट्रांसफर प्रक्रिया के कारण यात्रियों को अतिरिक्त समय लग सकता है। कटरा स्टेशन पर रुकने से यात्रा में समय का इजाफा होगा, लेकिन यह कदम यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए आवश्यक है। वंदे भारत और मेल एक्सप्रेस ट्रेनें उत्तर रेलवे ने पहले ही इस ट्रेन सेवा का टाइम टेबल 31 दिसंबर 2024 को जारी किया था, जिसमें बताया गया था कि कटरा और श्रीनगर के बीच हर रोज़ एक वंदे भारत और दो मेल एक्सप्रेस ट्रेनें चलेंगी। इन ट्रेनों की शुरुआत 2024 के अंत से होने की उम्मीद है। वंदे भारत ट्रेन, जो आधुनिक सुविधाओं से लैस होगी, कटरा से सुबह 8:10 बजे रवाना होगी और 11:20 बजे श्रीनगर पहुंचेगी। दूसरी तरफ, मेल एक्सप्रेस ट्रेनें कटरा से सुबह 9:50 बजे और दोपहर 3 बजे रवाना होंगी, जो क्रमशः 1:10 बजे और 6:20 बजे श्रीनगर पहुंचेंगी। श्रीनगर से कटरा के लिए मेल एक्सप्रेस ट्रेनें सुबह 8:45 बजे और दोपहर 3:05 बजे रवाना होंगी। इस प्रकार, रेलवे ने दोपहर और शाम के समय भी ट्रेनों का संचालन सुनिश्चित किया है। क्या होगा कटरा स्टेशन पर? कटरा स्टेशन पर हर ट्रेन के आने के बाद, सभी यात्रियों को उतरकर स्टेशन के बाहर जाना होगा। यहां पर उन्हें फिर से अपनी सामान की जांच करवानी होगी और फिर आगे की यात्रा के लिए दूसरी ट्रेन का इंतजार करना होगा। कटरा का प्लेटफॉर्म-1 पूरी तरह से कश्मीर जाने वाली ट्रेनों के लिए समर्पित रहेगा। इस प्रक्रिया से यात्रियों को अपने सामान की दोबारा जांच करनी होगी, और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी यात्री बिना किसी परेशानी के अपनी यात्रा जारी रखें। यात्री यात्रा में अतिरिक्त समय का सामना करेंगे कटरा स्टेशन पर ट्रांसशिपमेंट प्रक्रिया के कारण यात्रियों को यात्रा में अतिरिक्त समय का सामना करना पड़ेगा। हालांकि, यह कदम सुरक्षा के लिहाज से लिया गया है, और रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह प्रक्रिया यात्रियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है। यात्रियों को कटरा में अपने सामान की फिर से जांच करवानी होगी और फिर अपनी यात्रा के लिए दूसरी ट्रेन में बैठना होगा। कश्मीर जाने का सपना देखने वाले दिल्लीवासियों के लिए यह एक बड़ा झटका हो सकता है, क्योंकि अब उन्हें सीधे श्रीनगर पहुंचने के लिए कटरा रेलवे स्टेशन पर ट्रेन बदलनी पड़ेगी। हालांकि, यह कदम यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। अब यात्रियों को अपनी यात्रा के दौरान अधिक समय देना होगा, लेकिन रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह प्रक्रिया पूरे यात्रा अनुभव को सुरक्षित और बेहतर बनाने के लिए जरूरी है।  

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा- मैं भी मनुष्य हूं, देवता नहीं हूं, मुझसे भी गलतियां होती हैं, राजनीति में अच्छे लोग लगातार आना चाहिए

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पॉडकास्ट इंटरव्यू में कई महत्वपूर्ण बातें साझा कीं। उन्होंने कहा कि “मैं भी मनुष्य हूं, देवता नहीं हूं। मुझसे भी गलतियां होती हैं।” उन्होंने राजनीति में आने के उद्देश्य पर बात करते हुए कहा कि राजनीति में एंबीशन नहीं, बल्कि मिशन होना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि राजनीति में अच्छे लोग लगातार आना चाहिए। जब पीएम मोदी से पूछा गया कि पहले और दूसरे टर्म में क्या अंतर है, तो उन्होंने कहा कि पहले टर्म में लोग मुझे समझने की कोशिश करते थे, और मैं भी दिल्ली को समझने की कोशिश कर रहा था। इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने युवाओं को राजनीति में आने के लिए यह संदेश दिया कि अगर वह राजनीति में आना चाहते हैं तो उनके पास एक मिशन होना चाहिए। जीनोम सीक्वेंसिंग डेटा जारी किया प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार को 10 हजार नागरिकों का जीनोम सीक्वेंसिंग डेटा भी जारी किया। यह जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान के क्षेत्र में एक अहम कदम है और भविष्य में इसका बड़ा असर होगा। पीएम मोदी ने वीडियो संदेश के माध्यम से बताया कि इस परियोजना में 20 से ज्यादा रिसर्च इंस्टीट्यूशन ने अहम योगदान दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस कदम को जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में मील का पत्थर बताते हुए कहा कि यह शोध के क्षेत्र में ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने बताया कि यह डेटा अब “इंडिया बायोलॉजिकल डेटा सेंटर” में उपलब्ध है। पीएम मोदी ने कहा, “इस परियोजना की शुरुआत पांच साल पहले जीनोम इंडिया परियोजना के रूप में हुई थी और कोविड की चुनौतियों के बावजूद हमारे वैज्ञानिकों ने इसको पूरा किया।” इस डेटा से देश के असाधारण आनुवंशिक परिदृश्य का अध्ययन किया जा सकेगा और इससे भविष्य में कई महत्वपूर्ण शोध होंगे।

सरकार और संभल प्रशासन को शाही जामा मस्जिद के विवादित कुएं को लेकर कोई भी कदम उठाने से रोका: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश सरकार और संभल जिला प्रशासन को शाही जामा मस्जिद के विवादित कुएं को लेकर कोई भी कदम उठाने से रोक दिया। इस कुएं का आधा हिस्सा मस्जिद के अंदर और आधा हिस्सा मस्जिद के बाहर है। कोर्ट ने इस मामले में साम्प्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की जरूरत की बात कही है। आपको बता दें कि इसी इलाके में मस्जिद के स्थान पर एक हिंदू मंदिर होने का दावा किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट की जिस बेंच ने इस मामले पर रोक लगाई है उसमें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) संजीव खन्ना और जस्टिस पीवी संजय कुमार शामिल थे। पीठ ने आदेश दिया कि संभल नगर पालिका परिषद द्वारा दिसंबर 2024 में जारी किए गए नोटिस पर कार्रवाई नहीं की जाएगी। नोटिस में कुएं की सफाई, संपत्ति की जांच और मस्जिद के बाहरी हिस्से को सार्वजनिक उपयोग के लिए खोलने की बात की गई थी। कोर्ट ने इस मामले पर कड़ी निगरानी रखने की बात कही है। आपको बता दें कि इस मामले में अब 21 फरवरी को सुनवाई होगी। कोर्ट ने जिला प्रशासन को दो सप्ताह के भीतर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस मामले में शाही जामा मस्जिद के प्रबंधन समिति द्वारा एक याचिका दाखिल की गई थी। उनके द्वारा निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें मस्जिद का सर्वे करने का आदेश दिया गया था। मस्जिद के प्रबंधन का आरोप था कि सर्वे बिना किसी सूचना के किया गया और यह कार्रवाई अवैध तरीके से और जल्दबाजी में की गई थी। इस सर्वे के बाद 24 नवंबर 2024 को संभल में हिंसक झड़पें हुई थीं, जिसमें चार लोग मारे गए थे और कई लोग घायल हो गए थे। मस्जिद के वकील ने की रोक की मांग सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता हुजैफा अहमदी ने अदालत से अनुरोध किया कि वह जिला प्रशासन को कुएं की जांच और उस पर की जाने वाली कार्रवाई पर रोक लगाए। उन्होंने कहा कि कुआं मस्जिद के अंदर और बाहर स्थित है और इसे बिना अदालत की अनुमति के सार्वजनिक उपयोग के लिए खोलना अनुचित होगा। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) केएम नटराज ने इस दलील का विरोध किया। उनका कहना था कि यह एक सार्वजनिक कुआं है और राज्य की संपत्ति है। अब स्थिति शांतिपूर्ण है, लेकिन कुछ लोग इसमें समस्या पैदा करना चाहते हैं। कुआं खोलने से क्या ऐतराज? इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “यह पानी है। इसे सभी को उपयोग करने देना चाहिए। आप खुद कह रहे हैं कि इसका आधा हिस्सा मस्जिद के अंदर है और आधा बाहर। यदि कोई व्यक्ति बाहर के हिस्से से पानी का उपयोग करता है तो इससे कोई समस्या नहीं होनी चाहिए।” अहमदी ने इसके जवाब में कहा, “यह कुआं पूरी तरह से ढका हुआ था और इसका उपयोग कभी नहीं किया गया। मस्जिद इसका पानी एक पंप के माध्यम से उपयोग करती है। नगरपालिका के नोटिस में इसे हरी मंदिर कहा गया है। पूजा और भक्तों की स्नान के लिए पानी इस्तेमाल करने की बात की गई है।” इस पर सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के फैसले को नकारते हुए कहा, “यह क्या है? इसे मत बढ़ाइए। ऐसा करना उचित नहीं है।” कोर्ट ने सरकार से स्टेटस रिपोर्ट की मांग करते हुए आदेश दिया कि नगरपालिका परिषद का कुएं से संबंधित नोटिस प्रभावी नहीं होगा। हिंदू पक्ष ने किया SC के पुराने आदेश का जिक्र हिंदू पक्ष की ओर से पेश हुए वकील विष्णु शंकर जैन ने इस बात को याद दिलाया कि मस्जिद प्रबंधन समिति को पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि वह इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाए, न कि सीधे सुप्रीम कोर्ट आए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “हां, हम जानते हैं। हम चाहते थे कि वे हाईकोर्ट जाएं, लेकिन हम इस मामले पर कड़ी निगरानी रख रहे हैं ताकि कोई हिंसा न हो और शांति और सौहार्द बना रहे।” आपको बता दें कि यह विवाद तब बढ़ा जब एक मुकदमे में यह दावा किया गया कि शाही जामा मस्जिद उस स्थान पर बनाई गई थी जहां पहले एक हिंदू मंदिर खड़ा था। उसे “हरीहर मंदिर” के रूप में जाना जाता है। हिंदू पक्ष ने मंदिर में पूजा करने के लिए पहुंच की मांग की थी। इसके बाद स्थानीय अदालत ने मस्जिद का सर्वे कराने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने 29 नवंबर को सेशन कोर्ट को इस मामले में कोई भी कार्यवाही करने से रोक दिया। इसके अलावा मस्जिद प्रबंधन समिति को इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने की सलाह दी थी। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा था कि वह इलाके में शांति बनाए रखने के लिए कदम उठाए और विवाद का समाधान समुदायों के बीच मध्यस्थता के माध्यम से करने का प्रयास करे।

रिपोर्ट: AI के चलते नौकरियां जाएंगी और अब ऐसा ही देखने को मिल रहा है, अब होने लगे है AI से काम, झटका

नई दिल्ली आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस (AI) का प्रभाव जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है और इसके चलते ढेरों काम अब आसान हो गए हैं। एक्सपर्ट्स ने पहले ही चिंता जताई थी कि AI के चलते नौकरियां जाएंगी और अब ऐसा ही देखने को मिल रहा है। Bloomberg Intelligence की नई रिपोर्ट में सामने आया है कि अगले तीन से पांच साल के अंदर ग्लोबल बैंक्स के कर्मचारियों की दो लाख से ज्यादा नौकरियां जाने वाली हैं। BI में चीफ इन्फॉर्मेशन एंड टेक्नोलॉजी ऑफिसर्स के सर्वे में संकेत मिले हैं कि कुल नौकरियाों में से 3 प्रतिशत की कटौती होने वाली है और लाखों नौकरियां जाएंगी। BI के सीनियर एनालिस्ट Tomasz Noetzel ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि ऐसी जो भी नौकरियां, जिनमें एक जैसा काम बार-बार करना पड़ता है, उनके जाने का रिस्क है। हालांकि कई नौकरियां पूरी तरह खत्म नहीं होंगी और उनके लिए काम करने का तरीका बदल जाएगा। इन वजहों से जाने वाली हैं नौकरियां ब्लूमबर्ग इंटेलिजेंस ने जो पीयर ग्रुप कवर किया, उसमें Citigroup Inc., JPMorgan Chase & Co. और Goldman Sachs Group Inc. वगैरह शामिल हैं। 93 लोगों में से करीब एक चौथाई ने कहा है कि कुल कर्मचारियों में से 5 प्रतिशत से 10 प्रतिशत के बीच AI के इस्तेमाल के बाद प्रभावित होंगे। दरअसल, AI टूल्स के साथ ना सिर्फ कंपनियों की प्रोडक्टिविटी बढ़ेगी, बल्कि वे अपना खर्च भी कम कर पाएंगे। मौजूदा काम की स्पीड भी AI टूल्स के चलते बढ़ जाएगी। सामने आया है कि सबसे ज्यादा नौकरियां बैंकिंग सेक्टर से जाने वाली हैं और किसी अन्य सेक्टर के मुकाबले बैंकिंग के क्षेत्र की तो 54 प्रतिशत नौकरियों का ऑटोमेशन किया जा सकता है। कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि नौकरियां पूरी तरह खत्म होने के बजाय नए अवसर पैदा होंगे और मौजूदा काम करने का तरीका AI के आने के बाद बदलेगा।

अगर आपका आधार कार्ड 10 साल पुराना है, तो उसे अपडेट कराना जरूरी हो गया है, नहीं तो पुराने आधार कार्ड होंगे रद्द

नई दिल्ली यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) ने आधार कार्ड धारकों के लिए एक महत्वपूर्ण सूचना जारी की है। सरकार ने 10 साल से अधिक पुराने आधार कार्ड को अपडेट कराने की आवश्यकता पर जोर दिया है। अगर आपका आधार कार्ड 10 साल पुराना है, तो उसे अपडेट कराना जरूरी हो गया है, क्योंकि पुराने आधार कार्ड को रद्द किया जा सकता है। सरकार ने फ्री आधार अपडेट की समयसीमा को फिर से बढ़ाते हुए अब अंतिम तारीख 14 जून 2025 कर दी है। इससे पहले डेडलाइन 14 दिसंबर 2024 थी। 10 साल से अधिक पुराने आधार कार्ड धारकों को अपनी जानकारी अपडेट करने की सलाह दी जा रही है ताकि उनकी पहचान प्रमाणित और अद्यतन बनी रहे। यह सुविधा केवल ऑनलाइन myAadhaar पोर्टल पर मुफ्त में उपलब्ध होगी। हालांकि, ऑफलाइन मोड के जरिए अपडेट कराने पर शुल्क देना होगा। क्यों जरूरी है आधार कार्ड अपडेट? आधार कार्ड, जिसे देश में पहचान का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है, हर व्यक्ति की बायोमेट्रिक और व्यक्तिगत जानकारी से जुड़ा होता है। समय के साथ, पते या अन्य जानकारी में बदलाव हो सकता है, जिसे अपडेट कराना आवश्यक है। इसके अलावा, फेक आधार कार्ड के मामलों में बढ़ोतरी को देखते हुए सरकार ने 10 साल पुराने आधार कार्ड धारकों को जानकारी अपडेट कराने की सिफारिश की है। कैसे करें आधार कार्ड अपडेट? आधार कार्ड अपडेट प्रक्रिया को ऑनलाइन करना बेहद आसान है। UIDAI ने इसे सरल और सुलभ बनाने के लिए विशेष कदम उठाए हैं। इसके लिए, https://myaadhaar.uidai.gov.in/ पर लॉगिन करें और अपनी जानकारी को सत्यापित कर अपडेट करें। सरकार के इस कदम से लाखों आधार कार्ड धारकों को लाभ मिलेगा, खासकर वे लोग जिनकी जानकारी अब तक अपडेट नहीं हुई है। डेडलाइन खत्म होने के बाद आधार अपडेट के लिए शुल्क देना होगा। ऐसे में यह सलाह दी जाती है कि 14 जून 2025 से पहले अपनी जानकारी को अपडेट कराना सुनिश्चित करें।  

33% महिला आरक्षण कानून को चुनौती मामले में सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को निरर्थक बताया

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने 33% महिला आरक्षण कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई से शुक्रवार को इनकार कर दिया। अदालत ने उस याचिका को निरर्थक बताया जिसमें विधेयक को चुनौती दी गई थी, न कि अधिनियम को। दूसरी याचिका में इस मामले को लेकर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने सहित अन्य उपाय तलाशने की मांग रखी गई, जिसे नकार दिया गया। एससी की बेंच ने कहा कि पहले भी संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का मुद्दा उठाया गया, मगर इसे कभी लागू नहीं किया जा सका। हालांकि, इस बार इसे परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने की शर्त पर लागू किया जा रहा है। महिला आरक्षण कानून क्या है? महिला आरक्षण अधिनियम (नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023) लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करता है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों पर भी यह नियम लागू होगा। इसका मतलब है कि लोकसभा की 543 सीटों में से 181 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित कर दी जाएंगी। हालांकि, पुडुचेरी जैसे केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित नहीं होंगी। मालूम हो कि जनगणना के आंकड़े जारी होने के बाद यह आरक्षण लागू होगा। जनगणना के आधार पर महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित होंगी जिसके लिए परिसीमन किया जाएगा। यह आरक्षण 15 साल की अवधि के लिए मिलेगा। फिलहाल, लोकसभा की 131 सीटें एससी-एसटी के लिए आरक्षित की गई हैं। महिला आरक्षण कानून लागू होने के बाद इनमें से 43 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इन 43 सीटों को सदन में महिलाओं के लिए आरक्षित कुल सीटों का ही हिस्सा माना जाएगा। इसका मतलब है कि महिलाओं के लिए आरक्षित 181 सीटों में से 138 ऐसी होंगी, जिन पर किसी भी जाति की महिला उम्मीदवार होगी। साफ है कि इन सीटों पर उम्मीदवार पुरुष नहीं हो सकते हैं। मालूम हो कि यह गणना लोकसभा में सीटों की मौजूदा संख्या पर की गई है। परिसीमन के बाद इसमें बदलाव हो सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा बेटियों को पढ़ाई के खर्चे के लिए अपने माता-पिता से पैसे मांगने का पूरा अधिकार

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बेटियों को पढ़ाई के खर्चे के लिए अपने माता-पिता से पैसे मांगने का पूरा अधिकार है. कोर्ट ने लड़कियों को बड़ा अधिकार देते हुए कहा कि वे जरूरत पड़ने पर पढ़ाई का खर्चा देने के लिए अपने माता-पिता को कानूनी तौर पर बाध्य भी कर सकती हैं. उनके माता-पिता अपनी हैसियत के अंदर बेटी को पढ़ाई का खर्चा देने को बाध्य होंगे. सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला तलाक से जुड़े एक विवाद में दिया है. इस मामले की सुनवाई जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ कर रही थी. मामले में एक दंपत्ति 26 साल से अलग रह रहे थे. इनकी बेटी आयरलैंड में पढ़ाई कर रही थी. लड़की ने अपनी मां को दिए जा रहे कुल गुजारा भत्ते के एक हिस्से के रूप में अपने पिता द्वारा उसकी पढ़ाई के लिए दिए गए 43 लाख रुपये लेने से इनकार कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने केस में क्या कहा अदालत ने आदेश में कहा, “बेटी होने के नाते उसे अपने माता-पिता से शिक्षा का खर्च प्राप्त करने का ऐसा अधिकार है जिसे खत्म नहीं किया जा सकता है. इस आदेश को कानूनी रूप से लागू किया जा सकता है.” सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम केवल इतना ही मानते हैं कि बेटी को अपनी शिक्षा जारी रखने का मौलिक अधिकार है, जिसके लिए माता-पिता को अपने वित्तीय संसाधनों की सीमा के भीतर आवश्यक धनराशि प्रदान करने के लिए बाध्य किया जा सकता है.” अदालत ने कहा कि लड़की ने अपनी गरिमा का ध्यान रखते हुए इस राशि रखने से इनकार कर दिया और अपने पिता को पैसे वापस लेने को कहा, लेकिन पिता ने ऐसा करने से इनकार कर दिया. अदालत ने कहा कि बेटी कानूनी रूप से राशि की हकदार थी. पिता ने बिना किसी कारण के पैसे दिए, जिससे पता चलता है कि वे फाइनेंशियल तौर पर मजबूत हैं और अपनी बेटी की पढ़ाई के लिए आर्थिक मदद करने में सक्षम हैं. 73 लाख रुपये में हुआ था सेटलमेंट इस केस में 28 नवंबर 2024 को दंपती के बीच एक समझौता हुआ था. इनकी बेटी ने भी इस समझौते पर हस्ताक्षर किया था. इस सेटलमेंट के तहत पति ने कुल  73 लाख रुपये अपनी पत्नी और बेटी को देने पर सहमति जताई थी. इसमें से 43 लाख रुपये बेटी की पढ़ाई के लिए थे, बाकी पत्नी के लिए थे. कोर्ट ने कहा कि चूंकि पत्नी को अपने हिस्से के 30 लाख रुपए मिल गए हैं और दोनों पक्ष पिछले 26 साल से अलग रह रहे हैं, ऐसे में कोई कारण नहीं बनता है कि आपसी सहमति से दोनों को तलाक न दिया जाए. न्यायालय ने कहा, “परिणामस्वरूप, हम संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए आपसी सहमति से तलाक का आदेश देकर दोनों पक्षों के विवाह को भंग करते हैं.” अदालत ने कहा कि भविष्य में कोई भी पक्ष न तो किसी के खिलाफ अदालत में कोई केस करेगा और न ही किसी तरह का दावा करेगा. विरासत में बेटियों की हिस्सेदारी इससे पहले जनवरी 2022 में भी सुप्रीम कोर्ट ने बेटियों के पक्ष में एक अहम फैसला दिया था. सर्वोच्च न्यायालय ने इस फैसले में कहा था कि एक ऐसे व्यक्ति की संपत्ति,जो बिना वसीयत लिखे मर गया और उसकी केवल एक बेटी हो तो उसकी बेटी को संपत्ति में समग्र अधिकार प्राप्त होगा, न कि परिवार के किसी अन्य सदस्य को. कोर्ट के अनुसार संयुक्त परिवार में रह रहे व्यक्ति की वसीयत लिखे बिना ही मौत हो जाए तो उसकी संपत्ति पर बेटों के साथ उसकी बेटी का भी हक होगा. इस दौरान बेटी को अपने पिता के भाई के बेटों की तुलना में संपत्ति का हिस्सा देने में प्राथमिकता दी जाएगी.  

अमेरिका : लॉस एंजिल्स के जंगलों में लगी भयानक आग और हुई भयानक, मरने वालों की संख्या 7 हुई

कैलिफोर्निया अमेरिका के सबसे अधिक आबादी वाले काउंटी लॉस एंजिल्स के जंगलों में लगी आग अब और भयानक रूप ले लिया है। इस भयानक आग में अब तक मरने वालों की संख्या 7 हो गई है। इस आग से 1,100 इमारतें क्षतिग्रस्त हुई हैं। कैलिफोर्निया के जंगलों में लगी आग अब विकराल रूप ले चुकी है। इसमें लॉस एंजेलिस और हॉलीवुड हिल्स में तबाही मचा दी है ,जिससे हजारों लोग पलायन को मजबूर हैं। एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक आग की वजह से अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार इस भयानक आग ने लगभग 1,000 से ज्‍यादा घरों को अपनी चपेट में ले लिया है। इससे सांता मोनिका पर्वतमाला और प्रशांत महासागर के बीच बने कई महंगे घर भी प्रभावित हुए हैं। मालिबू के लिए भी नई चेतावनी जारी की गई है। कैलिफोर्निया डिपार्टमेंट ऑफ फॉरेस्ट्री एंड फायर प्रोटेक्शन (कैल फायर) ने जानकारी देते हुए कहा कि पैलिसेड्स में मंगलवार से शुरू हुई विनाशकारी आग ने तेज हवा की वजह से विकराल रूप ले लिया है। बुधवार दोपहर तक यह आग 15,800 एकड़ (63.9 वर्ग किमी) तक फैल गई और इस पर काबू नहीं पाया जा सका। कैल फायर ने कहा, ” आग भयावह है और दूर या पास से इसका पता लगाना एक चुनौती बना हुआ है।” लॉस एंजिल्स शहर के पश्चिम में 32 किमी दूर स्थित एक समृद्ध समुदाय में, कई ऐतिहासिक स्थल, जिनमें ग्रीक और रोमन प्राचीन वस्तुओं को प्रदर्शित करने वाला शानदार गेट्टी विला संग्रहालय और मध्य शताब्दी का आधुनिक ईम्स हाउस भी आग के खतरे में है। वही इस भयानक आग से पैलिसेड्स के तीन स्कूलों को भी काफी नुकसान पहुंचा है। अग्निशमन और पुलिस अधिकारियों के अनुसार मंगलवार शाम को लगी ईटन की आग ने लॉस एंजिल्स के दो पड़ोसी शहरों अल्ताडेना और पासाडेना के पास 10,600 एकड़ (42.9 वर्ग किमी) से अधिक क्षेत्र को जला दिया, जिससे पांच लोगों की मौत हो गई और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। भीषण के कारण राष्ट्रपति जो बाइडेन ने अपना विदेशी दौरा रद्द कर दिया था। वहीं नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कैलिफोर्निया के गवर्नर पर भड़कते दिखाई दिए। अधिकारियों ने दक्षिणी कैलिफोर्निया में खतरनाक जंगली आग की स्थिति के लिए तेज हवाओं और सूखी वनस्पति को जिम्मेदार ठहराया है। रात में 160 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से असाधारण रूप से शक्तिशाली हवाएं चलीं। स्थानीय टीवी स्टेशन केटीएलए ने बताया कि दक्षिणी कैलिफोर्निया के लॉस एंजिल्स, वेंचुरा, ऑरेंज, सैन बर्नार्डिनो, रिवरसाइड और सैन डिएगो काउंटियों में जंगली आग के कारण व्यापक बिजली कटौती से बुधवार दोपहर तक 4 मिलियन से अधिक ग्राहक प्रभावित हुए। वहीं कैलिफोर्निया के गवर्नर गेविन न्यूसम ने मंगलवार को आपातकाल घोषित करने के साथ तेजी से फैल रही आग के चलते हजारों लोगों से वहां से निकलने का कहा।

हिंदू धर्म में बहुत अधिक मान्यता रखने वाली रामायण का मंचन राजधानी बीजिंग में कराया जाएगा, भगवान राम से मर्यादा सीखेगा चीन!

नई दिल्ली, बीजिंग भारत और चीन भले ही पड़ोसी मुल्क हैं, लेकिन दोनों के बीच सांस्कृतिक अंतर काफी गहरे हैं। इस बीच चीन ने एक बड़ी पहल की है। इसके तहत हिंदू धर्म में बहुत अधिक मान्यता रखने वाली रामायण का मंचन राजधानी बीजिंग में कराया जाएगा। यह कार्यक्रम 25 जनवरी को बीजिंग के शुनयी ग्रैंड थिएटर में शाम को 7 बजे होगा। भारत में स्थित चीनी दूतावास की प्रवक्ता यु जिंग ने इस बारे में जानकारी दी है। यु जिंग ने एक्स अकाउंट पर इसके बारे में जानकारी दी है, जिस पर लोगों ने खुशी जताते हुए कहा कि यह चीन की रिश्तों को सुधारने के लिए एक अच्छी पहल है, जिसका स्वागत होना चाहिए। यही नहीं कई यूजर्स ने लिखा है कि सनातन धर्म के मूल्य ही ऐसे हैं कि 21वीं सदी में पूरी दुनिया को उनसे सीख मिलती है। चीन में रामायण पर होने वाली यह प्रस्तुति प्रोफेसर जि शियानलिन के संस्कृत से मंदारिन में किए गए अनुवाद पर आधारित होगी। इस नाट्य प्रस्तुति का निर्देशन भारतनाट्यम एक्सपोनेंट से जुड़े जिन शानशान करने वाले हैं। यह कार्यक्रम बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास के सहयोग से किया जा रहा है। चीन में रामायण के मंचन को लेकर शीर्ष सरकारी सूत्रों की ओर से कुछ नहीं कहा गया है, लेकिन साफ है कि भारत के साथ शी जिनपिंग सरकार रिश्ते सुधारना चाहती है। 2020 में लद्दाख में सीमा पर दोनों सैनिकों के बीच खूनी झड़प हो गई थी। इसके बाद कई सालों तक दोनों देशों के रिश्तों में बर्फ जमी रही, लेकिन बीते कुछ महीनों में रिश्ते सहज होते दिखे हैं।एक तरफ सीमा विवादों को निपटाने के लिए दोनों देश आगे आए हैं तो वहीं लद्दाख में सैनिकों को भी थोड़ा पीछे हटाया गया है। इस तरह सीमा पर रिश्तों में पिघली बर्फ का असर अब सांस्कृतिक और राजनयिक रिश्तों में भी दिख रहा है।

जहां पिछले साल 20 अक्टूबर को आतंकी हमला हुआ था, वही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2,400 करोड़ रुपये की लागत से सुरंग का उद्घाटन करेंगे

गांदरबल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 जनवरी को श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित 2,400 करोड़ रुपये की लागत से बनी रणनीतिक जेड-मोड़ सुरंग (Z-Morh tunnel) का उद्घाटन कर सकते हैं। यह 6.5 किलोमीटर लंबी सुरंग लद्दाख क्षेत्र को पूरे साल सड़क मार्ग से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। यह वही सुरंग है जहां पिछले साल 20 अक्टूबर को आतंकी हमला हुआ था। यह सुरंग गांदरबल जिले के गगनगीर इलाके में आती है। गगनगीर में हुए हमले में एक स्थानीय डॉक्टर और बिहार के दो मजदूरों सहित सात लोगों की जान चली गई थी। जेड-मोड़ सुरंग निर्माण स्थल पर हुए इस हमले में दो आतंकवादी शामिल थे। रक्षा जरूरतों और लद्दाख को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने के लिहाज से यह सुरंग अत्यंत महत्वपूर्ण है। परियोजना से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि अगर मौसम अनुकूल रहा, तो प्रधानमंत्री खुद वहां मौजूद रहकर सुरंग का उद्घाटन करेंगे। लेकिन अगर खराब मौसम रहा तो इस स्थिति में सुरंग का उद्घाटन वर्चुअल माध्यम से किया जाएगा। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस सुरंग परियोजना का नाम लिए बिना सोशल मीडिया पर इसे पर्यटन के विस्तार के लिए एक “गेम चेंजर” बताया। उन्होंने कहा, “जम्मू-कश्मीर, विशेष रूप से मध्य कश्मीर, आने वाले दिनों में एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के उद्घाटन की प्रतीक्षा कर रहा है। यह परियोजना घाटी में सर्दी के पर्यटन के विस्तार के लिए एक क्रांतिकारी कदम होगी।” गौरतलब है कि कंगन के गंड क्षेत्र में भारी बर्फबारी के कारण श्रीनगर-सोनमर्ग सड़क सर्दियों के महीनों में बंद रहती है। जेड-मोड़ सुरंग के खुलने से यह सड़क सालभर खुली रहेगी, जिससे सोनमर्ग क्षेत्र में सर्दी के पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। श्रीनगर-लेह सड़क को सालभर चालू रखने के लिए जोजिला सुरंग पर भी काम जारी है। जेड-मोड़ सुरंग परियोजना का काम मई 2015 में शुरू हुआ था और इसे पिछले साल पूरा कर लिया गया। फरवरी 2024 में सुरंग का सॉफ्ट ओपनिंग किया गया था। सुरंग के शुरू होने से न केवल यात्रा का समय कम होगा, बल्कि यह बर्फीले इलाकों में खतरनाक और हिमस्खलन-प्रवण मार्ग का विकल्प भी प्रदान करेगी।

देवेंद्र फडणवीस ने मालेगांव में अवैध जारी किए गए फर्जी जन्म प्रमाण पत्र मामले की एसआईटी जांच के निर्देश दिए

नासिक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मालेगांव में अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को कथित तौर पर जारी किए गए फर्जी जन्म प्रमाण पत्र मामले की एसआईटी जांच के निर्देश दिए हैं। मालेगांव के बाद अब अमरावती में भी फर्जी जन्म प्रमाण पत्र घाटले की बात सामने आई है। इस पर पूर्व भाजपा सांसद किरीट सोमैया ने प्रतिक्रिया दी है। किरीट सोमैया ने गुरुवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया, “मालेगांव के बाद अमरावती के अंजनगांव में बांग्लादेशी रोहिंग्या जन्म प्रमाण पत्र घोटाला सामने आया है।” उन्होंने कहा कि अंजनगांव के तहसीलदार सुरजी ने मुझे बताया है कि पिछले 6 महीनों में बांग्लादेशी रोहिंग्याओं को 1100 जन्म प्रमाण पत्र फर्जी दस्तावेज दिए गए हैं। यह सब बिना उचित जांच के प्रमाण पत्र जारी किए गए। बता दें कि इससे पहले दो जनवरी को किरीट सोमैया ने आरोप लगाया था कि मालेगांव के करीब एक हजार लोगों ने जन्म प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए खुद को बांग्लादेशी रोहिंग्या के रूप में गलत तरीके से पेश किया। उन्होंने कहा था कि मुझे पता चला है कि एक घोटाला किया गया है, जिमसें मालेगांव के करीब एक हजार लोगों ने खुद को बांग्लादेशी रोहिंग्या के रूप में गलत तरीके से पेश किया, तहसीलदार से मुलाकात की और जन्म प्रमाणपत्र प्राप्त किया। अब नाशिक कलेक्टर और नासिक नगर निगम इस मामले की समीक्षा कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र एटीएस ने पूरे राज्य के अलग-अलग हिस्सों से पिछले एक महीने में अवैध रूप से रह रहे 60 बांग्लादेशियों को गिरफ्तार किया है। मुंबई, नवी मुंबई और ठाणे में सबसे ज्यादा बांग्लादेशियों को गिरफ्तार किया गया। पूरे महाराष्ट्र में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों के खिलाफ एटीएस द्वारा ऑपरेशन चला कर कार्रवाई की जा रही है।  

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