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होलिका दहन के लिए मिलेगा सिर्फ 1 घंटा का ही समय

होली हिंदू धर्म में मनाया जाने वाला एक पावन त्योहार है. दिवाली के बाद होली को हिंदू धर्म में दूसरा प्रमुख त्योहार माना जाता है. होली के दिन चारों ओर रंग बिखरे रहते हैं. इस दिन लोग एक दूसरे को गुलाल, अबीर और रंग आदि लगाते हैं. होली के त्योहार को आनंद, क्षमा और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है. होली के पर्व से पहले होलिका का दहन किया जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल फाल्गुल माह की पुर्णिमा तिथि पर होलिका को दहन किया जाता है. होलिका दहन के अगले दिन होली का त्योहार मनाया जाता है और रंगों से होली खेली जाती है. मान्यता है कि होली से पहले होलिका दहन में सभी नकारात्मक शक्तियां जलकर नष्ट हो जाती हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि इस साल होलिका दहन कब किया जाएगा. इसका शुभ मुहूर्त क्या है और इस साल होलिका दहन के लिए कितना समय मिलेगा? होलिका दहन का शुभ मुहूर्त और समय इस साल फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 13 मार्च गुरुवार सुबह 10 बजकर 35 मिनट पर होगी. वहीं इस तिथि का समापन 14 मार्च शुक्रवार को 12 बजकर 23 मिनट पर हो जाएगा. इस साल होलिका दहन 13 मार्च को किया जाएगा, लेकिन भद्रा काल में होलिका दहन नहीं किया जाता. 13 मार्च को भद्रा पूंछ शाम 6 बजकर 57 मिनट पर शुरू होगा. ये रात 8 बजकर 14 मिनट तक रहेगा. इसके बाद भद्रा मुख का समय शुरू होगा जो रात 10 बजकर 22 मिनट तक रहेगा. ऐसे में होलिका दहन का शुभ मुहूर्त रात के 11 बजकर 26 मिनट पर शुरु होगा. ये शुभ मुहूर्त रात के 12 बजकर 30 मिनट तक रहेगा. ऐसे में इस साल होलिका दहन के लिए 1 घंटा 4 मिनट का समय मिलेगा. पूजा विधि     होलिका दहन के दिन सुबह स्नान कर लेना चाहिए.     फिर पूजा स्थल पर पर गाय के गोबर से होलिका और प्रहलाद की मूर्ति बनानी चाहिए.     इसके बाद कच्चा सूत, गुड़, हल्दी,मूंग, बताशे और गुलाल नारियल अर्पित करना चाहिए.     फिर मिठाइयां और फल अर्पित करने चाहिए,     होलिका पूजन के साथ ही भगवान नरसिंह की भी अराधना करनी चाहिए.     अंत में होलिका के चारों ओर परिक्रमा करनी चाहिए. होलिका दहन का महत्व पौराणिक कथाओं में होलिका दहन का महत्व बताया गया है. होलिका जलाने से लोगों की आत्मा शुद्ध हो जाती है. साथ ही मन पावन हो जाता है. होलिका दहन पर पूजन से संतान सुख की प्राप्ति होती है. इसके अलावा घर में सुख शांति बनी रहती है और जीवन में आने वाले कष्टों से छुटकारा मिलता है.

होली से आठ दिन पहले शुरू होता है होलाष्टक, भूल से भी न खरीदें ये चीजें

हिंदू धर्म में होलाष्टक की अवधि अशुभ मानी जाती है. ये आठ दिनों की अवधि होती है. हिंदू कैलेंडर के अनुसार, होलाष्टक की शुरुआत फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होती है. पंचांग के अनुसार, होलाष्टक की अवधि की शुरुआत होली से आठ दिन पहले हो जाती है. इसका समापन होलिका दहन के साथ हो जाता है. होलाष्टक की अवधि में गृह प्रवेश, विवाह या मुंडन संस्कार जैसे शुभ कार्यों को करने की मनाही होती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, होलाष्टक की अवधि में किए गए शुभ कामों का फल प्राप्त नहीं होता है. इसके विपरीत होलाष्टक की अवधि में अगर वर्जित काम किए जाते हैं, तो जीवन में कई तरह की समस्याएं आ सकती हैं. होलाष्टक की अवधि में शुभ काम न करने के साथ-साथ इस दौरान नई चीजों की खरीदारी भी वर्जित मानी गई हैं. मान्यता है कि इस दौरान कोई नहीं चीज खरीदना शुभ नहीं होता. ऐसा करने से जीवन में मुश्किलें बढ़ सकती हैं. इस साल कब से होलाष्टक? वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 7 मार्च से हो शुरू हो रही है. ऐसे में होलाष्टक की भी शुरुआत 7 मार्च से हो जाएगी. इसका समापन 13 मार्च को हो जाएगा. क्योंकि 13 मार्च को होलिका दहन की जाएगी. इसके बाद 14 मार्च को होली का मनाई जाएगी. होलाष्टक में न खरीदें ये चीजें     हिंदू मान्यताओं के अनुसार होलाष्टक दिनों में बाजार से कोई नई चीज खरीदकर घर न लाएं.     होलाष्टक के दौरान नए कपड़े, नई गाड़ी, घरेलू उपयोग में आने वाली चीजें, सोना और चांदी भी नहीं खरीदें. इस दौरान नया मकान न लें और बनवाएं भी नहीं.     होलाष्टक के दिनों में यज्ञ, हवन या अन्य धार्मिक अनुष्ठान नहीं करवाएं. हालांकि इस दौरान नियमित पूजा की जा सकती है.     हिंदू मान्यता है कि इस समय में नकारात्मक ऊर्जा का वेग बहुत ज्यादा होता है. इसलिए इस दौरान नया निवेश और लेन देन न करें. इससे जीवन में आर्थिक संकट आ सकता है. करें ये काम     होलाष्टक के दौरान दान करें. इससे घर में सुख-समृद्धि आती है.     हनुमान चालीसा और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें. ऐसा करना विशेष फलदायी माना जाता है.     इस दौरान लड्डू गोपाल का पूजन करें. उनके गोपाल सहस्त्रनाम का पाठ करें. इससे जीवन में सकारात्मकता रहती है.  

एक वचन, तीन बाण और शीश का दान… कौन थे बर्बरीक, कैसे मिला खाटू वाले श्याम का नाम

फाल्गुन के इस महीने श्रद्धालुओं के जत्थे राजस्थान के सीकर जिले की ओर बढ़ते चले जा रहे हैं. इन रेलों में दूर से ही दिख रही हैं, नीली-पीली और केसरिया झंडिया, जिन्हें हाथों में थामकर श्रद्धालु नंगे पांव मंदिर की ओर बढ़ते ही जा रहे हैं. भीड़ भक्ति से झूम रही है, कतारों में खड़े लोग भजन गा रहे हैं और भजन को ध्यान से सुनिए तो वह अपने प्रभु श्याम का गुणगान कर रहे हैं. ये श्याम राधा के कृष्ण नहीं हैं, न ही नंद के लाला नंदलाल हैं. देवकी और यशोदा के पुत्र भी नहीं और न ही ये गीता का संदेश देने वाले कर्मयोगी हैं. श्रद्धालु उन्हें बाबा भी कह रहे हैं और हारे का सहारा भी. वह उनका नाम खाटू वाले श्याम बता रहे हैं. उनकी मंजिल है सीकर से तकरीबन 20 किलोमीटर दूर एक गांव खाटू. यह गांव फाल्गुन महीने में दुल्हनों की तरह सजा है और भक्त अपने भगवान के दरबार में हाजिरी लगाने पहुंच रहे हैं. उन्हें हारे का सहारा बता रहे हैं और खुद को धन्य मान रहे हैं  बाबा के दर्शन कर लिए. कौन है खाटू वाले श्याम बाबा… महाभारत से जुड़ा है खाटू श्याम का इतिहास खाटू बाबा का इतिहास आज से 5000 साल पहले की पौराणिक गाथा से जुड़ा है. महाभारत के युद्ध के दौरान हुई एक घटना से खाटू वाले बाबा श्याम का प्राकट्य माना जाता है. क्या है यह कथा? जब यह तय हो गया था कि कौरव-पांडव में युद्ध होना ही है. ऐसे में दूर-दूर से राजा-महाराजा अपना पक्ष चुनते हुए सेना समेत युद्ध में शामिल होने पहुंच रहे थे. युद्ध की बात जंगल में रहने वाले एक नवयुवक के कानों तक भी पहुंच रही थी. उसने अपनी मां से युद्ध में जाने की आज्ञा मांगी. मां ने सहर्ष अनुमति दे दी और जाते-जाते कहा, जा बेटा ‘हारे का सहारा’ बनना. वह नवयुवक मां की बात से इंच भर भी नहीं डिगता था, क्योंकि वह उसकी गुरु भी थीं. उसने अपने नीले घोड़े पर सवार होने से पहले मां को वचन दिया, जैसा आपने कहा ऐसा ही होगा. ‘हारे का ही सहारा’ बनूंगा. यह नवयुवक थे महाबली भीम के पौत्र, महाबलशाली घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक, उनकी महान मां थीं मौरवी. बर्बरीक की दादी हिडिंबा थीं. जिन्होंने पांडवों के वनवास के दौरान भीम से गंधर्व विवाह किया था. इस तरह बर्बरीक पांडव वंशी भी था और हस्तिनापुर के क्षत्रिय परिवार से संबंधित था. क्यों लिया हारे के सहारे का वचन दरअसल, कौरव व पांडव के युद्ध में देश-विदेश के जो भी राज्य व राजा थे वह सभी युद्ध में भाग लेने पहुंच चुके थे. राजाओं के साथ उनकी सेना भी उनके साथ युद्ध मे शामिल थीं. इस तरह दोनों दलों की ओर 7-7 अक्षौहिणी सेना हो चुकी थीं. अभी तक द्वारिका ने युद्ध में भाग नहीं लिया था. कौरव-पांडव जब दोनों ही द्वारिका से सहायता मांगने पहुंचे तो परिस्थिति वश कृष्ण पांडव की ओर निहत्थे शामिल हुए और अपनी चतुरंगिणी सेना उन्होंने दुर्योधन को दे दीं. इस तरह कौरवों के पक्ष में 11 अक्षौहिणी सेना हो गई. मौरवी को था पांडवों की हार का डर बर्बरीक की मां को लगा था पांडवों की सेना कम है. कहीं युद्ध में उनका पलड़ा कमजोर न पड़े. ऐसे में उसने अपने बेटे से हारने वाले या कमजोर के पक्ष से युद्ध करने का वचन लिया. क्योंकि वह केवल शुरुआती पक्ष ही समझ पा रही थीं, लेकिन, मौरवी ने यह ध्यान नहीं दिया कि अनजाने ही उसने जो वचन लिया है वह महाभारत के युद्ध में किसी काम नहीं आएगा, लेकिन आगे चलकर उनका यही वचन कलयुग में संसार भर के लोगों का कल्याण करेगा. इसी वचन के कारण योद्धा बर्बरीक आज हारे के सहारे बाबा श्याम के तौर पर जाने जाते हैं. ऐसे मिला श्याम बाबा का नाम जब बर्बरीक युद्ध क्षेत्र की ओर बढ़ रहे थे, तो रास्ते में एक ब्राह्मण ने उन्हें रोक लिया. ब्राह्मण ने योद्धा का परिचय पूछा. बर्बरीक ने बताया कि मैं पांडव कुलभूषण बलशाली भीम और हिडिम्बा का पोता और उनके पुत्र घटोत्कच का पुत्र हूं. मेरी मां मौरवी हैं जो खुद एक योद्धा हैं और मेरी गुरु भी हैं. मैं इस समय महाभारत के युद्ध में हिस्सा लेने जा रहा हूं. मेरी मां ने मुझे युद्धनीति में प्रशिक्षित किया है और देवताओं से आशीर्वाद भी दिलवाया है. अब मैं उनके आशीष से युद्ध में भाग लेने जा रहा हूं. बर्बरीक के पास थी दिव्य शक्तियां ब्राह्मण ने पूछा, योद्धा तुम युद्ध में भाग लेने अकेले जा रहे हो. तुम्हारी सेना कहां है? तुम्हारे अस्त्र-शस्त्र भी अधिक नहीं दिख रहे. यह क्या तुणीर में केवल तीन बाण और बस एक धनुष. ब्राह्मण ने उनका मजाक उड़ाते हुए कहा-योद्धा कुरुक्षेत्र में ऐसा युद्ध होगा, जो फिर कभी नहीं होगा. वहां तुम कैसे अपना पराक्रम दिखाओगे. मेरी मानो लौट जाओ और जीवन का आनंद लो. बर्बरीक ने नम्रता से कहा-मेरी मां के आशीष का अपमान न कीजिए ब्राह्मण देवता. उनके प्रताप से मैं हारे का सहारा बनूंगा. यह तीन बाण साधारण नहीं हैं, दिव्य हैं. योद्धा बर्बरीक ने दिखाया पराक्रम इस महाभारत युद्ध के लिए तो मेरा एक ही बाण का काफी है, तीनों बाण चले तो सृष्टि का ही नाश हो जाएगा. यह बाण खुद महादेव ने प्रसन्न होकर दिए हैं. इनकी विशेषता है कि एक बार में लक्ष्य करते ही यह शत्रु समूह का समूल नाश कर देता है. चाहे वह कहीं भी जा छिपा हो. ब्राह्मण ने कहा-तुम तो बातें करते हो. ऐसा होता है तो प्रमाण दिखाओ. उस पीपल के पेड़ के पत्तों को क्या एक ही बाण से वेध सकते हो? इस पर बर्बरीक ने कहा-मैं बातें नहीं करता, प्रत्यक्ष को प्रमाण की क्या जरूरत? लीजिए आप संतुष्टि कर लीजिए. कहकर बर्बरीक ने पीपल की ओर लक्ष्य कर दिया. …और आश्चर्य में पड़ गए ब्राह्मण बर्बरीक ने जैसे ही बाण संधान किया. ऐसा लगा कि लाखों बाण प्रकट होकर पीपल के पेड़ के पत्तों को बेधने लगे हों. यह देखकर ब्राह्मण ने एक पत्ते को चुपके से अपने पैर के नीचे छिपा लिया. सारे पत्तों को बेध लेने के बाद बाण ब्राह्मण के पैरों की ओर बढ़ा और उसके पंजों को … Read more

फुलेरा दूज का त्योहार1 मार्च को मनाया जाएगा, जानें इस दिन क्या करना चाहिए और क्या नहीं

फुलेरा दूज का त्योहार हर वर्ष फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। यह तिथि वर्ष 2025 में 1 मार्च को है। शुक्ल द्वितीया 1 मार्च की सुबह 3 बजकर 16 मिनट से शुरू हो जाएगी, इसलिए उदयातिथि की मान्यता के अनुसार फुलेरा दूज का पर्व 1 मार्च को ही मनाया जाएगा। यह दिन भगवान कृष्ण और राधा रानी के प्रेम को समर्पित है। धार्मिक मत के अनुसार इस दिन भगवान कृष्ण और राधा रानी ने फूलों की होली खेली थी। इस दिन क्या कार्य करने से आपको लाभ होगा और क्या काम करने से इस दिन आपको बचना चाहिए, आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं। फुलेरा दूज के दिन करें ये काम     भगवान कृष्ण और राधा रानी के प्रेम को समर्पित फुलेरा दूज के दिन आपको विधि-विधान से राधा-कृष्ण की पूजा करनी चाहिए।     इस दिन श्रीकृष्ण की पूजा में दूर्वा, अक्षत, खीर आदि अर्पित करना शुभ माना जाता है।     इसके साथ ही राधा रानी और भगवान कृष्ण को इस दिन फूल भी अवश्य चढ़ाने चाहिए।     अगर आपके घर में राधा कृष्ण की प्रतिमाएं हैं तो उन्हें रंग-बिरंगे वस्त्र इस दिन आपको पहनाने चाहिए।     भगवान कृष्ण के प्रिय भोग माखन, मिश्री को भी पूजा में अवश्य शामिल करेंगे।     राधा रानी को इस दिन श्रृंगार की सामग्री अर्पित करनी चाहिए। इसके साथ ही गुलाल भी राधा-कृष्ण को अर्पित करें।     भगवान कृष्ण की प्रिय धेनु यानि गाय की भी इस दिन आपको सेवा करनी चाहिए।     इस दिन व्रत रखने से और राधा-कृष्ण की पूजा करने से प्रेम और वैवाहिक संबंधों में निखार आता है।     आप फुलेरा दूज के दिन अपने साथी को उपहार देते हैं तो स्नेह और प्रेम का बंधन मजबूत होता है। फुलेरा दूज के दिन क्या न करें     भगवान कृष्ण को समर्पित इस दिन आपको गलती से भी किसी के साथ बुरा व्यवहार नहीं करना चाहिए।     भोजन से जुड़े नियमों का भी पालन आपको करना चाहिए और इस दिन मांस, मदिरा आदि तामसिक चीजों को ग्रहण नहीं करना चाहिए।     किसी के प्रति भी इस दिन अपने दिल में बैर भाव न लाएं।     इस दिन राधा-कृष्ण को अर्पित किए गए प्रसाद, गुलाल, फूल को गलती से भी किसी के भी पैरों के नीचे न आने दें।  

28 फरवरी शुक्रवार को इन राशियों में दिखेगा लाभ

मेष राशि- मेष राशि वालों का मन परेशान रहेगा। आत्मविश्वास में कमी रहेगी। जीवनसाथी की सेहत का ध्यान रखें। कारोबार में वृद्धि होगी। लाभ के अवसर मिलेंगे। परिश्रम अधिक रहेगा। वृषभ राशि- वृषभ राशि वालों का मन प्रसन्न तो रहेगा, फिर भी बातचीत में संयत रहें। व्यर्थ के वाद-विवाद से बचें। नौकरी में बदलाव के योग बन रहे हैं। आय में वृद्धि होगी, परंतु स्थान परिवर्तन हो सकता है। मिथुन राशि- मिथुन राशि वालों के मन में उतार-चढ़ाव रहेंगे। आत्मविश्वास में कमी रहेगी। शैक्षिक कार्यों के प्रति सचेत रहें। शासन सत्ता का सहयोग मिलेगा। स्थान परिवर्तन हो सकता है। लाभ में वृद्धि होगी। कर्क राशि- कर्क राशि वालों के आत्मविश्वास में कमी रहेगी। मन में नकारात्मक विचारों से बचें। वाणी में मधुरता रहेगी। फिर भी धैर्यशीलता बनाए रखें। नौकरी में बदलाव की संभावना बन रही है। आय में वृद्धि होगी। सिंह राशि- सिंह राशि वालों का मन परेशान हो सकता है। सेहत का ध्यान रखें। व्यर्थ के क्रोध से बचें। परिश्रम अधिक रहेगा। नौकरी में कार्यक्षेत्र में बदलाव के योग बन रहे हैं। कन्या राशि- कन्या राशि वालों का मन परेशान रहेगा। संयत रहें। अपनी भावनाओं को वश में रखें। परिवार की सेहत का ध्यान रखें। भागदौड़ अधिक रहेगी। रहन-सहन कष्टमय हो सकता है। खर्चों में वृद्धि होगी। तुला राशि- तुला राशि वालों का मन परेशान रहेगा। संयत रहें। क्रोध व आवेश के अतिरेक से बचें। शैक्षिक व बौद्धिक कार्यों में मन लगेगा। नौकरी में बदलाव के योग बन रहे हैं। आय में वृद्धि होगी। कार्यक्षेत्र भी बढ़ेगा। वृश्चिक राशि- वृश्चिक राशि वालों का आत्मविश्वास तो बहुत रहेगा, परंतु धैर्यशीलता बनाए रखने के प्रयास करें। परिवार की सेहत का ध्यान रखें। शैक्षिक कार्यों में सफलता मिलेगी। माता-पिता से धन मिल सकता है। धनु राशि- धनु राशि वाले आत्मविश्वास से लबरेज रहेंगे, परंतु मन में नकारात्मक विचारों से बचें। जीवनसाथी की सेहत का ध्यान रखें। उच्च पद की प्राप्ति हो सकती है। आय में वृद्धि होगी। लाभ के अवसर मिलेंगे। मकर राशि- मकर राशि वालों के मन में शांति व प्रसन्नता रहेगी। कला व संगीत के प्रति रूझान बढ़ सकता है। कारोबार में वृद्धि होगी। लाभ में वृद्धि होगी। मान-सम्मान की प्राप्ति होगी। जीवनसाथी की सेहत का ध्यान रखें। कुंभ राशि- कुंभ राशि वालों का मन प्रसन्न तो रहेगा फिर भी धैर्यशीलता बनाए रखें। बातचीत में संयत रहें। व्यर्थ के लड़ाई-झगड़ों से बचें। सेहत के प्रति सचेत रहें। कारोबार में वृद्धि होगी। मीन राशि- मीन राशि वाले आत्मविश्वास से लबरेज तो रहेंगे, परंतु मन परेशान भी हो सकता है। परिवार के साथ किसी धार्मिक स्थान पर जा सकते हैं। भागदौड़ अधिक रहेगी। वाहन सुख में वृद्धि हो सकती है।

27 फरवरी से 3 राशियों को होगा लाभ ही लाभ

मेष राशि आज का राशिफल (Mesh Rashi Kal Ka Rashifal)- मेष राशि के जातक को के लिए आज दिन मिला जुला रहने वाला है. आपको वाहनों का प्रयोग सावधान रहकर करना होगा. आप अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के प्रयासों में तेजी लाएंगे. किसी मित्र से यदि आप बिजनेस को लेकर कोई सलाह लेंगे, तो वह आपको अच्छी सलाह दे सकते हैं. पिताजी का कोई पुराना रोग भरने से आपकी टेंशन बढ़ेगी. आपको किसी लंबी दूरी की यात्रा पर जाने का मौका मिल सकता है. वृषभ राशि आज का राशिफल (Vrishabh Rashi Kal Ka Rashifal)- वृषभ राशि के जातको को आज किसी बड़े लक्ष्य को पकड़ कर चलने की आवश्यकता है. आपको भाग दौड़ लगी रहेगी, लेकिन आपके काम भी आसानी से पूरे होंगे. आपकी जीवनसाथी आपके कामों में आपका पूरा साथ देंगे. वैवाहिक जीवन खुशनुमा रहेगा. माताजी आपको कोई बड़ी जिम्मेदारी दे सकती हैं. आप यदि ससुराल पक्ष किसी व्यक्ति से लेनदेन करेंगे, तो उसमें कोई गड़बड़ी हो सकती है, इसलिए आप  उसमें पूरा ध्यान दें. मिथुन राशि आज का राशिफल (Mithun Rashi Kal Ka Rashifal)- मिथुन राशि के जातकों को आज  झगड़े व झंझटों से दूर रहने की आवश्यकता है. आपको एक साथ कई काम हाथ लगने से आपकी व्याकाग्रता बढ़ेगी. किसी नये वाहन की खरीदारी करना आपके लिए अच्छा रहेगा.  प्रेम जीवन जी रहे लोग अपने रूठे जीवन साथी को मनाने की कोशिश में लगे रहेंगे. आपकी कुछ नया करने की कोशिश रंग लाएगी. विद्यार्थियों को पढ़ाई लिखाई में ढील नहीं देनी है, नहीं तो बाद में  समस्या खड़ी हो सकती है. कर्क राशि आज का राशिफल (Kark Rashi Kal Ka Rashifal)- कर्क राशि के जातकों के इन्कम के सोर्स बढ़ेंगे. आपके घर किसी नये मेहमान का आगमन हो सकता है. परिवार में किसी सदस्य के विवाह की बात पक्की हो सकती है. आपको आज बेवजह के कामों में पढ़ने से बचना होगा. आप बिजनेस में अपनी योजनाओं पर अच्छा खासा धन खर्च करेंगे. जीवन साथी आपसे किसी चीज की फरमाइश कर सकते हैं. आपको यदि कोई टेंशन थी, तो  आप भगवान की भक्ति में आप खुब मन लगाएंगे. सिंह राशि आज का राशिफल (Singh Rashi Kal Ka Rashifal)- सिंह राशि के सामाजिक क्षेत्र में कार्यरत लोगों के लिए आज दिन चिंताग्रस्त  रहने वाला है, क्योंकि उन्हें किसी गलत काम में फसाया जा सकता है. आपको संतान की संगति पर भी विशेष ध्यान देना होगा. आपको किसी पर आंख मिलाकर भरोसा करना नुकसान देगा. यदि आप किसी कानूनी मामले को लेकर परेशान थे, तो वह भी दूर होगा. सरकारी काम यदि  रुका हुआ था, तो उसके भी पूरा होने की संभावना है. कन्या राशि आज का राशिफल (Kanya Rashi Kal Ka Rashifal)- कन्या राशि के जातकों को अपनी वाणी व व्यवहार पर संयम रखना होगा. जीवनसाथी को लेकर आप कहीं घूमने फिरने जा सकते हैं, जिससे आपको मानसिक शांति मिलेगी. किसी विपरीत परिस्थिति में भी आपको धैर्य बनाए रखने की आवश्यकता है. विदेश जाकर पढ़ाई कर रहे  विद्यार्थियों को आज कोई बेहतर अवसर हाथ लग सकता है. आपको अपने ज्ञान को बढ़ाने  का कोई भी मौका हद से जाने नहीं दें. तुला राशि आज का राशिफल (Tula Rashi Kal Ka Rashifal)- तुला राशि के जातकों के लिए कल दिन प्रसन्नता दिलाने वाला रहेगा. बंधु बांधवों का आपको पूरा साथ मिलेगा. आप मौज मस्ती करने में काफी समय व्यतीत करेंगे. पार्टनरशिप में किसी नए काम की आप शुरुआत कर सकते हैं. आपको लेनदेन से संबंधित मामलों पर पूरा ध्यान देना होगा.  आप परिवार के सदस्यों के साथ कुछ समय व्यतीत करेंगे, जिससे आप एक दूसरे के मन में चल रही दूरियों को कम करेंगे. वृश्चिक राशि आज का राशिफल (Vrishchik Rashi Kal Ka Rashifal)- वृश्चिक राशि के जातकों के लिए आज दिन किसी नए मकान, वाहन आदि की खरीदारी करना अच्छा रहेगा. आपको यदि कोई आंखों से संबंधित समस्या थी, तो वह बढ़ सकती है. नौकरी की तलाश में लगे लोगों के प्रयास बेहतर रहेंगे. पिताजी को यदि कोई स्वास्थ्य संबंधित समस्या थी, तो वह भी दूर होगी.  आपका कोई पुराना मित्र आपके लिए कोई सरप्राइज लेकर आ सकता है. आप अपने घर के कामों पर भी पूरा ध्यान देंगे. धनु राशि आज का राशिफल (Dhanu Rashi Kal Ka Rashifal)- धनु राशि के जातकों के लिए आज दिन  शांतिपूर्ण रहने वाला है. व्यापार में आपका कोई बड़ा काम आपके हाथ से निकल सकता है. आपको अपनी आय से ज्यादा खर्च करने से बचना होगा, नहीं तो आपकी समस्याएं बढ़ेंगी माता-पिता के आशीर्वाद से आपका कोई रुका हुआ काम पूरा होगा. आपको किसी विरोधी की बातों में आने से बचना होगा. संतान पक्ष की ओर से आपको  कोई खुशखबरी सुनने को मिल सकती है. मकर राशि आज का राशिफल (Makar Rashi Kal Ka Rashifal)- मकर राशि के जातकों के लिए आज दिन समस्याओं भरा रहने वाला है. आपकी वाणी की सौम्यता आपको मान सम्मान दिलवाएगी. व्यापार में आपको नुकसान होने से आपका मन परेशान रहेगा. आपको किसी की कहीं सुनी  बातों पर भरोसा करने से बचना होगा. नौकरी में कार्यरत लोग अपने कामों पर पूरा फोकस बनाएंगे. उनके बॉस को उनके दिए गए सुझाव आपको खूब पसंद आएंगे. किसी सरकारी योजना का आपको लाभ मिलेगा. कुंभ राशि आज का राशिफल (Kumbh Rashi Kal Ka Rashifal)- कुंभ राशि के जातकों के लिए आज दिन किसी कानूनी मामले में अच्छा रहने वाला है. ससुराल पक्ष से आपको धन लाभ मिलता दिख रहा है. परिवार के सदस्यों के साथ आपका अच्छा समय बीतेगा. आप किसी धार्मिक आयोजन में सम्मिलित हो सकते हैं. आप अपनी वाणी की सभ्यता बनाए रखें, तभी आपको मान सम्मान मिलता दिख रहा है. कार्य क्षेत्र में आप अपने बॉस से किसी बात को लेकर न उलझे, नहीं तो  इसका असर आपके प्रमोशन पर पड़ सकता है. मीन राशि आज का राशिफल (Meen Rashi Kal Ka Rashifal)- मीन राशि के जातकों को आज किसी नए घर मकान दुकान आदि की खरीदारी करना अच्छा रहेगा. प्रेम जीवन जी रहे लोगों के रिश्ते में किसी बाहरी व्यक्ति के आने के कारण खटपट हो सकती है.  आप परिवार में सबको साथ लेकर चलने की कोशिश करेंगे. माता-पिता आपको कोई जिम्मेदारी दे सकते हैं. आप अपनी बिजनेस में उतार-चढ़ाव को लेकर … Read more

मार्च में कब रखा जाएगा आमलकी एकादशी का व्रत? जाने

हिंदू धर्म में एकादशी की तिथि का विशेष महत्व है. ये तिथि भगवान विष्णु को समर्पित की गई है. हर माह में दो एकादशी होती है. इस तरह से साल भर में कुल 24 एकादशी पड़ती हैं. सभी एकादशी विशेष होती हैं और सबका अपना महत्व है. फाल्गुन माह के शुक्ल फक्ष में जो एकादशी पड़ती है उसे आमलकी एकादशी कहा जाता है. आमलकी एकादशी के दिन व्रत के साथ भगवान श्री हरि विष्णु और आंवले के पेड़ के पूजा की जाती है. इस साल मार्च में आमलकी एकादशी पड़ेगी. ऐसे में आइए जानते हैं कि मार्च में आमलकी एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा. इसकी सही तिथि और पूजा विधि क्या है. आमलकी एकादशी कब है ? हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 9 मार्च को सुबह 7 बजकर 45 मिनट पर शुरू होगी. वहीं इस तिथि का समापन 10 मार्च को सुबह 7 बजकर 44 मिनट पर होगा. ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, आमलकी एकादशी 10 मार्च को रहेगी. इसी दिन इसका व्रत रखा जाएगा. आमलकी एकादशी पूजा विधि     आमलकी एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए.     इसके बाद भगवान विष्णु का ध्यान करते व्रत का संकल्प लेना चाहिए.     फिर विधि पूर्वक भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए.     पूजा के समय भगवान विष्णु को पीला फूल, माला चढ़ानी चाहिए. भगवान को पीला चंदन लगाना चाहिए.     भगवान विष्णु के समाने घी का दीपक और धूप जलाना चाहिए.     एकादशी व्रत कथा का और चालीसा का पाठ करना चाहिए.     भगवान को भोग लगाना चाहिए. साथ ही तुलसी दल चढ़ाएं.     अंत में भगावन की आरती करनी चाहिए.     इस दिन आंवले के पेड़ की भी पूजा अवश्य करनी चाहिए. आमलकी एकदशी का महत्व हिंदू धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि आमलकी एकदशी का व्रत करने से सैकड़ों तीर्थ और कई यज्ञ के बराबर का पुण्य प्राप्त होता है. हिंदू मान्यताओं के अनुसार, आमलकी एकदशी का व्रत और इस दिन भगवान विष्णु का पूजन करने वालों के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं. इस दिन व्रत और भगवान विष्णु का पूजन करने से मरने के बाद मोक्ष और हरि चरणों में स्थान प्राप्त होता है. आमलकीएकादशी के दिन व्रत और पूजन से जीवन के सभी कष्ट मिट जाते हैं. साथ ही जीवन मेंं सुख-समृद्धि और शांति का आगमन होता है.

महाशिवरात्रि की पूजा में व्रत कथा का पाठ जरूर करें , पूरी होगी हर मनोकामना

महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के दौरान व्रत कथा का पाठ जरूर करना चाहिए. शिवपुराण में इस व्रत का महत्व बताया गया है, जिसके अनुसार यदि कोई व्यक्ति महाशिवरात्रि का व्रत करता है उसे भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे उसके जीवन की सभी परेशानियां दूर होती है और मनचाही इच्छा भी पूरी होती है. महाशिवरात्रि व्रत कथा कथा के अनुसार, चित्रभानु नामक एक शिकारी था. वह शिकार करके अपने परिवार का पालन पोषण करता था. उस शिकारी पर साहूकार का काफी कर्ज था. लेकिन वह उसका कर्ज समय पर नहीं चुका पाया. फिर साहूकार ने शिकारी को शिव मठ में बंदी बना लिया. जिस दिन उसे बंदी बनाया गया उस दिन शिवरात्रि थी. चतुर्दशी के दिन उसने शिवरात्रि व्रत की कथा सुनी और शाम होते ही साहूकार ने उसे अपने पास बुलाया और ऋण चुकाने के बारे में कहा. उसके बाद वह फिर शिकार की खोज में निकला. बंदीगृह में रहने के कारण वह बहुत भूखा था. शिकार की तलाश में वह बहुत दूर निकल आया. अंधेरा होने पर उसने जंगल में ही रात बिताने का फैसला किया और एक पेड़ पर चढ़ गया. उस पेड़ के नीचे शिवलिंग था जो बेलपत्र के पत्तो से ढका हुआ था. शिकारी को उसके बारे में जानकारी नहीं थी. पेड़ पर चढ़ते समय उसने जो टहनियां तोड़ी वह शिवलिंग पर गिरती रहीं. इस तरह से भूखे प्यासे रहकर शिकारी का शिवरात्रि का व्रत हो गया और शिवलिंग पर बेलपत्र भी चढ़ गए. रात के समय एक हिरणी पानी पीने तालाब पर आई. शिकारी जैसे ही उसका शिकार करने जा रहा था भी हिरणी बोली मैं गर्भवती हूं शीघ्र ही प्रसव करूंगी. तुम एक साथ दो जीवों की हत्या करोगे. मैं बच्चे को जन्म देकर तुरंत तुम्हारे सामना आ जाउंगी. तब मुझे मार लेना. शिकारी ने हिरणी को जाने दिया. इस दौरान अनजाने में कुछ बेलपत्र शिवलिंग पर गिर गए. इस तरह उसने अंजाने में प्रथम प्रहर की पूजा भी संपन्न कर ली. कुछ देर बार एक हिरणी उधर से निकली. जैसे ही शिकारी उसे मारने के लिए धनुष बाण चढ़ाया तो हिरणी ने विनम्रतापूर्वक निवेदन किया हे शिकारी में थोड़ी देर पहले ही ऋतु से निवृत्त हुई हूं. कामातूर विरहिणी हूं. अपने प्रिय की तलाश में हूं. अपनी पति से मिलकर मैं तुम्हारे पास आ जाउंगी. शिकारी ने उसे भी जाने दिया. रात का आखिरी पहर बीत रहा था. तब भी कुछ बेलपत्र शिवलिंग पर जा गिरे. ऐसे में शिकारी ने अनजाने में ही अंतिम पर की पूजा भी कर ली. इस दौरान वहां एक हिरणी अपने बच्चों के साथ आई. उसने भी शिकारी से निवेदन किया और शिकारी ने उसे जाने दिया. इसके बाद शिकारी के सामने एक हिरण आया. शिकारी ने सोचा अब तो मैं इसे यहां ने नहीं जाने दूंगी इसका शिकार करुंगी. तब हिरण ने उससे निवेदन किया कि मुझे कुछ समय के लिए जीवनदान दे दो. शिकारी ने पूरा रात की घटना उस हिरण को सुना दी. तब हिरण ने कहा कि जिस तरह से तीनों पत्नियां प्रतिज्ञाबद्ध होकर गई हैं, मेरी मृत्यु से अपने धर्म का पालन नहीं कर पाएंगी. जैसे तुमने उन्हें विश्वापात्र मानकर छोड़ा है मुझे भी जाने दो. मैं उन सबके साथ तुम्हारे सामने शीघ्र ही उपस्थित होता हूं. शिकारी ने उसे भी जाने दिया. इस तरह सुबह हो गई. उपवास, रात्रि जागरण, और शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने से अनजान में ही शिवरात्रि की पूजा पूर्ण हो गई. लेकिन, अनजाने में हुई पूजा का परिणाम उसे तत्काल मिला. थोड़ी देर बार हिरण और उसका परिवार शिकारी के सामने आ गया. उन सभी को देखकर शिकारी को बहुत गिलानी हुई और उसके पूरे परिवार को जीवनदान दे दिया. अनजाने में शिवरात्रि व्रत का पालन करने पर भी शिकारी को मोक्ष की प्राप्ति हुई. जब मृत्यु काल में यमदूत जीव को ले जाने आए तो शिवगणों ने उन्हें वापस भेज दिया और उसे शिवलोक ले गए. शिवजी की कृपा से चित्रभानु अपने पिछले जन्म को याद रख पाए. शिवरात्रि के महत्व को जानकर उसका अगले जन्म में भी पालन कर पाए.

26 फरवरी बुधवार को इन राशियों की चमकेगी किस्मत

मेष राशि- मेष राशि वालों की लाइफ में आत्मविश्वास भरपूर रहेगा। मन प्रसन्न रहेगा, इसलिए आपको । बातचीत में संयत रहें। पिता की सेहत का ध्यान रखें। खर्चों में वृद्धि होगी। कारोबार में वृद्धि होगी। परिश्रम बढ़ेगा, जो आगे चलकर आपको लाभ देगा। वृषभ राशि- वृषभ राशि वालों को कुछ समस्याएं रहेगीं, लेकिन मन प्रसन्न रहेगा। आत्मविश्वास में कमी रहेगी। इसके बावजूद आप ऑफिस में सभी का ध्यान अपनी तरफ खीचेंगे। किसी मित्र का आगमन हो सकता है। वस्त्र उपहार में मिल सकते हैं। कारोबार में वृद्धि होगी। मिथुन राशि– मिथुन राशि वालो का मन अशांत रहेगा, लेकिन इससे परेशान होनी की जरूरत नहीं। आर्थिक तौर पर आप अच्छे हैं। रिलेशनशिप में संयत रहें। बेकार के क्रोध से बचें। किसी मित्र के सहयोग से कारोबार में लाभ में वृद्धि होगी। संतान से सुखद समाचार मिल सकते हैं। खर्च बढ़ेंगे। कर्क राशि- कर्क राशि वालों के लिए समय अच्छा है। आपके लिए कईअच्छे मौके आ रहे हैं जो आपको लाभ दिलाएंगे। मन परेशान हो सकता है। परिवार की सेहत का ध्यान रखें। नौकरी में स्थान परिवर्तन के योग हैं। परिवार से दूर रहना पड़ सकता है। सिंह राशि– सिंह राशि वालों को समाज में सम्मान मिलेगा, जिससे आपका मन प्रसन्न रहेगा। पठन-पाठन में रुचि रहेगी। परिवार में धार्मिक कार्य हो सकते हैं, जिसके लिए आपको पैसा देना होगा। वस्त्र उपहार में मिल सकते हैं। कारोबार में भागदौड़ अधिक रहेगी। कन्या राशि– कन्या राशि वालों के लिए आपका मन आज चंचल रहेगा, बेकार की चिंताओं से मन परेशान हो सकता है। पिता की सेहत का ध्यान रखें। आज अपने खर्च पर कंट्रोल करें, क्योंकि खर्चों की अधिकता रहेगी। मित्रों का सहयोग मिलेगा। कारोबार में कठिनाई आ सकती है। इसलिए सतर्क होकर काम करें। भागदौड़ बढ़ेगी। तुला राशि– तुला राशि वालों के लिए आत्मविश्वास भरपूर रहेगा। आपकी लाइफ में इस समय अच्छे योग हैं, इसलिए सोचविचारकर काम करें। मन प्रसन्न तो रहेगा, पर धैर्यशीलता बनाए रखें। किसी मित्र के सहयोग से किसी संपत्ति से धन प्राप्ति हो सकती है। वृश्चिक राशि– अपनी वाणी के बल पर लोगों को आकर्षित करने में सफल रहेंगे। नौकरी में बदलाव के योग बन रहे हैं। तरक्की के अवसर भी मिलेंगे। आय में वृद्धि होगी। जिन जातकों को नौकरी में प्रमोशन का इंतजार था, उन्हें खुशखबरी मिल सकती है। जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा। धनु राशि- धनु राशि वालों का दिन आत्मविश्वास भरपूर रहेगा। किसी सम्मानित कार्यक्रम में आपको सम्मान भी दिया जा सकता है। पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा। परिवार में धार्मिक कार्य हो सकते हैं। परिवार की किसी बुजुर्ग महिला से धन मिल सकता है। कुल मिलाकर आपके लिए समय अच्छा है। मकर राशि– मकर राशि वालो के करियर में थोड़ी दिक्कत है। आत्मविश्वास में कमी रहेगी। बेवजह आपका मन परेशान हो सकता है। नौकरी में बदलाव की संभावना बन रही है। कार्यक्षेत्र में बदलाव हो सकता है, लेकिन यह बदलाव अच्छा होगा। आय में वृद्धि होगी। कुंभ राशि– कुंभ राशि वालों के लिए मन परेशान रहेगा। सेहत का ध्यान रखें। परिवार का साथ मिलेगा। संपत्ति में वृद्धि हो सकती है। पिता का साथ मिलेगा। नौकरी में कार्यक्षेत्र में बदलाव हो सकता है। मीन राशि- मीन राशि वालों के मन में शांति व प्रसन्नता रहेगी। घर-परिवार में धार्मिक कार्य हो सकते हैं। किसी करीबी से सरप्राइज गिफ्ट मिल सकता है। भवन सुख में वृद्धि हो सकती है। परिवार का साथ मिलेगा। खर्चों में वृद्धि होगी।

महाकुंभ के समापन पर तीन बड़े ग्रह त्रिग्रही योग का करेंगे निर्माण

प्रयागराज में चल रहा महाकुंभ अब समापन की ओर बढ़ रहा है. 13 जनवरी को पौष पूर्णिमा के स्नान के साथ प्रयागराज में महाकुंभ की शुरुआत हुई. इस महाकुंभ में 14 जनवरी मकर संक्रांति, 29 जनवरी मौनी अमावस्या और 3 फरवरी को बसंत पंचमी के दिन अमृत स्नान किया गया. वहीं 12 फरवरी को माघी पूर्णिमा के दिन शाही स्नान किया गया. अब 26 फरवरी को महाकुंभ में महाशिवरात्रि का अंतिम शाही स्नान किया जाएगा. महाशिवरात्रि पर महाकुंभ का समापन महाकुंभ में महाशिवरात्रि पर होने वाले अंतिम शाही स्नान के साथ ही इस 45 दिनों तक चलने वाले विश्व के सबसे बड़े धार्मिक उत्सव का समापन हो जाएगा. ज्योतिषियों के अनुसार, महाकुंभ के समापन पर त्रिग्रही योग का निर्माण हो रहा है.मतलब त्रिग्रही योग में इस महाकुंभ का समापन होगा. इस त्रिग्रही योग में जो भी महाकुंभ में आस्था की डुबकी लगाएगा उसे अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य फल मिलेगा. महाकुंभ के समापन पर बनेगा त्रिग्रही योग दरअसल, महाकुंभ के अंतिम स्नान यानी महाशिवरात्रि के दिन ज्योतिष शास्त्र के तीन बड़े ग्रह, ग्रहों के राजा भगवान सूर्य, ग्रहों के राजकुमार बुध और कर्मफल दाता शनि देव कुंभ राशि में त्रिग्रही योग का निर्माण करेंगे. इससे कुछ राशियों के जातकों को लाभ ही लाभ होगा. आइए जानते हैं कि ये राशियां कौनसी हैं. जिन्हें त्रिग्रही योग के निर्माण से लाभ होगा. मेष राशि महाकुंभ के समापन पर बनने वाला त्रिग्रही योग मेष राशि के शुभ साबित हो सकता है. इस दौरान मेष राशि वालों को धन का लाभ हो सकता है. बेरोजगार जातकों को नौकरी मिल सकती है. पैतृक संपत्ति से लाभ के योग बनेंगे. वृषभ राशि महाकुंभ के समापन पर बनने वाला त्रिग्रही योग वृषभ राशि के जातकों के लिए अनुकूल साबित हो सकता है. इस दौरान वृषभ राशि वालों को करियर में उन्नति मिल सकती है. निवेश से लाभ हो सकता है. आय में बढ़ोतरी हो सकती है. मिथुन राशि महाकुंभ के समापन पर बनने वाला त्रिग्रही योग मिथुन राशि के जातकों के लिए लाभ देने वाला साबित हो सकता है. इस दौरान मिथुन राशि वालों को नाम और ख्याति प्राप्त हो सकती है. कुंभ राशि महाकुंभ के समापन पर बनने वाला त्रिग्रही योग कुंभ राशि में ही बनेगा. इससे कुंभ राशि के जातकों को अच्छे परिणाम प्राप्त हो सकते हैं. इस दौरान कारोबारी जातक कोई बड़ी डील कर सकते हैं. सेहत अच्छी रहेगी.

महाशिवरात्रि के दिन इन आसान उपायों से मिलेगी पितृ दोष से मुक्ति

ज्योतिष के अनुसार, व्यक्ति की कुंडली में पितृ दोष लगने पर उसे कई तरह की परेशानियां और कष्ट झेलनी पड़ सकते हैं. ऐसा माना जाता है कि पितरों के नाराज होने पर पितृ दोष लगता है. इसके अलावा, पितृ दोष लगने के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं. धार्मिक मान्यता है कि पितृ दोष को करने के लिए भगवान शिव की पूजा करना चाहिए. महाशिवरात्रि का पर्व पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए एक अच्छा अवसर है. इस साल महाशिवरात्रि 26 फरवरी को मनाई जाएगी. ऐसे में चलिए जानते हैं कि पितृ दोष लगने पर व्यक्ति को कौन-कौन सा परेशानियां झेलना पड़ती हैं और इनसे बचाव के लिए महाशिवरात्रि के दिन क्या उपाय करने चाहिए. पितृ दोष से होती हैं ये समस्याएं     पितृ दोष होने पर व्यक्ति को संतान की प्राप्ति में बाधा आती है.     पितृ दोष होने पर परिवार में लड़ाई-झगड़ा बढ़ने लगते हैं.     पितृ दोष होने पर घर में कोई-न-कोई हमेशा बीमार रहता है.     पितृ दोष होने पर कारोबार में घाटा होने लगता है और आर्थिक परेशानी होती है.     पितृ दोष होने पर व्यक्ति के विवाह में देरी होती है.     पितृ दोष होने पर दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है. करें यह आसान उपाय पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए सही विधि से तर्पण, श्राद्ध और दान जैसे कर्म करने चाहिए. ऐसा करने से पितरों की कृपा दृष्टि भी के ऊपर बनी रहती है. साथ ही, इस दिन जल में काले तिल मिलाकर दक्षिण दिशा में अर्घ्य देना चाहिए, पीपल के पेड़ में जल चढ़ाएं और सात बार परिक्रमा करें. ऐसा करने से करने से आपको पितृ दोष से छुटकारा मिल सकता है. इन मंत्रों का करें जाप     ॐ श्री पितराय नमः     ॐ श्री पितृदेवाय नमः     ॐ श्री पितृभ्यः नमः     ॐ श्री सर्व पितृ देवताभ्यो नमो नमः     ॐ पितृभ्यः स्वधायिभ्यः पितृगणाय च नमः     ॐ श्राध्दाय स्वधा नमः     ॐ नमः शिवाय     ॐ श्रीं सर्व पितृ दोष निवारणाय क्लेशं हं हं सुख शांतिम् देहि फट् स्वाहा     ॐ पितृदेवताभ्यो नमः     ॐ पितृ गणाय विद्महे जगत धारिणे धीमहि तन्नो पित्रो प्रचोदयात् इस चीज का करें दान महाशिवरात्रि के दिन काले तिल का दान करने से पितर प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा प्राप्त होती है. ऐसा कहा जाता है कि इस दिन शिवलिंग पर काले तिल चढ़ाने करने से पितृदोष से राहत मिलती है. इसके अलावा, महाशिवरात्रि के दिन काले तिल का दान करने से शनि दोष से भी छुटकारा मिलता है, क्योंकि भगवान शिव शनिदेव के गुरु माने गए हैं.

16 फरवरी रविवार को इन राशियों में दिखेगा लाभ

मेष राशि- मन प्रसन्न रहेगा। संतान सुख में वृद्धि होगी। घर-परिवार में धार्मिक कार्य हो सकते हैं। वस्त्र उपहार में मिल सकते हैं। भागदौड़ अधिक रहेगी। नौकरी में अफसरों का सहयोग मिलेगा। वृषभ राशि- मन परेशान रहेगा। आत्मसंयत रहें। व्यर्थ के क्रोध से बचें तथा बातचीत में संतुलित रहें। शैक्षिक कार्यों में सफल रहेंगे। संतान की ओर से सुखद समाचार मिल सकता है। मिथुन राशि- मन प्रसन्न रहेगा। कला या संगीत के प्रति रुझान बढ़ेगा। पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा। कारोबारी कार्यों में परिश्रम अधिक रहेगा। लाभ में वृद्धि होगी। कर्क राशि- मन अशांत रहेगा। आत्मसंयत रहें। व्यर्थ के क्रोध से बचें। सेहत का ध्यान रखें। नौकरी में अफसरों का सहयोग मिलेगा। तरक्की के मार्ग प्रशस्त होंगे। आय में वृद्धि होगी। भागदौड़ अधिक रहेगी। सिंह राशि- आत्मविश्वास भरपूर रहेगा। वाणी में मधुरता रहेगी। फिर भी आत्मसंयत रहें। परिवार में शांति बनाए रखें। शैक्षिक कार्यों के लिए किसी दूसरे स्थान पर जाना पड़ सकता है। कन्या राशि- आत्मसंयत रहें। अपनी भावनाओं को वश में रखें। घर-परिवार में धार्मिक कार्य हो सकते हैं। लेखनादि बौद्धिक कार्यों में व्यस्तता बढ़ सकती है। रहन-सहन अव्यवस्थित हो सकता है। तुला राशि- मन परेशान रहेगा। आत्मसंयत रहें। धैर्यशीलता बनाए रखने के प्रयास करें। माता की सेहत का ध्यान रखें। खर्चों में वृद्धि होगी। रहन-सहन कष्टमय हो सकता है। परिवार का साथ मिलेगा। वृश्चिक राशि- मन परेशान रहेगा। आत्मविश्वास में कमी रहेगी। बातचीत में संयत रहें। सेहत का ध्यान रखें। घर-परिवार में धार्मिक कार्य हो सकते हैं। शैक्षिक कार्यों में सफलता मिलेगी। धनु राशि- मन में शांति व प्रसन्नता रहेगी। आत्मविश्वास भी भरपूर रहेगा। कला या संगीत में रुचि बढ़ेगी। पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा। पिता का सान्निध्य मिलेगा। खर्च बढ़ेंगे। मकर राशि- आत्मविश्वास तो बहुत रहेगा, परंतु मन परेशान भी हो सकता है। आत्मसंयत रहें। क्रोध के अतिरेक से बचें। नौकरी में बदलाव की संभावना बन रही है। तरक्की के अवसर मिल सकते हैं। कुंभ राशि- आत्मविश्वास भरपूर रहेगा, परंतु मन में उतार-चढ़ाव रहेंगे। कारोबार में वृद्धि होगी। नौकरी में बदलाव के योग बन रहे हैं। भागदौड़ अधिक रहेगी। आय में वृद्धि होगी। मीन राशि- आत्मविश्वास से लबरेज रहेंगे, परंतु मन में नकारात्मक विचारों से बचें। धैर्यशीलता बनाए रखें। किसी मित्र के सहयोग से नौकरी के अवसर मिल सकते हैं। नौकरी में तरक्की मिल सकती है।

ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में 17 फरवरी से शिवनवरात्र उत्सव की शुरुआत, इस बार शिवनवरात्र नौ की बजाय दस दिन के होंगे

उज्जैन  ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में 17 फरवरी से शिवनवरात्र उत्सव की शुरुआत होगी। इस बार शिवनवरात्र नौ की बजाय दस दिन के होंगे। मंदिर की पूजन परंपरा में शिवनवरात्र के नौ दिन भगवान महाकाल का तिथि अनुसार शृंगार होता है। ऐसे में तिथि वृद्धि के कारण बढ़ी हुई तिथि पर भगवान का किस रूप में शृंगार करें, इसके लिए शुक्रवार को पुजारी पुरोहित की बैठक होगी। बारह ज्योतिर्लिंग में महाकाल एक मात्र ऐसा ज्योतिर्लिंग है, जहां की पूजन परंपरा अनूठी है। प्रतिदिन तड़के 4 बजे होने वाली मंगला आरती में भगवान को भस्मी स्नान कराया जाता है। शिवनवरात्र के रूप में शिव पार्वती विवाह का उत्सव नौ दिन मनाने की परंपरा भी यहीं है। शिवनवरात्र के नौ दिनों में भगवान महाकाल का अलग-अलग रूपों में तिथि अनुसार शृंगार भी इसी अद्भुत परंपरा का हिस्सा है। इसी विशिष्ट पूजन परंपरा के कारण शिवनवरात्र में तिथि वृद्धि होने के कारण बढ़ी हुई तिथि पर भगवान का शृंगार करने को लेकर असमंजस की स्थित निर्मित हो रही है। शुक्रवार को पुजारी बैठक कर इस पर निर्णय लेंगे कि किस दिन भगवान का किस रूप में शृंगार किया जाए। ग्वालियर के पंचांग की मान्यता, यह हो सकता है पं.महेश पुजारी ने बताया महाकाल मंदिर की पूजन परंपरा में तिथि का निर्धारण ग्वालियर के पंचांग अनुसार किया जाता है। ऐसी के अनुसार तय होगा कि नवरात्र में कौन सी तिथि बढ़ी है। उसी के अनुसार मुखारविंद का निर्धारण होगा। ऐसा भी किया जा सकता है कि पहले दिन भगवान को नवीन वस्त्र व आभूषण धारण कराकर जो चंदन शृंगार किया जाता है, उसी शृंगार को शुरुआती दो दिन निरंतर रखते हुए अगले दिन से निर्धारित क्रम अनुसार अन्य मुखारविंद का शृंगार किया जाए। मंदिर के सभी प्रमुख सोलह पुजारी बैठक कर इसका निर्णय लेंगे। किस दिन किन रूपों में होता है शृंगार मंदिर की परंपरा अनुसार फाल्गुन कृष्ण पंचमी पर शिवनवरात्र के पहले दिन भगवान को महाकाल को हल्दी लगाकर दूल्हा बनाया जाता है। इसके बाद नवीन वस्त्र व सोने चांदी के आभूषण धारण कराकर चंदन शृंगार किया जाता है। षष्ठी पर शेषनाग, सप्तमी पर घटाटोप, अष्टमी पर छबीना, नवमी पर होलकर, दशमी पर मनमहेश, एकादशी पर उमा महेश, द्वादशी पर शिव तांडव, महाशिवरात्रि के दिन (सुबह से रात तक कोई मुखारविंद धारण नहीं कराया जाता) सतत जलधारा तथा चतुर्दशी पर सप्तधान शृंगार होगा। चंद्र दर्शन की दूज पर पंच मुखारविंद दर्शन महाकाल मंदिर की पूजन परंपरा अनुसार महाशिवरात्रि के तीन दिन बाद फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया जिसे चंद्र दर्शन की दूज कहा जाता है, इस दिन भगवान का पंच मुखारविंद शृंगार किया जाता है। अर्थात इस दिन भगवान महाकाल भक्तों को एक साथ पांच रूपों में दर्शन देते हैं। शिवनवरात्र के नौ दिन, जो भक्त भगवान के दर्शन नहीं कर पाते हैं, वे दूज के दिन भगवान के एक साथ पांच रूपों के दर्शन कर सकते हैं।

2 दिन बाद इन राशियों का शुरू होगा गोल्डन टाइम, इन्हें मिलेगा खास तोहफा, जानें अपनी लव लाइफ के बारे में

मेष राशि- आत्मविश्वास में कमी रहेगी। मन में उतार-चढ़ाव भी रहेंगे। शैक्षिक कार्यों के प्रति सचेत रहें। कठिनाई आ सकती है। संतान की सेहत का ध्यान रखें। कारोबार में वृद्धि होगी। भागदौड़ अधिक रहेगी। वृषभ राशि- मन परेशान रहेगा। आत्मविश्वास में कमी रहेगी। धैर्यशीलता बनाए रखें। पिता की सेहत का ध्यान रखें। परिवार का साथ मिलेगा। खर्चों में वृद्धि होगी। मित्रों का सहयोग मिलेगा। मिथुन राशि- मन प्रसन्न तो रहेगा। फिर भी बातचीत में संतुलित रहें। माता का सान्निध्य मिलेगा। पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा। कारोबार में वृद्धि होगी। लाभ के अवसर मिलेंगे। कर्क राशि- मन अशांत हो सकता है। आत्मविश्वास में कमी रहेगी। परिवार के साथ किसी धार्मिक स्थान पर जा सकते हैं। कारोबार में परिवर्तन के योग बन रहे हैं। परिवार का साथ मिलेगा। सिंह राशि- आत्मसंयत रहें। व्यर्थ के क्रोध से बचें। अपनी भावनाओं को वश में रखें। कारोबार में कठिनाई आ सकती है। भागदौड़ अधिक रहेगी। परिवार का साथ मिलेगा। यात्रा पर खर्च बढ़ेंगे। कन्या राशि- आत्मविश्वास तो भरपूर रहेगा, परंतु मन परेशान भी हो सकता है। संयत रहें। व्यर्थ के क्रोध से बचें। वाणी के प्रभाव में वृद्धि होगी। पठन-पाठन में रुचि बढ़ेगी। शैक्षिक कार्यों में सफल रहेंगे। तुला राशि- मन में निराशा व असंतोष रहेगा। आत्मसंयत रहें। मानसिक शांति बनाए रखने के प्रयास करें। सेहत का ध्यान रखें। शैक्षिक कार्यों में सफलता मिलेगी। मित्रों का सहयोग मिलेगा। वृश्चिक राशि- आत्मविश्वास तो बहुत रहेगा, परंतु मन परेशान भी हो सकता है। सेहत के प्रति सचेत रहें। नौकरी में अफसरों का सहयोग मिलेगा। कोई अतिरिक्त जिम्मेदारी मिल सकती है। धनु राशि- मन प्रसन्न रहेगा, परंतु बातचीत में संतुलित रहें। जीवनसाथी की सेहत का ध्यान रखें। परिवार का साथ मिलेगा। खर्चों की अधिकता रहेगी। कारोबार का विस्तार होगा। लाभ में वृद्धि होगी। मकर राशि- मन शांत रहेगा। आत्मविश्वास भी बहुत रहेगा, परंतु मन में नकारात्मक विचारों से बचें। नौकरी में अफसरों का सहयोग मिलेगा। आय में वृद्धि तो होगी, परंतु खर्च भी बढ़ेंगे। कुंभ राशि- मन प्रसन्न तो रहेगा, परंतु बातचीत में संयत रहें। सेहत के प्रति सचेत रहें। खर्चों की अधिकता रहेगी। कार्यक्षेत्र में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। कारोबार में वृद्धि होगी। मीन राशि- वाणी में मधुरता रहेगी, परंतु मन परेशान हो सकता है। धैर्यशीलता बनाए रखने के प्रयास करें। परिवार की सेहत का ध्यान रखें। रहन-सहन कष्टमय हो सकता है। भागदौड़ अधिक रहेगी।

शादी की बात बनते-बनते बिगड़ जाती है तो करें ये काम

हर कोई अपनी पसंद के व्यक्ति से शादी करना चाहता है, जिससे वह पूरा जीवन खुशी से बिता सके, लेकिन हमेशा ऐसा नहीं होता है. ज्योतिष शास्त्र में माना गया है कि जब कुण्डली में ग्रहों की स्थिति अनुकूल नहीं होती तो ऐसे में व्यक्ति को शादी होने में बाधाओं का सामना करना पड़ता है या फिर शादी की बात तय होकर भी टूट जाती है. ऐसी स्थिति से निकलने के लिए ज्योतिष शास्त्र में कुछ उपाय बताए गए है, जिससे विवाह में आ रही सभी बाधाओं को दूर किया जा सकता है. करें ये उपाय कई बार कुंडली में मांगलिक दोष के चलते व्यक्ति को विवाह में बाधाओं का सामना करना पड़ता है. ऐसे में मांगलिक दोष को दूर करने के लिए मंगलवार के दिन व्रत रखकर हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए. इसके अलावा हनुमान जी को गेहूं के आटे एवं गुड़ से बने लड्डू का भोग लगाएं और सिंदूर अर्पित करें. अंत में बालकांड का पाठ करें. अगर विवाह में बार-बार बाधा उत्पन्न हो रही हैं, तो रोजाना सुबह स्नान कर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने के साथ पार्वती चालीसा का पाठ करें. धार्मिक मान्यता के अनुसार ऐसा करने से जल्द विवाह के योग बनते हैं. गंगाजल और तिल का उपाय कई बार कुंडली में शुक्र ग्रह कमजोर होने की वजह से भी विवाह में बाधाएं उत्पन्न होती हैं. ऐसा में शुक्रवार के दिन गंगाजल में काले तिल मिलाकर भगवान शिव का अभिषेक करें. ऐसा करने से कुंडली में शुक्र ग्रह मजबूत होता है. साथ ही अन्य ग्रहों के अशुभ प्रभावों से मुक्ति मिलती है. गुरुवार को करें ये उपाय ज्योतिष शास्त्र में गुरु को विवाह का कारक माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, गुरुवार के दिन पीले रंग के वस्त्र धारण करें. साथ ही चने की दाल, हल्दी, केला, केसर का सेवन करना शुभ फलदायी होता है. इसके अलावा गुरुवार के व्रत भी कर सकते हैं.

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