LATEST NEWS

“अंग्रेजों से युद्ध मुसलमानों ने लड़ा था, भाजपा और RSS ने नहीं”

“अंग्रेजों से युद्ध मुसलमानों ने लड़ा था, भाजपा और RSS ने नहीं” AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का बयान

यू एन ह्यूमन राइट चीफ वोल्कर ने, भारत में मुस्लिमों के प्रति हो रही हिंसा, भेदभाव और बयानबाज़ी पर बयान जारी किया

यू एन ह्यूमन राइट चीफ वोल्कर तुर्क ने भारत में मुस्लिमों के प्रति हो रही हिंसा, भेदभाव और भड़काव बयानबाज़ी पर बयान जारी कर कहा है कि : “भारत रहने वाले अल्पसंख्यक समुदाय हिंसा और भेदभाव का शिकार हो रहे हैं। मुसलमान अक्सर ऐसे हमलों का निशाना बनते हैं, हाल ही में उत्तर भारत में हरियाणा और गुरुग्राम में , मणिपुर में अन्य समुदाय भी मई से हिंसा और असुरक्षा का सामना कर रहे हैं “।

गठबंधन की ओट में सनातन धर्म पर चोट।

ग्वालियर। कांग्रेस पार्टी द्वारा क्षेत्रीय घटक दलों को साथ लेकर बनाये गए I.N.D.I.A गठबंधन का असली चेहरा सनातन धर्म एवं संस्कृति के प्रमुख विरोधी के रूप में खुलकर उजागर हो रहा है। ऐसा लगता है जैसे देश मे विपक्षी राजनीतिक दलों के द्वारा सनातन धर्म को लेकर खुद को सबसे बड़ा सनातन संस्कृति का विरोधी दिखाने की एक होड़ सी लगी हुई है। कांग्रेस एवं सहयोगी विपक्षी दलों द्वारा लगातार सनातन धर्म एवं संस्कृति को लेकर जिस तरह की अमर्यादित, अनर्गल एवं धर्म विरोधी और अपमानजनक भाषा का उपयोग करते हुए सनातन धर्म का अपमान किया जा रहा है। वह इस I.N.D.I.A गठबंधन को ही पतन की ओर ले जाता दिखाई दे रहा है। जहाँ एक ओर कांग्रेस विपक्षी दलों को साथ लेकर बनाए गए I.N.D.I.A गठबंधन के भरोसे भाजपा को सत्ता से बाहर करने के लिए हुंकार भर रही है। वहीं गठबंधन के द्वारा लगातार सनातन धर्म पर तीखे प्रहार कर समस्त सनातनियों को अपमानित कर रही है। अभी हाल ही में कर्नाटक के मुख्यमंत्री स्टॉलिन के बेटे एवं कर्नाटक सरकार में खेल मंत्री उदय निधी स्टॉलिन ने जिस तरह सनातन धर्म की तुलना कॉरोना वायरस और डेंगू मलेरिया जैसी बीमारियों से करते हुए सनातन धर्म को समाप्त करने की बात कही गई है। वह बहुत ही गंभीर एवं चिंताजनक है। इसके भी दो कदम आगे आकर कर्नाटक सरकार के ही एक ओर मंत्री जी परमेश्वर द्वारा सनातन हिन्दू धर्म का अपमान करते हुए यहां तक कह दिया कि जैन और बौद्ध धर्म का उदय भारत में हुआ है और ईसाई और इस्लाम धर्म बाहर से भारत में आये हैं लेकिन हिन्दू धर्म का कहीं कोई इतिहास नहीं मिलता है। जबकि इसके पूर्व गठबंधन के प्रमुख घटक दल समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य ने भी कभी सनातनियों के प्रमुख धार्मिक ग्रंथ श्री राम चरित मानस का खुले आम अपमान किया तो कभी अयोध्या में राम मंदिर, काशी के विश्वनाथ मंदिर, उत्तराखंड के प्रमुख केदारनाथ सहित तमाम हिंदु मंदिरों को बौद्धमठ तोड़कर बनाया जाना बताकर एक नया विवाद खड़ा करते हुए देश की शांति और धार्मिक सदभावना को तोड़ने का प्रयास किया। इतना ही नहीं खुद कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी द्वारा कई वार हिन्दू धर्म को लेकर विवादित बयान दिए गए हैं। अपने आप को जनेऊधारी ब्राह्ममण बताने वाले राहुल गांधी तो यहाँ तक कह चुके हैं कि हिन्दू मंदिरों में लोग लड़कियां छेड़ने जाते हैं। इस तरह के एक नहीं कई बयान हैं। जिनमें कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे सहित कई नेताओं द्वारा हिन्दू धर्म के ऊपर कुठाराघात किया गया है। यहाँ गौरतलब है कि कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी राजनीतिक दलों के बड़े-बड़े नेताओं को सिद्ध सनातन हिंदु धर्म और भारत देश के करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों को अपमानित करने से पहले यह भी सोचना चाहिए कि जिस तरह लगातार सनातन धर्म एवं संस्कृति का अपमान किया जा रहा है। इस अपमान से आक्रोशित होकर यदि सनातनियों ने एकजुटता दिखाई तो भारतीय जनता पार्टी को सत्ता से बेदखल करने का सपना देख रहे कांग्रेसनीत I.N.D.I.A गठबंधन के दिग्गज नेताओं को अपनी-अपनी सीटों को बचाने के लाले न पड़ जाएं और भाजपा विहीन भारत का स्वपन कहीं कांग्रेस सहित विपक्ष विहीन भारत में तब्दील न हो जाए।

धर्म संस्थापक योगेश्वर श्री कृष्ण के जन्म दिवस की आप सभी महानुभावों को हार्दिक अनंतशुभकामनाएं…

भारतीय इतिहास में श्री कृष्ण के सदृश्य कोई दूसरा इतना महान व्यक्ति नही हुआ जिसे योगेश्वर पुकारा जाता हो। श्री कृष्ण के जन्म के समय भारत खण्ड-खण्ड में विभक्त था। ‘*गृहे गृहे ही राजानं: स्वस्य स्वस्य प्रियं करा:’ * अर्थात घर घर राजा हैं और अपने ही हित में लगे हुए हैं। सम्पूर्ण राष्ट्र को एक सूत्र में बाँधने वाला कोई व्यक्ति नहीं था। कंस, जरासन्ध, शिशुपाल, दुर्योधन आदि जैसे दुराचारी व विलासियों का वर्चस्व निरन्तर बढ़ रहा था। राज्य के दैवीय सिद्धान्त और प्रतिज्ञा से भीष्म जैसे योद्धा तक बंधे हुए थे। श्री कृष्ण के जन्म से पहले ही उनके माता-पिता मथुरा के राजा कंस के कारावास में क़ैदी थे। कंस ने उनके सात भाइयों की हत्या भी करवा दिया था।ऐसे घोर अन्धकार और अन्याय पूर्ण काल में श्री कृष्ण का जन्म मथुरा के राजा कंस के कारागृह में हुआ। ऐसे वातावरण में उन्होंने अपने अद्भुत कुशल पूर्ण चातुर्य नीति एवं कौशल से इन राजाओं को समूल नष्ट करवाकर धर्म राज युधिष्ठिर को भारत का चक्रवर्ती सम्राट बनवा दिया था। श्री कृष्ण के संदर्भ में तथ्य विशेष …….. 1 – जन्म व शैक्षणिक – श्री कृष्ण का जन्म लगभग 5300 वर्ष पूर्व हुआ था। वे वेद-वेदांग, धनुर्वेद, गन्धर्व-वेद, स्मृति, मीमांसा, न्यायशास्त्र व सन्धि, विग्रह, यान, आसन, द्वैत व आश्रय इन छः भेदों से युक्त राजनीति और अर्थशास्त्र का अध्ययन किया और श्रेष्ठतम पारंगता प्राप्त की । 2 – लोकनायकत्व – अरिष्ट नामक पागल बैल व कैशी नामक दुर्दम्य घोड़े को मारकर वे बचपन से ही गोकुल वासियों के नायक बन गए थे। 3 – संघ राज्य के समर्थक – कंस का वध करके वे पुनः राजतंत्र की परम्परा का परित्याग करके प्रजातन्त्र यानी संघ राज्य की स्थापना की थी। 4 – अर्ध्यदान के पात्र यानी सर्वाधिक प्रतिष्ठित युगपुरुष – राजसूय यज्ञ की समाप्ति पर पितामह भीष्म ने सम्राट युधिष्ठिर से यह कह कर अर्ध्य दिलवाया कि, समस्त पृथ्वी पर मानव जाति में अर्ध्य प्राप्त करने के सर्वोत्तर अधिकारी श्री कृष्ण ही हैं।क्योंकि वेद-वेदांग का ज्ञान, बल- विद्या और नीति का ज्ञान सम्पूर्ण धरती पर इनके बराबर किसी अन्य मनुष्य में नही है। 5 – संयम एवं ब्रह्मचर्य की साधना – विवाह के उपरान्त सामवेद के विधान के अनुसार अपने पत्नी के साथ 12 वर्ष बाद तक ब्रह्मचर्य की साधना की । ऐसे महात्मा के लिए 8-8 पटरानियां व 16000 रानियां और 18000 पुत्रों के पिता होने के अनर्गल प्रलाप आधुनिक विद्वानों ने किया उनके एक पुत्र और एक पत्नी को छोड़कर महाभारत या श्रीमद्भागवत में राधा नाम का कोई दूसरा पात्र नही है। ब्रह्मवैतादि पुराणकारों ने उनके उज्जवल चरित्र को कलंकित करने की कुत्सित चेष्टा की हैं। 6 – ज्ञान के क्षेत्र में श्रीकृष्ण – ज्ञान के क्षेत्र में श्रीकृष्ण अप्रतिम थे। गीता का ज्ञान संसार का सर्वोच्च उदाहरण है। वे शास्त्रों में पारंगत, शस्त्रों में निपुण व राजनीति के बृहस्पति थे। 7 – महान योगी – श्रीकृष्ण महान योगी थे। महाभारत में श्रीकृष्ण ने तीन बार दृष्टि अनुबन्ध का प्रयोग किया। दुर्योधन के समक्ष राजदरबार में, युद्ध के समय अर्जुन को और तीसरी बार कौरवों को सूर्यास्त का भान कराया। 8 – कूटनीतिज्ञ – शुक्राचार्य ने अपने नीतिसार में लिखा है कि,” श्री कृष्ण के समान कुटनीतिज्ञ कोई इस धरती पर दूसरा नही हुआ। 9 – मनोविज्ञानी – कर्ण से हारने के बाद युधिष्ठिर का मनोबल गिर गया था। पुनः शल्य के साथ युद्ध करने की अनुमति देकर उनका मनोबल बढ़ाया। 10 – पाखण्ड का विरोध – धर्म के नाम पर ढोंग फैलाने वालों को श्रीकृष्ण मिथ्याचारी तथा विमूढ़ कहकर भर्त्सना करते हैं। कर्मेन्द्रियणि संयम्य य आस्ते मन्सास्मरन्। इन्द्रीयर्थानिविमूढात्मा मिथ्याचारः स उच्यते।। ( गीता ३/१३ ) कर्म ब्रह्मोदभवम विद्वि ब्रह्माक्षर समुद्र भवम। ( गीता ३/१४ ) अर्थात – कर्म को तू वेद से उत्पन्न जान। और वेद परमात्मा से उतपन्न हुआ है। अतः श्रीकृष्ण वेद को ही सर्वोपरि मानते हैं। श्रीकृष्ण भगवान क्यों? सम्पूर्ण ऐश्वर्य, धर्म, यश, श्री, ज्ञान, और वैराग्य इन छः का नाम ‘भग’ है। जिसके पास इनमें से एक वान भी हो वह भगवान कहलाता है। इसीलिए हम श्रीकृष्ण जैसे महापुरुषों को भगवान कहा जाता है। (ईश्वर के पास ये सभी गुण है इसीलिए ईश्वर भी भगवान है। किन्तु भगवान ईश्वर नहीं है। श्रीकृष्ण स्वयं कहते है कि मैं ईश्वर नही हूँ। महाभारत में वे कहते है कि, मैं यथासाध्य मनुष्योचित प्रयत्न कर सकता हूँ, किन्तु देव ( ईश्वर ) के कार्यो में मेरा कोई वश नहीं इस प्रकार यह स्पस्ट है कि श्रीकृष्ण महान योगी,महान राजनीतिज्ञ, महान कूटनीतिज्ञ, महान योद्धा, महान विद्वान तथा एक आप्त पुरुष थे यतो धर्मस्य ततो जय: शीतला शंकर विजय मिश्र

“ये जो राजनीति करते हैं वो मेरे और सुभाष चंद्र बोस के आदर्श सब धर्म को एकसाथ करने के मुताबिक नहीं है” – चंद्र कुमार बोस ने इस्तीफे पर कहा

“ये जो राजनीति करते हैं वो मेरे और सुभाष चंद्र बोस के आदर्श सब धर्म को एकसाथ करने के मुताबिक नहीं है” – चंद्र कुमार बोस ने इस्तीफे पर कहा

Lord Hanuman : महाबली हनुमान को मनाने के लिए मंगलवार की पूजा में करें ये सरल उपाय

कलयुग में हनुमान जी (Lord Hanuman) की उपासना अत्यंत ही कल्याणकारी मानी गई है. पवनपुत्र हनुमान जी उन सात चिरंजीवी में से एक हैं, जो हर युग में अपने भक्तों का कल्याण करने के लिए पृथ्वी पर मौजूद रहते हैं. एकादश रुद्र के रूप में पूजे जाने वाले श्री हनुमान जी को शिव (Lord Shiva) पुराण में शम्भु, रुद्राक्ष महादेवात्मज, रुद्रावतार, कपीश्वर आदि नामों से संबोधित किया गया है. संकटमोचक हनुमान जी की साधना के लिए मंगलवार (Tuesday) का दिन अत्यंत ही शुभ और मंगलकारी माना गया है. आइए जानते हैं रामदूत कहलाने वाले बजरंगी की पूजा का महाउपाय (Lord Hanuman worship Tips in Hindi) . हनुमान चालीसा का करें सात बार पाठ सनातन परंपरा में श्री हनुमान जी की साधना, उनकी सेवा और भक्ति सभी मनोकामनाओं को पूरा करने वाली मानी गई है. हनुमत साधना सभी संकटों को दूर करने वाली है. यदि आप जीवन से जुड़े किसी कष्ट से जूझ रहे हैं या फिर आपको किसी लक्ष्य या लाभ की प्राप्ति की कामना है तो आप मंगलवार के दिन पूरे श्रद्धा एवं भाव के साथ श्री हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) का सात बार पाठ करें. श्री हनुमान जी की महिमा का गुणगान करने वाली इस चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति के सभी भय, रोग और शोक दूर होते हैं और उसे सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है. बड़े संकट से बचाता है बजरंग बाण का पाठ मंगलवार के दिन श्री हनुमान को प्रसन्न करने के लिए कई प्रकार के उपाय बताए गये हैं, लेकिन यदि आप किसी बड़े संकट में फंसे हुए हैं या फिर आपको किसी ज्ञात-अज्ञात शत्रु से हर समय खतरा बना रहता है या फिर आपके घर में कलह का प्रवेश हो गया है और आप उसे दूर करना चाहते हैं तो आपको इन सभी परेशानियों से उबरने के लिए न सिर्फ मंगलवार को बल्कि प्रतिदिन भक्ति भाव से बजरंग बाण (Bajrang Baan) का पाठ करना चाहिए, लेकिन ध्यान रहे कि बजरंग बाण का पाठ महिलाओं को नहीं करना चाहिए. बजरंग बाण का पाठ चमत्कारिक रूप से बड़ी से बड़ी बाधा को दूर कर मनोकामनाओं को पूरा करने वाला है. श्री हनुमान जी की पूजा में बजरंग बाण का पाठ करने से शिक्षा, व्यवसाय, कॅरिअर आदि में आ रही सभी बाधाएं दूर होती हैं. सुंदरकांड के पाठ से संवरेगा भाग्य मान्यता है कि जिस जगह पर श्री रामचरित मानस (Ramcharitmanas) का पाठ होता है, वहां पर श्री हनुमान जी अप्रत्यक्ष रूप से विराजमान रहते हैं. ऐसे में मंगलवार के दिन पूरे श्रद्धा एवं विश्वास के साथ मुक्त कंठ से यदि कोई व्यक्ति सुंदरकांड (Sunder Kand) का पाठ करता है तो उस पर श्री हनुमान जी की कृपा अवश्य बरसती है. मंगलवार के दिन सुंदरकांड का पाठ करने के लिए तन एवं मन से पवित्र होकर सबसे पहले विधि-विधान से हनुमान जी की पूजा करें और उसके बाद आप अपनी मनोकामना के अनुसार श्री रामचरित मानस की चौपाई का संपुट बनाकर सुंदरकांड का पाठ करें. सुंदरकांड का भक्ति भाव के साथ पाठ करने पर बजरंगबली की कृपा बहुत ही जल्द प्राप्त हो जाती है. जो लोग नियमित रूप से सुंदरकांड का पाठ करते हैं, उन्हें कभी भी रोग-शोक नहीं सताता है और उन्हें सभी प्रकार के सुखाों की प्राप्ति होती है. सुंदरकांड का पाठ जीवन में सभी प्रकार की सफलता दिलाने वाला है. (यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)

Maha Shivratri 2022 : साल 2022 में कब है महाशिवरात्रि, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

महाशिवरात्रि (Maha Shivratri 2022) हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है. ये पर्व भगवान शिव की आराधना करके मनाया जाता है. हिंदू कैलेंडर के अनुसार हर साल फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को महाशिवरात्रि (Maha Shivratri) मनाई जाती है. इस साल महाशिवरात्रि 1 मार्च को मनाई जाएगी. हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार ऐसा माना जाता है कि महाशिवरात्रि पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था. महाशिवरात्रि के खास मौके पर भक्त भगवान शिव (Lord Shiv) को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखते हैं. माता पार्वती की तरह मनचाहा वर पाने के लिए लड़कियां व्रत रखती हैं और सभी रीति-रिवाजों का पालन करते हुए पूजा करती हैं. ये भी माना जाता है कि इस दिन व्रत करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है. इसके अलावा ये भी माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से जीवन के सभी कष्टों और बाधाओं से मुक्ति मिलती है. इस दिन भगवान शिव के साथ माता पार्वती की भी पूजा की जाती है. आइए जानते हैं महाशिवरात्रि की तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा करने का सही तरीका. शिवरात्रि का शुभ मुहूर्त इस साल महाशिवरात्रि का शुभ दिन मंगलवार, 1 मार्च को सुबह 3.16 बजे से शुरू होगा. चतुर्दशी तिथि बुधवार, 2 मार्च को सुबह 10 बजे समाप्त होगी. महाशिवरात्रि की पूजा चार चरणों में की जाती है. चार चरणों में पूजा के शुभ मुहूर्त हैं. प्रथम चरण पूजा – 1 मार्च शाम 6.21 बजे से रात 9.27 बजे तक दूसरे चरण की पूजा – 1 मार्च रात 9.27 बजे से 12.33 बजे तक तीसरे चरण की पूजा – 2 मार्च को दोपहर 12:33 से 3.39 बजे तक चौथा चरण पूजा – 2 मार्च को सुबह 3:39 बजे से सुबह 6:45 बजे तक शिवरात्रि पूजा विधि फाल्गुन मास की महाशिवरात्रि को साल की सबसे बड़ी शिवरात्रि में से एक माना जाता है. अपने दिन की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करके करें. इसके बाद घर में पूजा स्थल पर जल से भरा कलश स्थापित करें. बाद में कलश के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्तियों को रखें. भगवान शिव और माता पार्वती को अक्षत, पान, सुपारी, रोली, मौली, चंदन, लौंग, इलायची, दूध, दही, शहद, घी, धतूरा, बेलपत्र, कमलगट्टा और फल चढ़ाएं. पूजा करें और अंत में भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें. शिवरात्रि पूजा मंत्र लोग इस दिन महामृत्युंजय और शिव मंत्र का पाठ करते हैं. महामृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् 2. शिव मंत्र – ॐ नमः शिवाय अगर आप सभी अनुष्ठानों के साथ पूजा करते हैं, तो ऐसा माना जाता है कि भगवान आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं.

क्या मठ की अथाह संपत्ति बनी महंत नरेंद्र गिरि की मौत की वजह?

महंत नरेंद्र गिरि (Mahant Narendra Giri) की सोमवार को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी. उनका शव उनके कमरे में फांसी के फंदे से लटका मिला था. उनके कमरे से एक सुसाइड नोट (Suicide Note) भी बरामद हुआ है. वहीं महंत की आत्‍महत्या को लेकर तमाम सवाल उठ रहे हैं. महंत नरेंद्र गिरी की मौत को बाघंबरी गद्दी मठ (Baghambari Math) और निरंजनी अखाड़े (Niranjani Akhara) की अकूत धन-संपदा और वैभव को लेकर भी जोड़ा जा रहा है. बाघंबरी गद्दी मठ और निरंजनी अखाड़े से जुड़े लोग हत्‍या की भी आशंका जता रहे हैं. बाघंबरी गद्दी मठ और निरंजनी अखाड़े की अकूत धन-संपदा (Property Dispute) को लेकर विवादों का रिश्ता पुराना रहा है. मीडिया में आई तमाम रिपोर्ट के मुताबिक, मठ और अखाड़े की सैकड़ों बीघे जमीनें बेचने, सेवादारों और उनके परिवारीजनों के नाम मकान, जमीन खरीदने को लेकर अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि और उनके करीबी शिष्य आनंद गिरि के बीच विवाद लंबे समय से रहा है. मंहत नरेंद्र गिरि के अधीन संपत्तियां: बाघंबरी मठ: प्रयागराज के अल्लापुर इलाके में बाघंबरी गद्दी और मठ है, जो करीब 5 से 6 बीघे जमीन में है. यहां निरंजनी अखाड़े के नाम एक स्कूल और गौशाला भी है. दारागंज में भी अखाड़े की जमीन है. प्रयागराज में हनुमान मंदिर जिसे संगम तट पर लेटे हुए हनुमान जी के नाम से जाना जाता है, वो भी इसी बाघंबरी मठ का ही मंदिर है. जहां प्रयागराज और संगम आने वाले सभी श्रद्धालु मत्था जरूर टेकते हैं. मांडा (प्रयागराज) में 100 बीघा और मिर्जापुर के महुआरी में भी 400 बीघे से ज्यादा की जमीन बाघंबरी मठ के नाम है. मिर्जापुर के नैडी में 70 और सिगड़ा में 70 बीघा जमीन अखाड़े की है. प्रयागराज और आसपास के इलाकों में निरंजनी अखाड़े के मठ, मंदिर और जमीन की कीमत 300 करोड़ से ज्यादा की है, जबकि हरिद्वार और दूसरे राज्यों में संपत्ति की कीमत जोड़े तो वो हजार करोड़ के पार है. निरंजनी अखाड़े की कुंभ नगरी उज्जैन और ओंकारेश्वर में 250 बीघा जमीन, आधा दर्जन मठ और दर्जनभर आश्रम हैं. कुंभ नगरी नासिक में 100 बीघा से अधिक जमीन, दर्जनभर आश्रम और मंदिर हैं. बड़ोदरा, जयपुर, माउंटआबू में भी करीब 125 बीघा जमीन, दर्जन भर मंदिर और आश्रम हैं. हरिद्वार स्थित मुख्यालय के अधीन दर्जनभर मठ-मंदिर हैं. नोएडा में मंदिर और जमीन है तो वहीं वाराणसी में मंदिर और आश्रम के साथ करोड़ों की जमीन है.

Chant Mantra For Life Problems : रोजाना कर लें इन तीन मंत्रों का जाप, कुछ ही दिनों में दूर होंगी सभी परेशानियां

Chant mantra For Life Problems ग्रह-नक्षत्र में बदलाव से व्यक्ति के जीवन में भी अनुकूल और प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है जिससे व्यक्ति कभी सुख तो कभी दुःख में रहता है। नई दिल्ली। Chant mantra For Life Problems: हर कोई अपने जीवन में सुख-शांति और समृद्धि चाहता है। इसके लिए वह कई प्रकार के यत्न भी करते हैं, लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिलती है। दरअसल, भौतिक संसार में लोगों की इच्छाएं अनेक हैं, जिनकी पूर्ति होना संभव नहीं है। इसके साथ ही ग्रह-नक्षत्र में बदलाव से व्यक्ति के जीवन में भी अनुकूल और प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जिससे व्यक्ति कभी सुख तो कभी दुःख में रहता है। अगर सुख मिले तो व्यक्ति खुश रहता है। वहीं, अगर दुःख मिले तो व्यक्ति निराश और हताश हो जाता है। ऐसे में आज हम आपको पुराणों में निहित उन वैदिक मंत्रो के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनके जप से आप सभी बाधाओं से मुक्ति पा सकते हैं। साथ ही आपके घर में सुख शांति और समृद्धि भी आएगी। आइए जानते हैं। शत्रु पर विजय के लिए इस मंत्र का जाप करें ॐ पूर्वकपिमुखाय पच्चमुख हनुमते टं टं टं टं टं सकल शत्रु सहंरणाय स्वाहा। इस मंत्र का रोजाना स्नान के बाद 11 बार जाप करें। आप चाहे तो शाम में भी इस मंत्र का जाप कर सकते हैं। समस्त प्रकार की बाधा से मुक्ति पाने के लिए इस मंत्र का जाप करें ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्‌॥ वेदों में बताया गया है कि इस मंत्र के जाप से व्यक्ति को सर्प दोष से भी मुक्ति मिलती है। साथ ही समस्त प्रकार के पाप, दु:ख, भय एवं शोक से भी निजात मिलता है। स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए इस मंत्र का जाप करें ॐ भूर् भुवः स्वः तत् सवितुर्वरेण्यं। भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥ गायत्री मंत्र के जाप से नव जीवन संचार की ऊर्जा मिलती है। साथ ही समस्त प्रकार की मानसिक चिंताओं से मुक्ति के साथ स्मरण शक्ति बढ़ाने और जीवन में नई ऊर्जा संचरण के लिए गायत्री मंत्र का जाप सर्वश्रेष्ठ बताया गया है। ऐसे में रोजाना स्नान-ध्यान के बाद गायत्री मंत्र का जाप जरूर करें।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी कब है, कैसे करें सरल पूजन, प्रामाणिक विधि

हर वर्ष भाद्रपद की कृष्ण अष्टमी को श्रीकृष्‍ण जन्माष्टमी पर्व मनाया जाता हैं। इस बार 30 अगस्त 2021, सोमवार को यह त्योहार मनाया जाएगा। हम सभी भगवान श्रीकृष्ण को मनमोहन, केशव, श्याम, गोपाल, कान्हा, श्रीकृष्णा, घनश्याम, बाल मुकुंद, गोपी मनोहर, गोविंद, मुरारी, मुरलीधर जाने कितने सुहाने नामों से पुकारते हैं। यह खूबसूरत देव दिल के बेहद करीब लगते हैं। इनकी पूजा का ढंग भी उनकी तरह ही निराला है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म आधी रात को हुआ था और व्रत हमेशा उदया तिथि में रखना ही उत्तम माना जाता है। इसलिए श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 30 अगस्त को मनाई जाएगी। भगवान कृष्ण के पूजन के लिए 30 अगस्त की रात्रि 11.59 मिनट से देर रात्रि 12.44 मिनट तक रहेगा। यानी कुल अवधि 45 मिनट रहेगी। पंचांग के अनुसार, भाद्रपद कृष्ण अष्टमी 29 अगस्त, रविवार को रात्रि 11.25 मिनट से शुरू होगी और सोमवार, 30 अगस्त को देर रात्रि 1.59 मिनट पर यह तिथि समाप्त होगी। आइए अब जानें इस जन्माष्टमी पर कैसे करें श्रीकृष्ण का पूजन… 1. चौकी पर लाल कपड़ा बिछा लीजिए। 2. भगवान् कृष्ण की मूर्ति चौकी पर एक पात्र में रखिए। 3. अब दीपक जलाएं और साथ ही धूपबत्ती भी जला लीजिए। 4. भगवान् कृष्ण से प्रार्थना करें कि, ‘हे भगवान् कृष्ण ! कृपया पधारिए और पूजा ग्रहण कीजिए। 5. श्री कृष्ण को पंचामृत से स्नान कराएं। 6. फिर गंगाजल से स्नान कराएं। 7. अब श्री कृष्ण को वस्त्र पहनाएं और श्रृंगार कीजिए। 8. भगवान् कृष्ण को दीप दिखाएं। 9. इसके बाद धूप दिखाएं। 10. अष्टगंध चन्दन या रोली का तिलक लगाएं और साथ ही अक्षत (चावल) भी तिलक पर लगाएं। 11. माखन मिश्री और अन्य भोग सामग्री अर्पण कीजिए और तुलसी का पत्ता विशेष रूप से अर्पण कीजिए. साथ ही पीने के लिए गंगाजल रखें। 12. अब श्री कृष्ण का इस प्रकार ध्यान कीजिए : श्री कृष्ण बच्चे के रूप में पीपल के पत्ते पर लेटे हैं। 13. उनके शरीर में अनंत ब्रह्माण्ड हैं और वे अंगूठा चूस रहे हैं। 14. इसके साथ ही श्री कृष्ण के नाम का अर्थ सहित बार बार चिंतन कीजिए। 15. कृष् का अर्थ है आकर्षित करना और ण का अर्थ है परमानंद या पूर्ण मोक्ष। 16. इस प्रकार कृष्ण का अर्थ है, वह जो परमानंद या पूर्ण मोक्ष की ओर आकर्षित करता है, वही कृष्ण है। 17. मैं उन श्री कृष्ण को प्रणाम करता/करती हूं। 18. वे मुझे अपने चरणों में अनन्य भक्ति प्रदान करें। 19. विसर्जन के लिए हाथ में फूल और चावल लेकर चौकी पर छोड़ें और कहें : हे भगवान् कृष्ण! पूजा में पधारने के लिए धन्यवाद। 20. कृपया मेरी पूजा और जप ग्रहण कीजिए और पुनः अपने दिव्य धाम को पधारिए।

हर संकट की काट हैं ये शक्तिशाली मंत्र, प्रतिदिन जाप करने से घर में आएगी खुशहाली

नई दिल्ली। ‘जहां दो बर्तन होंगे वहां आवाज तो आएगी ही’ ये कहावत ​तो आप सब ने सुनी होगी। इस कहावत का मतलब है कि एक छत के निचे जब दो लोग रहेंगे तो थोड़ी नोंक झोंक तो होगी ही, लेकिन कभी-कभी ये छोटे मोटे झगड़े बड़े तनाव का कारण बन जाते हैं जिससे रिश्ता टूटने तक की नौबत आ जाती है। लड़ाई-झगड़े ​हर घर में ​होते रहते हैं, लेकिन अधिकतर घरों में देखने को मिलता है कि अक्सर घर के सदस्यों में मतभेद होते रहते हैं जिससे रिश्ते टूटने की कगार पर आ जाते हैं। अगर आप अपने घर में होनें वाले रोज रोज के झगड़ों से परेशान हैं तो इसका उपाय भी हमारे हिंदू ग्रंथों में दिया गया है। हिंदू पुराणों के अनुसार हमारे प्राचीन ग्रंथों में हर समस्या का हल दिया हुआ है। अलग-अलग तरह के मंत्रों का जाप कर के आप अपनी ​कई तरह की मुश्किलों का हल निकाल सकते हैं। घर में लड़ाई झगड़ों की ऐसी हालतों में घर का कोई एक पक्ष भी अगर इन मंत्रों का जाप करें तो घर में शां​ति का माहौल बन स​कता है। हिंदू धर्म में इसलिए किया जाता है भगवान की पूजा में तांबे के बर्तन का इस्तेमाल घर में शांति के लिए मंत्र मंत्र: धां धी धूं धूर्जटे पत्नी वां वीं वूं वागधीश्वरी। क्रां क्रीं क्रूं कालिका देवी, शां शीं शूं में शुभं कुरू। विधि: इस मंत्र का जाप करनें के लिए इच्छुक व्यक्ति को काली माता की मूर्ति अथवा चित्र पर पुष्प माला अर्पण कर के और दीप जलाकर देवी मां का मन में ध्यान करना चाहिए। इस मंत्र का जाप लगातार 108 बार और 28 से 43 दिनों तक करने से घर में शांति का वास होता है। शादी में आ रही अड़चनों को दूर करने का मंत्र मंत्र: हे गौरी शंकराद्वांगि यथा त्व शंकरप्रिया। तथा मां कुरू कल्याणि कांतकांता सुदुर्लभाम्। विधि: इस मंत्र का जाप लड़का या लड़की की शादी में आ रही रूकावटों को दूर करने के लिए ​किया जाता है। इसके लिए सुबह प्रात: स्नान करने के बाद भगवती पार्वती के चित्र के सामने पुष्प माला अर्पण कर के और दीप जलाकर लड़की या लड़के को 40 दिनों तक लगातार 22 माला का जाप करना चाहिए। हर सोमवार अपनी राशि के अनुसार शिव को चढ़ाएं यह सामग्री, मिलेगी मनचाही खुशियां भयनाशक मंत्र मंत्र: ओम ऐं हरीं हनुमते रामदूताय नम: विधि: इस मंत्र का जाप भय को भगाने या लगातार आ रहे डरावने सपनों को दूर रखने के लिए किया जाता है। इसके लिए हनुमान जी के किसी भी बलशाली चित्र के सामने एकांत स्थान पर बैठ कर 108 बार इस मंत्र का जाप करें। इससे आपके अंदर आत्मविश्वास आएगा।

क्यों करना चाहिए सुंदरकांड का पाठ, जानें इसका सही तरीका और महत्व

— जो भी व्यक्ति नियमित अंतराल में घर पर सुंदरकांड का पाठ करता है उसे बजरंगबली का आशीर्वाद प्राप्त होता है. — मान्यता है कि सुंदरकांड (Sundarkand) का पाठ करने से व्यक्ति को जीवन में कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं. हनुमान जी (Hanuman Ji) अपने भक्तों पर आने वाले तमाम तरह के कष्टों (Pains) और परेशानियों (Problems) को दूर करते हैं. ऐसी मान्यता है कि भगवान हनुमान (Lord Hanuman) बहुत जल्द प्रसन्न होने वाले देवता हैं. उनकी पूजा पाठ में ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं होती. हिंदू धर्म में सुंदरकांड पाठ का विशेष महत्व होता है. सुंदरकांठ पाठ में भगवान हनुमान के बारे में विस्तार से बताया गया है. तुलसीदास द्वारा रचित सुंदरकांड सबसे ज्यादा लोकप्रिय और महत्वपूर्ण माना गया है. मान्यताओं के अनुसार जो भी व्यक्ति नियमित अंतराल में घर पर सुंदरकांड का पाठ करता है उसे बजरंगबली का आशीर्वाद प्राप्त होता है. आइए जानते हैं सुंदरकांड के पाठ का इतना महत्व क्यों हैं और इसको करने की क्या है पूजा विधि… सुंदरकांड का महत्व हनुमान जी जल्द प्रसन्न होने वाले देवता हैं. वह बल, बुद्धि और कृपा प्रदान करने वाले माने जाते हैं. मान्यता है कि सुंदरकांड का पाठ करने से व्यक्ति को जीवन में कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं. जो भी जातक प्रतिदिन सुंदरकांड का पाठ करता है उसकी एकाग्रता और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है. सुंदरकांड का पाठ करने से व्यक्ति के अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. ऐसे में उसके द्वारा किए जाने वाले किसी भी काम का परिणाम हमेशा सकारात्मक ही मिलता है. इसलिए हर घर में सुंदरकांड का पाठ अवश्य करने को बताया गया है. सुंदरकांड का नियमित पाठ करने से व्यक्ति के अंदर से नकारात्मक शक्तियां दूर चली जाती है. जानें सुंदरकांड पाठ करने का सही तरीका -अगर आप विशेष फल की प्राप्ति के लिए सुंदरकांड का पाठ कर रहे हैं तो इसकी शुरुआत मंगलवार या शनिवार के दिन से ही करें. -सुंदरकांड का पाठ शुरू करने से पहले स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए. -सुंदरकांड का पाठ करने से पहले पूजा स्थल पर रखी हनुमानजी की मूर्ति की विशेष रूप से पूजा करनी चाहिए. साथ ही सीता-राम की मूर्तियां भी हनुमान जी पास जरूर रखें. -हनुमानजी की पूजा फल-फूल, मिठाई और सिंदूर से करें. -सुंदरकांड का पाठ शुरू करने से पहले गणेश वंदना जरूर करें. -सुंदरकांड करते समय तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस की भी पूजा करनी चाहिए.

महाकाल मंदिर में खुदाई में निकला शिवलिंग

उज्जैन. उज्जैन के महाकाल मंदिर के विस्तारीकरण के लिए चल रही खुदाई के दौरान मंगलवार को शिवलिंग निकला है. फिलहाल प्रशासन ने इस शिवलिंग (Shivling) को चादर से ढांक दिया है. आगे की खुदाई पुरातत्व विभाग के विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में शुरू की जाएगी. उसके बाद शिवलिंग बाहर निकाला जाएगा. महाकाल मंदिर कैंपस के विस्तारीकरण के लिए एक साल से चल रही खुदाई में 11 वीं शताब्दी के 1000 साल पुराने परमार कालीन मंदिर का ढांचा सामने आया था. उसके बाद भोपाल से आयी पुरातत्व विभाग की टीम की देख रेख में खुदाई चल रही है. काम आगे बढ़ा तो उसमें परमार कालीन वास्तुकला का बेहद खूबसूरत मंदिर निकला था. शिवलिंग निकला आगे की तरफ चल रही खुदाई के दौरान एक बड़े शिवलिंग का भाग भूगर्भ में दिखाई दिया. धीरे-धीरे खोदा गया तो शिवलिंग की पूरी जिलहरी बाहर आ गई. इसकी सूचना मंदिर प्रशासन के अधिकारियों को मिली तो उन्होंने खुदाई वाले स्थान पर पहुंच कर फिलहाल शिवलिंग को चादर से ढांक दिया. इसकी जानकारी पुरातत्व विभाग के शोध अधिकारी दुर्गेंद्र सिंह जोधा को दी गयी है. इस स्थान पर अब आगे पुरातत्व विभाग के विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में खुदाई कर शिवलिंग निकाला जाएगा. लगातार मिल रहे हैं अवशेष पुरातत्व अधिकारी रमेश यादव ने बताया कि आज टीम के सदस्य उज्जैन पहुचंगे उसके बाद ही कुछ कहा जा सकेगा. 30 मई को महाकाल मंदिर के आगे के भाग में खुदाई के दौरान माता की प्रतिमा और स्थापत्य खंड सहित कई पुरातत्व अवशेष मिले थे. उन पर पुरातत्व विभाग का शोध जारी है. महाकाल मंदिर विस्तारीकरण खुदाई में निकले 11 वीं शताब्दी के 1000 वर्ष पुराने परमार कालीन मंदिर का ढांचा पूरा साफ़ साफ बाहर दिखाई देने लगा था. माता की प्रतिमा और स्थापत्य खंड मिलने की जानकारी जैसे ही संस्कृति विभाग को लगी थी उन्होंने तुरंत पुरातत्व विभाग भोपाल की एक चार सस्दय टीम को उज्जैन महाकाल मंदिर में अवलोकन के लिए भेजा था. टीम ने बारीकी से मंदिर के उत्तर भाग और दक्षिण भाग का निरक्षण किया. टीम को लीड कर रहे पुरातत्वीय अधिकारी डॉ रमेश यादव ने बताया था कि ग्यारहवीं-बारहवीं शताब्दी का मंदिर नीचे दबा हुआ है जो उत्तर वाले भाग में है. दक्षिण की तरफ चार मीटर नीचे एक दीवार मिली है जो करीब करीब 2100 साल पुरानी हो सकती है

Gayatri Mantra : गायत्री मंत्र का जाप कब और कैसे करें, जानिए अर्थ और आश्चर्यजनक फायदे

भोपाल। मंत्र जप एक ऐसा उपाय है, जिससे सभी समस्याएं दूर हो सकती हैं। शास्त्रों में मंत्रों को बहुत शक्तिशाली और चमत्कारी बताया गया है। सबसे ज्यादा प्रभावी मंत्रों में से एक मंत्र है गायत्री मंत्र। इसके जप से बहुत जल्दी शुभ फल प्राप्त हो सकते हैं। गायत्री मंत्र जप का समय : गायत्री मंत्र जप के लिए 3 समय बताए गए हैं, जप के समय को संध्याकाल भी कहा जाता है। * गायत्री मंत्र के जप का पहला समय है सुबह का। सूर्योदय से थोड़ी देर पहले मंत्र जप शुरू किया जाना चाहिए। जप सूर्योदय के बाद तक करना चाहिए। * मंत्र जप के लिए दूसरा समय है दोपहर का। दोपहर में भी इस मंत्र का जप किया जाता है। * इसके बाद तीसरा समय है शाम को सूर्यास्त से कुछ देर पहले। सूर्यास्त से पहले मंत्र जप शुरू करके सूर्यास्त के कुछ देर बाद तक जप करना चाहिए। यदि संध्याकाल के अतिरिक्त गायत्री मंत्र का जप करना हो तो मौन रहकर या मानसिक रूप से करना चाहिए। मंत्र जप अधिक तेज आवाज में नहीं करना चाहिए। पवित्र और चमत्कारी गायत्री मंत्र : ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो न: प्रचोदयात्।। गायत्री मंत्र का अर्थ : – सृष्टिकर्ता प्रकाशमान परामात्मा के तेज का हम ध्यान करते हैं, परमात्मा का वह तेज हमारी बुद्धि को सद्मार्ग की ओर चलने के लिए प्रेरित करें। गायत्री मंत्र जप की विधि : * इस मंत्र के जप करने के लिए रुद्राक्ष की माला का प्रयोग करना श्रेष्ठ होता है। * जप से पहले स्नान आदि कर्मों से खुद को पवित्र कर लेना चाहिए। * मंत्र जप की संख्या कम से कम 108 होनी चाहिए। * घर के मंदिर में या किसी पवित्र स्थान पर गायत्री माता का ध्यान करते हुए मंत्र का जप करना चाहिए। गायत्री मंत्र जप के 8 फायदे * उत्साह एवं सकारात्मकता बढ़ती है। * धर्म और सेवा कार्यों में मन लगता है। * पूर्वाभास होने लगता है। * आशीर्वाद देने की शक्ति बढ़ती है। * स्वप्न सिद्धि प्राप्त होती है। * क्रोध शांत होता है। * त्वचा में चमक आती है। * बुराइयों से मन दूर होता है।

धन के देवता कुबेर देव की 10 खास बातें

पुलस्त्य पुलस्ति ऋषि को ब्रह्मा के मानस पुत्रों में से एक माना जाता है। कर्दम प्रजापति की कन्या हविर्भुवा से इनका विवाह हुआ था। कहते हैं कि ये कनखनल के राजा दक्ष के दामाद और भगवान शंकर के साढू थे। इनकी दूसरी पत्नी इडविला थी। पुलस्त्य और इडविला के पुत्र विश्रवा थे और विश्रवा के पुत्र रावण और कुबेर थे। विश्रवा की पहली पत्नी भारद्वाज की पुत्री देवांगना थी जिसका पुत्र कुबेर था। विश्रवा की दूसरी पत्नी दैत्यराज सुमाली की पुत्री कैकसी थी जिसकी संतानें रावण, कुंभकर्ण, विभीषण और सूर्पणखा थीं। खर, दूषण, कुम्भिनी, अहिरावण और कुबेर रावण के सगे भाई बहन नहीं थे। आओ जानते हैं धन के देवता कुबेर के बारे में 10 खास बातें। 1. हिन्दू धर्म में कुबेर को धन का देवता माना गया है। धनतेरस और दीपावली पर माता लक्ष्मी और श्रीगणेश के साथ इनकी भी पूजा होती है। कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को इनकी विशेष पूजा की जाती है। 2. कुबेरदेव को यक्षों का राजा माना जाता है और उनके राज्य की राजधानी अलकापुरी है। कैलाश के समीप इनकी अलकापुरी है। श्वेतवर्ण, तुन्दिल शरीर, अष्टदन्त एवं तीन चरणों वाले, गदाधारी कुबेर अपनी सत्तर योजन विस्तीर्ण वैश्रवणी सभा में विराजते हैं। 3. कुबेर को यक्ष के अतिरिक्त राक्षस भी कहा गया है, क्योंकि वे रावण के भाई हैं। यक्ष के रूप में वे खजानों के रक्षक है पुराने मंदिरों के वाह्य भागों में कुबेर की मूर्तियां पाए जाने का रहस्य भी यही है कि वे मंदिरों के धन के रक्षक हैं और राक्षस होने के नाते वे धन का भोग भी करते हैं। 4. दीपावली की रात्रि को यक्ष अपने राजा कुबेर के साथ हास-विलास में बिताते व अपनी यक्षिणियों के साथ आमोद-प्रमोद करते थे। सभ्यता के विकास के साथ यह त्योहार मानवीय हो गया और धन के देवता कुबेर की बजाय धन की देवी लक्ष्मी की इस अवसर पर पूजा होने लगी, क्योंकि कुबेर जी की मान्यता सिर्फ यक्ष जातियों में थी पर लक्ष्मीजी की देव तथा मानव जातियों में। 5. कुबेरे देवता देवताओं के कोषाध्यक्ष थे। सैन्य और राज्य खर्च वे ही संचालित करते थे। यक्षों के राजा कुबेर उत्तर के दिक्पाल तथा शिव के भक्त हैं। भगवान शंकर ने इन्हें अपना नित्य सखा स्वीकार किया है। देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर को पूजने से भी पैसों से जुड़ी तमाम समस्याएं दूर रहती हैं। 6. कुबेर पहले श्रीलंका के राजा था परंतु रावण ने उनसे लंका को हथिया लिया। कुबेरदेव के पास एक महत्वपूर्ण पुष्पक विमान और चंद्रकांता मणि भी थी जिसे भी रावण ने हथिया लिया था। 7. कुबेर के संबंध में लोकमानस में एक जनश्रुति प्रचलित है। कहा जाता है कि पूर्वजन्म में कुबेर चोर थे-चोर भी ऐसे कि देव मंदिरों में चोरी करने से भी बाज न आते थे। एक बार चोरी करने के लिए एक शिव मंदिर में घुसे। तब मंदिरों में बहुत माल-खजाना रहता था। उसे ढूंढने-पाने के लिए कुबेर ने दीपक जलाया लेकिन हवा के झोंके से दीपक बुझ गया। कुबेर ने फिर दीपक जलाया, फिर वह बुझ गया। जब यह क्रम कई बार चला, तो भोले-भाले और औघड़दानी शंकर ने इसे अपनी दीपाराधना समझ लिया और प्रसन्न होकर अगले जन्म में कुबेर को धनपति होने का आशीष दे डाला। बाद में भगवान ब्रह्मा ने इन्हें समस्त सम्पत्ति का स्वामी बनाया। यह भी कहा जाता है कि यह कुबड़े और एक आंख वाले थे परतुं भगवती की अराधना से धनपति और निधियों के स्वामी बन गए थे। 8. कुबरे की शादी मूर दानव की पुत्री से हुई थी जिनके दो पुत्र नलकूबेर और मणिग्रीव थे। कुबेर की पुत्री का नाम मीनाक्षी था। अप्सरा रंभा नलकुबेर की पत्नी थी जिस पर रावण ने बुरी नजर डाली थी। यह बात जब नलकुबेर को पता चली तो उसने रावण को शाप दिया कि आज के बाद रावण बिना किसी स्त्री की इच्छा के उसको स्पर्श नहीं कर पाएगा और यदि करेगा तो उसका मस्तक सौ टुकड़ों में बंट जाएगा। नलकूबेर और मणिग्रीव भगवान श्री कृष्णचन्द्र द्वारा नारद जी के शाप से मुक्त होकर कुबेर के साथ रहते थे। 9. कुबेर मंत्र : ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥ कुबेर धन प्राप्ति मंत्र : ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः॥ कुबेर अष्टलक्ष्मी मंत्र : ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं कुबेराय अष्ट-लक्ष्मी मम गृहे धनं पुरय पुरय नमः॥ 10. घर की उत्‍तर दिशा को कुबेर देव की दिशा माना जाता है। अत: इस दिशा की दशा सही रखने से घर में सुख, शांति और धन धान्य बना रहता है।

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

casino online

clickbet88

login kudahoki88

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet