LATEST NEWS

Gold Silver Rupee: सोना 7 हफ्ते के हाई पर, चांदी 2 लाख के करीब; रुपया 90.56 के नए निचले स्तर पर फिसला

Gold Silver Rupee: Gold at 7-week high, silver nears 2 lakh; Rupee slips to new low of 90.56 घरेलू वायदा बाजार में शुक्रवार के शुरुआती कारोबार में सोना साढ़े सात हफ्तों के उच्च स्तर के करीब बना रहा। एमसीएक्स पर फरवरी सोने का वायदा 0.02% की हल्की बढ़त के साथ ₹1,32,496 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। यह बढ़त अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा 25 आधार अंकों की ब्याज दर कटौती के बाद बने सकारात्मक रुझान का विस्तार है। इसके उलट, मार्च सिल्वर वायदा में रिकॉर्ड स्तरों के पास प्रॉफिट बुकिंग देखने को मिली, और यह 0.54% गिरकर ₹1,97,861 प्रति किलोग्राम पर कारोबार करता दिखा। चांदी हाल ही में ₹2 लाख प्रति किलो के नए रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंची थी। बुलियन में यह उतार-चढ़ाव कमजोर डॉलर इंडेक्स, वैश्विक वित्तीय बाजारों में जारी अस्थिरता और फेड की नीति के बाद निवेशकों की सोने-चांदी में बढ़ती दिलचस्पी के बीच देखने को मिल रहा है।पिछले सत्र में तेज बढ़तवहीं गुरुवार के कारोबार में सोना और चांदी दोनों घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मजबूती के साथ बंद हुए। गोल्ड फरवरी कॉन्ट्रैक्ट 2.06% की बढ़त के साथ ₹1,32,469/10 ग्राम पर सेटल हुआ। सिल्वर मार्च कॉन्ट्रैक्ट 5.41% उछलकर ₹1,98,942 प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ।अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चांदी ने बनाया नया रिकॉर्डफेड की नीतिगत बैठक के बाद मिले संकेतों खासतौर पर 25 आधार अंकों की कटौती से कीमती धातुओं में मजबूत खरीद देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी 65 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंचकर नया रिकॉर्ड बना रही है, जबकि सोना सात सप्ताह की ऊंचाई पर है।रुपये अपने नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचावहीं शुक्रवार सुबह रुपये में भारी कमजोरी देखने को मिली और यह 24 पैसे टूटकर 90.56 के नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता और विदेशी फंड के लगातार बहिर्वाह ने बाजार भावनाओं को कमजोर किया है।कीमती धातुओं की तेजी को लेकर विशेषज्ञों की रायकीमती धातुओं में हालिया तेजी पर टिप्पणी करते हुए पृथ्वी फिनमार्ट कमोडिटी रिसर्च के मनोज कुमार जैन ने कहा कि मजबूत फंडामेंटल्स आने वाले सत्रों में भी सोना और चांदी की कीमतों को सहारा दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि घरेलू बाजारों में रुपये की कमजोरी भी बुलियन को समर्थन प्रदान कर रही है। जैन के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना $4,040 प्रति औंस और चांदी $57.70 प्रति औंस के मुख्य सपोर्ट स्तरों को बनाए रख सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि आज के सत्र में सोना-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। डॉलर इंडेक्स में हलचल, वैश्विक वित्तीय बाजारों की अस्थिरता और महत्वपूर्ण अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों से पहले बाजार दिशा खोजेगा।घरेलू बाजार में सोने के दामदिल्ली22 कैरेट (स्टैंडर्ड गोल्ड): ₹99,168 प्रति 8 ग्राम24 कैरेट (शुद्ध सोना): ₹1,06,784 प्रति 8 ग्राममुंबई22 कैरेट: ₹99,160 प्रति 8 ग्राम24 कैरेट: ₹1,06,720 प्रति 8 ग्राम

Vi ने कंपनी ने AST SpaceMobile से हाथ मिलाया, जाने क्यों खास है ये पार्टनरशिप

मुंबई  भारतीय सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेक्टर में एक और प्लेयर की एंट्री हो रही है. Vi और AST SpaceMobile ने स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का ऐलान किया है. दोनों मोबाइल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने में काम करेंगे. खासकर उस जगहों पर जो अभी भी कनेक्टेड नहीं हैं. AST SpaceMobile ने हाल में स्पेस ब्रॉडबैंड नेटवर्क टेक्नोलॉजी का डेमो दिखाया है.  कंपनी ने स्पेस से एक स्टैंडर्ड मोबाइल फोन इस्तेमाल करते हुए पहली वीडियो और वॉयस कॉल की है. इस सफलता ने असल जीवन में कंपनी के स्पेस बेस्ड सेल्युलर ब्रॉडबैंड नेटवर्क की क्षमता को दिखाया है. इस नेटवर्क को ऐसे डिजाइन किया गया है कि आप अपने स्मार्टफोन से सीधे इसे इस्तेमाल कर सकते हैं.  क्यों खास है ये पार्टनरशिप? AST SpaceMobile की एक प्रमुख खासियत नेटवर्क को सीधे स्मार्टफोन से कनेक्ट करना है. इसके लिए आपको किसी स्पेशल सॉफ्टवेयर, डिवाइस सपोर्ट या अपडेट की जरूरत नहीं पड़ेगी. इस स्पेस बेस्ड सेल्युलर ब्रांडबैंड इकोसिस्टम से Vi की मौजूदा कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने का ऑप्शन मिलेगा.  दोनों कंपनियों के बीच हुए इस समझौते के तहत AST SpaceMobile का काम डेवलपमेंट, मैन्युफैक्चरिंग और सैटेलाइट नेटवर्क को मैनेज करना होगा. वहीं दूसरी तरफ Vi टेरेस्ट्रियल नेटवर्क इंटीग्रेशन, ऑपरेशन स्पेक्ट्रम और भारत में मार्केट एक्सेस का काम संभालेगी.  इस कोलैबोरेशन से भारत दुनिया के स्पेस टेक्नोलॉजी इनोवेशन में पहली लाइन में पहुंच जाएगा. इसके अलावा Vi और AST SpaceMobile साथ मिलकर अलग-अलग सेक्टर के लिए कमर्शियल ऑफरिंग (कस्टमर्स, एंटरप्राइसेस और IoT एप्लिकेशन) प्लान करेंगे.  सैटेलाइट कनेक्टिविटी है अगला पड़ाव  बता दें कि भारत में Starlink लंबे समय से एंट्री की कोशिश में है. कंपनी को हाल में भारत में अपनी सर्विस शुरू करने के लिए जरूरी लाइसेंस मिल गया है. स्टारलिंग के अलावा जियो और एयरटेल भी भारत में सैटेलाइट कम्युनिकेशन लाने के लिए काम कर रहे हैं. जल्द ही हमें स्पेशल के जरिए कनेक्टिविटी मिलने लगेगी, जिससे दूर-दराज के इलाकों में नेटवर्क बेहतर होगा. Jio-Airtel के साथ Starlink का धमाका, बदलेगा भारत का डिजिटल नक्शा अब भारत में भी घर बैठे आसमान से इंटरनेट की सुविधा मिलने वाली है. एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस Starlink को भारत सरकार से लाइसेंस मिल गया है. इस कदम को भारत के डिजिटल डेवलपमेंट में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है. देश के संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने खुद इस बात की जानकारी दी और कहा कि ये भारत के लिए कनेक्टिविटी का अगला फ्रंटियर होगा. अब पहाड़ों, जंगलों और गांवों में भी फास्ट इंटरनेट कनेक्शन मिलना पॉसिबल हो जाएगा. सिंधिया और SpaceX की मीटिंग सिंधिया ने Starlink की कंपनी SpaceX की प्रेसिडेंट और COO ग्विन शॉटवेल से मुलाकात की और दोनों के बीच काफी पॉजिटिव बातचीत हुई. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि भारत की डिजिटल उड़ान को और ऊंचा ले जाने के लिए सैटेलाइट कम्युनिकेशन में सहयोग के कई अवसर हैं. Starlink क्या है? Starlink एक सैटेलाइट-बेस्ड इंटरनेट सर्विस है, जिसे एलन मस्क की कंपनी SpaceX ने शुरू किया है. ये टेक्नोलॉजी लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में घूमने वाले हजारों छोटे सैटेलाइट्स के जरिए फास्ट और कम लेटेंसी वाला इंटरनेट देती है. Starlink धरती से करीब 550 किलोमीटर ऊपर सैटेलाइट्स से इंटरनेट भेजता है. ये पारंपरिक सैटेलाइट सिस्टम से ज्यादा तेज और भरोसेमंद माना जाता है. इसका खास फायदा दूर-दराज के इलाकों को मिलेगा, जहां फाइबर या मोबाइल नेटवर्क पहुंचना मुश्किल होता है. Airtel और Jio भी Starlink के साथ मार्च 2025 में Jio और Airtel ने Starlink के साथ साझेदारी का ऐलान किया था. अब भारत में Starlink को इन्हीं दोनों कंपनियों के जरिए बढ़ाया जाएगा. Jio Starlink का इंस्टॉलेशन, कस्टमर सपोर्ट और एक्टिवेशन भी देखेगा. Starlink का डिवाइस अब Jio और Airtel के स्टोर्स पर मिलने लगेगा. ये सर्विस खासकर स्कूलों, हॉस्पिटल्स, गांवों और बिजनेस के लिए फायदेमंद साबित होगी.  

लगातार बढ़ रही मुंबई में रियल एस्टेट की कीमतें, दुबई को भी पीछे छोड़ा

 मुंबई  मुंबई में प्रॉपर्टी कीमतें अब दुबई से भी 20 फीसदी ज्यादा हो गई हैं, लेकिन भारतीय खरीदार इससे विचलित नहीं हुए हैं.   Wisdom Hatch के अक्षत श्रीवास्तव ने बताया कि मुंबई का बढ़ता हुआ प्रॉपर्टी मार्केट वैश्विक तर्क को क्यों चुनौती देता है और बुनियादी ढांचे की समस्याओं के बावजूद खरीदारों को आकर्षित करता रहता है. अक्षत श्रीवास्तव कहते हैं- “मुंबई का रियल एस्टेट बढ़ता जा रहा है, क्योंकि भारतीय किसी भी कीमत पर खरीदने को तैयार हैं.”  उन्होंने कहा कि भारत का प्रॉपर्टी मार्केट भावनाओं और स्थानीय मांग से प्रेरित है. भले ही दुबई बेहतर मूल्य दे, यहां लोग उसी में निवेश करना पसंद करते हैं जिसे वे समझते हैं.’ कोविड के बाद रियल एस्टेट सेक्टर में आई तेजी उनकी ये टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब भारतीय रियल एस्टेट क्षेत्र COVID के बाद तेजी से आगे बढ़ रहा. नवीनतम 1 फाइनेंस हाउसिंग टोटल रिटर्न इंडेक्स (TRI) के अनुसार, भारत के शीर्ष शहरों में घरों की कीमतें औसतन 48% बढ़ गई हैं. यह इंडेक्स, जो RERA-पंजीकृत लेनदेन आंकड़ों पर आधारित है, दर्शाता है कि आवास बाजार महामारी के बाद से मजबूत रूप से उबर आया है. मुंबई सबसे महंगा मुंबई भारत का सबसे महंगा रियल एस्टेट बनकर उभरा है, जिसकी औसत कीमतें ₹26,975 प्रति वर्ग फुट तक पहुंच गई हैं. एक आंकड़ा जो न केवल अन्य भारतीय शहरों को बल्कि दुबई जैसे अंतरराष्ट्रीय केंद्रों को भी पीछे छोड़ देता है.  शहर की लगातार बुनियादी ढांचे की समस्याओं के बावजूद, प्रॉपर्टी की कीमतें बढ़ रही हैं. श्रीवास्तव इसका कारण सांस्कृतिक मनोविज्ञान और अनौपचारिक वित्तीय प्रथाओं का मिश्रण बताते हैं. वो कहते हैं- ‘यह खरीदारों के लिए सुविधा बढ़ाता है, क्योंकि वे उस काले धन का इस्तेमाल कर सकते हैं. बहुत सारे खरीदार हैं जो किसी भी कीमत पर खरीदने को तैयार हैं”. उन्होंने कहा कि जहां दुबई जैसे प्रॉपर्टी मार्केट पारदर्शी हैं और वैश्विक खरीदारों को आकर्षित करते हैं, वहीं मुंबई का हाउसिंग मार्केट स्थानीय मांग और गहरे विश्वास पर फलता-फूलता है. एक भारतीय सबसे ज्यादा भारत में ही प्रॉपर्टी खरीदना चाहता है. रियल एस्टेट बहुत हद तक स्थानीय है. महंगी प्रॉपर्टी में दुबई रह गया पीछे!  दुबई में महंगे फ्लैट मिलते हैं तो अपनी सोच बदल लीजिए। अपने देश के एक शहर ने महंगी अल्ट्रा-लग्जरी प्रॉपर्टी के मामले में दुबई को पीछे छोड़ दिया है। यही नहीं, इससे मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों भी पीछे रह गए हैं। यह शहर कोई और नहीं बल्कि एनसीआर का गुरुग्राम है। अल्ट्रा-लग्जरी प्रॉपर्टी के मामले में गुरुग्राम काफी आगे निकल गया है। देश में इस समय लग्जरी हाउसिंग प्रॉपर्टी की मांग काफी बढ़ रही है। साल 2024 में काफी लोगों ने करोड़ों रुपये के फ्लैट सहित दूसरे हाउसिंग प्रोजेक्ट खरीदे। ऐसे में देखा जाए तो साल 2024 भारत के लग्जरी रियल एस्टेट बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण वर्ष साबित हुआ है। फाइनेंशियल एक्सप्रेस की एक खबर के मुताबिक सुपर-लग्जरी हाउसिंग प्रोजेक्ट की मांग गुरुग्राम से लेकर मुंबई तक हो रही है। गुरुग्राम निकला आगे लग्जरी रियल एस्टेट कैटेगरी में गुरुग्राम ने मुंबई और दुबई को कड़ी टक्कर दी है। दिसंबर 2024 तक गुरुग्राम का DLF कैमेलियास प्रोजेक्ट भारत की रियल एस्टेट सुर्खियों में सबसे आगे रहा। इस प्रोजेक्ट में कई महंगे-महंगे सौदे हुए। ऐसे में ग्रुरुग्राम ने अल्ट्रा-लक्जरी सेगमेंट में मुंबई और दुबई दोनों को पीछे छोड़ दिया है। ओआरएएम डेवलपमेंट्स के सीएमडी प्रदीप मिश्रा के मुताबिक DLF कैमेलियास में 16,290 वर्ग फुट के पेंटहाउस को एक कारोबारी ने 190 करोड़ में खरीदा। यह कीमत 1.80 लाख रुपये प्रति वर्ग फुट के बराबर है। ऐसे में कैमेलियास भारत के सबसे महंगे हाई-राइज कॉन्डोमिनियम के रूप में सबसे आगे रहा। कहां कितनी कीमत? मुंबई में जुहू को सबसे पॉश इलाका माना जाता है। ओआरएएम डेवलपमेंट्स के मुताबिक यहां प्रॉपर्टी की औसतन कीमत 55 हजार से 60 हजार रुपये प्रति वर्ग फुट है। वहीं मालाबर हिल में यह कीमत 50 हजार से 55 हजार रुपये प्रति वर्ग फुट है। वहीं बात अगर दुबई की करें तो यहां की सिलिकॉन ओएसिस में प्रॉपर्टी की औसत कीमत 40 हजार रुपये प्रति वर्ग फुट है। दुबई में पाम जुमेरह (Palm Jumeirah) काफी चर्चित जगह है। यहां समुद्र के ऊपर कॉलोनी बनी है। यहां पर प्रॉपर्टी की कीमत सबसे ज्यादा है जिसकी शुरुआत करीब एक लाख रुपये प्रति वर्ग फुट जो 10 लाख रुपये प्रति वर्ग फुट तक जाती है। गुरुग्राम कितना आगे? महंगी प्रॉपर्टी के मामले में देखें तो अभी गुरुग्राम दुबई को कड़ी टक्कर दे रहा है। कुछ मामले में तो यह दुबई से भी आगे निकल गया है। वहीं देश में अभी सबसे महंगी प्रॉपर्टी गुरुग्राम में ही बिकी है। जानकारों के मुताबिक गुरुग्राम में प्रॉपर्टी की कीमत आने वाले समय में और तेजी से बढ़ सकती है।

अमेजन भारत में करेगा बड़ा निवेश, अमेजन अपने नेटवर्क का विस्तार और अपग्रेडेशन कर सकेगी, ग्राहकों को मिलेगी बेहतर सुविधा

नई दिल्ली  दिग्गज ई-कॉमर्स अमेजन इंडिया भारत में 2000 करोड़ रुपये से अधिक का बड़ा निवेश करने जा रही है। कंपनी ने गुरुवार को इसकी घोषणा करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य पूरे देश में अपने परिचालन नेटवर्क को और मजबूत बनाना है। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, इस निवेश से अमेजन अपने नेटवर्क का विस्तार और अपग्रेडेशन कर सकेगी, जिससे ग्राहकों को तेज़ और भरोसेमंद सेवा मिलेगी। इसके साथ ही टेक्नोलॉजी और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा और कर्मचारियों तथा साझेदारों की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। कंपनी की मजबूती का इरादा यह घोषणा ऐसे वक्त पर की गई है जब भारत का ई-कॉमर्स सेक्टर तेजी से विकास कर रहा है। भारत में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी, सस्ते स्मार्टफोन, डिजिटल भुगतान के बढ़ते विकल्प, और मध्यम से संपन्न वर्ग की बढ़ती खरीदारी शक्ति के कारण ई-कॉमर्स में तेजी आ रही है। युवाओं की डिजिटल सोच और मोबाइल-फर्स्ट व्यवहार ने इस क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। अमेजन के साथ ही फ्लिपकार्ट, और कई छोटे ऑनलाइन खिलाड़ी देश के ई-कॉमर्स परिदृश्य को बदल रहे हैं। 2030 तक 325 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान अमेजन ने भारत में अपने निवेशों की घोषणा ऐसे समय में की है जब ई-कॉमर्स बाजार 21% की वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ने की संभावना है और 2030 तक इसका आकार 325 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। यह नया निवेश अमेजन के पहले से चल रहे संचालन नेटवर्क के अतिरिक्त होगा, जो देश के हर सेवा योग्य पिन कोड तक डिलीवरी सुनिश्चित करता है। अमेजन की आगे की योजना अमेजन इस निवेश के जरिए नए वेयरहाउस और सप्लाई चेन साइट्स खोलने, साथ ही मौजूदा सॉर्टेशन और डिलीवरी नेटवर्क को अपग्रेड करने की योजना बना रही है। कंपनी का कहना है कि इससे उसकी प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ेगी, सप्लाई की रफ्तार में सुधार होगा और पूरे भारत में संचालन की दक्षता बेहतर होगी। इससे ग्राहकों को तेज़ और भरोसेमंद सेवा प्रदान करना संभव होगा।  

बाजार में छा गया TVS iQube इलेक्ट्रिक स्कूटर, बिक गईं 6 लाख यूनिट, देखते रह गए ओला-एथर

मुंबई  हैदराबाद: स्वदेशी दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी TVS Motor की इलेक्ट्रिक स्कूटर TVS iQube कंपनी का पहला इलेक्ट्रिक उत्पाद है और अब इस स्कूटर ने घरेलू बाजार में 6 लाख थोक बिक्री का आंकड़ा पार कर लिया है. SIAM उद्योग से मिले आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2025 के अंत में इस आंकड़े को छूने में केवल 1,345 यूनिट्स की कमी थी. मई के पहले दो दिनों में यह कमी जल्दी ही पूरी हो गई, जिसमें 27,642 यूनिट्स की बिक्री हुई, जिससे इस स्कूटर की कुल बिक्री 6,26,297 यूनिट्स हो गई है. TVS iQube की बिक्री इस स्कूटर की पहली 1,00,000 यूनिट की बिक्री में तीन साल से थोड़ा ज़्यादा समय लगा, वहीं अगले 1,00,000 स्कूटर – कुल 2,00,000 तक – सिर्फ़ 10 महीनों में ही बिक गए. इसके आगे इस इलेक्ट्रिक स्कूटर ने 3,00,000 यूनिट की थोक बिक्री की उपलब्धि मई 2024 की शुरुआत में ही हासिल कर ली, जो 52 महीने या 4 साल, 4 महीने है. इसके बाद, पिछले 3,00,000 यूनिट को कंपनी ने सिर्फ़ 13 महीनों में पूरा कर लिया और भारत में TVS डीलरों को भेज दिया गया. इससे इस ई-स्कूटर की बढ़ती मांग को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है. जनवरी 2020 में लॉन्च किया गया TVS iQube फुल LED लाइटिंग, कनेक्टेड तकनीक से लैस था और इसे एक बड़ी सीट और बढ़िया स्टोरेज स्पेस के साथ एक पारिवारिक ई-स्कूटर के रूप में पेश किया गया था. आईक्यूब की पहली 1,00,000 यूनिट की बिक्री में 3 साल से थोड़ा ज्यादा समय लगा था। 1,00,000 से 2,00,000 यूनिट तक का सफर सिर्फ 10 महीने में पूरा क लिया था। जबकि, 3,00,000 यूनिट थोक बिक्री का मील का पत्थर मई 2024 की शुरुआत में पार किया गया, जो 53 महीने या चार साल और चार महीने है। पिछले 3,00,000 यूनिट्स को सिर्फ़ 12 महीनों में पूरे भारत में TVS डीलरों को भेजा गया है, जो ई-स्कूटर की बढ़ती मांग को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। आईक्यूब को जनवरी 2020 में लॉन्च किया गया था, जो फुल LED लाइट्स, कनेक्टेड टेक्नोलॉजी से लैस है और इसे एक बड़ी सीट और बढ़िया स्टोरेज स्पेस के साथ एक फैमिली ई-स्कूटर के रूप में पेश किया गया है। इलेक्ट्रिक स्कूटर को 6,00,000 बिक्री मील का पत्थर हासिल करने में 65 महीने लगे हैं। जैसा कि डेटा दिखता है कि पिछले 3 फाइनेंशियल ईयर में मांग बढ़ी है, जो फाइनेंशियल ईयर 2025 में तेजी से बढ़ेगी। TVS के लिए फाइनेंशियल ईयर 2025 में शानदार प्रदर्शन रहा, जिसमें चेन्नई स्थित दोपहिया वाहन प्रमुख ने पेट्रोल इंजन वाले जुपिटर, एनटॉर्क और जेस्ट और इलेक्ट्रिक आईक्यूब सहित 18 लाख स्कूटर (18,13,103 यूनिट्स, 25% सालाना वृद्धि) की रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की। इस शानदार प्रदर्शन ने टीवीएस को 26% बाजार हिस्सेदारी दिलाई और फाइनेंशियल ईयर 2025 में भारत में घरेलू स्कूटर उद्योग के लिए रिकॉर्ड 68,53,214 बिक्री में मजबूत योगदान देने में मदद की, 272,605 यूनिट के साथ टीवीएस आईक्यूब ने पिछले फाइनेंशियल ईयर में टीवीएस स्कूटर की बिक्री में 15% का योगदान दिया। TVS मोटर कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2026 की शुरुआत शानदार तरीके से की है। अप्रैल 2025 में आईक्यूब ने 5 साल पहले लॉन्च होने के बाद पहली बार मासिक इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर रिटेल सेल्स में शीर्ष स्थान हासिल किया और मई 2025 में लगातार दूसरे महीने ताज पर कब्जा किया। वाहन के आंकड़ों के अनुसार, यह जून की बिक्री में भी शीर्ष पर रहने के लिए तैयार है, जिसने 1 से 14 जून के बीच 11,841 यूनिट बेचीं और भारत में बेचे गए 43,917 इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों में से 27% हिस्सेदारी हासिल की। ध्यान देने वाली बात यह है कि इलेक्ट्रिक स्कूटर को 6,00,000 यूनिट की बिक्री की उपलब्धि हासिल करने में 65 महीने लगे हैं. जैसा कि आंकड़ों में देखा जा सकता है कि पिछले तीन वित्तीय वर्षों में इलेक्ट्रिक स्कूटर की मांग बढ़ी है, जो वित्त वर्ष 2025 में भी तेज़ी से बढ़ेगी. TVS Motor के लिए वित्त वर्ष 2025 शानदार रहा, जिसमें चेन्नई स्थित दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी ने 18 लाख स्कूटरों (18,13,103 यूनिट, जो पिछले साल की समान अवधि से 25 प्रतिशत अधिक है) की रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की, जिसमें पेट्रोल इंजन वाले TVS Jupiter, NTorq, Zest और इलेक्ट्रिक स्कूटर TVS iQube शामिल हैं. इस शानदार प्रदर्शन ने TVS को 26 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी दिलाई और वित्त वर्ष 2025 में भारत में घरेलू स्कूटर उद्योग के लिए रिकॉर्ड 68,53,214 बिक्री में मजबूत योगदान देने में मदद की, इसमें 2,72,605 यूनिट के साथ TVS iQube ने पिछले वित्त वर्ष में टीवीएस स्कूटर की बिक्री में 15 प्रतिशत का योगदान दिया. TVS iQube की खुदरा बिक्री TVS iQube की थोक बिक्री के आँकड़े अनिवार्य रूप से देश भर में कंपनी के डीलरशिप को फैक्ट्री डिस्पैच हैं, जबकि खुदरा बिक्री वास्तविक दुनिया की कहानी है. वाहन डेटा के अनुसार, जनवरी 2020 से मई 2025 के अंत तक भारत में कुल 5,58,461 यूनिट्स TVS iQubes स्कूटर बेचे गए हैं. ध्यान देने वाली बात यह है कि इसमें तेलंगाना के आंकड़े शामिल नहीं हैं. वित्त वर्ष 2023 में 82,107 यूनिट्स से, वित्त वर्ष 2024 में बिक्री 123 प्रतिशत बढ़कर 1,83,190 यूनिट्स हो गई, जिससे TVS को रिकॉर्ड 9,44,000 इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की बिक्री में 19 प्रतिशत की बाजार हिस्सेदारी हासिल की. इस बिक्री आंकड़ों के साथ यह OLA Electric के बाद दूसरे स्थान पर पहुंच गई. वित्त वर्ष 2025 में मांग 30 प्रतिशत बढ़कर 2,37,911 यूनिट्स हो गई, जबकि ई-टू-व्हीलर बाजार हिस्सेदारी में 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई.

कोका-पेप्सी को लगेगा झटका ! अंबानी का कैम्पा लेकर आ रहा है करंट , 8000 करोड़ से हिलेगा बाजार

मुंबई  मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड (RCPL) अपने बेवरेज ब्रांड्स पर बड़ा निवेश करने जा रही है। कंपनी अगले 12-15 महीनों में 8000 करोड़ रुपये तक का निवेश करेगी। यह निवेश कैम्पा और अन्य पेय पदार्थों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए किया जाएगा। रिलायंस कंज्यूमर इस निवेश के साथ बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। रिलायंस कंज्यूमर Coca-Cola और PepsiCo जैसी बड़ी कंपनियों को टक्कर देने के लिए तैयार है। साथ ही, कंपनी का लक्ष्य देश भर में मौजूद छोटे, क्षेत्रीय ब्रांड्स को भी चुनौती देना है। के मुताबिक कंपनी लगभग 10-12 नए कारखाने खोलने की योजना बना रही है। कुछ कारखाने कंपनी खुद बनाएगी और कुछ में दूसरी कंपनियों के साथ मिलकर काम करेगी। अब तक का सबसे बड़ा निवेश एक अधिकारी ने बताया कि यह RCPL द्वारा किया जाने वाला अब तक का सबसे बड़ा निवेश है। RCPL ने 2022 में रिलायंस रिटेल वेंचर्स की सहायक कंपनी के रूप में काम करना शुरू किया था। अधिकारी ने यह भी बताया कि यह निवेश रिलायंस और उसके कुछ साझेदारों द्वारा मिलकर किया जा रहा है। कुल मिलाकर 6000 से 8000 करोड़ रुपये का निवेश होगा। बिहार में भी लगेगा प्लांट फरवरी में रिलायंस ने गुवाहाटी में एक प्लांट शुरू किया था। यह प्लांट स्थानीय कंपनी Jericho Foods and Beverages LLP के साथ मिलकर शुरू किया गया है। इस प्लांट में सॉफ्ट ड्रिंक्स और पानी बनाया जाता है। यह प्लांट पूर्वोत्तर क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करता है। कंपनी बिहार में भी एक और प्लांट लगाने जा रही है। अभी तक कैम्पा और अन्य पेय पदार्थ 18 प्लांट्स में बनाए जा रहे हैं। ये सभी प्लांट्स सह-निवेश के तहत बने हैं। इसका मतलब है कि इनमें रिलायंस के साथ-साथ दूसरी कंपनियों ने भी पैसा लगाया है। मुरलीधरन के साथ साझेदारी रिलायंस कंज्यूमर के बेवरेज पोर्टफोलियो में कई ब्रांड शामिल हैं। इनमें कैम्पा कोला, ऑरेंज और लेमन जैसे फ्लेवर हैं। इसके अलावा, सोस्यो सॉफ्ट ड्रिंक्स, स्पिनर स्पोर्ट्स ड्रिंक, सन क्रश जूस, फ्रूट-बेस्ड हाइड्रेशन ब्रांड RasKik और इंडिपेंडेंस वाटर भी शामिल हैं। रिलायंस कंज्यूमर ने श्रीलंका के पूर्व क्रिकेटर मुथैया मुरलीधरन के साथ साझेदारी की है। इस साझेदारी में स्पिनर स्पोर्ट्स ड्रिंक को बनाया और बेचा जाएगा। यह ड्रिंक 250 ml की बोतल में 10 रुपये में मिलेगी। यह PepsiCo के Gatorade और Sting जैसे ब्रांड्स से काफी सस्ती है। पोर्टफोलियो में कई ब्रांड रिलायंस कंज्यूमर कंपनी सिल जैम और स्प्रेड्स भी बनाती और बेचती है। इसके अलावा, Lotus Chocolate, Toffeeman और Ravalgaon जैसे कन्फेक्शनरी ब्रांड्स भी कंपनी के पोर्टफोलियो में शामिल हैं। एलन’स बगल्स स्नैक्स, वेलवेट शैम्पू और इंडिपेंडेंस स्टेपल्स जैसे ब्रांड्स भी कंपनी बनाती है। कंपनी के ज्यादातर 15 ब्रांड्स खरीदे हुए हैं। हालांकि, कंपनी के ब्रांड्स अभी कुछ ही बाजारों में उपलब्ध हैं। कंपनी चाहती है कि मार्च 2027 तक उसके सभी कंज्यूमर प्रोडक्ट्स पूरे देश में मिलने लगें।

BSNL से मिला Polycab को बड़ा ऑर्डर, आज रखें शेयर पर नजर

मुंबई  केबल तार बनाने वाली दिग्गज कंपनी पॉलीकैब इंडिया का शेयर (Polycab India Share)  फोकस में है. इसे भारत दूरसंचार निगम लिमिटेड यानी बीएसएनएल (BSNL) से एक बड़ा ऑर्डर मिला है. Bharat Net Program के तहत मिला ये ऑर्डर 6000 करोड़ रुपये से ज्यादा का है. यहां बता दें कि ये महंगे शेयरों में शामिल है और पॉलीकैब इंडिया शेयर का भाव भी (Polycab Stock Price) 6,000 रुपये के पार है. इस बड़ी डील का असर कंपनी के शेयर पर देखने को मिल सकता है.  बाजार बंद होने के बाद दी थी जानकारी Polycab India की ओर से बीते कारोबारी दिन मंगलवार को जानकारी शेयर करते हुए बताया गया कि उसे 6447.54 करोड़ रुपये का एक बड़ा ऑर्डर बीएसएनएल से मिला है और इस समझौते पर 17 जून को साइन किए गए हैं. कंपनी की ओर से ये डिटेल शेयर मार्केट (Stock Market) में कारोबार बंद होने के बाद शेयर की गई थी. ऐसे में आज बाजार ओपन होने के बाद इसका पॉजिटिव असर कंपनी के स्टॉक पर देखने की उम्मीद जताई जा रही है. बता दें मंगलवार को पॉलीकैब शेयर गिरावट के साथ लाल निशान पर बंद हुआ था.  3 साल में पूरा करना है ऑर्डर बात करें पॉलीकैब इंडिया को BSNL से मिले इस ऑर्डर के बारे में, तो रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसे भारतनेट प्रोग्राम के तहत कर्नाटक, गोवा और पुडुचेरी टेलीकॉम सर्किल में नेटवर्क डिजाइन, सप्लाई, इंस्टॉलेशन, अपग्रेडेशन और मैंटेनेंस का काम दिया गया है. कुल ऑर्डर वैल्यू में से 3,741.92 करोड़ रुपये पूंजीगत व्यय पर,  2,245.15 करोड़ नए नेटवर्क के परिचालन के लिए और मौजूदा नेटवर्क के लिए 460.47 करोड़ शामिल है. मिडिल माइल नेटवर्क डेवलपमेंट के लिए ये काम पॉलीकैब को दिया गया है. इस करार के तहत निर्माण कार्य तीन साल में पूरा करना होगा, जबकि 10 साल तक मेंटिनेंस के लिए समझौता किया गया है.  शेयर पर दिख सकता है असर इस बड़े ऑर्डर के मिलने की खबर का असर कंपनी के स्टॉक पर आज कारोबार के दौरान देखने को मिल सकता है. बता दें कि बीते कारोबारी दिन Polycab India Share 6114 रुपये पर ओपन हुआ था और सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट के बीच 1.15 फीसदी फिसलकर 6,037 रुपये पर क्लोज हुआ था. कंपनी के मार्केट कैप की बात करें, तो ये 90840 करोड़ रुपये है और इस केबल मेन्युफैक्चरर कंपनी का 52 वीक का हाई लेवल 7605 रुपये, जबकि लो-लेवल 4555 रुपये है.  5 साल में 7 गुना किया पैसा इस महंगे स्टॉक ने बीते पांच साल में अपने निवेशकों को मल्टीबैगर रिटर्न (Multibagger Return) दिया है. जी हां इस अवधि में हर एक शेयर की कीमत में 5235.80 रुपये का उछाल आया है और निवेशकों के लिए ये स्टॉक मल्टीबैगर बनकर उभरा है. 19 जून 2020 को Polycab Share की कीमत 801.20 रुपये थी, जो मंगलवार को गिरावट के बावजूद 6037 रुपये पर बंद हुआ. इस हिसाब से कैलकुलेशन करें तो पांच साल में निवेशकों को मिला रिटर्न 653.49% रहा है यानी उनका किया गया निवेश 7 गुना से ज्यादा बढ़ गया है. 

मुकेश अंबानी की टेलीकॉम कंपनी जियो ने खास प्लान पेश किए, गेमर्स को डेटा के साथ मिलेंगे ये बेनिफिट

नई दिल्ली मुकेश अंबानी की टेलीकॉम कंपनी जियो ने खास प्लान पेश किए हैं। कंपनी ने ये प्लान गेमिंग के शौकीन यूजर्स के लिएपेश किया है। इन प्लान को कंपनी गेमिंग-स्पेसिफिक मोबाइल प्लान बता रही है, जिसके लिए उसने पॉपुलर मोबाइल गेम बैटलग्राउंड्स मोबाइल इंडिया (BGMI) के पब्लिशर क्राफ्टन इंडिया के साथ पार्टनरशिप किया है। जियो के लेटेस्ट लॉन्च किए दो प्लान के कीमत की बात करें, तो इनमें से एक 495 रुपये और दूसरे की कीमत 545 रुपये है। यहां हम आपको जियो के इन दोनों गेमिंग प्लान की जानकारी दे रहे हैं। Jio के 495 रुपये वाले प्लान की खूबियां जियो के 495 रुपये वाले गेमिंग प्लान की वैलिडिटी 28 दिनों की है। इस प्लान में यूजर्स को हर रोज 1.5 जीबी का डेटा मिलेगा। इसके साथ ही कंपनी यूजर्स को 5 जीबी अतिरिक्त डेटा भी ऑफर करेगा। यानी इस प्लान में कुल मिलाकर 47 जीबी डेटा मिलेगा। इसके साथ ही यूजर्स को अनलिमिटेड कॉलिंग और डेली 100 एसएमएस मिलेंगे। जियो के इस प्लान में जियोगेम्स क्लाउड, बीजीएमआई, फैनकोड, जियोटीवी, जियो एआई क्लाउड का सब्सक्रिप्शन मिलेगा। यूजर्स को कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल या जियो सेट टॉप बॉक्स पर 500 से ज्यादा एचडी प्रीमियम गेम्स का मजा ले सकेंगे। इसके साथ ही ग्राहकों को 90 दिन के लिए JioHotstar का मोबाइल और टीवी का सब्सक्रिप्शन मिलेगा। कंपनी ग्राहकों को जियो एआई क्लाउड पर 50 जीबी स्टोरेज मिलेगा। जियो के इस प्लान के साथ BGMI के बार्ड्स जर्नी सेट, डेजर्ट टास्कफोर्स मास्क और टैप बूम मोलोटोव कॉकटेल जैसी प्रीमियम स्किन के कूपन भी फ्री मिल रहे हैं। Jio के 545 रुपये वाले प्लान की खूबियां जियो के 545 रुपये वाले गेमिंग स्पेसिफिक प्लान में डेली 2GB का डेटा मिलेगा। इसमें यूजर्स को अनलिमिटेड 5G डेटा मिलेगा। डेटा के अलावा इस प्लान में यूजर्स को वे सभी फायदे मिलेंगे, जो 495 रुपये वाले प्लान में मिलते हैं।

अनिल अंबानी ने की राफेल बनाने वाली कंपनी के साथ बड़ी डील, शेयर खरीदने की लूट, लगा अपर सर्किट

नई दिल्ली  अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के शेयरों में आज जबरदस्त खरीदारी हो रही है। कंपनी के शेयर में 5% का अपर सर्किट लग गया और यह 386.05 रुपये के इंट्रा डे हाई पर पहुंच गया। शेयरों में इस तेजी के पीछे एक बड़ी डिफेंस संबंधित डील है। दरअसल, फ्रांस की दिग्गज डिफेंस कंपनी डसॉल्ट एविएशन और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की सहायक कंपनी रिलायंस एयरोस्ट्रक्चर के बीच भारत में फाल्कन 2000 बिजनेस जेट बनाने के लिए एक डील साइन की गई है। बता दें कि डसॉल्ट एविएशन ने ही राफेल फाइटर जेट को भी बनाती है। राफेल का इस्तेमाल ऑपरेशन सिंदूर में किया गया था। क्या है डिटेल 18 जून को कारोबार के दौरान एक एक्सचेंज फाइलिंग के जरिए अनिल अंबानी के स्वामित्व वाली फर्म ने घोषणा की कि इसकी सहायक कंपनी रिलायंस एयरोस्ट्रक्चर लिमिटेड ने ग्लोबल मार्केट्स के लिए भारत में फाल्कन 2000 बिजनेस एग्जीक्यूटिव जेट बनाने के लिए डसॉल्ट एविएशन के साथ एक रणनीतिक साझेदारी की है। 18 जून को अपनी एक्सचेंज फाइलिंग में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने कहा, “डसॉल्ट एविएशन और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की सहायक कंपनी, रिलायंस एयरोस्ट्रक्चर लिमिटेड (आरएएल) ने आज पेरिस एयर शो में वैश्विक बाजारों के लिए भारत में फाल्कन 2000 बिजनेस एग्जीक्यूटिव जेट बनाने के लिए एक ऐतिहासिक रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की। यह साझेदारी भारत की एयरोस्पेस विनिर्माण क्षमताओं को आगे बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण कदम है।” बता दें कि डसॉल्ट एविएशन पहली बार भारतीय और वैश्विक बाजारों के लिए फ्रांस के बाहर फाल्कन 2000 बिजनेस जेट का निर्माण करेगा। संयुक्त राज्य अमेरिका, फ्रांस, कनाडा और ब्राजील के बाद भारत अगली पीढ़ी के बिजनेस जेट बनाने वाले देशों के कुलीन वर्ग में शामिल हो गया। डसॉल्ट एविएशन 2028 के अंत तक कॉर्पोरेट और सैन्य उपयोग के लिए पहला ‘मेड इन इंडिया’ फाल्कन 2000 जेट वितरित करेगा। रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के शेयरों के हाल पिछले साल रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के शेयर की कीमत में उछाल आया है, बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद इसमें 83 प्रतिशत की उछाल आई है। इस साल अब तक शेयर में 21 प्रतिशत की तेजी आई है, हाल ही में 11 जून को यह 52-सप्ताह के उच्चतम स्तर ₹421 पर पहुंच गया। पिछले साल 23 जुलाई को शेयर 52-सप्ताह के निम्नतम स्तर ₹169.75 पर पहुंच गया था।  

सोने के दाम में रिकॉर्ड तेजी, ₹1 लाख केनिकट पहुंचा भाव

मुंबई  सोने और चांदी की कीमतें रोज नया रिकॉर्ड बनाने को तैयार हैं. भारतीय सर्राफा बाजार में आज, 18 जून, 2025 की सुबह सोना और चांदी की कीमतें बढ़ी हैं. सोना एक बार फिर एक लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के पार जाने को तैयार है और चांदी एक लाख 10 हजार रुपये किलो का आंकड़ा पार करने वाली है. राष्ट्रीय स्तर पर 999 शुद्धता वाले 24 कैरेट 10 ग्राम सोने की कीमत 99018 रुपये है. जबकि 999 शुद्धता वाली चांदी (Silver) की कीमत 109550 रुपये है. इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के मुताबिक, एक दिन पहले यानी मंगलवार की शाम को 24 कैरेट का शुद्ध सोना 98810 रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो आज (बुधवार) सुबह महंगा होकर 99018 रुपये पहुंच गया है. इसी तरह शुद्धता के आधार पर सोना और चांदी की कीमत में उछाल आया है. गोल्ड का ताजा रेट आधिकारिक वेबसाइट ibjarates.com के मुताबिक, आज 995 शुद्धता वाले सोने की कीमत 98622 रुपये प्रति 10 ग्राम है. वहीं, 916 (22 कैरेट) प्योरिटी वाले गोल्ड प्राइस 90700 रुपये प्रति 10 ग्राम है. 750 (18 कैरेट) प्योरिटी वाले गोल्ड का रेट 74264 रुपये प्रति 10 ग्राम है. वहीं, 585 (14 कैरेट) प्योरिटी वाले सोने का भाव 57926 रुपये प्रति 10 ग्राम है. चांदी का रेट ibjarates.com के मुताबिक, कल चांदी का रेट 106952 रुपये किलो था, जो आज (18 जून) 109550 रुपये किलो पहुंच गया है यानी आज चांदी के भाव में 2598 रुपये की बढ़त दर्ज की गई है. सोना-चांदी आज कितने रुपये हुआ महंगा?   शुद्धता मंगलवार शाम के रेट बुधवार सुबह का भाव कितने बदले रेट सोना (प्रति 10 ग्राम) 999     98810 99018 208 रुपये महंगा सोना (प्रति 10 ग्राम) 995      98414 98622 208 रुपये महंगा सोना (प्रति 10 ग्राम) 916      90510 90700 190 रुपये महंगा सोना (प्रति 10 ग्राम) 750      74108 74264 156 रुपये महंगा सोना (प्रति 10 ग्राम) 585      57804 57926 122 रुपये महंगा चांदी (प्रति 10 ग्राम) 999      106952 109550  2598  रुपये महंगी बता दें कि इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन की अधिकारिक वेबसाइट ibjarates.com सोमवार से शुक्रवार रोज सुबह और शाम गोल्ड और सिल्वर के रेट जारी करता है. ये सभी दाम टैक्स और मेकिंग चार्ज से पहले के होते हैं. इनमें जीएसटी शामिल नहीं होता है. गहने खरीदते समय आपको टैक्स और मेकिंग चार्ज भी देने होंगे.

अमेरिका से अपना बोरिया-बिस्तर समेटने TikTok को फिर मिला 90 दिनों की राहत

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टिकटॉक की बिक्री की समयसीमा तीसरी बार बढ़ा दी है। अब ट्रंप ने टिकटॉक को बेचने के लिए 90 दिनों की राहत दी है। व्हाइट हाउस ने मंगलवार को बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप टिकटॉक के चीनी मालिक को एप बेचने की समयसीमा बढ़ाने के लिए इस सप्ताह एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करेंगे।  इससे पहले, ट्रंप ने अप्रैल की शुरुआत में टिकटॉक को 75 और दिन चलाने की अनुमति दी थी। इस आदेश पर हस्ताक्षर करने के बाद टिकटॉक को अमेरिकी कंपनी को बेचने का सौदा टल गया था। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा, ‘राष्ट्रपति ट्रंप नहीं चाहते हैं कि टिकटॉक बंद हो जाए। यह विस्तार 90 दिनों तक चलेगा, जिसे प्रशासन यह सुनिश्चित करने के लिए काम करेगा कि यह सौदा बंद हो जाए ताकि अमेरिकी लोग इस आश्वासन के साथ TikTok का उपयोग करना जारी रख सकें कि उनका डेटा सुरक्षित है।’ कनाडा से वाशिंगटन लौटते वक्त पत्रकारों से की बात ट्रंप ने जी7 शिखर सम्मेलन में भाग लेकर कनाडा से वाशिंगटन लौटते वक्त मंगलवार सुबह एयरफोर्स वन में पत्रकारों से बात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि वह संभवत: समयसीमा को फिर से बढ़ा देंगे। ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्हें भरोसा है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग अंत में टिकटॉक को बेचने की मंजूरी दे देंगे। तीसरी बार ट्रंप ने बढ़ाई समयसीमा  यह तीसरी बार होगा जब ट्रंप ने समय सीमा बढ़ाई है। पहली बार ट्रंप ने राष्ट्रपति बनने के बाद 20 जनवरी को एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके बाद टिकटॉक पर अमेरिका में प्रतिबंध लगा दिया गया था। दूसरी बार अप्रैल में समयसीमा बढ़ाई गई, जब टिकटॉक को अमेरिकी कंपनी में बदलने की कोशिश हो रही थी, लेकिन ट्रंप की टैरिफ घोषणा के बाद चीन के पीछे हटने से यह सौदा टूट गया था।  अमेरिका में TikTok पर क्यों मंडरा रहा संकट TikTok की मूल कंपनी बाइटडांस (ByteDance) चीन की है और अमेरिका को आशंका है कि यह एप यूजर्स का डेटा चीन सरकार के साथ साझा कर सकता है। इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए अमेरिका ने एक कानून पारित किया था, जिसके तहत बाइटडांस को TikTok का मालिकाना अधिकार किसी अमेरिकी कंपनी को सौंपना होगा या फिर देश में इसका संचालन बंद करना पड़ेगा। एफबीआई और फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन दोनों ने चेतावनी दी थी कि बाइटडांस उपयोगकर्ता डेटा, जैसे ब्राउजिंग हिस्ट्री, लोकेशन और बायोमेट्रिक जैसी जानकारियों को चीन की सत्तावादी सरकार के साथ साझा कर सकता है। टिकटॉक ने कहा कि उसने ऐसा कभी नहीं किया है और न ही ऐस करने का कोई उद्देश्य रखता है। टिकटॉक ने बाताया कि अमेरिकी सरकार ने ऐसा होने का सबूत नहीं दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपना कार्यकाल शुरू करते ही TikTok को बैन से कुछ दिनों की राहत दी थी।   TikTok के लिए कौन-कौन हैं दावेदार TikTok के अमेरिकी ऑपरेशन को खरीदने के लिए कई बड़ी कंपनियां मैदान में हैं। इसमें सबसे पहले टेक कंपनी ओरेकल (Oracle) है जिसके पास पहले से ही TikTok Global में 12.5% की हिस्सेदारी है और यह इसका क्लाउड टेक्नोलॉजी पार्टनर भी है। इससे अलावा इन्वेस्टमेंट फर्म ब्लैकस्टोन (Blackstone) भी TikTok को खरीदने में दिलचस्पी दिखा रही है। वहीं, एआई स्टार्टअप पर्प्लेक्सिटी एआई (Perplexity AI) ने भी TikTok के अमेरिकी कारोबार को अपने साथ मर्ज करने का प्रस्ताव दिया है। कंपनी का कहना है कि वह TikTok के एल्गोरिदम को नए सिरे से तैयार करेगी ताकि यह अमेरिकी डेटा सुरक्षा मानकों के अनुरूप हो। बिलियनेयर फ्रैंक मैककॉर्ड का कंसोर्टियम समूह ने TikTok के लिए 20 बिलियन डॉलर की पेशकश की है और इसमें Reddit के सह-संस्थापक एलेक्सिस ओहानियन भी सलाहकार के रूप में जुड़े हैं। इसके अलावा, एम्प्लॉयर डॉट कॉम के फाउंडर जेसी टिन्सली ने 30 बिलियन डॉलर और वायोमिंग के बिजनेसमैन रीड रैस्नर ने 47.5 बिलियन डॉलर की पेशकश की है। क्या होगा TikTok का भविष्य? TikTok पर बैन लगने या उसके बिकने के बीच अमेरिकी प्रशासन की नीति में बदलाव भी हो सकता है। दिलचस्प बात यह है कि खुद ट्रंप के TikTok पर लाखों फॉलोअर्स हैं और वे इसे युवा वोटर्स तक पहुंचने के लिए एक महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म मानते हैं। 

डोनाल्ड ट्रंप अब मोबाइल फोन भी बेचेंगे, स्मार्टफोन के कारोबार में उतरा अमेरिकी राष्ट्रपति का परिवार

 वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का परिवार अब मोबाइल फोन निर्माण के नए कारोबार में उतरेगा। इसका नाम ट्रंप मोबाइल होगा। यह कदम तब उठाया गया है जब डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च सांविधानिक पद पर हैं। उनकी इस बात को लेकर आलोचना हो रही है कि वे अपनी निजी व्यावसायिक हितों के लिए सार्वजनिक नीतियों को प्रभावित कर सकते हैं। इसे ट्रंप ब्रांड की लोकप्रियता को भुनाने की एक और कोशिश करार दिया जा रहा है। ट्रंप ऑर्गनाइजेशन के कार्यकारी उपाध्यक्ष और डोनाल्ड ट्रंप के बेटे एरिक ट्रंप ने कहा कि ट्रंप मोबाइल अमेरिका में निर्मित फोन बेचेगा और देश में ही एक कॉल सेंटर संचालित करेगा। कंपनी की वेबसाइट के अनुसार, ट्रंप ऑर्गनाइजेशन 47.45 डॉलर (लगभग ₹3,950) प्रति माह की स्कीम पेश करेगी। इसमें असीमित बातचीत, टेक्स्ट और डेटा के साथ-साथ टेलीहेल्थ और फार्मेसी लाभ भी शामिल हैं। ट्रंप के “मेक अमेरिका ग्रेट” नारे से सजे सुनहरे रंग के इस फोन की कीमत 499 डॉलर (लगभग ₹41,500) है। आधिकारिक बयान में कहा गया है कि यह फोन सितंबर में बाजार में आ जाएगा। ट्रंप ऑर्गनाइजेशन के कार्यकारी उपाध्यक्ष और डोनाल्ड ट्रंप के छोटे बेटे एरिक ट्रंप ने कहा कि ट्रंप मोबाइल अमेरिका में बना फोन बेचेगा। साथ ही अमेरिका में ही एक कॉल सेंटर संचालित करेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति की कंपनी ट्रंप ऑर्गनाइजेशन रियल एस्टेट, होटल और गोल्फ रिसॉर्ट्स के लिए जानी जाती है। लेकिन अब ट्रंप ऑर्गनाइजेशन डिजिटल मीडिया, क्रिप्टोकरेंसी और टेलिकॉम सेक्टर में भी पैर पसार रही है। ट्रंप ऑर्गनाइजेशन ने दावा किया है कि इसका कस्टमर सपोर्ट और मैन्यूफैक्चरिंग दोनों अमेरिका में ही होंगे। माना जा रहा है कि इसके बाद डोनाल्ड ट्रंप और उनके परिवार के कारोबारी साम्राज्य का नया विस्तार होने वाला है। एक्सपर्ट की मानें तो ट्रंप अपनी राजनीतिक पहचान को व्यावसायिक लाभ में बदलने की कोशिश कर रहे हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि अमेरिकी मार्केट में यह नया मोबाइल नेटवर्क और फोन कितना असर डालता है। इस बात को लेकर ट्रंप की आलोचना हो रही है कि वे अपनी निजी व्यावसायिक हितों के लिए सार्वजनिक नीतियों को प्रभावित कर सकते हैं। इसी क्रम में इसे ट्रंप ब्रांड की लोकप्रियता को भुनाने की एक और कोशिश करार दिया जा रहा है। इस नई मोबाइल फोन और सेवा को टी1 मोबाइल नाम दिया गया है। इसकी घोषणा मध्य पूर्व में कई रियल एस्टेट सौदों के बाद हुई है, जिसमें कतर में एक गोल्फ परियोजना भी शामिल है। पिछले महीने उनके परिवार ने वियतनाम में गोल्फ कोर्स, होटल और रियल एस्टेट परियोजनाओं के लिए 1.5 बिलियन डॉलर का साझेदारी समझौते को मंजूरी दी थी। हालांकि, इन सौदाें की शुरुआत ट्रंप के निर्वाचन से पहले हो गई थी। व्यवसायों में ट्रंप के नाम से जुड़ाव पर अमेरिका के व्यापारिक और राजनीतिक हलकों में विवादों का नया दौर शुरू हो गया है। गौरतलब है कि मोबाइल फोन कंपनियों की नियामक संस्था फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन ने उन मीडिया संस्थानों की जांच शुरू की है, जिन्हें ट्रंप नापसंद करते हैं।   भारत में आईफोन निर्माण को लेकर टैरिफ की धमकी दे चुके हैं ट्रंप एरिक ट्रंप ने सोमवार को कहा कि उपभोक्ताओं को ऐसा फोन मिलना चाहिए जो किफायती हो, उनके मूल्यों के अनुरूप हो। यह कंपनी एक अत्यंत प्रतिस्पर्धी बाजार में प्रवेश कर रही है। इसके पहले भारत में आईफोन निर्माण को लेकर लेकर डोनाल्ड ट्रंप एपल की आलोचना कर चुके हैं। ट्रंप ने एपल पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी थी।  

देश में पैसेंजर वाहनों की बिक्री में मई में मंदी, डीलर स्टॉक बढ़ने से थोक डिस्पैच 0.8% घटा

मुंबई  देश का ऑटो सेक्टर पहले गियर में फंसा नज़र आ रहा है. बीता महीना पैसेंजर व्हीकल सेग्मेंट के लिए कुछ ख़ास नहीं रहा. बामुश्किल वाहन निर्माताओं ने अपने सेल्स टार्गेट को पूरा किया है. नतीजा ये रहा कि डोमेस्टिक मार्केट में कारों की बिक्री स्लो मोशन में रही. सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, मई में घरेलू यात्री वाहनों की बिक्री में 0.8% की मामूली गिरावट देखी गई है. क्या कहते हैं आंकड़े: SIAM की रिपोर्ट के मुताबिक मई में कुल 3,44,656 यूनिट पैसेंजर कारों की बिक्री हुई है जो पिछले साल इसी महीने में 3,47,492 यूनिट थी. ये बिक्री में 0.8% की मामूली गिरावट गिरावट दर्शाता है. गिरावट के बावजूद, सियाम के महानिदेशक राजेश मेनन ने कहा कि मई में भले ही पैसेंजर व्हीकल सेग्मेंट में गिरावट देखने को मिली है लेकिन किसी भी महीने की तुलना में ये आंकड़े सेकंड हाइएस्ट हैं. जो बाजार में पैसेंजर वाहनों की निरंतर मांग की गति को दर्शाता है.  बीते मई में सभी सेग्मेंट में वाहनों की बिक्री यूनिट में: पैसेंजर व्हीकल      3,44,656  तिपहिया वाहन     53,942 दोपहिया वाहन     16,55,927 कैसा है दिग्गज़ों का हाल? सियाम का डाटा कहता है कि, पीवी सेगमेंट की मार्केट लीडर मारुति सुजुकी इंडिया ने मई में कुल 1,35,962 यूनिट कारों की बिक्री की है. जो पिछले साल मई में 144,002 यूनिट थी. वहीं हुंडई मोटर इंडिया ने भी गिरावट दर्ज की, एक साल पहले 49,151 यूनिट के मुकाबले कंपनी ने बीते मई में कुल 43,861 यूनिट थी. इसके विपरीत, महिंद्रा एंड महिंद्रा ने मजबूत ग्रोथ दर्ज की है. महिंद्रा ने मई में कुल 52,431 यूनिट की बिक्री की है जो पिछले साल मई में  43,218 यूनिट थी. दोपहिया ने पकड़ी रफ्तार: जहां एक तरह पैसेंजर व्हीकल (PV) सेग्मेंट में गिरावट देखने को मिली है, दोपहिया वाहनों की बिक्री ने वाहन बाजार को मजबूत करने में मदद की है. जो मई में 2.2% बढ़कर 16.56 लाख यूनिट हो गई. बीते मई में कुल 10.3 लाख मोटरसाइकिलों की बिक्री दर्ज की गई है जो पिछले साल के मई के मुकाबले लगभग बराबर ही रहा है. लेकिन सबसे तगड़ी ग्रोथ स्कूटरों की बिक्री में देखने को मिली है. मई में स्कूटरों की बिक्री 7.1% बढ़कर 5,79,507 यूनिट हो गई. थ्री-व्हीलर व्हीकल सेग्मेंट ने भी मई में 3.3% की गिरावट दर्ज की है. इस दौरान कुल 53,942 यूनिट तिपहिया वाहनों की बिक्री हुई है. SIAM का कहना है कि, भले ही पैसेंजर व्हीकल सेग्मेंट में गिरावट आई है या कुछ दिग्गज प्लेयर्स की बिक्री कम हुई है लेकिन कुल मिलाकर, सभी सेग्मेंट में वाहनों की बिक्री साल-दर-साल 1.8% बढ़कर 2.01 मिलियन यूनिट हो गई है.   

UPI ट्रांजेक्शन की स्पीड हुई डबल, 30 की जगह 15 सेकंड में होगा पेमेंट, देखें नए बदलावों की पूरी लिस्ट

नई दिल्ली UPI से अब पैसे भेजना और लेना आज से और भी तेज हो जाएगा. नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने 26 अप्रैल 2025 को कहा कि वे यूपीआई के रिस्पॉन्स टाइम को कम कर रहे हैं. इससे बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स (जैसे फोनपे, गूगल पे, पेटीएम) को फायदा होगा. NPCI ने 26 अप्रैल को अपने एक सर्कुलर में कहा था कि 16 जून से UPI से लेनदेन करना और भी तेज हो जाएगा. ऐसे में यूजर्स को एक शानदार एक्सपीरियंस मिलेगा. आइए विस्तार से जानते है. यूपीआई API मौजूदा समय (सेकंड) नया समय (सेकंड) रिक्वेस्ट पे, डेबिट और क्रेडिट 30 सेकंड 15 सेकंड चेक ट्रांजेक्शन स्टेटस 30 सेकंड 10 सेकंड ट्रांजेक्शन रिवर्सल (डेबिट और क्रेडिट) 30 सेकंड 10 सेकंड वैलिडेट एड्रेस (पे, कलेक्ट) 15 सेकंड 10 सेकंड जुलाई के बाद नए नियम NPCI के 21 मई 2025 के सर्कुलर के मुताबिक, अगस्त से यूपीआई में और बदलाव आएंगे. बैंक और PSP को यह सुनिश्चित करना होगा कि यूपीआई के API रिक्वेस्ट (ट्रांजेक्शन की स्पीड और मात्रा) को ठीक से मैनेज किया जाए. क्या-क्या बदलेगा?     बैलेंस चेक: हर यूजर दिन में 50 बार यूपीआई ऐप से बैलेंस चेक कर सकेगा.     लिस्ट अकाउंट: आप अपने मोबाइल से लिंक अकाउंट्स की लिस्ट देख सकते हैं.     ऑटो-पेमेंट: ऑटो-पेमेंट के लिए हर मैनडेट (पेमेंट शेड्यूल) के लिए 1 कोशिश और 3 रीट्राई मिलेंगी. ये कोशिशें नॉन-पीक आवर्स में होंगी. पीक आवर्स (जब सबसे ज्यादा ट्रांजेक्शन होते हैं).     NPCI ने दिए आदेश: NPCI ने कहा कि सभी बैंकों और पार्टनर्स को 31 जुलाई 2025 तक ये बदलाव लागू करने होंगे. क्यों हो रहा है बदलाव? यूपीआई भारत में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला डिजिटल पेमेंट सिस्टम है. NPCI यूजर्स का अनुभव बेहतर करना चाहता है. इसके लिए बैंक और PSP को अपने सिस्टम अपडेट करने होंगे ताकि ट्रांजेक्शन तेज हों और कोई दिक्कत न आए. 16 जून 2025 से यूपीआई और तेज होगा. इससे पेमेंट करना और आसान हो जाएगा. इतने रुपये तक कर सकते हैं पेमेंट  यूपीआई ऐप जैसे फोन पे, गूगल पे और पेटीएम के जरिए आप 2 लाख रुपये एकमुश्त या किस्तों में लेन-देन कर सकते हैं। यूपीआई ऐप आने के बाद अब पेमेंट करना और आसान हो गया है। पेमेंट के लिए आपको अब कैश की जरूरत नहीं पड़ती।  आज हर छोटी-बड़ी दुकान में आपको यूपीआई पेमेंट सर्विस उपलब्ध है। हालांकि पेमेंट डिजटलाइज होने के साथ-साथ धोखाधड़ी का खतरा उतना भी बड़ गया है। साइबर अपराधी से बचने के लिए जरूरी है कि आप किसी भी यूपीआई ऐप के जरिए पेमेंट करते वक्त सावधानी बरते। 

Indian Railwayने चीन और जर्मनी को छोड़ा पीछे, कर दिखाया कुछ ऐसा कि बड़े-बड़े देश छूट गए पीछे, जानें क्या है पूरा मामला?

नई दिल्ली क्या नई बनी कारों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में सड़क परिवहन का दबदबा कम हो रहा है? क्या अब ज्यादा कारें रेल से जा रही हैं? जवाब है, हां। पिछले 11 सालों में भारतीय रेलवे ने कारों को ढोने में जबरदस्त तरक्की की है। वित्त वर्ष 2013-14 में जितनी कारें बनती थीं, उनमें से सिर्फ 1.5% ही रेल से जाती थीं। लेकिन 2024-25 में यह आंकड़ा बढ़कर 24% से भी ज्यादा हो गया है। इस मामले में भारतीय रेलवे ने कई बड़े-बड़े देशों को पीछे छोड़ दिया है। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक रेलवे के अधिकारियों ने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में देश में कुल 50.6 लाख कारें बनीं। इनमें से लगभग 12.5 लाख कारों को ट्रेनों से भेजा गया। एक बड़े रेलवे अधिकारी ने कहा, ‘सिर्फ पिछले चार सालों में, ट्रेनों से जाने वाली कारों की संख्या 14.7% से बढ़कर लगभग 24.5% हो गई है। हमें उम्मीद है कि यह सिलसिला जारी रहेगा। क्योंकि कार बनाने वाली कंपनियों को रेल ज्यादा सुविधाजनक, किफायती और पर्यावरण के लिए बेहतर लगती है।’ सिर्फ एक देश है आगे ट्रेन के जरिए कार ढोने के मामले में भारत ने चीन और जर्मनी समेत दुनिया के कई बड़े-बड़े देशों को पीछे छोड़ दिया है। पूरी दुनिया में ट्रेनों से कारों को ढोने के मामले में भारत दूसरे नंबर पर है। पहले नंबर पर अमेरिका है, जहां लगभग 75 लाख कारें रेल से जाती हैं। जर्मनी लगभग 6 लाख कारों के साथ तीसरे नंबर पर है। कितना पड़ा फर्क? उद्योग के सूत्रों का कहना है कि ट्रकों से 600 किमी से ज्यादा दूर जाने वाली कारों की संख्या लगभग आधी हो गई है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि रेलवे इस काम में ज्यादा हिस्सा पाना चाहता है। एक लॉजिस्टिक्स कंपनी के बड़े अधिकारी ने कहा कि इससे सड़क परिवहन उद्योग को बहुत नुकसान हुआ है, जो ज्यादा लोगों को नौकरी देता है। रेलवे ज्यादा रैक उपलब्ध करा रहा है और कारोबार बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन भी दे रहा है। कैसे आया उछाल? रेल मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि ट्रेनों से कारों को ढोने में यह उछाल लगातार कोशिशों की वजह से आया है। 2013-14 में इस काम के लिए सिर्फ 10 रैक थे। साल 2021 तक इनकी संख्या 29 हो गई और अब यह 170 है। उन्होंने बताया कि 2024-25 में कारों को ढोने के लिए कुल 7,578 चक्कर लगाए गए। एसयूवी भी हुई शामिल दो साल पहले रेलवे ने वैगनों (wagons) को इस तरह से डिजाइन किया कि उनमें SUV जैसी बड़ी गाड़ियां भी दोनों डेक पर आ सकें। पहले एक रैक में 27 वैगन होते थे, जिनमें सिर्फ 135 एसयूवी आ पाती थीं। लेकिन अब इनकी संख्या दोगुनी होकर 270 हो गई है। इससे रेलवे एक बार में ज्यादा गाड़ियां ले जा पाता है। रेलवे की इस तरक्की से सड़क परिवहन कंपनियों को जरूर थोड़ी परेशानी हो रही होगी। लेकिन इससे पर्यावरण को फायदा हो रहा है, क्योंकि ट्रेनें ट्रकों के मुकाबले कम प्रदूषण करती हैं। साथ ही कार बनाने वाली कंपनियों को भी गाड़ियां भेजने का एक सस्ता और आसान तरीका मिल गया है।

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live