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भारत से सस्ती है कंगाल पाकिस्तान में मोबाइल सेवा, जानिए बाकी देशों में कितना है मिनिमम रिचार्ज

नई दिल्ली रिलायंस जियो, एयरटेल और वोडाफोन आइडिया ने मोबाइल टैरिफ में भारी बढ़ोतरी की है। इससे महंगाई से जूझ रहे आम लोगों की परेशानी बढ़ गई है। एनालिस्ट्स का कहना है कि इससे शहरी इलाकों में टेलिकॉम सर्विसेज पर खर्च वित्त वर्ष 2025 में कुल घरेलू खर्च का 2.8 फीसदी हो जाएगा। ग्रामीण परिवारों के लिए यह 4.5 फीसदी से बढ़कर 4.7 फीसदी हो जाएगा लेकिन सरकार और टेलिकॉम रेगुलेटर ट्राई (TRAI) ने कहा है कि टेलिकॉम कंपनियां टैरिफ फिक्स करने के लिए स्वतंत्र हैं और उनका इस मामले में हस्तक्षेप करने का कोई इरादा नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि भारत में मोबाइल टैरिफ अब भी दुनिया के अधिकांश देशों से सस्ता है। दूसरी ओर आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान में मोबाइल टैरिफ भारत से सस्ता है। हालिया बढ़ोतरी के बाद रिलायंस जियो का मिनिमम सर्विस चार्ज 139 रुपए से बढ़कर 189 रुपए हो गया है। इसमें 28 दिन की वैलिडिटी और दो जीबी डेटा शामिल है। इसी तरह एयरटेल और वोडाफोन आइडिया का भी मिनिमम सर्विस चार्ज 179 रुपए से बढ़कर 199 रुपए हो गया है लेकिन सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में महीनेभर के लिए अनलिमिटेड वॉयस और 18 जीबी डेटा के लिए आपको 1.89 डॉलर यानी करीब 157 रुपए खर्च करने पड़ते हैं। यह रेट सरकारी कंपनी बीएसएनएल का है। बीएसएनएल पहले एक प्राइस रेगुलेटर की तरह काम करता था। इससे प्राइवेट कंपनियां टैरिफ बढ़ाने से बचती थीं। लेकिन कंपनी 4-जी और 5-जी सर्विसेज के मामले में निजी कंपनियों के साथ होड़ करने की स्थिति में नहीं है। पाकिस्तान में सस्ती है सेवा सरकार ने कई देशों में मोबाइल टैरिफ के बारे में डिटेल जानकारी देते हुए भारत से उनकी तुलना की है। इन आंकड़ों के मुताबिक चीन में मिनिमम सर्विस के लिए यूजर्स को 8.84 डॉलर खर्च करने पड़ रहे हैं। अफगानिस्तान में यह राशि 4.77 डॉलर, भूटान में 4.62 डॉलर, बांग्लादेश में 3.24 डॉलर और नेपाल में 2.75 डॉलर है यानी इन देशों में मोबाइल टैरिफ भारत से महंगा है। वहीं पाकिस्तान में मोबाइल यूजर्स को अपनी सर्विस बनाए रखने के लिए मिनिमम 1.39 डॉलर खर्च करने पड़ते हैं यानी पाकिस्तान में मोबाइल टैरिफ भारत से सस्ता है। अमेरिका में मिनिमम मोबाइल रिचार्ज प्लान 49 डॉलर यानी करीब 4000 रुपए का है। इसी तरह ऑस्ट्रेलिया में इसके लिए यूजर्स को 20.1 डॉलर, साउथ अफ्रीका में 15.8 डॉलर, यूके में 12.5 डॉलर, रूस में 6.55 डॉलर, ब्राजील में 6.06 डॉलर, इंडोनेशिया में 3.29 डॉलर, मिस्र में 2.55 डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। भारत में टेलिकॉम कंपनियों ने प्रति यूजर औसत राजस्व (ARPU) बढ़ाने के लिए टैरिफ में बढ़ोतरी की है। उन्होंने महंगे 5G स्पेक्ट्रम खरीदने के लिए बहुत ज्यादा पैसे चुकाए हैं लेकिन अभी तक बहुत कम मोनेटाइजेशन हुआ है। यह नवंबर 2021 के बाद मोबाइल टैरिफ में पहली बड़ी बढ़ोतरी है। सरकार का दखल नहीं, बाजार के हिसाब से होती हैं तय संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग ने इसे लेकर शुक्रवार को एक बयान जारी किया. बयान में दूरसंचार विभाग ने कहा कि अभी घरेलू बाजार में 1 सरकारी कंपनी और 3 प्राइवेट कंपनियां काम कर रही हैं. मोबाइल सेवाओं का बाजार अब डिमांड और सप्लाई के हिसाब से काम करता है. मोबाइल कंपनियां नियामक ट्राई द्वारा तय किए गए ढांचे के तहत दरें तय करती हैं. सरकार फ्री मार्केट के निर्णयों में दखल नहीं देती है. टैरिफ में बदलाव की ट्राई करता है निगरानी बयान के अनुसार, टेलीकॉम कंपनियों के द्वारा दरों में की जाने वाली बढ़ोतरी की ट्राई निगरानी करता है और देखता है कि ये बदलाव तय दायरे में रहें. दूरसंचार विभाग ने साथ ही ये भी जोड़ा कि बीते 2 सालों से देश में मोबाइल टैरिफ में कोई बदलाव नहीं हुआ था, जबकि उस दौरान टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स ने देश में 5जी सेवाएं शुरू करने पर भारी निवेश किया. उसी का परिणाम है कि आज देश में औसत मोबाइल स्पीड बढ़कर 100 एमबीपीएस के स्तर पर पहुंच गई है और मोबाइल स्पीड के मामले में देश की अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग अक्टूबर 2022 के 111 से छलांग लगाकर 15 पर पहुंच गई है. टेलीकॉम कंपनियों ने इतना महंगा किया प्लान तीनों प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और वोडाफोन आइिडया ने इस महीने से अपने प्लान को महंगा किया है. दूरसंचार कंपनियों ने मोबाइल टैरिफ में 11 से 25 फीसदी तक की बढ़ोतरी की है. सबसे पहले रिलायंस जियो ने टैरिफ बढ़ाने का ऐलान किया था. उसके बाद भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया ने भी टैरिफ बढ़ाने का ऐलान किया. टैरिफ बढ़ने से मोबाइल उपभोक्ताओं पर हजारों करोड़ रुपये का बोझ बढ़ने का अनुमान है. विपक्षी पार्टियां इस बात को मुद्दा बना रही हैं. वहीं सरकार ने ताजे बयान में सफाई देते हुए दोहराया है कि अभी भी भारत में मोबाइल सेवाओं की दरें दुनिया के प्रमुख देशों की तुलना में कम हैं. दूरसंचार विभाग ने अपनी बात रखने के लिए इंटरनेशनल टेलीकॉम यूनियन के द्वारा जारी आंकड़ों को आधार बनाया है. आईटीयू के आंकड़ों में न्यूनतम मोबाइल, वॉयस और डेटा के बास्केट (140 मिनट, 70 एसएमएस और 2 जीबी डेटा) की दरें बताई गई हैं. डेटा पिछले साल यानी 2023 के हिसाब से है. प्रमुख देशों में मोबाइल सेवाओं की दरें आंकड़ों के अनुसार, मिनिमम सेवाओं के लिए चीन में उपभोक्ता 8.84 डॉलर खर्च कर रहे हैं. इसी तरह अफगानिस्तान में 4.77 डॉलर, भूटान में 4.62 डॉलर, बांग्लादेश में 3.24 डॉलर, नेपाल में 2.75 डॉलर और पाकिस्तान में 1.39 डॉलर खर्च करना पड़ रहा है. प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की दरों को देखें तो वे अमेरिका में 49 डॉलर, ऑस्ट्रेलिया में 20.1 डॉलर, दक्षिण अफ्रीका में 15.8 डॉलर, ब्रिटेन में 12.5 डॉलर, रूस में 6.55 डॉलर, ब्राजील में 6.06 डॉलर, इंडोनेशिया में 3.29 डॉलर और मिस्र में 2.55 डॉलर हैं. भारत के मामले में यह दर 1.89 डॉलर है, जिसमें उपभोक्ताओं को अनलिमिटेड वॉयस कॉल के साथ 18 जीबी डेटा का लाभ मिल रहा है.

चीन, जापान और साउथ कोरिया 2028 तक बुक, 30 साल में 50,000 से अधिक जहाजों की जरूरत

नई दिल्ली  भारत और एशिया के दूसरे सबसे बड़े रईस गौतम अडानी (Gautam Adani) अब जहाज निर्माण यानी शिपबिल्डिंग में उतरने की योजना बना रहे हैं। गुजरात के मुंद्रा में अडानी ग्रुप (Adani Group) के फ्लैगशिप पोर्ट पर जहाज बनाने का काम शुरू हो सकता है। इसकी वजह यह है कि चीन, जापान और दक्षिण कोरिया में अधिकांश यार्ड कम से कम 2028 तक पूरी तरह बुक हैं। यही वजह है कि दुनिया में जहाज ऑपरेट करने वाली बड़ी कंपनियों को शिपबिल्डिंग के लिए वैकल्पिक जगहों की तलाश है। इनमें भारत भी शामिल है। इस मौके का फायदा उठाने के लिए अडानी ग्रुप शिपबिल्डिंग में उतरने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। अडानी ग्रुप देश का सबसे बड़ा पोर्ट ऑपरेटर है। मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 में भारत को शीर्ष 10 शिपबिल्डर बनाने और मैरीटाइम अमृत काल विजन में 2047 तक शीर्ष पांच में शामिल होने का लक्ष्य रखा गया है। अडानी ग्रुप का प्लान देश की इस योजना में फिट बैठता है। दुनिया में कमर्शियल शिपबिल्डिंग मार्केट में भारत की हिस्सेदारी महज 0.05% है। दुनिया में कमर्शियल जहाज बनाने वाले देशों की लिस्ट में भारत 20वें स्थान पर है। देश की कुल विदेशी माल-ढुलाई आवश्यकताओं में भारतीय स्वामित्व वाले और भारतीय झंडे वाले जहाजों का हिस्सा लगभग 5% है। अडानी की जहाज निर्माण योजना को मुंद्रा बंदरगाह के लिए 45,000 करोड़ रुपये की विस्तार योजना में शामिल कर लिया गया है। इस योजना को हाल में पर्यावरण मंत्रालय से मंजूरी मिली है। 62 अरब डॉलर का मार्केट अडानी ग्रुप ऐसे समय जहाज निर्माण में उतरने की तैयारी कर रहा है जब ग्लोबल शिपिंग इंडस्ट्री डीकार्बनाइजेशन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए धीरे-धीरे ग्रीन शिप की ओर बढ़ रही है। एक अनुमान के अनुसार मौजूदा बेड़े को बदलने के लिए अगले 30 वर्षों में 50,000 से अधिक जहाजों का निर्माण किया जाना है। अडानी ग्रुप ने इस बारे में भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं दिया। केपीएमजी की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2047 तक भारत का कमर्शियल शिपबिल्डिंग मार्केट 62 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। साथ ही इससे जुड़े सहायक उद्योग के 37 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। इससे 1.2 करोड़ लोगों को नौकरी मिलने की उम्मीद है। केपीएमजी के अनुसार मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 और अमृत काल विजन लक्ष्यों तक पहुंचने के लिए भारतीय शिपयार्ड्स के सालाना उत्पादन को 2030 तक 0.072 मिलियन ग्रॉस टन से बढ़ाकर 0.33 मिलियन ग्रॉस टन और 2047 तक 11.31 मिलियन ग्रॉस टन तक बढ़ाने की आवश्यकता है। साल 2047 तक घरेलू कार्गो क्षमता में वृद्धि के अलावा भारतीय विदेशी कार्गो की न्यूनतम 5% ढुलाई प्राप्त करने के लिए, अतिरिक्त बेड़े की क्षमता की आवश्यकता है। इसके परिणामस्वरूप घरेलू जहाज निर्माण की मांग अगले 23 वर्षों में 59.74 मिलियन ग्रॉस टन होने का अनुमान है। इनमें पुराने जहाजों का रिप्लेसमेंट भी शामिल है। क्या है एडवांटेज जानकारों का कहना है कि किसी नई कंपनी को इस सेक्टर में काफी समय लग सकता है लेकिन अडानी ग्रुप के लिए परिस्थितियां आसान हैं। उसके पास इसके लिए जमनी और और पर्यावरणीय मंजूरी है। हैवी इंजीनियरिंग में अडानी ग्रुप का यह पहला कदम होगा। एसईजेड का दर्जा मिलने से अडानी ग्रुप को अनेक वित्तीय और टैक्स चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी। इन चुनौतियों के कारण स्थानीय कंपनियां चीन की शिपबिल्डिंग कंपनियों के साथ होड़ करने में असमर्थ है। भारत में आठ सरकारी यार्ड और करीब 20 निजी यार्ड हैं। लार्सन एंड टुब्रो चेन्नई के पास कट्टुपल्ली में एक यार्ड ऑपरेट करती है।  

निफ्टी 30 अंकों की बढ़त के साथ 24351 के लेवल पर खुला

मुंबई शेयर मार्केट की शुरुआत आज दमदार रही। सेंसेक्स 146 अंकों की बढ़त के साथ 810107 के लेवल पर खुला। जबकि, निफ्टी 30 अंकों की बढ़त के साथ 24351 के लेवल पर खुला।  ग्लोबल मार्केट में काफी हद तक पॉजिटिव मोमेंटम को देखते हुए सेंसेक्स और निफ्टी 50 के मंगलवार को सपाट खुलने की उम्मीद है।। क्योंकि, आज एशियाई बाजारों में ज्यादातर तेजी रही, जबकि अमेरिकी शेयर बाजार मिश्रित रूप से बंद हुए, जिसमें एसएंडपी 500 और नैस्डैक रिकॉर्ड हाई लेवल पर क्लोज हुए। आज सेंसेक्स के लिए संकेत इस प्रकार हैं एशियाई बाजार  लाइव मिंट के मुताबिक एशियाई बाजारों में मंगलवार को तेजी रही। जापान के निक्केई 225 में 1% की तेजी आई, जबकि टॉपिक्स में 0.27% की बढ़त दर्ज की गई। दक्षिण कोरिया के कोस्पी में 0.3% की वृद्धि हुई। गिफ्ट निफ्टी  गिफ्ट निफ्टी 24,387 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जो निफ्टी फ्यूचर्स के पिछले बंद से 7 अंक अधिक है। यह भारतीय शेयर बाजार सूचकांकों के लिए एक सपाट शुरुआत का संकेत देता है। वॉल स्ट्रीट  अमेरिकी शेयर बाजार सोमवार को ज्यादातर तेजी के साथ बंद हुए। इसमें एसएंडपी 500 और नैस्डैक ने ताजा मुद्रास्फीति के आंकड़ों और फेड चेयर पॉवेल की टिप्पणी से पहले रिकॉर्ड हाई लेवल पर बंद हुए। डॉऊ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.08% गिरकर 39,344.79 पर आ गया, जबकि एसएंडपी 500 0.10% बढ़कर 5,572.85 पर पहुंच गया। नैस्डैक 0.28% बढ़कर 18,403.74 पर बंद हुआ। यह इसकी लगातार पांचवां हाइ लेवल पर क्लोजिंग थी।

देश की सबसे बड़ी कार व निर्माता कंपनी मारुति ने 2023-24 में 4,47,750 इकाई की आपूर्ति रेलवे से की

नई दिल्ली  मारुति सुजुकी इंडिया के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी हिसाशी ताकेउची ने कहा कि कंपनी अगले सात से आठ वर्षों में अपने कारखानों में बनाए जाने वाले 35 प्रतिशत वाहनों की आपूर्ति के लिए भारतीय रेलवे का इस्तेमाल करने की योजना बना रही है। रेलवे के जरिए वाहन आपूर्ति का हिस्सा 2014-15 में पांच प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2023-24 में 21.5 प्रतिशत हो गया। देश की सबसे बड़ी कार व निर्माता कंपनी ने 2014-15 में रेलवे के जरिए 65,700 इकाइयों की आपूर्ति की थी जो 2023-24 में बढ़कर 4,47,750 इकाई हो गई। ताकेउची ने कहा, ‘‘ वित्त वर्ष 2030-31 तक हमारी उत्पादन क्षमता करीब दोगुना होकर 20 लाख इकाई से 40 लाख इकाई हो जाएगी। हम अगले सात से आठ वर्षों करीब 35 प्रतिशत वाहनों की आपूर्ति रेलवे से करने की योजना बना रहे हैं।’’ मारुति सुजुकी ने अभी तक भारतीय रेलवे के जरिए 20 लाख से अधिक गाड़ियां भेजी हैं। वह रेलवे के जरिए 450 से अधिक शहरों में 20 जगहों पर गाड़ियां पहुंचाती है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस वर्ष की शुरुआत में पीएम गति शक्ति कार्यक्रम के तहत मारुति सुजुकी की गुजरात सुविधा में देश की पहली ‘ऑटोमोबाइल इन-प्लांट रेलवे साइडिंग’ का उद्घाटन किया था।    

ग्रीन हाइड्रोजन के पहले चरण में अडानी का नौ अरब डॉलर के भारी-भरकम निवेश का प्लान, 10,000 लोगों को रोजगार मिलेगा

नई दिल्ली  भारत और एशिया के दूसरे सबसे बड़े अमीर गौतम अडानी (Gautam Adani) ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में बड़ा दांव खेलने की तैयारी में हैं। मिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक अडानी ग्रुप (Adani Group) ने ग्रीन हाइड्रोजन बिजनस के पहले चरण के लिए नौ अरब डॉलर के निवेश की योजना बनाई है। इसमें से चार अरब डॉलर का निवेश मशीनरी, मैन्युफैक्चरिंग प्लांट आदि पर किया जाएगा जबकि पांच अरब डॉलर 5 गीगावॉट इलेक्ट्रोलाइजर मेकिंग कैपिसिटी के विकास पर खर्च किए जाएंगे। माना जा रहा है कि इससे करीब 10,000 लोगों को रोजगार मिलेगा। अडानी ग्रुप ने तीन मिलियन टन ग्रीन हाइड्रोजन कैपेसिटी का टारगेट रखा है। इसमें से एक मिलियन टन कैपेसिटी 2030 तक हासिल करने का लक्ष्य है। अडानी कई बार यह दावा कर चुके हैं कि उनकी दुनिया की सबसे सस्ती ग्रीन हाइड्रोजन बनाएगी। सूत्रों के मुताबिक ग्रीन हाइड्रोजन का प्रॉडक्शन शुरू होने के बाद अडानी ग्रुप इसे जहाजों के जरिए यूरोप और कुछ एशियाई देशों को एक्सपोर्ट करेगा। इस सेक्टर में अडानी ग्रुप का मुकाबला लार्सन एंड टुब्रो, इंडियन ऑयल और ऑयल इंडिया से हो सकता है। ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने में ग्रीन हाइड्रोजन की भूमिका को अहम माना जा रहा है। ग्रीन हाइड्रोजन पानी और क्लीन इलेक्ट्रिसिटी से बनती है और इसे भविष्य का ईंधन कहा जा रहा है। मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने भी ग्रीन एनर्जी में में 75 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की है। इलेक्ट्रोलाइजर सूत्रों का कहना है कि अडानी ग्रुप के ग्रीन हाइड्रोजन बिजनस का पहले चरण एल्केलाइन इलेक्ट्रोलाइजर पर आधारित होगा। इसमें एक किलो हाइड्रोजन बनाने के लिए कम से कम नौ किलो पानी की जरूरत होती है। बाद में एनियन एक्सचेंज मेंबरेन पर आधारित इलेक्ट्रोलाइजर बनाएगा। ग्रीन बिजनस के लिए अडानी ग्रुप ने अडानी न्यू इंडस्ट्रीज नाम से एक कंपनी बनाई है। पिछले फाइनेंशियल ईयर में अडानी ग्रुप की टोटल इनकम में इसकी हिस्सेदारी नौ फीसदी थी। अडानी ग्रुप की बिजनस कई सेक्टर्स में फैला है और यह मार्केट कैप के हिसाब से टाटा ग्रुप और रिलायंस के बाद देश का तीसरा सबसे बड़ा औद्योगिक घराना है।  

ICICI बैंक ने दी वॉर्निंग, ईमेल, कॉल और मेसेज से रहें अलर्ट, साइबर क्रिमिनल्स की नई चाल

मुंबई यूजर्स के ऊपर एक बड़े फ्रॉड का खतरा मंडरा रहा है। यह खतरा बैंकिंग से जुड़ा है। इसी को देखते हुए ICICI बैंक ने अपने ग्राहकों के लिए वॉर्निंग जारी की है। टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार ICICI बैंक ने कहा है कि साइबर क्रिमिनल यूजर्स को एक्सटॉर्शन स्कैम में फंसा रहे हैं। इस स्कैम में साइबर क्रिमिनल इंडिविजुअल या ऑर्गनाइजेशन को मेसेज भेज कर सेंसिटिव और सीक्रेट इन्फर्मेशन को लीक करने की धमकी देते हैं। ऐसा न करने के लिए ये जालसाज बैंक के कस्टमर से पैसों की मांग करते हैं। बैंक इस स्कैम के बारे में ग्राहकों को ईमेल भेज कर सतर्क कर रहा है। क्या है एक्सटॉर्शन स्कैम एक्सटॉर्शन स्कैम ईमेल से शुरू होता है। इसमें साइबर क्रिमिनल दावा करते हैं कि उनके पास टारगेट किए गए यूजर के प्राइवेट फोटो और पर्सनल डेटा मौजूद है। अपने शिकार को डराने के लिए ये जालसाज इन फोटो और प्राइवेट डेटा को पैसे न मिलने पर फ्रेंड, फैमिली के साथ ही पब्लिक प्लैटफॉर्म लीक करने की धमकी देते हैं। कई मामलों में साइबर क्रिमिनल्स के पास ऐसा कोई डेटा नहीं होता, लेकिन यूजर डर कर इनकी चाल में फंस जाते हैं। ऐसे करें एक्सटॉर्शन स्कैम की पहचान आईसीआईसीआई बैंक ने भेजे गए ईमेल में इस तरह के स्कैम की पहचान करने के कुछ तरीकों के बारे में बताया है। बैंक के अनुसार साइबर क्रिमिनल हैकर को जाल में फंसाने के लिए कॉल, मेसेज या ईमेल कर सकते हैं, जिसमें वे खुद को किसी सरकारी विभाग या कलेक्शन एजेंसी का बता सकते हैं। साइबर क्रिमिनल अपने शिकार को लीगल ऐक्शन और गिरफ्तारी की धमकी देते हैं। डरे हुए बैंक कस्टमर को फिर स्कैमर पैसों के बदले मामले को रफा-दफा करने का ऑप्शन देते हैं। साइबर क्रिमिनल हैकर से पासपोर्ट डीटेल, डेट ऑफ बर्थ और बैंक डीटेल भी मांग सकते हैं। ग्राहकों जल्द से जल्द पैसे दे दे इसके लिए ये जालसाज पुलिस के घर तक पहुंचने का भी झूठा दावा करते हैं। खुद को ऐसे रखें सेफ 1- पैसे की मांग करने वाले किसी भी अनजान कॉलर से परेशान न हों और कॉलर को कोई जवाब न दें। 2- किसी को भी गिफ्ट, हैंपर, वाउचर या वायर ट्रांसफर में पेमेंट न करें। 3- कॉलर के दिए गए किसी भी कॉन्टैक्ट डीटेल को यूज न करें। ऑर्गनाइजेशन में डायरेक्ट कॉल करके कॉलर की आइडेंटिटी को वेरिफाइ करें। 4- किसी भी अनजान इंसान को पैसे न भेजें। साथ ही किसी के साथ भी ईमेल या फोन पर क्रेडिट कार्ड, ऑनलाइन अकाउंट डीटेल, डाइवर लाइसेंस और पासपोर्ट की डीटेल को शेयर न करें। 5- अनजान लिंक से आए ईमेल में दिए गए अटैचमेंट पर क्लिक न करें। साथ ही इसमें दी गई किसी फाइल को डाउनलोड करें। ऐसा करने से आपका कंप्यूटर में वायरस आ सकता है। फेक Extortion Scam को कैसे पहचानें ? मीडिया रिपोर्ट्स में ICICI Bank के ईमेल के हवाले से बताया है कि आप इस स्कैम को कैसे पहचान सकते हैं. इसके लिए आपको हाल ही में होने वाले लेटेस्ट स्कैम के बारे में पता होना चाहिए. अक्सर इस तरह के स्कैम में एक अनजान नंबर से कॉल आता है, कॉल करने वाला खुद को किसी सरकारी एजेंसी का ऑफिसर बताता है या फिर पुलिस वाला भी बता सकता है, जबकि ये फेक होते हैं. फेक केस को लेकर डरा और धमका सकता हैं इसके बाद ये आपको फेक केस, ड्रग केस या मनी लाउंड्रिंग केस को लेकर धमकी दे सकते हैं, यहां तक की गिरफ्तारी तक का डर दिखा सकते हैं. इसके अलावा वे साइबर ठग विक्टिम को इतना डरा देते हैं कि आपको गिरफ्तार करने आपके घर आ रहे हैं. इसके बाद वे आपकी जरूरी डिटेल्स, ओटीपी या फिर सीधे रुपयों की डिमांड कर सकते हैं. लगा सकते हैं लाखों रुपये का चूना इस तरह की कॉल पर बैंक डिटेल्स या फिर रुपयों को ट्रांसफर नहीं करना चाहिए. इसके अलावा किसी भी लिंक आदि पर क्लिक नहीं करना है. ना ही स्कैमर्स के कहने पर कोई ऐप इंस्टॉल करना है. ऐसे में आपको नजदीकी पुलिस स्टेशन जाना चाहिए और उस नंबर के बारे में बताना चाहिए. इसके बारे में आप साइबर सेल में भी शिकायत कर सकते हैं.

आगामी आम बजट में होटल को विलासिता, उत्पाद के रूप में वर्गीकृत करने की नीति में बदलाव होना चाहिए

नई दिल्ली Budget 2024: आतिथ्य क्षेत्र की कंपनियां चाहती हैं कि सरकार आगामी आम बजट में होटल क्षेत्र को बुनियादी ढांचा क्षेत्र का दर्जा प्रदान करे, इससे नई संपत्तियों में निवेश अधिक आकर्षक बन सकेगा। उनका कहना है कि होटल क्षेत्र देश की वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और इसे ‘लक्जरी’ के रूप में वर्गीकृत नहीं किया जाना चाहिए। इको-फ्रेंडली होटल्स को मिले सब्सिडी इसके अलावा यह उद्योग चाहता है कि सरकार को आतिथ्य क्षेत्र को टिकाऊ और पर्यावरणनुकूल व्यवहार को अपनाने के लिए कर छूट या सब्सिडी के रूप में प्रोत्साहन देने पर पर विचार करना चाहिए। आतिथ्य क्षेत्र की कंपनियां चाहती हैं कि सरकार आगामी बजट में पर्यटन एजेंडा में तेजी लाने पर ध्यान दे क्योंकि यह देश के आतिथ्य क्षेत्र को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में योगदान देने का महत्वपूर्ण ‘इंजन’ और रोजगार सृजन का जरिया बनाने का बड़ा अवसर है। ये है प्रमुख मांगे भारतीय होटल संघ (एचएआई) के अध्यक्ष के बी काचरू ने कहा, ‘‘यह क्षेत्र ऊंचे कराधान के बोझ से दबा है। इसके अलावा लाइसेंस, मंजूरी और अनुपालन की प्रक्रिया भी काफी महंगी बैठती है। होटल के परिचालन की लागत काफी ऊंची है।’’ उन्होंने कहा कि इन वजहों से होटल में निवेश जोखिम भरा हो जाता है। काचरू ने कहा कि निवेश की बेहतर दर के साथ होटल निवेश को और अधिक आकर्षक बनाने और कारोबार सुगमता को बढ़ावा देने की जरूरत है। उन्होंने आगे कहा कि आगामी आम बजट में होटल को विलासिता, विशिष्ट या ‘नुकसान’ वाले उत्पाद के रूप में वर्गीकृत करने की नीति में बदलाव होना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के दृष्टिकोण-2047 को हासिल करने के लिए यह आतिथ्य क्षेत्र की क्षमता का लाभ उठाने का अवसर है। काचरू ने कहा कि बजट के लिए एचएआई की प्रमुख नीतिगत सिफारिश यह है कि सरकार होटल क्षेत्र को बुनियादी ढांचे का दर्जा दे। इसी तरह के विचार व्यक्त करते हुए इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) पुनीत छटवाल ने कहा, ‘‘क्षेत्र को बुनियादी ढांचे का दर्जा मिलने से निवेश बेहतर हो सकेगा। इससे क्षेत्र देश को 2027 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे पाएगा।’’

बजट में ऐलान होने की संभवावना, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में ₹10 लाख हो सकता है बीमा कवर

नई दिल्ली Budget 2024: केंद्र सरकार अपनी प्रमुख आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) के लाभार्थियों की संख्या आगामी तीन साल के दौरान दोगुना करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। सरकार शुरुआत में 70 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों को इसके दायरे में लाने और बीमा कवरेज को बढ़ाकर 10 लाख रुपये प्रति वर्ष करने पर मंथन कर रही है। क्या है डिटेल आधिकारिक सूत्रों ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि यदि प्रस्तावों को मंजूरी दी जाती है तो राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के अनुमान के अनुसार, सरकारी खजाने पर प्रति वर्ष 12,076 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा। सूत्रों ने कहा, ‘‘अगले तीन वर्षों में एबी-पीएमजेएवाई के तहत लाभार्थियों की संख्या दोगुना करने पर चर्चा हो रही है, जिसे लागू किया गया तो देश की दो-तिहाई से अधिक आबादी को स्वास्थ्य कवर मिलेगा। परिवारों को कर्ज के दलदल में धकेलने वाले कुछ सबसे बड़े कारणों में चिकित्सा व्यय भी एक है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘कवरेज राशि की सीमा को मौजूदा पांच लाख रुपये से दोगुना कर 10 लाख रुपये करने के प्रस्ताव को अंतिम रूप देने पर भी विचार-विमर्श चल रहा है।’’ बजट में हो सकता है ऐलान इस महीने के अंत में पेश होने वाले केंद्रीय बजट में इन प्रस्तावों या इसके कुछ हिस्सों की घोषणा होने की उम्मीद है। अंतरिम बजट 2024 में सरकार ने ‘एबी-पीएमजेएवाई’ के लिए आवंटन बढ़ाकर 7,200 करोड़ रुपये कर दिया जो 12 करोड़ परिवारों को माध्यमिक और तृतीयक देखभाल अस्पताल में भर्ती के लिए प्रति वर्ष पांच लाख रुपये प्रति परिवार का स्वास्थ्य कवर प्रदान करता है। आयुष्मान भारत हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन (पीएम-एबीएचआईएम) के लिए 646 करोड़ रुपये आवंटित किए गए। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 27 जून को संसद की संयुक्त बैठक में अपने अभिभाषण में कहा था कि 70 वर्ष से अधिक उम्र के सभी बुजुर्गों को भी अब आयुष्मान भारत योजना के तहत कवर किया जाएगा और मुफ्त इलाज का लाभ मिलेगा। वहीं, एक अन्य सूत्र ने कहा कि 70 वर्ष से अधिक उम्र वालों को मिलाकर इस योजना के लाभार्थियों की संख्या लगभग चार-पांच करोड़ बढ़ जाएगी। क्या है मकसद एबी-पीएमजेएवाई के लिए पांच लाख रुपये की सीमा 2018 में तय की गई थी। कवर राशि को दोगुना करने का उद्देश्य उच्च लागत वाले उपचार जैसे प्रतिरोपण, कैंसर आदि के मामले में परिवारों को राहत प्रदान करना है। नीति आयोग ने अक्टूबर 2021 में प्रकाशित ‘भारत के लापता मध्य के लिए स्वास्थ्य बीमा’ शीर्षक वाली अपनी रिपोर्ट में इस योजना का विस्तार करने का सुझाव दिया था। इसमें कहा गया था कि लगभग 30 प्रतिशत आबादी स्वास्थ्य बीमा से वंचित है, जो भारतीय आबादी में स्वास्थ्य बीमा कवरेज में अंतर को उजागर करती है। लगभग 20 प्रतिशत आबादी सामाजिक स्वास्थ्य बीमा और निजी स्वैच्छिक स्वास्थ्य बीमा के माध्यम से कवर की जाती है, जो मुख्य रूप से उच्च आय समूहों के लिए तैयार की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि शेष 30 प्रतिशत आबादी स्वास्थ्य बीमा से वंचित है, पीएमजेएवाई में मौजूदा कवरेज अंतराल और योजनाओं के बीच व्याप्ति (ओवरलैप) के कारण स्वास्थ्य कवर से वंचित वास्तविक आबादी अधिक है। रिपोर्ट में कहा गया है कि स्वास्थ्य कवर से वंचित इस आबादी को ‘लापता मध्य’ (मिसिंग मिडल) कहा जाता है।

Xiaomi चुपके से भारत में अपनी पहली इलेक्ट्रिक कार लेकर आ गया, कंपनी कार को बेंगलुरू में शोकेस करेगी

 बेंगलुरू Xiaomi चुपके से भारत में अपनी पहली इलेक्ट्रिक कार लेकर आ गया है. इस कार को कंपनी ने पिछले साल के अंत में चीन में इंट्रोड्यूस किया था. कंपनी इस कार को भारत में अगले हफ्ते दिखा सकती है. हम बात कर रहे हैं Xiaomi SU7 की. हालांकि, कंपनी ने इस कार के लॉन्च और अनवील को लेकर कोई जानकारी नहीं दी है. रिपोर्ट्स की मानें तो कंपनी इस कार को बेंगलुरू में शोकेस कर सकती है. कंपनी का कहना है कि अभी उनका इस कार को लॉन्च करने का कोई प्लान नहीं है. ब्रांड अगले हफ्ते बेंगलुरू में एक इवेंट कर रहा है, जहां इस कार को दिखा सकता है. चीन में लॉन्च हो चुकी है ये कार टाइम ऑफ इंडिया की रिपोर्ट की मानें, तो संभवतः कंपनी इस कार को भारत में शोकेस करके लोगों को रिस्पॉन्स देखना चाहती है. बता दें कि Xiaomi को भारत में आए दस साल हो गए हैं. कंपनी ने पहली बार 2014 में भारत में एंट्री की थी. वहीं Xiaomi SU7 को ब्रांड चीन में लॉन्च कर चुका है. चीन में कंपनी ने SU7 की डिलीवरी मार्च में शुरू की है. इसका बेस मॉडल 30 हजार डॉलर (लगभग 25 लाख रुपये) की कीमत पर लॉन्च हुआ था. ये कार Tesla Model 3 से चीन में 4000 डॉलर (लगभग 3.3 लाख रुपये) सस्ता है. भारत लाने का क्या है मकसद? रिपोर्ट की मानें तो कंपनी इस कार को Xiaomi की ताकत दिखाने के लिए पेश कर रही है. कंपनी दिखाना चाहती है कि उनके पोर्टफोलियो में स्मार्टफोन के अलावा दूसरे प्रोडक्ट्स भी हैं. कंपनी अपने पोर्टफोलियो को शोकेस करना चाहती है, जिससे वो बता सके कि स्मार्टफोन के अलावा उनकी पकड़ दूसरे बड़े कंज्यूमर्स प्रोडक्ट्स में भी है. Xiaomi SU7 को कंपनी ने दो ऑप्शन में लॉन्च किया है. एक वेरिएंट सिंगल चार्ज में 668 किलोमीटर्स तक चल सकता है. वहीं एक्सटेंडेड रेंज वाले वेरिएंट में 800Km की रेंग मिलेगी. ये कार डिस्प्ले में होगी और इसके साथ ही कंपनी कई दूसरे होम अप्लायंस को शोकेस कर सकती है. स्मार्टफोन भी होगा लॉन्च बता दें कि कंपनी अगले हफ्ते 9 जुलाई को अपना नया स्मार्टफोन लॉन्च कर रही है. ये ब्रांड का बजट फोन होगा, जो 15 हजार रुपये से कम बजट में आएगा. कंपनी Redmi 13 5G को लॉन्च करने वाली है. इसके साथ ही ब्रांड पावरबैंक और दूसरे प्रोडक्ट्स को इंट्रोड्यूस कर सकता है.  

अर्थव्यवस्था में तेज विकास दर होने के कारण देश में लग्जरी घरों की मांग में इजाफा हो रहा

नई दिल्ली भारत के लग्जरी रियल एस्टेट मार्केट में तेजी देखने को मिल रही है। इसकी वजह अर्थव्यवस्था में तेज विकास दर होना है, जिसके कारण देश में लग्जरी घरों की मांग में इजाफा हो रहा है। प्रॉपर्टी कंसलटेंट फर्म नाइट फ्रैंक की ओर से जारी ‘इंडिया रियल एस्टेट: रेजीडेंशियल और ऑफिस (जनवरी-जून 2024)’ रिपोर्ट में बताया गया है कि इस साल देश में लग्जरी घरों की बिक्री में बड़ा इजाफा देखने को मिल रहा है। 2024 की छमाही में एक करोड़ रुपये से ऊपर के घरों की बिक्री कुल बिक्री का 41 प्रतिशत रही है। यह आंकड़ा 2023 की समान अवधि में 30 प्रतिशत था। 2024 की पहली छमाही में देश के आठ बड़े शहरों जिसमें मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरू, पुणे और हैदराबाद शामिल हैं, वहां घरों की बिक्री में पिछले वर्ष के मुकाबले 11 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली है। इस अवधि में कुल 1,73,241 घरों की बिक्री हुई है, जो कि 11 वर्षों का उच्चतम स्तर है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 के पहले छह महीने में कुल घरों की बिक्री का 27 प्रतिशत बजट घर थे, जबकि 2023 की समान अवधि में यह आंकड़ा 32 प्रतिशत था। मुंबई देश का सबसे बड़ा रेजिडेंशियल मार्केट है। यहां 47,259 घरों की बिक्री हुई है। पिछले साल की अपेक्षा देश की आर्थिक राजधानी में एक करोड़ रुपये से अधिक के घरों की मांग में 117 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। इस दौरान बिक्री में सालाना आधार पर 16 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिली थी। वहीं, दिल्ली एनसीआर में 28,998 यूनिट्स और बेंगलुरु में 27,404 यूनिट्स की बिक्री हुई है। कुल घरों की बिक्री में इन तीन शहरों की हिस्सेदारी 59 प्रतिशत है। नाइट फ्रैंक इंडिया के वरिष्ठ कार्यकारी निदेशक – अनुसंधान, सलाहकार, बुनियादी ढांचा और मूल्यांकन, गुलाम जिया ने कहा कि चालू वर्ष के पहले छह महीने में 1,73,000 यूनिट्स से ज्यादा की बिक्री पिछले एक दशक में सबसे ज्यादा है। प्रीमियम कैटेगरी में तेजी से इजाफा हो रहा है। यह 2018 की पहली छमाही में 18 प्रतिशत था, जो कि 2024 की छमाही में बढ़कर 34 प्रतिशत हो गया है। भारतीय अर्थव्यवस्था के बढ़ने के कारण हमें लगता है कि आने वाले समय में भी बिक्री में बढ़त जारी रहेगी।  

एफएमसीजी क्षेत्र में 2024-25 में 7-9 प्रतिशत की राजस्व वृद्धि का अनुमान: क्रिसिल रेटिंग्स

कोलकाता  दैनिक उपयोग के घरेलू सामान (एफएमसीजी) बनाने वाली कंपनियों की राजस्व वृद्धि चालू वित्त वर्ष में 7-9 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल रेटिंग्स ने  रिपोर्ट जारी कर कहा कि चालू वित्त वर्ष (2024-25) में अपेक्षित राजस्व वृद्धि को बिक्री की मात्रा बढ़ने से समर्थन मिलेगा। इसमें ग्रामीण मांग के पुनरुद्धार और स्थिर शहरी मांग का विशेष योगदान होगा। वित्त वर्ष 2023-24 में एफएमसीजी क्षेत्र की अनुमानित वृद्धि पांच से सात प्रतिशत थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि खाद्य एवं पेय (एफ एंड बी) खंड के लिए प्रमुख कच्चे माल की कीमतों में मामूली वृद्धि के साथ बिक्री एकल अंक में बढ़ने का अनुमान है। हालांकि, व्यक्तिगत देखभाल और घरेलू देखभाल क्षेत्रों के लिए प्रमुख कच्चे माल की कीमतें स्थिर रहने की संभावना है। क्रिसिल रेटिंग्स के निदेशक रवींद्र वर्मा ने कहा, ‘उत्पाद खंडों और फर्मों के लिए राजस्व वृद्धि अलग-अलग होगी। ग्रामीण मांग में सुधार से इस वित्त वर्ष में एफएंडबी खंड में आठ-नौ प्रतिशत की वृद्धि होने की संभावना है। व्यक्तिगत देखभाल खंड में छह से सात प्रतिशत और घरेलू देखभाल में आठ से नौ प्रतिशत की वृद्धि होने की संभावना है।’ रिपोर्ट में कहा गया है कि एफएमसीजी कंपनियां अधिग्रहण अवसरों पर नजर बनाए रखेंगी, जिससे उन्हें उत्पाद पेशकश का विस्तार करने में मदद मिलेगी।    

भारत में हुए 21.4 अरब डॉलर मूल्य के 501 सौदे, 2022 की दूसरी तिमाही के बाद सबसे बड़ा आंकड़ा

नई दिल्ली भारत में अप्रैल से जून के बीच 501 सौदे हुए हैं, जिनका मूल्य 21.4 अरब डॉलर था। यह 2022 की दूसरी तिमाही के बाद सबसे बड़ा आंकड़ा है। इसकी वजह राजनीतिक स्थिरता और आने वाले बजट को लेकर सरकार की नीति स्पष्ट होना है, जिससे निवेशकों का विश्वास बढ़ा है। आने वाले छह महीनों में सौदों की गतिविधियों में और बढ़त देखने को मिल सकती है।शुक्रवार को जारी हुई एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। ग्रांट थॉर्नटन भारत डीलट्रैकर के मुताबिक, विलय एवं अधिग्रहण और प्राइवेट इक्विटी (पीई) सौदों की संख्या 467 रही और इनकी वैल्यू 14.9 अरब थी। अप्रैल से जून के बीच वॉल्यूम में 9 प्रतिशत का इजाफा देखे को मिला। सौदों में बढ़त की वजह अदाणी ग्रुप की ओर से इंडस्ट्रियल मटेरियल और पोर्ट सेक्टर में चार उच्च वैल्यू वाले सौदे करना था, जो कि पिछली तिमाही हुई डील की वैल्यू का 52 प्रतिशत थी। 2024 की दूसरी तिमाही में एक अरब डॉलर की एक और 30 हाई-वैल्यू डील (100 मिलियन डॉलर से अधिक) हुई है और इस वजह पिछली तिमाही के मुकाबले हाई-वैल्यू डील में 58 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। पारंपरिक सेक्टर्स जैसे फार्मा और मैन्युफैक्चरिंग में मजबूल डील देखने को मिली है, जो कि कुल डील का करीब 50 प्रतिशत था। 2024 की दूसरी तिमाही में 14 आईपीओ आए, जिन्होंने करीब 4.2 अरब डॉलर की राशि जुटाई। यह 2022 की दूसरी तिमाही के बाद सबसे बड़ा आंकड़ा था। ग्रांट थॉर्नटन भारत में पार्टनर (ग्रोथ) शांति विजेता ने कहा, “तिमाही में मजबूत निजी इक्विटी गतिविधि और बड़े घरेलू सौदे देखे गए। वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण सीमा पार सौदों में गिरावट के बावजूद, घरेलू निवेश मजबूत रहा है।”

सरकारी तेल कंपनियां ब्राजील से तेल की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए एक लॉन्ग टर्म समझौता चाहती है

नई दिल्ली  देश में पेट्रोल और डीजल की कीमत में मार्च से कोई बदलाव नहीं हुआ है। आम चुनावों से पहले सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर आम लोगों को राहत दी है। तब पूरे देश में पेट्रोल और डीजल की कीमत में प्रति लीटर दो रुपये की कटौती की गई थी। इस कटौती के बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 94.72 रुपये और डीजल की कीमत 87.62 रुपये रह गई थी। लेकिन जल्दी ही पेट्रोल-डीजल की कीमत में गिरावट आ सकती है। मिंट की एक खबर के मुताबिक सरकारी तेल कंपनियां ब्राजील से कच्चे तेल की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए एक लॉन्ग टर्म समझौता करने के वास्ते बातचीत कर रही हैं। भारत दुनिया में कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा आयातक है और पिछले कुछ समय से अपनी सप्लाई को डाइवर्सिफाई करने में लगा है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि सरकारी तेल कंपनियां इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन और भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन ब्राजील की दिग्गज तेल कंपनी पेट्रोब्रास के साथ बातचीत कर रही हैं। ब्राजील दुनिया में कच्चे तेल का सातवां बड़ा उत्पादक और एक्सपोर्टर है। भारतीय कंपनियों के अधिकारियों ने अप्रैल में ब्राजील का दौरा किया था। बीपीसीएल अभी अपनी रिफाइनरीज में ब्राजील के कच्चे तेल की टेस्टिंग कर रही है। जल्दी ही कॉन्ट्रैक्ट पर साइन होने की उम्मीद है। हालांकि अभी यह फाइनल नहीं हुआ है कि ब्राजील से कितना कच्चा तेल मंगाया जाएगा। क्यों बढ़ रही है कीमत सूत्रों का कहना है कि भारतीय कंपनियां ब्राजील की कंपनी के साथ अलग-अलग बातचीत कर रही हैं लेकिन इसकी शर्तें एक ही तरह की हो सकती हैं। भारत परंपरागत रूप से पश्चिम एशिया से कच्चा तेल मंगाता रहा है क्योंकि यह सस्ता पड़ता है। लेकिन जानकारों का कहना है कि जब कंपनियां कंसोर्टियम के रूप में मोलभाव करती हैं तो उन्हें सस्ता पड़ता है। भारतीय कंपनियां ऐसे वक्त ब्राजील से कच्चे तेल की सप्लाई के लिए बातचीत कर रही हैं जब पश्चिम एशिया और यूक्रेन में संघर्ष और होरमुज की खाड़ी से सप्लाई में बाधा के कारण कच्चे तेल की कीमत बढ़ रही है। भारत के तेल आयात में ब्राजील की हिस्सेदारी बहुत कम है। पिछले फाइनेंशियल ईयर में भारत ने ब्राजील से 1.46 अरब डॉलर का कच्चा तेल आयात किया था जबकि भारत का कुल ऑयल बिल 139.85 अरब डॉलर रहा था। पिछले फाइनेंशियल ईयर में भारत का सबसे बड़ा सप्लायर रूस रहा। ब्राजील का तेल उत्पादन पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2023 में देश में कच्चे तेल का उत्पादन करीब 13 फीसदी बढ़कर 34 लाख बैरल प्रतिदिन रहा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आज कच्चा तेल मामूली गिरावट के साथ ट्रेड कर रहा है। ब्रेंट क्रूड 30 सेंट की गिरावट के साथ 87.17 डॉलर पर ट्रेड कर रहा है।

अनिल अंबानी की आर-इन्फ्रा पर छह बैंकों का 1700 करोड़ रुपये बकाया, कर्ज चुकाएगी महाराष्ट्र सरकार!

मुंबई महाराष्ट्र की एकनाथ शिंदे सरकार ने मुंबई मेट्रो की सबसे पुरानी लाइन मेट्रो 1 को खरीदने की योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। लेकिन राज्य मंत्रिमंडल ने एमएमआरडीए (MMRDA) की कार्यकारी समिति को एकमुश्त निपटान के माध्यम से मुंबई मेट्रो वन प्राइवेट लिमिटेड (MMOPL) के 1,700 करोड़ रुपये के कर्ज का मूल्यांकन करने का निर्देश दिया है। 11.4 किमी लंबा मेट्रो-1 कॉरिडोर वर्सोवा-अंधेरी-घाटकोपर के बीच है। यह मुंबई मेट्रो का एकमात्र कॉरिडोर है जिसे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के जरिए बनाया गया था। इसके लिए एक स्पेशल पर्पज वीकल MMOPL बनाई गई थी। इसमें एमएमआरडीए की 26% और अनिल अंबानी (Anil Ambani) की कंपनी रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर (Reliance Infrastructure) की 74% हिस्सेदारी है। इस कॉरिडोर में रोजाना 4.6 लाख यात्री सफर करते हैं। इस न्यूज से रिलायंस इन्फ्रा का शेयर करीब 10 फीसदी उछल गया। शेयर मार्केट में गिरावट के बावजूद कंपनी का शेयर बीएसई पर कारोबार के दौरान 206.65 रुपये तक पहुंचा। MMOPL पर कुछ छह बैंकों का बकाया है। इनमें भारतीय स्टेट बैंक, आईडीबीआई बैंक, केनरा बैंक, इंडियन बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और आईआईएफसीएल (यूके) शामिल हैं। मार्च 2024 में कंपनी ने अपने ऋणदाताओं के साथ एक समझौता किया था जिसके तहत अपने पूरे ऋण का निपटान करने के लिए 1,700 करोड़ रुपये का भुगतान करने पर सहमति व्यक्त की गई। इस व्यवस्था के तहत, एमएमआरडीए और एमएमओपीएल ने ऋणदाताओं को 171 करोड़ रुपये का प्रारंभिक भुगतान किया। सूत्रों ने बताया कि अब 26 जून को कैबिनेट की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि एमएमआरडीए की कार्यकारी समिति से एकमुश्त निपटान के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए कहा जाए। कैबिनेट ने पलटा फैसला उल्लेखनीय है कि 11 मार्च को राज्य मंत्रिमंडल ने मेट्रो-1 में रिलायंस इन्फ्रा की 74% हिस्सेदारी को एमएमआरडीए द्वारा 4,000 करोड़ रुपये में खरीदने को मंजूरी दे दी थी। लेकिन एमएमआरडीए ने कहा कि उसके पास इसके लिए पैसे नहीं हैं। उसने राज्य सरकार से फंड देने का अनुरोध किया लेकिन सरकार ने इसे खारिज कर दिया। राज्य मंत्रिमंडल ने हाल ही में अपने खरीद निर्णय को उलट दिया था। अब एमएमआरडीए कमिश्नर इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए एमएमओपीएल के सभी छह ऋणदाताओं के साथ एक बैठक आयोजित करने की योजना बना रहे हैं। अप्रैल 2023 से जून 2024 तक एमएमओपीएल ने 225 करोड़ रुपये से अधिक का ब्याज चुकाया है। एमएमओपीएल को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में दिवालियापन की कार्यवाही का सामना करना पड़ रहा था। आईडीबीआई बैंक ने 133.37 करोड़ रुपये के बकाये पर अक्टूबर 2023 में दिवालियापन की कार्यवाही शुरू की, जबकि एसबीआई ने 416 करोड़ रुपये की चूक के कारण अगस्त 2023 में कार्यवाही शुरू की। एमएमआरडीए ने 170 करोड़ रुपये यानी वन-टाइम सेटलमेंट की 10 फीसदी राशि का भुगतान किया था। उसके बाद एनसीएलटी ने दिवालियापन के मामलों का निपटारा कर दिया था। इस बारे में संपर्क करने पर एमएमओपीएल के प्रवक्ता ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। एमएमआरडीए के अधिकारी भी टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं थे। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि 2,356 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित मेट्रो लाइन 1 घाटे में नहीं है, लेकिन वित्तीय संकट में फंसा अनिल अंबानी ग्रुप इस प्रोजेक्ट से बाहर निकलना चाहता है। एमएमआरडीए और एमएमओपीएल के बीच 2007 में कनसेशन एग्रीमेंट पर साइन हुए थे। यह कॉरिडोर 2014 में ऑपरेशनल हुआ था। इसकी लागत को लेकर भी एमएमओपीएल और एमएमआरडीए के बीच कानूनी लड़ाई चल रही है। एमएमओपीएल का दावा है कि इस कॉरिडोर को बनाने में 4,026 करोड़ रुपये का खर्च आया था जबकि एमएमआरडीए का कहना है कि इसकी मूल लागत 2,356 करोड़ रुपये थी।

RBI की बड़ी कार्रवाई, बनारस मर्केंटाइल को-ऑपरेटिव बैंक का लाइसेंस किया कैंसिल, अब ग्राहकों के पैसे का क्या होगा?

नईदिल्ली  भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए बनारस मर्केंटाइल को-ऑपरेटिव बैंक का लाइसेंस रद्द कर दिया है। इस निर्णय के बाद बैंक के ग्राहकों को असुविधा का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि वे अब अपने खातों में पैसा जमा या निकाल नहीं सकेंगे। दरअसल बैंक की खराब होती वित्तीय स्थिति इस कदम के पीछे का प्रमुख कारण है। बनारस मर्केंटाइल सहकारी बैंक का लाइसेंस रद्द दरअसल भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बनारस मर्केंटाइल को-ऑपरेटिव बैंक का लाइसेंस रद्द करने का फैसला किया है। यह निर्णय बैंक की वित्तीय स्थिति के अत्यधिक खराब होने के कारण लिया गया है। 4 जुलाई के बाद से यह बैंक किसी भी प्रकार का बैंकिंग कार्य नहीं कर सकेगा। जानकारी के अनुसार RBI ने उत्तर प्रदेश के सहकारिता आयुक्त और सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार से बैंक के लिए लिक्विडेटर नियुक्त करने का अनुरोध किया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अनुसार, बनारस मर्केंटाइल को-ऑपरेटिव बैंक के पास न तो आय के पर्याप्त स्रोत हैं और न ही पर्याप्त पूंजी। ऐसे में बैंक का संचालन जमाकर्ताओं के हित में नहीं है। बैंक की आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि वह अपने जमाकर्ताओं को पूर्ण भुगतान करने में असमर्थ है। जानकारी दे दें कि दिसंबर में बैंक पर प्रतिबंध लगाए गए थे और अब लाइसेंस रद्द कर दिया गया है। जानिए कैसे मिलेगा ग्राहकों का पैसा वापस? दरअसल बनारस मर्केंटाइल सहकारी बैंक के जमाकर्ताओं को अपना पैसा निकालने के लिए जमा बीमा और लोन गारंटी निगम (DICGC) के पास आवेदन करना होगा। वहीं बैंक के अनुसार, 99.98% जमाकर्ता DICGC के जरिए अपना पूरा पैसा वापस पा सकते हैं। DICGC किसी भी जमाकर्ता को अधिकतम 5 लाख रुपये तक की राशि लौटाती है। 30 अप्रैल तक, DICGC ने 4.25 करोड़ रुपये का भुगतान पहले ही कर दिया है। जमाकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण जानकारी: लाइसेंस रद्द: 4 जुलाई के बाद से बनारस मर्केंटाइल को-ऑपरेटिव बैंक कोई भी बैंकिंग कारोबार नहीं कर पाएगा। DICGC आवेदन: जमाकर्ताओं को DICGC के माध्यम से अपने पैसे की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। अधिकतम वापसी: DICGC अधिकतम 5 लाख रुपये तक की राशि किसी भी जमाकर्ता को वापस करती है। लिक्विडेशन प्रक्रिया: उत्तर प्रदेश के सहकारिता आयुक्त और सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार से बैंक के लिए लिक्विडेटर अपॉइंट किया जाएगा।

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