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राज्य सरकार एआई को नागरिक केंद्रित, पारदर्शी और कुशल शासन की आधारशिला के रूप में कर रही है स्थापित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

The State Government is establishing AI as the cornerstone of citizen-centric, transparent and efficient governance: Chief Minister Dr. Yadav भोपाल ! मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार एआई को नागरिक-केंद्रित, पारदर्शी और कुशल शासन की आधारशिला के रूप में स्थापित करने की दिशा में ठोस कदम उठा रही है। एआई आधारित प्रशासनिक व्यवस्था और प्रबंधन, तकनीक-प्रौद्योगिकी और अकादमिक क्षेत्र में एआई आधारित नवाचार विकसित भारत@ 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में प्रभावी रूप से सहायक होंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हर क्षेत्र में भारत को आगे बढ़ाने के लिए कार्य कर रहे हैं। मध्यप्रदेश में भगवान श्रीकृष्ण का अध्ययन केंद्र और शंकराचार्य की साधना का केंद्र भी है। राज्य सरकार मानवीय संवेदनाओं के साथ आगे बढ़ रही है। राज्य सरकार सभी विभागों की जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए एआई का उपयोग कर रही है। एआई वर्तमान समय में शासन, उद्योग और समाज के लिए एक परिवर्तनकारी शक्ति है। हमारा राज्य जल्द ही एआई नीति भी लाएगा और एआई के लिए मिशन मोड पर व्यापक रूप से कार्य किया जाएगा। प्रदेश के माइनिंग और हेल्थ सेक्टर में एआई के उपयोग की बड़ी संभावनाएं हैं। मध्यप्रदेश अपार संभावनाओं वाला राज्य है, जिसमें आगे बढ़ने की पर्याप्त क्षमता है। विकसित भारत के लक्ष्य प्राप्ति में हमारी सरकार हर कदम पर प्रधानमंत्री मोदी के विजन के अनुरूप कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को भोपाल के ताज लेक फ्रंट में ‘मध्यप्रदेश रीजनल एआई इम्पैक्ट कांफ्रेंस-2026’ का शुभारंभ कर संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एआई लिटरेसी मिशन के तहत फ्यूचर स्किल्स फॉर एआई पावर्ड भारत के लिए कौशल रथ को झंडी दिखाकर रवाना किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश स्पेस टेक नीति-2026 लांच की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में विभिन्न समझौता ज्ञापनों (एमओयू) का आदान-प्रदान हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन सिंहस्थ-2028 के संचालन के लिए आयोजित उज्जैन महाकुंभ हैकाथॉन और मध्यप्रदेश इनोटेक प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया। अपर मुख्य सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी श्री संजय दुबे ने “एआई फॉर पीपल, प्लेनेट एंड प्रोग्रेस-मध्यप्रदेश रोडमैप टू इंपैक्ट” पर राज्य का प्रमुख एआई विजन प्रस्तुत किया। एआई को राष्ट्रीय आंदोलन बनाने के उद्देश्य से एआई लिटरेसी मिशन के अंतर्गत आरंभ युवा एआई फॉर ऑॅल पर लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। एम.पी. राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम लिमिटेड के महाप्रबंधक आशीष वशिष्ठ ने कॉन्फ्रेंस के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत एमपीएसईडीसी प्रदेश में एआई इंफ्रॉस्ट्रक्चर स्थापित करने के लिए नोडल एजेंसी है। स्पेस टेक नीति – अंतरिक्ष आधारित अनुप्रयोगों को बढ़ावा देने की पहल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रीजनल एआई इंपैक्ट कॉन्फ्रेंस में प्रदेश की स्पेस टेक नीति लांच की। उन्होंने कहा कि नीति राज्य को भारत के उभरते अंतरिक्ष क्षेत्र में एक अग्रणी और भविष्य-उन्मुख केंद्र के रूप में स्थापित करेगी। नीति के तहत स्पेस टेक स्टार्ट-अप्स, एमएसएमई और उद्योगों को वित्तीय, अवसंरचनात्मक और अनुसंधान सहयोग प्रदान कर कृषि, आपदा प्रबंधन, जल संसाधन एवं शहरी नियोजन जैसे क्षेत्रों में अंतरिक्ष-आधारित अनुप्रयोगों को बढ़ावा दिया जाएगा। यह नीति निवेश, नवाचार और राष्ट्रीय अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र में मध्यप्रदेश की भूमिका को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। नवाचार और कौशल विकास के लिए हुए 7 एमओयू पर हस्ताक्षर मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा 6 समझौता ज्ञापन-यंगोवेटर (आंसर फाउंडेशन), सीईईडब्ल्यू (कॉउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर), गूगल, नैसकॉम, एआईएसईसीटी और भाषिणी के साथ किए गए। ये समझौते शैक्षणिक संस्थानों में नवाचार एवं रोबोटिक्स को बढ़ावा देने, जलवायु परिवर्तन व सतत विकास से जुड़े क्षेत्रों में एआई आधारित शोध एवं निर्णय सहयोग विकसित करने, शासकीय विभागों में एआई और क्लाउड तकनीक के उपयोग को प्रोत्साहित करने, राज्य में एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना एवं कौशल विकास को गति देने, राष्ट्रीय एआई मिशन से जुड़कर कंप्यूटर एवं डेटा संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने, ग्रामीण एवं वंचित क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता और एआई जागरूकता बढ़ाने और एआई आधारित शासन को सक्षम करने के उद्देश्य से किए गए हैं। इसके अलावा इंडिया एआई और तकनीकी शिक्षा,कौशल विकास एवं रोजगार विभाग के मध्य एक समझौता ज्ञापन हुआ। उच्च गुणवत्ता वाली एआई शिक्षा तक पहुंच को व्यापक बनाने के लिए इंडिया एआई मिशन देश के टियर-2 एवं टियर-3 शहरों में 570 डेटा एवं एआई लैब्स की स्थापना कर रहा है। तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग, मध्य प्रदेश सरकार के सहयोग से मध्यप्रदेश में 30 डेटा एवं एआई लैब्स स्थापित की जाएंगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब केवल तकनीक नहीं, नीति, समाज और अर्थव्यवस्था से जुड़ा एक सशक्त माध्यम बना : मुख्य सचिव जैन मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा है कि एआई के उपयोग से प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी और निर्णय प्रक्रिया अधिक तेज, सटीक व नागरिक-केंद्रित होगी। मुख्य सचिव जैन ने बताया कि यह कांफ्रेंस आगामी इंडिया एआई इंपैक्ट समिट-2026 से पूर्व देश में एआई इको सिस्टम को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा निर्धारित सतत आर्थिक विकास लक्ष्य को प्राप्त करने में गवर्नेंस में एआई की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने उद्योग और अकादमिक संस्थानों के सहयोग, स्किलिंग व री-स्किलिंग की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि भविष्य रिसर्च, इनोवेशन और नॉलेज आधारित होगा। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने यूपीआई को भारत की वैश्विक पहचान बताया। मध्यप्रदेश में समग्र आईडी जैसी पहलों के माध्यम से डेटा-आधारित और परिवार-केंद्रित शासन को बढ़ावा दिया जा रहा है। मुख्य सचिव जैन ने कहा कि ऐसे मंच नवाचार और सहयोग को नई दिशा देते हैं। मध्यप्रदेश इस राष्ट्रीय प्रयास में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। एआई के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये राज्य ने बनाये 4 प्रमुख स्तंभ : एसीएस दुबे अपर मुख्य सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संजय दुबे ने कहा कि प्रदेश सरकार ने “AI for People, Planet, and Progress” के सिद्धांत पर आधारित एक स्पष्ट और दीर्घकालिक एआई रोडमैप तैयार किया है। राज्य का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब प्रयोगात्मक तकनीक नहीं, बल्कि शासन की एक मुख्य क्षमता बन चुकी है। एआई के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य 4 प्रमुख सक्षम स्तंभों—अवसंरचना, डेटा, प्रतिभा और रणनीति को सुदृढ़ कर रहा है। … Read more

मध्य प्रदेश में फिर तेज हुई दलित-आदिवासी राजनीति, कांग्रेस साधने के लिए मुद्दों को दे रही हवा

Dalit-tribal politics has once again intensified in Madhya Pradesh, with the Congress raising issues to gain traction. भोपाल। मध्य प्रदेश में एक बार फिर दलित-आदिवासी राजनीति केंद्र में आ गई है। भले ही विधानसभा चुनाव 2028 में होने हैं, लेकिन राजनीतिक दलों ने अभी से इन वर्गों को साधने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। खासकर कांग्रेस दलित और आदिवासी समाज को फिर से अपने पाले में लाने के लिए आक्रामक रुख अपनाती दिख रही है। ग्वालियर में डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा स्थापना को लेकर हुए विवाद से लेकर आदिवासी संगठनों के मुद्दों तक, कांग्रेस लगातार संदेश देने की कोशिश कर रही है कि वह इन वर्गों के साथ खड़ी है। हाल ही में ग्वालियर हाई कोर्ट खंडपीठ परिसर में डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा लगाने को लेकर हुए विवाद ने दलित राजनीति को नया मुद्दा दे दिया। कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया समेत कई नेता खुलकर दलित संगठनों के समर्थन में सामने आए। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर प्रशासन और सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए दलित अस्मिता से जोड़कर इसे बड़ा राजनीतिक प्रश्न बना दिया। ग्वालियर-चंबल अंचल में अनुसूचित जाति वर्ग की निर्णायक भूमिका को देखते हुए कांग्रेस का यह रुख महज संयोग नहीं माना जा रहा। विधानसभा गणित और दलित-आदिवासी महत्वप्रदेश की 230 सदस्यीय विधानसभा में अनुसूचित जाति के लिए 35 और अनुसूचित जनजाति के लिए 47 सीटें आरक्षित हैं। इसके अलावा करीब 40 सामान्य सीटों पर भी इन वर्गों का प्रभाव निर्णायक माना जाता है। यही कारण है कि कांग्रेस और भाजपा, दोनों ही दल इन मतदाताओं को नजरअंदाज नहीं कर सकते। वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में स्थानीय मुद्दों और असंतोष के चलते दलित-आदिवासी मतदाताओं का झुकाव कांग्रेस की ओर रहा, जिससे 15 वर्षों बाद कमल नाथ के नेतृत्व में कांग्रेस सत्ता में लौटी। हालांकि 2023 में समीकरण बदले और भाजपा ने एससी-एसटी सीटों पर बेहतर प्रदर्शन करते हुए पूर्ण बहुमत की सरकार बना ली। आदिवासी मुद्दों पर कांग्रेस की रणनीतिकांग्रेस का मौजूदा फोकस सिर्फ दलित नहीं, बल्कि आदिवासी समाज पर भी है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का अधिकांश राजनीतिक जोर आदिवासी क्षेत्रों पर दिखाई देता है। हाल के दिनों में आइएएस अधिकारी संतोष वर्मा के विवादित बयान को लेकर कांग्रेस की चुप्पी को भी इसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। वर्मा आदिवासी समाज से आते हैं और अजाक्स के अध्यक्ष हैं, जिसे कांग्रेस का पारंपरिक समर्थन रहा है। वर्मा को दिए गए कारण बताओ नोटिस के विरोध में जय युवा आदिवासी संगठन (जयस) समेत कई आदिवासी संगठन एकजुट हैं, जबकि ब्राह्मण समाज सरकार की निष्क्रियता से नाराज है। दिग्विजय सिंह और दलित एजेंडाप्रदेश में दलित राजनीति को धार देने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की अगुआई में नया दलित एजेंडा तैयार किया जा रहा है। अगले एक वर्ष तक प्रदेश सहित अन्य राज्यों में इस एजेंडे को लेकर गतिविधियां चलाई जाएंगी और 13 जनवरी 2027 को इसे औपचारिक रूप से घोषित किया जाएगा। इससे पहले वर्ष 2002 में भी दिग्विजय सिंह के मुख्यमंत्री रहते दलित एजेंडा लागू हुआ था, हालांकि उसके बाद हुए चुनाव में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था। भाजपा का पलटवारभाजपा कांग्रेस की इस सक्रियता को महज “एजेंडा की राजनीति” बता रही है। प्रदेश के मंत्री रजनीश अग्रवाल का कहना है कि कांग्रेस का इतिहास एससी-एसटी वर्ग के विकास का नहीं रहा है। उनके अनुसार कांग्रेस ने जाति को जाति से लड़ाने का काम किया, जबकि भाजपा सामाजिक समरसता और विकास की राजनीति करती है। 2028 से पहले सियासी तापमानकुल मिलाकर, 2028 के चुनाव से काफी पहले ही मध्य प्रदेश में दलित-आदिवासी राजनीति का तापमान बढ़ने लगा है। कांग्रेस जहां इन वर्गों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है, वहीं भाजपा अपने विकास और समरसता के एजेंडे पर भरोसा जता रही है। आने वाले महीनों में यह राजनीति और तेज होने के संकेत साफ दिखाई दे रहे हैं।

संरक्षण बनाम विकास: टाइगर कॉरिडोर के पास खनन व इंफ्रास्ट्रक्चर पर सख्त शर्तों के साथ मंजूरी

Conservation vs. development: Mining and infrastructure near tiger corridors approved with strict conditions भोपाल। मध्यप्रदेश के बाघ आवास क्षेत्रों में विकास और संरक्षण के बीच संतुलन को लेकर एक अहम फैसला सामने आया है। राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति ने ग्रेटर पन्ना लैंडस्केप में तीन परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही सतना जिले के आरक्षित वन क्षेत्र में एक चूना पत्थर खदान को सैद्धांतिक स्वीकृति देने की सिफारिश भी की गई है। समिति के अनुसार, पन्ना टाइगर रिज़र्व की टाइगर संरक्षण योजना के अंतर्गत स्वीकृत वन्यजीव कॉरिडोर के भीतर और आसपास की 266.302 हेक्टेयर राजस्व भूमि पट्टे पर दी जाएगी। यह कॉरिडोर पन्ना–बांधवगढ़–संजय टाइगर रिज़र्व के प्रमुख आवास क्षेत्रों को आपस में जोड़ता है और बाघों की सुरक्षित आवाजाही के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अलावा संजय डबरी और रातापानी टाइगर रिज़र्व में भूमिगत जल पाइपलाइन और बरना बांध से जुड़े ढांचागत कार्यों को भी मंजूरी दी गई है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ सीमा से सटे मंडला जिले के ईको-सेंसिटिव ज़ोन में दो बॉक्साइट खनन परियोजनाओं को सिफारिशी मंजूरी प्रदान की गई है। समिति ने स्पष्ट किया कि ये परियोजनाएं भले ही कोर या बफर ज़ोन में नहीं आतीं, लेकिन संवेदनशील टाइगर कॉरिडोर के निकट होने के कारण यहां कड़े पारिस्थितिक सुरक्षा उपायों का पालन अनिवार्य होगा। कॉरिडोर के पास सख्ती जरूरीसमिति ने साफ किया कि प्रस्तावित खनन पट्टे संरक्षित क्षेत्रों के भीतर नहीं हैं, लेकिन पन्ना–बांधवगढ़ और कान्हा–अचानकमार जैसे महत्वपूर्ण कॉरिडोर के बेहद करीब स्थित हैं। ऐसे में वन्यजीवों, विशेषकर बाघों की प्राकृतिक आवाजाही पर किसी भी प्रकार का नकारात्मक असर न पड़े, इसके लिए विशेष प्रबंधन और सतत निगरानी आवश्यक होगी। अक्टूबर माह में 266.3 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले AAA रिसोर्स लिमिटेड के चूना पत्थर खदान पट्टे का निरीक्षण केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय, संबंधित प्राधिकरण और मध्यप्रदेश वन विभाग की संयुक्त समिति ने किया था। निरीक्षण में पाया गया कि पट्टे का दक्षिणी हिस्सा घने वनों से जुड़ा हुआ है और बाघों की आवाजाही के लिए उपयुक्त है, जबकि उत्तरी हिस्सा अपेक्षाकृत खंडित है। खनन सीमित, संरक्षण पर जोरसमिति ने परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए शर्त रखी है कि दक्षिणी कॉरिडोर को हर हाल में सुरक्षित और मजबूत रखा जाए, खनन गतिविधियां सीमित दायरे में हों और आवास सुधार से जुड़े उपाय प्रभावी ढंग से लागू किए जाएं। उद्देश्य साफ है—विकास परियोजनाओं के साथ-साथ बाघ संरक्षण और जैव-विविधता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

मध्य प्रदेश में ठेके पर चलेगा मंत्रालय!, जीतू पटवारी का बड़ा दावा

Ministry will be run on contract in Madhya Pradesh! Jitu Patwari makes a big claim भोपाल ! मध्य प्रदेश में धार और बैतूल में पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनशिप) मॉडल पर दो नए मेडिकल कॉलेज और खुलने जा रहे हैं. केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा इसकी आधारशिला रख रहे हैं. प्रदेश के जिला अस्पतालों से संबद्ध कर मेडिकल कॉलेज खोलने का कांग्रेस ने विरोध जताया है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि कांग्रेस द्वारा जिलों में खोले गए सरकारी अस्पतालों को सरकार ठेके पर दे रही है. सरकार ऐसी संस्थाओं को यह जिला अस्पताल ठेके पर दे रही है, जिसके पास कोई अनुभव ही नहीं है. बिना अनुभव वाली संस्थान पर मेहरबानी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि “जिला अस्पतालों से निजी मेडिकल कॉलेज को संबद्ध किए जाने के लिए सरकार ने टेंडर में शर्त रखी थी कि कम से कम 5 साल का मेडिकल कॉलेज को अनुभव होने चाहिए, लेकिन सरकार ने एक ही संस्था को 4 जिला अस्पताल सौंप दिया. इनका कोई अनुभव ही नहीं है. जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि सिर्फ भाषण और ताली बजाने से कुछ नहीं होगा. उन्हें पूछना चाहिए कि आखिर इससे प्रदेश का क्या भला होगा. कांग्रेस करेगी निजी मेडिकल कॉलेजों का निरीक्षण जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि प्रदेश में निजी मेडिकल कॉलेज खोलने के दौरान शर्त रखी गई थी कि मेडिकल कॉलेजों में 100 बेड मुफ्त चलने चाहिए. एक भी ऐसा मेडिकल कॉलेज सरकार बता दे, जहां गरीबों से एक भी पैसा नहीं लिया जाता हो और उनका मुफ्त इलाज किया जा रहा हो. कांग्रेस अब अभियान शुरू करने जा रही है. 8 दिन चलने वाले अभियान के दौरान कांग्रेस एक-एक मेडिकल कॉलेज पहुंचेगी और देखेगी कि किस निजी मेडिकल कॉलेज में 100 बेड पर निजी मरीजों का मुफ्त इलाज किया गया. सरकार ने इस पर कभी ध्यान ही नहीं दिया. इसके उलट अब सरकारी अस्पताल ठेके पर देकर सरकार उत्सव मना रही है.” मंत्रालय भी ठेके पर दे देगी क्या सरकार ? जीतू पटवारी ने कहा कि “प्रदेश में करीबन 3 हजार पंचायतें ठेके पर चल रही हैं. संस्थाएं सरपंच को साल भर का पैसा देकर पूरी पंचायत ठेके पर लेकर चला रही हैं. पंचायत के बाद अब इसी तरह जिला अस्पताल ठेके पर जा रही है. ऐसा न हो कि कहीं सरकार मंत्रालय भी ठेके पर चलने लगे. मंत्री नागर सिंह के भाई द्वारा सेल्समेन से मारपीट को लेकर जीतू पटवारी ने कहा कि इस घटना से यह प्रमाण मिलता है कि प्रदेश में खाद की कमी है, इसीलिए मंत्री के भाई ने मारपीट की. प्रदेश में पर्याप्त खाद के सरकार के दावे को इस घटना ने सामने ला दिया है. सरकार को कार्रवाई तो करनी ही चाहिए, लेकिन मंत्री के भाई का धन्यवाद कि उन्होंने सरकार को आइना दिखा दिया है.”

‘टाइगर स्टेट’ मध्य प्रदेश में रिकॉर्ड मौतें: एक हफ्ते में 6 बाघों की मौत, 2025 में आंकड़ा 54 पार

Record deaths in ‘Tiger State’ Madhya Pradesh: 6 tigers died in a week, toll crosses 54 in 2025 भारत के ‘टाइगर स्टेट’ मध्य प्रदेश में पिछले एक हफ्ते के भीतर 6 बाघों की मौत दर्ज की गई है. इसके साथ ही वर्ष 2025 में अब तक बाघों की कुल मौतों का आंकड़ा 54 हो गया है. यह संख्या 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत के बाद किसी एक साल में अब तक की सबसे अधिक बताई जा रही है. आंकड़ों के मुताबिक मध्य प्रदेश में- ज्यादातर मौतों का कारण प्राकृतिकवन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अधिकतर मौतें प्राकृतिक कारणों से हुई हैं, जो बाघों की बढ़ती संख्या को भी दर्शाती हैं. उन्होंने कहा, “संख्या जितनी ज्यादा होगी, प्राकृतिक मौतें भी उतनी बढ़ेंगी. यह स्वाभाविक है.” अधिकारियों के अनुसार, यह रुझान बताता है कि अगली बाघ गणना में भी मध्य प्रदेश देश का शीर्ष ‘टाइगर स्टेट’ बना रह सकता है. हाल ही में बांधवगढ़ में मिला बाघ का शवबाघ की मौत का ताजा मामला बांधवगढ़ का है, जहां उमरिया जिले के चंदिया वन परिक्षेत्र के आरएफ-10 में कथली नदी के पास एक बाघ का शव मिला. शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला, जिसके बाद इलाके को सील कर जांच शुरू कर दी गई है. फील्ड स्टाफ नियमित गश्त और जनगणना कार्य में जुटा था, तभी यह मामला सामने आया. करंट लगने से बाघ की मौत की आशंकावन विभाग की टीमें साक्ष्य सुरक्षित करने में जुटी हैं. डॉग स्क्वॉड की मदद से संदिग्ध गतिविधियों की तलाश की जा रही है और आसपास के वन क्षेत्रों व नदी किनारे की पट्टी की सघन तलाशी ली जा रही है. अधिकारियों ने बताया कि शव बिजली लाइन कॉरिडोर के पास मिला है, इसलिए करंट लगने की आशंका से भी इनकार नहीं किया गया है. नजदीकी बिजली ढांचे की जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं खुले या अवैध तारों की वजह से घटना तो नहीं हुई. 54 में से 36 रहस्यमयी मौतें, ज्यादातर शिकार सेटाइगर की 54 मौतों में से 36 मौतें रहस्यमयी हैं. ज्यादातर मामलों में टाइगर का शिकार किया गया है. कई बार टाइगर के पंजे काटकट शिकारी ले गए. तस्करी में एक टाइगर की कीमत अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर करीब एक से 3 करोड़ रुपये होती है. कई बार शिकारी जंगल मे टाइगर्स की निगरानी में लगे कैमरों में कैद हो चुके हैं. बाघों की निगरानी के लिए लगाए गए कैमरे भी चोरी होने के कई मामले आए हैं. टाईगर्स की बढ़ती मौतों और सुरक्षा में लापरवाही पर NTCA ने चिंता जताई है. कांग्रेस ने एमपी सरकार पर लगाए आरोपटाइगर्स की सुरक्षा को लेकर कांग्रेस ने सरकार को में असफल बताया है. कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव बबारोलिया ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. वन राज्यमंत्री दिलीप सिंह अहरवार का कहना है कि विभाग मामलों की गंभीरता से जांच कर रही है.

नेशनल हेराल्ड मामले में सियासी उबाल: भोपाल में भाजपा दफ्तर का घेराव करेगी कांग्रेस, जीतू पटवारी के नेतृत्व में 3 बजे कूच करेंगे कार्यकर्ता

Political uproar in the National Herald case: Congress to surround BJP office in Bhopal, workers led by Jitu Patwari to march at 3 pm भोपाल। नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ ED की कार्रवाई तथा हालिया न्यायालय से मिली राहत के बाद सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। कांग्रेस ने भाजपा पर गांधी परिवार को फंसाने का आरोप लगाते हुए भोपाल में भाजपा कार्यालय का घेराव करने का ऐलान किया है। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में यह प्रदर्शन किया जाएगा। कांग्रेस कार्यकर्ता दोपहर 3 बजे कांग्रेस कार्यालय से भाजपा कार्यालय की ओर कूच करेंगे और वहां घेराव करेंगे। कांग्रेस का कहना है कि भाजपा सरकार ने राजनीतिक बदले की भावना से गांधी परिवार को नेशनल हेराल्ड मामले में फंसाने की कोशिश की। पार्टी नेताओं ने ED की कार्रवाई को लोकतंत्र पर हमला करार दिया है। हालांकि, हालिया अदालती फैसले में दिल्ली कोर्ट ने ED की शिकायत पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया, जिसे कांग्रेस ने सत्य की जीत बताया है।

MP Assembly Special Session: मनरेगा योजना का नाम बदलने को लेकर विधानसभा में कांग्रेस का प्रदर्शन, महात्मा गांधी की प्रतिमा के नीचे बैठकर जताया विरोध

भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा ने आज अपने स्थापना के 69 साल पूरे कर लिए हैं। इस अवसर पर आज 17 दिसंबर को विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र आयोजित किया गया है। यह दिन इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि ठीक 69 साल पहले, 17 दिसंबर 1956 को मध्यप्रदेश विधानसभा की पहली बैठक हुई थी। वहीं कांग्रेस ने विधानसभा में मनरेगा योजना का नाम बदलने के विरोध में कांग्रेस के विधायकों ने विधानसभा परिसर में जमकर नारेबाजी की। कांग्रेस विधायकों ने महात्मा गांधी की प्रतिमा के नीचे बैठकर विरोध किया। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि बीजेपी महात्मा गांधी का अपमान कर रही है। उन्होंने कहा कि राम जी के नाम पर कोई नई योजना लानी चाहिए थी, राम जी के नाम पर कोई नई योजना आती तो हम उसकी तारीफ करते। महात्मा गांधी से बीजेपी को तकलीफ है। कांग्रेस के प्रदर्शन पर बोले विधायक रामेश्वर शर्माकांग्रेस के विधानसभा में प्रदर्शन पर विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि कांग्रेस को राम से एलर्जी है इसलिए विरोध कर रही है। राम से एलर्जी रखोगे तो रावण से राम तक सबका अंत होगा।कांग्रेस ने महात्मा गांधी के नाम का इस्तेमाल किया। हम महात्मा गांधी के विचारों और कार्यों का अनुसरण कर रहे हैं। कांग्रेस गांधी का नाम लेकर कई बार सत्ता में आई लेकिन गरीब का घर नहीं बनाया। यह दुनिया जानती है कि महात्मा गांधी के रामराज्य को जमीन पर उतारने का काम किसी ने किया है तो वो पीएम मोदी ने किया है। शर्मा ने कहा कि हमने अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण किया, ग़रीब के पक्के मकान बनाने का काम किया, गरीब के इलाज के लिए आयुष्मान कार्ड बनाए, किसानों का सम्मान किया क्योंकि यही गांधी जी चाहते थे। सबका साथ सबका विकास – यही काम भाजपा सरकार कर रही है। मनरेगा में मनमोहन सिंह की सरकार के समय भ्रष्टाचार हुआ, अब मनरेगा के बलबूते पर ग्रामीण लोगों का विकास होगा।

शासकीय योजना में दो लाख की प्रोत्साहन राशि, 90 हजार रुपये मांगी रिश्वत, जनजातीय विभाग के बाबू को लोकायुक्त ने रंगेहाथ पकड़ा

Lokayukta catches Tribal Department clerk red-handed after demanding Rs 90,000 bribe for Rs 2 lakh incentive under government scheme भोपाल। राज्य सरकार की प्रोत्साहन योजनाओं में भ्रष्टाचार थमने का नाम नहीं ले रहा है। लोकायुक्त पुलिस भोपाल की टीम ने मंगलवार शाम नर्मदापुरम में कलेक्ट्रेट स्थित जनजातीय कार्य विभाग में पदस्थ सहायक ग्रेड-दो मनोज सोनी को 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। आरोपी बाबू ने अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन योजना के तहत मिलने वाली दो लाख रुपये की राशि दिलाने के बदले एक हितग्राही से 50 प्रतिशत कमीशन की मांग की थी। हितग्राही से पहले 20 हजार रुपये और काम पूरा होने के बाद 70 हजार रुपये लेने की डील तय हुई थी। बाद में पहली किश्त के रूप में 10 हजार रुपये पर सहमति बनी। सिवनीमालवा के सिपुर निवासी 36 वर्षीय हितग्राही प्रवीण सोलंकी ने रिश्वत मांगने की शिकायत लोकायुक्त भोपाल एसपी कार्यालय में की थी। शिकायत के सत्यापन के बाद आरोपी बाबू को पकड़ने के लिए लोकायुक्त टीम गठित कर जाल बिछाया गया। तय योजना के अनुसार जैसे ही शिकायतकर्ता ने मंगलवार शाम आरोपी क्लर्क के कार्यालय में पहुंचकर उसे रिश्वत की रकम थमाई, लोकायुक्त टीम ने उसे मौके पर ही धर दबोचा। इस कार्रवाई में लोकायुक्त टीम में डीएसपी बीएम द्विवेदी, डीएसपी अजय मिश्रा, निरीक्षक रजनी तिवारी, प्रधान आरक्षक रामदास कुर्मी, प्रधान आरक्षक मुकेश पटेल, आरक्षक मुकेश परमार, आरक्षक चैतन्य प्रताप सिंह व गौरव साहू शामिल रहे। घटना ने एक बार फिर सरकारी योजनाओं में फैले भ्रष्टाचार को उजागर किया है।

Cabinet Meeting: कर्मचारी व्यवस्था में बड़ा बदलाव,7 कैटेगरी खत्म, अब सिर्फ तीन वर्ग,1782 करोड़ का सिंचाई पैकेज

Cabinet Meeting: Major changes in employee management, 7 categories abolished, now only three, irrigation package worth Rs 1782 crore मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य की कर्मचारी व्यवस्था में बड़ा सुधार करते हुए सात प्रकार की नियुक्ति श्रेणियों को समाप्त कर दिया है। अब प्रदेश में केवल तीन ही कैटेगरी रहेंगी। नियमित, संविदा और आउटसोर्स। मंगलवार को मंत्रालय में हुई कैबिनेट बैठक में यह अहम फैसला लिया गया। सरकार ने स्पष्ट किया है कि स्थायी और अस्थायी कर्मचारियों का अलग वर्ग अब नहीं रहेगा, क्योंकि दोनों की सेवा शर्तें, वेतन और पेंशन समान हैं। कैबिनेट निर्णय के अनुसार, वर्तमान में कार्यरत कार्यभारित, दैनिक वेतन भोगी, अंशकालीन, स्थायीकर्मी सहित अन्य श्रेणियों के कर्मचारी अपने सेवाकाल तक कार्य करते रहेंगे। इनके सेवानिवृत्त होते ही पद स्वतः समाप्त हो जाएंगे। यदि किसी विभाग को आवश्यकता होगी, तो नियमित पद सृजित कर नई भर्ती की जाएगी। कार्यभारित कर्मचारियों के लिए अनुकंपा नियुक्ति का प्रावधानसरकार ने यह भी निर्णय लिया कि सेवाकाल में कार्यभारित कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके आश्रित को नियमित पद पर अनुकंपा नियुक्ति दी जाएगी। अब तक इस संवर्ग में यह सुविधा उपलब्ध नहीं थी। न्यायालयीन मामलों में मिलेगी राहतनई व्यवस्था लागू होने के बाद अदालतों में कर्मचारियों की अलग-अलग कैटेगरी बताने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे न्यायालयीन भ्रम कम होगा और सरकार को बार-बार सुनवाई से राहत मिलेगी। साथ ही अस्थायी पदों के लिए हर साल कैबिनेट से अनुमति लेने की बाध्यता भी समाप्त हो जाएगी। नियमित और संविदा पर रहेगा जोरसरकार ने दो टूक कहा है कि भविष्य में नियुक्तियों का फोकस नियमित और संविदा कर्मचारियों पर रहेगा। आउटसोर्स कर्मी सरकारी कर्मचारी नहीं माने जाएंगे, क्योंकि उनकी सेवाएं एजेंसियों के माध्यम से ली जाती हैं। मुख्यमंत्री ने ब्लाइंड विमेन T20 वर्ल्ड कप 2025 विजेता टीम की तीन मध्यप्रदेश की खिलाड़ियों को 25-25 लाख रुपए देने की घोषणा की। वहीं बैतूल जिले के भरेवा धातु शिल्प को जीआई टैग मिलने पर शिल्पकार बलदेव वाघमारे को राष्ट्रीय शिल्प पुरस्कार से सम्मानित किया गया। भोपाल-इंदौर मेट्रो के लिए 90.67 करोड़ स्वीकृतभोपाल और इंदौर मेट्रो रेल परियोजना के संचालन एवं रखरखाव के लिए राज्य सरकार ने 90.67 करोड़ रुपए के प्रावधान को मंजूरी दी है। यह राशि मेट्रो संचालन से जुड़े व्यय को पूरा करने के लिए होगी। तीन आदिवासी जिलों को 1782 करोड़ का सिंचाई पैकेजनर्मदा घाटी विकास विभाग के तहत अपर नर्मदा, राघवपुर और बसानिया बहुउद्देशीय परियोजनाओं के डूब प्रभावितों के लिए 1782 करोड़ रुपए के विशेष पैकेज को स्वीकृति दी गई है। इससे अनूपपुर, मंडला और डिंडोरी जिलों की 5512 करोड़ रुपए की योजनाएं पूरी होंगी। इन परियोजनाओं से 71,967 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई और 125 मेगावाट बिजली उत्पादन संभव होगा। कैबिनेट में अन्य महत्वपूर्ण फैसले मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं अवसंरचना योजना के सूचकांक में वृद्धि, 3810 कार्य 693.76 करोड़ की लागत से होंगे।एमएसएमई विभाग की मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना को पांच साल तक जारी रखने का निर्णय, 905.25 करोड़ मंजूर।छह जिलों में वन विज्ञान केंद्र स्थापित होंगे, 48 करोड़ की स्वीकृति।इंदौर के एमवाय अस्पताल का 773 करोड़ से नवनिर्माण, 1450 बिस्तरों की सुविधा।

विशेष सत्र से पहले कांग्रेस विधायक दल की अहम बैठक आज, 17 दिसंबर के एजेंडे पर बनेगी रणनीति

Congress Legislature Party to hold crucial meeting ahead of special session; strategy to be chalked out on December 17 agenda भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र से पहले कांग्रेस विधायक दल की एक महत्वपूर्ण बैठक मंगलवार, 16 दिसंबर को शाम 7:30 बजे भोपाल स्थित बी-12 (ए), 74 बंगला में आयोजित की जाएगी। बैठक की अध्यक्षता नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार करेंगे। इस बैठक में 17 दिसंबर को प्रस्तावित विधानसभा के विशेष सत्र को लेकर कांग्रेस की रणनीति, कार्ययोजना और मुद्दों को अंतिम रूप दिया जाएगा। बताया गया है कि विशेष सत्र में मध्यप्रदेश को विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध राज्य बनाने के विषय पर चर्चा प्रस्तावित है। इसे देखते हुए कांग्रेस विधायक दल सरकार की नीतियों की समीक्षा कर यह तय करेगा कि सत्र में किन जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाया जाए। आर्थिक हालात से लेकर सामाजिक मुद्दों पर मंथनविधायक दल की बैठक में प्रदेश की वर्तमान आर्थिक स्थिति, किसानों की समस्याएं, युवाओं के रोजगार, महिलाओं की सुरक्षा, आदिवासी, दलित, पिछड़े और कमजोर वर्गों से जुड़े सवालों पर गहन चर्चा होगी। इसके साथ ही सरकार के दावों और नीतिगत फैसलों की पड़ताल करते हुए विपक्ष की भूमिका तय की जाएगी। उमंग सिंघार का सरकार पर हमलानेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि प्रदेश को सच मायनों में विकसित और आत्मनिर्भर बनाने के लिए खोखले नारों से काम नहीं चलेगा। इसके लिए ठोस नीतियां और ईमानदार राजनीतिक इच्छाशक्ति जरूरी है। उन्होंने कहा कि एक दिवसीय विशेष सत्र केवल औपचारिकता बनकर न रह जाए, बल्कि इसमें किसानों की आय, युवाओं के रोजगार, महिलाओं की सुरक्षा और प्रदेश की कमजोर आर्थिक स्थिति पर गंभीर और सार्थक चर्चा होनी चाहिए।उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस विधायक दल विशेष सत्र में जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दों और प्रदेश के भविष्य की ठोस रूपरेखा को मजबूती के साथ विधानसभा में रखेगा। 16वीं विधानसभा का एक दिवसीय अष्टम सत्रविधानसभा सचिवालय के अनुसार, मध्यप्रदेश की 16वीं विधानसभा का एक दिवसीय अष्टम सत्र बुधवार, 17 दिसंबर 2025 को सुबह 11 बजे से शुरू होगा। भले ही यह सत्र एक दिन का हो, लेकिन इसे बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान प्रदेश के विकास, अर्थव्यवस्था, रोजगार, किसानों, महिलाओं, युवाओं और बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है। विभिन्न दलों के विधायकों को सरकार की योजनाओं और भविष्य की दिशा पर अपने विचार रखने का अवसर मिलेगा।

CM Mohan Yadav held a review meeting , बोले- जनता के जीवन को सरल और सुरक्षित बनाने की हमारी संकल्पना

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने दावा किया कि वे और उनकी सरकार जनता के कामों के लिए संकल्पित हैं. सीएम ने कहा कि सड़कें केवल यातायात का माध्यम नहीं, बल्कि विकास, रोज़गार, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच और सामाजिक-सांस्कृतिक प्रगति का आधार हैं. विभाग का उद्देश्य प्रत्येक निर्माण कार्य को सिर्फ एक तकनीकी परियोजना के रूप में नहीं, बल्कि जनता के जीवन स्तर को सुधारने वाले साधन के रूप में देखना है. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गुणवत्ता, पारदर्शिता और नवाचार के साथ प्रत्येक परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, यही प्रयास “लोक निर्माण से लोक कल्याण” की भावना को साकार करते हैं. यह निर्देश मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रालय में लोक निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान दिये. मुख्यमंत्री डॉ यादव ने विभाग द्वारा “लोक निर्माण से लोक कल्याण” की भावना को धरातल पर उतारने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश की आधारभूत संरचना का विकास ही जनकल्याण का आधार है और विभाग ने इस दिशा में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है. उन्होंने कहा कि हर सड़क, हर पुल, हर परियोजना जनता के जीवन को सरल और सुरक्षित बनाने की हमारी संकल्पना का महत्वपूर्ण हिस्सा है. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि मेट्रोपॉलिटन एरिया और समीपवर्ती क्षेत्रों में राजमार्गों का घनत्व बढ़ायें. पूरे प्रदेश को समावेशित कर समग्र विकास पर कार्य करें. उन्होंने कहा कि शीघ्र ही जबलपुर और ग्वालियर को भी मेट्रोपोलिटन क्षेत्र घोषित किया जाएगा. शहरी, ग्रामीण एवं औद्योगिक क्षेत्रों सभी को अधोसंरचना विकास का लाभ प्राप्त हो इस आधार पर प्रस्ताव की परिकल्पना की जाये. उन्होंने कहा कि राजमार्गों का घनत्व राष्ट्रीय स्तर के समीप ले जाने के लिए विज़न डॉक्यूमेंट के आधार पर प्रस्ताव तैयार करें. प्रस्ताव में स्थानीय मांगों और सुझावों को यथोचित स्थान दिया जाये. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अपर मुख्य सचिव क्षेत्रों के समग्र विकास अनुसार कार्ययोजना का निर्धारण करें. सीएम मोहन यादव ने निर्देश दिए कि शहरी विकास की इंटीग्रेटेड पॉलिसी के निर्माण में लोक निर्माण विभाग को भी शामिल किया जाये. उन्होंने कहा कि अधोसंरचना विकास में पर्यावरण समन्वय का विशेष ध्यान रखा जाये. सतत संवहनीय विकास के लिए सूरत के डायमंड पार्क की तर्ज में भवनों का निर्माण ग्रीन बिल्डिंग संकल्पना पर किया जाये. बिजली और पानी की बचत सुनिश्चित की जाये. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भवन निर्माण में वास्तु-विज्ञान का ध्यान रखा जाये. ताकि सूर्य की रोशनी, हवा अन्य प्राकृतिक संसाधनों का उचित उपयोग सुनिश्चित हो और ऊर्जा की बचत की जा सके. उन्होंने कहा कि एक्सप्रेस-वे आधुनिक समय की मांग है. इन अधोसंरचनाओं के विकास में ग्रामीण क्षेत्र की सुविधाओं का ध्यान रखा जाये. आवश्यकतानुसार फ्लाई-ओवर, अंडर-पास, सर्विस लेन को प्रस्ताव में शामिल करें. बैठक में बताया गया कि सिंहस्थ-2028 के कार्य प्राथमिकता से किए जा रहे हैं. प्रस्तावित कार्यों की प्रशासनिक स्वीकृति जारी की जा चुकी है. दिसम्बर माह के अंत तक कार्य प्रारंभ हो जायेंगे. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि कार्यों को जून-2027 तक पूर्ण किया जाये. बैठक में बताया गया कि लोकपथ ऐप में प्राप्त 12 हज़ार 212 शिकायतों में से 12 हज़ार 166 का निराकरण किया गया है. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोकपथ ऐप के उत्कृष्ट उपयोग की सराहना की. उन्होंने कहा कि लोकपथ ऐप में रियल टाइम सड़क की स्थिति को भी अपडेट किया जाये. साथ ही इसका प्रचार प्रसार सुनिश्चित किया जाये ताकि अधिक से अधिक लोग इससे लाभान्वित हो सकें. लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि लोकपथ ऐप में आगे स्थलों के बीच की दूरी, समस्त वैकल्पिक मार्ग, पर्यटन स्थल, चिकित्सा सेवाएं, ब्लैक स्पॉट, टोल का शुल्क अन्य सुविधाओं को भी मैप किया जाएगा. यह स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ आगंतुकों के लिए भी उपयोगी होगा. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि राष्ट्रीय एवं राज्य के राजमार्गों में सतत संधारण सुनिश्चित किए जाये. प्रकाश, ग्रीनरी और सावधानी मार्कर्स मानक अनुसार रहें यह भी सुनिश्चित किया जाये. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) और मध्यप्रदेश भवन विकास निगम (बीडीसी) के संचालक मंडल की बैठक हुई. एमडी एमपीआरडीसी भरत यादव ने एमपीआरडीसी के चल रहे कार्यों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी प्रस्तुत की. इसी प्रकार एमडी बीडीसी सिवी चक्रवर्ती ने भवन विकास निगम के कार्यों और आगामी कार्ययोजना का विवरण दिया. बैठक में ये लोग रहे मौजूदबैठक में प्रमुख सचिव पीडब्ल्यूडी सुखवीर सिंह ने कहा कि विभाग द्वारा किए जा रहे नवाचारों, पीएम गतिशक्ति पोर्टल के उपयोग से रोड प्लानिंग, BISAG-N के माध्यम से समय सीमा का निर्धारण और प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग के कार्य किए जा रहे हैं. इसके साथ पर्यावरण से समन्वय, वृक्षारोपण, ट्री-शिफ्टिंग, लोक सरोवर, सौर ऊर्जा के कार्य भी विकास कार्यों में शामिल किए गए हैं. उन्होंने बताया कि पीएम गतिशक्ति के उत्कृष्ट उपयोग पर विभाग को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है. लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, मुख्य सचिव अनुराग जैन, एसीएस नीरज मंडलोई, एसीएस मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव लोकनिर्माण सुखवीर सिंह, एमडी एमपीआरडीसी भरत यादव, एमडी बीडीसी एमसीबी चक्रवर्ती सहित विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे. दो वर्ष की उपलब्धियांसीएम मोहन यादव ने बताया कि दो वर्षों में मध्य प्रदेश ने 12 हजार किमी सड़क निर्माण, उन्नयन और सुदृढ़ीकरण कर अभूतपूर्व रिकॉर्ड स्थापित किया है, जिससे राज्य का 77 हजार 268 किमी का सड़क नेटवर्क देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हुआ है. वित्तीय वर्ष 2024–25 में विभाग ने 99% तक वित्तीय लक्ष्य हासिल कर समयबद्ध क्रियान्वयन और संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया. “लोक पथ” मोबाइल ऐप के माध्यम से 12,212 शिकायतों में से 12,166 शिकायतों का निवारण कर 99.6% समाधान दर प्राप्त की, जिससे विभाग की पारदर्शिता और जनसहभागिता मजबूत हुई.

MP खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री मंत्री बोले- वोटर लिस्ट में नाम नहीं तो राशन पानी होगा बंद, कांग्रेस बोली- चुनाव आयोग के अधिकारी बन गए क्या आप?

MP Food and Supplies Minister said- If your name is not in the voter list, ration and water will be stopped, Congress said- Have you become an officer of the Election Commission? भोपाल ! मध्य प्रदेश के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत का एक विवादित बयान सामने आया है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। मंत्री ने कहा कि ‘जिसने मतदाता सूची में नाम नहीं जुड़वाया, उसे राशन और सरकारी सुविधाएं मिलना बंद हो जाएंगी।’ उनके इस बयान ने जनता में हड़कंप और राजनीतिक हलचल दोनों बढ़ा दी हैं। बताया जाता है कि मंत्री सागर जिले की सुरखी विधानसभा में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे थे। यहां उन्होंने अपील करते हुए कहा कि गांवों में मतदाता सूची अपडेट होने का काम चल रहा है, इसलिए हर व्यक्ति अपना नाम जोड़वाए। उन्होंने कहा अगर नाम नहीं जोड़वाओगे तो राशन, आधार कार्ड और अन्य सुविधाएं बंद हो जाएंगी। 5–6 दिन का समय है, जाकर अपना फॉर्म जमा कर दो।’ हालांकि SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया का उद्देश्य केवल मतदाता सूची को अपडेट और त्रुटिरहित बनाना है। इस प्रक्रिया का किसी भी तरह से राशन कार्ड या अन्य सरकारी योजनाओं से कोई संबंध नहीं है। न ही इसका प्रभाव राशन मिलने पर पड़ता है। विपक्ष का हमला- ‘नेतागिरी छोड़ चुनाव आयोग के अधिकारी बन गए क्या?’उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने मंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि मंत्री किस अधिकार से ऐसे बयान दे रहे हैं? क्या वे चुनाव आयोग के अधिकारी हैं? कटारे ने आरोप लगाया कि भाजपा SIR प्रक्रिया को प्रभावित कर रही है और चुनाव आयोग से मंत्री पर कार्रवाई की मांग की।

विधानसभा में बंदर बनकर पहुंचे कांग्रेस विधायक, जिसने देखा रह गया हक्का-बक्का, जाने माजरा

MP Vidhan Sabha Winter Session :मध्य प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र का आज तीसरा दिन है। सदन की कार्यवाही के बीच उस समय विधानसभा में मौजूद हर कोई हक्का-बक्का रह गया, जब सदन में कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक बंदर बनकर परिसर में दाखिल हुए। कोई उन्हें देखकर हंस रहा था तो कोई उनके संदेश की गंभीरता को भांप रहा था। सदन में इस अनोखे अंदाज में पहुंचने वाले कोई और नहीं, बल्कि छिंदवाड़ा की जुन्नारदेव सीट से विधायक सुनील उईके हैं। चेहरे पर मास्क लगाए, हाथ में पोस्टर लिए सदन परिसर में पहुंच गए, जो सरकारी की जनविरोधी नीतियों का हवाला देकर विरोध कर रहे थे। सदन की कार्यवाही से पहले विपक्ष में बैठे कांग्रेस विधायकों द्वारा ये प्रदर्शन किया गया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेत्रत्व में हुए इस प्रदर्शन के माध्यम से विपक्ष ने सरकार को घेरा। खाद की कमी, किसानों की बदहाली और जनता की अनदेखी के खिलाफ इस अनोखे प्रदर्शन को देख हर कोई हैरान था। बंदर का मास्क लगाए विधायक सुनील उईके हाथ में नकली उस्तरा भी लिए थे। वहीं, प्रदर्शन कर रहे विपक्षी विधायक ‘बंदर के हाथ में उस्तरा’ जैसी कहावत के नारे लगा रहे थे। विधानसभा में आज 13,476.94 करोड़ रुपए के दूसरे अनुपूरक बजट पर चर्चा होनी है। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने मंगलवार को इसपर बजट पेश किया था। सबसे बड़ी राशि ग्रामीण विकास को मिली है। पीएम आवास के लिए 4,000 करोड़ और लाड़ली बहना योजना के लिए 1,794 करोड़ रुपए। किसानों के लिए समर्थन मूल्य भुगतान हेतु 2,001 करोड़, आपदा राहत के लिए 77.20 करोड़ और भावांतर योजना के लिए 500 करोड़ रखे गए हैं। विपक्ष बोला- जनता की पुकार, सत्ता पक्ष ने बताया सदन का अपमानजुन्नारदेव विधायक सुनील उईके ने बंदर का वेश धारण कर इशारा किया कि सरकार जनता को ‘बंदर’ बना रही है। उन्होंने कहा कि, ‘खाद नहीं मिल रही, बिजली नहीं मिल रही, किसान मर रहा है। सरकार हर वर्ग के हक पर उस्तरा चला रही है।’ कांग्रेस ने इसे जनता की पुकार बताया। तो वहीं, दूसरी तरफ सत्ता पक्ष ने इसे सदन की गरिमा का अपमान ठहराया है।

कुपोषण फ्री के लिए फुल प्रूफ प्लान बनाएं, लाडली लक्ष्मी बेटियों के ड्रॉप आउट रोकें…. रिव्यू मीटिंग में सीएम के सख्त निर्देश

Develop a foolproof plan to eliminate malnutrition, prevent dropouts of Ladli Laxmi girls… CM issues strict instructions in review meeting भोपाल : एमपी सरकार के दो साल पूरे होने वाले हैं। इससे पहले सीएम मोहन यादव विभागों की समीक्षा कर रहे हैं। बाल विकास विभाग की समीक्षा के दौरान सीएम ने कई निर्देश दिए हैं। मध्य प्रदेश आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की पूर्णत: ऑनलाइन पारदर्शी भर्ती प्रकिया लागू करने में देश का पहला राज्य बन गया है। इसके साथ ही सीएम ने लाडली लक्ष्मी बेटियों के ड्रॉप आउट पर विभागीय अधिकारियों से जानकारी ली। ड्रॉप आउट रोकने के निर्देशसीएम ने अधिकारियों को लाडली लक्ष्मी बेटियों के ड्रॉप आउट रोकने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कहा कि इस पर सख्त निगरानी रखें। दरअसल, यह खबरें आ रही थीं कि लाडली लक्ष्मी बेटियां पढ़ाई छोड़ रही हैं। इसी के बाद सीएम ने चर्चा की है। ये रहीं विभाग की उपलब्धियांइसके साथ ही टेक होम राशन की एफआरएस प्रक्रिया में मध्य प्रदेश प्रथम स्थान पर है। इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर सराहना हुई है। साथ ही स्पॉन्सरशिप योजना में 20,243 बच्चों को लाभ देकर एमपी ने देश में दूसरा स्थान हासिल किया है। झाबुआ के ‘मोटी आई’ नवाचार को प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार मिला है। PM JANMAN भवनों की डिजाइन और मॉनिटरिंग मॉड्यूल की भारत सरकार द्वारा विशेष सराहना की गई। भवन निर्माण की रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए अत्याधुनिक मॉड्यूल विकसित किया गया। आंगनवाड़ी में गर्म भोजन की व्यवस्थावहीं, सीएम ने तीन वर्ष की तैयारी करने के निर्देश दिए हैं। 2026 से मध्य प्रदेश के शहरी आंगनवाड़ी केंद्रों में सेंट्रल किचन से गर्म भोजन उपलब्ध करवाने की तैयारी है। साथ ही अगले तीन वर्ष में 9000 नए आंगनवाड़ी केंद्रों के भवन बनाए जाएंगे। महिलाओं को मिली मददसाथ ही PMMVY में 9.70 लाख गर्भवती महिलाओं को ₹512 करोड़ से अधिक की सहायता मिली है। लाडली बहना योजना के तहत जनवरी 2024–नवंबर 2025 में ₹36,778 करोड़ का अंतरण किया गया है। 1.72 लाख महिलाओं को महिला हेल्पलाइन से सहायता मिली है। इसके साथ ही बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के तहत 1.89 लाख पौधारोपण, 6,520 ड्राइविंग लाइसेंस, 8,637 बालिकाओं को प्रतियोगी परीक्षा प्रशिक्षण दी गई। वहीं, सामग्री टेंडर प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के निर्देश दिए। सीएम ने कहा कि यदि टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी होगी तो वरिष्ठ अधिकारी जिम्मेदार होगें। सीएम ने तीन साल में कुपोषण को समाप्त करने के लिए फुल प्रूफ कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही ब्रेस्ट फीडिंग के लिए जागरूकता बढ़ाने के भी निर्देश दिए हैं।

BJP विधायक संजय पाठक से जुड़ीं कंपनियों पर 443 करोड़ का नोटिस, कलेक्टर ने 15 दिन का दिया ultimatum

Companies linked to BJP MLA Sanjay Pathak have been served notices of ₹443 crore, with the collector issuing a 15-day ultimatum. भोपाल। मध्यप्रदेश में अवैध रेत उत्खनन के सबसे बड़े मामलों में से एक पर बड़ी कार्रवाई सामने आई है। विजयराघवगढ़ से भाजपा विधायक संजय सत्येंद्र पाठक से संबद्ध तीन खनन कंपनियों को सरकार ने 443 करोड़ 4 लाख 86 हजार 890 रुपये की भारी-भरकम वसूली नोटिस थमाया है। इसकी आधिकारिक पुष्टि विधानसभा में दी गई है। कांग्रेस विधायक डॉ. हीरालाल अलावा के तारांकित प्रश्न के जवाब में खनिज साधन विभाग ने बताया कि जांच में स्वीकृत सीमा से अधिक रेत निकालने का बड़ा घोटाला पकड़ा गया है। जिन कंपनियों पर कार्रवाई हुई है, वे इस प्रकार हैं— आनंद माइनिंग कॉर्पोरेशन – ग्राम टिकरिया निर्मिला मिनरल्स – ग्राम दुबियारा पैसिफिक एक्सपोर्ट – ग्राम झिठी जबलपुर कलेक्टर ने 10 नवंबर 2025 को आदेश जारी कर सभी कंपनियों को राशि जमा करने के निर्देश दिए हैं। नोटिस में खनिज रॉयल्टी, जीएसटी और अन्य देयकों का भुगतान अनिवार्य बताया गया है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि राशि जमा न करने पर मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभाग का कहना है कि यह कदम खनिज विभाग की जांच रिपोर्ट के आधार पर उठाया गया है, जिसे सरकार ने स्वीकार कर लिया है। इस कार्रवाई को जबलपुर जिले में बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध रेत उत्खनन और राज्य को हुए राजस्व नुकसान की भरपाई के रूप में देखा जा रहा है। वहीं, कांग्रेस लगातार इस मुद्दे को विधानसभा से लेकर सड़क तक उठा रही है, और अब 443 करोड़ की यह वसूली कार्रवाई राजनीतिक हलचल तेज कर रही है।

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