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काम का दबाव या बीमारी? 10 दिनों में छह बीएलओ की मौत, परिजन बोले- एसआईआर ने ली जान

madhya pradesh blo deaths special intensive revision work pressure health issues election digitization crisis प्रदेश में जारी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान बूथ लेवल ऑफिसरों (BLO) की लगातार मौतों और बीमार होने की घटनाओं ने प्रशासन से लेकर कर्मचारी संगठनों तक सभी को चिंता में डाल दिया है। पिछले 10 दिनों में प्रदेश में 6 बीएलओ की मौत दर्ज की गई है, जबकि कई कर्मचारी अस्पताल में भर्ती हैं। परिजनों का आरोप है कि भारी काम के दबाव और तनाव के कारण मौतें हुई हैं, वहीं निर्वाचन विभाग का कहना है कि मौतों का कारण बीमारियों की अनदेखी और हादसे हैं। दूसरी ओर कर्मचारी संगठन इसे “काम के बोझ का नतीजा” बता रहे हैं। 5.74 करोड़ मतदाताओं का डेटा, 65 हजार बीएलओ पर जिम्मेदारी प्रदेश में 4 नवंबर से मतदाता सूची के डिजिटलाइजेशन का बड़ा अभियान चल रहा है। इसमें लगभग 5.74 करोड़ मतदाताओं की जानकारी अपडेट करने का काम 65 हजार बीएलओ द्वारा किया जा रहा है। निर्धारित डेडलाइन नजदीक आने से कर्मचारियों पर लगातार प्रेशर बढ़ रहा है। घटनाओं की चिंताजनक श्रृंखला सूत्रों के अनुसार, शहडोल के सोहागपुर में बीएलओ मनीराम नापित लोगों से फॉर्म ले रहे थे तभी एक अधिकारी का फोन आया। कॉल के तुरंत बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई और अस्पताल ले जाते समय उनकी मौत हो गई। पिपरिया (नर्मदापुरम) में शिक्षक और बीएलओ सुजान सिंह रघुवंशी एसआईआर सर्वे से लौटते समय ट्रेन की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हुए और बाद में अस्पताल में उनका निधन हो गया। मंडीदीप में ऑनलाइन मीटिंग खत्म होने के कुछ ही मिनट बाद बीएलओ रमाकांत पांडे अचानक बेहोश हुए और अस्पताल ले जाने के दौरान उनकी मौत हो गई। झाबुआ में बीएलओ भुवन सिंह को कुछ दिन पहले लापरवाही बताकर निलंबित किया गया था। परिजनों का कहना है कि निलंबन से वह गहरे मानसिक तनाव में थे और इसी सदमे में उन्हें हार्ट अटैक आया। इसी तरह दमोह और बालाघाट में भी दो बीएलओ की तबीयत बिगड़ने के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई। एक परिजन ने आरोप लगाया कि “लगातार काम का दबाव और भागदौड़ ने उनकी स्थिति खराब कर दी।” बीएलओ अस्पताल में भर्ती भोपाल, रीवा और भिंड में कई बीएलओ को हार्ट अटैक और ब्रेन हेमरेज के मामले सामने आए हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि बीमारी के बावजूद अधिकारियों ने उनसे काम पूरा करने का दबाव बनाया। कर्मचारी संघ ने उठाई मुआवजे की मांग मप्र तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने चुनाव आयोग को पत्र भेजकर मांग की है कि मृत बीएलओ के परिवारों को 15 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए और बीमार कर्मचारियों का इलाज चुनाव ड्यूटी की तरह शासन खर्च पर कराया जाए। एसआईआर प्रगति रिपोर्ट: एमपी चौथे स्थान पर मतदाता सूची के डिजिटाइजेशन को लेकर नवीनतम रिपोर्ट में बताया गया है कि 25 नवंबर दोपहर 12 बजे तक मध्य प्रदेश ने 72.29% काम पूरा कर लिया है। इससे राज्य देशभर में चौथे स्थान पर पहुंचा है। हालांकि बीएलओ को सर्वर की समस्या, लगातार फील्ड विजिट और हजारों रिकॉर्ड के पुनः सत्यापन जैसी बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं राजस्थान देश में पहले स्थान पर है, जहां 3,000 से अधिक बूथों पर 100% डिजिटाइजेशन पूरा कर लिया गया है। 4 दिसंबर तक चलेगा सर्वे निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 4 दिसंबर तक बीएलओ मतदाताओं के घरों तक फॉर्म पहुंचाने और भरे हुए फॉर्म वापस लेने का काम पूरा करेंगे। इसके बाद 9 दिसंबर को ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। जिन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट में नहीं होंगे, वे जिला निर्वाचन अधिकारी के पास अपील कर सकेंगे। यदि वहां अपील खारिज होती है, तो राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के समक्ष भी अपील दायर की जा सकेगी। मध्य प्रदेश की 230 विधानसभा में चार नवंबर से एसआईआर का काम चल रहा हैं। प्रदेश के कुल 5 करोड़ 74 लाख 5 हजार वोटर्स के फार्म डिजिटलाइज होने हैं। इस काम में 65 हजार 14 बूथ लेवल ऑफियर ड्यूटी पर लगे है।

प्रदेश की जनता सीधे चुनेगी नगर पालिका और नगर परिषद अध्यक्ष, राइट टू रिकॉल भी होगा लागू

The people of the state will directly elect the Municipal Council and Municipal Council President, Right to Recall will also be implemented भोपाल ! एक दिसंबर से प्रारंभ होने वाले विधानसभा के शीतकालीन सत्र (Madhya Pradesh Legislative Assembly Winter Session) में सरकार नगर पालिका अधिनियम में संशोधन का विधेयक लाएगी। जिसमें जनता द्वारा सीधे नगर पालिका व नगर परिषद का अध्यक्ष चुने जाने का प्रविधान होगा। मझौली नगर परिषद के उपचुनाव से प्रविधान लागू हो जाएगामझौली नगर परिषद के उपचुनाव से ही यह प्रविधान लागू हो जाएगा। निर्वाचित अध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास होने पर राइट टू रिकॉल के तहत वापस भी बुलाया जा सकेगा। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में हुई कैबिनेट की बैठक में संशोधन विधेयक प्रस्तुत करने की स्वीकृति दी गई। इसके साथ ही दस हजार करोड़ रुपये से अधिक के द्वितीय अनुपूरक बजट प्रस्ताव को भी हरी झंडी दी गई। संशोधन विधेयक लाया जाएगातत्कालीन कमल नाथ सरकार ने नगर पालिका अधिनियम में संशोधन करके पार्षदों के बीच में से अध्यक्ष चुनने की व्यवस्था लागू की थी। शिवराज सरकार में इसी प्रविधान से चुनाव हुए। अब 2027 में चुनाव प्रस्तावित हैं। पार्षदों द्वारा अध्यक्ष पर दबाव बनाने सहित अन्य शिकायतों को देखते हुए मोहन यादव सरकार ने नगर पालिका व नगर परिषद के अध्यक्ष का चुनाव सीधे जनता से कराने का प्रविधान अध्यादेश के माध्यम से किया। अब इसके स्थान पर संशोधन विधेयक लाया जाएगा। नए वाहनों के लिए विभागों को राशि नहीं दी जाएगीवहीं, विधानसभा में वर्ष 2025-26 के लिए प्रस्तुत किए जाने वाले द्वितीय अनुपूरक बजट के प्रस्तावों को भी हरी झंडी दी गई। सूत्रों का कहना है कि यह दस हजार करोड़ रुपये से अधिक का हो सकता है। इसमें कोई भी नई योजना प्रारंभ नहीं होगी। नए वाहनों के लिए विभागों को राशि नहीं दी जाएगी। बलिदानी आशीष के भाई को मिलेगी अनुकंपा नियुक्तिमाओवादी विरोधी अभियान के दौरान पुलिस-नक्सल मुठभेड़ मे 19 नवंबर 2025 को बलिदान हुए विशेष सशस्त्र बल के निरीक्षक आशीष शर्मा के छोटे भाई अंकित शर्मा को जिला पुलिस बल में उप निरीक्षण नियुक्त करने का निर्णय लिया गया। साथ ही स्वजन को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता की स्वीकृति भी प्रदान की गई।

मध्य प्रदेश में छात्रों के आत्महत्या करने के मामले में इंदौर पहले और भोपाल दूसरे नंबर पर

Indore is at first place and Bhopal is at second place in the number of student suicides in Madhya Pradesh. भोपाल ! देशभर में स्वच्छता में पहले स्थान पर आने वाला इंदौर लोगों में बढ़ते तनाव को कम करने में काफी पीछे है। खासकर विद्यार्थियों में तनाव बढ़ता जा रहा है, जिसके कारण वह आत्महत्या कर रहे हैं। इंदौर के कोचिंग संस्थानों (Coaching institutes) में पढ़ने वाले 20 से अधिक विद्यार्थी हर वर्ष तनाव में आत्महत्या कर रहे हैं। सबसे अधिक तनाव नीट(NEET) और जेईई (JEE) की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों में है। आत्महत्या की दर ने सरकार की चिंता बढ़ाईविद्यार्थियों में बढ़ रही आत्महत्या की दर ने सरकार की भी चिंता बढ़ा दी है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) 2023 की रिपोर्ट बताती है कि 2023 में देशभर में 15 हजार से अधिक बच्चों ने आत्महत्या की है। 1668 मामलों के साथ मध्य प्रदेश देश में दूसरे नंबर (महाराष्ट्र के बाद) पर है। वहीं प्रदेश में भी इंदौर पहले और भोपाल जिला दूसरे स्थान पर है। एक्शन में सरकार, एसटीएफ का गठनमानसिक स्वास्थ्य में सुधार के लिए एसटीएफ का गठन सरकार ने बच्चों को आत्मघात से बचाने की जिम्मेदारी शिक्षकों-अफसरों को सौंपी है। उच्चशिक्षा विभाग ने अभिनव प्रयोग करते हुए स्टेट टास्क फोर्स (एसटीएफ) का गठन किया है। यह बल सभी विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और कोचिंग संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी उपायों की निगरानी और सुधार की रूपरेखा तय करेगा। शैक्षणिक संस्थानों में नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। कॉलेजों में काउंसलिंग कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है। एसटीएफ में स्कूल शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस, बाल सुरक्षा, सामाजिक न्याय तथा नगरीय प्रशासन विभागों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है। इंदौर में पांच हजार से अधिक कोचिंगइंदौर प्रदेश का कोचिंग हब है। यहां पांच हजार से अधिक कोचिंग संस्थान संचालित होते हैं। इसमें से 200 से अधिक नीट, जेईई और आईआईटी (IIT) की तैयारी की कोचिंग है। भंवरकुआं, गीताभवन, पलासिया, विजय नगर आदि क्षेत्रों में बड़ी संख्या में कोचिंग संस्थान हैं। यहीं सबसे अधिक विद्यार्थी रहते भी हैं। इंदौर में आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में विद्यार्थी पढ़ाई के लिए आते हैं। पढ़ाई का दबाव बना जानलेवाकेस 1ः फरवरी 2025 में भंवरकुआं थाना क्षेत्र में नीट की परीक्षा में चयन न होने से परेशान छात्रा ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी। छात्रा का नाम गारगी सुमन (23) निवासी श्रीराम नगर पालदा था। गारगी कई वर्षों से नीट की तैयारी कर रही थी। दो बार कम अंक आने के कारण वह सफल नहीं हो सकी। इसके बाद उसने बैंक की परीक्षा की तैयारी की, लेकिन इसमें भी वह सफल नहीं हो सकी। केस 2ः वर्ष 2024 में भंवरकुआं क्षेत्र में एक छात्र ने नोट लिखा कि मैं जीवन में सफल नहीं हो पाया और आत्महत्या कर ली। छात्र नीट की तैयारी कर रहा था। मूलरूप से शिवनी जिले का रहने वाला था। केस 3ः फरवरी 2024 में 20 वर्षीय आर्यन तिवारी ने फांसी लगा ली थी। वह मूलरूप से हुजूर (रीवा) का रहने वाला था। इंदौर रहकर वह नीट की तैयारी कर रहा था। केस 4ः मई 2025 में नर्सिंग की छात्रा आशा कानूनगो (25) ने आत्महत्या कर ली। वह मूलरूप से सिवनी की रहने वाली थी। उसकी दीवार पर कई नोट चिपके हुए थे। उनमें लिखा था कि वह सरकारी नर्स नहीं बन सकती और डिप्रेशन में है।केस 5ः मई 2025 में संयोगितागंज थाना क्षेत्र में नर्स यास्मित्रा ने आत्महत्या की। वह निजी मेडिकल कॉलेज में आगे की पढ़ाई कर रही थी। आशंका जताई गई थी कि पढ़ाई के दबाव के चलते यह कदम उठाया है। विशेषज्ञ ने बताया क्या करें माता-पितामनोचिकित्सक डॉ. राहुल माथुर ने बताया कि अब बच्चों में तनाव सहने की क्षमता कम हो गई है। पढ़ाई का तनाव इतना अधिक ले लेते हैं कि आत्महत्या जैसे कदम उठाते हैं। माता-पिता को ध्यान रखना चाहिए कि वह बच्चों से उम्मीद रखने के बजाय उनके सहायक की भूमिका निभाएं। उनसे खुलकर बात करें। यदि बच्चा कई दिनों से चुपचाप है, अकेला रहने लगा है, रात में जल्दी नहीं सो रहा है, तो हमें इन लक्षणों को पहचानकर विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। बच्चों को यह लगता है कि परीक्षा में फेल हो गया तो क्या होगा। उन्हें यह समझना होगा कि जो व्यक्ति परीक्षा में सफल नहीं हो पाते हैं, वह भी आगे बढ़ते हैं। विद्यार्थियों में इन लक्षणों को पहचानें

एमपी गज़ब: विकास या बर्बादी? जिम्मेदार कौन इंजीनियरिंग या सरकार

MP Ghazab: Development or ruin? Who is responsible: engineering or government? Whether it’s the municipal corporation, the Bhopal Metro, or the Public Works Department… they’re all tainted by corruption. भोपाल। प्रदेश की राजधानी भोपाल एक बार फिर सरकारी इंजीनियरिंग की गंभीर खामियों को लेकर सुर्खियों में है। विपक्ष का आरोप है कि राज्य में मानो इंजीनियरों के बीच यह होड़ चल रही है कि कौन जनता के पैसों की सबसे ज्यादा बर्बादी कर सकता है। इसी सवाल के साथ कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को कठघरे में खड़ा किया है। भोपाल विकास की 3 तस्वीरें राज्य के सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहीं हैं पहली तस्वीर: सेकंड स्टॉप के पास बन रहा नगर निगम का प्रदेश का अनोखा 40 करोड़ का “नया ऑफिस”। इसकी बेसिक प्लानिंग में भारी चूक सामने आ रहीं है। भोपाल नगर निगम का नया आठ मंजिला कार्यालय 40 करोड़ रुपये में तैयार किया गया। विपक्ष का आरोप है कि इतनी बड़ी बिल्डिंग में मीटिंग हॉल की बुनियादी प्लानिंग तक सही नहीं की गई। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह फैसला नहीं हो पा रहा कि यह इमारत ऑफिस है या इंजीनियरों का “प्रैक्टिकल लैब”, जहां जनता के पैसों पर प्रयोग किए जा रहे हैं। दूसरी तस्वीर: भोपाल मेट्रो… मानक से कम ऊंचाई पर बना स्टेशन प्रगति पेट्रोल पंम्प और केंद्रीय रिजर्व बैंक के पास भोपाल मेट्रो स्टेशन की ऊंचाई मानकों से कम पाए जाने के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इन दोनों जगह सड़क और स्टेशन के बीच इतनी कम जगह छोड़ी गई कि बड़ी गाड़ियाँ स्टेशन से टकराने लगीं। तीसरी मुसीबत की तस्वीर: एशबाग के 90 डिग्री रेलवे ओवर ब्रिज की राजधानी के बरखेड़ी स्थित यह सवाल रेलवे ओवरब्रिज बनाने में पीडब्ल्यूडी की इंजीनियरिंग बड़ी फेलुअर साबित हुई है। यहां 90 डिग्री मोड़ वाला ओवर ब्रिज बना दिया, जो बनने से पहले ही जानलेवा बन गया है। करोड़ों रुपये से तैयार ओवर ब्रिज जनता के उपयोग लायक नहीं है। अब इसको उपयोगी बनाने के लिए फिर से करोड़ों रुपये खर्च करने की प्लानिंग बन रहीं है, जिसमें 3 महीने का समय लगना है। विपक्ष का कहना है कि…“यह सिर्फ इंजीनियरिंग गलत नहीं, बल्कि जनता के हजारों करोड़ की योजनाओं के साथ खिलवाड़ है।” विपक्ष का तीखा तंज… मध्यप्रदेश के इंजीनियर बिल्डिंग ब्लॉक गेम खेल रहे हैं”। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री दोनों पर हमला बोलते हुए कहा कि “मध्यप्रदेश के इंजीनियर्स पहले बिल्डिंग बनाते हैं, फिर तोड़ते हैं, फिर बनाते हैं और फिर से तोड़ देते हैं। मानो यह सरकारी निर्माण नहीं, बच्चों का बिल्डिंग-ब्लॉक गेम हो।” भारी गलतियों के लिए अधिकारी जिम्मेदार कांग्रेस प्रवक्ता संगीता शर्मा और कांग्रेस एससी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार समेत अन्य नेताओं ने सवाल उठाया कि जब एक आम आदमी अपने घर की छोटी से छोटी प्लानिंग में सावधानी रखता है तो फिर सरकारी परियोजनाओं में बार-बार ऐसी भारी गलतियाँ क्यों हो रही हैं? और अगर गलती इंजीनियर की है तो “भरपाई जनता क्यों करे? कार्रवाई इंजीनियर और जिम्मेदार अधिकारियों पर क्यों नहीं होती?” पीएम मोदी और राज्य सरकार पर विपक्ष का सीधा हमला कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रदेश में निर्माण कार्यों की बार-बार की खामियाँ साबित करती हैं कि “मध्यप्रदेश में सिस्टम नहीं, बर्बादी का मौन राज चल रहा है।” विपक्ष की मांग है कि दोषी इंजीनियरों पर तत्काल सख्त कार्रवाई हो। निर्माण के हर चरण की थर्ड-पार्टी जांच अनिवार्य की जाए और जनता के पैसों की भरपाई उन अधिकारियों से कराई जाए, जिन्होंने योजनाओं को गलत तरीके से पास किया। प्रदेश में लगातार सामने आ रही इंजीनियरिंग की ये गलतियाँ अब एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुकी हैं और जनता पूछ रही है। “विकास के नाम पर आखिर किसके हाथों खेल रही है जनता की गाढ़ी कमाई?”

प्रगति एग्रो इंडस्ट्रीज ने बढ़ाया भारत का गौरव : गिनी गणराज्य के राजदूत और राष्ट्रपति सलाहकार से हुई उच्च स्तरीय बैठक

Pragati Agro Industries has enhanced India’s pride: High-level meeting with the Ambassador of the Republic of Guinea and the Presidential Advisor भोपाल। मध्य प्रदेश की अग्रणी संस्था प्रगति एग्रो इंडस्ट्रीज ने भारत की कृषि तकनीक को वैश्विक मंच पर एक नया मुकाम दिलाया है। हाल ही में गिनी गणराज्य (नई दिल्ली) के राजदूत महामहिम कोंटे अलासेन और गिनी के राष्ट्रपति के सलाहकार केलेटी डौम्बौया भोपाल के आधिकारिक दौरे पर पहुंचे, जहां उन्होंने प्रगति एग्रो इंडस्ट्रीज के अधिकारियों से मुलाकात की। बैठक के दौरान दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने सतत कृषि विकास, पॉलीहाउस तकनीक, संरक्षित खेती, सिंचाई प्रणाली और टर्नकी कृषि अवसंरचना परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की। प्रगति एग्रो इंडस्ट्रीज ने भारत की तकनीकी विशेषज्ञता और नवाचार क्षमता को प्रस्तुत करते हुए बताया कि किस तरह भारतीय कंपनियां अफ्रीकी देशों के कृषि विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। राजदूत कोंटे अलासेन ने भारत की कृषि तकनीक और प्रगति एग्रो इंडस्ट्रीज के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि “गिनी भारत से सीख लेकर अपने देश में आधुनिक और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देना चाहता है।” वहीं, कंपनी ने गिनी में संरक्षित खेती और उन्नत कृषि ढांचे के लिए संभावित सहयोग योजनाएं साझा कीं। प्रगति एग्रो इंडस्ट्रीज के प्रतिनिधियों ने कहा कि यह बैठक भारत-अफ्रीका कृषि सहयोग की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है, जो न केवल तकनीकी आदान-प्रदान को बढ़ावा देगी, बल्कि रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त करेगी। इस मुलाकात ने भारत और गिनी के बीच कृषि साझेदारी का नया अध्याय खोल दिया है, जिससे दोनों देशों के किसानों और कृषि विशेषज्ञों को लाभ होगा। यह मुलाकात भारत की कृषि शक्ति को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है।

सड़कों पर मौत का तांडव , मप्र में हर घंटे में एक जानलेवा दुर्घटना, हर दिन 150+ एक्सीडेंट, 38 से ज्यादा मौतें

Death on the roads: One fatal accident every hour in Madhya Pradesh, 150+ accidents daily, and over 38 deaths. भोपाल। मध्य प्रदेश 2023 में सड़क दुर्घटनाओं के मामले में देश के सबसे खतरनाक राज्यों में से एक रहा है। एनसीआरबी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में कुल 14,098 लोगों की मौत हुई, जो भारत की कुल आकस्मिक मौतों का 9.8 प्रतिशत है। 2022 की तुलना में दुर्घटनाओं में 5.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। रिपोर्ट बताती है कि 2023 में मध्य प्रदेश में 54,763 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इन दुर्घटनाओं में 54,699 लोग घायल भी हुए। राज्य में आकस्मिक मृत्यु दर 49.8 रही, जो देश में छठी सबसे अधिक दर है। मध्य प्रदेश के हाईवे खतरनाकयात्रियों के लिए राजमार्ग सबसे खतरनाक साबित हुए। भारत की कुल सड़क दुर्घटना मौतों का 7 प्रतिशत केवल मध्य प्रदेश के राष्ट्रीय राजमार्गों पर दर्ज किया गया। शाम 6 बजे से रात 9 बजे के बीच का समय विशेष रूप से जोखिम भरा रहा, इस दौरान 10,613 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इसके अलावा, देश में हुई घातक बस दुर्घटनाओं में से 10.2 प्रतिशत मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में मिलाकर हुईं। छोटे वाहनों से ज्यादा हुए एक्सीडेंटखराब बुनियादी ढांचा और पर्यावरणीय कारक भी इन मौतों में योगदान करते हैं। एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार, भारी और यात्री वाहनों के कारण बड़ी संख्या में मौतें हुईं। राज्य की सड़कों पर स्ङ्क/जीप और कारों से होने वाली दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या ट्रक/लॉरी/मिनी-ट्रक से होने वाली मौतों से अधिक थी। राजधानी भोपाल में भी बढ़ोतरीराष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, भोपाल में 2023 में सड़क दुर्घटनाओं में 4.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यह वृद्धि 2022 की तुलना में हुई है। कुल 2,906 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 196 लोगों की जान गई और 2,196 लोग घायल हुए। रात 9 बजे से आधी रात तक का समय सबसे खतरनाक रहा। दोपहिया वाहन चालक और पैदल यात्री सबसे ज़्यादा असुरक्षित पाए गए। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने भी भोपाल को ओवर-स्पीडिंग के कारण होने वाली दुर्घटनाओं में चौथे स्थान पर रखा था।

75 करोड़ सम्पत्ति के मालिक हैं शिवराज सिंह के चाहते सीहोर विधायक सुदेश राय

Shivraj Singh Chouhan’s favourite Sehore MLA Sudesh Rai owns property worth crores भोपाल। Sehore MLA Sudesh Rai साल 2023 में हुए विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करने वाले 230 विधायकों में 205 करोड़पति हैं। विधायकों की संपत्ति साल दर साल बड़ी है। मध्य प्रदेश के सबसे अमीर विधायकों की सीरीज में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिला सीहोर के विधायकों की सम्पत्ति कई गुना बड़ी है। Sehore MLA Sudesh Rai 74.71 करोड़ रुपये की संपत्ति के मालिक हैं, जो सीहोर सीट से 3 बार चुनाव जीत चुके हैं। 2023 के विधानसभा चुनाव में चुनाव आयोग को दिए हलफनामे में सुदेश राय ने अपनी संपत्ति 74 करोड़ 71 लाख 38 हजार 89 रुपये बताई थी, जबकि उनकी देनदारी 2 करोड़ 75 लाख 7 हजार 785 रुपये थी। राय की संपत्ति 5 साल में 7.20 करोड़ रुपये बढ़ गई है। साल 2018 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने अपनी संपत्ति 67 करोड़ 51 लाख 29 हजार 525 रुपये बताई थी। चुनावी हलफनामे के अनुसार, सुदेश राय के नाम पर 24.17 करोड़ रुपये की 59.125 एकड़ खेतीहर जमीन है, जबकि उनकी पत्नी के नाम भी 4.04 करोड़ रुपये की कृषि भूमि है। इसके अलावा उनके पास 21.33 करोड़ रुपये और उनकी पत्नी के नाम पर 96.42 लाख की नॉन-एग्रीकल्चर जमीन है। सुदेश राय के नाम पर सीहोर में 1.09 करोड़ रुपये का एक घर है, जो 3472 स्क्वायर फीट में बना है। उनके पास सीहोर में इंदौर-भोपाल रोड पर एक कमर्शियल बिल्डिंग भी है, जिसकी कीमत उन्होंने एफिडेविट में 10.51 करोड़ रुपये बताई थी। सुदेश राय को महंगी कार का भी शौक है। चुनावी हलफनामे में उन्होंने 2 कारों का जिक्र किया था। इसमें 21.74 लाख रुपये की कीमत की फोर्ड एंडेवर और 1.29 करोड़ रुपये की मर्सडीज शामिल है। सुदेश राय के पास 200 ग्राम सोना है, जिसकी कीमत 2023 में उन्होंने 11 लाख रुपये बताई थी। उनकी पत्नी के पास 500 ग्राम सोना है, जिसकी कीमत 27.5 लाख रुपये बताई थी। उनकी पत्नी के पास 2 किलो 70 ग्राम चांदी भी है, जिसकी कीमत साल 2023 में 1.5 लाख रुपये थी। Sehore MLA Sudesh Rai ने 2013 में पहली बार निर्दलीय चुनाव लड़ा था और जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। इसके बाद 2018 और 2023 में बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीत चुके हैं।

भोपाल वन विहार घूमने वाले को बूरी ख़बर: आज से ‘नो-व्हीकल जोन: न कार अंदर जा सकेगी, न बाइक बस; 40 गोल्फ कार्ट से घूम सकेंगे टूरिस्ट

Bad news for visitors to Bhopal’s Van Vihar: From today, it’s a ‘no-vehicle zone’: no cars, bikes, or buses will be allowed inside; tourists can explore using 40 golf carts. भोपाल । वन विहार नेशनल पार्क आज (1 अक्टूबर) से ‘नो व्हीकल’ जोन हो जाएगा। न कार अंदर जा सकेंगी और न बाइक या बसें । टूरिस्ट 40 गोल्फ कार्ट के जरिए वन विहार घूम सकेंगे। वन विहार में घूमने आने वाले टूरिस्ट कई बार अपनी गाड़ियों के हॉर्न तेज आवाज में बजाते हैं। इससे अन्य पर्यटकों के साथ जानवर भी परेशान होते हैं। इसलिए वन विहार प्रबंधन यह कदम उठाने जा रहा है। बुधवार को मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव वन विहार में ही राज्य स्तरीय वन्य प्राणी सप्ताह की शुरुआत भी करेंगे। हर 10 मिनट में मिलेंगे गोल्फ कार्ट वन विहार की असिस्टेंट डायरेक्टर डॉ. रूही हक ने बताया कि वन विहार में भ्रमण के लिए 40 गोल्फ कार्ट का संचालन किया जाएगा। इन गोल्फ कार्ट में से 32 गोल्फ कार्ट हॉप ऑन हॉप ऑफ पद्धति संचालन के लिए रहेंगे। वहीं, 8 गोल्फ कार्ट (6 सीटर) पूर्ण रूप से 3 घंटे के लिए बुकिंग पर पर्यटकों को उपलब्ध रहेंगे। गोल्फ कार्ट का संचालन दोनों गेट से 10 मिनट पर लगातार होगा। सभी व्यू पाइंट पर 30 सेकेंड से 1 मिनट के लिए रुकेंगे। इससे पर्यटकों को अपनी स्वेच्छानुसार व्यू पाइंट पर वन्यप्राणियों को देखने का पर्याप्त समय मिलेगा। साइकिल से भी घूम सकेंगे गोल्फ कार्ट के अलावा पैदल भ्रमण, साइकिल, शाकाहारी सफारी की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। इस बदलाव से वन विहार में पर्यटकों को सशुल्क 150 नई साइकिलें भी उपलब्ध कराएगा। जिससे वन विहार भ्रमण और सुगम बनेगा। अलग-अलग रंग के बैंड भी मिलेंगे विभिन्न प्रकार के माध्यम से भ्रमण करने हेतु पर्यटकों को विभिन्न रंग के बाइओडिग्रेडबल बैंड भी दिए जाएंगे। जिससे किसी भी भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो। पार्किंग के लिए रुपए चुकाने होंगे वन विहार को जहां नो व्हीकल जोन बनाया जा रहा है तो पार्किंग के रूप में पर्यटकों को रुपए भी चुकाने होंगे। चार पहिया वाहनों की पार्किंग के लिए केवल प्रवेश द्वार नंबर-2 पर पार्किंग स्थल बनाया गया है। टूव्हीलर्स के लिए गेट नंबर-1 और 2 दोनों पर ही व्यवस्था रहेगी।

ब्रेकिंग न्यूज : MP में 24 आईएएस अफसरों के तबादले, 11 कलेक्टर बदले: संस्कृति बनीं भोपाल नगर निगम की कमिश्नर; नीरज वशिष्ठ पांढुर्णा के नए कलेक्टर

Breaking News: 24 IAS officers transferred in MP, 11 collectors changed भोपाल। राज्य शासन ने मंगलवार को 24 आईएएस अफसरों के तबादले करते हुए 11 कलेक्टर बदल दिए हैं। जिन जिलों के कलेक्टर बदले गए हैं उनमें पन्ना, पांढुर्णा, सिवनी, मुरैना, डिंडोरी, अलीराजपुर, निवाड़ी, भिंड, सिंगरौली, छिंदवाड़ा और रतलाम जिलों के कलेक्टर शामिल हैं। पन्ना कलेक्टर रहे सुरेश कुमार को मुरैना का संभागायुक्त बनाया गया है। संस्कृति जैन को भोपाल नगर निगम का कमिश्नर बनाया गया है। नीरज कुमार वशिष्ठ पांढुर्णा के नए कलेक्टर होंगे। राज्य शासन द्वारा जारी आदेश में कलेक्टर पन्ना सुरेश कुमार को ओएसडी सह आयुक्त चंबल संभाग मुरैना, छिंदवाड़ा कलेक्टर शीलेंद्र सिंह को अपर सचिव नगरीय विकास और आवास विभाग, नेहा मारव्या कलेक्टर डिंडौरी को संचालक विमुक्त घुमंतू और अर्ध घुमंतु जनजाति विभाग, संजीव श्रीवास्तव कलेक्टर भिंड को अपर सचिव लोक निर्माण विभाग, उषा परमार अपर आयुक्त राजस्व भोपाल संभाग को कलेक्टर पन्ना पदस्थ किया गया है। देखें लिस्ट

MPWLC में 10 करोड़ का टेंडर घोटाला : नियम ताक पर, चहेती फर्मों को फायदा, कार्रवाई गायब

MPWLC tender scam: Rules flouted, favoured firms benefit by crores; learn how officials are committing fraud भोपाल। MPWLC Scam in 10 crores मध्य प्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक कॉर्पोरेशन (MPWLC) में सड़क और साइनज के करीब 10 करोड़ रुपये के टेंडर को लेकर गंभीर गड़बड़ियों के आरोप लगे हैं। शिकायतें बताती हैं कि अधिकारियों ने तय नियमों की अनदेखी कर चहेती फर्मों को फायदा पहुँचाया और पात्रता की मूल शर्तें पूरी न करने के बावजूद उन्हें क्वालिफाई कर दिया। टेंडर की पहली शर्त ही टूटी MPWLC Scam in 10 crores जुलाई 2025 में जारी इस टेंडर में साफ लिखा था कि भाग लेने वाली फर्म मध्य प्रदेश पीडब्ल्यूडी में पंजीकृत होनी चाहिए। लेकिन कॉर्पोरेशन ने एवेन्यू ग्राफिक्स, सत्यम ग्राफिक्स और अबुल फैज जैसी फर्मों को भी क्वालिफाई कर लिया, जिनका रजिस्ट्रेशन उस वक्त नहीं था। हद तो यह कि एक फर्म ने तो टेंडर जारी होने के बाद आवेदन किया, जो कि नियमों के हिसाब से अमान्य है। OEM सर्टिफिकेट के बिना भी क्वालिफाई MPWLC Scam in 10 crores पड़ताल में यह भी सामने आया कि इन फर्मों के पास ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर (OEM) का इनकॉरपोरेशन सर्टिफिकेट तक नहीं था। बावजूद इसके उन्हें प्रजेंटेशन के लिए बुलाया गया और बाद में दस्तावेज़ लेकर खानापूर्ति कर दी गई। प्रतिस्पर्धा खत्म, थ्री एम वेंडर बाहर इस टेंडर में छह वेंडर शामिल हुए थे, जिनमें तीन थ्री एम इंडिया से और तीन ओराफिल से थे। लेकिन अधिकारियों ने एक पेपर के आधार पर थ्री एम इंडिया के सभी वेंडरों को बाहर कर दिया। जबकि उनके पास पीडब्ल्यूडी रजिस्ट्रेशन और सभी जरूरी दस्तावेज मौजूद थे। इससे प्रतिस्पर्धा घट गई और अनुमान लगाया जा रहा है कि टेंडर सामान्य से 20–25% कम दर पर मंजूर होने की बजाय केवल ढाई प्रतिशत कम दर पर खोला गया। नियमों की अनदेखी, पारदर्शिता पर सवाल जानकारों का कहना है कि टेक्निकल बिड खुलने के सिर्फ एक घंटे बाद ही फाइनेंशियल बिड भी खोल दी गई, जबकि नियमानुसार इसमें कम से कम 24 घंटे का अंतर होना चाहिए। इस प्रक्रिया से किसी भी वेंडर को आपत्ति दर्ज कराने का मौका ही नहीं मिला। जवाबदेही से बचते अधिकारी जब चीफ इंजीनियर जीपी मेहरा से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि “हमने पीडब्ल्यूडी एनआईटी के अनुसार फर्मों को क्वालिफाई किया है, बाकी जानकारी अधीक्षण यंत्री से लीजिए।”अधीक्षण यंत्री एसके जैन का कहना था कि “स्टैंडर्ड मानकों के हिसाब से कार्रवाई हुई है और रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन करने वाली फर्म को भी पात्र माना जाता है। शिकायत वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी गई है।”वहीं, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की एसीएस रश्मि अरुण शमी ने कहा, “मुझे जानकारी नहीं है, पता करती हूं।” एमडी अनुराग वर्मा से संप

मुख्यमंत्री आवास पर ओबीसी आरक्षण को लेकर अहम बैठक

Important meeting regarding OBC reservation at Chief Minister’s residence भोपाल ! ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर आज शाम 6:30 बजे मुख्यमंत्री आवास पर माननीय मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव जी की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक के प्रमुख बिंदु: इस बैठक से यह स्पष्ट हो गया है कि मध्यप्रदेश सरकार और ओबीसी समाज एकजुट होकर सुप्रीम कोर्ट में मजबूत पक्ष प्रस्तुत करेंगे और ओबीसी समाज को उसका संवैधानिक हक दिलाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। ओबीसी आरक्षण प्रकरण के संदर्भ में आयोजित बैठक में ओबीसी महासभा से अपनी ओर से दो अधिवक्ताओं के नाम सुझाने का अनुरोध किया गया था। इस पर महासभा ने देश के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं भारत के पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल श्री पी. विल्सन का नाम प्रस्तावित किया है। शीघ्र ही एक और वरिष्ठ अधिवक्ता का नाम भी ओबीसी महासभा द्वारा प्रदान किया जाएगा।13% होल्ड हटाने एवं 27% आरक्षण लागू करने की दिशा में ओबीसी महासभा द्वारा एक अभिमत (Representation) एडवोकेट जनरल को सौंपा जाएगा। तत्पश्चात एडवोकेट जनरल उस अभिमत का गहन अध्ययन कर अपना अभिमत सरकार को प्रस्तुत करेंगे, जिसके आधार पर 13% होल्ड हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।

प्रतिनियुक्ति लेकर मलाईदार पदों पर वर्षों से जमे शिक्षक

Teachers stuck on lucrative posts for years by taking deputation भोपाल। मध्यप्रदेश समग्र शिक्षक संघ ने राज्य में प्रतिनियुक्ति की अवधि को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है। संघ ने लंबे समय से प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत अधिकारियों, कर्मचारियों और शिक्षकों को मूल पदस्थापना पर भेजने की मांग की है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश चंद्र दुबे एवं प्रदेश संरक्षक मुरारी लाल सोनी ने इस संबंध में मध्यप्रदेश शासन को पत्र प्रेषित किया है। संघ पदाधिकारियों ने पत्र में उल्लेख किया है कि शासन के नियमों के अनुसार प्रतिनियुक्ति की अवधि सामान्यत: 4 वर्ष तय है। विशेष परिस्थितियों में यह अवधि दोनों विभागों की सहमति से केवल 3 वर्ष और बढ़ाई जा सकती है, लेकिन वर्तमान में नीति के विपरीत अनेक अधिकारी, कर्मचारी एवं शिक्षक ऐसे हैं, जो व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए वर्षों से प्रतिनियुक्ति पर जमे हुए हैं। जो स्पष्ट रूप से प्रतिनियुक्ति नियमों के विपरीत है। संघ ने तर्क दिया है कि प्रतिनियुक्ति की लंबी अवधि से मूल विभाग के कार्य प्रभावित हो रहे हैं। पदाधिकारियों का कहना है कि प्रतिनियुक्ति का उद्देश्य केवल विशेष प्रशासनिक आवश्यकता की पूर्ति होती है, न कि व्यक्तिगत सुविधा से इसे स्थायी पदस्थापना का रूप देना है। प्रतिनियुक्ति लेकर मलाईदार विभागों में जमेसंघ के अध्यक्ष सुरेशचंद दुबे का कहना है कि विभिन्न संगठनों से जुड़े कई शिक्षक, कर्मचारी, अधिकारी और उनके परिजन मलाईदार विभागों में नियम विरुद्ध प्रतिनियुक्ति पर 10 से 15 वर्षों से जमे हुए हैं। ऐसे सभी कर्मचारी, अधिकारियों और शिक्षकों को मूल विभाग में तत्काल प्रभाव से वापस भेजा जाए। प्रतिनियुक्ति पर जमे लोकसेवकों की संपत्ति की जांच होसंघ के प्रदेश संरक्षक मुरारीलाल सोनी का का आरोप है कि अनेक लोकसेवक कई वर्षों से नियमविरुद्ध प्रतिनियुक्ति पर जमे हैं। वे शासन को आर्थिक रूप से खोखला कर रहे हैं। ऐसे लोकसेवकों की प्रति नियुक्ति समाप्त कर उनके कार्यकाल और संपत्ति की जांच कराई जाए।

संघर्ष से शिखर तक : हेमंत खंडेलवाल का राजनीतिक सफर

From struggle to peak: Hemant Khandelwal’s political journey भोपाल ! BJP President Hemant Khandelwal मध्य प्रदेश की राजनीति में कभी-कभी ऐसे चेहरे सामने आते हैं, जिनकी चमक न तो पोस्टरों से आती है और न ही बड़ी-बड़ी रैलियों की भीड़ से। हेमंत खंडेलवाल ऐसा ही एक नाम हैं—जो बिना ढोल-नगाड़े, बिना सत्ता का शोर मचाए आज भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुँच गए। सवाल यह है कि क्या यह सफर केवल सादगी और संघर्ष का है, या फिर संगठन की राजनीतिक गणित का भी खेल? हेमंत खंडेलवाल सिर्फ भाजपा के अध्यक्ष नहीं, बल्कि संघर्ष, सादगी और संगठन के उस दर्शन का चेहरा हैं जो राजनीति को जनसेवा का सच्चा माध्यम बनाता है। BJP President Hemant Khandelwal 3 सितंबर 1964 को मथुरा में जन्मे हेमंत खंडेलवाल ने बैतूल में पढ़ाई की और धीरे-धीरे राजनीति में कदम रखा। पिता विजय कुमार खंडेलवाल चार बार सांसद रहे, इसलिए राजनीतिक माहौल घर में मौजूद था। लेकिन यहाँ भी दिलचस्प मोड़ यह है कि हेमंत ने विरासत की मलाई खाने के बजाय खुद को संघर्ष के रास्ते में झोंक दिया। वरना आजकल तो नेता जी का बेटा सीधे ‘उत्तराधिकारी’ घोषित हो जाता है। 2008 में पिता के निधन के बाद बैतूल उपचुनाव से सांसद बने। यही वह पल था जब उन्हें राष्ट्रीय राजनीति की रोशनी मिली। लेकिन उनके साथ विडंबना यह रही कि वे लंबे समय तक सत्ता की गाड़ी के इंजन से दूर रहे—कभी विधायक, कभी जिला अध्यक्ष, कभी कोषाध्यक्ष, और कभी प्रवासी प्रभारी। कहते हैं, उन्होंने राजनीति को ‘करियर’ नहीं, बल्कि ‘धैर्य की परीक्षा’ मान लिया था। BJP President Hemant Khandelwal की सबसे बड़ी पूंजी उनकी सादगी है। सुना है, कार्यकर्ताओं को शर्ट तक दे दी और कभी स्कूटर तक। अब सोचिए, जिस दौर में नेता जी चुनाव में नोटों की बारिश कर रहे हों, उसमें कोई नेता अपनी शर्ट उतारकर कार्यकर्ता को दे दे—ये दृश्य राजनीति की किताब में दुर्लभ ही है। लेकिन राजनीति केवल सादगी से नहीं चलती। 2020 की सत्ता पलट की पटकथा में उनकी भूमिका किसी पर्दे के पीछे के निर्देशक जैसी रही। कमलनाथ सरकार जब गिर रही थी, तब खंडेलवाल ने सिंधिया खेमे और भाजपा के बीच पुल का काम किया। और कहते हैं, यही पुल उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी तक ले आया। राजनीति में ऐसे मौके हर किसी को नहीं मिलते—यह किस्मत और कौशल का संगम है। अब वे प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हैं। सवाल यह है कि क्या वे भाजपा को बूथ स्तर तक और मजबूत बना पाएंगे, या फिर संगठनात्मक जोड़-तोड़ में ही उलझ जाएंगे? याद रखिए, प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी केवल शोभा की वस्तु नहीं है; यह वह कुर्सी है जिस पर बैठकर पार्टी का भविष्य तय होता है। एक और दिलचस्प पहलू यह है कि 31 साल बाद वैश्य समाज से किसी नेता को यह जिम्मेदारी मिली है। तो क्या यह केवल जातीय संतुलन साधने की कोशिश है, या फिर सचमुच संगठन के ‘सच्चे सेवक’ को उसकी मेहनत का इनाम? जनता तो यही देख रही है कि सियासी समीकरणों में जनता का हिस्सा कितना है। BJP President Hemant Khandelwal के पास अब मौका है कि वे यह साबित करें कि राजनीति सिर्फ ‘सत्ता का गणित’ नहीं, बल्कि सेवा और संघर्ष का भी नाम है। क्योंकि अगर वे भी बाकी नेताओं की तरह महंगे काफिलों और बेतहाशा पोस्टरों में उलझ गए, तो जनता उन्हें भी उसी भीड़ में गुम कर देगी, जहाँ नेता बदलते रहते हैं, लेकिन जनता की उम्मीदें वही की वही रहती हैं। हेमंत खंडेलवाल का नया अध्याय केवल भाजपा के संगठन का नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश की राजनीति का भी इम्तिहान है। देखना दिलचस्प होगा कि वे अपनी सादगी और संघर्ष को कायम रखते हैं या फिर सत्ता के गलियारों की चकाचौंध उन्हें भी उसी रंग में रंग देती है, जिसमें बाकी नेता डूब चुके हैं।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा- जीएसटी में कटौती से किसानों को ट्रैक्टर खरीदने में होगी 65 हजार रुपये की बचत

Union Agriculture Minister Shivraj Singh Chouhan भोपाल। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जीएसटी में हुई कटौती से किसानों सहित आम लोगों को होने वाले फायदे बताए। भोपाल में आज मीडिया से चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि कृषि उपकरणों में जीएसटी घटाकर पांच प्रतिशत की गई है जो किसानों के लिए वरदान साबित होगी। किसान अगर ट्रैक्टर खरीदेगा तो 65 हजार रुपये को बचत होगी। हम इंट्रीगेटेड फार्मिंग की कोशिश कर रहे है। जीएसटी घटने से दुग्ध उत्पादन में बड़ी संख्या में काम कर रहे महिलाओं के ग्रुप और लखपति दीदी को बड़ी ताकत मिलेगी। दुग्ध उत्पादकों को लाभ होगा दूध, घी मक्खन पर भी जीएसटी घटाया गया है। डेयरी क्षेत्र आगे बढ़ेगा तो कहीं न कहीं किसान ही लाभान्वित होंगे। उन्होंने कहा कि हमारे यहां लैंड होल्फिंग कम है, इसलिए किसान महंगे उपकरण नहीं खरीद सकता। जीएसटी घटने से छोटे उपकरण खरीद सकेगा। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मछली उत्पादक किसान को भी इससे लाभ होगा। समुद्र ही नहीं अब तो खेतों में तालाब बनाकर मछली पालन हो रहा है, उन्हें भी लाभ होगा। ऊर्जा आधारित उपकरणों पर 12 से घटाकर 5% जीएसटी से भी बड़ा लाभ होगा। सौर ऊर्जा को प्रोत्साहन मिलेगा। सीमेंट लोहे पर जीएसटी कम होने से पीएम आवास बनाना आसान होगा। देश कई चुनौतियों का सामना कर रहा है हमे अपनी अर्थ व्यवस्था को मजबूत करना है। दाम घटेंगे तो उत्पादन बढ़ेगा, हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। कई टैक्टर कंपनियों ने अभी से रेट कम कर दिए हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जहां फसल का नुकसान हुआ है, कलेक्टरों को कहा गया है की निरीक्षण कराकर नुकसान का मुआवजा दें। फार्टिलाइजर की कमी नही है, कमी है तो केवल वितरण व्यवस्था की। उन्होंने कहा- कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई करेंगे। बिहार चुनाव के लिए जीएसटी घटाने के सवाल पर कहा कांग्रेस ने तो बच्चो की टाफी और खिलौनों पर भी टैक्स लगाया था। ट्रंप की मेहरबानी से जीएसटी घटाने के सवाल पर कहा कि विपक्ष तो हर कार्य में ट्रंप दिख रहा है। मध्य प्रदेश में किसानों की संख्या घटने के सवाल पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि खेती के अलावा बाकी कामों की तरफ भी बढ़ना पड़ेगा। किसानों की संख्या में ज्यादा असर नहीं पड़ा है।

जनगणना से पहले कांग्रेस ने फिर आदिवासियों को बनाया मुद्दा, गैर हिंदू बताने का प्रयास

Before the census, Congress again made tribals an issue, tried to declare them non-Hindus भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में आदिवासी समुदाय की अपनी अलग भूमिका और महत्व होने से कांग्रेस और भाजपा के बीच उन्हें लुभाने की जंग नई नहीं है। यह समुदाय जिसके साथ चलता है, सत्ता उसी को मिलती है। पिछले दो दशक से आदिवासी समुदाय भाजपा के साथ है, अलबत्ता 2018 में कांग्रेस की ओर आदिवासी समाज का झुकाव होने से कमल नाथ को सरकार में आने का मौका जरूर मिल गया था। यही वजह है कि 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले शुरू हो रही जनगणना को लेकर कांग्रेस सक्रिय हो गई है। कांग्रेस ने आदिवासी समुदाय से अपील की है कि जनगणना में धर्म के कालम में वह स्वयं को हिंदू न बताएं। इधर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे हिंदुओं का अपमान बताया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के बयान ‘गर्व से कहो हम आदिवासी हैं, हिंदू नहीं’ के बाद प्रदेश का सियासी माहौल गरमा गया है। भाजपा के आदिवासी नेताओं ने सिंघार के बयान को आदिवासी विरोधी बताया है। उन्होंने राहुल गांधी के बयानों को आधार बनाकर कहा कि कांग्रेस की संस्कृति ही सनातन धर्म के विरोध की रही है। अब जनगणना के बहाने कांग्रेस हिंदू ही नहीं, बल्कि समाज का बंटवारा करना चाहती है। यह बयान हिंदू समाज के साथ ही आदिवासी समुदाय को भी कमजोर बनाने की साजिश है। 2028 चुनाव को ध्यान में रखकर छेड़ी बहसबता दें कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को किसी एसटी आरक्षित सीट पर जीत नहीं मिली। कांग्रेस ने आदिवासी बनाम हिंदू बहस ही वर्ष 2028 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर छेड़ी है, ताकि उसे राजनीतिक लाभ मिल सके। उमंग सिंघार का बयान ऐसे समय पर आया है, जब सुप्रीम कोर्ट में लंबित ओबीसी आरक्षण के मामले में कांग्रेस ने सरकार का साथ देकर एक तरह से अपने हथियार डाल दिए हैं। उसने ओबीसी आरक्षण के मामले में सफलता और असफलता का अनुमान लगाए बिना यह कदम उठाकर बड़ा जोखिम ले लिया है। कांग्रेस की कोशिश बन सकती है राजनीतिक जोखिमजनगणना में आदिवासी समुदाय को अलग से पहचान दिलाने की कांग्रेस की यह कोशिश भी राजनीतिक जोखिम बन सकती है। कांग्रेस के पास आदिवासी समुदाय के बीच जाकर बताने के लिए फिलहाल कुछ खास नहीं है, वहीं द्रौपदी मुर्मु को राष्ट्रपति पद तक पहुंचाने का श्रेय भाजपा अपने खाते में रखती है। साथ ही पेसा एक्ट जैसी कवायद भी भाजपा सरकार कर चुकी है। देश के विभिन्न राज्यों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा के अनुषांगिक संगठन आदिवासी समुदायों के बीच मतांतरण रोकने के साथ उनके कल्याण के लिए कार्यक्रमों को लगातार जारी रखे हुए हैं। संघ की कोशिश आदिवासियों को मुख्य धारा में लाने कीसंघ की कोशिश है कि रामायण और महाभारत काल के तमाम उदाहरण के माध्यम से आदिवासियों को उनके हिंदू होने का बोध कराते हुए मुख्य धारा में लाया जाए। इधर कांग्रेस के बयान इन कोशिशों के लिए चुनौती खड़ी करते हैं। मामला संघ के प्रयासों से जुड़ा है और सीधे सत्ता के समीकरणों को प्रभावित कर सकता है, इसलिए भाजपा इस मुद्दे पर कांग्रेस को कड़ी टक्कर देने की तैयारी कर रही है।

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