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अजाक्स संगठन आमला ब्लॉक एवं तहसील कार्यकारिणी का भव्य शपथ ग्रहण एवं होली मिलन समारोह हुआ संपन्न ।

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The grand oath taking ceremony and Holi Milan ceremony of Ajax Organization Amla Block and Tehsil Executive was held. हरिप्रसाद गोहे आमला। सोमवार दिनांक 9 3 2026 को अजाक्स संगठन आमला ब्लॉक एवं तहसील कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण एवं होली मिलन समारोह भव्यता के साथ नगर के माथनकर लाँन में नगर पालिका अध्यक्ष नितिन गाडरे , अजाक्स संगठन के संभागीय अध्यक्ष अनिल कापसे संगठन के जिला अध्यक्ष दशरथ धुर्वे के आतिथ्य में संपन्न हुआ कार्यक्रम में मुख्य रूप से अजाक्स आमला संगठन के संरक्षक शेषराव चौकीकर, पूर्व विकासखंड शिक्षा अधिकारी यशवंतराव झरबडे, अजाक्स बैतूल ब्लॉक अध्यक्ष मुकेश उपराले, अजाक्स बैतूल तहसील अध्यक्ष कल्पना परते, प्रधान पाठक माध्यमिक शाला श्रीमती उमा उइके, हरिशंकर धुर्वे, अजाक्स जिला उपाध्यक्ष रामानंद बेले, अजाक्स जिला महासचिव अशोक धुर्वे,अजाक्स जिला संयुक्त सचिव देवानंद धुर्वे तथा अजाक्स संगठन आमला ब्लॉक एवं तहसील कार्यकारिणी के समस्त पदाधिकारी गण तथा अजाक्स संगठन के सदस्यगण भारी संख्या में उपस्थित रहे | कार्यक्रम का शुभारंभ बोधिसत्व बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी एवं धरती आबा बिरसा मुंडा की छायाचित्र पर उपस्थित अतिथिगणों द्वारा माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर किया गया, तत्पश्चात रामानंद बेले जिला उपाध्यक्ष अजाक्स बैतूल द्वारा अपनी स्वरचित रचना अजाक्स गान की प्रस्तुति दी गई ब्लॉक एवं तहसील कार्यकारिणी के सदस्य द्वारा उपस्थित अतिथि गणों का स्वागत किया गया अपने उद्बोधन में अमूमन समस्त अतिथिगणों द्वारा अजाक्स संगठन के उद्देश्य, विस्तार व एकता पर प्रकाश डाला | अजाक्स संभागीय अध्यक्ष अनिल कापसे द्वारा आमला ब्लाक कार्यकारिणी एवं तहसील कार्यकारिणी के नवनियुक्त पदाधिकारीगनों को संगठन के प्रति कर्तव्य एवं निष्ठा की शपथ दिलाई गई, तथा अजाक्स संगठन आमला की ओर से उपस्थित समस्त अतिथिगणो,पदाधिकारीगणों को स्मृति चिन्ह भेंट किया गया | इसके पश्चात ब्लॉक अध्यक्ष रेखा ध्रुर्वें एवं तहसील अध्यक्ष राजाराम नागले द्वारा उपस्थित समस्त अतिथिगणों एवं कार्यकारिणी के पदाधिकारीगणों को गुलाल लगाकर होली मिलन एवं संगठन की एकता हेतु परस्पर बधाई प्रेषित की गई | कार्यक्रम में होली मिलन पर कविद्वय रामानंद बेले एवं कैलाश सलाम द्वारा अपनी रचनाओं के माध्यम से प्रस्तुति दी गई होली की शुभकामनाएं प्रेषित की गई | कार्यक्रम का सफल संचालन अजाक्स तहसील उपाध्यक्ष शिव प्रसाद गुजरे द्वारा किया गया| तथा कार्यक्रम अंत में उपस्थित अतिथिगणो, पदाधिकारीगणों तथा समस्त सदस्यगणों का आभार अजाक्स तहसील अध्यक्ष राजाराम नागले द्वारा व्यक्त किया गया|

विवाद, बहिष्कार और अंत—SDM सर्वेश यादव की विदाई, नए अध्याय की शुरुआत!

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Controversy, boycott and end – SDM Sarvesh Yadav’s farewell, beginning of a new chapter! संवाददाता चंदा कुशवाह नलखेड़ा। प्रशासनिक गलियारों में लंबे समय से चर्चा का विषय बने सुसनेर के SDM सर्वेश यादव को आखिरकार उनके पद से हटा दिया गया है। शासन ने उनकी जगह किरण बरबड़े को सुसनेर का नया SDM नियुक्त किया है। क्षेत्र में पिछले कुछ महीनों से लगातार विवाद और विरोध की स्थिति बनी हुई थी, जिसके बाद यह प्रशासनिक बदलाव हुआ है।दरअसल, SDM सर्वेश यादव का कार्यकाल शुरू से ही विवादों से घिरा रहा। सबसे पहले मामला विश्व प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा से जुड़ा सामने आया, जहां मंदिर के पुजारियों ने उनके व्यवहार और कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी जताते हुए उनका बहिष्कार कर दिया था। मामला बढ़ने के बाद तत्कालीन कलेक्टर आगर ने हस्तक्षेप करते हुए सर्वेश यादव को मंदिर से जुड़े सभी दायित्वों से अलग कर दिया और यह जिम्मेदारी डिप्टी कलेक्टर कमल मंडलोई को सौंप दी गई।इसके बाद एक और विवाद उस समय सामने आया जब सुसनेर के अधिवक्ताओं ने SDM कोर्ट का बहिष्कार कर दिया। अधिवक्ताओं का आरोप था कि SDM सर्वेश यादव द्वारा उनसे बातचीत के दौरान असभ्य व्यवहार और कठोर भाषा का इस्तेमाल किया गया। इस मुद्दे को लेकर वकीलों ने हड़ताल शुरू कर दी। धीरे-धीरे यह विरोध केवल सुसनेर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नलखेड़ा और सोयत तहसील के अधिवक्ताओं ने भी समर्थन देते हुए उनकी कोर्ट में पेशी देने से इनकार कर दिया। प्रशासनिक हलकों में यह मामला लगातार चर्चा में बना रहा।स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा होती रही कि SDM सर्वेश यादव अक्सर खुद को उच्च राजनीतिक संपर्कों वाला अधिकारी बताते थे। हालांकि इन चर्चाओं की आधिकारिक पुष्टि कभी नहीं हुई, लेकिन प्रशासनिक दफ्तरों और स्थानीय हलकों में यह बातें लंबे समय तक चर्चा का विषय बनी रहीं।लगातार बढ़ते विवाद, मंदिर प्रकरण और अधिवक्ताओं के विरोध के बाद आखिरकार शासन ने प्रशासनिक स्तर पर बदलाव करते हुए सर्वेश यादव को सुसनेर से हटा दिया और उनकी जगह किरण बरबड़े को नई SDM के रूप में पदस्थ किया है।नई SDM की नियुक्ति के बाद क्षेत्र में यह उम्मीद जताई जा रही है कि अब प्रशासन और आमजन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा और लंबे समय से चल रहे विवादों पर विराम लगेगा।

आदिवासी विधायक को हटाना पूरे समाज का अपमान” — जीतू पटवारी का भाजपा पर बड़ा हमला

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“Removing the tribal MLA is an insult to the entire society” – Jitu Patwari’s big attack on the BJP भोपाल। मध्यप्रदेश की सियासत में एक बार फिर आदिवासी मुद्दा गरमा गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भाजपा सरकार पर दलित और आदिवासी विरोधी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला है। पटवारी ने कहा कि आज मध्यप्रदेश में दलित और आदिवासियों के खिलाफ पूरी भाजपा एकजुट होकर खड़ी दिखाई दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता द्वारा चुने गए एक आदिवासी विधायक को पद से हटाने की कार्रवाई केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे आदिवासी समाज का अपमान है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता के फैसले का सम्मान होना चाहिए, लेकिन भाजपा सरकार सत्ता के अहंकार में आदिवासी समाज की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। पटवारी ने चेतावनी देते हुए कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर चुप नहीं बैठेगी और आदिवासी समाज के सम्मान की लड़ाई सड़क से लेकर सदन तक लड़ी जाएगी। पटवारी के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी टकराव और तेज होने के आसार हैं।

कर्ज के पहाड़ तले मध्यप्रदेश! मोहन सरकार फिर ले रही 5800 करोड़ का नया कर्ज, कांग्रेस ने घेरा”

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Madhya Pradesh under a mountain of debt! The Mohan government is taking on another 5,800 crore rupees in new loans, and Congress is attacking it. भोपाल। वित्तीय वर्ष के अंतिम चरण में मध्यप्रदेश सरकार एक बार फिर बड़ा कर्ज लेने जा रही है। प्रदेश सरकार भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से तीन किस्तों में 5,800 करोड़ रुपये का कर्ज उठाने की तैयारी में है। इससे पहले होली से ठीक पहले सरकार 6,300 करोड़ रुपये का कर्ज ले चुकी है। लगातार लिए जा रहे कर्ज को लेकर अब सियासत भी तेज हो गई है और विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। वित्त विभाग के अधिकारियों के अनुसार 10 मार्च (मंगलवार) को सरकार तीन अलग-अलग किस्तों में यह कर्ज लेगी। इसमें 1,900 करोड़, 1,700 करोड़ और 2,200 करोड़ रुपये शामिल हैं। सरकार का कहना है कि यह राशि प्रदेश में विकास परियोजनाओं और आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए ली जा रही है। खासतौर पर इस धनराशि का उपयोग पूंजीगत कार्यों और अधोसंरचना विकास में किया जाएगा। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अगर हाल ही में लिए गए कर्ज को भी जोड़ लिया जाए तो वित्तीय वर्ष 2025-26 में मध्यप्रदेश द्वारा लिए गए कुल कर्ज की राशि लगभग 85,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी। वहीं प्रदेश पर कुल कर्ज का बोझ बढ़कर करीब 5.66 लाख करोड़ रुपये के आसपास पहुंचने का अनुमान है। इधर इस मुद्दे को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। पटवारी ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार लगातार कर्ज लेकर मध्यप्रदेश को कर्ज के दलदल में धकेल रही है और आने वाली पीढ़ियों पर आर्थिक बोझ बढ़ा रही है। हालांकि सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि लिया जा रहा कर्ज राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम के दायरे में है और इसका उपयोग केवल विकास कार्यों के लिए किया जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा के बजट सत्र के दौरान कर्ज का यह मुद्दा सियासी बहस का बड़ा केंद्र बन सकता है, जहां विपक्ष सरकार की आर्थिक नीति पर सवाल उठाएगा।

कांग्रेस MLA मुकेश मल्होत्रा की विधायकी रद्द, बीजेपी के रामनिवास रावत होंगे नए विधायक, हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला

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gwalior congress mla mukesh malhotra membership cancelled bjp ram niwas rawat to be the ग्वालियर। मध्य प्रदेश की विजयपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा का चुनाव ग्वालियर हाईकोर्ट ने शून्य (रद्द) घोषित कर दिया है। हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच के जस्टिस जीएस अहलूवालिया ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने निर्वाचन प्रक्रिया में गड़बड़ी और तथ्यों को छुपाने के आधार पर यह निर्णय लिया है। आपराधिक रिकॉर्ड छुपाने का आरोपमुकेश मल्होत्रा के खिलाफ यह याचिका भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी और पूर्व मंत्री रामनिवास रावत ने दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि मुकेश मल्होत्रा ने अपने चुनावी हलफनामे में अपने आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी छुपाई थी। कोर्ट ने याचिका के तथ्यों को सही पाया और माना कि जानकारी छुपाना चुनाव नियमों का उल्लंघन है। रामनिवास रावत घोषित हुए विजयपुर के विधायकचुनाव शून्य घोषित करने के साथ ही हाईकोर्ट ने एक और महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। चुनाव के दौरान दूसरे नंबर पर रहने वाले भाजपा प्रत्याशी रामनिवास रावत को विजयपुर विधानसभा सीट से विधायक घोषित कर दिया गया है। इस फैसले के बाद अब विजयपुर सीट पर भाजपा का प्रतिनिधित्व हो गया है।

पहचान बचानी है तो अभी उठाओ आवाज़” — आदिवासियों से उमंग सिंघार की बड़ी अपील

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“If you want to save your identity, raise your voice now” – Umang Singhar’s big appeal to the tribals भोपाल। आदिवासी धर्म कोड की मांग को लेकर मध्यप्रदेश की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आदिवासी समाज को संबोधित करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि सभी आदिवासी एकजुट होकर अपनी पहचान की लड़ाई लड़ें। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अभी मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश के अन्य राज्यों के आदिवासी समाज ने अलग धर्म कोड की मांग के लिए बड़ी संख्या में आवेदन नहीं भेजे, तो आने वाले समय में आदिवासियों की पहचान किसी दूसरे धर्म की श्रेणी में दर्ज कर दी जाएगी। सिंघार ने कहा कि यह सिर्फ एक मांग नहीं बल्कि आदिवासी अस्मिता, संस्कृति और परंपरा को बचाने का सवाल है। उन्होंने आदिवासी भाई-बहनों से अपील करते हुए कहा कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में फॉर्म भरकर राष्ट्रपति महोदया तक अपनी आवाज़ पहुँचाएँ, ताकि देश में आदिवासी समाज को उसका अलग धार्मिक और सांस्कृतिक दर्जा मिल सके। उन्होंने कहा कि अगर आज समाज एकजुट होकर अपनी आवाज़ नहीं उठाएगा तो आने वाली पीढ़ियों को अपनी पहचान बचाने के लिए और बड़ी लड़ाई लड़नी पड़ेगी। इसलिए हर आदिवासी परिवार को आगे आकर इस मुहिम का हिस्सा बनना होगा।

पिकअप वाहन को बचाने के प्रयास में ट्रक पलटा, संभागीय परिवहन उड़नदस्ता की तत्परता से चालक-परिचालक को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाया

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While trying to save a pickup truck, the truck overturned. The Divisional Transport Flying Squad promptly transported the driver and conductor to the hospital. विशेष संवाददाता: जितेन्द्र श्रीवास्तव जबलपुर। राष्ट्रीय राजमार्ग नागपुर-जबलपुर रोड पर बरगी बायपास के पास एक वाहन क्रमांक MH40 BL 6986 पिकअप वाहन को बचाने के प्रयास में अनियंत्रित होकर पलट गया। घटना की सूचना मिलते ही संभागीय परिवहन उड़नदस्ता की टीम तत्काल मौके पर पहुंची।उड़नदस्ता टीम ने तत्परता दिखाते हुए वाहन में फंसे चालक एवं परिचालक को सुरक्षित बाहर निकाला और एम्बुलेंस की सहायता से उपचार के लिए मेडिकल अस्पताल रवाना किया।घटना के कारण कुछ समय के लिए मार्ग पर यातायात प्रभावित हुआ था, जिसे टीम की त्वरित कार्रवाई से व्यवस्थित करते हुए मार्ग पर यातायात को पुनः सुचारू रूप से चालू कराया गया।संभागीय परिवहन उड़नदस्ता की इस त्वरित कार्रवाई से समय रहते घायलों को सहायता मिली और राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात व्यवस्था भी शीघ्र बहाल हो सकी। इस दौरान प्रभारी राजेंद्र साहू, परिवहन उप निरीक्षक अक्षय पटेल, परिवहन आरक्षक पीयूष मरावी, आशुतोष मोघे, सारंगधर महाले, अशोक खापर्डे, उमाशंकर उपाध्याय सहित समस्त स्टाफ मौके पर मौजूद रहा।

काली मठ में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन, कन्याओं का पूजन कर किया गया सम्मान – महापौर अन्नू सिंह रहे उपस्थित

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Shrimad Bhagwat Katha was organised at Kali Math, where girls were worshipped and honoured – Mayor Annu Singh was present. विशेष संवाददाता: जितेन्द्र श्रीवास्तव / अर्पिता श्रीवास्तव जबलपुर। शहर के प्राचीन काली मठ मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन किया गया। इस धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन संतोष मिश्रा द्वारा किया गया, जिसमें उनके परिवारजनों और मित्रों ने भी सक्रिय सहयोग प्रदान किया। कथा के दौरान श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या उपस्थित रही और पूरे वातावरण में भक्ति और आस्था का माहौल देखने को मिला। कार्यक्रम के दौरान अंधमूक विद्यालय की बालिकाओं का विशेष रूप से पूजन, स्वागत और अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर जबलपुर के महापौर जगत बहादुर सिंह ‘अन्नू’ ने उपस्थित होकर बालिकाओं का सम्मान किया और आयोजकों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम समाज में सेवा, संस्कार और सहयोग की भावना को मजबूत करते हैं। श्रीमद्भागवत कथा के समापन अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण भी किया गया। कार्यक्रम में स्थानीय नागरिक, समाजसेवी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

सेंट्रल जेल में रोज़ा इफ्तार पार्टी का आयोजन, 156 बंदियों ने रखा रोज़ा – प्रशासन ने दी विशेष सुविधाएं

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Central Jail hosts Roza Iftar party, 156 inmates observe fast – administration provides special facilities विशेष संवाददाता :जितेंद्र श्रीवास्तव /अर्पिता श्रीवास्तवजबलपुर। नेताजी सुभाष चंद्र बोस सेंट्रल जेल में रमजान के पवित्र महीने के दौरान रोज़ा रखने वाले बंदियों के लिए विशेष रोज़ा इफ्तार पार्टी का आयोजन किया गया। जेल प्रशासन द्वारा बंदियों के लिए जिस प्रकार के पकवान और व्यवस्थाएं की गईं, वह सराहनीय रही। शासन की ओर से रोज़ा रखने वाले बंदियों को सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। जानकारी के अनुसार सेंट्रल जेल में कुल 156 बंदियों ने रोज़ा रखा, जिनके लिए इफ्तार के समय विशेष भोजन और पकवान की व्यवस्था की गई। जेल प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि रोज़ा रखने वाले बंदियों को समय पर इफ्तार और सहरी की पूरी सुविधा मिले। यह आयोजन सेंट्रल जेल अधीक्षक अखिलेश तोमर के निर्देशन में किया गया। इस दौरान उप अधीक्षक कमलेश मदन मोहन और जेलर प्रशांत के नेतृत्व में पूरी टीम ने व्यवस्थाओं को सफलतापूर्वक संचालित किया। जेल प्रशासन का कहना है कि रमजान के दौरान बंदियों की धार्मिक आस्था का सम्मान करते हुए उन्हें सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि वे अपने धार्मिक कर्तव्यों का पालन कर सकें।

जन औषधि दिवस 2026 : दावा 2000 से अधिक दवाइयों और उपकरण का, हकीकत में 500 ही उपलब्ध

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इंदौर। देश में मरीजों को सस्ती दवाइयां मिलें, इस उद्देश्य से प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खोले गए। दावा किया जाता है कि इन केंद्रों में 50 से 70 प्रतिशत तक की छूट के साथ 2000 से अधिक प्रकार की दवाइयां और उपकरण मिलते हैं। जबकि हकीकत यह है कि इन पर करीब 500 प्रकार की दवाइयां ही उपलब्ध हैं। इन केंद्रों पर जेनरिक दवाइयां मिलती हैं। इंदौर में 100 और मध्य प्रदेश में 600 से अधिक केंद्र हैं, लेकिन यहां अभी भी मधुमेह, उच्च रक्तचाप, प्रोटीन पाउडर, फेसवाश आदि ही उपलब्ध नहीं होते हैं। इस कारण मरीजों को मजबूरन मेडिकल दुकान पर जाकर महंगे दामों में दवाइयां खरीदनी पड़ती है। यह भी देखा गया है कि इन केंद्रों पर सिर्फ जेनरिक दवाइयों को बेचने की ही अनुमति होने के बावजूद नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है। यानी यह सभी प्रकार की दवाइयां बेचते हैं क्योंकि इन पर कभी कार्रवाई नहीं होती है। मरीजों को जरूरी दवाइयां नहीं मिलती बता दें कि उक्त योजना 2008 में तत्कालीन केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई थी। इसके बाद 2016 में भाजपा सरकार ने इसे री-लांच किया। अब हालत यह है कि जगह-जगह जन औषधि केंद्र तो खुल गए हैं लेकिन मरीजों को जरूरी दवाइयां नहीं मिलती। सबसे अधिक परेशानी उन्हें होती है, जो दूर-दूर से यहां शासकीय अस्पताल में इलाज करवाने के लिए आते हैं। जो दवाई उन्हें शासकीय अस्पताल में नहीं मिलती है, वे इन केंद्रों पर लेने के लिए जाते हैं। यहां पर नहीं मिलने के कारण उन्हें मजबूरन महंगी दवाएं खरीदना पड़ती हैं। मध्य प्रदेश में सबसे अधिक केंद्र इंदौर में बता दें जन औषधि के सबसे अधिक केंद्र प्रदेश में इंदौर में ही हैं, बावजूद मरीजों को दवाइयां खरीदने में परेशानी होती है। हालांकि कई दवाइयां इन केंद्रों पर मरीजों को आसानी से मिल जाती हैं, जिससे मरीजों को फायदा भी मिल रहा है। 1000 रुपये की दवाइयां मिलती हैं 300 में अधिकारियों ने बताया कि जन औषधि केंद्र के माध्यम से 50 से 70 प्रतिशत सस्ते में दवाइयां उपलब्ध करवाई जाती हैं। जैसे बाजार में यदि कोई दवाई 1000 रुपये में मिल रही है तो वह केंद्र में 300 रुपये में मिल सकती है। इससे बड़ी संख्या में लोगों को लाभ हो रहा है। भ्रमित हो रहे लोग, अन्य केंद्रों पर भी लगी पीएम की फोटो शहर में करीब 100 प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र हैं, जहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की फोटो लगी हुई है। जबकि इसके अलावा भारत औषधि केंद्र जैसे नाम से केंद्र भी खोले गए हैं। यहां प्रधानमंत्री के फोटो लगाने की अनुमति नहीं है। बावजूद फोटो लगा रखे हैं। इन्हें नोटिस भी जारी किया गया है, लेकिन कोई जवाब अब तक नहीं आया है। समय पर नहीं मिलती दवाइयां दवाई न मिलने पर जब भी केंद्र संचालकों से इसका कारण पूछा जाता है तो वे यही कहते हैं कि हमें दवाइयां समय पर नहीं मिल पाती हैं। कई बार दवाइयों का आर्डर देते हैं, लेकिन हमें समय पर दवाई ही नहीं मिल पाती है। ऐसे में मरीजों को खाली हाथ लौटना पड़ता है। नियम है कि सात दिन में केंद्र पर जो भी दवाई का आर्डर देते हैं, वे आ जानी चाहिए, लेकिन हमारे पास 15 दिन-एक माह तक दवाइयां नहीं आ पाती हैं। वहीं कई बार दवाइयां आती भी हैं तो मरीज अधिक मात्रा में लेकर चले जाते हैं।

बैतूल के चिचोली बस स्टैंड पर अतिक्रमण हटाने के लिए बुलडोजर चलेगा, 20 को अंतिम नोटिस, 7 दिन का वक्त

बैतूल बैतूल जिले के चिचोली में नगर परिषद प्रशासन ने बस स्टैंड क्षेत्र की शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। नवनिर्मित बस स्टैंड के आसपास सरकारी जमीन पर कब्जा जमाए 20 अतिक्रमणकारियों को अंतिम नोटिस जारी किया गया है। मुख्य नगर पालिका अधिकारी सैयद आरिफ हुसैन ने बताया कि नोटिस जारी होने के बाद अतिक्रमणकारियों को सात दिन का समय दिया गया है। उन्हें इस अवधि में स्वयं अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए हैं। यदि तय समय सीमा में कब्जा नहीं हटाया गया, तो नगर परिषद द्वारा बलपूर्वक कार्रवाई करते हुए अतिक्रमण हटाया जाएगा। इस कार्रवाई में आने वाला पूरा खर्च भी संबंधित अतिक्रमणकारियों से ही वसूला जाएगा। नगर परिषद के अनुसार, इससे पहले मार्च, जून और अक्टूबर 2025 में भी अतिक्रमण हटाने के लिए पत्र जारी कर चेतावनी दी गई थी। हालांकि, अतिक्रमणकारियों ने इन निर्देशों को गंभीरता से नहीं लिया। इसके बाद अब मध्यप्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 223 के तहत यह अंतिम नोटिस जारी किया गया है। प्रशासन ने इस कार्रवाई को लेकर पूरी तैयारी कर ली है। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कलेक्टर बैतूल, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व बैतूल, तहसीलदार चिचोली और थाना प्रभारी चिचोली को भी लिखित रूप से सूचित कर आवश्यक सहयोग मांगा गया है।

MP में प्राइवेट स्कूलों के लिए मान्यता की अंतिम तिथि, 10 मार्च तक 20 हजार लेट फीस के साथ आवेदन कर सकेंगे

 ग्वालियर  लोक शिक्षण विभाग यानि डीपीआई हाईस्कूल व हायरसेकेण्डरी स्कूलों की नवीन मान्यता व नवीनीकरण की प्रक्रिया शुरू कर चुका है। बिना विलंब शुल्क के ऑनलाइन आवेदन के करने की तिथि निकल चुकी है। लेकिन विभाग ने 20 हजार विलंब शुल्क के साथ मान्यता के लिए आवेदन करने की अंतिम तारीक्ष 10 मार्च रखी है। आवेदन के बाद 25 मार्च तक संयुक्त संचालक शिक्षा के नेतृत्व में गठित टीम आवेदन वाले स्कूलों की छानबीन करेगा। इसके बाद जिन स्कूलों के आवेदन को समिति निरस्त करेगी, उसके लिए 25 अप्रैल तक अपील की जा सकती है। इन अपीलों का निराकरण डीपीआई 25 मई को करेगा। इसके बाद स्कूलों की मान्यता जारी कर दी जाएगी। ऑनलाइन आवेदन और पोर्टल की जानकारी डीपीआई ने मान्यता की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए ऑनलाइन पोर्टल https://manyta.dpimp.in/ शुरू किया है। सीबीएसई, आईसीएसई और अन्य बोर्डों से संबद्ध स्कूलों को भी इसी पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना अनिवार्य है। सामान्य शुल्क के साथ आवेदन की समय-सीमा 15 फरवरी को समाप्त हो चुकी है, लेकिन स्कूलों को डीपीआई ने विलंब शुल्क के साथ 10 मार्च तक का आवेदन करने का समय दिया है। आवेदन करने के बाद इस तरह चलेगी प्रक्रिया     ग्वालियर चंबल क्षेत्र से स्कूलों की जांच संभागीय संयुक्त संचालक द्वारा गठित दल ऑनलाइन आवेदनों की छानबीन की जाएगी। नवीन मान्यता, नवीनीकरण और अपग्रेडेशन के प्रकरणों पर निर्णय लेने की अंतिम तिथि 25 मार्च 2026 तय की गई है।     यदि किसी स्कूल का आवेदन संयुक्त संचालक स्तर पर निरस्त कर दिया जाता है, तो संबंधित संस्था 25 अप्रैल तक आयुक्त, लोक शिक्षण के समक्ष ऑनलाइन अपील प्रस्तुत कर सकती है।     प्राप्त अपीलों का अंतिम निराकरण 25 मई तक कर दिया जाएगा। इसके बाद ही स्कूलों की मान्यता की अंतिम सूची और प्रमाण पत्र जारी किए जाएंगे। स्कूलों को यह रखना होगा ध्यान डीपीआई के संचालक केके द्विवेदी द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि स्कूल प्रबंधन समय-सीमा का विशेष ध्यान रखें। ग्वालियर संभाग के संयुक्त संचालक ने भी जिले के सभी अशासकीय स्कूलों को निर्देशित किया है कि वे तकनीकी त्रुटियों से बचने के लिए अंतिम तारीख का इंतजार न करें और पोर्टल पर सभी प्रविष्टियों को सावधानीपूर्वक अपलोड करें।  

जज की पत्नी की मौत ट्रेन के वॉशरूम में, पति ने लोकेशन ट्रेस कर रोकी ट्रेन, स्टेशन पर किया इंतजार

 रतलाम रेल यात्रा आम तौर पर लोगों के लिए एक सामान्य और सुरक्षित अनुभव मानी जाती है, लेकिन कभी-कभी सफर के बीच घटने वाली घटनाएं हर किसी को झकझोर कर रख देती हैं. मध्य प्रदेश के रतलाम जिले से सामने आई एक ऐसी ही घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. यहां चलती ट्रेन के वॉशरूम में एक जज की पत्नी की मौत हो गई. इस पूरे घटनाक्रम में सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि स्टेशन पर खड़े पति को काफी देर तक यह पता ही नहीं चल पाया कि उनकी पत्नी ट्रेन के अंदर ही जिंदगी की जंग हार चुकी हैं।  यह घटना कांचीगुड़ा–भगत की कोठी एक्सप्रेस में सामने आई, जहां सफर के दौरान अचानक महिला की तबीयत बिगड़ गई और संभवतः साइलेंट हार्ट अटैक आने से उनकी मौत हो गई. घटना के बाद रेलवे पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है. जानकारी के मुताबिक राजस्थान के निंबाहेड़ा में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजकुमार चौहान अपनी पत्नी उषा चौहान के साथ जोधपुर से निंबाहेड़ा लौट रहे थे. दोनों ट्रेन में सवार तो साथ हुए थे, लेकिन रिजर्वेशन अलग-अलग कोच में था, इसलिए वे अलग डिब्बों में यात्रा कर रहे थे. सफर सामान्य तरीके से चल रहा था. रास्ते में दोनों के बीच फोन पर बातचीत भी होती रही. बताया जाता है कि निंबाहेड़ा स्टेशन पहुंचने से कुछ समय पहले उषा चौहान ने अपने पति को फोन किया और बताया कि वह वॉशरूम जा रही हैं. उस समय किसी को यह अंदाजा नहीं था कि यह बातचीत आखिरी साबित होगी।  स्टेशन पर इंतजार करते रहे पति कुछ ही देर बाद ट्रेन निंबाहेड़ा स्टेशन पहुंची. जैसे ही ट्रेन प्लेटफॉर्म पर रुकी, जज राजकुमार चौहान अपने डिब्बे से उतरकर पत्नी का इंतजार करने लगे. उन्हें उम्मीद थी कि पत्नी भी अपने कोच से उतरकर प्लेटफॉर्म पर आ जाएंगी. लेकिन मिनट दर मिनट गुजरते गए और उषा चौहान नजर नहीं आईं. पहले तो उन्होंने सोचा कि शायद वह दूसरे दरवाजे से उतर गई होंगी या फिर सामान लेने में देर हो रही होगी. लेकिन जब काफी देर तक उनका कोई पता नहीं चला तो चिंता बढ़ने लगी।  तलाश शुरू, लेकिन नहीं मिला कोई सुराग राजकुमार चौहान ने प्लेटफॉर्म पर इधर-उधर तलाश शुरू की. उन्होंने आसपास मौजूद यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों से भी पूछताछ की, लेकिन किसी को भी उनके बारे में कोई जानकारी नहीं थी. इसी बीच ट्रेन भी आगे के लिए रवाना हो चुकी थी. पत्नी के अचानक लापता होने से घबराए जज ने तुरंत रेलवे पुलिस को सूचना दी. सूचना मिलते ही रेलवे पुलिस सक्रिय हो गई. सबसे पहले ट्रेन की जानकारी जुटाई गई और आगे के स्टेशन को अलर्ट किया गया. पुलिस ने ट्रेन को मंदसौर स्टेशन पर रुकवाने का फैसला किया ताकि वहां जांच की जा सके. मंदसौर स्टेशन पर रेलवे पुलिस और कर्मचारियों ने कई डिब्बों की जांच की, लेकिन वहां भी उषा चौहान का कोई पता नहीं चला।  मोबाइल लोकेशन बनी सुराग इसी दौरान पुलिस ने महिला के मोबाइल फोन की लोकेशन ट्रेस करवाई. लोकेशन सामने आने के बाद स्थिति कुछ हद तक साफ होने लगी. मोबाइल की लोकेशन से संकेत मिला कि फोन अभी भी उसी ट्रेन में मौजूद है. इससे यह अंदेशा बढ़ गया कि महिला शायद ट्रेन से उतरी ही नहीं हैं और किसी डिब्बे में ही मौजूद हो सकती हैं. मोबाइल लोकेशन के आधार पर पुलिस ने ट्रेन को आगे जावरा स्टेशन पर रुकवाया. यहां पुलिस टीम ने उस आरक्षित कोच की जांच शुरू की, जिसमें उषा चौहान यात्रा कर रही थीं. जब कोच के भीतर तलाश की गई तो एक वॉशरूम का दरवाजा अंदर से बंद मिला. काफी देर तक दरवाजा खटखटाने के बावजूद कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली. इससे शक और गहरा गया।  दरवाजा तोड़कर देखा गया अंदर का दृश्य स्थिति को गंभीर देखते हुए पुलिस और रेलवे कर्मचारियों ने वॉशरूम का दरवाजा तोड़ने का फैसला किया. दरवाजा तोड़ा गया तो अंदर का दृश्य देखकर सभी हैरान रह गए. वॉशरूम के अंदर उषा चौहान अचेत अवस्था में पड़ी थीं. उन्हें तुरंत बाहर निकाला गया और बिना समय गंवाए अस्पताल ले जाया गया. अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने महिला की जांच की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. प्रारंभिक जांच में डॉक्टरों ने आशंका जताई कि महिला की मौत साइलेंट हार्ट अटैक की वजह से हुई है. साइलेंट अटैक में कई बार व्यक्ति को गंभीर दर्द या लक्षण महसूस नहीं होते और अचानक स्थिति बिगड़ जाती है।  परिवार में पसरा मातम घटना की जानकारी मिलते ही परिवार में शोक की लहर दौड़ गई. एक सामान्य ट्रेन यात्रा इस तरह दुखद अंत में बदल जाएगी, यह किसी ने सोचा भी नहीं था. परिजनों को सूचना दी गई और बाद में सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया. परिवार शव को अपने साथ लेकर रवाना हो गया। 

अधिकारी-कर्मचारी कार्यालयीन समय का पालन करें सुनिश्चित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

गेहूं उपार्जन प्रक्रिया में किसानों को ना हो कोई परेशानी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव परफार्मेंस और परिणाम देने वाले कलेक्टर ही रहेंगे मैदान में अधिकारी-कर्मचारी कार्यालयीन समय का पालन करें सुनिश्चित जिला कलेक्टर, शैक्षणिक संस्थानों, छात्रावासों, विश्व विद्यालय परिसरों का आवश्यक रूप से करें आकस्मिक निरीक्षण खाड़ी देशों में रह रहे व्यक्तियों और उनके परिवारों से निरंतर रखें समन्वय और सम्पर्क भ्रामक जानकारियों का जिला स्तर पर हो तत्काल प्रभावी रूप से खंडन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिला कलेक्टर्स को दिए निर्देश भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि गेहूं उपार्जन प्रक्रिया में किसानों को किसी भी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े। जिला कलेक्टर पंजीकृत किसानों में से चिन्हित किसानों के सत्यापन, उपार्जन केन्द्रों पर बारदानों की उपलब्धता और किसानों को समय पर भुगतान के लिए शत-प्रतिशत व्यवस्था सुनिश्चित करें। गेहूं का उपार्जन इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में 16 मार्च से 5 मई तक होगा और शेष संभागों जबलपुर, ग्वालियर, रीवा, शहडोल, चम्बल व सागर में 23 मार्च से 12 मई तक किया जाएगा। किसान अपना पंजीयन 7 मार्च तक करा सकेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरूवार को मंत्रालय में आयोजित अभियान की राज्य स्तरीय बैठक के बाद जिला कलेक्टर्स से वर्चुअल संवाद में यह निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उपार्जन केन्द्रों का समय-सीमा में निर्धारण, उनकी स्थापना और इन केन्द्रों पर सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उपार्जन कार्य में लगे अमले के उपयुक्त प्रशिक्षण सहित जिला उपार्जन समिति द्वारा नियमित बैठक कर समस्याओं के त्वरित निदान की व्यवस्था की जाए। किसानों को अद्यतन जानकारियां सरलता से उपलब्ध कराना भी सुनिश्चित हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिला कलेक्टर्स को खाड़ी देशों में वर्तमान में निर्मित अप्रत्याशित परिस्थितियों को देखते हुए इन देशों में रह रहे जिले के विद्यार्थियों, नागरिकों के परिवारों से सम्पर्क में रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश भवन नई दिल्ली और वल्लभ भवन मंत्रालय में प्रदेशवासियों की सहायता के लिए कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। जिला स्तर पर ऐसे व्यक्तियों और परिवारों से कलेक्टर्स निरंतर समन्वय और सम्पर्क रखें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संकल्प से समाधान अभियान का अंतिम चरण जारी है। अभियान के अंतर्गत 40 लाख आवेदनों का निराकरण हुआ है। अब 16 मार्च तक जिला स्तरीय शिविर लगना है। विकास और जनकल्याण की इस गतिविधि की जिला कलेक्टर सघन मॉनीटरिंग सुनिश्चित करें। अभियान में किसी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो कलेक्टर्स जिले की सभी गतिविधियों में परफार्मेंस और परिणाम देंगे वे ही मैदान में रहेंगे, यह सिद्धांत सभी अधिकारी-कर्मचारियों पर भी लागू होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिलों में वीसी सेटअप के संबंध में आलीराजपुर, छिंदवाड़ा, पांर्ढुणा, बालाघाट, भोपाल जिलों को तत्काल कार्यवाही पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वीसी सेटअप से सभी विभागों के अधिकारी और जनप्रतिनिधियों को पंचायत स्तर तक संवाद स्थापित करने में मदद मिलेगी। इससे विकास और जनकल्याण के कार्यों की समीक्षा में सुविधा होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधानसभा स्तर के विजन डॉक्यूमेंट के संबंध में भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शासन और व्यवस्था के संबंध में मिथ्या या भ्रम फैलाने वाली जानकारियों का जिला स्तर पर तत्काल प्रभावी रूप से खंडन किया जाए। सोशल मीडिया के युग में ऐसी गतिविधियों पर त्वरित रूप से वस्तुस्थिति रखना आवश्यक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्तमान में शाला और महाविद्यालयीन स्तर पर परीक्षाओं का समय चल रहा है। जिला अधिकारी शैक्षणिक संस्थाओं, छात्रावासों, विश्वविद्यालय परिसरों का आकस्मिक निरीक्षण आवश्यक रूप से करें। यह सुनिश्चित किया जाए कि परीक्षाओं का संचालन और आगामी सत्रारंभ निर्विघ्न रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिला अधिकारियों को जिला स्तर पर नवाचार करने के लिए प्रोत्साहित भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य के अधिकारियों और कर्मचारियों से कार्यालयीन समय का पालन करने की अपेक्षा है। इस संबंध में गत दिवस मंत्रालय में कार्यालयीन समय अनुसार उपस्थिति का आकस्मिक निरीक्षण कराया गया था। जिला स्तर पर जिला कलेक्टर्स द्वारा अपने स्तर पर इस प्रकार के निरीक्षण की व्यवस्था की जाए। कार्यालयीन स्टॉफ को दी गई सुविधाएं, उनका अधिकार है, इसके साथ उनसे नियमानुसार कार्य लेना भी सुनिश्चित हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आकस्मिक निरीक्षण की प्रक्रिया निरंतर जारी रहेगी। यदि कार्यालयीन समय के पालन में सुधार नहीं आया तो राज्य में 6 कार्य दिवसीय सप्ताह की व्यवस्था लागू कर दी जाएगी। शासकीय कार्यालयों में आम नागरिकों के लिए सुगम व्यवस्था स्थापित करना हमारा उद्देश्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में वर्ष 2026 किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। जिलों में होने वाले परम्परागत मेलों में कृषि-पशुपालन आदि क्षेत्र में नवाचार करने वालों या विशेष उपलब्धि अर्जित करने वालों की प्रदर्शनी लगाई जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिला स्तर पर होम-स्टे को प्रोत्साहित करने के भी कलेक्टर्स को निर्देश दिए। बैठक में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, श्री अशोक बर्णवाल, श्री संजय दुबे, श्री नीरज मंडलोई, श्रीमती दीपाली रस्तोगी, श्री शिवशेखर शुक्ला एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में समस्त जिला कलेक्टर्स वर्चुअली शामिल हुए।  

मुख्यमंत्री जल संचय-जन भागीदारी अभियान की समीक्षा में वर्चुअली हुए शामिल

केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री  पाटिल ने मध्यप्रदेश की जल संचय की पहल को सराहा सामुदायिक सहभागिता पर आधारित जल संरक्षण और प्रबंधन में मध्यप्रदेश कर रहा है श्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री जल संचय-जन भागीदारी अभियान की समीक्षा में वर्चुअली हुए शामिल केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री  सी.आर. पाटिल द्वारा की गई समीक्षा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश नदियों का मायका है। देश की कई महत्वपूर्ण नदियों के उद्गम स्थल होने के साथ ही प्रदेश में 250 से अधिक नदियां हैं। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के आहवान पर जल संसाधनों के संरक्षण, संवर्धन के लिए देश में आरंभ हुआ जल संचय-जन भागीदारी अभियान सामुदायिक सहभागिता का उत्कृष्ट उदाहराण बन गया है। मध्यप्रदेश ने इस अभियान के प्रथम चरण में 2 लाख 79 हजार जल संग्रहण संरचनाओं का निर्माण कर महत्वपूर्ण योगदान दिया है। द्वितीय चरण में भी मध्यप्रदेश में 64 हजार 395 कार्य प्रगति पर हैं और 72 हजार 647 कार्य पूर्ण कर लिए गए हैं। इस प्रकार 1 लाख 37 हजार 42 संरचनाओं के साथ प्रदेश, देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव केन्द्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा गुरूवार को आयोजित संयुक्त वीडियो कॉन्फ्रेंस को मंत्रालय भोपाल से संबोधित कर रहे थे। जल संचय-जन भागीदारी की व्यापक समीक्षा के लिए आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंस में केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री  सी.आर. पाटिल, प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  प्रहलाद सिंह पटेल, सभी संभागायुक्त और जिला कलेक्टर्स शामिल हुए। केन्द्रीय मंत्री  पाटिल ने अभियान के अंतर्गत मध्यप्रदेश की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश सामुदायिक सहभागिता पर आधारित जल संरक्षण और सतत् जल प्रबंधन में देश के सम्मुख श्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भूजल स्त्रोतों के दोहन के कारण गिरते हुए भूजल स्तर, प्राचीन जल संग्रहण संरचनाओं के क्षरण और नदियों के कम होते प्रवाह के प्रति हम पूर्णत: सजग है। इसलिए मध्यप्रदेश ने जल संचय-जन भागीदारी की राष्ट्रीय पहल को सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आत्मसात करते हुए राज्य स्तर पर इसे व्यापक जनभागीदारी से जोड़ा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश से जिन नदियों का उद्गम है, उनके जल का स्त्रोत प्रदेश के वन हैं। यह नदियां अन्य राज्यों की कृषि और अन्य आर्थिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। इस प्रकार प्रदेश की नदियों का राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय योगदान है। इस दृष्टि से राज्य में विद्यमान वनों के रखरखाव के लिए राज्य सरकार को केन्द्र की ओर से अतिरिक्त आर्थिक सहयोग की अपेक्षा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण के लिए बुनियादी ढांचे के विकास के लिए खेत-तालाबों और नए सरोवरों का निर्माण किया गया है। भू-जल संवर्धन के लिए कुओं का पुनर्भरण किया गया है। शहरी क्षेत्रों और वन क्षेत्रों में भी वर्षा जल संचयन संरचनाओं का निर्माण किया गया है। औद्योगिक इकाइयों को रूफ वाटर हार्वेस्टिंग के लिए प्रेरित किया गया है। नदियां निर्मल और अविरल रहे, यह हमारी प्रतिबद्धता है और इसके लिए अभियान के अंतर्गत प्रमुख नदियों में गिरने वाले प्रदूषित नालों की पहचान कर उनके शोधन की याजना बनाई गई है। पाठशालाओं में जल के संबंध में विभिन्न गतिविधियों जैसे चित्रकला, निबंध प्रतियोगिता, जल शपथ तथा रैलियों का आयोजन किया गया है। पानी के दक्षतापूर्ण उपयोग को भी अभियान के अंतर्गत प्रोत्साहित किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा संकल्प है कि प्रत्येक जिला, प्रत्येक ग्राम और प्रत्येक शहर इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभाए और जल संरक्षण को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाए। केंद्र, राज्य सरकार और जनसहयोग से हम जल सुरक्षा के लक्ष्य को अवश्य प्राप्त करेंगे। मध्यप्रदेश बांधों की संख्या के मामले में देश में दूसरे स्थान पर : केन्द्रीय मंत्री  पाटिल केंद्रीय जल शक्ति मंत्री  सी.आर. पाटिल ने कहा कि मध्यप्रदेश बांधों की संख्या के मामले में देश में दूसरे स्थान पर है। मध्यप्रदेश गुजरात को पानी दे रहा है। केन-बेतवा लिंक परियोजना के माध्यम से उत्तर प्रदेश को भी पानी मिलेगा। इस परियोजना से 10 लाख 62 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी और लाखों लोगों को पेयजल की सुविधा मिलेगी। राजस्थान के साथ भी पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना को लेकर मध्यप्रदेश सरकार ने सकारात्मक सोच दिखाई है। मध्यप्रदेश, देश के सर्वाधिक लोगों को पेयजल उपलब्ध कराने वाला राज्य है। केन्द्रीय मंत्री  पाटिल ने कहा कि मध्यप्रदेश ने जल संचय-जनभागीदारी अभियान में उत्कृष्ट कार्य किया है। हमारी कोशिश है कि गांव का पानी गांव और खेत का पानी खेत में सिंचाई के लिए उपयोग हो। प्रधानमंत्री  मोदी ने देशवासियों से पेयजल की बर्बादी रोकने का भी आह्वान किया है। केंद्रीय मंत्री  पाटिल ने कहा कि मध्यप्रदेश एक बड़े वन क्षेत्र वाला राज्य है। वर्षा जल को संचित करने के प्रयासों से राज्य में सिंचाई और पेयजल के लिए पानी की उपलब्धता में और वृद्धि की जा सकती है। बैठक के दौरान खंडवा (पूर्व निमाड़), राजगढ़ और इंदौर जिलों के जिला कलेक्टरों ने विस्तृत प्रस्तुतियाँ दीं, जिनमें जल संचय जनभागीदारी 2.0 के क्रियान्वयन की जिला स्तरीय प्रगति तथा आगामी कार्ययोजना प्रस्तुत की गई। प्रस्तुतियों में भूजल पुनर्भरण, नदी पुनर्जीवन तथा जल संरक्षण गतिविधियों में सामुदायिक सहभागिता को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। उल्लेखनीय है कि अभियान के अंतर्गत मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर चौथा स्थान प्राप्त किया था। विशेष रूप से खंडवा (पूर्व निमाड़) जिला देशभर के जिलों में प्रथम स्थान पर रहा, जो जल संरक्षण के क्षेत्र में प्रभावी नेतृत्व और जनभागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है। मंत्रालय भोपाल में बैठक में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, मती दीपाली रस्तोगी,  संजय दुबे, प्रमुख सचिव  पी. नरहरि सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

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