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यूनियन कार्बाइड कचरे को ट्रायल रन में जलाने में 15-20 किलो मरकरी की आशंका

भोपाल एक एनजीओ ने एमपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीपीसीबी) और अन्य एजेंसियों पर एमपी हाई कोर्ट को गुमराह करने का आरोप लगाया है। एनजीओ का कहना है कि इन एजेंसियों ने जानबूझकर पीथमपुर फैक्ट्री में यूनियन कार्बाइड कचरे के निपटान के दौरान मरकरी के खतरनाक मुद्दे को छुपाया। एनजीओ का आरोप है कि पीथमपुर फैक्ट्री में मरकरी को ठीक करने की क्षमता नहीं है। मरकरी एक बहुत ही हानिकारक भारी धातु है जिसे बिना उपचार के लैंडफिल में डाला जा रहा है। बीजीपीएसएसएस नामक एनजीओ की सदस्या साधना कर्णिक ने कहा कि ट्रायल रन में कमियां थीं। उन्होंने कहा कि 1 मई से बचे हुए 307 मीट्रिक टन कचरे को जलाना शुरू होने की संभावना है। कर्णिक ने आरोप लगाया कि एमपी हाई कोर्ट को सौंपी गई ट्रायल रन की रिपोर्ट में मरकरी को ठीक करने या सोखने का कोई जिक्र नहीं था। बीजीपीएसएसएस ने दी जानकारी उन्होंने कहा कि मरकरी को सोखना एक मुश्किल काम है और पीथमपुर की सुविधा इसे संभालने में सक्षम नहीं है। उन्होंने दावा किया कि पीथमपुर सुविधा में तीन ट्रायल रन में जलाए गए 30 मीट्रिक टन जहरीले कचरे में कम से कम 15 से 20 किलो मरकरी थी। बीजीपीएसएसएस की सदस्या साधना कर्णिक ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह आरोप लगाया। ट्रायल रन की रिपोर्ट का किया विश्लेषण उन्होंने आगे कहा कि एमपीपीसीबी और अन्य एजेंसियां अदालत को गलत जानकारी दे रही हैं। उनके अनुसार, पीथमपुर फैक्ट्री में मरकरी को ठीक करने की क्षमता नहीं है, जो कि एक बड़ी समस्या है। कर्णिक ने बताया कि उन्होंने यह निष्कर्ष एमपीपीसीबी द्वारा ट्रायल रन पर दी गई रिपोर्ट के आंकड़ों का विश्लेषण करके निकाला है। उन्होंने आगे कहा कि जलाए जाने के दौरान मरकरी से छुटकारा पाने के लिए सल्फर और सल्फर डाइऑक्साइड का उपयोग किया जा रहा है, लेकिन मरकरी का अवशोषण आसान नहीं है क्योंकि यह अक्सर खुद को अलग कर लेता है। अधिकारी का कहना एमपीपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी ब्रजेश शर्मा से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि कार्बाइड में तत्वों की पहचान करने के लिए एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई गई थी। उनकी जानकारी के अनुसार एक्सपर्ट कमेटी द्वारा पहचाने गए तत्वों में मरकरी शामिल नहीं था। उन्होंने जोर देकर कहा कि एमपीपीसीबी नहीं बल्कि एक्सपर्ट कमेटी ने कचरे को परिभाषित किया और पीथमपुर सुविधा में इसके निपटान के लिए हरी झंडी दिखाई।

MP के नाम हुई बड़ी उपलब्धि, UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की राष्ट्रीय लिस्ट में शामिल हुईं ये तीन विरासत

भोपाल मध्य प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के प्रयासों को सफलता प्राप्त हुई है। मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड की पहल पर यूनाइटेड नेशंस एजुकेशनल, साइंटिफिक एंड कल्चरल आर्गेनाइजेशन (यूनेस्को) की नोडल एजेंसी संगीत नाटक अकादमी ने मध्य प्रदेश की तीन विरासतों को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की राष्ट्रीय सूची में सम्मिलित किया है। इन विरासतों में भगोरिया आदिवासी नृत्य, गोंड आदिवासी चित्रकला और नर्मदा परिक्रमा हैं। प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि आगामी वर्षों में यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की अंतर्राष्ट्रीय सूची में इन्हें सम्मिलित किया जा सकता है। प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति और प्रबंध संचालक टूरिज्म बोर्ड शिव शेखर शुक्ला ने इस उपलब्धि पर हर्ष जताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में हम मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक और पारंपरिक विरासतों को विश्व पटल पर पहचान दिलाने के लिए प्रयासरत हैं। इन्हीं प्रयासों के फलस्वरूप यह उपलब्धि हासिल हुई है। यह प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि है। सूची में नामांकित होने से यह अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र बनेंगे। अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में वे परंपराएं, प्रथाएं, ज्ञान और कौशल शामिल हैं, जो हमारे पूर्वजों से विरासत में मिले हैं और भविष्य की पीढ़ियों को दिए गए हैं। मूर्त विरासतों में स्मारक या भौतिक कलाकृतियां शामिल होती हैं, वहीं अमूर्त सांस्कृतिक विरासत एक संस्कृति की जीवंत अभिव्यक्तियों को संदर्भित करती है। इसमें मौखिक परंपराएं, कलाएंं, सामाजिक अनुष्ठान, उत्सव के कार्यक्रम, प्रकृति के बारे में ज्ञान और पारंपरिक शिल्प शामिल होते हैं। मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड ने किया था आवेदन भारत के किसी भी हिस्से से किसी भी अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की मान्यता के लिए आवेदन यूनेस्को की नोडल एजेंसी संगीत नाटक अकादमी को प्रस्तुत किए जाते हैं। यह एजेंसी राष्ट्रीय सूची को बनाए रखने के लिए जिम्मेदार होती है। मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की राष्ट्रीय सूची में शामिल करने के लिए मध्य प्रदेश के भगोरिया आदिवासी नृत्य, नर्मदा परिक्रमा और गोंड आदिवासी चित्रकला इंटेजिबल कल्चरल हेरीटेज (आईसीएच) को नामांकित करने के लिए आवेदन विगत वर्ष 2024 में किया था। पाटनगढ़ की गोंड आदिवसी चित्रकला, कला का ऐसा रूप से जो स्थानीय गोंड जनजाति द्वारा 1400 वर्षों से अधिक समय से सहेजी गई है। यह कला प्रकृति और संस्कृति के बीच गहरे संबंधों को दर्शाती है। दीवार के भित्त चित्र हों या जीवन शैली के उत्पाद, इन सभी को जीवंत रंगों, जटिल रचनाओं और मनमोहक अभिव्यक्ति के माध्यम से तैयार किया जाता है। चूंकि यह समुदाय प्रकृति के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है, इसलिए उनसे प्रेरणा लेकर वे इसे चित्रकला में प्रदर्शित भी करते हैं। परंपरागत रूप से यह कला एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में पहुंचती हैं। इन चित्रकलाओं में जहां पेड़–पौधों को कैनवास पर उकेरा जाता है वहीं पशुओं के साथ–साथ आकाश, सूर्य, चंद्रमा आदि का भी सुंदर चित्रण देखने को मिलता है। आकार और प्रयोग में लाई गई जटिलताओं के आधार पर इन्हें बनाने में 2 दिन से लेकर 2 महीने तक का समय लगता है। कई बार बड़ी कलाकृतियों को समूहों में तैयार किया जाता है। नर्मदा परिक्रमा यह एक पवित्र आध्यात्मिक तीर्थयात्रा है, जिसमें देवी के रूप में पूजनीय मां नर्मदा नदी के चारों ओर 3500 किलोमीटर नंगे पैर परिक्रमा की जाती है। यह यात्रा भारत के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व को दर्शाती है। यह ऐतिहासिक घाटों, मंदिरों और पवित्र शहरों से होकर गुजरती है। नर्मदा परिक्रमा की यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है, जिसका वर्णन महाकाव्यों और प्राचीन पवित्र ग्रंथों में मिलता है। यह परिक्रमा छह से आठ महीनों की अवधि में की जाती है। नर्मदा का तट ध्यान और तपस्या की भूमि भी रहा है, जिसे सांस्कृतिक रूप से कई महान ऋषियों और संतों की तपोभूमि के रूप में जाना जाता है। श्रद्धालु चलते समय लगातार मां नर्मदा की स्तुति करते हुए “नर्मदे हर!” का जाप करते हैं। यात्रा अमरकंटक स्थित मां नर्मदा के उद्गम से शुरू होकर पुन: उस बिंदु पर वापस आने के बाद पूरी मानी जाती है। तीर्थयात्रा पूरी होने के बाद, भक्तों को ओंकारेश्वर मंदिर जाना होता है जो भगवान शिव को समर्पित है और बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। भगोरिया आदिवासी नृत्य भगोरिया आदिवासी नृत्य और महोत्सव भील जनजाति के बीच खुशी, एकता और परंपरा का एक जीवंत उत्सव है। भगोरिया आदिवासी नृत्य भील समुदाय के भगोरिया त्यौहार का एक अभिन्न अंग है, जो होली के त्यौहार से सात दिन पहले मनाया जाता है। यह त्यौहार पूरे समुदाय व रिश्तेदारों से मिलने के साथ–साथ आनंद से सराबोर होने का अवसर होता है। यह त्यौहार फसल कटाई के मौसम का भी प्रतीक है। भील समुदाय के साथ-साथ भीलाला और पटेलिया जैसे स्थानीय आदिवासी समुदाय भी यह त्यौहार मनाते हैं। ऐसा माना जाता है कि यह त्यौहार भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करने की परंपरा के रूप में शुरू हुआ था। गांव भगोर में भगवान शिव और देवी पार्वती को समर्पित एक मंदिर भी मौजूद है (ऐसा माना जाता है कि यह नाम शिव और पार्वती के लिए एक और नाम भाव-गौरी से लिया गया है)। इस दौरान सभी गांवों के निवासी अपनी पारंपरिक वेशभूषा पहनकर पैदल आते हैं। पुरुष धोती और सिर पर साफा पहनते हैं। वे अपने पारंपरिक हथियार और कमर में घंटी की बेल्ट भी पहनते हैं। महिलाएं दुपट्टे के साथ घाघरा और पोल्की पहनती हैं। जनजातीय पुरुष और महिलाएं चांदी के पारंपरिक आभूषण पहनते हैं। समूह पारंपरिक संगीत वाद्ययंत्रों जैसे मांदर, कुंडी, पीतल की थाली और बांसुरी का वादन करते हुए समूह नृत्य करते हैं।

मध्य प्रदेश में कहीं भीषण गर्मी का कहर जारी, 40 जिलों में 2 और 3 मई को बारिश हो सकती

भोपाल मध्यप्रदेश के लगभग 40 जिलों में 2 और 3 मई को बारिश हो सकती है। जिन जिलों में मौसम का बदलाव देखने को मिलेगा, उनमें भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर भी शामिल हैं। इसका कारण वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) का एक्टिव होना है। हालांकि, इससे पहले 30 अप्रैल और 1 मई को प्रदेश में तेज गर्मी का असर रहेगा। खासकर उज्जैन संभाग में लू चलने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, बुधवार को रतलाम, नीमच और मंदसौर में लू का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, शहडोल और अनूपपुर जैसे क्षेत्रों में हल्की बारिश हो सकती है। भोपाल, इंदौर और उज्जैन समेत अन्य जिलों में गर्मी का असर बना रहेगा। इधर, नर्मदापुरम जिले के डोलरिया में मंगलवार शाम को आई तेज आंधी से राजपूत समाज के सामूहिक विवाह सम्मेलन के लिए लगाया गया टेंट गिर गया। मौसम विभाग के अनुसार, बुधवार को रतलाम, नीमच-मंदसौर में लू का अलर्ट है। वहीं, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, शहडोल और अनूपपुर में हल्की बारिश हो सकती है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन समेत बाकी के जिलों में गर्मी का असर बना रहेगा। सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि साइक्लोनिक सर्कुलेशन और टर्फ की वजह से पिछले दो-तीन दिन से बारिश हो रही है। पूर्वी हिस्से में मंगलवार को भी बारिश हुई। बुधवार से कुछ जिलों में ही असर देखने को मिलेगा। वहीं, राजस्थान और गुजरात से जुड़े जिलों में हीट वेव यानी, लू चल सकती है। 2 मई को वेस्टर्न डिस्टरबेंस एक्टिव हो रहा है। जिसका असर अगले 3 दिन तक रह सकता है। पिछले 24 घंटे कैसा रहा मौसम? पिछले 24 घंटों के दौरान मध्यप्रदेश के जबलपुर और शहडोल संभाग के कुछ जिलों में हल्की बारिश दर्ज की गई, वहीं बाकी हिस्सों में मौसम साफ और गर्म रहा। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले 3 दिनों में भी तापमान में खास बदलाव की उम्मीद नहीं है, हालांकि पारा 2 से 3 डिग्री तक गिर सकता है। धूप ने तोड़े 5 साल के रिकॉर्ड, गर्मी से सड़कों पर पसरा सन्नाटा  इंदौर में मंगलवार को अप्रैल महीने की अब तक की सबसे भीषण गर्मी दर्ज की गई। दिन का तापमान 42.6 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 2 डिग्री अधिक है। तेज धूप और तपन के चलते दोपहर में सड़कों पर आवाजाही कम हो गई थी। लोग घरों में दुबके रहे क्योंकि धूप में एक मिनट भी खड़ा रह पाना मुश्किल हो रहा था। यह दिन न केवल अप्रैल का, बल्कि पिछले पांच सालों का भी सबसे गर्म दिन बन गया। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों तक ऐसी ही भीषण गर्मी बने रहने की संभावना जताई है। बुधवार को भी सुबह से ही तेज धूप है। गर्म हवाओं के थपेड़े चल रहे हैं और 11 बजे बाद सड़कें सूनी हो गई हैं। पिछले दस वर्षों में केवल चार बार पार हुआ 42 डिग्री का आंकड़ा   पिछले दस वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 29 अप्रैल 2019 को इंदौर में अब तक का सबसे अधिक तापमान 43.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। बीते दशक में केवल चार बार तापमान 42 डिग्री के पार गया है। पिछले पांच वर्षों में भी इस बार का तापमान सबसे ज्यादा रहा। 18 अप्रैल 2024 को अधिकतम तापमान 40.2 डिग्री था, जबकि मंगलवार को यह रिकॉर्ड टूट गया। मंगलवार की रात का तापमान भी सामान्य से 3 डिग्री अधिक, यानी 26.3 डिग्री सेल्सियस रहा, जिससे रात में भी गर्मी से राहत नहीं मिली। मौसम वैज्ञानिकों का पूर्वानुमान: लू का खतरा बरकरार मौसम विभाग की सीनियर वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि बीते कुछ दिनों से प्रदेश के कुछ इलाकों में साइक्लोनिक सर्कुलेशन और टर्फ के कारण बारिश हो रही है। हालांकि इंदौर संभाग पर इसका कोई असर नहीं दिख रहा है। यहां गर्मी का दौर जारी है और अगले दो दिन भी हालात ऐसे ही बने रहने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों ने चेताया है कि राजस्थान और गुजरात से सटे जिलों में हीट वेव यानी लू चलने के आसार हैं, जिससे लोगों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है। कई जिलों में मौसम बदला, बारिश भी हुई इससे पहले मंगलवार को प्रदेश में मौसम बदला रहा। सिवनी, दमोह, सिंगरौली, अनूपपुर और पन्ना तेज आंधी चली। वहीं, रीवा, कटनी, शहडोल, नरसिंहपुर, बालाघाट, छिंदवाड़ा, सतना, सीधी, मंडला, रायसेन, भोपाल, सीहोर, नर्मदापुरम, बैतूल, मैहर, उमरिया, जबलपुर, डिंडौरी, पांढुर्णा और सागर में भी मौसम बदला रहा। मंडला में ओले भी गिरे। दूसरी ओर, 8 शहर ऐसे हैं, जहां तापमान 43 डिग्री के पार पहुंच गया। मौसम विभाग के अनुसार, साइक्लोनिक सर्कुलेशन और टर्फ की वजह से ऐसा मौसम है। भोपाल में सुबह से ही बादल छाए रहे। हालांकि, गर्मी का असर बरकरार रहा। यहां मंगलवार को अधिकतम तापमान 41.8 डिग्री, इंदौर में 42.6 डिग्री, ग्वालियर में 38.8 डिग्री, उज्जैन में 43 डिग्री और जबलपुर में 40 डिग्री दर्ज किया गया। कहीं लू तो कहीं बारिश मौसम विभाग के मुताबिक, बुधवार, 30 अप्रैल को मध्य प्रदेश के रीवा, मऊगंज, सिंगरौली, शहडोल, सीधी और अनूपपुर में हल्की बारिश हो सकती है. वहीं रतलाम, नीमच और मंदसौर में लू का अलर्ट जारी किया गया है. इसके अलावा भोपाल, इंदौर, उज्जैन समेत बाकी के जिलों में गर्मी का असर रहेगा. मंगलवार को दमोह, सिवनी, सिंगरौली, अनूपपुर और पन्ना तेज आंधी चली, जबकि मंडला में ओले गिरे. वहीं भोपाल, सीहोर, रीवा, सतना, शहडोल, कटनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, रायसेन, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, सीधी, बैतूल, मैहर, उमरिया, जबलपुर, डिंडौरी, पांढुर्णा और सागर में मौसम का मिजाज बदला रहा. मौसम विभाग के अनुसार,  2 और 3 मई को मध्य प्रदेश के 40 जिलों में बारिश होने के आसार हैं. बीते दिन  शाजापुर में तापमान 43.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. गुना में 43.5 डिग्री सेल्सियस, खजुराहो में  तापमान 43.4 डिग्री सेल्सियस, रतलाम में पारा 43.2 डिग्री सेल्सियस, धार-रायसेन-नरसिंहपुर में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया. इसके अलावा सागर और टीकमगढ़ में 42.8 डिग्री सेल्सियस, खंडवा और दमोह में तापमान 42.5 डिग्री सेल्सियस, खरगोन में पारा 42.4 डिग्री सेल्सियस रहा. इसके अलावा भोपाल में तापमान 41.8 डिग्री सेल्सियस, इंदौर में 42.6 डिग्री सेल्सियस, ग्वालियर में पारा 38.8 डिग्री सेल्सियस, उज्जैन में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस और जबलपुर में 40 … Read more

पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण मंडला के प्रभारी सहायक संचालक द्वारा खरीदी में जमकर की कमीशन खोरी

मंडला मंडला जिला आदिवासी बाहुल्य जिला है जिसका फायदा अधिकारी खूब उठाते हैं मनमाने तरीके से योजनाओं का संचालन कर   भ्रष्टाचार मचाए हुए हैं , शासन  द्वारा अनेक प्रकार की योजनाएं चलाई जाती है आदिवासी एवं पिछड़ा वर्ग के लिए शासन ने अनेक सुविधा प्रदान की है छात्रावास में पढ़ने वाले बच्चे बच्चियों के लिए छात्रवृत्ति के साथ-साथ और भी अनेक सुविधाएं प्रदान की जाती है ताकि वह अपना भविष्य अच्छे से सवार  सके, किंतु जिले में बैठे भ्रष्ट अधिकारी इसमें भी अपना फायदा देखकर बच्चों के हक का पैसा खाने में परहेज नहीं करते है।     ऐसा ही एक मामला पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण मंडला  का है मेरे द्वारा सूचना के  अधिकार के माध्यम से जानकारी निकाली गई इसमें स्पष्ट भ्रष्टाचार दिख रहा है , शासन द्वारा पढ़ने वाले बच्चों के लिए ठंड के दिनों में पिछड़ा वर्ग छात्रावास बालक एवं कन्या छात्रावास के लिए कंबल एवं चद्दर प्रदान करने के लिए राशि जारी की गई थी, पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण के सहायक संचालक द्वारा बच्चों के लिए जो कंबल के क्रय किए गए वह घटिया क्वालिटी के है इनके द्वारा कंबल जबलपुर से किया गया है जबकि इन्हें मंडला से ही क्रय किया जाना था। जबलपुर से क्रय करने के बावजूद कम्बल चादर घटिया क्वालिटी की है एक कंबल का मूल प्रति 775 रुपया है और चादर का मूल प्रति₹200 है उनके द्वारा प्रदान किए गए बिल के आधार पर मेरे द्वारा जब पिछड़ा वर्ग बालक छात्रावास में जाकर अधीक्षक से मिलकर कंबल व चादर का अवलोकन किया गया तो देखने में लगा कि प्रति कंबल 250 ₹300 एवं चंदर मुश्किल से 70,75 की प्रति चादर मूल्य होगा जबलपुर से क्रय किए जाने के बावजूद सहायक संचालक द्वारा घटिया सामग्री क्रय कर बच्चों को प्रदान की गई है इसमें भी उनके द्वारा जमकर भ्रष्टाचार किया गया है, पिछड़ा वर्ग के छात्रावास अधीक्षक से चर्चा करने पर उनके द्वारा कहा गया कि ही राशि छात्रावास में दिए जाना चाहिए था ताकि हम अपने हिसाब से अच्छी क्वालिटी की सामग्री करें कर सके। दोनों छात्रावास में लगभग डेढ़ सौ कंबल चादर प्रदान किए गए हैं विभाग में पूर्व में भी इनके द्वारा अनेक प्रकार की अनिमितता की गई है चाहे पैरामेडिकल छात्रवृत्ति का मामला हो या पिछड़ा वर्ग अल्पसंख्यक लोन का मामला हो यहां पर मनमानी तरीके से कार्य किया जा रहा है । उच्च अधिकारियों को मामले की गंभीरता को देखते हुए सूक्ष्म जांच कर जिम्मेदार पर उचित कार्यवाही की जानी चाहिए।

भोपाल स्टेशन पर रेलकर्मियों की ईमानदारी और सजगता एक बार फिर यात्रियों की सेवा में मिसाल बनकर सामने आई

 भोपाल दिनांक 29 अप्रैल 2025 को अपराह्न लगभग 16:10 बजे, एक यात्री श्री अल्फ्रेड टोनी जो ट्रेन संख्या 12618 मंगला एक्सप्रेस से एर्नाकुलम स्टेशन की यात्रा पर थे, वे भोपाल स्टेशन परिसर में स्थित “ड्रॉप एंड गो” क्षेत्र में टैक्सी से उतरे। यात्रा की जल्दी में वे अपना एक बैग वहीं भूल गए और प्लेटफॉर्म की ओर रवाना हो गए। इसी दौरान प्लेटफॉर्म पर कार्यरत रेलवे कुली श्री छगनलाल (बिल्ला क्रमांक 75) की नजर उस लावारिस बैग पर पड़ी। अपनी ईमानदारी और सजगता का परिचय देते हुए उन्होंने बिना देर किए वह बैग उपस्टेशन प्रबंधक (वाणिज्य) श्री जावेद अंसारी को सौंप दिया। श्री अंसारी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बैग की जांच की, जिसमें नकदी के साथ कई महत्वपूर्ण बैंकिंग दस्तावेज मिले। दस्तावेजों में अंकित मोबाइल नंबर से उन्होंने यात्री श्री अल्फ्रेड टोनी से संपर्क किया और उन्हें उनके बैग के सुरक्षित होने की सूचना दी। सूचना मिलते ही श्री टोनी तुरंत स्टेशन पर उपस्टेशन अधीक्षक कार्यालय में पहुँचकर बैग प्राप्त किया। उन्होंने भोपाल रेल प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “मैं बहुत खुश और आभारी हूँ कि इतनी जिम्मेदारी और ईमानदारी से मेरा सामान मुझे वापस मिल गया। रेल प्रशासन का यह व्यवहार यात्रियों के विश्वास को और मज़बूत करता है।” इस सराहनीय कार्य पर प्रतिक्रिया देते हुए वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री सौरभ कटारिया ने कहा— “भोपाल मंडल में कार्यरत हमारे कर्मचारी यात्रियों की सेवा और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं। श्री छगनलाल की ईमानदारी और श्री जावेद अंसारी की तत्परता ने यह सिद्ध कर दिया है कि हमारे स्टाफ न सिर्फ कर्मठ हैं, बल्कि मानवीय मूल्यों को भी निभाते हैं। रेल प्रशासन को उन पर गर्व है।” भोपाल रेल मंडल यात्रियों को सुरक्षित, भरोसेमंद और सहयोगात्मक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। यह घटना इस बात का प्रतीक है कि रेलवे केवल यात्रा का साधन नहीं, बल्कि यात्रियों के विश्वास और सुरक्षा का संरक्षक भी है।

पहलगाम हमले की रील देख रहे छात्र को पीटा, वीडियो देख हुई शिनाख्त, जीआरपी अरेस्ट करने के लिए रवाना

 इंदौर भोपाल-इंदौर एक्सप्रेस ट्रेन में हिंदू युवक से विवाद करने वाले मुस्लिम युवकों की पहचान जीआरपी ने कर ली है। ये आरोपी सेंधवा के रहने वाले हैं, जिन्हें पुलिस पकड़ने के लिए रवाना हो गई है। बता दें कि अनमोल पुत्र हिंदू सिंह परमार निवासी खंडवा नाका ने आरोप लगाया था कि वह ट्रेन में पहलगाम हमले से संबंधित रील देख रहा था, तभी वहां बैठे मुस्लिम युवकों ने आक्रोशित होकर मारपीट की थी, जिससे हाथ और गले में चोट आई है। यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने ट्रेन से बाहर फेंकने की भी कोशिश की थी। शिकायतकर्ता ने घटना को तोड़ मरोड़कर पेश किया     इस बीच, पुलिस का यह भी दावा है कि शिकायतकर्ता छात्र ने घटना को तोड़ मरोड़कर पेश किया है। पहले युवक स्वयं को छात्र बता रहा था, लेकिन पुलिस जांच में सामने आया है कि वह जिम ट्रेनर है।     उज्जैन में ट्रेन में चढ़ने के दौरान उसका आरोपियों से विवाद हुआ था, वहां आरपीएफ पुलिस ने मामला सुलझाया था। वहीं ट्रेन का एक वीडियो भी पुलिस को मिला है, जिसमें युवक के साथ दो साथी भी नजर आ रहे हैं।     पुलिस के मुताबिक, आरोपियों की पहचान हो गई है। उन्हें जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। टीआई रश्मि पाटीदार के मुताबिक, छात्र द्वारा लगाए गए आरोप और वीडियो की जांच की जा रही है। वायरल हुआ वीडियो, तो पुलिस ने दर्ज किया केस बता दें कि घटना के बाद युवक जब शिकायत लेकर जीआरपी थाने पहुंचा तो सुनवाई नहीं हुई। इंटरनेट मीडिया पर वीडियो बहुप्रसारित होने के बाद प्रकरण दर्ज हुआ। पुलिस ने 36 घंटे बाद मामले में प्रकरण दर्ज किया। युवक ने आरोप लगाया कि मुस्लिम युवक बोल रहे थे पहलगाम में 28 लोग शहीद हुए हैं। हम चंदन नगर में रहते हैं। 29वां तुझे बना देंगे। युवक ने बताया कि ट्रेन में बैठकर शुजालपुर से इंदौर आ रहा था।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों को अक्षय तृतीया पर्व की दी बधाई

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों को अक्षय तृतीया पर्व की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर भगवान श्री विष्णु और मां लक्ष्मी से सभी प्रदेशवासियों पर कृपा बनाए रखने और अक्षय सुख, समृद्धि व प्रसन्नता प्रदान करने की प्रार्थना की है।  

चितरंगी पुलिस की अवैध मादक पदार्थों की बिक्री करने वालों के विरूध्द लगातार ताबड़तोड़ कार्यवाही

चितरंगी पुलिस की अवैध मादक पदार्थों  की बिक्री करने वालों के विरूध्द लगातार ताबड़तोड़ कार्यवाही  सिंगरौली  मनीष खत्री (भा.पु.से.) पुलिस अधीक्षक महोदय सिंगरौली के कुशल निर्देशन एवं अभिषेक रंजन (भा.पु.से.) अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महोदय सिंगरौली के सतत मार्गदर्शन तथा अरूण कुमार सोनी प्रभारी अनुविभागीय पुलिस अधिकारी चितरंगी के सतत निगरानी में नशे के विरूध्द चलाये जा रहे अभियान अन्तर्गत थाना प्रभारी चितरंगी को दिनांक 27/04/2025 को  मुखबिर से सूचना पर प्राप्त हुआ कि एक महिला जो  सुदा की रहने वाली है ,जिसका पूरा परिवार वर्षों से  बहुत चतुराई से चोरी छिपे गाजा बिक्री का काम करता आ रहा है। वह महिला पिंक कलर की साडी पहनी हुई है और अपने पर्स में गाजा रखकर चितरंगी गाजा बेचने आ रही है ।जो सजहवा तिराहे पर गाड़ी का इंतजार कर रही है।   तत्काल थाना प्रभारी चितरंगी द्वारा  पुलिस बल के साथ सजहवा तिराहे पर घेराबंदी कर पिंक कलर की साडी पहनी हुई महिला को घेरावंदी कर पकड़ा गया। एनडीपीएस एक्ट के प्रावधानों के अनुरूप मुखबिर के बताये अनुसार महिला को सूचना से अवगत कराकर महिला के पर्स की तलासी लेने पर एक सफेद प्लास्टिक में 750 ग्राम मादक पदार्थ गाजा कीमती 11500 रुपये बरामद हुआ। कार्यवाही करने में पूरी रात और पूरा दिन बीत गया फिर रात 22.00 बजे प्रेस नोट दिया गया विलम्ब के लिए विचारणीय है।   एन.डी.पी.एस. एक्ट के प्रावधानो के मौके की कार्यवाही पूर्ण किया जाकर वापसी पर महिला आरोपी  के विरूध्द  एन.डी.पी.एस. एक्ट की  सुसंगत धाराओ 8,20(b) NDPS ACT  मे अपराध पंजीबध्द किया  गया।   आरोपिया से पूछताछ मे कुछ अन्य मादक पदार्थ कारोबार में लिप्त अपराधियों के विषय में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त  हुई है, जिनकी तस्दीक की जा रही है । उक्त कार्यवाही में महत्वपूर्ण योगदान –     निरी. सुधेश तिवारी (प्रभारी थाना चितरंगी ), सउनि. मोहन पनाडिया , प्रआर. लक्ष्मीकान्त मिश्रा , आर. शिव कुमार पटेल , म.आर. वर्षा पंथी की महत्वपूर्ण  भूमिका रही।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुरूप जबलपुर में राजस्व अभिलेखागार के प्रबंधन की एक नई शुरुआत की गई

जबलपुर के राजस्व अभिलेखागार को बनाया गया आधुनिक राजस्व अभिलेखों की नकल प्राप्त करना हुआ आसान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुरूप जबलपुर में राजस्व अभिलेखागार के प्रबंधन की एक नई शुरुआत की गई भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुरूप जबलपुर में राजस्व अभिलेखागार के प्रबंधन की एक नई शुरुआत की गई है। कलेक्टर कार्यालय में स्थित राजस्व अभिलेखागार को आधुनिकतम रूप में विकसित किया गया है, जिससे आवेदकों को राजस्व अभिलेखों की नकल प्राप्त करना अब आसान हो गया है। कलेक्टर दीपक सक्सेना के निर्देशन में राजस्व रिकॉर्ड रूम को व्‍यवस्थित करने और सभी रिकॉर्डों को स्कैन कर ऑनलाइन किया है। इससे अब कोई भी व्यक्ति घर बैठे राजस्व अभिलेखों की स्थिति के बारे में पता कर सकता है। राजस्व अभिलेखागार के आधुनिकीकरण से पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी है। पारदर्शिता और जवाबदेही नवीनतम राजस्व रिकॉर्ड रूम में वर्ष 1909-10 से अभिलेख उपलब्ध हैं, जो अब सहजता से कंप्यूटर के माध्यम से उपलब्ध हो सकेंगे। इससे राजस्व अभिलेखों की नकल प्राप्त करने में अब कोई दिक्कत नहीं है। नवाचार का अवलोकन करने के लिए जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी पहुंच रहे हैं। प्रशासनिक सुधार कलेक्टर सक्सेना स्वयं समय-समय पर रिकॉर्ड रूम का अवलोकन कर बेहतर और सुविधाजनक बनाने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। जनता से जुड़े राजस्व रिकॉर्ड को आधुनिकतम रूप में लाने का यह कार्य निश्चित ही प्रशंसनीय है। यह पहल जिले में प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कपड़े के बस्ते की जगह प्लास्टिक के बॉक्स में हर केस फाइल रिकॉर्ड रूम के रख-रखाव की समस्याओं का समाधान करने में यह नवाचार महत्वपूर्ण है। अभिलेखों, राजस्व प्रकरणों एवं पुराने दस्तावेजों को व्यवस्थित तरीके से प्लास्टिक बैग में डालकर प्रकरणों को क्रमानुसार प्लास्टिक बॉक्स में जमाया गया। प्रत्येक प्लास्टिक बॉक्स की तहसील के हिसाब से कलर कोडिंग की गई। उन पर मौजावार, वर्ष वार, मद वार केस के डिटेल स्टीकर पर प्रिंट कर चिपकाए गए। रिकॉर्ड रूम और उसमे रखी रैक्स का रंग रोगन किया गया। रिकॉर्ड रूम एयरकंडीशंड बनाया गया। हर रैक और उसकी शेल्फ को एक यूनिक नंबर दिया गया। हर शेल्फ में रखे प्लास्टिक बॉक्स और बॉक्स में प्लास्टक बैग में रखे गए केस की कोडिंग की गई। आवेदकों के लिये सुविधाजनक रिकार्ड रूम की सारी जानकारी एक ऑनलाइन एप्लीकेशन तैयार कर उस पर अपलोड की गई है। आवेदक घर बैठे ऐप की सहायता से यह जानकारी प्राप्त कर सकते हैं कि उनके द्वारा जिस रिकार्ड की प्रति चाही गई है,प्रति चाही गई है वह कहाँ उपलब्ध है। रिकार्ड रूम के बाहर स्थापित कियॉस्क पर केस नंबर का रिकार्ड रखा गया है। साथ ही केस की लोकेशन का प्रिंट निकालने की सुविधा दी गई है। इससे आवेदक प्रिंट निकालकर आसानी से अपने रिकार्ड की नकल प्राप्त कर सकता है। बैंक के लॉकर रूम सरीखा माहौल समस्या को हल करने के अभिनव तरीके और चंद महीनों की मेहनत ने रिकॉर्ड रूम की शक्ल बदल दी है। अब रिकॉर्ड कई वर्षों तक सुरक्षित रखा जा सकेगा। अब बैंक के लॉकर रूम की तरह माहौल है। कीमती रिकॉर्ड सुरक्षित भी है और कहाँ रखा है, यह कम्‍प्‍यूटर से सभी को पता भी है।  

जल गंगा संवर्धन अभियान में नए जल संग्रहण संरचनाएं बनाई जाएंगी और पहले से मौजूद संरचनाओं का जीर्णोद्धार किया जा रहा

जल गंगा संवर्धन अभियान हर बूंद की कीमत: जन सहयोग से हो रहा जल संवर्धन  जल गंगा संवर्धन अभियान जनसहभागिता से जल संरक्षण और संवर्धन की अवधारणा पर आधारित जल गंगा संवर्धन अभियान में नए जल संग्रहण संरचनाएं बनाई जाएंगी और पहले से मौजूद संरचनाओं का जीर्णोद्धार किया जा रहा भोपाल जल संचयन का संकल्प प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्पों को साकार करने के लिये मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जल गंगा संवर्धन अभियान पूरे प्रदेश में 30 मार्च से प्रारंभ किया है, जो 30 जून तक संचालित होगा। यह अभियान जन-जन के जीवन से जुड़ा महत्वपूर्ण अभियान है। जल गंगा संवर्धन अभियान जनसहभागिता से जल संरक्षण और संवर्धन की अवधारणा पर आधारित है। इस अभियान में नए जल संग्रहण संरचनाएं बनाई जाएंगी और पहले से मौजूद संरचनाओं का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। साथ ही जल स्रोतों और जल वितरण प्रणालियों की सफाई तथा उनके आसपास पौधारोपण किया जा रहा है । समाज की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। अभियान समाज और सरकार की संयुक्त पहल से एक जन आंदोलन बनता जा रहा है। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती निर्मला भूरिया झाबुआ जिले के पेटलावद जनपद की ग्राम पंचायत करड़ावद के ठिकरिया तालाब पर जल गंगा संवर्धन अभियान में जल चौपाल कार्यक्रम में शामिल हुईं। मंत्री श्रीमती भूरिया ने कहा कि पेटलावद क्षेत्र को माही डेम की सौगात स्व. दिलीप सिंह भूरिया के अथक प्रयासों से मिलने के कारण आज पेटलावद में हरियाणा, पंजाब जैसी कृषि होने लगी है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के अनेक पुराने तालाबों से किसान अपनी फसलों की सिंचाई के लिये पानी लेते आ रहे हैं। वर्तमान में तालाब में पानी खत्म हो गया है। ऐसी स्थिति में सभी किसानों को जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत तालाबों से काली मिट्टी जन-भागीदारी से निकालकर अपने-अपने खेतों में ले जायें, जिससे उनके खेतों की उर्वरा शक्ति में वृद्धि होगी। मंत्री श्रीमती भूरिया ने ग्रामीणों से अपील की कि इस महत्वपूर्ण अभियान में आगे आयें एवं जल-स्रोतों की साफ-सफाई और जल संग्रहण के कार्य में भागीदारी निभायें, जिससे वर्तमान जल संकट से आने वाली पीढ़ी को बचाया जा सके। इस अवसर पर 100 बालिकाओं ने कलश यात्रा निकाल कर जल संरक्षण का संदेश दिया गया। जन-अभियान परिषद और ग्रामीणों ने क्षिप्रा नदी की साफ-सफाई की देवास जिले में कलेक्टर ऋतुराज सिंह के मार्गदर्शन में जल गंगा संवर्धन अभियान संचालित किया जा रहा है। इस अभियान में क्षिप्रा नदी के शुद्धिकरण के लिये जन-अभियान परिषद और ग्रामीणजन क्षिप्रा नदी की साफ-सफाई कर श्रमदान कर रहे हैं। इस दौरान ग्रामीणों को स्वच्छता की शपथ दिलायी गयी। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना वॉटर शेड अंतर्गत देवास जिले के बागली विकासखण्ड के ग्राम पुंजापुरा में वॉटर शेड विकास यात्रा का शुभारंभ किया गया। विधायक बागली मुरली भंवरा ने वॉटर शेड वैन को हरी झण्डी दिखायी। विधायक भंवरा ने जल के महत्व के बारे में जानकारी दी। इस अवसर पर उन्होंने प्रतिभावान कृषक, स्कूली बच्चों और आजीविका समूह की महिलाओं का सम्मान किया। जल संरक्षण का संदेश देने के लिये अधिकारी एवं छात्रों ने देवास में निकाली रैली जल गंगा संवर्धन अभियान में जल संरक्षण का संदेश देने के लिये अधिकारी एवं छात्रों द्वारा रैली निकाली गयी। अभियान के अंतर्गत नये तालाब बनाये जा रहे हैं एवं पुराने तालाबों, बावड़ियों और कुओं का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। नदियों को साफ-स्वच्छ एवं जल एकत्रित करने के कार्य भी किये जा रहे हैं। बुरहानपुर में रंगोली के माध्यम से दिया जल बचाने का संदेश जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत बुरहानपुर में रंगोली के माध्यम से जल बचाने का संदेश दिया जा रहा है। रंगोली प्रतियोगिता एक कलात्मक और रचनात्मक गतिविधि है, जिसका उद्देश्य लोगों को जल के महत्व के बारे में बताना है। शासकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय बुरहानपुर में सेव वॉटर की थीम पर रंगोली प्रतियोगिता आयोजित की गयी। इस प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। प्रतियोगिता के माध्यम से “जल होगा तभी सुरक्षित होगा कल’’ का संदेश दिया गया। प्रतिभागियों को पुरस्कृत भी किया गया। भिण्ड जिले के लहार न्यायालय परिसर में जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत मध्यप्रदेश जन-अभियान परिषद द्वारा नवांकुर संस्था स्व. विद्या देवी लल्ला प्रसाद झा शिक्षा प्रसार समाज सेवा समिति द्वारा न्यायाधीश राकेश बंसल एडीजे लहार द्वारा भीषण गर्मी को देखते हुए मटके के ठंडे पानी की प्याऊ की व्यवस्था की गयी।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव धार में विभिन्न विकास कार्यों का भूमि-पूजन एवं लोकार्पण भी करेंगे

मुख्यमंत्री डॉ. यादव धार जिले के उमरबन में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के सामूहिक विवाह सम्मेलन में होंगे शामिल मुख्यमंत्री करेंगे 2140.26 करोड़ रुपये लागत के विकास कार्यों का भूमि-पूजन और लोकार्पण  मुख्यमंत्री डॉ. यादव धार में विभिन्न विकास कार्यों का भूमि-पूजन एवं लोकार्पण भी करेंगे धार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव धार जिले के उमरबन में 30 अप्रैल 2025 (बुधवार) को मुख्यमंत्री कन्यादान सामूहिक विवाह आयोजन  में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव धार में विभिन्न विकास कार्यों का भूमि-पूजन एवं लोकार्पण भी करेंगे, जिनकी अनुमानित लागत 2140.26 करोड़ रुपये है। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सवित्री ठाकुर, प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री तथा धार ज़िले के प्रभारी मंत्री  कैलाश विजयवर्गीय तथा सामाजिक न्याय मंत्री नारायण सिंह कुशवाह उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम का आयोजन केशरपुरा फाटा, जनपद पंचायत उमरबन में दोपहर 12 बजे से किया जाएगा। सामूहिक विवाह मे बड़ी संख्या में जोड़ों के विवाह सम्पन्न कराए जाएंगे। साथ ही क्षेत्र में अधोसंरचना जैसे सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य व पेयजल जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जुड़े अनेक परियोजनाओं का भूमिपूजन और लोकार्पण भी किया जाएगा।  

कैबिनेट की बैठक: मध्य प्रदेश में एक मई से 30 मई तक हो सकेंगे तकादले, मिली मंजूरी

भोपाल मध्य प्रदेश में एक मई से 30 मई तक तकादले हो सकेंगे। मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में तबादला नीति को मंजूरी दी गई। ई- ऑफिस से ही तबादले आवेदन लिए जाएंगे। विभाग अपनी सुविधा अनुसार तबादला नीति बना भी सकेंगे। कैबिनेट की बैठक में हुए निर्णयों की जानकारी देते हुए नगरीय विकास, आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि पराली जलाने पर संबधित किसान की सम्मान निधि एक साल के लिए रुकी जाएगी। पराली जलाने वाले किसानों पर केस दर्ज होने पर उस किसान का अनाज समर्थन मूल्य पर खरीदा नही जाएगा।     विजयवर्गीय ने बताया कि राज्य सरकार अब केंद्र सरकार के समान शासकीय कर्मचारियों को 55 प्रतिशत महंगाई भत्ता देगी।     इससे राज्य सरकार पर 3.50 हजार करोड़ वित्तीय भार आएगा। कैबिनेट की बैठक में ग्रीन एनर्जी को लेकर भी निर्णय लिया गया।     मप्र और उत्तर प्रदेश अपनी अपनी डिमांड के अनुरूप ग्रीन एनर्जी बिजली का उपयोग करेंगे। ग्रीन एनर्जी संयंत्र मध्य प्रदेश में लगेगा और इससे उत्तर प्रदेश को भी बिजली मिलेगी।     मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश की बिजली मांग की अवधि एक दूसरे की पूरक होने के कारण मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश में पूरक आधार पर विद्युत प्रदाय के लिए मध्य प्रदेश में 2000 मेगावाट सौर पार्क व 1000 मेगावाट कंपोजिट ऊर्जा भंडारण परियोजना स्थापित किए जाने के प्रस्ताव को मंत्रिपरिषद द्वारा अनुमोदन किया गया।     इस परियोजना से दोनों राज्यों द्वारा पृथक-पृथक छः महीनों के लिए बिजली ली जाएगी। इसके अलावा पेंशन योजना के लिए कमेटी गठित की गई। यूनीफाइड पेंशन योजना देने पर यह कमेटी विचार करेगी।  

इंदौर और भोपाल के महानगर बनने का रास्ता साफ,5-5 शहरों को मिलाया जायेगा

भोपाल इंदौर और भोपाल के महानगर बनने का रास्ता साफ हो गया है। सरकार ने मप्र मेट्रोपॉलिटन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट 2025 का ड्राफ्ट तैयार करने की नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मेट्रोपॉलिटन एरिया के गठन के प्रस्ताव पर समीक्षा बैठक हुई। नगरीय आवास एवं विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय शुक्ला ने प्रेजेंटेशन में बताया कि इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया के प्रथम चरण का काम पूरा हो चुका है। भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया के लिए कंसल्टेंट की नियुक्ति के लिए टेंडर प्रक्रिया जारी कर दी गई है। दोनों शहरों के विकास का जिम्मा मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी का होगा। पढ़िए इंदौर-भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया में कौन-कौन से क्षेत्र आएंगे और इसका स्वरूप क्या होगा? 5 जिलों के 1756 गांव होंगे शामिल इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया में पांच जिले इंदौर, देवास, उज्जैन, धार और शाजापुर को शामिल किया गया है। कुल क्षेत्रफल करीब 9 हजार वर्ग किमी का होगा। इस एरिया की आबादी 55 लाख के करीब होगी। इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया को डेवलप करने का काम तेजी से हो रहा है। इंदौर विकास प्राधिकरण( आईडीए) को नोडल एजेंसी बनाया है। आईडीए ने डेवलपमेंट प्लान तैयार करने के लिए कंसल्टेंट की नियुक्त कर ली है। मेट्रोपॉलिटन एरिया को 4 चरणों में डेवलप किया जाना है, जिसमें इंसेप्शन, सिचुएशन एनालिसिस, रीजनल एवं इन्वेस्टमेंट प्लान और डीपीआर शामिल है। इसके पहले चरण यानी इंसेप्शन का काम पूरा हो चुका है यानी ये तय हो गया है कि मेट्रोपॉलिटन एरिया का कुल क्षेत्रफल कितना होगा? इनमें कौन-कौन से जिले शामिल होंगे, तहसील और गांवों की संख्या कितनी होगी? अब सिचुएशन एनालिसिस का ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा यानी इसमें शामिल जिलों की अलग-अलग तहसील, निकायों का डेटा, वहां की जनसंख्या, स्थापित उद्योग, क्षेत्र की विशेषता की स्टडी होगी। इसके बाद वहां की भौगोलिक, आर्थिक, धार्मिक-सामाजिक स्थिति का आकलन होगा। कहां कौन सी इंडस्ट्री है, किस तरह की जरूरतें हैं, इसका भी खाका तैयार होगा। इसके बाद रीजनल एवं इन्वेस्टमेंट प्लान बनेगा, जिसमें ये देखा जाएगा कि मेट्रोपॉलिटन एरिया का समान रूप से विकास हो सके। इसके बाद डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट जारी की जाएगी। 7863 वर्ग किमी के एरिया में बनेगी इंदौर मेट्रोपॉलिटन सिटी सीएम डॉ. मोहन यादव की पहल पर इंदौर और भोपाल को महानगरों के रूप में विकसित किया जा रहा है। इंदौर मेट्रोपॉलिटन सिटी में इंदौर के अलावा उज्जैन, देवास और धार जिले को भी मिलाया जाएगा। मेट्रोपॉलिटन सिटी में पूरा इंदौर शामिल होगा जबकि उज्जैन, देवास और धार का कुछ हिस्सा भी इसमें जोड़ा जाएगा। इंदौर में इसके लिए कंसल्टेंट की नियुक्ति की जा चुकी है। सीएम डॉ. मोहन यादव ने भोपाल-इंदौर को मेट्रोपॉलिटन सिटी बनाने की घोषणा की और तुरंत ही इसपर अमल करने के निर्देश देकर प्लान बनवाए। इंदौर महानगर की कवायद तेजी से चल रही है। कुल 7863 वर्ग किमी का एरिया निर्धारित किया इंदौर नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार इंदौर मेट्रोपॉलिटन सिटी के लिए प्रशासन ने योजना तैयार कर ली है। इसके लिए कुल 7863 वर्ग किमी का एरिया निर्धारित किया है। इंदौर मेट्रोपॉलिटन सिटी में 19 निकाय शामिल किए जाएंगे। अगले दो ढाई दशकों में विकास का खाका तैयार करने के लिए डेढ दर्जन से ज्यादा विभागों से रिपोर्ट तलब ​की गई है। इसी तरह भोपाल मेट्रोपॉलिटन सिटी भी विकसित की जाएगी जिसमें भोपाल के साथ ही सीहोर, रायसेन, विदिशा, राजगढ़ जिलों के हिस्सों को मिलाया जाएगा। भोपाल मेट्रोपॉलिटन के लिए प्रारंभिक योजना में भोपाल की 59 ग्राम पंचायतें और रायसेन जिले के मंडीदीप की 9 ग्राम पंचायतें शामिल की गई थीं। अब इनमें कई नए एरिया जुड़ेंगे। खाका फाइनल होने के बाद भोपाल मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी बनाई जाएगी। केंद्र सरकार व राज्य सरकार के बीच एमओयू होगा। अवंतिका मेट्रोपॉलिटन रीजन नाम संभावित समीक्षा बैठक में इस बात पर भी विचार किया गया कि दोनों महानगरों का नाम क्या होगा? इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया के लिए तीन नामों का विकल्प रखा गया है।     इंदौर-उज्जैन महानगरीय क्षेत्र     मालवा महानगरीय क्षेत्र     अवंतिका महानगरीय क्षेत्र सूत्र बताते हैं कि बैठक में तीसरे विकल्प यानी अवंतिका महानगरीय क्षेत्र पर सैद्धांतिक सहमति बनी है। हालांकि, अंतिम फैसला मेट्रोपॉलिटन एक्ट बनने के बाद लिया जाएगा। इंदौर में तेजी से काम की वजह इंदौर मेट्रोपॉलिटन के तेजी से हो रहे काम की वजह है सिंहस्थ 2028। दरअसल, इंदौर का जो एरिया तय हुआ है उसमें दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC) को जोड़ा गया है। सरकार की कोशिश है कि इससे उद्योगों और व्यापार को नई गति मिले। इससे देवास, पीथमपुर, उज्जैन और बदनावर जैसे क्षेत्रों में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही इंदौर, देवास और अन्य शहरों को मजबूत सड़क, रेल और हवाई मार्गों से जोड़ा जाएगा, जिससे सिंहस्थ में आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सके।   भोपाल के लिए जून में कंसल्टेंट की नियुक्ति भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया में भोपाल- सीहोर- रायसेन-विदिशा और राजगढ़ जिले के ब्यावरा को शामिल किया गया है। भोपाल विकास प्राधिकरण को मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलप करने के लिए नोडल एजेंसी बनाया गया है। हालांकि अभी तय नहीं है कि इन जिलों का कितना क्षेत्रफल भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया में शामिल होगा। साल 2022 में शिवराज सरकार ने भोपाल में मेट्रो रेल प्रोजेक्ट को मंडीदीप तक विस्तार करने के लिए मेट्रोपॉलिटन एरिया के प्रस्ताव को कैबिनेट में मंजूरी दी थी। उस वक्त भोपाल मेट्रोपॉलिटन का प्रांरभिक एरिया डिफाइन किया था, जिसमें भोपाल की 59 ग्राम पंचायतें और मंडीदीप निवेश क्षेत्र (रायसेन) की 9 ग्राम पंचायतें शामिल की गई थी। समीक्षा बैठक में बताया गया कि कंसल्टेंट की नियुक्ति के लिए टेंडर जारी किया गया है, जो जून में ओपन होगा। भोजपाल महानगरीय क्षेत्र हो सकता है नाम इंदौर की तरह भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया के लिए भी तीन नाम सुझाए गए हैं…     भोपाल महानगरीय क्षेत्र     मध्य प्रदेश राज्य राजधानी क्षेत्र     भोजपाल महानगरीय क्षेत्र

प्रदेशवासियो की जेबों को लगेगा बड़ा झटका! 1 मई से इतने रुपये मंहगी हो सकती है बिजली

 जबलपुर मई माह में बिजली उपभोक्ताओं को बिल से झटका लग सकता है। बिल में करीब 50 से 100 रुपये की बढ़ोतरी होगी। विद्युत नियामक आयोग के नए टैरिफ आदेश पर करीब 4 प्रतिशत बिजली के रेट बढ़ने के निर्देश वितरण कंपनी ने एक अप्रैल को ही जारी कर दिये थे। इसके चलते जो उपभोक्ता 200 से 400 यूनिट बिजली खपत करते हैं उनको 50 से लेकर 99 रुपये तक बिजली के बिलों में अतिरिक्त भुगतान करना पड़ेगा। उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने इस पर रोक की मांग की है। बढ़े रेट पर रोक लगाने की मांग नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच, भारतीय वरिष्ठ नागरिक एसोसियेशन, महिला समिति, मानव अधिकार क्रांति संगठन तथा सीनियर सिटीजन वेलफेयर एसोसियेशन ने इस बढ़े हुए बिजली दामों पर आक्रोश जताते हुए सोमवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 108 के तहत इस पर रोक लगाने की मांग की है। आयोग ने बिजली कंपनियों पर कार्रवाई नहीं की डॉ. नाजपांडे ने बताया कि मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी के सर्कुलर 24 जनवरी 2024 के अनुसार बिजली हानि प्रतिशत 15.45 था। लेकिन बाद में एक वर्ष के भीतर इसी कंपनी के सर्कुलर दिनांक 25 मार्च 2025 के अनुसार वह 17.22 प्रतिशत हो गया है। वास्तविकता में बिजली हानि प्रतिशत घटना चाहिए था, लेकिन वह उल्टा बढ़ गया है। यह विद्युत नियामक आयोग आदेश की पूर्णतः अवहेलना हुई है। इसके बाद भी आयोग ने बिजली कंपनियों पर कार्रवाई नहीं की है। जबलपुर के नयागांव स्थित 220 केवी सबस्टेशन में रविवार की शाम को फिर से तकनीकी खराबी आ गई। इस वजह से 220 केवी सब स्टेशन में एक घंटे सप्लाई बंद रही। इससे शहर का बड़ा इलाका प्रभावित हुआ। उपभोक्ता परेशान हुए। लोगों द्वारा बिजली बंद होने की शिकायत भी कॉल सेंटर में की गई। जानकारी के अनुसार शाम को 220 नयागांव सबस्टेशन के आइसोलेटर में खराब आ गई थी जिसके कारण शक्ति भवन, रामपुर, आईटी पार्क, सूपाताल, संजीवनी नगर आदि 33 केवी सबस्टेशन की बिजली बंद हो गई। पूरे क्षेत्रों में करीब शाम को 6 बजे से 7 बजे तक बिजली बंद रही है। 220 सब स्टेशन से सप्लाई बहाल होने के बाद सभी जगहों की बिजली की आपूर्ति शुरु हो सकी। साउथ डिवीजन के कार्यपालन अभियंता अभिषेक विश्वकर्मा ने बताया कि 220 से सप्लाई बाधित होने कारण 33 केवी की सबस्टेशनों की सप्लाई प्रभावित हुई थी।

बदनावर से टिमरवानी तक नया हाई-वे बनाया जाएगा, जो सीधे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे से जुड़ेगा

इंदौर दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे( Delhi-Mumbai Expressway) से इंदौर भी जुड़ने जा रहा है। पिछले दिनों बदनावर आए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इंदौर को इस हाई-वे से जोड़ने का ऐलान किया था। इसके बाद एनएचएआइ इसकी डीपीआर बनाने में जुटा है। एनएचएआइ के प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुमेश बांझल ने बताया कि इंदौर का इंदौर-अहमदाबाद हाई-वे से घाटा बिल्लौद, लेबड़ होते हुए बदनावर से जुड़ाव हो जाएगा। बदनावर से टिमरवानी तक नया हाई-वे बनाया जाएगा, जो सीधे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे से जुड़ेगा। इंदौर-अहमदाबाद रोड के अलावा उज्जैन रोड से भी नई सड़क के जरिए जुड़ा जा सकता है। इसके लिए तीन हजार करोड़ में करीब 90 किमी की फोरलेन सड़क बनाई जाएगी। अभी डीपीआर बनाई जा रही है। साथ ही इसे नेशनल हाई-वे का दर्जा देने पर भी काम किया जा रहा है। इसके बाद जमीन अधिग्रहण और टेंडर की प्रक्रिया की जाएगी। काम शुरू होने में करीब डेढ़ साल लगेंगे। दिल्ली-मुंबई की दूरी घटेगी इंदौर से मुंबई और दिल्ली जाने के लिए वर्तमान रूट के अलावा दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे(Delhi-Mumbai Expressway) से जुड़ने पर वाहनों की बड़े शहरों से आवाजाही आसान हो सकेगी। दूरी भी घटेगी।

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