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जन अभियान परिषद के सीएम सीएलडीपी के छात्रों ने डॉ. भीमराव अम्बेडकर के योगदान को किया याद

शहडोल    विकासखंड बुढार में डॉ भीमराव अंबेडकर जी की जयंती जन अभियान परिषद के जिला समन्वयक विवेक पांडे,  शिक्षक श्री शिवेंद्र द्विवेदी की उपस्थिति में मनाया गया तथा डॉ. भीमराव अंबेडकर जी के जीवन के बारे में प्रकाश डाला गया। इस अवसर पर मीनू जैन, मेंटर पूर्णिमा मुखर्जी, चंद्र शेखर वर्मा, कैलाश पाण्डेय, दीप्ति पाण्डेय, आनन्द यादव,  गणमान्य नागरिक व बी एस डब्लू, एम एस डब्लू के छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।

वन परिक्षेत्र चितरंगी के जंगलों में लगी भीषड़

वन परिक्षेत्र चितरंगी के जंगलों में लगी भीषड़ वन संपदा की सुरक्षा करने  कि आखिर किसकी जिम्मेदारी ‌? चितरंगी वन परिक्षेत्र चितरंगी के कक्ष क्रमांक आर 12 बगदरा कला के जंगल मे 24 अप्रैल 2025 को आग लगने की सूचना प्राप्त हुई। बीट प्रभारी सुरेश प्रजापती ने मौके से पहुच कर अपने चौकीदार एवं ग्रामीणों के सहयोग से इस तपती धूप में आग को बुझाने केलिए कड़ी मेहनत किया । लेकिन गर्मियों में पेड़ो के पत्ते सभी झड़ जाते है जंगलो में खड़पतवार होने से हवाओ में आग फैलने में अधिक मौका रहता है। केलिन सभी के सूझबूझ से खड़पतवार की कटिंग कर आग पर काबू पाया गया। ग्रामीणों द्वारा आग को बुझाने में अपनी एक अहम जिम्मेदारी को दिखाया इसलिए बहुत जल्द ही विकराल रूप धारण किया आग को नियंत्रित कर लिया गया। स्थल से लौटते ही आग बेकाबू हो गई और बगदरा कला के जंगल से बढ़ कर चितरंगी अधियारी तक पहुंच गई है आंधी तूफान आग को बढ़ावा देने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहा हैं। वन परिक्षेत्र अधिकारी रवि शेखर सिंह ने इस घटना पर नज़र बनाये रखने और उचित मार्गदर्शन करते रहे। अंततः एक तरफ सफलता हासिल हुई। और दूसरे दिन वही आग चितरंगी पहुंच गई श्री सिंह ने आम जन मानस से अपील किया हैं कि वन संपदा से जसमे सब कुछ मिलता है। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण ऑक्सीजन मिलती है जो जीवन उसके बैगर एक पल जिन मुश्किल होता है। इसलिए सभी आम जन मानस से मेरी अपील हैं कि वन सुरक्षा अपनी नैतिक जिम्मेदारी है। अपने खुद के फायदे के लिए वन को छति नही पहुचाये। चितरंगी तहसील जनपद मुख्यालय होने के बावजूद एक भी फायर ब्रिगेड नहीं है। जंगल के आलावा किसानों की फसलें, घर,वाहन अनेकों प्रकार की आगजनी होती रहती है। शासन प्रशासन से क्षेत्रीयजनों की ओर से मांग की जाती है की फायर ब्रिगेड की ब्यवस्था कराई जाय जिससे जान माल की सुरक्षा हो सके।

एवीजीसी-एक्सआर क्षेत्र में निवेश की अपार संभावनाएं : एसीएस श्री दुबे

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विजन को साकार करते हुए प्रदेश में आईटी और संबंधित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा पहली सेक्टर आधारित “टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव” का आयोजन किया जा रहा है। अपर मुख्य सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग श्री संजय दुबे ने “मध्यप्रदेश के उभरते एवीजीसी- एक्सआर (एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग,कॉमिक्स और एक्सटेंडेड रियलिटी) ईकोसिस्टम” विषय पर राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस- 3 को ब्रिलियेंट कन्वेशन सेंटर, इंदौर में संबोधित किया। उन्होंने एवीजीसी-एक्सआर क्षेत्र के उद्योपतियों ने इस क्षेत्र में मध्यप्रदेश की संभावनाओं/ निवेश पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि एवीजीसी-एक्सआर क्षेत्र में मध्यप्रदेश में अपार संभावनाएं हैं। राज्य सरकार इस क्षेत्र में निवेश और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। एसीएस श्री दुबे ने बताया कि प्रदेश में इस उद्योग के विकास के लिए अनुकूल माहौल हैं। प्रोजेक्ट डायरेक्टर एमपीएसईडीसी श्री गुरु प्रसाद, श्री आशीष कुलकर्णी, संस्थापक, पुन्नरीयुग आर्ट विजन प्राइवेट लिमिटेड, श्री मनीष राजोरिया, पर्पल टर्टल के सह-निर्माता, श्री रेन चिलका, संस्थापक – ग्रीन गोल्ड एनीमेशन प्राइवेट लिमिटेड सहित कई उद्योगपति/निवेशक उपस्थित थे। एसीएस श्री दुबे ने कहा कि 4 नई नीतियों के लिए गाइडलाइंस का अनावरण मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में कॉन्क्लेव के दौरान किया जाएगा। एसीएस श्री दुबे ने जानकारी दी कि जीआईएस- 2025 के दौरान की गई राज्य सरकार की प्रतिबद्धताएं अब धरातल पर उतरने लगी हैं। कई नई पहलें भी आज साकार होने जा रही हैं। आज ‘नो-क्वेरी पोर्टल’ भी लॉन्च किया गया है, जहां आवेदक बिना भौतिक दस्तावेज प्रस्तुत किए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं और 30 दिनों में जवाब प्राप्त कर सकते हैं। एसीएस श्री दुबे कहा राज्य में एवीजीसी क्षेत्र के लिए 4 उन्नत प्रयोगशालाएँ स्थापित करने और एक विशेष मीडिया पार्क बनाने की भी योजना है। एसीएस श्री दुबे ने बताया कि राज्य में प्रतिभाशाली युवाओं की बड़ी संख्या है, जो एवीजीसी सेक्टर में राष्ट्रीय नेतृत्व करने की ओर अग्रसर हैं। उन्होंने सभी उद्योगपतियों, निवेशकों को ‘मध्यप्रदेश टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव- 2025’ में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया।  

PM मोदी के नेतृत्व में स्वदेशी और आत्मनिर्भरता का विचार पूरे देश में तेज़ी से फैल रहा है, जो अत्यंत गर्व की बात : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

समाज मेक इन इंडिया और मेड इन इंडिया को बढ़ावा दे: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि स्वदेशी का भाव भारत की आत्मा में रचा-बसा PM मोदी के नेतृत्व में स्वदेशी और आत्मनिर्भरता का विचार पूरे देश में तेज़ी से फैल रहा है, जो अत्यंत गर्व की बात : मुख्यमंत्री डॉ. यादव इंदौर लाल बाग में स्वदेशी मेले का समापन समारोह संपन्न इंदौर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि स्वदेशी का भाव भारत की आत्मा में रचा-बसा है। वर्षों पूर्व शुरू हुई स्वदेशी जागृति आज ‘मेक इन इंडिया’ और ‘मेड इन इंडिया’ जैसे अभियानों के रूप में देश को आत्मनिर्भर बनाने का सशक्त माध्यम बन रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में स्वदेशी और आत्मनिर्भरता का विचार पूरे देश में तेज़ी से फैल रहा है, जो अत्यंत गर्व की बात है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव  लालबाग परिसर में स्वदेशी जागरण मंच द्वारा आयोजित स्वदेशी मेले के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत ने समय-समय पर अनेक चुनौतियों का सामना किया, लेकिन स्वावलंबन और स्वदेशी की भावना कभी क्षीण नहीं हुई। हमें इस भावना को और सशक्त बनाना है ताकि भारत हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोकमाता अहिल्याबाई होलकर का श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने महेश्वर जैसे स्थान पर स्थानीय कारीगरी और वस्त्र निर्माण को प्रोत्साहित कर स्वदेशी विचार को नई ऊंचाइयों तक पहुँचाया। समारोह में नगरीय प्रशासन एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, सांसद शंकर लालवानी, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, विधायक श्रीमती मालिनी गौड़, रमेश मेंदोला, गोलू शुक्ला, श्रवण चावड़ा, सुमित मिश्रा, स्वदेशी मेला प्रमुख योगेश मेहता एवं सिख समाज के बाबा तेजा सिंह सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित थे। समारोह में सिकल सेल बीमारी के प्रति जागरूकता हेतु एक पोस्टर का विमोचन भी किया गया। विभिन्न संस्थाओं द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. यादव का सम्मान भी किया गया।  

स्लीपर बसों में रोज क्षमता से ज्यादा ढोया जा रहा वजन, नहीं हो रही कार्रवाई

 इंदौर हाईवे पर रोज ऐसी यात्री बसें देखी जा सकती हैं, जिनमें सीटिंग और स्लीपर व्यवस्था के साथ बस की छत पर भारी मात्रा में सामान लदा होता है। इससे दुर्घटना की आशंका होती है। मगर अब ओवरलोडेड बसों का यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है। सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल हुई है, जिसमें पूरे देश में ओवरलोडेड यात्री बसों का मुद्दा उठाया गया है। कहा गया है कि ओवरलोडेड यात्री बसें न सिर्फ लोगों के जीवन के लिए गंभीर खतरा हैं, बल्कि ये पर्यावरण को भी प्रदूषित करती हैं। जीएसटी छुपाने से राजस्व का भी नुकसान बसों पर लदे सामान का जीएसटी छुपाने से राजस्व का भी नुकसान होता है। यह याचिका वकील संगम लाल पांडेय ने दाखिल की है। इसमें केंद्र और सभी राज्यों को पक्षकार बनाया गया है। इंदौर से अन्य शहरों और राज्यों तक जाने वाली 400 स्लीपर बसों में निर्धारित क्षमता से अधिक वजन भरा जा रहा है। केबिन में भर देते हैं, 40 से 50 टन वजन बसों की छत और नीचे केबिन में 40 से 45 टन तक वजन भर दिया जाता है। इससे यात्रियों की जान भी जोखिम में रहती है, लेकिन परिवहन और यातायात विभाग की सुस्ती के कारण इस पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। बसों पर कार्रवाई नहीं होती शहर की सड़कों से ये बसें खुलेआम निकलती हैं और गंतव्य तक पहुंचती हैं, लेकिन कहीं भी कार्रवाई नहीं होती है। प्रदेश की वाणिज्यिक राजधानी होने से इंदौर से अन्य राज्यों तक बड़ी मात्रा में सामान भेजा जाता है। यह ट्रांसपोर्ट की अपेक्षा स्लीपर बसों से पहुंचा रहे हैं। महाराष्ट्र, राजस्थान और यूपी जाने वाली बसों में भरते हैं सामान इंदौर शहर से प्रतिदिन 200 स्लीपर बसें रवाना होती हैं और 200 आती हैं। इनमें टनों वजन भर दिया जाता है। इंदौर से सर्वाधिक स्लीपर बसें महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान जाती हैं। सूत्रों का कहना है उप्र की तरफ जाने वाली बसों में सर्वाधिक सामान भरा जाता है। काटन, किराना, मशीनरी, प्याज आदि का बड़ी मात्रा में परिवहन स्लीपर बसों से किया जाता है। वहीं महंगे आइटम और जल्दी पहुंचने वाले सामान भी इन्हीं से पहुंचाया जा रहा है। सीट के नीचे बना रखे हैं केबिन अधिकांश स्लीपर बसों में सीट के नीचे बड़े केबिन बना रखे हैं। इनमें ठूस-ठूस कर लगेज भर देते हैं। बस की छत पर भी सामान रखा जाता है। कई बसें तो यात्रियों से ज्यादा लगेज ढोती हैं। लगेज बस संचालकों की कमाई का हिस्सा बन चुका है।

डॉ. अंबेडकर ने देश में समतामूलक समाज निर्माण के लिए गुरू की भूमिका निभाई: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने देश में समतामूलक समाज के निर्माण के लिए गुरू की भूमिका निभाई और देश की आजादी को अमर, अखंड और अक्षुण्ण रखने का आधार बनाया। एक हजार साल की गुलामी के दौर से गुजरे देश में, गुलामी के कारणों को खोजने और उन कारणों का प्रभावी समाधान देने में बाबा साहेब का महत्वपूर्ण योगदान है। आरक्षण की व्यवस्था को संवैधानिक आधार प्रदान कर डॉ अंबेडकर ने देश में समानता के भाव का विस्तार किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव, डॉ. अंबेडकर यूथ कॉन्क्लेव में श्यामला हिल्स स्थित राज्य संग्रहालय में आयोजित डॉ. भीमराव अंबेडकर सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर सांसद वी.डी. शर्मा, सांसद देवास महेंद्र सिंह सोलंकी, विधायक भगवानदास सबनानी उपस्थित थे। कार्यक्रम के आरंभ में मुख्यमंत्री डॉ. यादव को डिक्की के मध्यप्रदेश चैप्टर प्रमुख अनिल सरवैया ने सोशल जस्टिस पत्र की प्रति भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को स्मृति चिन्ह भी भेंट किया गया। मुदित शैजवार ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि डॉ. अंबेडकर द्वारा स्थापित व्यवस्था के परिणामस्वरूप ही देश में सभी वर्गों को प्रगति के समान अवसर मिले। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि किसान-मजदूर सहित अन्य कठिन और संर्घषपूर्ण परिस्थिति में रह रहे परिवारों से आए व्यक्तियों को देश का नेतृत्व करने सहित महत्वपूर्ण पदों से व्यवस्था संचालन के अवसर प्राप्त हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि डॉ. अंबेडकर के विचारों की महत्ता को स्वीकारते हुए उनकी जन्म स्थली महू पर विश्वविद्यालय स्थापित किया गया। प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर नई शिक्षा नीति में डॉ. अंबेडकर को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है और उनके विचारों पर शोध को प्रोत्साहित किया जा रहा है। कार्यक्रम में सांसद वी.डी. शर्मा ने कहा कि सम्पूर्ण भारत को एक सूत्र में बांधने का कार्य बाबा साहेब अंबेडकर ने किया। प्रधानमंत्री मोदी उनके विकसित भारत के संकल्प का क्रियान्वयन कर रहे हैं। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित युवाओं से बाबा साहेब के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने और उनके विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में योगदान देने का आव्हान किया।

हमारे देश की पहचान सिंधु घाटी से जुड़ी है: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारे देश की पहचान सिंधु घाटी सभ्यता और सिंधु नदी से जुड़ी है। प्राचीन काल में विकसित सिंधु घाटी सभ्यता आज भी पूरे देश को गौरवान्वित करती है। सम्राट दाहिर सेन का अपनी धर्म और संस्कृति को बचाने के लिए संघर्ष आज भी हमें प्रेरणा और साहस प्रदान करता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश, धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए समर्पित और प्रतिबद्ध हैं। भोपाल, संत हिरदाराम की पुण्य भूमि है, संत परम्परा के अनुसार हम “जियो और जीने दो” के सिद्धांत में विश्वास करते हुए प्राणी मात्र से प्रेम के भाव का व्यवहार में भी निवर्हन करते हैं। सिंधी समाज ने इन मूल्यों का पालन करते हुए अपने धर्म और संस्कृति की सरक्षा के लिए अपना घर-परिवार और व्यापार छोड़ा। संघर्ष और चुनौतियों का सामना करते हुए अपनी कर्मठता और आत्मविश्वास से उन्होंने स्वयं को पुन: स्थापित भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सिंधु भवन में आयोजित चेतीचांद महोत्सव एवं प्रतिभा सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विधायक भगवान दास सबनानी ने की। इस अवसर पर मध्यप्रदेश सिन्धु भवन ट्रस्ट के पदाधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अपनी क्षमता, योग्यता और निरंतर मेहनत से सिंधी समाज ने व्यापार और उद्योग जगत में कई उपलब्धियां अर्जित की हैं। राज्य सरकार प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों और स्थानीय स्तर पर उद्यमिता के विस्तार के लिए प्रतिबद्ध है, और इस दिशा में निरंतर हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। उद्योग स्थापना और व्यापारिक गतिविधियों के संचालन के लिए नीतियों और प्रकियाओं को सरल और सुगम किया गया है। प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए उद्योगों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। व्यापार और उद्योग रोजगार उपलब्ध कराने का प्रमुख माध्यम है। अन्य राज्यों तथा विदेश से भी निवेश के लिए उद्योगपतियों और व्यापारियों को आमंत्रित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंधी समाज के बंधुओं से प्रदेश में व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार की पहल करने का आव्हान करते हुए कहा कि राज्य सरकार इस दिशा में हर संभव सहयोग के लिए तत्पर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से विधायक भगवानदास सबनानी ने राजा दाहिर सेन, संत कंवर दास और शहीद हेमू कालानी के प्रसंगों को शालेय स्तर पर पाठ्यक्रम में शामिल करने, प्रदेश के सिंधी समाज की बहुलता वाले शहरों में शहीद हेमू कालानी की प्रतिमा स्थापित करने, सिंधी संग्रहालय के लिए भूमि उपलब्ध कराने और सिंधी अकादमी का बजट बढ़ाने का आग्रह किया।

अगले आठ दिनों में प्रदेश के विभिन्न जिलों में लगेंगे उन्नत कृषि पर केंद्रित मेले: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में अगले 8 दिनों में उन्नत कृषि पर केंद्रित मेले आयोजित किए जाएंगे। किसानों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से यह मेले उन्नत तकनीक और बीज, आधुनिकतम उपकरणों व अन्य संसाधनों, शासन की योजनाओं की जानकारी के साथ कृषि उद्यानिकी आदि के बेहतर प्रबंधन पर केंद्रित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों से सौर पंप संचालन के लिए कुसुम सी योजना का अधिक से अधिक लाभ लेने का आहवान भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया को जारी संदेश के माध्यम से यह अपील की। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि वर्तमान में बिजली के बिना खेती संभव नहीं है। राज्य सरकार कृषकों को बिजली में आत्मनिर्भर करने जा रही है। किसान अपनी बिजली स्वयं बनाएं, इस उद्देश्य से कुसुम सी योजना का व्यापक क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा। किसानों को बिजली सब्सिडी के माध्यम से सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। यह एक तरह से किसान के जीवन में सरकार की ओर से बड़ी मदद होती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि पंपों को सौर ऊर्जा से चलाने के लिए सौर पंप स्थापित करने में किसानों को सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। सौर पंप की कीमत की दस प्रतिशत राशि से बुकिंग के लिए पंजीयन खोला गया है। प्रदेश में तीन हॉर्स पॉवर तक के सौर पंपों का पंजीयन आरंभ किया गया है। इसी प्रकार 5 लाख रुपए तक के पंप के लिए किसान से मात्र 50 हजार रुपए लेकर बाकी 4 लाख 50 हजार रुपए की सरकार द्वारा गारंटी लेकर किसानों को पंप उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार इस योजना में लगभग एक लाख किसानों का पंजीयन करने जा रही है। पूर्व में भी कृषकों द्वारा योजना में पंजीयन कराया गया था। पूर्व में हुए पंजीयन के प्रकरणों में पहले पंप उपलब्ध कराए जाएंगे। उसके बाद नवीन पंजीकृत कृषकों को पंप उपलब्ध होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस योजना से किसान बिजली के मामले में आत्मनिर्भर होंगे और उनकी प्रगति के द्वार खुलेंगे। किसानों की बेहतरी के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है।  

हमारी सरकार कमजोर वर्गों को, स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध करवाने के लिए दृढ़-संकल्पित: उप मुख्यमंत्री देवड़ा

भोपाल उपमुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि हमारी सरकार समाज के वंचित और कमजोर वर्गों को, उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध करवाने के लिए दृढ़-संकल्पित है। श्री देवड़ा आज इंडियन मेडिकल एसोसिएशन द्वारा मंदसौर के कुशाभाऊ ठाकरे ऑडिटोरियम में आयोजित चिकित्सा सम्मेलन “दशपुरकॉन 2025” में सहभागिता कर उपस्थित प्रबुद्ध नागरिकों व सम्माननीय चिकित्सकों को संबोधित कर रहे थे। उपमुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि हमारी सरकार ने मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के व्यापक विस्तार, चिकित्सा शिक्षा में गुणात्मक सुधार, तकनीकी नवाचारों के समावेशन एवं दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की पहुँच सुनिश्चित किया है। ‘सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय’ के भाव के अनुरूप हमारी सरकार का यह अटल एवं दृढ़ संकल्प है कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक, विशेषकर समाज के वंचित और कमजोर वर्गों को उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध करवाई जाएँ। इससे न केवल स्वस्थ मध्यप्रदेश का निर्माण होगा, अपितु एक समृद्ध, सशक्त और विकसित मध्यप्रदेश की परिकल्पना भी साकार होगी। इस अवसर पर सांसद श्री सुधीर गुप्ता, राज्यसभा सांसद श्री बंशीलाल गुर्जर, पूर्व मंत्री श्री कैलाश चावला सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, चिकित्सक एवं नागरिकगण उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री यादव ने कहा- मप्र सुशासन के लिए जाना जाता है, इसलिए यहां अपराध और अपराधी के लिए कोई जगह नहीं

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सुशासन के लिए जाना जाता है, इसलिए यहां अपराध और अपराधी के लिए कोई जगह नहीं है। जो अपराध करेगा उसे दण्ड मिलेगा, हमारी सरकार ने प्रदेश की धरती पर किसी प्रकार के जिहाद या लव जिहाद की अनुमति नहीं दी है। जो हमारी धरती पर यह करता पाया जाएगा उसे छोडेंगे नहीं, वह राज्य के अंदर हो या राज्य से बाहर भागा हो, हमारी पुलिस उसे हर जगह से पकड़ कर लाएगी। यह हमारा संकल्प है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया को जारी संदेश में यह बात कही।  

मध्य प्रदेश में गर्मी के बीच बारिश का दौर, प्रदेश के पूर्वी हिस्से में अगले 4 दिन बारिश और ओले का अलर्ट

भोपाल मध्य प्रदेश के मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है। तेज गर्मी के बीच कुछ जिलों में बारिश का दौर शुरू हो गया है। पूर्वी मध्य प्रदेश में अगले 4 दिन तक मौसम बदला रहेगा। कई क्षेत्रों में गर्मी का भी असर देखने को मिलेगा। मध्य प्रदेश के मौसम में अचानक से बदलाव देखने को मिल रहा है अलग-अलग स्थान पर बनी तीन मौसम प्रणालियों के असर से अरब सागर में नमी आने का सिलसिला शुरू हो गया है। तेज गर्मी के बीच मध्यप्रदेश के पूर्वी हिस्से यानी, जबलपुर, रीवा और शहडोल संभाग में अगले 4 दिन बारिश होगी। कुछ जिलों में ओले भी गिरेंगे। वहीं, ग्वालियर-चंबल संभाग में मिला-जुला असर देखने को मिलेगा। यहां बारिश भी होगी और तेज गर्मी भी पड़ेगी। इस दौरान 40 से 50 किलो मीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से आंधी भी चल सकती है। इंदौर, भोपाल-उज्जैन में पारा 40 डिग्री के पार ही रहेगा। मध्य प्रदेश में दो तरह के मौसम दिखे  इससे पहले शनिवार को प्रदेश में मौसम के दो रंग देखने को मिले। रात में भोपाल, हरदा, देवास, सीहोर, रायसेन और नर्मदापुरम में हल्की बारिश हुई, जबकि कई जिलों में तेज आंधी भी चली। भोपाल में हवा की रफ्तार 50Km, सीहोर में 47Km और हरदा-पचमढ़ी में 30Km प्रतिघंटा रही। वहीं, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, खंडवा, बुरहानपुर, नरसिंहपुर, दमोह, सागर, कटनी, पन्ना, मैहर, उमरिया, सीधी, शहडोल और रीवा जिलों में हल्की बारिश का दौर रहा। प्रदेश में शनिवार को आंधी, बारिश के दौर के बीच कई शहरों में गर्मी के तेवर भी देखने को मिले। ग्वालियर, खजुराहो और नौगांव में पारा 43 डिग्री के पार रहा। मौसम विभाग के अनुसार, खजुराहो सबसे गर्म रहा। यहां तापमान 43.8 डिग्री रहा। ग्वालियर में 43.6 डिग्री और नौगांव में 43 डिग्री दर्ज किया गया। भोपाल, उज्जैन, गुना, शिवपुरी, खरगोन, रतलाम, टीकमगढ़, खंडवा, नरसिंहपुर, बैतूल, शाजापुर, मंडला, रीवा, धार, मलाजखंड, रायसेन, सतना और दमोह में पारा 42.4 डिग्री से 40 डिग्री के बीच रहा। वहीं, बारिश की वजह से कई शहरों में पारा लुढ़क गया। इकलौता हिल स्टेशन पचमढ़ी सबसे ठंडा रहा। यहां पारा 33.4 डिग्री दर्ज किया गया। उमरिया में 37.1 डिग्री, जबलपुर-सीधी में 37.8 डिग्री, नर्मदापुरम-सिवनी में 38.2 डिग्री, इंदौर-सागर में 39.7 डिग्री सेल्सियस रहा। हल्की बारिश होने का अनुमान मौसम विभाग के सीनियर वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया, अगले चार दिन तक प्रदेश में हल्की बारिश और गरज-चमक का अनुमान जताया है। कुछ जगहों पर लू भी चल सकती है। वहीं, गर्मी का असर भी देखने को मिलेगा। 28 अप्रैल : सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर,उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा में हल्की बारिश हो सकती है। श्योपुर, नीमच, मंदसौर, रतलाम और झाबुआ में लू चल सकती है। 29 अप्रैल : शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है। प्रदेश के बाकी हिस्से में गर्मी का असर तेज रहेगा।  

भोपाल शहर में इन दिनों स्वच्छता सर्वेक्षण-2024 के दिल्ली से आई टीम शहर को कोने कोने में पहुंच रही, सर्वे अंतिम चरण में पहुंचा

भोपाल भोपाल में स्वच्छता सर्वेक्षण-2024 के दिल्ली से आई टीम शहर को कोने कोने में पहुंच रही है। जानकारी के मुताबिक सर्वेक्षण का काम अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है।  21 में से 15 नगर निगम जोन में सर्वेक्षण केवल आठ दिनों में पूरा हो चुका है। राजधानी भोपाल शहर में इन दिनों स्वच्छता सर्वेक्षण-2024 के दिल्ली से आई टीम शहर को कोने कोने में पहुंच रही है। जानकारी के मुताबिक सर्वेक्षण का काम अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है।  21 में से 15 नगर निगम जोन में सर्वेक्षण केवल आठ दिनों में पूरा हो चुका है। दिल्ली से आई एक टीम कचरा मुक्त शहर (जीएफसी) और खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ)जल मानकों सहित विभिन्न स्वच्छता मापदंडों का गहन निरीक्षण कर रही है, जो कुल 12,500 अंकों में से 2,500 का महत्वपूर्ण भार रखते हैं। इन जोनो में पहुंच चुकी है टीम अब तक जोन 1, 2, 4 और 17 का तीन-तीन दिनों में सर्वेक्षण किया गया, जबकि जोन 6, 11 और 12 का एक दिवसीय निरीक्षण किया गया। जोन 8, 9, 18 और 19 को दो दिनों में कवर किया गया।  शुक्रवार को जोन 1, 2, 17 और 18 में विस्तृत निरीक्षण किया गया, जिसमें जोन 2, 17 और 18 में सर्वेक्षण पूरा हो गया। टीम ने शनिवार को जोन 1 में अपना निरीक्षण जारी रखा, जो बैरागढ़ से लालघाटी तक फैला हुआ है, और साथ ही साथ शेष 10 जोनों में सर्वेक्षण शुरू किया। टीम इन बिंदुओं पर कर रही फोकस दिल्ली से आई टीम निरीक्षण के तहत प्रमुख क्षेत्रों में सार्वजनिक शौचालय, उद्यान, नालियां, सीवर और सार्वजनिक प्रतिक्रिया शामिल हैं। कुल 218 सार्वजनिक शौचालयों का मूल्यांकन किया गया, साथ ही यह भी जांच की गई कि कचरा संग्रहण सेवाएं प्रभावी रूप से चल रही हैं या नहीं। अलर्ट पर है निगम की टीम भोपाल नगर निगम (बीएमसी) के अधिकारियों के अनुसार सर्वेक्षण टीम से अगले पांच दिनों के भीतर शेष जोनों में निरीक्षण पूरा करने की उम्मीद है। जनकारी के लिए बतादें कि जब से दिल्ली की टीम भोपाल पहुंची है। भोपाल नगर निगम के ्अधिकारी और कर्मचारी अलर्ट पर हैं। निगम कमिश्नर हरेन्द्र नरायण खुद इसकी निगरानी कर रहे हैं। विशेष क्षेत्रों के एएचओ अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय हो गए और फील्ड स्टॉफ को उनके बीट चार्ट के अनुसार हर समय ड्यूटी पर रहने के लिए कहा गया है।  

सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट उद्योग का अगला प्रमुख केंद्र बनेगा मध्यप्रदेश

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट उद्योग में एक बड़ा केंद्र बनने के लिए तैयार है। नवीन तकनीकी क्रांति में राज्य अग्रणी भूमिका निभाने और निवेश आकर्षित करने की ओर अग्रसर है। “एमपी टेक ग्रोथ कॉनक्लेव-2025” में अपर मुख्य सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी श्री संजय दुबे ने रविवार को “मध्यप्रदेश – सेमीकंडक्टर और ईएसडीएम के लिए अगला गंतव्य” विषय पर आयोजित राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस-4 को ब्रिलियंट कंवेंशन सेंटर, इंदौर में संबोधित किया। उन्होंने राज्य की सेमीकंडक्टर नीति एवं प्रदेश सरकार द्वारा निवेशकों को दी जाने वाली वित्तीय एवं गैर वित्तीय सुविधाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उद्योगपतियों/निवेशकों ने अपने विचार और सुझाव रखे। इसमें  प्रोजेक्ट डायरेक्टर एमपीएसईडीसी श्री गुरु प्रसाद, डॉ. मणि मधुकर, प्रोग्राम लीड, सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम – आईबीएम इंडिया, श्री अभिषेक कुमार, प्रबंध निदेशक (एमडी ) केदारा सहित उद्योगपति/ निवेशक उपस्थित रहे। एसीएस श्री दुबे ने कहा कि टियर-2 शहर जैसे इंदौर, भोपाल का तेजी से विकास राज्य की तकनीकी स्थिति को मजबूत कर रहा है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की विशेष भौगोलिक स्थिति, त्वरित स्वीकृतियाँ, आधुनिक आधारभूत संरचना और प्रगतिशील नीतियाँ तकनीकी विकास को गति दे रही हैं। साथ ही सेमीकंडक्टर कंपोनेंट निर्माण, इलेक्ट्रोनिक उत्पाद विकास और नवाचार और चिप डिजाइन कंपनियों सभी के लिए विशेष सुविधाएं राज्य में प्रदान की जा रही हैं। एसीएस श्री दुबे कहा कि राज्य सरकार आईटी पार्क, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (ईएमसी ), विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड ) और मजबूत स्टार्ट-अप संस्कृति के जरिये नवाचार को बढ़ावा दे रही है। कॉन्फ्रेंस में निवेशकों ने कहा कि सरकार की सेमीकंडक्टर नीति- 2025बहुत आकर्षक है। राज्य सरकार निवेशकों को सभी आवश्यक सुविधाएं प्रदान कर रही है। निवेशकों ने राज्य में सेमीकंडक्टर और संबंधित क्षेत्रों के उद्योगों को विकसित करने के लिए महत्पूर्ण सुझाव भी रखे।

मध्य प्रदेश में मातृ, शिशु मृत्यु दर नियंत्रण के लिए नियंत्रण के लिए कई प्रयोग किए जा रहे, रणनीति तैयार की

भोपाल प्रदेश में मातृ, शिशु मृत्यु दर नियंत्रण के लिए रविवार को भोपाल में अधुना फॉगसी प्रोजेक्ट के तहत विशेषज्ञों ने दिन भर चर्चा की और रणनीति तैयार की। सभी ने साथ मिल कर काम करने पर जोर दिया। मध्य प्रदेश में मातृ, शिशु मृत्यु दर नियंत्रण के लिए नियंत्रण के लिए कई प्रयोग किए जा रहे हैं। इसे लेकर रविवार को भोपाल में आयोजित अधुना फॉगसी प्रोजेक्ट के तहत विशेषज्ञों ने दिन भर चर्चा की और रणनीति तैयार की। इस दौरान एनएसएम की एमडी सीनियर आईएएस डॉ. सलोनी सिडाना ने कहा कि गर्भवती स्त्री, मां और शिशु के स्वास्थ्य बेहद संवेदनशील होता है। इनके बेहतर स्वास्थ्य और मृत्युदर को नियंत्रित करने के लिए हम सभी को एकजुट होकर काम करने की जरूरत है।  इस कार्यक्रम में प्रदेश भर से महिला रोग विशेषज्ञों के अलावा स्टाफ नर्सों की मौजूदगी भी रही। इस कार्यक्रम में 100 से भी ज्यादा स्वास्थ्य क्षेत्र के कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी सेक्टर साथ मिल कर करें काम डॉ. सलोनी सिडाना ने आगे कहा कि पब्लिक हेल्थ सेक्टर, प्राइवेट हेल्थ सेक्टर और सभी डॉक्टरों को मिलकर मातृ और शिशु स्वास्थ्य के लिए कार्य करना चाहिए, ताकि उनकी मृत्यु दर नियंत्रित हो सके। कार्यक्रम के दौरान डॉ. सलोनी सिडाना ने फ़ॉक्सी के अधुना प्रोजेक्ट की तारीफ करते हुए कहा कि यह एक अच्छा कदम है। हमीदिया अस्पताल की गायनेकोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ.शबाना सुल्ताना ने जानकारी देते हुए बताया कि सेंट्रल फॉक्सी के अधुना प्रॉजेक्ट के तहत यह आयोजन हुआ है। इस वर्कशॉप में मुख्य अतिथि के तौर पर एनएचएम मध्य प्रदेश की एमडी डॉ. सलोनी सिडाना उपस्थित रहीं। इस कार्यक्रम में एनएचएम में मातृत्व स्वास्थ्य की डायरेक्टर डॉ. अरुणा कुमार, जीएमसी भोपाल की डीन डॉ. कविता सिंह भी उपस्थित रहीं। उन्होंने बताया कि पहले सीपीडी सत्र  का आयोजन भोपाल ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटी के सहयोग से किया गया, जिसमें डॉ. आभा जैन (प्रेजिडेंट) और डॉ. प्रिया चित्तवार (सेक्रेटरी) एवं शबाना सुल्तान, मुदिता जैन (मास्टर ट्रेनर्स-अधुना), स्टेट कॉर्डिनेटर डॉ. रोजा ओलयाय का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। यह वर्कशॉप होटल एमपीटी लेक व्यू रेसीडेंसी में हुआ। क्या है फॉक्सी? देश में गायनेकोलोजिस्ट्स की सर्वोच्च संस्था फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक एण्ड गायनेकोलोजिकल सोसाइटीज़ ऑफ इंडिया (FOGSI)  है। FOGSI भारत में गायनेकोलोजिस्ट्स का प्रमुख संगठन है। 275 सदस्य सोसाइटियों और 43,011 से अधिक व्यक्तिगत सदस्यों के साथ यह देशभर में फैला सबसे बड़ा संगठन है। अधुना प्रोजेक्ट्स क्या है? FOGSI ने मातृ एवं नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य में सुधार लाने के लिए प्रोजेक्ट ‘अधुना’ लॉन्च किया है। यह प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, ओडिशा और बिहार में संचालित हो रहा है। ADHUNA के तहत 29 जिलों को शामिल किया गया हैं। भोपाल भी उसमें शामिल है।  

माधव टाइगर रिजर्व का जंगल लगातार आग की चपेट में आ रहा, वन्यजीवों पर मंडरा रहा खतरा, वन विभाग के बचाव के प्रयास जारी

शिवपुरी टाइगर रिजर्व के पूर्वी हिस्से में आग लगने से वहां रहने वाले तीन बाघों और दो शावकों सहित हजारों अन्य जंगली जानवरों की जान पर खतरा मंडरा रहा है। जंगल में हर दिन किसी न किसी हिस्से में आग लगने की घटनाएं सामने आ रही हैं शिवपुरी जिले में हाल ही में घोषित माधव टाइगर रिजर्व का जंगल लगातार आग की चपेट में आ रहा है। तेज गर्मी और सूखी झाड़ियों के कारण आग तेजी से फैल रही है, जिससे वन्यजीवों पर भी संकट गहरा गया है। शनिवार को सुरवाया और बल्लारपुर क्षेत्र के जंगलों में आग भड़क उठी, जो एक किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में फैल गई। बीते 15 दिन में टाइगर रिजर्व के सुरवाया, बल्लारपुर, भरकुली गेट, सुभाषपुरा और सतनवाड़ा क्षेत्र में कई बार आग लग चुकी है। लगातार हो रही घटनाओं से पार्क की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। बाघों समेत अन्य जानवर खतरे में टाइगर रिजर्व के पूर्वी हिस्से में आग लगने से वहां रहने वाले तीन बाघों और दो शावकों सहित हजारों अन्य जंगली जानवरों की जान पर खतरा मंडरा रहा है। जंगल में हर दिन किसी न किसी हिस्से में आग लगने की घटनाएं सामने आ रही हैं, लेकिन पार्क प्रबंधन आग पर काबू पाने में नाकाम नजर आ रहा है। बीडी-सिगरेट से फैली आग, वन विभाग के प्रयास जारी पार्क के रेंजर आर.के. दीक्षित ने बताया कि किसी ने पार्क की बाउंड्री के पास जलती हुई बीड़ी या सिगरेट फेंकी, जिससे आग भड़की। आग बुझाने के प्रयास जारी हैं, लेकिन तेज हवाओं और गर्मी के कारण आग पर पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सका है। पिछले एक महीने में माधव टाइगर रिजर्व के करीब दो दर्जन से ज्यादा स्थानों पर आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं। बावजूद इसके, वन विभाग आगजनी की घटनाओं को रोकने में असफल रहा है।  

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