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हनुमान जयंती के अवसर पर समारोह पर पथराव की घटना हुई थी अब इस मामले में गुना एसपी को हटाया

भोपाल गुना में हनुमान जयंती के अवसर पर 12 अप्रैल को निकले जुलूस में पथराव की घटना के एक सप्ताह बाद पुलिस अधीक्षक संजीव कुमार सिंह को हटा दिया गया है। उनकी जगह पुलिस उपायुक्त (आसूचना एवं सुरक्षा) नगरीय पुलिस इंदौर अंकित सोनी को गुना का नया एसपी बनाया गया है।     उल्लेखनीय है कि हनुमान जन्‍मोत्‍सव पर रात में मस्जिद के सामने से चल समारोह निकल रहा था।     इस दौरान समारोह पर पथराव की घटना हुई, जिससे क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी थी।     पुलिस ने एक वर्ग के युवाओं को गिरफ्तार किया तो महिलाओं ने विरोध में थाने पहुंचकर प्रदर्शन किया था।     यह भी सामने आया था कि वहां से चल समारोह निकालने की प्रशासन ने अनुमति नहीं दी थी।     इसके बाद भी निकाला गया। इसे पुलिस की विफलता के तौर पर देखा जा रहा है।  

सानौधा से हिंदू लड़की और मुस्लिम समाज का लड़का भागा था, गांव में फैल गया था तनाव, ग्वालियर स्टेशन पर पकड़ाया

सागर सानौधा से भागे युवक- युवती को ग्वालियर पुलिस ने ग्वालियर रेलवे स्टेशन से पकड़ लिया है। बीते रोज हिंदू लड़की और मुस्लिम समाज का लड़का भागा था। लड़की की एक दिन बाद बारात आने वाली थी, इसी बीच मुस्लिम समाज के लड़के के साथ भागने से गांव में तनाव का माहौल था। इसको लेकर तोड़फोड़ व आगजनी की घटनाएं भी हुईं। इसके बाद यहां पुलिस बल तैनात है। जानकारी के मुताबिक सागर एसपी विकास शाहवाल को लड़का-लड़की के ग्वालियर भागने की सूचना मिली थी। इसके बाद उन्होंने ग्वालियर एसएसपी से मदद मांगी थी, जिसके बाद पुलिस अलर्ट थी।   जैसे ही ट्रेन से उतरे, पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया दोनों शनिवार रात जैसे ही ट्रेन से उतरे पड़ाव थाना पुलिस ने उनको पकड़ लिया है। प्रेमी जोड़ा पकड़े जाने की सूचना सागर पुलिस को दे दी है। पड़ाव थाना प्रभारी आलोम परिहार ने बताया कि पुलिस कप्तान को सूचना मिली थी कि सागर से भागे युवक-युवती भोपाल के रास्ते ट्रेन से ग्वालियर आने वाले हैं। इसका पता चलते ही पुलिस की एक टीम स्टेशन पर तैनात कर दी गई। जैसे ही युवक-युवती यहां पहुंचे, पुलिस ने उन्हें निगरानी में ले लिया। पुलिस ने दोनों की जानकारी सागर पुलिस को दी है। सागर पुलिस ग्वालियर के लिए रवाना हो गई है। वहीं सानौधा गांव में अब शांति का माहौल है, लेकिन लोग लड़की को भगाने वाले आरोपित अनश पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि लड़की की एक दिन बाद बरात आना था। आरोपित ने लव जिहाद के तहत लड़की को फंसाया।गांववालों के मुताबिक इस तरह की उनके गांव में यह पांचवीं घटना है। आरेापित प्राचीन किले की जमीन पर अतिक्रमण किए हैं। परिवार के लोग अपराधिक गतिविधियों में लिप्त हैं। उन पर कार्रवाई होना चाहिए।

जालियों की आड़ में सरकारी जमीन पर बना ली थी मजारें, जालियों को हटाया गया तो मजार सभी को दिखाई दी

भोपाल भोपाल शहर के 1250 शासकीय आवासीय परिसर में स्थित मजारों को जालियों की आड़ में बनाया गया था। जब इन जालियों को हटाया गया तो मजार सभी को दिखाई देने लगी। इसकी शिकायत पहले भी टीटी नगर एसडीएम से हो चुकी थी, लेकिन प्रशासन ने इसकी जांच तक नहीं कराई। यह क्षेत्र वार्ड 31 में आता है। यहां की भाजपा पार्षद बृजुला संचान जब भ्रमण करने आई थी तो उनकी नजर मजारों पर गई थी। रहवासियों से पूछताछ करने के बाद उन्होंने भी एसडीएम अर्चना रावत शर्मा को इसकी शिकायत दर्ज कराई थी। भाजपा पार्षद बृजुला संचान ने बताया कि वह पिछले दिनों बांघबरी मंदिर क्षेत्र में प्रशासन के एक अभियान के तहत भ्रमण करने पहुंची थी।   जालियां लगी हुईं थी, जिन्हें हटाया गया तब मंदिर से पहले एक शासकीय आवासीय परिसर के पीछे खाली जगह पर मजारें दिखाईं दीं। इस पर उन्होंने आवास में रहने वाले परिवार से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि वे कुछ दिन पहले ही रहने आए हैं। इससे पहले दूसरा परिवार यहां निवास करता था, तब जालियां लगी हुईं थी, जिन्हें हटा दिया गया है। पार्षद ने एसडीएम से की मामले की शिकायत इतना ही नहीं रहने वाले परिवार के लोगों ने कहा कि शासकीय भूमि पर बनीं मजारों को लेकर प्रशासन जो भी निर्णय लेगा, इससे उनको किसी तरह की कोई आपत्ति नहीं है। इसके बाद पार्षद ने एसडीएम से मामले की शिकायत की थी। एसडीएम अर्चना रावत शर्मा ने बताया कि पार्षद की शिकायत पर ही जांच शुरू कराई थी। इसी बीच मंच ने भी शिकायत दर्ज करवा दी, लेकिन बाद में वह क्षेत्र कोलार तहसील का होना पता चला तो अब जांच वहीं से कराई जा रही है। शासकीय अवकाश होने से अटक गई मामले की जांच शासकीय परिसर में बनीं मजारों का मामला सामने आने के बाद कोलार एसडीएम रविशंकर राय ने जांच शुरू करवा दी है। इसको लेकर संपदा और पीडब्ल्यूडी दोनों से जवाब मांगा है। वहीं शनिवार और रविवार दो दिन शासकीय अवकाश होने से जांच अटक गई है। संपदा और पीडब्ल्यूडी से जवाब नहीं मिल पाया है कि आखिर शासकीय भूमि पर मजारें कब से बनी हैं और किसने बनाई हैं।

बीजेपी और कांग्रेस नेताओं के बीच विवाद में चिंटू चौकसे गिरफ्तार

इंदौर  मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में बीजेपी और कांग्रेस नेताओं के बीच विवाद के बाद मारपीट हो गई। मामले में नगर निगम नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। मामले में आठ लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई है। आट में से छह आरोपी फरार है। दरअसल बीजेपी कार्यकर्ता कपिल पाठक की शिकायत पर केस दर्ज किया गया था। गिरफ्तारी के बाद चिंटू चौकसे के समर्थकों ने थाने के बाहर जमकर नारेबाजी की। चिंटू चौकसे को गिरफ्तार कर एमवाय हॉस्पिटल में मेडिकल जांच के लिए ले जाया गया। बताया जाता है कि मारपीट के मामले में छह लोग अभी भी फरार है। पुलिस के मुताबिक लोहे की रोड से मारपीट की थी। पानी का टैंकर हटाने को लेकर नेताओं में विवाद हुआ था।

हमने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृढ़ संकल्प को ही कार्यसिद्धि का मंत्र बनाया: मुख्यमंत्री मोहन यादव

भोपाल मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि हमने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृढ़ संकल्प को ही कार्यसिद्धि का मंत्र बनाया है। उन्होंने देश के सर्वाँगीण विकास के लिए समाज के सभी वर्गों के एक साथ और एक समान सशक्तिकरण को आवश्यक बताया है। इस संकल्प की सिद्धि के लिए मध्यप्रदेश सरकार लगातार मिशन मोड में कार्य कर रही है। मिशन मोड में विकास पथ पर तेजी से आगे बढ़ने के लिये प्रदेश सरकार ने गरीब कल्याण मिशन, युवा शक्ति मिशन, किसान कल्याण मिशन और नारी सशक्तिकरण मिशन लागू किये हैं। सभी मिशनों को पूरा करने के लिए अलग-अलग रोड़ मैप तैयार कर प्रभावी क्रियान्वयन शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री यादव ने कहा है कि उन्हें प्रधानमंत्री मोदी के देश के सर्वांगीण विकास के संकल्प ने प्रेरित किया है। उन्होंने आशा व्यक्त की है कि समाज के सभी वर्गों के मिशन मोड में सशक्तिकरण से मध्यप्रदेश विकास की नई ऊचाइयों को स्पर्श करेगा। गरीब कल्याण का मिशन गरीब कल्याण मिशन का मुख्य उद्देश्य गरीबों के लिए सामाजिक सुरक्षा उपायों को मजबूत करना है, ताकि वंचित वर्ग को कठिन समय में आवश्यक सहायता मिल सके। इसके अतिरिक्त, मिशन इस वर्ग को रोजगार से संबंधित चुनौतियों से निपटने में सक्षम योजनाओं का लाभ दिलाएगा। आर्थिक रूप से पिछड़े, जरूरतमंदों को मिशन में वित्तीय सहायता प्रदान कर आर्थिक सशक्तिकरण में मदद करेगा। बुनियादी सेवाओं जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा और आवास तक पहुंच में सुधार किया जाएगा, जिससे गरीब परिवारों के जीवन स्तर में सुधार हो सकें। गरीब कल्याण मिशन, मध्यप्रदेश सरकार द्वारा शुरू की जाने वाली एक अभिनव पहल है, जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से पिछड़े समुदायों को सशक्त बनाना और यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजनाएं और आवश्यक सेवाएं उन तक सहजता से पहुंच सकें। युवा शक्ति का मिशन मुख्यमंत्री यादव को विश्वास है कि ‘स्वामी विवेकानंद युवा शक्ति मिशन’ प्रदेश के युवाओं के सशक्तिकरण का सक्सेस मंत्र सिद्ध होगा। युवाओं के प्रेरणा स्रोत स्वामी विवेकानंद की जयंती 12 जनवरी 2025 को लाँच किया गया यह मिशन युवा पीढ़ी को आधुनिकतम तकनीकों, उद्यमिता और खेल क्षेत्र में उच्च कौशल से सशक्त बनाएगा। यह मिशन से प्रदेश के युवाओं को बदलते दौर में स्वयं को विभिन्न प्रतिस्पर्धाओं के लिये सशक्त बनायेगा। इससे मिशन की परिणिति युवाओं के सफल एवं सक्षम नेतृत्व के गुणों से संपन्न बनने, ग्लोबल जॉब मार्केट का सशक्त प्रतिस्पर्धी बनने और नौकरी ढूंढ़ने की कतारों में लगे युवा के स्थान पर नौकरी देने वाला उद्यमी बनने में होगी। ‘युवा शक्ति मिशन’ के सफल क्रियान्वयन में आधुनिक तकनीक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। कौशल विकास के पाठ्यक्रम युवाओं को सहजता से उपलब्ध कराने और उसे सहजता से समझाने के लिए ऑनलाइन प्लेटफार्म लॉन्च किए गए हैं। इस फ्लेटफार्म की सुविधाएं ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के युवाओं को समान रूप से सुलभ होंगी। मिशन का लाभ प्रदेश के युवा बढ़-चढ़ कर ले सकें, इसके लिए सोशल-मीडिया के माध्यमों का भी प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। इससे युवाओं को मिशन से संबंधित जानकारी आसानी से उपलब्ध हो रही है और युवाओं में मिशन के प्रति जागरूकता और रुचि बढ़ रही है। किसान कल्याण के लिए मिशन कृषि और कृषक देश एवं प्रदेश की अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण आधार हैं। इसलिए मध्यप्रदेश की मंत्रि-परिषद ने 15 अप्रैल को कृषक कल्याण मिशन को हरी झंडी दे दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में इस मिशन का उद्देश्य है कि अन्नदाता समृद्ध हों और कृषि क्षेत्र में आर्थिक स्थिरता आए। इस मिशन का उद्देश्य फसल-विविधीकरण के साथ ही पशुपालन एवं मत्स्य पालन जैसे सहायक व्यवसायों को एकीकृत कर समावेशी कृषि को बढ़ावा देना है। मिशन में कृषि-आधारित उद्यमिता जैसे प्रगतिशील उपायों को वित्तीय सहायता और तकनीकी परामर्श देकर प्रोत्साहित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- हमने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दृढ़ संकल्प को ही कार्यसिद्धि का मंत्र बनाया

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने दृढ़ संकल्प को ही कार्यसिद्धि का मंत्र बनाया है। उन्होंने देश के सर्वाँगीण विकास के लिए समाज के सभी वर्गों के एक साथ और एक समान सशक्तिकरण को आवश्यक बताया है। इस संकल्प की सिद्धि के लिए मध्यप्रदेश सरकार लगातार मिशन मोड में कार्य कर रही है। मिशन मोड में विकास पथ पर तेजी से आगे बढ़ने के लिये प्रदेश सरकार ने गरीब कल्याण मिशन, युवा शक्ति मिशन, किसान कल्याण मिशन और नारी सशक्तिकरण मिशन लागू किये हैं। सभी मिशनों को पूरा करने के लिए अलग-अलग रोड़ मैप तैयार कर प्रभावी क्रियान्वयन शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि उन्हें प्रधानमंत्री श्री मोदी के देश के सर्वांगीण विकास के संकल्प ने प्रेरित किया है। उन्होंने आशा व्यक्त की है कि समाज के सभी वर्गों के मिशन मोड में सशक्तिकरण से मध्यप्रदेश विकास की नई ऊचाइयों को स्पर्श करेगा। गरीब कल्याण मिशन गरीब कल्याण मिशन का मुख्य उद्देश्य गरीबों के लिए सामाजिक सुरक्षा उपायों को मजबूत करना है, ताकि वंचित वर्ग को कठिन समय में आवश्यक सहायता मिल सके। इसके अतिरिक्त, मिशन इस वर्ग को रोजगार से संबंधित चुनौतियों से निपटने में सक्षम योजनाओं का लाभ दिलाएगा। आर्थिक रूप से पिछड़े, जरूरतमंदों को मिशन में वित्तीय सहायता प्रदान कर आर्थिक सशक्तिकरण में मदद करेगा। बुनियादी सेवाओं जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा और आवास तक पहुंच में सुधार किया जाएगा, जिससे गरीब परिवारों के जीवन स्तर में सुधार हो सकें। गरीब कल्याण मिशन, मध्यप्रदेश सरकार द्वारा शुरू की जाने वाली एक अभिनव पहल है, जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से पिछड़े समुदायों को सशक्त बनाना और यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजनाएं और आवश्यक सेवाएं उन तक सहजता से पहुंच सकें। युवा शक्ति मिशन मुख्यमंत्री डॉ. यादव को विश्वास है कि ‘स्वामी विवेकानंद युवा शक्ति मिशन’ प्रदेश के युवाओं के सशक्तिकरण का सक्सेस मंत्र सिद्ध होगा। युवाओं के प्रेरणा स्रोत स्वामी विवेकानंद की जयंती 12 जनवरी 2025 को लाँच किया गया यह मिशन युवा पीढ़ी को आधुनिकतम तकनीकों, उद्यमिता और खेल क्षेत्र में उच्च कौशल से सशक्त बनाएगा। यह मिशन से प्रदेश के युवाओं को बदलते दौर में स्वयं को विभिन्न प्रतिस्पर्धाओं के लिये सशक्त बनायेगा। इससे मिशन की परिणिति युवाओं के सफल एवं सक्षम नेतृत्व के गुणों से संपन्न बनने, ग्लोबल जॉब मार्केट का सशक्त प्रतिस्पर्धी बनने और नौकरी ढूंढ़ने की कतारों में लगे युवा के स्थान पर नौकरी देने वाला उद्यमी बनने में होगी। ‘युवा शक्ति मिशन’ के सफल क्रियान्वयन में आधुनिक तकनीक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। कौशल विकास के पाठ्यक्रम युवाओं को सहजता से उपलब्ध कराने और उसे सहजता से समझाने के लिए ऑनलाइन प्लेटफार्म लॉन्च किए गए हैं। इस फ्लेटफार्म की सुविधाएं ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के युवाओं को समान रूप से सुलभ होंगी। मिशन का लाभ प्रदेश के युवा बढ़-चढ़ कर ले सकें, इसके लिए सोशल-मीडिया के माध्यमों का भी प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। इससे युवाओं को मिशन से संबंधित जानकारी आसानी से उपलब्ध हो रही है और युवाओं में मिशन के प्रति जागरूकता और रुचि बढ़ रही है। किसान कल्याण मिशन कृषि और कृषक देश एवं प्रदेश की अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण आधार हैं। इसलिए मध्यप्रदेश की मंत्रि-परिषद ने 15 अप्रैल को कृषक कल्याण मिशन को हरी झंडी दे दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में इस मिशन का उद्देश्य है कि अन्नदाता समृद्ध हों और कृषि क्षेत्र में आर्थिक स्थिरता आए। इस मिशन का उद्देश्य फसल-विविधीकरण के साथ ही पशुपालन एवं मत्स्य पालन जैसे सहायक व्यवसायों को एकीकृत कर समावेशी कृषि को बढ़ावा देना है। मिशन में कृषि-आधारित उद्यमिता जैसे प्रगतिशील उपायों को वित्तीय सहायता और तकनीकी परामर्श देकर प्रोत्साहित किया जाएगा। मिशन के अंतर्गत जैविक खेती, पशुपालन, मत्स्य-पालन जैसे व्यवासायों का एकीकरण और उन्हें बाजारोन्मुखी बनाकर उपज की पहुंच बाजारों में सुनिश्चित करने के साथ ही कृषि-उद्यमिता को प्रोत्साहन पर जोर दिया जाएगा। मिशन किसानों को सीधे बाजारों से जोड़ने के लिए ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों और स्थानीय मेलों का भी आयोजन भी कर रहा है, जिससे उनकी उपज के लिए उचित मूल्य सुनिश्चित हो रहा है। किसानों का वित्तीय बोझ को कम करने के लिए मिशन के अंतर्गत बीज, उर्वरक और उपकरण खरीदने के लिए वित्तीय सहायता और अनुदान दिया जा रहा है। इससे कृषि लागत कम होंगी और आय में वृद्धि होगी। देवी अहिल्या नारी सशक्तिकरण मिशन पुण्य-श्लोका लोकमाता देवी अहिल्या बाई के 300वें जयंती वर्ष में उनकी प्रशासन-स्थली महेश्वर में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में”देवी अहिल्या बाई नारी सशक्तिकरण मिशन” का शुभारंभ किया गया। नारी सशक्तिकरण मिशन राज्य में मातृ-शक्ति की सामाजिक-आर्थिक स्थितियां सुधार कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। मिशन का उद्देश्य महिलाओं को पुरुषों के ही समान अवसर उपलब्ध करा कर प्रदेश में जेंडर इक्वलिटी को बढ़ावा देना है। मिशन के अंतर्गत नारी शिक्षा और कौशल के विकास के लिए उन्हें व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इससे रोजगार प्राप्त कर पाने के लिए नारी की सक्षमता और संभावनाएं बढ़ेंगी और उन्हें वित्तीय आत्मनिर्भरता प्राप्त होगी। मिशन महिला उद्यमिता को भी बढ़ावा देगा, उन्हें अपने व्यवसाय शुरू करने और उसके सुचारु संचालन के संसाधन, मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता प्रदान करेगा।

‘पीएमश्री’ एयर एंबुलेंस की सुविधा अब रात में भी मिल सकेगी, दो इंजन वाले हेलीकाॅप्टर का होगा उपयोग

भोपाल राज्य सरकार की पीएमश्री एयर एंबुलेंस सेवा में एक बड़ी सुविधा जुड़ने जा रही है। इसमें रोगियों को उपचार के लिए रात में भी बड़े अस्पताल में पहुंचाया जा सकेगा। इसके लिए दो इंजन वाले हेलीकाप्टर का उपयोग किया जाएगा, जो रात में भी उड़ सकेंगे। इस सुविधा के लिए सेवा देने वाली कंपनी और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के बीच सहमति बन चुकी है। टेंडर प्रक्रिया भी प्रांरभ हो गई है।   लगभग दो माह माह में सेवा प्रारंभ होने के आसार हैं। लगभग एक वर्ष में 60 लोगों को यह सुविधा मिली है, जिनमें 80 प्रतिशत आयुष्मान कार्डधारी हैं, जिन्हें निश्शुल्क सेवा मिली। आयुष्मान हितग्राहियों के अतिरिक्त अन्य लोग भी निर्धारित शुल्क देकर रात में इस सुविधा का लाभ ले सकेंगे। अभी गैर आयुष्मान हितग्राहियों को यह सुविधा लगभग दो लाख रुपये प्रति घंटे के हिसाब से मिल रही है। रात में हेलीकाप्टर सेवा के दरें अभी निर्धारित नहीं हुई हैं, पर पुरानी दरों की तुलना में इसमें थोड़ा-बहुत अंतर ही हो सकता है। आयुष्मान हितग्राहियों के लिए इसकी सुविधा निर्धारित 80 प्रकार ही आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मिल रही है। इसमें रोगी के लिए 50 लाख का दुर्घटना बीमा का प्रविधान भी है। ऐसी मिलती है सुविधा संभाग के अंदर रोगी के निशुल्क परिवहन के लिए जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की अनुशंसा पर जिला कलेक्टर संभाग के अंदर स्वीकृति प्रदान करते हैं। संभाग के बाहर जाने की स्वीकृति स्वास्थ्य आयुक्त देते हैं। मेडिकल कालेज में भर्ती गंभीर रोगी को संभाग के बाहर एंबुलेंस की स्वीकृति डीन की अनुशंसा पर संभाग आयुक्त और राज्य के बाहर के लिए संचालक चिकित्सा शिक्षा देते हैं। पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा प्रत्येक जीवन अमूल्य है और हर जीवन की रक्षा के लिए हम प्रतिबद्ध हैं। कहां मिलेगी सुविधा मध्य प्रदेश के छोटे शहरों में गंभीर बीमारी से पीड़ितों को आपातकालीन परिस्थिति में बड़े शहरों के अस्पताल तक पहुंचाने के लिए एयर एम्बुलेंस की सुविधा उपलब्ध होगी। मप्र में इस सेवा का नाम बदलकर पीएम एयर एंबुलेंस सेवा किया गया है। देश के अन्य राज्यों में स्थित अस्पतालों के लिए भी एयर एम्बुलेंस चलाई जाएगी। किसको मिलेगी एयर एम्बुलेंस की सुविधा अभी तक एयर एम्बुलेंस का उपयोग आर्थिक रुप से संपन्न लोग ही कर पाते हैं। सरकार प्रोजेक्ट में सफल हुई तो सरकारी कर्मचारियों को एवं आम लोगों के लिए भी एयर एम्बुलेंस का उपयोग किया जाएगा। कब मिलेगी एयर एम्बुलेंस की सुविधा सड़कों और औद्योगिक स्थलों पर होने वाले हादसों, हृदय रोगी अथवा जहर से प्रभावित एवं अन्य गंभीर बीमारी जिसमें तत्काल इलाज की आवश्यकता हो ऐसे मरीजों अच्छे चिकित्सा संस्थानों में समय पर इलाज के लिए ये सुविधा मिलेगी। अस्पताल द्वारा मरीज की स्थिति की गंभीरता की जांच के उपरांत एयर एम्बुलेंस की सुविधा मिलेगी।  

बोत्सवाना से मध्य प्रदेश में लाए जाएंगे आठ और चीते, मई महीने में आएंगे चार

भोपाल दक्षिण अफ्रीका के बोत्सवाना से आठ चीतों को दो चरणों में मध्य प्रदेश में लाया जाएगा। मई 2025 तक बोत्सवाना से चार चीतों को भारत लाने की योजना है। इसके बाद चार और चीतों को लाया जाएगा। प्रोजेक्ट चीता के तहत चीतों को अब गांधी सागर अभयारण्य में भी चरणबद्ध तरीके से स्थानांतरित किया जाएगा।   जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को भोपाल में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव की उपस्थिति में चीता परियोजना की समीक्षा बैठक हुई। एनटीसीए अधिकारियों ने बताया कि अब तक देशभर में चीता परियोजना पर 112 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं, जिसमें से 67 प्रतिशत व्यय मध्य प्रदेश में चीता पुनर्वास पर खर्च किया गया है। चीता प्रोजेक्ट पर अब तक खर्च हो चुके 112 करोड़ भारत और केन्या के बीच भी अनुबंध पर सहमति बनाई जा रही है। देश में चीता प्रोजेक्ट पर अब तक 112 करोड़ रुपये से अधिक राशि व्यय की जा चुकी है। प्रोजेक्ट चीता के तहत ही अब गांधी सागर अभयारण्य में भी चीते चरणबद्ध रूप से विस्थापित किए जाएंगे। भूपेंद्र यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश में चल रहे वन्य प्राणियों की पुनर्वास परियोजनाओं की देखरेख के लिए वन, पर्यटन, पशु चिकित्सा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जनजातीय कार्य एवं परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का एक टास्क फोर्स बनाया जाए। श्योपुर के 80 गांवों के 400 चीता मित्रों को प्रशिक्षित करने का अनुबंध कर सकते हैं। चीतों को गांधी सागर अभयारण्य में लाया जाएगा प्रोजेक्ट चीता के तहत राजस्थान की सीमा से सटे गांधी सागर अभयारण्य में चरणबद्ध तरीके से चीतों को बसाया जाएगा। अत: मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच अंतरराज्यीय चीता संरक्षण क्षेत्र स्थापित करने के लिए सैद्धांतिक सहमति बन गई है। कुनो राष्ट्रीय उद्यान में चीतों के बारे में जानकारी देते हुए वन अधिकारियों ने बताया कि वहां 26 चीते हैं, जिनमें से 16 खुले जंगल में और 10 पुनर्वास केंद्र (बाड़ों) में हैं। अधिकारी ने बताया कि चीतों पर निगरानी रखने के लिए सैटेलाइट कॉलर आईडी का उपयोग करके 24 घंटे ट्रैकिंग की जाती है। चीतों की जा रही है निगरानी अधिकारियों ने कहा कि चीतों की निगरानी के लिए ‘सैटेलाइट कॉलर आईडी’ का उपयोग करके 24 घंटे निगरानी की जा रही है।  अधिकारियों ने बताया कि मादा चीता ज्वाला, आशा, गामिनी और वीरा ने शावकों को जन्म दिया है। इतना ही नहीं, केएनपी में पर्यटकों की संख्या दो साल में दोगुनी हो गई है। अधिकारियों के मुताबिक पांच मादा और तीन नर सहित आठ नामीबियाई चीतों को 17 सितंबर, 2022 को केएनपी में छोड़ा गया था। उनके मुताबिक फरवरी 2023 में, 12 और चीतों को दक्षिण अफ्रीका से केएनपी में स्थानांतरित किया गया। वर्तमान में, केएनपी में 26 चीते हैं, जिनमें भारत में जन्मे 14 शावक शामिल हैं। चीतों के कदम पड़ते ही बदल जाएगी गांधीसागर की रंगत इस बीच मंदसौर से खबर है कि गांधीसागर अभयारण्य को भारत में चीता पुनर्स्थापन योजना के तहत चीतों का दूसरा घर बनने में अब महज एक दिन शेष है। कूनो नेशनल पार्क से दो नर चीते यहां छोड़े जा रहे हैं। चीतों के यहां आने के बाद निश्चित ही गांधीसागर व आस-पास के क्षेत्र की रंगत बदल जाएगी। यहां पर्यटकों की आमद भी बढ़ेगी और निश्चित ही गांधीसागर, रामपुरा, भानपुरा की अर्थव्यवस्था भी बदलेगी। वहीं अभयारण्य के लिहाज से देखे तो यहां की जैव विविधता भी समृद्ध होगी। चीते के आने से इसमें भी सितारे जड़ जाएंगे। गांधीसागर अभयारण्य में अभी तो चीते बाड़ों में ही रखे जाएंगे। कुछ माह बाद इन्हें खुले जंगल में छोड़ा जाएगा। इसके बाद गांधीसागर व आस-पास के नगरीय क्षेत्रों की आर्थिक स्थिति में भी परिवर्तन आएगा।

इंदौर मेट्रो ट्रेन की डेडलाइन घोषित पहले चरण में 17.5 किलोमीटर लंबी दूरी पर दौड़ेगी

इंदौर  मध्य प्रदेश के दो सबसे बड़े शहर इंदौर और भोपाल में मेट्रो ट्रेन का काम तेज गति से जारी है. इस मामले में इंदौर बाजी मारते हुए दिख रहा है. इंदौर में पहले चरण में 17.5 किलोमीटर लंबी दूरी पर मेट्रो ट्रेन दौड़ेगी. इंदौर में दीपावली तक मेट्रो ट्रेन चलाने की तैयारी है. इसका शुभारंभ करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रण पत्र भेजा जा रहा है. नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने ये जानकारी दी. इंदौर में मेट्रो ट्रेन का किराया क्या है दरअसल, हाल ही में कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेलवे सेफ्टी की स्वीकृति मिलने के बाद इंदौर मेट्रो रेल कंपनी द्वारा जल्द से जल्द मेट्रो ट्रेन शुरू करने की तैयारी की गई है. इसका किराया भी न्यूनतम ₹20 से लेकर अधिकतम 80 रुपए तक तय कर दिया गया है. पहले चरण में मेट्रो ट्रेन गांधीनगर से सुपर कॉरिडोर स्टेशन तक चलेगी, जो सुबह 8 बजे से लेकर रात 8 बजे तक दोनों और 50-50 फेरे लगाएगी. शनिवार को मेट्रो रेल कंपनी के अधिकारियों के साथ नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मेट्रो ट्रेन चलाने की तैयारी और स्टेशनों के साथ व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया. दीपावली तक मेट्रो ट्रेन दौड़ने लगेगी कैलाश विजयवर्गीय ने बताया “पहले चरण में दीपावली तक 17.5 किलोमीटर का सफर शुरू किया जाएगा. इसके लिए सभी तैयारियां कर ली गई हैं. मेट्रो ट्रेन के शुभारंभ के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी आमत्रण भेजा जा रहा है. ज्यादा से ज्यादा लोग मेट्रो ट्रेन का सफर कर सकें, इसलिए इंदौर में सिटी बसों की कनेक्टिविटी भी मेट्रो ट्रेन के स्टेशनों से जोड़ी जाएगी. इसकी भी प्लानिंग की जा रही है. इंदौर में एक कन्वेंशन सेंटर भी तैयार किया जाएगा, जिसकी अनुमति वन विभाग से प्राप्त हो गई है.” मेट्रो स्टेशनों पर दोपहिया वाहनों की पार्किंग मेट्रो स्टेशनों पर ईवी चार्जिंग से युक्त स्टेशनों के साथ दोपहिया पार्किंग की व्यवस्था भी होगी. कैलाश विजयवर्गीय का कहना है “इंदौर शहर के जितने भी ब्रिज हैं, उनके निर्माण की भी समीक्षा की जा रही है. कोशिश की जा रही है कि उज्जैन सिंहस्थ से पहले इंदौर से उज्जैन के बीच भी मेट्रो ट्रेन का शुभारंभ कर दिया जाए. इसकी भी प्लानिंग की जा रही है.” इंदौर में 7 अंडरग्राउंड स्टेशन तैयार इंदौर रेलवे स्टेशन, राजवाड़ा, छोटा गणपति, बड़ा गणपति, रामचंद्र नगर, कॉलानी नगर, एयरपोर्ट अंडरग्राउंड स्टेशन में शामिल हैं. इंदौर में मेट्रो ट्रेन की येलो लाइन में 21 एलिवेटेड स्टेशन:     गांधी नगर, सुपर कॉरिडोर-6,5,4,3,2,1     भवर कुआ चौराहा     एम आर -10     आई एस बी टी     चन्द्रगुप्त चौराहा     हीरा नगर     बापट चौराहा     मेघदूत गार्डन     विजय नगर चौराहा     मालवीय नगर चौराहा     शहीद बाग     खजराना     बंगाली चौराहा     पत्रकार कॉलोनी     पलासिया

मध्यप्रदेश में किसानों की आर्थिक समृद्धि का आधार बनी उद्यानिकी फसलें

भोपाल उद्यानिकी एवं खाद्य प्र-संस्करण के क्षेत्र में जिस गति से मध्यप्रदेश ने अपनी पहचान राष्ट्रीय स्तर पर बनाई है, उससे प्रदेश की उद्यानिकी फसलों के प्रति देश और विदेशों में खासी मांग भी बढ़ रही है। इससे प्रदेश के किसानों को आर्थिक संबल भी मिल रहा है। मध्यप्रदेश उद्यानिकी के साथ खाद्य प्र-संस्करण का मुख्य हब बन कर उभरा है। गत फरवरी माह में भोपाल में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में निवेशकों से उद्यानिकी क्षेत्र में 4 हजार करोड़ रूपये से अधिक का निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। यह निवेश प्रस्ताव मध्यप्रदेश के उद्यानिकी क्षेत्री में हुए नवाचारों और बड़े पैमाने पर हो रहे उत्पादन को दर्शाता हैं। मध्यप्रदेश में गत 5 वर्षों में उद्यानिकी के रकबा में 23.72 प्रतिशत वृद्धि हुई। वर्ष 2019-20 में उद्यानिकी फसलों का रकबा 21.75 लाख लाख हेक्टेयर था जो वर्ष 2023-24 में बढ़कर 26.91 लाख हैक्टेयर हो गया है। मध्यप्रदेश में गत 20 वर्षों में छोटे के साथ बड़ी कृषि-जोत रखने वाले किसान भाइयों ने ‘कैश-क्रॉप’ के रूप में उद्यानिकी फसलों को लेना शुरू कर दिया है इस कारण उद्यानिकी फसलों (फल, सब्जी, मसाला पुष्प एवं औषधियों) का रकबा 4 लाख 67 हजार हैक्टेयर से 27 लाख 71 हजार हैक्टेयर यानिकी लगभग 500 प्रतिशत की तथा उत्पादन 35 लाख 40 हजार मीट्रिक टन से बढ़कर 417 लाख 89 हजार मीट्रिक टन हो गया। इस तरह उत्पादन में 1000 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि हुई है। परिणामस्वरूप मध्यप्रदेश उद्यानिकी के साथ खाद्य प्र-संस्करण का मुख्य हब बन रहा है।

आईआईटी खड़गपुर की सहायता से प्रदेश के लोगों की खुशियां मापेगा आनंद विभाग

भोपाल  मध्य प्रदेश के लोग कितने खुश हैं और खुशी के प्रमुख कारण क्या हैं. नए साल में प्रदेश के लोगों की खुशी का ये इंडेक्स सामने होगा. लोगों की खुशी का इंडेक्स तैयार करने का बीढ़ा मध्य प्रदेश के आनंद विभाग ने उठाया है, जो आईआईटी खड़गपुर की सहायता से प्रदेश के लोगों की खुशियां मापेगा. संयुक्त राज्य अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र की तर्ज पर मध्य प्रदेश में खुशियों का निर्धारण हो सकेगा. मध्य प्रदेश के लोगों का हैप्पीनेस का इंडेक्स मापने के लिए आनंद विभाग एक नवाचार करने जा रहा है. इसके लिए विभाग आईआईटी खड़गपुर की सेवाएं ले रहा है. आईआईटी खड़गपुर की मदद से एक प्रश्नावली तैयार की जा रही है. आनंद विभाग से प्रदेश के सभी जिलों में 50 हजार से ज्यादा लोग जुड़े हुए हैं. इन वॉलन्टियर्स को आनंदक नाम दिया गया है. आनंद विभाग के अफसरों की मानें तो प्रदेश के 20 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर खुशियां मापने की शुरुआत होगी. विभाग का कहना है कि खुशी मापने का आधार संसाधनों की बजाय लोगों के भाव होंगे. प्रश्नावली इन भाव पर आधारित रहेगी. आनंद विभाग का मानना है कि साल के अंत तक इंडेक्स तैयार हो जाएगा.

विश्व में मशहूर पन्ना के हीरों को मिलेगा जीआई टैग, केंद्र कर रहा एग्जामिनेशन रिपोर्ट तैयार

भोपाल मध्य प्रदेश का पन्ना जिला हीरों के लिए प्रसिद्ध है. ऐसे में पन्ना के हीरा को जीआई टैग (Geographical Indication Tag) मिल सकता है. साल के अंत तक जीआई टैग मिलने की उम्मीद जताई जा रही है. जिसके लिए केंद्र एग्जामिनेशन रिपोर्ट तैयार कर रहा है. दरअसल, पत्रा के डायमंड में हल्का हरा रंग दिखता है. जबकि दुनिया के दूसरे हिस्से में मिलने वाले हीरे में या तो रंग नहीं होता या प्रकाश पड़ने पर बहुत से रंग एक साथ दिखते हैं. साथ ही पन्ना डायमंड में वीक कार्बन लाइन स्पष्ट होती है. इसके सहारे उसमें नक्काशी या डिजाइन बहुत आसान हो जाती है, जो दुनिया के दूसरे हीरों में उपलब्ध नहीं होती. सघनता और खास चमक भी पन्ना के हीरों को खास बनाती है. पन्ना के खजिन अधिकारी की मानें तो केंद्र के अधिकारी प्रेजेंटेशन के आधार पर एग्जामिनेशन रिपोर्ट तैयार करेंगे. इसमें बिंदुवार जीआई टैग से जुड़ी जानकारी मांगी जाएगी. केंद्र के अधिकारी अगर जवाब से संतुष्ट होंगे तो 6 से 8 महीने प्रक्रिया पूरी कर नोटिफिकेशन हो जाएगा. मार्च में राजधानी में प्रेजेंटेशन के बाद अब केंद्र आगे की प्रक्रिया कर रहा है. जीआई टैग मिलने पर निश्चित ही पन्ना के हीरे को नई पहचान मिलेगी.

BDA रेलवे लाइन के समानांतर दोनों तरफ 60-60 फीट चौड़ी रोड विकसित करेगा

भोपाल  भोपाल विकास प्राधिकरण इस साल बावड़िया रेलवे ओवरब्रिज से मिसरोद के बीच रेलवे लाइन के दोनों तरफ नई बसाहट के लिए अधोसंरचना विकसित करेगा। रेलवे लाइन के नर्मदापुरम रोड की तरफ विद्यानगर फेस दो के साथ अब विद्यानगर फेज तीन के तहत करीब 11 हेक्टेयर में काम होगा, जबकि बावडिय़ा की ओर दानापानी से मिसरोद और बावड़िया गांव के चारों तरफ 51 हेक्टेयर में काम होगा। दोनों तरफ 60-60 फीट चौड़ी रोड सबसे खास ये कि लोगों को रेलवे लाइन के समानांतर दोनों तरफ 60-60 फीट चौड़ी रोड मिलेगी। आशिमा मॉल (MP News) से बावड़िया गांव को पार कर सेज अपोलो अस्पताल की ओर उतरने वाला रेलवे ओवरब्रिज भी इस पूरी योजना में मददगार होगा। बीडीए ने इस योजना के लिए सिविल अधोसंरचना विकसित करने 122.09 करोड़ रुपए खर्च का अनुमान लगाया है। अन्य खर्च मिलाकर ये राशि 249 करोड़ रुपए बन रही है। बावड़ियाकलां गांव के आसपास रेलवे लाइन तक का क्षेत्र नई योजना में शामिल है। इस पर जल्द ही काम शुरू होगा।–संजीव सिंह, प्रशासक बीडीए ऐसे समझें स्थिति ● विद्यानगर फेस दो के तहत 39.96 हेक्टेयर क्षेत्र में योजना विकसित हो रही है। ● 84.14 करोड़ रुपए लागत है। 701 प्लॉट इसमें विकसित होंगे। ● विद्या नगर फेस तीन के तहत 10.60 हेक्टेयर क्षेत्र में योजना प्रस्तावित है। ● 28.27 करोड़ रुपए की लागत है। 34 प्लॉट विकसित होंगे। ● बावड़ियाकलां योजना- 51 हेक्टेयर क्षेत्रफल में तय है।  

मध्यप्रदेश में जल्द ही तबादलों पर लगा बैन हट सकता, ट्रांसफर पॉलिसी 2025 बनाकर तैयार

भोपाल  मध्यप्रदेश में लंबे समय से ट्रांसफर का इंतजार कर रहे सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों के लिए एक जरूरी खबर है। मध्यप्रदेश में जल्द ही तबादलों पर लगा बैन हट सकता है। सामान्य प्रशासन विभाग ने ट्रांसफर पॉलिसी 2025 तैयार कर ली है और सीएम मोहन यादव की सलाह पर इसमें कुछ आंशिक बदलाव कर इसे अप्रैल के ही महीने में कैबिनेट में लाने की तैयारी है। बता दें कि मध्यप्रदेश में बीते 3 साल से तबादलों पर बैन लगा हुआ है। इसी महीने हट सकता है बैन ! जानकारी के मुताबिक सामान्य प्रशासन विभाग ने तबादला नीति 2025 तैयार कर ली है। इसे इस माह के अंत तक राज्य शासन की मंजूरी के लिए कैबिनेट बैठक में रखा जाएगा। कैबिनेट से मंजूरी मिलते ही प्रदेश में तबादलों पर लगा बैन हटाया जा सकता है। पॉलिसी के अनुसार करीब 15 दिन से एक महीने तक तबादलों से प्रतिबंध हटाया जा सकता है। बता दें कि आखिरी बार तबादला नीति 2021-22 में लागू की गई थी। किनके लिए होगी फायदेमंद? यह नई नीति खासतौर पर उन सरकारी कर्मचारियों के लिए राहत लेकर आएगी, जो दो साल से ज्यादा समय से ट्रांसफर बैन के चलते एक ही जगह अटके हुए थे. अब वे स्वेच्छा से ट्रांसफर के लिए आवेदन कर सकेंगे और विशेष परिस्थितियों में मनचाही जगह पोस्टिंग भी मिल सकती है. शिक्षा और स्वास्थ्य विभागों में तबादलों की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन की जाएगी, जिससे व्यवस्था पारदर्शी होगी और कर्मचारियों को आसानी मिलेगी. किसके लिए बनेगी परेशानी? नई पॉलिसी उन अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए मुश्किल बन सकती है, जो पिछले 3 साल या उससे ज्यादा समय से एक ही पद पर जमे हुए हैं. सरकार का इरादा है कि ऐसे सभी अधिकारियों का ट्रांसफर किया जाए और जरूरत पड़ी तो उन्हें दूसरे जिलों में भी भेजा जाएगा. साथ ही, किसी भी विभाग में कुल कर्मचारियों के सिर्फ 10% का ही तबादला किया जा सकेगा. इसका मतलब ये है कि सबको ट्रांसफर नहीं मिलेगा, सिर्फ उन्हीं को मौका मिलेगा जो इस श्रेणी में आते हैं. क्या मिलेगा ट्रांसफर पर भत्ता? आपको बताते चलें कि नई नीति में ये भी तय किया गया है कि स्वेच्छा से ट्रांसफर लेने वाले कर्मचारियों को कोई भत्ता नहीं दिया जाएगा. लेकिन जिनका ट्रांसफर प्रशासनिक वजहों से किया जाएगा, उन्हें सरकार की ओर से भत्ते की सुविधा दी जाएगी. वहीं, ट्रांसफर की प्रक्रिया में मंत्रियों की भूमिका अहम होगी. अपने विभाग के कर्मचारियों का ट्रांसफर मंत्री कर सकेंगे. गजेटेड अधिकारियों ( उच्च स्तर के प्रशासनिक या प्रबंधकीय पदों पर होते हैं) के ट्रांसफर के लिए मुख्यमंत्री की सहमति जरूरी होगी. तबादला नीति में ये बिंदू हो सकते हैं शामिल     तबादला नीति में इस बात का प्रावधान रहेगा कि 3 साल से ज्यादा समय से एक ही स्थान पर जमे अधिकारी-कर्मचारियों को हटाया जाए। ऐसे अधिकारियों को दूसरे जिलों में भी भेजा जाएगा।     माना जा रहा है कि किसी भी विभाग में अधिकतम 10 फीसदी कर्मचारियों के तबादले ही हो सकेंगे।     जो अधिकारी-कर्मचारी स्वयं के व्यव पर ट्रांसफर करवाएंगे, उन्हें किसी भी प्रकार का भत्ता नहीं दिया जाएगा।     प्रशासनिक आधार पर होने वाले तबादले में सरकार भत्ता प्रदान करेगी।     मंत्रियों को उनके विभाग के कर्मचारियों के तबादले को लेकर अधिकार प्रदान किए जाएंगे।     जिले के अंदर ट्रांसफर करने का अधिकार प्रभारी मंत्री को दिया जाएगा। प्रभारी मंत्री की अनुशंसा के आधार पर जिला कलेक्टर जिले के अंदर ट्रांसफर कर सकेंगे।     जिले के बाहर तबादला विभागीय मंत्रियों की अनुशंसा पर होंगे, लेकिन राजपत्रित अधिकारियों का तबादला करने के लिए मुख्यमंत्री समन्वय की प्रक्रिया अपनाना होगी।     स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग से जुड़े तबादलों में ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।     विशेष परिस्थितियों में कर्मचारियों को मांगी गई लोकेशन पर ट्रांसफर दिया जाएगा।    मंत्रियों को उनके विभाग के कर्मचारियों के तबादले के अधिकार होंगे। जिले के अंदर ट्रांसफर करने का अधिकार प्रभारी मंत्री को दिया जाएगा। जिले के बाहर ट्रांसफर विभागीय मंत्रियों की अनुशंसा पर होंगे  राजपत्रित अधिकारियों का तबादला करने के लिए सीएम समन्वय की प्रक्रिया अपनानी होगी। 3 साल से ज्यादा समय से एक ही स्थान पर जमे अधिकारी-कर्मचारियों का ट्रांसफर किया जाएगा उन्हें दूसरे जिले में भी भेजा जाएगा।  किसी भी विभाग में अधिकतम 10 फीसदी कर्मचारियों के तबादले ही हो सकेंगे।  स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग से जुड़े तबादलों में ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

प्रदेश का पहला सम्भागीय किसान मेला उज्जैन में 3 मई से आयोजित किया जायेगा

 भोपाल मध्य प्रदेश में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के आयोजन के बाद अब सरकार संभागीय स्तर पर किसान मेलों का आयोजन करने जा रही है, शुरुआत 3 मई को उज्जैन संभाग से की जाएगी यानि पहला सम्भागीय किसान मेला उज्जैन में आयोजित किया जायेगा,  संभाग में मेलों के आयोजन के बाद अक्टूबर में राज्य स्तरीय किसान मेला आयोजित किया जायेगा। किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना ने कहा है मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के सभी संभागों में किसान मेलों का आयोजन करने का निर्णय लिया है। उज्जैन संभाग में 3 मई को मंदसौर में पहला किसान मेला आयोजित किया जाएगा।  इन मेलों में किसानों को कृषि, खाद्य प्र-संस्करण, उद्यानिकी और पशुपालन से संबंधित नवीनतम जानकारी दी जायेगी। साथ ही सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी के साथ किसानों की समस्याओं का समाधान भी किया जाएगा। मेले में प्रदर्शनी के माध्यम से भी किसानों को कृषि तकनीकों और कृषि उपकरणों की जानकारी दी जायेगी। एक साल में 10 लाख सोलर पंप लगाने का लक्ष्य मंत्री कंषाना ने बताया कि अक्टूबर में एक राज्य स्तरीय किसान मेला भी आयोजित किया जाएगा। इसके अलावा राज्य सरकार ने एक साल में 10 लाख सोलर पंप लगाने का लक्ष्य रखा है, जिससे किसानों को ऊर्जादाता बनने में मदद मिलेगी। सरकार ने इसके लिए अभियान शुरू कर किसानों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। मध्य प्रदेश कृषक कल्याण मिशन को मिली है सैद्धांतिक स्वीकृति कृषि मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत@2047 के विजन के अनुरूप राज्य सरकार ने गरीब, युवा, अन्नदाता किसान और नारी कल्याण के लिए मिशन शुरू कर दिया है। मंत्रि-परिषद द्वारा मध्य प्रदेश कृषक कल्याण मिशन को सैद्धांतिक स्वीकृति दे दी गई है। किसानों की आय बढ़ाने के प्रयास में एमपी सरकार ‘मध्यप्रदेश कृषक कल्याण मिशन’ के तहत अब कृषि से सम्बद्ध विभागों की योजनाएं एक मंच पर समन्वित रूप से क्रियान्वित होंगी। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश कृषि आधारित राज्य है और इस क्षेत्र में यहां अपार संभावनाएं हैं। किसानों की आय, कृषि उत्पादन, पशुपालन, मत्स्य पालन में वृद्धि के साथ खाद्य प्र-संस्करण और कृषि से उत्पादित कच्चे माल पर आधारित औद्योगिक इकाई स्थापित करने जैसे हरसंभव प्रयास किये जा रहे हैं।  

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