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राहुल गांधी पर संसद में प्रस्ताव, BJP सांसद ने चुनाव न लड़ने की उठाई मांग

नई दिल्ली भाजपा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने लोकसभा में एक मोशन पेश किया है, जिसमें विपक्षी नेता राहुल गांधी की सदस्यता रद्द करने और भविष्य में चुनाव लड़ने पर पाबंदी लगाने की मांग की गई। डॉ. दुबे ने कहा सोरोस फाउंडेशन और देश को टुकड़े करने वाले ताक़तों के साथ मिलकर राहुल गांधी भारत का विभाजन करना चाहते हैं। इसलिए मैंने लोकसभा के नियम 352(5) और 353 के तहत उनकी सदस्यता रद्द करने और भविष्य में चुनाव नहीं लड़ने की पाबंदी का मोशन पेश किया। सोरोस फाउंडेशन व देश को टुकड़े करने वाले ताक़तों के साथ मिलकर विपक्ष के नेता राहुल गांधी जी भारत का विभाजन करना चाहते हैं। मैंने लोकसभा के नियम 352(5) और नियम 353 के तहत उनकी सदस्यता रद्द करने व भविष्य में चुनाव नहीं लड़ने की पाबंदी का मोशन पेश किया। क्या है लोकसभा नियम 352(5) और 353 लोकसभा नियम 352(5) और 353 के तहत संसद किसी सदस्य की सदस्यता रद्द करने या भविष्य के चुनावों में भाग लेने पर रोक लगाने की प्रक्रिया को अपनाती है यदि उसके कार्य संविधान और राष्ट्रीय एकता के खिलाफ हों। विशेषज्ञों के अनुसार, यह मोशन राजनीतिक रूप से संवेदनशील है और संसद में इस पर बहस और निर्णय का असर विपक्ष और राजनीतिक माहौल पर पड़ सकता है। भाजपा नेता ने दी राहुल गांधी को राष्ट्रीय सुरक्षा पर राजनीति न करने की नसीहत इसके अलावा वरिष्ठ भाजपा नेता वानाथी श्रीनिवासन ने गुरुवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी से अपील की कि वे राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर राजनीति करना बंद करें और इसके बजाय रचनात्मक राजनीति पर ध्यान दें। वानाथी श्रीनिवासन ने लोकसभा में कथित रूप से एक पूर्व सेना प्रमुख की आत्मकथा को लेकर उत्पन्न हंगामे की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि कांग्रेस नेता जानबूझकर देश की सुरक्षा के साथ राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा राहुल गांधी, जिन्हें जनता ने नकार दिया है, लोकसभा में अराजकता पैदा कर रहे हैं। राजनीति में करने के लिए हजारों काम हैं, लेकिन वे अनावश्यक रूप से देश की सुरक्षा को राजनीतिक मुद्दा बना रहे हैं। इससे उनका विपक्षी नेता का पद भी खतरे में पड़ सकता है।

संसद में हंगामा: 25 कांग्रेस सांसदों ने चेंबर में घुसकर की गाली-गलौज, रिजिजू का आरोप

नई दिल्ली संसद के बजट सत्र में लगातार जारी हंगामे के बीच बुधवार को केंद्रीय मंत्री किरन रिजिजू ने कांग्रेस सांसदों पर बड़ा आरोप लगाया है। संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि कम से कम 20-25 कांग्रेस सांसद लोकसभा स्पीकर के चेंबर में घुस गए और उन्हें गालियां दीं। उन्होंने यह आरोप लगाए हैं कि इस दौरान प्रियंका गांधी वाड्रा और केसी वेणुगोपाल समेत कई सीनियर कांग्रेस नेता भी वहां मौजूद थे। बुधवार को संसद परिसर में पत्रकारों के सवाल का जवाब देते हुए किरन रिजिजू ने कहा, “स्पीकर साहब बहुत आहत हैं। मैंने उनसे बात की है। स्पीकर साहब के चेंबर में जाकर गाली गलौज किया, बुरा भला कहा। फिर स्पीकर साहब ने जो फैसला सुनाया उसको नहीं माने, और फिर राहुल गांधी कहते हैं कि उन्हें सदन में बोलने के लिए किसी की परमिशन नहीं चाहिए, वो मर्जी से बोलेंगे। ये सब रिकॉर्ड पर है। लेकिन सदन में चेयर की अनुमति के बिना नहीं बोल सकते।” केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा, “स्पीकर के चेंबर में 20,25 कांग्रेस के MPs जब घुसे, तो मैं भी वहां गया। उन्होंने जो गाली गलौज किया स्पीकर के साथ, वह मैं आपको बता नहीं सकता। स्पीकर बहुत नरम आदमी हैं। नहीं तो और कठोर कदम उठाया जा सकता था। यह कोई तरीका नहीं होता।” रिजिजू ने कहा, “जब स्पीकर को गाली दी जा रही थी तब वहां प्रियंका गांधी भी मौजूद थीं, वेणुगोपाल भी मौजूद थे, कांग्रेस के सीनियर नेता वहां मौजूद थे और इसे बढ़ावा दे रहे थे।” विपक्ष ने पेश किया है अविश्वास प्रस्ताव इससे पहले विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव लाने संबंधी नोटिस मंगलवार को लोकसभा महासचिव को सौंपा है। ओम बिरला पर पक्षपातपूर्ण तरीके से सदन संचालित करने, कांग्रेस सदस्यों पर झूठे इल्जाम लगाने और अपने पद का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया गया है। लोकसभा सचिवालय के सूत्रों ने बताया है कि विपक्ष की ओर से नोटिस सौंपे जाने के बाद लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने फैसला किया है कि वह मामले का निपटारा होने तक आसन पर नहीं बैठेंगे और उन्होंने लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह को निर्देश दिया कि नोटिस की जांच कर उचित कार्रवाई की जाए। सूत्रों ने यह भी कहा कि नोटिस पर विचार किया जाएगा और नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। सौ से ज्यादा सांसदों ने किए हस्ताक्षर जानकारी के मुताबिक निचले सदन में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई, कांग्रेस के मुख्य सचेतक कोडिकुनिल सुरेश और सचेतक मोहम्मद जावेद ने लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह को ओम बिरला को पद से हटाने से संबंधित नोटिस सौंपा। नोटिस पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रमुक और कई अन्य विपक्षी दलों के करीब 120 सांसदों से अधिक सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। ओम बिरला पर क्या आरोप? यह प्रस्ताव संबंधी नोटिस संविधान के अनुच्छेद 94 (सी) के तहत सौंपा गया है। विपक्ष ने नोटिस में कहा, ”बीते दो फरवरी को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलते समय अपना भाषण पूरा नहीं करने दिया गया। यह कोई अकेली घटना नहीं है। करीब-करीब हमेशा ही ऐसा होता है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता को बोलने नहीं दिया जाता।” उन्होंने दावा किया कि गत 3 फ़रवरी को, विपक्ष के आठ सांसदों को पूरे बजट सत्र के लिए ”मनमाने ढंग से” निलंबित कर दिया गया और उन्हें केवल अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने के लिए दंडित किया जा रहा है। विपक्ष ने ओम बिरला द्वारा सदन में पांच फरवरी को दिए गए उस वक्तव्य का भी हवाला दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि चार फरवरी को कांग्रेस के कई सदस्य सदन के नेता (प्रधानमंत्री) की सीट के पास पहुंचकर किसी अप्रत्याशित घटना को अंजाम देना चाहते थे, इसलिए उनके अनुरोध पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सदन में नहीं आए।

भोपाल बीजेपी कार्यकारिणी घोषित, लेकिन विवाद के चलते सोशल मीडिया से हटाई गई लिस्ट

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भाजपा की नई जिला कार्यकारिणी का गठन विवादों की भेंट चढ़ गया है। शहर अध्यक्ष रविंद्र यती द्वारा मंगलवार को घोषित की गई टीम के खिलाफ पार्टी के भीतर ही जबरदस्त नाराजगी और विरोध के स्वर उठने लगे। मामला इतना बढ़ा कि कुछ ही घंटों के भीतर इस नई कार्यकारिणी को होल्ड पर रखना पड़ा। कार्यकारिणी पर क्यों मचा बवाल? विरोध का सबसे बड़ा कारण जिला महामंत्री के पद पर सचिन दास बब्बा की नियुक्ति को माना जा रहा है। पार्टी के पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि सचिन दास 2013 में भाजपा के आधिकारिक प्रत्याशी सुरेंद्र नाथ सिंह के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ चुके हैं। इतना ही नहीं, उन पर भाजपा प्रदेश कार्यालय में तोड़फोड़ करने जैसे गंभीर आरोप भी हैं। ऐसे व्यक्ति को महत्वपूर्ण पद दिए जाने से निष्ठावान कार्यकर्ताओं में गहरा रोष फैल गया। बीजेपी की ये कार्यकारिणी हुई होल्ड ये बनाए गए थे उपाध्यक्ष: राजकुमार विश्वकर्मा, अश्विनी राय, राकेश कुकरेजा, अशोक वाणी, राजू अनेजा, भाषित दीक्षित, विभा गरुण, शिखा मोनू गोहल, ये बने महामंत्री : मनोज राठौर, योगेश परमार, सचिन दास बब्बा मंत्री: अमन यादव, योगेश वासवानी, सुनील यादव, सुषमा बावीसा, लक्ष्मी ठाकुर, पार्थ पाटीदार, प्रतीक्षा ब्रह्मभट्ट कोषाध्यक्ष: राघवेन्द्र द्विवेदी सह कोषाध्यक्ष: संतोष जाट कार्यालय मंत्री: योगेन्द्र मुखरैया सह कार्यालय मंत्री: अमित कुमार सिंह, सुमित पांडे आईटी प्रभारी: विश्वविजय सिंह आईटी सह प्रभारी: रवि यादव, शरद पंडित, शेखर श्रीवास्तव सोशल मीडिया प्रभारी: जगदीश विश्वकर्मा सोशल मीडिया सह प्रभारी: हेतराम, चंद्रभान यादव, आरती बोराना कार्यालय प्रभारी: शैलेन्द्र निगम मन की बात प्रभारी: सुनील निगम, सह प्रभारी: चंद्रशेखर तिवारी(राधे महाराज), राजेश खटीक, अनुपम जैन इन वजहों से हुआ विरोध तो होल्ड हुई सूची बीजेपी ऑफिस में तोड़फोड़ करने वाले को महामंत्री बनाया बीजेपी की जिला कार्यकारिणी में सचिन दास बब्बा को जिला महामंत्री बनाया गया था। लिस्ट जारी होने के बाद संगठन में भोपाल के कई नेताओं ने इस बात की शिकायत की कि सचिन दास प्रदेश कार्यालय में तोड़फोड़ में शामिल थे। 2013 में उन्होंने बीजेपी प्रत्याशी सुरेन्द्र नाथ सिंह के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ा था। पार्षदों का क्लब बनी जिला कार्यकारिणी बीजेपी की जिला कार्यकारिणी में पांच पार्षद पदाधिकारी बनाए गए थे। इनमें वार्ड 70 के पार्षद अशोक वाणी, वार्ड 32 के पार्षद प्रतिनिधि राजू अनेजा, वार्ड 45 के पार्षद प्रतिनिधि मोनू गोहल, वार्ड 50 की पार्षद सुषमा बावीसा और वार्ड 13 के पार्षद मनोज राठौर जिला पदाधिकारी बनाए गए हैं। जिला और प्रदेश अध्यक्ष ने पोस्ट डिलीट की भोपाल की जिला कार्यकारिणी घोषित होने की लिस्ट बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, भोपाल के शहर अध्यक्ष रविन्द्र यती और बीजेपी मध्य प्रदेश के ऑफिशियल पेज पर पोस्ट की गई लेकिन, कुछ ही समय बाद सबने पोस्ट डिलीट कर दी। पार्षदों का क्लब बनी टीम संगठन के भीतर इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि नई कार्यकारिणी में पार्षदों और उनके प्रतिनिधियों का दबदबा रहा। वार्ड 70 के पार्षद अशोक वाणी, वार्ड 32 के पार्षद प्रतिनिधि राजू अनेजा, वार्ड 45 के पार्षद प्रतिनिधि मोनू गोहल, वार्ड 50 की पार्षद सुषमा बावीसा और वार्ड 13 के पार्षद मनोज राठौर को टीम में जगह दी गई। कार्यकर्ताओं का तर्क है कि इससे संगठन ‘पार्षदों का क्लब’ बनकर रह गया और जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी हुई। हटाए गए सोशल मीडिया पोस्ट विवाद इतना गहराया कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, शहर अध्यक्ष रविंद्र यती और भाजपा मध्य प्रदेश के आधिकारिक सोशल मीडिया पेज से सूची वाले पोस्ट आनन-फानन में डिलीट कर दिए गए। फिलहाल पूरी सूची को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। गौरतलब है कि रविंद्र यती की नियुक्ति के एक साल बाद यह सूची जारी हुई थी, जिसमें राजकुमार विश्वकर्मा और अश्विनी राय जैसे नेताओं को उपाध्यक्ष और योगेश परमार को महामंत्री बनाया गया था। महाशिवरात्रि तक के लिए होल्ड हुई है लिस्ट जिला कार्यकारिणी होल्ड होने को लेकर भोपाल के शहर अध्यक्ष रविन्द्र यती ने भास्कर से कहा- अभी महाशिवरात्रि तक के लिए लिस्ट होल्ड की गई है।

साथी ने ही बदल दिया समीकरण: शिवसेना UBT के सपोर्ट से भाजपा की जीत, कांग्रेस देखती रह गई

मुंबई  गुटबाजी से जूझ रही कांग्रेस को उस समय बड़ी शर्मिंदगी झेलनी पड़ी, जब उसकी सहयोगी शिवसेना (UBT) और सत्तारूढ़ भाजपा के बीच अचानक हुए गठबंधन से चंद्रपुर नगर निगम में भाजपा का महापौर चुन लिया गया। यह तब हुआ, जब कांग्रेस इस पद पर दावा करने की स्थिति में थी। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की संगीता खांडेकर ने कांग्रेस उम्मीदवार वैशाली महादुले को एक वोट से हराकर महापौर चुनाव जीत लिया। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) ने भाजपा को समर्थन दिया। शिवसेना (UBT) के पार्षद प्रशांत दानव उपमहापौर चुने गए। सबसे बड़ी पार्टी बनी थी कांग्रेस इस घटनाक्रम ने विपक्षी एकता और महा विकास आघाडी (MVA) की व्यवहार्यता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि शिवसेना (UBT) MVA और विपक्षी दलों के ‘INDIA’ गठबंधन दोनों में कांग्रेस की एक प्रमुख सहयोगी है। चंद्रपुर उन कुछ नगर निकायों में से एक है जहां कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और महापौर का पद हासिल करने की स्थिति में थी। हालांकि, विजय वडेट्टीवार और प्रतिभा धनोरकर के नेतृत्व वाले गुटों के बीच गहरे आंतरिक मतभेदों ने भाजपा को अपना महापौर बनाने का अवसर प्रदान कर दिया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि वह विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के बाद इस घटनाक्रम पर चर्चा करेंगे। कांग्रेस ने इन दलों को घेरा तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के प्रमुख हर्षवर्धन सपकाल ने पार्षदों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया और इस झटके के लिए शिवसेना (UBT), AIMIM और वंचित बहुजन आघाडी (वीबीए) को जिम्मेदार ठहराया। कांग्रेस नेता ने पत्रकारों से कहा, ‘चंद्रपुर महापौर चुनाव में भाजपा को 32 वोट और कांग्रेस को 31 वोट मिले। शिवसेना (UBT), MVA और विपक्षी दलों के ‘INDIA’ गठबंधन की सहयोगी है। उम्मीद थी कि शिवसेना (UBT) अपने छह पार्षदों के साथ कांग्रेस को समर्थन देगी लेकिन पार्टी ने भाजपा का साथ देना चुना। इस घटनाक्रम का राज्य पर असर पड़ेगा।’ महापौर पद के लिए मची थी होड़ यहां 66 सदस्यीय नगर निकाय में कांग्रेस 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी जबकि भाजपा 23 सीट के साथ दूसरे स्थान पर रही जिससे दोनों दलों के बीच प्रतिष्ठित महापौर और उप महापौर पदों को पाने की होड़ मच गई। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) ने छह सीट जीतीं, भारतीय शेतकरी कामगार पक्ष (जनविकास सेना) को तीन, वीबीए को दो और एआईएमआईएम, बसपा और शिवसेना को एक-एक सीट मिली। दो निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी चुनाव जीता। पंद्रह जनवरी को हुए चुनाव में खंडित जनादेश के बाद चंद्रपुर नगर निकाय में गठबंधन को लेकर सोमवार तक कोई स्पष्टता नहीं थी। शिवसेना यूबीटी थी भाजपा के विरोध में महापौर चुनाव से पहले, शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत ने उद्धव ठाकरे के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा था कि पार्टी विपक्ष में बैठना पसंद करेगी और भाजपा का कभी समर्थन नहीं करेगी। हालांकि, परिणाम आने के बाद, शिवसेना (UBT) के नेता अंबादास दानवे ने कहा कि यह घटनाक्रम पार्टी नेतृत्व की मंजूरी के बिना हुआ प्रतीत होता है। पार्टी के स्थानीय नेताओं ने अलग-अलग स्पष्टीकरण दिया। चंद्रपुर जिला शिवसेना (UBT) के अध्यक्ष संदीप गिरहे ने बताया कि स्थानीय नेताओं ने महापौर पद के लिए कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार से मुलाकात की थी, लेकिन कांग्रेस ने पांच साल के लिए यह पद देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, ”इसके बाद शिवसेना (UBT) ने ‘विकास के हित में’ भाजपा से बातचीत शुरू की।” गिरहे ने कहा कि वह शिवसेना (UBT) के नेता वरुण सरदेसाई के संपर्क में रहे और नेतृत्व ने स्थानीय इकाइयों को संगठनात्मक एकता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। उप महापौर दानव ने पुष्टि की कि भाजपा और शिवसेना (UBT) के बीच हुई चर्चा के परिणामस्वरूप एक समझौता हुआ जिसके तहत भाजपा को महापौर का पद और शिवसेना (UBT) को उपमहापौर का पद मिला। भाजपा ने क्या कहा भाजपा के महापौर चुनाव पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के समर्थन के कारण भाजपा को बढ़त मिली, जबकि प्रकाश आंबेडकर के नेतृत्व वाली वंचित बहुजन आघाडी (VBA) मतदान के दौरान अनुपस्थित रही। सपकाल ने कहा, ”वंचित बहुजन आघाडी के साथ हमने नगर निकाय चुनावों में वास्तविक गठबंधन किया और अगर उसने कांग्रेस का समर्थन किया होता तो हमारा उम्मीदवार जीत जाता। पार्षदों की खरीद-फरोख्त हुई।” चंद्रपुर कांग्रेस में गुटबाजी के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि पार्टी के पार्षद एकजुट हैं और उन्होंने चंद्रपुर में कांग्रेस नेताओं के बीच मतभेदों को सुलझा लिया है। उन्होंने कहा, ”शिवसेना (UBT), एआईएमआईएम और वीबीए की वजह से ही भाजपा अपना महापौर बना सकी।” शिवसेना (UBT) पर निशाना साधते हुए, शिवसेना मंत्री संजय शिरसाट ने कहा कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी के पार्षदों ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वे अब कांग्रेस और राकांपा के साथ गठबंधन नहीं करना चाहते।

सियासी तूफान! अजित पवार की मौत पर रोहित पवार के आरोपों ने प्रफुल्ल पटेल को भी घेरा

मुंबई  महाराष्ट्र के बारामती में हुए विमान हादसे में डिप्टी सीएम रहे अजित पवार की मौत को लेकर अब सवाल उठने शुरू हो गए हैं. शरद पवार गुट के विधायक और अजित पवार के भतीजे रोहित पवार ने मंगलवार को मुंबई में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई ऐसे सवाल उठाए, जिससे माहौल गरमा गया है. उनके सनसनीखेज आरोपों के घेरे में एनसीपी (अजित गुट) के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल आ गए. अब सबकी नजरें ब्लैक बॉक्स रिपोर्ट और आधिकारिक जांच पर हैं. फिलहाल, रोहित पवार आज दिल्ली पहुंचेंगे और दोपहर 12 बजे वे प्रेस क्लब में विस्तृत जानकारी देंगे.  रोहित का कहना है कि मेरे मन में सवाल उठ रहे हैं और मैंने अपने काका को खोया है. महाराष्ट्र ने एक नेता खोया है. जब तक हमारी शंकाओं का समाधान नहीं होगा, हम यह मुद्दा उठाते रहेंगे. VSR कंपनी और मेंटेनेंस पर सवाल रोहित पवार ने सबसे पहले विमान की मालिक कंपनी VSR पर सवाल उठाए. उन्होंने पूछा कि क्या विमान का रूटीन मेंटेनेंस हुआ था? टेक लॉग कहां है? एयरवर्दी रिपोर्ट क्यों सार्वजनिक नहीं की गई? क्या क्रैश से पहले ट्रांसपोंडर जानबूझकर बंद किया गया? उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 2023 में VSR के एक अन्य विमान हादसे की फाइनल रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं हुई. उनका दावा है कि DGCA पर दबाव हो सकता है और जांच पूरी पारदर्शिता से नहीं हो रही. ARROW कंपनी और फ्लाइट बुकिंग पर शक रोहित ने कहा कि पहले अजित पवार सड़क मार्ग से बारामती जाने वाले थे और उनके काफिले की तैयारी हो चुकी थी. फिर आखिरी समय में विमान से जाने का फैसला क्यों हुआ? फ्लाइट बुकिंग देर रात क्यों की गई? उन्होंने ARROW कंपनी की भूमिका पर भी सवाल उठाए और कहा कि बुकिंग और हैंडलिंग की पूरी जांच होनी चाहिए. किसके दबाव में प्लान बदला गया? पायलट पर सीधे सवाल उठाए रोहित पवार ने पायलट कैप्टन सुमित कपूर के रिकॉर्ड पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि कपूर को पहले शराब सेवन के मामले में सस्पेंड किया गया था. उन्होंने पूछा कि लैंडिंग के समय पायलट चुप क्यों थे? रनवे 29 की अनुमति मिलने के बाद रनवे 11 क्यों मांगा गया, जबकि वो ज्यादा चुनौतीपूर्ण था? उन्होंने यह भी कहा कि को-पायलट शांभवी पाठक का लियरजेट पर अनुभव ज्यादा था. ऐसे में अंतिम निर्णय किस आधार पर लिए गए? विजिबिलिटी और ट्रांसपोंडर का रहस्य रोहित ने DGCA रिपोर्ट और केंद्रीय रिपोर्ट के बीच समय में अंतर का मुद्दा उठाया. उनका दावा है कि आखिरी एक मिनट का ट्रांसपोंडर डेटा उपलब्ध नहीं है. उन्होंने पूछा कि क्या इसे जानबूझकर बंद किया गया? उन्होंने ब्लैक बॉक्स की पूरी रिकॉर्डिंग सार्वजनिक करने की मांग की और कहा कि अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों जैसे NTSB और UK की AAIB को भी जांच में शामिल किया जाए. रोहित ने और क्या दावे किए? रोहित पवार ने सवाल उठाया कि क्या यह सिर्फ हादसा था या इसके पीछे कोई साजिश हो सकती है? उन्होंने एक किताब का हवाला देते हुए कहा, जो इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद पर आधारित है. उसमें एक लाइन लिखी है- ‘कभी-कभी सबसे प्रभावी तरीका ड्राइवर को खत्म करना होता है.’ इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि कुछ घटनाओं को सिर्फ संयोग मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. उन्होंने बताया कि 27 जनवरी को अजित पवार का कार्यक्रम बदला गया था. उनके बंगले के बाहर बारामती जाने के लिए काफिला तैयार था. सड़क मार्ग से यात्रा की तैयारी हो चुकी थी. लेकिन एक वरिष्ठ नेता उनसे मिलने आने वाले थे, जो देर से पहुंचे. इस वजह से वे सड़क मार्ग से नहीं जा सके और फ्लाइट बुक करनी पड़ी. रोहित का दावा है कि फ्लाइट यात्रा की योजना पहले से बन रही थी, भले ही अंतिम निर्णय बाद में लिया गया हो. रोहित ने यह भी कहा कि अजित पवार को विदर्भ से जुड़ी एक फाइल पर हस्ताक्षर करने थे. वह मंत्रालय (मंत्रालय भवन) में मौजूद थे और फाइल साइन करने के कारण उन्हें देर हो गई. इसी वजह से बारामती रवाना होने में देरी हुई. उन्होंने सवाल उठाया कि विमान का निर्धारित समय सुबह 7 बजे था, लेकिन उड़ान 8:10 बजे भरी गई. टेक-ऑफ में देरी क्यों हुई? इसके लिए कौन जिम्मेदार था? रोहित ने यह भी याद दिलाया कि एक बार पहले जब विजिबिलिटी कम थी, तब अजित पवार ने दो इंजन वाले हेलीकॉप्टर उपलब्ध होने के बावजूद हवाई यात्रा टाल दी थी और सड़क मार्ग से यात्रा की थी. ऐसे में इस बार कम विजिबिलिटी के बावजूद उड़ान क्यों भरी गई? उन्होंने दावा किया कि एक ईमेल के मुताबिक कैप्टन साहिल मदान और कैप्टन यश को इस फ्लाइट के लिए तैनात किया जाना था, लेकिन आखिरी समय में यह बदलाव कर दिया गया. रोहित ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर सुमित कपूर के नाम से जो एक वायरल फोटो साझा की गई, वो दरअसल साहिल मदान की थी. इस पर उनकी पत्नी ने भी टिप्पणी की थी. सुबह 7:02 बजे एक अधिकारी ने संदेश भेजा था कि सभी क्रू पहुंच चुके हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि जिन पायलटों को पहले असाइन किया गया था, वे वहां क्यों नहीं थे? क्या वे वास्तव में ट्रैफिक में फंसे थे? क्या DGCA के पास उनका कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) है? क्या वे एयरपोर्ट के पास रहते थे या दूर? इन तमाम बिंदुओं को आधार बनाकर रोहित पवार ने कहा कि इन सभी पहलुओं की निष्पक्ष और विस्तृत जांच होनी चाहिए. प्रफुल्ल पटेल का नाम क्यों चर्चा में आया? प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रोहित पवार ने लियरजेट विमानों के मेंटेनेंस से जुड़े मुद्दे पर प्रफुल्ल पटेल की ओर इशारा किया. उन्होंने कहा कि देश में विमानों की MRO (Maintenance, Repair and Overhaul) सेवाएं देने वाली सिर्फ दो कंपनियां हैं. एक दिल्ली में स्थित है और दूसरी मुंबई में. रोहित के अनुसार, मुंबई स्थित कंपनी का स्वामित्व प्रफुल्ल पटेल से जुड़ा बताया जाता है. इसके साथ ही रोहित पवार ने यह भी कहा कि VSR कंपनी ने अपनी अलग इन-हाउस मेंटेनेंस यूनिट शुरू कर रखी है, जहां विमान की देखभाल और तकनीकी कार्य किए जाते हैं. रोहित ने पूछा कि क्या मेंटेनेंस में कोई चूक हुई? रोहित ने … Read more

गोपाल भार्गव का बड़ा खुलासा: दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस में शामिल होने का दिया था ऑफर, मैंने कहा- मैं टिकाऊ हूं, बिकाऊ नहीं

भोपाल/सागर  मध्य प्रदेश की राजनीति में वरिष्ठ नेताओं की भूमिका और संगठनात्मक सम्मान को लेकर चल रही बहस एक बार फिर तेज हो गई है. इसकी वजह बने हैं भाजपा के कद्दावर नेता और रहली विधायक गोपाल भार्गव, जिनका सार्वजनिक मंच से दिया गया बयान सियासी हलकों में दूर तक गूंज रहा है. सागर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान गोपाल भार्गव ने न सिर्फ अपने लंबे राजनीतिक संघर्ष का जिक्र किया, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि राजनीति में उपेक्षा किसी भी नेता को भीतर से तोड़ सकती है. उनके शब्दों में दर्द भी था और अनुभव की गंभीरता भी. जिस तरह उन्होंने अपने जीवन के तीन दशक से अधिक समय को पार्टी और संगठन को समर्पित करने की बात कही, उसने यह संकेत दिया कि मामला सिर्फ व्यक्तिगत असंतोष का नहीं, बल्कि भाजपा के भीतर वरिष्ठ नेताओं की भूमिका और सम्मान से जुड़ा बड़ा सवाल है. गोपाल भार्गव बोले-मैं टिकाऊं, बिकाऊं नहीं  गोपाल भार्गव ने कहा ‘राजनीति में उपेक्षा किसी भी व्यक्ति को भीतर से तोड़ देती है, कई बार सरकार में बात नहीं सुनी जाती तो भी मन टूट जाता है. उन्होंने कांग्रेस के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि मैंने तो 20 साल संघर्ष किया है, अपनी मांगे रखता रहा, जूझता रहा. लेकिन जब सरकार नहीं मानती तो मन टूट जाता है. मैंने 20 साल मन को बांधे रखा, उस दौरान कई मंत्री यहां तक पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह कहते थे कि गोपालजी बीजेपी में क्या रखा है, कुछ नहीं है, आप तो हमारे पास आ जाओ, मैं आपको किसी अच्छे विभाग का मंत्री बना दूंगा, लेकिन तब मैंने भी कहा दिया था कि  राजा साहब एक बात कहता हूं, ये माल टिकाऊ है बिकाऊ नहीं है. मैं 20 साल विपक्ष में रहा, लेकिन यहां तो लोग 20 महीने में पलटी मार जाते हैं.  9 बार के अपराजेय विधायक गोपाल भार्गव का यह बयान ऐसे समय आया है, जब मोहन यादव सरकार की कैबिनेट को लेकर पहले से ही राजनीतिक चर्चाएं चल रही हैं. वरिष्ठ होने के बावजूद मंत्री पद न मिलना और संगठनात्मक फैसलों में कथित अनदेखी, इन सभी बातों ने उनके शब्दों को और अधिक अर्थपूर्ण बना दिया है. जब उन्होंने कहा कि उन्होंने 20 साल तक कठिन परिस्थितियों में खुद को टिकाए रखा, जबकि आज के दौर में लोग 20 महीने भी नहीं टिक पाते, तो यह सिर्फ आत्मकथा नहीं थी, बल्कि वर्तमान राजनीतिक संस्कृति पर सीधा कटाक्ष था. यही वजह है कि उनका “मैं टिकाऊ हूं, बिकाऊ नहीं” वाला बयान अब सिर्फ एक संवाद नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश की राजनीति में वैचारिक निष्ठा बनाम अवसरवाद की बहस का प्रतीक बन गया है. राजनीति में उपेक्षा का दर्द, अनुभव और योगदान की अनदेखी से गहरी हुई पीड़ा  कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गोपाल भार्गव ने साफ शब्दों में कहा कि जब किसी जनप्रतिनिधि की बात सरकार या संगठन नहीं सुनता, तो उसका मनोबल टूटता है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि उपेक्षा किसी को भी भीतर से कमजोर कर सकती है. यह बयान उस मानसिक स्थिति को दर्शाता है, जिससे अक्सर लंबे समय तक सेवा देने वाले वरिष्ठ नेता गुजरते हैं. राजनीति में पद और प्रभाव भले बदलते रहते हों, लेकिन अनुभव और योगदान की अनदेखी गहरी पीड़ा पैदा करती है. भार्गव के शब्दों में यही पीड़ा झलकती है. “मैं टिकाऊ हूं, बिकाऊ नहीं” का सियासी संदेश गोपाल भार्गव के बयान का सबसे चर्चित हिस्सा तब सामने आया, जब उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के कांग्रेस में शामिल होने के प्रस्ताव का जिक्र किया. उन्होंने स्पष्ट कहा कि उन्होंने उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया, क्योंकि वे बिकाऊ नहीं हैं. यह टिप्पणी सिर्फ एक घटना का जिक्र नहीं थी, बल्कि उनकी वैचारिक प्रतिबद्धता और राजनीतिक ईमानदारी का सार्वजनिक ऐलान भी थी. भाजपा के भीतर इसे निष्ठा का प्रतीक माना जा रहा है, वहीं विपक्ष इसे संगठन के अंदर असंतोष की स्वीकारोक्ति के रूप में देख रहा है. पूरा जीवन पार्टी को समर्पित कर दिया, अपेक्षित सम्मान नहीं  गोपाल भार्गव ने यह भी कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन पार्टी को समर्पित कर दिया है. उन्होंने कई बार चुनाव जीते, संगठन को मजबूत किया और सरकार में रहते हुए अहम विभागों की जिम्मेदारी निभाई. इसके बावजूद जब अपेक्षित सम्मान नहीं मिलता, तो पीड़ा स्वाभाविक है. उनका यह बयान भाजपा के उन वरिष्ठ नेताओं की आवाज बनता दिख रहा है, जो खुद को हाशिए पर महसूस कर रहे हैं. भाजपा में वरिष्ठता और अनुभव का सवाल गोपाल भार्गव का राजनीतिक सफर लंबा और प्रभावशाली रहा है. वे रहली विधानसभा से लगातार विधायक चुने गए हैं और कई महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री रह चुके हैं. संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर उनका अनुभव उन्हें भाजपा के मजबूत स्तंभों में शामिल करता है. जनता ने मेरा साथ दिया  गोपाल भार्गव ने कहा ‘हमने उस दौरान बहुत कोशिश की है, जब हमारी सरकार आएंगी तो हमने अपने क्षेत्र का विकास करवाएंगे, इस दौरान जनता ने भी मेरा पूरा साथ दिया है, आज जनता के साथ होने से ही क्षेत्र में विकास कार्य किए जा रहे हैं.’ गोपाल भार्गव का यह बयान अहम माना जा रहा है, राजनीतिक जानकारों का कहना है कि एक तरह से उन्होंने न केवल अपनी पीड़ा जाहिर की है, साथ ही यह भी बताया है कि वह पार्टी के प्रति हमेशा वैचारिक प्रतिबद्धता और राजनीतिक ईमानदारी से काम करते रहे हैं.  गोपाल भार्गव रिकॉर्ड 9वीं बार विधायक  गोपाल भार्गव वर्तमान में मध्य प्रदेश विधानसभा में सबसे सीनियर विधायक हैं, वह सागर जिले की रहली विधानसभा सीट से लगातार 9वीं बार 2023 में विधायक चुने गए थे. वह 2003 से 2013 तक लगातार अलग-अलग विभागों के मंत्री रहे, जबकि 15 महीने की कमलनाथ सरकार के दौरान वह विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी रहे हैं, इसके अलावा 2023 तक वह फिर से मंत्री रहे हैं, लेकिन नई सरकार में उन्हें जिम्मेदारी नहीं मिली है. बीजेपी में गोपाल भार्गव के प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक पकड़ को अहम माना जाता है. ऐसे में उनका यह बयान फिलहाल चर्चा में बना हुआ है.   मोहन कैबिनेट से बाहर रहने की पीड़ा मुख्यमंत्री मोहन यादव की वर्तमान कैबिनेट में गोपाल भार्गव को मंत्री पद नहीं मिला. इसके बाद से ही उनके … Read more

पीएम मोदी पर राहुल का तीखा वार— ‘सदन में आने से डरते हैं’, सरकार की मंशा पर उठाए सवाल

नई दिल्ली कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने संसद की कार्यवाही और सरकार के रवैये को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री सदन में आने से डरते हैं और अगर सच में कोई खतरा था तो FIR दर्ज करानी चाहिए थी। राहुल गांधी ने बताया कि पूरा विवाद कुछ दिन पहले पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे की किताब से जुड़े मुद्दे से शुरू हुआ। उनका आरोप है कि सरकार नहीं चाहती थी कि वह इस विषय पर कोई भी बात रखें, इसी वजह से सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई और उन्हें बोलने नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि पहले यह कहा गया कि वह किताब से उद्धरण नहीं दे सकते, फिर मैगज़ीन से भी कोट करने से रोका गया और अंत में बिना किसी उद्धरण के बोलने की इजाज़त भी नहीं दी गई। उन्होंने रक्षा मंत्री पर भी झूठा दावा करने का आरोप लगाया कि संबंधित किताब प्रकाशित नहीं हुई है, जबकि किताब प्रकाशित हो चुकी है और उसकी प्रति मौजूद है। राहुल गांधी ने कहा कि यह केवल एक मुद्दा नहीं है, बल्कि इससे बड़ा सवाल यह है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर विपक्ष के नेता और पूरे विपक्ष को बोलने का मौका ही नहीं दिया गया। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि सत्ताधारी पार्टी के एक सदस्य ने कई किताबों से उद्धरण देते हुए आपत्तिजनक बातें कहीं, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं, विपक्ष के सदस्यों को लगातार रोका गया और कई सांसदों को निलंबित कर दिया गया। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया। प्रधानमंत्री की सुरक्षा को लेकर लगाए गए आरोपों पर राहुल गांधी ने कहा कि यह दावा पूरी तरह झूठा है कि विपक्ष के सदस्य पीएम को धमकी देने वाले थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सदस्यों की वजह से नहीं, बल्कि सच्चाई से डरकर सदन में नहीं आए। अगर सच में किसी ने धमकी दी होती, तो तुरंत FIR दर्ज होती और गिरफ्तारी होती, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष चर्चा और बहस चाहता है, लेकिन सरकार इससे बच रही है। उनके अनुसार, सरकार बजट और अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते जैसे मुद्दों पर चर्चा से डरती है, क्योंकि इनसे किसानों और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर को लेकर सवाल उठाए जाएंगे। उन्होंने साफ कहा कि सरकार बहस से भाग रही है और यही वजह है कि प्रधानमंत्री सदन से दूर रहे।

लोकसभा में सरकार पर गंभीर आरोप, कांग्रेस की महिला सांसदों का अध्यक्ष को पत्र

नई दिल्ली कांग्रेस की महिला सांसदों ने सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर उन पर सरकार के निरंतर दबाव में काम करने का आरोप लगाया और कहा कि उन्हें सदन के निष्पक्ष संरक्षक के रूप में कार्य करना चाहिए उन्होंने यह पत्र उस वक्त लिखा है जब बिरला ने बीते गुरुवार को कहा था कि इससे एक दिन पहले कांग्रेस के कई सदस्य सदन के नेता (प्रधानमंत्री) की सीट के पास पहुंचकर किसी अप्रत्याशित घटना को अंजाम देना चाहते थे, इसलिए उनके अनुरोध पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सदन में नहीं आए।   इस पत्र पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा, सांसद वर्षा गायकवाड़, ज्योति मणि और कुछ अन्य महिला सांसदों के हस्ताक्षर हैं। कांग्रेस की महिला सांसदों ने पत्र में लिखा, “हम यह पत्र गहरे दुःख और संवैधानिक दायित्व की भावना के साथ लिख रहे हैं। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि आपको, लोकसभा के माननीय अध्यक्ष और इस सदन के संवैधानिक संरक्षक के रूप में सत्तारूढ़ दल द्वारा विपक्ष की महिला सांसदों विशेषकर कांग्रेस की सांसदों के विरुद्ध झूठे, निराधार और मानहानिकारक आरोप लगाने के लिए मजबूर किया गया।” आवाज उठाने के लिए बनाया जा रहा निशाना उन्होंने कहा, “हमें केवल इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि हमने लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनविरोधी सरकार के खिलाफ आवाज़ उठाई है और उनसे जवाबदेही की मांग की है। प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति किसी भय के कारण नहीं थी, वह सिर्फ इस डर के कारण सदन में नहीं आए कि उनमें विपक्ष का सामना करने का साहस नहीं था।” राहुल गांधी को नहीं बोलने दिया गया- कांग्रेस सांसद उन्होंने कहा, “अध्यक्ष का पद एक संवैधानिक दायित्व वाला है जिसका उद्देश्य संसद की गरिमा बनाए रखना, निष्पक्षता सुनिश्चित करना और सभी सदस्यों के अधिकारों की रक्षा करना है, चाहे वे किसी भी दल से हों। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान स्थापित संसदीय परंपरा यह है कि पहले सत्ता पक्ष और फिर विपक्ष को बोलने का अवसर दिया जाता है, जिसके बाद प्रधानमंत्री उत्तर देते हैं।” उनके मुताबिक, पिछले सप्ताह लगातार चार दिनों तक लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को जानबूझकर बोलने का अवसर नहीं दिया गया, जो पूरी तरह अस्वीकार्य है। कांग्रेस की महिला सांसदों ने दावा किया, “दूसरी ओर, विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन के आठ सांसदों को सत्तारूढ़ दल के कहने पर निलंबित किया गया और एक भाजपा सांसद को पूर्व प्रधानमंत्रियों के बारे में अभद्र भाषा में बोलने की अनुमति दी गई।” उन्होंने कहा, “जब हम आपसे मिले, तो हमने न्याय की मांग की और उन भाजपा सांसद के निलंबन की मांग की। आपने स्वयं स्वीकार किया कि एक गंभीर गलती हुई है और हमें शाम चार बजे फिर आने को कहा। दोबारा मिलने पर आपने कहा कि आप सरकार की प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि अब आप इन मामलों में निर्णयकर्ता नहीं हैं।” बिरला के अधिकारों पर उठाए सवाल महिला सदस्यों ने दावा किया कि इससे अध्यक्ष के रूप में बिरला की स्वतंत्रता और अधिकार पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं। कांग्रेस की महिला सांसदों ने कहा, गुरुवार को शाम 5 बजे, परंपरा प्रक्रिया के विरुद्ध, प्रधानमंत्री का लोकसभा में बोलना निर्धारित किया गया। ‘इंडिया’ गठबंधन के सभी सदस्यों ने विरोध में खड़े होकर आपत्ति जताई और प्रधानमंत्री सदन में उपस्थित नहीं हुए।” उन्होंने दावा किया, “अगले दिन, स्पष्ट रूप से सत्तारूढ़ दल के दबाव में आकर प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति का बचाव करते हुए आपने कांग्रेस पार्टी की महिला सांसदों पर गंभीर आरोप लगाए।” उनका कहना है, “हमारे विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और मर्यादित रहे हैं। हममें से अधिकतर साधारण पृष्ठभूमि से आते हैं और कई पहली पीढ़ी की नेता हैं। हमने दशकों तक जनता के बीच संघर्ष करते हुए, भेदभाव और बाधाओं का सामना करते हुए अपना स्थान बनाया है। हमारी ईमानदारी पर प्रश्न उठाना हर उस महिला का अपमान है जो साहस और गरिमा के साथ सार्वजनिक जीवन में अपनी जगह बनाती है।” कांग्रेस की महिला सांसदों ने कहा, “हम हिंसा और धमकी की राजनीति में विश्वास नहीं रखते। हम साहसी निर्वाचित महिला प्रतिनिधि हैं जिन्हें डराकर चुप नहीं कराया जा सकता। हमें विश्वास है कि पारदर्शिता ही अध्यक्ष के पद की गरिमा और इस सदन की विश्वसनीयता को पुनः स्थापित कर सकती है।” उन्होंने बिरला से कहा, “हमें आपके पद और आपके प्रति पूर्ण सम्मान है। किंतु यह स्पष्ट है कि आप पर सत्तारूढ़ दल का लगातार दबाव है। हम आपसे पुनः आग्रह करते हैं कि आप लोकसभा के निष्पक्ष संरक्षक के रूप में कार्य करें। इस प्रयास में हम आपके साथ खड़े रहेंगे और आपको पूरा समर्थन देंगे।”उन्होंने इस बात पर जोर दिया, “इतिहास आपको उस व्यक्ति के रूप में याद रखे जो कठिन परिस्थितियों में भी सही के साथ खड़ा रहा और देश के हित में संवैधानिक मर्यादा की रक्षा की। 

नाबालिग बच्चों पर राजनीति बर्दाश्त नहीं: विवाद के बीच गौरव गोगोई का कड़ा संदेश

गुवाहाटी असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और लोकसभा सांसद गौरव गोगोई ने सोमवार को मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की कड़ी आलोचना की, जिन्होंने कथित तौर पर उनके नाबालिग बच्चों को राजनीतिक विवाद में घसीटा। उन्होंने सीएम सरमा के इस कदम को अस्वीकार्य और राजनीतिक शिष्टाचार की सभी हदें पार करने वाला बताया। गोगोई ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि राजनीतिक लड़ाई सख्ती से नेताओं के बीच लड़ी जानी चाहिए और इसमें बच्चों को कभी भी शामिल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने अपने पांच साल और नौ साल के बच्चों के बारे में की गई टिप्पणियों पर दुख व्यक्त किया और कहा कि ऐसी बातों की सार्वजनिक चर्चा में कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि मैं अपने ऊपर होने वाले किसी भी व्यक्तिगत हमले का सामना करने के लिए तैयार हूं, लेकिन अगर मेरे बच्चों, कांग्रेस कार्यकर्ताओं या आम नागरिकों को निशाना बनाया जाता है तो मैं चुप नहीं रहूंगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ऐसी हरकतें जारी रहीं तो वह इस मुद्दे को आखिर तक ले जाएंगे। गौरव गोगोई ने सीएम सरमा को व्यक्तिगत मामलों को और आगे न बढ़ाने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने उनके बच्चों से संबंधित जानकारी का खुलासा करने की हद पार कर दी है। हम उनके परिवार के बारे में भी जानते हैं। हर कोई जानता है। लेकिन, हमने कभी भी ऐसा व्यवहार नहीं किया है। इन टिप्पणियों से असम को शर्मिंदगी हुई है। गोगोई ने आरोप लगाया कि जानबूझकर गलत जानकारी फैलाई जा रही है। यह मुद्दा इतना गंभीर है कि सुप्रीम कोर्ट का ध्यान आकर्षित करने लायक है और सुझाव दिया कि शीर्ष अदालत को इस मामले का स्वतः संज्ञान लेना चाहिए। गोगोई ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि मुझे ऐसी स्थिति में मजबूर न करें, जहां मुझे जवाब देना पड़े। अपने परिवार के बारे में बात करते हुए कांग्रेस सांसद ने कहा कि उनकी पत्नी एक स्वतंत्र महिला हैं और अपने बच्चों की देखभाल करने में पूरी तरह सक्षम हैं। एक व्यक्तिगत उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि उनका पालन-पोषण ज्यादातर उनकी मां ने किया है और उनके बच्चों का पालन-पोषण भी इसी तरह से हो रहा है। जब वे 18 साल के हो जाएंगे, तो वे अपने फैसले खुद लेंगे। गोगोई ने यह भी कहा कि यह प्रेस कॉन्फ्रेंस राजनीतिक नाटक के लिए नहीं बल्कि मीडिया और असम के लोगों की गरिमा बनाए रखने के लिए थी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बच्चों को राजनीतिक हमलों में घसीटने से राज्य को शर्मिंदा किया गया है और यह मुख्यमंत्री के पद पर बैठे व्यक्ति के लिए अशोभनीय है। मैं असम के लोगों से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए राजनीति में हूं। लोगों को फैसला करने दीजिए।

लोकसभा में टकराव तेज़: ‘किसी को दिलचस्पी नहीं’ कहकर शशि थरूर ने स्पीकर और वित्त मंत्री को क्यों घेरा?

नई दिल्ली लोकसभा में सदन चलाने के लिए सुलह की बातचीत के बाद भी विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच सोमवार को जमकर नोकझोंक हुई जिसके कारण सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई। इस बीच, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने केंद्र सरकार और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पर संसद चलाने में रुचि नहीं लेने का आरोप लगाया और कहा कि लोकसभा में बार-बार व्यवधान के कारण वह केंद्रीय बजट 2026-27 पर बोलने में असमर्थ रहे। सदन के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए थरूर ने कहा कि वह बजट चर्चा में भाग लेने के लिए तैयार होकर आए थे लेकिन उन्हें ऐसा करने की बहुत कम गुंजाइश मिली। उन्होंने कहा,”ऐसा लगता है कि सरकार और लोकसभा अध्यक्ष को सदन चलाने में कोई दिलचस्पी नहीं है।”   थरूर ने सदन की कार्यवाही के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाए और कहा कि इसका मतलब साफ है कि सदन में स्थगन पहले से ही तय था। उन्होंने कहा, “वित्त मंत्री सदन में बैठी ही नहीं थी।” उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि उन्हें पता था कि सदन स्थगित कर दिया जाएगा।” संसद के दोनों सदनों में सोमवार को केंद्रीय बजट 2026-27 पर चर्चा होने वाली थी क्योंकि सीतारमण ने 1 फरवरी को बजट पेश किया था लेकिन यह चर्चा नहीं हो सकी। 2 बजे से पहले भी दो बार स्थगन लोकसभा में दो बार के स्थगन के बाद दोपहर 2 बजे जैसे ही फिर सदन की कार्यवाही शुरु हुई और पीठासीन अधिकारी संध्या राय ने बजट पर चर्चा की शुरुआत कराने के लिए कांग्रेस के शशि थरूर का नाम लिया। उन्होंने थरूर का नाम लेते हुए उन्हें बजट पर बोलने के लिए कहा लेकिन थरूर ने कहा कि विपक्ष के नेता सदन में बोलना चाहते हैं। यह उनका अधिकार है, लेकिन उन्हें बोलने नहीं दिया जा रहा है। इस पर पीठासीन संध्या राय ने कहा कि सबको बोलने का अधिकार है लेकिन इस समय सिर्फ बजट पर ही बोलना है। सदन में बोलने नहीं दिया जा रहा: राहुल गांधी इसी बीच सदन में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि करीब एक घंटा पहले वह लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिले थे और उन्होंने कहा था कि वह उन्हें सदन में कुछ मुद्दों पर बोलने की अनुमति देंगे लेकिन सदन की कार्यवाही शुरु होते ही सरकार अपनी बात से पीछे हट गई है। राहुल ने आरोप लगाया कि उन्हें सदन में बोलने नहीं दिया जा रहा है। इस पर पीठासीन अधिकारी ने व्यवस्था दी कि सदन में सिर्फ बजट पर ही बोलना है। इसके अलावा आपको अन्य किसी विषय पर नहीं बोल सकते क्योंकि किसी अन्य विषय पर बोलने के लिए आपकी तरफ से कोई नोटिस नहीं है इसलिए आप सिर्फ बजट पर अपनी बात कह सकते हैं। उनका कहना था कि बजट के अलावा किसी और विषय पर सदन में बोलना है तो पहले नोटिस देना पड़ेगा। सदन को गुनराह कर रहे राहुल: किरेन रिजिजू इस दौरान संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने हस्तक्षेप करते हुए कहा “जिस मुलाकात की बात विपक्ष के नेता कर रहे हैं उस दौरान वह भी अध्यक्ष के कमरे में थे। राहुल गांधी के साथ उनकी पार्टी के नेता के सी वेणुगोपाल भी थे लेकिन उस समय अध्यक्ष ने कहा था कि यदि शांतिपूर्ण तरीके से सदन चलाने पर सहमति बनती है तो बोलने दिया जाएगा। आप जो बोलना चाहते हैं उस पर बोलने की बात नहीं हुई थी।” रिजिजू ने कहा, “राहुल गांधी सदन में इस मुलाकात में हुई बात को लेकर जो कुछ कह रहे हैं ऐसी कोई बात अध्यक्ष के कमरे में नहीं हुई थी। अध्यक्ष ने कहा कि यदि सबकी सहमति बनती है और सदन शांति से चलता है तो देखेंगे। यह बात हुई थी।” थरूर ने अपना नाम आने के बाद भी नहीं बोला इतना के बाद राय ने फिर से डॉ थरूर को बजट पर बोलने के लिए कहा लेकिन उन्होंने बजट पर कुछ नहीं बोला। इसी बीच, दोनों तरफ से तकरार तेज हो गयी तो पीठासीन अधिकारी ने सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी। इससे पहले 11 बजे अध्यक्ष ओम बिरला ने जैसे ही प्रश्नकाल शुरु किया तो विपक्षी दलों के सदस्यों ने हंगामा शुरु कर दिया जिसके कारण उन्हें 12 बजे तक सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। फिर 12 बजे सदन शुरु हुआ तो विपक्ष के तेवरों में कोई बदलाव नहीं आया जिसके कारण सदन को दो बजे तक स्थगित किया गया था।

सदन में टकराव चरम पर: राहुल-खरगे को नहीं मिला मौका, विपक्षी सांसदों का वॉकआउट

नई दिल्ली संसद के बजट सत्र के दौरान दोनों ही सदनों में जमकर हंगामा हो रहा है। मंगलवार को कार्यवाही शुरू होते ही लोकसभा में हंगामे का दौर शुरू हो गया और थोड़ी ही देर बाद सदन को 2 बजे तक स्थगित करना पड़ा। दूसरी तरफ राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे को ना बोलने देने का आरोप लगाते हुए विपक्षी सांसदों ने वॉकआउट कर दिया। एक बार स्थगन के बाद बारह बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही पीठासीन अधिकारी कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने जरूरी कागजात सभा पटल पर रखवाए। उन्होंने उसके बाद आम बजट पर चर्चा की शुरुआत करने के लिए कांग्रेस के शशि थरूर का नाम पुकारा। इस बीच कांग्रेस के कयी सदस्य अपने स्थान से खड़े होकर शून्यकाल के साथ राहुल गांधी को अपनी बात रखने देने की मांग करने लगे। पीठासीन अधिकारी ने बार बार कहा कि यह समय बजट पर चर्चा के लिए निर्धारित किया गया है और विपक्ष के नेता बजट पर अपनी बात रख सकते हैं। इस पर कांग्रेस समेत विपक्ष के सदस्य श्री गांधी को अपनी बात रखने देने की मांग करने लगे। विपक्षी सदस्य अपने स्थान पर खड़े होकर अपनी मांग को लेकर शोरगुल करने लगे जिसके कारण सदन की कार्यवाही दो बजे तक स्थगित कर दी गई। इससे पहले कार्यवाही शुरू होते ही अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन को बताया कि छह फरवरी को अंडर-19 भारतीय क्रिकेट टीम ने विश्व कप जीता है इसके लिए उन्हें वह सदन की तरफ से बधाई देते हैं। युवा क्रिकेट टीम को बधाई देने के बाद श्री बिरला ने प्रश्न काल की कार्रवाई शुरू की तो विपक्षी दलों के सदस्य अपनी मांगों को लेकर सीटों पर खड़े हो गए और जोर-जोर से बोलने लगे। अध्यक्ष ने इसी बीच प्रश्न काल की कार्यवाही को आगे बढ़ाया लेकिन विपक्ष की तरफ से तेज हंगामा शुरू हो गया। बिरला ने हंगामा कर रहे सदस्यों से कहा कि प्रश्न काल के बाद सदस्यों को बोलने का अवसर दिया जाएगा। उनका कहना था कि वह हमेशा सब सदस्यों को बोलने का अवसर देते हैं इसलिए सदन को बाधित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बजट पर चर्चा होगी तो सभी दलों को अपनी बात रखने का मौका मिलेगा इसलिए प्रश्न काल को चलने दें। उनका कहना था कि यह सदस्यों का समय होता है और सबको मौका मिलना चाहिए इसलिए वह सभी सदस्यों से सदन को बाधित न करने का आग्रह कर रहे है। सदन में सार्थक चर्चा के लिये सहयोग करें। उन्होंने तेज लहजे में कहा कि सदस्य नियमित सदन की कार्यवाही में अवरोध करने का प्रयास कर रहे हैं और उन्हें ऐसा नहीं होना चाहिए। इसी बीच सदस्य नारे लगाते हुए सदन के बीचों-बीच आ गये और शोर शराबा करने लगे। हंगामा और बढ़ने लगा तो श्री बिरला ने सदन की कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित कर दी।  

महाराष्ट्र में BJP की चुनावी लहर, जिला परिषद में जीत से विपक्ष को करारा झटका

मुंबई महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनावों में बड़ी जीत हासिल करने के बाद भाजपा ने एक बार फिर से परचम लहराया है। भाजपा को जिला परिषद चुनावों में 145 सीटों पर बढ़त मिली है। इसके अलावा एकनाथ शिंदे की शिवसेना 85 और अजित पवार की एनसीपी 80 सीटों पर आगे है। राज्य में कुल 731 जिला परिषद और 1462 पंचायत समिति के लिए रविवार को मतदान हुआ था। इसमें करीब 2 करोड़ वोटर शामिल हुए थे। पहले ये चुनाव 5 फरवरी को ही होने वाले थे, लेकिन डिप्टी सीएम अजित पवार के निधन के चलते इन्हें टाल दिया गया था और फिर 8 फरवरी को ही मतदान हुआ और आज नतीजे आ रहे हैं। अब तक मिली जानकारी के अनुसार भाजपा को सांगली, सतारा और पनवेल जैसे इलाकों में बढ़त मिली है। वहीं अजित पवार के गढ़ बारामती में एनसीपी काफी आगे है। माना जा रहा है कि एनसीपी को अजित पवार के निधन के चलते सहानुभूति लहर का फायदा मिला होगा। अजित पवार को पुणे और मराठवाड़ा क्षेत्र के बड़े नेताओं में गिना जाता था। उनकी इस इलाके में अच्छी पकड़ रही है। ऐसे में उनकी निधन के चलते सहानुभूति की लहर पैदा होने की बात भी की जा रही है। जिला परिषद की कुल 731 सीटों के चुनाव में भाजपा सबसे आगे है। उसके सहयोगी शिवसेना और एनसीपी दूसरे और तीसरे नंबर पर हैं। वहीं विधानसभा चुनाव के बाद से ही निराशा झेल रहे विपक्ष को एक बार फिर झटका लगा है। यहां कांग्रेस को 30 सीटें ही मिली हैं। वहीं उद्धव ठाकरे की शिवसेना 21 सीटों पर ही बढ़त हासिल कर पाई है। पुणे, सोलापुर जैसे जिलों में एनसीपी ने बाजी मारी है। सोलापुर और पुणे में एनसीपी आगे, सहानुभूति की दिखी लहर सोलापुर में एनसीपी अब तक 24 सीटों पर आगे है। इसके अलावा पुणे में भी उसे बढ़त हासिल हुई है। सोलापुर में कांग्रेस का अब तक खाता भी नहीं खुल पाया है। अब सतारा की बात करें तो भाजपा को यहां 32 सीटों पर बढ़त है। इसके अलावा एनसीपी को 17 और शिवसेना को 10 सीटों पर बढ़त हासिल है।  

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी, विपक्ष ने बताए कारण

नई दिल्ली संसद का बजट सत्र 2026 अब तक काफी हंगामेदार रहा है. हर दिन सदन की कार्यवाही विपक्षी सांसदों के चलते स्थगित करनी पड़ रही है. आज सोमवार को भी लोकसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी गई. वहीं, सूत्रों से जानकारी मिली है कि विपक्षी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की योजना बनाई है. सूत्रों के मुताबिक, विपक्ष इसे बजट सेशन 2026 के दूसरे फेज में पेश करेगा, क्योंकि इसके लिए उसे 20 दिन का नोटिस देना होता है. वहीं, इस फैसले के लिए जो वजहें बताई गई हैं, उनमें सबसे पहले लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बोलने की इजाजत नहीं देना; दूसरा चेयर पर बैठे पीठासीन अधिकारी द्वारा महिला सांसदों का नाम लिया जाना; तीसरा कुछ ट्रेजरी बेंच सांसदों को हमेशा सदन में प्रिविलेज दिया जाना; और आखिरी जिस तरह से 8 विपक्षी सांसदों को पूरे सेशन के लिए सस्पेंड किया गया शामिल है. लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला तब हुआ जब विपक्ष ने आरोप लगाया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सदन में बोलने नहीं दिया गया. बता दें, पिछले हफ्ते, संसद के निचले सदन में उस समय नारेबाजी और हंगामा हुआ जब राहुल गांधी ने चीन के साथ 2020 के गतिरोध पर चर्चा करने के लिए पूर्व आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवणे की ‘अनपब्लिश्ड’ यादों का जिक्र किया. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने एक आदेश पारित किया था, जिसमें राहुल गांधी से ‘अनपब्लिश्ड’ लिटरेचर का हवाला न देने को कहा गया था और पढ़ने की अनुमति देने से मना कर दिया था. वहीं, 5 फरवरी को स्पीकर बिरला ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सदन में न आने का आग्रह किया था, ताकि कोई भी अप्रिय घटना न हो, क्योंकि उन्हें जानकारी मिली थी कि कुछ कांग्रेसी सांसद सदन में पीएम मोदी की सीट तक आ सकते हैं और ‘ऐसी घटना कर सकते हैं जो पहले कभी नहीं हुई.’ आज सोमवार को लोकसभा की कार्यवाही में कोई कानूनी काम नहीं हुआ, क्योंकि स्पीकर बिरला ने विपक्ष के भारत-US अंतरिम ट्रेड फ्रेमवर्क पर चर्चा की मांग को लेकर नारेबाजी के बीच सदन को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया, जिससे प्रश्नकाल में रुकावट आई. आज सदन की कार्यवाही शुरू होने के करीब सात मिनट बाद ही स्थगित कर दी गई. जैसे ही प्रश्नकाल शुरू हुआ, विपक्षी बेंचों से नारेबाज़ी जारी रही, सांसदों ने मांग की कि उनके मुद्दों पर ध्यान दिया जाए. हालांकि, स्पीकर बिरला ने सांसदों से अपील की कि वे मर्यादा बनाए रखें, क्योंकि किसी भी सांसद को सदन में बोलने पर कोई रोक नहीं होगी. सदन में रुकावट डालने के लिए विपक्षी सांसदों की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि क्या आप सदन को स्थगित करना चाहते हैं? क्या आप काम नहीं करना चाहते? सदन बहस और चर्चा के लिए है, कृपया मुद्दों पर बात करें और उन्हें उठाएं. सभी को बोलने का मौका मिलेगा; किसी को भी बोलने से नहीं रोका जाएगा. लगातार नारेबाजी जारी रहने से स्पीकर बिरला ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी. संसद के दोनों सदनों में सोमवार को यूनियन बजट 2026-27 पर चर्चा जारी रहने वाली थी, जिसे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को पेश किया था. सीतारमण ने लगातार नौवीं बार लोकसभा में यूनियन बजट 2026-27 पेश किया.

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर मनोज झा का जोर: संसद की भूमिका अहम

नई दिल्ली राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने भारत-अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने टैरिफ को 2.9 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया था और अब 50 फीसदी से घटाकर टैरिफ को 18 प्रतिशत पर लाया गया है, जबकि इस बात पर भारत में सरकार जश्न मना रही है। मनोज झा ने कहा कि असल में यह सामूहिक चिंता का विषय होना चाहिए। समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में मनोज झा ने कहा कि केंद्रीय कैबिनेट के सामूहिक दायित्व को खत्म किया जा चुका है। सवाल विदेश मंत्री से पूछा जाता है तो वह वाणिज्य मंत्री का नाम लेते हैं और वाणिज्य मंत्री इस सवाल को विदेश मंत्री की तरफ बढ़ा देते हैं। राजद सांसद ने कहा कि व्यापार समझौते पर सरकार को संसद को विश्वास में लेना चाहिए और बिंदुवार एक सूची जारी करनी चाहिए, क्योंकि आशंकाओं को सरकार निर्मूल साबित नहीं कर पाई है। रुपए की गिरती कीमत पर भी मनोज झा ने सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि आज कैबिनेट के दो मंत्रियों की उम्र को मिला लें, तब भी रुपया उससे नीचा जा चुका है। संघ प्रमुख मोहन भागवत की टिप्पणी पर राजद सांसद ने कहा कि आजकल ऐसे लोग भी इतिहास और इतिहास के संदर्भों पर बयान देते हैं, जिन्होंने व्हाट्सअप के जरिए ही अपना भविष्य और वर्तमान देखा है। उन्होंने कहा, “जब हिंदू की बात होती है तो मोहन भागवत को बताना चाहिए कि सीवर में उतरकर जहरीली गैस से मरने वाला कौन है। क्या वह हिंदू नहीं है? वह व्यक्ति क्यों आपकी चिंताओं में शुमार नहीं है? अगर वह व्यक्ति आपकी चिंताओं में शुमार नहीं है तो स्पष्ट है कि आपने विसंगतियों से मुंह मोड़ लिया है।” इसी बीच, मनोज झा ने पूर्णिया से निर्दलीय सांसद और कांग्रेस नेता पप्पू यादव की गिरफ्तारी पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस गिरफ्तारी की टाइमिंग को लेकर सवाल उठाया। राजद नेता ने कहा कि मुकदमा लगभग 35 साल पुराना है। उसमें इतनी क्या जल्दी थी कि जब नीट छात्रा की मृत्यु पर बिहार की जनता आक्रोशित है और उस बीच गिरफ्तारी होती है? मनोज झा ने कहा कि इस प्रकरण में टाइमिंग ही महत्वपूर्ण हो चुकी है। क्या यह चुप कराने की कोशिश है?

गौरव गोगोई का तंज: CM हिमंत की प्रेस कॉन्फ्रेंस बनी झूठी दलीलों की हकीकत

नई दिल्ली असम की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा रविवार को लोकसभा सांसद गौरव गोगोई पर गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद अब कांग्रेस नेता ने तीखा पलटवार किया है। मुख्यमंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस को गोगोई ने सदी की सबसे फ्लॉप प्रेस कॉन्फ्रेंस करार दिया। मुख्यमंत्री की ओर से लगाए गए आरोपों के बाद कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट करते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस की कड़ी आलोचना की। उन्होंने लिखा कि उन्हें दिल्ली और असम के उन पत्रकारों पर दया आती है, जिन्हें सदी की सबसे फ्लॉप प्रेस कॉन्फ्रेंस झेलनी पड़ी। बता दें कि प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सीएम सरमा ने कहा कि पाकिस्तानी नागरिक अली तौकीर शेख और एलिजाबेथ गोगोई, जो लोकसभा में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई की पत्नी हैं, से जुड़े आरोप बहुत गंभीर प्रकृति के हैं और इन्हें मामूली मुद्दा नहीं माना जाना चाहिए। एक मौजूदा सांसद की संलिप्तता ने इस मुद्दे को एक सामान्य जांच के दायरे से ऊपर उठा दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये आरोप गंभीर हैं। जब एक मौजूदा सांसद, जो संसद में कांग्रेस पार्टी के उप नेता भी हैं, किसी भी तरह से पाकिस्तान से जुड़े होते हैं, तो मामला अपने आप ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए गोगोई ने लिखा, “मुझे दिल्ली और असम के उन पत्रकारों पर दया आती है जिन्हें सदी की सबसे फ्लॉप प्रेस कॉन्फ्रेंस झेलनी पड़ी। यह एक सी-ग्रेड सिनेमा से भी बदतर था। तथाकथित राजनीतिक रूप से चतुर मुख्यमंत्री ने सबसे बेवकूफी भरे और फर्जी मुद्दे उठाए। यह सुपर फ्लॉप हमारी जोमोय परिवर्तन यात्रा के बिल्कुल उलट है, जो मुख्यमंत्री और उनके परिवार के सदस्यों द्वारा कब्जाई गई 12 हजार बीघा जमीन का खुलासा करने में हिट रही है।” सीएम सरमा ने आगे बताया कि इस मामले की शुरू में असम पुलिस द्वारा गठित एक विशेष जांच दल (एसआईटी) ने जांच की थी। एसआईटी की फाइंडिंग्स के आधार पर, आगे की जांच के लिए सीआईडी पुलिस स्टेशन में एक औपचारिक मामला दर्ज किया गया। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस मामले में एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी, जिसके बाद मामला असम कैबिनेट के सामने रखा गया। विचार-विमर्श के बाद, कैबिनेट ने निष्कर्ष निकाला कि आरोपों के दायरे, संवेदनशीलता और व्यापक प्रभावों के लिए एक केंद्रीय एजेंसी द्वारा जांच की आवश्यकता है।

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