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नेता जब पार्टी से बड़े बनने लगें तो हार तय… कांग्रेस की लगातार हार पर पटवारी का बड़ा बयान

भोपाल  मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने संगठन चुनाव के दौरान पार्टी की लगातार हार के लिए अप्रत्यक्ष रूप से पुराने नेताओं को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि जब नेता पार्टी से बड़े हो गए, तभी कांग्रेस कमजोर होने लगी और विधानसभा, लोकसभा से लेकर स्थानीय निकाय चुनाव तक हार का सिलसिला जारी रहा। हरदा में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने साफ संकेत दिए कि कांग्रेस अब नेतृत्व और संगठन में नई ऊर्जा के साथ बदलाव के रास्ते पर है। पटवारी ने कहा कि राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने तय किया है कि अब संगठन की ताकत कार्यकर्ताओं को दी जाएगी। जिला और ब्लॉक स्तर पर अध्यक्षों का चयन सीधे कार्यकर्ता करेंगे। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे चुनाव में सक्रिय रहें और सही नेतृत्व को चुने। इस बयान से साफ है कि अब कांग्रेस में शीर्ष से लेकर जमीनी स्तर तक नई रणनीति बनाई जा रही है। किसानों के मुद्दे पर BJP पर जमकर बोला हमला जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को घेरते हुए कहा कि सरकार किसान हितैषी होने का दावा कर रही है, लेकिन समर्थन मूल्य पर गेहूं और धान की खरीद नहीं हो रही। उन्होंने मूंग खरीदी को कांग्रेस के आंदोलन का परिणाम बताया और पूछा कि अगर सरकार वाकई किसान हितैषी है तो धान 3100 रुपये और गेहूं 2700 रुपये प्रति क्विंटल क्यों नहीं खरीद रही? उन्होंने लाडली बहना योजना पर भी सरकार को घेरा और कहा कि 3000 रुपये देने का वादा करके अब सिर्फ 1250 रुपये दिए जा रहे हैं। रक्षाबंधन पर 250 रुपये देने की घोषणा को उन्होंने महज दिखावा बताया। उन्होंने कहा कि सिर्फ 250 रुपये बढ़ाये गये जिससे अब 1 किलो मिठाई का ढिब्बा भी नहीं आता है। संगठन चुनाव के जरिए बदलाव की शुरुआत पटवारी ने कहा कि कांग्रेस अब नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि संगठन को मजबूत बनाने में जुटी है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे नए नेतृत्व की पहचान करें और संगठन की रीढ़ बनें। उन्होंने साफ किया कि कांग्रेस अब पहले जैसी नहीं रही और बदलाव की इस लहर में हर कार्यकर्ता की भूमिका अहम है।

MP में कांग्रेस ने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने एक पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत की, विदिशा बनेगा कांग्रेस की प्रयोगशाला

भोपाल  मध्यप्रदेश कांग्रेस कमजोर क्षेत्रों में विदिशा मॉडल लागू करेगी, जिसके तहत 650 पंचायतों और वार्डों में समितियां वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन और इलेक्शन मैनेजमेंट का काम देखेंगी। यह मॉडल उन क्षेत्रों में लागू होगा जहां कांग्रेस पिछले 20 सालों से सत्ता से बाहर है और संगठन कमजोर है। इस मॉडल में एक्सपर्ट्स कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर जमीनी स्तर पर काम करेंगे और 30 जून तक वेरिफिकेशन का काम पूरा किया जाएगा। कार्यकर्ताओं के साथ टिफिन मीटिंग करेंगे पटवारी इसके बाद जुलाई में जीतू पटवारी कार्यकर्ताओं के साथ टिफिन मीटिंग करेंगे और फिर भोपाल और नर्मदापुरम में भी यह मॉडल शुरू किया जाएगा। मध्यप्रदेश में कांग्रेस पिछले 20 सालों से सत्ता से बाहर है, सिर्फ 15 महीनों को छोड़कर पार्टी लगातार चुनाव हार रही है। 2020 में हुए दलबदल के बाद कई क्षेत्रों में कांग्रेस का संगठन बेहद नाजुक स्थिति में है। अब कांग्रेस अपने संगठन को मजबूत करने के लिए विदिशा मॉडल का सहारा ले रही है। पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने संगठनात्मक रूप से सबसे कमजोर जिले विदिशा में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया। पहले जानिए क्या है विदिशा मॉडल पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने संगठनात्मक रूप से सबसे कमजोर जिले विदिशा में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया। इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए 70 एक्सपर्ट्स को चुनकर विदिशा जिले की पांचों विधानसभा सीटों के हर ग्राम पंचायत और वार्ड में भेजा गया। एक्सपर्ट्स ने पंचायत और वार्ड में सबसे पहले कांग्रेस की कमजोरी की वजहों को लेकर रिपोर्ट तैयार की। इसके बाद पंचायत और वार्ड समिति के लिए वैचारिक रूप से मजबूत कार्यकर्ताओं के नाम छांटे। बातचीत के बाद पंचायत और वार्ड समिति का गठन किया। इन समितियों के सदस्य अब गांव और वार्ड में कांग्रेस के लिए काम करेंगे। फर्जी वोटर्स की पहचान से लेकर वोटरलिस्ट वेरिफिकेशन और चुनाव की तैयारी में ये समिति काम करेगी। विदिशा जिले में समितियों के गठन के बाद अब इस मॉडल पर प्रदेश के दूसरे जिलों में काम किया जाएगा। समितियों का डेटा ऑनलाइन हुआ दर्ज कांग्रेस ने विदिशा जिले की पंचायत और वार्ड समितियों का गठन करने के बाद ऑनलाइन डेटा अपलोड भी किया है। इसमें समिति के अध्यक्ष सहित सभी सदस्यों के नाम, मोबाइल नंबर सहित तमाम जानकारी ऑनलाइन दर्ज की गई है। अब इन समितियों के वॉट्सऐप ग्रुप बनाकर आगे संगठन के काम को जमीनी स्तर पर क्रियान्वित किया जाएगा। वेरिफिकेशन का काम 30 जून तक चलेगा विदिशा जिले की पंचायतों और वार्डों में बनाई गई समितियों के वेरिफिकेशन का काम 30 जून तक चलेगा। इसके लिए पीसीसी में एक कॉल सेंटर बनाया जा रहा है। जहां से सभी समितियों के अध्यक्ष सहित तमाम सदस्यों से टेलीफोनिक बातचीत कर सत्यापन किया जाएगा। टिफिन मीटिंग करेंगे जीतू पटवारी विदिशा जिले में गठित हुई पंचायत और वार्ड समिति के अध्यक्षों के साथ पीसीसी चीफ जीतू पटवारी जुलाई के महीने में टिफिन मीटिंग करेंगे। विधानसभा वार होने वाली टिफिन मीटिंग में सभी कार्यकर्ता अपने-अपने घर से भोजन बनवाकर टिफिन लेकर आएंगे और एक जगह पीसीसी चीफ सभी अध्यक्षों के साथ बैठकर चर्चा करेंगे और भोजन करेंगे। अब भोपाल और नर्मदापुरम में होगा काम शुरू विदिशा जिले के बाद कांग्रेस अब इस मॉडल पर भोपाल और नर्मदापुरम संभाग की उन विधानसभाओं में इसपर काम शुरू करेगी। जहां कांग्रेस लगातार चुनाव हार रही है। कांग्रेस का मानना है कि इन दोनों संभागों में कांग्रेस की स्थिति सुधारने की सबसे ज्यादा जरूरत है। विदिशा से हुई पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत कांग्रेस के संगठन प्रभारी संजय कामले ने बताया- कांग्रेस पार्टी ने बहुत महत्वाकांक्षी पायलट प्रोजेक्ट के लिए विदिशा जिले को चुना था। पार्टी में इस बात की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी कि संगठन में किस तरह से संगठन में बदलाव करना चाहिए। कैसे कांग्रेस पार्टी की जमीनी स्तर पर शुरुआत कर सकते हैं। हमारे अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस पर जोर दिया। 70 एक्सपर्ट्स को काम पर लगाया इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए 70 एक्सपर्ट्स को चुनकर विदिशा जिले की पांचों विधानसभा सीटों के हर ग्राम पंचायत और वार्ड में भेजा गया। एक्सपर्ट्स ने पंचायत और वार्ड में सबसे पहले कांग्रेस की कमजोरी की वजहों को लेकर रिपोर्ट तैयार की। इसके बाद पंचायत और वार्ड समिति के लिए वैचारिक रूप से मजबूत कार्यकर्ताओं के नाम छांटे गए। बातचीत के बाद पंचायत और वार्ड समिति का गठन किया गया। इन समितियों के सदस्य अब गांव और वार्ड में कांग्रेस के लिए काम करेंगे। ऑनलाइन डेटा भी किया अपलोड फर्जी वोटर्स की पहचान से लेकर वोटरलिस्ट वेरिफिकेशन और चुनाव की तैयारी में ये समिति काम करेगी। विदिशा जिले में समितियों के गठन के बाद अब इस मॉडल पर प्रदेश के दूसरे जिलों में काम किया जाएगा। कांग्रेस ने विदिशा जिले की पंचायत और वार्ड समितियों का गठन करने के बाद ऑनलाइन डेटा अपलोड भी किया है। इसमें समिति के अध्यक्ष सहित सभी सदस्यों के नाम, मोबाइल नंबर सहित तमाम जानकारी ऑनलाइन दर्ज की गई है। अब इन समितियों के वॉट्सऐप ग्रुप बनाकर आगे संगठन के काम को जमीनी स्तर पर क्रियान्वित किया जाएगा।

शशि थरूर ने यह स्वीकार किया है कि पार्टी नेतृत्व में कुछ नेताओं से उनके मतभेद हैं, लेकिन कांग्रेस, उसके कार्यकर्ता बहुत प्रिय हैं

तिरुवनंतपुरम कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) के सदस्य शशि थरूर ने गुरुवार को यह स्वीकार किया है कि पार्टी नेतृत्व में कुछ नेताओं से उनके मतभेद हैं, लेकिन नीलांबुर निर्वाचन क्षेत्र में उपचुनाव के मद्देनजर वह इस बारे में बात नहीं करेंगे। थरूर ने यहां संवाददाताओं से कहा कि कांग्रेस, उसके मूल्य और उसके कार्यकर्ता उन्हें बहुत प्रिय हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने 16 वर्ष तक पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ निकटता से मिलकर काम किया है और वह उन्हें अपना करीबी मित्र एवं भाई मानते हैं। थरूर ने कहा, ”हालांकि, कांग्रेस नेतृत्व में कुछ लोगों से मेरी राय अलग है। आप जानते हैं कि मैं किस बारे में बात कर रहा हूं, क्योंकि उनमें से कुछ मुद्दे सार्वजनिक हैं और आपने (मीडिया ने) इस बारे में खबरें दी हैं।” उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि उनके मतभेद राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ हैं या प्रदेश नेतृत्व के साथ। तिरुवनंतपुरम के सांसद ने संकेत दिया कि वह उपचुनाव के नतीजों के बाद उन मतभेदों के बारे में बात कर सकते हैं। जब उनसे पूछा गया कि वह उपचुनाव के लिए प्रचार अभियान का हिस्सा क्यों नहीं थे, तो थरूर ने कहा कि उन्हें इसके लिए आमंत्रित नहीं किया गया था, जबकि पिछले साल वायनाड में हुए उपचुनाव सहित अन्य उपचुनावों के दौरान आमंत्रित किया जाता रहा है। उन्होंने कहा, ”मैं वहां नहीं जाता, जहां मुझे आमंत्रित नहीं किया गया हो।” उन्होंने साथ ही कहा कि वह चाहते हैं कि पार्टी कार्यकर्ताओं के प्रचार अभियान के प्रयास सफल हों और नीलांबुर से संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) उम्मीदवार की जीत हो। थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी हालिया बातचीत के बारे में कहा कि इस दौरान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के सिलसिले में प्रतिनिधिमंडलों की विभिन्न देशों की यात्राओं और वहां हुई चर्चाओं को लेकर बात हुई। उन्होंने कहा, ”घरेलू राजनीति के किसी मामले पर चर्चा नहीं हुई।” उन्होंने प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने के केंद्र के निमंत्रण को स्वीकार करने के अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि जब वह संसद की विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष बने थे, तब उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया था कि उनका ध्यान भारत की विदेश नीति एवं उसके राष्ट्रीय हित पर है, न कि कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की विदेश नीति पर। उन्होंने कहा, ”मैंने अपना रुख नहीं बदला है। जब राष्ट्र से जुड़ा कोई मुद्दा सामने आता है तो हम सभी का कर्तव्य होता है कि हम देश के लिए काम करें और बोलें। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान मैंने जो कहा, वह मेरी अपनी राय थी।” थरूर ने कहा, ”मेरी सेवाएं केंद्र ने मांगी थीं। वास्तव में, मेरी पार्टी ने ये (सेवाएं) नहीं मांगी, इसलिए मैंने एक भारतीय नागरिक के रूप में अपना कर्तव्य गर्व से निभाया।”  

शाहनवाज ने कहा- ईरान में तनाव के बीच भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए सरकार सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध

नई दिल्ली भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद शाहनवाज हुसैन ने ईरान में बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए केंद्र द्वारा शुरू किए गए ‘ऑपरेशन सिंधु’ पर गुरुवार को कहा कि भारत सरकार अपने हर नागरिक की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने मुख्य विपक्षी दल को पाकिस्तान के एजेंडे की कार्बन कॉपी बताया। सैयद शाहनवाज हुसैन ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा, “जब भी भारतीय नागरिकों को विदेश में किसी संकट का सामना करना पड़ा है, मोदी सरकार ने हमेशा सक्रियता से जवाब दिया है। ‘ऑपरेशन सिंधु’ के तहत 110 से ज्यादा लोगों को निकाला जा चुका है और आगे भी निकाला जाएगा। भारत सरकार हर भारतीय की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, चाहे वे कहीं भी हों।” कांग्रेस पार्टी द्वारा पाकिस्तान का नैरेटिव चलाने के आरोप पर शाहनवाज हुसैन ने कहा, “कांग्रेस हर सवाल उठाती है जो पाकिस्तान उठाता है, यह पाकिस्तान के एजेंडे की कार्बन कॉपी बन गई है। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतनी बड़ी पार्टी देश की चिंताओं पर पाकिस्तान के नैरेटिव को प्राथमिकता देती है। उन्होंने निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी को क्या हो गया है? यह पाकिस्तान जैसा ही नैरेटिव और प्रोपेगैंडा फैलाती है।” प्रधानमंत्री मोदी के बिहार दौरे पर शाहनवाज हुसैन ने कहा, “प्रधानमंत्री बिहार जा रहे हैं और लोगों में काफी उत्साह है। सीवान में एक बड़ी रैली होने वाली है। जब भी प्रधानमंत्री बिहार आते हैं, राजद नेता बयान जारी करना शुरू कर देते हैं। प्रधानमंत्री राज्य के विकास को लेकर काफी चिंतित हैं। वह कभी खाली हाथ नहीं जाते, पिछली बार वह 87,000 करोड़ रुपए का पैकेज लेकर आए थे और एक एयरपोर्ट का उद्घाटन किया था।” सपा नेता एस.टी. हसन के बयान पर उन्होंने कहा कि हसन को मालूम नहीं है कि योग शरीर के लिए बहुत जरूरी है, पूजा इबादत एक अलग विषय है, इसको इबादत से क्यों जोड़ रहे हैं। पूरे इस्लामी देशों में लोग योग करते हैं, इनको यहां योग में दिक्कत हो रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “अगर हसन साहब योग करेंगे तो स्वस्थ रहेंगे और बयान भी ठीक-ठीक देंगे।” बता दें कि समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और मुरादाबाद से पूर्व सांसद डॉ. एस.टी. हसन ने योग दिवस पर कर्मचारियों को दिए जाने वाले विशेष ब्रेक को लेकर सवाल उठाए हैं।

कांग्रेस पार्टी एक बार फिर फर्जी खबरों की फैक्ट्री और झूठ का जनरेटर साबित हुई: शहजाद पूनावाला

नई दिल्ली  पीएम नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की फोन पर हुई 35 मिनट की बातचीत पर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस बातचीत से यह साफ हो गया है कि कांग्रेस पार्टी फर्जी खबरों की फैक्ट्री और झूठ का जनरेटर है। शहजाद पूनावाला ने बुधवार को समाचार से बातचीत के दौरान कहा कि कांग्रेस पार्टी एक बार फिर फर्जी खबरों की फैक्ट्री और झूठ का जनरेटर साबित हुई है। कांग्रेस पार्टी आईएनसी की तरह कम और पीएनसी (पाकिस्तानी नेशनल कांग्रेस) की तरह ज्यादा बोलती है। राहुल गांधी विपक्ष के नेता की तरह कम और पाकिस्तान प्रोपेगेंडा फैलाने वाले नेता की तरह ज्यादा बोलते हैं। विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए पूनावाला ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कांग्रेस की ओर से जो झूठ फैलाया गया, उसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पीएम मोदी की बातचीत ने बेनकाब कर दिया है। पीएम मोदी ने इस बातचीत में स्पष्ट कर दिया है कि पाकिस्तान के मामले में किसी भी तीसरे देश की मध्यस्थता नहीं हुई है। जबकि कांग्रेस लगातार इस बात को उठाती रही कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-पाक सीजफायर में मध्यस्थता की। ट्रंप के साथ बातचीत में पीएम मोदी ने स्पष्ट कर दिया है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान डीजीएमओ ने सीजफायर की गुहार भारत से लगाई थी। लेकिन, कांग्रेस सरेंडर और अन्य घटनाओं से जोड़कर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का मजाक बनाती रही। ट्रंप के साथ बातचीत में पीएम मोदी ने आतंकवाद के मामले पर साफ कर दिया है कि अगर पाकिस्तान की ओर से गोली चलाई जाएगी तो यहां से बदले में गोला चलाया जाएगा। आतंकवाद को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पूनावाला ने मांग की है कि कांग्रेस जो हमेशा से सेना का अपमान करती रही है, उसने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता पर सवाल उठाकर भी सेना का अपमान किया। पाकिस्तान की प्रशंसा करने वाली इस कांग्रेस पार्टी को देश की सेना से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ट्रंप ने पीएम मोदी को अमेरिका आने का भी आग्रह किया था। लेकिन, शेड्यूल की व्यवस्थता को देखते हुए नहीं जा पाए। लेकिन, जल्द ही मुलाकात पर सहमति बनी है। कांग्रेस को यह सोचना चाहिए कि मोदी विरोध के चक्कर में वह देश का विरोध करने लगे हैं।

राज ठाकरे ने कहा- राज्य में जबरन हिंदी थोपने की कोशिश की जा रही है, जिसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा

मुंबई  महाराष्ट्र में तीसरी भाषा के रूप में हिंदी अनिवार्य करने के फैसले पर मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने राज्य सरकार को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि राज्य में जबरन हिंदी थोपने की कोशिश की जा रही है, जिसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा। हम हिंदू हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम हिंदी (भाषी) भी हैं। महाराष्ट्र की स्मिता मराठी भाषा से जुड़ी है और मराठी को सम्मान मिलना चाहिए। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने बुधवार को हिंदी भाषा को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने आशंका जताई कि आने वाले चुनावों में मराठी और हिंदी भाषा का मुद्दा राजनीतिक रूप से गरमा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में “बांटो और राज करो” जैसी स्थिति पैदा की जा रही है और हिंदी जबरन थोपी जा रही है। मनसे प्रमुख ने चेतावनी दी कि अगर हिंदी भाषा को बलपूर्वक थोपा गया तो महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना अपने अंदाज में जवाब देगी। उन्होंने लोगों से अपील की, “अगर मराठी से प्रेम है तो हिंदी थोपने का विरोध करें। यह सरकार को मेरा तीसरा पत्र है। हमने पहले भी लिखा था कि शिक्षा विभाग में मराठी और अंग्रेजी के बाद हिंदी सिर्फ विकल्प होनी चाहिए, अनिवार्य नहीं। मराठी भाषी छात्रों को इससे नुकसान हो रहा है।” राज ठाकरे ने सवाल उठाया कि जब उत्तर प्रदेश, बिहार या मध्य प्रदेश में कोई तीसरी भाषा नहीं सिखाई जाती है तो महाराष्ट्र पर ही हिंदी क्यों थोपी जा रही है? अगर गुजरात में हिंदी नहीं सिखाई जाती तो महाराष्ट्र में क्यों? उन्होंने कहा, “मनसे की ओर से स्कूलों को पत्र भेजा जाएगा और यह देखा जाएगा कि कौन-कौन से स्कूल जबरन हिंदी पढ़ा रहे हैं।” मनसे प्रमुख ने राजनीतिक दलों से भी अपील की कि “मराठी भाषा के सम्मान” के लिए एकजुट होकर इस विषय पर सरकार से सवाल पूछें।

अपराधियों और माफिया का बोलबाला, सीएम सैनी और उनकी सरकार पूरी तरह विफल साबित हुई: रणदीप सिंह सुरजेवाला

नई दिल्ली  कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कानून-व्यवस्था को लेकर हरियाणा की नायब सिंह सैनी सरकार पर बुधवार को हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में अपराधियों का मनोबल सातवें आसमान पर है और आम जनता भय के साए में जीने को मजबूर है। सुरजेवाला ने हरियाणा की छवि को लेकर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि आज राज्य एक ऐसे क्षेत्र के रूप में जाना जा रहा है, जहां अपराध, माफिया राज, गुंडागर्दी, गैंगस्टरों का बोलबाला, लचर पुलिस व्यवस्था और प्रशासनिक उदासीनता ने आम लोगों के जीवन को खौफ से भर दिया है। ऐसे में सरकार को तत्काल प्रभाव से कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और उनकी सरकार इस मामले में पूरी तरह विफल साबित हुई है। एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया कि भाजपा शासित राज्य मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में संगठित अपराध और अराजकता का केंद्र बन गया है। उन्होंने सवाल किया कि क्या हरियाणा की जनता को सुरक्षित माहौल देना सरकार की प्राथमिकता नहीं है? उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “बीजेपी का काम, अपराधी सरेआम! हरियाणा में अपराधियों का मनोबल लगातार बढ़ता जा रहा है। शायद ही कोई दिन गुजरता हो, जब कोई बड़ी आपराधिक घटना नहीं घटती। आज हरियाणा की छवि एक ऐसे राज्य की बन गई है, जहां अपराध, माफिया राज, गुंडे, बदमाश, गैंगस्टर्स, लचर पुलिस व्यवस्था, प्रशासनिक उदासीनता और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण आम लोगों का जीवन अब खौफ के साए में है।” उन्होंने लिखा कि हरियाणा की कानून-व्यवस्था पूरी तरह से फेल हो गई है। दिनदहाड़े हत्या, सरेआम रंगदारी, धमकी के साथ भाजपा के शासन में माफिया राज कर रहे हैं। गैंगस्टरों के हाथों में हरियाणा की सुरक्षा आज खतरे में है, यहां तक की जेल आज गैंगस्टर के ऑफिस बन गए हैं। हरियाणा में अपराध हाईटेक हो गया है। विदेश में बैठे गैंगस्टर के इशारे पर गुर्गे अपराध को अंजाम दे रहे हैं, सोशल मीडिया के जरिए खौफ फैलाने की साजिश, फिरौती और वसूली सैनी सरकार में सबसे बड़ा धंधा बन गया है।

भोपाल कांग्रेस ने बुलाई बड़ी अहम बैठक, चले लात-घूंसे, जिला अध्यक्ष की दावेदारी को लेकर टकराव

 भोपाल   कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान के तहत मंगलवार को कांग्रेसियों में अचानक मारपीट शुरू हो गई। असल में एआईसीसी के पर्यवेक्षक भोपाल आए हुए हैं। वे यहां विधानसभा स्तर पर बैठकें कर जिलाध्यक्ष के दावेदारों से चर्चा कर रहे हैं। मंगलवार की शाम को भी यही कम चल रहा था, इसी बीच कांग्रेसी भिड़ गए। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो खूब वायरल हुआ।  बताया जा रहा कि यह घमासान कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद और कांग्रेस नेता साजिद अली के समर्थकों के बीच हुआ। दोनों पक्षों के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए, जिसके बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। इस घटना ने कांग्रेस की संगठनात्मक एकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस बैठक में एआईसीसी पर्यवेक्षक यशोमति ठाकुर सहित कई बड़े और स्थानीय नेता मौजूद थे, जो भोपाल जिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ चर्चा में व्यस्त थे। एक दूसरे पर किया केस घटना के बाद दोनों पक्षों के कार्यकर्ता एमपी नगर थाने पहुंचे और एक-दूसरे के खिलाफ शिकायती आवेदन दिए। पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायतें दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार, यह हंगामा कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद और कांग्रेस नेता साजिद अली के समर्थकों के बीच हुआ. दोनों पक्षों के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए, जिसके बाद स्थिति बेकाबू हो गई. मारपीट और गाली-गलौज की इस घटना ने कांग्रेस की संगठनात्मक एकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. बैठक में AICC पर्यवेक्षक यशोमति ठाकुर सहित कई वरिष्ठ और स्थानीय नेता मौजूद थे, जो भोपाल जिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ चर्चा में व्यस्त थे. इस दौरान बाहर हुए इस हंगामे ने पार्टी के लिए शर्मिंदगी की स्थिति पैदा कर दी.  घटना के बाद दोनों पक्षों के कार्यकर्ता एमपी नगर थाने पहुंचे और एक-दूसरे के खिलाफ शिकायती आवेदन दिए. पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायतें दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. इस घटना पर बीजेपी ने भी कांग्रेस पर तंज कसा. बीजेपी के मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने X पर लिखा, “कांग्रेस की बैठक या कुश्ती प्रतियोगिता? भोपाल में कांग्रेस का संगठन सृजन अब संघर्ष सृजन बन गया है. जिला कांग्रेस की बैठक में आरिफ मसूद और साजिद अली के समर्थकों के बीच बहस नहीं, सीधे मारपीट हुई. आरोप लगा कि साजिद अली ने चुनाव में BJP का समर्थन किया- जवाब मिला, “बैठक में देशभक्तों की जरूरत नहीं.” फिर क्या था — बहस, धक्का-मुक्की और कुर्सियां चलने लगीं! अब समझ आया कि कांग्रेस में मन की बात नहीं, मुक्कों की बात होती है. अगली बैठक में डॉक्टर आएंगे या पुलिस? इंतज़ार कीजिए….”  बता दें कि ‘संगठन सृजन अभियान’ का शुभारंभ लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बीते 3 जून को भोपाल दौरे के दौरान किया था. इस अभियान के तहत कांग्रेस ने 61 पर्यवेक्षकों को नियुक्त किया है, जो मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में पार्टी की स्थिति का आकलन कर रहे हैं. लेकिन इस तरह की घटनाएं पार्टी की आंतरिक कलह को उजागर कर रही हैं. भाजपा ने कसा तंज सोशल मीडिया पर इस घमासान का वीडियो खूब वायरल हुआ। प्रदेश भाजपा प्रभारी आशीष अग्रवाल ने वीडियो सांझा करते हुए लिखा कि कांग्रेस की बैठक या कुश्ती प्रतियोगिता। भोपाल में कांग्रेस का संगठन सृजन अब संघर्ष सृजन बन गया है। जिला कांग्रेस की बैठक में आरिफ मसूद और साजिद अली के समर्थकों के बीच बहस नहीं, सीधे मारपीट हुई। अगली बैठक में डॉक्टर आएंगे या पुलिस? इंतज़ार कीजिए।

केंद्र सरकार ने जनगणना के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया, सियासत तेज, विपक्षी दल भाजपा पर हुए हमलावर

नई दिल्‍ली केंद्र सरकार ने जनगणना के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इसके बाद से सियासत तेज हो गई है, विपक्षी दल भाजपा पर हमलावर हैं। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा है कि नोटिफिकेशन में जाति जनगणना का कोई जिक्र नहीं किया गया है। उन्‍होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाया है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा, “जनगणना तो होगी, लेकिन इसमें जाति जनगणना का कोई जिक्र नहीं है। अगर इसकी तुलना तेलंगाना सरकार के आदेश से करें तो उस आधिकारिक आदेश में तीन बार ‘जाति जनगणना’ शब्द का स्पष्ट उल्लेख है, यहां तक ​​कि इसे ‘जाति सर्वेक्षण’ भी कहा गया है। इसलिए इस सरकार की मंशा पर संदेह या आशंका होना स्वाभाविक है। क्योंकि सत्ताधारी पार्टी ने हमेशा इसका विरोध किया है। वहीं पीएम मोदी के जी-7 की बैठक में हिस्सा लेने पर उन्‍होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 साल के दौरान कई बैठकों में हिस्‍सा ले चुके हैं, देश को कोई लाभ होता तो दिखता नहीं है। अपनी वाहवाही के लिए विदेश नीति नहीं होती है, यह देश को लाभ पहुंचाने के लिए होती है।

भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा-कांग्रेस लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा करना चाहती है

नई दिल्ली  भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने मंगलवार को कहा कि आज की तारीख में भारत कांग्रेस पर निर्भर नहीं है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि ये लोग कब तक एक्सपायर हो चुकी चीजों को देश के सामने नए ब्रांड के रूप में पेश करते रहेंगे। आखिर कब तक यह लोग कहते रहेंगे कि इस रोड और पोर्ट का शिलान्यास नेहरू जी ने किया था। अब यह कांग्रेस को बंद कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जब से सत्ता से बेदखल हुई है, तब से वो लगातार पुराने गाने ही गा रही है, जिसे अब किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है। कांग्रेस को अब यह स्वीकार करना होगा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत हर तरफ उपलब्धियां अर्जित कर रहा है। आज की तारीख में चौतरफा विकास की बयार बह रही है। लेकिन, अफसोस कांग्रेस इसे स्वीकार नहीं कर पा रही है। उन्होंने जातिगत जनगणना को लेकर कांग्रेस की तरफ से सवाल उठाए जाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि पहले यही लोग कह रहे थे कि केंद्र सरकार जातिगत जनगणना नहीं करा रही है और जब सरकार जातिगत जनगणना कराने की दिशा में अपने कदम आगे बढ़ा चुकी है, तो इन लोगों को मिर्ची लग रही है। ये लोग अब इस पर भी सवाल उठा रहे हैं। ऐसा करके कांग्रेस देश के लोगों के बीच में भ्रम की स्थिति पैदा करना चाहती है, लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे। बता दें कि कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करके केंद्र सरकार के जातिगत जनगणना के फैसले पर सवाल उठाया। उन्होंने अपने पोस्ट में तेलंगाना सरकार की तरफ से जातिगत जनगणना के संबंध में जारी अधिसूचना भी साझा की। कांग्रेस नेता ने अपने पोस्ट में कहा कि जब तेलंगाना सरकार की तरफ से जातिगत जनगणना के संबंध में अधिसूचना जारी की गई थी, तो उसमें ‘जाति’ शब्द का जिक्र तीन बार किया गया था। लेकिन, केंद्र सरकार की तरफ से जारी अधिसूचना में एक बार भी जाति शब्द का उल्लेख नहीं किया गया है। वहीं, उन्होंने इजरायल और ईरान के बीच बनी युद्ध की स्थिति पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि निश्चित तौर पर भारत किसी भी सूरत में युद्ध का पक्षधर नहीं रहा है। भारत हमेशा से विस्तारवादी नीतियों का विरोधी रहा है और आगे भी रहेगा।

पार्टी की अंदरूनी खींचतान या स्वास्थ्य का बहाना? पूर्व विधायक वीरेंद्र रघुवंशी ने पार्टी से दिया इस्तीफा!

शिवपुरी  कांग्रेस पार्टी में एक बार फिर से हलचल मचाने वाला घटनाक्रम सामने आया है। कोलारस विधानसभा से पूर्व विधायक और कद्दावर नेता वीरेंद्र रघुवंशी ने सोमवार को अचानक कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पत्र साझा करते हुए इसका कारण “स्वास्थ्य ठीक न होना” बताया है। चौंकाने वाली बात यह है कि महज एक दिन पहले ही रघुवंशी ने एक महत्वपूर्ण पार्टी बैठक की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की थी, जो 16 जून को कोलारस के होटल फुलराज में आयोजित की जानी है। यह बैठक कांग्रेस संगठन सृजन अभियान के अंतर्गत शिवपुरी जिले के नए जिला अध्यक्ष के चयन को लेकर बुलाई गई है, जिसमें केंद्रीय और प्रदेश पर्यवेक्षक समेत कांग्रेस के दिग्गज नेता आमंत्रित हैं। ऐसे में रघुवंशी का ठीक इसी बीच पार्टी से इस्तीफा देना कई सवाल खड़े करता है। क्या यह वाकई सिर्फ स्वास्थ्य का मामला है या फिर कांग्रेस के अंदरूनी संघर्ष और गुटबाज़ी से उपजी नाराज़गी की एक कड़ी? स्थानीय राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि रघुवंशी लंबे समय से संगठन में उपेक्षा का सामना कर रहे थे। सूत्रों का दावा है कि पार्टी में उनके सुझावों की अनदेखी और नए नेतृत्व के साथ टकराव ने उन्हें हाशिए पर ला दिया था। राजनीतिक गलियारों में कई अटकलें स्थानीय राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि रघुवंशी लंबे समय से संगठन में उपेक्षा का सामना कर रहे थे। सूत्रों का यहां तक दावा है कि, पार्टी में उनके सुझावों की अनदेखी और नए नेतृत्व के साथ टकराव ने उन्हें हाशिए पर ला दिया था। ऐसे में अटकलें ये भी लगाई जा रही हैं कि, अब रघुवंशी किसी अन्य राजनीतिक दल की ओर रुख कर सकते हैं, हालांकि इस पर अभी तक उन्होंने कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। कोलारस के प्रभावशाली नेताओं में वीरेंद्र का शुमार गौरतलब है कि, वीरेंद्र रघुवंशी कोलारस क्षेत्र में प्रभावशाली नेता माने जाते हैं और उनका कांग्रेस से यूं अचानक अलग होना पार्टी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। अब देखना यह है कि कांग्रेस इस घटनाक्रम पर क्या प्रतिक्रिया देती है और रघुवंशी का अगला कदम क्या होता है? वहीं, यह भी अटकलें लगाई जा रही हैं कि रघुवंशी किसी अन्य राजनीतिक दल की ओर रुख कर सकते हैं, हालांकि इस पर अभी तक उन्होंने कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया है। गौरतलब है कि वीरेंद्र रघुवंशी कोलारस क्षेत्र में प्रभावशाली नेता माने जाते रहे हैं और उनका कांग्रेस से यूं अचानक अलग होना पार्टी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। अब देखना यह है कि कांग्रेस इस घटनाक्रम पर क्या प्रतिक्रिया देती है और रघुवंशी का अगला कदम क्या होता है।

दिग्विजय सिंह ने कहा है कि वे युवक कांग्रेस के चुनावों में किसी भी प्रकार से भाग नहीं लेंगे न ही किसी को अपना समर्थन दे रहे

भोपाल  दिग्विजय सिंह ने कहा है कि वे युवक कांग्रेस के चुनावों में किसी भी प्रकार से भाग नहीं लेंगे न ही किसी को अपना समर्थन दे रहे हैं। उन्होंने ये भी कहा है कि लोग ऐसे युवाओं को समर्थन दें जो भाजपा से समझौता न करें और निष्पक्षता से बिना गुटबाजी के काम करें। वहीं, कांग्रेस के सृजन अभियान को लेकर भी उन्होंने कहा कि मैं अपनी तरफ से कोई नाम नहीं दे रहा हूं। उन्होंने सुझाव दिया कि पदाधिकारी चयन करने के लिए जो मापदंड कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने तय किये हैं, उसका पूरी तरह से पालन होना चाहिए। इसी के साथ कहा कि ऐसे किसी व्यक्ति का चयन नहीं होना चाहिए जो किसी और पार्टी से कांग्रेस में आया हो और जिनके पाँच साल पूरे हो गए हैं उन्हें परिवर्तन के लायक मानना चाहिए। यूथ कांग्रेस चुनाव को लेकर दिग्विजय सिंह का बड़ा बयान मध्यप्रदेश में युवा कांग्रेस संगठन चुनाव बीस जून को होंगे। इसे लेकर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया है कि वो किसी को भी अपना समर्थन नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि लंबे समय से वे युवक कांग्रेस के मसलों में किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं कर रहे हैं लेकिन ये ज़रूर कहना चाहते हैं कि ऐसे युवाओं को समर्थन दिया जाए जो बीजेपी के साथ समझौता न करें, बिना गुटबाजी के काम करें और बीजेपी सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ लड़ाई लड़ सकें।  उन्होंने कहा कि कांग्रेस के सामने बहुत चुनौतियां हैं। हमारा संघर्ष का समय है और निडरता से लड़ाई लड़नी है। सृजन अभियान को लेकर कही ये बात इसी के साथ कांग्रेस के ‘सृजन अभियान’ को लेकर उन्होंने कहा है कि पूरे देश में कांग्रेस पार्टी जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्षों की नियुक्ति के लिए पर्यवेक्षक भेज रही है और मध्यप्रदेश कांग्रेस ने भी पर्यवेक्षक भेजे हैं। उन्होंने कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने उम्मीदवारों के लिए कुछ अर्हताएं तय की है और उसका पूरी तरह से पालन होना चाहिए। पूर्व सीएम ने सुझाव दिया कि उनमें ऐसा कोई व्यक्ति नहीं होना चाहिए जो दलबदल कर हाल ही में कांग्रेस में आया हो।साथ ही ऐसे लोग जिनके पाँच साल पूरे हो गए हों, उन्हें परिवर्तन के लायक माना जाना चाहिए। उन्होंने साफ कहा है कि वे न तो किसी का नाम दे रहे हैं, न ही किसी के नाम की पैरवी करेंगे।

कांग्रेस विधायक भैरो सिंह परिहार का वीडियो वायरल, RSS के साथ अच्छे रिश्तों का किया खुलासा

सुनसेर  कांग्रेस और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ दोनों की विचारधारा एकदम अलग है, लेकिन संघ का प्रभाव इतना व्यापक है कि कांग्रेसी भी इससे अछूते नहीं हैं। वैसे तो लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी लगातार आरएसएस को निशाने पर लेते रहते हैं, लेकिन अब उनके ही एक सिपाही का वीडियो वायरल हो रहा है। इस वायरल वीडियो में विधायक कह रहे हैं कि मैं कांग्रेस का विधायक हूं, लेकिन आरएसएस से भी जुड़ा हुआ हूं। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। वायरल वीडियो में क्या है सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो आगर-मालवा क्षेत्र का है। भैरो सिंह परिहार यहां की सुनसेर विधानसभा सीट से विधायक हैं। किसी संगठन के प्रोग्राम में शामिल होने के लिए भैरो सिंह पहुंचे थे। इस दौरान जब माइक उनके हाथ में आया तो वो आरएसएस के साथ अपनी नजदीकियां गिनवाने लगे। भैरो सिंह ने कहा कि वैसे तो वो कांग्रेस विधाय हैं, लेकिन आरएसएस से भी जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि आरएसएस के कई पदाधिकारी उनके करीबी हैं और उन्होंने भी संघ के लिए कई काम किए हैं। इस दौरान भैरो सिंह ने हाल ही में हुए एक समझौते की भी याद दिलाई। 2 साल पहले भी करवाया था समझौता सुनसेर विधानसभा सीट से कांग्रेसी विधायक भैरों सिंह ने कहा कि उन्होंने आरएसएस के लिए काम किया है। इस दौरान परिहार ने एक वाक्या याद दिलाया जब गरोठ सीट से विधायक को पुलिस उठा ले गई थी। उन्होंने कहा कि उस समय जब मुख्यमंत्री आए थे तो उन्होंने मिलकर एक समझौता करवाया था। संघ पदाधिकारियों से शिकायत भी कांग्रेस विधायक भैरो सिंह वायरल वीडियो में संघ पदाधिकारियों से शिकायत करते भी सुनाई दे रहे हैं। भैरों सिंह का कहना है कि अगर वो अभी संघ कार्यालय चले जाएं तो मंडल अध्यक्ष कहेगा कि ना जाने ये कौन आ गया है। शिकायत करते हुए भैरों ने संघ के साथ अपनी नजदीकी और संगठन के लिए काम करने के इतिहास को सबके सामने खुलकर रखा। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर कई लोग इस विषय में चर्चा कर रहे हैं।

विधानसभा क्षेत्र बेलसंड लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के तहत आता है, RJD और JDU में होगी कड़ी टक्कर

पटना  बिहार के दो सौ 43 विधानसभा सीटों में से एक बेलसंड विधानसभा सीट भी है…सीतामढ़ी जिले में स्थित यह विधानसभा क्षेत्र बेलसंड लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के तहत आता है। इस सीट पर 1957 और 1962 में हुए चुनाव में पीएसपी के रामानंद सिंह को जीत मिली थी। 1967 में कांग्रेस कैंडिडेट सी.पी सिंह विधायक चुने गए थे। 1969 में यह सीट फिर पीएसपी के खाते में गई और रामानंद सिंह एक बार फिर से विधायक बने। 1972 में कांग्रेस कैंडिडेट राम सूरत सिंह को जीत हासिल हुई थी। 1977 और 1980 में जनता पार्टी के टिकट पर रघुवंश प्रसाद सिंह विधायक चुने गए थे। 1985 के चुनाव में भी एलकेडी कैंडिडेट रघुवंश प्रसाद सिंह को ही जीत मिली थी। इसके बाद 1990 में कांग्रेस की टिकट पर दिग्विजय प्रताप सिंह बेलसंड के विधायक बने थे। 1995 में जनता दल के नेता रघुवंश प्रसाद सिंह को फिर से जीत हासिल हुई थी। 1996 में इस सीट पर समता पार्टी के वृषण पटेल विधायक चुने गए थे। वहीं 2000 में हुए चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल के उम्मीदवार राम स्वार्थ राय विधायक बने थे। 2005 के फरवरी महीने में हुए चुनाव में लोक जनशक्ति पार्टी की टिकट पर सुनीता सिंह को जीत हासिल हुई थी। 2005 के अक्टूबर महीने में राष्ट्रीय जनता दल के संजय कुमार गुप्ता ने बाजी पलट दी थी। 2010 और 2015 में दोनों बार इस सीट पर जेडीयू कैंडिडेट सुनीता सिंह चौहान विधायक चुनी गईं थीं, लेकिन 2020 के चुनाव में आरजेडी लीडर संजय कुमार गुप्ता ने जेडीयू को शिकस्त दे दिया था। इस बार भी यहां आरजेडी और जेडीयू उम्मीदवारों में कड़ी टक्कर होगी। वहीं 2020 के विधानसभा चुनाव में आरजेडी कैंडिडेट संजय कुमार गुप्ता ने जीत हासिल की थी। संजय कुमार गुप्ता 50 हजार एक वोट लाकर पहले स्थान पर रहे थे। वहीं जेडीयू उम्मीदवार सुनीता सिंह चौहान 36 हजार 70 वोट लाकर दूसरे स्थान पर रहीं थीं तो आरएलएसपी कैंडिडेट ठाकुर धर्मेंद्र सिंह 19 हजार 34 वोट लाकर तीसरे स्थान पर रहे थे। 2015 के विधानसभा चुनाव में बेलसंड सीट पर जेडीयू उम्मीदवार सुनीता सिंह चौहान ने जीत हासिल की थी। सुनीता सिंह चौहान ने लोजपा कैंडिडेट मोहम्मद नासिर अहमद को 5 हजार पांच सौ 75 वोटों से हराया था। सुनीता सिंह चौहान को कुल 33 हजार सात सौ 85 वोट मिले थे, जबकि दूसरे नंबर पर रहे मोहम्मद नासिर अहमद को कुल 28 हजार दो सौ दस वोट मिले थे तो वहीं तीसरे स्थान पर रहे निर्दलीय कैंडिडेट बैद्यनाथ प्रसाद को कुल 11 हजार तीन सौ 66 वोट मिले थे। वहीं 2010 में बेलसंड सीट पर जेडीयू कैंडिडेट सुनीता सिंह ने आरजेडी को शिकस्त दे दिया था। सुनीता सिंह ने आरजेडी कैंडिडेट संजय कुमार गुप्ता को 19 हजार पांच सौ 80 वोटों से हराया था। सुनीता सिंह को कुल 38 हजार एक सौ 39 वोट मिले थे। जबकि दूसरे नंबर पर रहे संजय कुमार गुप्ता को कुल 18 हजार पांच सौ 59 वोट मिले थे तो वहीं तीसरे स्थान पर रहे कांग्रेस कैंडिडेट ताहिर अनीस खान को कुल 13 हजार नौ सौ 96 वोट मिले थे। बेलसंड विधानसभा सीट के चुनावी नतीजों को तय करने में यादव,राजपूत,वैश्य और मुस्लिमों की अहम भूमिका है। 2020 में जेडीयू कैंडिडेट को हराने में आरएलएसपी कैंडिडेट की बड़ी भूमिका थी, लेकिन इस बार उपेंद्र कुशवाहा के एनडीए में शामिल होने से बेलसंड सीट पर जेडीयू उम्मीदवार को थोड़ा फायदा जरूर मिलेगा।

संजीव अरोड़ा की जगह खुद RS जाना चाहते हैं केजरीवाल, कांग्रेस ने हमला बोलते हुए निकाली कुर्सी यात्रा

लुधियाना लुधियाना वेस्ट विधानसभा उपचुनाव में सियासी तापमान तेज हो गया है। कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी (AAP) और उसके संयोजक अरविंद केजरीवाल पर तीखा हमला बोलते हुए शुक्रवार को एक “कुर्सी यात्रा” निकाली। इस यात्रा के माध्यम से कांग्रेस ने केजरीवाल पर राज्यसभा की सीट पाने की लालसा का आरोप लगाया। यात्रा के दौरान बैंड-बाजे के साथ एक रथ पर एक डमी केजरीवाल को एक विशाल कुर्सी पर बैठा दिखाया गया। कांग्रेस समर्थकों ने उस कुर्सी के चारों ओर पार्टी के झंडे लहराते हुए यह संदेश देने की कोशिश की कि लुधियाना वेस्ट सीट पर हो रही यह लड़ाई AAP प्रत्याशी संजीव अरोड़ा को विधायक बनाने की नहीं, बल्कि केजरीवाल को राज्यसभा पहुंचाने की साजिश है। कार्यक्रम में महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लाम्बा और पंजाब कांग्रेस के सह प्रभारी राणा गुरजीत सिंह ने भाग लिया। अलका लाम्बा ने कहा, “दिल्ली में मुख्यमंत्री की कुर्सी छिनने के बाद केजरीवाल सत्ता के लिए बेताब हैं। अब वे पंजाब के माध्यम से राज्यसभा में घुसपैठ करना चाहते हैं। केजरीवाल अब शाही जीवन जीने के आदी हो चुके हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि केजरीवाल ने अपने भ्रष्टाचार में फंसे करीबी लोगों मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन और विभव कुमार को पंजाब में सरकारी पदों पर बैठाया। उन्होंने कहा, “अब केजरीवाल संजीव अरोड़ा की राज्यसभा सीट छीनकर खुद को वहां पहुंचाना चाहते हैं ताकि फिर से वैभवशाली जीवन जी सकें। वह दो राज्यों की Z+ सुरक्षा का आनंद ले रहे हैं।” कांग्रेस प्रत्याशी भारत भूषण आशु ने भी केजरीवाल पर कटाक्ष किया और कहा, “लुधियाना वेस्ट में केजरीवाल विकास की बातें नहीं कर रहे हैं, बल्कि यह उपचुनाव उनकी बेरोजगारी खत्म करने का प्रयास है।” उन्होंने कहा कि केजरीवाल ने 13 वर्षों में पहली बार दिल्ली की नई दिल्ली विधानसभा सीट से हारकर बेरोजगार होने का अनुभव किया है और अब वे राज्यसभा सदस्य की नौकरी ढूंढ रहे हैं। आशु ने कहा कि यह चुनाव केवल एक विधायक के चुनाव की नहीं, बल्कि एक पंजाबी राज्यसभा सदस्य की बलि देकर AAP के बेरोजगार नेता को फिर से सत्ता में पहुंचाने का षड्यंत्र है। कुर्सी यात्रा के जरिए कांग्रेस ने अपने चुनावी अभियान को एक प्रतीकात्मक और आक्रामक रूप दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह यात्रा न केवल कांग्रेस के वोट बैंक को एकजुट करने का प्रयास है, बल्कि AAP की मंशा पर जनता का ध्यान केंद्रित करने की रणनीति भी है।  

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