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बाघ और अब चीतों के बीच फंसा मोहली गांव, विस्थापन रुका, खतरें में 8 हजार जिंदगियां

Mohli village trapped between tigers and leopards, displacement stopped, 8 thousand lives in danger सागर ! मध्य प्रदेश के सबसे बड़े टाइगर रिजर्व में करीब 8 हजार आबादी वाली ग्राम पंचायत मोहली के बंटी यादव 4 महीने पहले विस्थापन की औपचारिकताएं पूरी कर चुके हैं. लेकिन अब तक गांव में विस्थापन प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है. उनका कहना है कि, ”बाघों की आबादी बढ़ रही है, हम अब सुरक्षित नहीं हैं. डर के मारे ना खेती कर पाते हैं, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव हैं. हम सिर्फ इतना चाहते हैं कि यहां से निकलकर सुरक्षित जगह पहुंच जाएं.” गांव की करीब 80 फीसदी आबादी को विस्थापन में मिलने वाले मुआवजे का इंतजार लंबा हो रहा है. टाइगर रिजर्व प्रबंधन का कहना है कि, विस्थापन स्वैच्छिक होता है और जब तक ग्रामसभा की सहमति नहीं मिलेगी, तब तक हम विस्थापन प्रक्रिया शुरू नहीं कर पाएंगे. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि लगातार बाघों की आबादी बढ़ने के अलावा अफ्रीकन चीते भी यहां आने वाले हैं. अगर समय पर विस्थापन नहीं हुआ, तो वन्यप्राणी और इंसान दोनों असुरक्षित होंगे. मोहली का विस्थापन बड़ी समस्यानौरादेही टाइगर रिजर्व में विस्थापन की प्रक्रिया 2014 से चल रही है. हालांकि 2018 में इलाके को राष्ट्रीय बाघ संरक्षण परियोजना में शामिल किया गया था और 2023 में टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया गया था. लेकिन 2010 में यहां अफ्रीकन चीतों को बसाने के लिए सर्वेक्षण हुआ था और तभी तय कर लिया गया था कि पहले यहां विस्थापन की प्रक्रिया शुरू की जाए. उसी समय नौरादेही वाइल्ड लाइफ सेंचुरी हुआ करती थी और यहां पर बाघों की संख्या शून्य थी. लेकिन भविष्य में बाघ और चीता बसाने के लिहाज से यहां 2014 में विस्थापन की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी. तब से लेकर अब तक कई छोटे गांव विस्थापित हो चुके हैं. लेकिन मोहली एक ऐसा गांव है, जिसकी आबादी करीब 8 हजार है और इस गांव का विस्थापन काफी जरूरी है. यहां के 80 से 90 फीसदी लोग विस्थापन की औपचारिकताएं पूरी कर चुके हैं. लेकिन ग्राम सभा द्वारा सहमति नहीं दिए जाने के कारण विस्थापन शुरू नहीं हो पा रहा है. क्या कहते हैं विस्थापित लोगटाइगर रिजर्व के मोहली गांव के 80 फीसदी लोग विस्थापन की औपचारिकताएं पूरी कर चुके हैं. लेकिन ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित ना होने के कारण ये स्थिति बनी है. मोहली के रामा यादव बताते हैं कि, ”जंगली जानवरों से परेशान हैं. विस्थापन मंजूर हो चुका है, लेकिन मुआवजा कम मिल रहा है. अभी 15 लाख रूपए मिल रहे हैं और हम 35 से 30 लाख चाहते हैं. दूसरी तरफ हमारी खेती की जमीन का कोई भी मुआवजा नहीं दिया जा रहा है. पति पत्नी को एक यूनिट में गिना जा रहा है. इसलिए हम अभी नहीं जाना चाहते हैं.” बंटी यादव कहते हैं कि, ”यहां जानवरों का आतंक है. फसलें भी सुरक्षित नहीं रह पा रही हैं. बेरोजगारी, बिजली और पानी की समस्या है. जानवरों के डर से हम लोग खेत भी नहीं जा पाते हैं. पिछले साल मेरे पिताजी पर हमला कर दिया था. यहां पर बाघों की आवाज आती रहती है. चार महीने खाता खुले हो चुके हैं, सरपंच प्रस्ताव नहीं दे रहे हैं, तो अभी पैसा नहीं मिला है. हम लोग विस्थापन चाहते हैं कि सुरक्षित जगह पर पहुंच जाएं. यहां पर हम लोग सुरक्षित नहीं हैं.” क्या कहते हैं वाइल्डलाइफ एक्टिविस्टवाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे का कहना है कि, ”नौरादेही टाइगर रिजर्व में विस्थापन की प्रक्रिया गंभीर होती जा रही है. यहां मौजूद बाघों के हिसाब से बहुत बड़ा एरिया चाहिए है. कोर एरिया में बड़ी संख्या में हजारों लोग रह रहे हैं. ऐसे में विस्थापन की प्रक्रिया में तेजी लाना जरूरी है. प्रबंधन को चाहिए कि स्थानीय लोगों से संपर्क करें. जनप्रतिनिधि सरपंच, विधायक और सांसद सब की सहमति से प्रक्रिया आगे बढ़ना चाहिए. क्योंकि भविष्य में इधर चीते भी आना हैं.” ”नौरादेही टाइगर रिजर्व बेहतर तब बन सकता है, जब यहां जो अंदरूनी समस्याएं हैं उन में मुख्य धारा से कटे लोगों को निर्धारित पैकेज दिया जाए. रोजगार की व्यवस्था की जाए, उन्हें पर्यटन से जोड़ा जाए और स्वावलंबन की योजनाओं से जोड़ा जाए. मुझे विश्वास है कि यहां के लोग अपने इलाके के बाघों और चीतों की सुरक्षा के लिए नई बसाहट में बसेंगे और वन विभाग उन्हें सहयोग करेगा.” क्या कहना है टाइगर रिजर्व प्रबंधन कानौरादेही टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर डाॅ. ए ए अंसारी कहते हैं कि, ”जिन गांवों की ग्राम सभा की सहमति आ गयी है, वहां पर हमने विस्थापन की प्रक्रिया शुरू कर दी है. मोहली गांव की अभी तक हमारे पास ग्राम सभा की सहमति नहीं आयी है. सहमति के उपरांत प्रक्रिया पूरी की जाएगी. चूंकि यह स्वैच्छिक विस्थापन है, इसलिए ग्राम सभा की सहमति के बाद ही प्रक्रिया शुरू होगी. मोहली के अधिकतम लोग जाने को इच्छुक हैं और जैसे ही सहमति मिल जाएगी, हम प्रक्रिया पूरी कर देंगे. मोहली एक बड़ा गांव है, इसके लिए हमें सहमति मिलने पर बजट की मांग करना होगी.”

सेल्फी के चक्कर में मौत से खेल, प्रशासन बना मूकदर्शक

Playing with death for selfie, administration becomes mute spectator सागर, मध्य प्रदेश | मध्य प्रदेश के सागर जिले में इन दिनों राजघाट बांध का दृश्य बेहद आकर्षक बना हुआ है। लगातार हो रही बारिश के बाद राजघाट बांध ओवरफ्लो हो गया है, जिससे बेबस नदी अपने पूरे शबाब पर बह रही है। यह दृश्य सागरवासियों के लिए हर साल का सबसे रोमांचक पल होता है। रविवार को भारी संख्या में लोग इस मनमोहक नज़ारे को देखने और इसका आनंद लेने पहुंचे। परिवार, युवा, बच्चे और पर्यटक – सभी ने इस प्राकृतिक दृश्य का आनंद उठाया। लेकिन इस खूबसूरती के बीच एक गंभीर खतरा छिपा रहा, जिसे नजरअंदाज किया जा रहा है। लोगों की उत्सुकता इतनी अधिक थी कि कई लोग बहती नदी के बेहद करीब चले गए। कुछ तो नदी की धार के बीच जाकर सेल्फी और वीडियो बनाने लगे। कुछ युवाओं को तो खतरनाक चट्टानों और फिसलन भरे किनारों पर स्टंट करते हुए भी देखा गया। यह सब एक अनहोनी को दावत देने जैसा था। दुर्भाग्य की बात यह रही कि इस दौरान कहीं भी सुरक्षा व्यवस्था नजर नहीं आई। न तो पुलिस मौजूद थी और न ही नगर निगम या जल संसाधन विभाग की ओर से कोई निगरानी दल। ऐसे में अगर कोई हादसा हो जाता, तो उसकी सीधी जिम्मेदारी प्रशासन की होती, जो इस गंभीर स्थिति के बावजूद मूकदर्शक बना रहा। राजघाट बांध सागर शहर, मकरोनिया, कैंट एरिया और आर्मी क्षेत्र की जल आपूर्ति का प्रमुख स्रोत है। इससे निकलने वाली बेबस नदी सागर की जीवनरेखा कही जाती है। यह क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है और पिछले कुछ वर्षों में यह एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल बन चुका है। इसे विधिवत पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए सरकार ने लगभग 5 करोड़ रुपये की योजना भी स्वीकृत की है, जिसमें रिसॉर्ट, वॉटर स्पोर्ट्स और अन्य सुविधाएं शामिल होंगी। लेकिन पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ लोगों की सुरक्षा भी उतनी ही आवश्यक है। इस क्षेत्र में अभी तक कोई चेतावनी बोर्ड, बैरिकेडिंग, गार्ड या मेडिकल सहायता की व्यवस्था नहीं की गई है। जबकि यह देखा गया है कि मानसून के दौरान जलस्तर तेजी से बढ़ता है और बहाव बेहद खतरनाक हो सकता है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से अपील की है कि वह इस स्थान पर त्वरित रूप से सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करे। कुछ युवाओं ने सोशल मीडिया पर वीडियो डालकर प्रशासन की लापरवाही को उजागर भी किया है। यह दुखद है कि हम आज भी ऐसे दौर में हैं, जहां सेल्फी की सनक लोगों की जान की कीमत पर भारी पड़ रही है और प्रशासन समय रहते चेतावनी नहीं देता। राजघाट बांध और बेबस नदी का यह दृश्य निश्चित ही एक प्राकृतिक सौंदर्य का प्रतीक है, लेकिन जब तक यहां सुरक्षा की व्यवस्था नहीं होती, तब तक यह सौंदर्य एक संभावित खतरे के रूप में भी देखा जाना चाहिए।

महिला ने पुजारी की चप्पलों से की तड़ातड़ पिटाई, पंडित जी ने मां का आशीर्वाद माना

The woman beat the priest with slippers, the priest accepted it as his mother’s blessing सागर ! बुंदेलखंड के प्रसिद्ध रानगिर के हरसिद्धि माता मंदिर में चैत्र नवरात्रि पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. इस वजह से श्रद्धालुओं को घंटों लंबी-लंबी कतारों में लगकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है. वीआईपी दर्शन करने वालों के कारण उनका इंतजार और लंबा हो जाता है. इस चैत्र नवरात्रि में वीआईपी दर्शन करने वालों पर श्रद्धालुओं का आक्रोश कई बार सामने आया. इससे परेशान होकर आखिरकार एक महिला ने मंदिर के पुजारी की ही पिटाई कर दी. जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. क्या है मामला?सागर के रहली विकासखंड स्थित रानगिर के हरसिद्धि मंदिर में शुरुआत से ही मेले में कई तरह की घटनाएं सामने आईं. मेले में अव्यवस्था, पार्किंग, ठेकेदार द्वारा महिला से मारपीट जैसी घटनाएं सामने आई. सबसे ज्यादा विवाद वीआईपी दर्शन के कारण देखने को मिले. इसको लेकर आम श्रद्धालुओं में काफी आक्रोश था. दरअसल, यहां पूर्णिमा तक मेला चलता है और नवरात्रि के बाद भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु जवारे विसर्जन के लिए पहुंचते हैं. एक महिला वीआईपी दर्शन को लेकर इतनी नाराज हो गई कि उसने मंदिर के पुजारी अनिल शास्त्री को चप्पलों से पीट दिया. वीडियो वायरल होने के बाद जहां कई श्रद्धालु पुजारी की पिटाई को जायज ठहरा रहे हैं. वहीं, कई लोग इस घटना को गलत करार दे रहे हैं. पुजारी ने नहीं की किसी से शिकायतसोशल मीडिया पर जो वीडियो वायरल हो रहा है, वो मंदिर के सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हुआ वीडियो है. हालांकि इस मामले में मंदिर प्रबंधन और मेला प्रबंधन करने वाली रहली जनपद पंचायत द्वारा कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. वहीं, कोई पक्ष पुलिस या कहीं शिकायत करने भी नहीं पहुंचा है. लेकिन वीडियो में साफ तौर पर दिखा रहा है कि महिला मंदिर के पुजारी अनिल शास्त्री को जमकर पीट रही है और फिर पुजारी महिला से बचते हुए भागते नजर आ रहे हैं. पुजारी ने कहा, यह माता का आशीर्वादइस मामले में पुजारी अनिल शास्त्री का कहना है कि “मंदिर का जो सीसीटीवी फुटेज वायरल हुआ है. मैं उसके बारे में ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहता हूं. जो भी हुआ है, वह हरसिद्धि माता की कृपा से हुआ है. कई बार महिलाओं को भाव आ जाते हैं. हो सकता है कि महिला ने ऐसी स्थिति में मारपीट की हो. मैं इसे माता का आशीर्वाद मान रहा हूं. बाकी आप इसे जो चाहें वो समझे.”

सागर वासियों को खुशखबरी नहीं बढ़ेगा जलकर, सम्मेलन में सहमति नहीं बनी, प्रस्ताव अगले सम्मेलन तक टला

Good news for Sagar residents, water tax will not increase, no consensus was reached in the conference, proposal postponed till next conference सागर । शनिवार को निगम परिषद का साधारण सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन निगम के सभागार में रखा गया। जिसमें विधायक शैलेंद्र जैन, महापौर संगीता तिवारी, निगम अध्यक्ष वृंदावन अहिरवार, निगम आयुक्त राजकुमार खत्री समेत एमआईसी सदस्य, पार्षद और अधिकारी, कर्मचारी शामिल हुए। सम्मेलन में सबसे पहले बजट पेश किया गया, जिसको लेकर चर्चा हुई। शहर विकास के मुद्दों पर चर्चा शुरू की गई। इस दौरान नगर निगम क्षेत्र में जलकर बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया। जिसमें बताया गया कि वर्तमान में जलकर की दरें 150 रुपए प्रतिमाह और अनुसूचित जनजाति के लिए 75 रुपए प्रतिमाह है। जिसको बढ़ाकर 263.37 रुपए प्रतिमाह करने और प्रतिवर्ष 5 प्रतिशत की वृद्धि करने के संबंध में प्रस्ताव रखा गया। प्रस्ताव पर चर्चा शुरू की गई। जिसमें निगम के नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के पार्षदों ने जलकर बढ़ाए जाने के प्रस्ताव का विरोध किया। उन्होंने कहा कि पहले निगम जनता को नियमित पानी की सप्लाई करें। उसके बाद जलकर बढ़ाने पर विचार किया जाएगा। वहीं पक्ष के पार्षदों ने भी जलकर बढ़ाने पर आपत्ति ली। भाजपा के पार्षदों ने कहा कि शहर में अभी 10 से 12 दिन ही लोगों को पानी की सप्लाई की जा रही है। ऐसे में जलकर नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। पहले पानी की सप्लाई व्यवस्था को सुधारा जाएगा। नियमित पानी की सप्लाई की जाए, जिसके बाद जलकर बढ़ाने पर बात हो। चर्चा के बाद निगम अध्यक्ष ने जलकर बढ़ाने के प्रस्ताव को अगले नगर परिषद के सम्मेलन में रखने का निर्णय लिया है। सीवर परियोजना संचालन के लिए 100 रुपए प्रतिमाह पर बनी सहमतिसम्मेलन में सीवर परियोजना के संचालन के लिए उपभोक्ता शुल्क 200 रुपए प्रतिमाह और 5 प्रतिशत प्रतिवर्ष वृद्धि का प्रस्ताव रखा गया। जिस पर हितग्राहियों से सीवर संचालक के लिए 100 रुपए प्रतिमाह उपभोक्ता शुल्क लेने पर सहमति जताई गई है। इसके अलावा कटरा बाजार में नवनिर्मित दुकानों के आवंटन पर बात हुई। सिविल लाइन चौराहे का नाम भगवान परशुराम चौराहा के नाम पर करने का प्रस्ताव रखा गया। इसके साथ ही अन्य विषयों पर चर्चा की गई। विरोध करने की तैयारी से पहुंचे थे कांग्रेस पार्षदनिगम सम्मेलन में जलकर बढ़ाने का प्रस्ताव रखने का पहले ही निर्णय हो चुका था। जिसको लेकर कांग्रेस के पार्षद सम्मेलन में जलकर बढ़ाए जाने की स्थिति में विरोध प्रदर्शन करने की तैयारी में पहुंचे थे। उन्होंने विरोध के लिए तख्तियां बनवा रखी थी, जिनमें लिखा था जलकर में वृद्धि नहीं होगी-नहीं होगी। 30 दिन 24 घंटे पानी दो, फिर पानी का पैसा लो जैसे स्लोगन लिखे थे। हालांकि जलकर के प्रस्ताव को अगले सम्मेलन तक टाल दिया गया है।

गिट्टी रेत सप्लाई करने के एवज में दरोगा मांगता है एक लाख रुपये, एसपी को दिया शिकायती आवेदन

Inspector asks for one lakh rupees in return for supplying ballast sand, complaint application given to SP सागर जिले के नरयावली थाना इंचार्ज पर एक डंपर मालिक ने डंपर निकलवाने की एवज में एक लाख रुपया मांगे जाने का आरोप लगाया है। डंपर मालिक ने इस आशय का शिकायती आवेदन पुलिस अधीक्षक कार्यालय में दिया है। आवेदन में डंपर मालिक सुरेंद्र प्रताप सिंह ठाकुर ने आरोप लगाया कि नरयावली थाने के टीआई कपिल लक्षकार उनसे उनके डंपर निकलवाने के एवज में एक लाख रुपया महीना मांग रहे है। नहीं देने पर डंपर पकड़कर थाने में खड़ा कर लेते हैं। डंपर मालिक ने बताया कि बीते 31 जनवरी को उनके तीन डंपर गिट्टी लेकर ग्राम वसोना डैम पर गए हुए थे। रात्रि 8 बजे के करीब नारयावली टीआई अपनी निजी कार से आए और इन्होंने डंपर चालक परिचालक से मारपीट कर जबरदस्ती डंपर पकड़वाकर थाने में रख लिए है। जबकि इनके पास खनिज रॉयल्टी पूरे कागज मौजूद थे। यह सब कागजात उन्होंने आवेदन के साथ पेश किए है। डंपर मालिक ने कहा कि थाना प्रभारी कहते है कि नारयावली थाना क्षेत्र में अगर गिट्टी सप्लाई करनी है तो एक लाख रुपया महीना देना पड़ेगा। वहीं डंपर मालिक के आरोपों को लेकर थाना प्रभारी का कहना है कि पैसे मांगने के आरोप तथ्यहीन है। मैंने तीनों डंपरों पर ओवरलोडिंग की कार्रवाई की है। वहीं इस पूरे मामले पर सागर पुलिस अधीक्षक ने कहा है कि वह मामले की जांच करवाएंगे।

वाहन से पुलिस ने चार लाख के कीमत की अवैध शराब पकड़ी, पिकअप छोड़कर भागे तस्कर

Police caught illegal liquor worth four lakhs from the vehicle, smugglers left the pickup and ran away सागर जिला अवैध शराब की तस्करी का गढ़ बनता जा रहा है। जिले में आए दिन अवैध शराब पकड़ी जा रही है, लेकिन यह अवैध शराब या तो जिले में सक्रिय भगवती मानव कल्याण संगठन के लोग पकड़ रहे है या फिर पुलिस अवैध शराब की रोकथाम के लिए बनाए गए आबकारी विभाग का योगदान इस गोरखधंधे पर लगाम लगाने में शून्य है। यह विभाग सिर्फ नाम का विभाग रह गया है। रविवार के दिन सागर शहर के सिविल लाइन पुलिस ने अवैध शराब तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। पुलिस ने फोर लाइन स्थित बम्होरी चौराहे के पास एक पिकअप वाहन से करीब 4 लाख रुपये कीमत की 81 पेटी अवैध शराब बरामद की है। मिली जानकारी अनुसार शराब को बेहद चालाकी से फिल्मी स्टाइल में भूसे के नीचे छिपाकर रखा गया था। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार मुखबिर ने पुलिस को बताया कि बम्होरी चौराहे के पास एक पिकअप वाहन में भारी मात्रा में अवैध शराब ले जाई जा रही है। सूचना मिलते ही सिविल लाइन पुलिस की टीम ने तत्काल इलाके में घेराबंदी की और संदिग्ध पिकअप वाहन को रोका। जैसे ही पुलिस ने वाहन को रोकने का प्रयास किया, आरोपी वाहन को वहीं छोड़कर मौके से फरार हो गए। पुलिस ने वाहन की तलाशी ली तो भूसे के नीचे छिपाकर रखी गई 81 पेटियां शराब की बरामद हुई। पुलिस ने वाहन को जब्त कर लिया है और फरार आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।

इस धंधे ने BJP नेता को बनाया धनकुबेर, प्रॉपर्टी पर कब्जा कर गाड़ियां भी छीन लेता था पूर्व पार्षद

sagar crorepati businessman money lending fraud rajesh kesharwani income source full details मध्य प्रदेश के सागर जिले में आयकर विभाग ने हाल ही में केशरवानी परिवार के ठिकानों पर छापेमारी की, जिसमें कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई हैं। बीड़ी और कंस्ट्रक्शन कारोबार से जुड़े राजेश और बृजेश केशरवानी ब्याज पर पैसे देने का काम करते थे। इसी धंधे से वह करोड़पति बने। उन्होंने लोगों को ब्याज पर खूब पैसा दिया, जिसे नहीं चुकाने पर उनकी गाड़ियां छीन ली और प्रॉपर्टी पर भी कब्जा कर लिया। आईटी के छापे में उनके पास से सात फार्च्यूनर, क्रिस्टा और इनोवा जैसी लग्जरी कारें मिली है। साथ ही चार किलो 700 ग्राम सोने के साथ करोड़ों के लेनदेन के दस्तावेज भी मिले हैं। दअरसल, आयकर विभाग ने तीन दिन पहले सागर में तीन प्रमुख ठिकानों पर छापा मारा था। जिसमें भाजपा के पूर्व विधायक हरवंश सिंह राठौर और पूर्व पार्षद राजेश और बृजेश केशरवानी के ठिकानों की जांच की गई थी। इन छापेमारियों में विभाग को 150 करोड़ रुपये की संपत्ति के दस्तावेज मिले, जिनमें 100 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति के बेनामी होने की जानकारी सामने आई है। आयकर विभाग को छापेमारी में 150 करोड़ की टैक्स चोरी का भी पता चला है। हालांकि, टीम अभी दस्तावेजों की जांच कर रही है। जिसके बाद और बड़े खुलासे हो सकते है। बता दें कि आयकर विभाग की टीम ने रविवार सुबह सागर में छापामार कार्रवाई की थी। इस दौरान एक टीम ने भाजपा के पूर्व विधायक हरवंश सिंह राठौर और उनके भाई कुलदीप राठौर के घर छापेमारी की। वहीं, दूसरी टीम ने पूर्व पार्षद राजेश केशरवानी, उनके भाई बृजेश केशरवानी और सहयागी राकेश छावड़ा के घर छापा मारा था। तीन दिन की जांच के बाद आईटी की टीम को करोड़ों की संपत्ति और लेनदेन का पता चला है। किसके घर क्या मिला था? पूर्व पार्षद राजेश केशरवानी के घर से 140 करोड़ से ज्यादा के नकद लेनदेन के दस्तावेज मिले थे। साथ 7 बेनामी लग्जरी कारें और करीब 4.7 किलो सोना और गहने मिले था। सोने और गहनों के दस्तावेज दिखाने के कारण आईटी टीम ने इसे जब्त नहीं किया था।भाजपा पूर्व विधायक हरवंश सिंह राठौर के बंगले से 14 किलो सोना और 3.8 करोड़ रुपये नकद मिले थे। कई प्रॉपर्टी के दस्तावेज के साथ करोड़ों के लेनदेन और टैक्स चोरी की बात भी सामने आई थी। इसके अलावा उनके घर में तीन मगरमच्छ भी पले हुए मिले थे। जिन्हें देखकर आयकर विभाग की टीम भी हैरान रह गई थी।

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