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जेपी अस्पताल: हद है… किसी दूसरे मरीज का एक्स-रे देख डॉक्टर ने शुरू कर दी थी इलाज की तैयार

Jaypee Hospital: This is too much… the doctor started preparing for treatment after seeing the X-ray of another patient भोपाल। राजधानी मॉडल अस्पताल जेपी में एक बार फिर इलाज के प्रति स्टाफ की लापरवाही उजागर हुई है। यदि मरीज चिकित्सक की बात मानकर इलाज शुरू करा देता तो उसको जो नुकसान होता उसकी भरपाई नामुमकिन थी। लेकिन मरीज ने समझदारी दिखाई और सेकेंड ओपिनियन के लिए वह एक निजी अस्पताल पहुंच गया, जहां पता चला कि उसे वो बीमारी ही नहीं है, जिसका इलाज जेपी अस्पताल के चिकित्सक बता रहे थे। दरअसल समीर सूफी नाम का एक मरीज 6 फरवरी को जेपी अस्पताल पहुंचा। उसकी दाढ़ में से अक्सर खून आता रहता है, यही समस्या लेकर वह जेपी अस्पताल गया और यहां डॉ. यश से चैकअप कराया। डॉ. यश ने मरीज का एक्स-रे कराने को कहा। एक्स-रे जेपी अस्पताल में ही हुआ था। एक्स-रे की रिपोर्ट देख डॉ. यश ने मरीज समीर से कहा कि आपका दाढ़ सढ़ गई है, इसे निकालना होगा। मरीज ने इस बात पर आपत्ति भी ली और कहा कि मुझे भोजन चबाने में कोई दिक्कत नहीं होती, लेकिन चिकित्सक ने मरीज की बात को नकार दिया और दाढ़ निकलवाने की राय देता रहा।मरीज ने कराया फिर से एक्स-रेजेपी अस्पताल से निराश होकर लौटे समीर सूफी ने आठ फरवरी को करोंद स्थित पीपुल्स डेंटल अस्पताल में एक संपर्क किया। यहां चिकित्सक ने मरीज का फिर से एक्स-रे किया। इस एक्स-रे में मरीज की दाढ़ को एक दम स्वस्थ्य बताया और खून आने का कारण नस में परेशानी को बताया। इतना ही नहीं इस समस्या का इलाज बिना किसी चीर फाड़ या दाढ़ निकलवाने के बजाए सिर्फ दवाओं से बताया। इस मामले में अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. राकेश श्रीवास्तव का कहना है कि मामले को दिखवाना पड़ेगा, किस स्तर पर गलती हुई है। यदि कहीं कोई चूक हुई है तो कार्रवाई भी की जाएगी।

गणतंत्र दिवस पर शासकीय प्राथमिक स्कूल में मचा हड़कंप, पूड़ी-लड्डू खाने से 58 बच्चों की बिगड़ी तबीयत

There was a stir in the government primary school on Republic Day, health of 58 children deteriorated after eating puri-laddus. रीवा ! 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के दिन शासकीय प्राथमिक स्कूल में उस वक्त हड़कंप मच गया जब खाना खाने के बाद बच्चे बीमार पड़ने लगे। तत्काल बच्चों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मेंरीवा: जिले में गणतंत्र दिवस के मौके पर परोसे गए मिड डे मील खाने से 50 से ज्यादा बच्चे फूड प्वाइजनिंग का शिकार हो गए। बच्चों को इलाज के लिए सिरमौर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है। सभी बच्चों की हालत ठीक बताई जा रही है। प्रशासन इस बात का पता लगाने का प्रयास कर रहा है कि बच्चों को किस चीज से फूड प्वाइजनिंग हुई है। ऐसा माना जा रहा है कि पूड़ी सब्जी ही बच्चों को नुकसान किया जिससे उनकी तबियत बिगड़ गई। दरअसल, मामला रीवा जिले के सिरमौर थाना क्षेत्र के पड़री गांव का है। जहां पर शासकीय प्राथमिक विद्यालय पड़री में गणतंत्र दिवस का कार्यक्रम आयोजित हुआ। आयोजन के बाद बच्चों को मिड डे मील परोसा गया। जिसको खाने के बाद अचानक बच्चों की तबियत बिगड़ने लगी और देखते ही देखते करीब 50 से अधिक बच्चे बीमार हो गए। जिसके बाद स्कूल में हड़कंप मच गया। तत्काल सभी बच्चों को इलाज के लिए सिरमौर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। जहां सभी बच्चों की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि स्वयं सहायता समूह द्वारा स्कूल में मध्यान्ह भोजन दिया जाता है। रसोइए द्वारा पूड़ी और आलू गोभी की सब्जी बनाई गई थी। लड्डू भी बैकुंठपुर के एक दुकान से लाया गया था। जिसको खाने के बाद अचानक बच्चों की तबियत बिगड़ने लगी 50 से अधिक बच्चे बीमार पड़ गए। जिसमे 45 छात्र स्कूल के है और करीब 16 बच्चे आस पास गांव के हैं।

एम्स: नि:संतान दंपती के लिए जल्द शुरू होगी आईवीएफ सुविधा

AIIMS: IVF facility for childless couples will start soon प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग ने मनाया अपना स्थापना दिवस आईवीएफ और ईटी पर सीएमई के साथ मनाया भोपाल। राजधानी के एम्स में नि:संतान दंपती के लिए जल्द ही आईवीएफ सुविधा शुरू होने जा रही है। एम्स डायरेक्टर डॉ अजय सिंह ने जल्द से जल्द आईवीएफ सुविधा स्थापित करने की दिशा में काम करने के लिए प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग को बधाई दी। दरअसल गुरूवार को एम्स के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग का स्थापना दिवस मनाया गया। इस अवसर पर इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) और भ्रूण स्थानांतरण (ईटी) पर एक सीएमई का भी आयोजन किया गया। जिसमें आईवीएफ-ईटी और हिस्टेरोस्कोपी तकनीक का प्रदर्शन भी किया गया। कार्यक्रम में एम्स डायरेक्टर डॉ अजय सिंह मुख्य अतिथि थे और सीएमएचओ डॉ. प्रभाकर तिवारी विशेष अतिथि थे। जो अपनी टीम के साथ शामिल हुए क्योंकि 25 जनवरी विस्तारित प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व (ई -पीएमएसएमए) अभियान का दिन भी है। उन्होंने इस बात की सराहना की कि स्थापना दिवस में आईवीएफ तकनीकों के प्रदर्शन के साथ आईवीएफ-ईटी जैसे प्रासंगिक विषय पर एक सीएमई भी शामिल की गई है। डॉ के पुष्पलता, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की प्रमुख और सीएमई की आयोजन अध्यक्ष ने वर्ष 2023 की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट और विभाग की भविष्य की योजनाएं प्रस्तुत की। एसओपी की एक पुस्तिका भी जारीडॉ. सिंह ने एम्स भोपाल में मातृ मृत्यु में क्लिनिकल ऑटोप्सी पर मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) की एक पुस्तिका का भी विमोचन किया। पुस्तक में मातृ मृत्यु के मामलों में शव परीक्षण करने के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं की रूपरेखा तैयार करता है और इसे एम्स की एक विषयक टीम द्वारा तैयार किया गया है, जिसमें प्रसूति एवं स्त्री रोग, फोरेंसिक मेडिसिन, पैथोलॉजी और लैब मेडिसिन विभाग शामिल हैं।एम्स शुरू हुई नर्स-लेड क्लिनिक एम्स डायरेक्टर डॉ अजय सिंह ने नर्स-लेड क्लिनिक का उद्घाटन किया, जो स्वास्थ्य देखभाल नवाचार में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह पहल, देश में अपनी तरह की पहली है, इससे मरीज देखभाल और नर्सिंग पेशे में एक नई क्रांति होगी। सोमवार से शुक्रवार सुबह 9 से 10:30 बजे के बीच संचालित होने वाले क्लीनिक शुरू में तीन महत्वपूर्ण क्षेत्रों रेडियोथेरेपी और ऑन्कोलॉजी, न्यूरोसाइंसेज/न्यूरोसर्जरी/न्यूरोलॉजी और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य पर संचालित होंगे। क्लीनिक का लक्ष्य नैदानिक उत्कृष्टता और पैशनेट केयर पर जोर देते हुए नर्सिंग सेवाओं की भूमिका को फिर से परिभाषित करना है। इस अवसर पर डॉ सिंह ने कहा कि नर्स-लेड क्लीनिकों की स्थापना स्वास्थ्य देखभाल के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण है। यह न केवल नर्सों के नैदानिक प्रशिक्षण को बल्कि नर्सिंग के सभी मानकों को बढ़ाएगा। इससे नर्सिंग छात्रों के नैदानिक कौशल में सुधार होगा और रोगी की संतुष्टि को बढ़ाने के लिए पैशनेट केयर पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग होंगे मर्ज,सभी जिलों में खुलेंगे पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस

भोपाल ! मध्यप्रदेश में चिकित्सा शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग अब मिलकर एक होंगे। मंत्रालय में शाम को होने वाली कैबिनेट बैठक में इसे मंजूरी दी जाएगी। वहीं प्रदेश के सभी जिलों में पीएम कॉलेज आफ एक्सीलेंस खोले जाएंगे। मध्यप्रदेश में चिकित्सा शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग के अलग-अलग होंने के कारण कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। दोनो विभाग आमजनता की स्वास्थ्य सुविधाओं पर काम करते है। लेकिन चिकित्सा शिक्षा विभाग मेडिकल एजूकेशन पर काम करता है और स्वास्थ्य विभाग केवल प्रदेश की स्वास्थ्य सुविधाओं पर ही काम करता है। मेडिकल एजूकेशन विभाग के अंतर्गत प्रदेशभर के मेडिकल कॉलेज आते है और इन कालेजों से सम्बद्ध अस्पतालों में ही जूनियर डॉक्टर और चिकित्सा शिक्षा विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टर काम करते है। नीतिगत मसलों पर दोनो विभाग अलग- अलग होने के कारण कई दिक्कते आ रही थी। इन्हें दूर करने के लिए अब दोनो विभागों को मिलाकर एक किया जा रहा है नये विभाग का नाम लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग होगा। इन्हें दूर करने के लिए अब दोनो विभागों को मिलाकर एक किया जा रहा है। प्रदेश के सभी जिलों में प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस खोले जाने है। इस प्रस्ताव पर भी आज होंने वाली कैबिनेट बैठक में चर्चा की जाएगी। ये कॉलेज विशेष होंगे और इनमें विद्यार्थियों को सभी तरह के विषयों पर अध्ययन करने की सुविधा होगी। इन कॉलेजों को रोजगारोन्नमुखी शिक्षा से भी जोड़ा जाएगा। हर जिले में ऐसा एक कॉलेज खोला जाएगा। इसके अलावा अशोकनगर जिले में मल्हारगढ़ सिचाई परियोजना के लिए 72 करोड़ रुपए की मंजूरी देने के प्रस्ताव पर भी कैबिनेट में चर्चा की जाएगी। चार अधिकारियों और कर्मचारियों के द्वारा की गई अनियमितताओं के चलते उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही करने और उनकी विभागीय जांच शुरु करने के प्रस्तावों पर भी चर्चा की जाएगी।

तुलसी, सेहत के लिए बेहद फायदेमंद, कई बीमारियों के लिए औषधि

Tulsi, very beneficial for health, medicine for many diseases भोपाल ! क्या आप जानते हैं कि तुलसी आपके स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायक है. चलिए आज हम आपको बताते हैं कि तुलसी की पत्तियां आपके स्वास्थ्य के लिए कितनी लाभदायक हैं. सर्दी के मौसम में ज्यादातर घरों में तुलसी का उपयोग कभी चाय में तो कभी-कभी काढ़े के रूप में किया जाता है. सर्दी में तुलसी का सही विधि से उपयोग किया जाए, तो आप कई बीमारियों से बच सकते हैं !तुलसी के अंदर एंटी-ऑक्सीडेंट, आयरन, कैल्शियम, जिंक प्रॉपर्टी होती है, जो आपको अलग-अलग स्वास्थ्य लाभ पहुंचाती है. एंटी-ऑक्सीडेंट होने की वजह से यह शरीर की इम्युनिटी को बूस्ट करने में मददगार है. सर्दी-जुकाम, सूखी खांसी, बलगम खांसी में भी तुलसी के पत्तों का रस लाभदायक होता है. साइनस की समस्या में लाभदायक तुलसी तुलसी के पत्ते साइनस की समस्या में भी लाभकारी हैं. यदि किसी मरीज को साइनस की दिक्कत है, नाक बंद रहती है या बार-बार छींक आती है, तो तुलसी के पत्तों का रस निकालकर उसकी कुछ बूंदें डायरेक्ट नाक में डालने से नाक का सारा बलगम निकल जाता है और आपको साइनस की समस्या में राहत मिलती है. नाक में डायरेक्ट तुलसी की बूंदें अप्लाई करने से यदि तेज जलन होती है, तो इसे थोड़ा पानी के साथ डाइल्यूट करके भी इस्तेमाल किया जा सकता है. छोटे बच्चों को शहद में मिलाकर दें तुलसी का रस सर्दियों के मौसम में सर्दी-जुकाम, नाक बंद जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं और इन मौसमी बीमारियों का असर सबसे पहले छोटे बच्चों पर दिखाई देता है. यदि आपके भी 5 से 15 साल के बच्चे को सर्दी-जुकाम हो रहा है, तो आप तुलसी के पत्तों का रस निकालकर उसमें थोड़ा शहद मिलाकर थोड़ा-थोड़ा बच्चों को पिलाने से सर्दी-जुकाम की समस्या खत्म हो जाती है.

उप स्वास्थ्य केंद्र में स्टाफ की कमी लोगों को नहीं मिल रहा सुविधा का लाभ

Due to lack of staff in sub health center, people are not getting the benefit of the facility. कटनी । स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर विभाग उदासीन रवैया अपना रहा है मिली जानकारी के अनुसार ग्रामीण अंचलों मैं ग्रामीणों को सरलता से प्राथमिक उपचार व स्वास्थ्य सेवाओं का मिल सके इसी उद्देश्य से शासन द्वारा उपस्वास्थ्य केंद्र खोले जा रहे है। लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ ग्रामीणों को नही मिल पाता। ताजा मामला बहोरीबंद विकासखण्ड अंतर्गत नवीन उपस्वास्थ्य केंद्र नीमखेड़ा का सामने आया है। जहां 49 लाख रुपये की लागत राशि से उपस्वास्थ्य केंद्र का निर्माण कराया गया। जिसका लोकार्पण 21 सितंबर 2023 को विधायक प्रणय पांडेय के द्वारा किया गया। लोकार्पण होने के बाद आसपास के 5 हजार ग्रामीणों को आस जागी थी कि बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी। स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए लंबी दूरी तय नही करनी पड़ेगी। लेकिन तीन माह के समय बीत जाने के बाद भी अब तक नवीन उपस्वास्थ्य केंद्र शोपीस बना हुआ है। जहां उपचार के लिए आने वाले ग्रामीणों को बिना उपचार ही वापस लौट जाना पड़ता है। उप स्वास्थ्य केन्द्र पर आए दिन ताला लटकता नजर आता है। ग्रामीणों ने बताया कि यहां नियमित चिकित्सक की पदस्थापना नही है। जिस कारण किसी को अतिरिक्त जवाबदेही दी गई। जो सप्ताह मैं एक-दो दिन उपस्वास्थ्य केंद्र का ताला खुलता है। जिसके कारण लोगों को प्राथमिक उपचार की सुविधा नहीं मिल पाती है। उपचार के लिए लंबी दूरी तय कर बताया गया है कि ग्रामीणों को बहोरीबंद या स्लीमनाबाद जाना पड़ता या फिर झोलाछाप डॉक्टरों से उपचार करवाना पड़ता है। ग्रामीणों ने बताया कि उपस्वास्थ्य केंद्र न तो सीएचओ न ही एएनएम की पदस्थापना है। यहां तक कि ग्रामीणों द्वारा स्वास्थ्य विभाग को भी कई बार सूचना दी गई की उपस्वास्थ्य केंद्र बन गया है तो चिकित्सा स्टॉफ की भी पदस्थापना की जाए। जिससे मरीजो को स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सके। इनका कहना है डॉ आंनद अहिरवार बीएमओ बहोरीबंद नीमखेड़ा नवीन उपस्वास्थ्य केंद्र मैं चिकित्सक स्टाफ की पदस्थापना को लेकर विभागीय स्तर पर पत्राचार किया गया है। राज्य स्तर से पदस्थापना की जानी है। जब तक स्वास्थ्य सुविधाये ग्रामीणों को बेहतर मिल सके। इसके लिए जो स्टाफ अन्य स्वास्थ्य केंद्रों मैं है। उन्ही की सहायता से स्वास्थ्य कामकाज संचालित किया जा रहा है।

यह है मॉडल अस्पताल जेपी का हाल: 59 सफाई कर्मी,

This is the condition of Model Hospital JP: 59 cleaning workers, भोपाल। राजधानी का मॉडल अस्पताल जेपी में सफाई व्यवस्था के नाम पर सरकारी रुपयों की बर्बादी हो रही है। सफाई का जिम्मा जिस कंपनी को दिया गया है, वह खानापूर्ति कर रही है। यही कारण है कि अस्पताल परिसर में गंदगी और गुटके के दाग देखे जा सकते है। आईपीडी वार्ड की खिड़कियों के बाहर कचरा और छिपे हुए कोनों में दवाईयों का ढेर आसानी से देखा जा सकता है। जानकारी अनुसार जेपी अस्पताल की सफाई का जिम्मा निजी कंपनी के पास है। जिसका नाम प्रथम नेशनल सिक्योरिटी सर्विसेस है। यह फर्म इंदौर की है। फर्म को जो ठेका दिया गया है, उसकी शर्तों के अनुसार 59 सफाई कमी जेपी अस्पताल में हर दिन ड्यूटी देंगे, लेकिन फर्म द्वारा सफाई सिर्फ 20 से 25 कर्मचारियों द्वारा कराई जा रही है। ताकि अधिक से अधिक पैसा बचाया जा सके। इतना ही नहीं ओपीडी के समय में सफाई पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता, बल्कि दोपहर में जब भीड़ कम होती है तब सफाईकर्मी एक से दो घंटे में सफाई करते हुए देखे जाते हैं। बायोमेडिकल वेस्ट का निष्पादन नहीं जेपी अस्पताल की सफाई व्यवस्था में सबसे बड़ी लापरवाही बायोमेडिकल वेस्ट मामले में हो रही है। अस्पताल में मरीजों को दी जाने वाली दवाईयां कचरे के ढेर में आए दिन मिलती हैं। इसके अलावा ग्लब्स, पट्टी और अन्य मेडिकल वेस्ट भी खुले परिसर में नाले के पास अक्सर देखे जाते हैं। आज तक नहीं मिला कायाकल्प अवार्ड जेपी अस्पताल में सफाई व्यवस्था लचर रहने और मरीजों को मिलने वाली सुविधाएं सुस्त रहने के कारण ही आज तक संस्था को कायाकल्प अवार्ड में नंबर आने का मौका नहीं मिला है। जबकि इस अवार्ड को शुरू हुए सात साल से ज्यादा हो गए हैं। जेपी अस्पताल को अक्सर कायाकल्प अवार्ड में सांत्वना पुरस्कार से संतोष करना पड़ा है। जांच कराऊंगा जेपी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राकेश श्रीवास्तव ने बताया कि सफाई व्यवस्था में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जएगी। यदि निजी फर्म द्वारा कम संख्या में सफाई कर्मियों से काम लिया जा रहा है तो मैं इस मामले की जांच कराउंगा। यदि फर्म ने कुछ गड़बड़ी की है तो कंपनी पर जुर्माना लगाकर ठेका निरस्त किया जाएगा।

बार-बार अलग-अलग एंटीबायोटिक दवाएं देने से मरीजों पर नहीं होता असर

Repeatedly giving different antibiotics has no effect on patients. भोपाल। लगातार उपयोग से एंटीबायोटिक दवाओं का असर कम हो रहा है। एक मरीज को बार-बार अलग-अलग तरह की एंटीबायोटिक देने से उस पर ये दवाएं प्रभावी नहीं होती। ऐसे में विशेषज्ञ समय समय पर इन दवाओं की संवेदनशीलता को जांचने की सलाह देते हैं। एम्स भोपाल भी एंटीबायोटिक के प्रभाव को जांचने के लिए लगातार शोध हो रहे हैं। एम्स भोपाल देश का एकमात्र ऐसा संस्थान है जो दवाओं की संवेदनशीलता की रिपोर्ट को सार्वजनिक कर रहा है। गुरुवार को भी एम्स भोपाल ने 2023 की दूसरी छहमाही की एंटीबायोटिक की रिपोर्ट (एंटीबायोग्राम) जारी की। सरल शब्दों में कहें तो एम्स अपने अस्पताल में बेअसर हो चुकी एंटीबायोटिक की रिपोर्ट (एंटीबायोग्राम) जारी करता है। मालूम हो कि इस रिपोर्ट को हर छह महीने में अपडेट किया जाता है। दरअसल इस रिपोर्ट का उद्देश्य एंटीबायोटिक के धड़ल्ले से उपयोग को रोकना है। डॉक्टरों को बताएगा किस दवा का असर कमएम्स के पीआरओ केडी शुक्ला बताते हैं कि एंटीबायोग्राम वह तकनीक है जिससे एंटीबायोटिक की संवेदनशीलता की जानकारी मिलती है। लगातार उपयोग से एंटीबायोटिक का असर कम हो जाता है। हर अस्पताल या क्षेत्र में अलग अलग एंटीबायोटिक का असर अलग अलग होता है। ऐसे में एम्स अस्पताल में उपयोग हो रहे एंटीबायोटिक की जांच कर रिपोर्ट को हर छह महीने में अपडेट किया जाता है। इससे चिकित्सकों को यह पता होता है कि उन्हें किस एंटीबायोटिक का इस्तेमाल करना है किसका नहीं। एंटीबायोटिक का ऐसा हो रहा यूजएनएचएम के पूर्व संचालक डॉ. पंकज शुक्ला ने बताया कि कई चिकित्सक एक मरीज को दिन भर में पांच एंटीबायोटिक दे देते हैं। डॉक्टर अक्सर मरीजों पर एंटीबायोटिक का टेस्ट करते हैं। एक दवा काम न आए तो दूसरी और तीसरी दवाएं तक दी जाती हैं। एंटीबायोटिक के ज्यादा उपयोग से कुछ समय बाद मरीज पर इसका असर होना खत्म हो जाता है। कई एंटीबायोटिक बेअसरकरीब चार पहले एम्स भोपाल ने एंटीबायोटिक के कम हो रहे असर को लेकर शोध किया था। शोध में पता चला था कि नए एंटीबायोटिक का असर खत्म हो रहा है। शोध के अनुसार सबसे ज्यादा उपयोग किए जाने वाले एंटीबायोटिक जैसे एंपिसिलीन, एमॉक्सीसिलीन, सिफजोलिन, सिफ्रिएक्सोन आदि की प्रभाविता 50 प्रतिशत के नीचे पहुंच गई है। वहीं सालों पहले एनेक्टिव होने से क्लोरेम्फेनिकूल का उपयोग बंद कर दिया गया था, उसकी प्रभाविता 63 प्रतिशत तक पाई गई।

आयुष विभाग जिला विदिशा के द्वारा अश्वगंधा, शतावर एवं तुलसी की कृषि तकनीक, संग्रहण एवं स्वेच्छिक प्रमाणन पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम

Two day training program on collection and voluntary certification सीताराम कुशवाहा सहारा समाचार विदिशा ! आयुष विभाग जिला विदिशा के द्वारा अश्वगंधा, शतावर एवं तुलसी की कृषि तकनीक, संग्रहण तकनीक स्वेच्छिक प्रमाणन आदि विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम दिनांक 12 जनवरी 2024 से 13 जनवरी 2023 का शुभारंभ हुआ।दिनांक 12 जनवरी 2024 को प्रातः 10 बजे से होटल राजावत, माधवगंज विदिशा में किया गया। उक्त प्रशिक्षण मे अश्वगंधा शतावर एवं तुलसी आदि कृषि उत्पादन संग्रहण आदि विषयो पर संबंधित विशेषज्ञो आयुष विभाग/कृषि विभाग/उधानिकी विभाग द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। उक्त प्रशिक्षण में आज दिनांक 12.01.2024 को जिला अंतर्गत विभिन्न विकासखण्डों के कृषकों के द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त किया साथ ही कृषकों के द्वारा उक्त प्रशिक्षण को औषधीय पौधों की कृषि में अत्यधिक लाभकारी बताया गया है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कृषकों को इन औषधीय पौधों के संरक्षण, तकनीक एवं प्रमाणन पर विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण दिया जायेगा।

खीरे के पानी में छुपे हैं अद्भुत गुण, इन 6 बीमारियों में होता है फायदेमंद

Amazing properties are hidden in cucumber water it is beneficial in these 6 diseases रोज सुबह खीरे का पानी पीने से स्किन का ग्लो बना रहता है। यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है। आजकल अनियमित जीवनशैली और खानपान में लापरवाही के कारण लोग कम उम्र में ही कई बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। ऐसे में यदि आप दिन की शुरुआत ही व्यवस्थित तरीके से कर दें तो आप कई समस्या से छुटकारा पा सकते हैं। सुबह उठते ही शरीर को डिटॉक्स करने से लिए पानी पीने की सलाह दी जाती है, लेकिन इसके स्थान पर यदि आप खीरे का पानी का सेवन करेंगे तो सेहत को कई बीमारियों से छुटकारा मिल सकता है। यहां डायटिशियन मीना कोरी खीरे के पानी के फायदों के बारे में विस्तार से जानकारी दे रही है। शरीर में पानी की कमी नहींसुबह यदि आप खीरे का पानी का सेवन करते हैं तो शरीर में पानी की कमी नहीं होती है। सामान्य जल की तुलना में खीरे का पानी सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद होता है। यह पानी सुगंधित होने के साथ-साथ स्वास्थ्यवर्धक भी होता है। यह पानी शरीर की आंतरिक सफाई में अहम भूमिका निभाता है। वजन घटाने में मददगारखीरा एक ऐसी सब्जी है, जिसमें कैलोरी काफी कम होती है। यदि सुबह सुबह खीरे का पानी पीते हैं तो इससे पेट काफी देर तक भरा हुआ रहता है। यह वजन कम करने में मदद करता है। खीरे का पानी एक डिटॉक्स ड्रिंक के रूप में काम करता है, जो शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। खीरे के पानी में घुलनशील फाइबर भी होता है, जो शरीर का वजन नहीं बढ़ने देता है। कंट्रोल में रहता है ब्लड प्रेशरखीरे के पानी में पोटेशियम भरपूर मात्रा में होता है, जो ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद करता है। खीरे का पानी किडनी में जमा सोडियम की मात्रा को नियंत्रित करता है। खीरे का पानी पीने से हार्ट अटैक का खतरा भी कम होता है।स्किन में बढ़ता है ग्लोरोज सुबह खीरे का पानी पीने से स्किन का ग्लो बना रहता है। यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है। खीरे के पानी में विटामिन, खनिज और फाइबर जैसे आवश्यक पोषक तत्व भी होते हैं, जो स्किन को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

उप स्वास्थ्य केन्द्र की बिल्डिंग निर्माण सामग्री में गुणवत्ता की कमी

Lack of quality in building construction material of Sub Health Center कटनी । ग्रामीणों के स्वास्थ्य सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए शासन द्वारा नवीन उप स्वास्थ्य केंद्र भवन का निर्माण करा रही है ताकि ग्रामीणों को एक बेहतर स्वास्थ्य सुविधा महिया कराई जा सके । परंतु निर्माणधीन ठेकेदार अपनी जेब भरने के लिए गुणवत्ताहीन सामग्री का उपयोग कर बिल्डिंग का निर्माण कर रहे हैं हम बात कर रहे कटनी जिले की रीठी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र की ग्राम उमरिया में जहां उपस्वास्थ्य केंद्र भवन का निर्माण कार्य किया जा रहा है । ग्रामीणों का आरोप है कि ग्रामीणों क आरोप है कि ठेकेदार द्वारा मनमानी पूर्वक बिल्डिंग में कच्चा मटेरियल व डस्ट की जुढ़ाई की जा रही है और आज तक इसमें पानी की तराई नहीं की गई । जिसकी जानकारी उच्च अधिकारियों को दी परंतु यहां देखने आज तक कोई नहीं पहुंचा अब देखना यह होगा की जिम्मेदार विभाग इस पर क्या कार्यवाही करता है

मुरैना जिला अस्पताल में आग लगने से मचा हड़कंप।

There was a stir due to fire in Morena District Hospital संतोष सिंह तोमर मुरैना। जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में भीषण आग लग गई जिसके चलते पूरे वार्ड में अफरा तफरी फैल गई और अस्पताल परिसर में भगदड़ मच गई। बताया गया कि यह आग शॉर्ट सर्किट के चलते हुए लगी है । फटाफट इस वार्ड से नवजात बच्चों को और प्रसूति महिलाओं को दूसरे वार्ड में तत्काल प्रभाव से शिफ्ट किया गया । जैसे ही घटना की सूचना पुलिस और प्रशासन को मिली तो मुरैना के अपर कलेक्टर और पुलिसअफसर मौके पर पहुंचे । अस्पताल के अग्नि शमक यंत्र से कर्मचारियों के द्वारा आज पर काबू पाया गया मौके पर दमकल विभाग की दो गाड़ी पहुंची। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि जिला चिकित्सालय में हमारा बच्चा भर्ती था यहां न तो कोई सायरन बजा न कुछ प्रशासन की लापरवाही इतनी है कि आग लग गई हमारा बच्चा दूसरे वार्ड में शिफ्ट कर दिया है और प्रशासन कोई जवाब नहीं दे रहा है। वहीं सीएमएचओ का कहना है कि बिजली का जो फॉल्ट हुआ है उसकी हम जांच करवा रहे है और उसे दिखवा रहे है। उन्होंने बताया कि वार्ड में 47 बच्चे थे अब उनको दूसरे वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है । सारे बच्चे सुरक्षित है जिनको ऑक्सीजन की जरूरत है उनको प्रदाय की जा रही है और जिनको उपचार की जरूरत है उनको भी ट्रीटमेंट दिया जा रहा है।

देश में एक बार फिर कोरोना संक्रमण ने पकड़ी रफ्तार

Corona infection once again gained momentum in the country देश में एक बार फिर कोरोना संक्रमण ने पकड़ी रफ्तार, 24 घंटे में 636 नए मामले, जेएन.1 के मरीज 200 पार स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, पिछले 24 घंटे में केरल में दो और तमिलनाडु में एक मरीज की संक्रमण से मौत हो गई। पिछले साल पांच दिसंबर तक दैनिक मामलों की संख्या घटकर दोहरे अंक तक पहुंच गई थी। देश में कोरोना संक्रमण के 636 नए मामले सामने आए हैं, जिससे उपचाराधीन मरीजों की संख्या बढ़कर 4,394 हो गई है। साथ ही नए उपस्वरूप जेएन.1 के 37 नए मामले मिलने के बाद इसके मरीजों की संख्या 200 पार कर गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, पिछले 24 घंटे में केरल में दो और तमिलनाडु में एक मरीज की संक्रमण से मौत हो गई। पिछले साल पांच दिसंबर तक दैनिक मामलों की संख्या घटकर दोहरे अंक तक पहुंच गई थी, लेकिन ठंड और वायरस के नए उपस्वरूप के कारण मामलों में तेजी आई है। स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाइट के अनुसार, अब तक संक्रमण से उबरने वाले लोगों की संख्या 4.4 करोड़ से अधिक हो गई है। किस राज्य में कितने जेएन.1 वैरिएंट के मामलेजेएन.1 वैरिएंट से संक्रमित लोगों की संख्या बताने के लिए INSACOG ने राज्यवार आंकड़े भी जारी किए। सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक केरल (83), गोवा (51), गुजरात (34), कर्नाटक (आठ), महाराष्ट्र (सात), राजस्थान (पांच), तमिलनाडु (चार), तेलंगाना (दो) ओडिशा (एक) और दिल्ली में एक मामला रिपोर्ट किया गया है। राज्यों को निगरानी बढ़ाने का निर्देशWHO के मुताबिक कोरोना वायरस के जेएन.1 सब-वैरिएंट को पहले बीए.2.86 का प्रकार माना गया। हालांकि, बीते कुछ हफ्तों में 40 से अधिक देशों में JN.1 मामले सामने आ चुके हैं। तेजी से फैलते संक्रमण को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से निरंतर निगरानी बनाए रखने को कहा है।

क्षेत्र की तरक्की के लिए मील का पत्थर साबित होगा नवीन स्वास्थ्य केंद्र- मलैया

New health center will prove to be a milestone for the progress of the area – Malaiya 306 लाख की लागत से बन रहे नवीन स्वास्थ केंद्र का हुआ भूमि पूजन चंद्रपाल सिंह दमोह ! क्षेत्र के लोगों की तरक्की के लिए उनकी उन्नति के लिए बांसा तारखेडा का यह है नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मील का पत्थर साबित होगा। यह बात पूर्व वित्त मंत्री एवं दमोह विधायक जयंत मलैया ने बांसा तारखेडा में बन रहे नवीन स्वास्थ्य केंद्र के भूमि पूजन के दौरान कही। उन्होंने कहा इस मार्च तक इसका कार्य पूरा होना था परंतु किसी कारणवश इसका कार्य लेट प्रारंभ हुआ है, लेकिन जल्दी ही यह बनकर तैयार होगा और इसका लाभ सभी क्षेत्र वासियों को मिलेगा। दमोह का जिला अस्पताल कुछ वर्षों पहले कैसे हुआ करता था, आज आप जाकर देखिए प्रदेश के कुछ बड़े अस्पतालों को छोड़ दें, तो दमोह का अस्पताल शानदार है। उन्होंने कहा विधानसभा चुनाव में जो आशीर्वाद क्षेत्र की जनता ने मुझे दिया है, इस उम्र में पार्टी ने मुझे टिकट दी, पार्टी का आदेश हुआ और मैं चुनाव लड़ा और आप सभी ने इतने प्रचंड मतों से मुझे जिताया।ज्ञात हो कि बांसा तारखेडा में 306 लाख रुपए की लागत से नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं आवास गृहों का निर्माण किया जाना है, जिसका भूमि पूजन आज संपन्न हुआ। इस अवसर पर रश्मि/दीपक शेरू परिहार, नंदकिशोर तिवारी, राकेश नायक, डॉ जगत सिंह, नीरज राय, रोहन पाठक, शैलेन्द्र तिवारी, राम सिंह, अखिलेश हजारी, संतोष आठ्या, गुड्डा यादव, राजकुमार जैन सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, अधिकारी-कर्मचारी, ग्रामवासियों की मौजूदगी रही।

झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई करने मैं प्रशासन सुस्त

Civil hospital in-charge unable to take action against quacks झोलाछाप डॉक्टरों पर जिला स्वास्थ्य अधिकारी प्रभारी दोनों ही मेहरबान जानकारी के बाद भी कार्रवाई नहीं कर रहे ऐसा लगता कहीं ना कहीं मोटी रकम दी जा रही है मलखान सिंह परमार अंबाह । झोलाछाप डॉक्टरों को प्रशासन का भय नहीं, बिना डिग्री के डाक्टरी और विना लायसेंस के मेडिकल स्टोर चला धड़ल्ले से चलाए जा रहे हैं, ऐसा एक मामला अंबाह पिनाहट रोड पर देखने को मिला है यहां डा पीयूष सेनी राज मार्केट में मौत का अस्पताल चला रहे हैं जब इसकी हमने जानकारी सिविल अस्पताल बीएमओ को दी तो उनका कहना लिखित में दो कार्रवाई करेंगे पर 19 10 2023 लिखित में दी गई उसके बावजूद भी कार्रवाई नहीं की बिना डिग्री के मरीजों की चिकित्सा कर रहे हैं यही नहीं एक मेडिकल स्टोर भी बिना लायसेंस के वैखोफ संचालित कर रहे हैं ऐसे झोलाछाप डॉक्टर मरीजों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने में लगे हुए हैं जिस पर प्रशासन का भी कोई अंकुश नहीं है। यही बजय है कि लोग पैसे के लालच में लोगों के जीवन से खेल रहे हैं कई बार झोलाछाप डॉक्टरों के उपचार से भोले भाले ग्रामीण मरीज अपने जीवन से हाथ धो बैठते हैं।समय रहते ऐसे गैरकानूनी काम करने वाले लोगों पर प्रशासन की सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो झोलाछाप डॉक्टर एक बीमारी की तरह पूरे शहर को नष्ट-भुष्ट कर देंगे और प्रशासन को अवगत होने के बाद भी प्रशासन इन पर कार्रवाई नहीं कर रहा क्या चक्कर है सिविल अस्पताल से नोटिस जारी होते हैं पर कार्यवाही नहीं होती

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