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इंजेक्शन, टैबलेट या फिर लिक्विड…शरीर में दवा पहुंचाने का क्या है सबसे सही तरीका?

medication into the body

injection tablet or liquid what is the fastest way to get medication into the body Way to Get Medication into the Body : किसी भी व्यक्ति के बीमार पड़ने पर डॉक्टर उनकी स्थिति के हिसाब से उन्हे दवाएं देते हैं. डॉक्टर अपने मरीजों को दवाएं कई रूपों में देते हैं, जिसमें टैबलेट, कैप्सूल, लिक्विड सिरप, इंजेक्शन या फिर इन्हेलर जैसे अन्य विकल्प होते हैं. अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि इनमें से किस तरह की दवाएं सबसे अधिक असरदार होती हैं? तो आपको बता दें कि इसका जवाब इस पर निर्भर करता है कि आपको किस तरह की समस्या हुई है और आपकी स्थिति कितनी गंभीर है. आइए जानते हैं इस बारे में- टैबलेट और कैप्सूल टैबलेट और कैप्सूल सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला तरीका है. इन्हें लेना आसान होता है, ये लंबे समय तक स्टोर की जा सकती हैं और कम खर्चीली भी होती हैं. हालांकि, इन्हें पचने और खून में घुलने में समय लगता है, इसलिए ये उन बीमारियों में दी जाती हैं जिनमें तुरंत असर की जरूरत नहीं होती, जैसे – सामान्य बुखार, दर्द, एलर्जी, ब्लड प्रेशर इत्यादि स्थितियों में टैबलेट और कैप्सूल जैसी दवाएं दी जाती हैं. लिक्विड जिन मरीजों के निगलने की क्षमता कम होती है, जैसे- छोटे बच्चे या बुजुर्ग, उन्हें दवाएं लिक्विड दी जाती हैं. लिक्विड में मिलने वाली दवाएं जल्दी अवशोषित होती हैं और स्वाद के अनुसार बनाई जाती हैं. पर इनकी मात्रा का सही निर्धारण जरूरी होता है. इंजेक्शन किसी भी मरीज को इंजेक्शन तब दिया जाता है, जब दवा को शरीर में तुरंत पहुंचाना होता है. इंजेक्शन सबसे सबसे प्रभावी तरीका होता है. ये सीधे खून में (IV), मांसपेशी (IM) या स्किन के नीचे (SC) दिए जाते हैं. इंजेक्शन गंभीर संक्रमण, एलर्जी रिएक्शन या सर्जरी के समय इसका इस्तेमाल किया जाता है. मुख्य रूप से तेज बुखार, डिहाइड्रेशन, गंभीर संक्रमण, डायबिटीज (इंसुलिन) जैसी स्थितियों में दिया जाता है. सबसे सही तरीका कौन सा है? दवाएं देने का कोई सही तरीका नहीं होता है. यह पूरी तरह इस पर निर्भर करता है कि बीमारी की गंभीरता क्या है? दवा कितनी जल्दी असर दिखानी चाहिए? मरीज की उम्र और शारीरिक स्थिति क्या है? हर दवा देने का तरीका अपनी जगह सही होता है. डॉक्टर आपकी स्थिति के अनुसार सबसे उपयुक्त तरीका चुनते हैं. खुद से दवाओं का रूप या तरीका बदलना खतरनाक हो सकता है, इसलिए हमेशा चिकित्सक की सलाह लेना ही सबसे सही तरीका है.

लाइफस्टाइल- गर्मियों में फायदेमंद गन्ने का जूस: लू से बचाए, शरीर को रखे हाइड्रेटेड, डाइटीशियन से जानें किन्हें नहीं पीना चाहिए

Lifestyle:Sugarcane juice is beneficial in summers: Protects from heat wave, keeps the body hydrated, know from dietician who should not drink it हेल्थ डेस्क: आपने गर्मी के मौसम में अपने आसपास गन्ने का जूस बिकते जरूर देखा होगा। तेज धूप और हीट स्ट्रोक से बचने के लिए लोग इसे खूब पीते हैं। यह न केवल स्वादिष्ट होता है, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है। यह शरीर को हाइड्रेट के साथ-साथ एनर्जेटिक भी रखता है। इसके अलावा गन्ने का रस पाचन तंत्र को बेहतर बनाने, इम्यूनिटी बूस्ट करने और स्किन को हेल्दी बनाए रखने में भी मददगार है। इसमें कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। फार्माकोग्नॉसी जर्नल में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, गन्ने के जूस के कई हेल्थ बेनिफिट्स हैं। आयुर्वेद और यूनानी पद्धति में पीलिया व यूरिन संबंधी समस्याओं के इलाज के लिए गन्ने का जूस पीने की सलाह दी जाती है। इसमें विटामिन और मिनरल्स का खजाना होता है। गन्ना अनुसंधान केंद्र की एक स्टडी के मुताबिक, इसके जूस में हाई पॉलीफेनोल्स होते हैं, जो पावरफुल फाइटोन्यूट्रिएंट्स हैं। गन्ने के जूस में बैड कोलेस्ट्रॉल से लड़ने की क्षमता होती है। साथ ही ये मेटाबॉलिज्म को भी बेहतर बनाता है। इसलिए, आज जरूरत की खबर में गन्ने का जूस पीने के फायदों के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- क्या इसे ज्यादा पीने के कोई साइड इफेक्ट्स भी हैं? किन लोगों को गन्ने का जूस नहीं पीना चाहिए? एक्सपर्ट: डॉ. पूनम तिवारी, सीनियर डाइटीशियन, डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ सवाल- गन्ने में कौन-कौन से पोषक तत्व पाए जाते हैं? जवाब- नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, गन्ने में 70-75% पानी, 13-15% सुक्रोज (नेचुरल शुगर) और 10-15% फाइबर होता है। हालांकि गन्ने का जूस निकालने की प्रक्रिया में फाइबर लगभग खत्म हो जाता है। नीचे दिए ग्राफिक में 250ml जूस की न्यूट्रिशनल वैल्यू जानिए- सवाल- गन्ने का जूस सेहत के लिए किस तरह से फायदेमंद है? जवाब- गन्ने के जूस में मौजूद विटामिन C और फ्लेवोनोइड्स व फेनोलिक जैसे एंटीऑक्सिडेंट्स इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाते हैं। ये एक बेहतरीन हाइड्रेटिंग ड्रिंक्स है क्योंकि इसमें भरपूर मात्रा में पानी होता है। गन्ने के जूस में नेचुरल शुगर, फाइबर और इनवर्टेज जैसे एंजाइम होते हैं, जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं। गन्ना सुक्रोज और ग्लूकोज जैसे कार्बोहाइड्रेट का एक नेचुरल सोर्स है, जो इंस्टेंट एनर्जी देता है। गन्ने के डाइयूरेटिक गुण यूरिन के जरिए शरीर के टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मददगार हैं। गन्ने में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो ओरल हेल्थ के लिए फायदेमंद हैं। इसमें मौजूद कैल्शियम दांतों और हड्डियों को मजबूत बनाते हैं। इसमें पाए जाने वाले एंटीऑक्सिडेंट्स स्किन को हेल्दी बनाए रखने में मदद करते हैं। ये उम्र बढ़ने के संकेतों जैसे झुर्रियां, महीन रेखाएं और स्किन के दाग-धब्बे को कम करते हैं। वहीं पॉलीफेनोल और पोटेशियम जैसे कंपाउंड कार्डियो प्रोटेक्टिव होते हैं। गन्ने के एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण आर्टरीज की सूजन और कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करके हार्ट हेल्थ को बेहतर बनाते हैं। इसका जूस शरीर के तापमान को कंट्रोल करने के साथ-साथ इलेक्ट्रोलाइट को भी बैलेंस करता है। इस तरह ये हमें गर्मी में हीट स्ट्रोक के खतरे से बचाता है। नीचे दिए ग्राफिक से गन्ने का जूस पीने के कुछ फायदे समझिए- सवाल- गन्ना या गन्ने का जूस क्या ज्यादा फायदेमंद है? जवाब- सीनियर डाइटीशियन डॉ. पूनम तिवारी बताती हैं कि चाहे गन्ने की बाइट चबाएं या उसका जूस पिएं दोनों ही फायदेमंद है। हालांकि गन्ने में फाइबर की मात्रा भरपूर होती है। इसलिए जूस पीने से ज्यादा इसे चबाना बेहतर है। सवाल- क्या गन्ने में बर्फ डालकर पीना सेहत के लिए अच्छा है? जवाब- बर्फ डालने से गन्ने का रस ठंडा हो जाता है, जिससे गर्मी में ताजगी मिलती है। ठंडा गन्ने का जूस पीने से गर्मी से तुरंत राहत मिलती है। लेकिन कुछ लोगों को इससे सर्दी-जुकाम, खांसी या पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए बहुत ज्यादा बर्फ वाला गन्ने का रस पीने से बचना चाहिए। सवाल- गन्ने का जूस पीने का सही तरीका क्या है? जवाब- गन्ने का जूस निकालने के तुरंत बाद पीना सबसे अच्छा होता है। बासी गन्ने के जूस में बैक्टीरिया पनप सकते हैं, जो सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। गन्ने का जूस हमेशा किसी साफ और स्वच्छ दुकान से ही पिएं। जिस मशीन से जूस निकाला जा रहा है, वह साफ-सुथरी होनी चाहिए। गन्ने का जूस पीने का सबसे अच्छा समय दोपहर से पहले का होता है। खाली पेट गन्ने का जूस नहीं पीना चाहिए क्योंकि इससे एसिडिटी हो सकती है। गन्ने के जूस में थोड़ा सा काला नमक और नींबू का जूस और पुदीना मिलाकर पीने से इसका स्वाद और न्यूट्रिशन दोनों बढ़ जाता है। सवाल- क्या गन्ने का जूस किडनी स्टोन में फायदेमंद है? जवाब- गन्ने का जूस किडनी स्टोन से पीड़ित लोगों के लिए सुरक्षित माना जाता है क्योंकि इसमें ऑक्सालेट कम होता है। जो शरीर में पथरी बनने से रोकने में मदद कर सकता है। इसके डाइयूरेटिक गुण टॉक्सिन्स को बाहर निकालने और नए स्टोन्स के प्रोडक्शन को रोकने में भी मदद कर सकते हैं। इसके अलावा गन्ने के जूस में पोटेशियम, मैग्नीशियम और कई अन्य ऐसे पोषक तत्व होते हैं, जो किडनी की सेहत के लिए फायदेमंद हैं। गन्ने का रस शरीर में पानी की मात्रा को बढ़ाता है, जिससे किडनी में पथरी बनने की संभावना कम हो जाती है। सवाल- क्या डायबिटिक लोग गन्ने का जूस पी सकते हैं? जवाब- डॉ. पूनम तिवारी बताती हैं कि गन्ने के जूस में नेचुरल शुगर की मात्रा अधिक होती है, जो ब्लड शुगर लेवल को बढ़ा सकती है। इसलिए डायबिटिक लोगों को इसे पीने से बचना चाहिए। सवाल- एक दिन में कितना गन्ने का जूस पीना सुरक्षित है? जवाब- एक स्वस्थ व्यक्ति एक दिन में एक गिलास गन्ने का जूस पी सकता है। इससे ज्यादा पीना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। सवाल- क्या गन्ने का जूस पीने के कोई साइड इफेक्ट भी हैं? जवाब- गन्ने का जूस पीना आमतौर पर सुरक्षित होता है। हालांकि इसके अधिक सेवन से वजन बढ़ सकता है। साथ ही ब्लड शुगर हाई हो सकता है। इसके अलावा दांत खराब हो सकते हैं और पाचन … Read more

हेल्थ टिप्स – क्या ज्यादा फायदेमंद? आलू या शकरकंद, एक्सपर्ट से जानें बेनिफिट्स, ज्यादा खाने के नुकसान, किसे नहीं खाना चाहिए

Which is more beneficial? Potato or sweet potato

Which is more beneficial? Potato or sweet potato हर भारतीय रसोई में आलू और शकरकंद की खास जगह है। ये दोनों ही फूड हमारी थाली में अहम स्थान रखते हैं। इन दोनों में कई सारी समानताएं हैं, जो उन्हें एक जैसा बनाती हैं। अंग्रेजी भाषा में दोनों के नाम भी मिलते-जुलते हैं। आलू को ‘पोटैटो’ और शकरकंद को ‘स्वीट पोटैटो’ के नाम से जाना जाता है।आलू को सब्जियों का राजा कहा जाता है और हर भारतीय रसोई में हमेशा इसकी मौजूदगी होती है। वहीं शकरकंद अपने मीठे स्वाद और न्यूट्रिएंट्स की वजह से अलग पहचान रखता है।शकरकंद को कई डिश में मिठास के लिए इस्तेमाल किया जाता है। सर्दी के मौसम में शकरकंद खूब खाया जाता है। हालांकि, जब बात सेहत की आती है, तो यह सवाल उठता है कि इन दोनों में से क्या अधिक फायदेमंद है? ऐसे में आज हम सेहतनामा में जानेंगे कि- आलू और शकरकंद में क्या ज्यादा सेहतमंद है?इन दोनों के क्या फायदे और नुकसान हैं? आलू के फायदे आलू के कई सारे चाहने वाले हैं। लोग इसे अलग-अलग रूपों में पसंद करते हैं। हालांकि इसके स्वाद के साथ हेल्थ बेनिफिट्स की वजह से भी इसे पसंद किया जाता है। विटामिन C: एक मध्यम आकार का यानी तकरीबन 115 ग्राम का एक आलू खाने से विटामिन C की दैनिक जरूरत की 11% पूरा हो जाता है।विटामिन C कोलेजन बनाने में मदद करता है। यह आयरन के अवशोषण में सहायक होता है। इसके अलावा आलू में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सिडेंट भी होता है।विटामिन B6: आलू में विटामिन B6 भी होता है, जो हमारी दैनिक आवश्यकता का 25% पूरा करता है। विटामिन B6 रेड ब्लड सेल्स के उत्पादन में मददगार है।यह ऊर्जा के रूपांतरण और ब्रेन के न्यूरोट्रांसमीटर के निर्माण में मदद करता है, जो मूड और नींद को नियंत्रित करते हैं। फाइबर: आलू में फाइबर भी पाया जाता है, जो पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है।पोटेशियम: इसमें पोटेशियम होता है, जो ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद करता है। यह नर्वस सिस्टम और मांसपेशियों के कार्य में मदद करता है। स्टार्च: आलू में एक प्रकार का कार्बोहाइड्रेट होता है, जिसे स्टार्च कहा जाता है। यह छोटी आंत में नहीं टूटता, बल्कि सीधे बड़ी आंत में जाता है। यह आंतों के स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है। हालांकि, पेट की समस्या हो तो आलू खाने से बचना चाहिए। शकरकंद के फायदे शकरकंद अपने लो-ग्लाइसेमिक इंडेक्स और फाइबर के कारण डायबिटीज कंट्रोल करने और वजन घटाने में मददगार है। शकरकंद फाइबर, विटामिन्स, मिनरल्स और एंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर होता है। इसके छिलके में पाया जाने वाला फाइबर प्रीबायोटिक गुणों से भरपूर होता है, जो गुड बैक्टीरिया के विकास को बढ़ावा देता है और आंतों की हेल्थ को बेहतर बनाता है। विटामिन A: नारंगी शकरकंद में बीटा-कैरोटीन और प्रोविटामिन A की भरपूर मात्रा होती है, जो आंतों में जाकर विटामिन A में बदल जाता है। एक मध्यम आकार का शकरकंद (114 ग्राम) खाने से रोज की विटामिन A की जरूरत का 122% मिल जाता है। यह सेल्स के विकास, इम्यून सिस्टम, प्रजनन और आंखों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी होता है। पॉलीफेनोल्स: शकरकंद में पॉलीफेनोल्स एंटीऑक्सिडेंट्स होते हैं, जो सूजन को कम करने, कोलेस्ट्रॉल के स्तर को सुधारने और ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद करते हैं। बैंगनी शकरकंद में पाया जाने वाला एंथोसाइनिन सूजन को कम करने और मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने में सहायक होता है। विटामिन C और विटामिन B6: शकरकंद विटामिन C और विटामिन B6 का भी अच्छा स्रोत है। इसमें भी आलू की तरह प्रतिरोधी स्टार्च पाया जाता है, जो आंतों के स्वास्थ्य को सुधारने, ब्लड शुगर कंट्रोल करने में मदद करता है। साथ ही इससे पेट भरे होने का एहसास होता है, जो वजन घटाने में मददगार हो सकता है।तो, क्या आपने यह सोच लिया है कि आपकी हेल्थ के लिए क्या बेहतर है– आलू या शकरकंद? आइए ग्राफिक के जरिए दोनों में पाए जाने वाले न्यूट्रिएंट्स और डेली वैल्यू के बीच के अंतर को समझते हैं। क्या आलू और शकरकंद का कुछ नुकसान भी है? आलू और शकरकंद दोनों ही हेल्थ के लिए फायदेमंद हैं, लेकिन अधिक मात्रा में खाने से कई नुकसान हो सकते हैं। साथ ही एलर्जी की समस्याओं से जूझ रहे व्यक्तियों को शकरकंद खाने से बचना चाहिए।शकरकंद में विटामिन A की अधिकता होती है। इससे शरीर में पॉइजनिंग हो सकती है। वहीं अधिक मात्रा में आलू खाने से कई सारी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। आइए इसे ग्राफिक के जरिए जानते हैं। आपके लिए कौन सा बेहतर? आलू और शकरकंद दोनों ही हेल्थ के लिए फायदेमंद होते हैं। इनमें कार्बोहाइड्रेट्स, फाइबर, विटामिन्स, मिनरल्स और एंटीऑक्सिडेंट्स की भरपूर मात्रा पाई जाती है। शकरकंद में विटामिन A की मात्रा ज्यादा होती है, जो आंखों की सेहत और इम्यून फंक्शन के लिए बेहद जरूरी है।अपनी हेल्थ को ध्यान में रखते हुए जरूरत के अनुसार, आलू और शकरकंद दोनों को हम अपनी डाइट में संतुलित मात्रा में शामिल कर सकते हैं। अगर इनके साथ प्रोटीन रिच फूड, कई सारी हरी सब्जियां और हेल्दी फैट्स हो, तो ये हमारी सेहत के लिए अधिक फायदेमंद साबित होते हैं। किसे आलू या शकरकंद नहीं खाना चाहिए क्रॉनिक डायबिटीज के मरीजों को आलू खाने से बचना चाहिए। इससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है।आलू में स्टार्च की अधिक मात्रा होती है। ऐसे में गैस्ट्रिक या एसिडिटी की समस्या से जूझ रहे लोगों को आलू से परहेज करना चाहिए।आलू में एक ऐसा केमिकल होता है, जो एनेस्थीसिया के असर को कम कर सकता है। साथ ही सर्जरी से रिकवरी में देरी का कारण बन सकता है। इसलिए किसी सर्जरी के बाद इसे खाने से बचना चाहिए।आलू में ऑक्सलिक एसिड पाया जाता है, जो ब्लैडर सर्जरी के बाद दर्द पैदा कर सकता है। इसलिए ब्लैडर सर्जरी से पहले आलू नहीं खाना चाहिए।क्रॉनिक डायबिटीज हो तो शकरकंद नहीं खाना चाहिए। इससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है।लिवर की बीमारी से जूझ लोगों को भी शकरकंद नहीं खाना चाहिए। शकरकंद में पोटैशियम बहुत ज्यादा होता है, जो लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है।

औषधीय गुणों से भरपूर अर्जुन के पेड़ से संबंधित विस्तृत जानकारी,एवं फायदे

Detailed information and benefits related to Arjuna tree which is rich in medicinal properties. अर्जुन के पेड़ को औषधीय पेड़ माना जाता हैं क्यूंकि इसे बहुत सी दवाइयों के लिए उपयोगी माना जाता है। यह पेड़ ज्यादातर नदी और नालों के किनारे पाए जाते है। अर्जुन का पेड़ सदाहरित रहता हैं। अर्जुन के पेड़ को अन्य कई नामो से जाना जाता हैं जैसे ,घवल और नदीसर्ज। इस पेड़ की ऊंचाई लगभग 60 -80 फ़ीट ऊँची रहती हैं। अर्जुन का पेड़ ज्यादातर उत्तर प्रदेश ,महाराष्ट्र ,बिहार और अन्य कई राज्यों नदियों के किनारे या सुखी नदियों के तल के पास पाए जाते है। अर्जुन का पेड़ कैसा होता हैं अर्जुन के पेड़ की लम्बाई काफी ऊँची रहती है। अर्जुन का पेड़ बहुत ही शुष्क इलाकों में पाया जाता हैं। अर्जुन के पेड़ को किसी भी मिटटी में उगाया जा सकता है। अर्जुन के पेड़ को अनुनारिष्ट के नाम से भी जाना जाता है। इस पेड़ का उपयोग बहुत सालों से आयुर्वेदिक दवाइयों के लिए किया जा रहा है। अर्जुन के पेड़ का फल कैसा होता हैं अर्जुन के पेड़ का फल शुरुआत हल्के सफ़ेद और पीले रंग का होता हैं ,कुछ समय पश्चात जब फल में बढ़ोत्तरी होती हैं तो ये फल हरे और पीले रंग का दिखाई पड़ता हैं ,साथ ही इसमें से हल्की हल्की सुगंध भी आने लगती है। पकने के बाद ये फल लाल रंग का दिखाई पड़ने लगता है। अर्जुन के पेड़ के पत्ते हैं लाभकारी अर्जुन के पेड़ के पत्ते खाने से ये शरीर में जमा गंदे कॉलेस्ट्रॉल को बाहर निकलता हैं। इसका सेवन सुबह खाली पेट करना चाहिए। इन पत्तों का सेवन करने से ब्लड शुगर नियंत्रित रहता हैं। अर्जुन की छाल से मिलने वाले फायदे अर्जुन की छाल का काढ़ा बनाकर पीने से खून पतला होता हैं जो शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को संतुलित बनाये रखता है। इस छाल के काढ़े का उपयोग दो से तीन महीने लगातार करना चाहिए। इस काढ़े के उपयोग से रक्तश्राव कम होता है। यह ह्रदय के रक्तचाप जैसी गतिविधियों की क्षमता में सुधार लाता है। पाचन किर्या में सहायक अर्जुन का पेड़ पाचन किर्या में सहायक होता हैं। इसकी छाल का चूर्ण बनाकर लेने से ये पाचन तंत्र को संतुलित बनाये रखता है। यह बड़े हुए चर्बी को कम करने में मदद करता हैं ,अर्जुन की छाल का सेवन लिवर जैसी समस्याओं के लिए बेहतर माना जाता है। यह वजन घटाने में भी सहायता प्रदान करती है। सर्दी खांसी में है लाभकारी अर्जुन के पेड़ की छाल का कड़ा बनाकर पीने से या फिर अर्जुन के चूर्ण में शहद मिलाकर खाने से सर्दी और खांसी दोनों में फायदा होता है। अर्जुन के पेड़ का रस औषिधि के रूप में सदियों से किया जा रहा हैं। हड्डियों के जोड़ने में मददगार अर्जुन के पेड़ की छाल का उपयोग टूटी हुई हड्डियों या फिर मांसपेशियों में होने वाले दुखाव के लिए किया जाता हैं। इसमें छाल के चूर्ण को एक गिलास दूध में दो चम्मच चूर्ण मिलाकर पीने से हड्डियां मजबूत होती है। ये हड्डी में होने वाले दर्द से भी आराम दिलाता हैं। अल्सर बीमारी में है फायदेमंद अर्जुन का प्रयोग अल्सर जैसी बीमारी में भी किया जाता हैं। कई बार अल्सर का घाव जल्द ही नहीं भर पाता हैं। या फिर घाव सूखते ही दूसरे घाव निकल आते हैं ,इसमें अर्जुन के पेड़ की छाल का काढ़ा बनाकर ,घाव को इससे धोये। ऐसा करने से घाव कम होने लगते हैं,साथ ही अल्सर जैसे रोग को भी नियंत्रित करता है। अर्जुन की छाल से होने वाले नुकसान अर्जुन के पेड़ को बहुत सी बीमारियों के लिए लाभकारी माना जाता हैं ,लेकिन इसके कुछ नुक्सान भी हैं जो शरीर पर गलत प्रभाव डालते है। सीने में जलन होना अर्जुन की छाल का सेवन बहुत से लोगो की सेहत के लिए ठीक नहीं रहता हैं, जिसकी वजह से उन्हें जी मचलना या घबराहट जैसी परेशानियां अक्सर हो जाती है। यदि आप छाल का सेवन कर रहे हैं और आपको ऐसा महसूस होता हैं की सीने में जलन या दर्द हो रहा हैं तो इसका उपयोग करना उसी वक्त छोड़ दे। पेट में दर्द या ऐठन का महसूस होना यदि छाल का उपयोग करने से आपको पेट में दर्द या और कोई परेशानी महसूस होती हैं तो छाल का सेवन करना बंद कर दे। हालाँकि अर्जुन एक आयुर्वेदिक जड़ीबूटी हैं लड़की कुछ लोगों पर इसका दुष्प्रभाव पड़ता है। एलेर्जी जैसो रोगों को जन्म देता हैं अर्जुन के पेड़ की छाल का घोल बनाकर शरीर पर लगाया जाता हैं, यह त्वचा के लिए बहुत ही लाभकारी माना जाता हैं। लेकिन इसका लेप बहुत से लोगो के शरीर एलेर्जी से जुडी समस्याओं को भी खड़ा कर देता हैं। यदि इस लेप का उपयोग करने के बाद शरीर में खुजली जैसी परेशानिया हो तो इस लेप का उपयोग न करें। आयुर्वेद में अर्जुन के पेड़ को बहुत ही लाभकारी माना गया हैं। अर्जुन के पेड़ में सबसे ज्यादा उपयोग छाल का किया जाता हैं। अर्जुन के पेड़ की छाल में मैग्नीशियम ,पोटेसियम और कैल्शियम पाया जाता है। इस पेड़ की छल का इस्तेमाल बहुत से रोगो में किया जाता हैं ,और ये लाभकारी भी है। अर्जुन के पेड़ की छाल का उपयोग कैंसर सम्बंधित रोगो से निपटने के लिए भी किया जाता है। साथ ही इसके कुछ नुक्सान भी हैं। जो व्यक्ति पहले से किसी भी प्रकार की कोई दवाई ले रहा हैं ,उसे इसका सेवन डॉक्टर से परामर्श लेकर ही करना चाहिए।

मध्य प्रदेश : हजारों फार्मासिस्टों की पोस्ट खाली फिर भी स्वास्थ्य विभाग कर रहा है अनदेखी ?

Madhya Pradesh: Posts of thousands of pharmacists are vacant yet the health department is ignoring it?

Madhya Pradesh: Posts of thousands of pharmacists are vacant yet the health department is ignoring it? भोपाल ( कमलेश )। मप्र में स्वास्थ्य विभाग के प्रशासकीय 10267 केंद्र संचालित हैं। यहां अभी तक फार्मासिस्टों की भर्ती नहीं हो सकी है, जबकि इन स्वास्थ केंद्रों में 126 प्रकार की दवाओं का वितरण और संधारण किया जाता है। वर्तमान में इन उप स्वास्थ्य केंद्रों में गैर-फार्मासिस्टों की मदद ली जा रही है, जो फार्मेसी एक्ट का उल्लंघन है। बता दें कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के तहत देशभर के उपस्वास्थ्य केंद्रों में आयुष, नर्सिंग के साथ फार्मासिस्ट भी कम्युनिटी हेल्थ आफिसर पद के लिए योग्य हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मप्र द्वारा फार्मासिस्टों को नजरअंदाज किया जा रहा है।दरअसल, देश में संचालित चिकित्सा प्रणाली मुख्यतः एलोपैथी पर आधारित है, जिसके तहत एमबीबीएस व एमएस/एमडी डिग्रीधारी चिकित्सक इस पद्धति से उपचार करते हैं। एलोपैथी पद्धति में एमबीबीएस, एमएस डिग्रीधारी चिकित्सक के बाद फार्मासिस्ट ही मरीजों एवं बीमारियों से संबंधित जानकारी के सबसे नजदीक हैं।फार्मासिस्ट अपने बी फार्मेसी एवं एम फार्मेसी कोर्स के दौरान इसका अध्ययन भी करते हैं। बी फार्मेसी चार वर्षीय पाठ्यक्रम में थ्योरी एवं प्रैक्टिकल मिलाकर कुल 75 विषयों के तहत एलोपैथी पद्धति विशेषतः बीमारी एवं उसके उपचार से संबंधित अध्ययन किया जाता है, बावजूद इसके फार्मासिस्टों को कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर के पद के लिए योग्य नहीं समझा जा रहा।काउंसिल बना दलालों का अड्डाफार्मासिस्टों ने बताया है कि मप्र फार्मेसी काउंसिल में निरंतर अनियमितताएं पाई जा रही हैं। इसमें खासतौर पर पंजीकृत फार्मासिस्टों के रिनुअल, नए पंजीयन, एनओसी और पंजीयन के लिए प्रोफाइल क्रिएशन में समस्या होती है, जिससे हजारों फार्मासिस्ट परेशान होते हैं।फार्मासिस्टों का आरोप है कि काउंसिल में बिना लेने-देन कोई काम नहीं होता है, यह दलालों का अड्डा है। काउंसिल परिसर में दलाल सक्रिय हैं। जो फार्मासिस्ट रिश्वत नहीं देते हैं, उनके काम रोक दिए जाते हैं। जनता के साथ खिलवाड़स्वास्थ्य विभाग के 10267 उप स्वास्थ्य केंद्रों में फार्मासिस्ट के पद को स्वीकृत नहीं किया गया है। जिसके चलते दवाओं का वितरण, संधारण आदि कार्य गैर फार्मासिस्ट से कराया जा रहा है। इससे प्रदेश की जनता के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। – राजन नायर, प्रदेश संयोजक, स्टेट फार्मासिस्ट एसोसिएशन, मप्र

अमानक दवाओं की सप्लाई पर चिकित्सक महासंघ अलर्ट, CM को लिखी चिट्ठी

Doctors federation alert on supply of non-standard medicines, letter written to CM

Doctors federation alert on supply of non-standard medicines, letter written to CM भोपाल ! प्रदेश के सरकारी अस्पताल में अमानक दवाइयों की सप्लाई हो रही है. इस बात का खुलासा चिकित्सक महासंघ द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को लिखे पत्र से हुआ है. चिकित्सक महासंघ द्वारा लिखे गए पत्र में सीएम से एफआईआर दर्ज कराने के साथ ही आजीवन कारावास सजा की मांग की है. बता दें मध्य प्रदेश में सरकारी अस्पतालों में अमानक दवाइयों का मामला सुर्खियों में बना हुआ है. इसे लेकर मध्य प्रदेश मेडिकल कॉरपोरेशन ने सीएम डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखा है. इस पत्र में शासकीय अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों की शिकायत पर आईसीयू और ऑपरेशन के दौरान उपयोग की जाने वाली जीवन रक्षक 10 दवाओं को लैब जांच में अमानक पाए जाने पर चिंता जताई. डॉक्टर्स ने मामले को गंभीर चिंता का विषय बताया और सीएम को लिखे पत्र में बताया कि 10 जीवन रक्षक दवाओं का अमानक पाया जाना मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ है. ‘बच्चों के स्वास्थ्य से भी खिलवाड़’पत्र में बताया कि ओआरएस जैसे सामग्री के अमानक पाए जाने से दस्त एवं डायरिया से ग्रस्त बच्चों का इलाज प्रतिकूल रूप से प्रभावित हुआ है. हमारे चिकित्सकों ने गंभीर मरीजों के उपचार में इन दवाओं का उपयोग किए जाने पर मरीजों पर दवा का असर न होना पाया गया है. चिकित्सा संघ ने कहा की विगत दिनों में लगातार दवाओं के अमानक पाए जाने पर ऐसा प्रतीत होता है कि निर्माता कंपनियों पर गुणवत्तापूर्ण दवाइयां निर्मित करने का कोई नियंत्रण नहीं है. आजीवन कारावास की सजा होसीएम को लिखे पत्र में कहा कि मध्य प्रदेश शासकीय स्वशासी चिकित्सक महासंघ मांग करता है कि मध्य प्रदेश में दवा निर्माता कंपनियों शासकीय अस्पतालों में अमानक दवाइयां सप्लाई करने की स्थिति में आजीवन कारावास का कठोर दंड निर्धारित किया जाए.

भोपाल: औषधि निरीक्षक एवं CMHO की सयुंक्त टीम ने शहर के क्लिनिक पर की कार्यवाही से शहर में मचा हड़कंप । 

A young man died due to the negligence of a doctor at Aditya Hospital, Jabalpur

The joint team of drug inspector and CMHO created a stir in the city due to the action taken against the city clinic. भोपाल, ड्रग इंस्पेक्टर तबस्सुम मेरोठा ने शुक्रवार को  दोपहर बाद भोपाल शहर के बाणगंगा क्षेत्र में संचालित विकास क्लिनिक पर कार्यवाही की जिसमे उन्होंने पाया की फर्जी तरीके से क्लिनिक जिसका नाम विकास क्लिनिक का आकस्मिक निरीक्षण किया। जहाँ करीब 6 बॉक्स भरकर एलॉपथी की दवाईया मिली,  उन्होंने विभिन्न दवाओं के खरीद के बिल चेक किए, रजिस्टर चेक किए। विकास क्लिनिक के संचालक डॉक्टर अनिल शर्मा इन सभी के कोई भी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाए. जिसके तहत फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट ने क्लिनिक पर एलॉपथी दवाई पाए जाने पर उचित कार्यवाही की गयी।  CMHO एवं निरयंत्रक खाद्य एवं औषधि प्रशासन की सयुक्त टीम ने यह कार्यवाही की, टीम में DHO मनोज हुरमाडे व् सदस्य, ड्रग इंस्पेक्टर मौजूद थे।  उन्होंने इसके अलावा टीम ने आस पास के क्षेत्र में भी मेडिकल चेक किये तथा अपनी रूटीन कार्यवाही को अंजाम दिया।  ड्रग इंस्पेक्टर भोपाल तबस्सुम मेरोठा ने बताया कि दवा मेडिकल स्टोर पर दवाओं की खरीद और बिक्री का विवरण रखें, शेड्यूल एच 1 का रजिस्टर बनाएं, फ्रिज रखें, मेडिकल स्टोर लाइसेंस चस्पा करके रखें, इसके अलावा पशुओं की दवा बेचते हैं तो वह दवा रखने के स्थान पर बोर्ड भी लगाएं। ड्रग इंस्पेक्टर कन्हैया लाल अग्रवाल एवं तबस्सुम मेरोठा से मिली जानकारी के अनुसार पिछले एक महीने में अनेक कार्यवाहियां खाघ एवं औषधि प्रशासन  के आदेश कार्यक्षेत्र में संचालित औषधि विक्रय संस्थानों के द्वारा औषधियों पर अंकित एम.आर.पी. से अधिक मूल्य पर औषधियों का विक्रय न हो एवं आम जनता को उचित मूल्य पर औषधियों उपलब्ध हो सके, साथ ही औषधि विक्रय संस्थान द्वारा बेची जाने वाली ऐसी औषधियों जिनका दुरूपयोग नशे के रूप में हो सकता है। औषधि विक्रय संस्थानों द्वारा औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 एवं नियमावली, रजिस्टर्ड मेडिकल प्रेक्टीशनर के पर्चे के बिना यदि कोई शेडयूल एथ, एच। एवं एक्स का विक्रय किये जाने के संबंध में कोई प्रकरण पाया जाता है तो औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 एवं नियमावली, 1945 के तहत् कठोर कार्यवाही की जाएगी सभी निजी चिकित्सालयों/ नर्सिंग होम परित्तर में संचालित औषधि विक्रय संस्थानों के मालिक, कर्मचारी, स्टॉफ अथवा चिकित्सालयों के स्टॉफ द्वारा मरीजों को अथवा मरीजों के परिजन को उनके ही औषधि विक्रय संस्थान से ही औषधि क्रय किये जाने हेतु बाध्य नहीं कर सकते । इस प्रकार का कृत्य करते पाए जाने औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत कठोर कार्यवाही की जाएगी।  

खाघ एवं औषधि नियंत्रक के आदेश की, रायसेन औषधि निरीक्षक द्वारा उड़ाई जा रही है धज्जिया। 

Raisen; Health Department; DI Ajeet Jain; Bhopal;

The orders of the Food and Drug Controller are being flouted by the Raisen Drug Inspector. Special Correspondent, Raisen, Madhya Pradesh भोपाल , मध्य प्रदेश के सभी ड्रग इंस्पेक्टरों को खाघ एवं औषधि नियंत्रक द्वारा 27 जुलाई 2024 को एक आदेश भेजा गया था, जिसमे मध्यप्रदेश के सभी जिलों के औषधि निरीक्षकों को उनके कार्यक्षेत्र में संचालित हो रहे औषधि विक्रय संस्थानों के द्वारा औषधियों पर अंकित एम.आर.पी. से अधिक मूल्य पर औषधियों का विक्रय न हो एवं आम जनता को उचित मूल्य पर औषधियों उपलब्ध हो सके, साथ ही औषधि विक्रय संस्थान द्वारा बेची जाने वाली ऐसी औषधियों जिनका दुरूपयोग नशे के रूप में हो सकता है ऐसी औषधियों की बिक्री को और प्रभावी रूप से नियंत्रित किये जाने के संबंध में आदेश जारी किये गए थे, एवं औषधि निरीक्षको को निरिक्षण कर यह सुनिश्चित करने को कहा गया था की किसी फार्मेसी/ केमिस्ट शॉप / मेडिकल स्टोर के द्वारा बिना प्रिस्क्रिप्शन के शेडयूल H, H1 एवं X में दी गई औषधियों का विक्रय न किया जाये।  निजी चिकित्सालयों/ नर्सिंग होम परित्तर में संचालित औषधि विक्रय संस्थानों के मालिक, कर्मचारी, स्टॉफ द्वारा अथवा चिकित्सालयों के स्टॉफ द्वारा मरीजों को अथवा मरीजों के परिजन को उनके ही औषधि विक्रय संस्थान से ही औषधि क्रय किये जाने हेतु बाध्य नहीं किया जाय।  रजिस्टर्ड मेडिकल प्रेक्टीशनर के पर्चे के बिना यदि शेडयूल H, H1 एवं X का विक्रय न किया जाये एवं आम जनता हेतु औषधि विक्रय संस्थान द्वारा प्रमुख स्थान पर इस आशय को प्रदर्शित किया जाये कि ऐसी औषधियों जो शेडयूल H, H1 एवं X में आती है उन्हें बिना प्रिस्क्रिप्शन के नहीं बेचा जाय। इन्होने क्या कहा —-? लेकिन रायसेन जिले के औषधि निरीक्षक “अजीत जैन” इस आदेश की धज्जियां उड़ाते दिख रहे है “सहारा समाचार” टीम के द्वारा फ़ोन पर बात करने पर औषधि निरीक्षक अजीत जैन ने लगभग 24 घंटे बाद 5-6 कॉल करने पर हमारी टीम का फ़ोन उठाया एवं जानकारी देने से मना कर दिया और कहा की में इस सम्बन्ध में आप से कोई बात नहीं कर सकता।   हमारे संवाददाता ने रायसेन क्षेत्र में जाकर जानकारी इकठा करने की कोशिश की तो पता चला की यहाँ पर किसी भी प्रकार की कोई कारवाही नहीं की गयी। इस से यह स्पष्ठ होता है की रायसेन के औषधि निरीक्षक इस आदेश को गंभीरता से नहीं ले रहे है आसपास के जिलों से मिली जानकारी के अनुसार मेडिकल संस्थानों पर शेडयूल H, H1 एवं X के चेतावनी का विज्ञापन प्रदर्शित देखा गया है।

कोलकाता की घटना के बाद मध्य प्रदेश प्रशासन सख्त, सरकारी अस्पतालों के कर्मचारियों का पता लगाया जाएगा बैकग्राउंड

Madhya Pradesh administration strict after Kolkata incident, background of government hospital employees will be ascertained

Madhya Pradesh administration strict after Kolkata incident, background of government hospital employees will be ascertained भोपाल। कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में ट्रेनी महिला डॉक्टर के साथ हुई हैवानियत की घटना के बाद मप्र में भी स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी अस्पतलों की सुरक्षा- व्यवस्था पुख्ता करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। सरकारी अस्पताल में काम करने वाले कर्मचारियों की कुंडली जांची जाएगी। स्वास्थ्य आयुक्त ने सरकारी अस्पताल के सफाईकर्मी, सुरक्षाकर्मी सहित अन्य कर्मचारियों के बैकग्राउंड की जांच के आदेश दिए हैं। इससे यह पता चल जाएगा कि अस्पतालों में काम करने वालों में से कोई किसी आपराधिक प्रवृत्ति का तो नहीं है। इसके अलावा सभी अस्पतालों के अधीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि अस्पताल की सुरक्षा और सीसीटीवी कैमरों की जानकारी उपलब्ध करवाएं। इससे अस्पताल में सुरक्षा-व्यवस्था पुख्ता हो सकेगी। क्योंकि इन अस्पतालों में बड़ी संख्या में महिला डॉक्टर दिन-रात ड्यूटी करती हैं। हमीदिया हो या फिर जेपी अस्पताल, इनमें डाक्टर एक साथ ड्यूटी रूम साझा करने के लिए मजबूर हैं, क्योंकि यहां पुरुष और महिला डॉक्टरों के लिए अलग-अलग कमरे नहीं हैं।जेपी अस्पताल में कमरों के दरवाजे टूटे, कैमरा भी नहींराजधानी के मॉडल जिला अस्पताल जेपी में बने ड्यूटी रूम में कोई सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं। कमरों के दरवाजे भी टूटे हुए हैं। कई बार कोई गार्ड भी ड्यूटी पर नहीं होता है। अस्पताल के कर्मचारियों के अनुसार मेडिसिन विभाग में 15 ड्यूटी डाक्टर हैं और एक समय में 10 से अधिक ड्यूटी पर रहते हैं, लेकिन यहां सिर्फ एक सामान्य ड्यूटी रूम हैं, जो काफी छोटे हैं। शौचालय की स्थिति खराब है, टूटे हुए बिस्तर हैं और वेंटिलेशन के लिए कोई जगह नहीं है। कई बिस्तरों पर तो सिर्फ सामान ही रखा जा रहा है।शिकायत के बावजूद सुनवाई नहींचिकित्सक महासंघ के मुख्य संयोजक डॉ. राकेश मालवीय ने बताया कि डॉक्टरों ने सुरक्षा को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों से कई बार शिकायत की है, लेकिन अभी तक कोई फायदा नहीं हुआ। अस्पताल में डॉक्टरों के लिए कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं है। कोई भी घूमते हुए किसी भी वार्ड में घुस सकता है।डॉ. राकेश मालवीय के अनुसार, बड़ी संख्या में स्वजन और कई असामाजिक तत्व बिना किसी जांच के गलियारों में बैठे रहते हैं। इतना ही नहीं मरीजों के स्वजन द्वारा दुर्व्यवहार के समय भी मौके पर गार्ड नहीं होता है, हमें उसे ढूंढना पड़ता है। सुरक्षा बढ़ाने और CCTV की जांच के निर्देश

किस विटामिन की कमी से जल्दी आता है बुढ़ापा? वैज्ञानिकों ने लगाया पता

Deficiency of which vitamin causes early ageing? Scientists discovered

Deficiency of which vitamin causes early ageing? Scientists discovered उम्र बढ़ना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है. हर कोई बूढ़ा होता है, लेकिन कुछ लोगों की उम्र उनके चेहरे पर नहीं दिखती. वे अपनी उम्र से काफी छोटे लगते हैं. क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है? वैज्ञानिकों ने इस सवाल का जवाब ढूंढ निकाला है. न्यूट्रिएंट्स जर्नल में प्रकाशित एक नए अध्ययन के अनुसार, विटामिन डी उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा कर सकता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि विटामिन डी कई महत्वपूर्ण कारकों को प्रभावित करता है जो उम्र बढ़ने और उम्र से संबंधित बीमारियों से जुड़े होते हैं. उम्र बढ़ने की प्रक्रिया कैसे होती है?उम्र बढ़ने के साथ-साथ हमारे शरीर में कई बदलाव होते हैं. सेल्स में सूजन, सेल्स के बीच संचार में गड़बड़ी, स्टेम सेल की थकान, सेल्स की सेंसिटिविटी कम होना, माइटोकोंड्रिया का कमजोर होना, पोषक तत्वों का सही तरीके से अवशोषण न होना, प्रोटीन में बदलाव और जीन में बदलाव जैसे कई कारक उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं. ये सभी प्रक्रियाएं बहुत जटिल हैं, लेकिन विटामिन डी इन सभी प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. विटामिन डी कैसे करता है काम?विटामिन डी हमारे शरीर के लिए कई तरह से फायदेमंद होता है. यह हड्डियों को मजबूत बनाने, प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने और मूड को बेहतर बनाने में मदद करता है. इसके अलावा, विटामिन डी सेल्स की मरम्मत और नवीनीकरण में भी मदद करता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि विटामिन डी सूजन को कम करके, सेल्स के बीच संचार को बेहतर बनाकर और स्टेम सेल को सक्रिय करके उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा कर सकता है. विटामिन डी की कमी के क्या होते हैं लक्षण?विटामिन डी की कमी से हड्डियों का कमजोर होना, थकान, मसल्स में दर्द, डिप्रेशन और इम्यून सिस्टम कमजोर होना जैसे लक्षण हो सकते हैं. इसके अलावा, विटामिन डी की कमी से दिल की बीमारियां, कैंसर और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है. विटामिन डी कैसे प्राप्त करें?विटामिन डी सूर की रोशनी से मिलता है. आप रोजाना कुछ समय धूप में बैठकर अपनी विटामिन डी की जरूरत पूरी कर सकते हैं. इसके अलावा, आप विटामिन डी से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे मछली, अंडे और दूध का सेवन भी कर सकते हैं. यदि आपको विटामिन डी की कमी है तो आप अपने डॉक्टर से विटामिन डी की गोलियां लेने की सलाह ले सकते हैं.

चिलचिलाती गर्मी में शरीर को फायदा पहुंचाएगा लौकी का रायता, जानें इसे बनाने का तरीका

Bottle gourd raita will benefit the body in the scorching heat, know how to make it अप्रैल का महीना चल रहा है और भीषण गर्मी से अभी से लोगों की हालत खराब होने लगी है। कई शहरों में तो तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से पार चला गया है, जिस वजह से लोगों ने बाहर निकलना तक बंद कर दिया है। इस मौसम में लोगों को अपने खाने का खासा ध्यान रखना पड़ता है। अगर आप भी ऐसी डिश की तलाश कर रहे हैं, जो स्वाद और सेहत दोनों के लिए फायदेमंद हो तो लौकी का रायता एक बेहतर विकल्प है। लौकी गर्मी के मौसम में शरीर को काफी लाभ पहुंचाती है। इसमें कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को हाइड्रेट रखते हैं। इसके साथ ही लौकी मे पाए जाने वाले विटामिन-सी, फाइबर, पोटेशियम और अन्य तत्व शरीर के लिए लाभदायक हैं। वहीं दही शरीर को ठंडक प्रदान करता है। ऐसे में अगर आप लौकी का रायता बनाकर खाएंगे, तो आपको इसका लाभ देखने को जरूर मिलेगा। लौकी का रायता बनाने का सामान विधि लौकी का रायता बनाना काफी आसान है। इसके लिए सबसे पहले लौकी का छिलका उतारकर उसे चार टुकड़ों में काटकर कद्दूकस कर लें। कद्दूकस करने के बाद लौकी को एक पैन में पानी डालकर उबाल लें। इसे आपको 5-8 मिनट तक उबालना है। जब लौकी गल जाए तो इसे छलनी से छानकर एक थाली में फैला दें।जब तक ये ठंडी हो रही है, तब तक एक भगोने में दही लेकर उसे सही से फेंट लें। अब आपको रायते के तड़के की तैयारी करनी है। तड़का लगाने के लिए सबसे पहले एक पैन में तेल डालकर इसे गर्म करें। तेल गर्म हो जाने के बाद इसमें हींग-जीरे का तड़का लगाएं। तड़का बन जाने के बाद इसे फेंटी हुई दही में डालें। तड़का लगाने के बाद दही को सही से मिक्स करें। आखिर में इसमें उबली हुई लौकी, बारीक कटी धनिया पत्ती, हरी मिर्च स्वादानुसार नमक और थोड़ा सा काला नमक डालें। रायता तैयार होने के बाद इसे फ्रिज में रख दें। अब ठंडे रायते को खाने के साथ परोसें।

टमाटर खाने से दूर हो सकती हैं कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियां, जानें फायदे

Eating tomatoes can cure dangerous diseases like cancer, know the benefits टमाटर में विटामिन C ही नहीं सोडियम, फास्फोरस, कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम और सल्फर जैसे पावरफुल तत्व पाए जाते हैं. इसमें मौजूद ग्लूटाथियोन इम्यूनिटी बढ़ाकर कई तरह की बीमारियों से बचा सकता है. हेल्थ डेस्क सहारा समाचार, भोपाल ! टमाटर हर सब्जी की जान होता है. इसे सलाद, चटनी, सॉस और न जाने कितने सारे फूड्स को टेस्टी बनाने में उपयोग किया जाता है. यह सेहत के लिए जबरदस्त फायदेमंद है. इसमें (Tomatoes) ढेर सारे पौष्टिक तत्व और कई एंटीऑक्सिडेंट्स (Antioxidant) भी पाए जाते हैं, जो शरीर को कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियों से भी बचा सकते हैं. इसके अलावा कब्ज और कमजोरी जैसी समस्याएं भी दूर करने में टमाटर उपयोगी हो सकते हैं. आइए जानते हैं टमाटर के क्या-क्या फायदे हैं… टमाटर क्यों इतना फायदेमंदटमाटर में लाइकोपेन नाम का एंटीऑक्सीडेंट होता है, जो हार्ट की बीमारी और कैंसर के खतरे को कम करता है. टमाटर में विटामिन C ही नहीं सोडियम, फास्फोरस, कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम और सल्फर जैसे जरूरी और पावरफुल तत्व पाए जाते हैं. इसमें मौजूद ग्लूटाथियोन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी को बढ़ा देता है और प्रोस्ट्रेट कैंसर से भी शरीर की रक्षा करता है. यह एक अच्छे एंटीऑक्सिडेंट का काम करता है, इसीलिए यह शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को सामान्‍य बनाने में मदद करता है. टमाटर के क्या-क्या फायदे हैं कैंसर का खतरा करें कमरिसर्च में पता चला है कि जब मोनोपॉज के बाद अगर महिलाएं टमाटर खाती हैं तो ब्रेस्ट कैंसर का रिस्क काफी कम हो सकता है. इससे ग्लूटाथियोन नाम का एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है, जो हार्मोन्स पर सकारात्मक असर डालकर कैंसर का रिस्क कम होता है. वजन कम करेंलो कैलोरी फूड होने के कारण यह टमाटर आपके वजन को कंट्रोल में रखता है. इसमें पानी के साथ ही फाइबर भी काफी ज्यादा मात्रा में होता है. इस वजह से वजन कम करने में ये काफी मदद कर सकता है. वेट कंट्रोल करने वाले गुण की वजह से ही इसे ‘फिलिंग फूड’ नाम से भी जाना जाता है. शरीर को दे मजबूतीटमाटर में विटामिन और कैल्शियम पाए जाते हैं, जो हड्डियों के टिशूज़ हेल्दी रखकर उन्हें मजबूत बनाते हैं. टमाटर खाने से ब्रेन हैमरेज की का खतरा भी कम किया जा सकता है. इससे शरीर को मजबूती मिलती है. पाचन शक्ति बढ़ाएटमाटर में मौजूद क्लोरीन और सल्फर के कारण पाचन शक्ति बढती है और गैस-कब्ज जैसी परेशानी दूर हो जाती हैं. टमाटर हमारे शरीर से खराब पदार्थों को बाहर निकालने में भी मददगार होता है.Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

जिला चिकित्सालय में उपलब्ध नहीं रहती पूरी दवाई , बाहर की दवा लेने को मजबूर नागरिक

Complete medicines are not available in the district hospital, citizens are forced to take medicines from outside. कटनी । शासन के द्वारा नागरिकों को मुहैया कराने के लिए जिला चिकित्सालय में दवाइयां उपयोग कराई जाती हैं एवं अच्छे स्वास्थ्य की अपेक्षा की जाती है लेकिन जिला चिकित्सालय में आए हुए मरीजों को पूरी दवाइयां उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं डॉक्टर जो दवा लिखते हैं इसमें कई दवाइयां नागरिक बाहर से खरीदने को मजबूर होते हैं यह कोई नई बात नहीं है यह सिलसिला हमेशा चलता रहता है मिली जानकारी के मुताबिक जिला चिकित्सालय में लगभग 80 परसेंट दवाइयां उपलब्ध रहती हैं एवं कई प्रकार की दवाइयां जिला चिकित्सालय में आती हैं फिर भी डॉक्टर के द्वारा लिखी दवाइयां कुछ मरीजों को प्राप्त नहीं हो पाती हैं नागरिकों ने बताया कि कई बार ऐसा होता है कि बाहर से दवाई लेने को मजबूर होते हैं जिला चिकित्सालय में हर रोज कई मरीज आते हैं और बाहर से भी जिसको दवाइयां नहीं मिलती है वह परेशान होते हैं मरीज ने बताया कि पूर्ण रूप से दवाइयां नहीं मिल पाती हैं जिससे बाहर महंगे दामों में खरीदना पड़ता है इस विषय पर सिविल सर्जन डॉक्टर यशवंत वर्मा का कहना है कि हमारी कोशिश रहती है कि मरीज को दवाइयां उपलब्ध कराना कभी स्टॉक में कमी हो जाती है और लेट दवाइयां मिलने के कारण मरीजों को उपलब्ध नहीं हो पाती हैं

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