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डायबिटीज के मरीजों के लिए हैं वरदान , पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं मोरिंगा के पत्ते

Moringa leaves are a boon for diabetic patients, they are rich in nutrients. मोरिंगा की फली का इस्तेमाल कई तरह के भोजन बनाने के लिए किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते है कि न सिर्फ इसकी फली बल्कि पत्ते भी हमारी सेहत के लिए काफी फायदेमंद होते हैं। डायबिटीज कंट्रोल से लेकर पाचन बेहतर करने तक इसके कई फायदे हैं।मोरिंगा की फली का इस्तेमाल कई तरह के भोजन बनाने के लिए किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते है कि न सिर्फ इसकी फली बल्कि पत्ते भी हमारी सेहत के लिए काफी फायदेमंद होते हैं। डायबिटीज कंट्रोल से लेकर पाचन बेहतर करने तक इसके कई फायदे हैं। खुद को हेल्दी रखने के लिए हम कई चीजें को अपनी डाइट में शामिल करते हैं। फलों हो या हरी सब्जियां ये सब हमारे हेल्दी डाइट का ही एक हिस्सा होती हैं। इन्हीं में से एक है सहजन की फली जिसका इस्तेमाल लोग सब्जी के रूप में करते हैं। खासकर सांभर बनाने के लिए इसका बहुत इस्तेमाल होता है। लेकिन क्या आपके पता हैं कि सहजन की सिर्फ फली ही नहीं इसके पत्ते भी हमारे सेहत के लिए फायदेमंद हैं। सेहजन की पत्तियों में कई पोषक तत्व होते हैं जो सेहत को दुरूस्त रखने में मदद करते हैं। ऐसे में इन पत्तों को अपनी डाइट में शामिल करके आप कई बीमारियों से बच सकते हैं। डायबिटीज में असरदारअगर आप भी डायबिटीज से परेशान है तो ये आपके बहुत काम आ सकती हैं। डायबिटीज के मरीजों के लिए सहजन के पत्ते किसी वरदान से कम नहीं हैं। ये हमारे बॉडी में ब्लड शुगर के लेवल को स्थिर करने में योगदान देती हैं। जिसका सकारात्मक प्रभाव डायबिटीज मरीजों पर पड़ता है। इतना ही नहीं ये हमारे शरीर की इम्यूनिटी को भी मजबूत रखने में मदद करता है। बेहतर बनाए पाचनआप भी अगर पाचन संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं तो ये आपके काम आ सकती है। जी हां सहजन की पत्तियां आपके पाचन संबंधी समस्या के बेहतर बनाने के काम आ सकती है। इसकी पत्तियों में एंटीबायोटिक और एंटी-बैक्टीरियल जैसे गुण मौजूद होते हैं, जो पाचन को बेहतर बनाने का काम करते हैं। विटामिन से भरपूरमोरिंगा की पत्तियां विटामिन ए, विटामि सी, विटामि बी1, फोलेट, आयरन, कैल्शियम जैसे कई विटामिन की मात्रा पाई जाती है। इसके सेवन से हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज, कैंसर जैसी कई बीमारियों के लिए फायदेमंद है। इन पत्तियों को अपने डाइट में शामिल करके आप कई बीमारियों से बच सकते हैं। Disclaimer – इस लेख में दी गई सूचनाएं सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। सहारा समाचार इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह लें।

हल्के में ना लें सिरदर्द, हो सकती हैं ये गंभीर बीमारियां

Do not take headache lightly, it can lead to serious diseases. जानें राहत पाने के उपाय सिरदर्द होने पर आमतौर पर दर्द की दवा खाकर ठीक हो जाते हैं लेकिन अगर दर्द लगातार बना हुआ है तो कोई गंभीर बीमारी भी हो सकती है. ऐसी कंडीशन में इसे सामान्य दर्द समझने की गलती नहीं करनी चाहिए. Headache Remedies: सिरदर्द एक आम समस्या मानी जाती है लेकिन अगर इससे ज्यादा दिन से परेशान हैं तो सावधान हो जाइए, क्योंकि जब कई दिनों तक सिरदर्द (Headache) ठीक न हो तो वह गंभीर रूप भी ले सकती है. इसका कारण कई खतरनाक बीमारी भी हो सकती है. ऐसे में डॉक्टर के पास जाने की नौबत आ सकती है. इसलिए सिरदर्द को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. आइए जानते हैं सिरदर्द के क्या कारण हो सकते हैं और इससे बचने के लिए क्या करना चाहिए… सिरदर्द का गंभीर कारण बुखार के साथ सिरदर्दकई बार बुखार के साथ सिरदर्द या गर्दन में अकड़न की वजह से भी होती है. यह इंसेफेलाइटिस या मेनिन्जाइटिस के संकेत भी हो सकते हैं. जिसे दिमागी बुखार या मस्तिष्क ज्वर भी कहा जाता है.यह एक संक्रामक बीमारी है, जिसमें मेनिन्जेस में सूजन आ जाती है. इस तरह का सिरदर्द खतरनाक भी हो सकता है. ऐसे लोग जिन्हें डायबिटीज या उनकी इम्यूनिटी कमजोर है, उनके लिए यह जानलेवा भी हो सकती है. इसलिए समय रहते इसका इलाज करवाना चाहिए. माइग्रेन या क्लस्टर हेडेकक्लस्टर हेडेक या माइग्रेन से होने वाला सिरदर्द अलग होता है. माइग्रेन की वजह से सिर के किसी एक हिस्से में काफी तेज दर्द होता है. इसमें उल्टी या मिचली भी आती है. कई बार यह दर्द इतना ज्यादा होता है कि नींद खुल जाती है. यह समस्या 20 से 50 साल की उम्र वालों में ज्यादा देखने को मिलता है. कई बार ब्रेन ट्यूमर, स्लीप एपनिया और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों की वजह से भी सिरदर्द होता है. स्ट्रेस की वजह से सिरदर्दस्ट्रेस यानी तनाव की वजह से भी सिरदर्द की समस्या होती है. इसमें सिरदर्द अचानक से होता है और फिर खुद से ही ठीक हो जाता है. हालांकि, तनाव से होने वाले दर्द में कोई दूसरा लक्षण नहीं दिखाई देता लेकिन इसे भी हल्के में नहीं लेना चाहिए. थंडर क्लैप सिरदर्दथंडरक्लैप सिरदर्द काफी गंभीर बीमारी है. इसमें कुछ ही सेकेंडस में ही तेज दर्द होने लगता है. कई बार स्ट्रोक, आर्टरीज के डैमेज होने या सिर में चोट की वजह से भी दर्द हो सकता है. कई बार ये दर्द सिर से पीठ की तरफ बढ़ जाता है और कई-कई घंटों तक बना रहता है. थंडर क्लैप सिरदर्द की वजह से मिचली, बेहोशी और चक्कर आने की समस्याएं हो सकती हैं. हाई ब्लड प्रेशर वालों को यह दर्द ज्यादा परेशान कर सकता है. साइनस सिरदर्दसिर में साइनस या कैविटी में सूजन आने के कारण भी कई बार सिर में तेज दर्द होता है. यह दर्द लगातार होता रहता है. इसमें सिरदर्द के अलावा नाक के ऊपरी हिस्से या गाल की हड्डी पर भी दर्द हो सकता ह. इसकी वजह से चेहरे पर सूजन, कान बंद होना, बुखार और नाक बहने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं. आंखों की बीमारी से सिरदर्दआंखों का धुंधलापन, रेटिना की प्रॉब्लम्स या आंखों की दूसरी समस्याओं की वजह से भी सिर दर्द बहुत तेज होता है. अगर आंखों की रोशनी कम है तो भी सिरदर्द की समस्या हो सकती है. ऐसे में डॉक्टर को दिखाना चाहिए. सिरदर्द के ये कारण भी50 साल या उससे ज्यादा उम्र वालों में शारीरिक बदलाव की वजह से कमजोरी होती है और इससे भी सिरदर्द हो सकता है.कुछ महिलाओं को मेनोपॉज के दौरान सिरदर्द होता है.चाय-कॉफी पीने की आदत है तो कैफीन की लत पड़ जाती है, जब ये न मिले तो सिरदर्द होने लगता है.ज्यादा शराब पीने या डिहाइड्रेशन से भी सिरदर्द हो सकता है.नींद पूरी न होने से से भी सिर दर्द करता रहता है. सिरदर्द से राहत पाने के उपाय Disclaimer: इस आर्टिकल में बताई विधि, तरीक़ों और सुझाव पर अमल करने से पहले डॉक्टर या संबंधित एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें.

स्वास्थ्य मंत्रालय की सलाह- सीजनल फ्लू से करें बचाव, जानिए इसके लिए क्या करें-क्या नहीं?

Health Ministry’s advice – Protect yourself from seasonal flu, know what to do and what not to do? फरवरी-मार्च के महीने में देश में मौसम में तेजी से बदलाव आने लगता है और बदलता मौसम कई प्रकार की बीमारियों और संक्रमण का कारक हो सकता है। विशेषतौर पर मौसम बदलने के कारण सीजनल फ्लू (इंफ्लूएंजा) के मामले सबसे ज्यादा देखे जाते रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है उनमें संक्रामक रोगों के विकसित होने का खतरा अधिक होता है। बच्चे और बुजुर्ग मौसमी फ्लू का अधिक शिकार होते हैं। मौसम में होने वाले परिवर्तन के साथ इस संक्रामक रोग से बचाव को लेकर सभी लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने भी सीजनल फ्लू और इसके जोखिमों को लेकर लोगों को सावधान किया है। आइए जानते हैं इस संक्रमण से किस प्रकार से बचाव किया जा सकता है और सुरक्षात्मक तौर पर लोगों को क्या करना चाहिए-क्या नहीं? मौसमी फ्लू (इन्फ्लूएंजा) का खतरा स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया, मौसमी फ्लू को इन्फ्लूएंजा के नाम से भी जाना जाता है, ये वायरल संक्रमण श्वसन समस्याओं का कारण बनता है। इसके कारण सर्दी-जुकाम के साथ बुखार, शरीर-सिर में दर्द के साथ थकान की समस्या हो सकती है। इन्फ्लूएंजा वायरस, संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने पर आसानी से फैल सकता है। फ्लू का टीकाकरण इस बीमारी से बचाव का सबसे अच्छा तरीका माना जाता है। डॉक्टर कहते हैं, लाइफस्टाइल और आहार में कुछ प्रकार के बदलाव करके भी आप संक्रामक रोगों के खतरे से खुद को सुरक्षित रख सकते हैं। सीजनल फ्लू से बचाव के लिए क्या करें? स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक पोस्ट में सीजनल फ्लू से बचाव के लिए क्या करें और क्या न करें, इसको लेकर स्पष्ट जानकारी साझा की है। आइए जानते हैं कि इस बदलते मौसम में स्वस्थ और फिट रहने के लिए क्या उपाय किए जाने चाहिए?मास्क पहनें और भीड़-भाड़ वाली जगहों से बचें।छींकते और खांसते समय मुंह और नाक को ढकें।आंखों और नाक को बार-बार छूने से बचें।तरल पदार्थों-पानी का खूब सेवन करें।बुखार और शरीर में कुछ समय से दर्द महसूस हो रहा है तो पैरासिटामॉल लें। संक्रामक रोग से बचाव के लिए क्या न करें? स्वास्थ्य मंत्रालय ने सीजनल फ्लू से बचाव के लिए कुछ बातों का ध्यान रखने और उसे न करने की सलाह दी है। क्या है डब्ल्यूएचओ की सलाह? विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) कहता है, थोड़ी सी सावधानी आपको और परिवार के अन्य सदस्यों को इस संक्रामक रोग से सुरक्षित रख सकती है। मौसमी फ्लू आसानी से फैल सकता है, स्कूलों और नर्सिंग होम सहित भीड़-भाड़ वाली जगहों पर इसका प्रसार अधिक तेजी से होने का जोखिम रहता है। जब कोई संक्रमित व्यक्ति खांसता या छींकता है, तो इससे निकलने वाली ड्रॉपलेट (संक्रामक बूंदें) हवा में फैल जाती हैं और निकटतम व्यक्तियों को संक्रमित कर सकती हैं। संचरण को रोकने के लिए, खांसते समय अपने मुंह और नाक को रुमाल से ढकना और नियमित रूप से अपने हाथ धोना जरूरी है।

स्ट्रेस नहीं आएगा पास, तनाव भी चला जाएगा दबे पांव, बस आपको करने होंगे ये उपाय

Stress will not come near, tension will also disappear, you just have to do these measures हमारे शरीर में तनाव से जो प्रक्रियाएं होती है, उसे कंट्रोल करने का कामकोर्टिसोल नाम का हार्मोन करता है. कोर्टिसोल का स्तर बढ़ने पर तनाव भी बढ़ने लगता है. आजकल करीब-करीब हर इंसान तनाव में है. वो बात अलग है कि हर किसी का कारण अलग-अलग होता है. जिस तेजी से दुनिया आगे बढ़ रही है, तनाव भी उसी तरह हम सभी की जिंदगी का हिस्सा बनता जा रहा है. इसकी वजह से कई तरह की गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं. तनाव को पूरी तरह खत्म कर पाना भी आसान नहीं है. हालांकि, कुछ प्रयास कर इससे छुटकारा जरूर पाया जा सकता है. आइए जानते हैं तनाव का कारण और इससे बचने के 5 सबसे कारगर उपाय… तनाव क्यों होता है दरअसल, हमारे शरीर में तनाव से जो प्रक्रियाएं होती है, उसे कंट्रोल करने का कामकोर्टिसोल नाम का हार्मोन करता है. कोर्टिसोल का स्तर बढ़ने पर तनाव भी बढ़ने लगता है. कुछ अच्छी हैबिट्स से कोर्टिसोल और तनाव दोनों को कंट्रोल किया जा सकता है. तनाव से छुटकारा पाने के 5 जबरदस्त उपाय तनाव और खानपान का गहरा जुड़ाव होता है. पोषक तत्वों से भरपूर खाना खाने से ब्लड शुगर कंट्रोल में रहता है. इससे नींद अच्छी आती है और टेंशन कम रहता है. पुदीने या लेमन ग्रास टी कोर्टिसोल के लेवल को कम कर तनाव से छुटकारा दिला सकते हैं. स्ट्रेस से बचने के लिए आप चाहें तो थोड़ी सी डार्क चॉकलेट भी खा सकते हैं. इसमें एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो तनाव कम करने का काम करते हैं. इसके अलावा एवोकाडो, बादाम, अखरोट, पिस्ता, चिया सीड्स और अलसी जैसी चीजों में ओमेगा-3 फैटी एसिड और मैग्नीशियम खूब पाए जाते हैं, जिससे तनाव दूर होते हैं. खट्टे फल और पत्तेदार सब्जियां भी तनाव से राहत दिलाते हैं. स्मार्टफोन या लैपटॉप का इस्तेमाल इन दिनों काफी ज्यादा बढ़ गया है. ऐसे में सोने से एक घंटे पहले स्क्रीन से दूरी बनाकर रखनी चाहिए. दरअसल, इन गैजेट्स से निकलने वाली नीली रोशनी नींद को प्रभावित करती हैं. लगातार फोन यूज करने से दिमाग एक्टिव रहता है. जिससे बॉडी में कोर्टिसोल का लेवल बढ़ता है. ऐसे में तनाव ट्रिगर हो सकता है. तनाव से बचना है तो अपना नजरिया बदलना चाहिए. दरअसल, लोग उन चीजों को लेकर ज्यादा दुखी हैं, जो उन्हें नहीं मिल पाए हैं. ऐसे में आपके पास जो भी है, उसके लिए ईश्वर का आभार जताएं और उसी में खुश रहने की आदत डालें. इससे छोटे-छोटे अचीवमेंट्स आपको खुश रखेंगे. जिससे आप शांत रह पाएंगे और अच्छा महसूस करेंगे. योग और मेडिटेशन को अपनी लाइफ का हिस्सा बनाएं. इससे तनाव दूर करने में मदद मिलती है. योग-मेडिटेशन जिंदगी में पॉजिटिविटी लाने का काम करते हैं और पैरासिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम को एक्टिव करते हैं. जिससे बॉडी रिलैक्स होती है. इससे मन शांत रहता है और फोकस बढ़ता है.

भगवान भरोसे चल रहा आरोग्यम प्राथमिक स्वस्थ्य केंद्र धमोखर

Arogyam Primary Health Center Dhamokhar is running with the trust of God. विशेष संवाददाता  उमरिया। प्रदेश सरकार मरीजो को बेहतर इलाज के लिए भले ही पानी की तरफ पैसा बहा रहे हो लेकिन हकीकत कुछ और ही है। जिला उमरिया से लगभग 13 किमी की दूरी पर बनी आरोग्यम स्वास्थ्य केंद्र धमोखर अस्तपाल में मरीज आये और ऑनलाइन पर्ची बनवाने के पश्चात ऑनलाइन ही मरीज अपनी दवा करवा के घर जाए इस अस्पताल का रबईया आज दिनों कुछ ऐसा ही चल रहा हकीकत यह है की इस अस्पताल मे जहा पर डॉक्टर मरीजो की जांच कर सही उपचार करें वही पर डॉक्टर की कुर्सी मे बैठ कर कंपाउंडर मरीजो की जाँच कर उनको दवा दे रहे है जिससे मरीजो की जिंदगी दाँव पर लगी बैठी है अगर इसी तरह का रबईया रहा तो मरीजो की समस्या का समाधान नहीं हो सकता

हमीदिया अस्पताल: एंबुलेंस चालकों का आरोप: शव ले जाने से पहले पार्किंग संचालक मांगता है कमीशन

Hamidia Hospital: Allegations of ambulance drivers: Parking operator demands commission before taking the dead body भोपाल। हमीदिया अस्पताल में पार्किंग व शव वाहन का संचालन विवाद की जड़ बन गया है। अकसर रात में यहां दो गुट एक दूसरे के लोगों को धमकाते व मारपीट करते हैं। हाल ही में इसका एक वीडियो भी वयरल हुआ था। वहीं अब करीब 11 एंबुलेंस चालकों द्वारा कोहफिजा थाने में लिखित शिकायत की गई है। जिसमें पार्किंग संचालक नरेंद्र गोस्वामी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। लिखित आवेदन में कहा गया है कि पार्किंग संचालक शव ले जाने से पहले कमीशन मांगता है। उसकी बात ना मानने मारपीट व जान से मारने तक की धमकी देता है। इस मामले में पार्किंग संचालक नरेंद्र का कहना है कि यह वे लोग हैं जो प्रति माह 2 हजार रुपए का तय किराया नहीं दे रहे हैं। इनसे जब किराया मांगा गया तो, इन्होंने झूठा आरोप लगाना शुरू कर दिया। इनके पीछे सलमान और आरीफ नाम के लोगों का हाथ। जो अकसर हमीदिया परिसर में गुंडागर्दी करते हैं। परिजनों से वसूल रहे दो से ढाई गुना किरायापार्किंग को लेकर चल रहे इस विवाद से परेशान मरीजों व परिजनों को होना पड़ रहा है। परिजनों को हमीदिया से शव निवास तक ले जाने के लिए दो से ढाई गुना अधिक किराया चुकाना पड़ रहा है। यह स्थिति बीते डेढ़ से दो साल से बनी हुई। अस्पताल प्रबंधन से लेकर प्रसाशन तक ने अब तक इस पर कोई कठोर कदम नहीं उठाए हैं। जिसके चलते अस्पताल की व्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हो रही है।

जेपी अस्पताल: हद है… किसी दूसरे मरीज का एक्स-रे देख डॉक्टर ने शुरू कर दी थी इलाज की तैयार

Jaypee Hospital: This is too much… the doctor started preparing for treatment after seeing the X-ray of another patient भोपाल। राजधानी मॉडल अस्पताल जेपी में एक बार फिर इलाज के प्रति स्टाफ की लापरवाही उजागर हुई है। यदि मरीज चिकित्सक की बात मानकर इलाज शुरू करा देता तो उसको जो नुकसान होता उसकी भरपाई नामुमकिन थी। लेकिन मरीज ने समझदारी दिखाई और सेकेंड ओपिनियन के लिए वह एक निजी अस्पताल पहुंच गया, जहां पता चला कि उसे वो बीमारी ही नहीं है, जिसका इलाज जेपी अस्पताल के चिकित्सक बता रहे थे। दरअसल समीर सूफी नाम का एक मरीज 6 फरवरी को जेपी अस्पताल पहुंचा। उसकी दाढ़ में से अक्सर खून आता रहता है, यही समस्या लेकर वह जेपी अस्पताल गया और यहां डॉ. यश से चैकअप कराया। डॉ. यश ने मरीज का एक्स-रे कराने को कहा। एक्स-रे जेपी अस्पताल में ही हुआ था। एक्स-रे की रिपोर्ट देख डॉ. यश ने मरीज समीर से कहा कि आपका दाढ़ सढ़ गई है, इसे निकालना होगा। मरीज ने इस बात पर आपत्ति भी ली और कहा कि मुझे भोजन चबाने में कोई दिक्कत नहीं होती, लेकिन चिकित्सक ने मरीज की बात को नकार दिया और दाढ़ निकलवाने की राय देता रहा।मरीज ने कराया फिर से एक्स-रेजेपी अस्पताल से निराश होकर लौटे समीर सूफी ने आठ फरवरी को करोंद स्थित पीपुल्स डेंटल अस्पताल में एक संपर्क किया। यहां चिकित्सक ने मरीज का फिर से एक्स-रे किया। इस एक्स-रे में मरीज की दाढ़ को एक दम स्वस्थ्य बताया और खून आने का कारण नस में परेशानी को बताया। इतना ही नहीं इस समस्या का इलाज बिना किसी चीर फाड़ या दाढ़ निकलवाने के बजाए सिर्फ दवाओं से बताया। इस मामले में अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. राकेश श्रीवास्तव का कहना है कि मामले को दिखवाना पड़ेगा, किस स्तर पर गलती हुई है। यदि कहीं कोई चूक हुई है तो कार्रवाई भी की जाएगी।

देश के जायकेः पालक के पत्तों की लज्जतदार चाट 

Flavors of the country: Delicious chaat of spinach leaves सर्दी के मौसम के खत्म होने में अब कुछ ही दिन बाकी हैं। यानी हरी पत्तेदार सब्जियों का सीजन भी जल्द ही बीत जाएगा। तो क्यों न हरे पत्तों के जाते हुए सीजन में + आज कुछ अलग-सी डिश पर हाथ आजमाएं। आज हम बनाते हैं अब भी बहुतायत में आ रहीं पालक के पत्तों की लज्जतदार चाट। सामग्री: पालक के पत्ते – 7 से 8 नग बेसन – 1 कप चावल का आटा – 2 छोटे चम्मच कॉर्न फ्लोर – 2 छोटे चम्मच – लाल मिर्च पाउडर – 1 चम्मच हल्दी पाउडर – 1 चम्मच – गरम मसाला 1 चम्मच – नमक 1 चम्मच तलने के लिए तेल सामग्री: गार्निशिंग के लिए – दही – 1/2 कप – पीसी हुई शक्कर – 1 छोटा चम्मच काला नमक – 2 छोटे चम्मच भुना जीरा पाउडर – 2 छोटे चम्मच धनिया पाउडर – 2 छोटे चम्मच लाल मिर्च पाउडर – 2 छोटे चम्मच – हरी चटनी – 2 बड़े चम्मच – मीठी चटनी – 2 बड़े चम्मच अदरक (पतली कतरन) – 2 बड़े चम्मच अनार के दाने 2 बड़े चम्मच – हरा धनिया (बारीक कटा हुआ) – 2 छोटे चम्मच बनाने की विधि : – पालक के पत्तों को अच्छे से धोकर और साफ करके उन्हें एक तरफ रख दीजिए। – एक बॉउल में बेसन लेकर उसमें चावल का आटा, कॉर्न फ्लोर, नमक, लाल मिर्च पाउडर, हल्दी पाउडर, गरम मसाला और पानी डालकर चिकना घोल बना लीजिए। – पालक के पत्तों को बेसन के घोल में पूरी तरह लपेट लीजिए और फिर गहरे फ्राई पैन में अच्छे से तल लीजिए – अब एक बॉउल में दही डालकर उसमें पीसी हुई शक्कर और काला नमक डालकर अच्छे से मिला लीजिए।  अब पालक पत्ता चाट की प्लेट लगाने की शुरुआत करते हैं। इसके लिए तले हुए पालक पत्ता को प्लेट में रखें और ऊपर से काला नमक, भुना हुआ जीरा पाउडर, धनिया पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, दही का मिश्रण, हरी चटनी, मीठी चटनी, कटा हुआ हरा धनिया, अनार के दाने डालिए। अब इसी प्रकिया को दोहराएं और जितनी जरूरत हो, उतनी परतें बनाते जाएं। तैयार है आपकी पालक पत्ता चाट।

तुलसी, सेहत के लिए बेहद फायदेमंद, कई बीमारियों के लिए औषधि

Tulsi, very beneficial for health, medicine for many diseases भोपाल ! क्या आप जानते हैं कि तुलसी आपके स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायक है. चलिए आज हम आपको बताते हैं कि तुलसी की पत्तियां आपके स्वास्थ्य के लिए कितनी लाभदायक हैं. सर्दी के मौसम में ज्यादातर घरों में तुलसी का उपयोग कभी चाय में तो कभी-कभी काढ़े के रूप में किया जाता है. सर्दी में तुलसी का सही विधि से उपयोग किया जाए, तो आप कई बीमारियों से बच सकते हैं !तुलसी के अंदर एंटी-ऑक्सीडेंट, आयरन, कैल्शियम, जिंक प्रॉपर्टी होती है, जो आपको अलग-अलग स्वास्थ्य लाभ पहुंचाती है. एंटी-ऑक्सीडेंट होने की वजह से यह शरीर की इम्युनिटी को बूस्ट करने में मददगार है. सर्दी-जुकाम, सूखी खांसी, बलगम खांसी में भी तुलसी के पत्तों का रस लाभदायक होता है. साइनस की समस्या में लाभदायक तुलसी तुलसी के पत्ते साइनस की समस्या में भी लाभकारी हैं. यदि किसी मरीज को साइनस की दिक्कत है, नाक बंद रहती है या बार-बार छींक आती है, तो तुलसी के पत्तों का रस निकालकर उसकी कुछ बूंदें डायरेक्ट नाक में डालने से नाक का सारा बलगम निकल जाता है और आपको साइनस की समस्या में राहत मिलती है. नाक में डायरेक्ट तुलसी की बूंदें अप्लाई करने से यदि तेज जलन होती है, तो इसे थोड़ा पानी के साथ डाइल्यूट करके भी इस्तेमाल किया जा सकता है. छोटे बच्चों को शहद में मिलाकर दें तुलसी का रस सर्दियों के मौसम में सर्दी-जुकाम, नाक बंद जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं और इन मौसमी बीमारियों का असर सबसे पहले छोटे बच्चों पर दिखाई देता है. यदि आपके भी 5 से 15 साल के बच्चे को सर्दी-जुकाम हो रहा है, तो आप तुलसी के पत्तों का रस निकालकर उसमें थोड़ा शहद मिलाकर थोड़ा-थोड़ा बच्चों को पिलाने से सर्दी-जुकाम की समस्या खत्म हो जाती है.

यह है मॉडल अस्पताल जेपी का हाल: 59 सफाई कर्मी,

This is the condition of Model Hospital JP: 59 cleaning workers, भोपाल। राजधानी का मॉडल अस्पताल जेपी में सफाई व्यवस्था के नाम पर सरकारी रुपयों की बर्बादी हो रही है। सफाई का जिम्मा जिस कंपनी को दिया गया है, वह खानापूर्ति कर रही है। यही कारण है कि अस्पताल परिसर में गंदगी और गुटके के दाग देखे जा सकते है। आईपीडी वार्ड की खिड़कियों के बाहर कचरा और छिपे हुए कोनों में दवाईयों का ढेर आसानी से देखा जा सकता है। जानकारी अनुसार जेपी अस्पताल की सफाई का जिम्मा निजी कंपनी के पास है। जिसका नाम प्रथम नेशनल सिक्योरिटी सर्विसेस है। यह फर्म इंदौर की है। फर्म को जो ठेका दिया गया है, उसकी शर्तों के अनुसार 59 सफाई कमी जेपी अस्पताल में हर दिन ड्यूटी देंगे, लेकिन फर्म द्वारा सफाई सिर्फ 20 से 25 कर्मचारियों द्वारा कराई जा रही है। ताकि अधिक से अधिक पैसा बचाया जा सके। इतना ही नहीं ओपीडी के समय में सफाई पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता, बल्कि दोपहर में जब भीड़ कम होती है तब सफाईकर्मी एक से दो घंटे में सफाई करते हुए देखे जाते हैं। बायोमेडिकल वेस्ट का निष्पादन नहीं जेपी अस्पताल की सफाई व्यवस्था में सबसे बड़ी लापरवाही बायोमेडिकल वेस्ट मामले में हो रही है। अस्पताल में मरीजों को दी जाने वाली दवाईयां कचरे के ढेर में आए दिन मिलती हैं। इसके अलावा ग्लब्स, पट्टी और अन्य मेडिकल वेस्ट भी खुले परिसर में नाले के पास अक्सर देखे जाते हैं। आज तक नहीं मिला कायाकल्प अवार्ड जेपी अस्पताल में सफाई व्यवस्था लचर रहने और मरीजों को मिलने वाली सुविधाएं सुस्त रहने के कारण ही आज तक संस्था को कायाकल्प अवार्ड में नंबर आने का मौका नहीं मिला है। जबकि इस अवार्ड को शुरू हुए सात साल से ज्यादा हो गए हैं। जेपी अस्पताल को अक्सर कायाकल्प अवार्ड में सांत्वना पुरस्कार से संतोष करना पड़ा है। जांच कराऊंगा जेपी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राकेश श्रीवास्तव ने बताया कि सफाई व्यवस्था में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जएगी। यदि निजी फर्म द्वारा कम संख्या में सफाई कर्मियों से काम लिया जा रहा है तो मैं इस मामले की जांच कराउंगा। यदि फर्म ने कुछ गड़बड़ी की है तो कंपनी पर जुर्माना लगाकर ठेका निरस्त किया जाएगा।

25 निजी अस्पतालों में इलाज करा सकेंगे सरकारी कर्मचारी

Government employees will be able to get treatment in 25 private hospitals भोपाल। राज्य शासन द्वारा शासकीय कर्मचारी व उनके परिवार के आश्रित सदस्य की जांच और उपचार के लिए 21 अस्पताल को नवीन मान्यता और चार की मान्यता अवधि में वृद्धि की गई है। अब शासकीय कर्मचारी 25 निजी अस्पताल में उपचार करा सकेंगे। नवीन मान्यता प्राप्त अस्पतालों में बॉम्बे हॉस्पिटल इंदौर, नेशनल हॉस्पिटल भोपाल, नर्मदा अपना हॉस्पिटल नर्मदापुरम, जैनमश्री हॉस्पिटल भोपाल, शैल्बी हॉस्पिटल जबलपुर, तेजनकर हेल्थकेयर उज्जैन, मार्बल सिटी हॉस्पिटल जबलपुर, नोबल हॉस्पिटल भोपाल, जिंदल हॉस्पिटल भोपाल, ग्लोबल सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल ग्वालियर, ज्याति हॉस्पिटल इंदौर, अपेक्स हॉस्पिटल, वी वन हॉस्पिटल इंदौर, लक्ष्मी नारायण हॉस्पिटल जबलपुर, रेटिना स्पेशेलिटी इंदौर, अनंत हार्ट हॉस्पिटल भोपाल, महेश्वरी हॉस्पिटल भोपाल, चित्रकूट हॉस्पिटल जबलपुर, सेंटर फॉर साइट हॉस्पिटल इंदौर और डॉ अग्रवाल हेल्थ केयर इंदौर शामिल हैं। वहीं नर्मदा ट्रामा सेंटर भोपाल की अतिरिक्त मान्यता के साथ अमृता हॉस्पिटल शहडोल, आरोग्य हेल्थ केयर हॉस्पिटल छिंदवाड़ा और एमिनेंट हॉस्पिटल इंदौर की मान्यता में वृद्धि की गई है। मान्यता प्राप्त निजी अस्पताल शासकीय कर्मचारियों और आश्रित परिवार सदस्यों से पंजीयन शुल्क नहीं लेंगे और चिकित्सालय में निर्धारित पैकेज दरों की रेट-लिस्ट प्रदर्शित करेंगे। निर्धारित दरों से अधिक शुल्क लेने, परीक्षण संबंधी सुविधाएं मानक-स्तर की न पाए जाने और किसी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर मान्यता समाप्त कर दी जाएगी। चिकित्सालय में उपचार और परीक्षण करवाने पर चिकित्सा प्रतिपूर्ति निर्धारित दरों पर होगी। एक भी सरकारी अस्पताल नहीं है एनएबीएच सर्टिफाईफिलहाल प्रदेश का एक भी सरकारी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज एनएबीएच सर्टिफाई नहीं हैं। लेकिन भोपाल के हमीदिया हॉस्पिटल ने एंट्री लेवल सर्टिफिकेशन के लिए अप्लाई किया हुआ है। इसके तहत एनएबीएच की टीम हॉस्पिटल का प्राइमरी इंस्पेक्शन कर चुकी है, जिसकी रिपोर्ट अस्पताल प्रबंधन को अब तक नहीं मिली है।

खीरे के पानी में छुपे हैं अद्भुत गुण, इन 6 बीमारियों में होता है फायदेमंद

Amazing properties are hidden in cucumber water it is beneficial in these 6 diseases रोज सुबह खीरे का पानी पीने से स्किन का ग्लो बना रहता है। यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है। आजकल अनियमित जीवनशैली और खानपान में लापरवाही के कारण लोग कम उम्र में ही कई बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। ऐसे में यदि आप दिन की शुरुआत ही व्यवस्थित तरीके से कर दें तो आप कई समस्या से छुटकारा पा सकते हैं। सुबह उठते ही शरीर को डिटॉक्स करने से लिए पानी पीने की सलाह दी जाती है, लेकिन इसके स्थान पर यदि आप खीरे का पानी का सेवन करेंगे तो सेहत को कई बीमारियों से छुटकारा मिल सकता है। यहां डायटिशियन मीना कोरी खीरे के पानी के फायदों के बारे में विस्तार से जानकारी दे रही है। शरीर में पानी की कमी नहींसुबह यदि आप खीरे का पानी का सेवन करते हैं तो शरीर में पानी की कमी नहीं होती है। सामान्य जल की तुलना में खीरे का पानी सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद होता है। यह पानी सुगंधित होने के साथ-साथ स्वास्थ्यवर्धक भी होता है। यह पानी शरीर की आंतरिक सफाई में अहम भूमिका निभाता है। वजन घटाने में मददगारखीरा एक ऐसी सब्जी है, जिसमें कैलोरी काफी कम होती है। यदि सुबह सुबह खीरे का पानी पीते हैं तो इससे पेट काफी देर तक भरा हुआ रहता है। यह वजन कम करने में मदद करता है। खीरे का पानी एक डिटॉक्स ड्रिंक के रूप में काम करता है, जो शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। खीरे के पानी में घुलनशील फाइबर भी होता है, जो शरीर का वजन नहीं बढ़ने देता है। कंट्रोल में रहता है ब्लड प्रेशरखीरे के पानी में पोटेशियम भरपूर मात्रा में होता है, जो ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद करता है। खीरे का पानी किडनी में जमा सोडियम की मात्रा को नियंत्रित करता है। खीरे का पानी पीने से हार्ट अटैक का खतरा भी कम होता है।स्किन में बढ़ता है ग्लोरोज सुबह खीरे का पानी पीने से स्किन का ग्लो बना रहता है। यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है। खीरे के पानी में विटामिन, खनिज और फाइबर जैसे आवश्यक पोषक तत्व भी होते हैं, जो स्किन को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

मुरैना जिला अस्पताल में आग लगने से मचा हड़कंप।

There was a stir due to fire in Morena District Hospital संतोष सिंह तोमर मुरैना। जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में भीषण आग लग गई जिसके चलते पूरे वार्ड में अफरा तफरी फैल गई और अस्पताल परिसर में भगदड़ मच गई। बताया गया कि यह आग शॉर्ट सर्किट के चलते हुए लगी है । फटाफट इस वार्ड से नवजात बच्चों को और प्रसूति महिलाओं को दूसरे वार्ड में तत्काल प्रभाव से शिफ्ट किया गया । जैसे ही घटना की सूचना पुलिस और प्रशासन को मिली तो मुरैना के अपर कलेक्टर और पुलिसअफसर मौके पर पहुंचे । अस्पताल के अग्नि शमक यंत्र से कर्मचारियों के द्वारा आज पर काबू पाया गया मौके पर दमकल विभाग की दो गाड़ी पहुंची। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि जिला चिकित्सालय में हमारा बच्चा भर्ती था यहां न तो कोई सायरन बजा न कुछ प्रशासन की लापरवाही इतनी है कि आग लग गई हमारा बच्चा दूसरे वार्ड में शिफ्ट कर दिया है और प्रशासन कोई जवाब नहीं दे रहा है। वहीं सीएमएचओ का कहना है कि बिजली का जो फॉल्ट हुआ है उसकी हम जांच करवा रहे है और उसे दिखवा रहे है। उन्होंने बताया कि वार्ड में 47 बच्चे थे अब उनको दूसरे वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है । सारे बच्चे सुरक्षित है जिनको ऑक्सीजन की जरूरत है उनको प्रदाय की जा रही है और जिनको उपचार की जरूरत है उनको भी ट्रीटमेंट दिया जा रहा है।

देश में एक बार फिर कोरोना संक्रमण ने पकड़ी रफ्तार

Corona infection once again gained momentum in the country देश में एक बार फिर कोरोना संक्रमण ने पकड़ी रफ्तार, 24 घंटे में 636 नए मामले, जेएन.1 के मरीज 200 पार स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, पिछले 24 घंटे में केरल में दो और तमिलनाडु में एक मरीज की संक्रमण से मौत हो गई। पिछले साल पांच दिसंबर तक दैनिक मामलों की संख्या घटकर दोहरे अंक तक पहुंच गई थी। देश में कोरोना संक्रमण के 636 नए मामले सामने आए हैं, जिससे उपचाराधीन मरीजों की संख्या बढ़कर 4,394 हो गई है। साथ ही नए उपस्वरूप जेएन.1 के 37 नए मामले मिलने के बाद इसके मरीजों की संख्या 200 पार कर गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, पिछले 24 घंटे में केरल में दो और तमिलनाडु में एक मरीज की संक्रमण से मौत हो गई। पिछले साल पांच दिसंबर तक दैनिक मामलों की संख्या घटकर दोहरे अंक तक पहुंच गई थी, लेकिन ठंड और वायरस के नए उपस्वरूप के कारण मामलों में तेजी आई है। स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाइट के अनुसार, अब तक संक्रमण से उबरने वाले लोगों की संख्या 4.4 करोड़ से अधिक हो गई है। किस राज्य में कितने जेएन.1 वैरिएंट के मामलेजेएन.1 वैरिएंट से संक्रमित लोगों की संख्या बताने के लिए INSACOG ने राज्यवार आंकड़े भी जारी किए। सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक केरल (83), गोवा (51), गुजरात (34), कर्नाटक (आठ), महाराष्ट्र (सात), राजस्थान (पांच), तमिलनाडु (चार), तेलंगाना (दो) ओडिशा (एक) और दिल्ली में एक मामला रिपोर्ट किया गया है। राज्यों को निगरानी बढ़ाने का निर्देशWHO के मुताबिक कोरोना वायरस के जेएन.1 सब-वैरिएंट को पहले बीए.2.86 का प्रकार माना गया। हालांकि, बीते कुछ हफ्तों में 40 से अधिक देशों में JN.1 मामले सामने आ चुके हैं। तेजी से फैलते संक्रमण को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से निरंतर निगरानी बनाए रखने को कहा है।

लाखों की लागत से बने उप स्वास्थ्य केंद्र पर लगा रहता है ताला, लोगों को नहीं मिल रहा इलाज.

A lock is placed on the Sub health Center built at a cost of millions, depriving people of access to medical treatment. मलखान सिंह परमार मुरैना । ग्राम पंचायत आरोली मे बीच का पुरा गांव में स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए उप स्वास्थ्य केंद्र ताे खोले गए हैं। लेकिन इन स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में लोगों को इलाज के लिए लोगों को निजी चिकित्सालय क्लीनिकों पर या जिला स्तर पर अस्पताल में जाना पड़ता है। उप स्वास्थ्य केंद्रों पर कहने को तो यहां 24 घंटे एएनएम और इलाज की सुविधा मिलना है, लेकिन ताला नहीं खुलने से ग्रामीणों को विकासखंड के उप स्वास्थ्य केंद्रों पर इलाज की सुविधा नहीं मिल रही है। लाखों की लागत से बने बीच के पुरा पर स्थित उप स्वास्थ्य केंद्र बना जर्जर केंद्र जानकारी के अनुसार देखने में तो उप स्वास्थ्य केंद्र को बने अभी कुछ अधिक समय नहीं हुआ लेकिन उसकी दीवारें, प्लास्टर सभी खंडर हो गए है केंद्र को बनाने में घटिया सामग्री का उपयोग किए जाने से कम समय में ही उप स्वास्थ्य केंद्र खंडर हो गया है। ग्राम पंचायत अरोली में ग्राम बीच के पूरा को शासकीय उप स्वास्थ्य केंद्र में पिछले कई दिनों से ताला लटका हुआ हैं, वहीं जिले में बैठे जिम्मेदार जांच सहित अन्य के नाम पर वाहन द्वारा डीजल का भुगतान लेते है, लेकिन समझ से परे यह है कि आखिर इनके द्वारा किस चीज की जांच की जाती है। ग्रामीण क्षेत्र में लोगों को नि:शुल्क उपचार उपलब्ध कराना महज दिखावा बनकर रह गया है, क्योंकि कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां पर पिछले कई दिनों से उप स्वास्थ्य केंद्र में ताला लटक रहा है। मजे की बात तो यह है कि यहां पदस्थ जिम्मेदार से अगर कोई पूछ ले कि आप कहां हैं, तो इनके द्वारा मीटिंग के साथ भ्रमण बताकर अपना पल्ला झाड़ लिया जाता है। ग्रामीणों को स्वास्थ्य लाभ मुहैया करवाने के उद्देश्य से सरकार ने गांव में उप-स्वास्थ्य केन्द्र खोला था, लेकिन यह ग्रामीणों का दुर्भाग्य ही रहा कि लाखों रुपये की लागत से बने उप-स्वास्थ्य केन्द्र में आये दिन ताला लटका रहता है।

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