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कोरोना : नए साल पर मिलेगा वैक्सीन का तोहफा, देशभर में डिस्ट्रीब्यूशन की प्लानिंग पर काम शुरू

नई दिल्ली.. देश के लिए अच्छी खबर है। कोरोना वैक्सीन पर तेजी से काम हो रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने मंगलवार को कहा कि उम्मीद है कि जैसे ही नया साल शुरू होगा, देश में कोरोना की वैक्सीन उपलब्ध हो जाएगी, वह भी एक से ज्यादा सोर्स के जरिए। देशभर में इसके डिस्ट्रीब्यूशन की प्लानिंग पर काम शुरू हो गया है। उम्मीद है कि जुलाई 2021 तक हम देश में वैक्सीन के 40-50 करोड़ डोज मुहैया कराकर देश के 20-25 करोड़ लोगों को वैक्सीन दे सकेंगे। इस बीच, देश में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा 71 लाख 73 हजार 565 हो गया है। 710 लोगों ने दम तोड़ा। देश में एक्टिव केस में 21 दिन की सबसे बड़ी गिरावट आई है। 24 घंटे में 25 हजार केस कम हुए हैं। इससे पहले 21 सितंबर को 28 हजार 653 केस कम हुए थे। मोदी बोले- जब तक दवाई नहीं, तब तक ढिलाई नहीं महाराष्ट्र में कोरोना के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा- ‘जब तक दवाई नहीं, तब तक ढिलाई नहीं। मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग के मामले में लापरवाही न बरती जाए।’ मोदी ने डॉ. बालासाहेब विखे पाटिल की बायोग्राफी रिलीज होने के मौके पर यह बात कही। देश में पिछले दो हफ्तों में 10 लाख मामले बढ़े हैं। हालांकि, 24 घंटे में सामने आने वाले संक्रमितों की औसत संख्या अब 72 से 74 हजार के बीच हो गई है। दो हफ्ते पहले हर दिन 90 हजार से ज्यादा मामले सामने आते थे। अब तक 62.24 लाख मरीज ठीक हो चुके हैं, जबकि 1 लाख 9 हजार 894 मरीजों की मौत हो चुकी है। रिकवरी का आंकड़ा बढ़ने से एक्टिव केस भी कम हो रहे हैं। बीते 24 घंटे में 71 हजार 559 लोग ठीक होने के साथ एक्टिव केस की संख्या घटकर 8.61 लाख हो गई। लगातार चार दिनों से देश में एक्टिव केस की संख्या 9 लाख से नीचे रही। ये आंकड़े covid19india.org के मुताबिक हैं।

कोरोना पर अध्ययन : 70 फीसदी रोगी नहीं फैलाते वायरस 

नई दिल्ली . कोरोना के 70 फीसदी रोगी वायरस नहीं फैलाते हैं। इस बात की जानकारी आंध्रप्रदेश-तमिलनाडु में किए गए एक अध्ययन से हुई है। अमेरिका स्थित सेंटर फॉर डिसीज, डायनेमिक्स एंड इकोनॉमिक पॉलिसी (सीडीडीईपी) द्वारा आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में किए गए एक नवीनतम अध्ययन से पता चला है कि कोरोना से संक्रमित सभी व्यक्ति वायरस को प्रसारित नहीं करते हैं। हालांकि, हमउम्र बच्चों में संक्रमण का प्रसार ज्यादा बताया गया है। आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में कोरोना महामारी विज्ञान और संचरण गतिकी शीर्षक से अध्ययन साइंस पत्रिका के 30 सितंबर के संस्करण में प्रकाशित हुआ था। इस बाबत आंध्र प्रदेश सरकार के एक अधिकारी ने कहा कि बर्कले में सीडीडीईपी, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु सरकारों और कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के जांचकर्ताओं के एक दल ने 575,071 व्यक्तियों में बीमारी के संचरण पैटर्न का अध्ययन किया, जिसमें कोरोना के 84,965 मामलों की पुष्टि हुई। अधिकारी ने दावा किया कि आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के राज्यों में हजारों संपर्क प्रशिक्षकों द्वारा एकत्र किए गए आंकड़ों के आधार पर महामारी विज्ञान का अब तक का सबसे बड़ा और सबसे व्यापक विश्लेषण है। अध्ययन के अनुसार, उजागर संपर्कों के संभावित अनुवर्ती परीक्षण से पता चला कि 70 प्रतिशत संक्रमित व्यक्तियों ने अपने किसी भी संपर्क को संक्रमित नहीं किया था, जबकि 8 प्रतिशत संक्रमित व्यक्ति 60 प्रतिशत नए संक्रमणों के लिए जिम्मेदार थे। अध्ययन में उन बच्चों में संक्रमण का उच्च प्रसार पाया गया, जो अपनी उम्र के आसपास के मामलों के संपर्क में थे। सूचकांक मामले से एक करीबी संपर्क में संचरण का जोखिम समुदाय में 2.6 प्रतिशत से लेकर घर में 9.0 प्रतिशत तक है। समान-आयु वाले संपर्क सबसे बड़े संक्रमण जोखिम से जुड़े हैं। हालांकि, इन दोनों राज्यों में 40-69 वर्ष की आयु में मृत्यु दर अधिक है। यह 5-17 वर्ष के आयु वर्ग के लोगों में 0.05 प्रतिशत और 85 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में 16.6 प्रतिशत है। सीडीडीईपी के निदेशक डॉ. रामनयन लक्ष्मीनारायण के अनुसार, यह अध्ययन आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में महत्वपूर्ण संपर्क-ट्रेसिंग प्रयास से संभव हुआ, जिसमें हजारों स्वास्थ्य कार्यकर्ता शामिल थे।

कोरोना : जुलाई 2021 तक देश के 25 करोड़ लोगों तक पहुंचेगी वैक्सीन, 40 से 50 करोड़ डोज बनाने पर फोकस

केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने रविवार को कहा कि केंद्र सरकार देश के हर एक नागरिक तक वैक्‍सीन पहुंचाने की तैयारियां कर रही है। इस पर एक हाई लेवल कमेटी काम कर रही है। उन्होंने कहा, ”सरकार का लक्ष्य है कि जुलाई 2021 तक 20-25 करोड़ भारतीयों तक कोविड-19 वैक्सीन पहुंचाई जा सके। इसके लिए हमारा फोकस है कि हम तब तक वैक्सीन की 40 से 50 करोड़ डोज हासिल कर सकें। इसकी प्लानिंग पर काम चल रहा है। जरूरतमंदों को पहले मिलेगी वैक्सीन डॉ. हर्षवर्धन ने कहा, ”वैक्सीन तैयार होने के बाद, टीकाकरण का काम होगा। हेल्थ मिनिस्ट्री इसके लिए एक फॉर्म तैयार कर रही है। इसमें सभी स्टेट ऐसे लोगों की डिटेल्स देंगे, जिन्हें वैक्सीन की पहले जरूरत है। खासतौर पर कोविड-19 के मैनेजमेंट में लगे हेल्थ वर्कर्स, पुलिस स्टाफ आदि शामिल हैं। अक्टूबर तक इसकी प्लानिंग पर काम हो जाएगा। वैक्सीन के स्टोरेज के लिए स्टेट से कोल्ड चेन के अलावा वैक्सीन स्टोरेज और डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़ी जानकारी भी मांगी गई है। देश में अब तक 65 लाख 53 हजार केस आ चुके हैं। इनमें 55 लाख 9 हजार लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि 9 लाख 37 हजार मरीजों का इलाज चल रहा है। ये आंकड़े covid19india.org के मुताबिक हैं।

क्या भारत में गुजर गया कोरोना वायरस संक्रमण का पीक ? रिकवरी रेट 100% बढ़ा

नई दिल्ली। भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले साढ़े 61 लाख के करीब पहुंच चुके हैं। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से मंगलवार सुबह 8 बजे जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक पिछले 24 घंटे में 70,589 नए मामले सामने आने के बाद देश में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 61,45,291 हो गई। पिछले कुछ दिनों से कोविड-19 के डेली केसेज में कमी आई है तो क्या भारत में कोरोना का पीक गुजर चुका है? आइए आंकड़ों के जरिए इस सवाल का जवाब तलाशते हैं। भारत में 12 सितंबर से 22 सितंबर तक कोरोना वायरस संक्रमण के हर दिन 90,000+ मामले सामने आए। 17 सितंबर को 93,199 नए मामले सामने आए जो अब तक किसी एक दिन में संक्रमण का सबसे बड़ा आंकड़ा है। हालांकि, पिछले कुछ दिनों से कोरोना के नए मामलों में लगातार गिरावट आ रही है। देश में करीब एक महीने बाद मंगलवार को कोविड-19 के एक दिन में 75 हजार से कम नए मामले सामने आए और एक हजार से कम लोगों की मौत हुई है। भारत में पहली बार नए मामलों में लगातार गिरावट पहली बार भारत में कोरोना के मामलों में इतने लंबे समय तक लगातार गिरावट देखने को मिली है। इस दौरान एवरेज डेली टेस्ट भी बढ़े हैं, फिर भी नए मामलों में थोड़ा ही सही लेकिन लगातार गिरावट उम्मीदें बढ़ाने वाला है। इसी तरह टेस्ट पॉजिटिविटी रेट भी 8.7 प्रतिशत से गिरकर 7.7 प्रतिशत पर आ चुका है। भारत में कोरोना के केस लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़े बताते हैं कि बड़ी संख्या में मरीज इस बीमारी को मात भी दे रहे हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, पिछले महीने की तुलना में सितंबर में रिकवरी रेट 100 फीसदी बढ़ा है। वहीं, अब तक सामने आए कुल मरीजों में से 82 फीसदी स्वस्थ्य हो चुके हैं। बता दें, देश में कुल मरीजों का आंकड़ा साठ लाख के पार हो गया है। वहीं एक्टिव मरीजों की संख्या 10 लाख से कम है। जिन राज्यों में पहले कोरोना तेजी से फैल रहा था, वहां अब राहत के संकेत मिल रहे हैं। मसलन दिल्ली में सोमवार को 1984 नए मामले सामने आए जो कि करीब एक महीने में सबसे कम हैं।

इंदौर में कोरोना से सितंबर में 152 मौत, फिर भी सियासी जलसों में जुटाई भीड़

इंदौर। इंदौर में रविवार रात कोरोना रिपोर्ट में 468 नए मामले मिले, जबकि 6 लोगों की मौत भी हुई। इसे मिलाकर संक्रमितों की संख्या अब 23075 हो गई है, जबकि कुल मृतक 551 हो गए। रात में 3 हजार 240 टेस्ट की रिपोर्ट आई, जिसमें 2 हजार 682 निगेटिव मरीज मिले। इंदौर में कोरोना की भयंकर तस्वीर होने के बाद भी सियासी जलसे हो रहे हैं। गौरतलब है कि सांवेर विधानसभा क्षेत्र इंदौर से लगा हुआ है। सांवेर में उपचुनाव हो रहा है. यहां हाल ही में जनसभा हुई। जिसमें सीएम शिवराज सिंह के अलावा सिंधिया ने भाग लिया। इस सभा के लिए प्रशासन के स्तर पर 600 बसों का इंतज़ाम किया गया, इन बसों में गाँव-गाँव से लोगों को लाया गया। इस कोरोना काल में कांग्रेस भी भीड़ जमा कर लोगों को खतरा पैदा कर रही है। हालांकि 18194 लोग अब तक ठीक हो चुके हैं। फिर भी सबसे ज्यादा परेशान करने वाला आंकड़ा लगातार बढ़ रहे पॉजिटिव मरीजों का है। जिले में अभी 4 हजार 330 एक्टिव मरीज हैं। जिले में अब तक 2 लाख 93 हजार 759 सैंपल टेस्ट किए जा चुके हैं। सितंबर के 27 दिनों में 9825 संक्रमित मरीज मिले हैं। वहीं, 152 की मौत हुई है। सबसे संक्रमित क्षेत्र सुदामा नगर रविवार रात 234 क्षेत्रों में संक्रमण मिला, इनमें से तीन क्षेत्र ऐसे थे, जहां पहली बार संक्रमण पहुंचा है। सबसे ज्यादा संक्रमित क्षेत्र सुदामा नगर रहा। यहां पर 17 संक्रमित सामने आए। इसके बाद विजय नगर क्षेत्र में 14 लोग पॉजिटिव मिले। हुजूर गंज में 9 तो गुमास्ता नगर, वीना नगर, हीरा नगर, न्याय नगर और महेश गार्ड लाइन में 8-8 संक्रमित मिले। सूर्यदेव नगर में 7 तो स्कीम नंबर -71, त्रिवेणी नगर, अखंड नगर, लक्ष्मी नगर, सीआईएसएफ, सदाशिव गैलेक्सी, एयरपोर्ट रोड, जिला जेल, कैम्पस रेसिडेंसी एरिया, इंद्रपुरी कॉलोनी में 6-6 लोग संक्रमित मिले। कैलाश मार्ग, मल्हार गंज, आनंद नगर, शिव शक्ति नगर, वैशाली नगर, सिल्वर स्प्रिंग, पिपलिया राव, राजेंद्र नगर, ट्रेजर टाउन, सनकेश्वर सिटी में 5-5 लोगों में संक्रमण दिखाई दिया। स्कीम नंबर 51, राज मोहल्ला, खातीवाल टैंक, एमआईजी कॉलोनी, सिलिकॉन सिटी, कालानी नगर, बियाबानी, क्लर्क कॉलोनी, लसुडिय़ा अभिनवन नगर और सराफा बाजार में 4-4 लोग संक्रमित मिले।

MP : कोरोना ने बढाई सीएम की चिंता, कलेक्टर्स को अधिक सावधानी के निर्देश

भोपाल. कोरोना संक्रमण ने सीएम शिवराज सिंह चौहान की चिंता बढा दी है। उन्होंने प्रदेश के सभी कलेक्टर्स को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक कर कोरोना संक्रमण से अधिक प्रभावी तरीके से निपटने के लिए निर्देश दिए। सीएम ने कोरोना संक्रमण की वर्तमान स्थिति की जानकारी ली और इस संक्रमण से रिकवरी रेट बढाने की दिशा में कार्य करने के लिए व्यवस्थाएं सुनिश्चित कराने को कहा। 80 प्रतिशत हुआ रिकवरी रेट सीएम शिवराज सिंह चौहान ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से कोरोना संक्रमण की वस्तुस्थिति का जिलेवार जायजा लिया। जानकारी लेने के बाद सीएम ने सभी जिला कलेक्टर्स को कोरोना संक्रमण पर प्रभावी नियंत्रण के निर्देश दिए। सीएम ने बताया कि प्रदेश में कोरोना संक्रमण से ठीक होने वालों का रिकवरी रेट 80 प्रतिशत हो गया है। यह अच्छा संकेत है, लेकिन इस संक्रमण को रोकने के लिए और अधिक प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि कोरोना मरीजों के उपचार के लिए सभी संभव व्यवस्थएं सुनिश्चित की जाएं। इन जिलों पर रहा फोकस मुख्यमंत्री शिवराज सिहं चौहान ने जबलपुर, नरसिंहपुर, शहडोल, उमरिया, खरगोन व धार जिलों में कोरोना संक्रमण की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। सीएम ने इन जिलों की अलग से विशेष समीक्षा की और खास तौर पर ध्यान रखने को कहा। उन्होंने कोविड केयर सेंटर्स में मरीजों के एडमिट होने और डिस्चार्ज होने की अवधि की भी समीक्षा की। फीवर क्लीनिक पर विशेष ध्यान रखने के लिए कलेक्टर्स को निर्देशित किया। बैठक में ​​चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग, मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस, अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य मोहम्मद सुलेमान, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव मनीष रस्तोगी आदि शामिल रहे।

ड्रग्स लेने पर कैसा महसूस होता है, आखिर क्यों हैं बॉलिवुड में इसका इतना चलन ?

मुंबई. ड्रग्स के सेवन को लेकर जिस स्तर का हंगामा इस समय हमारे देश में देखने को मिल रहा है, उसका पूरा फोकस इस समय केवल बॉलिवुड है। लेकिन ऐसा नहीं है कि ड्रग्स का कंजंप्शन केवल बॉलिवुड मे होता है। हां लेकिन ड्रग्स केस में फंस चुकी जया साहा ने एनसीबी की पूछताछ में सितारों का बचाव करने के लिए जिस तरह के तर्क दिए हैं, उनसे दिल्ली के जाने माने सायकाइट्रिस्ट एग्री नहीं करते हैं… क्या वाकई ड्रग्स लेने से स्ट्रेस कम होता है? इस बारे में बात करते हुए मैक्स हॉस्पिटल पटपड़गंज (दिल्ली) के सीनियर सायकाइट्रिस्ट डॉक्टर राजेश कुमार कहते हैं कि कोई भी ड्रग हमारे ब्रेन के मिड पार्ट में पहुंचने पर प्लेजर ऐक्टिविटीज के सर्किट में जाकर काम करता है। आमतौर पर ब्रेन का यह हिस्सा सेक्स, फूड, प्लेजर ऐक्टिविटीज, म्यूजिक आदि के कारण ऐक्टिव होता है। ड्रग्स भी ब्रेन के इसी सर्किट पर काम करता है और ड्रग लेने के बाद हाई फील होने लगता है। क्या होती है हाई फीलिंग? –हाई फील करने के दौरान आप खुद को फुल ऑफ एनर्जी महसूस करते हैं। इस दौरान आप आस–पास के माहौल से पूरी तरह कट जाते हैं और तनाव देनेवाली बातों को भूल जाते हैं। इस दौरान आप डिसइनिवेटिव बिहेवियर (जो काम आप एलर्टनेस में नहीं कर सकते) करने लगते हैं और ड्रग्स के असर से कुछ समय के लिए आपकी नींद और थकान गायब हो जाती हैं। हाई फील में होते हैं ‘लो‘ काम –जब व्यक्ति हाई फील करता है तो उसकी कॉन्शियसनेस (चेतन अवस्था) कम हो जाती है, सही और गलत समझने की उसकी क्षमता कम हो जाती है। किस काम को करना है और किसे नहीं उसे यह तय करने में भी मुश्किल होती है। इस कारण उनका व्यवहार सामान्य स्थिति की अपेक्षा में बहुत अधिक बदल जाता है। इस अवस्था में लोग रेप, ऐक्सिडेंट, चोरी और दूसरे इंपल्सिव बिहेवियर करने लगते हैं, जो कि इस स्थिति में बहुत सामान्य ऐक्टिविटीज हैं। अक्सर इस हाई फील के दौरान व्यक्ति ऐसे काम नहीं कर पाता है, जिनमें पूरी तरह सजगता (फोकस) की जरूरत होती है। क्यों सितारे यूज करते हैं ड्रग्स? –सुशांत डेथ केस से जुड़े ड्रग्स मामले में जेल में बंद जया साहा का कहना है कि फिल्मी सितारे अपने स्ट्रेस और डिप्रेशन को कम करने के लिए ड्रग्स लेते हैं। इस बारे में डॉक्टर राजेश कहते हैं कि यह पूरी तरह एक मिथ है कि एंग्जाइटी और डिप्रेशन में लोग ड्रग्स लेते हैं। अपने क्लीनिकल एक्सपीरियंस के बारे में बात करते हुए डॉक्टर कुमार कहते हैं कि एंग्जाइटी और डिप्रेशन के इलाज में कुछ खास पेथी की सीमित दवाओं को छोड़ दिया जाए तो कोई मेडिसिन ऐसी नहीं है, जिसके कॉम्पोनेंट इन ड्रग्स से मिलते–जुलते भी हों। जबकि ड्रग्स का सेवन करने से इन बीमारियों के लक्षण बढ़ जरूर जाते हैं। –आमतौर पर एडिक्शन के शिकार लोग फिर भले ही वे सिलेब्रिटी ही क्यों ना हों, ड्रग्स का सेवन फन के लिए करते हैं। लेकिन वो लोग हमेशा किसी और को अपने ड्रग्स अडिक्शन का कारण बताते हैं। मतलब वे अपने ऊपर जिम्मेदारी ना लेकर किसी और पर प्रोजेक्ट करते हैं या कहिए कि दोषी ठहराते हैं, इसे सायकॉलजी की भाषा में डिफेंस मैकेनिज़म कहा जाता है। –ड्रग लेनेवाले लोग अलग–अलग कारण देते हैं कि हमने ड्रग्स का सेवन इस कारण किया या उस कारण किया… जैसा कि वे उदाहरण देते हैं कि इन देशों में तो लीगलाइज है ड्रग्स लेना, इसलिए भारत में भी इन्हें लेने की छूट होनी चाहिए। जबकि उन्हें बात की जानकारी नहीं होती है कि जिन देशों में इन ड्रग्स पर पाबंदी नहीं है, वहां भी मेंटल इलनेस के इलाज के लिए इन ड्रग्स का सेवन नहीं किया जाता है। हर प्रफेशन में है स्ट्रेस –डॉक्टर राजेश कहते हैं कि जितना पेन आपको सफलता के स्तर पर पहुंचने के लिए लेना पड़ता है, उससे अधिक पेन आपको सफलता की ऊंचाइयों पर बने रहने के लिए लेना पड़ता है। लेकिन यह बात सिर्फ बॉलिवुड पर नहीं बल्कि हर प्रफेशन पर लागू होती है। इसलिए इस कारण को वैलेड नहीं माना जा सकता कि बॉलिवुड सितारे स्ट्रेस कंट्रोल करने के लिए ड्रग्स लेते हैं। स्ट्रेस से बचने के लिए क्या करें –डॉक्टर राजेश के अनुसार, स्ट्रेस कम करने के कई दूसरे तरीके होते हैं, जो आपको शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाने का काम करते हैं। इनमें माइंडफुलनेस प्रैक्टिस, मेडिटेशन, योगा और अन्य स्प्रिचुअल प्रैक्टिस की जा सकती हैं। आप सायकाइट्रिस्ट से ट्रीटमेंट, सायकॉलिजस्ट से काउंसलिंग या स्प्रिचुअल काउंसलिंग ले सकते हैं। ये सभी स्ट्रेस से लड़ने के हेल्दी तरीके हैं। – यदि आप अपना तनाव कम करने के लिए ड्रग्स लेते हैं तो आप बस कुछ देर के लिए अपने स्ट्रेस को दूर कर पाते हैं। लेकिन इसके साथ ही खुद को अन्य समस्याओं में झोंक रहे होते हैं। इनमें मेंटल और फीजिकल दोनों तरह की बीमारियां शामिल हैं।

ताउम्र शुगर की बीमारी से बचाकर रख सकता है एलोवेरा, जानें इसे खाने के और भी फायदे

भोपाल. ग्वारपाठा, घृतकुमारी या एलोवेरा आपकी त्वचा की सुंदरता के लिए जितना उपयोगी है, उतना ही लाभकारी आपकी सेहत के लिए भी है। हम सभी चाहते हैं कि हमारा शरीर हमेशा निरोग रहे। तो प्राकृतिक आयुर्वेदिक औषधियों में एलोवेरा एक ऐसी ही औषधि है, जिसका सेवन नियमित रूप से करने पर किसी भी तरह की बीमारियां शरीर पर हावी नहीं हो पाती हैं। आइए, जानते हैं ग्वारपाठा खाने का सही तरीका और इसके फायदे… क्यों खाना चाहिए एलोवेरा? –एलोवेरा को एक सर्वगुण संपन्न पौधा भी कहा जाता है। क्योंकि आपकी सेहत से जुड़ी कोई समस्या हो या सौंदर्य से जुड़ी समस्या, हर पीड़ा को हरने के गुण इस पौधे में मौजूद होते हैं। शायद यही वजह है कि मिश्र की प्राचीन सभ्यता में घृतकुमारी को अमरता प्रदान करनेवाला पौधा कहा जाता था। –एलोवेरा में ऐंटिबैक्टीरियल, ऐंटिफंगल और ऐंटिमाइक्रोबियल तत्व पाए जाते हैं। यही कारण है कि कोई बीमारी आपकी त्वचा से जुड़ी हो या शरीर के अंदरूनी हिस्सों से, एलोवेरा खाने का फायदा शरीर के हर अंग को मिलता है। इन समस्याओं से बचाता है –अपने दैनिक जीवन में आप खान–पान और लाइफस्टाइल से संबंधित कई भूल कर जाते हैं। जिस कारण कभी दांत दर्द, पेट दर्द, कब्ज, अपच, उल्टी, लूजमोशन, सिर दर्द जैसी समस्या हो जाती है। लेकिन अगर आप हर दिन एलोवेरा जूस या इसके गूदे का सेवन करेंगे तो आपको इन समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा। कभी नहीं होती ये बीमारियां –नियमित रूप से सीमित मात्रा में एलोवेरा का सेवन करने से रोगी को कभी भी डायबिटीज, हाई कॉलेस्ट्रोल, हाइपरटेंशन जैसी गंभीर बीमारियों का सामना नहीं करना पड़ता है। क्योंकि एलोवेरा का सही प्रकार से सेवन करने पर आपके शरीर में कोई विकार पनप ही नहीं पाता है। इस कारण आप हर तरह की बीमारियों से बचे रहते हैं। इन बीमारियों में देता तुरंत लाभ –पेट में तेज जलन हो रही हो या सीने पर जलन की समस्या तब आप एलोवेरा की एक पत्ती को छीलकर उसके गूदे में धोड़ा–सा शहद मिलाएं और इस मिश्रण का सेवन धीरे–धीरे चाटकर करें। आपको सीने और पेट की जलन से छुटकारा मिलेगा। –ग्वारपाठा छीलकर उसके गूदे में थोड़ी–सी चीनी मिलाकर रोगी को पिला दें। कैसा भी पेट दर्द हो उसे कुछ ही मिनटों में आराम मिल जाएगा। –यदि रसोई का कोई काम करते हुए या किसी अन्य काम के दौरान आपकी त्वचा जल जाती है तो आप तुरंत इस जली हुई जगह पर एलोवेरा का गूदा लगा लें। इससे आपकी त्वचा की जलन तुरंत शांत होगी। साथ ही फफोले कम पड़ेंगे और त्वचा पर जले हुए का निशान गहरा नहीं बन पाएगा। दिव्य अनुभूती कराती है घर पर तैयार की गई यह ड्रिंक, एक बार जरूर ट्राई करें सेवन से जुड़ी जरूरी बातें –एलोवेरा का सेवन करने के बारे में यह बात अच्छी तरह जान लें कि आपको इसके सेवन से कोई हानि नहीं होगी अगर आप हर दिन सीमित मात्रा में इसका सेवन करेंगे। –अति तो हर चीज की वर्जित होती है, इस कारण आपको अपनी उम्र और सेहत के अनुसार ही एलोवेरा की सही मात्रा का निर्धारण करना होगा। इस बारे में आयुर्वेदिक चिकित्सक आपको सही सलाह दे सकते हैं। –यदि आप युवा हैं और स्वस्थ हैं। यानी आपको किसी भी तरह का गंभीर रोग नहीं है तो आप हर दिन एलोवेरा की पत्ती का दो इंच भाग खा सकते हैं। जूस पीना चाहें तो आप हर दिन चाय के कप से आधा कप जूस पी सकते हैं। –गर्भवती महिलाओं को किसी भी जूस या फल का नियमित सेवन करने से पहले अपनी डॉक्टर से परामर्श अवश्य लेना चाहिए। क्योंकि प्रेग्नेंसी के दौरान हर महिला के शरीर में हॉर्मोन्स की स्थिति अलग हो सकती है, जिससे उसकी हेल्थ संबंधी जरूरतें भी अलग–अलग हो सकती हैं। इस स्थिति में आपकी डॉक्टर की सलाह के बाद ही आप एलोवेरा का सेवन करें।

गैस के कारण हो रहा है पेट दर्द तो ये घरेलू नुस्खे दिलाएंगे तुरंत आराम

भोपाल. पेट में दर्द होना एक आम समस्या है। कई बार अचानक यह दर्द शुरू हो जाता है और आप सोच में पड़ जाते हैं कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? काफी देर सोचने के बाद भी आप नहीं जान पाते कि आपने ऐसा क्या खाया है या पिया है जिसके कारण पेट दर्द हो रहा है, जबकि कई बार आपको पता भी चल जाता है कि किस कारण आपके पेट में गैस बन रही है और आपको दर्द झेलना पड़ रहा है। आइए, यहां जानते हैं उन घरेलू नुस्खों के बारे में जो आपको पेट दर्द से तुरंत राहत दिलाने का काम करेंगे… पेट में गैस का दर्द होने के लक्षण –अगर आपके मन में यह सवाल आ रहा है कि इस बात का पता कैसे लगाएं के पेट में दर्द गैस के कारण हो रहा है तो इसका उत्तर यह है कि गैस के कारण जब भी दर्द होता है वह पेट में किसी एक स्थान पर नहीं होता है। –गैस यानी वायु और वायु की प्रकृति होती है कि वह किसी भी एक स्थान पर नहीं ठहरती है। इस कारण गैस से होनेवाला दर्द या तो आपको पूरे पेट में अनुभव होगा या कभी पेट के एक हिस्से में और कुछ ही देर बाद पेट के दूसरे हिस्से में होने लगेगा। –गैस के कारण होने वाले दर्द के समय पेट फूला हुआ और बहुत टाइट अनुभव होता है। यह जरूरी नहीं है कि गैस का दर्द आपके पेट तक ही सीमित रहे। यह शरीर के अन्य हिस्सों में भी पहुंच सकता है। –इस तरह का दर्द होने के दौरान यदि डकार आती है या वायु पास होती है तो व्यक्ति को दर्द में राहत मिलती है। –गैस के कारण होनेवाले दर्द के दौरान बार–बार वायु पास होने या डकार आने की प्रक्रिया भी लगातार चलती रह सकती है। ऐसा उस स्थिति में होता है ,जब पेट में बहुत अधिक गैस बन रही होती है। क्यों बनती है पेट में गैस? –हमारा शरीर पंचतत्वों से बना हुआ है। इन्हें पंचमहाभूत भी कहा जाता है। इनमें जल, वायु, अग्नि, आकाश और पृथ्वी शामिल हैं। ये सभी तत्व शरीर में संतुलित अवस्था में रहते हैं तो आप भी खुद को स्वस्थ और ऊर्जावान अनुभव करते हैं। –लेकिन यदि किसी भी कारण से इन तत्वों के संतुलन में दिक्कत हो जाती है तो शरीर में अलग–अलग तरह की पीड़ा होने लगती है। जैसे, वायु अधिक होने पर दर्द की समस्या होने लगती है। –जब आप भोजन करते हैं तो उसे पचाने के दौरान शरीर में वायु या गैस का उत्सर्जन होता है। पाचन के दौरान उत्पन्न हुई यह गैस, डकार या वायु ( Fart) के रूप में शरीर से बाहर निकल जाती है तो कोई समस्या नहीं होती है। लेकिन यदि किसी भी कारण से यह गैस शरीर में ही रुकी रहती है तो दर्द का कारण बनती है। गैस से होनेवाले पेट दर्द के घरेलू उपचार –पेट में यदि गैस के कारण दर्द हो रहा हो तो आप हरे पुदीने की 5 से 6 पत्तियां धुल लें और इन्हें काले नमक के साथ धीरे–धीरे चबाकर खाएं। कुछ ही मिनटों में आपको वायु पास हो जाएगी और दर्द से राहत मिलेगी। –पेट में बननेवाली गैस की समस्या को दूर करने में अजवाइन सीड्स आपकी सहायता कर सकते हैं। आप 1/4 चम्मच अजवाइन लेकर उसे हल्के गुनगुने पानी के साथ खा लें। इसके बाद उलटे हाथ (लेफ्ट हैंड) की तरफ करवट लेकर 10 से 15 मिनट के लिए लेट जाएं। आपको आराम मिलेगा और दर्द दूर होगा। –पेट गैस के कारण होनेवाले दर्द को दूर करने में हींग आपकी सहायता कर सकता है। आप दो चुटकी हींग लेकर उसे कुछ बूंद पानी के साथ घोलकर लिक्विड बना लें। अब थोड़ी–सी कॉटन लेकर इस लिक्विड में भिगो लें और इसे नाभि में लगाकर लेट जाएं। आपको जल्द राहत मिलेगी। –आप 1/4 चम्मच अजवाइन सीड्स (अजवाइन दाना) लें, इतनी ही चीनी और 1 चुटकी काला नमक लें। इन चीजों को आधा गिलास पानी में मिलाएं। अब इसमें आधे नींबू का रस निचोड़कर पी लें। आपको राहत मिलेगी। लेकिन ध्यान रखें कि यह नुस्खा आप सिर्फ गर्मी के मौसम में ही अजमाएं। सर्दी के मौसम में सादे के स्थान पर हल्के गुनगुने पानी का उपयोग करें।

उत्तराखंड के दौरे पर गयीं उमा भारती को कोरोना, हरिद्वार के पास क्वारंटीन

भोपाल। एमपी की पूर्व सीएम उमा भारती की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव हैं। वह अभी उत्तराखंड के दौरे पर हैं। उमा बीते दिनों पहाड़ की यात्रा पर गई थीं। उन्होंने केदारनाथ में दर्शन करते हुए वीडियो भी डाला था। कोरोना पॉजिटिव होने के जानकारी उन्होंने खुद ही ट्वीट कर दी है। रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उमा भारती ने ऋषिकेश और हरिद्वार के बीच स्थित वंदे मातरम कुंज में खुद को क्वारंटीन किया है। उमा भारती ने देर रात ट्वीट कर लिखा है कि मैं आपकी जानकारी के लिए यह डाल रही हूं कि मैंने अपनी पहाड़ यात्रा की समाप्ति के अंतिम दिन प्रशासन को आग्रह करके कोरोना टेस्ट की टीम को बुलवाया, क्योंकि मुझे 3 दिन से हल्का बुखार था। मैंने हिमालय में कोविड के सभी विधिनिषेध एवं सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया। फिर भी मैं कोरोना पॉजिटिव निकली हूं। पूर्व सीएम ने बताया कि मैं अभी हरिद्वार और ऋषिकेश के बीच वंदे मांतर कुंज में क्वारंटीन हूं, जो कि मेरे परिवार के जैसा है। 4 दिन बाद फिर से टेस्ट कराऊंगी और स्थिति ऐसी ही रही, तो डॉक्टरों के परामर्श के अनुसार निर्णय लूंगी। मेरे संपर्क में आए लोगों से अपील है कि वो अपनी कोरोना टेस्ट करवाए एवं सावधानी बरते। गौरतलब है एमपी की पूर्व सीएम उमा भारती एमपी उपचुनाव के लिए चुनाव प्रचार के बाद हिमालय की यात्रा पर निकल गई थीं। यात्रा खत्म कर वह फिर से एमपी की राजनीति में सक्रिय होतीं। लेकिन उससे पहले ही वह कोरोना की चपेट में आ गई हैं। एमपी बीजेपी के नेताओं ने उन्हें जल्द स्वस्थ होने की कामना की है।

MP : एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंची, अस्पताल के रास्ते में ही निकली महिला की जान

बैतूल। मध्य प्रदेश के बैतूल में एम्बुलेंस समय पर नहीं पहुंचने से एक महिला की मौत हो गई। बैतूल के भंडारपानी गांव में सड़क नहीं है और ग्रामीण बांस के झोले में महिला को लादकर अस्पताल के लिए निकले, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है और मामले की जांच की मांग की है। बैतूल के घोड़ाडोंगरी ब्लॉक का भंडारपानी गांव 1800 फीट ऊपर पहाड़ी पर बसा है। यहां जाने के लिए रास्ता नहीं है। भंडारपानी की जग्गोबाई पति इंदर (28) की डिलीवरी पिछले महीने अगस्त में हुई थी जब उसने बेटी को जन्म दिया था लेकिन एक महीने बाद पेट मे दर्द और ब्लीडिंग के कारण उसकी मौत हो गई। परिवार वालों का आरोप है कि एम्बुलेंस और सरकारी सुविधाएं मिल जाती तो उसकी जान बच सकती थी। जग्गो बाई को 9 सितंबर की रात में अचानक दर्द और ब्लीडिंग होनी लगी। 10 सितंबर की सुबह ग्रामीणों ने बांस में कपड़ा बांधकर झोला बनाया और उसे कंधों पर 1800 फीट नीचे इमलीखेड़ा (सड़क तक) ले आए। ग्रामीणों का दावा है कि उन्होंने बुधवार दोपहर 12.46 बजे 108 पर एंबुलेंस के लिए फोन किया। भोपाल से सूचना मिली कि घोड़ाडोंगरी की एंबुलेंस ढाई घंटे बाद मिल पाएगी। इसके बाद नूतन डंगा गांव के सरपंच साबू लाल, सचिव मालेकार सरकार ने प्राइवेट वाहन की व्यवस्था की और घोड़ाडोंगरी अस्पताल के लिए महिला व परिजनों को रवाना किया। गांव से 10 किमी दूर तबियत बिगड़ने पर रास्ते में आमढाना उप स्वास्थ्य केंद्र में इलाज के लिए दिखाया गया लेकिन महिला की मौत पहले ही हो चुकी थी। श्रमिक आदिवासी संगठन के राजेंद्र गढ़वाल ने कहा उन्होंने 108 पर एंबुलेंस के लिए फोन किया था, लेकिन एंबुलेंस नहीं आई। पीड़िता एंबुलेंस का इंतजार करती रही। अगर एंबुलेंस समय पर आ जाती तो शायद महिला की मौत नहीं होती। उन्होंने सरकार से पीड़ित परिवार के लिए राहत की मांग भी की है।

विटामिन D हो पर्याप्त तो कोरोना वायरस से मौत का खतरा आधा: स्टडी

भोपाल। कोरोना वायरस के जिन मरीजों में पर्याप्त मात्रा में विटामिन D की मात्रा मौजूद होती है उनकी मौत का खतरा 52 फीसदी कम होता है. एक नई स्टडी में इस बात की जानकारी मिली है. अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने यह स्टडी की है. रिसर्चर्स को इस बात की जानकारी मिली है कि जिन मरीजों में विटामिन डी की मात्रा पर्याप्त रूप से मौजूद थी, वैसे मरीजों के हॉस्पिटल में भर्ती होने के बाद मौत का खतरा आधा हो गया. वहीं, गंभीर रूप से बीमार पड़ने का खतरा भी विटामिन डी की वजह से 13 फीसदी कम पाया गया. स्टडी के दौरान पता चला कि जिन मरीजों में विटामिन डी की पर्याप्त मात्रा मौजूद है, उनके वेंटिलेटर पर रखे जाने की जरूरत भी 46 फीसदी कम हो गई. वैज्ञानिकों का कहना है कि व्यक्ति के इम्यून सिस्टम में विटामिन डी का अहम रोल होता है जिसकी वजह से कोरोना मरीजों को फायदा होता है. बता दें कि औसतन अमेरिका के 42 फीसदी लोगों में विटामिन डी की कमी पाई जाती है. वहीं, अश्वेत और बुजुर्ग लोगों में भी तुलनात्मक रूप से विटामिन डी की कमी अधिक होती है और ऐसे लोग कोरोना के भी अधिक शिकार हो रहे हैं. इससे पहले बोस्टन यूनिवर्सिटी के ही माइकल हॉलिक को एक रिसर्च में पता चला था कि ऐसे लोग जिनमें पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी मौजूद है, उनके कोरोना वायरस से संक्रमित होने का खतरा 54 फीसदी कम होता है. पिछली स्टडी को ही आगे बढ़ाने पर वैज्ञानिकों को कोरोना मरीजों और विटामिन डी के संबंधों को लेकर नई जानकारी मिली. हॉलिक की टीम ने तेहरान के अस्पताल के 235 कोरोना मरीजों के सैंपल लिए थे. कुल 67 फीसदी मरीजों में विटामिन डी की मात्रा 30 ng/mL से कम थी. एक्सपर्ट का कहना है कि अन्य बीमारियों से जूझ रहे लोगों में भी विटामिन डी की मात्रा कम होती है, इसलिए स्पष्ट तौर से यह कहना मुश्किल है कि विटामिन डी की कमी नहीं होती तो कितने लोगों की जान बच सकती थी.

MP : न डॉक्टर देखते हैं, न दवा देते हैं, मरीज की पत्नी ने मंत्री को गिनाईं खामियां

भोपाल। पति को कोरोना होने पर 5 दिन पहले ही जेपी अस्पताल में भर्ती किया है, ना डॉक्टर देखने आते हैं और ना वार्ड ब्वॉय दवाई खिलाते हैं। नर्सों को कुछ बोलो तो वो दुत्कार देती हैं। मरीज को खाना खिलाने और बाथरूम कराने के लिए कोई तैयार नहीं है। ऐसे में मजबूरन मैं कोरोना के आईसीयू में जाकर पति को दवा और खाना खिलाती हूं। मैं जानती हूं कि मुझे संक्रमण का खतरा है, इसलिए 5 दिन से अस्पताल में ही पड़ी हूं। घर में छोटे-छोटे बच्चे अकेले हैं। अपनी मजबूरी और अस्पताल प्रबंधन की यह लापरवाही 12 नंबर स्टॉप पर रहने वाली आशा शर्मा ने शनिवार दोपहर 2 बजे जेपी अस्पताल पहुंचे चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग को सुनाई। इस पर मंत्री ने अस्पताल प्रबंधन को फटकार लगाई और स्वास्थ्य आयुक्त संजय गोयल को व्यवस्थाएं दुरुस्त करने को कहा। साथ ही आशा को भरोसा दिलाया कि उनके पति का बेहतर इलाज किया जाएगा। मंत्री सारंग जेपी अस्पताल में कोरोना मरीज संतोष रजक की मौत और रजक की बेटी की ओर से लगाए गए आरोपों की हकीकत देखने अस्पताल पहुंचे थे। मंत्री ने जेपी अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. आरके तिवारी और डॉ. योगेंद्र श्रीवास्तव को फटकार लगाई। मंत्री सारंग ने बताया कि मृतक संतोष रजक के मामले की जांच के लिए स्वास्थ्य आयुक्त को बोला है। लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद देर शाम जेपी अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. आरके तिवारी को हटा दिया गया। इनके स्थान पर डॉ. राकेश श्रीवास्तव को यह जिम्मेदारी सौंपी। मंत्री की फटकार के बाद चिरायु भेजा- मंत्री सारंग ने आशा से पूछा कि आप क्या चाहती हैं। इस पर आशा ने साफ कहा कि यहां इलाज ही नहीं हो रहा है, आप मेरे पति को चिरायु अस्पताल में शिफ्ट करा दो। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग का अमला सक्रिय हुआ और एक घंटे में एंबुलेंस से सुरेश को चिरायु अस्पताल भेज दिया गया। इससे पहले मंत्री सारंग ने कोरोना पॉजिटिव मृतका संतोष की बेटी प्रियंका की ओर से लगाए गए आरोपों का वीडियो जेपी के सिविल सर्जन डॉ. तिवारी समेत अन्य जिम्मेदारों को दिखाया। उनसे हकीकत पूछी। इस पर उन्होंने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया और कहा था कि परिजन तो झूठे आरोप लगा रहे हैं।

कोरोना : राहत … अब एक्टिव केस कम हो रहे, 14 दिन पहले 9.73 लाख थे, अब 9.61 लाख

नई दिल्ली. देश में कोरोना संक्रमितों का आंकड़े अब कुछ राहत दे रहे हैं। बीते आठ में से सात दिनों में नए संक्रमितों से ठीक होने वालों की संख्या ज्यादा रही है। शुक्रवार को भी 85 हजार 465 संक्रमितों की पहचान हुई, जबकि 93 हजार 166 ठीक हो गए। इससे एक्टिव केस लगातार कम हो रहे हैं। 14 दिन पहले 12 सितंबर को 9.73 लाख एक्टिव केस थे, जबकि 25 सितंबर को यह 9.61 लाख हो गए। देश में अब तक 59 लाख 1 हजार 571 लोग संक्रमित हो चुके हैं। इनमें 48 लाख 46 हजार 168 लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि 93 हजार 410 मरीजों की मौत हो चुकी है। ओडिशा देश का 8वां राज्य हो गया है, जहां संक्रमितों की संख्या 2 लाख से अधिक हो चुकी है। शुक्रवार को यहां 4208 नए केस मिले। इसी के साथ संक्रमितों की संख्या 2 लाख 1 हजार 96 हो गई है। महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, उत्तरप्रदेश, दिल्ली और पश्चिम बंगाल में संक्रमितों की संख्या 2 लाख से ज्यादा हो चुकी है। गुरुवार को रिकॉर्ड 14 लाख 92 हजार 409 लोगों की जांच हुई। कोरोना टेस्टिंग का यह आंकड़ा एक दिन में सबसे ज्यादा है। इसके पहले 19 सितंबर को 12 लाख लोगों की जांच हुई थी। 6.89 करोड़ जांच हो चुकी हैं। अब हर 10 लाख की आबादी में मरीजों के मिलने की संख्या बढ़ गई है। अब इतनी आबादी में 4210 लोग संक्रमित मिल रहे हैं। 20 सितंबर तक 4200 मरीज मिल रहे थे। इतनी ही आबादी में मरने वालों की संख्या भी 67 हो गई है। पीजीआई चंडीगढ़ में शुक्रवार से ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की कोरोना वैक्सीन कोवीशील्ड का ट्रायल शुरू हो गया है। यहां वैक्सीन का डोज लेने के लिए 400 वॉलंटियर्स ने रजिस्ट्रेशन कराया है।

MP : बीमार मां को लेकर बच्चे 3 अस्पतालों में 2 दिन भटके; चौथे दिन बेड मिला, मौत

भोपाल। कोरोनाकाल में इंसानियत भी मरती जा रही है। प्राइवेट अस्पताल हों या सरकारी, सभी जगह बेपरवाह सिस्टम अब लोगों को मार रहा है। भोपाल के कोलार की 43 साल की संतोष रजक इसी बेपरवाही का शिकार हो गईं। वे दो दिन अस्पतालों में आईसीयू बेड के लिए भटकीं। जैसे-तैसे बेड मिला तो ठीक से इलाज नहीं हो पाया। अंत में उन्होंने गुरुवार को दम तोड़ दिया। बंसल में एक रात के इलाज का 41 हजार रु. बिल भरा 12 सितंबर की शाम करीब 6 बजे मां को सांस लेने में परेशानी हुई तो हर्ष उन्हें सिद्धांता अस्पताल ले गया। यहां हार्ट अटैक के लक्षण बताए तो हम रात 10 बजे बंसल अस्पताल ले गए। यहां कोरोना का सैंपल लिया गया तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई। यहां कोविड आईसीयू बेड नहीं हैं, इसलिए अगले दिन दोपहर तीन बजे हमें एंबुलेंस से जेके अस्पताल भेज दिया गया। बंसल में एक रात के इलाज का हमने 41 हजार रु. बिल भरा। जेके में भी आईसीयू बेड खाली नहीं थे, तो उन्होंने भर्ती नहीं किया। जेके से हमें हमीदिया भेजा, तो वहां रात 9 बजे तक हम बेड का इंतजार करते रहे, लेकिन बेड खाली नहीं होने का कहकर हमें लौटा दिया। फिर हमने पीपुल्स अस्पताल में फोन लगाया तो पता चला, वहां आईसीयू बेड खाली हैं। हम रात 10:20 बजे पीपुल्स हॉस्पिटल पहुंचे। यहां मरीज को भर्ती करने के पहले पांच दिन के 50 हजार रु. जमा करा गए। यहां इलाज महंगा पड़ता, इसलिए 14 की सुबह हमने कलेक्टर अविनाश लवानिया को आवेदन किया। उनके दखल के बाद मां को 14 सितंबर को दोपहर में जेपी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती किया गया। लेकिन, यहां भी इलाज के नाम पर खानापूर्ति हुई। मां की डेथ हुई, तब भी किसी ने हाथ नहीं लगाया यहां रात में अक्सर ऑक्सीजन की सप्लाई बंद हो जाती है, कोई सुनता नहीं है। ऑक्सीजन सिलेंडर खत्म होने पर मरीज के परिजन दूसरे वार्ड से खुद ही लाते हैं। 10 दिन इलाज के बाद जब गुरुवार को मां की डेथ हुई, तब भी किसी ने हाथ नहीं लगाया। हमें आईसीयू में बुलाकर पीपीई किट थमा दी और कहा- खुद पहन लो और अपनी मां को पहना दो। मेरे भाई और परिजनों ने पीपीई किट पहनकर मां को पैकिंग बैग में रखा, फिर उन्हें एंबुलेंस से विश्राम घाट लेकर गए।  

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