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बंद कमरे में ढाई घंटे की बैठक, RSS के 3 दर्जन से ज्यादा पदाधिकारी और CM योगी आदित्यनाथ ने क्या किया चर्चा?

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने  राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पदाधिकारियों के साथ बैठक की। बताया जा रहा है कि ढाई घंटे तक चली इस बैठक में सरकार और संघ के बीच समंवय व आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर चर्चा हुई। सीएम ने संघ के अधिकारियों से सरकार का फीडबैक लिया। साथ ही संघ पदाधिकारियों के सुझाव भी जाने। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्टेट प्लेन गुरुवार सुबह करीब सवा 11 बजे हिंडन एयरबेस पर उतारा। सीएम का काफिला सड़क मार्ग से दोपहर पौने 12 बजे नेहरू नगर स्थित सरस्वती विद्या मंदिर पहुंचा। जहां मुख्यमंत्री ने आरएसएस की दृष्टि से मेरठ प्रांत (मेरठ, मुरादाबाद व सहारनपुर मंडल) के तीन दर्जन से अधिक अधिकारियों के साथ बंद कमरे में करीब ढाई घंटे तक चर्चा की। मुख्यमंत्री ने बैठक के बाद संघ पदाधिकारियों के साथ भोजन भी किया। क्या-क्या सुझाव दिए गए बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री ने इस दौरान संघ के पदाधिकारियों से सरकार का फीडबैक लिया। संघ के अधिकारियों ने अपने फीडबैक के अलावा सरकार के कामकाज को लेकर कुछ सुझाव भी दिए। प्रमुख सुझावों में सरकारी अस्पतालों व स्कूलों में आधारभूत ढांचे को और मजबूत करना व मानव संसाधन बढ़ाना रहा। कुछ पदाधिकारियों ने थानों में भष्ट्राचार को रोकने के लिए और प्रभावी अंकुश लगाने का सुझाव भी दिया। लोनी को लेकर भी चर्चा हुई। कहा गया कि लोनी में सड़कों की हालात सुधारने की आवश्यकता है। सड़कों का भी उठा मुद्दा संघ अधिकारियों ने कहा हर घर जल योजना के तहत खुदाई से गांवों की सड़कें खराब हो गई हैं। इन सड़कों को तुरंत ठीक किया जाए। मेरठ में सेंट्रल मार्केट का मुद्दा भी बैठक में उठा। मुख्यमंत्री दोपहर करीब ढाई बजे वायु मार्ग से नोएडा के लिए रवाना हुए। मुख्यमंत्री ने पिछले साल अप्रैल में सरस्वती विद्या मंदिर में भी संघ पदाधिकारियों के साथ बैठक की थी। 40 पदाधिकारी रहे मौजूद सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री सरकार का फीडबैक व सुझाव लेने के लिए भविष्य में भी संघ के अधिकारियों के साथ समंवय बैठक करते रहेंगे। मुख्यमंत्री के साथ समंवय बैठक में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, प्रदेश संगठन मंत्री धर्मपाल सिंह, क्षेत्र संघचालक सूर्यप्रकाश टोंक, क्षेत्र प्रचारक महेंद्र और प्रांत प्रचारक अनिल समेत करीब 40 पदाधिकारी मौजूद रहे।

15 हजार से अधिक विद्युत सखी सक्रिय रूप से फील्ड में तैनात, बाकी प्रशिक्षित महिलाएं भी जल्द उतरेंगी मैदान में

योगी सरकार की पहल से आधी आबादी के जीवन में उजाला 30 हजार ‘विद्युत सखियां’ बनीं आत्मनिर्भर ग्रामीण यूपी में महिलाओं ने किया कमाल, अब तक 3250 करोड़ रुपये का किया रिकॉर्ड बिजली बिल कलेक्शन 15 हजार से अधिक विद्युत सखी सक्रिय रूप से फील्ड में तैनात, बाकी प्रशिक्षित महिलाएं भी जल्द उतरेंगी मैदान में लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार महिला सशक्तीकरण की दिशा में नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। योगी सरकार की ‘विद्युत सखी योजना’ ग्रामीण महिलाओं के जीवन में न केवल उजाला ला रही है, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत भी कर रही है।  अब तक इन ग्रामीण महिलाओं ने अपनी मेहनत और लगन से 3,250 करोड़ रुपये से अधिक का बिजली बिल संग्रह कर एक अभूतपूर्व रिकॉर्ड कायम किया है, जो महिला सशक्तीकरण का एक सशक्त मॉडल बन गया है। प्रदेश में अभी  30 हजार महिलाओं को विद्युत सखी के तौर पर पंजीकृत किया जा चुका है। इनमें से 15 हजार से अधिक महिलाएं पूरी सक्रियता के साथ फील्ड में तैनात होकर घर-घर जाकर बिजली बिल जमा करवा रही हैं।  महिलाओं के लिए सम्मानजनक आय का एक मजबूत जरिया योगी सरकार की योजना है कि प्रशिक्षण और अन्य औपचारिकताएं पूरी होने के बाद बाकी बची महिलाओं को भी जल्द ही मैदान में उतार दिया जाएगा, जिससे ग्रामीण ऊर्जा सेवा में आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की जा सके। इस योजना ने महिलाओं के लिए सम्मानजनक आय का एक मजबूत जरिया तैयार किया है।  हजारों ‘दीदियां’ बनीं लखपति इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र में विद्युत सखियों को दो हजार रुपये तक के बिजली बिल कलेक्शन पर 20 रुपये का कमीशन दिया जाता है, जबकि दो हजार से अधिक के बिल पर एक फीसदी कमीशन मिलता है। इस योजना के जरिए आज गांवों में हजारों ‘दीदियां’ लखपति बन चुकी हैं और समाज व परिवार में उनका मान-सम्मान भी काफी बढ़ा है। उपभोक्ताओं को सुविधा तो महिलाओं के लिए रोजगार का साधन उत्तर प्रदेश में इस योजना के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को बिजली बिल कलेक्शन एजेंट के रूप में सशक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया था। इस सफल पहल से जहां एक ओर ग्रामीण उपभोक्ताओं को लंबी लाइनों से छुटकारा मिला है और उनके लिए बिल जमा करना आसान हुआ है, वहीं दूसरी ओर महिलाओं के लिए यह योजना रोजगार का एक बेहतरीन साधन साबित हुई है।

3300 से ज्यादा किसानों को मिलेगा राज्य में कृषि यंत्रों का तोहफा

प्रदेश के 3300 से अधिक किसानों को मिलेंगे कृषि यंत्र  जनपदों में शुक्रवार को ई लाटरी से होगा किसानों का चयन  www.agridarshan.up.gov.in पर 4 मार्च तक ऑनलाइन आवेदन करने वाले किसानों को मिलेगा अनुदान का लाभ 2017 से 2025 के मध्य लगभग तीन लाख कृषि यंत्रों का किया गया है वितरण लखनऊ योगी सरकार होली के उपरांत 3300 से अधिक किसानों को अनुदान पर कृषि यंत्र देगी। इसका लाभ उन्हीं किसानों को मिलेगा, जिन्होंने 4 मार्च तक कृषि विभाग की वेबसाइट www.agridarshan.up.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन किया है। जिन जनपदों में लक्ष्य से अधिक आवेदन मिले हैं, सिर्फ वहीं शुक्रवार को ई लाटरी से चयन होगा।  सब मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन योजना के तहत 2519 किसानों को दिए जाएंगे यंत्र  कृषि विभाग द्वारा संचालित सब मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन योजना के अंतर्गत फार्म मशीनरी बैंक, कृषि ड्रोन, अन्य एकल कृषि यंत्र के तहत 2519 तथा प्रमोशन ऑफ एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन फॉर इन-सीटू मैनेजमेंट ऑफ क्रॉप रेज्ड्यू योजना के अंतर्गत 800 किसानों को कृषि यंत्र मिलेंगे।  10 दिन के भीतर अपलोड करनी होगी रसीद व फोटो  कृषि यंत्रों से जुड़ी समस्त जानकारी व अनुदान प्रक्रिया वेबसाइट पर उपलब्ध है। लाभार्थियों का चयन/बुकिंग टोकन कन्फर्म होने की तिथि से कृषि यंत्र खरीद कर उसकी रसीद व फोटो 10 दिन के भीतर www.agridarshan.up.gov.in या upyantratraking.in अपलोड करना होगा।  चयनित न होने वाले किसानों की जमानत धनराशि की जाती है वापस  ई लॉटरी में चयनित किसानों को मोबाइल पर एसएमएस भेजा जाता है। सूचना एवं बिल अपलोड की अंतिम तिथि की सूचना के साथ-साथ प्रतीक्षा सूची में चयनित कृषकों को भी सूचित किया जाता है। ई लॉटरी में चयनित न होने वाले किसानों की जमानत धनराशि अधिकतम छह महीने में वापस कर दी जाती है। योगी सरकार की प्राथमिकता है कि कृषि विभाग द्वारा संचालित योजनाएं पारदर्शिता से संपादित हो और इसका लाभ किसानों को मिले। कृषि विभाग ने अपील की है कि जिन किसानों ने कृषि विभाग के पोर्टल पर कृषि यंत्रों की बुकिंग की है, वे जनपद में होने वाली ई-लाटरी प्रक्रिया में अवश्य प्रतिभाग करें। 2017 से 2025 तक लगभग तीन लाख कृषि यंत्रों का वितरण 2017-18 से 2025 तक उत्तर प्रदेश में लगभग तीन लाख कृषि यंत्रों का वितरण किया गया। इसमें 2.31 लाख एकल कृषि यंत्र, 8405 कस्टम हायरिंग सेंटर, 7351 फॉर्म मशीनरी बैंक आदि प्रमुख हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतर्गत जनवरी तक 7777 कृषि यंत्र, 51 कस्टम हायरिंग सेंटर एवं 64 फार्म मशीनरी बैंक स्थापित करने के बिल पोर्टल पर अपलोड हुए।

उत्तर प्रदेश पुलिस और होंडा इंडिया फाउंडेशन के तत्वावधान में होगा आयोजन

उत्तर प्रदेश पुलिस को होंडा इंडिया फाउंडेशन देगा 50 वाहन आज  50 क्यूआरटी वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे मुख्यमंत्री  उत्तर प्रदेश पुलिस और होंडा इंडिया फाउंडेशन के तत्वावधान में होगा आयोजन  लखनऊ होंडा इंडिया फाउंडेशन उत्तर प्रदेश पुलिस को 50 वाहन देगा। फाउंडेशन अपने सीएसआर फंड से ये वाहन उपलब्ध कराएगा। इन 50 क्यूआरटी (क्विक रिस्पॉन्स टीम) दोपहिया वाहनों को शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। यह आयोजन उत्तर प्रदेश पुलिस और होंडा इंडिया फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में होगा। इस दौरान पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण भी मौजूद रहेंगे।  बॉर्डर के जनपदों को दी जाएगी तरजीह  यह 50 दोपहिया वाहन उत्तर प्रदेश पुलिस के बेड़े में शामिल होंगे। इन वाहनों का उपयोग बार्डर जनपदों में कानून व्यवस्था बनाये रखने एवं आपातकालीन स्थिति या अपराध होने पर पुलिस की तरफ से तत्काल कार्रवाई के लिए किया जाएगा। सहारनपुर में 5, शामली, हापुड़, बागपत, बुलन्दशहर, बिजनौर, पीलीभीत, महोबा, बांदा, प्रतापगढ़, खीरी, उन्नाव, श्रावस्ती, सिद्धार्थ नगर, देवरिया व सोनभद्र में तीन-तीन वाहन दिए जाएंगे। 2017 के बाद पुलिस का बढ़ा कारवां योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के उपरांत पुलिस के वाहनों का कारवां भी बढ़ा है। वर्ष 2017 में चार पहिया वाहनों की संख्या 9500 थी और दोपहिया की संख्या 3000 थी। वर्तमान में यह संख्या खासी बढ़ चुकी है। अब चार पहिया वाहन 15,500 एवं दोपहिया वाहन 9200 हो चुके हैं। गौरतलब है कि 2017 के पहले पुलिस के वाहन क्रय करने के लिए 85 करोड़ के प्रावधान में कई गुना बढोतरी के साथ 280 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

योगी सरकार की योजनाओं का असर, एस्पिरेशनल ब्लॉक कार्यक्रम में यूपी का लहराया परचम

योगी सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर हासिल की एक और बड़ी उपलब्धि, नीति आयोग से लखीमपुर खीरी के दो ब्लॉकों को मिला सम्मान लखीमपुर खीरी के धौरहरा ब्लॉक को मिला गोल्ड और बांकेगंज को ब्रॉन्ज मेडल योगी सरकार की योजनाओं का असर, एस्पिरेशनल ब्लॉक कार्यक्रम में यूपी का लहराया परचम स्वास्थ्य, पोषण और कृषि योजनाओं में शत-प्रतिशत सैचुरेशन से मिली राष्ट्रीय पहचान धौरहरा ने छह और बांकेगंज ने तीन इंडिकेटर्स पर 100 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर जीता मेडल लखनऊ योगी सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। नीति आयोग ने एस्पिरेशनल ब्लॉक के तहत उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी स्थित धौरहरा व बांकेगंज ब्लॉक को उत्कृष्ट कार्य के लिए गोल्ड और ब्रॉन्ज मेडल से नवाजा है। जुलाई से सितंबर 2024 के बीच चले संपूर्णता अभियान में जिले के बांकेगंज और धौरहरा ब्लॉक ने प्रदर्शन की नई इबारत लिखी। यह मेडल लखीमपुर खीरी की जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल ने प्राप्त किया। इसके साथ ही उन्हें सर्टिफिकेट ऑफ एप्रिसिएशन से सम्मानित किया गया।  बांकेगंज ब्लॉक ने तीन प्रमुख इंडिकेटर्स पर प्राप्त किया शत प्रतिशत सैचुरेशन जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में जिले के आकांक्षात्मक ब्लॉक में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। इसी के तहत लखीमपुर खीरी के बांकेगंज ब्लॉक ने ‘हेल्थ एंड न्यूट्रिशन’, ‘एग्रीकल्चर एंड अलाइड सर्विसेज़’ और ‘एस्पिरेशनल ब्लॉक्स प्रोग्राम के तहत सोशल डेवलपमेंट’ थीम में तीन प्रमुख इंडिकेटर्स पर शत-प्रतिशत सैचुरेशन हासिल किया है। इसके लिए नीति आयोग की ओर से ब्लॉक को ब्रॉन्ज मेडल प्रदान किया गया है। यह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेरणा से संभव हो पाया। सीएम योगी की मंशा के अनुरूप जमीनी निगरानी, विभागों के बीच बेहतर तालमेल और तय समय सीमा में लक्ष्य पूरा करने की रणनीति ने ब्लॉक को मॉडल बनाया। धौरहरा ब्लॉक ने प्राप्त किया छह इंडिकेटर्स पर शत प्रतिशत सैचुरेशन जिलाधिकारी ने बताया कि धौरहरा ब्लॉक ने छह इंडिकेटर्स पर शत-प्रतिशत सैचुरेशन के साथ गोल्ड मेडल हासिल किया। स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर पहुंच, पोषण सुधार की ठोस पहल और कृषि योजनाओं के लाभार्थियों तक सीधी पहुंच ने नतीजे को असरदार बनाया। संपूर्णता अभियान के तहत किए गए प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया कि जब प्रशासनिक इच्छाशक्ति और टीमवर्क साथ हो, तो लक्ष्य सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहते, धरातल पर उतरते हैं। डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल ने सीडीओ अभिषेक कुमार की मौजूदगी में बांकेगंज के बीडीओ ऋषिकांत अहिरवार और धौरहरा के तत्कालीन बीडीओ सुमित कुमार सिंह (वर्तमान में बीडीओ फूलबेहड़) को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया है।

आयुष्मान भारत के अंतर्गत उत्तर प्रदेश ने अब तक सर्वाधिक 5 करोड़ 60 लाख से अधिक गोल्डन कार्ड बनाए: सीएम

जैसे कपिल देव को देखकर ही पाकिस्तान आधा मैच हार जाता था, वैसे ही डॉक्टर के व्यवहार से आधी बीमारी हार जाती है: सीएम योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ग्रेटर नोएडा में किया केडीएसजी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का शुभारंभ   आयुष्मान भारत के अंतर्गत उत्तर प्रदेश ने अब तक सर्वाधिक 5 करोड़ 60 लाख से अधिक गोल्डन कार्ड बनाए: सीएम वर्ष 2014 से पहले देश में सिर्फ 6 एम्स कार्यरत थे, प्रधानमंत्री मोदी जी की पहले से आज देश में 23 एम्स: मुख्यमंत्री सरकारी प्रयासों के साथ निजी अस्पतालों के सहयोग से बड़ी आबादी को बेहतर और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकती हैं: सीएम योगी 2017 से पहले प्रदेश में “वन डिस्ट्रिक्ट-वन माफिया” की स्थिति थी और सरकारें माफियाओं के सामने नतमस्तक रहती थीं: योगी आज यूपी “वन डिस्ट्रिक्ट-वन मेडिकल कॉलेज”, “वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट” और अब “वन डिस्ट्रिक्ट-वन कुज़ीन” की दिशा में आगे बढ़ रहा: सीएम ग्रेटर नोएडा, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को ग्रेटर नोएडा में केडीएसजी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें डॉक्टर और मरीज के बीच विश्वास और मानवीय व्यवहार की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। एक मरीज डॉक्टर के पास बड़े विश्वास के साथ जाता है। उसके लिए पैसा सबसे बड़ा मुद्दा नहीं होता, बल्कि डॉक्टर के व्यवहार और उसकी सलाह पर भरोसा अधिक महत्वपूर्ण होता है। डॉक्टर का अच्छा व्यवहार मरीज की आधी से अधिक बीमारी को समाप्त कर देता है। इस बात को समझाने के लिए मुख्यमंत्री ने क्रिकेट का उदाहरण देते हुए कहा कि जब भारत की क्रिकेट टीम के कप्तान के रूप में कपिल देव गेंदबाजी करते थे या टीम का नेतृत्व करते थे, तो पाकिस्तान की टीम आधा मैच वहीं हार जाती थी। इसी तरह यदि बीमारी की तुलना पाकिस्तान से की जाए और डॉक्टर को कपिल देव के रूप में देखा जाए, तो मरीज डॉक्टर को देखकर ही आधी लड़ाई जीत लेता है।  डॉक्टर पर विश्वास हो तो दवा भी असर करती है और दुआ भी मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि जब मरीज को डॉक्टर पर विश्वास हो जाता है तो बीमारी के खिलाफ उसकी मानसिक शक्ति बढ़ जाती है। इसके बाद दवा भी असर करती है और दुआ भी काम करती है। डॉक्टर को दुआ मिलती है और मरीज को सही दवा मिलने पर वह जल्दी स्वस्थ हो जाता है। इससे अस्पताल की प्रतिष्ठा भी बढ़ती है और डॉक्टर का सम्मान भी। उन्होंने प्रदेश सरकार द्वारा स्वास्थ्य क्षेत्र में उठाए जा रहे कदमों के बारे में कहा कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। सरकार ने आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से गरीब और जरूरतमंद लोगों को बिना भेदभाव पांच लाख रुपये तक की कैशलेस उपचार सुविधा उपलब्ध कराई है, जिससे लाखों लोगों को राहत मिल रही है।  सेवा सही, सस्ती और विश्वसनीय होनी चाहिए मुख्यमंत्री ने कहा कि 2014 तक भारत के अंदर केवल छह एम्स काम कर रहे थे और प्रधानमंत्री मोदी जी की पहल का परिणाम है कि आज देश में 23 एम्स कार्य कर रहे हैं। आयुष्मान भारत के अंतर्गत 60 करोड़ से अधिक लोगों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इसमें उत्तर प्रदेश देश का अग्रणी राज्य है, जहां सर्वाधिक गोल्डन कार्ड बनाए गए हैं। प्रदेश में अब तक 5 करोड़ 60 लाख से अधिक गोल्डन कार्ड बनाए जा चुके हैं। इससे स्वास्थ्य क्षेत्र में एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा भी पैदा हुई है। यह स्वस्थ प्रतिस्पर्धा ऐसी है, जिसमें आज सुपर स्पेशियलिटी सुविधाएं भी बढ़ रही हैं। साथ ही सरकार द्वारा तय उपचार दरों और निजी क्षेत्र की मनमानी दरों के बीच बड़े अंतर को संतुलित करने का भी प्रयास हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा मानना है कि अस्पतालों के लिए स्वास्थ्य सेवा की परिभाषा स्पष्ट होनी चाहिए। सेवा सही होनी चाहिए, सस्ती होनी चाहिए और विश्वसनीय भी होनी चाहिए। किसी भी स्तर पर मरीज के साथ धोखा नहीं होना चाहिए। हर व्यक्ति उस सेवा को वहन कर सके और उस पर भरोसा कर सके। सरकार के साथ निजी क्षेत्र की सहभागिता भी अत्यंत आवश्यक मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के प्रयासों के साथ-साथ निजी क्षेत्र की सहभागिता भी अत्यंत आवश्यक है। निजी अस्पतालों के सहयोग से बड़ी आबादी को बेहतर और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। किसी भी संपन्न देश के लिए यह आवश्यक है कि वहां के प्रत्येक नागरिक को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिले। यह उसका अधिकार भी है और सरकार का दायित्व भी। उन्होंने केडीएसजी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के निर्माण को इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए इसके संस्थापकों को बधाई दी। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह अस्पताल केवल गौतम बुद्ध नगर ही नहीं, बल्कि पूरे एनसीआर क्षेत्र तथा अन्य जनपद के लोगों को उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यूपी में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की अपार संभावनाएं मुख्यमंत्री ने प्रसन्नता जताई कि केडीएसजी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की स्थापना कपिल देव और उद्योगपति सुनील गुप्ता द्वारा की गई है। उन्होंने महाराष्ट्र की प्रतिष्ठित संस्था डीवाई पाटिल ग्रुप के साथ मिलकर इस अस्पताल के संचालन की जिम्मेदारी ली है। डीवाई पाटिल समूह शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में लंबे समय से काम कर रहा है और उसने महाराष्ट्र में उत्कृष्ट कार्य किए हैं। अब उनके अनुभव का लाभ गौतम बुद्ध नगर जनपद और एनसीआर क्षेत्र के लोगों को भी मिलेगा। उत्तर प्रदेश देश की सबसे बड़ी आबादी वाला राज्य है और यहां स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की अपार संभावनाएं हैं। यदि केडीएसजी समूह मेडिकल कॉलेज के क्षेत्र में भी निवेश करेगा, तो इससे नए मेडिकल प्रोफेशनल तैयार होंगे और स्थानीय लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी। 1000 लोगों को मिलेगा रोजगार मुख्यमंत्री ने कहा कि यह 300 बेड का सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल केवल स्वास्थ्य सेवा ही नहीं देगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा। यहां प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कम से कम 1000 लोगों को रोजगार मिलेगा। इसमें डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिक्स, टेक्नीशियन, वार्ड बॉय, सफाई कर्मचारी, सुरक्षा कर्मी और अन्य सहयोगी कर्मचारी शामिल होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश सकारात्मक सोच के साथ विकास के मार्ग … Read more

नीतीश कुमार के राज्यसभा नामांकन से यूपी को क्या फायदा, 2027 के चुनाव में क्या होगा असर?

लखनऊ/बदायूं  बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चा ना केवल प्रदेश, बल्कि पूरे देश में हो रही है. बिहार में तो जेडीयू कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए. पटना में जेडीयू दफ्तर के सामने भी इसको लेकर प्रदर्शन किया गया. नीतीश के इस रुख को लेकर उत्‍तर प्रदेश में पार्टी क्‍या सोच रही है. उसके प्रदेश नेतृत्‍व का इस बारे में क्‍या मानना है, ये भी जानना जरूरी है.  अनूप पटेल का इस बारे में कहना है कि नीतीश कुमार अगर केंद्र की राजनीति में आते हैं तो कहीं ना कहीं इसका फायदा उत्तर प्रदेश सहित कई अन्य राज्यों के कार्यकर्ताओं और पार्टी को मिलेगा. उत्तर प्रदेश में भी जेडीयू की स्थिति मजबूत होगी।  दरअसल, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के कदम के बाद बिहार की राजनीति को लेकर तमाम सवाल उठने लगे, क्योंकि अभी कुछ समय पहले ही नीतीश कुमार एक बार फिर बिहार के मुख्यमंत्री बने हैं.. लेकिन अभी कुछ दिनों से उनके बेटे निशांत कुमार की भी सक्रिय राजनीति में भागीदारी देखी जा रही है. तमाम मंचों पर उनका चेहरा दिखाया जाता है. इसके बाद कहा जा रहा है कि बिहार में इस बार जदयू के दो उप मुख्यमंत्री होंगे, जिसमें से निशांत कुमार एक हो सकते हैं. वहीं अगर मुख्यमंत्री की बात की जाए तो वह बीजेपी का ही कोई चेहरा होगा।  पूरे मामले पर उत्तर प्रदेश जनता दल यूके प्रदेश अध्यक्ष अनूप पटेल ने बदायूं में कहा कि हम लोग के सीनियर नेता का निर्णय देशहित में और पार्टी हित में हमेशा सही होता है. जैसा उनका निर्णय होगा हम सभी लोग उस निर्णय में उनके साथ हैं. उन्होंने कभी भी कोई ऐसा निर्णय नहीं लिया, जो देश हित में ना हो या पार्टी हिट में ना हो. उन्होंने कहा कि जो फार्मूला पहले था, पार्टी उसी लाइन पर काम करेगी. इस बार दो डिप्टी सीएम जदयू के होंगे और मुख्यमंत्री का चेहरा बीजेपी का होगा। उन्होंने कहा कि हम लोगों की बहुत समय से मांग थी कि निशांत को सक्रिय राजनीति में लाया जाए. हमें उम्मीद है कि अब वह सक्रिय राजनीति में आएंगे. बिहार में समर्थकों के प्रदर्शन पर उन्होंने कहा कि 2025 के चुनाव में हम लोगों ने घर-घर जाकर वोट मांगे और प्रचंड बहुमत से हमारी सरकार बनी तो स्वाभाविक बात है कि पब्लिक को बुरा तो लगेगा ही. कार्यकर्ताओं में पीड़ा है और वह पीड़ा रहेगी. नीतीश कुमार के केंद्रीय राजनीति में आने से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश तथा अन्य कई और प्रदेशों की राजनीति में हमारी पार्टी को फायदा मिलेगा।

शिवमय स्टेशनों से होकर बनारस रोपवे में 15 मिनट में करें काशी विश्वनाथ दर्शन

बनारस  काशी की गलियों का जाम अब बीते दिनों की बात होने वाली है. बाबा विश्वनाथ के भक्तों के लिए अब ‘शिवलोक’ तक का सफर बादलों के बीच से होकर गुजरेगा. वाराणसी में देश के पहले पब्लिक रोपवे का सपना अब हकीकत के बेहद करीब है. 807 करोड़ की लागत से तैयार हो रहा यह प्रोजेक्ट न केवल ट्रैफिक की तस्वीर बदलेगा, बल्कि सैलानियों को 50 मीटर की ऊंचाई से पुरातन काशी का वो अद्भुत नजारा दिखाएगा, जो आज से पहले कभी नहीं देखा गया. वाराणसी के कैंट रेलवे स्टेशन से बाबा विश्वनाथ के करीब गोदौलिया तक का सफर अब जाम की गलियों में नहीं, बल्कि बादलों के बीच होगा. देश के पहले पब्लिक रोपवे का निर्माण अपने अंतिम चरण में है और इसी साल जून तक सैलानी इस अनूठे सफर का आनंद ले सकेंगे. आइए जानते हैं, जून में शुरू होने वाले इस सफर की क्या है पूरी तैयारी. मार्च तक पूरा होगा सिविल वर्क, जून में उड़ान नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड के अनुसार, इस महात्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का 92.5% काम सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है. शेष 7.5 प्रतिशत काम को 31 मार्च तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके बाद रथयात्रा से गोदौलिया के बीच अलग-अलग चरणों में फाइनल ट्रायल रन शुरू किया जाएगा. अधिकारियों का कहना है कि जून महीने तक निर्माण और ट्रायल की सभी प्रक्रियाएं पूरी कर इसे आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा. 5 आधुनिक स्टेशनों पर दिखेगी ‘शिवमय’ काशी वाराणसी में कैंट से गोदौलिया के बीच प्रस्तावित रोपवे ट्रांसपोर्ट के लिए कुल 5 स्टेशन बनाए जा रहें है. इसमें कैंट,विद्यापीठ और रथयात्रा स्टेशन के बीच बीते दिनों रोप वे के तारों पर गंडोला का फुल स्पीड ट्रायल रन भी पूरा हो गया.इसके साथ ही स्टेशन निर्माण का काम भी लगभग कम्प्लीट है. स्टेशन कराएगा मंदिर जैसा अहसास इन सभी रोपवे स्टेशन पर काशी के कला और संस्कृति की झलक दिख रही है. स्टेशन पर ही भगवान शिव के साथ,डमरू,त्रिशुल और घाट का स्ट्रक्चर इसकी खूबसूरती को बढ़ा रहा है. अलग-अलग स्टेशन को अलग-अलग तरीके से सजाया गया है. इन रोपवे स्टेशन के प्रवेश द्वार को कुछ इस तरह डिजाइन किया गया है जो यहां आने वाले पर्यटकों को मंदिर में प्रवेश जैसी अनुभूति कराएगा. रोपवे के अलग अलग स्टेशन पर पर्यटकों के लिए कई तरह की सुविधाएं भी होंगी. यहां वेटिंग रूम के साथ लॉकर और दूसरी व्यवस्थाएं भी रहेगी. काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचना होगा आसान बता दें कि वाराणसी में कैंट से गोदौलिया से बीच 807 करोड़ की लागत से रोपवे ट्रांसपोर्ट बनाया जा रहा है. इसके निर्माण के बाद पर्यटक कैंट स्टेशन से महज 15 मिनट में काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंच सकेंगे. इस यात्रा के दौरान पर्यटक जमीन से करी 50 मीटर की ऊंचाई से पुरातन शहर काशी को निहार पाएंगे. फिलहाल 4 किलोमीटर के इस दूरी को पूरा करने में 40 से 45 मिनट का वक्त लगता है.

फिल्म सिटी से फिनटेक सिटी तक, क्रिएटिव और डिजिटल इकोनॉमी का संगम

लखनऊ  यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) द्वारा विकसित और प्रस्तावित औद्योगिक सिटीज का स्वरूप अब पारंपरिक औद्योगिक प्लॉटिंग से आगे बढ़कर एक संगठित सेक्टर आधारित आर्थिक ढांचे के रूप में सामने आ रहा है। योगी सरकार में मेडिकल डिवाइस पार्क, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर, टॉय सिटी और अपैरल पार्क जैसे स्थापित प्रोजेक्ट्स के साथ फिल्म सिटी, फिनटेक सिटी और विदेशी साझेदारी पर आधारित थीम सिटीज मिलकर यमुना एक्सप्रेस-वे को बहु क्षेत्रीय औद्योगिक कॉरिडोर में बदलने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। सेक्टर-28 में 350 एकड़ में विकसित मेडिकल डिवाइस पार्क और सेक्टर-24 में 200 एकड़ का इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर उच्च मूल्य उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्थापित किए गए हैं। इसके साथ ही सेक्टर-33 में 100 एकड़ की टॉय सिटी और सेक्टर-29 में 175 एकड़ का अपैरल पार्क श्रम आधारित उद्योगों को संगठित ढांचा उपलब्ध करा रहे हैं। इन परियोजनाओं को इस तरह डिजाइन किया गया है कि कच्चे माल से लेकर तैयार उत्पाद तक की सप्लाई चेन एक ही कॉरिडोर में विकसित हो सके। सेक्टर-21 में लगभग 1000 एकड़ में प्रस्तावित फिल्म सिटी को केवल मनोरंजन परियोजना के रूप में नहीं देखा जा रहा है। इसे मीडिया, कंटेंट प्रोडक्शन, पोस्ट प्रोडक्शन और डिजिटल सेवाओं के केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। इसके समानांतर सेक्टर-11 में 500 एकड़ में प्रस्तावित फिनटेक सिटी मैन्युफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्र को डिजिटल वित्तीय सेवाओं से जोड़ने का प्रयास करेगी। इससे औद्योगिक इकाइयों को भुगतान, निवेश और वैश्विक लेनदेन के लिए एकीकृत प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने की रणनीति सामने आ रही है। अंतरराष्ट्रीय सहयोग के दृष्टिकोण से सेक्टर-5ए में जापानी सिटी, सेक्टर-4 में कोरियन सिटी और सेक्टर-7 में सिंगापुर सिटी के लिए 500-500 एकड़ भूमि चिह्नित की गई है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य केवल विदेशी निवेश आकर्षित करना नहीं है, बल्कि संबंधित देशों की तकनीक, प्रबंधन प्रणाली और औद्योगिक कार्य संस्कृति को स्थानीय ढांचे में समाहित करना भी है। औद्योगिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन सिटीज में एंकर कंपनियां स्थापित होती हैं तो इससे क्षेत्र में सहायक उद्योगों और सेवा क्षेत्र को भी गति मिलेगी। टप्पल क्षेत्र में 200 एकड़ का प्रस्तावित लॉजिस्टिक्स पार्क इस पूरे औद्योगिक ढांचे की आपूर्ति और वितरण प्रणाली को मजबूती देगा। इसके अतिरिक्त सेक्टर-29 में 200 एकड़ का एमएसएमई पार्क छोटे और मध्यम उद्यमों को बड़े उद्योगों से जोड़ने का माध्यम बनेगा। इससे स्थानीय उद्यमियों को उत्पादन श्रृंखला का हिस्सा बनने का अवसर मिलेगा और रोजगार के अवसरों में वृद्धि की संभावना है। यमुना एक्सप्रेस-वे के आसपास विकसित हो रही इन औद्योगिक सिटीज का प्रभाव केवल निवेश तक सीमित नहीं रहेगा। भूमि उपयोग, आवासीय टाउनशिप, स्किल डेवलपमेंट संस्थान और सहायक सेवाओं के विस्तार से पश्चिमी उत्तर प्रदेश का सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य बदलने की संभावना जताई जा रही है।

गोरखनाथ मंदिर में बुधवार को आयोजित होली मिलन समारोह में गीतों का आनंद उठाया मुख्यमंत्री ने, खेली फूलों की होली

गोरखपुर रंगोत्सव के पावन अवसर पर बुधवार दोपहर बाद गोरखनाथ मंदिर में गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सीएम योगी ने होली मिलन कार्यक्रम में उमड़े लोगों पर फूलों की वर्षा की और सभी को होली की हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं दीं। समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने वाली ताकतें ही सदैव विजयी होती हैं।  गोरखनाथ मंदिर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार में आयोजित होली मिलन समारोह में सीएम योगी ने कहा कि समाज में हमेशा दो प्रकार की ताकतें होती हैं। एक अच्छी सोच वाली ताकतें और दूसरी नकारात्मक सोच वाली ताकतें। नकारात्मक सोच वाली ताकतें हमेशा विध्वंसात्मक गतिविधियों को प्रश्रय देती हैं, जबकि सकारात्मक सोच वाली ताकतें अच्छी कार्ययोजना के साथ आगे बढ़ती हैं और उनका परिणाम हमेशा सुखद होता है। शांति, आनंद, उल्लास और उमंग के साथ होलिकोत्सव का आयोजन भी सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का सुफल है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि देश और दुनिया में रहने वाले सनातन धर्मावलंबियों ने उमंग और उत्साह के साथ समरसता के महापर्व होली का आयोजन कर अपनी विरासत पर गर्व की अनुभूति की। सनातन धर्म की श्रेष्ठता पर वही लोग प्रश्न करते हैं, जिन्हें होली जैसे पर्व का अहसास नहीं होता है। होली जैसे पर्व में न भेदभाव होता है और न ही छुआछूत होती है। सनातन धर्म के पर्व व त्योहार किसी न किसी महत्वपूर्ण परिवर्तनकारी घटना से जुड़े हैं। इनके माध्यम से हमारी ऋषि परंपरा ने समाज को नई दिशा, धर्म और कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी है। सनातन धर्म के पर्व व त्योहार एकांकी नहीं होते बल्कि उनमें सामूहिकता का भाव होता है। समाज का हर तबका इसमें सहभागी बनता है।    सही दिशा में सोचता है भारत मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के दौर में दुनिया में अव्यवस्था है, पर भारत में शांति और उल्लास के साथ पर्व मनाए जा रहे हैं। इसका कारण यह है कि भारत की सोच सकारात्मक रही है। भारत सही दिशा में सोचता है। भारत ने कभी किसी को बुरा नहीं कहा, बुरा नहीं किया। और, जब बुरा किया नहीं, कहा नहीं तो बुरा सहा भी नहीं है।   राष्ट्र प्रथम की भावना से हो नागरिक दायित्वों का निर्वहन सीएम योगी ने कहा देश की प्रगति के लिए हम सभी को अपने अपने क्षेत्र में राष्ट्र प्रथम की भावना से नागरिक दायित्वों का निर्वहन करना होगा। भक्ति को राष्ट्रभक्ति से जोड़ना होगा। भगवान श्रीराम, श्रीकृष्ण और नृसिंह हर कालखंड में होंगे, जरूरत हनुमान, अर्जुन और प्रह्लाद जैसी भक्ति भावना जगाने की है।  सीएम योगी ने उठाया होली गीतों का आनंद, खेली फूलों की होली होली मिलन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सुपरिचित लोकगायक राकेश श्रीवास्तव व उनकी टीम की तरफ से प्रस्तुत होली गीतों का आनंद उठाया। सांसद रविकिशन ने भी होली गीत सुनाया। होली गीत सुनने के बाद मुख्यमंत्री ने उपस्थित लोगों पर पुष्पवर्षा कर फूलों की होली खेली। इस अवसर पर कई जनप्रतिनिधि, साधु-संत और बड़ी संख्या में नागरिकों की सहभागिता रही।

योगी सरकार ने प्रारंभिक शिक्षा को दी नई दिशा, खेल-खेल में सीख रहे हैं बच्चे

लखनऊ योगी सरकार प्रदेश में शिक्षा की मजबूत नींव आंगनबाड़ी केंद्रों से रख रही है। इस वित्तीय वर्ष 2025-26 में 20,000 से अधिक सक्षम आंगनबाड़ी केंद्रों पर प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ईसीसीई) किट का वितरण किया गया। प्रदेश सरकार का मानना है कि तीन से छह वर्ष की आयु बच्चों के बौद्धिक विकास की सबसे संवेदनशील अवस्था होती है। ऐसे में यदि इसी चरण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सामग्री और वैज्ञानिक पद्धति उपलब्ध करा दी जाए, तो आगे की शिक्षा यात्रा सशक्त बनती है।  प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र को 39000 रुपये दे रही योगी सरकार  प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ईसीसीई) किट के लिए प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र को 39000 रुपये योगी सरकार दे रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 में भी 03 से 06 वर्ष तक के बच्चों के लिए ईसीसीई को महत्व देते हुए स्कूली शिक्षा के बुनियादी स्तर में इसे सम्मिलित किया गया है। ईसीसीई के अन्तर्गत संसाधनों के रूप में प्री–स्कूल किट तथा ईसीसीई मैनुअल (पहल), वार्षिक गतिविधि कैलेंडर, बाल गतिविधि पुस्तिका उपलब्ध कराई जाती है। इसके अतिरिक्त नेशनल बुक ट्रस्ट (एनबीटी) से प्रकाशित 06 कहानियों की किताबों के सेट के साथ ही टीचिंग लर्निंग मैटेरियल (टीएलएम) पर आधारित पुस्तिकाएं भी उपलब्ध कराई जा रहीं हैं।  खेल-खेल में सीख रहे हैं बच्चे ईसीसीई किटों के माध्यम से बच्चों को खेल-खेल में सीखने का अवसर मिलता है जिससे उनकी बौद्धिक, शारीरिक और मानसिक क्षमताओं का विकास होता है। ईसीसीई किट के माध्यम से बच्चों को गतिविधि आधारित शिक्षा दी जाती है। रंगीन चार्ट, शैक्षिक खिलौने, पहेलियां और संज्ञानात्मक विकास से जुड़ी सामग्री बच्चों को सहज तरीके से सीखने का अवसर देती है। सरकार का जोर इस बात पर है कि शिक्षा बोझ न बने, बल्कि आनंद के साथ हो। खेल-खेल में अक्षर ज्ञान, संख्या पहचान और सामाजिक व्यवहार की समझ विकसित होगी। इससे बच्चों की जिज्ञासा, कल्पनाशक्ति और अभिव्यक्ति क्षमता को नया आयाम मिलेगा। सक्षम बन रहे आंगनबाड़ी केंद्र प्रदेश सरकार आंगनबाड़ी केंद्रों को केवल पोषण वितरण तक सीमित नहीं रखना चाहती। इन्हें चरणबद्ध तरीके से आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है। अत्याधुनिक उपकरणों का उपयोग, बेहतर फर्नीचर, सुरक्षित वातावरण और प्रशिक्षण प्राप्त कार्यकर्त्रियों की उपलब्धता से इन केंद्रों का स्वरूप बदल रहा है। यह बदलाव दर्शाता है कि सरकार प्रारंभिक शिक्षा को मुख्यधारा की नीति के केंद्र में ला रही है। आंगनबाड़ी अब गांव और मोहल्लों में छोटे-छोटे लर्निंग हब के रूप में विकसित हो रहे हैं। सर्वांगीण विकास के लिए ठोस कदम योगी सरकार बच्चों के बौद्धिक, शारीरिक और मानसिक विकास को समान महत्व दे रही है। पोषण, स्वास्थ्य जांच और शिक्षा को एकीकृत कर समग्र विकास का मॉडल तैयार किया गया है। प्रारंभिक अवस्था में सही मार्गदर्शन मिलने से बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने की क्षमता विकसित होती है। सरकार की यह पहल दर्शाती है कि आने वाली पीढ़ी को सक्षम और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए वह दीर्घकालिक और ठोस कदम उठा रही है।

तत्परता और संवेदनशीलता से हो जनता की समस्याओं का समाधान: सीएम योगी

जन समस्याओं के निस्तारण में शिथिलता अक्षम्य: मुख्यमंत्री जनता दर्शन में सीएम योगी आदित्यनाथ ने सुनीं 150 लोगों की समस्याएं तत्परता और संवेदनशीलता से हो जनता की समस्याओं का समाधान: सीएम योगी गोरखपुर,  गोरखपुर में जनता के साथ बुधवार दिनभर होली की खुशियां साझा करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में जनसेवा के नियमित प्रकल्प ‘जनता दर्शन’ में विभिन्न जिलों से आए लोगों से मुलाकात की। उनकी समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को निर्देशित किया कि जन समस्याओं का समाधान तत्परता और संवेदनशील तरीके से किया जाए। इसमें किसी भी तरह की शिथिलता या लापरवाही अक्षम्य होगी। हर समस्या का निस्तारण गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी और संतुष्टिपरक होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि जनता की हर समस्या का समाधान सरकार की प्राथमिकता है। गोरखनाथ मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के सामने आयोजित जनता दर्शन में कुर्सियों पर बैठे लोगों तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद चलकर पहुंचे और एक-एक कर सबकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने करीब 150 लोगों से मुलाकात की और सबको आश्वस्त किया कि हर व्यक्ति को न्याय दिलाया जाएगा। सबके प्रार्थना पत्रों को संबंधित अधिकारियों को संदर्भित करते हुए त्वरित निस्तारण का निर्देश देने के साथ मुख्यमंत्री ने लोगों को भरोसा दिलाया कि सरकार हर पीड़ित की समस्या का समाधान कराने के लिए दृढ़ संकल्पित है।  सीएम ने अफसरों से कहा कि किसी के साथ भी अन्याय नहीं होना चाहिए। हर पीड़ित के साथ संवेदनशील व्यवहार अपनाते हुए उसकी सहायता की जानी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि किसी की जमीन पर अवैध कब्जा करने वाले और कमजोरों को उजाड़ने वाले किसी भी सूरत में बख्शे न जाएं। उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।  मुख्यमंत्री के समक्ष जनता दर्शन में कई लोग इलाज के लिए आर्थिक सहायता की गुहार लेकर पहुंचे थे। सीएम योगी ने उन्हें आश्वस्त किया कि सरकार इलाज के लिए भरपूर मदद करेगी। उनके प्रार्थना पत्रों को अधिकारियों को हस्तगत करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि इलाज से जुड़ी इस्टीमेट की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूर्ण करा कर शासन में उपलब्ध कराया जाए।

गोरखनाथ मंदिर में मुख्यमंत्री ने लिया फाग का आनंद, सीएम संग खेली गई रंगों व फूलों की होली

होलिका भस्म की पूजा कर सीएम योगी ने मनाई होली गोरक्षपीठाधीश्वर व संतों ने एक दूसरे को लगाया भस्म का तिलक गोरखनाथ मंदिर में मुख्यमंत्री ने लिया फाग का आनंद, सीएम संग खेली गई रंगों व फूलों की होली   गोरखपुर होली के पावन महापर्व पर बुधवार सुबह गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर परिसर में होलिका भस्म की पूजा कर होली मनाने का शुभारंभ किया। उन्होंने गोरखनाथ मंदिर में फाग गीतों का आनंद लिया और गोवंश को भस्म व गुलाल लगाया और गुड़ खिलाकर गोसेवा की। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने गोरक्षपीठाधीश्वर के संग जमकर रंगों और फूलों की होली खेली।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के होलिकोत्सव की शुरुआत बुधवार सुबह गोरखनाथ मंदिर परिसर में बतौर गोरक्षपीठाधीश्वर होलिका भस्म की पूजा से हुई। मंदिर परिसर के मेला ग्राउंड में जलाई गई होलिका के पास जाकर योगी आदित्यनाथ ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच होलिका भस्म (सम्मत की राख) की पूजा की और आरती उतारी, भस्म का तिलक लगाया। इस अनुष्ठान के बाद मंदिर के प्रधान पुजारी कमलनाथ समेत अन्य साधु-संतों व श्रद्धालुओं ने इसी भस्म से गोरक्षपीठाधीश्वर का तिलक कर आशीर्वाद लिया। गोरक्षपीठाधीश्वर ने भी उन्हें तिलक लगाकर होली की मंगलकामना की। होलिकादहन स्थल से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, गुरु गोरखनाथ जी के मंदिर पहुंचे और श्रीनाथ जी को होलिका भस्म अर्पित की। इसके बाद मंदिर के द्वार पर फाग गीतों का आयोजन हुआ। सीएम योगी ने भी कुछ देर वहां रुककर फाग का आनंद उठाया और सबको होली की बधाई व शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री जब फाग का आनंद ले रहे थे तब वहां मौजूद श्रद्धालुओं ने उनके ऊपर रंग, अबीर-गुलाल और फूलों की वर्षा कर होली खेली।  गोवंश को लगाया तिलक, गुड़ खिलाकर की गोसेवा होली के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंदिर की गोशाला पहुंचे और गोवंश को भस्म व गुलाल लगाकर उनके लिए भी मंगलकामना की। उन्होंने गोवंश को गुड़ खिलाकर उनकी सेवा की। गोशाला में सीएम योगी की आवाज सुनकर गोवंश उनके पास दौड़ते हुए चले आए। मुख्यमंत्री ने माथा व गर्दन सहलाकर सभी गोवंश को खूब दुलार भी किया।

यात्रियों के लिए खुशखबरी: Indian Railways की नई 16 कोच वंदे भारत, होली के बाद रायबरेली से होगी रवाना

रायबरेली आधुनिक रेलडिब्बा कारखाना (आरेडिका) में बन रही वंदे भारत ट्रेन बनकर तैयार है, अब इसका ट्रायल किया जा रहा है। इसका पहला गति परीक्षण सफल रहा है। महाप्रबंधक ने स्वयं इंजन में बैठकर परीक्षण को परखा। आरेडिका अधिकारियों के अनुसार यह प्रक्रिया पूरी होने में अभी दो सप्ताह का समय लग सकता है। होली के पहले वंदे भारत के आरेडिका से निकलने की उम्मीद है। वंदे भारत ट्रेन के 16 डिब्बों की रैक को बनाने का काम आरेडिका को मिला था। पहले दौर में आरेडिका की अधिकारियों की टीम जानकारी जुटाने के लिए आइसीएफ चेन्नई गई थी। वहां से टीम के आने के बाद निर्माण का काम शुरू हो सका। अब वंदे भारत ट्रेन बनकर तैयार है। उसके ट्रायल की प्रक्रिया चल रही है। एक लघु ट्रायल रन में ट्रैक्शन, गति व ओवरहेड इक्विपमेंट से लिए गए करंट जैसे प्रमुख परीक्षण मानकों का अवलोकन किया गया। ट्रायल शेड से प्रारंभिक संचालन के दौरान रैक की गति को 10 किलोमीटर प्रति घंटा की निर्धारित गति पर परीक्षण किया गया। ब्रेक प्रतिक्रिया, पैसेंजर एनाउंसमेंट एवं पब्लिक इंफार्मेशन सिस्टम की कार्यप्रणाली व ट्रैक्शन के दौरान प्रणाली के व्यवहार का भी परीक्षण किया गया। महाप्रबंधक प्रशांत कुमार मिश्र ने कहा कि यह उपलब्धि एमसीएफ व उसके उद्योग सहयोगियों के बीच सुदृढ़ समन्वय व सहयोग का प्रतीक है जो वंदे भारत परियोजना को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। 12 फरवरी को आयोजित ट्रायल पूर्व निरीक्षण के दौरान मेसर्स सीमेंस के जर्मन अभियंता क्रिस्टोफ गोएट्ज, सैंड्रा स्पोंसेट व सेबास्टियन शोएसर, पदमाकर डीके, सैत करकृ ने तकनीकी कार्रवाई में सक्रिय सहभागिता की थी। उन्हाेंने बताया कि यह ट्रायल एमसीएफ की अत्याधुनिक, उच्च गति वाली ट्रेनसेट के निर्माण के लिए उसकी प्रतिबद्धता, नवाचार क्षमता व उत्कृष्टता के प्रति समर्पण को स्थापित करता है।

कानपुर का चौंकाने वाला मामला: पत्नी ने कहा – “मेरे साथ फ्रॉड हुआ, पति नपुंसक”

कानपुर .कानपुर के किशोर नगर की रहने वाली एक युवती ने अपनी शादीशुदा जिंदगी को लेकर गंभीर आरोप लगाते हुए पति और ससुराल पक्ष के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. युवती का कहना है कि उसकी शादी 25 अप्रैल 2025 को हमीरपुर निवासी युवक से पूरे रीति-रिवाज और धूमधाम के साथ हुई थी. उसके पिता ने होटल, जेवर, कैटरिंग और अन्य इंतजाम मिलाकर करीब 38 लाख रुपये खर्च किए थे. परिवार को उम्मीद थी कि बेटी की नई जिंदगी खुशहाल होगी, लेकिन शादी के बाद हालात बिल्कुल उलट निकले. पत्नी ने कहा, ‘मैंने पति से सुहागरात के लिए कई बार कहा लेकिन वो हमेशा टालता रहा. बाद में मुझे पता चला कि वो नपुंसक है. मेरे साथ फ्रॉड हुआ है.’  पति ने दूरी बनाए रखी पीड़िता के मुताबिक, 26 अप्रैल को वह विदा होकर ससुराल पहुंची. शादी के बाद के शुरुआती चार दिनों में ही उसे पति के व्यवहार पर संदेह होने लगा. उसका आरोप है कि पति ने उससे दूरी बनाए रखी और सुहागरात तक नहीं मनाई. उसने कई बार इस बारे में बात करने की कोशिश की, लेकिन हर बार पति ने टालमटोल कर दी. कुछ दिनों बाद वह मायके आ गई. फिर पति उसे नोएडा ले गया, जहां उसे अपने बड़े चाचा के फ्लैट में रखा गया. युवती का कहना है कि वहां करीब एक महीने तक साथ रहने के बावजूद पति ने उससे शारीरिक संबंध नहीं बनाए. इसी दौरान उसे शक हुआ कि पति शारीरिक रूप से सक्षम नहीं है. धमकियां देने का आरोप जब उसने इस बारे में ससुर और उनके बड़े भाई से बात की तो, उसके मुताबिक, पहले उसे समझाने और इलाज कराने का भरोसा दिया गया. आरोप है कि उससे कहा गया कि वह बेटे के साथ पत्नी की तरह रहे, इलाज करवा दिया जाएगा और पूरा खर्च उठाया जाएगा. लेकिन जब उसने अपनी आपत्ति जताई तो उसे कथित तौर पर धमकियां दी जाने लगीं. पांच लाख लाने को कहा गया पीड़िता का यह भी आरोप है कि उससे पांच लाख रुपये और लाने को कहा गया ताकि इलाज कराया जा सके. मना करने पर उसे बदनाम करने और परिवार की इज्जत खराब करने की धमकी दी गई. युवती का कहना है कि ससुराल पक्ष ने न सिर्फ बेटे की सच्चाई छिपाई, बल्कि शादी में खर्च हुआ पैसा भी व्यर्थ कर दिया और उसकी जिंदगी बर्बाद कर दी. मामला दर्ज हुआ आखिरकार परेशान होकर युवती अपने पिता के घर लौट आई और कानपुर के रावतपुर थाने में पति, ससुर और ताऊ के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई. पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. थाना प्रभारी कमलेश राय के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है और एक टीम हमीरपुर भेजी जाएगी. वहीं, लड़की के परिवार का कहना है कि वे फिलहाल ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहते, लेकिन उन्हें न्याय की उम्मीद है. इस पूरे मामले ने एक बार फिर शादी से पहले जरूरी जानकारियां छिपाने और पारिवारिक दबाव के मुद्दे पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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