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आईएफएस कैडर का प्रशासनिक ढांचा चरमराया, पद खाली फिर भी नहीं हो पा रहे हैं प्रमोट

भोपाल. किसी भी सेवा का प्रशासनिक ढांचा पिरामिड आकार का होना बेहतर माना गया है. मप्र में आईएफएस कैडर का प्रशासनिक ढांचा चरमराया गया है. चिंताजनक पहलू यह है कि अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक और मुख्य वन संरक्षक के पद रिक्त पड़े हैं पर सेवा आर्हता नहीं होने से एपीसीसीएफ और सीसीएफ के पदों पर प्रमोशन तक नहीं हो पा रहे हैं. स्थिति ऐसी बन गई है कि कैडर में सीसीएफ के 59 पद स्वीकृत है पर वर्तमान में आधा दर्जन के लगभग सीसीएफ ही कार्यरत है. सीसीएफ स्तर के आईएफएस नहीं होने की वजह से सर्किल में सीएफ की पोस्टिंग करना पड़ रही है. 2002 में कैडर में पीसीसीएफ का एक, प्लस दो और एपीसीसीएफ 4 पद कैडर में और इतने ही पद एक्स कैडर में थे. 2008 में हुई कैडर रिव्यू में एपीसीसीएफ के 10 पद कैडर में और एक्स कैडर में भी 10 पद स्वीकृत हुए. 2015 में हुए कैडर रिव्यू में एपीसीसीएफ के 21 पद स्वीकृत किए गए और उसके विरुद्ध 42 पद काम करने लगे. इसके बाद एपीसीसीएफ के पदों की संख्या बढ़कर 58 कर दी गई है. वर्तमान में आज तक की स्थिति यह है कि एपीसीसीएफ के 10 पद रिक्त है. इसी प्रकार कैडर में सीसीएफ के 59 पद है, जिसमें से केवल करीब आधा दर्जन ही सीसीएफ ही कार्यरत है. यानी नौबत यह बन गई है कि अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक और मुख्य वन संरक्षक के पद पर प्रमोशन पाने के लिए कोई भी आईएफएस सेवा आर्हता पूरा नहीं कर पा रहा है. वन विभाग के जिम्मेदारों द्वारा प्रशासनिक ढांचे को सुधारने की दिशा में कोई पहल भी नहीं की जा रही है. कैडर रिव्यू के प्रस्ताव को केंद्रीय कार्मिक विभाग ने संशोधन के लिए एमपी को लौटा दिया है पर अफसरों को इसकी एक्सरसाइज करने की फुर्सत नहीं है. इसकी मुख्य वजह भी बताई जा रही है कि आईएफएस अफसरों को पदोन्नति का लाभ नहीं मिल पाएगा. केडर मैनेजमेंट सुधारने के लिए पूर्व वन बल प्रमुख का सुझाव है कि एपीसीसीएफ के कुछ पद तत्काल समाप्त करने होंगे. यानि एपीसीसीएफ उत्पादन, एपीसीसीएफ निगरानी एवं मूल्यांकन, एपीसीसीएफ एचआरडी जैसे पदों का औचित्य नहीं है. उन्होंने यह भी सुझाव दिया है कि सर्किल में जिस तरीके से वन संरक्षक स्तर के आईएफएस अधिकारियों की पदस्थापना करने की परंपरा शुरू हो गई है. ठीक उसी प्रकार अनुसंधान एवं विस्तार ( सामाजिक वानिकी ) के मुख्य वन संरक्षक के पद समाप्त कर इन पदों पर वन संरक्षक स्तर के अधिकारियों की पदस्थापना की जानी चाहिए. 18 वनमंडल से हट जाएंगे सीएफ प्रस्ताव से सरकार सहमत हुई, तो एपीसीसीएफ और सीसीएफ के पद कम हो जाएंगे. सीएफ एवं डीएफओ के पद बढ़ जाएंगे. यानी फील्ड में ज्यादा अफसर पदस्थ होंगे. हालांकि इससे उन 18 वनमंडलों में सीएफ की जगह डीएफओ को पदस्थ करना होगा. इन वनमंडलों में भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, सीहोर, छतरपुर, दमोह, देवास, गुना, खंडवा, नरसिंहपुर, सतना, शिवपुरी, विदिशा, होशंगाबाद, डिंडोरी, उमरिया और कटनी शामिल हैं. कैडर में थी खामिया कैडर में खामियां है. इसलिए विभाग ने केंद्रीय कार्मिक विभाग में लंबित कैडर प्रस्ताव में एपीसीसीएफ और सीसीएफ के पद कम किए हैं. दरअसल, 1978, 1979 एवं 1980 बैच में 90 आईएफएस रहे. इन अधिकारियों को सेवानिवृत्ति से पहले पदोन्नति दिए जाने के कारण ऐसे हालात बने हैं. उन अधिकारियों को पदोन्नत करने के लिए केंद्र सरकार से अस्थाई मंजूरी ली गई थी. ऐसे 13 पद थे, जो समय पूरा होने के बाद भी समाप्त नहीं किए गए. अब ऐसे हालात बन गए हैं कि 24 साल की सेवा पूरी करने वाले सीसीएफ नहीं मिले रहें हैं जो कि एपीसीसीएफ बन सके. कमोबेश यही स्थिति मुख्य वन संरक्षक पद के लिए प्रमोट होने वाले सीएफ की है. वर्ष 2024 से पहले कोई भी वन संरक्षक मुख्य वन संरक्षक के पद पर प्रमोट होने के लिए 18 वर्ष की सेवा पूरा नहीं कर पा रहा है. ऐसी स्थिति क्यों बनी आईएफएस कैडर का प्रशासनिक ढांचा चरमराने की मुख्य वजह यह है कि भारत सरकार ने अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों की परीक्षा एक साथ कराना है. एक साथ परीक्षा होने की वजह से अंकगणित, आर्ट्स और सोशल साइंस के परीक्षार्थी मेरिट में अब्बल आ जाते हैं. बॉटनी सब्जेक्ट के परीक्षार्थी पीछे रह जाते हैं. इसके कारण आईएफएस इंडक्शन में बामुश्किल पांच से सात अभ्यार्थी आते हैं. कैडर मैनेजमेंट को लेकर वर्ष 2010 से लगातार भारत सरकार को पत्र लिखते रहे हैं कि मप्र को आई एफ एस इंडक्शन में कम से कम 10 से 12 अभ्यर्थी प्रति वर्ष दिया जाए पर कोई सुनवाई नहीं हुई. आईएफएस कैडर में इंडक्शन कम होने की वजह से ही आज प्रशासनिक ढांचा लगभग ढह सा हो गया है. केंद्रीय कार्मिक विभाग में अटका प्रस्ताव पद वर्तमान प्रस्तावित हॉफ (वन बल प्रमुख ) 01 — 0 एपीसीसीएफ 25 – 18 सीसीएफ 59 34 सीएफ 40 30 डीएफओ 59 90

छिंदवाड़ा- भूमाफिया के इशारे पर राजस्व विभाग कृषक को कर रहा परेशान

छिंदवाड़ा. सूरज माहोरे पिता धनसिंह माहोरे वार्ड नं 18 ने जिला कलेक्टर और जिला पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत देकर बताया कि वह एक किसान है स्वयं की पुश्तैनी जमीन पर कृषि कार्य कर परिवार का भरण पोषण कर रहें हैं। चूँकि मेरी कृषि भूमि चांद रोड़ से सटी हुई है, जिस पर भूमाफियाओं की पहले से नजर है । इस सम्बंध में मैंने अतुल माहेश्वरी एवं हेमंत रघुवंशी के कूट रचित दस्तावेजों के खिलाफ सिविल न्यायालय में प्रकरण दर्ज कराया हूँ जिसका क्रमांक RCSA 164 । 2023 है और RCSA 202 । 2023 है । जिसकी पूरी जानकारी राजस्व विभाग को है। न्यायालय में प्रकरण विचाराधीन होने के बावजूद राजस्व अधिकारी और भूमाफिया मुझे और मेरे परिवार को अनावश्यक रूप से प्रताड़ित कर रहें हैं । भूमाफिया राजस्व विभाग से साठ गांठ कर जमीन का नाप जोक कर रहें हैं। विरोध करने पर चन्दपाल रघुवंशी जान से खत्म कर देने और देख लेने की धमकी दे रहें हैं। इनकी धमकी से मेरा पूरा परिवार दहशत में जीवन जीने को मजबूर है। जिसकी विधिवत शिकायत मेरे द्वारा दिनांक 08। 07 । 2023 को प्रशासन से की पर आज तक कोई कार्यवाही नही हुई है ।ऐसी ही शिकायत मेरे पुत्र बबलू महोरे ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में भी की है जिसका नम्बर 23134580 है जिसका निराकरण राजस्व विभाग जानबूझकर नही कर रहा है!

सर्वे कार्य में लापरवाही बरतने पर पटवारी श्री खाण्डवेकर निलंबित

बुरहानपुर, कलेक्टर एवं ज़िला दंडाधिकारी बुरहानपुर सुश्री भव्या मित्तल के निर्देशानुसार वर्तमान खकनार तहसील के पहनं 38 एवं 41 के पटवारी श्री मिलिन्द खाण्डवेकर को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में पटवारी श्री खाण्डवेकर का मुख्यालय कार्यालय तहसीलदार (नगर) बुरहानपुर रहेगा तथा उन्हें जीवन निर्वाह की पात्रता होगी।निलंबन की यह कार्यवाही शासकीय कार्य में अनियमितता एवं लापरवाही बरतने के कारण की गई। लेख है कि जिले में माह अप्रैल में आयी तेज़ हवा, आंधी एवं ओलावृष्टि के समय ग्राम धामनगांव एवं बोरसल में केला फसल के नुकसान के सर्वे कार्य में अनियमितता एवं लापरवाही बरती गई। उक्त अवधि में पटवारी श्री खाण्डवेकर को ग्राम धामनगांव एवं बोरसल का कार्य सौंपा गया था। सर्वे कार्य के दौरान पंचायत में चस्पा की गई सूची एवं राहत राशि हेतु स्वीकृति की गई सूची में भिन्नता पायी गई। कलेक्टर सुश्री मित्तल के निर्देशानुसार मामले की जांच की गई। अनुविभागीय अधिकारी राजस्व बुरहानपुर श्रीमति पल्लवी पुराणिक ने जानकारी देते बताया कि जांच में यह पाया गया कि चस्पा की गई सूची एवं स्वीकृत सूची में अंतर पाया गया। अतः पटवारी श्री खाण्डवेकर का यह कृत्य शासकीय कार्यो में लापरवाही का घोतक है। जिसके चलते पटवारी पर निलंबन की कार्यवाही की गई है।

पंचायत परिषद से निष्कासित सुबोधकांत सहाय , परिषद संविधान बदलने की तैयारी में…..

मा० सदस्य गण एवं पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों , समाज सेवकों , पंचायती राज में रुचि रखने वाले विशेषज्ञ गण , पंचायती राज संस्थाओं,विद्वत जनों , एवं राजनीतिज्ञों की जानकारी के लिए उद्धृत कर रहा हूँ कि रजिस्ट्रार ,रजिस्ट्रार आफ सोसाइटीज पूर्वी दिल्ली के आदेश दिनांक -19-7-2016 द्वारा सुबोध कांत सहाय एवं बाल्मिकी प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में गठित अखिल भारतीय पंचायत परिषद के प्रबंध कारिणी समिति को विवादास्पद एवं अवैध घोषित कर दिया था उस आदेश को समाप्त करवाने और अपने को परिषद का अध्यक्ष उद्घोषित करवाने के लिए सुबोध कांत सहाय ने अपने पी ए अनिल शर्मा के द्वारा सिविल जज पूर्वी दिल्ली के न्यायालय में वाद संख्या 765/2017 दाख़िल करवाया था जिसमें में पारित आदेश के अनुक्रम में कि सुबोध कांत सहाय एवं उनके निजी सहायक अनिल शर्मा परिषद के संविधान के अनुसार ऑल इंडिया पंचायत परिषद के सदस्य नहीं हो सकते हैं तो अध्यक्ष एवं महामंत्री कैसे हो सकते हैं? इनको याचिका दाखिल करने का अधिकार नहीं है, याचिका ख़ारिज कर दी गयी। भाई सुबोध कांत सहाय जी एवं उनके निजी सहायक अनिल शर्मा जी स्वयंभू पदाधिकारी बन कर अखिल भारतीय पंचायत परिषद के नाम पर अपनी निजी दुकान चलाने एवं परिषद के आजीवन अध्यक्ष मंत्री बने रहने के उद्देश्य से अनधिकार , ग़ैर क़ानूनी ऑल इंडिया पंचायत परिषद के मूल संविधान में अपने निजी स्वार्थों की पूर्ति के लिए अमूल चूल परिवर्तन ( संविधान बदलने ) की तैयारी में लगे हुए हैं।इस सम्बंध में हमने दिनांक 16 जून को पोस्ट प्रेषित किया था जो शत प्रतिशत सच साबित हुई है। अखिल भारतीय पंचायत परिषद से दिनांक 18-2-2023 को अध्यक्ष मंडल द्वारा आजीवन निष्कासित किए जाने के पश्चात सुबोध कांत सहाय ने अवैध , ग़ैर क़ानूनी फ़र्ज़ी तथा कथिति संविधान संशोधन समिति का पत्र जारी किया है जिसमें ऐसे लोगों को सदस्य नामित किया है जिनका अखिल भारतीय पंचायत परिषद से कोई सम्बंध नहीं है और अपने पी ए अनिल शर्मा से प्रतिलिपियाँ उन तथा कथित लोगों को जारी करवाया है। आप सब की जानकारी के लिए उक्त पत्र , रजिस्ट्रार आफ सोसाइटीज के आदेश एवं सिविल जज पूर्वी दिल्ली के आदेश की प्रतिलिपियाँ जारी कर रह हूँ। ज्ञातव्य है कि ऑल इंडिया पंचायत परिषद के संविधान में कुल तीन बार आंशिक संशोधन नियमानुसार किए गये हैं। प्रथम संशोधन 29जनवरी 1985 , द्वितीय 17 नवम्बर 1990 में एवं 2002 में किया गया था।वर्ष 2002 में एक मुख्य महामंत्री का पद सृजित किया गया था एवं वार्षिक संबद्धता तथा सदस्यता शुल्क में वृद्धि की गयी थी जो वर्तमान में लागू है। त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों , पंचायती राज में रुचि रखने वालों, अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं , पंचायती राज विशेषज्ञों , विद्वत जनों से आग्रह है कि तथ्यों से अवगत हों और लोक नायक जयप्रकाश नारायण , बलवंत राय मेहता , लाल बहादुर शास्त्री , गुलज़ारी लाल नंदा , विनोदा नंद झा एवं डाक्टर लाल सिंह त्यागी द्वारा स्थापित संस्था ऑल इंडिया पंचायत परिषद की अस्मिता और उसके संविधान की रक्षा के लिए लाम बंद होकर सफ़ेद पोस क्षद्म राजनीतिक डाक्टर मनमोहन सिंह की कैविनेट के पूर्व मंत्री भू माफिया सुबोध कांत सहाय एवं उनके अन्य सहयोगीआपराधिक ,सजायाफ़्ता साथियों का पुर ज़ोर विरोध करें । जय पंचायती राज शीतला शंकर विजय मिश्र ( लोक तंत्र रक्षक सेनानी) मुख्य महामंत्री ऑल इंडिया पंचायत परिषद

मध्य भारत की विशाल तिरंगा यात्रा 14 को अखंड भारत दिवस पर ‘‘हर घर तिरंगा अभियान’’ के तहत निकलेगी तिरंगा यात्रा मोदी सरकार ने तिरंगे को आम आदमी के घर तक पहुंचाया: रामेश्वर शर्मा

राष्ट्रवाद और धर्म के प्रति जागरूकता लाने हेतु नित नए आयोजन करने वाले हुजूर विधायक अपनी संस्था ‘‘कर्मश्री’’ के तत्वावधान में इस बार भी 14 अगस्त को अखंड भारत दिवस और केंद्र सरकार के ‘‘हर घर तिरंगा अभियान’’ के तहत मध्य भारत की सबसे बड़ी तिरंगा यात्रा निकालने जा रहे हैं। यात्रा में तिरंगा लगे 15 हजार से अधिक दोपहिया-चौपहिया वाहन शामिल होंगे। ‘‘कर्मश्री’’अध्यक्ष और हुजूर विधायक रामेश्वर शर्मा ने आयोजन के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि 14 अगस्त को हम अखंड भारत दिवस मनाते हैं एवं पिछले वर्ष की तरह इस बार भी केंद्र सरकार ने ‘‘हर घर तिरंगा अभियान’’ शुरू किया है। युवा पीढ़ी के मन में अखंड भारत की स्मृति ताजा करने और हर घर तिरंगा अभियान को गति देने के उद्देश्य से ‘‘कर्मश्री’’ द्वारा मुखर्जी नगर कोलार से लेकर संत नगर तक मध्य भारत की सबसे विशाल तिरंगा यात्रा का आयोजन 14 अगस्त को किया गया है। विधायक शर्मा ने राष्ट्रवाद के ओतप्रोत इस विशाल आयोजन में भोपाल वासियों को आमंत्रित करते हुए कहा कि यह तिरंगा यात्रा का आयोजन प्रत्येक भारतवासी का आयोजन है । उन्होंने युवाओं एवं बच्चो को इस आयोजन में विशेष रूप से पधारने का आग्रह किया है । विधायक शर्मा ने कहा कि युवा और बच्चे भारत का आने वाला भविष्य है उनके कंधों पर देश की बागडोर आने वाली है तिरंगे के प्रति उनका सम्मान ही भारत को परम वैभव पर ले जाएगा । श्री शर्मा ने राजधानी वासियों से यात्रा में शामिल होने का आग्रह करते हुए कहा कि इस यात्रा में शामिल होने वाला, यात्रा का स्वागत करने वाला हर व्यक्ति राष्ट्र की सेवा कर अपने नागरिक बोध का परिचय भी देगा। अतः भोपाल वासियों का आह्वान करता हूँ कि इस तिरंगा यात्रा में बढ़-चढ़कर भाग लें और अपने राष्ट्र के प्रति अपने दायित्व-अपने उत्साह का प्रदर्शन करें। यात्रा में भाग लेकर हम गौरवशाली राष्ट्र की सेवा का संकल्प लें। मोदी सरकार ने तिरंगे को आम आदमी के घर तक पहुंचाया: रामेश्वर शर्मा तिरंगा यात्रा के आयोजक हुजूर विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत एक विश्व शक्ति के रूप में स्थापित हुआ है। मोदी सरकार के कार्यकाल में कश्मीर से धारा 370 खत्म हुई और कश्मीर से कन्याकुमारी तक सही मायने में भारत अब एक हुआ है। वही अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ है। देश का आर्थिक विकास भी द्रुत गति से दौड़ रहा है। संपूर्ण विश्व में भारतवंशियों का मान बढ़ा है। पहले तिरंगा विशिष्ट व्यक्तियों द्वारा ही फहराया जाता था और सरकारी कार्यालयों की शोभा बढ़ाता था। अब मोदी सरकार ने भारत के आम नागरिक को अपने हाथों में तिरंगा थामने और घरों में तिरंगा फहराने का अधिकार दिया है यह क्रांतिकारी कदम है। अतः इस अधिकार के बारे में जन जागृति लाने और इसका उत्सव मनाने के लिए इस बार पहले से भी विशाल तिरंगा यात्रा का आयोजन किया गया है। कोलार से सुबह 10 बजे निकलकर संतनगर पहुँचेगी यात्रा, भैंसाखेड़ी में होगा समापन 500 से अधिक स्थानों पर होगा स्वागत कर्मश्री के तत्वाधान में स्वतंत्रता दिवस के एक दिन पूर्व 14 अगस्त को निकाली जा रही तिरंगा यात्रा प्रातः 10 बजे मदर टेरेसा स्कूल मुखर्जी नगर कोलार से आरंभ होकर भोपाल के विभिन्न चौक चौराहों से होती हुई संत हिरदाराम नगर पहुंचेगी। यात्रा मार्ग में लगभग 500 से अधिक स्थानों पर स्थानीय नागरिक बंधुओ सामाजिक, धार्मिक एवं व्यापारिक संगठनों द्वारा पुष्प वर्षा स्वागत की तैयारियां जा रही है । आयोजक संस्था के अध्यक्ष-विधायक रामेश्वर शर्मा ने बताया कि यात्रा सुबह 10 बजे मुखर्जी नगर कोलार स्थित मदर टेरेसा पब्लिक स्कूल से प्रारंभ होकर बैरागढ़ चिचली कोलार, डी मार्ट चौराहा, ललिता नगर, बीमा कुंज, सर्वधर्म कोलार, चूनाभट्टी, कोलार तिराहा, मैनिट चौराहा, माता मंदिर, अटल पथ चौराहा, नानके तिराहा, रोशनपुरा चौराहा, बाणगंगा, विवेकानंद चौराहा (पॉलिटेक्निक चौराहा), राजा भोज सेतु, वीआईपी रोड, लालघाटी , हलालपुर बस स्टैंड से होते हुए संत हिरदाराम नगर, दीनदयाल उपमंडी भैंसाखेड़ी पहुंचकर संपन्न होगी। यात्रा में भोपाल के विभिन्न क्षेत्रों से कर्मश्री संस्था के कार्यकर्ताओं के साथ अनेक जनप्रतिनिधि, धार्मिक,सामाजिक, व्यापारिक, राजनैतिक संगठनों के प्रतिनिधि एवं अन्य नागरिक बंधु उपस्थित रहेंगे । 15 हजार से अधिक वाहन होंगे शामिल विधायक रामेश्वर शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि कर्मश्री संस्था के तत्वाधान में आयोजित होने वाली विशाल तिरंगा यात्रा में हुजूर विधानसभा सहित भोपाल के विभिन्न क्षेत्रों से लगभग 15 हजार से अधिक दो एवं चार पहिया वाहन सम्मिलित रहेंगे। सभी वाहनों पर तिरंगा लगा होगा और वाहन सवार अपने हाथों में भी तिरंगा थामे रहेंगे। यात्रा का सोशल मीडिया पर भी जबरदस्त प्रचार हुजूर विधायक एवं कर्मश्री अध्यक्ष रामेश्वर शर्मा द्वारा 14 अगस्त को निकाली जाने वाली तिरंगा यात्रा की तैयारियां जोरों पर है। यात्रा का सोशल मीडिया पर भी जबरदस्त प्रचार चल रहा है। कार्यकर्ताओं एवं आम नागरिकों द्वारा भी तिरंगा यात्रा का बढ़-चढ़कर प्रचार किया जा रहा है। यात्रा को भव्य बनाने के लिए कार्यकर्ता पूरी तन्मयता के साथ जुटे हुए है। कार्यकर्ताओ द्वारा होर्डिंग बैनर पोस्टर एवं सोशल मीडिया पर यात्रा का जबरदस्त प्रचार प्रसार किया जा रहा है । विधायक श्री शर्मा ने कहा कि 15 हजार से अधिक वाहनों की संभावित उपस्थिति से निश्चित है कि भोपाल 14 अगस्त को तिरंगे के रंग में रंग जाएगा। आकर्षण का केंद्र रहेगी वेशभूषा तिरंगा यात्रा में शामिल होने वाले युवाओं में भारतीय परिधानों के साथ यात्रा में सम्मिलित होने के लिए विशेष तैयारियां की जा रही है । साफा के साथ कुर्ता-पजामा, तिरंगे रंग के दुपट्टे, तिरंगा पगड़ी आदि यात्रा में आकर्षण का केंद्र रहेंगे । यात्रा को आकर्षक और उत्साहवर्धक बनाने के लिए अनेकों अनेक उपाय कार्यकर्ताओं द्वारा किए जा रहे हैं । पूर्व के वर्षों में निकली तिरंगा यात्रा में भी शामिल लोगों की वेशभूषा सदैव आकर्षण का केंद्र रही है। इस बार भी तिरंगा यात्रा में राष्ट्र प्रेम के अनूठे प्रदर्शन नजर आएंगे।

बच्चों की सुरक्षा को लेकर, शिक्षा एवं परिवाहन विभाग ग्वालियर से आला अधिकरियो की लापरवाही

रोहित राठौर,ग्वालियर, शिक्षा विभाग और परिवहन विभाग इतने मदहोश हो चुके हैं क्यों उन्हें बच्चों की सुरक्षा और बच्चों की शिक्षा से कोई लेना देना नहीं, जहां एक और सरकार और प्रशासन बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा को लेकर कर रही हैं वहीं विभागों के आला अधिकारी को इस से कोई लेना-देना नहीं, इन्हे तो एक मोटी रकम मिलती रहे, जिसको विद्यालय चलाने के लिए मान्यता चाहिए वह ले जाय, बच्चों को बैठने के लिए पर्याप्त व्यवस्था हो या नहीं हमें कोई लेना-देना नहीं ना ही विद्यालय का निरीक्षण किया जाता है, अगर कोई शिकायतकर्ता है तो दिखाने के लिए टीम बना दी जाती है चाय नाश्ता करती है और अपना लिफाफा लेकर चली आती है सुरक्षा को लेकर बहुत बड़ी लापरवाही करती रहती है जब कोई बड़ा हादसा हो जाता है तो आनंद आनंद में गाड़ियों की चेकिंग लगा दी जाती है और दिखाने के लिए कार्यवाही करते हैं लगातार शहर भर में स्कूली वाहन चलाई जा रहे हैं लेकिन परिवहन विभाग की तरफ से कोई चेकिंग नहीं की जाती इस से जाहिर होता है कि प्रशासन कुछ बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है हमारे पत्रकार साथी समय-समय पर प्रशासन को चैनल के माध्यम से अखबार की माध्यम से अवगत कराते रहते हैं लेकिन आला अधिकारी के कानों में आवाज नहीं जाती अब देखना यह है कि सरकार प्रशासन कब कुंभकरण की नींद से जगाती है या कोई बड़े हादसे का इंतजार कर रही है रोहित राठौर

नकली रुतबे में असली जेल (रुतबा दिखाने को बना नकली आई ए एस, सोशल मीडिया की फोटो ने पहुंचाया जेल)

खुद को आई ए एस अफसर बताकर मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर कलेक्टर का पदभार संभालने की फोटो सोशल मीडिया पर डालने वाले शख्स को जबलपुर पुलिस ने गिरफ्तार किया है, जबलपुर में थाना तिलवारा की टी आई सरिता बर्मन के अनुसार आरोपी राहुल गिरी मूलतः महाराष्ट्र के गोंदिया का रहने वाला है और जबलपुर के शास्त्रीनगर में किराए के मकान में रहता था, राहुल बी एस सी तक पढ़ा है और सिविल सेवा में जाना चाहता था परंतु आर्थिक कारणों से वह सिविल सर्विस की तैयारी पूरी नहीं कर सका और नकली अधिकारी बन लोगो में रुतबा बनाने का मन बना लिया, सोशल मीडिया के दौर में उसने एडिटिंग एप का सहारा लिया और देश के गृह मंत्री समेत कई बड़े नेताओं मंत्रियों और अधिकारियों के साथ फोटो एडिट कर पोस्ट करने लगा , अभी हाल में ही जब आरोपी ने नरसिंहपुर कलेक्टर की कुर्सी पर बैठकर पदभार ग्रहण करने की फोटो पोस्ट की जिसे खुद कलेक्टर नरसिंहपुर ने देखा और तहसीलदार गोटेगांव को को इसकी शिकायत हेतु निर्देशित किया उनकी सूचना पर पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया, आरोपी राहुल रुतबे को दिखाने के लिए अपने दोस्तों को अपने आई ए एस बनने की पार्टियां भी दी थी तथा वह अपनी कार पर फर्जी नेम प्लेट भी लगाता था उसकी इस सनक ने उसे पुलिस के हत्थे चढ़ा दिया और पुलिस अब यह जानकारी कर रही है कि यह मात्र एक सनक थी या कुछ और||

MP में ‘मां नर्मदा कॉरिडोर’ बनेगा, सीएम शिवराज ने की घोषणा; सिंधिया समर्थक रघुराज सिंह धाकड़ कांग्रेस में वापसी करेंगे

सीएम शिवराज सिंह चौहान ने ‘मां नर्मदा कॉरिडोर’ बनाने की घोषणा की है। सीएम अनूपपुर जिले के दो दिन के दौरे पर हैं। आज वे अमरकंटक में हैं, यहां मां नर्मदा की पूजा अर्चना की। सीएम ने कहा कि मां नर्मदा कि लाखों लोग परिक्रमा करते हैं, इसलिए मां नर्मदा की पवित्र धरा पर कॉरिडोर बनाया जाएगा। सीएम शिवराज ने कहा कि मां नर्मदा महालोक बनेगा तो लाखों लोग अमरकंटक आएंगे। अमरकंटक में जगह सीमित है, यहां अमरकंटक को नया सैटेलाइट शहर बनाया जाएगा। यह सैटेलाइट शहर नीचे बनेगा, जहां होटल, खाने-पीने जैसी सभी तरह की दुकानें रहेंगी। सिंधिया समर्थक रघुराज सिंह धाकड़ कांग्रेस में वापसी करेंगे ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में गए रघुराज सिंह धाकड़ गुरुवार को कांग्रेस में वापसी कर सकते हैं। भोपाल स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में धाकड़ समाज के नेता रघुराज सिंह धाकड़ पार्टी की सदस्यता लेंगे। कमलनाथ की मौजूदगी में वे कांग्रेस जॉइन करेंगे। विधायक जयवर्धन सिंह के साथ धाकड़ भोपाल पहुंचे हैं। कोलारस (शिवपुरी) से करीब 200 गाड़ियों का काफिला साथ आया है। इससे पहले सिंधिया समर्थक बैजनाथ सिंह यादव और राकेश गुप्ता भी BJP छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं।

केस्को के साथ 1.68 करोड़ का फ्रॉड, कौन हजम कर गया 1905 उपभोक्ताओं का पैसा?

कानपुर में कानपुर बिजली आपूर्ति कंपनी(केस्को) के साथ 1.68 करोड़ रुपये का फ्रॉड सामने आया है. इससे केस्को विभाग में हड़कंप मच गया है. पुलिस कमिश्नर ने इस ठगी का खुलासा करने वाली पुलिस की टीम को 1-1 लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा की है. जानकारी के मुताबिक केस्को को जून और जुलाई महीने मे 1900 से अधिक उपभोक्ताओं का पैसा नहीं मिला था. पैसा ट्रांसफर न होने और खाते से हेराफेरी की शिकायत करते हुए केस्को ने आईसीआईसीआई बैंक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था. केस्को के राजस्व में करोड़ों रुपये की ठगी के मामला सामने आने के बाद कमिश्नरेट के अधिकारियों ने इस पर संज्ञान लिया. उसने सर्विलांस, साइबर सेल, स्वाट टीम समेत एक स्पेशल टीम को मामले की जांच में लगाया गया. इसके बाद पुलिस टीम ने दिल्ली और बागपत से ठगी करने वाले गैंग के 6 सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है. इनके पास से भारी मात्रा में नकदी भी बरामद हुई है. बता दें कि केस्को में बिल जमा करने के लिए कानपुर के उपभोक्ता आईसीआईसीआई बैंक के गेटवे के माध्यम से ऑनलाइन अपना बिल जमा करते हैं. कोस्को को लगा करोड़ों का चूना उपभोक्ता के बिलों की जमा राशि आईसीआईसीआई बैंक केस्को के खाते में ट्रांसफर करता है. लेकिन बीते महीने जब केस्को को 1905 उपभोक्ताओं के रुपये का ट्रांसफर नही हुआ तो विभाग ने छानबीन शुरू की. इसमें सामने आया कि बैंक ने किसी दूसरे खाते में रुपये ट्रांसफर कर दिए हैं. इस पर केस्को ने ग्वालटोली थाने में आईसीआईसीआई बैंक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई. इधर पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाया तो मामले के तार बागपत मेरठ दिल्ली समेत अलग-अलग जिलों से जुड़ते नजर आए.? कैसे लगाते थे चूना? अधिकारियों के निर्देश पर पुलिस की एक टीम ने अलग-अलग जिलों में छानबीन शुरू की. इसके बाद ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ हो गया. जांच में सामने आया कि हैकर्स आईसीआईसीआई बैंक की बड़ौत शाखा में उपभोक्ताओं की जमा हो रही रकम के गेटवे का यूआरएल हर एक से 2 घंटे में चेंज करते थे. इस तरह से वह लाखों रुपये की रकम केस्को इलेक्ट्रॉनिक के नाम से खुले अकाउंट में ट्रांसफर कर रहे थे. ये अकाउंट बागपत निवासी सुमन के नाम पर था. ठगी करने वालों में सॉफ्टवेयर इंजीनियर भी शामिल इस ठगी करने वाले गिरोह में सॉफ्टवेयर इंजीनियर. बिजली विभाग का ठेकेदार समेत अन्य लोग शामिल हैं. पुलिस को पकड़े गए बैंक के 6 शातिरों के पास से 30 से अधिक मोबाइल, दर्जनों एटीएम कार्ड और 90 लाख रुपये नकद बरामद हुए हैं. मीडिया को जानकारी देते हुए पुलिस कमिश्नर बीपी जोगदंड ने बताया कि गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की भी तलाश की जा रही है. इसके लिए पुलिस टीम कई जनपदों में ठगी के नेटवर्क को खंगाल रही है. शानदार काम करने वाली साइबर सर्विलांस की टीम को एक-एक लाख रुपये का इनाम भी दिया गया है.

आरबीआई की नीति में सख्त रुख के बाद सेंसेक्स लुढ़का

नई दिल्ली, 10 अगस्त (आईएएनएस)। जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी.के. विजयकुमार का कहना है कि आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने नीतिगत दरों और रुख पर बाजार की उम्मीदों के अनुरूप इन्‍हें यथावत बनाये रखा है। वहीं इसने अपने टोन को सख्‍त किया है यानी भविष्‍य में रेपो रेट बढ़ाने के संकेत दिये हैं। समिति की गुरुवार को समाप्‍त हुई तीन दिवसीय बैठक में महत्वपूर्ण बदलाव मौजूदा वित्‍त वर्ष के लिए खुदरा महंगाई अनुमान 5.1 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.4 प्रतिशत करना है। इसका मतलब है कि ऊंची नीतिगत दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रहेंगी और इसलिए अगले वित्‍त वर्ष की पहली तिमाही से पहले दरों में कटौती की उम्मीद नहीं है। उन्होंने कहा कि बाजार के नजरिए से नीति में कोई सकारात्मक या नकारात्मक आश्चर्य नहीं है। एलकेपी सिक्योरिटीज के बैंकिंग विश्लेषक अजीत काबी ने कहा कि आरबीआई ने एमपीसी हालिया बैठक में नीतिगत दर को 6.5 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा है। मुद्रास्फीति (खुदरा महंगाई को छोड़कर) चिंता का कारण नहीं है। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2023-24 के लिए खुदरा महंगाई का पूर्वानुमान 5.1 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.4 प्रतिशत किया गया है। इसके अलावा, वास्तविक जीडीपी वृद्धि का पूर्वानुमान 6.5 प्रतिशत आंका गया है। उन्होंने कहा कि आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति मुद्रास्फीति को चार प्रतिशत के लक्ष्य के करीब लाने और मुद्रास्फीति की अपेक्षा को नियंत्रित करने की अपनी प्रतिबद्धता पर दृढ़ है। आरबीआई की नीति घोषणा के बाद बीएसई का सेंसेक्स तेजी से 326 अंक गिरकर 65,669 अंक पर आ गया। एशियन पेंट्स (NS:ASPN) में दो फीसदी से बड़ी गिरावट है। टाटा मोटर्स (NS:TAMO) और नेस्ले (NS:NEST) के शेयर भी एक फीसदी से ज्यादा टूटे।।

मंगलवार को जारी सीएजी रिपोर्ट में राजस्व क्षेत्र में फैली अनियमिततओं, लापरवाहियों और भ्रष्टाचार को उजागर किया है। इसी का नतीजा हैै कि केवल एक साल में राजस्व जुटाने वाले पांच विभागों ने सरकारी खजाने को 3640 करोड़ रुपये की चपत लगा दी।

राज्य सरकार के पांच विभागों के अधिकारियों ने लापरवाही और अनियमितताओं की वजह से 3640 करोड़ रुपये का नुकसान कर दिया है। राजस्व क्षति वाले इन शीर्ष पांच विभागों में पहले नंबर पर स्टेट जीएसटी, दूसरे नंबर पर आबकारी विभाग, तीसरे पर खनन, चौथे पर स्टांप व पंजीयन और पांचवें पर वाहन व यात्री कर विभाग हैं। यह खुलासा मंगलवार को विधानसभा में रखी गई भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में हुआ। सीएजी रिपोर्ट ने राजस्व क्षेत्र में फैली अनियमितताओं, लापरवाहियों और भ्रष्टाचार को उजागर किया है। इसी का नतीजा हैै कि केवल एक साल में राजस्व जुटाने वाले पांच विभागों ने सरकारी खजाने को 3640 करोड़ रुपये की चपत लगा दी है। राज्य कर विभाग (स्टेट जीएसटी) में गलत तरह से दिए गए इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के मामलों पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। स्टेट जीएसटी की 1525 करोड़ रुपये की अनियमितताओं में से करीब 1446 करोड़ रुपये के मामले अकेले फर्जी आईटीसी से संबंधित हैं। करीब 31 करोड़ रुपये कैश लेजर से ज्यादा वापस कर दिए गए। बिना टैक्स दिए ही डेवलपरों को 27 करोड़ रुपये दे दिए गए। सीएजी ने स्टांप व निबंधन विभाग के 60 उप निबंधक कार्यालयों में स्टांप शुल्क और बंधक दस्तावेजों की सैम्पल जांच की। इनमें 708 मामलों में 351 करोड़ रुपये से ज्यादा की गड़बड़ियां पकड़ी गईं। जिसमें 300 करोड़ से ज्यादा मामले बंधक दस्तावेजों पर लगाए गए स्टांप से जुड़े थे। खनन विभाग भी अनियमितताओं में पीछे नहीं है। सीएजी ने जांच में प्रदेश के 13 जिला खान अधिकारियों के दस्तावेजों की जांच की। जिसमें 3588 मामलों में पाया गया कि राॅयल्टी या तो कम ली गई या ली ही नहीं गई। इस तरह कुल 440 करोड़ रुपये का नुकसान सरकारी खजाने को किया गया। जांच में पाया गया कि 119 करोड़ रुपये की राॅयल्टी वसूली ही नहीं गई। पट्टों पर कम स्टांप शुल्क लगाकर छह करोड़ से ज्यादा की चपत लगाई गई। वाहन, माल और यात्री कर विभाग की जांच में भी लगभग 48 करोड़ रुपये की गड़बड़ी पकड़ी गई। सीएजी ने 76 इकाइयों में से 11 इकाइयों के 16,379 फाइलों की जांच में ये अनियमितता पाईं। इसमें सबसे ज्यादा 4165 मामले ऐसे थे, जिनमें 25 करोड़ रुपये के टैक्स की वसूली कम की गई। वसूली प्रमाणपत्रों को ठंडे बस्ते में डालने से भी 10 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हो गया। उधर, आबकारी विभाग की सीएजी जांच में 1276 करोड़ रुपये का घपला पकड़ा गया। जांच में 128 इकाइयों में से 29 इकाइयों की 2519 फाइलों की जांच में ये खुलासा हुआ। इसमें सबसे ज्यादा नुकसान दस्तावेजों में आबकारी सामग्री के कम उपभोग की जानकारी दर्ज करने से हुई। इस मद में 1078 करोड़ रुपये की राजस्व क्षति हुई। अधिकारियों ने अनुज्ञापन शुल्क न लेकर 164 करोड़ रुपये का नुकसान किया। राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाले शीर्ष पांच विभागराज्य कर विभाग 1525 करोड़ रुपयेआबकारी 1276 करोड़ रुपयेखनन विभाग 440 करोड़ रुपयेस्टांप व पंजीयन 351 करोड़ रुपयेपरिवहन व यात्री कर 48 करोड़ रुपयेकुल राशि 3640 करोड़ रुपये

राहुल गांधी ने क्या आख़िरी पलों में अविश्वास प्रस्ताव पर बोलने की रणनीति बदल ली?

भारतीय मीडिया में यह ख़बर पिछले दो दिनों से सुर्खियों में थी कि राहुल गांधी ही चर्चा की शुरुआत करेंगे. मंगलवार को राहुल गांधी का नाम भी लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला के पास पहले वक़्ता के तौर पर भेजा गया था. मीडिया में इस बात की चर्चा ज़ोरों पर थी कि राहुल गांधी सांसदी बहाल होने के बाद लोकसभा में किस तेवर में बोलेंगे. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आख़िरी मिनटों में राहुल गांधी ने चर्चा की शुरुआत करने से इनकार कर दिया. अभी तक यह रहस्य बना हुआ है कि राहुल गांधी ने ऐसा क्यों किया. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ राहुल के इनकार के बाद कांग्रेस के फ्लोर मैनेजरों ने ओम बिड़ला को सूचित किया कि असम से पार्टी के सांसद गौरव गोगोई चर्चा की शुरुआत करेंगे. गौरव गोगोई ने ही अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया था. छोड़कर ये भी पढ़ें आगे बढ़ें ये भी पढ़ें समाप्त कांग्रेस नेता चर्चा की शुरुआत राहुल गांधी की ओर से नहीं होने पर कोई ठोस कारण नहीं बता रहे हैं लेकिन सत्ताधारी बीजेपी इससे ज़रूर हरकत में आ गई. संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने लोकसभा में चर्चा शुरू होने के दौरान ही पूछा कि राहुल गांधी का नाम स्पीकर के पास भेजा गया था लेकिन उनका नाम वापस क्यों लिया गया? इस पर गोगोई ने जवाब दिया कि “स्पीकर के चैंबर में हुई बातों को सार्वजनिक करना ठीक नहीं है, क्या ये भी बता जाएगा कि प्रधानमंत्री और स्पीकर के बीच क्या बात हुई.” इमेज स्रोत,ANI इस बयान पर ट्रेज़री बेंच, अमित शाह सहित केंद्रीय मंत्रियों ने कड़ी आपत्ति जताई. अमित शाह ने कहा, “ ये गंभीर आरोप है. आपको बताना चाहिए पीएम और स्पीकर के बीच क्या बात हुई.” प्रह्लाद जोशी ने कांग्रेस की ओर से कौन बहस शुरू करेगा इसे लेकर पैदा हुए कंफ्यूजन पर कहा, “ये सबको पता था कि बहस की शुरुआत कौन करेगा.” मंगलवार को अविश्वास प्रस्ताव पर सदन में बोलने वाले दूसरे नेता थे निशिकांत दुबे. उन्होंने तंज़ वाली भाषा में कहा, “हमें उम्मीद थी की राहुल गांधी विपक्ष की ओर से पहले वक्ता होंगे लेकिन लगता है वो तैयारी करके नहीं आए और देर से सोकर उठे.” इमेज स्रोत,ANI कांग्रेस में भी कंफ्यूज़न छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें छोटी उम्र बड़ी ज़िंदगी उन चमकते सितारों की कहानी जिन्हें दुनिया अभी और देखना और सुनना चाहती थी. दिनभर: पूरा दिन,पूरी ख़बर समाप्त ऐसा लग रहा था कि कांग्रेस के सांसदों को भी इसका अंदाज़ा नहीं था कि राहुल गांधी प्रस्ताव पर बहस की शुरुआत नहीं करेंगे, सभी अपने-अपने कारण बता रहे थे. अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए एक कांग्रेस के सांसद ने कहा, “शायद उन्हें लगा कि गोगोई को बहस शुरू करनी चाहिए क्योंकि वह पूर्वोत्तर से हैं और उन्होंने मणिपुर का दौरा किया था. गोगोई ने ही सदन को नोटिस दिया था और वही चर्चा शुरू करने वाले थे. राहुल गांधी की लोकसभा में वापसी ही एक दिन पहले हुई है.” एक अन्य सांसद ने अख़बार से दावा किया कि गांधी ने पहले नहीं बोलने का फ़ैसला किया क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी सदन में मौजूद नहीं थे. वहीं तीसरे सांसद ने कहा कि राहुल गांधी “असहज” महसूस कर रहे थे इसलिए नहीं बोला. कांग्रेस के कुछ सांसद ये भी कह रहे थे कि वो सरकार को सरप्राइज़ करना चाहते थे. एक सांसद ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “हमने उनका (राहुल गांधी) नाम एक चाल के तहत दिया था. हमें पता था जैसे ही सरकार को पता चलेगा कि राहुल गांधी बोल रहे हैं, ट्रेज़री बेंच अपनी पूरी तैयारी के साथ आएगा और उनकी बहस को मुद्दे से भटकाना चाहेगा. लेकिन जब हमने ऐन मौक़े पर तय किया कि गोगोई बोलेंगे तो वो लोग हैरान परेशान हो गए, वो (सत्ता पक्ष के सांसद) लोग इसके लिए तैयार इमेज स्रोत,ANI राहुल गांधी के भाषण ना देने पर बीजेपी की आपत्ति मोदी सरकार के खिलाफ़ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर जब राहुल गांधी ने मंगलवार को भाषण नहीं दिया तो उस पर बीजेपी ने कड़ी आपत्ति जताई. केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि कांग्रेस ने सुबह 11 बजकर 55 मिनट पर एक पत्र दिया, जिसमें कहा गया कि राहुल गांधी बोलेंगे, बहस दोपहर में शुरू हुई, मुझे आश्चर्य है कि पाँच मिनट में ऐसी क्या समस्या आ गई कि उन्होंने भाषण ना देने का फ़ैसला ले लिया. इसके जवाब में कांग्रेस सांसद रंजन गोगोई ने कहा कि “सत्ता पार्टी के मंत्रियों को लोकसभा स्पीकर के चेंबर में हुई बातों को सार्वजनिक रूप से सामने नहीं लाना चाहिए.” चेतावनी वाले लहजे में उन्होंने कहा कि “अगर इस तरह स्पीकर से हुई हमारी बात को सामने लाया जा रहा है तो फिर चेंबर में प्रधानमंत्री और स्पीकर के बीच क्या बात हुई है ये भी आपको बताना होगा.” गोगोई के इस बयान पर गृहमंत्री अमित शाह ग़ुस्से मे अपनी सीट से उठ गए और गोगोई से कहा, “ ये गंभीर आरोप है, आपको बताना चाहिए कि पीएम ने क्या कहा है.” प्रह्लाद जोशी ने स्पीकर से कहा, “आप स्पीकर और प्रधानमंत्री को लेकर ऐसे बेबुनियाद आरोप नहीं लगा सकते. यह एक गंभीर मामला है.” इस पर लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने गौरव गोगोई से कहा मेरा चेंबर भी लोकसभा का हिस्सा है इसलिए ऐसे कोई बयान मत दीजिए जिसके पीछे सच्चाई ना हो. इमेज स्रोत,ANI निशिकांत दुबे का ‘बेटे और दामाद’ वाला बयान सत्ताधारी पक्ष की ओर से अविश्वास प्रस्ताव का विरोध करते हुए झारखंड के गोड्डा से बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने अपने पूरे भाषण में विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के विरोधाभासों पर ज़ोर दिया. उन्होंने टीएमसी, डीएमके, जेडीयू और नेशनल कॉन्फ्रेंस जैसे दलों के कांग्रेस के साथ अतीत के टकराव का विस्तार से ज़िक्र किया, उन्होंने तंज़ करते हुए कहा कि इस गठबंधन के ज़्यादातर लोग गठबंधन ‘इंडिया’ का “फुल फॉर्म नहीं बता पाएँगे”. निशिकांत दुबे ने अविश्वास प्रस्ताव को ‘ग़रीब के बेटे’ और ‘लोगों के लिए घर बनाने वाले’ व्यक्ति पर हमला बताया. दुबे ने सोनिया गांधी का नाम लेकर उनके बेटे और दामाद का ज़िक्र किया, उन्होंने अपने भाषण में कई बार ‘दामाद’ शब्द का प्रयोग किया जिस पर विपक्ष ने कई बार विरोध किया, उन्होंने कहा कि किसी का भी दामाद … Read more

मध्यप्रदेश बीज खरीदी मे घपलेबाज़ी -अपर मुख्य सचिव ने बदला अपना ही आदेश -दलालों और अधिकारियों के सिंडिकेट की रहेगी चांदी –

मध्यप्रदेश मे बीज खरीदी का मामला सामने आया है जहाँ दलालों के सिंडिकेट को बरकरार रखने के लिए उद्यानिकी विभाग के अपर मुख्य सचिव ने अपना ही आदेश बदल दिया है, अधिकारियों और बिचौलियों का यह खेल मध्यप्रदेश मे गहरी जडे जमा चुका है और एम पी एग्रो इसका एक बड़ा अड्डा बन चुका है | प्रदेश मे सालों से चल रही बीज खरीद घोटाले मे परत -दरपरत दलालों और अधिकारियो की मिलीभगत उजागर हो रही है, बीज की खरीद सिर्फ एम पी एग्रो से हो इसके लिए उद्यानिकी विभाग के अपर मुख्य सचिव जे. एस. कंसोटिया ने अपने ही पुराने आदेश को बदल दिया है, ज्ञात हो कि कमलनाथ सरकार गिरने के उपरांत प्रदेश कि सत्ता मे आसीन शिवराज सरकार के अधिकारी टमाटर के आलावा सभी बीज दोगुने से अधिक दामों मे खरीद रहे हैं सूत्रों की माने तो पड़ताल के बाद पता चला है कि इस प्रकरण मे एम पी एग्रो के आलावा उद्यानिकी विभाग के आला अफसरों की मिलीभगत भी आने लगी है कि कैसे अकेले एक आदेश से मध्यप्रदेश के जिलों के ग्रमीण विकास अधिकारी राष्ट्रीय बीज निगम के बजाय एम. पी एग्रो मे रजिस्टर्ड बिचौलियों से दोगुने से अधिक दामों पर बीज की खरीदी करने को बाध्य हो रहे हैं, अधिकारियों और बिचौलियों के इस संगम से सरकार को करोडो का चूना लग रहा है, तथा जनता की गाढ़ी कमाई भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही है, शिवराज सरकार के अफसरों कि मनमानी भ्रष्टाचार को चरम पर ले जा रही है और मामा मुख़्यमंत्री आँखे मूँद कर बैठे हैं, विभाग के छोटे कर्मचारियों का कहना है कि बड़े अफसरों को सत्ता का संरक्षण प्राप्त है और इसी वजह से वह ऐसा कृत्य करने मे संकोच नहीं करते हैं तो क्या मुख़्यमंत्री कार्यालय तक इस सिंडिकेट के तार जुड़ें हैं यह एक बड़ा सवाल है परन्तु सत्ताधारी पार्टी के नेता भारत एवं दुनिया भर मे जिस भ्रष्टाचार मुक्त शाशन कि दुहाई देते फिर रहे हैं उनके दावों पर यह एक बड़ा काला धब्बा हैं सच ये भी है कि जो हो रहा है वह किसी मजबूत संरक्षण के बिना संभव भी नहीं है तो क्या सत्ताधारी पार्टी कि कथनी एवं करनी मे फर्क है सवाल अभी बाकी है..

जलवायु परिवर्तन को लेकर जी20 समूह के बीच मतभेद बढ़ते जा रहे हैं

मुताबिक़, यूक्रेन पर कड़ा रूख़ ना रखने को लेकर महीनों तक चली खींचतान के बाद, जी-20 समूह अब सितंबर में नेताओं की बैठक से पहले जलवायु परिवर्तन के मुद्दों पर आम सहमति नहीं बहना पाया है. जुलाई में ऊर्जा परिवर्तन, पर्यावरण और जलवायु पर दो जी-20 मंत्रिस्तरीय बैठकों में उत्सर्जन का टारगेट, जीवाश्म ईंधन में कटौती और जलवायु वित्त सहित कई प्रमुख मुद्दों पर एक राय नहीं बन पाई और इसके बाद ही चिंताएं बढ़ गई हैं. पहली बैठक गोवा में जी-20 एनर्जी ट्रांजिशन वर्किंग ग्रुप (ईटीडब्ल्यूजी) की थी, उसके बाद बीते महीने चेन्नई में जी-20 पर्यावरण और जयवायु सस्टेनेबिलिटी वर्किंग ग्रुप (ईसीएसडब्ल्यूजी) की बैठक हुई. बैठक के बाद अध्यक्ष ने जो बैठक की सारांश रिपोर्ट बनाई उसमें ऐसे मुद्दे हैं, जिसमें जी-20 सदस्यों के बीच कोई ‘सहमति’ नहीं बन पाई. रूस और चीन अब भी यूक्रेन से संबंधित पैराग्राफ़ों पर जी-7 देशों के ख़िलाफ़ हैं. चीन का कहना है कि कोई भी “भूराजनीतिक” मुद्दे शामिल नहीं किए जाने चाहिए. वहीं अब ये असहमति जी7 देशों और विकासशील देशों के बीच उत्सर्जन टारगेट और जलवायु वित्त को लेकर भी देखी जा रही है. खासकर ‘फ़ेज़ आउट’ यानी कोयले के इस्तेमाल को पूरी तरह बंद करना और जीवाश्म ईंधन के उत्पादन में कमी के प्रस्ताव का सऊदी अरब और भारत सहित कई देश विरोध कर रहे हैं. इन देशों का कहना है कि फ़ेज़ आउट की जगह “फेज़ डाउन” जैसे शब्द इस्तेमाल किए जाएं. सहमति बनाना काफ़ी मुश्किल अख़बार सूत्रों के हवाले से लिखता है कि इस बातचीत से जुड़े लोगों के मुताबिक़ जी-20 वार्ताकारों ने जलवायु बैठक से पहले “रात भर और दो दिनों तक सुबह पाँ बजे तक” जलवायु मुद्दों पर चर्चा करते हुए इस बात पर ज़ोर दिया कि आम सहमति से एक प्रस्ताव तैयार होना चाहिए. इस बैठक में अमेरिका के विशेष दूत जॉन केरी सहित कई देशों के प्रमुख अधिकारियों ने भाग लिया. आख़िरकार जब सभी देशों के बीच तालमेल बैठाना असंभव लगने लगा तो भारतीय वार्ताकारों ने कहा कि वे मतभेद के सभी बिंदुओं को बयान में दर्ज करना करेंगे, ताकि 9 और 10 सितंबर को “नेताओं के शिखर सम्मेलन के दौरान असहमति के मुद्दों पर समाधान निकालने का विकल्प” तलाशा जा सके. एक अधिकारी ने द हिंदू को बताया, “अगर हम बैठक के बाद ऐसी रिपोर्ट बनाएंगे जिसमें असहमति के कोई मुद्दे ही ना हों तो हम उन बिंदुओं को बाद में नहीं ला सकते हैं. फ़ंडिंग की कमी और भारत की चुनौती ईसीएसडब्ल्यूजी की बैठक के अंत में अध्यक्ष ने जो बयान जारी किया, उसके अनुसार, सदस्यों के बीच 2025 तक वैश्विक उत्सर्जन लक्ष्य को चरम पर पहुँचाने और 2035 तक उत्सर्जन में 60% की कटौती (2019 की तुलना में) करने का लक्ष्य रखा गया है. भारत सहित विकासशील देशों ने इस लक्ष्य के लिए प्रतिबद्धता नहीं दिखाई है. एक मुद्दा और है, जिस पर विवाद है, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया सहित विकसित देशों ने ग़रीब देशों को जलवायु परिवर्तन के तहत किए जा रहे बदलावों को लागू करने के लिए100 अरब डॉलर की आर्थिक मदद देने का वादा किया था. ये मदद 2020 से दी जानी थी. इस बैठक की सारांश रिपोर्ट बनाने वाले अधिकारी ने दर्ज किया है कि जी -20 सदस्य इस बात पर भी सहमत नहीं थे, जिस पर वह पहले ही सहमत हो चुके हैं. चेन्नई में हुई बैठक की सारांश रिपोर्ट का पैराग्राफ़ 64 कहता है, “पर्यावरण और जलवायु स्थिरता कार्य समूह के आदेश पर जी-20 सदस्यों के बीच अलग-अलग विचार हैं. ऊर्जा परिवर्तन के मुद्दों और उन्हें इस दस्तावेज़ में किस लहजे में लिखा जाए किया जाए, इस पर भी अलग-अलग विचार हैं. ” इसके अलावा, जलवायु विशेषज्ञ और कार्यकर्ता समूह इस बात से निराश हैं कि बैठक में जो उम्मीद थी उसके उलट जलवायु परिवर्तन का मुद्दा “हल्का” नज़र आ रहा है. संभव है ये नवंबर में दुबई में होने वाले संयुक्त राष्ट्र COP28 जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में भी बातचीत को पटरी से उतार सकती है. जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन के कार्यकारी सचिव साइमन स्टिल ने चेन्नई में बैठक के बाद कहा कि “हमें एक मज़बूत और एकमत संदेश की उम्मीद थी लेकिन ऐसा हुआ नहीं.” चौथी शेरपा बैठक अब 3-6 सितंबर को हरियाणा के मानेसर में होने वाली है, इसके बाद 5-6 सितंबर को वित्त और केंद्रीय बैंक के प्रतिनिधियों की बैठक होगी. अब तक यूक्रेन युद्ध को लेकर में मतभेद मुख्य कारण रहा है, जिसके कारण अब तक जी-20 मंत्रिस्तरीय बैठक के बाद कोई संयुक्त बयान जारी नहीं किया गया. लेकिन अब जलवायु परिवर्तन पर आम सहमति वाली भाषा चुन पाना वार्ताकारों के सामने चुनौती बढ़ा रहा है. भारत ऐसे जी20 बैठक की मेज़बानी नहीं करना चाहता, जहाँ बैठक के बाद “नेताओं के साझा बयान” जारी ना किए जा सकें.

असम में बहुविवाह पर लगेगा प्रतिबंध

ये कानून बनाने के लेकर सीएम की टिप्पणी तब आई है जब राज्य सरकार की ओर से गठित एक एक्सपर्ट पैनल ने अपनी रिपोर्ट सौंपी है. असम सरकार ने इस मुद्दे को देखने और 60 दिनों के भीतर एक रिपोर्ट सौंपने के लिए मई में गुवाहाटी हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस रूमी फुकन की अध्यक्षता में चार सदस्यीय समिति का गठन किया था. सरमा ने पत्रकारों से कहा, “मैंने रिपोर्ट अभी नहीं पढ़ी है. पैनल को यह समझने का काम सौंपा गया था कि क्या राज्य सरकार बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने के लिए कानून बना सकती है या नहीं. समिति ने हमें बताया है कि हमारे पास ऐसा अधिकार है, लेकिन कानून को अंतिम मंजूरी राष्ट्रपति से मिलनी चाहिए, न कि राज्यपाल से. यह विशेषज्ञ समिति इस बात का अध्ययन करेगी कि राज्य विधायिका के पास बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने के अधिकार हैं या नहीं. असम सरकार के अनुसार, यह समिति अगले छह महीने के भीतर रिपोर्ट दाखिल करेगी. असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पिछले मंगलवार को बहुविवाह पर रोक लगाने के लिए इस विशेषज्ञ समिति का गठन करने की घोषणा की थी. उन्होंने कहा था, “बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने को लेकर कानूनी विशेषज्ञों और विद्वानों वाली यह समिति भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 के साथ-साथ मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) अधिनियम, 1937 के प्रावधानों की जांच करेगी.” छोड़कर ये भी पढ़ें आगे बढ समाप्त उन्होंने यह भी कहा था, “हम यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड की ओर नहीं जा रहे हैं जिसके लिए एक राष्ट्रीय सहमति की आवश्यकता होती है, लेकिन असम में यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड के एक घटक के रूप में हम एक राज्य अधिनियम के माध्यम से बहुविवाह को असंवैधानिक और अवैध घोषित करना चाहते हैं.” इमेज स्रोत,@HIMANTABISWA देश की आजादी के बाद से यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड की मांग उठती रही है. लेकिन यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड से अलग असम सरकार राज्य में एक नया क़ानून लाकर जिस तर्ज पर बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास कर रही है उसको लेकर सवाल उठ रहे हैं. मुख्यमंत्री के इस बयान ने ख़ासकर निचले असम में बसे बंगाली मूल के मुसलमानों को चिंता में डाल दिया है.

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