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जानें … दुनिया की सबसे तेज खुफिया एजेंसी मोसाद के सबसे चर्चित मिशन

नई दिल्ली। मोसाद को दुनिया की एक सबसे तेज खुफिया एजेंसी माना जाता है। ऐसी खुफिया एजेंसी जो अपना निशाना नहीं चूकती है। मोसाद ने कई ऐसे मिशन को अंजाम दिया है जिसको सोचकर इंसान सिहर जाए। मोसाद का सफलता का ट्रैक रेकॉर्ड काफी प्रेरक रहा है। यही कारण है कि अमेरिका और भारत समेत दुनिया की कई खुफिया एजेंसिया मोसाद के साथ मिलकर ट्रेनिंग और कई सीक्रेट मिशन्स को अंजाम देती हैं। भारत तो अपनी खुफिया एजेंसी में काम करने वाले अधिकारियों की ट्रेनिंग तक इजरायली खुफिया एजेंसी के साथ करवाता है। ऑपरेशन थंडरबोल्ट ने दुनिया में दिखाया मोसाद का दम 27 जून 1976 को जब इजरायली यात्रियों से भरी फ्रांस के एक यात्री विमान को अरब के आतंकियों ने अपहरण कर लिया। तब मोसाद ने अपनी ताकत और बुद्धिमानी के दम पर हजारों किलोमीटर दूर स्थित देश से अपने 94 नागरिकों को सुरक्षित वापस निकाल लिया। युगांडा के एंतेबे हवाई अड्डे पर मोसाद के ऑपरेशन को आज भी पूरी दुनिया में सबसे सफल हॉइजैकर्स मिशन माना जाता है। इस ऑपरेशन में वर्तमान में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के भाई जोनाथन नेतन्याहू भी शामिल हुए थे। हालांकि, उनकी ऑपरेशन के दौरान गोली लगने से मौत हो गई थी। जब मोसाद ने रूसी मिग-21 लड़ाकू विमान को चुराया 60 के दशक में अगर कोई लड़ाकू विमान सबसे अडवांस्ड और फास्ट था तो वह मिग-21 विमान था। अगर यह कहें कि अमेरिका भी इससे डरता था तो शायद कुछ गलत नहीं होगा। इस विमान को पाने में अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए फी असफल हो गई थी, जिसके बाद इसकी जिम्मेदारी मोसाद को दी गई। पहली कोशिश में पकड़े जाने के बाद दिसंबर 1962 में मोसाद के एक एजेंट को मिस्र में फांसी दे दी गई। मोसाद ने दूसरी कोशिश इराक में की, लेकिन यह प्रयास भी असफल रहा। 1964 में मोसाद की महिला एजेंट ने एक इराकी पायलट को इस विमान के साथ इजरायल लाने के लिए मना लिया था। म्यूनिख ओलिंपिक में इजरायली टीम के हत्यारों को ढूंढ-ढूंढकर मारा मोसाद ने 1972 में हुए म्यूनिख ओलिंपिक में इजरायली टीम के 11 खिलाड़ियों के हत्यारों को कई देशों में ढूंढ-ढूंढकर मौत के घाट उतार दिया। इजरायली खिलाड़ियों की हत्या का आरोप ब्लैक सेप्टेंबर और फिलीस्तीन लिबरेशन अर्गनाइजेशन पर लगा था। मोसाद की लिस्ट में 11 आतंकी थे, जो म्यूनिख में इजरायली खिलाड़ियों की हत्या के बाद अलग-अलग देशों में जाकर छिप गए थे। लेकिन, मोसाद ने 10 साल के ऑपरेशन में सभी आतंकियों को खोजकर मार दिया। कहा जाता है कि मोसाद ने सभी 11 आतंकियों को 11-11 गोलियां मारी थी। अर्जेंटीना में दिया सबसे घातक मिशन को अंजाम मोसाद ने अर्जेंटीना में 11 मई 1960 को एक ऐसे मिशन को अंजाम दिया जिसकी गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दी। यह मिशन इतना सीक्रेट था कि अर्जेंटीना की सरकार को इसकी भनक तक नहीं लगी। मोसाद नाजी युद्ध अपराधी एडोल्फ एकमैन का अपहरण कर इजरायल लेकर आई। जिसके बाद उसे यहूदियों के खिलाफ किए गए अत्याचारों के लिए मुकदमा चलाकर सजा दी गई। इस मिशन को इजरायल के पांच एजेंटों ने अंजाम दिया था जिसने नाम बदलकर अर्जेंटीना में छिपे एडोल्फ एकमैन को ढूंढ निकाला। एकमैन को पकड़ने के बाद एक सीक्रेट लोकेशन पर ले जाकर उसकी पहचान सुनिश्चित की गई। उसके बाद टीम उसे गुपचुप तरीके से इजरायल लेकर आ गई। यासिर अराफात के करीबी को परिवार के सामने मारी 70 गोलियां मोसाद ने फिलीस्तीन के प्रसिद्ध नेता रहे यासिर अराफात का दाहिना हाथ कहे जाने वाले खलील अल वजीर को ट्यूनिशिया में उसके परिवारवालों के सामने गोलियों से छलनी कर दिया। खलील को अबू जिहाद के नाम से भी जाना जाता था। यह फिलीस्तीन के आतंकी संगठनों का मुखिया माना जाता था जिसके इशारे पर इजरायल में कई हमले भी हुए थे। इस मिशन को मोसाद के 30 एजेंट्स ने अंजाम दिया। ये एजेंट एक-एक कर टूरिस्ट बनकर ट्यूनिशिया पहुंचे। जहां उन्होंने अबू जिहाद के घर का पता लगाकर उसके परिवार के सामने 70 गोलिया मारी। उस वक्त ट्यूनिशिया के आसमान में उड़ रहे इजरायली प्लेन ने सभी कम्यूनिकेशन सिस्टम्स को ब्लॉक कर दिया था।

सिंधिया को करना पड़ा सीएम शिवराज का 40 मिनट इंतजार, सिर्फ 10 मिनट ही हुई मुलाक़ात

भोपाल. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और सांसद ज्याेतिरादित्य सिंधिया के बीच हुई मुलाकात महज 10 मिनट में खत्म हो गई। इससे पहले सिंधिया को सीएम हाउस में शिवराज का करीब 40 मिनट इंतजार करना पड़ा। दरअसल, शिवराज सुबह गोंदिया गए थे। वे तय कार्यक्रम से करीब आधा घंटा लेट दोपहर 2:30 बजे भोपाल पहुंचे। सिंधिया से मुलाकात के तत्काल बाद मुख्यमंत्री ने शहडोल में नवजातों की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के साथ बैठक की। इसके बाद शाम 4 बजे दोनों नेता ओरछा रवाना हो गए हैं। जहां वे केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल की पुत्री के विवाह समारोह में शामिल होंगे। शिवराज और सिंधिया आज ही देर शाम दिल्ली रवाना हो जाएंगे। मुख्यमंत्री मंगलवार को सुबह 10:30 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। ऐसा माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच निगम-मंडलों में नियुक्ति को लेकर बातचीत हुई है। हालांकि जानकारों का कहना है कि अभी मंत्रिमंडल विस्तार में समय लग सकता है। लेकिन जब भी मंत्रिमंडल विस्तार होगा सिंधिया खेमे के विधायक तुलसी सिलावट और गोविंदसिंह राजपूत को पहले मंत्री बनाया जाएगा। उपचुनाव के परिणाम आने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा था कि मंत्रिमंडल विस्तार की कोई जल्दी नहीं है। इसके बाद सिंधिया ने भी मुख्यमंत्री के बयान पर सहमति जताई थी। दरअसल, मंत्रिमंडल के विस्तार से पहले भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की घोषणा होने की उम्मीद है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने अपनी टीम का चयन कर लिया है। इससे पहले शर्मा की दिल्ली में सिंधिया के साथ बैठक हो चुकी है। इससे पहले मुख्यमंत्री और प्रदेश संगठन मंत्री सुहास भगत के साथ उन्होंने कार्यसमिति को लेकर मंथन किया था। आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश की जानकारी मोदी को देंगे सीएम मुख्यमंत्री मंगलवार को प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश योजना के तैयार किए जा रहे रोडमैप की जानकारी देंगे। मुख्यमंत्री किसानों के लिए चलाई जा रही योजनाओं के अलावा मप्र में कोरोना की मौजूदा स्थिति और इससे निपटने के लिए तैयारियों से भी प्रधानमंत्री को अवगत कराएंगे। मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री केंद्र से मिलने वाली लंबित राशि राज्य को देने का प्रधानमंत्री से अनुरोध कर सकते हैं।

उज्जैन में 41 लाख की जमीन 12 लाख में नीलाम करने वाली तहसीलदार दीपाली निलंबित

भोपाल। कलेक्टर गाइड लाइन को धता बताते हुए 41 लाख की जमीन को मात्र 12 लाख में अपने पति रंजीत कर्नाल के ड्राइवर प्रेमकुमार दांगी को नीलाम करना तत्कालीन उज्जैन नायब तहसीलदार दीपाली जाधव (वर्तमान में देवास में तहसीलदार) को महंगा पड़ गया। लोकायुक्त पुलिस की चार्जशीट के बाद शासन ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। रजिस्ट्रार ने जब आपत्ति जताई तो दीपाली ने अपने ओहदे का प्रभाव दिखाते हुए रजिस्ट्रार पर दबाव बनाकर रजिस्ट्री करा दी थी। यह है मामला दरअसल, उज्जैन तहसील के बमौरा निवासी नाथूलाल ने अपनी 3.21 हेक्टेयर जमीन को बंधक रखकर बैंक से पांच लाख का लोन लिया था। लोन नहीं चुका पाने पर वर्ष 2014 में नाथूलाल की जमीन नीलाम हो गई। तत्कालीन नायब तहसीलदार दीपाली जाधव ने उक्त भूमि को अपने पति रंजीत कर्नाल के ड्राइवर प्रेमकुमार दांगी के पक्ष में महज 12 लाख 11 हजार रुपए में नीलाम कर दी। जबकि उस समय कलेक्टर गाइड लाइन के अनुसार उस भूमि की कीमत 41 लाख 60 हजार रुपए थी। शिकायत होने पर लोकायुक्त पुलिस उज्जैन ने पूरे मामले की जांच की। नायब तहसीलदार के पति रंजीत कर्नाल लोकायुक्त पुलिस इंसपेक्टर बंसत श्रीवास्तव ने बताया कि नियमों को ताक पर रखकर नायब तहसीलदार दीपाली ने जमीन की नीलामी की थी। इसमें उसके पति रंजीत कर्नाल ने भी साथ दिया। जांच में पता चला कि नीलामी में प्रेमकुमार दांगी के साथ उज्जैन के अशोक नगर निवासी सहदेव और नीमनवासा के रहने वाले रमेश गुर्जर ने बोली लगाई थी। प्रेमकुमार की बोली 12.11 लाख पर छूटी। प्रेमकुमार ने नीलामी राशि को जमा करने के लिए चेक दिया था लेकिन उसने उसी समय आवेदन देकर चेक वापस ले लिया और उसी दिन तीन बजे तक सरकारी खाते में 12.11 लाख रुपए कैश जमा कर दिया। जांच में पता चला कि प्रेमकुमार के खाते में उस समय इतनी धनराशि नहीं थी तो वह इतना कैश कहां से लाया। लोकायुक्त पुलिस की पूछताछ में उसने बताया कि यह सब मैडम (दीपाली) और साहब (रंजीत) का करा-धरा है। साहब ने ही पैसों की इंतजाम किया था। इंसपेक्टर बसंत श्रीवास्तव ने बताया कि रंजीत ने अपने इंदौर के पते पर प्रेमकुमार को किराएदार दिखाया था। उसी पते पर प्रेमकुमार का बैंक खाता भी खुलवाया था। प्रेमकुमार के पक्ष में नीलामी करवाने के बाद जमीन की रजिस्ट्री में रंजीत गवाह भी बना। जबकि यह नियमों के विरुद्ध था। नीलामी में पीठासीन अधिकारी का कोई सगा-संबंधी शामिल नहीं हो सकता है। रजिस्ट्रार ने की थी आपत्ति जांच अधिकारी बसंत श्रीवास्तव ने बताया कि मात्र 12 लाख में नीलामी करने को लेकर तत्कालीन रजिस्ट्रार ने प्रेमकुमार के पक्ष में जमीन की रजिस्ट्री करने से मना कर दिया था। तब दीपाली जाधव ने रजिस्ट्रार काे पत्र लिखकर रजिस्ट्री करने का दबाव बनाया। नीलामी में शामिल होने से किया इंकार जांच अधिकारी ने बताया कि नीलामी में तीन लोग आए ही नहीं थे। प्रेमकुमार के साथ बोली लगाने वाले सहदेव और रमेश गुर्जर ने लोकायुक्त पुलिस को दिए अपने बयान में बताया कि उन्हें न तो नीलामी के बारे में पता था और न ही वे बोली लगाने आए थे। पूरी नीलामी सिर्फ कागजों में की गई। नोटिस के बावजूद बयान देने नहीं आईं थीं दीपाली लोकायुक्त पुलिस के मुताबिक जांच के दौरान बयान देने के लिए तत्कालीन नायब तहसीलदार दीपाली जाधव को नोटिस भेजा गया था, लेकिन वह नहीं आईं। उधर, प्रेमकुमार दांगी भी बयान देने के बाद से फरार है। उसकी फरारी में ही इसी साल 15 जनवरी को कोर्ट में चालान पेश किया गया।

MP: पत्नी से झगड़े के बाद टावर पर चढ़ गया पति, बोला- मायके गई तो कूद जाऊंगा

इंदौर। मध्य प्रदेश के बड़वानी में पत्नी से झगड़ा होने के बाद पति हाईटेंशन टावर पर चढ़ गया. ग्रामीणों ने जब ये नजारा देखा तो हैरान रह गये. गनीमत ये रही कि उस समय हाईटेंशन में करंट नहीं दौड़ रहा था. टावर पर 80 फीट ऊपर चढ़ा पति बार-बार अपनी पत्नी से बोल रहा था कि तुम मायके गईं तो कूद जाऊंगा. ग्रामीणों की सूचना पर थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई. करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस ने पति को समझा-बुझाकर नीचे उतारा जा सका. बड़वानी के बालसमुद पुलिस चौकी क्षेत्र के ग्राम टमेला में एक घंटे तक चले ड्रामे से पुलिस और ग्रामीणों के पसीने छूट गये. गांव का ही रहने वाला मूलचंद पत्नी से झगड़े के बाद हाईटेंशन टावर पर चढ़ गया. करीब 80 फीट ऊंचाई पर चढ़े हुए इस युवक को जब देखा, तो मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई. युवक को बार-बार नीचे उतरने के लिए कहा जा रहा था, लेकिन वो कह रहा था, कि पत्नी मायके गई, तो वो यहां से कूद जायेगा. वहीं पति की इस हरकत की जानकारी जब पत्नी को मिली तो वो भी मौके पर पहुंच गई. सूचना पर पुलिस भी ग्राम टमेला पहुंच गई. युवक को टावर से उतारने के लिए समझाने का क्रम शुरू हो गया. करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद उसे समझा-बुझाकर टावर से नीचे उतारा जा सका. बताया गया है कि युवक का किसी बात को लेकर पत्नी से विवाद हो गया था. इस विवाद के दौरान पत्नी ने मायके जाने की धमकी दी. पत्नी के इस फैसले से नाराज युवक हाईटेंशन लाइन के टावर पर चढ़ गया. गनीमत ये रही, कि उस समय तारों में करंट नहीं दौड़ रहा था, नहीं तो गंभीर हादसा हो सकता था.

दिल्ली के सभी बॉर्डर पर किसानों का डेरा, बोले – देश में सभी कानून कॉरपोरेट के लिए बन रहे हैं

नई दिल्ली। दिल्ली की सीमाओं पर हजारों की संख्या में किसान जमे हुए हैं. कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों को दिल्ली के बुराड़ी में मौजूद निरंकारी ग्राउंड में प्रदर्शन करने की इजाजत दी गई है. लेकिन किसानों का एक गुट सिंघु और टिकरी बॉर्डर पर ही डेरा डाले हुआ है और सरकार से बिना शर्त बातचीत की मांग कर रहा है.किसान नेता गुरनाम सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इस आंदोलन को कुचलने के लिए 30 से ज्यादा मुकदमा दर्ज हो चुके हैं. आज जगह जगह से और लोग आ रहे हैं. हरियाणा से किसान कुच कर रहा है. ये लड़ाई सिर्फ किसान की नहीं है, सबकी है. पैदावार करने वाले किसानों को कम भाव मिलेगा. ये सभी का आंदोलन है. उन्होंने कहा, “ब्राह्मण समाज ने हमें समर्थन दिया . हरियाणा में सब मंडियां बंद रहेंगी. जो भी देश में कानून बन रहे हैं, वो सिर्फ कॉरपोरेट के लिए बन रहे हैं. पूरी जनता का शोषण कारपोरेट कर रही है. पूरे देश के नागरिक इस लड़ाई में शामिल हों. अपील करता हूं. जब तक बाते नहीं मानी जाएंगी, आंदोलन जारी रहेगा. कहीं इससे भी कड़ा कदम ना उठाना पड़े. उससे पहले बातचीत के लिए आ जाएं.” प्रेस कॉन्फ्रेंस में योगेंद्र यादव ने कहा, ”देश और दुनिया मे आज सब तरफ उत्सव मनाया जा रहा है, उसकी बधाई. किसान आज देश में अपनी छाप छोड़ने के लिए खड़े हैं. इस आंदोलन ने 5 झूठ का पर्दाफाश किया . पहला- ये आंदोलन किसानों का नहीं है. आप खुद चेक करें. दूसरा- किसानों को बरगलाने का काम किया जा रहा है. किसानों को सब पता है . तीसरा- सिर्फ पंजाब का आंदोलन है. यहां सब बैठे हैं. देश के कोने कोने से. उत्तराखंड से आए हैं. पंजाब के किसानों ने शुरुआत सभी किसानों के लिए की है. चौथा- इसकी कोई लीडरशिप नहीं है. 30 संगठनों का समहू है. इतनी अच्छी लीडरशिप मैंने कभी नहीं देखी. 30 किसान संगठन हर रोज मिल रहे हैं. क्लियर लीडरशिप है. पांचवां- पॉलिटिकल पार्टी ने करवाया. हरियाणा का किसान हमारे साथ है. ये आंदोलन ऐतिहासिक आंदोलन है.” भारती किसान यूनियन (दकुंडा) के जनरल सेक्रेट्री जगमोहन सिंह ने सिंघु बॉर्डर पर हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस में सभी को गुरु पर्व की बधाई दी और कहा, ” हमारे 30 संगठन की मीटिंग हुई. मुंह में राम राम बगल में छुरी. अमित शाह फ़ोन पर बात कर रहे हैं, लेकिन इसमें कोई सच्चाई नहीं है. ये पंजाब का संघर्ष नहीं है. ये सभी का संघर्ष है . सभी की जो स्थिति है, हम जहां हैं वही रहंगे, और आगे कैसे बढ़ना है. आज देश के किसान अपने मन की बात सुनाने आए हैं.”

MP : अपराधियों पर सीएम शिवराज सख्त, कहा- अपराधियों को दफन करना है

भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को भोपाल में आपात बैठक बुलाई। इसमें शिवराज ने अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में गुंडों बदमाशों और रसूखदारों पर कार्रवाई के निर्देश दिए। बैठक में डीजीपी से लेकर प्रमुख सचिव और भोपाल डीआईजी, नगर निगम कमिश्नर और कलेक्टर को तलब किया गया गया था। शिवराज ने कहा कि मध्यप्रदेश में गुंडों बदमाशों और अपराधियों को दफन करना है। इनके खिलाफ दंड ही एकमात्र उपाय है। उनके खिलाफ कार्रवाई चलती रहना चाहिए। एक तो सीधे सुशासन का कार्य करना है। जहां गड़बड़ी की संभावना हो, वहां बिना देरी समय पर कार्रवाई हो। उदाहरण बनना चाहिए। भोपाल को मॉडल बनाना है। यहां मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री, मुख्य सचिव और डीजीपी तक हैं। मध्यप्रदेश का मॉडल भोपाल कैसे बने, आप बैठकर सभी चीजों पर नए सिरे से विचार करें। 10 से 15 दिन में रूप रेखा बनाकर विकास के लिए प्लान तैयार करें। प्रशासन, सुशासन, सुविधाओं और विकास पर काम करना है। मेट्रो के कार्य में तेजी लाना है। धीमी गति से काम नहीं चलेगा। अगर बाधा है, तो उसे दूर करने के उपाय करें। अगर दिक्कत है, तो तत्काल सीएमओ को सूचना दें। हम इसे दूर करेंगे। इससे पहले सीएम ने ईरानी डेरे के बाहर हुई कार्रवाई की जानकारी भी ली। उन्होंने अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई में तेजी लाने के लिए कहा। इसके अलावा, सीएम ने कोरोना को लेकर अधिकारियों से चर्चा की। मुख्यमंत्री ने बैठक में अधिकारियों को अतिक्रमण और कोरोना से निपटने के लिए कार्रवाई के निर्देश दिए। बैठक के बाद शिवराज सिंह शाहगंज रवाना हो गए। सीएम 7 दिसंबर को वीसी करेंगे मुख्यमंत्री चौहान 7 दिसंबर को कलेक्टरों और संभागायुक्तों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बात करेंगे। इसमें शिवराज 13 नवंबर 2020 को आयोजित वीडियो कांफ्रेंसिंग में दिए गए निर्देशों का पालन प्रतिवेदन लेंगे। साथ ही आयुष्मान भारत कार्यक्रम-निरामयम मध्यप्रदेश योजना, मिलावट से मुक्ति अभियान, खरीफ-2020 उपार्जन एवं रबी-2020-21 हेतु यूरिया/खाद उपलब्धता, आबादी सर्वे की समीक्षा करेंगे।

Farmers Protest: किसान यूनियन का बड़ा ऐलान- हम बुराड़ी कभी नहीं जाएंगे, वो खुली जेल है

नई दिल्ली. नए कृषि कानूनों (Farm Laws 2020) को वापस लेने तथा अपनी फसल के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी की मांग को लेकर आंदोलन (Farmers Protest) कर रहे किसान पीछे हटने को तैयार नहीं हैं. किसान संघों ने रविवार दोपहर की मीटिंग में गृह मंत्री अमित शाह के प्रस्‍ताव को खारिज कर दिया है. इसके बाद मीटिंग के फैलने की जानकारी देने के लिए किसान संघ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा कि हम सरकार की ओर से बुराड़ी में प्रदर्शन करने का प्रस्तव नामंजूर करते हैं. किसान संगठन बिना शर्त सरकार से बातचीत चाहता है. उन्‍होंने कहा कि बुराड़ी ओपन जेल की तरह है और वह आंदोलन की जगह नहीं है. किसानों ने कहा कि हमारे पास पर्याप्‍त राशन, हम 4 महीने तक हम रोड पर बैठ सकते हैं. आंदोलन कर रहे किसानों ने दिल्ली की सीमाओं पर ही डटे रहने का फैसला किया केंद्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों ने रविवार को फैसला किया कि वे राष्ट्रीय राजधानी के बुराड़ी मैदान में नहीं जाएंगे और दिल्ली की सीमाओं पर डटे रहेंगे. हजारों किसानों ने लगातार चौथे दिन रविवार को सिंघू और टिकरी बॉर्डर पर अपना प्रदर्शन जारी रखा. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को किसानों से अपील की थी कि वे बुराड़ी के संत निरंकारी मैदान चले जाएं. शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए किसानों को इस मैदान की पेशकश की गई है. शाह ने यह भी कहा था कि निरंकारी मैदान में चले जाने के बाद केंद्र सरकार उनसे वार्ता करने को तैयार है. भारतीय किसान संघ (डकौंदा) के अध्यक्ष बूटा सिंह बुर्जगिल ने फोन पर बताया, ‘हमने फैसला किया है कि हम दिल्ली की सीमाओं पर जमे रहेंगे. हम बुराड़ी नहीं जाएंगे.’ उन्होंने कहा कि कई किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने यह फैसला किया है. बीकेयू (कादियान) के प्रमुख हरमीत सिंह कादियान ने भी कहा कि प्रदर्शनकारी बुराड़ी मैदान नहीं जाएंगे. केंद्रीय गृह मंत्री की अपील पर प्रतिक्रिया देते हुए कादियान ने सिंघू बॉर्डर के नजदीक पत्रकारों से कहा कि केंद्र सरकार को किसानों के साथ बातचीत करने के लिए कोई शर्त नहीं थोपनी चाहिए. उन्होंने कहा, ‘हम कोई पूर्व शर्त नहीं चाहते हैं. हम चाहते हैं कि बिना किसी शर्त के बैठक हो. हम बातचीत के लिए राज़ी हैं.’ किसान नेता ने कहा कि दिल्ली की सीमाओं पर हजारों किसान जल्द ही प्रदर्शन में शामिल हो सकते हैं. गौरतलब है कि ऑल-इंडिया किसान संघर्ष को-ओर्डिनेशन कमेटी, राष्ट्रीय किसान महासंघ और भारतीय किसान संघ (बीकेयू) के अलग-अलग धड़ों ने ‘दिल्ली चलो’ मार्च का आह्वान किया था. किसान केंद्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. उनको आशंका है कि इससे न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था खत्म हो जाएगी और उन्हें बड़े उद्योगपतियों के “रहम“ पर छोड़ दिया जाएगा. केंद्र सरकार ने पंजाब के किसानों के कई संगठनों को दूसरे चरण की बातचीत करने के लिए तीन दिसंबर को दिल्ली में आमंत्रित किया है.

लिफ्ट में फंसकर एक 5 साल के बच्चे की दर्दनाक मौत, सीसीटीवी में कैद हुई घटना

मुंबई। मुंबई के धारावी इलाके में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है. यहां लिफ्ट में फंसकर एक पांच साल के बच्चे की मौत हो गई. ये पूरी घटना लिफ्ट में लगे सीसीटीवी में कैद हो गई है. बता दें कि मुंबई के धारावी इलाके की घोषी शेल्टर बिल्डिंग की लिफ्ट में ये हादसा हुआ है. दरअसल तीन भाई बहन ग्राउंड फ्लोर से चौथे मंजिल पर आने के लिए चढ़े. तीनों बच्चे खेलते हुए लिफ्ट में चढ़े और लिफ्ट का बटन दबा दिया, जिस वक्त ये हादसा हुआ तब करीब पौने 1 बजे हुए थे. कुछ ही पल में लिफ्ट ग्राउंड फ्लोर से चौथी मंजिल तक आ गई, पहले दोनों लड़की बाहर निकली उसके बाद पांच वर्षीय हुजैफा बाहर निकलता है लेकिन इस से पहले की हुजैफा बाहर निकलता लिफ्ट के बाहर का लकड़ी का दरवाजा बंद हो जाता है, हुजैफा लिफ्ट के दरवाजे और बाहर के लकड़ी के दरवाजे के बीच मे फंस जाता है, और अगले ही पल लिफ्ट चल पड़ती है. हुजैफा भी लिफ्ट के साथ नीचे चला जाता है जिस से उसकी घटनास्थल पर ही मौत हो जाती है. हादसे के बाद पहुंची फायर ब्रिगेड की मदद से हुजैफा को बाहर निकाला जाता है. इस घटना में साहू नगर पुलिस ने ADR के तहत मामला दर्ज कर जांच कर रही है.

MP : मध्यप्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के लिए विशेष नगद योजना

भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार प्रदेश में कार्यरत सरकारी कर्मचारियों के लिए विशेष नगद योजना लेकर आई है। इस योजना के तहत सरकारी कर्मचारियों को 12,000 की खरीदी पर नगद 4000 की छूट मिलेगी । इस योजना का लाभ प्रदेश के 11 लाख कर्मचारियों को मिलेगा। केंद्र सरकार की तर्ज पर राज्य सरकार ने अपने 11 लाख कर्मचारियों को विशेष नगद पैकेज योजना की घोषणा की है। इसके तहत अधिकारी बाजार से 12 हजार रुपए की सामग्री खरीदते हैं तो 4 हजार रुपए का भुगतान राज्य सरकार करेगी। तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लिए भी इसी तरह की छूट रहेगी। वित्त विभाग ने शनिवार को इसके आदेश जारी कर दिए हैं। इसमें शर्त ये रखी गई है कि नगद पैकज योजना में छूट की पात्रता 12 प्रतिशत जीएसटी लगने वाली वस्तुओं की खरीदी पर ही मिलेगी। खरीदी गई वस्तु का डिजिटल पेमेंट किया गया हो। सरकार के जिन कर्मचारियों को इस योजना का लाभ मिलेगा, उनमें नियमित, कार्यभारित एवं आकस्मिकता निधि से वेतन पाने वाले कर्मचारी शामिल हैं। इस योजना का लाभ 31 मार्च 2021 तक मिलेगा और डिजिटल पेमेंट का बिल 30 मई तक कार्यालय प्रमुख को देना होगा। इस अवधि में खरीदी के मामलों में ही इस योजना का लाभ दिया जाएगा। सरकार का ये आदेश सातवें वेतनमान के एरियर की तीसरी किश्त 25 प्रतिशत के भुगतान और फेस्टिवल एडवांस 10 हजार रुपए के अलावा है। दरअसल, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने बजट में घोषणा की थी कि राज्य सरकार नगद पैकेज योजना के संबंध में योजनाएं शुरू करें, जिसका लाभ कर्मचारियों को मिल सके। इसी तर्ज पर राज्य सरकार ये योजना लेकर आई है। इसकी एक बड़ी वजह बाजार को मंदी से भी उबारना है। योजना के मुताबिक 12% से ज्यादा के GST वाले समान खरीदने पर ये छूट मिलेगी। डिजिटल पेमेंट करने पर ही कर्मचारी को 4000 की छूट मिलेगी।

MP में लव जिहाद : सलमान ने उमेश बनकर की लव मैरिज, अब बना रहा धर्म परिवर्तन के लिए दबाव

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार लव जिहाद के खिलाफ विधेयक लाने वाली है, लेकिन उसके पहले ही भोपाल में लव जिहाद का मामला सामने आया है। शुक्रवार शाम गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के निवास पर मदद मांगने एक युवती पहुंची। पीड़ित का आरोप है कि काफी दिनों तक उसका पति उमेश नाम से उसके साथ रहा, लेकिन बाद में असली चेहरा सामने आया। युवती ने कहा कि अब पति उस पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बना रहा है। गृह मंत्री ने भोपाल डीआईजी को मामले की जांच का आदेश दिया है। पीड़ित को मदद का भरोसा दिया है। युवती का कहना है कि गेंहूखेड़ा इलाके में रहने वाले युवक से उसकी करीब साल भर पहले मुलाकात हुई थी। उस वक्त युवक ने अपना नाम उमेश बताया। पीड़ित युवती से मन्दिर में शादी कर ली। युवती का शादी के बाद एक बच्चा भी है। युवती का कहना है, बाद में पता चला कि उसके पति का नाम उमेश नहीं, बल्कि सलमान है। धर्म परिवर्तन के लिए दबाव युवती का आरोप है कि धर्म परिवर्तन ना करने पर उसे घर में प्रताड़ित किया जा रहा है. पीड़ित युवती की मानें, तो आरोपी पति ने उसके बच्चे को भी मारने की कोशिश की। इस पर गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा है, मामले की जांच की जाएगी और दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. लव जिहाद के खिलाफ कानून इधर, मध्य प्रदेश सरकार लव जिहाद रोकने के लिए सख्त कानूनी प्रावधान करने की तैयारी कर रही है। हाल ही में इसका ड्राफ्ट भी तैयार किया गया है, जिसके तहत लव जिहाद के आरोप सही पाए जाने पर दोषी के खिलाफ 10 साल तक की सजा हो सकती है।

किसानों को दिल्ली आने से रोकने के लिए पुलिस ने सुरक्षाबलों ने हाईवे खोद डाला

पानीपत। दिल्ली करनाल हाईवे पूरी तरह बंद कर दिया है। दिल्ली को हरियाणा से जोड़ने वाले सिंघु बॉर्डर पर सैकड़ों की संख्या में पुलिसकर्मी और अर्धसैनिक बलों के जवान तैनात किए गए हैं। यहां दिल्ली वाले छोर पर दिल्ली पुलिस की कई टुकड़ियां, हरियाणा वाले छोर पर हरियाणा पुलिस और इनके बीच BSF, RAF(रैपिड एक्शन फोर्स) और CISF की तैनाती की गई है। जवानों की यह तैनाती पंजाब और हरियाणा के किसानों को किसी भी तरह से दिल्ली पहुंचने से रोकने के लिए की गई है। पंजाब और हरियाणा के हजारों किसान बीते काफी समय से कृषि संबंधी नए कानूनों का विरोध कर रहे हैं। इसी विरोध को आगे बढ़ाते हुए किसान संगठनों ने 26 नवंबर से ‘दिल्ली कूच’ का कार्यक्रम रखा है और इसमें शामिल होते हुए लाखों किसान अपने ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर दिल्ली की तरफ बढ़ रहे हैं। इन किसानों में सबसे बड़ी संख्या पंजाब और हरियाणा के अलग-अलग जिलों से आए किसानों की ही है। किसानों को दिल्ली पहुंचने से रोकने के लिए हरियाणा और दिल्ली पुलिस कई तरह की रणनीति अपना रही है। पुलिस ने दिल्ली-करनाल हाईवे को जगह-जगह बैरिकेड लगाकर बंद कर दिया है और कई जगह तो नक्सलियों जैसी रणनीति अपनाते हुए सड़क तक खोद डाली है। सोनीपत जिले की गनौर तहसील का नजारा इसी कारण बिलकुल किसी नक्सली इलाके जैसा बन पड़ा है। जिस तरह बस्तर के कई नक्सल प्रभावित इलाकों में सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे दिखाई पड़ते हैं, ठीक वैसे ही गड्ढे इन दिनों सोनीपत के नजदीक हाईवे पर दिख रहे हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि बस्तर में ये गड्ढे नक्सलियों द्वारा किए जाते हैं, ताकि सुरक्षा बल के जवान उन तक न पहुंच सकें, जबकि सोनीपत में सड़क खोदने का काम खुद सुरक्षाबलों ने किया है, ताकि किसान इन सड़कों पर आगे न बढ़ सकें। सड़क खोदने के साथ ही यहां पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए नक्सलियों जैसी एक अन्य रणनीति भी अपनाई है। हाइवे पर चलने वाले ट्रकों को रोककर पुलिसकर्मी ने आड़ा-तिरछा खड़ा करवा दिया गया है, जिसके चलते ये ट्रक ही कई किलोमीटर लंबे बैरिकेड बन गए हैं। किसानों का आरोप है कि ऐसा करके पुलिस आम ट्रक ड्राइवरों और उनकी निजी संपत्ति को अपनी ढाल की तरह वैसे ही इस्तेमाल कर रही है जैसे नक्सली आम लोगों को अपनी ढाल बनाने का काम करते हैं। सिरसा के रहने वाले किसान नेता सुरेश ढाका बताते हैं, ‘हमने इतने सालों में ऐसा पहले कभी नहीं देखा कि किसी आंदोलन को रोकने के लिए पुलिस इस हद तक गई हो। आज करनाल में किसानों को रोकने के लिए पुलिस ने आम ट्रक ड्राइवरों को अपनी ढाल बनाकर आगे खड़ा कर दिया था। वहां उनके लदे हुए ट्रक एक पुल पर खड़े करवा दिए थे और उनसे चाबियां छीन ली गई थीं, ताकि वे ट्रक हटा न सकें और इससे पूरी रोड जाम कर दी गई। लेकिन किसानों की संख्या इतनी ज्यादा थी कि उन्होंने धक्के लगाकर ही ट्रकों को किनारे कर दिया और वहां लगे बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ गए।’ पंजाब और हरियाणा के हजारों किसान बीते दो दिनों से कई बैरिकेड पार करते हुए पानीपत से आगे बढ़ चुके हैं और दिल्ली के काफी नजदीक आ गए हैं। लेकिन सोनीपत में खुदी हुई सड़कों और कई किलोमीटर में खड़े ट्रकों से जाम हुई सड़क को ये किसान अपने ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ पार कर सकेंगे? ये पूछने पर कुरुक्षेत्र से आए किसान जसमेर सिंह कहते हैं, ‘पुलिस चाहे कितने भी गड्ढे खोद ले किसानों की संख्या इतनी ज्यादा है कि अगर वो एक-एक मुट्ठी भरकर मिट्टी भी इन गड्ढों में डालेंगे तो गड्ढे भर जाएंगे। ट्रकों को भी किसान हटाकर अपना रास्ता बना ही लेंगे, जैसे अब तक बनाते हुए यहां तक पहुंचे हैं, ऐसे ही दिल्ली तक भी पहुंच जाएंगे। हम पूरे महीने का राशन-पानी लेकर निकलें हैं। अब चाहे जितने भी दिन लगें, लेकिन बिना अपनी शर्तें मनवाए हम लौटने वाले नहीं हैं।’

MP : आरोपी, संदेही और गिरफ्तार व्यक्तियों का जुलूस नहीं निकाल सकेगी पुलिस

भोपाल . भोपाल. मध्यप्रदेश में अब न तो किसी बदमाश का जुलूस निकाला जाएगा और न ही उसे सार्वजनिक किया जाएगा। पुलिस मुख्यालय मध्यप्रदेश ने इस संबंध में प्रदेश के सभी एडीजी, आईजी, डीआईजी और एसपी को निर्देश जारी कर दिए हैं। इसमें कहा गया है कि अब जुलूस निकालने पर रोक लगा दी गई है। आरोपी, संदेही और गिरफ्तार लोगों को पुलिस सार्वजनिक नहीं करेगी। सभी पुलिस अधीक्षकों को इस आदेश का कड़ाई से पालन करना होगा। अपराध अनुसंधान विभाग के एडीजी कैलाश मकवाना ने यह आदेश जारी किए। इतना ही नहीं किसी आरोपी या संदेही के फोटो भी सार्वजनिक नहीं किए जाएंगे। बदमाशों में खौफ बनाने जुलूस निकाला जाता था मध्यप्रदेश पुलिस ने बदमाशों और अपराधियों में पुलिस का खौफ पैदा करने के साथ ही लोगों में विश्वास बनाने के इरादे से इनका जुलूस निकालना शुरू किया था। इसका एक उद्देश्य यह भी था कि लोग इनके बारे में जाने, ताकि ऐसे लोगों से बचकर रहें। इसमें मुख्य रूप से चोरी, लूट, रेप, छेड़छाड़ और गुंडागर्दी करने वाले अपराधी होते थे। पिछले दिनों हाई कोर्ट ने एक फैसला सुनाते हुए पुलिस को आरोपियों और संदिग्धों के फोटो जारी करने से रोक लगा दी थी। इसके बाद से मध्यप्रदेश में पुलिस ने सार्वजनिक रूप से आरोपी, संदेही और गिरफ्तार लोगों के फोटो देना बंद कर दिया।

पंजाब-हरियाणा के बाद अब यूपी में सड़कों पर उतरे किसान

मेरठ। कृषि कानून के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन लगातार बड़ा होता जा रहा है. पंजाब-हरियाणा-दिल्ली के बाद अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी किसानों के प्रदर्शन का असर दिख रहा है. मेरठ, मुजफ्फरनगर, बागपत में भी किसान सड़कों पर उतर गए हैं और हाइवे को जाम कर दिया गया है. बीते दिन ही उत्तर प्रदेश भारतीय किसान यूनियन की ओर से ऐलान किया गया था, वो शुक्रवार दोपहर को कृषि कानून के खिलाफ सड़कों पर उतरेंगे. जिसका असर दिखना शुरू हो गया है. अब किसानों की ओर से दिल्ली-देहरादून हाइवे पर जाम लगाया जा रहा है. गुरुवार को भारतीय किसान यूनियन के राकेश टिकैत ने बयान दिया था कि पंजाब-हरियाणा के किसानों की जो मांग है वो उसका समर्थन करते हैं, ऐसे में उनके संगठन के सभी किसान सड़कों पर उतरेंगे. प्रदर्शन को लेकर किसानों ने बीते दिन मुजफ्फरनगर में महापंचायत भी की थी. उत्तर प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में शुक्रवार को किसानों के प्रदर्शन होने की बात कही गई थी, लेकिन इसकी कोई झलक नहीं दिखी. पीलीभीत में किसान यूनियन के नेता मनजीत सिंह का कहना है कि कृषि कानूनों का वापस होना जरूरी है, हालांकि अभी प्रदर्शन को लेकर उन्हें कोई निर्देश नहीं मिला है. लखीमपुर में किसान नेताओं का कहना है कि पूर्वांचल में किसानों के प्रदर्शन का कोई असर नहीं है और यूपी के किसान सत्ता से डरने लगे हैं. इसके अलावा देवरिया, सहारनपुर जैसे शहरों में भी किसानों के आंदोलन का कोई बड़ा असर नहीं दिखा.

कोलकाता में भाजपा-पुलिस में झड़प भाजपा कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया

कोलकाता : कोलकाता में गुरुवार को भाजपा कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया है। इनमें महिलाएं भी शामिल हैं। भाजपा कार्यकर्ता माझेरहाट ब्रिज को शुरू करने में हो रही देरी को लेकर विरोध कर रहे थे। वे कंस्ट्रक्शन साइट की तरफ बढ़ रहे थे, इस बीच पुलिस ने उन्हें रोका तो झड़प हो गई। पुलिस के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया था, इसलिए हल्का लाठीचार्ज करना पड़ा। कैलाश विजयवर्गीय भी प्रदर्शन में शामिल होने वाले थे माझेरहाट ब्रिज का एक हिस्सा 4 सितंबर 2018 को गिर गया था। हादसे में 2 लोगों की मौत हो गई थी। उसके बाद ब्रिज को गिराकर नए सिरे से काम शुरू किया गया था। ब्रिज अगले महीने शुरू होने की उम्मीद है। ब्रिज के काम में देरी होने पर भाजपा विरोध कर रही है। न्यूज एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक गुरुवार के प्रदर्शन में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय भी शामिल होने वाले थे, लेकिन पुलिस ने पहले ही भीड़ को रोक दिया।

MP : पैसों के विवाद में अपने भाई, भाभी और भतीजी को जिंदा जलाया, खुद भी फांसी लगाई

अनूपपुर. जिले के जैतहरी विकासखंड अंतर्गत ग्राम धनगवां में हृदयविदारक घटना सामने आई है। यहां एक युवक ने पारिवारिक कलह के चलते अपने ही सगे भाई, भाभी और एक भतीजी और भतीजे को जिंदा जला दिया। इस वीभत्स हत्याकांड को अंजाम देने के बाद आरोपी ने खुद भी फांसी लगा ली। इसमें तीन लोगों की मौत हो गई है, जबकि भतीजा शहडोल जिला अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहा है। घटना रात डेढ़ से दो बजे के बीच की है। पुलिस ने मामला दर्ज कर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मृतक ओमकार विश्वकर्मा (40) पिता छोटेलाल विश्वकर्मा, कस्तूरिया (35) पति ओमकार विश्वकर्मा, निधि (16) पिता ओमकार विश्वकर्मा हैं। वहीं, आशीष (17) पिता ओमकार विश्वकर्मा को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। आरोपी दीपक पिता छोटेलाल विश्वकर्मा ने फांसी लगा ली है। गांव में छोटेलाल के तीन पुत्र ओमकार विश्वकर्मा, चेतराम और दीपक साथ में घर में रहते थे। इनमें दीपक सबसे छोटा था। वे अपना अलग व्यवसाय कर रहे थे। छोटा भाई दीपक अविवाहित था। उसे गैरेज खोलने के लिए दोनों भाइयों ने एक साल पहले बैंक से 10 लाख रुपए लोन दिलवाया था। दीपक ने अपना व्यवसाय भी प्रारंभ कर दिया था, लेकिन किश्त समय पर ना जमा करने को लेकर दोनों में विवाद होता रहता था। रात डेढ़ बजे मौत का तांडव रात करीब डेढ़ बजे ओमकार विश्वकर्मा, अपनी पत्नी कस्तूरिया, बेटी निधि कमरे में सोए हुए थे। आरोपी दीपक ने पहले भाई के कमरे में दरवाजे के नीचे से पेट्रोल गिराकर आग लगा दी। कमरे में ओमकार, कस्तूरिया और बेटी निधि सोए हुए थे। इसके बाद दीपक ने आशीष के कमरे में भी पेट्रोल डालकर आग लगा दी। आग लगाते वक्त वक खुद भी झुलस गया। चीख-पुकार सुनकर चेतराम और उसका परिवार भी जाग गया। उसने देखा तो पूरे घर में आग लगी हुई थी। घबराकर उसने अपने परिवार को बाहर निकाला। भतीजे आशीष के कमरे का दरवाजा खोलकर उसे निकाला। अंदर जाने की कोशिश की, लेकिन आग फैलने के कारण वह अंदर नहीं जा सका। इसके बाद उसने दीपक के कमरे में खिड़की से झांका, तो वह फंदे पर लटका हुआ था। खुद ने भी लगा ली फांसी दीपक के सिर पर खून सवार था। आग लगाते समय वह खुद भी झुलस गया था। जलने के बाद कोई बाहर ना भाग पाए, इसलिए बाहर से दरवाजा बंद कर दिया। इसके बाद खुद भी कमरे में जाकर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। दीपक की नफरत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उसने घर के बाहर खड़ी मोटरसाइकिल को भी आग के हवाले कर दिया। आग की लपटें देख ग्रामीण भी जाग गए, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। लोगों ने आग बुझाने की कोशिश की। लोगों ने पुलिस को भी सूचना दी। दीवार पर लिखा- हत्या का कारण दीपक के कमरे में दीवार पर कोयले से कुछ शब्द लिखे हैं, जिसे इस हत्याकांड का कारण बताया जा रहा है। दीवार पर लिखा है कि ” चेतराम के साथ मिलकर जुग्गा उसे घर से भगा रहे थे। तेरा यहां कुछ नहीं है। वे जुआ खेलने का भी आरोप लगा रहे थे”

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