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स्पेशल ओलंपिक विश्व शीतकालीन खेलों में भारत ने 49 सदस्यीय दल किया रवाना

नई दिल्ली स्पेशल ओलंपिक भारत ने इटली के ट्यूरिन में होने वाले स्पेशल ओलंपिक विश्व शीतकालीन खेलों 2025 में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए तैयार 49 सदस्यीय दल (जिसमें 30 एथलीट और 19 सहायक कर्मचारी शामिल हैं) के लिए बुधवार को एक भव्य विदाई समारोह आयोजित किया। मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में हुए इस समारोह में युवा मामले और खेल मंत्री मनसुख मांडविया, स्पेशल ओलंपिक भारत की अध्यक्ष मल्लिका नड्डा और स्पेशल ओलंपिक भारत के कार्यकारी निदेशक वी.के. महेंद्रू मौजूद थे। मांडविया ने इस अवसर पर कहा, “स्पेशल ओलंपिक विश्व खेलों में भाग लेने वाले हमारे अविश्वसनीय भारतीय एथलीट दृढ़ संकल्प, लचीलापन और उत्कृष्टता की भावना को दर्शाते हैं। आपका समर्पण और जुनून देश को प्रेरित करता है, यह साबित करता है कि असली ताकत सीमाओं को लांघने के साहस में निहित है। पूरा देश आप सभी को एक्शन में देखने के लिए बेहद उत्साहित है। अपनी सफलता से तिरंगा ऊंचा फहराएं, पूरा देश आपका समर्थन कर रहा है।” 8 से 15 मार्च तक इटली में होने वाले स्पेशल ओलंपिक विंटर वर्ल्ड गेम्स में टीम इंडिया के 30 खिलाड़ी 6 खेल विधाओं – अल्पाइन स्कीइंग, क्रॉस कंट्री स्कीइंग, फ्लोरबॉल, शॉर्ट-ट्रैक स्पीड स्केटिंग, स्नोबोर्डिंग और स्नोशूइंग में भाग लेंगे। स्पेशल ओलंपिक वर्ल्ड विंटर गेम्स में 102 देशों के 1500 एथलीट हिस्सा लेंगे, जो आठ खेल विधाओं में प्रतिस्पर्धा करेंगे। उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने भारतीय एथलीटों को शुभकामनाएं दीं और वैश्विक मंच पर अपनी सफलता से देश को गौरवान्वित करने के लिए तैयार होने पर उन्हें अपने शब्दों से प्रेरित किया। एथलीटों को माला पहनाकर सम्मानित किया गया और समारोह के अंत में उन्हें सौभाग्य के प्रतीक के रूप में पारंपरिक हिमाचली ऊनी कैप भेंट किए गए। “हमारे एथलीट देश के लिए प्रेरणा हैं, जो दृढ़ संकल्प और खेल कौशल की शक्ति का प्रदर्शन करते हैं। हमने आपकी पूरी यात्रा देखी है और आपने कैसे हर संघर्ष और चुनौती को पार किया है । इन खेलों के लिए चुने जाने पर आपको बहुत-बहुत बधाई। मल्लिका ने कहा, “कठिन समय में अपने अंदर मौजूद लचीलेपन को याद रखें और आप हर बाधा को पार कर सकेंगे। इतिहास की किताबों में अपना नाम दर्ज कराने की कोशिश में हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।”

टैरिफ वॉर के बीच भारत ने फिक्स किया रूस दौरा, समकक्ष के साथ चर्चा और शीर्ष नेतृत्व से भी मुलाकात कर सकते हैं

नई दिल्ली अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी कांग्रेस में अपने पहले संबोधन में कई बड़ी घोषणाएं की। इसमें भारत, जापान और साउथ कोरिया पर रिसेप्रोकल टैरिफ शामिल है। ट्रंप ने कहा कि यह 2 अप्रैल से लागू हो जाएगा। उन्होंने बाहरी सामानों को घृषित और गंदा कहा, जो बिना टेस्टिंग के अमेरिका आ रहे हैं। अमेरिका के इस झटके के बीच भारत ने रूस दौरा फिक्स किया है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री 7 मार्च को रूस की यात्रा पर जा रहे हैं। भारत के लिए यह दौरा अहम होने वाला है। भारत और रूस के बीच व्यापक द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, वे अपने रूसी समकक्ष के साथ चर्चा करेंगे और शीर्ष रूसी नेतृत्व से भी मुलाकात कर सकते हैं। व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति प्रमुख विषय इस बैठक में व्यापार और निवेश के विस्तार, खासतौर पर भारतीय निर्यात को बढ़ावा देकर द्विपक्षीय व्यापार संतुलित करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। साथ ही, पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच रूस से भारत को ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी बातचीत होगी। 56 अरब डॉलर तक द्विपक्षीय व्यापार भारत-रूस द्विपक्षीय व्यापार वर्तमान में लगभग 66 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है, लेकिन यह रूस के पक्ष में झुका हुआ है, क्योंकि 2022 से भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल की भारी खरीद की गई है। भारत लंबे समय से रूस से अधिक व्यापारिक पहुंच की मांग कर रहा है ताकि व्यापार संतुलित किया जा सके। दोनों देशों ने 2030 तक 100 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य को प्राप्त करने का संकल्प लिया है। रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक परिदृश्य पर चर्चा इस यात्रा के दौरान रूस यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के हालिया प्रयासों पर भारत को जानकारी देगा। यह वार्ता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रति नरम रुख और यूरोप को दी जाने वाली सुरक्षा गारंटियों से अमेरिका के पीछे हटने की पृष्ठभूमि में हो रही है। यूरोपीय देशों ने रूस के तेल निर्यात को रोकने के लिए प्रतिबंधों को कड़ा कर दिया है, जिससे रूस की वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो रही है। हाल ही में, रूस के ‘शैडो फ्लीट’ पर नए प्रतिबंधों ने उसकी तेल आपूर्ति क्षमता को और सीमित कर दिया है। भारत-रूस संबंधों को नई दिशा विदेश सचिव की यह यात्रा दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने और व्यापारिक संतुलन बनाने का एक महत्वपूर्ण अवसर होगी। साथ ही, भारत और रूस वैश्विक चुनौतियों और यूक्रेन युद्ध के भविष्य पर आपसी दृष्टिकोण साझा करेंगे। बता दें कि भारत और रूस के बीच लंबे समय से मजबूत रक्षा, व्यापार और ऊर्जा सहयोग रहा है, और यह यात्रा दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभा सकती है।

श्रीनगर : 25 जून से शुरू हो जाएगी अमरनाथ यात्रा, 9 अगस्त तक होगी यात्रा अवधि….

श्रीनगर  इस साल अमरनाथ यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। श्री अमरनाथ यात्रा 2025 के लिए तारीख सामने आ गई है। श्रद्धालुओं के लिए बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई शुरू होगी और 9 अगस्त तक चलेगी। 39 दिनों तक चलने वाली यात्रा के लिए प्रशासन ने खास इंतजाम किए हैं। श्री अमरनाथ यात्रा का शेड्यूल जारी हो गया। इसे लेकर श्रद्धालु 3 जुलाई से 9 अगस्त तक बाबा बर्फानी के दर्शन कर सकेंगे। अमरनाथ यात्रा 39 दिनों तक चलेगी। जानकारी के मुताबिक श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड (Shri Amarnath Ji Shrine Board) जल्द ही एडवांस पंजीकरण के लिए अधिकृत किए जाने वाले बैंकों की शाखाओं की विस्तार से जानकारी उपलब्ध करवाएगा। चूंकि पंजीकरण के लिए स्वास्थ्य प्रमाणपत्र जरूरी है। इसलिए देश भर के राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में स्वास्थ्य प्रमाणपत्र बनने वाले अस्पतालों व डॉक्टरों की टीमों की सूची जारी की जाएगी। आम तौर पर पंजाब नेशनल बैंक, यस बैंक और जम्मू कश्मीर बैंकों की करीब साढ़े पांच सौ शाखाओं से पंजीकरण करने की व्यवस्था होती है। बोर्ड जल्द ही ग्रुप पंजीकरण के लिए दिशा-निर्देश जारी करेगा। साथ ही ऑनलाइन पंजीकरण को भी खोला जाएगा। कितनी ऊंचाई पर हैं अमरनाथ गुफा? यात्रा स्कंद षष्ठी के शुभ अवसर पर शुरू होती है और श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर समाप्त होती है। वर्ष के इस समय के दौरान, तीर्थयात्रियों के लिए मौसम काफी सुखद रहता है। यह क्षेत्र वर्ष के बाकी समय बर्फ से ढका रहता है, इसलिए उन महीनों के दौरान यहां नहीं जाया जा सकता है। अमरनाथ की यात्रा श्रीनगर और पहलगाम से शुरू होती है और अमरनाथ गुफा तक जाती है जो 3,888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इन मार्गों से होती है अमरनाथ यात्रा 38 दिनों तक चलने वाली अमरनाथ यात्रा दो रास्तों से होती है। एक एास्ता अनंतनाग जिले में पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबा नुनवान-पहलगाम मार्ग का है जबकि दूसरा रास्ता गांदेरबल जिले में 14 किलोमीटर लंबा बालटाल से होते हुए है। श्रीनगर से 141 किलोमीटर दूर और समुद्र तल से 12,756 फीट की ऊंचाई पर स्थित अमरनाथ यात्रा करने के लिए हर साल लाखों की तादाद में भक्त बाबा बर्फानी के दर्शन करने पहुंचते हैं। अमरनाथ यात्रा के लिए कहां से करें रजिस्ट्रेशनबाबा बर्फानी के दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं को रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होता है। ऐसे में भक्त श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड की ऑफिशियल वेबसाइट https://jksasb.nic.in पर जाकर रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। इसके अलावा अमरनाथ श्राइन बोर्ड की मोबाइल एप्लिकेशन से भी अमरनाथ यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है। यात्रा का मार्ग      मंद‍िर तक पहुंचने वाले मार्ग पर बेहद ही कठ‍िनाई होती है। लिहाजा इसल‍िए अमरनाथ यात्रा मार्ग को जुलाई-अगस्त के आसपास श्रावण के महीने में ही जनता के लिए खोला जाता है। सड़क के रास्ते अमरनाथ पहुंचने के लिए पहले जम्मू तक जाना होगा फिर जम्मू से श्रीनगर तक का सफर करना होता है। श्रीनगर से तीर्थयात्री पहलगाम या बालटाल पहुँचते हैं। पहलगाम या बालटाल तक आप किसी भी वाहन से पहुंच सकते हैं लेकिन इससे आगे का सफर आपको पैदल ही करना होता है। क्योंकि पहलगाम और बालटाल से ही श्री अमरनाथ यात्रा की शुरुआत होती है और पवित्र गुफा तक पहुंचने के लिए यहाँ से दो रास्ते निकलते हैं। पहलगाम से अमरनाथ की पवित्र गुफा की दूरी जहाँ करीब 48 किलोमीटर है वहीं बालटाल से गुफा की दूरी 14 किलोमीटर है। यहाँ से तीर्थयात्रियों को पैदल मार्ग से ही गुफा तक यात्रा करनी होती है।   चूँकि बालटाल से अमरनाथ गुफा तक की दूरी कम है और यह छोटा रूट है लिहाजा तीर्थयात्री कम समय में गुफा तक पहुंच सकते हैं। लेकिन यह रास्ता काफी कठिन और सीधी चढ़ाई वाला है इसलिए इस रूट से ज्यादा बुजुर्ग और बीमार नहीं जाते हैं। जबकि बात करें पहलगाम रूट की तो यह अमरनाथ यात्रा का सबसे पुराना और ऐतिहासिक रूट है। इस रूट से गुफा तक पहुंचने में करीब 3 दिन लगते हैं। लेकिन यह ज्यादा कठिन नहीं है। पहलगाम से पहला पड़ाव चंदनवाड़ी का आता है जो पहलगाम बेस कैंप से करीब 16 किलोमीटर दूर है यहां तक रास्ता लगभग सपाट होता है इसके बाद चढ़ाई शुरू होती है। इससे अगला स्टॉप 3 किलोमीटर आगे पिस्सू टॉप है। तीसरा पड़ाव शेषनाग है जो पिस्सू टॉप से करीब 9 किलोमीटर दूर है। शेषनाग के बाद अगला पड़ाव पंचतरणी का आता है जो शेषनाग से 14 किलोमीटर दूर है। पंचतरणी से पवित्र गुफा केवल 6 किलोमीटर दूर रह जाती है। पिछले साल 29 जून से शुरू हुई थी यात्रा पिछले साल अमरनाथ यात्रा के लिए पहला जत्था 29 जून को रवाना हुआ था. यह यात्रा रक्षाबंधन के दिन यानी 19 अगस्त तक चली थी. पिछले साल श्रद्धालुओं की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे. जम्मू-कश्मीर पुलिस की सुरक्षा विंग ने जम्मू में अमरनाथ बेस कैंप के आसपास के इलाके में तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम किए थे.

मुहम्मद यूनुस ने कहा- शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग करते हुए भारत को औपचारिक पत्र भेजे थे, लेकिन नहीं दिया भाव

ढाका बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना भारत में रह रही हैं। उनकी वतन वापसी के लिए मोहम्मद यूनुस सरकार ने ऐड़ी चोटी का जोर लगा दिया है, लेकिन भारत बिल्कुल भी भाव नहीं दे रहा। एक इंटरव्यू में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने कहा है कि ढाका ने अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग करते हुए भारत को औपचारिक पत्र भेजे थे, लेकिन नई दिल्ली से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली। ब्रिटेन स्थित स्काई न्यूज के साथ एक इंटरव्यू में, यूनुस ने कहा कि हसीना पर मानवता के खिलाफ अपराध के लिए मुकदमा चलाया जाएगा। 77 वर्षीय शेख हसीना पिछले साल 5 अगस्त से भारत में रह रही हैं। वे छात्रों के नेतृत्व में हुए बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन के बाद बांग्लादेश से भाग गई थीं, जिसने उनकी अवामी लीग की 16 साल की सरकार को गिरा दिया था। बांग्लादेश के अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी) ने हसीना और कई पूर्व कैबिनेट मंत्रियों, सलाहकारों, तथा सैन्य और नागरिक अधिकारियों के खिलाफ मानवता के खिलाफ अपराध और नरसंहार के लिए गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं। हसीना से जुड़े लोगों पर भी चलेगा केस मोहम्मद यूनुस ने कहा, “एक मुकदमा चलेगा। न केवल उनके खिलाफ, बल्कि उनके साथ जुड़े सभी लोगों – उसके परिवार के सदस्यों, उनके सहयोगियों के खिलाफ भी।” बांग्लादेश ने उसके लिए दो गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं। यूनुस ने कहा कि उन्होंने औपचारिक पत्र भेजे थे, लेकिन नई दिल्ली से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली। पिछले साल भारत ने नई दिल्ली में बांग्लादेश उच्चायोग से ‘नोट वर्बल’ या राजनयिक संचार प्राप्त करने की पुष्टि की थी, लेकिन इस पर टिप्पणी करने से इनकार किया था। हालांकि, यूनुस ने जोर देकर कहा कि हसीना को अदालत का सामना करना होगा, चाहे वह बांग्लादेश में शारीरिक रूप से मौजूद हों या भारत में अनुपस्थित हों। कुख्यात जेल का यूनुस ने किया जिक्र यूनुस ने कहा कि वह अब कुख्यात गुप्त जेलों में से एक में जो कुछ भी देखा, उससे वह हैरान रह गए, जिसका कोड नाम ‘हाउस ऑफ मिरर्स’ है। उन्होंने कहा, “यह सबसे भयावह चीज है जिसे आप देख सकते हैं, महसूस कर सकते हैं या देख सकते हैं।” हसीना पर सैकड़ों कार्यकर्ताओं के अपहरण, यातना और हत्या की निगरानी के लिए अपने सुरक्षा बलों और पुलिस का इस्तेमाल करने का आरोप है। वह आरोपों से इनकार करती हैं और कहती हैं कि उन्हें राजनीतिक रूप से सताया जा रहा है। यूनुस ने कहा कि कथित अपराधों में शामिल लोगों की संख्या और सीमा का पता लगाने में समय लग रहा है।

भारत में जल्द सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस का शुरु होने वाली है, अब सैटेलाइट से चलेगा इंटरनेट

नई दिल्ली भारत में जल्द सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस का शुरु होने वाली है। इस साल जून की शुरूआत में सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस शुरू हो सकती है। दूरसंचार नियामक इस सर्विस के लिए बेस तैयार कर रहा है, जो दूरदराज और समंदर तक में इंटरनेट पहुंचाने में सक्षम है। एक रिपोर्ट के मुताबिक सूत्रों ने बताया कि भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) सैटेलाइट कम्युनिकेश के प्राइसिंग और उपयोग पर सिफारिशों के एक सेट को अंतिम रूप दे रहा है, जिसे पिछले दो सालों से तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जैसे ही इसकी रूपरेखा तैयार होगी उसके बाद स्पेक्ट्रम एलोकेट किया जाएगा। रिलायंस जियो इन्फोकॉम, भारती एयरटेल और स्टारलिंक द्वारा सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस की तैयारी कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक एक सूत्र ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सैटेलाइट इंटरनेट सर्विसेज से जुड़ी सिफारिशें अंतिम रूप दिए जाने के करीब हैं। ब्रॉडबैंड की तुलना में यह सर्विस बहुत आगे है। खास बात है कि यह उन इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी देती है जहां केबल या मोबाइल टावर की सुविधा नहीं है। सैटेलाइट इंटरनेट में स्पेस में मौजूद सैटेलाइट्स का इस्तेमाल किया जाता है। दुनिया के कई देशों में सैटेलाइट इंटरनेट का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह ब्रॉडबैंड इंटरनेट की तुलना में ज्यादा महंगा है, क्योंकि सैटेलाइट इंटरनेट से जुड़ी लागत ज्यादा होती है।  

बोफोर्स घोटाले की जांच फिर से शुरू होने की संभावना, CBI ने अमेरिका से मदद के लिए ‘लेटर रोगेटरी’ भेजा

नई दिल्ली केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने अमेरिका को एक न्यायिक अनुरोध भेजकर निजी जांचकर्ता माइकल हर्शमैन से जानकारी मांगी है, जिन्होंने 1980 के दशक के 64 करोड़ रुपये के बोफोर्स रिश्वत कांड के बारे में महत्वपूर्ण विवरण भारतीय एजेंसियों के साथ साझा करने की इच्छा व्यक्त की थी। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। ‘फेयरफैक्स ग्रुप’ के प्रमुख हर्शमैन 2017 में निजी जासूसों के एक सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत आए थे। अपने प्रवास के दौरान, उन्होंने विभिन्न मंचों पर आरोप लगाया कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने घोटाले की जांच को पटरी से उतार दिया था । उन्होंने कहा था कि वह सीबीआई के साथ विवरण साझा करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने एक साक्षात्कार में दावा किया था कि उन्हें 1986 में केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने विदेशों में भारतीयों द्वारा मुद्रा नियंत्रण कानूनों के उल्लंघन और धन शोधन की जांच और भारत के बाहर ऐसी संपत्तियों का पता लगाने के लिए नियुक्त किया गया था और उनमें से कुछ बोफोर्स सौदे से संबंधित थे। सीबीआई ने वित्त मंत्रालय से भी संपर्क कर हर्शमैन की नियुक्ति से संबंधित दस्तावेज मांगे थे तथा यह भी पूछा था कि क्या उन्होंने कोई रिपोर्ट प्रस्तुत की है, लेकिन उस समय के रिकॉर्ड एजेंसी को उपलब्ध नहीं कराए जा सके। एजेंसी ने कई साक्षात्कारों में हर्शमैन के दावों पर ध्यान दिया और 2017 में घोषणा की कि मामले की उचित प्रक्रिया के अनुसार जांच की जाएगी। ‘लेटर रोगेटरी’ की आवश्यकता इसलिए पड़ी क्योंकि आठ नवंबर, 2023, 21 दिसंबर, 2023, 13 मई, 2024 और 14 अगस्त, 2024 को अमेरिकी प्राधिकारियों को भेजे गए पत्रों और स्मरणपत्रों से कोई जानकारी नहीं मिली। ‘लेटर रोगेटरी’ एक लिखित अनुरोध है जो एक देश की अदालत द्वारा किसी आपराधिक मामले की जांच या अभियोजन में सहायता प्राप्त करने के लिए दूसरे देश की अदालत को भेजा जाता है। इंटरपोल से किये गए अनुरोध का भी कोई परिणाम नहीं निकला। सीबीआई को इस साल 14 जनवरी को गृह मंत्रालय से अमेरिका को ‘लेटर रोगेटरी’ भेजने के लिए हरी झंडी मिल गई थी। एजेंसी ने विशेष अदालत को इसकी जानकारी दी, जिसने 11 फरवरी को सीबीआई के ‘लेटर रोगेटरी’ आवेदन को मंजूरी दे दी। एक विशेष अदालत ने ‘लेटर रोगेटरी’ जारी करने के सीबीआई के आवेदन को मंजूरी देते हुए टिप्पणी की, ‘‘माइकल हर्शमैन द्वारा उपर्युक्त साक्षात्कार में किए गए दावों से संबंधित तथ्य का पता लगाने के लिए दस्तावेजी और मौखिक साक्ष्य एकत्र करने के लिए अमेरिका में जांच करना आवश्यक है।” स्वीडन के एक रेडियो चैनल ने आरोप लगाया था कि बोफोर्स सौदे को हासिल करने के लिए भारत के राजनीतिक नेताओं और रक्षा अधिकारियों को रिश्वत दी गई थी जिसके तीन साल बाद सीबीआई ने 1990 में मामला दर्ज किया था। इन आरोपों ने राजीव गांधी सरकार के लिए बड़ा परेशानी खड़ी कर दी थी और प्रतिद्वंद्वी दलों ने कांग्रेस पर निशाना साधने के लिए इसका इस्तेमाल किया था। यह घोटाला स्वीडिश कंपनी बोफोर्स के साथ चार सौ 155 मिमी फील्ड हॉवित्जर तोपों की आपूर्ति के लिए 1,437 करोड़ रुपये के सौदे में 64 करोड़ रुपये की रिश्वत के आरोपों से संबंधित था। इन तोपों ने करगिल युद्ध के दौरान भारत की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। सीबीआई ने 1999 और 2000 में आरोपपत्र दाखिल किए थे। दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2004 में राजीव गांधी को आरोप मुक्त कर दिया था। गांधी की लिट्टे के आत्मघाती हमले में हत्या किए जाने के करीब 13 साल बाद अदालत ने यह फैसला दिया। दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2005 में शेष आरोपियों के खिलाफ सभी आरोपों को खारिज कर दिया और कहा कि सीबीआई यह साबित करने में विफल रही कि बोफोर्स से इतालवी व्यापारी ओतावियो क्वात्रोची को मिला धन भारत में लोक सेवकों को रिश्वत के रूप में दिया जाना था। सीबीआई ने 2005 के फैसले के खिलाफ 2018 में उच्चतम न्यायालय में अपील दायर की थी लेकिन देरी के आधार पर इसे खारिज कर दिया गया था। हालांकि, शीर्ष अदालत ने 2005 में अधिवक्ता अजय अग्रवाल द्वारा दायर अपील में सभी बिंदुओं को उठाने की अनुमति दी थी।  

स्मृति ईरानी ने कहा- लैंगिक समानता के लिए प्रौद्योगिकी में समानता आवश्यक

नई दिल्ली पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने लैंगिक समानता के लिए प्रौद्योगिकी में समानता सुनिश्चित करने की तत्काल आवश्यकता पर बुधवार को जोर दिया। महिला सशक्तीकरण पर ‘इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स’ में एक सम्मेलन में अपने संबोधन में ईरानी ने एआई प्रणालियों में अंतर्निहित प्रणालीगत पूर्वाग्रहों पर प्रकाश डाला और इन असमानताओं को दूर करने के लिए सामूहिक प्रयास का आह्वान किया। उन्होंने हितधारकों से आग्रह किया कि वे महिला सशक्तीकरण की आधारशिला के रूप में डिजिटल समानता को प्राथमिकता दें। ईरानी ने कहा, ‘‘एआई के युग में यह पुरुष का महिला से या महिला का पुरुष से मुकाबला नहीं है। यह मुकाबला है मानवता का इस बात से कि एआई हमारे साथ क्या करेगा।’’ उन्होंने एक शोध का हवाला दिया जिसमें इस बात का खुलासा किया गया है कि दुनिया भर में 133 एआई प्रणालियों में से 44 प्रतिशत एआई प्रणालियां लैंगिकता -समावेशी नहीं हैं। ईरानी ने एआई-संचालित वित्तीय प्रणालियों में लैंगिक पूर्वाग्रह का एक उदाहरण साझा किया। उन्होंने कहा, ‘‘एक महिला जिसकी आय, कर रिटर्न और वित्तीय स्थिति उसके पति के ही समान थी उसे उसके पति की तुलना में 10 प्रतिशत कम क्रेडिट सीमा की पेशकश की गई। एक अन्य महिला की क्रेडिट सीमा उसके पति की तुलना में 20 गुना कम निर्धारित की गई, जबकि उनकी वित्तीय स्थिति भी समान थी।’’ पूर्व मंत्री ने वित्तीय समावेशन में भारत की प्रगति की सराहना की तथा ‘जन धन योजना’ और ‘मुद्रा’ ऋण योजना जैसी पहलों का हवाला दिया और कहा कि इनसे लाखों महिलाएं सशक्त हुई हैं।  

सीएम स्टालिन ने एक बार फिर से कहा- सांसदों की संख्या बढ़ने से कोई परेशानी नहीं है, लेकिन हमारी ताकत में कोई कमी न रहे

चेन्नै लोकसभा सीटों के परिसीमन को लेकर बुधवार को तमिलनाडु में सीएम एमके स्टालिन के नेतृत्व में 35 दलों की मीटिंग हुई। इस बैठक में स्टालिन ने एक प्रस्ताव पेश किया, जिस पर सभी ने एकमत से सहमति जताई। इस प्रस्ताव में पीएम मोदी से मांग की गई है कि परिसीमन के लिए 1971 की जनगणना के अनुपात को ही आधार माना जाए। उसके आधार पर ही लोकसभा सीटें तय हों और यह सीमा अगले 30 सालों के लिए बरकरार रखी जाए। प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि दक्षिण भारत के अलावा अन्य राज्यों को भी जनसंख्या नियंत्रण के लिए प्रोत्साहित किया जाए। इस मीटिंग में मुख्य विपक्षी दल AIADMK के नेता भी मौजूद रहे। इस प्रस्ताव में कहा गया कि केंद्र सरकार को संविधान में संशोधन करना चाहिए और यह तय किया जाए कि यदि सांसदों की संख्या बढ़ती है तो उसका अनुपात वर्तमान जैसा ही हो। उनकी स्पष्ट मांग थी कि यदि नई जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाकर परिसीमन हुआ और सीटें बढ़ती हैं तो फिर उसका अनुपात वही रहे, जो फिलहाल बना हुआ है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु समेत दक्षिण भारत के राज्यों के साथ ऐसा कुछ नहीं होना चाहिए उनकी सीटें कम हो और उनकी राजनीतिक ताकत भी घट जाए। उनकी बैठक में भाजपा के अलावा 4 अन्य छोटे दलों के नेता नहीं पहुंचे। भाजपा ने कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति खराब है औऱ उससे ध्यान हटाने के लिए एमके स्टालिन परिसीमन वाला कार्ड खेल रहे हैं। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई और होम मिनिस्टर अमित शाह तो दोहरा चुके हैं कि दक्षिण भारत के राज्यों की सीटें कम नहीं होंगी। सीएम स्टालिन ने एक बार फिर से कहा कि सांसदों की संख्या बढ़ने से कोई परेशानी नहीं है, लेकिन हमारी ताकत में कोई कमी न रहे। उन्होंने कहा कि हमारे यहां तो लोगों ने फैमिली प्लानिंग की है। इसके बाद हमें उसकी सजा मिले तो यह अन्याय ही है। प्रस्ताव में कहा गया, ‘सभी राज्यों में परिवार नियोजन को बढ़ावा देने के लिए तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने 2000 में भरोसा दिया था कि 1971 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार ही परिसीमन किया जाए। अब पीएम मोदी को भी ऐसा भरोसा देना चाहिए कि 2026 से अगले 30 सालों तक लोकसभा सीटों के परिसीमन का यही पैमाना बना रहेगा।’ उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के लोग परिसीमन के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन यह ऐसा न हो कि हमारे लिए सजा बन जाए। हमने बहुत सी कल्याणकारी योजनाएं लागू की हैं। परिवार नियोजन किया है और महिलाएं सशक्त हुई हैं। इसके कारण हमारे यहां आबादी बेतहाशा नहीं बढ़ी है और इसकी एवज में हमें फायदे की बजाय नुकसान हो तो यह गलत बात होगी।

पासपोर्ट बनवाने के नियमों में हुआ बदलाव, अब आवेदक के लिए जन्म प्रमाण पत्र देना अनिवार्य , जाने जरूरी दस्तावेज

नई दिल्ली पासपोर्ट एक अहम दस्तावेज होता है, जो विदेश मंत्रालय के पासपोर्ट विभाग द्वारा जारी किया जाता है। यह पहचान के साथ-साथ नागरिकता साबित करने वाला अहम दस्तावेज है। बिना पासपोर्ट के विदेश (कुछ देशों को छोड़कर) जाना संभव नहीं हो सकता है। विदेशों में पासपोर्ट के जरिए ही आपकी नागरिकता साबित होती है। भारत सरकार ने पासपोर्ट बनवाने के नियमों में बदलाव किया है। अब किसी भी आवेदक के लिए जन्म प्रमाण पत्र देना अनिवार्य कर दिया गया है। यानी ऐसे लोग जिनका जन्म 1 अक्टूबर, 2023 के बाद हुआ है और वे पासपोर्ट बनाने को इच्छुक हैं तो उनके लिए अब अपने जन्म तिथि के लिए बर्थ सर्टिफिकेट देना अनिवार्य कर दिया गया है। 1. जन्म प्रमाण पत्र: 1 अक्टूबर, 2023 के बाद जन्मे लोग अगर पासपोर्ट बनवाना चाह रहे हैं तो उनकी जन्म तिथि के लिए केवल जन्म प्रमाण पत्र ही मान्य होंगे। हालांकि, इससे पहले जन्मे लोग 10वीं बोर्ड की मार्कशीट या सर्टिफिकेट, स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस या कोई अन्य सरकारी आईडी जैसे अतिरिक्त दस्तावेजों के आधार पर अपनी जन्म तिथि साबित कर सकते हैं। 2. आवासीय पता: बदले हुए पासपोर्ट के आखिरी पन्ने में अब आवासीय पता नहीं प्रिंट किया जाएगा; इसकी बजाय, इमिग्रेशन अधिकारी बारकोड को स्कैन कर जानकारी हासिल कर सकेंगे। 3. रंग-कोडिंग प्रणाली: पासपोर्ट के लिए अब एक नई रंग-कोडित प्रणाली की शुरुआत की गई है। अधिकारियों के लिए सफेद, राजनयिकों के लिए लाल और आम नागरिकों के लिए नीले रंग का पासपोर्ट जारी किया जाएगा जो अधिकारियों के लिए पासपोर्ट की पहचान करने में सुगमता और सहजता प्रदान करेगा। 4. माता-पिता का नाम हटाना: पासपोर्ट धारकों के माता-पिता के नाम अब पासपोर्ट के आखिरी पन्ने पर नहीं छापा जाएगा। इस नियम से एकल अभिभावक या अलग-थलग परिवारों के बच्चों को राहत मिलेगी और उनकी गोपनीयता बरकरार रहेगी। 5. पासपोर्ट सेवा केंद्र का विस्तार: सरकार ने फैसला किया है कि अगले पाँच वर्षों में पासपोर्ट सेवा केंद्रों की संख्या 442 से बढ़कर 600 हो जाएगी। इससे आवेदकों के लिए सुरक्षा, दक्षता और सुविधा बढ़ सकेगी।

9 मार्च की रात पश्चिमी विक्षोभ होगा एक्टिव, 10, 11, 12 मार्च को दोबारा भयंकर बारिश और बर्फबारी

नई दिल्ली देश के मौसम में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पहाड़ी राज्यों—हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश और बर्फबारी के चलते दिल्ली-NCR समेत कई मैदानी इलाकों में सर्द हवाएं चल रही हैं। इस ठंड ने मार्च में भी जनवरी जैसी ठिठुरन लौटा दी है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि एक और पश्चिमी विक्षोभ जल्द सक्रिय होने वाला है, जिससे मौसम में और बदलाव देखने को मिलेगा। आइए जानते हैं कि दिल्ली-NCR समेत देशभर में आगे कैसा रहेगा मौसम?   पश्चिमी विक्षोभ की वजह से मौसम में बदलाव भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, पिछले 13 दिनों से जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बर्फबारी और बारिश हो रही है, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ है। कई इलाकों में ओलावृष्टि भी हुई, जिससे ठंड का असर और बढ़ गया। दिल्ली-NCR समेत कई राज्यों में सर्द हवाओं के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। 9 मार्च तक यही स्थिति बनी रहेगी, लेकिन 9 मार्च की रात एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा। इसके प्रभाव से 10 से 12 मार्च के बीच पहाड़ी राज्यों में दोबारा बारिश और बर्फबारी की संभावना है। गर्मी और ठंड के बीच बंटा देश महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गोवा, कोंकण और कर्नाटक में तापमान तेजी से बढ़ रहा है, जहां पारा 35 से 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। दूसरी ओर, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश और बिहार में ठंडी हवाओं का असर बना हुआ है। हिमाचल प्रदेश में स्थिति और गंभीर हो गई है, जहां 500 से अधिक सड़कें और बिजली ट्रांसफार्मर ठप हो गए हैं। IMD के अनुसार, 9 मार्च के बाद उत्तर-पश्चिमी राज्यों—दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार में 30 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज़ हवाएं चल सकती हैं। इसके अलावा, नए पश्चिमी विक्षोभ के असर से 10 से 12 मार्च के बीच जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में फिर से बारिश और बर्फबारी देखने को मिलेगी। मौसम के इस बदलाव के चलते लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।  

वो हमपर टैक्स लगाएंगे, तो हम भी लगाएंगे… ट्रंप ने भारत को अधिक टैरिफ पर दी चेतावनी

न्यूयॉर्क अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बुधवार को संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित कर रहे हैं. ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले संयुक्त सत्र में कई बड़े मसलों पर बात की. उन्होंने फ्री स्पीच पर जोर दिया और टैरिफ के फैसले का खुलकर बचाव किया. उन्होंने भारत का भी जिक्र किया और कहा, चीन, कनाडा, मेक्सिको और भारत हम पर बहुत ज्यादा टैक्स लगाते हैं. ट्रंप का कहना था कि भारत जो टैक्स लगाता है, वो उचित नहीं है. ट्रंप ने भाषण में दो बार भारत का नाम लिया. उन्होंने ऐलान किया कि 2 अप्रैल से रेसिप्रोकल टैक्स लगाया जाएगा. अमेरिका राष्ट्रपति ने कहा कि कनाडा, मेक्सिको, भारत, ब्राजील और दक्षिण कोरिया बहुत ज्यादा टैरिफ लगाते हैं. ये अच्छी बात नहीं है. जो भी देश हम पर टैरिफ चार्ज लगाएंगे, हम भी उन पर चार्ज लागू करेंगे. हम दो अप्रैल से कनाडा, मेक्सिको, चीन और भारत पर रेसिप्रोकल टैक्स लगाएंगे. टैरिफ से अमेरिका को फिर से अमीर बनाना है. ट्रंप ने कहा, हमारा प्रशासन अमेरिका की जरूरत के अनुसार बदलाव लाने के लिए प्रयास कर रहा है. यह बड़े सपने देखने और साहसिक कार्रवाई का समय है. हमने सभी पर्यावरणीय प्रतिबंधों को समाप्त कर दिया है जो हमारे देश को कम सुरक्षित और पूरी तरह से अप्रभावी बना रहे थे. ट्रंप ने कहा, हमने 43 दिन में जो किया है, वो कई सरकारें अपने 4 या 8 साल के कार्यकाल में भी नहीं कर पाई हैं. ट्रंप ने जो बाइडेन पर भी तंज कसा और उन्हें इतिहास का सबसे खराब राष्ट्रपति बताया. भारत और चीन के खिलाफ रेसिप्रोकल टैरिफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका 2 अप्रैल को भारत और चीन समेत अन्य देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाएगा. उन्होंने कहा, वे हम पर जो भी टैरिफ लगाएंगे, हम उन पर टैरिफ लगाएंगे. अन्य देशों ने दशकों से हमारे खिलाफ टैरिफ का इस्तेमाल किया है और अब हमारी बारी है कि हम उन अन्य देशों के खिलाफ टैरिफ का इस्तेमाल करना शुरू करें. यूरोपीय संघ, चीन, ब्राजील, भारत और अनगिनत अन्य देश हमसे बहुत ज्यादा टैरिफ वसूलते हैं. यह बहुत अनुचित है. भारत हमसे 100 प्रतिशत टैरिफ वसूलता है. यह सिस्टम अमेरिका के लिए उचित नहीं है. यह कभी नहीं था. उन्होंने कहा, 2 अप्रैल से पारस्परिक टैरिफ लागू हो जाएंगे. यदि वे हमें अपने बाजार से बाहर रखने के लिए नॉन मोनेटरी टैरिफ लगाते हैं, तो हम उन्हें अपने बाजार से बाहर रखने के लिए नॉन मोनेटरी टैरिफ लागू करेंगे. ट्रंप के संबोधन की बड़ी बातें यहां पढ़ें:- – अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि हम यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की दिशा में काम कर रहे हैं. इस युद्ध में हजारों लोग मारे गए हैं इसलिए इसे रोकना होगा. – ट्रंप ने संसद को संबोधित करते हुए कहा कि मेरी सरकार पनामा नहर पर दोबारा कब्जा करेगी और हमने इस दिशा में काम करना शुरू कर दिया है. ट्रंप ने कहा कि हम ग्रीनलैंड के लोगों के अधिकार का सम्मान करते हैं कि उन्हें अपने भविष्य का सम्मान करने का हक है. लेकिन हम चाहते हैं कि ग्रीनलैंड हमारा हिस्सा बने. हम आपको समृद्ध बनाएंगे इसलिए आप हमसे हाथ मिला लें वरना हम किसी न किसी तरीके से ऐसा कर ही लेंगे. लेकिन यकीन दिलाते हैं कि हम आपको सुरक्षित रखेंगे. – संसद को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि हम जल्द ही एक एग्जिक्यूटिव ऑर्डर पर साइन करेंगे, जिसके बाद पुलिस अधिकारी किसी हत्या करने पर मौत की सजा का प्रावधान होगा. – ट्रंप ने कहा कि टैरिफ की रकम से अमेरिका फिर से समृद्ध होगा. इससे अमेरिका दोबारा ग्रेट और अमीर बनेगा और यह हो रहा है. – राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को अब अवैध प्रवासियों से छुटकारा चाहिए. हमारे देश के कुछ कब्जों में इन अवैध प्रवासियों का कब्जा है. हमें इनसे छुटकारा चाहिए और हम इन्हें देश से बाहर निकालकर रहेंगे. – ट्रंप ने कहा कि यह समय बड़े सपनों और बोल्ड फैसलों का है. लेकिन अब हमारा मकसद अमेरिका को फिर से अफोर्डेबल बनाना है. अब हमारा देश Woke नहीं रहेगा. – अमेरिका राष्ट्रपति ने कहा कि कनाडा, मेक्सिको, भारत और दक्षिण कोरिया बहुत टैरिफ लगाते हैं. हम दो अप्रैल से कनाडा, मेक्सिको, चीन और भारत पर रेसिप्रोकल टैक्स लगाएंगे. जो हम पर टैक्स लगाएंगे, हम भी उन पर उतना ही टैक्स लगाएंगे. – डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हमसे उगाहे गए पैसों को वसूल कर देश की महंगाई को काबू में करेंगे. मैं अभी तक बाइडेन की असफल नीतियों को दुरुस्त करने में लगा हुआ है. – अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के संबोधन के बीच डेमोक्रेट सांसद Al Green को संसद से बाहर का रास्ता दिखाया गया. उन्हें राष्ट्रपति के संबोधन में व्यवधान डालने के लिए बाहर किया गया. – ट्रंप ने कहा कि अब सिर्फ दो ही जेंडर होंगे महिला और पुरुष. मैंने पुरुषों के महिला खेल खेलने पर प्रतिबंध लगा दिया है. – अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने संबोधन में फ्री स्पीच की भी बात की. ट्रंप ने कहा कि मैंने कुछ दिन पहले अंग्रेजी भाषा को एकमात्र आधिकारिक भाषा बनाया. गल्फ ऑफ मेक्सिको को गल्फ ऑफ अमेरिका किया. – अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि हमने फैसला किया है कि हर एक नया फैसला लेने पर पुराने 100 फैसलों को रद्द किया जाएगा. – ट्रंप ने कहा कि यह बड़े सपनों और बोल्ड एक्शन का समय है. DOGE इसमें बेहतरीन काम कर रहा है. हमने बेहूदा नीतियों को खत्म कर दिया है. भ्रष्ट हेल्थ पॉलिसी को भी खत्म कर दिया है. बाइडेन सरकार की उन नीतियों को तुरंत प्रभाव से खत्म किया है, जिससे देश को फायदा नहीं हो रहा था. – ट्रंप ने कहा कि अमेरिका मोमेंटम वापस आ गया है. हमारी रूह वापस आ गई है. हमारा गौरव वापस आ गया है. हमारा विश्वास लौट आया है और अब अमेरिकी लोग अपने सपने पूरे कर पाएंगे. – ट्रंप ने संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि हमने सिर्फ 43 दिनों में वह कर दिखाया है, जो पिछली सरकारों ने चार साल में भी नहीं किया. – राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा कि America is Back. – … Read more

कुवैत: रमजान के दौरान सार्वजनिक स्थान पर खाने-पीने पर होगी जेल, सरकार ने जारी किया आदेश

 कुवैत इस्लाम का पवित्र महीना रमजान शुरू हो चुका है. इस पूरे महीने मुसलमान रोजा रखते हैं जिसमें सूरज उगने से पहले और डूबने के बाद ही कुछ खाया-पीया जाता है. उपवास यानी रोजा को लेकर मुस्लिम देशों में अलग-अलग नियम हैं. इसी बीच कुवैत ने एक ऐसा नियम बनाया है जिसे तोड़ने पर जेल की सजा भी हो सकती है. कुवैत के नए नियम के मुताबिक, अगर किसी ने उपवास के घंटों में सार्वजनिक जगह पर खाना-पीना किया तो उस पर 100 दिनार (28,230 रुपये) का जुर्माना लगाया जाएगा और जेल भी हो सकती है. गल्फ न्यूज की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि नए नियम में सार्वजनिक जगहों पर खाने-पीने से मना किया गया है. उल्लंघन करने पर जुर्माने के साथ-साथ अधिकतम एक महीने की जेल भी हो सकती है. कब माना जाएगा रोजे का उल्लंघन? अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर सार्वजनिक स्थान पर खाता है, पानी पीता है या धूम्रपान करता है और अपने किए की कोई वाजिब वजह नहीं बता पाता तो इसे रोजा नियम का उल्लंघन माना जाएगा. वाजिब वजहों में बीमार होना या लंबी यात्रा करना शामिल है. कुवैती अधिकारियों ने लोगों से कहा है कि जो लोग रोजा नहीं रख रहे, वो सार्वजनिक स्थानों के बजाए प्राइवेट में खाना-पीना करें. कुवैत का यह नियम वहां की कंपनियों और अन्य व्यवसायों पर भी लागू होता है. अगर कोई कंपनी या प्रतिष्ठान सार्वजनिक रूप से खाने-पीने की अनुमति देता है तो सजा के तौर पर कम से कम उसे दो महीने तक बंद कर दिया जाएगा. कुवैत की नगर पालिका ने दुकान और रेस्टोरेंट के खुले रहने के घंटों पर भी सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिसके तहत सूर्यास्त से दो घंटे पहले इफ्तार की तैयारियों के लिए वो खुले रह सकते हैं. किन मुसलमानों को रोजा न रखने की होती है छूट? रोजा रखना सभी मुसलमानों के लिए जरूरी होता है. लेकिन छोटे बच्चों को रोजा न रखने की छूट होती है. तरुणावस्था में प्रवेश करने के बाद उनका रोजा रखना भी जरूरी होता है. बच्चों के अलावा बीमार लोगों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, ब्रेस्टफीड कराने वाली महिलाओं और यात्रा कर रहे लोगों को रोजा न रखने की छूट होती है. रोजा के नियम -यौवनावस्था में पहुंच चुके सभी स्वस्थ मुसलमानों को रमजान के महीने में उपवास करना चाहिए. -अगर कोई बीमार है तो ठीक होते ही उसे अगले दिन रोजा रखना चाहिए. -जो लोग किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं और रोजा नहीं रख सकते, उन्हें फिदया अदा करना चाहिए. इसका मतलब है कि रोजा छूटने के बाद रमजान में हर दिन जरूरतमंदों को खाना खिलाना चाहिए. -रमजान के महीने में यात्रा करने से बचना चाहिए, जब तक कि बहुत जरूरी न हो. लेकिन अगर यह जरूरी हो, तो यात्रा के बाद फिर से रोजा शुरू करना चाहिए. -रोजा के वक्त सहरी और इफ्तार के सही वक्त का ध्यान रखना चाहिए और तय समय पर ही खाना चाहिए. सूरज उगने से पहले किए जाने वाले भोजन को सहरी कहते हैं और सूरज डूबने के बाद खाना खाकर रोजा तोड़ने को इफ्तार कहते हैं. -उपवास के दौरान भोजन, पानी, धूम्रपान से बचना चाहिए. इस दौरान यौन संबंधों से भी दूर रहने की सलाह दी जाती है. -रोजे में झूठ बोलना, लड़ना, गाली देना और बहस करने की मनाही होती है.  

गुजरात में दो साल में 286 शेरों और 456 तेंदुओं की हो गई मौत, राज्य में 674 एशियाई शेर

अहमदाबाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात में अंबानी की महत्वाकांक्षी परियोजना वनतारा का उद्घाटन किया और इसका दौरा किया। यहां पीएम मोदी वन जीवों के साथ तस्वीर भी खिचाते और शावक को दूध पिलाते नजर आए। लेकिन ठीक उसी दिन गुजरात विधानसभा में एक ऐसी रिपोर्ट पेश की गई जो जिसमें बताया गया कि राज्य में बीते दो साल में 286 शेरों की मौत हुई है। दरअसल, राज्य के वन मंत्री मुलुभाई बेरा ने मंगलवार को विधानसभा को यह जानकारी दी कि गुजरात में गत दो साल में कम से कम 286 शेरों की मौत हो गई, जिनमें 143 शावक भी शामिल हैं। इनमें से 58 शेरों की मौत अप्राकृतिक कारणों से हुईं।। बेरा ने प्रश्नकाल के दौरान वरिष्ठ कांग्रेस विधायक शैलेश परमार के एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि राज्य में दो वर्षों – 2023 और 2024 – में 140 शावकों सहित 456 तेंदुओं की भी मौत हुई है। दो साल में 286 शेरों की मौत राज्य विधानसभा में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार पिछले दो सालों में राज्य में 143 शावकों सहित 286 एशियाई शेरों की मौत हुई है। इनमें से 58 अप्राकृतिक मौतें थीं। इसके अलावा, इसी अवधि के दौरान 456 तेंदुए और तेंदुए के शावकों की मौत की सूचना मिली। 2023 में 58 वयस्क शेर और 63 शावकों की मौत हुई, जबकि 2024 में मृत्यु दर बढ़कर 85 वयस्क शेर और 80 शावक हो गई। तेंदुओं की मौतों में सरकार ने कहा कि 2023 में 71 शावकों सहित 225 तेंदुए मारे गए, जबकि 2024 में मृत्यु दर बढ़कर 231 हो गई, जिसमें 69 शावक शामिल थे। कुल मिलाकर, 153 तेंदुए की मौतें अप्राकृतिक थीं। विशेषज्ञ का चौंकाने वाला खुलासा टीओआई से बातचीत में एक एक वन्यजीव विशेषज्ञ ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि आमतौर पर जब बड़ी बिल्लियों की बात आती है तो शावकों की मृत्यु की संख्या वयस्कों की मृत्यु से अधिक होती है। ऐसा नरभक्षण के कारण होता है। यहां तक कि शावकों के पहले तीन वर्षों तक जीवित रहने की संभावना बहुत कम है। यह लगभग 40 फीसदी है। चिंता का एक और मामला यह है कि वयस्क शेरों की मृत्यु 2023 से 2024 में 46 फीसदी बढ़ गई। विशेषज्ञ ने कहा कि इस मामले की जांच की जानी चाहिए क्योंकि इसका एक कारण किसी बीमारी का प्रकोप हो सकता है। उन्होंने कहा कि शावकों की उच्च मृत्यु दर आश्चर्यजनक नहीं है, क्योंकि गिर में आमतौर पर एक बार में तीन शावक होते हैं। सरकार ने उठाए ये कदम अधिकारी ने कहा कि बड़ी बिल्लियों के जीव विज्ञानियों के अनुसार शेरों की आबादी में 20% तक की मृत्यु दर आमतौर पर स्वीकार्य है, लेकिन अगर यह इससे अधिक हो जाती है, तो यह चिंता का विषय है। सरकार ने अपने जवाब में कहा कि शेरों और अन्य जंगली जानवरों को बीमारी या दुर्घटना से संबंधित मामलों में तत्काल चिकित्सा देखभाल प्रदान करने के लिए एक पशु चिकित्सा अधिकारी नियुक्त किया गया है, और एक समर्पित एम्बुलेंस सेवा भी मौजूद है। सरकार ने कहा कि अभयारण्य क्षेत्र से गुजरने वाली सार्वजनिक सड़कों पर स्पीडब्रेकर और साइनबोर्ड लगाए गए हैं। नियमित रूप से गश्त भी की जाती है, और अधिकारी वाहनों, हथियारों और वॉकी-टॉकी से लैस होते हैं। सरकार ने कहा कि चौकियों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और सासन में एक हाई-टेक निगरानी इकाई स्थापित की गई है। उन्होंने बताया कि 286 शेरों की मौत में से 121 की मौत 2023 में तथा 165 की मौत 2024 में हुई। गुजरात एशियाई शेरों का दुनिया में अंतिक प्राकृतिक आवास है। जून 2020 में की गई आखिरी गणना के अनुसार, राज्य में 674 एशियाई शेर हैं, जिनमें से मुख्य रूप से गिर वन्यजीव अभयारण्य में हैं। मंत्री ने चल रहे बजट सत्र के दौरान विधानसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि 2023 में 225 और 2024 में 231 तेंदुओं की मौत हुई। उन्होंने बताया कि 228 शेरों की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई जबकि 58 मौतें अप्राकृतिक कारणों से हुईं, जैसे वाहनों की चपेट में आना या खुले कुओं में डूब जाना। बेरा ने बताया कि तेंदुओं में 303 मौतें प्राकृतिक कारणों से हुईं, जबकि 153 मौतें अप्राकृतिक कारणों से हुईं। वन मंत्री ने सदन को बताया कि राज्य सरकार ने शेरों की अप्राकृतिक मौतों को रोकने के लिए पशु चिकित्सकों की नियुक्ति और शेरों तथा अन्य जंगली जानवरों के समय पर उपचार के लिए एम्बुलेंस सेवा शुरू करने जैसे विभिन्न कदम उठाए हैं।

ट्रंप की नई टैरिफ नीति पर पलटवार करते हुए चीन ने कहा-अमेरिका को युद्ध चाहिए तो हम इसके लिए तैयार हैं

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ नीति पर पलटवार करते हुए चीन ने बुधवार को कहा कि अगर अमेरिका ने व्यापारिक प्रतिबंधों के रूप में युद्ध की शुरुआत की है तो हम इसका मुकाबला करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। चीन ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर अमेरिका व्यापारिक युद्ध को आगे बढ़ाने का मन बना चुका है तो ड्रैगन इस लड़ाई को अंत तक लड़ेगा। चीन के अमेरिका स्थित दूतावास ने एक बयान में कहा, “अगर अमेरिका को युद्ध चाहिए, चाहे वह टैरिफ युद्ध हो, व्यापार युद्ध हो या कोई और प्रकार का युद्ध, तो हम इसे अंत तक लड़ने के लिए तैयार हैं।” यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 2 अप्रैल से भारत, चीन और अन्य देशों पर टैरिफ शुल्क लगाने की घोषणा के बाद आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी कांग्रेस के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि भारत और चीन सहित अन्य देशों द्वारा लगाए गए उच्च शुल्क बहुत अनुचित हैं। 2 अप्रैल से ये शुल्क लागू होंगे। ट्रंप ने कहा, “दूसरे देशों ने दशकों तक हमारे खिलाफ टैरिफ का उपयोग किया है। अब हमारी बारी है कि हम उन देशों के खिलाफ इसे इस्तेमाल करना शुरू करें। यूरोपीय संघ, चीन, ब्राजील, भारत, मेक्सिको और कनाडा – क्या आपने इनके बारे में सुना है? अनगिनत अन्य देशों ने हम पर जो टैरिफ लगाए हैं, वे हमारी तुलना में बहुत अधिक हैं। यह बहुत अनुचित है।” ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अब अमेरिका उन देशों के खिलाफ जवाबी कदम उठाने का मन बना चुका है जिन्होंने अमेरिकी उत्पादों पर उच्च शुल्क लगाया है। चीन की तीखी प्रतिक्रिया चीन ने इस कदम का प्रतिवाद करते हुए कहा है कि वह अमेरिकी व्यापारिक रणनीति का मुकाबला करने के लिए तैयार है। यह स्पष्ट रूप से एक तनावपूर्ण व्यापारिक माहौल की ओर इशारा करता है, जिसमें चीन और अमेरिका के बीच पहले से ही कई मुद्दों को लेकर मतभेद थे। चीन ने कहा कि वह किसी भी प्रकार के आर्थिक संघर्ष से पीछे नहीं हटेगा और इसे अंत तक लड़ेगा। आपको बता दें कि इस व्यापारिक युद्ध के कारण वैश्विक बाजार में अस्थिरता आ सकती है और दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों पर गंभीर असर पड़ सकता है।

केदारनाथ में रोप-वे, 36 मिनट में होगी 9 घंटे की यात्रा मोदी कैबिनेट का हेमकुंड साहिब, 3 बड़े फैसले

नई दिल्ली केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में आज यानी बुधवार (5 मार्च 2025) को उत्तराखंड को बड़ा तोहफा मिला है. केंद्र की मोदी सरकार ने उत्तराखंड में केदारनाथ धाम के लिए रोप वे प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है. सोनप्रयाग से केदारनाथ तक  12.9  किलोमीटर का रोपवे होगा, जिसमें 4081 करोड़ रुपया खर्च होगा. नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक मैनेजमेंट इसे बनाएगा. इसके बनने से 8 से 9 घंटे की यात्रा सिर्फ 36 मिनट पूरी हो जाएगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीईए) ने सोनप्रयाग से केदारनाथ (12.9 किमी) तक 12.9 किमी रोपवे परियोजना के निर्माण को मंजूरी दे दी है. परियोजना को डिजाइन, निर्माण, वित्त, संचालन और स्थानांतरण (डीबीएफओटी) मोड पर 4,081.28 करोड़ रुपये की कुल पूंजी लागत पर विकसित किया जाएगा. यह सबसे एडवांस्ड ट्राई-केबल डिटेचेबल गोंडोला (3एस) तकनीक पर आधारित होगा. इसकी डिजाइन क्षमता 1,800 यात्री प्रति घंटे प्रति दिशा (पीपीएचपीडी) होगी, जो प्रति दिन 18,000 यात्रियों को ले जाएगी. रोपवे परियोजना केदारनाथ आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए वरदान होगी क्योंकि यह पर्यावरण-अनुकूल, आरामदायक और तेज़ कनेक्टिविटी प्रदान करेगी और एक दिशा में यात्रा का समय लगभग 8 से 9 घंटे से घटाकर लगभग 36 मिनट कर देगी. सिर्फ 36 मिनट की हो जाएगी यात्रा यह सबसे एडवांस्ड ट्राई-केबल डिटेचेबल गोंडोला (3एस) तकनीक पर आधारित होगा. इसकी डिजाइन क्षमता 1,800 यात्री प्रति घंटे प्रति दिशा (पीपीएचपीडी) होगी, जो प्रति दिन 18,000 यात्रियों को ले जाएगी. रोपवे परियोजना केदारनाथ आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए वरदान होगी क्योंकि यह पर्यावरण-अनुकूल, आरामदायक और तेज़ कनेक्टिविटी प्रदान करेगी और एक दिशा में यात्रा का समय लगभग 8 से 9 घंटे से घटाकर लगभग 36 मिनट कर देगी. केदारनाथ मंदिर तक की यात्रा गौरीकुंड से 16 किमी की चुनौतीपूर्ण चढ़ाई है और वर्तमान में इसे पैदल या टट्टू, पालकी और हेलिकॉप्टर द्वारा तय किया जाता है. प्रस्तावित रोपवे की योजना मंदिर में आने वाले तीर्थयात्रियों को सुविधा प्रदान करने और सोनप्रयाग तथा केदारनाथ के बीच हर मौसम में कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है. गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब जी तक 12.4 किमी रोपवे प्रोजेक्ट को मंजूरी कैबिनेट की बैठक में गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब जी तक 12.4 किलोमीटर रोपवे प्रोजेक्ट के निर्माण को भी मंजूरी मिल गई है. इस परियोजना की कुल लागत 2,730.13 करोड़ रुपये होगी. वर्तमान में हेमकुंड साहिब जी की यात्रा गोविंदघाट से 21 किलोमीटर की चुनौतीपूर्ण चढ़ाई है. यह रोपवे प्रोजेक्ट गोविंदघाट और हेमकुंड साहिब जी के बीच हर मौसम में कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगा. इसका डिजाइन इस तरीके से तैयार किया जाएगा जिससे इसकी क्षमता प्रति घंटे प्रति दिशा 1,100 यात्री (पीपीएचपीडी) होगी और यह प्रतिदिन 11,000 यात्रियों को ले जाएगा. हेमकुंड साहिब जी उत्तराखंड राज्य के चमोली जिले में 15,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित एक तीर्थ स्थल है. इस पवित्र स्थल पर स्थापित गुरुद्वारा मई से सितंबर के बीच साल में लगभग 5 महीने के लिए खुला रहता है और हर साल लगभग 1.5 से 2 लाख तीर्थयात्री यहां आते हैं. पशुओं के स्वास्थ्य और बीमारियों की रोकथाम के लिए बड़ा फैसला केंद्र सरकार ने आज पशुओं के स्वास्थ्य और बीमारियों की रोकथाम के लिए 3,880 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है. यह कैबिनेट का तीसरा बड़ा फैसला है, जो पशुपालकों और किसानों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा. पशुओं में होने वाली दो बड़ी बीमारियां हैं, खुरपका-मुंहपका रोग (FMD) और ब्रुसेलोसिस. सभी पशुओं का संपूर्ण टीकाकरण सुनिश्चित करने के लिए विशेष कार्यक्रम शुरू किया जाएगा. मोबाइल वेटरनरी यूनिट्स की मदद से किसानों को घर-घर पशु स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी. रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए ‘भारत पशुधन पोर्टल’ लॉन्च किया जाएगा, जिससे टीकाकरण और अन्य सेवाओं पर नजर रखी जा सकेगी. PM-किसान समृद्धि केंद्र और सहकारी समितियों के माध्यम से जेनरिक दवाएं किसानों तक पहुंचेंगी. पारंपरिक ज्ञान को बढ़ावा देने के लिए एथनो-वेटरनरी मेडिसिन्स को भी प्रोत्साहित किया जाएगा. सरकार के अनुसार, टीकाकरण कार्यक्रम के सकारात्मक परिणाम दिखने लगे हैं. करीब 9 राज्य FMD-मुक्त होने की कगार पर हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान से बचाया जा सकेगा. केदारनाथ मंदिर तक की यात्रा गौरीकुंड से 16 किमी की चुनौतीपूर्ण चढ़ाई है और वर्तमान में इसे पैदल या टट्टू, पालकी और हेलिकॉप्टर द्वारा तय किया जाता है. प्रस्तावित रोपवे की योजना मंदिर में आने वाले तीर्थयात्रियों को सुविधा प्रदान करने और सोनप्रयाग तथा केदारनाथ के बीच हर मौसम में कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है. केंद्र सरकार के इस कदम से चारधाम यात्रा को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय व्यवसायों को लाभ मिलेगा और क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि को बल मिलेगा. इससे पूरे छह महीने तीर्थयात्रियों की आवाजाही बनी रहेगी, जिससे शुरुआती दो महीनों में संसाधनों पर अत्यधिक दबाव कम होगा. इतना ही नहीं यात्रा सीजन में रोजगार के अवसरों में भी बढ़ोतरी होगी. केदारनाथ रोपवे परियोजना उत्तराखंड रोपवे अधिनियम, 2014 के तहत संचालित होगी, जो लाइसेंसिंग, संचालन की निगरानी, सुरक्षा और किराया निर्धारण का कानूनी ढांचा प्रदान करता है. वहीं दूसरा प्रोजेक्ट हेमकुंड साहिब में रोप वे प्रोजेक्ट बनने का है, जिसके लिए 2730 करोड़ रुपया खर्च किया जाएगा. इस प्रोजेक्ट से हेमकुंड साहिब और वैली ऑफ फ्लावर तक की यात्रा की जा सकेगी.

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